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इस्राइल ने 34 बंधकों की रिहाई को किया खारिज, ‘हमास ने अभी तक नामों की सूची नहीं दी’

तेल अवीव। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि हमास ने रविवार को संभावित युद्धविराम समझौते के तहत रिहा किए जाने वाले बंधकों की सूची भेजी है। प्रधानमंत्री कार्यालय का यह बयान यूके स्थित एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि हमास ने 34 बंधकों की सूची को मंजूरी दे दी है, जिन्हें वह युद्धविराम समझौते के बदले में रिहा करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने कहा है कि यह सौदा गाजा से हटने और स्थायी युद्धविराम लागू करने के लिए इस्राइल की सहमति पर निर्भर है। नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘जो दावा किया गया था, उसके विपरीत, हमास ने इस क्षण तक बंधकों के नामों की सूची नहीं भेजी है।’ वर्तमान में, पीएम नेतन्याहू मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर इस्राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) का नेतृत्व कर रहे हैं। यह बयान नेतन्याहू की प्रोस्टेट सर्जरी के बाद बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ दिनों बाद आया है। उनके कार्यालय के अनुसार, सर्जरी के बाद नेतन्याहू अच्छी स्थिति में थे और पूरी तरह से होश में थे। इस बीच, आईडीएफ ने घोषणा की है कि उसने दक्षिणी गाजा में इस्राइल द्वारा नामित मानवीय क्षेत्र में एक कमांड सेंटर पर हमास के गुर्गों के खिलाफ ड्रोन हमला किया है। इस्राइली सेना के अनुसार, खान यूनिस क्षेत्र में स्थित इस परिसर का इस्तेमाल हमास के कार्यकर्ताओं द्वारा गाजा में सैनिकों और इस्राइल के खिलाफ हमलों की योजना बनाने के लिए किया जाता था। देइर अल-बलाह क्षेत्र में आईडीएफ ने एक अलग हमला किया आईडीएफ ने कहा कि मानवीय क्षेत्र के देइर अल-बलाह क्षेत्र में एक अलग हमला किया गया, जिसमें फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद के एक कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया, जिसने इस क्षेत्र से पहले भी हमले किए थे। इस्राइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईडीएफ ने कहा कि उसने दोनों हमलों में नागरिकों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए उपाय किए। सैनिकों ने मार गिराया साद सईद जकी दहनोन आईडीएफ ने कहा कि उत्तरी गाजा के जबालिया में हाल ही में किए गए अभियानों के दौरान सैनिकों ने फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद कंपनी कमांडर और उत्तरी गाजा में आतंकी समूह के रॉकेट डिवीजन के उप प्रमुख साद सईद जकी दहनोन को मार गिराया। उसने सात अक्तूबर 2023 के हमले में भाग लिया था। दहनोन ने इस्राइल में की थी घुसपैठ आईडीएफ ने कहा कि दहनोन ने इस्राइल में घुसपैठ की थी। वह बेत लाहिया क्षेत्र में सैनिकों के खिलाफ कई हमलों में भी शामिल था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईडीएफ ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दहनोन और अन्य आतंकवादी खुद को कंबल में ढके हुए हैं। साथ ही बरसात के मौसम की आड़ में सैनिकों के पास जाने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। दूसरे ऑपरेटिव को पूछताछ के लिए इस्राइल लाया गया आईडीएफ ने कहा कि दहनोन मारा गया है, जबकि दूसरे ऑपरेटिव ने सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आईडीएफ के अनुसार, दूसरे ऑपरेटिव के पास एक विस्फोटक उपकरण था और उसे आगे की पूछताछ के लिए इस्राइल लाया गया।

46 करोड़ की परियोजना लाएगी रंग, त्रिपुरा में अगले माह से दौड़ेंगी बिजली से चलने वाली ट्रेनें

अगरतला त्रिपुरा में जल्द ही पटरियों पर बिजली से चलने वाली ट्रेनें दौड़ती दिखेंगी। दरअसल, सोमवार को एक अधिकारी ने जानकारी दी कि राज्य में रेलवे के एक महत्वपूर्ण विद्युतीकरण परियोजना के पूरा होने के बाद इस साल फरवरी तक बिजली से चलने वाली ट्रेनें शुरू हो सकती हैं। 46 करोड़ रुपये की इस विद्युतीकरण परियोजना की शुरुआत 2022 में की गई थी, जो त्रिपुरा को राष्ट्रीय रेलवे ग्रिड से जोड़ेगी। वर्तमान में राज्य में डीजल से चलने वाली ट्रेनें चल रही हैं। टीएसईसीएल कर रहा तैयार अधिकारियों ने बताया कि त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (टीएसईसीएल) फरवरी तक राज्य में रेलवे की विद्युत ट्रांसमिशन लाइन को बिजली की आपूर्ति करने के लिए तैयार हो जाएगा। जबकि उत्तर-पूर्व रेलवे (एनएफआर) ने पहले ही त्रिपुरा में धर्मनगर के माध्यम से बड़ापुर से अगरतला तक के मार्ग का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। क्या बोले अधिकारी? टीएसईसीएल के सहायक जनरल मैनेजर (ट्रांसमिशन) निरुपम गुहा ने बताया, ‘हमने उनकोटी जिला के कुमारघाट, खोवाई जिला के तेलियामुरा और गोमती जिला के उदयपुर में तीन ट्रैक्शन पावर सबस्टेशन लगाने का काम शुरू किया था। कुमारघाट सबस्टेशन का काम पिछले मार्च में पूरा हो गया था।’ उन्होंने कहा कि तेलियामुरा का सबस्टेशन इस महीने और उदयपुर का सबस्टेशन फरवरी तक पूरा हो जाएगा। तीनों टैक्शन सबस्टेशनों के पूरा होने के बाद टीएसईसीएल रेलवे के विद्युत ट्रांसमिशन लाइन को धर्मनगर से अगरतला और अन्य जगहों तक ऊर्जा प्रदान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि रेलवे ने प्रत्येक सबस्टेशन के लिए पांच मेगावाट बिजली की मांग की है और आवश्यकता पड़ने पर अधिक बिजली भी आपूर्ति की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद राज्य में अधिक आधुनिक और तेज ट्रेनें शुरू की जाएंगी, जो राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस जगह का काम पूरा उत्तर-पूर्व रेलवे (NFR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा, ‘बड़ापुर से अगरतला तक का विद्युतीकरण काम धर्मनगर के माध्यम से पूरा हो चुका है, केवल लुंबिंग-बड़ापुर खंड में पहाड़ी क्षेत्र बाकी है। हम इस खंड के विद्युतीकरण को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कदम उठा रहे हैं।’

सात लोगों की मौत और पांच घायल, मैक्सिको के बार में फिर गोलीबारी

विलेहरमोसा. दक्षिणी पूर्वी मैक्सिको के विलेहरमोसा शहर के एक बार में फिर से गोलीबारी हुई। इसमें सात लोगों की मौत हो गई। जबकि पांच लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि बार में गोलीबारी करने वाले अपराधियों की तलाश की जा रही है। विलेहरमोसा के बार में नवंबर 2024 में भी गोलीबारी हुई थी। इसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारियों ने बताया कि बंदूकधारियो ने ला कैसीटा अजुल बार में घुसकर ग्राहकों पर गोलियां चला दीं। इसके बाद सात लोगों की मौत हो गई। इस बार को गुप्त रूप से चलाया जा रहा था। अफसरों का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस को तैनात कर दिया गया है। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं इससे पहले 24 नवंबर को दक्षिण-पूर्वी मैक्सिको के डीबार नाम के बार में बंदूकधारियों ने गोलीबारी कर दी थी। इससे कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी और 10 अन्य घायल हो गए थे। इससे पहले नौ नवंबर को मध्य मैक्सिकन शहर क्वेरेटारो में बंदूकधारियों ने एक बार पर हमला कर 10 लोगों की हत्या कर दी थीष क्वेरेटारो के सार्वजनिक सुरक्षा विभाग के प्रमुख जुआन लुइस फेरुस्का के अनुसार, हमलावरों ने शहर के ऐतिहासिक जिले में लॉस कैंटारिटोस बार के अंदर गोलीबारी की थी। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में बताया गया था कि हथियारों से लैस कम से कम 4 लोग एक पिकअप ट्रक पर सवार होकर आए थे और फिर उन्होंने हत्याकांड को अंजाम दिया था। सेना की तैनाती के बाद बढ़े मामले मैक्सिको में 2006 में तस्करी से निपटने के लिए सरकार ने सेना तैनात की थी। इसके बाद मैक्सिको में मादक पदार्थ संबंधी हिंसा में 4.5 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मैक्सिको की राष्ट्रपति शिनबाम ने नशे की तस्करी को खत्म करने के लिए सामाजिक नीति का उपयोग करने का संकल्प लिया है।

समर्थकों के विरोध के बाद फैसला, दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति योल की गिरफ्तारी में जांचकर्ताओं ने पुलिस से मांगी मदद

सियोल. दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट लगातार गहरा रहा है और अब महाभियोग का सामना कर रहे राष्ट्रपति यून सुक योल को गिरफ्तार करना जांचकर्ताओं के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। यून सुक योल की गिरफ्तारी का विरोध होने के बाद जांचकर्ताओं ने पुलिस से मदद मांगी है। शुक्रवार को जब जांचकर्ता यून सुक योल को गिरफ्तार करने पहुंचे तो यून सुक योल के सुरक्षाकर्मी उनसे भिड़ गए थे। इससे पहले गुरुवार को यून सुक योल के समर्थकों ने जांचकर्ताओं को आवास में घुसने नहीं दिया था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया का भ्रष्टाचार जांच कार्यालय (CIO) यून सुक योल के खिलाफ जांच कर रहा है। जांचकर्ताओं ने वारंट की अवधि समाप्त होने से पहले पुलिस को पत्र भेजकर मदद मांगी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार जांच कार्यालय ने बिना किसी पूर्व परामर्श के हमारे सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने हमें पत्र भेजा है। हम इसकी कानूनी समीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार जांच कार्यालय (CIO) ने कहा कि यून सुक योल की गिरफ्तारी को लेकर हो रहे विरोध के चलते वारंट को तामील कराना संभव नहीं हो पा रहा है। हम समीक्षा के बाद आगे की योजना बना रहे हैं। हम समर्थकों के विरोध पर खेद जताते हैं, क्योंकि इससे कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हो सका। राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मियों ने नहीं होने दी गिरफ्तारी दक्षिण कोरियाई जांचकर्ता शुक्रवार को यून सुक योल को उनके आवास पर गिरफ्तार करने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति के सुरक्षा बलों ने जांचकर्ताओं को रोक दिया और यून की गिरफ्तारी फिर नहीं हो सकी। यून जिन्हें हटाने के लिए पहले ही सांसद अपना समर्थन दे चुके हैं, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति पद से हट जाएंगे। यून की गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है, लेकिन दो बार कोशिश करने के बाद भी जांचकर्ता यून को गिरफ्तार नहीं कर सके हैं। अगर वे गिरफ्तार हो जाते हैं तो यून गिरफ्तार होने वाले दक्षिण कोरिया के पहले राष्ट्रपति बन जाएंगे। यून ने 3 दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लगाने का फैसला किया था। हालांकि हंगामे के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। इसके लिए यून सुक योल को जेल की सजा और मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। समर्थक भी जांचकर्ताओं को घुसने नहीं दे रहे गुरुवार को यून समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी नहीं होने दी थी और यून समर्थक जांचकर्ताओं की टीम से भिड़ गए थे। यून की गिरफ्तारी के रोकने के लिए यून समर्थक उनके आवास के बाहर जमे हैं और प्रार्थनाओं का दौर चल रहा है। वहीं जांचकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति यून की गिरफ्तारी रोकने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

13 छात्र झुलसे, त्रिपुरा में पिकनिक मनाने गए स्कूली बच्चों की बस में लगी आग

अगरतला/नई दिल्ली। पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां रविवार को पिकनिक मनाने आए छात्रों से भरी एक बस में आग लग गई, जिससे 13 स्कूली छात्र झुलस गए। मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) किरण कुमार ने बताया कि इनमें से नौ छात्रों को जीबीपी अस्पताल भेजा गया, जबकि बाकी चार को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के बाद घर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि यह आग बस में रखे जनरेटर के विस्फोट के कारण लगी थी। मामले की जांच चल रही है। मामले में राज्य के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और सभी घायल छात्रों के जल्दी ठीक होने की कामना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखा कि मोहनपुर में हुई इस दुखद घटना से मैं बहुत चिंतित हूं, जहां जनरेटर के विस्फोट के बाद पिकनिक बस में आग लग गई। उन्होंने कहा कि मैं घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और घायल छात्रों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी से पिकनिक का आनंद लेते समय सतर्क और सावधान रहने की अपील की है।

पार्टी के भीतर ही बढ़ रहा विरोध, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जल्द दे सकते हैं इस्तीफा

ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जल्द ही लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे सकते हैं। कनाडा के समाचारपत्र द ग्लोब एंड मेल ने रविवार को अपनी रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिन ट्रूडो अगले एक या दो दिनों के भीतर पद छोड़ सकते हैं। दरअसल ट्रूडो की लोकप्रियता में हाल के समय में भारी गिरावट आई है और उन्हें पार्टी के भीतर भी विरोध झेलना पड़ रहा है। विभिन्न सर्वे में दावा किया गया है कि आगामी चुनाव में पिएरे पोलिएवरे के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी सत्ता में आ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी ये तय नहीं है कि ट्रूडो कब इस्तीफा देंगे, लेकिन माना जा रहा है कि बुधवार को होने वाली राष्ट्रीय कॉकस बैठक से पहले ट्रूडो अपना पद छोड़ सकते हैं। सहयोगी पार्टी एनडीपी ने भी छोड़ दिया था साथ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस ट्रूडो को सत्ताधारी लिबरल पार्टी के नेता के पद से भी हटाने पर विचार किया जा रहा है। अभी ये साफ नहीं है कि ट्रूडो इस्तीफे के बाद तुरंत पद छोड़ देंगे या फिर नए नेता की नियुक्ति तक पद पर बने रहेंगे। जस्टिस ट्रूडो बीते एक दशक से कनाडा की सत्ता पर काबिज हैं, लेकिन बीते कुछ समय में उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। ट्रूडो की सहयोगी पार्टी और जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली एनडीपी ने बीते दिनों ट्रूडो सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। एक हालिया सर्वे में दावा किया गया कि 73 प्रतिशत कनाडा के नागरिक चाहते हैं कि ट्रूडो प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दें। इनमें 43 प्रतिशत लिबरल मतदाता भी शामिल हैं। इन वजहों से ट्रूडो से नाराज हैं कनाडा के लोग कनाडा में जस्टिन ट्रूडो की सरकार की लोकप्रियता में गिरावट की कई वजह हैं। इनमें प्रमुख वजहों में अर्थव्यवस्था, कनाडा में घरों की कीमतों में जबरदस्त उछाल, अप्रवासी मुद्दा आदि शामिल हैं। कोरोना महामारी के बाद कनाडा में महंगाई 8 फीसदी तक बढ़ गई थी। हालांकि फिलहाल यह दो प्रतिशत से नीचे है। कनाडा में बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है, जो फिलहाल छह फीसदी के आसपास है। ट्रूडो सरकार के कार्बन टैक्स कार्यक्रम की भी विपक्ष द्वारा आलोचना की जा रही है। कनाडा में महंगे घर एक बड़ी समस्या है। कनाडा के अधिकतर बड़े शहरों में घर खरीदना आम लोगों के बजट के बाहर हो गया है। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है और सरकार इसे नियंत्रित कर पाने में नाकाम रही है। ये भी एक बड़ी वजह है कि लोगों में ट्रूडो सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है। कनाडा में अप्रवासन भी बड़ा मुद्दा है। हालांकि ट्रूडो सरकार ने हाल के समय में अप्रवासन को लेकर नई नीतियां बनाई हैं, जिससे अप्रवासियों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि अभी भी लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई है। अप्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से कनाडा की स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ा है। कनाडा में खालिस्तानियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी कई कनाडाई नागरिक नाराज हैं। हाल ही में कनाडा की डिप्टी पीएम और वित्त मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद ट्रूडो पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ा है।

बंगलूरू में आठ महीने की बच्ची में दिखे संक्रमण के लक्षण ने किया अलर्ट, HMPV वायरस भारत पहुंचा?

बंगलूरू। चीन में फैल रहे ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) संक्रमण की भारत में दस्तक हो गई। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि बंगलूरू में एक आठ महीने की बच्ची एचएमपीवी संक्रमित पाई गई है। हालांकि अभी तक भारत में एचएमपीवी का केस मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं कर्नाटक सरकार का कहना है कि वायरस के स्ट्रेन के बारे में जानकारी नहीं है। चीन में इन दिनों ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) का प्रकोप देखने को मिल रहा है। वायरस से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की खबरें आ रही हैं। इसे लेकर भारत में भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। कई राज्यों ने एडवाइजरी और अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही भारत में एचएमपीवी वायरस जैसा का पहला केस सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बंगलूरू के बैपटिस्ट अस्पताल में एक आठ महीने की बच्ची में एचएमपीवी वायरस जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि बच्ची में संक्रमण की पुष्टि एक निजी लैब में हुई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उनकी प्रयोगशाला में नमूने की जांच नहीं हुई है। निजी अस्पताल की रिपोर्ट में यह सामने आया है। स्ट्रेन को लेकर जानकारी नहीं है। नमूने को सरकारी प्रयोगशाला में भेजा गया है। वहीं सरकार ने वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है। सतर्कता बरती जा रही है। क्या है ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी)? 0- ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस, जिसे एचएमपीवी के छोटे नाम से भी जाना जाता है, इंसानों की श्वसन प्रक्रिया पर प्रभाव डालने वाला वायरस है। इसकी पहली बार पहचान 2001 में हो गई थी। तब नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया था। यह पैरामाइक्सोविरीडे परिवार का वायरस है। 0- श्वसन संबंधी अन्य वायरस की तरह यह भी संक्रमित लोगों के खांसने-छींकने के दौरान उनके करीब रहने से फैलता है। 0- कुछ स्टडीज में दावा किया गया है कि यह वायरस पिछले छह दशकों से दुनिया में मौजूद है। एचएमपीवी का किस पर और कितना असर? 0- यह मुख्य तौर पर बच्चों पर असर डालता है। हालांकि, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों और बुजुर्गों पर भी इसका प्रभाव दर्ज किया गया है। 0- इस वायरस की वजह से लोगों को सर्दी, खांसी, बुखार, कफ की शिकायत हो सकती है। ज्यादा गंभीर मामलों में गला और श्वांस नली के जाम होने से लोगों के मुंह से सीटी जैसी खरखराहट भी सुनी जा सकती है। 0- कुछ और गंभीर स्थिति में इस वायरस की वजह से लोगों को ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों में ऑक्सीजन ले जाने वाली नली में सूजन) और निमोनिया (फेफड़ों में पानी भरना) की स्थिति पैदा कर सकता है। इसके चलते संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। 0- चूंकि इसके लक्षण कोरोनावायरस संक्रमण और आम फ्लू से मिलते-जुलते हैं, इसलिए इन दोनों में अंतर बता पाना मुश्किल है। हालांकि, जहां कोरोनावायरस की महामारी हर सीजन में फैली थी। वहीं एचएमपीवी अब तक मुख्यतः मौसमी संक्रमण ही माना जा रहा है। हालांकि, कई जगहों पर इसकी मौजूदगी पूरे साल भी दर्ज की गई है। 0- कोरोना के इतर इस वायरस के कारण ऊपरी और निचले दोनों श्वसन पथ में संक्रमण का खतरा हो सकता है। 0- सामान्य मामलों में इस वायरस का असर तीन से पांच दिन तक रहता है। वैक्सीन और उपचार के क्या तरीके हैं? मौजूदा समय में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस से बचाव के लिए कोई टीका (वैक्सीन) मौजूद नहीं है। इसके अलावा एंटी वायरल दवाइयों का प्रयोग इस पर असर नहीं डालता। ऐसे में एंटी वायरल का प्रयोग इंसानों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम कर सकता है। इस वायरस से जूझ रहे लोगों को लक्षण हल्का करने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं। हालांकि, वायरस को खत्म करने लायक उपचार अभी मौजूद नहीं है।

सदन को संबोधित करने से किया इनकार, तमिलनाडु के राज्यपाल हुए राष्ट्रगान के अपमान पर नाराज

चेन्नई। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि विधानसभा सत्र के दौरान राष्ट्रगान के कथित अपमान से नाराज हो गए और विधानसभा सत्र को बिना संबोधित किए ही सदन से चले गए। तमिलनाडु विधानसभा के साल 2025 के पहले विधानसभा सत्र की आज से शुरुआत हो रही है। नियमों के तहत विधानसभा सत्र की शुरुआत राज्यपाल आरएन रवि के संबोधन से होनी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा सत्र की शुरुआत में तमिलनाडु सरकार के राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ का गायन हुआ। किस बात से नाराज हुए राज्यपाल आरएन रवि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राज्यपाल आरएन रवि ने तमिलनाडु के राज्य गीत के बाद राष्ट्रगान वादन की मांग की, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई। इस बात से राज्यपाल इस कदर नाराज हो गए कि विधानसभा सत्र को संबोधित किए बिना ही सदन से चले गए। तमिलनाडु राजभवन ने पूरे विवाद पर बयान जारी किया है। सोशल मीडिया पर साझा बयान में राजभवन ने कहा कि ‘भारत के संविधान और राष्ट्रगान का एक बार फिर तमिलनाडु विधानसभा में अपमान हुआ है। संविधान में पहला मौलिक कर्तव्य राष्ट्रगान का सम्मान बताया गया है। सभी राज्य विधानसभाओं में सत्र की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान का गायन होता है। आज सदन में राज्यपाल के आने पर सिर्फ तमिल थाई वजथु का ही गायन हुआ। राज्यपाल ने सदन को सम्मानपूर्वक संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई और राष्ट्रगान के वादन की मांग की, लेकिन उनकी अपील को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और सदन के स्पीकर ने खारिज कर दिया। यह गंभीर चिंता की बात है। ऐसे में राष्ट्रगान और भारत के संविधान के अपमान का हिस्सा न बनते हुए राज्यपाल ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सदन छोड़ दिया।’ पहले भी विधानसभा सत्र के दौरान हो चुका है विवाद गौरतलब है कि बीते दो साल से विधानसभा सत्र में राज्यपाल के संबोधन के दौरान खासा विवाद देखने को मिला है। पिछली बार राज्यपाल ने संबोधन के दौरान सरकार के बयान की कुछ लाइनें पढ़ने से इनकार कर दिया था। जिस पर खूब विवाद हुआ था। इस साल भी विधानसभा सत्र के दौरान हंगामे की उम्मीद है क्योंकि तमिलनाडु में अन्ना विश्वविद्यालय में छात्रा से दुष्कर्म का मामला गरमाया हुआ है और विपक्षी पार्टियां राज्य सरकार पर हमलावर हैं। अब राज्यपाल की नाराजगी से हंगामा और बढ़ने की आशंका है। अन्ना विश्वविद्यालय मुद्दे पर सदन में हंगामा राज्यपाल के इस तरह सदन छोड़कर जाने पर सत्ताधारी डीएमके और कांग्रेस के नेताओं ने नाराजगी जाहिर की। तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई ने कहा, ‘राज्यपाल तमिलनाडु के लोगों और पुलिस के खिलाफ हैं। वह विधानसभा से कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं करते।’ राज्यपाल के जाने के तुरंत बाद अन्ना विश्वविद्यालय की छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न के खिलाफ एआईएडीएमके ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्पीकर ने मार्शलों को प्रदर्शनकारी विधायकों को बाहर निकालने का आदेश दिया। पीएमके और भाजपा ने भी अन्ना विश्वविद्यालय मुद्दे पर वॉकआउट किया।

युद्धाभ्यास के जरिए मानी जा रही चीन की चेतावनी?, ताइवान की सीमा में लगातार तीसरे दिन घुसे चीनी विमान और पोत

ताइपे। ताइवान के रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने सोमवार को बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सात विमानों और पीएलए नौसेना (पीएलएएन) के सात जहाजों ने उनकी सीमा में प्रवेश किया। गौरतलब है कि लगातार तीसरे दिन चीन के विमानों और पोत ने ताइवान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चीन के छह विमान ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा को पार कर ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश कर गए। सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने लिखा, ‘ताइवान के आसपास 7 पीएलए विमान, 7 पीएलएएन जहाज और 1 आधिकारिक जहाज को सोमवार सुबह छह बजे देखा गया।’ इससे पहले रविवार और शनिवार को भी चीनी विमानों और जहाजों ने ताइवान की सीमा का उल्लंघन किया था। चीन द्वारा बीते दिनों ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास भी किया गया था। इस युद्धाभ्यास को चीन की ताइवान को चेतावनी के रूप में देखा गया था। पीएलए के जवाब में ताइवान ने भी रणनीतिक स्थानों पर युद्ध की तैयारी का अभ्यास किया था। क्या कुछ बड़ा करने वाले हैं जिनपिंग? हाल ही में नए साल पर देश को संबोधित करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुलेआम ताइवान को धमकी दी थी और कहा था कि ‘ताइवान को चीन के साथ मिलने से कोई नहीं रोक सकता और चीन अपनी कोशिशों को जारी रखेगा।’ जिनपिंग ने कहा कि ‘चीन और ताइवान के लोग एक ही परिवार हैं। कोई भी हमारे पारिवारिक बंधन को नहीं तोड़ सकता।’ जिनपिंग के हालिया बयान और चीनी सेना की गतिविधियों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रहा है। चीन और ताइवान के बीच संप्रभुता एक जटिल और लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है। चीन, ताइवान को अपना ही हिस्सा मानता है, लेकिन ताइवान खुद को स्वतंत्र राष्ट्र मानता है। बीजिंग ने ताइवान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य दबाव बनाया हुआ है और ताइवान को अपने साथ मिलाने का लगातार दावा कर रहा है।

सिंधु घाटी लिपि को डिकोड करने पर मिलेगा एक मिलियन डॉलर का पुरस्कार, सीएम एमके स्टालिन ने बड़ा एलान किया

चेन्नई तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी की लिपि एक सदी से भी अधिक समय से एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। उन्होंने इसे समझने वाले को 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार देने की घोषणा की। एग्मोर के सरकारी संग्रहालय में आयोजित सिंधु घाटी सभ्यता की खोज की शताब्दी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के दौरान सीएम एमके स्टालिन ने ये एलान किया। दरअसल, तीन दिवसीय संगोष्ठी में दुनिया भर के प्रसिद्ध पुरातत्वविदों, इतिहासकारों और विद्वानों ने सभ्यता के महत्व और तमिलनाडु के साथ इसके संबंधों पर चर्चा की है। वहीं, इस कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान सीएम स्टालिन ने कहा कि सिंधु घाटी के मिट्टी के बर्तनों पर पाए गए लगभग 60 प्रतिशत प्रतीक तमिलनाडु में खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियों पर पाए गए प्रतीकों के समान हैं। सीएम स्टालिन ने कही ये बात उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस आश्चर्यजनक समानता ने विद्वानों के बीच काफी रुचि जगाई है और संभावित रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के रहस्यों को उजागर कर सकती है। सीएम स्टालिन ने इस क्षेत्र में अनुसंधान को और बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध पुरातत्वविद् इरावतम महादेवन के नाम पर एक शोध पीठ स्थापित करने के लिए 2 करोड़ रुपये के अनुदान की भी घोषणा की। बता दें कि ये चेयर सिंधू घाटी सभ्यता पर गहन अध्ययन की सुविधा प्रदान करेगी, जिसमें तमिलनाडु के साथ इसके संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तमिलनाडु और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच संबंध पर भी खोज गौरतलब है कि तूतीकोरिन के शिवकलाई से हाल ही में मिली पुरातात्विक खोजों ने शोधकर्ताओं को तमिलनाडु और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच एक निश्चित संबंध स्थापित करने के करीब ला दिया है। इन खोजों का समय निर्धारण उन्हें 2500 ईसा पूर्व और 3000 ईसा पूर्व के बीच रखता है। खास बात है कि तमिलनाडु की खोजों से एक लौह युग की सभ्यता की उपस्थिति का पता चलता है जो सिंधु घाटी सभ्यता के समानांतर चलती थी, जो 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक फैली थी। वहीं, सिंधु घाटी सभ्यता ने इस दौरान मुख्य रूप से तांबे की वस्तुओं का उपयोग किया था।

केंद्र सरकार ने कहा- 2024 के पहले 11 महीनों के आंकड़े बताते हैं कि कुल 64.5 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों ने की यात्रा

नई दिल्ली भारत के विमानन क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। 2024 के पहले 11 महीनों (जनवरी-नवंबर) के आंकड़े बताते हैं कि कुल 64.5 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्री यात्रा के लिए भारतीय और विदेशी एयरलाइनों द्वारा ले जाए गए, जो कि 2023 की इसी अवधि के मुकाबले 11.4% की वृद्धि है। आंकड़ों के अनुसार, 64.5 मिलियन यात्रियों में से 29.8 मिलियन यात्रियों को भारतीय एयरलाइंस ने यात्रा कराई, जबकि 34.7 मिलियन यात्रियों को विदेशी एयरलाइनों ने सेवाएं दीं। यह दर्शाता है कि भारतीय वाहकों की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन विदेशी एयरलाइनों का भी योगदान महत्वपूर्ण रहा। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार, 2024 के पहले 11 महीनों में घरेलू एयरलाइनों ने 1.02 मिलियन उड़ानें संचालित कीं, जिनमें कुल 146.4 मिलियन यात्रियों ने यात्रा की। पिछले साल (2023) इसी अवधि में 0.97 मिलियन उड़ानें थीं, जिनमें 138.2 मिलियन यात्री थे। इससे यह साफ है कि 2024 में घरेलू यात्री संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो 5.9% तक पहुंची है। 17 नवंबर, 2024 को एक नया रिकॉर्ड बना जब 5 लाख घरेलू हवाई यात्री एक ही दिन में यात्रा करने लगे। यह भारतीय विमानन क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव और यात्री यातायात को दर्शाता है। भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 का प्रभाव 1 जनवरी 2024 से लागू भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 का उद्देश्य विमानन क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना है। यह पुराने विमान अधिनियम, 1934 को समकालीन आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप संशोधित करता है। सरकार का कहना है कि यह नया कानून ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल को बढ़ावा देगा। साथ ही, इसे शिकागो कन्वेंशन और आईसीएओ जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी संरेखित किया जाएगा, ताकि भारत का विमानन क्षेत्र दुनिया के स्तर से मेल खाता हुआ हो। बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण कदम सरकार ने पिछले वर्ष कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के कामों को आगे बढ़ाया। वाराणसी, आगरा, दरभंगा और बागडोगरा में नए एयरपोर्ट टर्मिनल्स की नींव रखी गई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरसावा, रीवा, और अंबिकापुर में नए हवाई अड्डों का उद्घाटन किया, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार हुआ। सरकार ने देश भर में 21 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के निर्माण के लिए ‘सैद्धांतिक’ मंजूरी भी दी है। यह कदम भारत के विमानन क्षेत्र के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लैंगिक समानता और पर्यावरण पर जोर विमानन क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने सभी हितधारकों से आग्रह किया है कि वे 2025 तक भारतीय विमानन उद्योग में महिलाओं की संख्या को 25 प्रतिशत तक बढ़ाएं। इसके अलावा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने हवाई अड्डों पर हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, 80 हवाई अड्डों ने 100% हरित ऊर्जा का उपयोग शुरू कर दिया है और 12 हवाई अड्डे 2024 तक इस दिशा में कदम उठा लेंगे।  

अब चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क वाला देश बना भारत

नई दिल्ली भारत में मेट्रो रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। अब देश में मेट्रो रेल नेटवर्क की कुल लंबाई बढ़कर 1000 किमी तक पहुंच गई है। इस बड़े नेटवर्क के साथ, भारत अब चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क वाला देश बन गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली के लोगों को दी थी पहली मेट्रो दिल्ली ने 2002 में अपनी मेट्रो यात्रा की शुरुआत की थी, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली के लोगों को पहली मेट्रो दी और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली वासियों को नई मेट्रो परियोजनाओं और नमो भारत का उपहार दे रहे हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में इसका परिवर्तन और विस्तार अभूतपूर्व रहा है, खासकर 2014 के बाद से। पिछले दशक में मेट्रो नेटवर्क में तीन गुना वृद्धि पिछले दशक में मेट्रो नेटवर्क में तीन गुना वृद्धि हुई है। मेट्रो नेटवर्क 2014 में केवल 248 किलोमीटर से बढ़कर अब 1000 किलोमीटर हो गया है। आज 11 राज्यों के 23 शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क है। 2014 में यह केवल 5 राज्यों और 5 शहरों में था। आज मेट्रो में प्रतिदिन एक करोड़ से ज्यादा लोग यात्रा करते हैं, जो 2014 के 28 लाख यात्रियों की तुलना में 2.5 गुना अधिक बढ़ोतरी है। मेट्रो ट्रेनें आज प्रतिदिन 2.75 लाख किलोमीटर की यात्रा करती हैं वहीं, मेट्रो ट्रेनें आज प्रतिदिन कुल 2.75 लाख किलोमीटर की यात्रा करती हैं, जो एक दशक पहले के रोजाना 86 हजार किलोमीटर का तीन गुना है। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के तहत, केंद्र सरकार लाखों नागरिकों के लिए यात्रा की सुविधा और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निर्बाध, किफायती और आधुनिक शहरी परिवहन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन परिवर्तनकारी प्रयासों के तहत, पीएम मोदी रविवार को साहिबाबाद आरआरटीएस स्टेशन से न्यू अशोक नगर आरआरटीएस स्टेशन तक नमो भारत ट्रेन की यात्रा करने वाले हैं। लाखों लोगों को अब हाई-स्पीड और आरामदायक यात्रा के विकल्प मिलेंगे पीएम मोदी की यह यात्रा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के 13 किलोमीटर लंबे हिस्से के उद्घाटन का प्रतीक होगी। 4,600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित यह कॉरिडोर दिल्ली और मेरठ के बीच क्षेत्रीय संपर्क को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, जिससे लाखों लोगों को हाई-स्पीड और आरामदायक यात्रा के विकल्प मिलेंगे। नमो भारत कॉरिडोर के अलावा, पीएम मोदी जनकपुरी और कृष्णा पार्क के बीच दिल्ली मेट्रो फेज-4 के 2.8 किलोमीटर लंबे हिस्से का उद्घाटन करेंगे। 1,200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ, यह दिल्ली मेट्रो फेज-4 का पहला परिचालन खंड है। कृष्णा पार्क, विकासपुरी और जनकपुरी के कुछ हिस्सों सहित पश्चिमी दिल्ली के निवासियों को इसका फायदा मिलेगा। रिठाला-कुंडली सेक्शन बनने से उत्तर-पश्चिमी दिल्ली और हरियाणा में कनेक्टिविटी की सुविधा बढ़ेगी प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली मेट्रो फेज-4 के 26.5 किलोमीटर लंबे रिठाला-कुंडली सेक्शन की आधारशिला भी रखेंगे। 6,230 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह नया कॉरिडोर दिल्ली के रिठाला को हरियाणा के नाथूपुर (कुंडली) से जोड़ेगा। इसका उद्देश्य उत्तर-पश्चिमी दिल्ली और हरियाणा में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है, जिससे रोहिणी, बवाना, नरेला और कुंडली जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।  

तेलंगाना सरकार ने 26 जनवरी से नए राशन कार्ड लागू करने का निर्णय लिया, कई कल्याणकारी पहलों भी करेगी लागू

हैदराबाद तेलंगाना सरकार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी से शुरू होने वाली कई कल्याणकारी पहलों को लागू करने का निर्णय लिया है जिसमें उन्नत रायथु भरोसा, नए राशन कार्ड जारी और इंदिराम्मा आत्मीय भरोसा योजना शामिल है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में शनिवार शाम को यहां सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिए गए। श्री रेड्डी ने बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए घोषणा की कि संशोधित रायथु भरोसा योजना के तहत सभी खेती योग्य भूमि के लिए वित्तीय सहायता को पिछले 10,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष कर दिया जाएगा। हालाँकि यह सहायता गैर-कृषि योग्य भूमि जैसे पहाड़ियों, सड़कों, रियल एस्टेट उद्यमों या औद्योगिक क्षेत्रों तक नहीं बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से सटीक कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए ऐसी भूमि की घोषणा सरकार को करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मंत्रिमंडल ने इंदिराम्मा आत्मीय भरोसा योजना के तहत भूमिहीन किसानों के लिए 12,000 रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है जिसका उद्देश्य कृषक समुदाय के सबसे कमजोर वर्गों को राहत और सहायता प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने राज्य भर में अधिक परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सभी पात्र व्यक्तियों को नए राशन कार्ड जारी करने की भी घोषणा की।  

आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जनजातीय महिलाओं को सिखायेंगे संसदीय शासन प्रणाली

नई दिल्ली संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में सोमवार को “पंचायत से पार्लियामेंट 2.0” कार्यक्रम में 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायती राज संस्थाओं से अनुसूचित जनजाति की 502 महिला प्रतिनिधि शामिल होंगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित किए जा रहे इस एक दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को संवैधानिक प्रावधानों, संसदीय प्रक्रियाओं और शासन व्यवस्था की गहन जानकारी प्रदान करना है। श्री बिरला के नेतृत्व में सभी प्रतिनिधि भारत के संविधान की प्रस्तावना का पाठ करेंगे। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह स्वागत भाषण देंगे। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम दूसरे सत्र को संबोधित करेंगे। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यशाला और सत्र आयोजित किए जाएंगे तथा प्रतिभागियों को नए संसद भवन, संविधान सदन, प्रधानमंत्री संग्रहालय और राष्ट्रपति भवन ले जाया जाएगा ताकि उन्हें भारत की विधायी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज की गहन जानकारी प्राप्त हो। इस कार्यक्रम में 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अनुसूचित जनजातियों की 502 निर्वाचित महिला प्रतिनिधि शामिल होंगी जिससे एक विविध और समावेशी समूह के बीच जानकारी का आदान-प्रदान होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित अनुसूचित जनजातियों की महिला प्रतिनिधियों को सशक्त बनाना तथा प्रभावी नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए उन्हें संवैधानिक प्रावधानों, संसदीय प्रक्रियाओं और शासन व्यवस्था के बारे में गहन जानकारी प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के आयोजन के पीछे एक अन्य उद्देश्य शिक्षा, ग्रामीण विकास आदि जैसे विविध क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति की महिला प्रतिनिधियों द्वारा किए गए अच्छे कार्यों को मान्यता देना भी है । प्रतिभागियों के लिए परस्पर संवादपरक कार्यशालाएँ और सत्रों का आयोजन किया जाएगा जिनका संचालन सुविख्यात विशेषज्ञों और संसद सदस्यों द्वारा किया जाएगा। ये सत्र निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित होंगे :- (1) महिलाओं से संबंधित संवैधानिक प्रावधान, जिसमें 73वें संशोधन – पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा अधिनियम) पर विशेष रूप से बल दिया जाएगा। (2) जनजातीय मुद्दों से संबंधित केंद्र सरकार की योजनाएँ और कार्यक्रम। इस कार्यक्रम का आयोजन “पंचायत से संसद 2024” के क्रम में किया जा रहा है, जिसमें पूरे भारत से 500 महिला सरपंच शामिल हुई थीं। कार्यक्रम के दूसरे संस्करण, पंचायत से पार्लियामेंट 2.0 का उद्देश्य, अब तक हुई प्रगति को आगे बढ़ाना तथा विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को और सशक्त करना है।  

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने की जगह मुख्यमंत्री कृषक बंधु व कृषक बीमा योजना को जारी रखेगी: शोभनदेव चट्टोपाध्याय

कोलकाता बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र की एक और योजना को राज्य में लागू नहीं करने का निर्णय लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के कृषि मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को साफ तौर पर कह दिया है कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने की जगह मुख्यमंत्री कृषक बंधु व कृषक बीमा योजना को जारी रखेगी। मालूम हो कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने गत शनिवार को सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअली बैठक की थी। सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल हुए शोभनदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री कृषक बंधु व कृषक बीमा योजना की राज्य के किसानों में कहीं अधिक स्वीकार्यता है। इनके तहत उन्हें केंद्रीय योजना से अधिक रुपये भी प्रदान किए जाते हैं और सारा खर्च राज्य सरकार के कोष से वहन किया जाता है। कहा- कई राज्यों ने नहीं किया है लागू उन्होंने कहा कि बंगाल का कृषि क्षेत्र के लिए बजट 9,800 करोड़ रुपये का है। केंद्र की ओर से विभिन्न योजनाओं के लिए जो फंड दिया जाता है, वह इसके पांच प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं को जारी रखने की बात कहते हुए तर्क दिया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को गुजरात, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, आंध्र प्रदेश व पंजाब जैसे राज्यों ने भी अभी तक अपने यहां लागू नहीं किया है। किसानों को दी जाती है वित्तीय सहायता मालूम हो कि मुख्यमंत्री कृषक बंधु योजना के तहत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें प्रति वर्ष दो फसलों के लिए 10,000 रुपये की सहायता शामिल है। वहीं कृषक बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है, जिसमें मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में दो लाख रुपये तक की सहायता शामिल है। बता दें कि बंगाल सरकार ने राज्य में आयुष्मान भारत योजना को भी अब तक लागू नहीं किया है। इसके बदले वह अपनी ‘स्वास्थ्य साथी योजना’ चला रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना को भी बंगाल में नाम बदलकर चलाया जा रहा है। इस कारण केंद्र ने उक्त योजना के लिए फंड रोक दिया है।

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