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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में राजस्थान के हिस्से में भी पटाखों पर पूर्ण बैन होना चाहिए

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की तरह ही यूपी और हरियाणा को पटाखे पर पूर्ण बैन लगाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस ओका की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पटाखे पर बैन तभी प्रभावी हो सकेगा, जब एनसीआर राज्यों में भी इसी तरह का बैन लागू किया जाए। कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि पटाखे पर पूरे साल के लिए बैन किया है। कोर्ट ने कहा कि एनसीआर इलाके में आने वाले राजस्थान के हिस्से में भी इसी तरह का बैन होना चाहिए। हम फिलहाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा को निर्देश देते हैं कि दिल्ली द्वारा 19 दिसंबर, 2024 को लगाए गए प्रतिबंध की तरह वे भी प्रतिबंध लागू करें। कोर्ट में एमसी मेहता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त आदेश पारित किया। जस्टिस ओका की अगुवाई वाली बेंच दिल्ली और एनसीआर में एयर पल्यूशन से निपटने के उपाय को लेकर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान पटाखों पर साल भर के लिए बैन, जीआरएपी और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अमल को लेकर विचार हुआ। दिल्ली सरकार का क्या पक्ष? दिल्ली सरकार की ओर से सीनियर वकील शादान फरासत ने अदालत को बताया कि दिल्ली में पटाखों के निर्माण, स्टोरेज और बिक्री के साथ वितरण और उपयोग पर व्यापक बैन लगाया गया है। लेकिन ये उपाय तभी प्रभावी हो सकेंगे, जब एनसीआर राज्य भी ऐसे बैन लगाएं। क्योंकि इन राज्यों से पटाखे दिल्ली में लाए जा सकते हैं। अदालत को बताया गया कि राजस्थान के एनसीआर इलाकों में पटाखों पर पूर्ण बैन लगाया गया है। साथ ही, हरियाणा में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 5 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए, दिल्ली सरकार ने एनसीटी दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, ऑनलाइन मार्केटिंग प्लैटफॉर्म के माध्यम से डिलिवरी और फोड़ने पर तत्काल प्रभाव से पूरे वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। अदालत ने कहा कि एक बार के लिए हम सुझाव देते हैं कि दिल्ली मॉडल का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2025 को होगी, जिसमें पटाखों के प्रतिबंध पर अतिरिक्त निर्देशों पर विचार किया जाएगा। क्या है मामला सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने में कमी पर चिंता व्यक्त की थी। 12 दिसंबर को कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्यों को पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण, और उपयोग पर पूरे वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि यह प्रतिबंध वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। पहले कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोई भी धर्म प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देता और नागरिकों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया था।

महिला घर निर्माण में लगने वाली सामग्री का इंतजार कर रही थी, घर पहुंचा पार्सल, खोला तो अंदर से निकली लाश

विशाखपट्नम आंध्र प्रदेश में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को एक पार्सल के जरिए लाश मिली है। मामले की सूचना लगते ही पुलिस भी हरकत में आ गई है और शव को ऑटोप्सी के लिए भेजा गया है। अब तक साफ नहीं हो पाया है कि शव किसका है। महिला घर निर्माण में लगने वाली सामग्री का इंतजार कर रही थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना पश्चिम गोदावरी जिले के उंदी मंडल के येंडागांदी गांव की है। नाग तुलसी नाम की एक महिला ने घर बनाने में मदद के लिए क्षत्रिय सेवा समिति को पत्र लिखा था। इसके बाद महिला को समिति की तरफ से टाइल्स भेजे गए थे। इसके बाद जब महिला ने एक बार फिर मदद मांगी, तो समिति ने कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध कराने का वादा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आवेदक को WhatsApp पर मैसेज मिला कि उसे लाइट, पंखे और स्विच भेज दिए जाएंगे। इसके बाद गुरुवार रात एक शख्स उनके घर पहुंचा और पार्सल छोड़कर निकल गया। साथ ही महिला को बताया कि पार्सल में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं। बाद में जब तुलसी ने बॉक्स खोला, तो वह दंग रह गई। उसे बॉक्स में एक शव मिला। फिलहाल, पुलिस पार्सल पहुंचाने वाले की पहचान करने में जुटी है। साथ ही समिति के प्रतिनिधियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया है। कहा जा रहा है कि शव पुरुष का है, जिसकी उम्र करीब 45 साल रही होगी। मौत का समय 4-5 दिन पहले का बताया जा रहा है।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर हत्या की साजिश रचने का आरोप, भाजपा नेता सीटी रवि को किया अरेस्ट

बेंगलुरू कर्नाटक में भाजपा नेता सीटी रवि को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर कांग्रेस की महिला मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर को अपशब्द कहने का आरोप है। वहीं, रवि ने कर्नाटक पुलिस और कांग्रेस सरकार पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। भाजपा नेता सीटी रवि की गिरफ्तारी के बाद उन्हें बेलगावी के कनकपुर पुलिस स्टेशन में रखा गया था। लेकिन, बाद में उन्हें किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया। पुलिस ने उनकी लोकेशन की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। सीटी रवि ने आरोप लगाया कि पुलिस और कांग्रेस सरकार उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं और उन्हें जान से मारने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक पुलिस ने मुझे पुलिस कस्टडी में सिर पर चोट लगने के तीन घंटे बाद प्राथमिक उपचार दिया। मैं पुलिस वाहन में बैठकर पिछले 5-6 घंटे से घूम रहा हूं और अब वह मेरी गाड़ी को सुनसान इलाके में खड़ा करके फोन पर बात कर रहे हैं। सीटी रवि ने कहा कि कांग्रेस सरकार और कर्नाटक पुलिस उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर मुझे कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी कर्नाटक सरकार, डीके शिवकुमार और लक्ष्मी हेब्बालकर पर होगी। वह मुझे अपराधी की तरह ट्रीट कर रहे हैं और इस वजह से मुझमें संदेह पैदा हो रहा है। उनका व्यवहार ठीक वैसा ही है जैसा आपातकाल के दौरान होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक पुलिस जानबूझकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। उन्होंने पुलिस पर हत्या की साजिश रचने और गलत मामले में फंसाने का आरोप लगाया है। सीटी रवि ने एक वीडियो संदेश कर बताया कि पुलिस मुझे खानपुर पुलिस स्टेशन ले आई थी, लेकिन उन्होंने मुझे नहीं बताया कि किस मामले में मुझे लाया गया है। मेरी शिकायत लेने के बावजूद, वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और न ही मेरी एफआईआर दर्ज कर रहे हैं। अगर मेरे साथ कुछ होता है तो कांग्रेस सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए, झूठा मामला दर्ज करके वे मेरी हत्या की साजिश कर रहे हैं, मैंने पहले ही शिकायत दर्ज कर दी है, हालांकि मुझे पुलिस स्टेशन लाए हुए घंटों हो गए हैं मुझे नहीं बताया गया कि मुझे पुलिस स्टेशन क्यों लाया गया है, अगर मेरे साथ कुछ होता है तो पुलिस, डीके शिवकुमार और लक्ष्मी हेब्बालकर और उनकी टीम जिम्मेदार होगी। वह मेरे साथ एक अपराधी की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उनका हर व्यवहार संदेह पैदा कर रहा है, मैंने एक मंत्री के रूप में काम किया है और मैं एक जनप्रतिनिधि हूं।  

देश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं शीतलहर तो कहीं कड़ाके की ठंड, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली देश के अलग-अलग हिस्सों में जाड़े का असर देखने को मिल रहा है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी राजस्थान में शीतलहर की बात कही है। इसके अलावा दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश में भी ठंड को लेकर भविष्यवाणी की गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी को लेकर भी मौसम विभाग ने चेतावनी दी है। आईएमडी के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान में 20 और 21 दिसंबर को शीतलहर का कहर देखने को मिल सकता है। हिमाचल प्रदेश में 19 से 23 दिसंबर तक कुछ इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। दिल्ली में धुंध के साथ शुक्रवार को तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की बात मौसम विभाग ने कही है। इसके अलावा राजधानी में हवा का स्तर भी लगातार खराब बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के संभल इलाके में तापमान में गिरावट के साथ आज सुबह कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग ने अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 26 डिग्री सेल्सियस और 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई थी। 20 दिसंबर को पंजाब के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा 21 और 22 तारीख को पंजाब के अलग-अलग इलाकों में शीतलहर का अनुमान है। वहीं, 19 से 25 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, 19 और 21 दिसंबर के दौरान हरियाणा-चंडीगढ़, 24 और 25 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग इलाकों में भी शीतलहर की बात कही गई है। मौसम विभाग ने जम्मू कश्मीर में 26 दिसंबर तक मौसम मुख्यत: शुष्क रहने और 21-22 दिसंबर की रात को घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होने का अनुमान जताया है। इसके मुताबिक 27 दिसंबर की रात से 28 दिसंबर की सुबह तक कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी भी संभव है। हिमाचल प्रदेश में, वर्तमान में बर्फबारी की भविष्यवाणी नहीं की गई है, क्योंकि शुष्क मौसम बना रहेगा। हालांकि आईएमडी का कहना है कि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ 27 और 28 दिसंबर के आसपास इस क्षेत्र में सर्द स्थिति लाएगा। इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने की संभावना है।

हाईकोर्ट से अडानी समूह को मिली राहत, धारावी प्रोजेक्ट के खिलाफ याचिका खारिज की

मुंबई बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई में धारावी झुग्गी बस्ती पुनर्विकास परियोजना को अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने कहा कि याचिका का कोई आधार नहीं है इसलिए इसे खारिज किया जाता है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरेशन ने यह याचिका दायर की थी जिसमें अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को परियोजना देने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। अडानी समूह ने 259 हेक्टेयर धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए सबसे अधिक बोली लगाई थी। 2022 की निविदा प्रक्रिया में 5,069 करोड़ रुपये की पेशकश के साथ उसने इसे हासिल किया था। सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरेशन ने 2018 की निविदा को रद्द करने और उसके बाद 2022 में अडानी को निविदा देने को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा, ‘याचिका में उठाए गए आधारों में दम नहीं है। सरकार के निविदा को रद्द करने और नई निविदा पेश करने के कदम को चुनौती देने में वह विफल रही।’ जमकर हुई थी राजनीति महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान धारावी प्रोजेक्ट का मुद्दा गर्माया था। विपक्षी दल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने सत्ता में आने पर एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती के पुनर्विकास के लिए अदाणी समूह को दी गई सारी जमीन वापस लेने और इस परियोजना को पूरी तरह से रद्द करने का वादा किया था। इधर, कहा जा रहा था कि विधानसभा चुनाव में महायुति की जीत से अडानी समूह के इस प्रोजेक्ट को राहत मिली है।

राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में अर्बन नक्सल संगठन शामिल थे: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में “अर्बन नक्सल” संगठन शामिल थे। फडणवीस के मुताबिक, इन संगठनों ने नेपाल में एक बैठक आयोजित की थी, जिसका उद्देश्य भाजपा शासित सरकारों को अस्थिर करना था। फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि यह बैठक महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 नवंबर को काठमांडू में हुई थी। इसका उद्देश्य मुंबई जैसे वित्तीय राजधानी में अशांति पैदा करना था। फडणवीस ने यह भी कहा कि एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने चुनावों में “आतंकी धन” के इस्तेमाल की जांच शुरू की है। उन्होंने यह दावा किया कि विदेशी हस्तक्षेप के सबूत मिले हैं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, “15 नवंबर को काठमांडू में एक बैठक हुई थी, जिसमें उन संगठनों ने भाग लिया था जो भारत जोड़ो यात्रा में शामिल थे। इस बैठक में ईवीएम का विरोध और महाराष्ट्र के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों की सरकार को अस्थिर करने और बैलट पेपर की वापसी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।” फडणवीस ने आगे दावा किया कि राहुल गांधी की यात्रा में शामिल 180 संगठनों में से 40 को पूर्व गृह मंत्री आरआर पटिल ने कांग्रेस-एनसीपी सरकार के दौरान ‘फ्रंटल संगठन’ के रूप में नामित किया था। फडणवीस ने कहा, “18 फरवरी 2014 को मनमोहन सिंह सरकार के दौरान केंद्र ने लोकसभा में 72 फ्रंटल संगठनों का उल्लेख किया था, जिनमें से 7 भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा थे।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इन संगठनों ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महा विकास आघाड़ी (MVA) के लिए प्रचार किया था। उन्होंने कहा, “भारत में चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के सबूत मिले हैं।” फडणवीस का यह दावा उस समय आया है जब सरकार ने विधानसभा में “महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2024” प्रस्तुत किया है, जो “शहरी नक्सलवाद” से निपटने के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव करता है। यह कानून शहरी केंद्रों में नक्सलवाद की बढ़ती उपस्थिति से निपटने के लिए कदम उठाने का दावा करता है।

वाइट हाउस के दावे से मची हलचल, पाकिस्तान एक ऐसी लॉन्ग रेंज की बलिस्टिक मिसाइल तैयार करने में जुटा है

इस्लामाबाद अमेरिका ने पाकिस्तान की एक सरकारी मिसाइल डिवेलपमेंट एजेंसी पर पाबंदियां लगाई हैं। इसके अलावा तीन अन्य वेंडर कंपनियों पर भी रोक लगाई हैं। इस बीच वाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी के दावे ने हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसी लॉन्ग रेंज की बलिस्टिक मिसाइल तैयार करने में जुटा है, जो दक्षिण एशिया से बाहर तक मार कर सकती है। यहां तक कि अमेरिका भी उस मिसाइल हमले की जद में आ सकता है। अमेरिका के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर ने कहा कि इस्लामाबाद का जो रवैया है, वह सवाल खड़े करने वाला है। आखिर उसकी नीयत क्या है, जो वह इस तरह की मिसाइलें तैयार कर रहा है। फाइनर ने एक कार्य़क्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे लिए यह हैरानी की बात है और समझना कठिन है कि कैसे पाकिस्तान इतने बड़े खतरे के तौर पर उभर रहा है। खासतौर पर अमेरिका तक को वह निशाने पर ले सकता है। इस बीच अमेरिका के आरोपों और पाबंदियों से पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। उसने भारत का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन अमेरिका पर भेदभाव का आरोप लगाया। पाकिस्तान ने कहा कि कुछ देशों के साथ अमेरिका ऐसा कुछ भी नहीं करता, लेकिन पाकिस्तान पर मनगढ़ंत आरोपों के साथ पाबंदियां लगाई जा रही हैं। अमेरिकी अधिकारी का कहना था कि पाकिस्तान लगातार मिसाइल तकनीक में इजाफा कर रहा है। फिलहाल वह लॉन्ग रेंज की बलिस्टिक मिसाइलें तैयार कर रहा है। यदि उसका यही ट्रेंड जारी रहा तो वह दक्षिण एशिया के बाहर तक मार करेगा और खासतौर पर अमेरिका को भी टारगेट कर सकने की उसके पास क्षमता होगी। बता दें कि अमेरिका ने पाकिस्तान की सरकारी मिसाइल टेक्नोलॉजी कंपनी नेशनल डिवेलपमेंट कॉम्प्लेक्स पर पाबंदी लगाई है। इसके अलावा उसकी तीन अन्य वेंडर कंपनियों अख्तर ऐंड संस प्राइवेट लिमिटेड, एफिलिएट्स इंटरनेशनल और रॉकसाइड इंटरप्राइजेज पर भी पाबंदियां लागू की हैं। पाकिस्तान ने अमेरिका के इन आरोपों और पाबंदियों को लेकर कहा है कि उसका रवैया भेदभाव वाला है। उसने कहा कि इस तरह से अमेरिका क्षेत्रीय शक्तियों में असंतुलन पैदा कर रहा है। उसका साफ इशारा भारत की ओर ही था। पाक के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘ऐसे दोहरे रवैये और भेदभाव वाली नीतियों के चलते अमेरिका ने अपना भरोसा कमजोर किया है। इसके अलावा वह क्षेत्रीय स्तर पर असंतुलन पैदा कर रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति पर भी खतरा पैदा हो सकता है।’

संसद सत्र के आखिरी दिन विपक्षी सांसदों ने आंबेडकर के अपमान को लेकर हंगामा, स्पीकर ने स्थगित कर दी कार्यवाही

नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा हुआ। वहीं शीतकालीन सत्र खत्म होते-होते बीजेपी और कांग्रेस में बवाल ही हो गया। शुक्रवार को इस सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू ही हुई थी कि विपक्षी सांसदों ने बाबासाहेब आंबेडकर के कथित अपमान को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने सांसदों ने अपनी जगह पर जाने को कहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत शुरू होने जा रहा है। सदन में राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा ने आखिरी दिन देश में एक साथ चुनाव कराने से संबंधित दो विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वहीं हंगामे को देखते हुए राज्यसभा की भी कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। संसद सत्र के आखिरी दिन विपक्षी सांसदों ने विजय चौक पर इकट्ठा होकर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के संदर्भ में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई “अपमानजनक” टिप्पणी के खिलाफ शुक्रवार को यहां विरोध प्रदर्शन किया। एक दिन पहले ही जब विपक्षी सांसद संसदभवन परिसर में प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे तो धक्कामुक्की हो गई और बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी को चोट लग गई। सारंगी ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के धक्का देने की वजह से उन्हें चोट आई है। विपक्षी दल संसद के शीतकालीन सत्र में, संसद के मकर द्वार के निकट विरोध प्रदर्शन करते थे, लेकिन गुरुवार की धक्का-मुक्की की घटना को बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने निर्देश दिया कि कोई भी राजनीतिक दल, सांसद और सांसदों का समूह संसद के किसी भी द्वार पर प्रदर्शन नहीं कर सकते। गृह मंत्री अमित शाह की बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर से संबंधित टिप्पणी को लेकर विरोध जताते हुए कल विपक्षी सदस्यों ने मार्च निकाला तो भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर बाबासाहेब के अपमान का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। संसद भवन के ‘मकर द्वार’ के निकट सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य एक दूसरे के सामने आ गए और जमकर नारेबाजी की। भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने धक्का-मुक्की की जिस वजह से उसके बुजुर्ग सांसद प्रताप सारंगी चोटिल हुए। भाजपा सासंद मुकेश राजपूत को भी चोट लगी है। दूसरी तरफ, कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के सांसदों ने उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कई महिला सांसदों को संसद भवन में जाने से रोका और धक्का-मुक्की की। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि शाह ने ‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ विषय पर राज्यसभा में दो दिन तक चली चर्चा का जवाब देते हुए मंगलवार को अपने संबोधन के दौरान बाबासाहेब का अपमान किया। मुख्य विपक्षी दल ने शाह के संबोधन का एक वीडियो अंश भी जारी किया, जिसमें गृह मंत्री विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए यह कहते सुने जा सकते हैं, ‘अभी एक फैशन हो गया है- आंबेडकर, आंबेडकर…। इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’ दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा बाबासाहेब का अपमान किया और यह सुनिश्चित किया कि वह चुनाव में हार जाएं। 

संसद में हुई भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई की क्राइम ब्रांच करेगी जांच, राहुल गांधी के खिलाफ है FIR

नई दिल्ली संसद परिसर में गुरुवार को सत्ता पक्षा और विपक्षी सांसदों के बीच हुई झड़प के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। इन शिकायतों की जांच अब दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच को सौंपने की तैयारी चल रही है। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। आपको बता दें कि यह घटना गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर पर दिए गए बयान के बाद हुई। झड़प में दो बीजेपी के दो सांसद गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद बीजेपी ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन पर हमले, उकसाने और हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराने के बाद मीडिया से कहा, “हमने राहुल गांधी के खिलाफ हमले और उकसाने के लिए दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। हमने विस्तार से घटना का विवरण दिया है। यह घटना मकर द्वार के बाहर हुई, जहां एनडीए सांसद शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। हमने धारा 109, 115, 117, 125, 131 और 351 के तहत शिकायत दी है।” बीजेपी की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 117 (गंभीर चोट पहुंचाने का प्रयास), 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना), 131 (अपराधिक बल का उपयोग), 351 (अपराधिक धमकी) और 3(5) (सामान्य उद्देश्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कांग्रेस ने भी संसद परिसर में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अभद्रता का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “कल जिस तरह से एक दलित नेता का अपमान किया गया और आज उन्हें धक्का दिया गया, यह सब एक साजिश है।” कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी की बहन और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि उनकी एफआईआर झूठी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस वही करेगी जो गृह मंत्री उनसे कहेंगे। उन्होंने कहा, “सभी ने डॉ. आंबेडकर से माफी की मांग की थी, लेकिन इस घटना को भटकाने के लिए यह सब योजना बनाई गई। यह एफआईआर राहुल गांधी के खिलाफ नहीं है, यह डॉ. आंबेडकर के खिलाफ है।”

सुप्रीम कोर्ट ने डीएनडी के लिए टोल टैक्स खत्म करने के आदेश के खिलाफ एनबीटीसीएल की याचिका खारिज की

नई दिल्ली दिल्ली नोएडा डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने डीएनडी के लिए टोल टैक्स खत्म करने के आदेश के खिलाफ नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (एनबीटीसीएल) की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यात्रियों से लगातार पैसे ऐंठने के लिए नोएडा अथॉरिटी को भी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-नोएडा डीएनडी फ्लाईवे पर चलने वाले वाहनों से टोल वसूलने के लिए निजी फर्म एनटीबीसीएल को ठेका देना अन्यायपूर्ण और अनुचित है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2016 के फैसले बरकरार रखा, जिसमें एनटीबीसीएल को दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाले डीएनडी फ्लाईवे से गुजरने वाले वाहनों से टोल कलेक्शन बंद करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि एनटीबीसीएल ने डीएनडी फ्लाईवे के निर्माण की लागत और एक्सप्रेसवे के 2001 में खुलने के बाद से उचित लाभ दोनों ही वसूल कर लिए हैं। बेंच ने नोएडा प्राधिकरण की आलोचना करते हुए कहा कि एनटीबीसीएल के साथ समझौते में टोल कलेक्शन के लिए एक निर्धारित समय सीमा का अभाव था, जिससे कंपनी को यात्रियों से लगातार टोल टैक्स लेने की अनुमति मिल गई। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “नोएडा प्राधिकरण ने एनटीबीसीएल को टैक्स लगाने या वसूलने के लिए शक्तियां सौंपकर अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है, और यह व्यवस्था रियायतकर्ता समझौते की शर्तों से अलग है…इससे यूजर्स पर अनुचित बोझ पड़ा है।” बेंच ने कहा कि आम जनता पहले ही कई सौ करोड़ रुपये गंवा चुकी है और यात्रियों से टोल टैक्स वसूली जारी रखने का कोई कारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को ठहराया सही शीर्ष अदालत ने 2012 में फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका को भी जायज ठहराया, जिसमें एनटीबीसीएल द्वारा “यूजर्स टैक्स के नाम पर टोल लगाने और कलेक्शन” को चुनौती दी गई थी। बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि जनहित याचिका कानूनी रूप से सही थी और हाईकोर्ट द्वारा सही तरीके से इस पर फैसला लिया गया था। शीर्ष अदालत ने कैग की रिपोर्ट पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि एनटीबीसीएल ने टोल कलेक्शन के माध्यम से पर्याप्त लाभ प्राप्त किया है, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि आगे टोल वसूली अनुचित थी। इसके मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एनटीबीसीएल की अपील खारिज कर दी। हर ट्रिप के लगते थे 28 रुपये 2001 में शुरू हुए डीएनडी फ्लाईवे ने दिल्ली और नोएडा के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर दिया है। हाईकोर्ट के निर्णय से पहले, डीएनडी एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों से हर ट्रिप 28 रुपये या राउंड ट्रिप के लिए 56 रुपये का टैक्स लिया जाता था। सुप्रीम कोर्ट इस फैसले से हजारों दैनिक यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

समंदर में बालू भर-भरकर चीन ने बना दिया कृत्रिम द्वीप फिर हवाई अड्डा

बीजिंग. पड़ोसी देश चीन ने इंजीनियरिंग और निर्माण सेक्टर में एक और चमत्कार किया है। उसने पूर्वोत्तर तट पर लिओनिंग प्रांत के एक व्यस्त बंदरगाह वाले शहर डालियान को बेहतर सुविधा परिवहन मुहैया कराने के लिए नजदीकी समंदर में बालू भर-भरकर एक बड़ा सा कृत्रिम द्वीप बना दिया है। इस द्वीप पर हवाई अड्डा बनाने की योजना पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह मानव निर्मित द्वीप पर दुनिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा जो चीन की शानदार उपलब्धि को दुनिया के सामने बताएगा। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कृत्रिम द्वीप पर निर्माणाधीन डालियान जिनझोउ बे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 20.9 वर्ग किलोमीटर (7.7 वर्ग मील) में फैला होगा। इसमें चार रनवे और 900,000 वर्ग मीटर (969,000 वर्ग फीट) में यात्री टर्मिनल होगा। यह हवाई अड्डा पहले चरण में 2035 में चालू हो जाएगा। योजना के मुताबिक, इस हवाई अड्डे से प्रति वर्ष 540,000 उड़ानों को संचालित करना है, जहां से करीब 8 करोड़ यात्री सफर कर सकेंगे। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट पर डालियान जिनझोउ बे इंटरनेशनल ने एक पोस्ट में लिखा है, “देश का सबसे बड़ा अपतटीय हवाई अड्डा पूर्व में सूर्योदय की तरह समुद्र तल से धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण कार्य पूरा हो जाने पर इस कृत्रिम द्वीप पर दुनिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जाएगा, जो दूसरे कृत्रिम द्वीप पर स्थित हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (HKG) और जापान के कंसाई हवाई अड्डे (KIX) दोनों को पीछे छोड़ देगा। हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे 12.48 वर्ग किलोमीटर और कंसाई हवाई अड्डे 10.5 वर्ग किलोमीटर में फैला है। डालियान जिनझोउवान अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा मुख्य भूमि चीन के तट पर पहला कृत्रिम द्वीप हवाई अड्डा होगा। यह हवाई अड्डा चीन के क्षेत्रीय पड़ोसियों, जापान और दक्षिण कोरिया के निकट होगा, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है। डालियान का बंदरगाह शहर तेल रिफाइनरी, शिपिंग, रसद और तटीय पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है। जापान को इस बात का भी टेंशन है कि भविष्य में चीन इस हवाई अड्डे का इस्तेमाल सामरिक दृष्टिकोण से कर सकता है क्योंकि चीन क्षेत्रीय वर्चस्व जमाना चाहता है और वह लंबे समय से कई महासागरों में विवादित जलक्षेत्रों में भी अपने सैन्य और सामरिक अड्डे बनाने में दिलचस्पी रखता रहा है।

रांची में नर्सरी के चार वर्षीय बच्चे से यौन उत्पीड़न, कैब ड्राइवर गिरफ्तार

रांची. झारखंड की राजधानी रांची में एक प्राइवेट स्कूल में नर्सरी के चार वर्षीय बच्चे के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी कैब ड्राइवर को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, बच्चे की मां का आरोप है कि उन्हें एफआईआर दर्ज कराने में दो दिनों तक परेशान होना पड़ा। स्कूल के मैनेजमेंट ने भी उनकी शिकायत पर किसी तरह का नोटिस नहीं लिया है। घटना रांची के बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र का है। बताया जाता है कि इस थाना क्षेत्र में स्पेक्ट्रम ग्लोबल स्कूल में नर्सरी में पढ़ाई करने वाले बच्चे ने घर के लोगों को स्कूल के कैब ड्राइवर की गंदी हरकत के बारे में जानकारी दी। उसकी मां ने स्कूल के प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इसके बाद वह बीआईटी मेसरा ओपी में शिकायत दर्ज कराने पहुंची। बच्चे की मां का कहना है कि यहां भी उन्हें दो दिनों तक दौड़ लगानी पड़ी। ओपी में कई बार उनके बच्चे से बयान लिया गया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट की लापरवाही और अपराध को संरक्षण देने के आरोप पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने स्कूल मैनेजमेंट को बचाने की कोशिश की है। झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य उज्ज्वल प्रकाश तिवारी ने कहा कि यह घटना आयोग के संज्ञान में आई है। इस मामले में आयोग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके पहले, रांची में इसी महीने एक स्कूल की नाबालिग छात्राओं से सरेआम छेड़खानी का वीडियो वायरल होने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी फिरोज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में लापरवाही के आरोप में वरीय पुलिस अफसरों के आदेश पर अब तक छह पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जा चुके हैं।  

नया साल शुरू होते ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भार बढ़ने वाला, चाय से साबुन तक सब होगा महंगा

नई दिल्ली नया साल शुरू होते ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भार बढ़ने वाला है। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां, जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, गोदरेज कंज्यूमर, पारले प्रोडक्ट्स, नेस्ले, और अडानी विल्मर, अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। उत्पादन लागत और कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी का असर अब चाय पत्ती, साबुन, तेल और क्रीम जैसे रोजमर्रा के उत्पादों पर साफ दिखाई देगा। सितंबर 2024 में खाद्य तेल आयात पर ड्यूटी में 22% की वृद्धि के साथ ही पिछले एक साल में इसकी लागत में 40% तक का इजाफा हुआ है। इसी तरह, चीनी, गेहूं के आटे और कॉफी के उत्पादन पर भी महंगाई का असर देखा गया है। पारले और डाबर जैसे ब्रांड्स ने बढ़ाई कीमतें पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने पुष्टि की है कि कंपनी अपने उत्पादों की नई कीमतों के साथ पैकेजिंग तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की मांग को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी। वहीं, डाबर ने हेल्थकेयर और ओरल केयर उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं, जबकि नेस्ले ने अपने कॉफी प्रोडक्ट्स में बढ़ोतरी की है। ग्रामीण और शहरी बाजारों पर असर रिटेल डेटा के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में बढ़ती मांग ने अक्टूबर 2024 में एफएमसीजी सेक्टर को 4.3% की वार्षिक वृद्धि दी थी, लेकिन नवंबर में बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। कंपनियों को उम्मीद है कि शहरी उपभोक्ता इन बढ़ी कीमतों को वहन कर पाएंगे।

स्टार्टअप फर्म CFS ने कहा कि 400 मेगावाट बिजली ‘नकली सूर्य’ से मिलेगी, अमेरिका में 2030 तक ग्रिड से जोड़ने का प्लान, समझें

वॉशिंगटन  दुनिया के कई देश आज के समय ‘नकली सूर्य’ बनाने में लगे हैं। अगर सब ठीक योजना के अनुसार हुआ तो वर्जीनिया 2030 के शुरुआती दशक तक दुनिया का पहला ग्रिड-स्केल न्यूक्लियर फ्यूजन पावर प्लांट स्थापित करेगा। यह संयंत्र भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा को उपयोग में लाकर बिजली उत्पादन करेगा। मंगलवार को स्टार्टअप कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम्स (CFS) ने इसकी घोषणा की। CFS सबसे बड़ी और सबसे चर्चित न्यूक्लियर फ्यूजन कंपनियों में से एक है। यह एक फैसिलिटी बनाने में अरबों डॉलर का निवेश करेगी। चालू होने पर प्लांट ग्रिड के साथ जोड़ने में सक्षम होगा और 400 मेगावाट का उत्पादन करेगा। कंपनी के सीईओ बॉब मुमगार्ड के मुताबिक यह लगभग 150,000 घरों को बिजली देने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार होगा जब दुनिया में ग्रिड पैमाने पर फ्यूजन पावर उपलब्ध कराई जाएगी।’ वर्जीनिया के गवर्नर ग्लेन यंगकिन ने घोषणा का स्वागत करते हुए इसे वर्जीनिया और पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। कैसे बनती है ऊर्जा यह संयंत्र परमाणु संलयन के व्यावसायीकरण की खोज में एक नए चरण का प्रतिनिधित्व करेगा। न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए ही हमारे सूर्य की तरह दूसरे तारों को ताकत मिलती है। लेकिन इस दिशा में अभी भी रास्ता आसान नहीं है। दुनिया को एक स्वच्छ और प्रचुर ऊर्जा स्रोत की सख्त जरूरत है जो जीवाश्म ईंधन की जगह ले सके। न्यूक्लियर फ्यूजन की टेक्नोलॉजी ऐसा ही वादा करती है। इसमें परमाणु कणों से फ्यूजन के जरिए ऊर्जा पैदा की जाती है। इसमें हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए टोकामैक नाम की डोनट के आकार वाली मशीन का इस्तेमाल होता है। क्या होता है फायदा संलयन ऊर्जा लगभग असीमित है, यह पर्यावरण को गर्म नहीं करती और वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली विखंडन तकनीक की तरह रेडियोएक्टिव कचरा भी नहीं छोड़ता है। हालांकि, शोध परियोजनाओं से वाणिज्यिक इस्तेमाल तक इसे लाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। CFS ने कहा है कि संलयन में रातों-रात कुछ नहीं होता। 2018 में MIT से अलग होकर स्थापित इस स्टार्टअप ने अब तक 2 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। उनका दावा है कि वे तेजी से प्रगति कर रहे हैं।

200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया : रेल मंत्री वैष्णव

नई दिल्ली वर्तमान में देश में लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए 10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण कार्य चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पहला प्रोटोटाइप स्लीपर वंदे भारत निर्मित हो चुका है और इसका फील्ड ट्रायल किया जाएगा। 136 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चालू रेल मंत्री ने लोकसभा में एक वक्तव्य में कहा कि इसके अलावा 200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया है। ट्रेन के रोलआउट की समय-सीमा परीक्षणों के सफल समापन पर निर्भर है। 2 दिसंबर तक, देशभर में छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर 136 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चालू हैं। एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा रेल मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयां अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच का उत्पादन कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोच की संख्या 2004-14 के दौरान निर्मित (2,337) संख्या से 16 गुना (36,933) अधिक है। भारतीय रेलवे (आईआर) ने एलएचबी कोचों की भरमार कर दी है जो तकनीकी रूप से बेहतर हैं और इनमें एंटी क्लाइम्बिंग व्यवस्था, विफलता संकेत प्रणाली के साथ एयर सस्पेंशन और कम संक्षारक शेल जैसी विशेषताएं हैं। दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित उन्होंने कहा कि “सुगम्य भारत मिशन” (सुलभ भारत अभियान) के हिस्से के रूप में, भारतीय रेलवे दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दिशा-निर्देशों के तहत, रैंप, सुलभ पार्किंग, ब्रेल और स्पर्शनीय संकेत, कम ऊंचाई वाले काउंटर और लिफ्ट व एस्केलेटर जैसी व्यापक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। नवंबर 2024 तक, भारतीय रेलवे ने 399 स्टेशनों पर 1,512 एस्केलेटर और 609 स्टेशनों पर 1,607 लिफ्टें स्थापित की थीं, जो पिछले दशक की तुलना में क्रमशः 9 और 14 गुना की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, अधिकांश मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में चौड़े प्रवेश द्वार, सुलभ शौचालय और व्हीलचेयर पार्किंग वाले समर्पित कोच उपलब्ध हैं, जबकि वंदे भारत ट्रेनें दिव्यांगजनों के लिए स्वचालित दरवाजे, निर्धारित स्थान और ब्रेल साइनेज जैसी सुविधाओं के साथ बेहतर सुगमता प्रदान करती हैं।  

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