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‘वैकुंठ द्वार दर्शन’ के टिकट बांटते समय हादसा, तिरुपति बालाजी मंदिर में भगदड़ में अब तक 6 लोगों की मौत

हैदराबाद/चित्तूर। आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में हुई भगदड़ में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है और कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हादसा तब हुआ जब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में ‘वैकुंठ द्वार दर्शन’ के टिकट के लिए पहुंची थी। यह दर्शन 9 जनवरी से शुरू होने वाले था, लेकिन टिकट के वितरण को लेकर हुई अव्यवस्था और भीड़ के दबाव ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी, जिससे यह हादसा हुआ। तिरुपति मंदिर की प्रशासनिक संस्था तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने इस घटना पर खेद व्यक्त किया है और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। टीटीडी के अधिकारियों का कहना है कि इस हादसे के बाद सभी सुरक्षा उपायों की पुनः समीक्षा की जाएगी। इस घटना के बाद, मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा इंतजामों को बढ़ाने और भगदड़ से बचने के लिए उपाय शुरू कर दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो। मंदिर प्रशासन ने यह भी कहा कि भविष्य में टिकटों की बिक्री के लिए अधिक सख्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि लोगों को इस तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। टीटीडी के अनुसार, “वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए टिकटों के वितरण को लेकर भारी भीड़ और व्यवस्था में खामियों के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।” टीटीडी बोर्ड मेंबर भानु प्रकाश रेड्डी ने कहा, “मंदिर में एकादशी दर्शन के लिए टोकन बांटे जा रहे थे, और इसके लिए हम ने 91 काउंटर खोले थे। यह बहुत दुखद है कि भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 6 लोगों की मौत हो गई और 40 लोग घायल हो गए। हम सभी को मेडिकल फेसेलिटी दे रहे हैं। आज तक टीटीडी के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है। मैं सभी श्रद्धालुओं से माफी मांगता हूं।” कब हुई घटना और क्या थे कारण श्री वेंकटेश्वर मंदिर के अधिकारियों ने 9 जनवरी से ‘वैकुंठ द्वार दर्शन’ के लिए टिकट जारी करने की योजना बनाई थी। इस दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह था, क्योंकि यह विशेष दिन है और मंदिर में इस दिन विशेष पूजा होती है। जानकारी के मुताबिक, टिकट लेने के लिए लगभग 4 हजार लोग लाइन में लगे थे, और काउंटर की संख्या सिर्फ 91 थी। इसी बीच भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। लोग इधर उधर तेजी से भागने लगे, जिसके चलते कई लोग जमीन पर गिर पड़े। इसी के चलते 6 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायल श्रद्धालुओं में से कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनमें से कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। इस दुर्घटना के बाद कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तिरुपति मंदिर प्रशासन की आलोचना की है। उनका कहना है कि मंदिर प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहले से ही ठोस व्यवस्था करनी चाहिए थी। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर टिकटों की बिक्री पहले से ही निर्धारित थी, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में क्यों जमा हो गए? कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें लगता था कि टिकट नहीं मिलेंगे, इसीलिए उन्होंने 8 जनवरी से ही मंदिर पहुंचना शुरू कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि टोकन प्रणाली की अव्यवस्था के कारण यह घटना हुई। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ने जताया दुख आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि इस हादसे से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, “मैं हालात पर करीब से नजर बनाए हुआ हूं। मैं पीड़ितों के परिवार से गुरुवार सुबह मुलाकात करूंगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख जताते हुए कहा, “आंध्र प्रदेश के तिरुपति में भगदड़ से आहत हूं। मेरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द ठीक हो जाएं। आंध्र प्रदेश सरकार प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा, “तिरुपति में हुई भगदड़ बेहद दुखद है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। मैं कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूं कि वे इस कठिन समय में हर संभव सहायता प्रदान करें।” कहां है तिरुपति मंदिर और क्या है इसका धार्मिक महत्व तिरुपति मंदिर, आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, जो भगवान श्री वेंकटेश्वर को समर्पित है। तिरुपति का यह मंदिर विश्वभर में सबसे अमीर और सबसे अधिक दर्शनार्थियों वाला मंदिर माना जाता है। यहां प्रत्येक दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं और भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करते हैं। मंदिर तिरुमाला पर्वत की चोटी पर स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पैदल यात्रा भी करते हैं, जिसे “तिरुमाला पर्वत यात्रा” कहा जाता है। इस मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता अत्यधिक है और इसे वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है। तिरुपति मंदिर का प्रमुख उत्सव “वैकुंठ द्वार दर्शन” है, जो हर साल खास महत्व रखता है, जहाँ लाखों लोग भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं। मंदिर का प्रशासन तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा किया जाता है, जो मंदिर से संबंधित सभी गतिविधियों का संचालन करता है। तिरुपति मंदिर का आर्थिक योगदान भी बहुत बड़ा है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में शामिल है।

मिनट दर मिनट विकराल रूप ले रही लॉस एंजिल्‍स की आग, लाखो हुए बेघर

लॉस एंजिल्‍स अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग अब भयानक रूप ले चुकी है। यह आग फैलकर लॉस एंजेलिस और अब हॉलीवुड हिल्स तक जा पहुंची है। इसके कारण लगभग एक लाख लोग घर छोड़ने पर विवश हो गए हैं। वहीं अब तक 5 लोगों की मौत भी हो गई है। लॉस एंजेलिस इलाके में लगी आग के कारण अधिकारियों ने लाखों लोगों को जल्द से जल्द घर खाली करने को कहा है। चारों ओर धुएं और धूल का गुबार देखा जा रहा है। एक्टर स्टीव गुटेनबर्ग ने कैलिफोर्निया में लगी आग को बेहद बुरा बताया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि अब तक की जिंदगी में मैंने इससे बुरा कुछ नहीं देखा। पेसिफिक पैलिसेड्स, ईटन और हर्स्ट में फैली आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टर को तैनात कर दिया गया है। हेलीकॉप्टर से पानी की बौछार की जा रही है। पैलिसेड्स में 15 हजार एकड़, ईटन में 10 हजार एकड़ और हर्स्ट में 500 एकड़ से ज्यादा का इलाका जलकर खाक हो गया। हजारों अग्निशमन कर्मचारी आग पर काबू पाने में जुटे हुए हैं। लॉस एंजेलिस के अग्निशमन अधिकारी क्रिस्टन क्रोले ने कहा कि हम अभी खतरे से कतई बाहर नहीं हैं। लोग अपने वाहन सड़कों पर ही छोड़कर भागने लगे। इमरजेंसी सेवाओं के लिए बुलडोजर से इन वाहनों को बताया गया। गेटी विला के मैदान पर कुछ पेड़ और वनस्पति जल गए थे, लेकिन स्टाफ व संग्रहालय संग्रह सुरक्षित थे, क्योंकि आसपास की झाडि़यों को काट दिया गया था। सबसे पहले आग 7 जनवरी को लगी थी। तेज हवाओं के कारण यह फैलती गई। कई स्क्वायर किलोमीटर का इलाका जलकर राख हो गया है। आग बुझाने की कोशिशें की जा रही हैं। स्थिति इस कदर विकट थी कि उससे निपटने के लिए लास एंजेलिस अग्निशमन विभाग को अपने उन कर्मियों से भी मदद की अपील करनी पड़ी, जो ड्यूटी पर नहीं थे। हालात को देखते हुए राष्ट्रपति जो बाइडन को अपनी इटली की यात्रा रद करनी पड़ी। गवर्नर गेविन न्यूजाम ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि कई घर जल गए हैं। उन्होंने वहां आपातकाल की घोषणा कर दी।

प्रदेश सरकार ने सात दिनों में मांगी रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 को हुए दंगे की दोबारा खुलेगी फाइल

संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 में हुए दंगे की फाइल फिर से खुलेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश सरकार ने सात दिनों में रिपोर्ट मांगी है। संभल प्रशासन और पुलिस मामले की जांच करेंगे। बता दें कि दिसंबर 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल दंगे पर वक्तव्य दिया। इसके बाद से इस दिशा में काम तेज हो गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिसंबर को विधानसभा में कहा था कि 1947 से लेकर अभी तक संभल में 209 हिंदुओं की जान दंगों के चलते गई है। संभल में 29 मार्च 1978 को दंगे के दौरान आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस घटना में कई हिंदू मारे गए थे। भय के चलते 40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा। पलायन के गवाह अभी मौजूद हैं। मंदिर में कोई पूजा करने वाला बचा नहीं था। घटना के 46 साल बाद अभी तक किसी को सजा तक नहीं मिली। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सक्रियता से 46 साल से बंद मंदिर के पट खुले। इसके बाद से अधिकारी संभल दंगों से जुड़ी फाइलों को खंगालने लगे थे।

हॉट डॉग के नॉर्थ कोरिया के लोग दिवाने हो रहे हैं, इस बीच वहां के तानाशाह किम जोंग-उन ने हॉट डॉग को देश में बैन किया

नई दिल्ली इनदिनों अमेरिका के फेमस स्ट्रीट फूड हॉट डॉग के नॉर्थ कोरिया के लोग दिवाने हो रहे हैं. पिछले कुछ सालों से ये स्ट्रीट फूड वहां काफी लोकप्रिय हुआ है. इसी बीच वहां के तानाशाह ने किम जोंग-उन ने हॉट डॉग को देश में बैन कर दिया. इसके पीछे की जो वजह बताई, वो भी काफी मजेदार है. उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने देश में हॉट डॉग खाने और बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसे पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को खत्म करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है. अब, अगर कोई व्यक्ति हॉट डॉग पकाते या बेचते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे देश के कुख्यात श्रम शिविरों में सजा भुगतनी पड़ सकती है. हॉट डॉग पर प्रतिबंध क्यों? कहा जा रहा है कि यह प्रतिबंध दक्षिण कोरिया से प्रेरित अमेरिकी व्यंजन ‘बुदाए-जिगे’ के बढ़ते चलन के कारण लगाया गया है. बुदाए जिगे को यहां ‘आर्मी बेस स्टू’ भी कहा जाता है. इसमें हॉट डॉग और स्पैम जैसे मांस शामिल होते हैं. ये एक तरह से हॉट डॉग ही है. 1950 में कोरियाई युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों द्वारा छोड़े गए मांस का उपयोग इसे बनाया जाता था. स्ट्रीट वेंडरों को चेतावनी उत्तर कोरिया में यह व्यंजन 2017 के आसपास लोकप्रिय होना शुरू हुआ. लेकिन अब इसे ‘पूंजीवादी संस्कृति’ का प्रतीक मानते हुए इसे पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.उत्तर कोरिया के उत्तरी प्रांत रयांगगांग के एक विक्रेता ने बताया कि बाजार में बुदाए-जिगे बेचना बंद हो चुका है. अधिकारियों ने घोषणा की है कि अगर कोई इस फूड आयटक को बेचते हुए पकड़ा गया, तो उसकी दुकान को बंद कर दी जाएगी. यहां तलाक पर भी सख्ती इसके अलावा, उत्तर कोरिया में तलाक लेने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, तलाक को सरकार ‘विरोधी समाजवादी कृत्य’ मानती है और किसी भी कानूनी तलाक को सरकार की स्वीकृति की आवश्यकता होती है.तलाक लेने वालों को एक से छह महीने तक श्रम शिविर में भेजा जा रहा है. महिला तलाकशुदाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कठोर सजा दी जा रही है. दक्षिण प्योंगन प्रांत की एक तलाकशुदा महिला ने बताया कि श्रम शिविर में लगभग 80 महिलाएं और 40 पुरुष कैद हैं. इनमें से करीब 30 पुरुष और महिलाएं तलाक के कारण सजा भुगत रहे हैं. महिलाओं को पुरुषों से अधिक लंबी सजा दी जा रही है. देश में लागू हैं कई कठोर नीतियां और प्रतिबंध उत्तर कोरिया में पश्चिमी और दक्षिण कोरियाई संस्कृति के प्रभाव को रोकने के लिए कई कठोर कदम उठाए गए हैं. इन कदमों में पारंपरिक व्यंजनों और रीति-रिवाजों को बढ़ावा देने और बाहरी प्रभावों पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इन प्रतिबंधों का मकसद जनता पर नियंत्रण बनाए रखना और विदेशी संस्कृति के प्रवेश को रोकना है. यह उत्तर कोरियाई सरकार की कठोर नीतियों का एक और उदाहरण है.

केंद्रीय बजट 2025 में 15 लाख रुपये तक सालाना इनकम वालों को टैक्‍स छूटका लाभ मिल सकता है, क्या बजट में होगा ऐलान?

नई दिल्‍ली वित्त मंत्री न‍िर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का आगामी बजट पेश कर सकती हैं. इस बीच, चर्चा है कि केंद्र सरकार इस बजट (Union Budget 2025) में आम लोगों के लिए बड़ी छूट का ऐलान कर सकता है. केंद्रीय बजट 2025 में 15 लाख रुपये तक सालाना इनकम वालों को टैक्‍स छूट (Tax Deduction) का लाभ मिल सकता है. टैक्‍स में छूट के ऐलान से डिस्‍पोजेबल इनकम में बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है, जिससे खपत बढ़ेगी.  कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि सरकार वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू की गई नई आयकर व्यवस्था (New Tax Regime) में बदलाव पर विचार कर रही है, जिसने सरल स्‍ट्रक्‍चर के कारण 70 फीसदी से ज्‍यादा टैक्‍सपेयर्स को अपनी तरफ आकर्षित किया है. अभी क्‍या है टैक्‍स स्‍लैब? मौजूदा समय में नई व्यवस्था के तहत 3 लाख रुपये तक की आय टैक्‍स फ्री है, जबकि 3 लाख से 6 लाख रुपये के बीच की आय पर 5%, 6-9 लाख रुपये पर 10%, 9-12 लाख रुपये पर 15%, 12-15 लाख रुपये पर 20% और 15 लाख रुपये से अधिक पर 30% टैक्‍स लगता है. 75,000 रुपये की स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन यह तय करती है कि 7.75 लाख रुपये तक की इनकम टैक्‍स फ्री है. वहीं 7 लाख तक सालाना इनकम होने पर कोई टैक्‍स देने की जरूरत नहीं होगी. टैक्‍स स्‍लैब में क्‍या हो सकता है बदलाव? रिपोर्ट्स बताती हैं कि मूल छूट सीमा 3 लाख रुपये से बढ़कर 4 लाख रुपये हो सकती है. साथ ही अन्य स्लैब में भी समायोजन किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, 5% स्लैब में 4 लाख रुपये से 7 लाख रुपये तक की इनकम शामिल हो सकती है, जिससे 14 लाख रुपये तक की इनकम वालों के लिए यह टैक्‍स व्यवस्था अधिक फायदेमंद हो जाएगी. क्‍यों मिल सकती है छूट? सूत्रों के अनुसार, सरकार का फोकस 13-14 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्तियों पर बोझ को कम करने पर है. खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां महंगाई ने खरीदारी की को कम किया है. इस बदलाव का मुख्‍य उद्देश्‍य शहरी टैक्‍सपेयर्स को राहत देना है. ये टैक्‍सपेयर्स बढ़ती महंगाई का सामना करते हैं और देश की इकोनॉमी में बड़ा योगदान देते हैं. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि टैक्‍स स्लैब में 1 लाख रुपये की सीमा बढ़ाकर संशोधन करने से टैक्‍स का बोझ काफी हद तक कम हो सकता है, जिससे अधिक खर्च को बढ़ावा मिलेगा. टैक्‍स रेवेन्‍यू में लगातार हो रहा इजाफा अप्रैल-नवंबर वित्त वर्ष 2025 के दौरान व्‍यक्तिगत टैक्‍स कलेक्‍शन 25% बढ़कर 7.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिससे सरकार इन सुधारों को लागू करने के लिए मज़बूत स्थिति में है. कॉर्पोरेट टैक्‍स के विपरीत, व्यक्तिगत टैक्‍स लगातार लक्ष्य से ज्‍यादा रही हैं, जिससे सरकार का खजाना भरा है. इसलिए टैक्‍स कलेक्‍शन भी टैक्‍स छूट के लिए संकेत दे रहा है.

पीएम मोदी 13 जनवरी को कश्मीर आएंगे और जेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन करेंगे

श्रीनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी को जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे और श्रीनगर-सोनमर्ग मार्ग पर जेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन करेंगे। सुरंग के माध्यम से सोनमर्ग तक हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पीएम मोदी 13 जनवरी को यहां आएंगे और जेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन करेंगे। यह सुरंग गगनगीर से सोनमर्ग तक रोड को बाईपास करेगी, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पूरे साल हिल स्टेशन पर आने की सुविधा मिलेगी। गगनगीर-सोनमर्ग खंड भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण बंद हो जाता है, जो हर साल इस क्षेत्र में होता है। जेड-मोड़ सुरंग जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में गगनगीर और सोनमर्ग के बीच 6.5 किलोमीटर लंबी 2-लेन वाली सड़क सुरंग है। पहले जो रोड उपयोग में थी, वह हिमस्खलन से प्रभावित थी और अक्सर कई महीनों तक बंद हो जाती थी। लेकिन जेड-मोड़ सुरंग सोनमर्ग पर्यटक शहर को सभी मौसमों में जोड़ने वाली सुविधा प्रदान करती है। इस 6.5 किलोमीटर लंबी सुरंग को पार करने में केवल 15 मिनट लगते हैं, जबकि पहाड़ियों पर ऊपर-नीचे टेढ़े-मेढ़े रास्ते से यात्रा करने में घंटों लगते थे। साथ ही यह, पास की जोजी-ला सुरंग के साथ, श्रीनगर-लेह हाईवे पर यह भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुरंग बालटाल (अमरनाथ गुफा), कारगिल और लद्दाख क्षेत्र के अन्य स्थानों को साल भर मौसम-रहित कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे सैन्य रसद में भी वृद्धि होगी और पर्यटन तथा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सोनमर्ग को सभी मौसमों में कनेक्टिविटी प्रदान करने के अलावा, यह सुरंग स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में मदद करेगी और क्षेत्र में पर्यटन तथा संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देगी। यह 31 सड़क सुरंगों में से एक है, जिनमें से 20 जम्मू-कश्मीर में और 11 लद्दाख में हैं। सुरंग का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था। 20 अक्टूबर 2024 को सुरंग के कर्मचारियों पर आतंकवादी हमला हुआ था। दो आतंकवादी गगनगीर में श्रमिकों के शिविर में घुसे और अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण कर रही इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के छह गैर-स्थानीय श्रमिकों सहित सात नागरिक मारे गए थे। इस हमले में एक स्थानीय डॉक्टर की भी मौत हो गई थी।  

महाकुंभ के दौरान रेलवे ने श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा की, जाने पूरी लिस्ट

नई दिल्ली 2025 का महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू हो रहा है, जो 26 फरवरी को महा शिवरात्रि के साथ समाप्त होगा। यह मेला हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है और इस बार का महाकुंभ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर होगा। इस मेले में लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। इस बार महाकुंभ के दौरान प्रमुख स्नान तिथियों में मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (29 जनवरी) और बसंत पंचमी (3 फरवरी) शामिल हैं। महाकुंभ के दौरान तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने इस विशेष आयोजन के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। इन ट्रेनों के चलने से श्रद्धालुओं को यात्रा में आसानी होगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। 13,000 से अधिक ट्रेनें चलाने का ऐलान भारतीय रेलवे ने महाकुंभ मेला के दौरान कुल 13,000 से अधिक ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है। इसमें 10,000 नियमित ट्रेन सेवाएं, 3,000 स्पेशल ट्रेनें और 560 रिंग रेल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनें से प्रयागराज और अयोध्या, वाराणसी, जौनपुर, चित्रकूट जैसे शहरों के बीच यात्रा करना और भी आसान हो जाएगा। प्रयागराज से 16 स्पेशल ट्रेनें दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने प्रयागराज से विभिन्न गंतव्यों को जोड़ने के लिए 16 स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। ये ट्रेनें विभिन्न शहरों के बीच तीर्थयात्रियों के लिए समय पर और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करेंगी। महाकुंभ 2025 के लिए स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट:     ट्रेन 7701: गुंटूर से आजमगढ़, 23:00 बजे प्रस्थान, अगले दिन 17:15 बजे पहुंचेगी (24 जनवरी)     ट्रेन 7702: आजमगढ़ से गुंटूर, 19:45 बजे प्रस्थान, अगले दिन 09:00 बजे पहुंचेगी (26 जनवरी)     ट्रेन 7707: मौला अली से आजमगढ़, 23:55 बजे प्रस्थान, अगले दिन 17:15 बजे पहुंचेगी (18 जनवरी और 21 फरवरी)     ट्रेन 7711: मौला अली से गया, 17:50 बजे रवाना, अगले दिन 09:00 बजे पहुंचेगी (19 जनवरी)     ट्रेन 7719: गुंटूर से गया, 14:20 बजे प्रस्थान, अगले दिन 09:00 बजे पहुंचेगी (25 जनवरी)     ट्रेन 7725: काचीगुडा से पटना, 16:45 बजे रवाना, अगले दिन 10:30 बजे पहुंचेगी (25 जनवरी) इन स्पेशल ट्रेनों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को अधिक आरामदायक और सुविधाजनक बनाना है। महाकुंभ मेला 2025 के लिए सभी तैयारियां पूरी महाकुंभ मेला भारत के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है। 2025 में यह मेला और भी भव्य होगा, और भारतीय रेलवे की इन स्पेशल ट्रेनों से यात्रा और भी सरल और सुरक्षित हो जाएगी।

विशाखापत्तनम में पीएम मोदी ने सीएम चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण के साथ रोड शो में लिया हिस्सा

विशाखापत्तनम पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम पहुंचे। इस दौरान राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण और अन्‍य नेताओं ने उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण के साथ विशाखापत्तनम में रोड शो में हिस्सा लिया। इस दौरान सड़कों पर जनसैलाब उमड़ा। स्थानीय जनता पीएम मोदी का एक झलक पाने को बेताब नजर आई। बीच-बीच में मोदी-मोदी के नारे भी लगे। पीएम मोदी ने भी लोगों को निराश नहीं किया। उन्होंने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिवसीय दौरे पर आंध्र प्रदेश और ओडिशा दौरे पर हैं। इस दौरान वो आंध्र प्रदेश को करोड़ों की सौगात देंगे। पीएम मोदी ने कहा, वो विशाखापत्तनम में ग्रीन एनर्जी से जुड़े प्रमुख कार्यों का उद्घाटन करने को लेकर उत्सुक हैं। सतत विकास, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़े कदम के रूप में प्रधानमंत्री मोदी 8 जनवरी (बुधवार) को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि हरित ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख कार्यों का उद्घाटन करने के लिए मैं विशाखापत्तनम के लोगों के बीच आने को उत्सुक हूं। यह बहुत खुशी की बात है कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ग्रीन हाइड्रोजन हब प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी जाएगी। इससे यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस तरह का पहला हब बन जाएगा। आंध्र प्रदेश के बाद पीएम मोदी ओडिशा जाएंगे। 9 जनवरी की सुबह 10 बजे भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वीजा अवधि को भारत ने बढ़ाया, अब पासपोर्ट रद्द कर भी क्या करेगा बांग्लादेश

नई दिल्ली भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वीजा अवधि को बड़ा दिया है। वह पिछले साल अगस्त से भारत में रह रही हैं। इस बीच खबर है कि बांग्लादेश ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है। हालांकि वीजा अवधि बढ़ने से हसीना के लिए अधिक समय तक भारत में रहने का रास्ता साफ हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार, भारत से पूर्व पीएम के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। यूनुस सरकार हसीना और उनकी बांग्लादेश आवाम पार्टी (बीएएल) पर शिकंजा कसने की पूरी कोशिश कर रही है। सरकार ने पूर्व पीएम और उनके प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया कि हसीना को देश में ‘शरण’ दी गई है और वह सामान्य रूप से देश में रह रही हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत उन्हें शरण नहीं दे सकता क्योंकि भारत के पास कोई शरण नीति नहीं है और इसलिए किसी को भी शरण देने की कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि हसीना के वीजा का विस्तार नियमित चैनलों के माध्यम से हुआ है और जहां तक ​​प्रत्यर्पण अनुरोध का सवाल है तो यूनुस शासन ने प्रमुख औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं, इसलिए भारत सरकार द्वारा उनकी मांग पर प्रतिक्रिया देने की संभावना नहीं है। पूर्व पीएम और आवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना को पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन से उभरे आक्रोश के बाद सत्ता छोड़कर भारत भागना पड़ा था। इस बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया मंगलवार को इलाज के लिए लिए लंदन रवाना हो गईं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का कहना है कि उनकी नेता की यात्रा मेडिकल कारणों से हो रही है और इसके राजनीतिक मायने नहीं निकाले जाए। हालांकि राजनीतिक उथल पुथल के दौर में जिया की विदेश यात्रा कई सवाल खड़ी करती है। सबसे अहम बात यह है कि देश की राजनीति पर कई दशकों तक हावी रहीं दो शीर्ष नेता अब विदेश में है।

झूठी खबरें फैलाने वाला पाकिस्तान अब खुद फेक न्यूज से डरा, बढ़ते खतरे से निपटने के लिए 2 अरब रुपये आवंटित किए

इस्लामाबाद भारत के खिलाफ लगातार झूठी खबरें और प्रचार चलाने वाले पाकिस्तान को अब खुद फेक न्यूज का डर सता रहा है। इसका मुकाबल करने के लिए सरकार ने भारी भरकम रकम भी जारी करने का फैसला किया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संघीय सरकार ने राज्य संस्थाओं को निशाना बनाकर फर्जी खबरों और गलत सूचना अभियानों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए 2 अरब रुपये आवंटित किए हैं। वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब की अध्यक्षता में आर्थिक समन्वय समिति [ईसीसी] की बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को कमजोर करने के लिए जानबूझकर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं का मुकाबला करने की कोशिशों को मजबूत करना है। आवंटित बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, [1.945 बिलियन रुपये], रक्षा मंत्रालय को जाएगा। बताया जा रहा है कि इस कदम को पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का भी समर्थन हासिल है। रिपोर्ट के मुताबिक विस्तृत ब्रीफिंग में ईसीसी को बताया गया कि सेना की पब्लिस रिलेशंस विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस [आईएसपीआर] गलत सूचनाओं से निपटने में सबसे आगे है। हालांकि, गलत सूचना फैलाने की रणनीति के लगातार विकसित होने की वजह से आईएसपीआर की क्षमताओं को बढ़ाने की जरुरत है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार के इस फैसले ने पाकिस्तान के नागरिकों को और अधिक नाराज कर दिया है जो रिकॉर्ड-उच्च मुद्रास्फीति, गरीबी और बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। बता दें पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और उसकी सारी उम्मीदें विदेशी कर्ज पर ही टिकी हैं। आलोचकों ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे तत्काल घरेलू संकटों को संबोधित करने के बजाय नैरेटिव कंट्रोल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार की आलोचना की है।

अपनी भांजी की शादी से काफा मामले ने ‘रिसेप्शन’ में मेहमानों के लिए तैयार किए गए भोजन में मिलाया जहर, भूल नहीं पाएगी कभी

महाराष्ट्र महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक व्यक्ति ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया। यहां एक व्यक्ति ने अपनी भांजी की शादी के दिन ऐसा कांड कर दिया जिसे परिवार चाहकर भी नहीं भूल पाएगा। व्यक्ति ने अपनी भांजी की शादी के ‘रिसेप्शन’ में मेहमानों के लिए तैयार किए गए भोजन में कथित तौर पर जहर मिला दिया क्योंकि वह उसकी शादी के खिलाफ था। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालांकि, किसी भी व्यक्ति ने उस भोजन को नहीं खाया और उसके नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना मंगलवार दोपहर पन्हाला तहसील के उतरे गांव में हुई। जहर मिलाते समय कुछ लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया, लेकिन वह भागने में सफल रहा। लड़की मामा के घर में पली-बढ़ी थी पन्हाला थाने के उपनिरीक्षक महेश कोंडुभैरी ने बताया कि पन्हाला पुलिस ने उतरे गांव निवासी महेश पाटिल नामक व्यक्ति के खिलाफ लोगों की जान को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोपी महिला का मामा है। पुलिस के अनुसार, लड़की मामा के घर में पली-बढ़ी थी। कोंडुभैरी ने बताया, ‘‘लड़की हाल में गांव के एक युवक के साथ भाग गई थी और उससे शादी कर ली थी। चूंकि, यह पाटिल को स्वीकार्य नहीं था, इसलिए वह मंगलवार को एक विवाह हॉल में आयोजित शादी के रिसेप्शन समारोह में घुस गया और मेहमानों के लिए तैयार किए जा रहे खाने में जहरीला पदार्थ मिला दिया।” उपनिरीक्षक ने बताया कि जब पाटिल भोजन में जहरीला पदार्थ मिला रहा था, तो उसके आसपास मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की और उसे पकड़ लिया। कोंडुभैरी ने बताया, ‘‘इसके बाद वह मौके से भाग गया। हमने उसके खिलाफ धारा 286 (जहरीले पदार्थ के संबंध में लापरवाही), 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।” उन्होंने बताया कि आरोपी को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने बताया कि जिस खाने में जहरीला पदार्थ मिलाया गया था, उसे किसी ने नहीं खाया और उसके नमूने फोरेंसिक लैब में भेज दिए गए हैं।  

हर विमान देगा वेदर डिपार्टमेंट को जानकारी, मौसम विभाग को इसकी मदद से वेदर अपडेट मिल सकेगा, जो एकदम सटीक होगी

नई दिल्ली अब घरेलू एयरलाइन कंपनियों को विमान की उड़ान और लैंडिंग के वक्त दिखे मौसम की जानकारी साझा करनी होगी। एयरलाइंस की ओर से वेदर की रियलटाइम जानकारी मौसम विभाग को दी जाएगी। मौसम विभाग का कहना है कि इसकी मदद से वेदर अपडेट मिल सकेगी, जो एकदम सटीक होगी। इससे मौसम विभाग की कार्य़क्षमता और सटीक आकलन करने में इजाफा होगा। अब तक मौसम विभाग जो अपडेट देता है, उसमें कुछ घंटे पहले की मिली जानकारी होती है और उसके अनुसार ही अनुमान जाहिर होते हैं। लेकिन रियल टाइम जानकारी मिलने से अपडेट में भी सुधार होगा। फिलहाल मौसम विभाग देश की 50 से 60 लोकेशंस से वेदर बलून लॉन्च करता है। इनके जरिए तापमान, उमस और हवा की गति के बारे में जानकारी मिलती है। इससे मौसम का अनुमान जारी करने में मदद मिलती है। अब फ्लाइट्स की लैंडिंग और टेकऑफ की मदद से मौसम का अनुमान और सटीक किए जाने की तैयारी है। देश भर में 6000 घरेलू विमान हर दिन टेकऑफ करते हैं और लैंडिंग करते हैं। यदि इनकी ओर से मौसम का रियलटाइम डेटा शेयर किया जाएगा तो विभाग को बड़ी मदद मिलेगी। भूगर्भ विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविंचंद्रन ने कहा कि इस मामले में उनका विभाग उड्डयन मंत्रालय से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ सही रहा तो फिर इसी साल से यह स्कीम लागू हो जाएगी कि सभी घरेलू उड़ानें मौसम की रियलटाइम जानकारी विभाग के साथ साझा करेंगी। यह अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करना ना सिर्फ विमानों के संचालन के लिए अच्छा रहेगा बल्कि मौसम के अनुमान के लिए भी उचित होगा। रविचंद्रन ने कहा कि आमतौर पर मौसम का अनुमान रियलटाइम वेदर की जानकारी पर ही आधारित होता है। ऐसे में हमें जितनी ज्यादा लोकेशंस से जानकारी मिलेगी, उतना ही अनुमान हमारा सही रहेगा। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में नए एयरपोर्ट बने हैं। उड़ानों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में इन नई लोकेशंस तक पहुंचने वाली उड़ानें यदि जानकारी साझा करेंगी तो मौसम विभाग के डेटा यानी सैंपल में इजाफा होगा। इससे ज्यादा रेंज के लिए अनुमान जाहिर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास जितना ज्यादा डेटा होगा, हम उतना ही सटीक जानकारी देने में सफल होंगे। यह एक तरह से एग्जिट पोल की तरह ही है। यदि आप ज्यादा से ज्यादा स्थानों से डेटा निकाल सकेंगे तो उतना ही सटीक आपका अनुमान भी होगा।’

मालदीव के रक्षा मंत्री ने की राजनाथ सिंह से बात, बुरे वक्त में याद आया भारत, पटरी पर लौट रहे रिश्ते

मालदीव भारत और मालदीव के रिश्ते एक बार फिर से पटरी पर लौट गए हैं। मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी, लेकिन आर्थिक झटका लगने से शुरू हुए बुरे वक्त के बाद मालदीव बैकफुट पर आ गया। अब मालदीव सरकार के मंत्री भारत के चक्कर लगा रहे हैं। विदेश मंत्री हालिया दौरे के बाद अब मालदीव के रक्षा मंत्री मोहम्मद घासन मौमून भी भारत पहुंचे हैं, जिसके बाद उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। राजनाथ सिंह ने मालदीव के अपने समकक्ष के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में मालदीव के साथ संबंधों को गहरा करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की हाल की भारत यात्रा पर विचार करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “मुझे अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान आपके साथ हमारी संक्षिप्त मुलाकात याद है।” रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के बीच स्थायी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, भाषाई और जातीय संबंधों पर जोर दिया, और संबंधों को घनिष्ठ, सौहार्दपूर्ण और बहुआयामी बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि मालदीव भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के तहत एक विशेष स्थान रखता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक ढांचा है। उन्होंने कहा, “मालदीव ने भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के तहत एक विशेष स्थान प्राप्त किया, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि लाना है।” हिंद महासागर में सुरक्षा बनाए रखने में दोनों देशों की साझा भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षा बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, इस प्रकार वे क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास में योगदान करते हैं।” मालदीव के साथ भारत का मजबूत रक्षा सहयोग दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बातचीत का एक और केंद्र बिंदु था। सिंह ने भारत द्वारा प्रस्तावित क्षमता निर्माण के अवसरों का भी जिक्र किया, जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, संयुक्त अभ्यास, कार्यशालाएं और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति शामिल है। उन्होंने इस गति को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “भारत परियोजनाओं, उपकरणों और प्रशिक्षण के माध्यम से मालदीव और मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल को उनके क्षमता निर्माण प्रयासों में समर्थन देना जारी रखेगा। एक विश्वसनीय भागीदार और एक करीबी दोस्त के रूप में, आश्वासन देता हूं कि भारत मालदीव की विकास आवश्यकताओं और उसके लोगों के कल्याण के लिए समर्थन करना जारी रखेगा।” मालदीव के विदेश मंत्री ने भी की थी भारत की यात्रा बता दें कि रक्षा मंत्री मोहम्मद घासन मौमून की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कुछ दिन पहले, मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने भारत की यात्रा की थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीन जनवरी को हुई बैठक में कहा था कि भारत की पड़ोस पहले नीति का मालदीव एक शानदार उदाहरण है और उन्होंने हिंद महासागर में स्थित इस द्वीप देश को नयी दिल्ली के सहयोग का वादा किया। उन्होंने कहा था, ”विभिन्न क्षेत्रों में हमारी भागीदारी बढ़ी है और भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा रहा है। हमारे लिए, आपके साथ सहयोग हमारी पड़ोस पहले नीति का शानदार उदाहरण है।” मालदीव, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रमुख समुद्री पड़ोसियों में से एक है और मालदीव में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान रक्षा सहित समग्र द्विपक्षीय संबंधों में वृद्धि देखी गई।

पंजाब के किसानों ने निकाले टेंट, हरियाणा में जोर पकड़ता नहीं दिख रहा, जाने कैसे आंदोलन में हुई दोफाड़

नई दिल्ली हरियाणा और पंजाब को जोड़ने वाले खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल करीब डेढ़ महीने से अनशन पर हैं। उनके साथ ही हजारों किसान टेंटों में डटे हुए हैं। 26 जनवरी को इन किसानों ने ट्रैक्टर रैली भी निकालने का फैसला लिया है, लेकिन किसान आंदोलन पड़ोसी राज्य हरियाणा में जोर पकड़ता नहीं दिख रहा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हरियाणा के किसान पंजाब वालों के साथ आंदोलन में क्यों नहीं उतर रहे हैं। यही नहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसानों में भी इसे लेकर कोई हलचल नहीं दिख रही है। लेकिन पंजाब से लगते जिलों करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र जैसे इलाकों में भी किसानों के बीच आंदोलन को लेकर उत्साह नहीं दिख रहा है। इसके कई कारण माने जा रहे हैं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हरियाणा में भाजपा की सरकार वापस लौटी है। इससे किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं का उत्साह ठंडा है। यही नहीं हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने भावांतर भरपाई योजना भी लॉन्च की है। इसके माध्यम से एमएसपी में यदि कमी रह जाए तो उन्हें भरपाई की जाएगी। वहीं नायब सिंह सैनी सरकार ने 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने की स्कीम भी लागू की है। इससे किसानों की फसलें बड़े पैमाने पर खरीदी जा रही हैं। माना जा रहा है कि इसके चलते हरियाणा में एमएसपी कानून न होने का कोई नुकसान किसानों को नहीं दिख रहा है। ऐसे में आंदोलन को लेकर भी उनका कोई रुख नहीं है। इसके अलावा एक और जानकारी यह मिल रही है कि संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब के संगठनों की ओर से जारी आंदोलन का हिस्सा नहीं है। ऐसे में किसान संगठनों के बीच ही सम्मान की लड़ाई का माहौल बन गया है। हरियाणा के कुछ किसान नेताओं का कहना है कि हमें सम्मान के साथ बुलाया जाए तो हम जाएंगे अन्यथा नहीं। वहीं एक नेता ने तो हरियाणा सरकार के रुख की तारीफ की और कहा कि भले ही एमएसपी पर कानून नहीं है, लेकिन राज्य सरकार ने उसकी भरपाई की कोशिश की है। यदि सभी राज्य ऐसे ही नीति बनाएं तो केंद्र सरकार पर खुद ही दबाव होगा कि वह एमएसपी पर कानून की ओर बढ़े। इस मामले में कानून तो राज्य सरकारें नहीं बना सकतीं। गौरतलब है कि पंजाब के किसानों का नेतृत्व कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल अपना अनशन तोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इलाज के लिए भी उन्होंने मना कर दिया है।

यूक्रेनी पायलट ने पश्चिमी देशों से सप्लाई किए गए एफ-16 लड़ाकू विमान से छह क्रूज मिसाइलों को ध्वस्त की, टेंशन में पुतिन

यूक्रेन यूक्रेन और रूस के बीच पिछले करीब तीन साल से जंग जारी है लेकिन पहली बार यूक्रेन ने रूस पर ऐतिहासिक हमला बोला है, जिससे रूसी राष्ट्रपति पुतिन की टेंशन बढ़ गई है। यूक्रेनी पायलट ने पश्चिमी देशों से सप्लाई किए गए एफ-16 लड़ाकू विमान से एक साथ रूस के छह क्रूज मिसाइलों को ध्वस्त कर दिया है। इससे रूसी सेना में खौफ है। कीव ने इस हमले को ऐतिहासिक घड़ी करार दिया है। यूक्रेन की वायु सेना ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। यूक्रेन की वायु सेना ने एक्स पर ट्वीट किया, “यूक्रेन द्वारा संचालित एक फाइटर जेट ने एक ही मिशन के दौरान छह रूसी क्रूज मिसाइलों को मार गिराया है। फाइटिंग फाल्कन के इतिहास में पहली बार, एक F-16 लड़ाकू जेट ने एक लड़ाकू मिशन में छह रूसी क्रूज मिसाइलों को नष्ट कर दिया।” वायु सेना के प्रवक्ता यूरी इहनात ने कहा कि यह सफल ऑपरेशन 13 दिसंबर, 2024 को तब पूरा हुआ, जब लगभग 200 ड्रोन और 94 मिसाइलों के साथ रूस ने यूक्रेन पर हवाई हमला बोला था। यूक्रेनी वायु सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि इस हमले पर अमेरिकी सैनिकों को भी यकीन नहीं हो पा रहा लेकिन यह सच है। इस पोस्ट में उन्होंने पायलट के साथ हुए साक्षात्कार का विवरण दिया है। हालांकि उस पायलट की पहचान उजागर नहीं की गई है, जिसने छह रूसी क्रूज मिसाइलों को जमींदोज किया है। यूक्रेनी वायुसेना के प्रवक्ता यूरी इहनात ने कहा, “हमें इस बात का 100 फीसदी भरोसा है कि इतिहास में पहली बार वायु-विरोधी युद्ध अभियान में एक अमेरिकी लड़ाकू एफ-16 ने छह पंखों वाली क्रूज मिसाइलों को मार गिराया है, जिनमें से दो को हवाई तोप से दागा गया है।” बता दें कि लंबे इंतजार के बाद, अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को अगस्त 2024 में एफ-16 लड़ाकू विमानों का पहला बैच सप्लाय किया था। तब यूक्रेन ने यह इस उम्मीद की थी कि वह इन अत्याधुनिक हथियारों की बदौलत रूस को करारा जवाब दे सकेगा और रूस के खिलाफ कीव की लड़ाई में पुराने सोवियत युग के विमानों पर फतह हासिल कर सकेगा लेकिन शुरुआती दौर में यूक्रेन को झटका लगा क्योंकि इसका संचालन करने के दौरान एक यूक्रेनी पायलट की मौत हो गई थी। हालांकि, अमेरिकी सेना से ट्रेनिंग पाकर अब यूक्रेनी पायलट खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने लगे हैं।

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