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युद्ध की तैयारी में जुटा है चीन? नए कमांड कॉम्प्लेक्स ने बढ़ाई चिंता, जिनपिंग तो इसे लेकर बेहद गंभीर नजर दिख रहे

चीन क्या चीन युद्ध की तैयारी में जुटा है? राष्ट्रपति शी जिनपिंग तो इसे लेकर बेहद गंभीर नजर आते हैं कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को जंग के लिए तैयार रहना चाहिए। चीनी सैन्य हवाई अड्डों को मजबूत बनाया जा रहा है। बमबारी से सैनिकों की रक्षा के लिए नए कमांड कॉम्प्लेक्स का निर्माण हो रहा है। इस तरह की तैयारियों से कुछ ऐसे ही संकेत मिलते हैं। सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि पीएलए की ओर से कई तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। मगर, इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नया कमांड कॉम्प्लेक्स है। राजधानी बीजिंग से लगभग 25-30 किमी पश्चिम-दक्षिण में इसका निर्माण हो रहा है। पता चला कि पीएलए की खातिर युद्धकालीन कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर के रूप में कार्य करने के लिए इसे डिजाइन किया गया है। यह साइट लगभग 1,500 एकड़ के दायरे में फैली हुई है। खास बात यह है कि पेंटागन की तुलना में यह 10 गुना बड़ी है। सैटेलाइट इमेजरी से खुलासा हुआ कि जमीन में कई गहरे गड्ढे किए गए हैं, जिनमें मजबूत बंकर बनाए जाएंगे। जानकारों का मानना है कि परमाणु हमला होने पर ये बंकर पर्याप्त सुरक्षा दे सकते हैं। जैसे ही यह कमांड कॉम्लेक्स पूरा होगा, दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य कमांड सेंटर कहलाएगा। कुछ लोग इसे बीजिंग मिलिट्री सिटी भी कह रहे हैं। 4 किमी के दायरे में फैला है कॉम्प्लेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, कमांड कॉम्प्लेक्स में हर दिन 100 से अधिक क्रेनें काम कर रही हैं। इस निर्माण स्थल की चौड़ाई लगभग 4 किलोमीटर तक है। साथ ही जमीन में काफी गहराई तक निर्माण कार्य चल रहा है। बमबारी या कोई बड़ा हमला होने पर इसमें जीवित बचने की संभावना अधिक होगी। चीन में बन रहे इस नए परिसर के बारे में अभी बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ पाई है। इसके अलावा, कॉम्प्लेक्स को लेकर जिस तरह के दावे किए जा रहे हैं उनकी पुष्टि करना भी मुश्किल है। खबर में कहा गया कि भूमिगत मार्ग से जुड़े कई अंडरग्राउंड नोड हैं, जिन्हें सबवे नेटवर्क की तरह तैयार किया जा रहा है। इस तरह की अपुष्ट जानकारियां चीन के नए मिलट्री कमांड कॉम्प्लेक्स को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वैश्विक सुरक्षा के लिए इन सवालों का समय से जवाब मिलना भी जरूरी है।

महाकुंभ में आए हजारों लोगें के परिजन लापता हो गए हैं, सपा सांसद ने दावा किया कि भगदड़ में गायब हो गए 15 हजार लोग

नई दिल्ली महाकुंभ को लेकर संसद में बवाल के बाद अब समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने एक और बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि 15 हजार लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उनके परिवार के लोग नहीं मिल रहे हैं। महाकुंभ में आए हजारों लोगें के परिजन लापता हो गए हैं। वहीं सरकार कोई भी जानकारी देने से इनकार कर रही है। उन्होंने कहा कि 1954 के प्रयाग कुंभ में भगदड़ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में बताया कि कितने लोग घायल हुए हैं और कितने लोग मारे गए हैं। यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का पूरा अमला केवल वीआईपी लोगों को सुविधाएं देने में व्यस्थ था। उन्हें आम आदमी की कोई फिक्र ही नहीं थी। उन्होंने कहा, हमारे मुख्यमंत्री रोज ही पहुंचते हैं। अधिकारी व्यवस्था में व्यस्त है कि वीआईपी लेन साफ-सुथरी रहनी चाहिए। वहीं आम आदमी चाहे डूब जाए या मर जाए। 15 हजार लोग कह रहे हैं कि उनके परिवार के सदस्य लापता हैं। सरकार कोई जानकारी ही नहीं दे रही है। बता दें कि सोमवार को बजट सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा किया था। विपक्ष का कहना था कि सदन में महाकुंभ में मची भगदड़ पर चर्चा करवाई जाए। एसपी चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि मृतकों की सही संख्या ना बताना बहुत निंदनीय है। मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या में एक रैली को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि सरकार यह आंकड़ो तो रोज बताती है कि कितने लोगों ने डुबकी लगाई है लेकिन मरने वालों का आंकड़ा आज तक साफ नहीं कर पाई है। अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर 5 तारीख को चुनाव होने हैं। बीजेडी नेता ने भी उठाए सवाल बीजू जनता दल (बीजद) की सदस्य सुलता देव ने महाकुंभ में एआई सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बावजूद मृतकों और लापता श्रद्धालुओं के आंकड़ों को पता करने में सरकार की असमर्थता पर सोमवार को सवाल उठाया। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान देव ने कहा कि इस घटना पर सदन में अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए। देव ने सवाल किया, “राष्ट्रपति ने कुंभ मेले में मृतकों के लिए दुख व्यक्त किया। कुंभ में जो कुछ भी हुआ और जो स्थिति है, उसकी आलोचना होनी चाहिए क्योंकि हम जानते हैं कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं और खो गए हैं और उनका पता नहीं लगाया जा सका है। अगर हम एआई से भीड़ की संख्या देख सकते हैं तो हम तकनीक की मदद से यह क्यों नहीं देख पा रहे हैं कि कितने लोग गायब हैं। इसकी आलोचना क्यों नहीं की जा रही है?” उन्होंने कहा कि जब 27 जुलाई को दिल्ली में जलजमाव की घटना में छात्रों की मौत हो गई तब इस पर अल्पकालिक चर्चा हुई थी तो महाकुंभ की घटना पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती है।

वाइट हाउस में नेतन्याहू से ट्रंप की मुलाकात होने वाली है और इस पर दुनिया भर की नजरें, बंद कर दी UN एजेंसी की फंडिंग

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में इजरायल और हमास के बीच लागू सीजफायर को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू से होने वाली मीटिंग से पहले कहा कि यह तय नहीं है कि सीजफायर बना रहेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि मैं कोई गारंटी नहीं दे सकता कि शांति बनी रहेगी। वाइट हाउस में नेतन्याहू से ट्रंप की मुलाकात होने वाली है और इस पर दुनिया भर की नजरें हैं। इजरायल का कहना है कि वह सीजफायर बढ़ाने को लेकर सहमत है, लेकिन हमास को समझना होगा। वहीं हमास भी इस पर राजी है, लेकिन उसके समर्थक इसे इजरायल की हार के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं, जिससे नेतन्याहू सरकार पर इजरायल के भीतर दबाव बन रहा है। इस बीच एक अहम खबर है यह डोनाल्ड ट्रंप एक नए आदेश पर साइन करने वाले हैं। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अमेरिका हट जाएगा। इसके अलावा फिलिस्तीनी रिफ्यूजियों की मदद करने वाली संस्था UNrwa की फंडिंग में भी रोक की तैयारी है। इस पर बाइडेन प्रशासन ने ही रोक लगा दी थी, जिसे ट्रंप आगे बढ़ाने वाले हैं। इस तरह फिलिस्तीनियों की मदद में भी कटौती होगी और यूएन की संस्था पर भी असर होगा। दरअसल हमास और इजरायल के बीच भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन दोनों की ओर से इसे जीत के तौर पर प्रचारित करने से तनाव की स्थिति बनी हुई है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल से रवाना होने के दौरान कहा कि हम हमास पर जीत को लेकर चर्चा करेंगे। हालांकि उन्होंने यह नहीं समझाया कि वह कैसे हमास से समझौते को जीत बता रहे हैं। वहीं हमास की ओर से भी कहा जा रहा है कि इजरायल का सीजफायर के लिए राजी होना उसकी जीत है। राहत की बात यह है कि हमास ने मध्यस्थ देश मिस्र को बता दिया है कि वह सीजफायर के दूसरे राउंड पर चर्चा के लिए तैयार है। हमास के एक अधिकारी ने कहा कि हम इंतजार कर रहे हैं कि मध्यस्थों की ओर से चर्चा के लिए बुलावा आ जाए। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इजरायल को नरसंहार का दोषी करार दिया जाए। एमनेस्टी के हेड एगनेस कॉलमार्ड ने कहा कि भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन हम बीते 15 महीनों में हुए कत्लेआम को भुला नहीं सकते। उन्होंने कहा कि यदि आपको भविष्य की चिंता है तो गुजरे वक्त का भी ख्याल करना होगा। इजरायल अब भी कर रहा फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक में हमले फिलिस्तीनी न्यूज एजेंसी वाफा का दावा है कि अब भी इजरायल की सेना वेस्ट बैंक के जेनिन शहर में अभियान छेड़े हुए है। उसकी ओर से लगातार 14 दिनों से हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों में अब तक 25 नागरिक भी मारे गए हैं। इसके अलावा दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं। वहीं बड़ी संख्या में घर भी तबाह हुए हैं।

चुनाव से पहले पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी घायल भी हुआ है और 3-4 बदमाशों को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली 5 फरवरी को दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं। मगर एक दिन पहले पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई है। घटना बाहरी दिल्ली के भलस्वा इलाके की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां एक बिल्डिंग में कई बदमाश छिपे हैं। इन्हें पकड़ने पहुंची टीम पर फायरिंग हुई तो पुलिस ने भी जवाबी कार्रावाई की। इस मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी घायल भी हुआ है और 3-4 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को जानकारी मिली थी कि भलस्वा इलाके की एक बिल्डिंग में कुछ बदमाश छिपे हैं। इसके बाद रानीबाग थाने के एसएचओ पुलिस टीम के साथ हथियारों से लैस होकर बदमाशों को पकड़ने गए थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने बदमाशों को हथियार डालने को कहा, लेकिन उन्होंने पुलिस का कहा नहीं माना और फायरिंग करनी शुरू कर दी। सरेंडर करने के बजाय बदमाशों की तरफ से फायरिंग होती देख पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी एक्शन किया। इस बीच बदमाशों की तरफ से हुई अचानक फायरिंग में एक गोली एसएचओ को छूते हुए भी निकली। मगर उन्होंने एक बदमाश को मजबूती से पकड़ लिया और फिर उसे नहीं छोड़ा। थानेदार की गिरफ्त से बचने के लिए बदमाश ने एसएचओ के सिर में हथियार का बट मार दिया, जिससे वो घायल हो गए। पुलिस ने इस मुठभेड़ में बिल्डिंग से 3 से 4 बदमाशों को पकड़ा है। ये लोग किस गैंग से जुड़े हैं, इसके बारे में पुलिस पता लगा रही है। बदमाशों के पास से हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए हैं।

SP-DSP समेत 500 पुलिस वालों ने डाली रेड, मिली 20 करोड़ की अफीम, अफीम की खेती को की नष्ट

रोहतास नशे के खिलाफ बिहार में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने करीब 20 करोड़ की अफीम की खेती को नष्ट किया है। बताया जा रहा है कि रोहतास जिले में बिहार- झारखंड के सीमा पर स्थित नौहट्टा थाना के बेलौजा सोनडीला पर एसपी रौशन कुमार के नेतृत्व मे बड़ी छापेमारी की गई। इस दौरान बीस करोड़ के अफीम की खेती को नष्ट किया गया। इस दौरान शराब की कई भट्ठियों को भी ध्वस्त किया गया है। बताया जा रहा है कि एसपी-डीएसपी, 23 थानाध्यक्ष समेत करीब पांच सौ पुलिस बल छापामारी में शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में पुलिस की इस छापेमारी से हड़कंप मच गया। पुलिस ने इस दौरान अफीम की खेती को नष्ट कर नशे पर जोरदार प्रहार किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रोहतास जिले के सुदूर सिंहपुर गांव में अफीम की यह खेती की जा रही है। इसके बाद पुलिस ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने पूरे इलाके को सीज कर दिया। ट्रैक्टर ला कर पुलिस ने पूरी फसल को नष्ट कर दिया। कहा जा रहा है कि अफीम की यह पूरी खेती 10 एकड़ में की गई थी। 10 एकड़ की अफीम की खेती की कीमत 20 करोड़ बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि फसल के पूरी तरह से तैयार होने के बाद इसकी कीमत और भी ज्यादा हो सकती है। खुले आसमान के नीचे अफीम की यह फसल लहलहा रही थी और अफीम की मोटी-मोटी गांठें लहरा रही थीं। हालांकि, अफीम की यह खेती किसने की थी अभी इसके बारे में पुलिस की तरफ से विशेष जानकारी नहीं दी गई है।

पडोसी देश पाकिस्तान से 400 हिंदुओं की अस्थियां भारत पहुंची, मृतकों को भारत में मिलेगा मोक्ष; हरिद्वार में होगा गंगा विसर्जन

अमृतसर  पाकिस्तान से लगभग 400 हिंदुओं की अस्थियां लेकर एक समूह भारत आया है। ये लोग इन अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित करना चाहते हैं। साथ ही महाकुंभ में प्रयागराज जाकर पवित्र स्नान करने की भी इच्छा रखते हैं। यह तीसरी बार है जब विभाजन के बाद पाकिस्तान से हिंदुओं की अस्थियां भारत लाई गई हैं। पहले 2011 और 2016 में भी अस्थियां लाई जा चुकी हैं। यह समूह सोमवार को अटारी बॉर्डर पहुंचा। दिल्ली के निगम बोध घाट पर 4 से 21 फरवरी तक अस्थियां रखी जाएंगी। 22 फरवरी को हरिद्वार के कनखल में सीता घाट पर विसर्जन होगा। इसके साथ 100 किलो दूध की आहुति भी दी जाएगी। वीजा एक्सटेंशन की उम्मीद पाकिस्तान से आए हिंदू समूह के पास लखनऊ और हरिद्वार जाने का वीजा है। वे प्रयागराज जाने के लिए वीजा एक्सटेंशन की उम्मीद कर रहे हैं ताकि महाकुंभ में पवित्र स्नान कर सकें। कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत राम नाथ मिश्र महाराज ने बताया कि पाकिस्तान में कई हिंदुओं की इच्छा होती है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की जाएं। उनके परिजन उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते हैं। ऐसे में अस्थियों को मंदिरों में कलश में सुरक्षित रखा जाता है। जब पर्याप्त संख्या में कलश इकट्ठे हो जाते हैं, तो भारत का वीजा लेने का प्रयास किया जाता है। इस तरह मृतक या उनके परिवार की अंतिम इच्छा पूरी होती है। राम नाथ मिश्र ने बताया कि वे लगभग 400 कलश लेकर आए हैं। ये अस्थियां पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित की गई हैं। 22 फरवरी को कनखल के सीता घाट पर विसर्जन दिल्ली की श्री देवोथान सेवा समिति के महासचिव विजय शर्मा और अन्य लोग अटारी बॉर्डर पर अस्थियां लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि 4 से 21 फरवरी तक अस्थियों को दिल्ली के सबसे पुराने और बड़े श्मशान घाट, निगम बोध घाट पर रखा जाएगा। लोग यहां आकर श्रद्धांजलि दे सकेंगे। 21 फरवरी को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अस्थियों को हरिद्वार ले जाया जाएगा। 22 फरवरी को कनखल के सीता घाट पर विसर्जन होगा। इसके साथ 100 किलो दूध की आहुति दी जाएगी। यह एक पारंपरिक हिंदू रस्म है। विजय शर्मा ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वे उन हिंदुओं को वीजा जारी करें जो अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार हरिद्वार में करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी मंचों के माध्यम से अपनी मांग उठाएंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि पाकिस्तानी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो।

गुजरात में जल्द लागू होगा UCC,सीएम भूपेन्द्र पटेल ने किया कमेटी का ऐलान

अहमदाबाद  उत्तराखंड के बाद अब एक और बीजेपी शासित राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, गुजरात सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर मंगलवार को घोषणा कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि गुजरात सरकार आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यूसीसी समिति के बारे में घोषणा कर सकती है। इस समिति में तीन से पांच लोग हो सकते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूसीसी को लेकर ऐलान करेंगे। गुजरात में वर्तमान में भाजपा की सरकार है, इसे भाजपा का गढ़ भी माना जाता है। पिछले 30 सालों से यहां की सत्ता पर भाजपा काबिज है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू गुजरात में 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यूसीसी को लेकर अपने इरादों को जाहिर किया था। बता दें कि उत्तराखंड में 27 जनवरी को यूसीसी लागू किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पोर्टल और नियम को लॉन्च किया। उन्होंने बताया था कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करके हम संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी के लिए काफी बातों पर विचार-विमर्श किया। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है। इसके अनुसार, यूसीसी उत्तराखंड और उससे बाहर रहने वाले राज्यों के निवासियों पर लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है। UCC के प्रावधान – विवाह और तलाक के लिए कानून एक समान होगा। एक पुरुष और महिला के बीच विवाह तभी हो सकता है जब वे विवाह के लिए योग्य आयु प्राप्त कर चुके हों और विवाह के समय दोनों पक्षों में से किसी का भी कोई जीवित जीवनसाथी न हो। – कपल को मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और विवाह के लिए सहमति देने में सक्षम होना चाहिए। – UCC के अनुसार, पुरुष की कानूनी विवाह आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष होनी चाहिए, और दोनों पक्ष निषिद्ध संबंधों के दायरे में नहीं होने चाहिए। – UCC 60 दिनों के भीतर विवाह पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाता है। हालांकि, यूसीसी का कहना है कि केवल पंजीकरण न होने के कारण विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा। – जिन व्यक्तियों ने पहले ही नियमों के अनुसार अपना विवाह पंजीकृत करा लिया है, उन्हें फिर से पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें पावती देनी होगी। – विवाह पंजीकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कराया जा सकता है। पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उप-पंजीयक को निर्णय लेना अनिवार्य है। यदि 15 दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं होता है, तो अधिनियम के अनुसार आवेदन स्वचालित रूप से रजिस्ट्रार को भेज दिया जाएगा। – आवेदन खारिज होने पर पारदर्शी अपील प्रक्रिया उपलब्ध है। साथ ही, गलत जानकारी देने पर दंड का प्रावधान है। – राज्य सरकार विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार नियुक्त करेगी। – यह वसीयत और कोडिसिल (वसीयतनामा उत्तराधिकार) के निर्माण और निरस्तीकरण के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है।

अमेरिका से वापस भेजे जा रहे भारतीय, पर इससे भी होने वाला है एक बड़ा फायदा, जाने कैसे

वाशिंगटन अमेरिका से भारत लौट रहे अवैध प्रवासियों की पहली फ्लाइट चर्चा में है लेकिन इस वापसी के पीछे एक और बड़ा फायदा होने वाला है। पंजाब पुलिस ने लगभग 100 कुख्यात अपराधियों की पूरी हिस्ट्री तैयार कर ली है, जिनमें से 20 के अमेरिका में छिपे होने की आशंका है। अब यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिका से अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। अमेरिका में छिपे हैं पंजाब के वॉन्टेड अपराधी दी ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में पंजाब के कई कुख्यात अपराधी छिपे हुए हैं। इनमें सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपी अनमोल बिश्नोई (गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई), पुलिस प्रतिष्ठानों पर ग्रेनेड हमलों में शामिल हैप्पी पासिया, ड्रग तस्कर सरवन भोला, और गोपी नवांशहरिया जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू भी पंजाब में हिंसा फैलाने और अवैध प्रवास को बढ़ावा देने में शामिल हैं, ऐसे में उसके तैयार किए गए गुर्गे भी इस वापसी में शामिल हो सकते हैं। इस लिहाज से अमेरिका द्वारा अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की शुरुआत इस दिशा में भी मददगार साबित हो सकती है। अमेरिकी नीति से मिल सकता है फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अवैध प्रवासियों और अपराधियों पर सख्ती की नीति ने पंजाब पुलिस के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आसान बनाने का मौका दिया है। पुलिस के काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट, एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स पहले से ही इन अपराधियों की फाइलें तैयार कर रही थीं। अब यह जानकारी अमेरिकी एजेंसियों को सौंपने की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। क्या कहती है पंजाब पुलिस? एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “हम अवैध प्रवासियों की वापसी को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं, लेकिन उन ट्रैवल एजेंट्स की जांच करेंगे, जिन्होंने इन लोगों को गैरकानूनी तरीके से विदेश भेजा। प्रत्यर्पण और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जैसी औपचारिकताएं जरूरी हैं, जिन पर तेजी से काम किया जा रहा है।” कौन हैं वो लोग जो लौट रहे हैं? अब तक पंजाब पुलिस को इस बात की कोई जानकारी नहीं मिली है कि अमेरिका से भेजे गए अवैध प्रवासियों में कौन-कौन शामिल हैं। इस पर जानकारी के लिए पुलिस विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के संपर्क में है। पंजाब में अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क को कमजोर करने के लिए यह एक अहम मौका है। यदि अमेरिका ने पंजाब के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की, तो राज्य में संगठित अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। यह सिर्फ अवैध प्रवासियों की वापसी नहीं, बल्कि पंजाब में अपराधियों की धरपकड़ का भी एक बड़ा मौका साबित हो सकता है।

SC ने बांग्लादेशियों उनके देश भेजने के बजाय सुधार गृहों में रखने के संबंध में केंद्र सरकार से जवाब मांगा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने भारत में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की अनिश्चितकालीन हिरासत पर सवाल उठाया है। अदालत ने इन्हें उनके देश भेजने के बजाय पूरे भारत के सुधार गृहों में लंबे समय तक हिरासत में रखने के संबंध में केंद्र सरकार से जवाब मांगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इस बात पर बल दिया कि जब किसी अवैध बांग्लादेशी प्रवासी को पकड़ा जाता है और विदेशी अधिनियम 1946 के अंतर्गत उसे दोषी ठहराया जाता है, तो उसकी सजा पूरी होने के तुरंत बाद उसे निर्वासित किया जाना चाहिए। पीठ ने पूछा कि विदेशी अधिनियम के अंतर्गत अपनी सजा पूरी करने के बाद फिलहाल कितने अवैध आप्रवासियों को विभिन्न सुधार गृहों में हिरासत में रखा गया है? शीर्ष अदालत ने लगभग 850 अवैध प्रवासियों की अनिश्चितकालीन हिरासत पर चिंता व्यक्त की। एससी ने 2009 के परिपत्र के खंड 2 (v) का पालन करने में सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो निर्वासन प्रक्रिया को 30 दिनों में पूरा करने का आदेश देता है। न्यायालय ने इस बात पर भी केंद्र से ठोस स्पष्टीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार से क्या कदम अपेक्षित हैं। ‘सजा पूरी होने के बाद सुधार गृहों में कैद’ माजा दारूवाला बनाम भारत संघ का मामला 2013 में कलकत्ता उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय में भेजा गया था। यह मामला मूल रूप से 2011 में शुरू हुआ जब एक याचिकाकर्ता ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला, जिन्हें उनकी सजा पूरी होने के बाद भी पश्चिम बंगाल सुधार गृहों में कैद रखा गया था। शीर्ष अदालत में स्थानांतरित होने से पहले कलकत्ता एचसी ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था। पीठ ने कहा कि ये प्रथाएं मौजूदा दिशा-निर्देशों के विपरीत हैं, जो तेजी से निर्वासन प्रक्रियाओं की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी।

यूक्रेन को मिलने वाली US मदद पर रोक, जंग के बीच ट्रंप का बड़ा फैसला

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को संकेत दिया कि वह रूस के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी समर्थन इस शर्त पर जारी रखने पर सहमत हैं कि यूक्रेन अपनी धरती पर मिलने वाले दुर्लभ खनिज तत्वों तक अमेरिकी पहुंच को लेकर समझौता करे। ट्रंप ने ‘ओवल ऑफिस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यालय) में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को अपने यूरोपीय सहयोगियों की तुलना में कहीं अधिक सैन्य और आर्थिक सहायता भेजी है। उन्होंने कहा, ‘‘हम यूक्रेन के साथ एक ऐसा समझौता करना चाहते हैं, जिसके तहत हम उन्हें जो कुछ भी दे रहे हैं, उसके बदले में वे हमें अपने दुर्लभ खनिज तत्व दें।’’ ट्रंप ने सुझाव दिया कि उन्हें यूक्रेन की सरकार से यह संदेश मिला है कि वह आधुनिक उच्च प्रौद्योगिकी वाली अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण तत्वों तक अमेरिका को पहुंच प्रदान करने संबंधी एक समझौता करने के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने कहा, ‘मैं धरती पर मिलने वाले इन दुर्लभ खनिज तत्वों का संरक्षण चाहता हूं। हम सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रहे हैं। उनके पास बहुत बढ़िया दुर्लभ खनिज तत्व हैं और मैं इन दुर्लभ खनिज तत्वों का संरक्षण चाहता हूं। वे ऐसा करने के लिए तैयार हैं।’ ट्रंप ने पहले कहा था कि वह युद्ध को तेजी से समाप्त करेंगे औ इसके लिए बातचीत जारी है। ट्रंप ने कहा, ‘हमने रूस और यूक्रेन के मामले में बहुत प्रगति की है। देखते हैं कि क्या होता है। हम उस बेतुके युद्ध को रोकने जा रहे हैं।’ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को कहा कि उनके देश की मौजूदगी के बिना अमेरिका और रूस के बीच कोई भी बातचीत अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ट्रंप प्रशासन के संपर्क में है, लेकिन ये चर्चाएं अभी सामान्य स्तर पर हैं और उनका मानना ​​है कि अधिक विस्तृत समझौते के लिए आमने-सामने की बैठकें जल्द होंगी। जेलेंस्की ने कहा, ‘हमें इस पर और काम करने की जरूरत है।’

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ चाहने वाली सरकार का बजट

बजट विशेष  नीरज मनजीत इस बार के बजट में केन्द्र सरकार ने मिडिल क्लास को दिल खोलकर जैसा तोहफ़ा दिया है, वह अभूतपूर्व और ऐतिहासिक है। भारत का मिडिल क्लास हर साल उत्सव की तरह बजट की प्रतीक्षा करता है। उसकी पहली नज़र इनकम टैक्स के स्लैब पर लगी होती है, कि सरकार ने कितनी राहत दी है। कभी उसे निराशा हाथ लगती है, तो कभी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी छूट हासिल हो भी जाती है। पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि देश का मिडिल क्लास फ्रस्ट्रेशन का शिकार होता चला जा रहा है। वोट हासिल करने की होड़ में राजनीतिक पार्टियों को अनाप-शनाप रेवड़ियां बाँटते देखकर इस फ्रस्ट्रेशन में साल-दर-साल बढ़ोतरी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों दिल्ली की एक जनसभा में इस बात के संकेत दिए थे कि देश के 50-60 करोड़ के विशाल मध्यवर्ग को राहत देना उनकी प्राथमिकता है। इसलिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के आख़िर में जैसे ही टैक्स छूट का ऐलान किया, सत्ता पक्ष के सांसद एक मिनट तक मेजें थपथपाकर स्वागत करते रहे। वैसे नितांत तटस्थ भाव से समीक्षा की जाए, तो यह बड़ी राहत अगले वर्षों में काफी दूरदर्शी क़दम साबित हो सकती है। वित्तमंत्री सीतारमण का कहना है कि नए टैक्स स्लैब से सरकार को तक़रीबन एक लाख करोड़ रुपए का वित्तीय घाटा होगा, मगर भविष्य में इसके बहुत से फ़ायदे भी होंगे। इस छूट का तार्किक विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि इससे मंझोले कारोबारियों और नौकरीपेशा लोगों की जेब में अतिरिक्त पैसा आएगा, उनकी क्रयशक्ति बढ़ेगी, पैसा बाज़ार में ख़र्च होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था के पहिए को तेज गति मिलेगी। पिछले कुछ दशकों से देखा गया है कि मध्यवर्ग के लोग कमाई का एक बड़ा हिस्सा उपभोक्ता वस्तुओं की ख़रीद, सैर-सपाटे और तीज-त्योहारों में दिलेरी से ख़र्च करने लगे हैं। इसे फ़िजूलखर्ची नहीं बल्कि इनकम मैनेजमेंट कहा जाना चाहिए। थोड़ी बहुत बचत का भाव भी उनके अंदर रहता है। बचत का पैसा भी बैंकों अथवा शेयर मार्केट में आएगा। अंततः इसका फ़ायदा भी देश की इकोनॉमी को ही होगा। जैसी कि परंपरा रही है, विपक्ष ने अपने-अपने तरीक़ों से इस बजट की आलोचना की है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में विपक्ष के कुछ सांसदों ने तो बजट का ही बहिष्कार कर दिया। हालांकि बाद में कुछ सांसद अपनी सीटों पर लौट आए। अखिलेश चाहते थे कि पहले महाकुंभ के हादसे पर चर्चा होनी चाहिए। जैसे ही सीतारमण ने बजट भाषण शुरू किया, अखिलेश और कुछ विपक्षी संसद हंगामा करने लगे। अखिलेश के इस रवैये को क़तई ठीक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि पीएम मोदी ने सत्र से पहले ही कह दिया था कि वे महाकुंभ हादसे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार हैं। बजट के पहले दिन तो यह संभव नहीं था। ऐसे में अखिलेश के बहिष्कार अगर कोई मतलब था तो सिर्फ़ यही के वे इस मुद्दे को सुर्ख़ियों में रखना चाहते थे। महाकुंभ के हादसे पर बेशक योगी सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए, मगर जिस तरह से एक तबका अफ़वाहें फ़ैलाने में लगा हुआ है, वह तो बहुत ही ख़तरनाक है। क्या ऐसे लोग चाहते हैं कि कोई बड़ा हादसा हो जाए? बजट पर राहुल गांधी ने बड़ी ही रोचक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बजट “बुलेट इंजरी पर बैंड-एड” यानी “गोली के जख़्म पर पट्टी” लगाने जैसा है। हालांकि राहुल का यह कथन एक रस्म अदायगी के अलावा और कुछ नहीं है, मगर यदि इसे सही मान भी लिया जाए, तो भाजपा और निर्मला सीतारमण ने कम-से-कम मिडिल क्लास के जख़्मों पर मरहम पट्टी लगाने की कोशिश तो की। 2014 से पहले कांग्रेस की सरकारें किस क़दर मध्यवर्ग की उपेक्षा करती थीं, यह भी हमने अच्छी तरह देखा है। मिसाल के तौर पर हम यहाँ 2011, 2012 और 2013 के बजट के इनकम टैक्स के आंकड़े पेश कर रहे हैं। 2011 से पहले कांग्रेस सरकार में 1 लाख 60 हजार तक की इनकम टैक्स फ्री थी। इस वर्ष वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसमें 20 हजार की बढ़ोतरी करते हुए 1 लाख 80 हजार तक कर दिया था। 2012 में पी चिदंबरम ने इसे बढ़ाकर 2 लाख की इनकम टैक्स फ्री कर दी। 2013 में कांग्रेस सरकार ने कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। अलबत्ता 2 से 5 लाख के स्लैब में 2 हजार रुपये की छूट दी गई थी। ज़ाहिर है कि मिडिल क्लास के घावों पर तरीक़े का फ़ाहा रखना भी कांग्रेस की प्राथमिकता में नहीं था। 2014 में भाजपा सरकार के आते ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने टैक्स फ्री इनकम में एकमुश्त 50 हजार की बढ़ोतरी करके ढाई लाख कर दी थी। इसके बाद तक़रीबन हर साल टैक्स स्लैब में मिडिल क्लास को कुछ-न ₹-कुछ राहत दी गई है। 2020 में तो एक बार फिर एकमुश्त छूट देते हुए 5 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री कर दी गई। वित्तमंत्री थीं निर्मला सीतारमण। 2023 में और इस साल तो मोदी सरकार ने कमाल ही कर दिया। 2023 में 7 लाख की आय और इस बार सीधे 5 लाख की छलांग और 12 लाख की इनकम टैक्स फ्री कर दी गई। निःसंदेह इसका श्रेय पीएम मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को दिया जाएगा। इस छलांग के अलावा भी इस बजट में बहुत कुछ है। सच तो यह है कि यह बजट गरीब, किसान, लोअर मिडिल क्लास, मंझोले व्यापारियों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों का भला चाहने वाली “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सिद्धांत पर चलने वाली सरकार का सर्वांगीण बजट है। बजट में युवाओं के स्टार्टअप और महिला उद्यमियों के लिए बड़ी रक़म रखी गई है। ‘मेक इन इंडिया एंड मेक फ़ॉर वर्ल्ड’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिए व्यापारियों के लिए लोन गारंटी लिमिट 5 से 10 करोड़ की गई है। साथ में 72 लाख नौकरियां पैदा करने का संकल्प है। भारतीय जनता पार्टी और पीएम मोदी पिछले दस वर्षों से भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का सपना साकार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए हर युवा को वे संदेश देते हैं कि वे बजाए सरकारी नौकरियों के पीछे दौड़ने के, किसी स्टार्टअप का मालिक बनें और अपने साथ अपने गाँव के युवाओं को भी रोजगार देकर आगे … Read more

रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में पैसेंजर रेवेन्यू के 16% की ग्रोथ के साथ 92,800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया

नई दिल्ली  रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में पैसेंजर रेवेन्यू के 16% की ग्रोथ के साथ 92,800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है। रेलवे को उम्मीद है कि वंदे भारत समेत एसी3 क्लास और प्रीमियम ट्रेनों की बढ़ती मांग से यात्रियों से होने वाली इनकम में उछाल आएगी। इसके उलट माल ढुलाई से होने वाली आय 4.4% की मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है। बजट दस्तावेजों के मुताबिक रेलवे के कुल रेवेन्यू में पैसेंजर इनकम का हिस्सा 2022-23 में 26.4% था जो चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (RE) में बढ़कर 28.6% हो गया है और वित्त वर्ष 2026 में इसके 30.6% तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि माल ढुलाई से होने वाली इनकम रेलवे की कमाई का मुख्य जरिया बनी हुई है। डेटा से पता चलता है कि मार्च तक एसी3 टिकटों से होने वाली इनकम 30,089 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष से लगभग 20% अधिक है। रेलवे ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026 में इस सेगमेंट से रेवेन्यू में 23% की बढ़ोतरी होगी और 37,115 करोड़ रुपये की इनकम होगी। दस्तावेजों के मुताबिक दो वर्षों में एक्जीक्यूटिव क्लास और एसी चेयर कार क्लास से होने वाली इनकम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और आगे भी इसमें तेजी आने का अनुमान है। सभी क्लास से फायदा मार्च तक एक्जीक्यूटिव क्लास में सफर करने वाले यात्रियों से राजस्व 698 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 42% अधिक है। वित्त वर्ष 2026 में इसके बढ़कर 987 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी तरह एसी चेयर कार से रेवेन्यू मार्च तक 4,280 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो 2024-25 के बजट अनुमान (BE) को पार कर जाएगा और पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 28.6% की वृद्धि होगी। वित्त वर्ष 2026 के अनुमान के अनुसार इनकम करीब 5,626 करोड़ रुपये होगी, जो 31% की वृद्धि है। रेल अधिकारियों ने कहा कि पैसेंजर रेवेन्यू में बढ़ोतरी सभी क्लास से होगी क्योंकि रेलवे गरीब और निम्न मध्यम वर्ग की यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए सामान्य कोच वाली अधिक ट्रेन चलाएगा। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 के लिए इंटर-सिटी ट्रेनों में जनरल कोच से अनुमानित राजस्व 1,517 करोड़ रुपये है, जो पिछले वित्त वर्ष से लगभग दोगुना है। किराया बढ़ेगा? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किराये में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना को खारिज किया है। उनका कहना है कि पैसेंजर रेवेन्यू में ग्रोथ यात्रियों की संख्या में वृद्धि से प्रेरित होगी। यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ रही है और इस साल कुल यात्रियों की संख्या बढ़कर 7.5 अरब रहने की उम्मीद है। अगले साल यह संख्या 7.8-7.9 अरब यात्रियों के आसपास होगी। इसलिए रेवेन्यू ग्रोथ पूरी तरह से यात्रियों की संख्या पर निर्भर करेगी।  

WhatsApp के 90 अकाउंट हैक, Meta ने Paragon को भेजा कानूनी नोटिस

नई दिल्ली WhatsApp ने रिपोर्ट किया है कि दुनिया भर (दो दर्जन देशों) के यूजर्स के अकाउंट्स को एक इजरायली स्पाइवेयर कंपनी, Paragon Solutions द्वारा निशाना बनाया गया है। Meta अधिकारियों ने खुलासा किया कि यह नया हमला पहले की उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें इजरायली स्पाइवेयर कंपनियों द्वारा इसी तरह के हैकिंग घटनाओं का उल्लेख किया गया था। Meta ने Paragon Solutions को एक “सीज़ एंड डेसिस्ट” (काम रोकने का कानूनी नोटिस) पत्र भी जारी किया है, जिसमें उनकी गतिविधियों को तुरंत बंद करने की मांग की गई है। अपने बयान में, Meta अधिकारियों ने यूजर्स को आश्वस्त किया कि वे उनके अकाउंट्स की गोपनीयता की रक्षा करने और प्लेटफॉर्म पर संचार को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इन हमलों के बावजूद, Meta ने जोर देकर कहा है कि वह यह सुनिश्चित करने के अपने प्रयास जारी रखेगा कि यूजर्स बाहरी हस्तक्षेप के बिना निजी रूप से कॉन्टैक्ट कर सकें। 90 अकाउंट्स पर पड़ा असर इस हमले से लगभग 90 यूजर्स प्रभावित हुए हैं, जो मुख्य रूप से पत्रकार और नागरिक समाज के सदस्य हैं। हालांकि, Meta ने अभी तक उन यूजर्स के बारे में कोई विशिष्ट जानकारी साझा नहीं की है, जिनको निशाना बनाया गया था। WhatsApp के अनुसार, स्पाइवेयर को इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों के रूप में भेजा गया था, जिनमें मैलिशियस सॉफ़्टवेयर मौजूद था। यह प्रक्रिया बिना किसी प्रत्यक्ष इंटरैक्शन के पूरी की गई, यानी हैकर्स और टारगेट्स के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ। इस हमले के अधिकांश पीड़ित यूरोप में स्थित हैं, लेकिन प्रभावित देशों की सटीक लिस्ट का खुलासा नहीं किया गया है। Meta का दावा है कि वह इस हमले को बीच में ही रोकने में सक्षम रहा, हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसने Paragon को इस हैकिंग प्रयास के स्रोत के रूप में कैसे पहचाना। पत्रकारों को बनाया गया निशाना फिलहाल, Paragon Solutions ने इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कनाडा स्थित इंटरनेट निगरानी समूह Citizen Labs के अनुसार, Paragon सरकारों को उन्नत निगरानी सॉफ़्टवेयर बेचने के लिए जाना जाता है, जिसका उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराध रोकथाम के लिए किया जाता है। हालांकि, इन उपकरणों का उपयोग पत्रकारों और नागरिक समाज के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए किया जाना गंभीर चिंताओं को जन्म देता है। यह हालिया घटना एक अन्य विवादास्पद इजरायली स्पाइवेयर कंपनी Pegasus के उपयोग के बाद सामने आई है, जिसने अतीत में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के WhatsApp अकाउंट्स की हैकिंग को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। यह मुद्दा इस बात को रेखांकित करता है कि स्पाइवेयर उपकरणों की बिक्री और उनके उपयोग को लेकर नैतिक चिंताएं बनी हुई हैं, विशेष रूप से जब इनका उपयोग मीडिया और नागरिक समाज के सदस्यों की गोपनीयता भंग करने के लिए किया जाता है।

तकनीकी गड़बड़ी के कारण स्‍पेस में अटकी NVS-02 नेविगेशन सेटेलाइट, 100वें मिशन को लगा झटका, अब क्‍या करेगा ISRO?

बेंगलुरु ISRO यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के 100वें रॉकेट मिशन को झटका लगा है। खबर है कि बुधवार को लॉन्च हुए मिशन को रविवार को तकनीकी परेशानी का सामना करना पड़ा है। 2250 किलो वजनी सैटेलाइट नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टलेशन या NavIC का हिस्सा थी। माना जाता है कि NavIC सीरीज की कई सैटेलाइट्स 2013 से लेकर अब तक उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ISRO के NVS-02 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के प्रयासों को उस समय झटका लगा जब अंतरिक्ष यान में लगे ‘थ्रस्टर्स’ काम नहीं कर सके। स्पेस एजेंसी ने रविवार को घटना की जानकारी दी है। इसरो ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि अंतरिक्ष यान में लगे ‘थ्रस्टर्स’ के काम नहीं करने के कारण एनवीएस-02 उपग्रह को वांछित कक्षा में स्थापित करने का प्रयास सफल नहीं हो सका। भारत की अपनी अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले एनवीएस-02 उपग्रह को 29 जनवरी को जीएसएलवी-एमके 2 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसरो ने यह भी कहा, ‘सैटेलाइट सिस्टम स्वस्थ हैं और सैटेलाइट फिलहाल एलिप्टिकल ऑर्बिट में है। एलिप्टिकल ऑर्बिट में नेविगेशन के लिए सैटेलाइट के इस्तेमाल के लिए मिशन की वैकल्पिक रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।’ खबरें हैं कि साल 2013 के बाद से अब तक NavIC सीरीज की कुल 11 सैटेलाइट लॉन्च की गई हैं, जिनमें से 6 पूरी या आशिंक रूप से असफल हो गई हैं। भारत ने साल 1999 में पाकिस्तान के साथ करगिल युद्ध के बाद NavIC को विकसित किया था। युद्ध के दौरान भारत को GPS डेटा देने से इनकार कर दिया गया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने GPS का एक क्षेत्रीय संस्करण बनाने का वादा किया था। क्‍या था इसरो का प्‍लान? इसरो के सूत्रों का कहना है कि सेटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने के बाद वो फायर करने में विफल रहा. इसरो ने कहा, “सेटेलाइट सिस्‍टम एक दम हेल्दी है और वो मौजूदा वक्‍त में अण्डाकार कक्षा में है. अण्डाकार कक्षा में नेविगेशन के लिए उपग्रह का उपयोग करने के लिए वैकल्पिक मिशन रणनीतियों पर काम किया जा रहा है.” इसरो का NVS-02 सेटेलाइट को पृथ्वी के चारों ओर एक अण्डाकार कक्षा में स्थापित करने का इरादा था. बताया गया था कि इसकी अपोजी यानी सबसे दूर का बिंदू 37,500 किमी रहेगा जबकि पेरीजी यानी निकटतम बिंदू और 170 किमी की होगी. 29 जनवरी को GSLV द्वारा बहुत सटीक इंजेक्शन ने सेटेलाइट को एक ऐसी कक्षा में स्थापित कर दिया था जो लक्ष्‍य किए गए अपोजी से 74 किमी और पेरीजी से 0.5 किमी दूर थी. भारत के लिए क्‍यों अहम है यह मिशन? भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (INSACI)आईएनएसपीएसीई) के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने लॉन्‍च के वक्‍त कहा था, ‘‘यह मिशन भारत की अंतरिक्ष एक्‍सप्‍लोरेशन की दशकों पुरानी विरासत और हमारे भविष्य के संकल्प को भी दर्शाता है. निजी प्रक्षेपणों के साथ-साथ, मैं अगले पांच वर्षों में अगले 100 प्रक्षेपणों को देखने के लिए उत्सुक हूं.’’ हैदराबाद स्थित अनंत टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सीएमडी सुब्बा राव पावुलुरी ने कहा था कि 100वां प्रक्षेपण न केवल इसरो की तकनीकी क्षमता का उत्सव है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं का भी प्रदर्शित करता है. ‘‘पिछले कुछ वर्षों में हमें इसरो के अनेक मिशनों में योगदान देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जहां हमने अत्याधुनिक वैमानिकी, प्रणालियां और समाधान उपलब्ध कराए हैं, जिन्होंने इन प्रयासों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.’’ इसरो ने क्या कहा, पहले यह जान लीजिए इसरो के पूर्व साइंटिस्ट विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनवीएस-02 उपग्रह को उसकी मनचाही कक्षा में स्थापित करने के इसरो के प्रयासों को झटका लगा है। दरअसल, अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर को एक्टिव नहीं किया जा सका है। एनवीएस-02 उपग्रह भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन सिस्टम यानी नाविक के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे 29 जनवरी को जीएसएलवी-एमके 2 रॉकेट से श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था। थ्रस्टर्स को फायर करने के लिए वॉल्व नहीं खुल पाए इसरो के पूर्व साइंटिस्ट विनोद कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि किसी भी सैटेलाइट को एक तय कक्षा में स्थापित किया जाता है। इसरो के इस सैटेलाइट को भी तय ऑर्बिट में ही कायम किया जाना था। मगर, वक्त पर इसके थ्रस्टर्स फायर नहीं कर पाए। ये थ्रस्टर्स एक तरह से छोटे-छोटे रॉकेट होते हैं। इनमें ऑक्सीडाइजर को प्रवेश देने वाले वॉल्व नहीं खुल पाए, जिससे फायरिंग नहीं हुई। दीर्घवृत्ताकार ऑर्बिट में नेविगेशन की खातिर सैटेलाइट का उपयोग करने के लिए वैकल्पिक मिशन रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक कवर करेगा इसरो इससे पहले ISRO ने बताया था कि NVS-02 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया है। यह सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का हिस्सा है, जो भारत में GPS जैसी नेविगेशन सुविधा को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसरो के पूर्व साइंटिस्ट विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह सिस्टम कश्मीर से कन्याकुमारी, गुजरात से अरुणाचल तक का हिस्सा कवर करेगा। साथ ही साथ कोस्टल लाइन से 1500 किमी तक की दूरी भी कवर होगी। इससे हवाई, समुद्री और सड़क यात्रा के लिए बेहतर नेविगेशन हेल्प मिलेगी। अभी किस स्थिति में है नाविक सैटेलाइट विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, सैटेलाइट अब अंडाकार भू-समकालिक स्थानांतरण कक्ष (GTO) में पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है, जो नेविगेशन सिस्टम के लिए ठीक नहीं है। इसरो ने कहा, सैटेलाइट सिस्टम ठीक है और सैटेलाइट मौजूदा वक्त में अंडाकार ऑर्बिट में है। यह ऑर्बिट में नेविगेशन के लिए सैटेलाइट का उपयोग करने के लिए वैकल्पिक मिशन रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।  

मंदिर के कपाट आगामी 4 मई को सुबह 6 बजे प्रात: विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

टिहरी उत्तराखंड़ में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर टिहरी राज दरबार नरेंद्रनगर में गणेश पूजन के साथ विश्व प्रसिद्ध धाम भगवान बदरीनाथ के कपाट खोलने की तिथि घोषित कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक शुभ लग्न के अनुसार मंदिर के कपाट आगामी 4 मई को सुबह 6 बजे प्रात: विधिवत पूजा-अर्चना के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। भगवान बदरी विशाल के महाभिषेक के लिए तिलों का तेल 22 अप्रैल को पिरोया जाएगा। उसी दिन राज दरबार से गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा शुरु होगी। इसके साथ ही चारधाम यात्रा के भी विधिवत शुरुआत हो जाएगी। नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में बसंत पंचमी पर राज पुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने गणेश, पंचांग और चौकी पूजन के बाद महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्म कुंडली का अध्ययन और ग्रह नक्षत्रों की दशा देखकर भगवान बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि घोषित की। भगवान बदरी विशाल के महाभिषेक के लिए स्थानीय सुहागिन महिलाएं महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह के नेतृत्व में 22 अप्रैल को राजदरबार में तिलों का तेल निकालेंगी। टिहरी के नरेश महाराजा मनुजेंद्र शाह बताया कि चार मई को प्रातः: 6:00 बजे श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे। उन्होंने देश के श्रद्धालुओं से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में सुखद एवं सफल यात्रा करें। राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने बताया कि महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्म कुंडली के आधार पर यह तिथि तय की गई है। धार्मिक पंचायत के उपाध्यक्ष भास्कर डिमरी ने बताया कि 22 अप्रैल को राजदरबार में सुहागिन महिलाओं द्वारा तिलों का तेल पिरोया जाएगा।  

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