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जयशंकर की पाकिस्तान को चेतावनी- ‘अब हम आतंकवाद के साथ और नहीं जीएंगे, हमला हुआ तो फिर जवाब देंगे’

ब्रूसेल्स  जयशंकर ने कहा कि ‘भारत के हमले में पाकिस्तान को काफी नुकसान उठाना पड़ा और भारत के लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों ने बेहद सटीकता से हमले किए और पाकिस्तान के तबाह एयरबेस की तस्वीरें गूगल पर मौजूद हैं।’ भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के करीब तीन हफ्ते बाद भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है औऱ कहा है कि अगर फिर से आतंकी हमला हुआ तो भारत फिर से करारा जवाब देने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा। जयशंकर इन दिनों ब्रूसेल्स के दौरे पर हैं। वहां एक इंटरव्यू के दौरान जयशंकर ने कहा कि ‘अगर आतंकी ठिकाने पाकिस्तान के भीतर मौजूद हैं तो हम पाकिस्तान में भीतर जाकर ही हमला करेंगे।’ भारत सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर पाकिस्तान की तरफ से फिर से आतंकी हमला हुआ तो भारत फिर से सैन्य कार्रवाई से हिचकेगा नहीं। विदेश मंत्री ने भी सरकार के इसी स्टैंड को दोहराया। विदेश मंत्री ने कहा कि ‘आतंकवाद इस देश (पाकिस्तान) की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। यही समस्या है।’ पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुआ संघर्ष बीती अप्रैल में भारत के जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी गई थी। भारत ने इसका आरोप पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन पर लगाया। इसके बाद मई में भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत पर हमले की कोशिश की। भारत ने 10 मई को बड़ा हमला कर पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह कर दिए। जिसके बाद पाकिस्तान ने लड़ाई रोकने की अपील की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया।    लड़ाकू विमान गिराने के दावे पर क्या बोले विदेश मंत्री पाकिस्तान ने भारत के लड़ाकू विमान गिराने का दावा किया था। जब इसे लेकर विदेश मंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ‘वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन जल्द ही संबंधित प्राधिकरण द्वारा सही समय आने पर इस पर पूरी जानकारी दी जाएगी।’ जयशंकर ने कहा कि ‘भारत के हमले में पाकिस्तान को काफी नुकसान उठाना पड़ा और भारत के लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों ने बेहद सटीकता से हमले किए और पाकिस्तान के तबाह एयरबेस की तस्वीरें गूगल पर मौजूद हैं।’ ‘अब आतंकवाद के साथ नहीं जीएंगे’ जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान लगातार आतंकियों को पनाह और प्रशिक्षण देता आ रहा है और हजारों आतंकी दक्षिणी सीमा पर मौजूद हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि ‘हम आतंकवाद के साथ अब और नहीं जीएंगे। हमारा संदेश साफ है कि अगर आगे भी अप्रैल जैसे हमले जारी रहे तो हम जवाबी कार्रवाई करेंगे और यह कार्रवाई आतंकी संगठनों और आतंकी नेतृत्व के खिलाफ होगी।’ 

Air defense system : दुश्मन को खोज कर मारने में कामयाब है क्यूआर-एसएएम सिस्टम

नई दिल्ली: भारतीय सेना को जल्द ही एक नया स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है। इसपर लगभग 30,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके तहत क्यूआर-एसएएम (QR-SAM:Quick Reaction Surface to Air Missile) सिस्टम खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस प्रस्ताव पर विचार करने वाला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद इस महीने के अंत तक इस प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इस मंजूरी को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity) यानी एओएन कहा जाता है। QR-SAM सिस्टम बहुत तेजी से काम करने वाला स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को 25-30 किलोमीटर की दूरी तक अचूक तरीके से मार गिराने के लिए बनाया गया है। हर तरह की कसौटी पर खरा उतरा है क्यूआर-एसएएम सिस्टम यह कदम भारत के मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम की कामयाबी पर विचार के बाद उठाया जा रहा है। हाल ही में इस सिस्टम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से भेजे गए तुर्की मूल के ड्रोन और चीनी मिसाइलों को मार गिराने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह ऑपरेशन 7 से 10 मई को हुआ था। डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने पिछले तीन-चार सालों में QR-SAM सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। उन्होंने इसे अलग-अलग तरह के खतरों का सामना करने के लिए जांचा और परखा है। यह परीक्षण दिन और रात दोनों समय किया गया है। भारत इलेक्ट्रोनिक्स (Bharat Electronics) और भारत डिनामिक्स (Bharat Dynamics) नाम की सरकारी कंपनियां मिलकर QR-SAM सिस्टम बनाएंगी। दुश्मन को खोज कर मारने में कामयाब है क्यूआर-एसएएम सिस्टम एक अधिकारी के मुताबिक,यह ‘QR-SAM सिस्टम चलते-फिरते भी काम कर सकता है। यह दुश्मन को खोज और ट्रैक कर सकता है और थोड़े समय के लिए रुककर भी हमला कर सकता है। इसे टैंकों और पैदल सेना के वाहनों के साथ चलने के लिए बनाया गया है, ताकि युद्ध के मैदान में उन्हें हवाई हमलों से बचाया जा सके। सेना की वायु रक्षा (AAD) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्हें QR-SAM की 11 रेजिमेंट चाहिए। इसके साथ ही, वे स्वदेशी आकाश सिस्टम को भी शामिल कर रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता लगभग 25 किलोमीटर है। और मजबूत होगी वायु सेना और थल सेना की रक्षा प्रणाली QR-SAM सिस्टम के आने से IAF (भारतीय वायु सेना) और सेना की मौजूदा वायु रक्षा प्रणाली और मजबूत हो जाएगी। इस प्रणाली में लंबी दूरी की रूसी एस-400 ट्रिम्फ ‘S-400 Triumf’ मिसाइलें (380 किलोमीटर की मारक क्षमता) और बराक-8 (Barak-8) मध्यम दूरी की एसएएम(Surface to Air Missile) सिस्टम (70 किलोमीटर) शामिल हैं, जिसे इजराइल के साथ मिलकर बनाया गया है। इसके अलावा, इसमें रूसी इगला-एस (Igla-S) मिसाइलें (6 किलोमीटर), एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन (3.5 किलोमीटर) और स्वदेशी ड्रोन का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने वाले सिस्टम (1 किलोमीटर-2 किलोमीटर) भी शामिल हैं। स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम में आगे और बड़ी योजना पर काम डीआरडीओ बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली (VSHORADS) भी तैयार कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 6 किलोमीटर है। लेकिन, असली गेम-चेंजर ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत विकसित की जा रही 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली वायु रक्षा प्रणाली होगी। भारत इस लंबी दूरी की प्रणाली को 2028-2029 तक तैनात करने की योजना बना रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2023 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए इसके पांच स्क्वाड्रन खरीदने के लिए 21,700 करोड़ रुपये की एओएन को मंजूरी दी थी।  

1 अगस्‍त से तकनीकी बदलाव करने जा रहा यूपीआई

नई दिल्ली गूगलपे, फोनपे, पेटीएम जैसे ऐप्‍स इस्‍तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए काम की खबर है। 1 अगस्‍त से नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई अपने एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) इस्‍तेमाल को लेकर नए नियम ला रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह तकनीकी बदलाव अगस्‍त से लागू होगा। आपको विषय टेक्निकल लग सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर आपके यूपीआई चलाने के तरीके को बदल सकता है। फाइनेंशल एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, नया नियम लाने का मकसद यूपीआई सिस्‍टम में पड़ रहे बोझ को कम करना है। इसका असर यह होगा कि आप यूपीआई ऐप से जो बैलेंस चेक करते हैं, उस पर लिमिट लग जाएगी। जो आपने ऑटो पेमेंट सेट किए हैं, उनमें चेंज आएगा। आइए इस बारे में व‍िस्‍तार से समझते हैं। पेमेंट बढ़ने से सिस्‍टम पर आ रहा लोड रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई पेमेंट की संख्‍या दिनों दिन बढ़ रही है। हर महीने करीब 16 अरब ट्रांजैक्‍शन प्रोसेस किए जा रहे हैं। इतनी बढ़ी संख्‍या में ट्रांजैक्‍शंस के होने से यूपीआई सिस्‍टम पर लोड बढ़ रहा है। हाल के दिनों में बैंकों की तरफ से सिस्‍टम का गलत इस्‍तेमाल करने के मामले सामने आए थे। साथ ही कुछ तकनीकी कमजोरियां भी दिखी थीं। इनसे निपटने के लिए 1 अगस्‍त से कुछ चेंज किए जा रहे हैं। 5 घंटे तक ठप पड़ी थी सर्विस रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो-तीन महीनों में कई वाकये हुए जब यूपीआई पेमेंट डाउन हुआ। कहा जाता है कि 12 अप्रैल को 5 घंटे तक पेमेंट डाउन रहने से लोग काफी परेशान हुए। यह तीन साल में सबसे लंबा आउटेज था। यूपीआई की वजह से कई लोगों ने वॉलेट रखना छोड़ दिया है या फ‍िर वॉलेट में पैसे नहीं रखते। ऐसे में अगर यूपीआई ही डाउन हो जाए तो लोगों को कितनी अधिक परेशानी होगी। इसी से निपटने के लिए नियमों में बदलाव किया जा रहा है। 1 मिनट डाउन होने का मतलब 4 लाख लोग परेशान रिपोर्ट बताती है कि यूपीआई पेमेंट का दायरा इतना बढ़ गया है कि इसमें जरा सी रुकावट लाखों की संख्‍या में यूजर्स को परेशान करती है। कहा जाता है कि हर सेकंड 7 हजार ट्रांजैक्‍शंस यूपीआई के जरिए प्रोसेस किए जा रहे हैं। अगर एक मिनट भी यूपीआई डाउन होता है यानी आपका फोनपे, पेटीएम या गूगलपे नहीं चलता तो 4 लाख लोग प्रभावित होते हैं। 10 मिनट यूपीआई डाउन होने पर 40 लाख लोग प्रभावित होते हैं। मौजूदा वक्‍त में यूपीआई पेमेंट करने वालों की संख्‍या 40 करोड़ से ज्‍यादा बताई जाती है। हाल में हुई जांच में सामने आया कि यूपीआई डाउन होने की अहम वजह बार-बार की जाने वाली एपीआई रिक्‍वेस्‍ट है, जिसकी वजह से सिस्‍टम पर लोड आ गया। ‘चेक ट्रांजैक्शन’ API रिक्‍वेस्‍ट अधिक आने से मार्च और अप्रैल में यूपीआई पर असर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में बैंकों को कुछ नियमों का पालन करना था, पर उन्‍होंने ऐसा नहीं किया। 1 अगस्‍त से क्‍या बदलाव हो रहा है NPCI ने सभी बैंकों और PSP यानी फोनपे, पेटीएम, गूगलपे आदि पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स से कहा है कि 31 जुलाई तक 10 सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होने वाले एपीआई को कंट्रोल किया जाए। यानी अगर यूजर्स यूपीआई ऐप पर बैलेंस ज्‍यादा चेक करते हैं तो अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, यूजर अब अपने ऐप पर रोजाना 50 बार बैलेंस चेक कर सकेंगे। मोबाइल नंबर से कितने अकाउंट जुड़े हैं, यह भी रोजाना 25 बार से ज्‍यादा नहीं देखा जा सकेगा। इसके अलावा ऑटोपे पेमेंट जैसे कोई एसआईपी या नेटफ्लिक्‍स की मेंबरशिप पेमेंट नॉन पीक आवर्स में ही होगी। नॉनपीक आवर्स से मतलब सुह 10 बजे से पहले, दोपहर में 1 बजे से शाम 5 बजे तक और रात साढ़े 9 बजे के बाद है।

पहलगाम के लोग अमरनाथ यात्रियों का स्वागत करते आए हैं और यह परंपरा ईमानदारी के साथ जारी रहेगी: महबूबा मुफ्ती

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा कश्मीर के लोगों की जिम्मेदारी है। महबूबा मुफ्ती ने अगले महीने शुरू होने वाली यात्रा से पहले दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम पर्यटन स्थल पर विभिन्न हितधारकों और पीडीपी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। बैठक को संबोधित करते हुए मुफ्ती ने कहा, “यात्रियों की सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है। यात्रा और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। पुलिस और सुरक्षा बलों से ज्यादा आपको उनकी सुरक्षा करनी है।” ‘पहलगाम के लोगों को यात्रा सुरक्षित करना होगा’ पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी के उन कार्यकर्ताओं को बुलाया है जो यात्रा के मार्ग पर रहते हैं और उनसे तीर्थयात्रा की सुरक्षा करने को कहा है। महबूबा मुफ्ती ने कहा, “मैंने उनसे कहा कि पहलगाम के लोगों को यात्रा को सुरक्षित करना होगा ताकि यह अच्छी तरह से संपन्न हो और पर्यटकों में विश्वास बहाल हो, जिससे पर्यटन फिर से शुरू हो जाएगा।” अमरनाथ आने वाले यात्रियों से की ये अपील महबूबा ने कहा कि कश्मीर और खासकर पहलगाम के लोग सदियों से अमरनाथ यात्रियों का स्वागत करते आए हैं और यह परंपरा उसी भावना और ईमानदारी के साथ जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि अमरनाथ यात्री आएं। जिस तरह से कश्मीर के लोग सदियों से उनका स्वागत करते आए हैं, ईश्वर की इच्छा से इस साल भी उनका स्वागत किया जाएगा। उनकी अच्छी तरह से सेवा की जाएगी और वे सुरक्षित और स्वस्थ अपने घरों को लौटेंगे। घाटी में पर्यटन ठप- महबूबा मुफ्ती मुफ्ती ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद स्थिति बदल गई और घाटी में पर्यटन ठप हो गया। हजारों टट्टूवाले, होटल व्यवसायी, दुकानदार और टैक्सी और ऑटो चालक परेशान हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बैंकों से कर्ज लिया है और वे संकट में हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और चुनी हुई सरकार से पहलगाम में चंदनवारी, अरु और बीताब घाटी जैसे पार्कों को फिर से खोलने की अपील की, ताकि पर्यटक इन जगहों पर जा सकें और होटल व्यवसायियों और टट्टूवालों को अपनी आजीविका कमाने में मदद मिल सके। पीडीपी प्रमुख ने सरकार से आम लोगों को परेशान न करने की अपील की। ​​उन्होंने कहा, “मैं सरकार से अपील करती हूं कि टट्टूवालों को सुनवाई के लिए श्रीनगर या पहलगाम बुलाना बंद करें। उनके साथ ऐसा न करें। अगर आपको आतंकवादियों से लड़ना है, तो वैसा करें, लेकिन आम लोगों को परेशान न करें। अगर आप आम लोगों को परेशान करेंगे या उन्हें अपना दुश्मन बना लेंगे, तो इसके अच्छे परिणाम नहीं होंगे।”

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ के माध्यम से ‘जन मन सर्वेक्षण’ की घोषणा की, राष्ट्रीय मुद्दों पर जनता की राय जानने के लिए भागीदारी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की सेवा में 11 साल पूरे होने के अवसर पर, ‘नरेंद्र मोदी ऐप’ (नमो ऐप) ने एक खास सर्वे शुरू किया गया है जिसका नाम है – जन मन सर्वेक्षण। यह सर्वे शुरू होते ही पूरे देश से लोगों की जबरदस्त भागीदारी देखने को मिली है। सिर्फ एक दिन में ही 5 लाख से ज्यादा लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। यह अनूठा सर्वेक्षण लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए बनाया गया है, जिससे उन्हें प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों और सरकारी पहलों पर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ के माध्यम से ‘जन मन सर्वेक्षण’ की घोषणा की है। यह लोगों को सरकार के साथ सीधे अपनी प्रतिक्रिया और राय साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह ऑनलाइन सर्वे यह सुनिश्चित करता है कि देश के हर कोने से लोगों की आवाज सुनी जाए और आने वाली नीतियों में उनकी राय को महत्व मिले। ‘जन मन सर्वेक्षण’ में भाग लेना बहुत आसान है। यह नमो ऐप पर पोस्ट किया गया है। यह सर्वे भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन से लेकर सांस्कृतिक गौरव और युवा विकास तक कई विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने की आजादी देता है। लॉन्च के बाद से 26 घंटों में 500,000 से अधिक प्रतिक्रियाओं के साथ, यह सर्वेक्षण जनता के साथ सीधे और सार्थक तरीके से जुड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभरा है। इसके अलावा, ऐप में एक दूसरा बैनर भी है जो पिछले 11 सालों में सरकार की उपलब्धियों को दिखाता है। वहां से भी सर्वे तक पहुंचा जा सकता है। इस सर्वे में पूरे देश से बड़ी संख्या में लोग हिस्सा ले रहे हैं। अब तक सबसे ज़्यादा जवाब उत्तर प्रदेश से आए हैं। खास बात यह है कि 77 प्रतिशत से अधिक लोगों ने पूरा सर्वे पूरा किया है, जो यह दिखाता है कि लोग इसमें कितनी रुचि ले रहे हैं और देश के भविष्य में अपना योगदान देना चाहते हैं। प्रतिक्रिया संख्या के अनुसार टॉप प्रदर्शन करने वाले राज्य और निर्वाचन क्षेत्र इस प्रकार रहे- 1. उत्तर प्रदेश – 1,41,150 प्रतिक्रियाएं 2. महाराष्ट्र – 65,775 प्रतिक्रियाएं 3. तमिलनाडु – 62,580 प्रतिक्रियाएं 4. गुजरात – 43,590 प्रतिक्रियाएं 5. हरियाणा – 29,985 प्रतिक्रियाएं सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए, नागरिक दो अलग-अलग तरीकों से नमो ऐप के माध्यम से आसानी से इसका उपयोग कर सकते हैं: 1. नमो ऐप के होम पेज : जैसे ही ऐप खोलेंगे, होमपेज पर एक बैनर दिखेगा, जिस पर क्लिक करके आप सीधे सर्वे में जा सकते हैं। 2. सीधा लिंक: अगर आप चाहें तो डायरेक्ट लिंक पर जाकर भी सर्वे भर सकते हैं। सर्वेक्षण में पूछे गए प्रश्नों में आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, विकास, डिजिटल इंडिया, नारी सशक्तीकरण, विकसित भारत, सरकारी योजनाओं आदि से जुड़े बहुआयामी विषय शामिल रहे। सर्वेक्षण में पूछे गए प्रश्नों की डिटेल्स इस प्रकार है- प्रश्न 1: “पिछले दशक में आतंकवाद से निपटने के लिए भारत का दृष्टिकोण किस तरह विकसित हुआ है?” प्रश्न 2: “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों के विरुद्ध सरकार की कार्रवाइयों को देखते हुए, एक नागरिक के रूप में आप खुद को कितना सुरक्षित महसूस करते हैं?” प्रश्न 3: “क्या आपको लगता है कि भारत की आवाज पहले की तुलना में आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा सुनी और सम्मानित की जा रही है?” प्रश्न 4: “2014 के बाद से निम्नलिखित में से कौन-सा विकास आपको भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण लगता है?” प्रश्न 5: “पिछले 12 महीनों में आपने डिजिटल इंडिया के किन उत्पादों या सेवाओं का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया है?” प्रश्न 6: “महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के दृष्टिकोण के साथ, आपने कौन-से सबसे महत्वपूर्ण सुधार देखे हैं?” प्रश्न 7: “कौशल भारत, स्टार्टअप इंडिया और शिक्षा में सुधार जैसी सरकारी पहलों ने युवाओं के लिए अवसरों के दायरे को किस तरह बढ़ाया है?” प्रश्न 8: “आपकी राय में, ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने विनिर्माण क्षेत्र को किस तरह प्रभावित किया है?” प्रश्न 9: “निम्नलिखित में से किस बात ने आपको गर्व महसूस कराया है और हमारी संस्कृति और विरासत से और अधिक जुड़ाव महसूस कराया है?” प्रश्न 10: “भारत के विकास के लिए निम्नलिखित में से कौन से दृष्टिकोण आपको सबसे अधिक सुसंगत लगते हैं?” प्रश्न 11: “इनमें से कौन-सी सरकारी योजना या पहल आपको शासन और देश के विकास के लिए सबसे परिवर्तनकारी लगी?” प्रश्न 12: “पिछले कुछ वर्षों में निम्नलिखित में से किस बुनियादी ढांचे के विकास से आपको या आपके परिवार को व्यक्तिगत रूप से लाभ हुआ है?” प्रश्न 13: “आपके क्षेत्र में जनता की समस्याओं को हल करने में स्थानीय या राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि कितने सक्रिय और जवाबदेह हैं?” प्रश्न 14: “आप ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में हो रहे काम को कैसे देखते हैं? क्या यह आपकी उम्मीदों के अनुसार है?” प्रश्न 15: “भारत के विकास में भाग लेने और योगदान देने को लेकर आप कितना प्रेरित और जुड़ा हुआ महसूस करते हैं?”

विदेश दौरे से लौटे प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मिले पीएम मोदी, दुनियाभर में पाकिस्तान की खोल दी पोल

नई दिल्ली  पाकिस्तान को दुनियाभर में बेनकाब कर वापस लौटे प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुलाकात की। इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में कई दलों के नेता शामिल थे। पीएम मोदी ने 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर नेताओं से मुलाकात की है। सदस्यों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए। केंद्र सरकार पहले ही 50 से अधिक व्यक्तियों वाले सात प्रतिनिधिमंडलों के कार्य की प्रशंसा कर चुकी है, जिनमें अधिकतर वर्तमान सांसद हैं। पूर्व सांसद और पूर्व राजनयिक भी इन प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा थे, जिन्होंने 33 विदेशी राजधानियों और यूरोपीय संघ का दौरा किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले ही प्रतिनिधिमंडलों से मिल चुके हैं और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को व्यक्त करने में उनके प्रयासों की सराहना कर चुके हैं। चार प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों ने किया, जिनमें भाजपा के दो, जद (यू) के एक और शिवसेना के एक सांसद शामिल थे, जबकि तीन का नेतृत्व विपक्षी सांसदों ने किया जिनमें कांग्रेस, डीएमके और एनसीपी (एसपी) के एक-एक सांसद शामिल थे। भाजपा के रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, कांग्रेस के शशि थरूर, जद (यू) के संजय झा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, द्रमुक की कनिमोई और राकांपा (एसपी) की सुप्रिया सुले ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे थे, जिनमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोग विदेशों में भारत के हितों की पैरवी करने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्यों के साथ थे। प्रतिनिधिमंडलों में प्रमुख पूर्व सांसदों में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद और सलमान खुर्शीद शामिल थे।  

ऑस्ट्रिया के बड़े स्कूल में फायरिंग में छात्र-शिक्षक समेत 10 की मौत

 ग्राज ऑस्ट्रिया के ग्राज शहर में एक छात्र ने बंदूक से 11  छात्रों को भून दिया. गोलीबारी की घटना को उसने स्कूल के क्लासरूम में अंजाम दिया है. छात्रों को मारने के बाद उसने खुद को गोली मार ली. घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस ने घेर लिया. जांच एजेंसी इस बात की तस्दीक कर रही है कि आखिर युवक ने गोली क्यों चलाई? समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक गोलीबार की घटना ग्राज शहर के उत्तर-पश्चिम में ड्रेयर्सचुट्जेगैस पर स्थित एक संघीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हुई है, जो शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित है. ऑस्ट्रिया इटली के पड़ोस में स्थित है. यह यूरोप का एक देश है. गोली चलाई फिर खुद को मार ली गोली स्थानीय मीडिया के मुताबिक हमलावर युवक है और 18 साल से कम उम्र का है. पहले हमलावर बंदूक लेकर स्कूल में गया और फिर उसने अंधाधुंध फायरिंग की. जब फायरिंग खत्म होने लगी तो उसने आखिरी गोली खुद को मार ली. हमलावर की मौत भी मौके पर हो गई है. ग्राज शहर के मेयर के मुताबिक इस हमले में 11  बच्चों की जान चली गई है. घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ग्राज ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना के बाद दूसरा सबसे प्रमुख शहर है. ग्राज के अधिकारियों का कहना है कि इलाके को सील कर लिया गया है और जांच के बाद ही यह खुलासा हो पाएगा कि आखिर हमले के पीछे कौन था? ऑस्ट्रिया की वजह से हुआ था प्रथम विश्व युद्ध ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप का एक देश है, जिस पर कभी रोमन सम्राज्य का कब्जा था. 1914 में ऑस्ट्रिया और सर्बिया की लड़ाई की वजह से प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ था. इस जंग में ऑस्ट्रिया जर्मनी के साथ था. हालांकि, उसे हार का सामना करना पड़ा. ऑस्ट्रिया जर्मनी, इटली और स्विटजरलैंड का पड़ोसी देश है.  

बेंगलुरु भगदड़ मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 12 जून को होगी, हादसे का स्वतः संज्ञान लिया

कर्नाटक  कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार (10 जून) को राज्य को बेंगलुरु भगदड़ मामले में सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब पेश करने की अनुमति दे दी। इस मामले में अगली सुनवाई 12 जून को होगी। कोर्ट ने इस हादसे का स्वतः संज्ञान लिया था। बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में चार जून को रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत का जश्न मनाने आए फैंस के बीच भगदड़ मची थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई। इस मामले पर अगले दिन हाई कोर्ट स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत इस हादसे के पीछे की वजह का पता लगाना चाहती है। अदालत जानना चाहती है कि क्या इस हादसे को रोका जा सकता था और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की खंडपीठ के समक्ष बताया कि उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया है। शशि किरण शेट्टी ने कहा, “न्यायिक आयोग का गठन किया गया है और रिपोर्ट देने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। लंबित जमानत याचिकाओं में, जो कुछ भी यहां कहा जाता है, उसका इस्तेमाल वहां आरोपी कर रहे हैं।” हाई कोर्ट ने पूछा, “क्या आप यह कह रहे हैं कि आप हमारे निर्देशों का जवाब नहीं देंगे?” इस पर महाधिवक्ता ने कहा, “कृपया इसे कल रखें, हम जवाब दाखिल करेंगे। कुछ चीजें हैं”। हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने में कठिनाई की वजह पूछी, जिस पर महाधिवक्ता ने कहा, “मैं खुली अदालत में नहीं रखना चाहता, हम पूर्वाग्रह से ग्रसित हो जाएंगे। स्वतंत्र जांच की रिपोर्ट आने दें और ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम पक्षपाती हैं। यह केवल एक महीने का मामला है।” हाई कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को आदेश दिया कि वह अपना जवाब सीलबंद लिफाफे में दाखिल करें। एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने कोर्ट से स्वतंत्र जांच की रिपोर्ट आने तक इंतजार करने की अपील की है। कोर्ट ने आदेश में कहा, “हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (आरजी) ने 5 जून के हमारे पिछले आदेश के अनुसार रिट याचिका (डब्ल्यूपी) दाखिल किया है। शशि किरण शेट्टी ने बताया कि एडवोकेट जनरल ने कहा है कि वह सीलबंद लिफाफे में जवाब दाखिल करना चाहते हैं, उन्हें गुरुवार तक या उससे पहले ऐसा करने की अनुमति है। आरजी यह सुनिश्चित करेंगे कि जवाब सुरक्षित रखा जाए।” इस मामले में अगली सुनवाई 12 जून को होगी।

चिनाब ब्रिज के बाद इस इलाके में बनने जा रहा सबसे लंबा पुल, 40 से ज्यादा गांवों को होगा फायदा

जम्मू  चिनाब ब्रिज के बाद अब एक और सबसे लंबा पुल बनने जा रहा है, जिससे लोगों को काफी फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक इस पुल के बनने से 40 से ज्यादा गांवों को बहुत फायदा होगा। गौरतलब है कि, जम्मू के अखनूर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास चिनाब नदी पर बनाया जा रहा इंदरी-पत्तन पुल इस साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा।  इस पुल से 40 से अधिक सीमावर्ती गांवों में विकास और खुशहाली आएगी और अखनूर और प्लांवाला सेक्टर में भारतीय सेना की स्थिति और पहुंच को भी और मजबूती मिलेगी। उत्तर भारत में किसी नदी पर बनने वाला यह सबसे लंबा पुल होगा, जिसकी लंबाई करीब पौने 2 किलोमीटर है। सीमावर्ती परगवाल क्षेत्र को जम्मू-अखनूर हाईवे से जोड़ने वाली एकमात्र सड़क सुआ नंबर-एक लोगों के लिए जीवन रेखा का काम करती है। हालांकि, पाकिस्तान की भारी गोलाबारी की स्थिति में यह मार्ग बंद हो जाता है, जिससे 25-30 हजार की आबादी का संपर्क प्रदेश के अन्य हिस्सों से कट जाता है। चिनाब नदी पर सजवाल के निकट बने इस डबल लेन पुल का स्पैन 1640 मीटर है। पुल के निर्माण से सजवाल और इंदरी-पत्तन के बीच की दूरी 47 किलोमीटर से घटकर मात्र 5 किलोमीटर रह जाएगी। इसके अलावा, यह पुल परगवाल को ज्यौड़ियां क्षेत्र से भी जोड़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए आवागमन और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगे। पुल के बन जाने से न केवल क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी, बल्कि भारतीय सेना की सीमा सुरक्षा भी और मजबूत होगी। बता दें कि, केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में 206 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल को मंजूरी दे दी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में जम्मू में इसका वर्चुअल शिलान्यास किया था। 

विदेशों में चल रहा अरबों का खेल!, भ्रष्टाचार का खुला खेल, ट्रम्प की निजी कमाई , राष्ट्रपति पद बना ट्रम्प का प्रॉफिट प्लान

वाशिंगटन  अमेरिका के दोबारा राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में अब तक कई ऐसे फैसले सामने आए हैं जो संकेत देते हैं कि  सरकारी नीतियां उन लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बदली जा रही हैं, जो या तो ट्रम्प के बिजनेस से जुड़े हैं या फिर उन्हें वित्तीय रूप से सहयोग करते हैं। ट्रम्प के खिलाफ सीधी रिश्वत लेने के सबूत नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा लिया गया हर बड़ा फैसला यह दर्शाता है कि सत्ता में रहते हुए भी वह अपने और अपने करीबी सहयोगियों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं । क्रिप्टोकरंसी घोटाले से राष्ट्रपति भोज तक  हाल ही में ट्रम्प ने एक भव्य डिनर का आयोजन किया जिसमें उन्हीं लोगों को बुलाया गया जिन्होंने सबसे अधिक मात्रा में ‘ट्रम्प कॉइन’ (Trump Coin)  नाम की क्रिप्टोकरंसी खरीदी थी। इसमें सबसे बड़ा नाम  जस्टिन सन  का है, जिन्होंने पहले ही ट्रम्प की एक और क्रिप्टो फर्म में ₹640 करोड़ लगाए थे और अब ₹340 करोड़ के ट्रम्प कॉइन खरीदकर डिनर में पहुंचे।ट्रम्प की इस नीति का नतीजा ये हुआ कि SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने जस्टिन सन के खिलाफ चल रहे  क्रिप्टो धोखाधड़ी  के मामले को बंद कर दिया। मेलानिया ट्रम्प और अमेज़न डील  अमेज़न  ने ट्रम्प की पत्नी मेलानिया ट्रम्प पर बनने वाली एक डॉक्यूमेंट्री के लिए ₹340 करोड़ की डील  की है। इससे साफ है कि कैसे ट्रम्प परिवार राष्ट्रपति की कुर्सी का व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग कर रहा है। कतर, सऊदी अरब, ओमान और यूएई  में ट्रम्प ऑर्गेनाइजेशन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स शुरू करने जा रहा है। वियतनाम सरकार  ने हनोई के पास ₹12,847 करोड़ के गोल्फ कॉम्प्लेक्स और हो ची मिन्ह सिटी में ट्रम्प की गगनचुंबी इमारत की अनुमति दी है। ट्रम्प के शपथ समारोह में ही करीब ₹2,000 करोड़ जुटाए गए थे।   भ्रष्टाचार का खुला खेल: ट्रम्प की निजी कमाई  फोर्ब्स के अनुमान के अनुसार ट्रम्प ने पिछले 9 महीनों में क्रिप्टोकरंसी के जरिए ₹8,569 करोड़ की कमाई की है। इस दौरान सरकार ने कई क्रिप्टो फ्रॉड मामलों में माफियाँ दीं, कई जांच बंद की गईं , वो भी तब, जब कंपनियों ने अपने गुनाह स्वीकार कर लिए थे। इतिहासकार मैथ्यू डैलेक कहते हैं  “डोनाल्ड ट्रम्प आधुनिक युग के सबसे भ्रष्ट राष्ट्रपति हैं। वे अपने लालच को सफलता का प्रतीक मानते हैं और इस पर गर्व करते हैं।”  ट्रम्प के कार्यकाल में एक ऐसी संस्कृति पनप रही है जिसमें राजनीति और निजी कारोबार  को घोल दिया गया है। वह सत्ता का उपयोग व्यक्तिगत लाभ और सहयोगियों की रक्षा  के लिए कर रहे हैं, जिससे अमेरिका की लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैश्विक प्रतिष्ठा  पर गहरा आंच आ रही है।

भारत और चीन के बीच तनाव में “काफी” कमी आई है और त्रिपक्षीय समूह‘RIC’ का रुका हुआ काम फिर से शुरू होगा : पुतिन

 मॉस्को हाल के वर्षों में वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से बदलाव आया है। इस बदलती दुनिया में रूस, भारत और चीन (RIC) त्रिपक्षीय मंच को दोबारा खड़ा करने की दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में इस मंच को फिर से सक्रिय करने की इच्छा जताई है। लावरोव ने कहा कि भारत और चीन के बीच तनाव में “काफी” कमी आई है और त्रिपक्षीय समूह‘आरआईसी’ का रुका हुआ काम फिर से शुरू हो सकता है। रूसी राजधानी मॉस्को में ‘2050 भविष्य का मंच’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरआईसी प्रारूप में संयुक्त कार्य की बहाली बहुध्रुवीय ढांचे के निर्माण समेत यूरेशियाई प्रक्रियाओं की दिशा में पहला कदम हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि रूस इस त्रिगुट को फिर से खड़ा करने के लिए इतना उत्सुक क्यों है? और क्या यह प्रयास वास्तव में भारत-चीन संबंधों को सामान्य कर सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं। RIC त्रिगुट का इतिहास रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय मंच की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में हुई थी, जब रूस के तत्कालीन विदेश मंत्री येवगेनी प्रिमाकोव ने इसे अमेरिका-केंद्रित एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था के खिलाफ एक वैकल्पिक रणनीतिक गठजोड़ के रूप में प्रस्तावित किया था। इस मंच का उद्देश्य तीनों देशों के साझा हितों को बढ़ावा देना और वैश्विक मंच पर बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना था। 2000 के दशक में यह मंच ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अन्य बहुपक्षीय मंचों के साथ पूरक रूप से काम करता रहा। हालांकि, 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प के बाद RIC मंच लगभग निष्क्रिय हो गया। भारत-चीन सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास ने इस त्रिगुट को कमजोर कर दिया। इस बीच, यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन के बीच निकटता बढ़ती चली गई। हालांकि रूस बार-बार इस बात पर जोर देता रहा है कि वह भारत को अपने सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक मानता है और RIC को दोबारा खड़ा करने की कोशिशों में लगा हुआ है। रूस की उत्सुकता के पीछे की वजहें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इससे पहले मई में भी एक बयान में कहा था कि भारत और चीन के बीच सीमा पर स्थिति को शांत करने की दिशा में प्रगति हुई है, और अब RIC मंच को फिर से सक्रिय करने का सही समय है। इस बयान के पीछे कई भू-राजनीतिक और रणनीतिक कारण हैं। पश्चिमी दबाव का जवाब: लावरोव ने बार-बार पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और नाटो, पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पश्चिम ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के तहत भारत को चीन-विरोधी गठजोड़ (जैसे क्वाड और AUKUS) में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। रूस का मानना है कि RIC का पुनर्जन्म पश्चिमी प्रभाव को संतुलित करने में मदद करेगा और तीनों देशों को एक स्वतंत्र, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करने का अवसर देगा। चीन के साथ संतुलन: रूस और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी के बावजूद, रूस नहीं चाहता कि वह बीजिंग के प्रति अत्यधिक निर्भर हो जाए। रूस को डर है कि जनसांख्यिकीय असंतुलन और साइबेरिया जैसे क्षेत्रों में चीनी प्रवासियों की बढ़ती मौजूदगी भविष्य में उसके लिए चुनौती बन सकती है। भारत, जो रूस का दशकों पुराना साझेदार है, वह इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संतुलन की भूमिका निभा सकता है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका रूस के लिए आकर्षक है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता: भारत ने वैश्विक भू-राजनीति में अपनी स्वतंत्र नीति बनाए रखी है। वह न तो पूरी तरह पश्चिम के साथ है और न ही रूस-चीन धुरी का हिस्सा। रूस भारत की इस स्वायत्तता को महत्व देता है और इसे RIC मंच के माध्यम से मजबूत करना चाहता है। लावरोव ने कहा कि रूस के मित्र देश भारत की क्वाड में भागीदारी मुख्य रूप से केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित है, और भारत इसे सैन्य गठजोड़ में बदलने के पश्चिमी प्रयासों का समर्थन नहीं करता। क्षेत्रीय स्थिरता और ब्रिक्स की भूमिका: रूस, भारत और चीन तीनों ब्रिक्स के प्रमुख सदस्य हैं। रूस का मानना है कि RIC का पुनर्जन्म ब्रिक्स को और मजबूत करेगा, जो पश्चिमी-प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के खिलाफ एक वैकल्पिक मंच के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, रूस भारत और चीन के बीच तनाव को कम करके एशिया में स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है, खासकर तब जब वह स्वयं यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। बातचीत शुरू कर दी है, त्रिगुट फिर खड़ा होगा- रूस रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ के अनुसार लावरोव ने  कहा, ‘‘मुझे वाकई उम्मीद है कि हम ‘रूस-भारत-चीन’ त्रिपक्षीय समूह के काम को फिर से शुरू कर पाएंगे। पिछले कुछ वर्षों से हमारी विदेश मंत्रियों के स्तर पर बैठक नहीं हुई है, लेकिन हम अपने चीनी सहयोगी और विदेश विभाग के भारतीय प्रमुख के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे वास्तव में उम्मीद है कि अब जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम हो गया है- मेरी राय में यह काफी हद तक कम हुआ है और हालात स्थिर हो रहा है, नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संवाद हो रहा है, तो हम ‘रूस-भारत-चीन’ त्रिगुट के कार्य को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे।’’ लावरोव ने कहा कि रूस और चीन बहुध्रुवीय संरचना के निर्माण सहित अखिल महाद्वीपीय प्रक्रिया में अग्रणी और सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं और उन्हें ऐसा करना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरआईसी प्रारूप की बहाली इस दिशा में पहला कदम हो सकता है। उन्होंने कहा, “यह महाद्वीपीय प्रक्रियाओं की गति में भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा।” भारत और चीन के बीच संबंधों में हाल के महीनों में कुछ सुधार के संकेत दिखे हैं। अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों को पीछे हटाने के समझौते ने चार साल से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने में मदद की। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024 में … Read more

जम्मू राजौरी हाईवे पर कल्लर चौक, राजौरी के पास एक संदिग्ध बैग मिला, मौके पर मचा हड़कंप

राजौरी जम्मू कश्मीर में अभी-अभी बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, एक संदिग्ध बैग मिलने से मौके पर हड़कंप मच गया। मिली जानाकीर के अनुसार, जम्मू राजौरी हाईवे पर कल्लर चौक, राजौरी के पास एक संदिग्ध बैग मिला है। इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और सेना पहुंची और जांच शुरू की गई। वहीं मौके पर बीडीएस को बुलाया गया। इस मामले संबंधी अधिक जानकारी मिलते ही खबर को अपडेट किया जाएगा।   मोर्टार बम मिलने से हड़कंप, फैली सनसनी सांबा मानसर मार्ग पर मनानू गांव में एक पुराना मोर्टार शैल मिलने से हड़कंप मच गया। यह मोर्टार शैल बसंतर नदी के किनारे पाया गया था। स्थानीय लोगों ने इसे देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बम डिस्पोजल टीम को बुलाकर शैल को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और लोग घबराए हुए हैं। पुलिस और अधिकारियों का कहना है कि यह मोर्टार शैल काफी पुराना है और फिलहाल इलाके को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया है। जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह शैल यहां कैसे आया।

आज तत्काल प्रभाव से 134 अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति के आदेश दिए, जम्मू-कश्मीर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर सरकार ने 134 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। मंगलवार को तत्काल प्रभाव से 134 अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति के आदेश दिए। जम्मू-कश्मीर सरकार के आदेश पर आयुक्त सचिव सामान्य प्रशासन विभाग ने जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) के अधिकारियों के तबादले जारी किए। आदेश में कहा गया है कि तबादले और नियुक्ति प्रशासन के हित में किए गए हैं। तबादले किए गए 134 अधिकारियों में विशेष सचिव, सचिव, आयुक्त, महानिदेशक, प्रबंध निदेशक और निदेशक रैंक के कई अधिकारी शामिल हैं।

दक्षिण कोरिया में महिलाओं ने बताया- शादी एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है और वे अपनी आजादी को प्राथमिकता देती हैं

नई दिल्ली  दुनिया के कई हिस्सों में जहाँ आज भी कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है वहीं कुछ ऐसे देश भी हैं जहाँ महिलाएँ अपनी मर्जी से शादी नहीं कर रही हैं. पिछले कुछ सालों में ऐसे कई आंदोलन देखने को मिले हैं जैसे दक्षिण कोरिया में महिलाओं का एक समूह जो शादी नहीं करना चाहता उनका मानना है कि शादी एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है और वे अपनी आजादी को प्राथमिकता देती हैं. पुरुषों का बढ़ता हिंसात्मक रवैया भी ऐसी महिलाओं को शादी न करने का एक विकल्प देता है. लेकिन यह बात सिर्फ दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं है. मुस्लिम देशों में भी बड़ी संख्या में ऐसी लड़कियाँ हैं जिन्होंने अभी तक शादी नहीं की है और इसके पीछे कई जटिल कारण हैं. किस मुस्लिम देश में हैं सबसे ज़्यादा कुंवारी लड़कियाँ? एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार गल्फ रीजन को मिलाकर पूरे अरब में करीब 25 मिलियन (2.5 करोड़) ऐसी लड़कियाँ हैं जिनकी उम्र 24 साल से ज़्यादा है और उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है. इस संख्या में कुछ ऐसी महिलाएँ भी शामिल थीं जिनकी उम्र 35 साल पार कर चुकी थी.   रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र (Egypt) इस सूची में सबसे ऊपर है जहाँ अकेले एक तिहाई यानी 9 मिलियन (90 लाख) स्पिनस्टर्स की संख्या है. स्पिनस्टर उस महिला को कहा जाता है जिसने कभी शादी नहीं की हो खासकर जब उसकी उम्र विवाह की पारंपरिक उम्र से अधिक हो गई हो. मिस्र के बाद दूसरे नंबर पर अल्जीरिया आता है जहाँ कुंवारी लड़कियों की संख्या करीब 4 मिलियन (40 लाख) है. इराक में यह संख्या 3 मिलियन (30 लाख) और यमन में करीब 2 लाख के आसपास है. इसके अलावा सूडान, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब में यह संख्या 1.5 लाख के आसपास है. आपको बता दें कि यह रिसर्च साल 2010 में कुवैत के न्यूजपेपर अलराई की तरफ से की गई थी जिसमें यह आँकड़ा सामने आया था. लिस्ट में अन्य देश और बदलते सामाजिक समीकरण इस लिस्ट में सीरिया और लेबनान का नाम भी शामिल है जहाँ कुंवारी महिलाओं की संख्या क्रमशः 70,000 और 45,000 के आसपास है. रिसर्च में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि जॉर्डन में महिलाओं की शादी की औसत उम्र 30 साल से बढ़कर 32 साल हो गई है जो दिखाता है कि समाज में कुछ बदलाव आ रहे हैं. महिलाएँ क्यों नहीं कर रही हैं शादी? महिलाओं के शादी न करने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं जिनमें प्रमुख हैं: ➤ उच्च शिक्षा और करियर को प्राथमिकता: अब महिलाएँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और अपने करियर को पहली प्राथमिकता दे रही हैं. वे तब तक शादी न करने का फैसला ले रही हैं जब तक वे नौकरी न कर लें और खुद को आर्थिक रूप से व्यवस्थित न कर लें. ➤ शादी का महंगा होना: कई मुस्लिम देशों में शादी करना बेहद महंगा हो गया है. दहेज, महंगे उपहार और रिसेप्शन जैसे खर्च आम बात हैं जो शादी को एक बड़ा आर्थिक बोझ बना देते हैं खासकर पुरुषों के लिए. ये कारण दर्शाते हैं कि कैसे सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की आकांक्षाएँ मुस्लिम समाजों में भी विवाह के पारंपरिक प्रतिमानों को बदल रही हैं.  

राज कुशवाह की बहन ने कहा- विक्की और राज दोनों मेरे भाई हैं, वे कभी ऐसा कुछ नहीं कर सकते, विधवा मां ने दी धमकी

मेघालया  मेघालया में राजा रघुवंशी को दर्दनाक मौत देने के चार आरोपी चार आरोपी सोनम रघुवंशी, आकाश राजपूत, विशाल सिंह चौहान और राज सिंह कुशवाहा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सभी चार को आज ट्रांजिट रिमांड औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद शिलांग ले जाया जाएगा। वहीं इसी बीच सोनम के कथित प्रेमी राजा रघुवंशी की बहन और मां ने उसके लिए गुहार लगाई है।  राज कुशवाह की बहन ने रोते हुए कहा-  “विक्की और राज दोनों मेरे भाई हैं। वे कभी ऐसा कुछ नहीं कर सकते। मेरा भाई राज कहीं नहीं गया। आप अपने कार्यालय में लोगों से पूछ सकते हैं। मेरी एकमात्र मांग यह है कि मेरे भाई को रिहा कर दिया जाना चाहिए। वह हत्या में शामिल नहीं है। मेरा भाई निर्दोष है …”। राज की बहन ने यह भी बताया कि राज मंदिर जाने की तैयारी कर रहा था इससे पहले ही पुलिस उठाकर उसे ले गई। राज कुशवाह की बहन बार- बार यही कह रही है कि उसें भाई ने कुछ नहीं किया है उसे फंसाया जा रहा है। राज के पिता का कोरोना काल में निधन हो गया था।  अब बेटे की गिरफ्तारी के बाद मां पूरी तरह टूट चुकी है। उनका कहना है कि राज का सोनम के साथ कोई अफेयर नहीं था। यदि अफेयर होता तो वह बताता। वो किसी से फोन पर बात तक नहीं करता था। उसे फंसाया गया है। मां के मुताबिक, मेरा बेटा बहुत सीधा है वह सोनम के भाई की कंपनी में काम करता था। वहां सोनम भी आती थी और इस दौरान कभी को बात हुई हो तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका अफेयर था। राज की मां ने कहा कि अगर उनके बेटे को जेल हुई तो वो आत्महत्या कर लेंगी। पुलिस के अनुसार, सोनम राहुवंशी और राज कुशवाहो प्रमुख अभियुक्त हैं। मेघालय पुलिस ने तीन दिवसीय पारगमन रिमांड प्राप्त करने के बाद बिहार के पटना में सोनम रघुवंशी को फुल्वरी सरिफ पुलिस स्टेशन में लाई। सोमवार को, मेघालय पुलिस को इंदौर के राजा रघुवंशी हत्या के मामले में तीनों आरोपियों का पारगमन रिमांड मिला। राजा रघुवंशी, कथित तौर पर मेघालय में एक हनीमून यात्रा के दौरान मारा गया था, जो कि अनुबंध हत्यारों द्वारा कथित तौर पर उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी द्वारा काम पर रखा गया था।  

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