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5 साल बाद RBI से आई गुड न्यूज, रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती

नई दिल्ली  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज (7 फरवरी 2025) खत्म हो गई है और आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा आज सुबह 10 बजे कमेटी के फैसले का ऐलान कर दिया। तीन दिन तक चली इस मीटिंग में उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया गया। 2020 में COVID-19 के बाद आज आरबीआई रेपो रेट में 25bps की कटौती कर दी है। आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले मई, 2020 में कोविड-19 महामारी के समय रेपो दर को 0.40 प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत किया गया था। फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के जोखिमों से निपटने के लिए आरबीआई ने मई, 2022 में दरों में बढ़ोतरी करनी शुरू की थी और यह सिलसिला फरवरी, 2023 में जाकर रुका था। रेपो दर दो साल से 6.50 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। आरबीआई के गवर्नर ने संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की बैठक में लिए गये निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि छह सदस्यीय समिति ने आम सहमति से रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि बैठक में इकोनॉमी डेवलपमेंट को लेकर चर्चा की गई. गवर्नर ने आगे कहा कि हमने बैठक में फैसला किया है कि रेपो रेट को घटाया जा रहा है. अब रेपो रेट 6.50 से घटाकर 6.25 किया जा रहा है. रेपो रेट में कटौती के बाद अब आपके लोन की ईएमआई कम हो जाएगी. गवर्नर ने कहा कि ग्‍लोबल इकोनॉमी चुनौतियों से गुजर रही है. साथ ही वैश्विक स्‍तर पर महंगाई भी बढ़ रही है. वहीं फेडरल रिजर्व बैंक ने रेट में कई बार कटौती की है. साथ जियो पॉलिटिकल टेंशन भी बढ़ रहा है. जिस कारण दुनिया भर की इकोनॉमी पर असर पड़ रहा है. भारतीय रुपया अभी प्रेशर में है. रिजर्व बैंक के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है. वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल GDP ग्रोथ 6.75%, अप्रैल-जून 2025 तिमाही 6.7%, जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में 7% रहने का अनुमान है. वहीं अक्टूबर-दिसंबर 2025 और जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में इसके 6.5-6.5% रहने का अनुमान है. महंगाई को और कम करने का लक्ष्‍य गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि इस वित्त वर्ष 4.8 फीसदी महंगाई रहने का अनुमान है. वहीं आगे महंगाई दर और कम हो जाएगी. दिसंबर में रिटेल महंगाई दर और थोक महंगाई दर, दोनों में बदलाव हुआ. रिटेल महंगाई दर 4 महीने के निचले स्तर 5.22% पर है. वहीं थोक महंगाई दर बढ़कर 2.37% पर पहुंच गई है. नवंबर में यह 1.89% थी. गवर्नर ने कह कि रिजर्व बैंक ने कहा कि सेकेंड्री मार्केट में गवर्नमेंट सिक्‍योरिटीज में ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक सेबी द्वारा रजिस्‍टर्ड आरबीआई के प्‍लेटफॉर्म का उपयोग कर स‍कते हैं.

भारत मंडपम में 10 फरवरी को होने वाली परीक्षा पर चर्चा के लिए छात्र भी बेहद उत्साहित, पीएम मोदी देंगे टिप्स

नई दिल्ली ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम नए कलेवर में छात्रों के सामने होगा। सवालों का जवाब सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही नहीं देंगे, बल्कि देश के कई दिग्गज भी देंगे। पहले पीएम मोदी छात्रों को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और तनावमुक्त रहने के टिप्स देते थे, लेकिन इस बार फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, अभिनेता विक्रांत मैसी, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर और खेल जगत के कई दिग्गज भी जरूरी टिप्स देते नजर आएंगे। दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में 10 फरवरी को होने वाली परीक्षा पर चर्चा के लिए छात्र भी बेहद उत्साहित हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), परीक्षा से जुड़े तनाव को सीखने के उत्सव में बदलने की पहल है। इसके 8वें संस्करण में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। वर्ष 2018 में परीक्षा पे चर्चा एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसने वर्ष 2025 में अपने 8वें संस्करण के लिए 3.56 करोड़ पंजीकरण प्राप्त किए हैं। ये 7वें संस्करण में 2.26 करोड़ पंजीकरण हुए थे, जो 1.3 करोड़ पंजीकरणों की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। परीक्षा पे चर्चा न केवल एक लोकप्रिय कार्यक्रम बन गया है, बल्कि यह एक “जन आंदोलन” में भी बदल गया है। यह पूरे देश में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ गहराई से जुड़ गया है। परीक्षा के तनाव को दूर करने और छात्रों को परीक्षाओं को एक त्योहार – “उत्सव” के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। परीक्षा पे चर्चा में अधिकतम भागीदारी मानसिक सेहत और समग्र शिक्षा के महत्व के बारे में बढ़ती जागरूकता और स्वीकृति को दर्शाती है। कार्यक्रम का इंटरैक्टिव प्रारूप, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और प्रधान मंत्री के बीच खुला संवाद शामिल है, ने इसकी सफलता में और योगदान दिया है। परीक्षा पे चर्चा को “जन आंदोलन” के रूप में और मजबूत करने के लिए 12 जनवरी 2025 (राष्ट्रीय युवा दिवस) से 23 जनवरी 2025 (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती) तक स्कूल स्तर पर कई आकर्षक गतिविधियां आयोजित की गईं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को परीक्षा पे चर्चा को एक उत्सव के रूप में मनाने में शामिल करना था। कुल 1.42 करोड़ छात्र, 12.81 लाख शिक्षक और 2.94 लाख स्कूलों ने भाग लिया। ये गतिविधियां तनाव को कम करने, ध्यान केंद्रित करने और परीक्षा के दौरान और उसके बाद प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई थीं। छात्रों को खो-खो और कबड्डी जैसे स्वदेशी खेलों, छोटी दूरी की मैराथन, रचनात्मक मीम प्रतियोगिता, आकर्षक नुक्कड़ नाटक प्रदर्शनों और आकर्षक पोस्टर बनाने सहित विविध प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें छात्र प्रशंसापत्रों के माध्यम से अपने अनुभव साझा करने, छात्र-नेतृत्व वाली चर्चाओं में भाग लेने और विश्राम और मन की शांति विकसित करने के लिए योग और ध्यान सत्रों में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए नाटकों का आयोजन किया, कार्यशालाएं आयोजित कीं तथा अपने विचार साझा करने के लिए विशेष अतिथियों को आमंत्रित भी किया।  

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा का पुनःनिर्माण में निकल जाएंगा पसीना! सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च

गाजा  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पर कब्जा करने और उसे जन्नत बनाने की बात कही है। ट्रंप के बयान ने दुनिया को चौंका दिया है। अरब देशों के साथ साथ अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी उनके प्लान की निंदा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को ‘मध्य पूर्व का रिवेरा’ बनाने और ‘गाजा को फिर से महाने बनाने’ का अपना प्लान पेश किया है। जिसके तहत गाजा में रहने वाले करीब 23 लाख लोगों को उन्होंने मिस्र, जॉर्डन और अरब देशों में भेजने की पेशकश की है। हालांकि, उनके प्लान को अरब देशों ने फौरन ही खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर विवाद जरूर हो रहे हैं, लेकिन एक सवाल भी उठ रहे हैं कि इजरायली बमबारी में ध्वस्त हो चुके गाजा का फिर से निर्माण कैसे होगा? डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर शक करने वाले लोगों का कहना है, कि असल में ये गाजा में रहने वाले लोगों के सफाए के लिए बनाया गया ये एक फॉर्मूला है। लोगों का कहना है कि ट्रंप का प्लान असल में गाजा पर कब्जा करना है। लेकिन सवाल ये है, कि गाजा को जन्नत बनाने में कितने साल लगेंगे? और गाजा स्वर्ग की तरह दिखे, ऐसा होने में जो खर्च आएगा, उसे कौन वहन करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए जो प्लान किया है, उसे पूरा करने में कई सालों का वक्त लगेगा और अरबों डॉलर का खर्च आएगा। गाजा को फिर से बनाने में कितने साल लगेंगे? गाजा में जिस तरह की बर्बादी फैली है, उसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि पुननिर्माण में कम से कम 20 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। गाजा को साफ करने में अमेरिका को लाखों टन मलबा पट्टी से बाहर निकालना होगा। मलबे को निकालने में ही कई सालों का वक्त लग जाएगा। सवाल ये भी हैं, कि आखिर इतना मलबा कहां रखा जाएगा? ब्रिटिश सेना के कर्नल रिचर्ड केम्प ने द सन की रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के प्लान का समर्थन किया है। उन्होंने इसे एक तार्किक योजना बताया है। उन्होंने कहा, कि “गाजा के पुनर्निर्माण में कम से कम एक दशक का समय लगेगा।” केम्प ने द सन की रिपोर्ट में कहा है, कि “गाजा को एक ऐसी जगह में बदलने के लिए, जहां लोग फिर से रह सकें, इसमें शायद कम से कम एक दशक लगने वाला है।” उन्होंने कहा, कि “इसमें शायद अरबों डॉलर खर्च होंगे, लेकिन मध्य पूर्व में कई अरब देश हैं, और वो इस प्रोजेक्ट में मदद दे सकते हैं।” हालांकि, बुधवार को व्हाइट हाउस ने कहा है, कि ट्रंप ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव के अपने प्रस्ताव के तहत गाजा पट्टी में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, कि ट्रंप का मानना है कि “क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए” गाजा के पुनर्निर्माण में संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल होना चाहिए। गाजा पट्टी में कितनी बर्बादी फैली है? यूनाइटेड नेशंस ने अनुमान लगाा है, कि गाजा में करीब 50 मिलियन टन मलबा फैला है, जिसे साफ करने में 21 सालों का वक्त लग सकता है। अनुमान में कहा गया है, कि गाजा पट्टी से सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। केम्प ने कहा कि, “मेरा मानना है, कि गाजा में लोगों को ट्रंप के प्लान के मुताबिक अलग रखा जाए, सुरंगों को साफ किया जाए, हथियारों को हटाया जाए और फिर एक नये गाजा का निर्माण किया जाए। हवाई अड्डे का निर्माण हो, बंदरगाह का निर्माण हो और ये सभी के लिए बेहतर होगा।” लेकिन असल सवाल ये है, कि क्या गाजा से लोगों को निकालना संभव है? डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है, कि गाजा के लोगों को निकालकर अस्थाई तौर पर मिस्र और जॉर्डर में बसाया जाए, जिसे दोनों देशों ने खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि “गाजा के लोगों ने मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं देखा है और अगर नये गाजा का निर्माण होगा, तो कौन होगा जो वापस नहीं जाना चाहेगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, गाजा “मध्य पूर्व का रिवेरा” होगा। लेकिन, सवाल ये है कि क्या ऐसा संभव है?

अमेरिका ने सैन्य विमान से बेड़ियों में बांधकर भारतीय नागरिकों को वापस भेजा, ये भारत का अपमान है: दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़ अमेरिकी सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर अमेरिका में रह रहे भारतीयों को हथकड़ी, बेड़ियों में जकड़कर सैन्य विमानों से जबरन निर्वासित किए जाने की खबरों पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अमेरिका ने सैन्य विमान से बेड़ियों में बांधकर भारतीय नागरिकों को वापस भेजा। ये हर भारतीय और भारत का अपमान है। उन्होंने इस विषय पर आज संसद भवन परिसर में INDIA गठबंधन के सांसदों के साथ बीजेपी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया व शून्यकाल का नोटिस दिया। नोटिस में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार द्वारा अवैध दस्तावेजों के आधार पर बड़े पैमाने पर भारतीय नागरिकों को अपमान जनक ढंग से हथकड़ी व बेड़ियों में जकड़कर सैन्य विमानों से अमेरिका से निर्वासित किया जा रहा है। जिससे विशेष रूप से हरियाणा के नौजवान बड़ी संख्या में हैं। ये युवा रोज़गार की तलाश में अपनी ज़मीन-जायदाद बेचकर, जान जोखिम में डालकर वहाँ गये लेकिन अब आर्थिक बर्बादी और सामाजिक विस्थापन का सामना कर रहे हैं। केंद्र की बीजेपी सरकार बार-बार दावा करती रही है कि अमेरिका के राष्ट्रपति पीएम के दोस्त हैं लेकिन अमेरिका का राष्ट्रपति बनते ही पीएम के दोस्त ने बड़ी तादाद में भारतीयों को अपमानजनक तरीके से जबरन निर्वासित कर दिया। उन्होंने मांग करी कि प्रधानमंत्री तुरंत अमेरिकी सरकार से बात करें ताकि वर्षों से अमेरिका में रह रहे भारतीयों को अपमानजनक ढंग से न निकाला जाए। इसके अलावा केंद्र सरकार निर्वासन का सामना कर रहे भारतीयों के लिए कानूनी सहायता हेतु अमेरिका के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करें। तत्काल पुनर्वास प्रदान करें, जिसमें वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर शामिल हों। प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए एक कानूनी सहायता कक्ष स्थापित किया जाए। उन्होंने बताया कि जुलाई, 2024 के बजट सत्र में इसी संसद में उन्होंने बेरोजगारी की हताशा में अवैध रूप से बिना वीजा के, जोखिम उठाकर डंकी के रास्ते विदेश जाने वाले नौजवानों की समस्याओं को उठाकर सरकार से सवाल किया था कि क्या विदेश मंत्रालय को इस बात की जानकारी है और मंत्रालय उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील है? इस पर जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने पल्ला झाड़ते हुए कहा था कि जिनको विदेश जाना ही है और अगर इसके लिए वे तमाम तरह के अन्य रास्ते अपनाते हैं तो सरकार जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर उस दिन मेरी बात को गंभीरता से लेती तो आज ये दिन न देखना पड़ता। दीपेन्द्र हुड्डा ने दोहराया कि अमेरिका से अपमानजनक निर्वासन की मार झेल रहे नौजवानों की दुर्दशा के लिए बीजेपी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार हैं। यदि सरकार नौजवानों को यहीं अपने देश में रोजगार उपलब्ध कराती तो वे अपना घर-बार छोड़कर विदेश क्यों जाते। डंकी के रास्ते विदेश जाने वाले सबसे ज़्यादा नौजवान हरियाणा के हैं। “बिना पर्ची बिना खर्ची” का fake नारा देने वालों ने प्रदेश में “बिना रोज़ी बिना रोटी” की परिस्थितियां बना दी है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में भयंकर बेरोजगारी का आलम है। जिसके कारण यहाँ के युवा अपनी सारी जमीन-जायदाद बेचकर, लाखों रुपये कर्जा लेकर भविष्य सँवारने की आस में विदेशों का रूख कर लिया। इन युवाओं ने अपनी जमीन जायदाद बेचकर सारा पैसा कबूतरबाजों को दे दिया। अब इनके पास कुछ नहीं बचा और भूखे मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कस्टम एंड बार्डर पेट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले करीब एक वर्ष में 97000 भारतीय नागरिक मेक्सिको बार्डर से पनामा के जंगलों के रास्ते या कनाडा के रास्ते अमानवीय परिस्थितियों से गुजरते हुए अमेरिका में पहुंचे और वहाँ उन्हें पकड़ लिया गया। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक बेरोजगारी और इसके कारण हो रहे पलायन और अब जबरन निर्वासन के लिये पूरी तरह से सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। सरकार युवाओं को रोजगार दे नहीं रही। आज प्रदेश में बेरोजगारों की फौज खड़ी हो गयी है। इस सरकार ने अग्निपथ जैसी योजना लाकर युवाओं के फौज में जाने का रास्ता भी बंद कर दिया। दो दर्जन से ज्यादा भर्ती घोटाले, कैश फॉर जॉब, पेपर लीक के बाद इक्का दुक्का नौकरी निकली भी तो उसमें भी ज्यादातर हरियाणा के बाहर के युवाओं की भर्ती हो रही है।

नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के ‘गाजा प्लान’ को कहा-मुझे लगता है कि इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए

वाशिंगटन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का समर्थन किया जिसमें गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए वहां से फिलिस्तीनियों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव शामिल है। उन्होंने इस योजना को ‘असाधारण’ बताया। रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू ने अमेरिकी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “यह पहला अच्छा विचार है जो मैंने सुना है। यह एक उल्लेखनीय विचार है। मुझे लगता है कि इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए – क्योंकि यह सभी के लिए एक अलग भविष्य बनाएगा।” इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू का यह बयान मंगलवार को व्हाइट हाउस में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप की ओर से पेश किए गए विचार का पहला पूर्ण समर्थन है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा पट्टी पर कब्जा करने और इसके पुनर्विकास का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, “अमेरिका गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा । हम इसे विकसित करेंगे। गाजा में मौजूद सभी खतरनाक बमों और अन्य हथियारों को निष्क्रिय करेंगे, जगह को समतल करने और तबाह हो चुकी इमारत को हटाएंगे।’’ ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका “एक ऐसा आर्थिक विकास करेगा जो क्षेत्र के लोगों के लिए असीमित संख्या में नौकरियों और आवास की आपूर्ति करेगा।” मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा कि क्या गाजा छोड़ने वाले फिलिस्तीनियों को भविष्य में वहां फिर से बसने की अनुमति दी जाएगी। तो जवाब में उन्होंने सवाल किया, “आप वहां किसे रहते हुए देखते हैं?” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “वहां रहने वाले लोग, दुनिया के लोग होंगे इसमें फिलिस्तीनी भी शामिल होंगे।’ हालांकि जब इस बयान पर हंगामा हुआ तो व्हाइट हाउस ने बाद में सफाई दी। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन का लक्ष्य केवल फिलिस्तीनियों को ‘अस्थायी रूप से’ हटाना है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है… कि वह क्षेत्र में हमारे साझेदारों – विशेष रूप से मिस्र और जॉर्डन – से अपेक्षा करते हैं कि वे फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अस्थायी रूप से स्वीकार करें ताकि हम उनके घरों का पुनर्निर्माण कर सकें।” लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुनर्निर्माण के लिए फिलिस्तीनियों को अस्थायी रूप से गाजा से बाहर ले जाने की जरुरत है क्योंकि यह अभी एक विध्वंस स्थल है और यह किसी भी इंसान के रहने योग्य जगह नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने ‘डेड बॉडी के साथ यौन संबंध बनाना ‘बलात्कार’ अपराध की दलील खारिज की

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि दंड कानून नेक्रोफीलिया को अपराध नहीं मानते, इसलिए वह हाईकोर्ट के आंशिक बरी करने के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जिसमें आरोपी ने मृतक की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ यौन संबंध बनाए थे। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को मृत शरीर के साथ यौन संबंध बनाने के लिए बलात्कार के आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन हत्या के अपराध के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी। यहां राज्य सरकार ने वर्तमान एसएलपी दायर की।  हाई कोर्ट ने शख्स को रेप के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन हत्या की सजा कायम रही। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में नेक्रोफिलिया (Necrophilia) यानी शव के साथ कामुकता को अपराध नहीं माना गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में कर्नाटक सरकार की ओर से अडिशनल एडवोकेट जनरल अमन पंवार ने तर्क दिया कि IPC की धारा 375(c) में ‘शरीर’ शब्द को मृत शरीर भी शामिल माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि रेप की परिभाषा के तहत प्रावधान में कहा गया है कि यदि कोई महिला सहमति नहीं दे सकती है तो इसे बलात्कार माना जाएगा। इसी तर्क के आधार पर मृत शरीर भी सहमति नहीं दे सकता, इसलिए यह अपराध बलात्कार की श्रेणी में आना चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि नेक्रोफिलिया भारतीय दंड संहिता के तहत कोई अपराध नहीं है, इसलिए वह हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या कहा था? कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मृत शरीर के साथ यौन संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता, क्योंकि IPC की धारा 375 और 377 केवल जीवित मनुष्यों पर लागू होती है। धारा 375 और 377 का गहराई से अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि मृत शरीर को ‘व्यक्ति’ या ‘मानव’ नहीं माना जा सकता। इसलिए, इन धाराओं के तहत कोई अपराध नहीं बनता और आरोपी को IPC की धारा 376 के तहत सजा नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि नेक्रोफिलिया एक गंभीर समस्या है और संसद को इसे अपराध घोषित करने के लिए कानून बनाना चाहिए। एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी दिसंबर में कहा था कि किसी मृत महिला या बच्ची के साथ यौन अपराध किया जाता है तो उसे IPC की धारा 375 (बलात्कार) या POCSO अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। कानून में बदलाव की दरकार अस्पतालों और मुर्दाघरों में युवतियों के शवों के साथ यौन संबंध की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन भारत में ऐसे मामलों के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। नेक्रोफिलिया एक मनो-यौन विकार (psychosexual disorder) है। यह सही समय है कि केंद्र सरकार मृत व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए IPC की धारा 377 में संशोधन करे और नेक्रोफिलिया को अपराध घोषित करे, जैसा कि यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में किया गया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता में संशोधन की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि मृत व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने किया आगाह, धिक सोडियम वाले नमक का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

नई दिल्ली अधिक सोडियम वाले नमक का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे लेकर चेताया है। इससे पहले भी संगठन ने गाइडलाइन जारी करके बताया था कि एक दिन में औसतन पांच ग्राम नमक ही खाना चाहिए। सोडियम युक्त नमक के लिए डब्ल्यूएचओ ने नई गाइडलाइन जारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह सुझाव भारतीयों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने लोगों से कम सोडियम वाले नमक को खाने की अपील की है। गाइडलाइन में खाने में सामान्य टेबल साल्ट की जगह पर पोटेशियम युक्त कम सोडियम वाले नमक के उपयोग की बात कही गई है। यह सिर्फ वयस्कों और स्वस्थ व्यक्तियों के लिए कहा गया है। वहीं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किडनी से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को सामान्य नमक खाने की सलाह दी गई है। नमक का इस्तेमाल न ज्यादा करना चाहिए और न ही कम करना चाहिए, इसका संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक दिन में व्यक्ति को मात्र पांच ग्राम नमक खाना चाहिए, वहीं दो ग्राम प्रतिदिन सोडियम की खपत सही होती है। लेकिन भारत में लोग औसतन 10 ग्राम तक नमक को हर दिन खाते हैं। नमक का इस्तेमाल अधिक करने से कई सारी शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी डब्ल्यूएचओ की इस सिफारिश की तारीफ की है। उनका कहना है कि कम सोडियम युक्त नमक खाना भारतीय लोगों के लिए काफी उपयोगी है क्योंकि भारतीय स्वाद के मामले में समझौता करने से अमूमन बचते हैं और इस चक्कर में अधिक नमक का सेवन करते हैं। बता दें कि अधिक नमक खाना कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। इससे ब्लड प्रेशर में बढ़ोतरी, हार्ट अटैक, दिल से जुड़ी कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अधिक नमक खाना किडनी, लिवर और खून पर भी असर डालता है। पेट और त्वचा की समस्या, डिहाइड्रेशन और हड्डियों के कमजोर होने की समस्याएं भी होने लगती हैं। 27 जनवरी 2025 को जारी किए गए दिशानिर्देश के मुताबिक लो सोडियम सॉल्ट सब्सटिट्यूट (एलएसएसएस) नियमित नमक का अच्छा विकल्प है। इनमें सामान्य नमक की तुलना में कम सोडियम होता है और अक्सर इसमें पोटेशियम क्लोराइड भी होता है ताकि सामान्य नमक जैसा स्वाद प्राप्त हो सके।  

मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा बीते 10 साल के दौरान मोबाइल फोन के कॉल दरों में 94 फीसदी तक की गिरावट आई

नई दिल्ली  संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार कहा कि दूरंसचार कंपनियों ने 5 जी सेवाओं के लिए 4.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है और इस निवेश की भरपाई के लिए दूरसंचार टैरिफ में 10 प्रतिशत की वृद्धि किये जाने के बावजूद भारत पूरी दुनिया में अब भी सबसे किफायती टेलीकॉम सेवाएं दे रहा है। श्री सिंधिया ने प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वर्ष 2014 में एक मिनट कॉल की कीमत औसतन 50 पैसे थी, जबकि 2025 में यह 94 प्रतिशत कम होकर तीन पैसे प्रति मिनट है। इसी तरह से वर्ष 2014 में एक जीबी डेटा की कीमत 270 रुपये थी, जबकि 2025 में यह 93 प्रतिशत कम होेकर 9.70 रुपये प्रति जीबी है। ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि साल 2014 से मोबाइल फोन कॉल दरों में 94 फीसदी की कमी आई है। सिंधिया ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश में पहले 90 करोड़ मोबाइल फोन उपभोक्ता थे जो अब बढ़कर 116 करोड़ हो गए हैं। इंटरनेट की पहुंच बढ़ी और दर घटी उन्होंने कहा, ‘‘…इंटरनेट पहुंच की बात करें तो 2014 में 25 करोड़ उपभोक्ता थे और आज यह संख्या 97 करोड़ है।’’ मंत्री ने कहा कि जब उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती है तो आवश्यक है कि शुल्क दरों की निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साल 2014 में जहां एक मिनट की कॉल की दर 50 पैसे थी, वहीं आज यह घट कर तीन पैसे रह गई है। इस प्रकार दर में 94 फीसदी की गिरावट आई है। सिंधिया ने कहा कि कि 2014 में डेटा यानी इंटरनेट 270 रुपये प्रति जीबी थी जो अब घटकर 9.70 रुपये प्रति जीबी हो गई है जो ‘टैरिफ’ में 93 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। दुनिया में सबसे किफायती देश उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में इंटरनेट और कॉल दरों के मामले में सबसे किफायती देश है। उन्होंने कहा कि ‘टैरिफ’ में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, ऐसा देश में 5जी सेवा के लिए किए गए निवेश के कारण हुआ है। उन्होंने सदन को बताया कि काफी तेज गति से 5जी सेवा शुरू की गयी है और इसमें करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। शुल्क वृद्धि सही उन्होंने शुल्क दरों में वृद्धि को सही ठहराते हुए कहा कि निवेश पर ‘रिटर्न’ मिलना चाहिए। श्री सुरजेवाला ने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों ने टैरिफ में वृद्धि करके 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है। श्री सिंधिया ने कहा कि पिछले 10 वर्षाें में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। टेलीकॉम कंपनियां रिकार्ड 22 महीने में देश के 98 प्रतिशत जिलों और 82 प्रतिशत आबादी को 5 जी के दायरे में लायी है। इसके लिए कंपनियों ने 4.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। मंत्री ने कहा कि कंपनियों को अपने निवेश पर रिटर्न भी चाहिए होता है। इसके लिए टैरिफ में 10 प्रतिशत की बढोतरी की गयी है। इससे उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 2590 ऐसे गांवों की पहचान की गयी है जहां दूरसंचार सेवाएं पहुंचायी जा रही है। इसके लिए 15 राज्यों में 1716 टावर लगाये जा रहे हैं। 901 गांवों में टावर लगाये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी कुछ क्षेत्रों में टावर लगाये जा रहे हैं लेकिन राज्य सरकार का पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार टावर लगाने के लिए भूमि भी उपलब्ध कराने में देरी कर रही है। इसके साथ ही दूरस्थ और पहाड़ी एवं जंगली क्षेत्रों में टावर लगाना कठिन होता है।

शेख मुजीबुर रहमान के आवास पर अब चला बुलडोजर, एक दिन पहले ही यहां तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी

ढाका बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के आवास पर अब बुलडोजर चल गया है। एक दिन पहले ही यहां तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी। खबरें हैं कि मौके पर एक फिलिस्तीनी झंडा भी देखा गया है। खास बात है कि सोशल मीडिया पर पहले ही ‘बुलडोजर जुलूस’ की अपील की जा रही थी। यह सब उस दौरान हुआ, जब शेख हसीना लोगों को संबोधित करने की तैयारी कर रही थीं। गुस्साई भीड़ ने शेख मुजीबुर रहमान के धानमंडी इलाके में स्मारक और आवास पर जमकर तोड़फोड़ की थी। साथ ही आवास में आग लगा दी गई थी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अब गुरुवार सुबह शेख के आवास पर बुलडोजर चला दिया गया है। साथ ही मौके पर एक युवक को फिलिस्तीन का झंडा भी लहराते हुए देखा गया है। भीड़ शेख रहमान की बनाई आवामी लीग पर बैन की मांग कर रही है। तोड़फोड़ और आगजनी पीटीआई भाषा के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि राजधानी के धानमंडी इलाके में स्थित घर के सामने हजारों लोग शाम से ही एकत्र हो गए थे। इस घर को पहले एक स्मारक संग्रहालय में बदल दिया गया था। सोशल मीडिया पर “बुलडोजर जुलूस” का आह्वान किया गया था, क्योंकि हसीना स्थानीय समयानुसार रात नौ बजे अपना संबोधन देने वाली थीं। हसीना का संबोधन आवामी लीग की अब भंग हो चुकी छात्र शाखा छात्र लीग द्वारा आयोजित किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देशवासियों से वर्तमान शासन के खिलाफ संगठित प्रतिरोध करने का आह्वान किया। हसीना ने स्पष्ट रूप से नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘उनके पास अभी भी इतनी ताकत नहीं है कि वे राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और उस स्वतंत्रता को बुलडोजर से नष्ट कर सकें, जिसे हमने लाखों शहीदों के जीवन की कीमत पर अर्जित किया है।’ उन्होंने कहा, ‘वे इमारत को ध्वस्त कर सकते हैं, लेकिन इतिहास को नहीं… लेकिन उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि इतिहास अपना बदला लेता है।’

शरणार्थियों ने भारत की नागरिकता मिलने के बाद पहली बार दिल्ली चुनाव में वोट डाला, तो तो छलके आंसू

नई दिल्ली लोकतंत्र के महापर्व में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों ने भी बुधवार को दिल्ली में वोट की आहुति दी। उनकी उंगली पर जैसे ही भारतीय होने की स्याही लगी तो चेहरे खिलने के साथ ही आंसू छलक उठे। इन शरणार्थियों ने भारत की नागरिकता मिलने के बाद पहली बार दिल्ली चुनाव में वोट डाला है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर से वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश के महाकुम्भ में मार्च में वह दिल्ली आए थे। किसी कारण वह महाकुम्भ में नहीं पहुंच सके। इस दौरान उन्होंने तय कर लिया था कि जो यातनाएं पाकिस्तान में सही थी वह अब नहीं सहेंगे और दोबारा नहीं लौटेंगे। उन्होंने भारत सरकार को उस समय अपना वीजा अवधि आगे बढ़ाने की मांग करते हुए पत्र लिखे। भारत में ठहरने के लिए जंतर-मंतर पर कई दिनों तक प्रदर्शन भी किया। इसके बाद मजनू का टीला में वर्ष 2013-2014 से हिंदू शरणार्थी यहां रह रहे हैं। दो सौ लोग मतदाता हैं हिंदू शरणार्थी धर्मबीर बागड़ी ने कहा कि हम बहुत समय से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे थे। चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में मजनू का टीला कैंप में 1009 लोग रह रहे हैं। इनमें से 200 लोगों को अब तक नागरिकता मिल गई है। बुधवार को मतदान का अधिकार मिलने के बाद हमें उम्मीद है कि सभी शरणार्थियों को नागरिकता मिल जाएगी। जल्द ही केंद्र सरकार से मिलकर आभार व्यक्त करेंगे। रामचंद्र बोले- भारत मां ने हमें अपना लिया हिंदू शरणार्थी रामचंद्र ने कहा, गर्व है कि भारत मां ने हमें अपना लिया है। कई शरणार्थियों ने बुधवार को मजनू का टीला के एक सरकारी स्कूल में स्थित मतदान केंद्र में जाकर वोट डाले। पाकिस्तान में न ही सरकार और न ही कोर्ट हिंदुओं के अधिकारों के लिए कोई कदम उठाता है। वहां हमारी बात तक नहीं सुनी जाती थी। वर्ष 1947 से 2013 तक हमारी पिछली पीढ़ियों ने जो यातनाएं झेली, वह अब हम कभी नहीं झेलेंगे। मतदान के अधिकार से हमें सबसे ज्यादा खुशी है। समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी नैनावंती ने बताया कि कैंप में बीते 11 वर्षों से सभी परिवार काफी संघर्षपूर्ण जीवन जी रहे थे। बीते वर्ष एक विभाग से कैंप को तोड़ने को लेकर कार्रवाई के लिए पत्र भी प्राप्त हुआ था। हालांकि, यह मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। हमें उम्मीद है कि अब हमारे मुद्दों और समस्याओं का उचित समाधान होगा। बदलाव महसूस हुआ फरीदाबाद से मजनू का टीला के मतदान केंद्र पर मैंना वोट डालने पहुंची। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह अनुभव बिल्कुल नया था। जब मैं मतदान केंद्र में गई तो मुझे नहीं पता था कि वोट कैसे देना है या कौन सी पार्टी किसका प्रतिनिधित्व करती है, लेकिन जब बटन दबाया तो मुझे बदलाव महसूस हुआ कि आखिरकार अब मुझे आवाज मिली। हिंदू शरणार्थी रेशमा ने कहा कि मेरी उम्र 50 साल है। मैंने जीवन में पहली बार मतदान किया है। मैंने केवल एक उम्मीदवार को चुनने के लिए, बल्कि अपने परिवार के भविष्य के लिए मताधिकार का इस्तेमाल किया।

भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया : डॉ. जितेंद्र सिंह

नईदिल्ली भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता वर्तमान में 8,180 मेगावाट है, जिसे 2031-32 तक 22,480 मेगावाट तक विस्तारित करने की योजना है। गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में दस रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त 10 और रिएक्टरों की योजना प्रगति पर है, जिसमें कोव्वाडा, आंध्र प्रदेश में संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से एक प्रमुख 6 x 1208 मेगावाट का परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कल बुधवार को एक खास मीडिया साक्षात्कार के दौरान दी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस घोषणा की सराहना की कि एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने इस कदम को “क्रांतिकारी” बताया। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार के भविष्यवादी रोडमैप पर जोर उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित “परमाणु मिशन” भारत के ऊर्जा परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी बदलाव लाएगा और परमाणु ऊर्जा को भारत में ऊर्जा के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरने में सक्षम बनाएगा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार के भविष्यवादी रोडमैप पर जोर दिया, जो ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस घोषणा की सराहना की कि एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। इस कदम को “क्रांतिकारी” बताते हुए उन्होंने कहा कि 60-70 वर्षों से यह क्षेत्र गोपनीयता के तहत काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब अधिक खुलेपन और सहयोग के साथ भारत आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप परमाणु ऊर्जा में विकास और नवाचार को गति दे सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद किया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने के फैसले ने उद्योग को बदल दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि परमाणु क्षेत्र इसी तरह के विकास और नवाचार का अनुभव करेगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव आएगा। परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख स्रोत होगी पेट्रोलियम आयात पर भारत की निर्भरता पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख स्रोत होगी। ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा को एक आधारशिला के रूप में मानते हुए सरकार ने विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य घरेलू परमाणु क्षमताओं को बढ़ाना, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों को तैनात करना है। केंद्रीय बजट 2025-26 ने आर एंड डी के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए केंद्रीय बजट 2025-26 ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में आर एंड डी के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए हैं, जिसका लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए, चालू एसआरएम स्थापित करना है। यह 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सस्टेनिबिलिटी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2031-32 तक 22,480 मेगावाट तक विस्तारित करने की योजना डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता, जो वर्तमान में 8,180 मेगावाट है, जिसे 2031-32 तक 22,480 मेगावाट तक विस्तारित करने की योजना है। गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में 10 रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, दस और रिएक्टरों की योजना प्रगति पर है, जिसमें कोव्वाडा, आंध्र प्रदेश में संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से एक प्रमुख 6 x 1208 मेगावाट का परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल है। उन्होंने साझा किया कि 19 सितंबर, 2024 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया, जब राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना की इकाई-7 (आरएपीपी-7) क्रिटिकैलिटी तक पहुँच गई, जो एक नियंत्रित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत का प्रतीक है – यह उपलब्धि भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता को उजागर करती है। डॉ. सिंह ने पुष्टि की कि विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन, परमाणु ऊर्जा विकास को गति देने और 2047 तक भारत को उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी में वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार है।  

सीएम प्रमोद सावंत ने गोवा-प्रयागराज महाकुंभ स्पेशल ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

पणजी मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने गोवा से प्रयागराज के लिए चलने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने गुरुवार सुबह करमाली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, “मैंने गोवा सरकार की ओर से प्रयागराज के लिए एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। मैं सभी श्रद्धालुओं को बधाई देता हूं। 13 और 21 फरवरी को दो और ट्रेनें जाएंगी। अगर और लोग जाएंगे तो हम उनके लिए भी व्यवस्था करेंगे। मैं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को महाकुंभ मेला 2025 में किए गए इंतजामों के लिए बधाई देता हूं। पीएम मोदी ने भी बुधवार को संगम में पवित्र डुबकी लगाई, मैं इसके लिए भी उन्हें बधाई देता हूं।” बता दें कि महाकुंभ में बसंत पंचमी के दिव्य, भव्य अमृत स्नान को लेकर प्रयागराज रेलवे ने 300 से अधिक ट्रेनों का सफल संचालन किया था। मेला प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक, बसंत पंचमी पर्व पर 2.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया था। प्रयागराज रेल मंडल ने तीर्थ यात्रियों के सुगम आवागमन के लिए बसंत पंचमी पर्व के दिन 106 मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। इसके साथ ही लगभग 200 नियमित ट्रेनें भी शहर के सभी स्टेशनों से चलाई गईं, जिससे लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य स्टेशनों तक पहुंचाया गया। 13 जनवरी से प्रारंभ हुए महाकुंभ में अब तक वीवीआईपी मूवमेंट के बावजूद श्रद्धालुओं को संगम स्नान में कहीं कोई दिक्कत नहीं आ रही है। इसी का नतीजा है कि मात्र 24 दिनों में अब तक 39 करोड़ श्रद्धालु संगम में पावन डुबकी लगा चुके हैं। बता दें कि इस बार का महाकुंभ इसलिए भी खास है, क्योंकि यह 144 साल बाद आया है। इसी के चलते लाखों श्रद्धालु रोजाना संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।  

पीएम मोदी राज्यसभा में चर्चा करते हुए कांग्रेस पर किया हमला, कहा- उनके लिए फैमिली फर्स्ट, हमारे लिए नेशन फर्स्ट

नई दिल्ली पीएम मोदी राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। मोदी ने राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में देश की दिशा को लेकर विस्तार से बात की और हम सभी के लिए एक मार्गदर्शन दिया। राष्ट्रपति का अभिभाषण प्रेरणादायक और प्रभावी था। यह सबके लिए भविष्य की दिशा को स्पष्ट करता है। मोदी ने कहा कि इसे हर किसी ने अपनी समझ के हिसाब से अलग-अलग तरीके से समझा। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के बारे में भी कहा और इसे हमारा दायित्व बताया। कांग्रेस का मॉडल फैमिली फर्स्ट- पीएम मोदी कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनसे इस बारे में कोई उम्मीद करना एक बड़ी गलती होगी, क्योंकि उनकी सोच इस दिशा में नहीं जाती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब एक परिवार के लिए समर्पित हो गई है, और उनके लिए ये संभव नहीं है। मोदी ने यह भी बताया कि कांग्रेस का मॉडल “फैमिली फर्स्ट” है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश की जनता ने हमें तीसरी बार लगातार सेवा करने का मौका दिया है, जो यह दिखाता है कि लोगों ने हमारे विकास मॉडल को समझा और उसे समर्थन दिया। उन्होंने अपने मॉडल को एक शब्द में “नेशन फर्स्ट” बताया और कहा कि इसी भावना के साथ हमारी सरकार ने नीतियों और कार्यों को लागू किया है। समाज में जाति का जहर फैलाने की कोशिश हो रही- पीएम मोदी राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज समाज में जाति का जहर फैलाने की कोशिश की जा रही है… कई सालों से सभी दलों के ओबीसी सांसद ओबीसी पैनल को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी मांग को खारिज कर दिया गया, क्योंकि यह उनकी (कांग्रेस) राजनीति के अनुकूल नहीं था। लेकिन हमने इस पैनल को संवैधानिक दर्जा दिया।” कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न के लायक नहीं समझा राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह सर्वविदित है कि कांग्रेस के मन में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कितना गुस्सा और नफरत थी। उन्होंने कभी भी बाबा साहेब को भारत रत्न के लायक नहीं समझा। लेकिन आज मजबूरी में उन्हें ‘जय भीम’ का नारा लगाना पड़ रहा है।”

हमास के द्वारा कुछ इजरायली नागरिकों को बनाया बंधक, बंधक के दौरान इजरायली नागरिकों के साथ अत्याचार

हमास इजरायल पर हमले के बाद हमास के द्वारा कुछ इजरायली नागरिकों को बंधक बना लिया गया था। उनमें पुरुष, महिला और बच्चे भी शामिल थे। बंधक के दौरान इजरायली नागरिकों के साथ अत्याचार हुए। हमास के एक समलैंगिक लड़ाके ने बंधक बनाए गए इजरायली पुरुषों का रेप किया। फिलिस्तीनी समूह के गुप्त दस्तावेजों से इसका खुलासा हुआ है। जब हमास के टॉप कमांडर को इसके बारे में पता चला तो अपने गे साथी की पहचान कर उसकी तड़पा-तड़पाकर हत्या कर दी गई। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हमास के पास ऐसे लड़ाकों की सूची थी जो समलैंगिकता में लिप्त थे। उन्हें इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, इस यौन अपराथ में हमास के 94 लड़ाके शामिल थे। दस्तावेजों में बच्चों के साथ बलात्कार और यातना का भी खुलासा हुआ। कथित तौर पर एक आरोप में उल्लेख किया गया है, “हमास के सदस्यों में शामिल एक लगातार ईश्वर को कोसता रहता है। एक अन्य ने कहा, “उसके फेसबुक पर रोमांटिक संबंध हैं। वह व्यवहारिक और नैतिक रूप से विचलित है।” यह स्पष्ट नहीं है कि हमास ने उन सभी लड़ाकों के साथ क्या किया। आपको बता दें कि गाजा में समलैंगिकता अवैध है और इसके परिणामस्वरूप कई वर्षों की जेल या मृत्यु हो सकती है। एक पूर्व हमास कमांडर महमूद इश्तवी को 2016 में समलैंगिक संबंध रखने के आरोप में मार दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमास द्वारा पूर्व कमांडर को उसके अंगों से लटकाकर कैद करने और प्रताड़ित करने के लगभग एक साल बाद उसे सीने में तीन गोलियां मारी गईं।  

महिला वर्ग के खेलों में ट्रांसजेंडरों की एंट्री पर लगा स्टॉप, डोनाल्ड ट्रंप ने लिया बड़ा फैसला

न्यूयॉर्क  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ ग्रहण करने के बाद में लगातार एक्शन में है। कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने कई बड़े फैसले लिए हैं। इसमें एक फैसला खिलाड़ियों से जुड़ा हुआ भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक ऐसे कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ट्रांसजेंडर खिलाड़ी महिला वर्ग के खेलों में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। डोनाल्ड ट्रंप का यह आदेश उन पर लागू होगा जो जन्म के समय पुरुष थे और बाद में लिंग परिवर्तन कराकर महिला बन गए। ट्रंप ने अपने अभियान के दौरान कहा था कि पुरुषों को महिलाओं के खेलों से दूर रखा जाना चाहिए। एपी वोटकास्ट के मुताबिक, आधे से ज्यादा वोटर्स ने कहा कि सरकार और समाज में ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए समर्थन बहुत आगे बढ़ गया है। उन्होंने चुनाव से पहले बयानबाजी जारी रखी और ट्रांसजेंडर पागलपन से छुटकारा पाने का वादा किया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह आदेश ‘शीर्षक IX’ के वादे को बनाए रखेगा और ऐसे स्कूलों और एथलेटिक संघों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की आवश्यकता होगी, जो महिलाओं को एकल-लिंग वाले खेलों और लॉकर रूम से वंचित करते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शिक्षा सचिव बेट्सी डेवोस ने 2020 में एक शीर्षक IX नीति जारी की। इसने यौन उत्पीड़न की परिभाषा को सीमित कर दिया और कॉलेजों को केवल तभी दावों की जांच करने की जरूरत थी जब उन्हें कुछ अधिकारियों को सूचित किया गया हो। पूर्व राष्ट्रपति की सरकार ने वापस लिया था प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार ने एक नियम प्रस्तावित किया था, जो स्कूलों को ट्रांसजेंडर एथलीट्स को पूरी तरह प्रतिबंधित करने से रोकता, लेकिन कुछ मामलों में सुरक्षा और निष्पक्षता की बुनियाद पर सीमाएं लगाने की इजाजत देता। हालांकि दिसंबर 2023 में बाइडेन प्रशासन ने इस प्रस्ताव को वापस ले लिया, क्योंकि इसे लेकर विवाद था और कानूनी मुश्किलें सामने आ रही थीं। अमेरिका की सेना में भी ट्रांसजेंडर्स की भर्ती पर लग सकती है रोक डोनाल्ड ट्रंप का यह आदेश ट्रांसजेंडर आबादी पर किस तरह से असर डालेगा अभी तो यह साफ नहीं है, लेकिन उनकी संख्या के बारे में पता लगाना बेहद ही मुश्किल है। बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना में ट्रांसजेंडर्स की भर्ती के आदेश पर भी रोक लगाने के एक कार्यकारी आदेश पर साइन किए हैं। कार्यकारी आदेश के तहत नए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पेंटागन नीति की समीक्षा करेंगे और समीक्षा के बाद ट्रांसजेंडर्स सैनिकों के अमेरिकी सेना में भर्ती पर रोक लगाने का फैसला कर सकते हैं।

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