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यूएस: एच-1 बी वीजा, डोनाल्ड ट्रंप का बना सर दर्द , एलन मस्क ने किया समर्थन

US: H-1B visa, Donald Trump’s headache, Elon Musk supported अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर बहस जारी है। ट्रंप समर्थक इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं, वहीं ट्रंप के करीबी उद्योगपति एलन मस्क ने एच-1बी वीजा का समर्थन किया है। अब इस बहस में अमेरिका के वरिष्ठ और प्रभावशाली सांसद बर्नी सैंडर्स भी शामिल हो गए हैं। बर्नी सैंडर्स ने मस्क पर आरोप लगाया है कि वह एच-1बी वीजा का समर्थन सिर्फ विदेशों से सस्ते कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए कर रहे हैं। एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से कुशल कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकते हैं। ‘श्रम लागत कम करना चाहते हैं मस्क’ बर्नी सैंडर्स लंबे समय से कर्मचारियों के अधिकारों के समर्थक रहे हैं। गुरुवार को एक बयान में कहा कि एच-1बी वीजा कुशल कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए नहीं है बल्कि सस्ते कर्मचारियों को नौकरी पर रखने और श्रम लागत कम करने के लिए है। बर्नी सैंडर्स ने दावा किया कि इस वीजा के जरिए अमेरिकी अरबपतियों को फायदा हो रहा है और टेस्ला जैसी कंपनियां कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशों, जैसे भारतीय कर्मचारियों को नौकरी दे रही हैं। बर्नी सैंडर्स ने मांग की कि एच-1बी वीजा में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि अमेरिकी कर्मचारियों को इसका नुकसान न झेलना पड़े। अमेरिकी सांसद ने कहा कि मस्क की कंपनी में बीते साल करीब साढ़े सात हजार अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया, जबकि एच-1बी वीजा धारक कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला गया। एलन मस्क ने एच-1बी वीजा का किया था समर्थन गौरतलब है कि एलन मस्क एच-1बी वीजा के समर्थक हैं और उन्होंने इसका समर्थन करते हुए कहा था कि अमेरिका में कुशल कर्मचारियों की कमी है और इस कमी को पूरा करने के लिए एच-1बी वीजा जरूरी है। मस्क ने कहा कि कई इंजीनियर्स इस वीजा के जरिए अमेरिका आए और उन्होंने अमेरिका के विकास में अहम योगदान दिया। मस्क के इस दावे पर भी बर्नी सैंडर्स ने पलटवार किया और कहा कि टेस्ला में कई एच-1बी वीजा धारक अकाउंटेंट और मैकेनिकल इंजीनियर हैं और ये उच्च प्रशिक्षित कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं। ट्रंप समर्थक भी कर चुके हैं इसका विरोध उल्लेखनीय है कि बीते दिनों ट्रंप समर्थक लॉरा लूमर और स्टीव बैनन आदि ने एच-1बी वीजा का विरोध किया था और दावा किया कि इससे अमेरिकी लोगों की नौकरियां छिन रही हैं। इस पर मस्क ने एच-1बी वीजा का समर्थन किया। डोनाल्ड ट्रंप ने भी मस्क का समर्थन करते हुए एच-1बी वीजा को जारी रखने की बात कही थी।

केंद्र सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्डों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए, 24 जनवरी से हाईवे के नियम बदल जाएंगे

नई दिल्ली नए साल की शुरूआत होते ही केंद्र सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्डों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। ये दिशा-निर्देश 24 जनवरी से प्रभावी होंगे, जिनका उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट, मानकीकृत और समय पर जानकारी प्रदान करना है। इन परिवर्तनों के जरिए दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है। स्पीड लिमिट और चेतावनी संकेतक नई व्यवस्था के तहत रंबल स्ट्रिप्स जैसे संभावित खतरनाक स्थानों से पहले संकेतक लगाए जाएंगे, ताकि ड्राइवर को अपनी गति समायोजित करने का समय मिल सके। स्पीड लिमिट की जानकारी हर पांच किलोमीटर पर साइन बोर्डों के माध्यम से दी जाएगी। इन बोर्डों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन चालकों के लिए पढ़ना और समझना आसान हो। मानकीकरण और एकरूपता सड़क परिवहन मंत्रालय ने साइन बोर्डों पर उपयोग किए जाने वाले अक्षरों और संख्याओं के आकार और रंग को मानकीकृत कर दिया है। इस कदम से संकेतकों की एकरूपता बढ़ेगी और उन्हें समझने में आसानी होगी। साथ ही, अलग-अलग वाहनों की गति सीमा को एक ही बोर्ड पर स्पष्ट रूप से दर्शाने की व्यवस्था की गई है। No parking और पैदल यात्री सुरक्षा दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए “नो पार्किंग” बोर्ड हर पांच किलोमीटर पर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, क्रॉसिंग की जानकारी पहले से देने की व्यवस्था की गई है। समग्र सुरक्षा के प्रयास इन दिशा-निर्देशों को तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और सड़क सुरक्षा के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया। इसके आधार पर मार्ग संकेतकों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया: अनिवार्य, चेतावनी और सूचना संबंधी संकेतक।

2023-24 में लड़कियों के स्कूली नामांकन में 16 लाख की कमी, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज

नई दिल्ली भारत में स्कूलों जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2023-24 में करीब 37 लाख छात्रों ने स्कूली पढ़ाई छोड़ी दी है, जिनमें 16 लाख लड़कियां शामिल हैं. साल 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में स्कूली छोड़ने वाली छात्रों की संख्या अधिक है. शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) की एक रिपोर्ट में यह डेटा में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में कुल 25.17 करोड़ छात्र स्कूलों में नामांकित थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 24.80 करोड़ रह गई और 2021-2022 में करीब 26.52 करोड़ था. इसके अनुसार, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट आई है. इस तरह2023-24 में लड़कियों के नामांकन में 16 लाख की कमी आई, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज की गई. अल्पसंख्यकों की भागीदारी UDISE 2023-24 ने पहली बार छात्रों का व्यक्तिगत डेटा और स्वैच्छिक आधार पर उनके आधार नंबर जुटाए. 2023-24 तक 19.7 करोड़ छात्रों ने अपने आधार नंबर शेयर किए. कुल नामांकन में 20% छात्र अल्पसंख्यक समुदायों से थे. इनमें 79.6% मुस्लिम, 10% ईसाई, 6.9% सिख, 2.2% बौद्ध, 1.3% जैन और 0.1% पारसी समुदाय से थे. जातीय वर्गीकरण रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल लेवल पर पंजीकृत (UDISE डेटा के अनुसार), 26.9% छात्र सामान्य वर्ग से, 18% अनुसूचित जाति से, 9.9% अनुसूचित जनजाति से और 45.2% अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में स्कूलों, शिक्षकों और नामांकित छात्रों की उपलब्धता अलग-अलग है। ‘घोस्ट स्टूडेंट्स’ की पहचान व्यक्तिगत डेटा से फर्जी छात्रों (‘घोस्ट स्टूडेंट्स’) की पहचान और सरकार की योजनाओं का लाभ सही छात्रों तक पहुंचाने में मदद मिली. इससे सरकारी खर्च में बचत और बेहतर प्रबंधन संभव हुआ. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत छात्र डेटा जुटाया गया. इसलिए, यह डेटा 2021-22 या उससे पहले के आंकड़ों से तुलनात्मक नहीं है. यह प्रक्रिया स्कूल-वार डेटा से अलग है, जिससे शिक्षा प्रणाली की वास्तविक स्थिति सामने आती है. राज्यों में स्कूल और छात्रों का अनुपात उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में स्कूलों की संख्या छात्रों की तुलना में अधिक है. वहीं, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और बिहार में छात्रों की संख्या स्कूलों से ज्यादा है. यह रिपोर्ट बताती है कि नई डेटा प्रणाली से छात्रों के ड्रॉपआउट और शिक्षा में प्रगति को सटीकता से ट्रैक किया जा सकेगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा.

हमास की लड़ाकों की संख्या तेजी से बढ़ी, हमास की भर्ती बढ़ाएगी आईडीएफ की टेंशन, गाजा में हमास जारी रखे हुए है अपनी लड़ाई

तेल अवीव  गाजा पट्टी में अक्टूबर, 2023 से हमास और इजरायल के बीच भीषण लड़ाई चल रही है। इसमें फिलिस्तीनी गुट हमास को बीते कुछ समय में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। उसके ज्यादातर शीर्ष नेता और कमांडर हालिया महीनों में मारे गए हैं। ऐसे में हमास के खत्म हो जाने के दावे भी कुछ एक्सपर्ट हालिया समय में करने लगे थे लेकिन इस गुट ने एक बार फिर तगड़ी वापसी की है। इजरायली वेबसाइट यरूशलम पोस्ट और चैनल 12 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास नए लड़ाकों की भर्ती करके गाजा पट्टी में इजरायली सेना (आईडीएफ) के सामने जोरदार वापसी कर रहा है। ये रिपोर्ट इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की चिंता बढ़ा सकती है। चैनल 12 ने बुधवार रात अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास के पास अभी भी 20,000 से 23,000 लड़ाके हैं। आईडीएफ का दावा है कि उसने अब तक युद्ध के दौरान 17,000 से 20,000 हमास और इस्लामिक जिहाद के लड़ाकों को अब तक मारा है। आईडीएफ ने युद्ध के दौरान 6,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें से कम से कम 4,300 अभी भी हिरासत में हैं। हमास बढ़ा रहा है लड़ाकों की तादाद युद्ध की शुरुआत में आईडीएफ ने हमास के पास 25,000 लड़ाके होने का अनुमान लगाया था और अभी भी 23,000 तक लड़ाके हमास में होने की बात कही जा रही है। वहीं आईडीएफ 20 हजार लड़ाकों को युद्ध में मारने का भी दावा कर रहा है। ऐसे में साफ है कि बड़े स्तर पर भर्ती हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये साफ है कि हमास नए लड़ाकों को हथियार सौंप रहा है। हालांकि इनकी ट्रेनिंग पर कई तरह के सवाल हैं। ये लड़ाके उस तरह से ट्रैंड नहीं है, जैसे शुरुआती दौर में हमास के पास थे। हमास ने बड़ी संख्या ऐसे लड़ाके भी भर्ती किए हैं, जिनकी उम्र 20 या 18 साल से भी कम है। हमास के पुनरुत्थान और लड़ाकों की संख्या के बारे में परस्पर विरोधी रिपोर्ट भी सामने आई हैं। आईडीएफ और इजरायली अखबारों के दावे भी एक जैसे नहीं है।हालांकि इस सबके बीच इजरायल के उन दावो पर जरूर बड़ा सवाल उठता है, जिनमें बार-बार हमास के गाजा में बेहद कमजोर हो जाने का दावा किया जाता रहा है। साथ ही गाजा में चल रहे संघर्ष की वास्तविक स्थिति के बारे में सवाल उठता है, जहां लाखों लोग अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हो रहे हैं।

प्रदेश सरकार 963 किसानों को उनकी जमीन वापस करेगी, किसानों को महाराष्ट्र सरकार का बड़ा तोहफा

मुंबई महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष और राज्य मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए साल की शुरुआत में किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। प्रदेश सरकार 963 किसानों को उनकी जमीन वापस करेगी, जो सरकार द्वारा उनके ऊपर सरकारी बकाया न चुकाए जाने के कारण जब्त कर ली गई थी। चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया है कि 963 किसानों को जमीन वापस की जाएगी। यह एक अहम कदम है, जिसे राज्य सरकार ने किसानों की भलाई के लिए उठाया है। किसानों की यह जमीन वापसी उनके लिए एक बड़ी राहत होगी और इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। शरद पवार और अजीत पवार के एनसीपी के विलय के बारे में पूछे जाने पर बावनकुले ने कहा कि अगर परिवार एक साथ आता है तो यह एक अच्छी बात है और वह इसका स्वागत करते हैं। यह राजनीतिक एकता का संकेत है और इससे राज्य में विकास की संभावनाएं मजबूत होंगी। बावनकुले ने पीएम नरेंद्र मोदी के वीर सावरकर के नाम पर दिल्ली में एक कॉलेज का शिलान्यास करने की बात भी की। उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी वीर सावरकर के नाम पर कॉलेज का शिलान्यास करने जा रहे हैं, इसके लिए हम प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं। वीर सावरकर महाराष्ट्र के गौरव हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें अपमानित करती रही है और उद्धव ठाकरे सत्ता की खातिर इस पर चुप हैं। लालू प्रसाद यादव के बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार गिराने का प्रस्ताव देने पर बावनकुले ने कहा कि जो कुछ संजय राउत और लालू प्रसाद यादव कह रहे हैं, वो शायद उन्होंने अपने सपनों में सुना होगा। उनका यह बयान बेइमानी और अव्यावहारिक है।

प्रधानमंत्री मोदी का कश्मीर की संस्कृति और भाषाओं को लेकर विशेष ध्यान है, बदल सकते है कश्मीर का नाम: अमित शाह

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ‘J&K and Ladakh Through the Ages’ पुस्तक के विमोचन के दौरान कहा कि कश्मीर का नाम कश्यप से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने बताया कि कश्मीर में भारत की संस्कृति की नींव पड़ी थी, और यहां सूफी, बौद्ध और शैल मठों ने बहुत अच्छा विकास किया। अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीरी, डोगरी, बालटी और झंस्कारी भाषाओं को सरकारी स्वीकृति दी है, जिससे कश्मीर की छोटी-छोटी भाषाएं जीवित रह सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का कश्मीर की संस्कृति और भाषाओं को लेकर विशेष ध्यान है। गृह मंत्री ने धारा 370 और 35ए के बारे में भी बात की, जिनका उद्देश्य देश को बांटने और कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए था। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने इन धाराओं को हटाकर कश्मीर में विकास के रास्ते खोले हैं। उन्होंने कहा कि इन धाराओं के कारण आतंकवाद पनपा था, लेकिन इनकी समाप्ति के बाद अब कश्मीर में शांति बढ़ी है। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर का इतिहास अब इस पुस्तक के जरिए प्रमाणित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत का इतिहास और संस्कृति पूरे देश में फैली हुई है, और कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा, और इस पुस्तक में इसके ऐतिहासिक प्रमाण दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर में जो मंदिर पाए गए हैं, वे भारत और कश्मीर के बीच अटूट संबंधों को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास कभी भी लुटियन दिल्ली से नहीं लिखा जा सकता, उसे वास्तविकता को समझकर और प्रमाणों के आधार पर लिखा जाना चाहिए। अमित शाह ने अंत में कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर तय होती हैं, और दुनिया में कोई भी देश हमें भू-राजनीतिक नजरिए से परिभाषित नहीं कर सकता। भारत की एकता और अखंडता की ताकत उसकी संस्कृति में निहित है।

22 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के पहले दल को 13 दिवसीय भ्रमण पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां 22 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के पहले दल को 13 दिवसीय भ्रमण पर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों की वोल्वो बस को हरी झंडी दिखाई और उन्हें इस टूअर के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश के 6000 अनाथ बच्चों को कानून बनाकर चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाया है। उनका कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना लागू की है, जिसके अन्तर्गत अनाथ बच्चों की देखभाल, उन्हें शिक्षा प्रदान करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रावधान किए गए हैं। इन 22 बच्चों को इसी योजना के अन्तर्गत चंडीगढ़, दिल्ली और गोवा के भ्रमण पर भेजा गया है। चंडीगढ़, दिल्ली और गोवा का भ्रमण करेंगे 22 बच्चे मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रमण पर निकले 22 बच्चों मेंं 16 लड़कियां और 6 लड़के शामिल हैं। ये बच्चे 2 से 4 जनवरी तक का चंडीगढ़ भ्रमण करेंगे और हिमाचल भवन चंडीगढ़ में ठहरेंगे। उसके बाद 5 जनवरी को ये शताब्दी ट्रेन से दिल्ली जाएंगे और 8 जनवरी तक दिल्ली में ठहरेंगे। वहां विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि 9 जनवरी को ये हवाई जहाज से गोवा के लिए रवाना होंगे और 13 जनवरी तक गोवा में एक थ्री स्टार होटल में ठहरेंगे और वहां के विभिन्न पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी को ये सभी बच्चे गोवा से हवाई जहाज के माध्यम से चंडीगढ़ पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बच्चों का हिमाचल की सम्पदा पर अधिकार है। इन बच्चों की सरकार ही माता है और सरकार ही पिता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम अपने परिवार के सदस्यों के साथ घूमने जाते हैं, उसी तरह से राज्य सरकार ने इन्हें भ्रमण पर भेजा है। राज्य सरकार की सराहनीय पहल : शांडिल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि राज्य सरकार की यह सराहनीय पहल है और अनाथ बच्चों की देखभाल राज्य सरकार कर रही है। पहले इन बच्चों की कोई सुनवाई नहीं होती थी, लेकिन अब वर्तमान राज्य सरकार उनकी हर जरूरत का परिवार की तरह ध्यान रख रही है। इस अवसर पर कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, उपायुक्त अनुपम कश्यप और अन्य उपस्थित रहे।

पर्यटकों और यात्रियों के लिए हाई अलर्ट जारी, कड़ाके की ठंड का सामना किया जा रहा, बर्फबारी के आसार

जम्मू कश्मीर जम्मू-कश्मीर में इस समय कड़ाके की ठंड का सामना किया जा रहा है और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। कश्मीर के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई और गुरुवार से पहाड़ों पर हल्का हिमपात और निचले इलाकों में वर्षा की संभावना है। श्रीनगर और जम्मू में हालांकि शुष्क मौसम रहा, लेकिन आसमान में बादल बने रहे।   मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कश्मीर में तापमान जमाव बिंदु से नीचे बना हुआ है, जिससे ठंड और बढ़ने की आशंका है। जम्मू में भी हल्का कोहरा और ठंड महसूस हो रही है। अधिकतम तापमान में गिरावट आ रही है, जिससे दिन में ठंड का असर बढ़ रहा है। जम्मू का अधिकतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो पिछले दिन की तुलना में हल्का कम है। विभाग ने यह भी जानकारी दी कि आगामी दिनों में कश्मीर में दो पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव रहेगा। पहला विक्षोभ बुधवार से सक्रिय हो चुका है और 2 जनवरी दोपहर तक प्रभावी रहेगा, जबकि दूसरा विक्षोभ 3 से 6 जनवरी के बीच अधिक तीव्रता से असर दिखाएगा। इस विक्षोभ के चलते घाटी के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से भारी बर्फबारी हो सकती है, जबकि 4 और 5 जनवरी को इसका प्रभाव अधिक होगा।

6 जनवरी को पश्चिमी यूपी में बारिश की संभावना, नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण बारिश के साथ सर्द हवाएं चलेंगी

नई दिल्ली 2025 की शुरुआत उत्तर प्रदेश में ठंड और बदलते मौसम के साथ हुई है। नए साल का जश्न मना रहे लोगों को ठंड और बारिश की वजह से सतर्क रहने की जरूरत है। 1 जनवरी को नोएडा समेत पूरे प्रदेश में ठंड का प्रकोप देखा गया। इस दौरान अधिकतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक बना रहा। इसी बीच, मौसम विभाग ने आज और आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जो ठंड को और बढ़ा सकती है। नोएडा और आसपास हल्की बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, आज नोएडा, मथुरा, अलीगढ़, ललितपुर, चित्रकूट, बांदा, और महोबा जैसे इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश के बाद ठंड का असर और तेज हो जाएगा। प्रदेश में शीत दिवस के हालात बन सकते हैं, जिसमें अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। स्कूलों की छुट्टियां और प्रदूषण में राहत ठंड बढ़ने की संभावना को देखते हुए यूपी सरकार ने बच्चों के स्कूलों में छुट्टियां पहले ही घोषित कर दी हैं। हालांकि, बारिश से प्रदूषण के स्तर में कमी आने की उम्मीद है, जिससे लोगों को राहत मिल सकती है। इन जिलों में अलर्ट? मौसम विभाग ने यूपी के कई जिलों में शीत दिवस और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, सहारनपुर, मेरठ, मथुरा, आगरा, बरेली, लखनऊ, गाजियाबाद, वाराणसी समेत अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड और बारिश के चलते सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। 6 जनवरी को फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जनवरी को पश्चिमी यूपी में बारिश की संभावना है। नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण बारिश के साथ सर्द हवाएं चलेंगी। इससे न्यूनतम तापमान में गिरावट और ठंड में बढ़ोतरी हो सकती है। नए साल में ठंड से बचाव की तैयारी जरूरी बारिश और ठंड को देखते हुए प्रदेशवासियों को सलाह दी जाती है कि वे गर्म कपड़ों का उपयोग करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। साथ ही, बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें, क्योंकि ठंड का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने घोषणा की है कि राज्य में 22 नई जलविद्युत परियोजनाओं का आबंटन की जाएगी

शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश को ऊर्जा उत्पादन में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने घोषणा की है कि राज्य में 22 नई जलविद्युत परियोजनाओं का आबंटन किया जाएगा। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 828 मैगावाट होगी, जिनमें 6.5 मैगावाट से लेकर 400 मैगावाट तक की परियोजनाएं शामिल हैं। चिनाब नदी बेसिन बनेगा ऊर्जा का मुख्य स्रोत इन परियोजनाओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी चिनाब नदी बेसिन की है, जहां 595 मैगावाट की 9 परियोजनाएं लगाई जाएंगी। इसके अलावा सतलुज नदी बेसिन में 169 मैगावाट की 8 परियोजनाएं, रावी बेसिन में 55 मैगावाट 4 परियोजनाएं और ब्यास बेसिन में 9 मैगावाट की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। 10 लाख प्रति मैगावाट का अपफ्रंट प्रीमियम सरकार ने इन परियोजनाओं को देश के अन्य राज्यों और केन्द्रीय उपक्रमों को 40 वर्षों के लिए 10 लाख प्रति मैगावाट अपफ्रंट प्रीमियम के आधार पर आबंटित करने का निर्णय लिया है। स्थानीय विकास और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। हिमाचल बनेगा ऊर्जा समृद्ध राज्य परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से हिमाचल प्रदेश देश के सबसे समृद्ध ऊर्जा उत्पादक राज्यों में से एक के रूप में उभरेगा। इसके लिए ऊर्जा निदेशालय ने देशभर में प्रचार अभियान शुरू कर दिया है और सभी राज्यों के सचिवों को पत्र भेजे गए हैं।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन खत्म कराने की कोशिश की जा रही है, भ्रम न फैलाएं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के मामले में पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि सरकार के अधिकारी और कुछ किसान नेता मीडिया में यह गलत धारणा फैला रहे हैं कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन खत्म कराने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा है कि वह स्पष्ट करती है कि कोर्ट ने कभी भी डल्लेवाल का अनशन खत्म कराने का निर्देश नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ उनकी सेहत को लेकर चिंतित है और चाहती है कि उन्हें जल्द से जल्द स्वास्थ्य सहायता दी जाए। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि कोर्ट ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहती लेकिन ऐसा लगता है कि पंजाब सरकार के अधिकारी और कुछ किसान नेता जमीनी स्तर पर स्थिति को और जटिल बनाने के लिए मीडिया में गैरजिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। पीठ ने कहा, “हमें डल्लेवाल के प्रति कुछ किसान नेताओं की सद्भावना को परखने की जरूरत है।” पीठ ने कहा कि चूंकि पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक इस मामले में डिजिटल माध्यम से पेश हो रहे हैं इसलिए उम्मीद है कि अदालत का संदेश निचले स्तर तक जाएगा। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से हलफनामा दाखिल करने को कहा जिसमें यह बताया गया हो कि 20 दिसंबर के उसके आदेश का कितना पालन किया गया है। इस आदेश में कोर्ट ने पंजाब सरकार को डल्लेवाल को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। वहीं पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने स्थिति को जटिल बनाने के किसी भी कोशिश से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि डल्लेवाल को अपना अनशन खत्म किए बिना चिकित्सा सहायता लेने के लिए मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए छह जनवरी की तारीख तय की है। कोर्ट ने डल्लेवाल की ओर से दायर एक नई याचिका पर केंद्र को नोटिस भी जारी किया है। डल्लेवाल की याचिका में केंद्र सरकार को कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बाद 2021 में प्रदर्शनकारी किसानों से किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न वादों को पूरा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

यह न्याय का उपहास है कि चिन्मय कृष्ण दास को एक बार फिर जमानत देने से इनकार कर दिया गया, भड़कीं पूर्व राजदूत

ढाका बांग्लादेश की एक कोर्ट ने इस्कॉन के पूर्व पुजारी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। चटगांव कोर्ट के इस फैसले पर बांग्लादेश में भारत की पूर्व राजदूत वीना सीकरी ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए इसे न्याय का मजाक बताया। साथ ही यह भी बताया कि कोई सबूत नहीं दिया गया है। सीकरी ने चिन्मय के खिलाफ देशद्रोह के आरोपों का समर्थन करने वाले सबूतों की कमी पर भी प्रकाश डाला। न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ से बात करते हुए सीकरी ने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत दुखद है। यह दुखद है। यह न्याय का उपहास है कि चिन्मय कृष्ण दास को एक बार फिर जमानत देने से इनकार कर दिया गया। आप जानते हैं, उनकी गिरफ्तारी का कारण भी, उन्होंने उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया है, लेकिन कोई सबूत नहीं दिया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि वे 25 अक्टूबर को किसी रैली के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है… चटगांव अदालत में मामला दर्ज किया गया और चिन्मय दास को ढाका हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया और फिर चटगांव ले जाया गया। उस समय, जमानत देने से इनकार कर दिया गया जो बहुत ही असामान्य था और अदालत में वकीलों और समर्थकों के बीच भारी झड़प हुई और उसमें एक वकील की मौत हो गई। सीकरी ने बांग्लादेश सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है। इसके अलावा, विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेवा ने भी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की जमानत याचिका खारिज किए जाने की आलोचना की और कहा कि बांग्लादेशी न्यायपालिका शायद सरकारी प्रभाव या हिंदू अल्पसंख्यकों के बारे में पक्षपातपूर्ण धारणाओं के तहत काम कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि चिन्मय के खिलाफ आरोप गंभीर नहीं हैं और उन्हें जमानत मिलनी चाहिए, साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की कार्रवाई देश में इस्लाम को प्राथमिक धर्म और संस्कृति के रूप में स्थापित करने के प्रयास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि बांग्लादेश की न्यायपालिका व्यवस्थित रूप से सरकार के निर्देशों या हिंदू अल्पसंख्यकों के तत्वों और उनके खिलाफ मामलों से एक निश्चित तरीके से निपटने की धारणाओं पर काम कर रही है। चिन्मय के खिलाफ आरोप गंभीर नहीं हैं। उन्हें जमानत मिलनी चाहिए… ऐसा लगता है कि न्यायपालिका एक नए बांग्लादेश की विचारधाराओं का पालन कर रही है, जहां वे इस्लाम को देश में प्राथमिक धर्म, प्राथमिक संस्कृति बनाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा- सरकार सभी साधन संपन्न लोगों से बिजली पर सब्सिडी छोड़ने की अपील करती है

शिमला हिमाचल प्रदेश आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। अब कांग्रेस सरकार ने इससे उबरने के लिए राज्य की जनता से बिजली पर मिल रही सब्सिडी को छोड़ने की अपील की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के साधन संपन्न लोगों से बिजली पर सब्सिडी छोड़ने की अपील की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कई ऐसे भी बिजली उपभोक्ता हैं, जिनके नाम से 285 बिजली मीटर लगे हुए हैं। वहीं, 100 और 200 बिजली मीटर वाले भी कई लोग थे। उनके खुद के नाम भी पांच बिजली मीटर हैं। इसे देखते हुए सरकार सभी साधन संपन्न लोगों से बिजली पर सब्सिडी छोड़ने की अपील करती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा जारी प्रोफार्मा खुद भरकर मुफ्त बिजली सब्सिडी छोड़ दी है। उनके सभी कैबिनेट मंत्रियों ने भी बिजली सब्सिडी छोड़ दी है। उनके अनुसार, पूर्व सरकार के फैसले के तहत मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारी भी बिजली सब्सिडी का लाभ ले रहे थे, जो राज्य के विद्युत बोर्ड पर एक वित्तीय बोझ डाल रहा था। हिमाचल प्रदेश में अभी 125 यूनिट बिजली की सब्सिडी पहले की सरकार की ओर से दी जा रही है, जबकि कांग्रेस ने चुनाव में 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया था। लेकिन अभी तक कांग्रेस सरकार ने 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की गारंटी को पूरा नहीं किया है। अब मुख्यमंत्री सूक्खु पहले से मिल रही 125 यूनिट मुफ्त बिजली को छोड़ने की अपील कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की माने तो इससे प्रदेश बिजली बोर्ड को 200 करोड़ रुपये का फायदा होगा। बिजली बोर्ड पहले से ही घाटे में चल रहा है, ऐसे में घाटे से उबरने के लिए सरकार ने आमजन से सब्सिडी छोड़ने की अपील की है। सीएम सुक्खू ने मीडिया से कहा, “हम बिजली के लिए 2,200 करोड़ रुपये की सब्सिडी पर चर्चा कर रहे हैं, और हमने पाया कि बिजली बोर्ड में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए हम उनके वेतन और पेंशन का भुगतान करने के लिए बिजली की यूनिट लागत का लगभग 2.5 गुना खर्च करते हैं। ये हमारे ही हिमाचल के लोग हैं, जिन्होंने बिजली बोर्ड में सेवाएं दी हैं और हमारी सरकार उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”  

महायुति सरकार के गठन के बाद अभी तक नौ मंत्रियों ने पदभार नहीं संभाला, नहीं हो रही मुश्किलें खत्म

मुंबई महाराष्ट्र में महायुति सरकार के गठन के बाद अभी तक नौ मंत्रियों ने पदभार नहीं संभाला है। इसको लेकर कुछ मंत्रियों में नाराजगी की बात कही जा रही है। महाराष्ट्र में महायुति सरकार की गठन के पहले से शुरू हुईं मुश्किलें अभी तक खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। नतीजे आए एक महीने से अधिक हो गए, लेकिन सरकार की मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं। सीट शेयरिंग से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार होने तक महायुति में लगातार विवाद देखने को मिला। उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल के बाद महायुति में सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन अब पालक मंत्री को लेकर भी सरकार में खींचतान जारी है। नागपुर में विधानमंडल के शीतकालीन सत्र से पहले 25 नवंबर को 39 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी और सत्र खत्म होने के बाद इन मंत्रियों के विभागों की घोषणा की गई थी। लेकिन अभी तक नौ मंत्रियों ने मुंबई पहुंचकर पदभार ग्रहण नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंत्री अपनी पसंद का विभाग नहीं मिलने से नाराज चल रहे हैं। वहीं, कई मंत्री नए साल का जश्न मनाने के लिए वेकेशन पर चले गए हैं। हालांकि सीएम देवेंद्र फडणवीस अपना पदभार ग्रहण करने के बाद से लगातार काम में व्यस्त हैं। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है और जिन मंत्रियों ने अपना पद नहीं संभाला है, उन्हें जल्द पदभार संभालने का निर्देश दिया। महाराष्ट्र में नए सरकार के गठन में देरी के बाद अभी कुछ मंत्रियों के अपने विभाग का चार्ज नहीं लिए जाने पर एनसीपी (एसपी) प्रवक्ता महेश तापसे ने निशाना साधा। उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार के मंत्रियों को पता है कि सरकार के पास अभी आर्थिक नियोजन और सरकार चलाने के लिए जो प्लानिंग होती है, वो नहीं है। इसलिए अभी कुछ मंत्री आराम से बैठे हुए हैं।”  

केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने राजेंद्र आर्लेकर को दिलाई राज्यपाल के रूप में शपथ

तिरुवनंतपुरम राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को राजभवन में आयोजित एक विशेष समारोह में केरल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नितिन मधुकर जामदार ने राज्यपाल को सुबह 10.30 बजे शपथ दिलाई। राज्यपाल ने भगवान के नाम पर शपथ ली और राज्य के 23वें राज्यपाल बन गए। समारोह में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, विधानसभा अध्यक्ष एएन शमसीर, विपक्ष के नेता वीडी सतीसन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं एआईसीसी कार्यसमिति के सदस्य रमेश चेन्निथला, मंत्री, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव, वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी, रक्षा अधिकारी, वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता भी शामिल हुए। श्री अर्लेकर अपनी पत्नी अनघा अर्लेकर के साथ बुधवार शाम हवाई अड्डे पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। शपथ ग्रहण समारोह के बाद, राजभवन में चाय पार्टी का आयोजन किया गया। श्री अर्लेकर ने आरिफ मोहम्मद खान की जगह ली है, जिन्हें बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई गई है। गोवा सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र अर्लेकर बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया। इनमें गोवा औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष, गोवा राज्य अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग वित्तीय विकास निगम के अध्यक्ष, दक्षिण गोवा के भाजपा अध्यक्ष शामिल हैं। 2021 में उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया और बाद में वे बिहार के राज्यपाल बनें।  

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