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खुलासा: चीन अपनी विस्तारवाद की नीति से बाज नहीं आ रहा, पैंगोंग झील के पास करने लगा खुदाई

नई दिल्ली चीन अपनी विस्तारवाद की नीति से बाज नहीं आ रहा है। एक तरफ भारत के विदेश मंत्री के साथ चीनी विदेश मंत्री वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध का समाधान निकालने के लिए बैठक करते हैं। वहीं, दूसरी तरफ चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास फिर अपनी हरकतें बढ़ा दी हैं। चीनी सेना यहां लंबे समय तक रहने के लिए खुदाई कर रही है। उसने यहां हथियार और ईंधन के भंडारण के लिए भूमिगत बंकर बनाए हैं। वहीं, अपने बख्तरबंद वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए कठोर आश्रयों का निर्माण किया है। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों से इसका खुलासा हुआ है। पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर पहाड़ों के बीच बसा सिरजाप में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का बेस है। यह झील के आसपास तैनात चीनी सैनिकों का मुख्यालय है। इसे भारत द्वारा दावा किए गए क्षेत्र में बनाया गया है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लगभग 5 किमी दूर स्थित है। मई 2020 में एलएसी पर गतिरोध शुरू होने तक इस क्षेत्र में कोई नहीं रहता था। ब्लैकस्काई द्वारा प्रदान की गई तस्वीरों के अनुसार, 2021-22 के दौरान बनाए गए बेस में भूमिगत बंकर हैं। इनका उपयोग हथियार, ईंधन या अन्य आपूर्ति को स्टोर करने के लिए किया जा सकता है। इसी साल 30 मई को ली गई एक तस्वीर में एक बड़े अंडरग्राउंड बंकर के आठ प्रवेश द्वार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। एक और छोटा बंकर है, जिसमें पांच प्रवेश द्वार हैं। दोनों आसपास ही स्थित है। ब्लैकस्काई के एक विश्लेषक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, “बेस में बख्तरबंद वाहनों की पार्किंग की सुविधा, परीक्षण रेंज, ईंधन और गोला-बारूद भंडारण की व्यवस्था है।” विश्लेषक ने कहा कि बेस को सड़कों और खाइयों के एक व्यापक नेटवर्क से जोड़ा गया है। यह बेस गलवान घाटी से 120 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। जहां जून 2020 में एक क्रूर झड़प हुई थी। इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।  कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे। तस्वीरों पर भारतीय अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। पैंगोंग झील के आसपास के क्षेत्र में तैनात एक पूर्व भारतीय सेना कमांडर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि चीन द्वारा भूमिगत बंकरों के निर्माण में वृद्धि सैन्य दृष्टि से बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा, “आज के युद्ध के मैदान में उपग्रहों या हवाई निगरानी प्लेटफार्मों का उपयोग करके सब कुछ सटीक रूप से देखा जा सकता है। हमारे पास ऐसा कोई भूमिगत आश्रय नहीं है। बेहतर सुरक्षा बनाने के लिए सुरंग बनाना ही एकमात्र तरीका है।” मामले से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भारत ने 2020 में गतिरोध शुरू होने के बाद से सैन्य गतिशीलता बढ़ाई है। रसद सहायता के लिए अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न सड़कें, पुल, सुरंगें, हवाई क्षेत्र और हेलीपैड बनाए हैं।  

भूस्खलन से दो श्रद्धालुओं की मौत, भारी बारिश के कारण फंसे तीर्थयात्री, अमरनाथ के बाद चारधाम यात्रा स्थगित

नई दिल्ली जुलाई में मानसून देश के कई हिस्सों में मेहरबान है। साथ ही कुछ हिस्सों में आफत बन चुका है। पहाड़ी क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब है, जहां भूस्खलन के कारण राजमार्ग बंद हो गए हैं। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात भी बन गए हैं। मौसम विभाग की मानें तो अगले दो से तीन दिन तक उत्तर पश्चिम भारत और उत्तर पूर्वी भारत में अगले पांच दिनों तक भारी बारिश जारी रहेगी। चारधाम यात्रा पर संकट उत्तराखंड में जारी भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए चारधाम यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। मौसम विभाग ने राज्य में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। अधिकारियें ने ऋषिकेश और विकासनगर प्रशासन को तीर्थ यात्रियों को चारधाम यात्रा के लिए रवाना न करने के लिए कहा है। दो लोगों की मौत भारी बारिश के बीच उत्तराखंड में भारी भूस्खलन की घटनाएं भी देखने को मिली है। चमोली में शनिवार को बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। वहीं, केदारनाथ मार्ग पर रुद्रप्रयाग में डोलिया देवी के समीप 20 घंटे तक 3,000 तीर्थयात्री फंस गए। भूस्खलन के कारण 300 से अधिक गांवों से संपर्क कट गया है। बारिश और भूस्खलन के कारण ऐसे हैं हाल भूस्खलन के कारण गंगोत्री राजमार्ग बंद यमुनोत्री राजमार्ग भी घंटो रहा बाधित भूस्खलन के बाद फंसे 1000 तीर्थयात्री रुद्रप्रयाग में बढ़ा नदियों का जलस्तर अलकनंदा व मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर अमरनाथ यात्रा भी स्थगित गौरतलब है कि इससे पहले भारी बारिश के कारण पहलगाम व बालटाल मार्ग से जाने वाली अमरनाथ यात्रा को भी स्थगित कर दिया गया था। मौसम साफ होने के बाद ही श्रद्धालुओं को रवाना किया जाएगा। यहां होगी भारी से बहुत भारी बारिश मौसम विभाग के अनुसार आज आंतरिक दक्षिणी कर्नाटक, तटीय कर्नाटक, मध्य महाराष्ट्र,उड़ीसा के कुछ क्षेत्र और पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। जबकि, असम और मेघालय में 9 और 10 जुलाई को, अरुणाचल प्रदेश में 10 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

इजरायल के सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला, अब अति रूढ़िवादी यहूदियों को भी अति रूढ़िवादी यहूदियों को भी, भड़के

तेल अवीव इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद कट्टरपंथी यहूदी भड़के हुए हैं और वे सड़कों पर उतर आए हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अब अति रूढ़िवादी यहूदियों को भी सामान्य यहूदियों की तरह सेना में अनिवार्य सेवा देनी होगी। इसके अलावा सरकार की तरफ से मिलने वाली विशेष सुविधाएं उन्हें नहीं दी जाएंगी। अब तक कट्टर यहूदियों के लिए सेना में सेवा देना अनिवार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि युवा हरेदी पुरुषों को भी सेना में भर्ती किया जाना चाहिए। अब येशिवा में पढ़ने वाले युवा इस फैसले के खिलाफ उतर आए हैं। उनका कहना है कि इससे उनके धार्मिक जीवन पर असर पड़ेगा और वे धर्म का पालन नहीं कर पाएंगे। उनका कहना है कि उनका आध्यात्मिक जीवन और पूजा-पाठ इजरायल की सुरक्षा के लिए जरूरी है। रिपोर्ट की मानें तो युवाओं को इस बात पर ऐतराज है कि अगर उन्हें सेना में जाना पड़ा तो उनको धार्मिक भक्ति के रास्ते से हटना पड़ेगा। ऐसे में उनकी आस्था कमजोर हो जाएगी जो कि देश के लिए भी खतरनाक साबित होगी। उनका कहना है कि इजरायली सेना को भी उनकी कोई जरूरत नहीं है। कट्टर यहूदी मानते हैं कि उनके धर्म को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि वे लोग धर्म का पालन करें और अन्य कामों में ज्यादा समय ना गवाएं। इजरायल में अति-रूढ़िवादी लोगों की संख्या 10 लाख से भी ज्यादा है। यानी यह इजरायल की जनसंख्या के 12 फीसदी के करीब है। अति रूढ़िवादी दलों का सत्ता में भी दखल रहता है। लंबे समय से ये दल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का साथ दे रहे हैं। कट्टर यहूदियों को टैक्स में भी छूट मिलती है। वहीं सामान्य यहूदी सेना में अनिवार्य सेवा भी देते हैं और टैक्स का भी भुगतान करते हैं। पहले भी इजरायल की संसद में एक विधेयक पारित हुआ था जिसके मुताबिक हरेदी युवाओं को आंशिक रूप से सेना में भर्ती किया जाना था। हालांकि यह कानून अब तक लागू नहीं हो पाया। इस कानून का हरेदी नेता विरोध करते हैं। येशिवा छात्रों को मिलती है छूट येशिवा छात्र वे होते हैं जो कि टोरा का अध्ययन करते हैं और यहूदी धर्म के नियमों का कट्टरता से पालन करते हैं। इन्हें सेना में जाने से छूट है। वहीं यह समूह हमेशा से ही बदलाव के खिलाफ रहा है। वहीं कट्टरपंथी यहूदियों का प्रदर्शन कई जगहों पर उग्र हो रहा है। कई  इलाकों में हिंसा और तोड़फोड़ भी हुई है। अब सवाल है कि बेंजामिन नेतन्याहू सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के सपोर्ट में कदम उठाएंगे या फिर राजनीतिक फायदे के लिए कोई और रास्ता निकालेंगे।  

14 साल PM रहे, पद छोड़ा तो नए PM से हाथ मिलाया, वहां पर रखी अपनी साइकिल उठाई और चल दिए घर, हो रही तारीफ

एम्सटर्डम आमतौर पर सत्ताधारी लोग बड़े तामझाम से रहते हैं। यहां तक कि सत्ता छोड़ने के बाद भी उनकी ठसक कम नहीं होती। लेकिन नीदरलैंड से एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है। यहां पर 14 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके मार्क रुटे ने जिस तरह से ऑफिस छोड़ा है, उसकी खूब तारीफ हो रही है। मार्क रुटे ने बेहद सादगी भरे अंदाज में प्रधानमंत्री कार्यालय को अलविदा कहा। विदाई समारोह खत्म होने के बाद वह अकेले ही बाहर निकले। नए प्रधानमंत्री से हाथ मिलाया। वहां पर रखी अपनी साइकिल उठाई और चल दिए। सोशल मीडिया पर यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। ऑफिस से बाहर निकलने के बाद मार्क रुटे नए प्रधानमंत्री से हाथ मिलाते हैं। इसके बाद वह अपनी साइकिल के पास पहुंचकर ताला खोलते हैं और उस पर सवार होते हैं। तभी पीछे से एक आवाज आती है। इसके बाद मार्क फिर साइकिल से उतरते हैं और आवाज देने वाले शख्स से मुलाकात करते हैं। इसके बाद वह साइकिल पर सवार होकर निकल जाते हैं। इस दौरान वहां मौजूद स्टाफ तालियां बजा रहा होता है और खुशी का इजहार कर रहा होता है। मार्क रुटे बीते 14 साल से नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रहे हैं। अब उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन करते हुए डिक स्कूफ को पद सौंप दिया है। डिक स्कूफ पूर्व इंटेलीजेंस चीफ हैं। उन्होंने किंग विलियम एलेक्जेंडर की मौजूदगी में हुए समारोह के दौरान पद संभाला। हालांकि शीर्ष पद के लिए 67 साल के इस शख्स का चयन हैरान करने वाला रहा। मार्क रूटे अब नाटो में बड़ी भूमिका निभाएंगे। वह नाटो के सेक्रेटरी जनरल का पद संभालेंगे। वहीं, नए प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने संसद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नई सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाया। स्कूफ ने खासतौर पर इमिग्रेशन कम करने पर जोर दिया।  

राष्ट्रपति पुतिन से भारत और रूस को संबंधों को और भी ज्यादा कैसे मजबूत किया जाए, उस पर चर्चा करेंगे

रूस रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बुलावे पर पीएम मोदी अपने दो दिवसीय रूस दौरे पर जाएंगे। 8 और 9 जुलाई को होने वाले इस दौरे के दौरान पीएम मोदी 22वे वार्षिक भारत- रूस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और राष्ट्रपति पुतिन से भारत और रूस को संबंधों को और भी ज्यादा कैसे मजबूत किया जाए, उस पर चर्चा करेंगे। दरअसल, पीएम मोदी हाल ही में SCO समिट में हिस्सा लेने के लिए नहीं गए थे, इसलिए यह पीएम का यह रूस दौरा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। 2019 में आखिरी बार रूस गए थे पीएम मोदी मीडिया से बात करते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, “भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को की यह यात्रा भारत और रूस के संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इससे संबंध और मजबूत होंगे।”  अपने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान पेसकोव ने कहा की मॉस्को में पीएम मोदी का कार्यक्रम व्यापक होगा, दोनों नेता अनौपचारिक बातचीत भी कर सकेंगे, भारत- रूस संबंध रणनितिक साझेदारी के स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि क्रेमलिन में आमने-सामने प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा होगी। मीडिया एजेंसी ने पेसकोव के हवाले से लिखा कि करीब पांच साल में यह पीएम मोदी की पहली रूस यात्रा होगी। रूस की उनकी आखिरी यात्रा 2019 में हुई थी जब उन्होंने व्लादिवोस्तोक में एक इकॉनॉमिक सम्मेलन में भाग लिया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को नई दिल्ली में उच्च स्तरीय यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों नेता दोनों देशों के बीच बहुमुखी संबंधों की समीक्षा करेंगे, आपसी हित की हालिया घटनाओं और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। दरअसल, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पीएम मोदी की यह पहली रूस यात्रा है, हाल ही में हुए SCO सम्मेलन में पीएम मोदी का न जाना रूस को खटका होगा, अब पीएम मोदी के रूस दौरे पर पश्चिमी देशों की कड़ी नजर होगी।

ताहिया लेकर पहुंचे राघवदास मठ के पुजारी, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में पहांडी रस्म शुरू

पुरी/नई दिल्ली. पुरी के अलावा गुजरात के अहमदाबाद, पूर्वोत्तर में त्रिपुरा, झारखंड की राजधानी रांची, वाराणसी और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत कई अन्य राज्यों में भी रथयात्राएं निकाली जाती हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ने देशवासियों को रथ यात्रा शुरूआत की शुभकामनाएं दी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी को शुभकामनाएं दीं। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इस्कॉन द्वारा आयोजित रथ यात्रा में भाग लेंगी। अहमदाबाद की डीसीपी कोमल व्यास ने जगन्नाथ रथयात्रा आयोजन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कहा, ‘अहमदाबाद स्मार्ट सिटी के कैमरे शहर में पहले से ही लगे हुए हैं, और रथ यात्रा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्हें समायोजित और ज़ूम किया गया है। जब एक जगह पर बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है और अपने मोबाइल नेटवर्क का उपयोग करती है, तो कनेक्टिविटी प्रभावित होती है। ऐसे में पुलिस का काम बिना किसी बाधा के हो, इसके लिए हम अपने वीएचएफ सेट का उपयोग करते हैं। हम बंधे हुए हीलियम गुब्बारों का भी उपयोग कर रहे हैं। हमने जुलूस का विहंगम दृश्य प्राप्त करने के लिए हीलियम गुब्बारे पर एक कैमरा लगाया है। हमने सभी पुलिस वाहनों में जीपीएस लगाया है। अहमदाबाद की मुख्य रथ यात्रा के अलावा, शहर में 7 और रथ यात्राओं की योजना बनाई गई है। रथ यात्रा के अलावा, हमने राज्य में आयोजित की जा रही 4 विभिन्न प्रकार की भर्ती परीक्षाओं का भी प्रबंधन और सुचारू संचालन सुनिश्चित किया है। रथ यात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 24000 कर्मियों की भर्ती की गई है।’ पहांडी रस्म शुरू– महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए पहांडी रस्म शुरू हो गई है। इसके साथ ही महाप्रभु को परंपरा के अनुसार, राघवदास मठ द्वारा तैयार किया गया ताहिया पहनाया जाएगा। ताहिया फूलों का बना मुकुट होता है, जिसे रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को पहनाया जाता है। ‘पहांडी’ परंपरा के अनुसार, सबसे पहले श्री चक्रराज सुदर्शन को रथ पर चढ़ाया जाता है। उनके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ पर चढ़ाया जाता है। नृत्य हॉल से सात सीढ़ियों वाले उत्तरी निकास पर, तीनों देवता एकत्रित होते हैं और फिर रथयात्रा शुरू होगी। पुरी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम पुरी के एसपी पिनाक मिश्रा ने कहा, ‘आज हम भगवान श्री जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा मना रहे हैं। जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, इस रथ यात्रा में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पुरी आएंगे। हमने व्यापक पुलिस व्यवस्था की है। हमने पुलिस व्यवस्था को कई महत्वपूर्ण खंडों में विभाजित किया है। भीड़ नियंत्रण और विनियमन के लिए व्यवस्था की गई है। यातायात और पार्किंग से संबंधित मामलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भारत की राष्ट्रपति पुरी का दौरा करेंगी। इसलिए राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, कई अन्य गणमान्य व्यक्ति पुरी का दौरा करेंगे। हम कई एजेंसियों के संपर्क में हैं और हम उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम तटरक्षक बल, तटीय सुरक्षा, रेलवे सुरक्षा के साथ समन्वय में हैं।’

महाराष्ट्र सरकार ने पेश किया एंटी पेपर लीक बिल… अधिकतम 10 साल की सजा, 1 करोड़ का जुर्माना

नई दिल्ली पेपर लीक की खबरों के बीच महाराष्ट्र सरकार एक बेहद अहम बिल लाने जा रही है। इसके जरिए पेपर लीक के साथ परीक्षा में गलत साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी है। यह बिल खासतौर पर नौकरी वाली परीक्षाओं के लिए प्रभावी होगा। बता दें कि महाराष्ट्र में रेवेन्यू अधिकारी पद के लिए हुई परीक्षा में पेपर लीक का आरोप लगा था। इस परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों ने फुल मार्क्स से ज्यादा नंबर हासिल किए थे। महाराष्ट्र कांपटीटिव एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) बिल, 2024 में तीन से पांच साल की जेल और  10 लाख जुर्माने का प्रावधान है। महाराष्ट्र के इस बिल में प्रदेश सरकार द्वारा कराए जाने वाले सभी कांपटिटिव एग्जाम्स को कवर किया गया है। इसमें एमपीएससी और टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट भी शामिल है। बिल के तहत सभी जुर्म गैर-जमानती होंगे। परीक्षा की शुचिता प्रभावित करने में संलिप्त पाए जाने पर संस्थान प्रमुखों को 3 से 10 साल की जेल हो सकती है। इसके अलावा उनके ऊपर एक करोड़ रुपए का जुर्माना भी लग सकता है। सर्विस प्रोवाइडर के दोषी पाए जाने पर उसे चार साल तक कांपटिटिव एग्जाम कराने से डिबार किया जा सकता है। इसके अलावा उनकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। शुक्रवार को पेश किए गए इस बिल में सभी तरह के अनुचित साधनों पर रोक के प्रावधान किए गए हैं। इसमें आंसर-की का लीक होना, कॉपी करना, आंसर शीट से छेड़छाड़, कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़, फेक एग्जाम कराना और सीटिंग अरेंजमेंट को मैनिपुलेट करना शामिल है। साथ ही साथ एग्जाम सेंटर पर सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स से छेड़खानी या परीक्षा करा रहे लोगों को धमकी देना भी अपराध की श्रेणी में आएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस बिल की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में पेपर लीक की समस्या से रोकने के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।  

NHRC ने की भीख मांगने वालों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की सिफारिश

नई दिल्ली. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शुक्रवार को एक परामर्श जारी कर भीख मांगने वाले व्यक्तियों का संरक्षण करने और उनका पुनर्वास कराने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने और राष्ट्रव्यापी ‘डाटाबेस’ तैयार करने समेत कई सिफारिशें की हैं। आयोग ने एक बयान में कहा कि यह परामर्श केंद्र और राज्य सरकारों को भीख मांगने वाले लोगों के जीवन में सुधार करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इसमें कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अनेक पहलों और कल्याणकारी कार्यक्रमों को शुरू करने के बावजूद देशभर में लोगों का भीख मांगना जारी है। बयान में कहा गया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में भीख मांगने वाले और खानाबदोश लोगों की संख्या 4,13,000 (4.13 लाख) से अधिक थी। एनएचआरसी ने अधिकारियों से भीख मांगने वाले व्यक्तियों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने की सिफारिश की है। एनएचआरसी ने कहा कि भीख मांगने वालों को लक्षित वित्तीय सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण, रोजगार के अवसरों मुहैया कराया जाए और इन पर अमल के लिए लगातार निगरानी की जाए। मानवाधिकार आयोग ने जबरन भीख मंगवाने वाले किसी भी गिरोह पर अंकुश लगाने के लिए मानव तस्करी विरोधी कानून बनाने के उद्देश्य से समाजशास्त्रीय और आर्थिक प्रभाव का आकलन करने की भी सिफारिश की। आयोग ने कहा कि इस कानून में भीख मांगने को मानव तस्करी के मूल कारणों में से एक माना जाना चाहिए तथा अपराधियों के खिलाफ दंडनीय अपराध का प्रावधान होना चाहिए।

हिमाचल: गांवों में छाया अंधेरा, 62 सड़कें बंद; अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन

शिमला. प्रदेश में शुक्रवार रात से जारी भारी वर्षा के कारण जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। प्रदेश में 62 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। जिसमें से 38 मंडी और 14 कुल्लू में बंद हैं। प्रदेश में खराब 154 ट्रांसफार्मरों में सभी मंडी में खराब है कई गांव में अंधेरा है। 26 पेयजल योजनाएं प्रभवित हैं। प्रदेश में बीते चौबीस घंटों के दौरान सबसे अधिक वर्षा कांगड़ा जिला में दर्ज की गई जिसमें धर्मशाला में 214.6, पालमपुर में 212.4 और कांगड़ा में 157.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। कांगड़ा में चौबीस घंटों के दौरान वर्ष 2016 में 166 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी और उसके बाद अब 157.6 मिलीमीटर दर्ज की गई है। सिरमौर के धौलाकुआं में 70, बिलासपुर के बरठीं में 58.8, ऊना में 50.6, मंडी में 46.4 और चंबा के डलहौजी में 31 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। लाहौल स्पीति के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्का हिमपात हुआ है। मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार रविवार को शिमला और सिरमाैर में भारी वर्षा के कारण अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा लाहौल स्पीति को छोड़ बाकी सभी जिलों में भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस संबंध में जारी की गई एडवाइजरी में नदी नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है। जुलाई में अब तक सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक वर्षा प्रदेश में जुलाई माह में छह दिनों के दौरान 72 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। कांगड़ा में अब प्रदेश में सबसे अधिक करीब 240 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से 206 प्रतिशत अधिक है। जबकि मंडी में 195 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से प्रदेश में सबसे अधिक 281 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है। लाहौल स्पीति में सामान्य से सबसे कम 77 प्रतिशत कम और किन्नौर में सामान्य से 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) समेत नई रणनीतिक साझेदारी का संकल्प जताया था: PM स्टार्मर

लंदन मानवाधिकार अधिवक्ता कीर स्टार्मर को शुक्रवार को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया जिन्होंने भारतीय मूल के लोगों के साथ लेबर पार्टी के संबंधों में सकारात्मक बदलाव की वकालत की है। स्टार्मर ने अपनी पार्टी को मजबूत जनादेश मिलने पर भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) समेत नई रणनीतिक साझेदारी का संकल्प जताया था। स्टार्मर की अगुवाई में लेबर पार्टी ने ब्रिटेन के आम चुनाव में शानदार जीत हासिल की है। स्टार्मर (61) अगले प्रधानमंत्री होंगे और उन्होंने एक विजय रैली में समर्थकों से कहा कि ‘बदलाव अब शुरू होगा।” दिसंबर 2019 में करारी चुनावी हार के बाद लेबर पार्टी की किस्मत में प्रभावशाली, विजयी उलटफेर का श्रेय अब जाहिर तौर पर स्टार्मर के खाते में जाएगा। वह ब्रिटिश भारतीयों के साथ अपनी पार्टी के रिश्ते को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहे हैं, जो पूर्व नेता जेरेमी कॉर्बिन के कार्यकाल में कश्मीर पर कथित भारत विरोधी रुख को लेकर प्रभावित हुए थे। स्टार्मर ने अपने विजय संबोधन में कहा, ‘‘साढ़े चार साल तक पार्टी में बदलाव का यही मकसद है: एक बदली हुई लेबर पार्टी जो हमारे देश की सेवा करने के लिए तैयार है, ब्रिटेन को कामकाजी लोगों की सेवा में फिर से लगाने के लिए तैयार है।” प्रधानमंत्री के तौर पर भारत के प्रति उनका रुख लेबर पार्टी के 2024 के चुनावी घोषणापत्र में प्रदर्शित हुआ था जिसमें ‘‘भारत के साथ एक नई रणनीतिक साझेदारी की बात कही गई है, जिसमें एक मुक्त व्यापार समझौते के साथ-साथ सुरक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना शामिल है।” उन्होंने पिछले साल ‘इंडिया ग्लोबल फोरम’ में कहा था, ‘‘मेरा आज आप सबके लिए स्पष्ट संदेश है। यह बदली हुई लेबर पार्टी है।” स्टार्मर ने कहा, ‘‘मेरी लेबर पार्टी की सरकार भारत के साथ लोकतंत्र और आकांक्षा के हमारे साझा मूल्यों पर आधारित संबंध तलाशेगी। वह एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए प्रयास करेगी। हम उस महत्वाकांक्षा को साझा करते हैं, लेकिन वैश्विक सुरक्षा, जलवायु सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा के लिए एक नई रणनीतिक साझेदारी भी करेंगे।” पिछले सप्ताह प्रचार अभियान के दौरान उत्तरी लंदन के किंग्सबरी में श्री स्वामीनारायण मंदिर की यात्रा के दौरान, उन्होंने ब्रिटिश हिंदुओं के लिए अपने संदेश में कहा था कि ‘‘ब्रिटेन में हिंदुओं के प्रति नफरत के लिए बिल्कुल कोई जगह नहीं है”। यह एक संदेश है जिसे वह पिछले कुछ वर्षों से दिवाली और होली के उत्सवों के दौरान दोहराते रहे हैं, जिसमें लेबर पार्टी को विपक्ष में 14 वर्षों के बाद शासन करने के लिए तैयार बताया जाता रहा है। राजनीति में आने से पहले स्टार्मर एक लंबा अरसा विधिक पेशे में बिता चुके हैं। उन्हें सबसे पहले 2015 में लंदन से लेबर पार्टी का संसद सदस्य चुना गया था। स्टार्मर और उनकी पत्नी ने अपने दो किशोर बच्चों को राजनीतिक चमक-दमक से दूर ही रखा है। उनकी पत्नी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में काम करती हैं। स्टार्मर ने अपने भाषण में कहा कि उन्होंने जिस बदलाव का वादा किया था, वह जल्द ही शुरू होगा। लंदन में एक औजार निर्माता पिता और एनएचएस में सेवारत नर्स माता के घर में जन्मे स्टार्मर का अधिकतर जीवन सरे के ऑक्स्टेड कस्बे में बीता। वह भाषण में अपनी मां को लेकर भी भावुक दिखे जो 2015 में उनके पहली बार सांसद बनने से कुछ सप्ताह पहले दुनिया छोड़कर चली गई थीं। स्टार्मर भी निवर्तमान प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की तरह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़े हैं।  

मोदीनगर में शुरू होगा राज्यकर कार्यालय, विधायक ने की अधिकारियों से बात

मोदीनगर. राज्य कर कार्यालय मोदीनगर में फिर से शुरू होने की कवायद जारी है। भाजपा विधायक डॉ.मंजू शिवाच, राज्य कर अधिकारियों और व्यापारियों के बीच बैठक के बाद राज्य कर कार्यालय को मोदीनगर में दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया। मोदीनगर में संचालित राज्य कर कार्यालय को कुछ समय पूर्व बंद कर गाजियाबाद स्थानांतरित कर दिया गया था। इससे व्यापारियों और अधिवक्ताओं में आक्रोश था। दोनों संगठनों की ओर से मोदीनगर में करीब चार दशक से संचालित राज्य कर कार्यालय को गाजियाबाद स्थानांतरित करने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने विधायक डॉ.मंजू शिवाच को ज्ञापन देकर मोदीनगर में दोबारा कार्यालय शुरू कराने की मांग की थी। विधायक डॉ.मंजू शिवाच ने बीते दिनों लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सेे मिलकर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। विधायक ने कार्यालय गाजियाबाद स्थानांतरित करने से व्यापारियों और अधिवक्ताओं के रुख की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी थी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में शीघ्र ही कार्रवाई का आश्वासन दिया था। शुक्रवार को दिल्ली-मेरठ मार्ग स्थित एक शिक्षण संस्थान में विधायक डॉ.मंजू शिवाच के साथ राज्य कर के एडिशनल कमिश्नर दिनेश मिश्रा व अन्य अधिकारी, व्यापारियों और नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जाटव वैशाली के बीच बहुपक्षीय बैठक हुई।

पति चुनाव नजदीक और डेमोक्रेट पार्टी एक अलग समस्या से जूझ रही है

वॉशिंगटन  अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव नजदीक आ रहे हैं और डेमोक्रेट पार्टी एक अलग समस्या से जूझ रही है। दरअसल जो बाइडन की राष्ट्रपति पद की दावेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डेमोक्रेट पार्टी अब उम्मीदवारी के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की तरफ देख रही है। डेमोक्रेट पार्टी के कई नेता, दानदाता और पार्टी कार्यकर्ता मानते हैं कि जो बाइडन, ट्रंप के सामने कमजोर रह सकते हैं, यही वजह है कि अब जो बाइडन की जगह कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाने पर विचार किया जा रहा है। बहस में पिछड़ने के बाद बाइडन की बढ़ती उम्र को लेकर तेज हुई चर्चा बीते दिनों अटलांटा में हुई राष्ट्रपति पद की पहली बहस में जो बाइडन, डोनाल्ड ट्रंप के सामने कमजोर साबित हुए थे। बहस के दौरान कई बार बाइडन की जुबान लड़खड़ाई और जिस तरह से उन्होंने जवाब दिए, उसके बाद से उनकी बढ़ती उम्र की चर्चा फिर से तेज हो गई थी। हालांकि बाइडन अपनी उम्मीदवारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो डेमोक्रेट पार्टी के भीतर एक वर्ग कमला हैरिस को जो बाइडन के संभावित विकल्प के रूप में देख रहा है। कमला हैरिस और उनकी प्रचार टीम अभी सार्वजनिक रूप से बाइडन का ही समर्थन कर रही है, लेकिन हाल के दिनों में उनके प्रचार अभियान में जो सूक्ष्म बदलाव आए हैं, उससे भी अटकलों को बल मिला है। जो बाइडन के चुनाव अभियान ने अटकलों को किया खारिज कमला हैरिस अपने बयानों में डोनाल्ड ट्रंप पर ज्यादा आक्रामक होकर हमला कर रही हैं। पार्टी के भीतर जो बाइडन को मनाने की कोशिशें चल रही हैं कि वह कमला हैरिस का समर्थन करें। डेमोक्रेट पार्टी में एक वर्ग ऐसा भी है जो कमला हैरिस के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को लेकर आशंकित है। इन चर्चाओं के बीच बाइडन के चुनाव अभियान के प्रवक्ता केविन मुनोज ने सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि जो बाइडन ही डेमोक्रेट पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे और कमला हैरिस उनकी सहयोगी होंगी।  

पाकिस्तान में मुहर्रम के दौरान हिंसा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए नफरती संदेश तेजी से फैलने का डर है

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लग सकता है। दरअसल पाकिस्तान के पंजाब राज्य समेत कई अन्य राज्यों ने संघीय सरकार से यह मांग की है। राज्यों को डर है कि मुहर्रम के दौरान हिंसा भड़क सकती है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए नफरती संदेश तेजी से फैलने का डर है। पाकिस्तान में मुहर्रम के दौरान हो चुकी हैं कई आतंकी घटनाएं मुहर्रम के दौरान शिया मुसलमान इस्लाम के पैगंबर के पोते की शहादत की याद में बड़ी-बड़ी सभाएं करते हैं और जुलूस निकालते हैं। शिया मुसलमान उनकी शहादत को अत्याचार के प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में मनाते हैं। इस दौरान मोहर्रम के पहले दस दिनों तक विशाल रैलियां करते हैं। शिया मुस्लिमों की सुन्नी मुस्लिमों के साथ ऐतिहासिक धार्मिक प्रतिद्वंदिता है। यही वजह है कि कट्टरपंथी सुन्नी समूहों की तरफ से मुहर्रम के दौरान शिया मुस्लिमों की रैलियों को निशाना बनाने की घटनाएं होती हैं। इस दौरान पाकिस्तान में बम विस्फोट या आत्मघाती हमलों का डर बना रहता है। पंजाब सरकार ने संघीय सरकार से की अपील हिंसा के डर से ही पाकिस्तान की सरकार मुहर्रम के दौरान दूरसंचार के साधनों पर रोक, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाती है। पंजाब की सरकार ने संघीय सरकार से अपील की है कि मुहर्रम के दौरान 6-11 जुलाई तक सोशल मीडिया सेवाओं पर रोक लगाई जाए ताकि भ्रामक संदेशों को फैलने से रोका जा सके। पंजाब सरकार ने गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा है, जिसमें मुहर्रम के दौरान फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स, टिक-टॉक आदि सोशल मीडिया मंचों पर पूरे प्रांत में रोक लगाने की मांग की। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर बताया कि सोशल मीडिया मंचों पर रोक लगाने का फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ही करेंगे। अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। रविवार या सोमवार को चांद दिखने के साथ ही मुहर्रम की शुरुआत हो सकती है। मुहर्रम की शुरुआत पर फैसला लेने के लिए मौलवियों की निकाय चर्चा कर रही है।    

David Lammy ब्रिटेन के नए विदेश मंत्री, फ्री ट्रेड डील साइन करने जल्द आ सकते हैं भारत

लंदन ब्रिटेन में लेबर पार्टी सत्ता में लौट आई है. कीर स्टार्मर ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बने हैं. उन्होंने डेविड लैमी को विदेश सचिव (विदेश मंत्री) बनाया है. वह भारत और ब्रिटेन के द्वीपक्षीय संबंधों पर काफी मुखर रहे हैं. उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को “दोस्त” बताया और पिछले सप्ताह उन्होंने एक महीने के भीतर भारत दौरे की अपनी मंशा जाहिर की. ब्रिटिश विदेश मंत्री डैविड लैमी पिछले सप्ताह लंदन में इंडिया ग्लोबल फोरम को संबोधित कर रहे थे, जब उन्होंने भारत दौरे की अपनी मंशा का खुलासा किया था. उनके विदेश मंत्री बनने के बाद भारतीय विदेश मंत्री एज जयशंकर ने उन्हें बधाई भी दी और दोनों देशों के बीच इंगेजमेंट बढ़ाने और पार्टनर्शिप को मजबूत करने की बात कही. दिवाली 2022 में ही फाइनल होनी थी डील ब्रिटिश विदेश मंत्री का पद ग्रहण करने के बाद डैविड लैमी ने कहा, “विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के लिए राज्य सचिव नियुक्त किया जाना मेरे जीवन का सम्मान है.” भारत-ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड डील पर बोरिस जॉनसन को घेरते हुए उन्होंने कहा था, “ट्रेड डील के बिना कई दिवाली आई और गई, कई बिजनेस इसका इंतजार कर रहे हैं.” दरअसल, यह ट्रेड डील जॉनसन के कार्यकाल से ही पेंडिंग है, जिन्होंने दिवाली 2022 तक इसे फाइनल करने का वादा किया था. ब्रिटिश मंत्री ने भारतीय मंत्रियों से की ये अपील ब्रिटिश मंत्री ने अपने एक भाषण में कहा था, “(वित्त) मंत्री (निर्मला) सीतारमण और (ट्रेड) मंत्री (पीयूष) गोयल को मेरा संदेश है कि लेबर पार्टी आगे बढ़ने के लिए तैयार है. चलिए हम फाइनली फ्री ट्रेड डील को पूरा करते हैं.” भारत को ब्रिटेन के लिए प्राथमिकता बताते हुए डैविड लैमी ने इकोनॉमिक, टेक्नोलॉजिकल और कल्चरल “सुपरपावर” बताया था. ब्रिटिश मंत्री ने भारत को बताया ‘महाशक्ति’ डैविड लैमी ने अपने भाषण में कहा था, “लेबर के साथ, बोरिस जॉनसन द्वारा एशिया में रुडयार्ड किपलिंग की उस पुरानी कविता को दोहराने के दिन खत्म हो गए हैं. अगर मैं भारत में कोई कविता सुनाऊंगा, तो वह टैगोर की होगी… क्योंकि भारत जैसी महाशक्ति के साथ सहयोग और सीखने के क्षेत्र असीमित हैं.” लेबर पार्टी को मिली है बंपर जीत आपको बता दें कि ब्रिटेन के आम चुनावों में की स्टार्मर की लेबर पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की है. 14 साल विपक्ष में बैठने के बाद लेबर पार्टी की सत्ता में वापसी हुई है. हाउस ऑफ कॉमंस की 650 सीटों के लिए हुए चुनाव में कीर स्टार्मर की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी मुख्य विपक्षी पार्टी लेबर पार्टी को 410 सीटों पर जीत मिली हैं.  

ओडिशा के पुरी में दो दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हुई, पुरी में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

पुरी/अहमदाबाद ऐतिहासिक नगरी पुरी के साथ ही गुजरात के अहमदाबाद में आज भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा निकाली जा रही है। दोनों शहरों में लाखों भक्त रथ यात्रा में शामिल होते हैं। ओडिशा के पुरी में दो दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत रविवार से होने जा रही है। यहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विशेष रूप से शामिल होंगी। आमतौर पर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा एक दिवसीय होती है, लेकिन इस वर्ष यह दो दिनों तक चलेगी। ऐसा दुर्लभ मामला आखिरी बार 1971 में देखा गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद पहुंचे और सपरिवार भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती में शामिल हुए। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। अहमदाबाद में रथयात्रा के लिए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। इससे पहले पुजारियों ने मंत्रोच्चार के साथ रविवार सुबह रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा की। इस दौरान मंदिर के बाहर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।     इसके बाद रथ यात्रा शुरू हुई, जो 15 जुलाई तक चलेगी।

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