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मुंबई में मंत्रालय भवन से कूदा युवक, जाली पर गिरा, सुरक्षाकर्मियों ने किया रेस्क्यू

मुंबई मुंबई में एक व्यक्ति द्वारा मंत्रालय भवन से नीचे छलांग लगाने का मामला सामने आया है। हालांकि गनीमत रही कि वह नीचे कूदकर मंत्रालय की सुरक्षा जाली पर जाकर गिरा और उसकी जान बच गई। घटना के बाद, सुरक्षाकर्मियों ने युवक को तुरंत कस्टडी में ले लिया। पुलिस ने युवक से पूछताछ और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, युवक ने मंत्रालय भवन की ऊपरी मंजिल से कूदने का प्रयास किया, लेकिन वह सुरक्षा जाली पर गिरकर बच गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक ने ऐसा कदम क्यों उठाया और उसके पीछे क्या कारण था। पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और युवक से पूछताछ की जा रही है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक सुरक्षा जाली पर गिरा हुआ है और सुरक्षाकर्मी उसे रेस्क्यू करने में जुटे हुए हैं।

IIT गुवाहाटी ने बनाया गजब का मॉडल, AI की ताकत से हड्डी के फैक्चर का होगा ज्यादा सटीक इलाज

मंडी हड्डी का फैक्चर जितना दर्दनाक होता है, उसका इलाज भी उतना ही चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सही इंप्लांट (कृत्रिम अंग) व तकनीक का चयन न केवल सर्जरी की सफलता बल्कि मरीज के घाव भरने की प्रक्रिया (हीलिंग) को भी प्रभावित करता है। अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी ) गुवाहाटी के शोधार्थियों ने इसी चुनौती का समाधान ढूंढा है। हर साल दो लाख होते हैं हड्डी के फैक्चर शोधार्थियों ने इसके लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित मॉडल विकसित किया है। भारत में हर वर्ष लगभग दो लाख जांघ की हड्डी के फैक्चर होते हैं। यह मॉडल जांघ व अन्य हड्डियों में फैक्चर के बाद ठीक होने की प्रक्रिया की ज्यादा सटीक जानकारी देने में सक्षम है। यह न सिर्फ रोगी के उपचार में लगने वाले समय को कम करेंगी बल्कि सर्जरी के खर्च को भी कम करने में मदद मिलेगी। इस एआइ मॉडल के प्रयोग से हड्डी रोग विशेषज्ञ विभिन्न फैक्चर व उनके उपचार की रणनीति के नतीजों का आकलन कर मरीज की व्यक्तिगत शारीरिक बनावट व फैक्चर के प्रकार के अनुसार सबसे उपयुक्त उपचार पद्धति चुन सकेंगे। आईआईटी गुवाहाटी के बायोसाइंसेज एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुप्तिक चंदा व उनकी टीम द्वारा विकसित यह एआइ मॉडल फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस व फजी लॉजिक तकनीक का उपयोग करके हड्डी के विकास के मापदंडों का अध्ययन करता है। इसमें स्क्रू फिक्सेशन तंत्रों के प्रभाव का भी अध्ययन किया गया है। शोध अमेरिका के ओपनसोर्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। एआइ आधारित सिमुलेशन मॉडल सर्जरी से पहले ही चिकित्सकों को सही इंप्लांट या तकनीक चुनने में मदद करेगा। इसमें बायोलाजिकल व मरीज विशिष्ट मापदंडों के अलावा धूमपान, मधुमेह जैसी स्वास्थ्य स्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है।   सॉफ्टवेयर व ऐप विकसित करने की योजना शोधार्थियों की टीम इस मॉडल के एल्गोरिदम पर आधारित एक सॉफ्टवेयर या मोबाइल एप भी अब विकसित करेगी। इसे अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में फैक्चर व इलाज प्रोटोकाल के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया सकेगा। आईआईटी के शोधार्थियों के साथ उत्तर पूर्वी इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान शिलांग के हड्डीरोग विशेषज्ञ डॉ. भास्कर बोर्गोहाईं व उनकी टीम ने भी इस मॉडल को विकसित करने में मदद की है। मॉडल लागू करने से पहले हो रहे पशु परीक्षण एआइ माडल की सटीकता को प्रायोगिक अध्ययन और नैदानिक अवलोकनों के माध्यम से प्रमाणित किया गया है। इसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर पूर्वी इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान शिलांग के अस्थि रोग विशेषज्ञों के सहयोग से निरंतर सत्यापन अध्ययन किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह मॉडल नैदानिक अनुप्रयोगों के लिए पूरी तरह उपयुक्त और विश्वसनीय हो। वर्तमान में इस मॉडल को मानव रोगियों पर लागू करने से पहले पशु परीक्षण किए जा रहे हैं। अध्ययनों के दौरान इस माडल के नए आयामों पर भी शोध किया जा रहा है, जिससे इसके नैदानिक उपयोग की संभावनाओं को और बेहतर तरीके से समझा जा सके। इस एआइ मॉडल को लेकर जोनल अस्पताल मंडी के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र नेगी बताते हैं कि हर व्यक्ति के शरीर के अनुसार हड्डियों की बनावट भी अलग होती है।फैक्चर की स्थिति में किस मरीज में कौन सा इंप्लांट लगना है, सर्जरी के समय टेबल पर ही तय किया जाता है। एआइ माडल से इंप्लांट चुनने में पहले ही मदद मिलेगी।

ट्रंप के शपथ ग्रहण के बाद रिकॉर्ड हाई से गिरी कीमत, बिटकॉइन में 5.4% की गिरावट देखने को मिली

नई दिल्ली साल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आया। जब डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को शपथ ली, तो बिटकॉइन ने एक ऐतिहासिक उछाल लिया। उस दिन बिटकॉइन की कीमत $109,000 (95,03,546.50 INR) के पार पहुंच गई थी, जो इसके अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर थी। ट्रंप की राष्ट्रपति चुनाव में जीत और उनके द्वारा क्रिप्टो से जुड़े नियमों में ढील देने के वादे ने क्रिप्टो बाजार को उत्साहित कर दिया था। इसके बाद बिटकॉइन में ऐतिहासिक तेजी देखी गई।  इस तेजी के बाद अब 25 फरवरी 2025 को बिटकॉइन में 5.4% की गिरावट देखने को मिली और इसकी कीमत $89,626 (78,15,039.59 INR) पर आ गई। यानि कुल 1 महीनें में 16,88,506.91 INR का नुकसान हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप के वादों का असर बिटकॉइन पर डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान के दौरान यह वादा किया गया था कि वह क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नियमों में ढील देंगे और क्रिप्टो रिजर्व बनाने का भी प्रयास करेंगे। इससे ट्रंप की जीत के बाद क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों में उम्मीद का माहौल था। बिटकॉइन की कीमत $109,000 तक पहुंची और निवेशक उत्साहित थे कि अब उनका निवेश काफी लाभकारी होगा। यह बिटकॉइन के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। लेकिन, इस तेजी के बाद बिटकॉइन में 12% की गिरावट आई। कुछ दिन पहले 20 जनवरी के बाद, इसकी कीमत $109,114 से घटकर $96,400 पर आ गई थी। फिर यह 25 फरवरी 2025 को बिटकॉइन में 5.4% की गिरावट देखने को मिली और इसकी कीमत $89,626 पर आ गई। क्रिप्टोकरेंसी की गिरावट का कारण क्या? क्रिप्टोकरेंसी की गिरावट का एक और कारण चीन पर अमेरिकी निवेश प्रतिबंधों का लागू होना था। 25 फरवरी 2025 को बिटकॉइन में 5.4% की गिरावट देखने को मिली और इसकी कीमत $89,626 पर आ गई। चीन के खिलाफ अमेरिका की नीति के कारण निवेशकों में डर का माहौल था, जिससे क्रिप्टोकरेंसी में बिकवाली बढ़ी और बाजार को तगड़ा झटका लगा। इसके अलावा डॉलर पर भी दबाव बढ़ गया, क्योंकि ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की थी। ट्रंप की क्रिप्टो नीति पर उठे सवाल यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि ट्रंप की जीत के बाद क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कई राज्यों के प्रस्तावों पर सवाल उठे। मोंटाना, नॉर्थ डकोटा और व्योमिंग जैसे राज्यों में बिटकॉइन रिजर्व से जुड़े प्रस्ताव विफल हो गए, जिससे क्रिप्टो बाजार को एक बड़ा झटका लगा। इसके अलावा जापान की मुद्रा येन की मजबूती भी बिटकॉइन की गिरावट का कारण बनी। विशेषज्ञों के मुताबिक जापान के बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना ने भी येन को मजबूत किया जिसका असर क्रिप्टोकरेंसी पर पड़ा।  

महाकुंभ आस्था व विश्वास का संगम है, CM सुक्खू ने परिवार संग लगाई आस्था की डुबकी

शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को प्रयागराज महाकुंभ में त्रिवेणी संगम पर सपरिवार डुबकी लगाई। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की खुशहाली व समृद्धि की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि महाकुंभ आस्था व विश्वास का संगम है और हमारी संस्कृति का परिचायक है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा आज परिवार सहित पवित्र स्नान करने का अवसर मिला है, यह बहुत अच्छा अहसास है। मुख्यमंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि हिंदुस्तान की संस्कृति और हिंदुत्व पहले से ही विश्व विख्यात है। यदि इतिहास के पन्नों को पलट कर देखेंगे तो पता लग जाएगा कि हमारी संस्कृति और संस्कार पहले से ही विश्व विख्यात है। मुख्यमंत्री ने प्रयागराज के लिए आईजीआई एयरपोर्ट नई दिल्ली से मंगलवार सुबह 10.20 पर उड़ान भरी और वहां पवित्र स्नान किया। मुख्यमंत्री प्रयागराज से देर शाम चंडीगढ़ पहुंचे। सीएम के साथ ही उनके राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू और प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान भी मौजूद रहे। सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट सीएम ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि त्रिवेणी सदियों से केवल एक जलधारा नहीं है। यह हमारी आस्था, परंपरा और समरसता का जीवंत प्रतीक है। यहां लहरें पूर्वजों की श्रद्धा, संकल्पों और सनातन मूल्यों की साक्षी हैं। पीढ़ियां बदलीं, समय आगे बढ़ा पर इस पावन संगम ने हर युग में मानवता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। प्रयाग महत्ता अडिग है, अनंत है। अंत में उन्होंने लिखा है कि जय तीर्थराज प्रयाग। जय मां गंगे। बुधवार को लौटेंगे शिमला मुख्यमंत्री को पहले मंगलवार को शिमला आने का कार्यक्रम था लेकिन उसमें अब फेरबदल हुआ है। इसके तहत मुख्यमंत्री बुधवार को चंडीगढ़ से होते हुए वापस शिमला पहुंचेगें। गौर हो कि बीते एक सप्ताह से मुख्यमंत्री प्रदेश से बाहर है। पहले वे निजी दौरे पर मालदीव गए थे और वहां से लौटने के बाद प्रयागराज गए।

असम की अर्थव्यवस्था 6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची, यह डबल इंजन सरकार के प्रभाव को दर्शाता है: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुवाहाटी में एडवांटेज असम 2.0 निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर शिखर सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भाजपा शासन में असम की अर्थव्यवस्था दोगुनी होकर 6 लाख करोड़ रुपए हो गई है। उन्होंने कहा कि यह “डबल इंजन” सरकार के प्रभाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर की भूमि एक नए भविष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने एडवांटेज असम पहल को असम की क्षमता और प्रगति से दुनिया को जोड़ने का एक भव्य अभियान बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से पूर्वी भारत ने भारत की समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब, जब भारत विकास की ओर बढ़ रहा है, तो पूर्वोत्तर अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञ भारत के तेज़ विकास को लेकर आश्वस्त पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपनी स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रहा है और विभिन्न वैश्विक क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है। उन्होंने पूर्वी एशिया के साथ बढ़ती कनेक्टिविटी और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के उभरने का उल्लेख किया, जो कई अवसरों को खोलता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, कई विशेषज्ञ भारत के तेज़ विकास को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने इस आत्मविश्वास का श्रेय भारत की युवा और तेज़ी से कौशल प्राप्त करने वाली आबादी, इसके नए मध्यम वर्ग की बढ़ती आकांक्षाओं और देश के 140 करोड़ लोगों से राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता के लिए समर्थन को दिया। उन्होंने सरकार के सुधारों और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने की प्रशंसा की। रेल बजट में हुई वृद्धि पर भी प्रकाश डाला उन्होंने असम के बढ़ते योगदान पर जोर देते हुए कहा कि 2018 में एडवांटेज असम का पहला संस्करण लॉन्च किया गया था, जब राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपए थी। अब यह बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो भाजपा शासन के तहत छह साल में अर्थव्यवस्था को दोगुना करने का प्रदर्शन करती है, जो डबल इंजन सरकार की सफलता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने असम के रेल बजट में हुई वृद्धि पर भी प्रकाश डाला, जो 2009 से 2014 के बीच औसतन 2,100 करोड़ रुपए से बढ़कर वर्तमान सरकार के तहत 10,000 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे, उद्योग और नवाचार में महत्वपूर्ण निवेश कर रही है, जो भारत की प्रगति की नींव के रूप में काम करते हैं। मिशन मोड पर काम कर रहा भारत प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत “मेक इन इंडिया” पहल के तहत अपने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड पर काम कर रहा है, जिससे कम लागत वाले विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि असम ने 2030 तक 143 बिलियन अमरीकी डॉलर का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, और उन्होंने राज्य के लोगों की क्षमता और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने की राज्य की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने यह कहते हुए समापन किया कि असम दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के बीच एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। इस क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार ने उत्तर-पूर्व औद्योगिकीकरण परिवर्तन योजना, ‘उन्नति’ शुरू की है। प्रधानमंत्री ने असम के चाय उद्योग को राज्य की क्षमता का एक उदाहरण बताया। 200 साल पूरे करने के बाद, असम चाय राज्य को अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।  

यूक्रेन को लेकर ट्रंप और मैक्रों के मतभेद साफ नजर आए, इस पर मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप को बीच में ही रोक दिया

फ्रांस फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस दौरान उनकी कई मसलों पर बात हुई तो कुछ मामलों में साफ तौर पर असहमति भी दिखी। खासतौर पर यूक्रेन को लेकर ट्रंप और मैक्रों के मतभेद साफ नजर आए। डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को सैन्य सहायता दी थी और अब वे उसके बदले में पैसा वापस ले रहे हैं। इस पर मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप को बीच में ही रोक दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको करेक्ट करता हूं। यूरोप ने यूक्रेन को पैसा दिया था और अब वह उसे ही वापस ले रहा है।’ मैक्रों के बीच में टोकने और करेक्ट करने के दौरान डोनाल्ड ट्रंप चुप रहे और हामी भरते हे। उनके चेहरे के हावभाव देखने लायक थे और इसी के चलते वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मैक्रों ने इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप की बांह पकड़ ली। उन्होंने कहा, ‘स्पष्ट रूप से कहें तो हमने कुल खर्च का 60 फीसदी हिस्सा लगाया। यह लोन, गारंटी के तौर पर था। यूरोप में हमारे पास 230 अरब डॉलर की रूस की एसेट्स हैं, जिन्हें फ्रीज किया गया है। लेकिन यह लोन के एवज में नहीं है। यह रूसी संपत्ति है और हमसे उसका कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए फ्रीज है।’ मैक्रों ने कहा कि यह रूस की जिम्मेदारी है कि वह यूक्रेन को मिली मदद की रकम वापस करे। हमारी जब अंत में रूस से बात होगी तो हम कहेंगे कि वह लोन की रकम वापस करें। रूस को यह रकम लौटानी ही होगी। ट्रंप ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि यदि आप ऐसा कहते हैं तो सही है। लेकिन मेरी चिंता यह है कि उन देशों को उनका पैसा तो वापस मिल रहा है, लेकिन हमें अपनी पूंजी नहीं मिल रही। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन फिलहाल यूक्रेन के साथ कुछ मिनरल्स को लेकर रेवेन्यू शेयरिंग अग्रीमेंट कर रहा है। इसके तहत यूक्रेन की कोशिश है कि बाइडेन प्रशासन के दौर में यूक्रेन को दी गई मदद का कुछ हिस्सा रिकवर किया जा सके। यह रकम अमेरिकी प्रशासन ने रूस के खिलाफ जंग में हथियार खरीदने के लिए दी थी। ट्रंप का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि यूक्रेन के साथ मिनरल्स को लेकर एक समझौता हो सकेगा। इसके तहत 180 अरब डॉलर की मदद जो अमेरिका ने की थी, उसका कुछ हिस्सा रिकवर हो सकेगा। ऐसा लगता है कि हम उस डील के बेहद करीब पहुंच गए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका के साथ हम अग्रीमेंट के करीब हैं।

मंत्रियों के कहने पर किसी भ्रष्ट निजी सहायकों और विशेष कार्य अधिकारी की नियुक्तियों को मंजूरी नहीं देंगे: फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि वह मंत्रियों के कहने पर किसी भ्रष्ट निजी सहायकों (पीएस) और विशेष कार्य अधिकारी की नियुक्तियों को मंजूरी नहीं देंगे। कृषि मंत्री और अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे के बयान पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने कहा कि चाहे कोई नाराज हो, लेकिन जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार या गलत कामों के आरोप हैं, उन्हें वह अपनी मंजूरी नहीं देंगे। फडणवीस का साफ संदेश गौरतलब है कि माणिकराव कोकाटे ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अब मंत्रियों के पीए और ओएसडी की नियुक्ति भी मुख्यमंत्री तय कर रहे हैं, जिससे उनके पास खुद के फैसले लेने की गुंजाइश नहीं बची है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इसके जवाब में फडणवीस ने कहा, “राज्य में मंत्रियों के पीए और विशेष कार्य अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है। कोकाटे साहब को शायद यह जानकारी नहीं है कि यह कोई नई परंपरा नहीं है। मैंने कैबिनेट बैठक में स्पष्ट किया था कि मंत्री अपने सुझाव भेज सकते हैं, लेकिन अगर उन पर गलत कामों का ठप्पा लगा है, तो मैं मंजूरी नहीं दूंगा।” सीएम फडणवीस ने बताया कि मंत्रियों की ओर से कुल 125 नाम भेजे गए थे, जिनमें से 109 को हरी झंडी दी गई, लेकिन जिन पर संदेह था, उन्हें मंजूरी नहीं दी गई। उन्होंने साफ कहा, “मैंने बाकी नामों को क्लीयर नहीं किया क्योंकि उन पर आरोप हैं और कुछ मामलों में जांच भी चल रही है। चाहे कोई नाराज हो या खुश, मैं ऐसे नामों को पास नहीं करूंगा।” साहित्य सम्मेलन पर भी बोले फडणवीस इस बीच, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपाध्यक्ष और शिंदे गुट की शिवसेना नेता नीलम गोऱ्हे द्वारा उद्धव ठाकरे पर की गई टिप्पणी और फिर संजय राऊत के पलटवार से राजनीति गरमा गई। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ऐसे राजनीतिक बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “साहित्य सम्मेलन में भी नफरत झलक रही है। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उद्धव ठाकरे तक पर कटाक्ष किए गए। लेकिन क्या ऐसे मंच का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना सही है?” फडणवीस ने यह भी कहा कि साहित्य मंचों पर सभी को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर राजनीतिक नेता साहित्य सम्मेलनों में जाते हैं, तो उन्हें अपनी राजनीतिक बयानबाजी पर भी रोक लगानी चाहिए। इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए राहत की घोषणा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार की किसान संमान निधि योजना के तहत अब राज्य सरकार अपनी तरफ से 6,000 रुपये की जगह 9,000 रुपये देगी। इससे किसानों को कुल 15,000 रुपये सालाना मिलेंगे, जिससे उनकी आर्थिक मदद हो सकेगी।

सिख विरोधी दंगों के मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा

नई दिल्ली  1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दो सिख नागरिकों की हत्या से जुड़े मामले में भी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। सिख दंगा मामले में सज्जन कुमार अब भी तिहाड़ जेल में हैं। दिल्ली की राउज ऐवन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इससे पहले 25 फरवरी तक अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि सज्जन कुमार को 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या से संबंधित मामले में दोषी ठहराया गया था। पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को 12 फरवरी को दंगा, गैरकानूनी सभा और हत्या आदि से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। इस मामले में सीबीआई और शिकायतकर्ता ने सज्जन कुमार को फांसी की सजा देने की मांग की थी. मामला 1 नवंबर, 1984 की है, जिसमें पश्चिमी दिल्ली के राज नगर में सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह की हत्या कर दी गई थी. शाम को करीब चार-साढ़े चार बजे दंगाइयों की भीड़ ने पीड़ितों के राज नगर इलाके स्थित घर पर लोहे के सरियों और लाठियों से हमला कर दिया था. शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इस भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे जो उस समय बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद थे. शिकायत के मुताबिक, सज्जन कुमार ने भीड़ को हमला करने के लिए उकसाया था, जिसके बाद भीड़ ने सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह को जिंदा जला दिया था. भीड़ ने पीड़ितों के घर में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी को भी अंजाम दिया था. शिकायतकर्ता की ओर से तत्कालीन रंगनाथ मिश्रा की अध्यक्षता वाली जांच आयोग के समक्ष दिए गए हलफनामे के आधार पर उत्तरी जिले के सरस्वती विहार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे. कब क्या हुआ? 1 नवंबर 1984: सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी. पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. 16 दिसंबर 2021: पुलिस जांच को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सज्जन के खिलाफ आरोप तय किए थे. इस दौरान पीड़ित के वकील ने दलील दी थी, “वकील ने कहा था, भीड़ खतरनाक हथियार लेकर सरस्वती विहार में घुसी. उन्होंने लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दी. वे सिखों की प्रॉपर्टीज पर हमला कर रहे थे. वे इंदिरा गांधी की हत्या का बदला ले रहे थे. भीड़ ने जसवंत के घर हमला किया, उसकी और बेटे की हत्या कर दी. लूटपाट के बाद घर में आग लगा दी.” 12 फरवरी 2025: स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने फैसला सुनाया- इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सज्जन कुमार न केवल भीड़ में शामिल थे, बल्कि भीड़ की अगुआई भी कर रहे थे. पहले तीन बार टल चुका है फैसला: 31 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार पर फैसला टाल दिया था. इससे पहले 8 जनवरी और 16 दिसंबर 2024 को भी फैसला टाला गया था. दोनों बार विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की कोर्ट में तिहाड़ में बंद सज्जन कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुआ था. दिसंबर 2021 को सज्जन कुमार ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही थी. ट्रायल में सज्जन कुमार को दोषी माना गया था. इसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

चैंपियंस ट्रॉफी- पाकिस्तान ऑलआउट, भारत को 242 का टारगेट: इकलौती फिफ्टी सऊद की; कुलदीप को 3 और पंड्या को 2 विकेट

Champions Trophy 2025 – Pakistan all out, India’s target is 242: Saud’s only fifty; Kuldeep gets 3 and Pandya gets 2 wickets चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान ने भारत को 242 रन का टारगेट दिया है। सऊद शकील ने टीम की ओर से इकलौती फिफ्टी लगाई। उन्होंने 62 रन बनाए और कप्तान मोहम्मद रिजवान (46 रन ) के साथ 104 रन की साझेदारी की। ओपनर बाबर आजम (23 रन) और इमाम-उल-हक (10 रन) अच्छी शुरुआत नहीं दिला पाए। लोअर मिडिल ऑर्डर भी भारतीय स्पिनर्स के आगे फेल हो गया। टीम इंडिया की ओर से कुलदीप यादव ने 3 विकेट लिए। जबकि हार्दिक पंड्या को 2 विकेट मिले। रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल को 1-1 सफलता मिली। 2 बैटर रनआउट हुए। इस मुकाबले में पाकिस्तान के कप्तान रिजवान ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी थी। भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने कहा था कि टॉस से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। हालांकि, यह पिच बाद में धीमी हो सकती है।

आंदोलन का केंद्र रहे कोकराझार में लगेगा एक दिवसीय विधानसभा सत्र , पीएम मोदी ने जताई खुशी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में आंदोलन के केंद्र रहे कोकराझार में 17 फरवरी को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र का स्वागत किया है। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्र और असम दोनों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकारें बोडो समुदाय को सशक्त बनाने और बोडो आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। सीएम सरमा ने बताया सत्र का प्रमुख एजेंडा वहीं, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने विकास के बारे में जानकारी दी और कहा कि सत्र का एक प्रमुख एजेंडा छठी अनुसूची क्षेत्रों के प्रशासन को मजबूत करना होगा। इस पल को अपने राजनीतिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ’17 फरवरी को असम ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करेगा, क्योंकि कोकराझार, जो कभी बोडोलैंड आंदोलन का केंद्र था, एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करेगा। मुख्य एजेंडा छठी अनुसूची क्षेत्रों के प्रशासन को मजबूत करना होगा, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण एक प्रमुख आकर्षण होगा।’ उन्होंने कहा, यह माननीय प्रधानमंत्री के असम के प्रति अटूट प्रेम और माननीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन से संभव हुआ है। उनका नेतृत्व शांति, स्थिरता और प्रगति की ओर हमारी यात्रा को आगे बढ़ाता रहेगा। मैंने जीवंत बोडो संस्कृति देखी थी- पीएम मोदी मुख्यमंत्री के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने इसका स्वागत किया और कोकराझार की अपनी यात्रा को भी याद किया। पीएम मोदी ने लिखा- ‘केंद्र और असम दोनों में एनडीए सरकारें बोडो समुदाय को सशक्त बनाने और बोडो आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। ये कार्य और भी अधिक जोश के साथ जारी रहेंगे। मुझे कोकराझार की अपनी यात्रा याद आती है, जहां मैंने जीवंत बोडो संस्कृति देखी थी।’  

भारत को अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान के ऑफर से चीन बिफरा गया

नई दिल्ली/ बीजिंग  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एफ-35 लड़ाकू विमान ऑफर किया। इस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि एशिया-पैसिफिक (इंडो-पैसिफिक) “शांति और विकास का शानदार उदाहरण है, भू-राजनीतिक खेलों का अखाड़ा नहीं।” चीन ने यह भी कहा कि “विशेष समूह” बनाने और भू-राजनीतिक खेलों में शामिल होने से सुरक्षा नहीं मिलेगी। इंडो-पैसिफिक को बताया विकास और शांति का उदाहरण शुक्रवार को एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, “किसी को भी देशों के बीच संबंधों और सहयोग में चीन को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए, या गुटबाजी और टकराव को भड़काने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “एशिया-प्रशांत शांति और विकास का एक शानदार उदाहरण है, न कि भू-राजनीतिक खेलों का अखाड़ा। विशेष समूह बनाने और गुटबाजी और टकराव में शामिल होने से सुरक्षा नहीं आएगी, और किसी भी तरह से एशिया-प्रशांत और पूरी दुनिया शांतिपूर्ण और स्थिर नहीं रहेगी।” भारत-अमेरिका संबंधों पर भी बोला चीन जब अमेरिका और भारत के बीच अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने और सैन्य साझेदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यूएस-इंडिया कॉम्पैक्ट पहल शुरू करने के समझौते के बारे में पूछा गया, तो गुओ ने कहा कि देशों के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं होना चाहिए या दूसरों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं दोहराना चाहता हूं कि चीन का मानना है कि देशों के बीच संबंधों और सहयोग को किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं करना चाहिए या दूसरों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए, और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अनुकूल होना चाहिए।” पाकिस्तान ने भी जताई चिंता पाकिस्तान ने शुक्रवार को भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को बाधित करेगा, रणनीतिक स्थिरता को कमजोर करेगा और दक्षिण एशिया में स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न करेगा। नाराज पाकिस्तान ने अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से “एकतरफा दृष्टिकोण न अपनाने का आग्रह किया, जो जमीनी हकीकत से अलग हो।” शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (एमओएफए) के प्रवक्ता ने कहा, “भारत को उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों के नियोजित हस्तांतरण पर पाकिस्तान बहुत चिंतित है। इस तरह के कदम क्षेत्र में सैन्य असंतुलन को बढ़ाते हैं और रणनीतिक स्थिरता को कमजोर करते हैं।” अमेरिका से एकतरफा रुख अपनाने से बचने का आग्रह उन्होंने कहा, “वे दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायक नहीं हैं। हम अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर समग्र और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने और एकतरफा और जमीनी हकीकत से अलग रुख अपनाने से बचने का आग्रह करते हैं।” गुरुवार को ट्रंप ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “इस साल से हम भारत को कई अरब डॉलर की सैन्य बिक्री बढ़ाएंगे। हम अंततः भारत को F35, स्टेल्थ लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं।”

CM फडणवीस अब लव जिहाद कानून लाने की तैयारी, एक्शन में सरकार, पैनल का किया गठन

मुंबई  महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार अब लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। सरकार ने ऐसे मामलों के खिलाफ नए कानून के अध्ययन करने के मकसद से राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक मामले, विधि एवं न्यायपालिका, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के सचिव और गृह विभाग के उप सचिव शामिल हैं।  सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, यह समिति राज्य में मौजूदा स्थिति का अध्ययन करेगी और लव जिहाद एवं जबरन धर्मांतरण की शिकायतों से निपटने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों के संबंध में सुझाव देगी। यह समिति कानूनी पहलुओं और अन्य राज्यों में बनाये गये कानूनों पर भी विचार करेगी। इसके साथ ही वह जबरन धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को रोकने के लिए कानून की सिफारिश करेगी। दिल्ली में अमित शाह के साथ फडणवीस की मीटिंग इससे पहले नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र सरकार से राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों में तीन नए आपराधिक कानूनों को जल्द से जल्द लागू करने को कहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महाराष्ट्र में आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार को नए आपराधिक कानूनों के अनुसार अभियोजन निदेशालय बनाना चाहिए। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने क्रमशः औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 का स्थान लिया है। ये नए कानून पिछले साल एक जुलाई से लागू हुए। अमित शाह ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सरकार को जल्द से जल्द राज्य के सभी आयुक्तालयों में नए आपराधिक कानूनों को लागू करना चाहिए।’’ बैठक में राज्य में पुलिस, जेल, अदालतों, अभियोजन और फोरेंसिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के कार्यान्वयन और मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य में नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन की द्वि-साप्ताहिक समीक्षा करनी चाहिए, जबकि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को साप्ताहिक समीक्षा करनी चाहिए।

1 अप्रैल से लागू हो रही यूनिफाइड पेंशन स्‍कीम, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कितना बेहतर, समझें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय पेंशन सिस्‍टम (NPS) के ऑप्‍शन के तौर पर यूनिफाइड पेशन स्‍कीम (UPS) शुरू की है. 24 जनवरी को इस स्‍कीम का अधिकारिक ऐलान हुआ था. इस योजना को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया जाएगा. UPS स‍िर्फ और सिर्फ सरकारी कमचारियों के लिए लागू होगा, जो पहले से ही NPS के तहत रजिस्‍टर्ड हैं. सरकारी कर्मचारियों के पास विकल होगा कि वे NPS या UPS में से किसी एक को चून सकते हैं. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि एनपीएस के तहत पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के पास अब एनपीएस के तहत यूनिफाइड पेंशन योजना में स्विच करने का विकल्प है. यूपीएस योजना को तब शुरू किया गया, जब ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम (OPS) को लेकर खूब मांग उठ रही थी. ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम में रिटायर्ड कर्मचारियों को उनके वेतन का 50 फीसदी पेंशन के तौर दिया जाता था.   क्‍या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)? यूपीएस के तहत अब केंद्रीय कर्मचारियों को एक निश्‍चित पेंशन दिया जाएगा, जो लास्‍ट 12 महीने की ऐवरेज बेसिक सैलरी का 50% होगा. कर्मचारी को यह पेंशन पाने के लिए कम से कम 25 साल तक सर्विस करनी होगी. वहीं अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है तो परिवार को भी एक निश्चित पेंशन दिया जाएगा, जो कर्मचारी को मिलने वाले पेंशन का 60 फीसदी होगा. इसके अलावा, मिनिमम एश्‍योर्ड पेंशन भी दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि जो लोग 10 साल तक नौकरी करते हैं तो उन्‍हें कम से कम 10 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी. महंगाई के आधार पर बढ़ेगी पेंशन यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत इंडेक्‍सेशन को भी जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि महंगाई के हिसाब से रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन बढ़ती रहेगी. यह बढ़ोतरी महंगाई राहत (Dearness Alloawance) के तौर पर पेंशन में जोड़ी जाएगी. यह ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-W) के आधार कैलकुलेट होगा. वहीं रिटायमेंट पर एकमुश्‍त रकम भी दी जाएगी. इससे करीब 23 लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचने वाला है. किसे मिलेगा इस योजना का लाभ? NPS के तहत कवर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस यूनिफाइड पेंशन स्कीम को शनिवार 25 जनवरी 2025 को सरकार की ओर से नोटिफाई किया गया है. यूनिफाइड पेंशन स्कीम केंद्र सरकार के ऐसे कर्मचारियों पर लागू होगी, जो कि NPS यानी नेशनल पेंशन स्कीम के तहत आते हैं और इसके तहत यूपीएस के ऑप्शन को चुनते हैं.  यूपीएस चुनने वाले लोग किसी अन्य पॉलिसी रियायत, पॉलिसी चेंज, फाइनेंशियल बेनिफिट के हकदार नहीं होंगे. सरकार कितना करेगी योगदान? केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीते 24 अगस्त 2024 को यूपीएस का ऐलान करते हुए इससे जुड़ी तमाम जानकारियां शेयर की थीं. न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कॉन्ट्रिब्यूट करना होता है और इसमें सरकारी कॉन्ट्रिब्यूशन 14 फीसदी होता है. वहीं 1 अप्रैल 2025 से UPS लागू होने के बाद सरकार का ये कॉन्ट्रिब्यूशन या अंशदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 18.5 फीसदी होगा. इस हिसाब से सरकारी खजाने पर बढ़ने वाला अतिरिक्त बोझ पहले साल 6250 करोड़ रुपये होगा. 23 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) इसके लिए जरूरी नियम जारी करेगी. यह योजना 23 लाख से ज्यादा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लाभकारी मानी जा रही है. इस योजना के तहत सरकार का कॉन्ट्रिब्यूशन बेसिक पे और महंगाई भत्ते (DA) की कुल राशि का 18.5 फीसदी हो जाएगा, जो पहले 14 फीसदी था. वहीं, कर्मचारी अपनी पेंशन के लिए 10 फीसदी का कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखेंगे. UPS के फायदे UPS प्रोग्राम की शुरुआत सरकारी कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की लगातार मांग के जवाब में की गई है, जिसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी अंतिम वेतन का 50 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता था. यूपीएएस के तहत, सरकारी कर्मचारी अपनी मूल सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी योगदान देंगे, जबकि सरकार 18.5 फीसदी का योगदान करेगी. इसके अलावा, सरकार एक अलग पूल्ड कॉर्पस के लिए एडिशनल 8.5 फीसदी का योगदान करेगी. इस स्कीम में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को उनकी अंतिम 12 महीनों की औसत सैलरी का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर मिलेगा. UPS के लिए एलिजिबिलिटी यूनिफाइड पेंशन स्कीम का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम 10 साल की सर्विस पूरी कर ली है. रिटारमेंट पर कर्मचारियों के मिलने वाले फायदे     पेंशन की गारंटी: रिटायरमेंट के बाद हर महीने आपकी पिछली 12 महीनों की औसत सैलरी का 50% पेंशन के तौर पर मिलेगा.     महंगाई के साथ बढ़ेगी पेंशन: पेंशन में समय-समय पर महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी होगी.     फैमिली पेंशन: अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो परिवार को पेंशन का 60 फीसदी हिस्सा मिलेगा.     रिटायरमेंट बेनिफिट्स: रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के साथ एकमुश्त रकम दी जाएगी.     मिनिमम पेंशन: कम से कम 10 साल की नौकरी करने वालों को ₹10,000 महीना पेंशन की गारंटी है.     वॉलंटरी रिटायरमेंट का विकल्प: 25 साल की नौकरी के बाद आप वॉलंटरी रिटायरमेंट ले सकते हैं. आपकी पेंशन उस उम्र से शुरू होगी, जब आप सामान्य रिटायरमेंट की उम्र में पहुंचते हैं. क्या NPS छोड़कर UPS में आ सकते हैं? जो कर्मचारी पहले से NPS में हैं, वे इस नई स्कीम में शिफ्ट हो सकते हैं. हालांकि, UPS में एक बार शिफ्ट करने के बाद आप वापस NPS में नहीं जा सकते. कैसे होगा NPS से UPS में बदलाव? यूपीएस में गारंटीड पेंशन का फायदा उठाने के लिए कर्मचारियों को अपना पूरा एनपीएस फंड यूपीएस में ट्रांसफर करना होगा. अगर आपका एनपीएस फंड यूपीएस के लिए तय न्यूनतम राशि से कम है, तो आपको अंतर की रकम खुद भरनी होगी. अगर आपका फंड तय सीमा से ज्यादा है, तो अतिरिक्त रकम आपको वापस मिल जाएगी. UPS के तहत डीए और डीआर यूपीएस में सरकार का योगदान 14 फीसदी से बढ़कर 18.5 फीसदी हो जाएगा, जबकि कर्मचारी का योगदान बेसिक वेतन और महंगाई भत्ता का 10 फीसदी ही रहेगा. महंगाई राहत (DR) की गणना उसी तरह की जाएगी जैसे वर्तमान कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) की जाती है और यह केवल तब ही दी जाएगी जब भुगतान शुरू होंगे. रिटायरमेंट … Read more

भारत से टकरा सकता है विनाशकारी एस्टेरॉयड 2024 YR4, वैज्ञानिकों ने खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया

वॉशिंगटन  एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था कि एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका करीब 1 प्रतिशत है। लेकिन अब खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है। खतरे की संभावना का लगातार बढ़ना वैज्ञानिकों को भी लगातार परेशान कर रहा है। सबसे परेशान करने वाली बात ये है कि कि इसकी स्पीड क्या है और वास्तविक आकार क्या है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका आकार 200 मीटर तक हो सकता है। हालांकि नासा के वैज्ञानिकों ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 के संभावित असर वाले क्षेत्रों की पहचान करनी शुरू कर दी है ताकि अगर वास्तव में टक्कर अवश्यंभावी हो जाए, तो पहले से ही लोगों को बचाने की कोशिशें शुरू की जा सकें। नासा के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि अगर एस्टेरॉयड 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है तो ये पूरे शहर को नष्ट कर सकता है। लिहाजा नासा ने एस्टेरॉयड के गिरने को लेकर जो संभावित रास्ता तैयार किया है, उसमें भारत समेत कई घनी आबादी वाले देश आते हैं। वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि अगर ये एस्टेरॉयड पृथ्वी पर गिरता है तो ये 500 परमाणु बमों से ज्यादा शक्तिशाली ऊर्जा का निर्माण कर सकता है। लिहाजा विनाश का स्तर क्या हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 के टकराने की आशंका बढ़ी नासा के कैटालिना स्काई सर्वे प्रोजेक्ट के इंजीनियर डेविड रैंकिन ने उत्तरी दक्षिण अमेरिका से लेकर प्रशांत महासागर, दक्षिणी एशिया, अरब सागर और उप-सहारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक इस एस्टेरॉयड के गिरमे के जोखिम गलियारे की पहचान की है। इसके अलावा जिन देशों में एस्टेरॉयड के गिरने की संभावना सबसे ज्यादा जताई गई है उनमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इथियोपिया, सूडान, नाइजीरिया, वेनेजुएला, कोलंबिया और इक्वाडोर शामिल हैं। वैज्ञानिक रैंकिन ने कहा है कि “हालांकि प्रभाव की संभावना कम है, लेकिन अगर 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है, तो हम संभावित परिणामों को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते।” एस्टेरॉयड 2024 YR4 को पिछले साल दिसंबर में खोजा गया था। जिसके बाद नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के वैज्ञानिकों के लिए ये एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। शुरुआती अनुमानों में टकराव की संभावना 1% थी, जो अब बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है। जिसे काफी खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके आकार और स्पीड के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है। सबसे ज्यादा खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया एस्टेरॉयड 2024 YR4 से संभावित खतरे को देखते हुए इसे टोरिनो स्केल पर तीन की रेटिंग दी गई है। टोरिनो स्केल पृथ्वी के पास होने वाले जोखिम को मापता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 को इतिहास में उस स्तर तक पहुंचने वाले एस्टेरॉयड के साथ रखा गया है, जिसने सबसे ज्यादा जोखिम पैदा की थी। वो है कुख्यात ‘गॉड ऑफ कैओस’ एस्टेरॉयड 99942 अपोफिस। डेटा यह भी संकेत मिले हैं, कि अगर ऐस्‍टरॉयड वाकई पृथ्वी से टकराता है, तो इसके स्तर स्थानीय हो सकते हैं। इस ऐस्‍टरॉयड का व्यास उस ऐस्‍टरॉयड के बराबर है, जो साल 1908 में साइबेरिया में तुंगुस्का घटना का कारण बना था। उस वक्त जब ऐस्‍टरॉयड टकराया था, तो करीब 2 हजार वर्ग किलोमीर का जंगल नष्ट हो गया था। उस टक्कर में 80 मिलियन से ज्यादा पेड़ उखड़ गये थे। विस्फोट का बल 10-15 मेगा टन टीएनटी के बराबर होने का अनुमान लगाया गया था। अभी तक जो आंकड़े उपलब्ध हो पाएं हैं, उससे पता चलता है, कि ये ऐस्‍टरॉयड 22 दिसंबर 2032 को पृथ्वी के करीब एक लाख 6 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जिसमें मार्जिन ऑफ एरर 1.6 मिलियन किलोमीटर हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दूरी पर, यह पश्चिमी मध्य अमेरिका से लेकर उत्तरी दक्षिण अमेरिका, फिर मध्य अटलांटिक महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए भारत तक पहुंचने वाली एक संकीर्ण पट्टी में पृथ्वी से टकरा सकता है।

कुंभ के लिए स्पेशल वंदे भारत का ऐलान, नई दिल्ली से वाराणसी प्रयागराज होते हुए चलेगी, 17 फरवरी तक संचालित होगी

नई दिल्‍ली  कुंभ जाने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी। रेलवे ने एक स्‍पेशल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है। कुंभ में भीड़ कम करने में भी ट्रेन मददगार होगी। यह स्‍पेशल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन (ट्रेन नंबर 02252) नई दिल्ली से वाराणसी चलेगी। ट्रेन प्रयागराज में रुकते हुए जाएगी। यह ट्रेन 15, 16 और 17 फरवरी को चलेगी। इसका मकसद वीकेंड पर कुंभ मेले जाने वाले यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालना है। क्‍या होगी टाइम‍िंंग? ट्रेन नई दिल्‍ली (NDLS) से सुबह 5:30 बजे छूटेगी। इसका प्रयागराज (PRYJ पहुंचने का समय दोपहर 12:00 बजे है। दोपहर 2:20 बजे यह वाराणसी (BSB) पहुंचेगी। वापसी में BSB से चलने का समय दोपहर 3:15 बजे है। प्रयागराज पहुंचने का समय शाम 5:20 बजे है। यह रात 11:50 बजे नई दिल्‍ली पहुंचेगी। कुंभ मेले के लिए यात्रियों की सुविधा के लिए स्‍पेशल वंदे भारत ट्रेन 15 फरवरी 2025 से चलेगी। इसके चलने का समय और दिन ऊपर बताए गए समय के अनुसार ही रहेंगे। लाखों लाख श्रद्धालु हर दिन कुंभ में हिस्‍सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। कुंभ एक विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है जो हर 12 साल बाद भारत के चार पवित्र स्थानों में से एक में आयोजित किया जाता है। 2025 में कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित हो रहा है। यह एक ऐसा अवसर होता है जब करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर स्नान करने के लिए जुटते हैं। रेलवे की अन्य तैयारियां: कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए रेलवे अतिरिक्त विशेष ट्रेनों, प्लेटफॉर्म प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है. मुख्य रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, मेडिकल सुविधा और विशेष गाइडेंस केंद्र स्थापित किए गए हैं. प्रयागराज, वाराणसी और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त रेलवे कर्मियों और आरपीएफ जवानों की तैनाती की गई है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कुंभ के दौरान ट्रेन सेवाओं में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी. टिकट बुकिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाने की योजना भी बनाई गई है. यात्रियों से रेलवे की अपील: रेलवे ने कुंभ मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे टिकट पहले से बुक कर लें और यात्रा के दौरान रेलवे की सुरक्षा एवं स्वच्छता निर्देशों का पालन करें. साथ ही स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ न बढ़ाने और सुविधाओं का सुव्यवस्थित उपयोग करने की सलाह दी गई है. उत्तर रेलवे के इस विशेष वंदे भारत ट्रेन के संचालन से कुंभ यात्रियों को तेज़, सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा और भी आसान हो जाएगी.

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