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8 और 9 फरवरी को आयोजित होगा 43वां नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह सम्मेलन, 51 जोड़े लेंगे सात फेरे

उदयपुर नारायण सेवा संस्थान का 43वां नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि उन जिंदगियों के सपनों को सच करने का प्रयास है, जिन्हें समाज ने अक्सर अधूरा मान लिया। 8 और 9 फरवरी को सेवा महातीर्थ में जब 51 जोड़े सात फेरे लेंगे, तो यह सिर्फ एक विवाह नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और प्रेम की मिसाल बनेगा। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि विवाह में शामिल 28 जोड़े विभिन्न दिव्यांगता से ग्रस्त हैं, जबकि 23 जोड़े आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इनके जीवन की कहानियां संघर्ष और संकल्प से भरी हैं, जो किसी के भी हृदय को छू सकती हैं। व्हाट्सएप से जुड़ी तक़दीरें, अब जन्मों का साथ टीकमगढ़ (म.प्र.) के धर्मदास पाल (35), जो जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग हैं, ने कभी भी अपनी कमजोरी को जीवन पर हावी नहीं होने दिया। कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी करने वाले धर्मदास की मुलाकात धार (म.प्र.) की रेशमा परमार (32) से व्हाट्सएप के दिव्यांग ग्रुप में हुई। रेशमा, जो एक साल की उम्र में पोलियो के कारण कमर से नीचे दिव्यांग हो गईं, मगर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी, समझ और अपनापन गहराता गया। लेकिन जब शादी की बात आई, तो आर्थिक तंगी दीवार बन गई। तब नारायण सेवा संस्थान ने आगे बढ़कर इन्हें अपने नि:शुल्क विवाह समारोह में शामिल कर एक नई जिंदगी का अवसर दिया। छत्तीसगढ़ के सोमनाथ धृतलहरे (28), जो एक सड़क हादसे में अपना एक हाथ खो चुके थे, और सेंदरी जैजैपुर की राखी, जो जन्म से ही दोनों पैरों और एक आंख से दिव्यांग थीं, की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। एक ‘दिव्यांग पैदल मार्च’ में हुई मुलाकात ने इन्हें जन्म-जन्मांतर के रिश्ते में बांध दिया। सोमनाथ ने नारायण सेवा संस्थान से कृत्रिम हाथ लगवाया और मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण लिया। अब वे आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रहे हैं। उधर, राखी के पैरों का सफल ऑपरेशन संस्थान में हुआ, जिससे अब वह कैलिपर्स की मदद से चल सकती हैं। इन दोनों के जीवन में आई मुश्किलों के बादल अब खुशी की बारिश में बदलने जा रहे हैं। गरीबी और दिव्यांगता के आगे झुकी तक़दीर, काली बनी कचरू की लाठी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कचरूलाल (29), जो जन्मजात पोलियो के कारण दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, की जिंदगी में भी नया सवेरा आने वाला है। लाठी के सहारे चलने वाले कचरूलाल को अब जीवनभर का सहारा मिल रहा है – काली कुमारी (25)। काली निर्धन परिवार से हैं, और उनके पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। सालभर पहले सगाई तो हुई, मगर विवाह गरीबी और दिव्यांगता के कारण अधर में था। अब संस्थान के सहयोग से 9 फरवरी को दोनों एक प्राण होने जा रहे हैं। जब उम्मीदें टूटती हैं, तब सेवा संवारती है नारायण सेवा संस्थान पिछले दो दशक से दिव्यांगों और निर्धनों के सपनों को पंख देने का काम कर रहा है। इन 51 जोड़ों की कहानियां सिर्फ उनके संघर्ष की नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि प्यार किसी भी सीमा का मोहताज नहीं।

स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए 73.90 करोड़ से अधिक ‘आभा’ आईडी बनाई गई, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी जानकारी

नई दिल्ली केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत अब तक 73.90 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। एबीडीएम की शुरुआत 2021 में हुई थी, जिसका उद्देश्य देश में एक डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली तैयार करना है। इसके लिए हर नागरिक का आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए) नंबर बनाया जाता है। यह 14 अंकों की एक विशेष पहचान संख्या होती है, जिसे पहले हेल्थ आईडी कहा जाता था। 3 फरवरी 2025 तक, सरकार ने कुल 73,90,93,095 ‘आभा’ आईडी जारी कर दी हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी। आभा नंबर से आपका स्वास्थ्य रिकॉर्ड आसानी से एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर तक पहुंच सकता है। इससे आपकी देखभाल लगातार होती रहेगी और स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर होंगी। इसके अलावा, यह एक तरह का डिजिटल स्वास्थ्य खाता है जिससे देश भर में रहने वाले लोग जुड़ सकते हैं। जब भी जरूरत हो, आभा कार्ड के जरिए ऑनलाइन अपनी सभी मेडिकल जरूरतों और इलाज की जानकारी पाई जा सकती है। सरकार इस योजना की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। इसमें मीडिया प्रचार, सूचना एवं शिक्षा गतिविधियां (आईईसी), और जागरूकता अभियान शामिल हैं। जाधव ने बताया कि सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं को 2021-2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इनका लक्ष्य है: मातृ मृत्यु दर को घटाकर 87 प्रति लाख करना। शिशु मृत्यु दर को 22 प्रति हजार तक लाना। कुल प्रजनन दर को 2.0 पर बनाए रखना। देशभर में 1.5 लाख ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ स्थापित करना। एक वर्ष तक के सभी बच्चों का 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना। इसके अलावा, मलेरिया, डेंगू, लिम्फेटिक फाइलेरिया, काला अजार जैसी बीमारियों के खिलाफ भी कार्यक्रम जारी रहेंगे।

सऊदी अरब के पास फिलिस्तीनियों को एक राज्य प्रदान करने के लिए पर्याप्त भूमि: बेंजामिन नेतन्याहू

तेल अवीव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि सऊदी अरब के पास फिलिस्तीनियों को एक राज्य प्रदान करने के लिए पर्याप्त भूमि है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘गाजा प्लान’ पर बहस जारी है। इजरायली मीडिया के मुताबिक वाशिंगटन दौरे पर गए नेतन्याहू ने एक चैनल से इंटरव्यू के दौरान कहा, “सऊदी अरब में एक फिलिस्तीनी राज्य बन सकता है; उनके पास वहां बहुत जमीन है।” इस बीच वाशिंगटन के होटल में फिल्माए गए वीडियो संदेश में इजरायली पीएम ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पर सुझाव को ध्यान से सुना जाना चाहिए क्योंकि यह सालों में सामने आया एक मौलिक विचार है। नेतन्याहू पहले ही ट्रंप के गाजा प्लान का समर्थन कर चुके हैं जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार (4 जनवरी) को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने अपने गाजा प्लान पेश किया था। ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध से तबाह गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और फिलिस्तीनियों को कहीं और बसाए जाने के बाद इसे आर्थिक रूप से विकसित करेगा। उन्होंने गाजा का विकास करने का प्रस्ताव रखते वक्त यह स्पष्ट कहा था कि फिलिस्तीनियों का विस्थापन स्थायी होगा। हालांकि बाद में व्हाइट हाउस में इस पर सफाई दी थी कि गाजा से कोई भी विस्थापन अस्थायी होगा। ट्रंप के इस सुझाव को फिलिस्तीनियों और दुनिया भर के नेताओं ने इसे अस्वीकार कर दिया लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने गुरुवार को ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक बार फिर अपना विचार दोहराया। ट्रंप ने लिखा, “लड़ाई के अंत में इजरायल गाजा पट्टी को संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंप दिया देगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए ज़मीन पर किसी अमेरिकी सैनिक की ज़रूरत नहीं होगी। 7 अक्टूबर 2023 इजरायल में हमास के बड़े हमले के जवाब में यहूदी राष्ट्र ने फिलिस्तीनी ग्रुप के कब्जे वाली गाजा पट्टी में सैन्य अभियान शुरू किया था। हमास के हमले में करीब 1200 लोग मारे गए थे जबकि 250 से अधिक लोगों को बंधक बनाया गया था। इजरायली हमलों ने गाजा में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है और हजारों फिलिस्तीनियों की मौत हुई है। फिलहाल एक सीजफायर समझौते के तहत गाजा में युद्ध रुका हुआ है। समझौते की शर्तों के तहत हमास ने जहां बंधकों को रिहा किया वहीं इजरायल ने फिलिस्तीनी बंदियों को मुक्त कर दिया।

एनडीए के कार्यकाल में पैदा हुई 17.9 करोड़ नौकरियां, बीजेपी ने कांग्रेस के उन दावों का किया खंडन

नई दिल्ली बीजेपी ने कांग्रेस के उन दावों का खंडन किया है, जिसमें ये दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश में पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा नहीं हुए हैं। बीजेपी ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के कार्यकाल में एक दशक में केवल 2.9 करोड़ नौकरियां पैदा हुई थी। वहीं, एनडीए के शासनकाल में 17.9 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिसमें से 4.6 करोड़ नौकरियां अकेले वित्त वर्ष 2023-24 में पैदा हुई हैं। बीजेपी ने राष्‍ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यूपीए के शासनकाल में बेरोजगारी 4.7 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। वहीं, मोदी सरकार में बेरोजगारी की दर 2017-18 में 5.3 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है। वहीं, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आधार पर बताया गया कि मोदी सरकार में ग्रामीण बेरोजगारी दर में भी कमी आई है। बीजेपी ने कहा कि महिला श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 37 प्रतिशत हो गई है। इसे 89.8 लाख लखपति दीदियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से भी समर्थन मिला है, जिसने महिलाओं को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 1 लाख रुपये की वार्षिक घरेलू आय प्राप्त करने का साधन प्रदान किया है। बीजेपी ने स्टार्टअप इकोसिस्टम में हुए विकास के बारे में बताते हुए कहा कि देश में 2013 में केवल 452 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे। 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 1.59 लाख हो गई है और इससे प्रत्यक्ष तौर पर 17.2 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। बीजेपी ने कहा कि अकेले नवंबर 2024 में 14.63 लाख नए सदस्य ईपीएफओ से जुड़े हैं, जो दिखाता है कि देश में औपचारिक क्षेत्र बढ़ रहा है। बीजेपी ने कहा कि स्किल इंडिया के तहत 14 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है और अब पीएम इंटर्नशिप योजना 2025 के तहत अतिरिक्त 1 करोड़ छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये इंटर्नशिप भारत की शीर्ष 500 कंपनियों द्वारा दी जा रही है। भाजपा ने फैक्टशीट में कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए गए प्रत्येक 1 करोड़ रुपये से अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल क्षेत्रों में 200-250 मेन-ईयर्स का रोजगार पैदा होता है।

शेख हसीना ने यूनुस सरकार पर की गई सख्त टिप्पणी बांग्लादेश को रास नहीं आई, चिढ़ गया बांग्लादेश, भारत से की ये शिकायत

ढाका अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की यूनुस सरकार पर की गई सख्त टिप्पणी बांग्लादेश को रास नहीं आई है। ढाका ने नई दिल्ली से कहा है कि वह अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश में रहते हुए ‘झूठी और मनगढ़ंत’ टिप्पणियां करने से रोके। अगस्त में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना को अपनी सत्ता छोड़नी पड़ी थी और वह भारत आ गई थीं। हसीना ने बुधवार को एक ऑनलाइन संबोधन में उन्होंने अपने समर्थकों से बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया और उस पर असंवैधानिक तरीके से सत्ता हथियाने का आरोप लगाया। हसीना के संबोधन से पहले ही हजारों प्रदर्शनकारियों ने उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक नेता मुजीबुर रहमान के घर को ध्वस्त कर दिया और आग लगा दी। हसीना के भाषण के बाद भी हिंसा जारी रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त को एक विरोध पत्र सौंपा, जिसमें उनकी टिप्पणियों पर ‘गहरी चिंता, निराशा और गंभीर आपत्ति’ व्यक्त की गई। मंत्रालय ने कहा, “मंत्रालय ने भारत से अनुरोध किया है कि वह आपसी सम्मान और समझ की भावना से उन्हें इस तरह के झूठे, मनगढ़ंत और भड़काऊ बयान देने से रोकने के लिए तुरंत उचित कदम उठाए।” भारत ने शेख मुजीब के घर को जलाए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रहमान के घर को नष्ट करने की निंदा करते हुए इसे ‘बर्बरतापूर्ण कृत्य’ बताया। उन्होंने कहा, “वे सभी लोग जो स्वतंत्रता संग्राम को महत्व देते हैं, जिसने बांग्ला पहचान और गौरव को पोषित किया, वे बांग्लादेश की राष्ट्रीय चेतना के लिए इस निवास के महत्व से अवगत हैं।” यह वही घर था, जहां रहमान ने 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और 1975 में इसी घर के भीतर उनकी और उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। हसीना ने इस इमारत को अपने पिता की विरासत को समर्पित एक संग्रहालय में बदल दिया।  

अनन्या प्रसाद ने 52 दिनों में यह कठिन यात्रा पूरी कर रचा नया इतिहास, अटलांटिक महासागर को अकेले किया पार

नई दिल्ली क्या आपने कभी सोचा है कि समुद्र की गहराइयों में अकेले 3,000 मील की यात्रा करना कैसा एक्सपीरियंस होगा? बेंगलुरु की रहने वाली अनन्या प्रसाद ने यही किया, और वो भी अकेले! 34 साल की अनन्या ने अटलांटिक महासागर को अकेले पार किया और 52 दिनों में यह कठिन यात्रा पूरी की। इस दौरान उन्होंने न केवल अपनी शारीरिक और मानसिक ताकत का परिचय दिया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों के लिए 1.5 लाख पाउंड से अधिक की रकम भी जुटाई। अनन्या का यह साहसिक कदम न सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि समाज में पॉजिटिव बदलाव लाने की भी एक बड़ी कोशिश है। एक अनोखी यात्रा की शुरुआत अनन्या की यात्रा 11 दिसंबर, 2024 को कैनरी द्वीप समूह के ला गोमेरा से शुरू हुई और 31 जनवरी, 2025 को एंटीगुआ में समाप्त हुई। अनन्या, जो प्रसिद्ध कन्नड़ कवि जी एस शिवरुद्रप्पा की पोती हैं, ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर और व्यक्तिगत आकांक्षाओं को मिलाकर इस यात्रा को संभव किया।अनन्या ने अपनी यात्रा की तैयारी में तीन साल से भी अधिक समय बिताया। इसमें विशेष रोइंग तकनीकों, शारीरिक सहनशक्ति बनाने और मानसिक दृढ़ता को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण शामिल था।   समुद्र की चुनौतियों से जूझना इस अकेली यात्रा के दौरान अनन्या को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। उन्हें खतरनाक समुद्री हालात, ओर्का व्हेल से मिलना, खराब मौसम से जूझना और एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा जब उनके रडर (स्टीयरिंग यंत्र) को मध्य यात्रा में नुकसान हो गया। लेकिन अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और मानसिक मजबूती के साथ उन्होंने उसे ठीक किया और यात्रा जारी रखी। अनन्या ने रोजाना लगभग 60-70 किलोमीटर की दूरी तय की। उनके द्वारा बनाई गई आहार और जल योजना ने उन्हें इन कठिन परिस्थितियों में टिके रहने में मदद की। समाज के लिए योगदान अनन्या की यह यात्रा केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में पॉजिटिव बदलाव लाना था। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य फाउंडेशन और दक्षिण भारत के अनाथ बच्चों के लिए काम करने वाले दीनबंधु ट्रस्ट के लिए 1,50,000 पाउंड से अधिक धन जुटाया। यह योगदान यह दिखाता है कि व्यक्तिगत प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सबके लिए यादगार प्रेरणा अनन्या की यह यात्रा केवल शारीरिक कड़ी मेहनत की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत संदेश भी देती है। यह उन महिलाओं और रंगीनी जातियों को साहस और प्रेरणा देती है जिन्हें साहसिक खेलों में पारंपरिक रूप से स्थान नहीं मिला है। अनन्या ने अपने संघर्ष को सभी के साथ साझा किया और सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा के बारे में जानकारी दी, जिससे वह दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं। नई सोच की ओर कदम “द लॉजिकल इंडियन” अनन्या प्रसाद को एक प्रेरणा के रूप में मानता है। उनका यह संघर्ष और सफलता साहस, जिम्मेदारी और बदलाव की ताकत को दर्शाती है। यह यात्रा हमें एक महत्वपूर्ण सवाल देती है: हम कैसे और अधिक समावेशी प्लेटफ़ॉर्म बना सकते हैं जो विविध आवाज़ों को सुनने और समाज के मौजूदा दृष्टिकोणों को चुनौती देने का मौका दे?

सरवणकुमार ने 14 साल बाद अपने कर्मचारियों से किया गया वादा पूरा किया और स्टाफ को बांटा 14 करोड़ रुपए का बोनस

नई दिल्ली तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित एक एआई स्टार्टअप कोवई.को ने अपने कर्मचारियों को 14 करोड़ रुपए का बोनस दिया है, जो किसी भी स्टार्टअप के लिए एक बड़ा सपना होता है। इस कंपनी में कुल 140 कर्मचारी काम करते हैं, और उन्हें यह बोनस उनकी मेहनत और योगदान के लिए दिया गया है। कोवई.को की स्थापना 2011 में सरवणकुमार नामक एक व्यक्ति ने की थी। यह कंपनी बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सास समाधान (SaaS solutions) प्रदान करती है। सरवणकुमार ने 14 साल बाद अपने कर्मचारियों से किया गया वादा पूरा किया और उन्हें यह बोनस दिया।   बड़े क्लाइंट्स के साथ कंपनी का नाम कोवई.को के पास बीबीसी, बोइंग और शेल जैसी बड़ी कंपनियां अपने ग्राहक के रूप में हैं। कंपनी का नाम कोयंबटूर शहर पर रखा गया है, जहां इसकी शुरुआत हुई थी। सरवणकुमार कोयंबटूर के मूल निवासी हैं, हालांकि वह पिछले 25 वर्षों से लंदन में रहते हैं। स्टार्टअप शुरू करने का फैसला सरवणकुमार ने बताया कि वह एक दशक से ज्यादा समय तक आईटी कर्मचारी थे, लेकिन उन्हें बाजार में कुछ कमी महसूस हुई। इसके बाद उन्होंने कोवई.को स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। यह कंपनी पूरी तरह से बूटस्ट्रैप्ड है और इसने कोई बाहरी फंडिंग नहीं ली है। कर्मचारियों को 14 करोड़ रुपए का बोनस दिया आपके स्टार्टअप ने इतना बड़ा बोनस क्यों दिया है? तो सरवणकुमार ने कहा कि स्टार्टअप में काम करने वाले लोग एक दिन अमीर बनना चाहते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें सिर्फ कागजी शेयर मिलते हैं। सरवणकुमार ने तीन साल पहले अपने कर्मचारियों से वादा किया था कि वह उन्हें जनवरी 2025 तक छह महीने का वेतन बोनस के रूप में देंगे। अब उन्होंने वह वादा पूरा किया और 14 करोड़ रुपए का बोनस दिया।   कंपनी का रेवेन्यू 100 मिलियन डॉलर पहुंचाना मकसद सरवणकुमार ने यह भी कहा कि वह कोवई.को को एक यूनिकॉर्न बनाना चाहते हैं। उनकी योजना 2030 तक कंपनी का रेवेन्यू 100 मिलियन डॉलर तक पहुंचाने की है। उन्होंने यह भी मजाक करते हुए कहा कि उन्होंने बुगाटी कार खरीदने का विचार छोड़ दिया है, और अब वह अपनी कर्मचारियों को बोनस देने के लिए उसी पैसे का उपयोग करना चाहते हैं। यह स्टार्टअप और इसके संस्थापक सरवणकुमार की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो न केवल अपने कर्मचारियों के साथ विश्वास कायम कर रहे हैं, बल्कि अपने स्टार्टअप को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।  

जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण ट्रेनें 9 से 26 फरवरी तक रद्द रहेंगी

जम्मू मसीत स्टेशन पर उच्चीकरण कार्यों के बीच, जम्मूतवी और हरदोई-बालामऊ स्टेशन के बीच ब्लॉक के चलते कई महत्वपूर्ण ट्रेनें 9 से 26 फरवरी तक रद्द रहेंगी। इस माह ट्रेनों से लंबी दूरी की यात्रा कठिन होगी। जम्मूतवी और हरदोई-बालामऊ स्टेशन के बीच मसीत स्टेशन पर उच्चीकरण के कार्यों के बीच ब्लॉक के चलते शुक्रवार से ट्रेनों का निरस्तीकरण शुरू हो जाएगा।इसके चलते 15655 कामाख्या-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस नौ, 16, 23 फरवरी, 15656 श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा-कामाख्या एक्सप्रेस 12,19, 26 फरवरी, 12491 बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस नौ, 16, 23 फरवरी, 12492 जम्मूतवी-बरौनी एक्सप्रेस सात, 14, 21 व 28 फरवरी, 15119-20 वाराणसी-देहरादून एक्सप्रेस 15 से 17 फरवरी तक निरस्त रहेंगी।  इनमें शामिल हैं: 15655 कामाख्या-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस (9, 16, 23 फरवरी) 15656 श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा-कामाख्या एक्सप्रेस (12, 19, 26 फरवरी) 12491 बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस (9, 16, 23 फरवरी) 12492 जम्मूतवी-बरौनी एक्सप्रेस (7, 14, 21, 28 फरवरी) 15119-20 वाराणसी-देहरादून एक्सप्रेस (15-17 फरवरी) इन ट्रेनों के रद्द होने के चलते, लंबी दूरी की यात्रा करना अधिक कठिन हो सकता है। 

हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल ने घातक हमले के लिए पेजर का इस्तेमाल किया था, अब डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट किया ‘गोल्डन पेजर’

इजरायल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खास तोहफा दिया है। इसी हफ्ते ओवल ऑफिस में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को गोल्डन पेजर गिफ्ट किया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दरअसल, पिछले साल हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल ने घातक हमले के लिए पेजर का इस्तेमाल किया था। पेजर का उपयोग करके लेबनानी आतंकवादी समूह के सदस्यों को निशाना बनाया गया, जिससे उसे भारी नुकसान पहुंचा था। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर में पेजर को कटे हुए पेड़ के तने पर रखा देखा जा सकता है। इस पर लिखा है, ‘दोनों हाथों से दबाएं।’ पेजर के साथ स्वर्ण पट्टिका भी रखी है जिस पर काले अक्षरों में लिखा है, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमारे सबसे अच्छे दोस्त और सबसे बड़े सहयोगी हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू।’ मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि गिफ्ट मिलने पर ट्रंप ने कहा, ‘यह एक बेहतरीन ऑपरेशन रहा।’   क्या गाजा में सेना भेजने पर विचार रहे ट्रंप? इजरायल ने पिछले साल 17 सितंबर को हिजबुल्लाह पर घातक हमला बोला था। पूरे लेबनान में अचानक पेजर्स से बीप बजना शुरू हो गया। जैसे ही उस पर आने वाले एन्क्रिप्टेड मैसेज को पढ़ने के लिए बटन दबाया जाता तो ब्लास्ट हो जाता था। वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमास के खिलाफ लड़ाई इजरायल की प्रतिबद्धता है। साथ ही, डोनाल्ड ट्रंप ने इसमें सहायता करने के लिए गाजा में सेना भेजने के बारे में कुछ नहीं कहा। नेतन्याहू ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि ट्रंप ने हमास को नष्ट करने के लिए अमेरिकी सेना भेजने की बात की है। यह हमारी प्रतिबद्धता है। यह हमारा काम है और हम इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’

जम्मू-कश्मीर में सीमा पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे 7 पाकिस्तानियों को किया ढेर, कुख्यात BAT के आतंकी भी थे शामिल

नई दिल्ली इंडियन आर्मी ने जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे 7 पाकिस्तानियों को ढेर कर दिया है. इन घुसपैठियों में पाकिस्तान के कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम के आतंकी भी शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने 4-5 फरवरी की रात को नियंत्रण रेखा पर अपनी चौकी पर पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले को नाकाम कर दिया. इस दौरान 7 पाकिस्तानी घुसपैठिए मारे गए. इन घुसपैठियों में 2 से 3 पाकिस्तानी आर्मी के जवान भी शामिल थे. यह घटना जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में हुई. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी घुसपैठिए कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम की मदद से भारत के जवानों पर घात लगाकर हमला करना चाहते थे. बॉर्डर एक्शन टीम LoC पर छिपकर हमला करने के लिए ट्रेंड है. पाकिस्तान की ये एजेंसी पहले भी बॉर्डर पर इंडियन जवानों पर हमला कर चुकी है. इसी अनुभव का फायदा लगाकर ये टीम एक बार फिर से भारत के जवानों को टारगेट करना चाहती थी.  सूत्रों ने बताया कि LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखते ही भारतीय जवानों ने ढेर कर दिया. मारे गए आतंकियों में दहशत संगठन अल-बदर के आतंकी भी शामिल हैं. ये घटना उस रोज हुई जब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने प्रोपगेंडा को हवा देता है और 5 फरवरी को कथित रूप से कश्मीर सॉलिडरिटी डे बनाने का ढोंग करता है. बता दें कि पाकिस्तान के कथित कश्मीर सॉलिडरिटी डे के मौके पर ही 5 फरवरी को लाहौर में आयोजित एक रैली में आतंकी हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद ने भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया. रैली को संबोधित करते हुए तल्हा सईद मिमियाता दिखा. उसने कहा कि वो कश्मीर को आजाद कराएगा. उसने मंच पर खूब नौटंकी की और कश्मीर को लेकर कसमें खाई. तल्हा सईद ने यह भी मांग की कि पाकिस्तानी सरकार अपनी नीति की समीक्षा करे और उसके बाप हाफिज सईद को जेल से रिहा करे.

ट्रंप के ऑर्डर से फिर मची खलबली, अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर लगाया बैन; क्या नेतन्याहू है वजह?

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराध न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ICC की ओर से गाजा में इजरायल के युद्ध अपराध की जांच के चलते अमेरिका ने ये कार्रवाई की है। अमेरिका के प्रमुख सहयोगी इजरायल पर गाजा में नरसंहार के गंभीर आरोप लगे हैं। ICC ने बीते साल इजरायली नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। ट्रंप ने ICC की कार्रवाई को खतरनाक मिसाल बताते हुए बैन का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों में ICC अधिकारियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमलों के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ ICC के गिरफ्तारी वारंट जारी करने के चलते यह कदम उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका और सहयोगी देशों की ICC जांच का विरोध कर रहा है। उन्होंने इन जांचों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल ICC के सदस्य नहीं हैं और दोनों ही देश इसके ऑर्डर नहीं मानते। ट्रंप पर हमलावर रहे हैं ट्रंप ICC को दूसरी बार अमेरिकी प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है। साल 2020 में ट्रंप प्रशासन ने तत्कालीन अभियोजक फातौ बेन्सौडा और एक शीर्ष सहयोगी पर प्रतिबंध लगाए थे। ये प्रतिबंध अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्ध अपराधों की ICC की जांच की प्रतिक्रिया में लगाए गए थे। ICC को अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इससे अदालत के कामकाज पर असर पड़ा है। ICC अध्यक्ष ने कुछ समय पहले चिंता जताई थी कि अमेरिकी प्रतिबंध न्यायालय के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्यायालय की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया है। ICC 125 सदस्य देशों वाला ICC एक स्थायी न्यायालय है। यह युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों, नरसंहार और सदस्य देशों या उनके नागरिकों के खिलाफ आक्रामकता के लिए मुकदमा चलाता है। हालांकि कई बड़े देश इसके सदस्य नहीं है। इंटरनेशनल कोर्ट ने पिछले नवंबर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट और हमास नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अदालत ने माना था कि नेतन्याहू और गैलेंट ने मानवीय सहायता रोककर गाजा में नागरिकों की भुखमरी को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया। हालांकि इजरायल ने आरोपों को झूठा बताकर खारिज कर दिया था।

सुभाष नायर के खिलाफ यह केस नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने पर हुआ, अब हुई जेल

सिंगापुर सिंगापुर में भारतीय मूल के रैपर सुभाष नायर को जेल हो गई है। सुभाष नायर के खिलाफ यह केस नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने पर हुआ है। पांच फरवरी को उन्हें छह हफ्तों के लिए जेल में डाल दिया गया। 32 साल के सुभाष ने सिंगापुर में चीन को मिलने वाली छूट और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार को लेकर लगातार आवाज उठाई है। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट्स और कार्यक्रमों के दौरान नस्लवाद पर बोलने के कई केस हैं। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वह सिंगापुर में भेदभाव के खिलाफ मुंह खोलने की सजा पा रहे हैं। उनके मुताबिक सिंगापुर के अधिकारी उनकी सामाजिक लड़ाई को रोकने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। क्या हैं मामले सुभाष नायर की मुश्किलें 2020 में शुरू हुईं जब उन्हें अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर चेतावनी मिली। यह पोस्ट उन्होंने 2019 के ऑर्चर्ड टॉवर्स मर्डर को लेकर की थी। इस घटना में 31 साल के भारतीय मूल के सिंगापुरियन सतीश नोएल गोबीदास की कुछ लोगों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। मामले में चैन जिया जिंग के ऊपर पहले तो हत्या का मामला दर्ज किया गया। लेकिन बाद में कुछ शर्तों पर उसके केस को कमजोर करते हुए चेतावनी दे दी गई। इसके मामले में नस्लीय पूर्वाग्रह के आरोप लगे थे। इंस्टाग्राम पर पोस्ट सुभाष ने इस मामले को लेकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने लिखा कि ‘नस्लवाद और चीनी विशेषाधिकार की आलोचना करना=दो साल की सशर्त चेतावनी और मीडिया में बदनामी का अभियान। एक भारतीय आदमी की हत्या की साजिश करना=हल्की सजा और मीडिया की सहानुभूति। इसको लेकर भी सुभाष को चेतावनी मिली थी। लेकिन उन्होंने अपने म्यूजिक शोज और कार्यक्रमों के दौरान नस्लवाद के मामलों को उठाना जारी रखा। साल 2021 में एक कार्यक्रम के दौरान ऑर्चर्ड टॉवर केस में अपनी पोस्ट को लेकर संकेत किया था। बाद में इस केस में उनके खिलाफ केस हुआ था। इसी तरह साल 2019 में अभिनेता डेनिस चियू को एक सरकारी विज्ञापन में दिखाने की सुभाष ने आलोचना की थी। इस मामले में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इस वीडियो में चाइनीज सिंगापुरियंस के लिए आक्रामक भाषा इस्तेमाल की गई थी। इसी तरह 2021 में एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उनके खिलाफ आरोप लगा था। इसमें उन्होंने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर जोआना थेंग और सिटी रिवाइवल चर्च के संस्थापक जेमी वोंग के खिलाफ ढंग से कार्रवाई न होने पर आलोचना की थी। इन दोनों ने एलजीबीटीक्यू आंदोलन को शैतान से जोड़ा था। नायर ने तर्क दिया कि अगर दो मलय मुसलमानों ने ऐसा किया होता तो जांच तेजी से होती।

ईरान में महिला ने नग्न होकर पुलिस के सामने हंगामा किया, हिजाब बैन के विरोध में

तेहरान इस्लामिक देश ईरान ने वैसे तो पिछले साल दिसंबर में ही सख्त हिजाब कानून को लागू करने पर रोक लगी दी है लेकिन अभी भी वहां हिजाब बैन के खिलाफ महिलाएं हल्ला बोल रही हैं। इसी तरह के एक वाकए में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए पहले अपने सभी कपड़े उतार दिए फिर नग्न होकर पुलिस वाहन के बोनट पर खड़ी होकर हंगामा करने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में महिला सशस्त्र बलों के अधिकारियों पर चिल्लाती हुई दिखाई दे रही है। ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने महिला की इस करतूत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि हंगामा करने वाली महिला पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर विंडशील्ड की ओर बढ़ते हुए और अपने दोनों पैरों को फैलाकर बैठ रही है। महिला की हालत देखकर वहां मौजूद एक सशस्त्र पुरुष अधिकारी मामले में दखल देने में हिचकिचाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो के अंत में महिला ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए और विरोध में चिल्लाने लगीं। महिला इस्लामी गणराज्य में महिलाओं के लिए सख्त प्रावधानों का विरोध कर रही थी। वह शरीर को पूरी तरह से ढकने से इनकार भी करती दिखी। हालांकि, हंगामा बढ़ने पर उस महिला के पति ने कहा कि फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत ठीक नहीं है। बता दें कि दिसंबर में, ईरानी सांसद ने विवादास्पद ‘पवित्रता और हिजाब’ कानून पारित किया था, जिसमें उन महिलाओं और लड़कियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया था जो अपने बाल, हाथ या पैर का प्रदर्शन करती हैं। हालांकि, महिलाओं के व्यापक विरोध के बाद ईरानी सरकार झुक गई थी और इस कानून को लागू करने पर रोक लगा दी थी। तब ईरानी सरकार ने कहा था कि इसमें सुधार की जरूरत है। एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई वैश्विक संगठनों ने ईरान के इस कानून की निंदा की थी और इसे दमनकारी और दमघोंटू व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कहा था। प्रस्तावित कानून में भारी जुर्माना और बार-बार अपराध करने वालों के लिए 15 साल तक की कैद का भी प्रावधान किया गया था।

दलित दूल्हे की घुड़चढी को रस्म पूरा करने एसपी ने पुलिसकर्मियों की फौज उतारी

अहमदाबाद  गुजरात के बनासकांठा जिले में दलित वकील मुकेश परेचा ने घोड़ी पर बैठकर अपनी शादी की बारात निकाली। इलाके में किसी दलित परिवार में घुड़चढ़ी का यह पहला मौका था। इस बारात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। बाद में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी के साथ पुलिस अफसरों ने दूल्हे की गाड़ी ड्राइव की। हालांकि घोड़ी के उतरकर कार पर चढ़ने के दौरान किसी ने उनकी कार पर पत्थर फेंका। दूल्हे परेचा ने कहा कि वह एक-दो दिन में इसकी शिकायत देंगे। शादी में घुड़चढ़ी के लिए मांगी थी सुरक्षा बनासकांठा ज़िले के पालनपुर तहसील के गडलवाड़ा गांव में गुरुवार को एक अनोखी शादी देखने को मिली। यह शादी आम शादियों से बिल्कुल अलग थी। दूल्हे मुकेश परेचा अपनी शादी में घुड़चढ़ी की रस्म करना चाहते थे। इलाके के दबंगों ने दलितों की घुड़चढ़ी पर रोक लगा रखी थी। परेचा ने इस रस्म के लिए स्थानीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से सुरक्षा मांगी। उन्होंने 22 जनवरी को बनासकांठा ज़िले के पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन दिया। आवेदन में परेचा ने बताया कि उनके गांव में दलित कभी घुड़चढ़ी या वरघोड़ा नहीं निकालते हैं। मैं पहला व्यक्ति हूं जो वरघोड़ा निकालूंगा, जिसमें किसी अनहोनी की पूरी संभावना है। आपसे निवेदन है कि हमें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। इंस्पेक्टर ने खुद चलाई दूल्हे की कार पुलिस ने उनकी बरात की सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई। खुद जिग्नेश मेवाणी भी पुलिस अफसरों के साथ बारात में शामिल हुए। बनासकांठा ज़िला अदालत में वकालत करने वाले परेचा ने कहा कि पुलिस सुरक्षा के बीच उनकी बारात निकली। जब वह घोड़े पर सवार थे, तब कुछ नहीं हुआ। लेकिन जब वह घोड़े से उतरे और अपनी कार में बैठे तो किसी ने उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंक दिया। फिर पुलिस इंस्पेक्टर के. एम. वसावा ने खुद स्टेयरिंग थाम लिया। उनके साथ कार में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी भी मौजूद थे।

ट्रंप को PM नेतन्याहू ने क्यों गिफ्ट किया गोल्डन पेजर? जानें क्या है बड़ा कारण

न्यूयॉर्क  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने ट्रंप को एक बेहद खास गिफ्ट दिया. व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें ‘गोल्डन पेजर’ गिफ्ट किया है. इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से भी इस बात की पुष्टि की गई कि नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को गोल्डन पेजर गिफ्ट के रूप में दिया है. दरअसल, यह तोहफा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के ऑपरेशन का प्रतीक है, जिसमें पेजर ब्लास्ट के जरिए हिजबुल्लाह के कई आतंकवादियों को मार गिराया गया था. लेबनान में कैसे हुए थे पेजर ब्लास्ट? लेबनान और सीरिया के सीमावर्ती इलाकों में पिछले साल सितंबर में कई पेजरों में ब्लास्ट हुए थे. लेबनान की राजधानी बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में खासकर पूर्वी बेका घाटी में पेजर में एक के बाद एक सीरियल ब्लास्ट हुए थे. इसके बाद लेबनान में वॉकी-टॉकी के अलावा सोलर पैनल और हैंड हेल्ड रेडियो में भी ब्लास्ट हुए थे. इतना ही नहीं लेबनान के बेरूत समेत कई प्रमुख शहरों में घरों के सोलर सिस्टम और सोलर पैनलों में भी कई धमाके हुए थे. हिजबुल्लाह की ओर से संवाद करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पेजरों में हुए हमलों के कारण करीब  3000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और लगभग 40 आतंकवादियों की मौत हुई थी. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बात की पुष्टि की थी कि उन्होंने ही सितंबर में लेबनान स्थित आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह के खुफिया ठिकानों पर पेजर हमले को मंजूरी दी थी. पेजर का ही इस्तेमाल क्यों करते थे हिजबुल्लाह के लड़ाके दरअसल, हमास के ऊपर इजरायल के हमले के बाद हिजबुल्लाह के टॉप कमांडरों ने अपने लड़ाकों को एक-दूसरे से बात करने के लिए मोबाइल या इंटरनेट की जगह पेजर का इस्तेमाल करने का आदेश दिए थे.  पेजर की लोकेशन ट्रैक नहीं हो सकती है. कैसे काम करता है पेजर? पेजर रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है। जब किसी को मैसेज भेजना होता है तो पेजर नेटवर्क उस मैसेज को सेंड करता है, जिसे पेजर डिवाइस रिसीव करता है। जब कोई संदेश आता है तो यह बीप या बाइब्रेट करता है। इसीलिए इसे बीपर और ब्लीपर भी कहा जाता है। इसमें किसी भी तरह के इंटरनेट और कॉलिंग की भी जरूरत नहीं पड़ती है। यह पहाड़ी इलाकों या दूर दराज के क्षेत्रों में ज्यादा फायदेमंद होते हैं। तीन तरीके के होते हैं पेजर मोबाइल फोन के नेटवर्क वीक होने वाली जगहों पर भी पेजर काफी भरोसेमंद डिवाइस था। पेजर भी कोई एक तरह का नहीं होता है बल्कि यह भी तीन तरह का होता है। इसमें पहले आता है वन वे पेजर। वनवे पेजर में केवल मैसेज को रिसीव किया जा सकता है। दूसरे नंबर पर टू वे पेजर आता है। इसमें मैसेज रिसीव करने के साथ-साथ सेंड भी कर सकते हैं। फिर आखिरी वॉयस पेजर का नाम शामिल है। इसमें वॉयस मैसेज को रिकॉर्ड किए जाते हैं।

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