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ममता बनर्जी और अन्य नेताओं का मजाक बनाने के आरोप में कोई ऐसा पुख्ता सबूत नहीं मिला,आरोपी को HC से राहत

कोलकाता ममता बनर्जी का मजाक बनाने के आरोपी एक शख्स को राहत देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुकदमा ही खारिज कर दिया है। बेंच ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम और अन्य नेताओं का मजाक बनाने के आरोप में कोई ऐसा पुख्ता सबूत नहीं मिला है कि केस चलाया जाए। जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने केस की सुनवाई करते हुए कहा, ‘केस डायरी और उपलब्ध सबूतों की विस्तार से जांच करने के बाद आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं बनता। बिना किसी सबूत के ही चार्जशीट भर दाखिल कर देने से केस आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। यही नहीं यदि केस चलाया भी जाए तो इस बात की संभावना बहुत कम है कि आरोपी के खिलाफ कोई चीज साबित हो सकेगी। इसके अलावा ऐसा करना आरोपी के खिलाफ पूर्वाग्रह रखना और उसका उत्पीड़न करने जैसा होगा।’ अदालत ने कहा कि जब कोई सबूत ही नहीं है और केस चलने लायक नहीं है तो फिर मामले की आगे सुनवाई क्यों की जाए। बेहतर होगा कि केस को ही खत्म कर दिया जाए। दरअसल आरोपी के खिलाफ ममता बनर्जी और कुछ अन्य नेताओं का मजाक उड़ाने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। इसी के खिलाफ आरोपी ने सेक्शन 482 के तहत अदालत का रुख किया था और कहा था कि मेरे खिलाफ दर्ज केस को खत्म किया जाए। आरोपी का कहना था कि उसने यूट्यूब पर कोई बात कही थी और उसी के आधार पर साजिश रचते हुए कुछ लोगों ने उन्हें फंसा दिया। आरोपी ने कहा कि मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी कि किसी का अपमान किया जाए। उस पर इस आरोप में केस दर्ज हुआ था कि उसकी टिप्पणी से सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा है। आरोपी ने कहा कि मैं पूरी तरह से निर्दोष हूं। मेरा उस कृत्य में कोई रोल ही नहीं है, जिसके आधार पर मेरे ऊपर केस दर्ज किया गया है। आरोपी ने कहा कि मेरा उत्पीड़न करने के उद्देश्य से फर्जी केस दायर किया गया है। इस पर बेंच ने सहमति जताई और कहा कि यदि इस केस को आगे बढ़ाया गया तो यह याची का उत्पीड़न होगा। यही नहीं आरोपी आरोपी का कहना था कि बिना पर्याप्त जांच के ही अधिकारी ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। मेरे ऊपर आरोप लगाया कि मैंने सीएम पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जबकि ऐसा कुछ भी मेरी ओर से कहा भी नहीं गया था।

कैबिनेट से वक्फ बिल को मिली मंजूरी, Parliament में अगले महीने लाएगी सरकार

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने वक्फ (संशोधन) बिल में हाल ही में संसदीय समिति द्वारा सुझाए गए बदलावों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह बिल बजट सत्र के दूसरे भाग में चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने अधिकांश बदलावों को शामिल किया है, जिसकी सिफारिश जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने की थी। कैबिनेट ने इसे पिछले सप्ताह भारतीय बंदरगाह विधेयक के साथ मंजूरी दी। इस बिल को सरकार ने अपने विधायी कार्यों की प्राथमिकता सूची में रखा है। विधेयक को अगस्त 2024 में लोकसभा में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू द्वारा पेश किए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। संसदीय पैनल ने बहुमत से अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दी। हालांकि पैनल के सभी 11 विपक्षी दलों के सांसदों ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी और असहमति नोट भी पेश किए थे। 655 पन्नों की यह रिपोर्ट इस महीने दोनों सदनों में प्रस्तुत की गई थी। पैनल ने “वक्फ बाय यूजर” प्रावधान को समाप्त कर दिया है और अब केवल मौजूदा “रजिस्टर्ड वक्फ बाय यूजर” को वक्फ के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि उन मामलों को बाहर रखा जाएगा जिनमें संपत्ति विवादित हैं या सरकारी स्वामित्व में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पैनल ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया है। इसकी संख्या चार तक हो सकती है। जिला कलेक्टरों से विवादों की जांच का अधिकार वरिष्ठ राज्य सरकार के नियुक्त अधिकारियों को सौंपने की सिफारिश की है। राज्य वक्फ बोर्डों में अब मुस्लिम ओबीसी समुदाय से एक सदस्य को शामिल किया जाएगा, जिससे अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। बता दें कि इससे पहले वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि ऐसी फर्जी रिपोर्ट को हम नहीं मानते, सदन इसे कभी नहीं मानेगा. JPC ने 29 जनवरी को दी थी मंजूरी संसदीय समिति ने वक्फ बिल में नए बदलावों पर अपनी रिपोर्ट को 29 जनवरी को मंजूरी दी थी. इस रिपोर्ट के पक्ष में 15 और विरोध में 14 वोट पड़े थे. रिपोर्ट में उन बदलावों को शामिल किया गया है, जो बीजेपी सांसदों ने दिए थे. विपक्षी सांसदों ने वक्फ बोर्डों को खत्म करने की कोशिश बताते हुए असहमति नोट जमा कराए थे. विपक्ष ने वक्फ बिल को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इसके अलावा ‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान को हटाने के प्रस्ताव का विरोध भी किया था.

UNHRC की बैठक में भारत ने पाकिस्तान की खोल दी पोल

जिनेवा भारत ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की बैठक में पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई. पाकिस्तान की ओर से यूएन में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने आईना भी दिखाया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र की सातवीं बैठक में भारत के प्रतिनिधि क्षितिज त्यागी ने कहा कि भारत, पाकिस्तान की ओर से किए गए निराधार और दुर्भावनापूर्ण संदर्भों का जवाब देने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा है. यह देखना दुखद है कि पाकिस्तान के तथाकथित नेता और प्रतिनिधि कश्मीर को लेकर झूठ धड़ल्ले से फैला रहे हैं. पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय नियमों का मखौल उड़ा रहा है. जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख हमेशा भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग बना रहेगा. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू कश्मीर में हुई अभूतपूर्व राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति अपने आप में बहुत कुछ कहती है. ये सफलताएं सरकार की उस प्रतिबद्धता में लोगों के विश्वास का प्रमाण हैं जो दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र में हालात सामान्य करने में जुटी है. उन्होंने कहा कि एक ऐसे देश (पाकिस्तान) के रूप में जहां मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और लोकतांत्रिक मूल्यों का पतन उसकी नीतियों का हिस्सा है और जो धड़ल्ले से संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों को पनाह देता है, ऐसे में वह किसी को भी उपदेश देने की स्थिति में नहीं है. इसकी बयानबाजी से पाखंड और शासन में अक्षमता की बू आती है. इन्हें भारत पर ध्यान देने के बजाए पाकिस्तान को अपने लोगों पर ध्यान देने की जरूरत है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस परिषद का समय एक असफल राष्ट्र द्वारा बर्बाद किया जा रहा है जो खुद अस्थिरता से जूझ रहा है. जबकि भारत का ध्यान लोकतंत्र, विकास और अपने लोगों का सम्मान सुनिश्चित करने पर है. ये ऐसे मूल्य हैं, जिनसे पाकिस्तान को कुछ सीखना चाहिए. बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधि आजम नजीर तरार ने कहा था कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है जो संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.  

ऐतिहासिक महाशिवरात्रि: पहली बार, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने 1000 वर्षों बाद प्रकट किए मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेष

ऐतिहासिक महाशिवरात्रि: पहली बार, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने 1000 वर्षों बाद प्रकट किए मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेष  180 देशों में लाखों लोगों ने साक्षात और ऑनलाइन देखा यह दिव्य अनावरण  युवा आइकॉन व ग्रैमी-नामांकित अंतरराष्ट्रीय संगीतकार राजा कुमारी ने मोहा लोगों का मन: भारतीय भक्ति संगीत की विरासत को नए अर्थ देने वाले इंडी बैंड्स ने लोगों को भक्ति के रस में किया सराबोर बेंगलुरु विशालाक्षी मंटप की भव्य पृष्ठभूमि में, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में महाशिवरात्रि का उत्सव एक दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ, जहां भारत के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंश—जो समय की धारा में विलुप्त माना जा रहा था—प्रकट हुआ। इस ऐतिहासिक क्षण ने 180 देशों के लाखों साधकों को गहरी श्रद्धा में डुबो दिया। इस पावन अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री माननीय अर्जुन राम मेघवाल भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा, “शिव वही हैं जो हैं, जो थे, और जो होंगे। इस शिवरात्रि पर समर्पित होकर सम्पूर्ण अस्तित्व के साथ एक हो जाएं। आप जैसे हैं, भगवान शिव आपको वैसे ही अपनाते हैं। स्वयं को ऐसे अनुभव करें जैसे आप स्वयं शिव के भीतर स्थित हैं।” उन्होंने शिव के पांच गुणों—सृजन, पालन, रूपांतरण, आशीर्वाद और लय—का उल्लेख करते हुए कहा, “शिवरात्रि वह समय है जब हम इन आशीर्वादों को अनुभव करते हैं और दिव्य ऊर्जा में सराबोर हो जाते हैं। हमें बस इन स्पंदनों में डूब जाना है और भीतर गहराई से उतरना है।”  शिवरात्रि की प्रमुख झलक: मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेषों का दुर्लभ दर्शन बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम, सोमनाथ ने सदैव श्रद्धा और भक्ति का संचार किया है, जिसकी कथा दिव्य रहस्यों में समाई हुई है। प्राचीन शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलता है कि यह ज्योतिर्लिंग गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए भूमि से दो फीट ऊपर स्थित रहता था! जब महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर और उसमें स्थित ज्योतिर्लिंग को नष्ट कर दिया, तब कुछ ब्राह्मण इसके खंडित अवशेषों को तमिलनाडु ले गए और उन्हें छोटे शिवलिंगों के रूप में स्थापित किया। ये पवित्र अवशेष पूरे एक सहस्राब्दी तक पीढ़ी दर पीढ़ी गुप्त रूप से पूजे जाते रहे।  लगभग सौ वर्ष पूर्व, संत प्रणवेन्द्र सरस्वती इन्हें कांची शंकराचार्य स्वामी चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती के पास ले गए। शंकराचार्य ने निर्देश दिया कि इन्हें अगले सौ वर्षों तक और गुप्त रखा जाए। वह पावन क्षण इस वर्ष आया, जब वर्तमान संरक्षक, पंडित सीताराम शास्त्री ने वर्तमान कांची शंकराचार्य से दिव्य मार्गदर्शन प्राप्त किया, जहां शंकराचार्य जी ने कहा, “बेंगलुरु में एक संत हैं—गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर। इन्हें उनके पास ले जाइए।” इस प्रकार, जनवरी 2025 में, ये पवित्र अवशेष गुरुदेव के करकमलों में पहुंचे। उनकी दिव्य महत्ता को पहचानते हुए, गुरुदेव ने इन्हें जनमानस को दर्शन के लिए उपलब्ध कराया  जिससे लाखों साधकों को सनातन धर्म की इस कालातीत विरासत से पुनः जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। ” इन पवित्र अवशेषों की पुनर्खोज केवल इतिहास को पुनः प्राप्त करने के विषय में नहीं है; यह हमारी सभ्यता की आत्मा को पुनर्जीवित करने का क्षण है। यह सिद्ध करता है कि सनातन धर्म केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है जो काल के साथ विकसित होती रही है और सतत् फलती-फूलती है।” – गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जैसे ही अर्धरात्रि निकट आई, बेंगलुरु आश्रम दिव्य ऊर्जा का केंद्र बन गया। “ॐ नमः शिवाय” के गूंजते मंत्रों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा, जब गुरुदेव ने साधकों को गहन ध्यान में ले गए। रुद्रपाठ, प्राचीन वैदिक अनुष्ठान, और आत्मा को छू लेने वाले भजन एक दिव्य लय में समाहित हो गए, जिससे विश्वभर से आए श्रद्धालु भक्ति और आनंद में एक हो गए। संगीत ने भी इस अद्भुत शिवरात्रि को विशेष स्वरूप प्रदान किया। ग्रैमी-नामांकित कलाकार राजा कुमारी ने अपनी भक्ति रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साधो – द बैंड, अभंग रेपोस्ट, और निर्वाण स्टेशन जैसे इंडी बैंड्स ने भी प्रस्तुति दी, जो भारतीय भक्ति संगीत की कालजयी विरासत को नए युग के अनुरूप पुनः परिभाषित कर रहे हैं। इस शुभ दिन का प्रारंभ लाखों श्रद्धालुओं द्वारा आश्रम के पावन शिव मंदिर में जलाभिषेक से हुआ। पूरे उत्सव के दौरान, आर्ट ऑफ लिविंग के  स्वयंसेवकों ने सभी भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया। रात्रि जब परम निस्तब्धता में विलीन हुई, तब साधक शिव तत्त्व की अनुकंपा में डूबे और  भक्ति और कृतज्ञता से परिपूर्ण हो गए। यह महाशिवरात्रि केवल एक उत्सव नहीं था—यह एक ऐतिहासिक क्षण था। पवित्र ज्योतिर्लिंग अवशेषों के भव्य पुनर्प्रतिष्ठापन से पहले उनके प्रथम दर्शन के साथ, यह रात्रि श्रद्धा, भक्ति और सनातन धर्म की अनंत शक्ति का दिव्य प्रमाण बन गई।

दुबई में मस्जिदों को विज्ञान से जोड़ने की कोशिश, अग्रेजी में होगी जुमे की नमाज

दुबई  रमजान की शुरूआत से ठीक पहले दुबई ने एक साथ 55 नई मस्जिदों के निर्माण का ऐलान किया है। दुबई प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि एक साथ 55 नई मस्जिदों के निर्माण के साथ अमीरात की 70 प्रतिशत से ज्यादा मस्जिदों में शुक्रवार के उपदेश का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाएगा। यानि अंग्रेजी में भी इस्लाम को लेकर प्रवचन दिए जाएंगे। इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट (IACAD) ने नई मस्जिदों के निर्माण को लेकर कई घोषणाएं की हैं। जिसमें कहा गया है की ये मस्जिदें भव्य होंगी और इनमें आधुनिकता को समाहित किया जाएगा। इसके अलावा मस्जिदों में वास्तुकला का शानदार परिचय दिया जाएगा, जिसमें इस्लामी वास्तुकला की विरासत से दुनिया को वाकिफ करवाया जाएगा। आपको बता दें कि पिछले साल भी 174 मिलियन दिरहम की लागत से 24 मस्जिदों का उद्घाटन किया गया था, जिसमें एक साथ 13 हजार 911 इस्लामिक उपासकों के रहने की व्यवस्था की गई थी। अब 55 नई मस्जिदों का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए 475 मिलियन दिरहम जारी किए गये हैं। इसमें एक साथ 40 हजार 961 इस्लामिक उपासक रह सकेंगे। इसके अलावा भविष्य में नई मस्जिदों के निर्माण के लिए 54 नये भूखंडों की भी पहचान की गई है। सात सितारे मस्जिदों का निर्माण IACAD ने कहा है कि ये मस्जिदें सात सितारा सुविधाएं वाली होंगी। इसके अलावा विभाग एक मस्जिद गाइड भी तैयार कर रहा है, जिसका मकसद मस्जिदों में स्थिरता के लिए 7-सितारा रेटिंग हासिल करना है। विभाग ने कगा है कि मस्जिदों का निर्माण इस तरह से किया जा रहा है, ताकि दुबई के पर्यावरण पर कोई निगेटिव असर ना पड़े। पिछले साल दुबई में एक आत्मनिर्भर मस्जिद का भी उद्घाटन किया गया था, जिसे 18.15 मिलियन दिरहम की लागत से बनाया गया था। इस मस्जिद में 500 उपासक रह सकते हैं। इस मस्जिद ने दुबई में मस्जिदों के कार्बन फुटप्रिंट को 5% तक कम करने में मदद की, जो शुरुआती लक्ष्यों के मुकाबले अच्छा है। इसके अलावा दुबई में 3D-प्रिंटेड मस्जिदों के निर्माण के लिए भी काम शुरू कर दिए हैं, जिसे 2026 में खोला जाना है। इस मस्जिद के जरिए मुसलमानों को टेक्नोलॉजी से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि फिलहाल पानी में तैरने वाली मस्जिद को लेकर कोई नई जानकारी नहीं दी गई है। फ्लोटिंग मस्जिद की घोषणा साल 2023 में की गई थी, जिसकी अनुमानित लागत 55 मिलियन दिरहम है। रमज़ान से पहले, दुबई पहले ही दो नई मस्जिदों का उद्घाटन कर चुका है। मिर्डिफ़ में इब्राहिम अली अल गरगावी मस्जिद करीब 2,226 वर्ग मीटर में फैली हुई है। इसमें 544 उपासक बैठ सकते हैं। इसी तरह, अल बरशा (अर्जन) में अता अल-रहमान मस्जिद का उद्घाटन किया गया है, जो 1,275 वर्ग मीटर में बनी है। IACAD ने कहा है कि अमेरिकी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर इन मस्जिदों के लिए डिजाइन कर रहा है।

मोहम्मद यूनुस की सत्ता में बने रहने की चाल होगी फेल, बांग्लादेश आर्मी चीफ जनरल जमान ने दी खुली चेतावनी

ढाका बांग्लादेश तेजी से अराजकता की ओर बढ़ रहा है। शेख हसीना को हटाने के लिए जो कट्टरपंथी कभी एक साथ आए थे, अब उनमें ही सत्ता को पाने के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। राजनीतिक अंतर्कलह, निष्क्रिय पुलिस और कट्टरपंथी इस्लामिस्टों के उदय के साथ देश बिखराव की ओर चल पड़ा है। इस एक अटकलें शुरू हो गई हैं कि क्या बांग्लादेश में सैन्य तख्तापलट हो कता है। इसी सप्ताह बांग्लादेश सेना प्रमुख ने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए खतरे की चेतावनी दी है। बांग्लादेश में सेना के खिलाफ तेज होती आवाजों के बीच सेना प्रमुख वकार उज-जमान को कहना पड़ा कि उनकी कोई और इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं बस देश को सुरक्षित हाथों में देखा चाहता हूं। पिछले 7-8 महीनों में मैंने बहुत कुछ झेला है। मैं आपको पहले ही चेतावनी दे रहा हूं ताकि आप कल यह न कहें कि मैंने आपको नहीं बताया।’ चुनाव पर अल्टीमेटम आर्मी चीफ ने आगे कहा कि यदि आप अपने मतभेदों से आगे नहीं बढ़ सकते और एक दूसरे पर कीचड़ उछालना जारी रखते हैं, तो देश की स्वतंत्रता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि ‘मुझे लगा कि मेरा काम पूरा हो गया है, लेकिन इसे सुलझाने में मुझे ज्यादा समय लगेगा। उसके बाद मैं छुट्टी ले लूंगा।’ आर्मी चीफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि दिसंबर तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए बांग्लादेश की संप्रभुता का दिखाया डर इस बीच सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने चेतावनी दी है कि अगर लोग अपने मतभेदों को भुला नहीं पाए या एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना बंद नहीं कर पाए तो बांग्लादेश की संप्रभुता दांव पर लग जाएगी। ढाका के रावा क्लब में 2009 में पिलखाना में बीडीआर नरसंहार को याद करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा, “अगर आप अपने मतभेदों को भुलाकर साथ मिलकर काम नहीं कर सकते, अगर आप कीचड़ उछालने और लड़ाई में शामिल होते हैं, तो इस देश और राष्ट्र की स्वतंत्रता और संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।” बांग्लादेशी सेना ने संभाली देश की कानून-व्यवस्था जनरल जमान ने आगे कहा, “मैं आज आपको बता रहा हूं, अन्यथा आप कहते कि मैंने आपको आगाह नहीं किया।” इससे पहले बांग्लादेशी सेना प्रमुख ने कहा था कि जब तक चुनी हुई सरकार नहीं आ जाती, तब तक सेना ही बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था को देखेगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था को सेना देख रही है और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक एक चुनी हुई सरकार नहीं आ जाती है। उनके इस बयान को मोहम्मद यूनुस की कुर्सी के लिए खतरे के तौर पर देखा गया था। आर्मी चीफ की सीधी चेतावनी सीएनएन-न्यूज18 ने शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि वकार-उज-जमान को लग रहा है कि बांग्लादेश को बाहरी हाथों से नियंत्रित किया जा रहा है। सूत्र ने कहा, जनरल जमान ‘राजनीतिक नेतृत्व को चुनाव की आवश्यकता की ओर इशारा कर रहे हैं, अन्यथा सेना का नियंत्रण एक और विकल्प है।’ बांग्लादेश में एक्टिव है आईएसआई असलियत में शेख हसीना के जाने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश अपनी प्लानिंग में जुट गई है। आईएसआई के एजेंट समझे जाने वाली जमात-ए-इस्लामी के लोग बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में पैठ बनाए हुए हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार तो खुलकर अपना पाकिस्तान प्रेम दिखा रहे हैं। अगस्त में पद संभालने के बाद से वे कई बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। मोहम्मद यूनुस को सीधा संदेश इसके अलावा मोहम्मद यूनुस देश में आम चुनाव कराए जाने को लेकर हीलाहवाली कर रहे हैं। यूनुस प्रशासन सुधारों का हवाला देकर चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं कर रहा है। जबकि बांग्लादेश सेना प्रमुख ने शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद 18 महीने के अंदर चुनाव कराने की बात कही थी। ऐसे में बांग्लादेश सेना प्रमुख का ताजा बयान मोहम्मद यूनुस के लिए सीधी चेतावनी है कि सत्ता में बने रहने के लिए अगर चुनाव टाले गए तो उन्हें नई स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और वह होगी देश पर सैन्य शासन। देश में सैन्य विद्रोह की जताई थी आशंका सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने कुछ महीने पहले देश में सैन्य विद्रोह की आशंका भी जताई थी। उन्होंने ढाका के रावा क्लब में 2009 के क्रूर पिलखाना नरसंहार के शहीदों की याद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर हमें कोई समस्या या मुद्दा आता है, तो हमें उसे बातचीत के ज़रिए सुलझाना चाहिए। बिना किसी मकसद के इधर-उधर भागने से सिर्फ नुकसान ही होगा। 25 फरवरी 2009 को बांग्लादेश में खूनी सैन्य विद्रोह हुआ था, जिसे बांग्लादेश राइफल विद्रोह या पिलखाना नरसंहार के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन ढाका में बांग्लादेश राइफल्स (BDR) की एक यूनिट ने विद्रोह किया था।

कानिफनाथ यात्रा में मुस्लिम व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने का लिया फैसला, इस फैसले से एक नया विवाद उत्पन्न

मुंबई महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के पाथर्डी तालुका में स्थित मढ़ी कानिफनाथ मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। यहां के ग्रामीणों ने तय किया है कि इस यात्रा में मुस्लिम व्यापारियों को शामिल होने से रोका जाएगा। यह यात्रा हर साल होली से शुरू होकर गुड़ी पड़वा तक होती है। ग्रामीणों का दावा: परंपराओं की अवहेलना ग्रामीणों का कहना है कि इस यात्रा में एक महीने तक विशेष रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। इस दौरान देवता को तेल लगाया जाता है और लोग शोक मनाने की प्रक्रिया में रहते हैं। वे तले हुए भोजन से परहेज करते हैं, फर्श पर सोते हैं और कोई उत्सव नहीं मनाते। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ व्यापारी, विशेष रूप से मुस्लिम व्यापारी, इन परंपराओं का पालन नहीं करते, जिससे उनकी भावनाएं आहत होती हैं। इसी वजह से अब उन्होंने इस यात्रा में मुस्लिम व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। कानिफनाथ देवस्थान ट्रस्ट का बयान कानिफनाथ देवस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय मरकड ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मुस्लिम व्यापारी हमारे रीति-रिवाजों का सम्मान नहीं करते हैं। यह हमारे लिए एक संवेदनशील समय होता है, और इन व्यापारियों की ओर से परंपराओं की अनदेखी की जाती है, जिससे भक्तों की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने इस फैसले को कुंभ मेला में मुस्लिम व्यापारियों पर लगाए गए प्रतिबंध से जोड़ते हुए कहा, “जैसे कुंभ मेले में मुस्लिम व्यापारियों को अनुमति नहीं दी जाती, वैसे ही अब हमने कानिफनाथ यात्रा पर भी ऐसा ही प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।”  

अरुणाचल सीमा पर बनेगा 1400 KM लंबा हाईवे, चीन को सीधी चुनौती, कभी भी पहुंचेगी सेना

नई दिल्ली चीन सीमा के पास केंद्र सरकार ने बड़े हाईवे के निर्माण को मंजूरी दी है। इससे सीमांत इलाकों तक कनेक्टिविटी में इजाफा होगा, इसके अलावा सुदूर अरुणाचल प्रदेश से अन्य राज्यों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। अरुणाचल प्रदेश पर तवांग नाम से चीन दावा करता रहा है। ऐसे में उसके लिए इतने बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान कर भारत ने उसे सीधा संदेश दिया है। मोदी सरकार के मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश के कामले जिले में लगे एक मेले के दौरान इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह हाईवे चीन और भारत सीमा पर 12 जिलों से होकर गुजरेगा। यह एक सपने के पूरे होने जैसा होगा और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए यह गेमचेंजर बनेगा। रिजिजू ने कहा कि इस हाईवे पर 42,000 करोड़ रुपये की लागत आने वाली है। यह अकेला ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने एक बार में ही इतने बड़े फंड को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे रणनीतिक रूप से बेहद अहम होगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे, कोलकाता-चेन्नै हाईवे और जयपुर दिल्ली कॉरिडोर आदि पर बड़ी लागत लगी है, लेकिन रणनीतिक रूप से अहम प्रोजेक्ट्स की बात करें तो यह सबसे अहम होगा। यह हाईवे अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक रूप से संवेदनशील ईस्ट कामेंग, बिशोम, अपर सुबानसिरी, शी-योमी, अनजॉ और चांगलांग जैसे जिलों से होकर निकलेगा। रिजिजू ने कहा कि इतना अहम प्रोजेक्ट पीएम नरेंद्र मोदी के चलते ही मंजूर हुआ है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार इस हाईवे का कुल रूट 1400 किलोमीटर लंबा होगा और कई जगहों पर तो यह चीन की सीमा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर होगा। अरुणाचल प्रदेश के जिस मेले में रिजिजू ने इस हाईवे का ऐलान किया, उसमें वाइस प्रेसिडेंट जगदीप धनखड़ भी मौजूद थे। बोसीमला मेले को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा कि यह इलाका नेशनल हाईवे से दूर है। इसके बाद भी यहां उपराष्ट्रपति पहुंचे तो यह अहम बात है और इसे इतिहास में दर्ज किया जाएगा। उपराष्ट्रपति बोले- पूरा होने वाला है किरेन रिजिजू का सपना उन्होंने कहा कि यह अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए गर्व की बात है। वहीं उपराष्ट्रपति ने भी कहा कि यह रिजिजू का सपना था कि एक ऐसा हाईवे अरुणाचल के लिए मंजूर हो और अब वह पूरा होने वाला है। उन्होंने कहा कि फंड को मंजूरी मिल चुकी है और अब पास काम शुरू होना है। न्योकुम योलो नाम के जिस मेले में रिजिजू और उपराष्ट्रपति मौजूद थे, वह अरुणाचल प्रदेश की निशी जनजाति का सबसे प्रमुख त्योहार माना जाता है।

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में लाचार, डेढ़ माह में 35 मर्डर

ढाका पड़ोसी देश बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। हत्या, लूट, रंगदारी और अपहरण के मामलों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आलम यह है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में लाचार दिख रही है। यही वजह है कि पिछले डेढ़ महीने में 35 लोगों की हत्या हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं और अपराधिक गतिविधियों की चिंताजनक प्रवृत्ति दिखा रहे हैं। हाल की आपराधिक घटनाओं से लोगों में भारी गुस्सा और रोष है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 1 जनवरी से 19 फरवरी, 2025 के बीच सिर्फ राजधानी ढाका में 35 हत्याएं हुईं हैं। इसके अलावा लूटपाट, डकैती और अपहरण के भी कई मामले सामने आए हैं। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बीती रात यानी मंगलवार की रात भी जतराबाड़ी के सुती खालपार इलाके में हथियारबंद लुटेरों ने एक युवक को गोली मार दी और उसके सामान लूट लिए। अपराध में इस वृद्धि ने पुलिस को सुरक्षा बढ़ाने और अधिक सतर्क रहने के लिए मजबूर किया है। दूसरी तरफ आम आदमी दहशत में है। देश भर में बढ़ते अपराध पर यूनुस सरकार बेपरवाह नजर आ रही है। सरकार की तरफ से विरोधाभासी बयान दिए जा रहे हैं। अंतरिम सरकार में गृह मामलों के सलाहकार मोइनुद्दीन अब्दुल्ला ने इस संकट को कमतर आंकते हुए कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक है। उनके बयान ने लोगों के मन में संदेह और बढ़ा दिया है क्योंकि लोग बढ़ती असुरक्षा से जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली बांग्लादेश पुलिस ने स्वीकार किया है कि राजधानी ढाका समेत देशभर में आपराधिक गतिविधियों में तेजी से इजाफा हुआ है और लोग इस वजह से भयभीत हैं। अधिकारी ने कई रिपोर्ट में दिनदहाड़े क्रूर हत्याओं, अपहरण और डकैती के चौंकाने वाले मामलों को उजागर किया है। हालांकि, इन अपराधों की गंभीरता के बावजूद, यूनुस सरकार दावा करती रहती है कि स्थिति नियंत्रण में है। यही वजह है कि गृह मामलों के सलाहकार के इस्तीफे की मांग अब जोर पकड़ रही है। ढाका में हाल ही में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में नागरिकों ने भी बड़े पैमाने पर शिरकत की थी और गृह मामलों के सलाहकार मोइनुद्दीन अब्दुल्ला का इस्तीफा मांगा था। आधिकारिक बयानों और जमीनी हकीकतों के बीच बढ़ते अंतर ने बांग्लादेश के संस्थाओं में विश्वास को कमजोर कर दिया है। इससे खफा बड़े पैमाने पर लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। लिहाजा, न्यायपालिका, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ और राजनीतिक वर्ग सभी को कठिन चुनौतियो का सामना करना पड़ रहा है।

भारत और जापान अफ्रीका के सतत और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए ‘अच्छी स्थिति’ में हैं: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को अफ्रीका और जापान के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी बनाने के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर जोर दिया। जापान-भारत-अफ्रीका व्यापार मंच में बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान अफ्रीका के सतत और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए ‘अच्छी स्थिति’ में हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत का जुड़ाव दीर्घकालिक, स्थायी साझेदारी पर आधारित है। उन्होंने कहा, “अफ्रीका के प्रति भारत का दृष्टिकोण हमेशा से ही दीर्घकालिक पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी बनाने की गहरी प्रतिबद्धता से प्रेरित रहा है। शोषणकारी मॉडलों के विपरीत, भारत क्षमता निर्माण, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में विश्वास करता है और चाहता है कि अफ्रीकी देश न केवल निवेश से लाभान्वित हों, बल्कि आत्मनिर्भर विकास हासिल कर सकें।” जयशंकर ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम, पैन अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना और उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजनाओं (एचआईसीडीपी) जैसी प्रमुख पहलों की ओर इशारा किया, जिन्होंने अफ्रीका की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मज़बूत किया। 2019 में, भारत ने अफ्रीकी देशों को आभासी शिक्षा और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए ई-विद्या भारती और ई-आरोग्य भारती नेटवर्क लॉन्च किए। अब तक, 19 अफ्रीकी देशों के छात्रों ने इस पहल के तहत विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है। जयशंकर ने अफ्रीका के चौथे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में भारत की स्थिति पर प्रकाश डाला, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जयशंकर ने अफ्रीका और मध्य पूर्व में विस्तार करने की इच्छुक जापानी कंपनियों के लिए एक आदर्श केंद्र के रूप में काम करने की भारत की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “जापानी निवेश, भारत का मजबूत औद्योगिक आधार, डिजिटल क्षमताएं, अफ्रीका की प्रतिभा और बढ़ता उपभोक्ता आधार सभी हितधारकों के लिए लाभकारी परिणाम बनाने के लिए एक साथ आ सकते हैं।” विदेश मंत्री ने कहा, “भारत और जापान लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन पर आधारित एक रिश्ता साझा करते हैं, साथ ही एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए एक समान दृष्टिकोण भी रखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे द्विपक्षीय संबंध एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में विकसित हुए हैं।”

अमित शाह ने कहा- भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को स्टालिन की पार्टी के सदस्यता अभियान में शामिल होना चाहिए

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार पर तीखा हमला करते हुए उसके नेताओं पर भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाया। कोयंबटूर, तिरुवन्नामलाई और रामनाथपुरम में भाजपा जिला कार्यालयों के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए शाह ने कहा, “भ्रष्टाचार के मामले में डीएमके के सभी नेताओं के पास मास्टर डिग्री है। उनके एक नेता नौकरी के लिए पैसे के मामले में फंसे हैं, दूसरे मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध रेत खनन में शामिल हैं, और तीसरे पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोप हैं।” एमके स्टालिन के बयान में कोई सच्चाई नहीं- शाह तमिलनाडु को केंद्रीय निधि से वंचित किए जाने के सीएम एमके स्टालिन के आरोपों को खारिज करते हुए शाह ने कहा, “एमके स्टालिन के बयान में कोई सच्चाई नहीं है। मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में तमिलनाडु को 5 लाख करोड़ रुपये दिए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मुख्यमंत्री अक्सर दावा करते हैं कि राज्य को केंद्र के हाथों अन्याय का सामना करना पड़ा है। हालांकि, यूपीए और एनडीए के तहत वितरित धन की तुलना से पता चलता है कि असली अन्याय यूपीए शासन के दौरान हुआ था।” अमित शाह ने DMK का उड़ाया मजाक डीएमके का मजाक उड़ाते हुए शाह ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को एमके स्टालिन की पार्टी के सदस्यता अभियान में शामिल होना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “कभी-कभी ऐसा लगता है कि DMK ने सदस्यता अभियान के ज़रिए समाज के सभी भ्रष्ट लोगों को DMK में शामिल कर लिया है। एमके स्टालिन और उनके बेटे वास्तविक चिंताओं से ध्यान भटकाने के लिए कई मुद्दे उठा रहे हैं। आज वे परिसीमन को लेकर बैठक करने जा रहे हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि परिसीमन के बाद भी दक्षिण के किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी।” भाजपा 2026 में तमिलनाडु में सरकार बनाएगी शाह ने आगे कहा कि भाजपा 2026 में तमिलनाडु में सरकार बनाएगी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनाएगी। उन्होंने राज्य में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को खत्म करने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को हटाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने के लिए तैयार हो जाइए। 2026 में हम NDA की सरकार बनाएंगे। यह नई सरकार तमिलनाडु के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगी। हम राज्य में भाई-भतीजावाद को खत्म करेंगे। तमिलनाडु में भ्रष्टाचार को खत्म किया जाएगा। हम तमिलनाडु से भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु के कोयंबटूर, तिरुवन्नामलाई और रामनाथपुरम में भाजपा जिला कार्यालयों का उद्घाटन किया।

पूर्वी थाईलैंड में एक चार्टर्ड बस अनियंत्रित होकर पलट गई, दुर्घटना में 18 लोगों की मौत, 31 अन्य लोग घायल

बैंकॉक पूर्वी थाईलैंड में एक चार्टर्ड बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई और 31 अन्य लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  पूर्वी थाईलैंड में बुधवार सुबह एक चार्टर्ड बस अनियंत्रित होकर पलट गई। दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि 31 अन्य लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सड़क दुर्घटना प्राचीन बुरी प्रांत में उस समय हुई, जब बस उत्तरी थाईलैंड से तटीय रेयोंग प्रांत की यात्रा कर रही थी। बस में एक दल सवार था, जो नगरपालिका अध्ययन दौरे पर निकला था। सुरक्षा मानक जांचने के लिए यात्री वाहनों की जांच होगी तेज परिवहन विभाग ने कहा कि वह इस सड़क दुर्घटना की जांच में पुलिस के साथ समन्वय करेगा। साथ ही सभी यात्री वाहनों की जांच तेज की जाएगी, जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं या नहीं। सड़क दुर्घटना में मौतों के मामले में 9वें स्थान पर है थाईलैंड मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थाईलैंड में सड़क सुरक्षा एक बड़ी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, सड़क दुर्घटना में मौतों के मामले में थाईलैंड 175 सदस्य देशों में से 9वें स्थान पर है। इसकी जानकारी पिछले साल अक्तूबर में तब हुई, जब एक स्कूल बस में भीषण आग लग गई और हादसे में 23 युवा छात्रों सहित शिक्षकों की मौत हो गई। सभी स्कूल के फील्ड ट्रिप पर गए थे। इस दुर्घटना के पीछे संदेह जताया गया था कि बस में आग रखरखाव और निरीक्षणों की लापरवाही के चलते लगी है। प्राचुआप खीरी खान में पेड़ से टकराई थी बस, 14 लोगों की गई थी जान दिसंबर 2023 में, पश्चिमी प्रांत प्राचुआप खीरी खान में एक और बस दुर्घटना हुई। 49 लोगों से भरी बस सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकरा गई। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पुलिस ने हादसे के पीछे ड्राइवर के सोने की संभावना जताई थी। 

हैदराबाद: ईडी ने ड्रग्स तस्करी से जुड़े मामले में की कार्रवाई, अवैध इंटरनेट फार्मेसी की करोड़ों की संपत्ति कुर्क

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि जेआर इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ड्रग्स तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई की गई है। पीएमएलए के तहत फार्मेसी की मध्य प्रदेश में जमीन और करीब 8 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि कुर्क की है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हैदराबाद की एक अवैध इंटरनेट फार्मेसी के खिलाफ ड्रग्स तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की है। ईडी ने बुधवार को बताया कि जांच के तहत उसने मध्य प्रदेश में जमीन और करीब 8 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि कुर्क की है। ईडी ने बताया कि जेआर इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ईडी के अनुसार,  हैदराबाद कार्यालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत फार्मेसी, उसके प्रमोटर आशीष जैन और परिवार के सदस्यों की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया है।   पहले एनसीबी ने दर्ज की थी शिकायत   बता दें कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने जेआर इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मई 2022 में शिकायत दर्ज की थी। फर्म पर अवैध इंटरनेट फार्मेसी चलाने का आरोप लगाया गया था। जिसके बाद मामले की ईडी ने जांच शुरू की। जांच के दौरान संघीय एजेंसी को अवैध इंटरनेट फार्मेसी चलाने की शिकायत सही मिली। इन साइकोट्रोपिक पदार्थों का किया निर्यात ईडी ने बताया जेआर इनफिनिटी द्वारा अल्प्राजोलम, जोलपिडेम, लोराजेपम, क्लोनाजेपम, हाइड्रोकोडोन और ऑक्सीकोडोन जैसे साइकोट्रोपिक पदार्थों को टैबलेट के रूप में निर्यात किया जा रहा था। एजेंसी ने दावा किया कि फर्म ने टेलीमार्केटिंग कॉल सेंटर सेवाएं और ‘सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन’ सेवाएं प्रदान करने की आड़ में ऐसा किया। ईडी द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया के लिए आरोपी या उसके परिवार से तुरंत संपर्क नहीं किया जा सका। विदेशी ग्राहकों को निर्यात किए साइकोट्रोपिक पदार्थ ईडी का आरोप है कि जेआर इनफिनिटी के प्रमोटर आशीष जैन ने नारकोटिस्क डंग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। जैन ने विदेशी ग्राहकों को अवैध रूप से अल्प्राजोलम, ट्रामाडोल, डायजेपाम आदि जैसे साइकोट्रोपिक पदार्थों का निर्यात करने के लिए जेआर इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया। इस तरह जैन ने अपराध से आय अर्जित की। विदेशों में ड्रग्स की अवैध बिक्री कर प्राप्त किए 4.50 करोड़ ईडी ने जांच में पाया कि जेआर इनफिनिटी के शामिल होने से पहले ही आशीष जैन और पारिवारिक सदस्यों ने अपने बैंक खातों में 4.50 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त किया। ये धन विदेशों में ड्रग्स की अवैध बिक्री करके प्राप्त किया गया था। ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित की गई 12.76 करोड़ रुपये की आय की पहचान की गई है। जिसका उपयोग आशीष जैन और उसके पारिवारिक सदस्यों ने फिक्स डिपोजिट (एफडी) और अचल संपत्तियों की खरीद के लिए किया था। जैन और परिवार के सदस्यों के नाम पर मध्य प्रदेश में है संपत्ति ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियां जैन और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित जमीन के रूप में हैं, जिसकी कीमत 6.52 करोड़ रुपये है। इसके अलावा बैंक बैलेंस और 1.46 करोड़ रुपये की एफडी भी है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य 7.98 करोड़ रुपये है।

एक fit और Healthy Nation बनने के लिए हमें Obesity की समस्या से निपटना ही होगा : पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बढ़ते मोटापे पर चिंता जताई थी। मोटापा सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी है। ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के अनुसार 2019 में भारत में मोटापे का आर्थिक बोझ लगभग 28.95 अरब डॉलर था जो देश की GDP का 1% है। अगर यही हाल रहा तो इस साल इसके 81.53 अरब डॉलर होने की आशंका है जो GDP का 1.57% होगा। माना जा रहा है कि साल 2060 तक मोटापे से देश की इकॉनमी को 838.6 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। यह देश की GDP का करीब 2.5% है। पिछले साल जुलाई में जारी हुए आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में चेतावनी दी गई थी कि अगर भारतीय फिट नहीं रहेंगे तो देश को डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी युवा आबादी का पूरा फायदा नहीं मिलेगा। यानी हमारी आबादी स्वस्थ नहीं होगी तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। सर्वे के मुताबिक अगर भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का फायदा उठाना है, तो इसके लिए यह जरूरी है कि उसके लोगों के स्वास्थ्य मानकों में संतुलित और विविध आहार की ओर बदलाव हो। सर्वे में मोटापे को एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बताया गया था। सर्वे के मुताबिक भारत की वयस्क आबादी में मोटापा एक गंभीर चिंता का विषय बन रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के अनुसार 18-69 आयु वर्ग के पुरुषों में मोटापे का प्रतिशत 22.9% हो गया है जो पिछले सर्वे में 18.9% था। महिलाओं में मोटापा 20.6% से बढ़कर 24.0% हो गया है। कम शारीरिक गतिविधि इसका एक बड़ा कारण हो सकता है। साथ ही लोगों की खानपान की आदत में भी बदलाव आया है। पैकेट बंद और प्रोसेस्ड खाना खाने से मोटापा बढ़ता है। आपकी थाली में क्या है? आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर चिंता जताई है। इसमें चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट पर सख्त नियम बनाने की बात कही गई है। इसमें खाने के पैकेट पर चेतावनी लेबल लगाने और जंक फूड के विज्ञापन पर, खासकर बच्चों के लिए, रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक जगहों पर ऐसे खाने को हटाने और मिलेट्स, फल और सब्जियों जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाने को सस्ता करने की बात भी कही गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध परिषद (ICRIER) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य क्षेत्र में 2011 से 2021 तक खुदरा बिक्री मूल्य में सालाना 13.37% की तेजी रही है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2022-23 के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण परिवार अपने खाद्य बजट का लगभग 9.6% प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर खर्च करते हैं जबकि शहरी परिवार लगभग 10.64% खर्च करते हैं। नेशनल वेट-लॉस प्लान? इन सब चेतावनियों के बावजूद भारत में मोटापे से निपटने के लिए कोई ठोस राष्ट्रीय रणनीति नहीं है। हालांकि बच्चों और कमजोर वर्गों के पोषण के लिए नीतियां हैं लेकिन सभी आयु वर्ग के लोगों में मोटापे से निपटने के लिए कोई व्यापक योजना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कदम नहीं उठाए गए तो आर्थिक बोझ बहुत बढ़ जाएगा। राष्ट्रीय पोषण संस्थान में काम कर चुके वैज्ञानिक ए लक्ष्मैया ने बताया कि मोटापे का आर्थिक प्रभाव सिर्फ इलाज की लागत तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘रोजगार का नुकसान, अवसरों की कमी और सोशल सपोर्ट की कमी के कारण भावनात्मक तनाव भी इस आर्थिक बोझ में काफी योगदान करते हैं।’ आगे का रास्ता मोटापा सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला नहीं है, यह राष्ट्रीय समृद्धि से भी जुड़ा है। अगर भारत अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा फायदा उठाना चाहता है, तो उसके पास एक स्वस्थ और उत्पादक वर्कफोर्स होना बहुत जरूरी है। आर्थिक सर्वेक्षण साफ कहता है कि अगर हमने अभी मोटापे पर नियंत्रण नहीं किया तो हम अपनी आर्थिक क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। तो अगली बार जब आप चिप्स का एक और पैकेट खाने के लिए हाथ बढ़ाएं या व्यायाम छोड़ने का फैसला करें, तो याद रखें कि यह सिर्फ आपके स्वास्थ्य का ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का भी सवाल है।

महाराष्ट्र के पुणे में हैवानियत!, बस में महिला से रेप, CCTV में कैद हुआ दरिंदा, पुलिस की कई टीमें तैनात

पुणे महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक सीरियल अपराधी ने स्वारगेट बस डिपो में खड़ी महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बस में 26 वर्षीय महिला के साथ रेप किया। यह घटना मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है, जब पीड़िता अपने गृहनगर सतारा जिले के लिए बस पकड़ने के इंतजार में थी। स्वारगेट पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि आरोपी की पहचान दत्ता गाडे के रूप में हुई है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी और चैन स्नेचिंग के कई मामले दर्ज हैं। ऐसे दिया वारदात को अंजाम पीड़िता के अनुसार, वह मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे स्वारगेट बस स्टैंड के एक प्लेटफॉर्म पर पैठण जाने वाली बस का इंतजार कर रही थी। तभी आरोपी ने उसे यह कहकर गुमराह किया कि उसकी बस दूसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी है। संदिग्ध ने उसे डिपो में खड़ी राज्य परिवहन निगम की शिवशाही बस में चढ़ने को कहा। महिला उसकी बातों में आ गई और उसके साथ वहां तक चली गई, जहां एक बस सुनसान जगह पर खड़ी थी। अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी ने महिला को बस के अंदर बैठने के लिए कहा और फिर खुद भी अंदर घुस गया। इसके बाद उसने महिला के साथ रेप किया और मौके से फरार हो गया। CCTV फुटेज से हुई पहचान, पुलिस की कई टीमें तैनात घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। स्वारगेट बस स्टैंड पर लगे CCTV कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान की गई। पुणे पुलिस ने आरोपी की धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित की हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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