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हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल द्वितीय परीक्षा आवेदन की तिथि बढ़ी

भोपाल माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्यप्रदेश भोपाल ने सत्र 2024-25 की हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी द्वितीय परीक्षा के लिये पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की तिथि में वृद्धि की है। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी मुख्य परीक्षा 2025 में उत्तीर्ण छात्र अंक सुधार के लिये अथवा अनुत्तीर्ण छात्र उत्तीर्ण विषयों के अंक सुधार के लिये अब 25 मई 2025 रात्रि 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी मुख्य परीक्षा में केवल अनुत्तीर्ण विषयों की द्वितीय परीक्षा के लिये 31 मई 2025 की रात्रि 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन किये जा सकेंगे।  

स्व-सहायता समूह से जुड़कर सेल बाई दीदी ने बनाई अपनी पहचान, परिवार की आजीविका का बनी संबल

भोपाल अलीराजपुर के ग्राम जाम्बू खेड़ा निवासी श्रीमती सेल बाई दीदी की जिंदगी कभी गरीबी और संघर्ष की कहानी थी। वर्षा आधारित खेती और मजदूरी के भरोसे चलने वाला उनका परिवार मुश्किल से 3 से 4 हजार रुपये मासिक कमाता था। पति और चार बच्चों के साथ जीवन बेहद कठिन था। ज़रूरतों के लिए कभी रिश्तेदारों से मदद मांगनी पड़ती, तो कभी साहूकारों के ऋण लेकर सालों तक चुकाना पड़ता था। वर्ष 2017 में जब राज्य आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह गठन के विषय में उनके फलिया में एक बैठक हुई। बैठक में उन्हें जानकारी मिली कि कैसे स्व-सहायता समूह बनते हैं, कौन जुड़ सकता है और क्या लाभ होते हैं। उन्होंने यह सब परिवार को बताया और सभी की सहमति से ‘बाबा देब आजीविका समूह’ से जुड़ गईं। यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। स्व-सहायता समूह में जुड़ने के बाद उन्हें कृषि कार्यों का प्रशिक्षण मिला, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीक सीखी। सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली, बैंक से जुड़ाव बढ़ा और धीरे-धीरे आत्म-निर्भरता की ओर कदम बढ़ने लगे। समूह से मिले ऋण की मदद से उन्होंने पहले खाद-बीज खरीदे, फिर बैल, सिंचाई पंप, पाइप और सिंचाई के अन्य साधन जुटाए। खेती में सुधार हुआ और दो फसलें उगाने लगीं। धीरे-धीरे उन्होंने भूमिगत पाइप लाइन लगवाई, जिससे सिंचाई क्षेत्र बढ़ा और आमदनी में उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ। फिर पति के लिए फर्नीचर निर्माण कार्य के लिए मशीन खरीदी, जिससे घर पर ही फर्नीचर का काम शुरू हुआ। आज उनका परिवार सब्जी की खेती, फर्नीचर निर्माण और खेती के माध्यम से हर महीने 20 से 22 हजार रुपये कमाता है। बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो रही है। एक बेटा तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर गया है। कच्चे घर से अब चार कमरों का पक्का मकान बना है – प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से गैस कनेक्शन भी मिला। अब सेल बाई दीदी सिर्फ एक गृहणी नहीं हैं, बल्कि अपने परिवार की मजबूत आधारशिला हैं। गांव में पहचान बनी है, निर्णयों में उनकी भागीदारी है, बैंक और बाजार तक उनकी सीधी पहुंच है। भविष्य में वे ट्यूबवेल लगाकर तीन फसलें लेना चाहती हैं और एक बड़ी फर्नीचर दुकान खोलकर स्थायी रोजगार का साधन बनाना चाहती हैं। सेल बाई दीदी गर्व से कहती हैं — “अगर आजीविका मिशन न होता, तो मैं आज भी मजदूरी कर रही होती, साहूकारों के कर्ज में डूबी होती और मेरे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते। आजीविका मिशन हमारे जीवन में बदलाव लाने वाला वरदान साबित हुआ है।”  

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विविध जागरूकता गतिविधियाँ

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर वन विभाग द्वारा वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में पश्चिम मण्डला सामान्य वन क्षेत्र में जैव विविधता पर आधारित स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता, वृत्त चित्र स्क्रीनिंग, गाँव की सफाई और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की बैठकों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया।

सुसाइड नोट लिखकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे अतिथि शिक्षक ने लगाई फांसी, पेड़ में लटका शव मिलने से सनसनी फैली

डिंडौरी, शहपुरा जिले की तहसील मुख्यालय शहपुरा निवासी अतिथि का शुक्रवार की सुबह तहसील कार्यालय के पीछे चमरकुंडी में आम के पेड़ में लटका शव मिलने से सनसनी फैल गई। जानकारी में बताया गया कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे अतिथि शिक्षक ने यह कदम उठाया है। उसके पास से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने उल्लेख किया है कि मैं बहुत तनाव में हूं। मेरे कारण किसी को परेशानी न हो। मेरी बॉडी का पोस्टमार्टम न कराया जाए। थाना प्रभारी ने बताया गया कि गुरुवार की रात शहपुरा के वार्ड क्रमांक एक निवासी सियोल राय पिता डीके राय 38 वर्ष घर से निकला था। रात भर वापस नहीं आया। सुबह उसका शव फांसी पर लटका मिला। बताया गया कि 5 साल पहले उसके पिता भी घर छोड़कर दूसरे जगह चले गए हैं, जबकि मां घर में गंभीर बीमारी से जूझ रही है। ऐसे में इकलौते बेटे के फांसी लगाने से पूरा परिवार प्रभावित हुआ है। बताया गया कि गर्मी में अवकाश के चलते सरकारी स्कूल की छुट्टी है। ऐसे में मृतक आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था। पुलिस की मानें तो वह नशा करने का भी आदी था। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने मामला कायम कर जांच शुरू कर दी है।

उप राष्ट्रपति धनखड़ के 26 मई को नरसिंहपुर प्रस्तावित भ्रमण की तैयारियों का मंत्री पटेल ने लिया जायजा

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को नरसिंहपुर कृषि उपज मंडी के पास होने वाले कृषि उद्योग समागम के कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों का जायजा लिया। उल्लेखनीय है कि उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ 26 मई को कृषि उद्योग समागम में शामिल होंगे। इस दौरान उन्होंने हेलीपैड स्थल, पौधरोपण स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, ग्रीन रूम, मंच, इन्वेस्टर्स मीट, बैठक व्यवस्था आदि का मुआयना किया। उन्होंने आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये। नरसिंहपुर में 26 मई को उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में कृषि उद्योग समागम का आयोजन होगा। निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि एशिया महाद्वीप की सबसे ज्यादा उपजाऊ जमीन नरसिंहपुर जिले में है और यहां खेती भी अच्छी होती है। उन्होंने कहा कि हमारा अगला कदम प्रोसेसिंग की तरफ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन दिवसीय कृषि उद्योग समागम के आयोजन के लिए नरसिंहपुर जिले को चुना, मैं उनका आभारी हूं। इस मेले में किसान भाईयों को उन्नत खेती करने के तरीके, नई तकनीक एवं मार्गदर्शन दिया जायेगा। 26 से 28 मई तक समागम के तीन दिवसों में इन्वेस्टर्स और जो अतिथि होंगे और आपस में बातचीत करेंगे। इस अवसर पर विधायक श्री महेन्द्र नागेश, पूर्व राज्यमंत्री श्री जालम सिंह पटेल, सहित अधिकारी उपस्थित थे।  

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस से विश्व बाघ दिवस तक की अवधि के लिये एक नया अभियान बाघदेव प्रारंभ किया गया

भोपाल सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस से विश्व बाघ दिवस तक की अवधि के लिये एक नया अभियान “बाघदेव’’ प्रारंभ किया गया है। “बाघदेव’’ को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में देवता के रूप में पूजा जाता है और उनसे मन्नतें मांगी जाती हैं। यह परम्परा आज भी प्रचलित है। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को जबकि बाघ दिवस 29 जुलाई को मनाया जाता है। उप संचालक पेंच टाइगर रिजर्व श्री रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि “बाघदेव’’ अभियान में बफर क्षेत्र की सभी 130 ईको विकास समितियों में मिट्टी के बाघ बनाये जायेंगे। ईको विकास समितियों के सदस्य एवं ग्राम पंचधार के मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाने वाले विशेषज्ञ कुम्हार भी सहायता करेंगे। पेंच प्रबंधन द्वारा समिति सदस्यों को पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया जायेगा। ग्रामीणजन मिट्टी के बाघ बनाकर उससे प्रकृति के इन तत्वों को वरदान के रूप में लेते हैं। मिट्टी के बाघों को पार्क प्रबंधन द्वारा एकत्रित करा कर भट्टी में पकाया जाता है, जिन्हें खबासा में निर्माणाधीन स्टील स्क्रेप से बन रही बाघ कलाकृति के पास स्थापित कर नये आस्था स्थल में संजोया जायेगा। पेंच प्रबंधन का प्रयास है कि इस वर्ष टेराकोटा (मिट्टी) की कलाकृति बनायी जाये। उन्होंने बताया कि इस अभियान में ईको विकास समितियों के साथ पर्यटक एवं अन्य बफर क्षेत्र के बाहर के रहवासी भी जुड़ सकते हैं और अपने हाथ से बाघ बनाकर उसमें अपना नाम लिखकर “बाघदेव’’ से मनोकामना मांग सकेंगे, इससे बाघ संरक्षण में समुदायों के भावनात्मक जुड़ाव के साथ ही पंचधार के मूर्तिकारों के लिये रोजगार के नये अवसर भी प्राप्त होंगे।  

घर में सो रही 5 वर्षीय बालिका से रिश्तेदार ने किया दुष्कर्म, नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में बालिकाओं के खिलाफ अपराधों की दो भयावह घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पिपलोद और खालवा थाना क्षेत्रों में नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं। दोनों ही मामलों में आरोपी पीड़िताओं के परिचित निकले, जिसने समाज में सुरक्षा और विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में जल्द कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया है। मामलों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ले जाने का निर्णय लिया है।   पिपलोद में पांच वर्षीय बालिका से दुष्कर्म पिपलोद थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच वर्षीय मासूम बालिका के साथ उसके ही रिश्तेदार ने दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना तड़के सुबह तीन से साढ़े तीन बजे के बीच की है, जब बालिका अपने घर में सो रही थी। शादी समारोह में शामिल होने आए रिश्तेदार ने मौके का फायदा उठाकर घर में घुसकर अपराध किया। पीड़िता के रोने की आवाज सुनकर परिजनों को घटना का पता चला, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने आरोपी को सुबह ही हिरासत में ले लिया। उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। खंडवा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोज कुमार राय ने बताया कि इस संवेदनशील मामले की जांच महिला अधिकारी टीआई एजके को सौंपी गई है।

25 मई से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की विदिशा संसदीय क्षेत्र में पदयात्रा , रोज 20-25 किमी चलेंगे

 विदिशा ‘पांव पांव वाले भैया’ और ‘मामा’ के नाम से मशहूर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करीब 25 साल बाद एक बार फिर पदयात्रा पर निकलने वाले हैं. शिवराज यह पदयात्रा अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा में निकालने वाले हैं. शिवराज सिंह चौहान की विदिशा संसदीय क्षेत्र में यह पदयात्रा 25 मई से शुरू होने वाली है, जिसमें वो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को जनता तक पहुंचाने का काम करेंगे. यह पदयात्रा विदिशा संसदीय क्षेत्र की सभी विधानसभाओं में होगी, जो हफ्ते में दो दिन चलेगी. इस दौरान शिवराज सिंह चौहान अधिकतम 20 से 25 किमी की यात्रा निकालेंगे. यात्रा के दौरान गांवों में विभिन्न वर्गों से संवाद कर योजनाओं की जानकारी देंगे, लाभ सुनिश्चित कराएंगे, उनकी समस्याओं का निराकरण के निर्देश देंगे. पदयात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही लाभार्थियों से संवाद करेंगे और योजनाओं के प्रभाव की समीक्षा करेंगे. पदयात्रा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, महिला सशक्तिकरण की योजनाएं, ग्रामीण सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, डिजिटल इंडिया, और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी. इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान लाभार्थियों से मिलकर योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे. बता दें कि इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा में साल 1991 में पदयात्रा निकाली थी और पूरा संसदीय क्षेत्र नाप डाला था. तब उनका नाम ‘पांव-पांव वाले भैया’ पड़ गया था. शिवराज की विदिशा संसदीय क्षेत्र में पदयात्रा 25 मई से, रोज 20-25 किमी चलेंगे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 25 मई से अपने विदिशा संसदीय क्षेत्र में ऐतिहासिक पदयात्रा प्रारंभ कर रहे हैं. यह पदयात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. यह पदयात्रा निरंतर चलेगी और प्रारंभ में विदिशा संसदीय क्षेत्र की सभी विधानसभाओं में यात्रा निकलेगी. तत्पश्चात, देश के अन्य लोकसभा क्षेत्रों में भी शिवराज सिंह पदयात्रा निकालेंगे. शिवराज सिंह प्रतिदिन 20 से 25 किमी की यात्रा निकालेंगे. यात्रा के दौरान गांवों में विभिन्न वर्गों से संवाद कर योजनाओं की जानकारी देंगे, लाभ सुनिश्चित कराएंगे, उनकी समस्याओं का निराकरण के निर्देश देंगे. पदयात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री चौहान ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही लाभार्थियों से संवाद करेंगे और योजनाओं के प्रभाव का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करेंगे. इस यात्रा के माध्यम से वे ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि सुधार, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को धरातल पर उतारेंगे. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता और समग्र विकास की ओर अग्रसर है. मेरी पदयात्रा का उद्देश्य है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर गांव, हर किसान, हर महिला सशक्त बने. इसके लिए हम कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे. केंद्र की योजनाओं का प्रचार-प्रसार पदयात्रा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, महिला सशक्तिकरण की योजनाएं, ग्रामीण सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, डिजिटल इंडिया, और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी. लाभार्थियों से करेंगे प्रत्यक्ष संवाद शिवराज सिंह चौहान लाभार्थियों से मिलकर योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे. इसमें स्थानीय भागीदारी भी रहेगी. साथ ही, कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारियों के अलावा पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, किसान संगठन, महिला मंडल आदि को भी यात्रा में शामिल कर सबकी सहभागिता की जाएगी और योजनाओं के प्रभाव को व्यापक बनाया जाएगा. आगे की योजना अन्य क्षेत्रों की     विदिशा के बाद अन्य संसदीय क्षेत्रों में भी इसी तरह की पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में विकास की नई गाथा लिखी जा सके.     यात्रा का होगा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव     आत्मनिर्भर भारत मिशन को बल: कृषि, ग्रामीण उद्योग, महिला उद्यमिता, और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान.     गरीबीमुक्त गांव: केंद्र की योजनाओं के माध्यम से आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और रोजगार के अवसरों का विस्तार.     महिला सशक्तिकरण: विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना.     युवाओं के लिए अवसर: स्वरोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना.   बहनों से मिलेंगे किसानों से करेंगे संवाद देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का है। इसी को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले गांव लाडक़ुई से भैरूंदा तक दो दिवसीय पदयात्रा निकाल रहे हैं। विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान यह उनकी पहली पदयात्रा होगी। इसके बाद वह देश के कई गांवो में जाकर यात्रा के माध्यम से किसानों, महिलाओं व युवाओं से सीधे जुड़ेगें। इस यात्रा का उद्देश्य पर्यावरण सरंक्षण, जल सरंक्षण, उन्नत, जैविक व प्राकृतिक खेती, नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान, भूमिगत जलस्तर को बढ़ाने के प्रयास, वॉटर हार्वेस्टिंग को अपनाने, पॉलीथिन के उपयोग को कम करने, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दो को अमलीय जामा पहनाकर आम लोगों को जागरूक करना है। इस दौरान वह ग्रामीणों को चौपाल के माध्यम से विकसित भारत में अपने योगदान को लेकर संकल्प भी दिलाएंगे। चौपाल के माध्यम से योजनाओं की जानेंगे हकीकत, ग्रामीणों से लेंगे फीडबैक उनकी यात्रा 25 मई को शाम 4 बजे लाडक़ुई से शुरु होगी। यहां पर वह प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों, वन विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग योजना के संबंधित हितग्राहियों से संवाद करेंगे। इसके बाद वह पदयात्रा कर लाडक़ुई व भादाकुई के बीच पड़ने वाले खेतों में पहुंचकर किसानों से संवाद करेंगे और उन्हें जैविक खेती को बढ़ावा देने, कीटनाशक एवं रासायनिक खाद का उपयोग कम करने, नरवाई नहीं जलाने का संकल्प दिलाएंगे। साथ ही उद्यानिकी एवं वाणिज्यिक खेती पर भी चर्चा करेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे भादाकुई पहुंचकर चौपाल में शामिल होंगे और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत लाड़ली बहना व लखपति दीदी से संवाद … Read more

वन विभाग ने ‘पुष्पा’ फिल्म की तरह खेर की लकड़ी की तस्करी पकड़ी

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर के घाटीगांव इलाके में सांक नदी से 35 क्विंटल खैर की लकड़ी बरामद कर वन विभाग ने 3 तस्करों को गिरफ्तार किया है. लेकिन आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के दौरान आरोपियों को रिमांड पर नहीं लेने से कार्रवाई पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. चेकिंग के दौरान दो ट्रकों में मिली थी खैर की लकड़ी असल में ग्वालियर जिला वन मंडल में फिल्म ‘पुष्पा’ की तर्ज पर कुछ तस्कर खैर की लकड़ी की तस्करी कर रहे थे. इस तस्करी के बारे में वन विभाग की टीम को एक मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी. वन विभाग के मुताबिक, उन्होंने अलवर से आए दो ट्रकों से चेकिंग के दौरान बहुमूल्य खैर की लकड़ी पकड़ी थी. ये लकड़ी कत्था बनाने के काम में ली जाती है. जो काफी महंगी होती है. पुष्पा की तर्ज पर नदी में इकट्ठा कर रहे थे लकड़ी तस्करों ने ट्रकों में छुपा कर रखी ज्यादातर लकड़ियों को पहले ही जखौदी इलाके में सांक नदी में फेंक दिया था. जब ग्रामीणों की सूचना वन विभाग को मिली तो टीम सांक नदी किनारे पहुंची और नदी से 35 क्विंटल से ज्यादा खैर की लकड़ी जब्त की. पता चला है कि तस्करों का गिरोह पुष्पा फिल्म की तरह ही खैर की लकड़ी को नदी से बहाकर इकट्ठा कर रहे थे. वन विभाग की विजलेंस टीम ने मौके से तीन तस्कर हामिद, अजहरुद्दीन और साउन खान को भी पकड़ा है. जबकि उनका एक साथी रामनिवास गुर्जर मौके से फरार हो गया. अंडरग्राउंड हुआ तस्करी का मास्टर माइंड खैर की लकड़ी की तस्करी का मास्टरमाइंड शोभित यादव बताया जा रहा है, जो वन विभाग की कार्रवाई के बाद के बाद अंडर ग्राउंड हो गया है. ऐसे में वन विभाग ने पकड़े गए तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर कोर्ट में पेश कर दिया है. वन विभाग के ग्वालियर रेंज सीसीएफ एपीएस सेंगर से बात करने पर उनका कहना है कि, ”सोनचिरैया अभियारण्य में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ी की तस्करी की जानकारी मिल रही थी. इसी आधार पर ये कार्रवाई की गई है.” पुष्पा फिल्म की तरह छुपाई लकड़ी ग्वालियर में वन विभाग को खेर की लकड़ी की तस्करी का एक बड़ा मामला मिला है। यह मामला फिल्म ‘पुष्पा’ की तरह है। 15-16 मई की रात को वन विभाग को खबर मिली कि कुछ लोग लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। राजस्थान से आ रहे थे ट्रक अलवर से आ रहे दो ट्रकों की तलाशी ली गई। ट्रकों में कीमती खेर की लकड़ी छुपाई गई थी। तस्करों ने लकड़ियों को जखौदी इलाके में सांक नदी में फेंक दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। वन विभाग ने सांक नदी से 35 क्विंटल से ज्यादा खेर की लकड़ी जब्त की। हामिद, अजहरुद्दीन और साउन खान नाम के तीन तस्करों को भी पकड़ा गया। रामनिवास गुर्जर नाम का एक तस्कर मौके से भाग गया। सांक नदी से लकड़ी निकालने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिमांड पर नहीं लिए तस्कर, उठा सवाल शोभित यादव नाम का एक व्यक्ति इस तस्करी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह वन विभाग की कार्रवाई के बाद से गायब है। वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि पकड़े गए तस्करों को रिमांड पर नहीं लिया गया। अगर रिमांड पर लिया जाता, तो तस्करी के एक बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता था।

उपराष्ट्रपति धनखड़ नरसिंहपुर में 26 मई को करेंगे कृषि उद्योग समागम का शुभारंभ

 भोपाल  प्रदेश में वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इन्वेस्ट मध्यप्रदेश के अंतर्गत अनंत संभावनाओं के दृष्टिगत नरसिंहपुर में 26 मई को कृषि उद्योग समागम का आयोजन होगा। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 26 मई को  कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। तीन दिन के कृषि उद्योग समागम में कृषि अधारित उद्योग इकाइयों का शिलान्यास एवं लोकार्पण तथा उद्योगपतियों को भूमि आवंटन पत्र एवं आशय पत्रों का वितरण भी होगा। साथ कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 26 मई को नरसिंहपुर जिले में किसान उद्योग समागम मेले का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय इस मेले में अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। आने वाले समय में रीवा सतना और चंबल में भी ऐसे ही मेले आयोजित किये जाऐंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन ने हर खेत में सिंचाई के लिये पानी पहुचाने का संकल्प लिया है। पहले प्रदेश के 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी जिसे बढ़ाकर 55 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित कर ली गई है। आने वाले समय में 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य- “कृषि उद्योग समागम 2025” का आयोजन मध्यप्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, खाद्य प्रसंस्करण में निवेश आकर्षित करने, और किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ने के लिए किया जा रहा है। यह समागम उद्योगपतियों कृषक उत्पादक संगठनों एवं नीति निर्माताओं के बीच संवाद, नीति प्रस्तुति एवं सहयोग के अवसर प्रदान करेगा। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश का किसान सम्पन्न होगा तो प्रदेश और देश भी समृद्ध होगा। राज्य सरकार युवा, महिला और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि उद्योग समागम में आधुनिक कृषि तकनीकों व उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। समागम में कृषि के साथ खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित जानकारी मिलेगी।  

इंदौर में सिटी बस में सफर महंगा, आज से नई दरें लागू

इंदौर  इंदौर शहर में सिटी बस में सफर एक बार फिर महंगा हो गया है। एआइसीटीएस एल ने 10 माह में दूसरी बार किराया बढ़ाया है। हर कैटेगरी में 1 रुपए वृद्धि की है। शहर में 28 किमी सफर करने पर अब तक 40 रुपए चुकाने होते थे, अब 42 रुपए चुकाने होंगे।  एआइसीटीएसएल ने यह आदेश जारी कर सभी बस ऑपरेटर को बढ़ा किराया वसूलने के निर्देश दे दिए। जानकारी है कि पूर्व में हुई बोर्ड बैठक में निर्णय लिया था कि हर वित्तीय वर्ष में पांच फीसदी किराए में वृद्धि करेंगे। जानकारी अनुसार एआइसीटीएसएल घाटे में चल रहा है। करीब 60 करोड़ के घाटे में संचालन किया जा रहा है। इसके अलग-अलग कारण भी हैं। कई बार कर्मचारियों का भुगतान भी लंबित हो जाता है। कई रूट पर तो बस संचालन ही सुचारू नहीं हो रहा। जानिए कितना बढ़ा किराया दूरी (किमी में) दर पहले: 0 से 1.5 – 5 रुपए अब: 0 से 1.5 – 5 रुपए पहले: 1.5 से 3- 10 रुपए अब: 1.5 से 3- 11 रुपए पहले: 3.1 से 4.5- 15 रुपए अब: 3.1 से 4.5- 16 रुपए पहले: 4.5 से 7.5- 20 रुपए अब: 4.5 से 7.5- 21 रुपए पहले: 7.5 से 12- 25 रुपए अब: 7.5 से 12- 26 रुपए पहले: 12.1 से 18- 30 रुपए अब: 12.1 से 18- 32 रुपए पहले: 28.1 से अधिक- 42 रुपए अब: 18.1 से 28 – 37 रुपए

प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन

प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कचरे के सभी भागों का पूर्ण प्रसंस्करण सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य भोपाल मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी) के अंतर्गत नगरों में गतिविधियां निरंतर जारी हैं। मिशन के तहत सभी गतिविधियां एक अक्टूबर 2026 तक संचालित होंगी। इसके लिये लक्ष्य भी तय कर लिये गये हैं। इन गतिविधियों में प्रमुख रूप से उपयोगी जल के प्रबंधन के साथ स्वच्छता व्यवहारों को संस्थागत स्वरूप प्रदान करते हुए उन्हें व्यवहारिक बनाना है। आगामी वर्षों में प्रदेश के शहरों को कचरा मुक्त बनाना, खुले में शौच से मुक्ति, मानदंडों ओडीएफ+, ओडीएफ++, वॉटर+ को स्थायी बनाये रखना, इसी के साथ स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिये नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी कार्यवाही नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत सुनिश्चित की जा रही हैं। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के लक्ष्य स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में स्त्रोत पृथक्कीकरण, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट सहित कचरे के सभी भागों का पूर्ण प्रसंस्करण, प्लास्टिक अपशिष्‍ट और सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध रूप से कम करना और संपूर्ण लीगेसी वेस्ट को उपचारित करते हुए सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि सीवर्स, सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव श्रम को सीधे रूप से रोका जाये और मशीनों के माध्यम से सफाई की व्यवस्था की जाये। शहरी क्षेत्रों में उपयोगी जल को जल संरचनाओं में जाने से पूर्व उपचार और पुर्न-उपयोग के लिये सीवेज ट्रीटमेंट इकाई, नालों में इंटरसेप्शन व डायवर्जन आदि सुविधाओं का विकास करना प्रमुख है। वित्तीय प्रावधान स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी) में मध्यप्रदेश में संचालित योजनाओं के लिये करीब 4 हजार 914 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें करीब 2200 करोड़ रूपये की राशि केन्द्र सरकार की ओर से और 1800 करोड़ रूपये राशि राज्य सरकार के अंशदान के रूप में होगी। धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पर सुलभ कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उन स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन स्थानों पर आवाजाही ज्यादा होती है। इनमें धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल के आस-पास सुलभ काम्प्लेक्स की सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिये नगरीय निकायों को कहा गया है।  

आम के पेड़ जिनकी सुरक्षा 3 गार्ड और 9 कुत्ते करते हैं? विश्व के सबसे महंगे जापानी आम

जबलपुर संस्कारधानी जबलपुर में विदेशी आम के बागान एक बार फिर लद गए हैं। इनमें शामिल दुनिया के सबसे महंगे जापानी किस्म के आम मियाजाकी तइयो नो तमांगो(Miyazaki Mango) सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र है। जिसकी सुरक्षा भी खास है। सीसीटीवी के साथ ही एक दर्जन जर्मन शेफर्ड(German Shepherd) डॉग बाग की सुरक्षा में लगे हुए हैं। सशस्त्र गार्ड भी पहरा देते हैं। दरअसल, जबलपुर के एक युवक ने मियाजाकी तइयो नो तमांगो की किस्म को नर्मदा के तट से लगे चरगवां रोड पर स्थित बागान में तैयार कर सभी को हैरान कर दिया था। अब यह आम एक बार फिर पकने की प्रक्रिया में है। कई तरह की खासियत वाले इस आम की अंतरराष्ट्रीय बाजा में कीमत दो से ढाई लाख रुपए प्रति किलोग्राम है। बाग मालिक संकल्प सिंह परिहार ने बताया कि इस किस्म के आम की विदेश में अच्छी मांग है। जिसे पकने के बाद भेजा जाएगा। आस्ट्रेलिया व यूएसए की भी प्रजाति बगिया में आस्ट्रेलिया का आर2 ओ 2, यूएसए का सेंसेशन, जापानी जम्बोग्रीन, 2 किलोग्राम जापानी आम, जापानी हापुस व ऑल टाइम मैंगो तैयार हो रहे हैं। इसके साथ ही देसी किस्म के आम की भी बगिया में बहार आ गई है, इनमें मल्लिका, आम्रपाली, आरका अनमोल, आरका पुनीत, हापुस, केशर, चौंसा, लंगड़ा आम शामिल हैं। पेड़ के पके आम के लिए लोग एडवांस में बुकिंग करा रहे हैं। बागवान संकल्प के अनुसार इस बार 30 मई के बाद आम पकने की संभावना है। उद्यानिकी विशेषज्ञों के अनुसार आंधी-तूफान ने आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है पर उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है। अचार वाले आम का सबसे ज्यादा उत्पादन यहां देसी आम का उत्पादन सबसे ज्यादा है। अन्य सभी किस्मों के आम के उत्पादन के मुकाबले देसी आम का उत्पादन यहां चार गुना ज्यादा होता है। ये आम ज्यादाकर अचार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। अनुकूल जलवायु के कारण यहां अच्छी गुणवत्ता के आम का उत्पादन हो रहा है। जिनकी दूसरे राज्यों में भी मांग रहती है। सबसे ज्यादा मांग पेड के पके आम की रहती है जो जून के महीने से मिल पाते हैं। मगरमुहां, बिजना के आम उत्पादक किसानों के अनुसार यहां उत्पादित आम स्वाद और गुणवत्ता में अच्छे होते हैं। नर्मदा के कछार के आम में खास मिठास नर्मदा के कछार की वजह से जबलपुर व महाकोशल के अन्य जिलों में होने वाले आम में खास मिठास पाई जाती है। यहां अलग-अलग किस्म के आम का वृहद स्तर पर उत्पादन होता है। हापुस, राजापुरी, अमृतांग, अलफेंजो, नीलेश्वरी, सोनपरी, बॉम्बे ग्रीन, नीलम, आम्रपाली, मल्लिका, लंगड़ा, चोंसा, दशहरी, फजली, सुंदरजा, तोतापरी कई और किस्म के आम की बहार आ गई है। आंधी-तूफान से आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है, पर बगीचों में जो आम बचे हैं उनकी गुणवत्ता अच्छी है। संभवत: 30 मई तक पेड़ों के पके स्थानीय आम बाजार में आने लगेंगे। -एसके मिश्रा, उद्यानिकी विशेषज्ञ

पार्वती नर्मदा लिक योजना से इच्छावर के 11 ग्रामों का हुआ पत्ता साफ ग्रामीण किसान हुए आक्रोशीत, निकाली पैदल रैली

इछावर सीहोर जिले के इछावर में नर्मदा लिंक परियोजना में 11 छूटे हुए गांवों को शामिल करने की मांग को लेकर सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आए. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह क्षेत्र इछावर में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचे, जिनकी लंबी कतारें दूर-दूर तक दिखाई दीं. इछावर में 11 गांवों के किसानों ने नर्मदा लिंक परियोजना में अपने गांवों को शामिल करने की मांग को लेकर पैदल रैली निकाली. किसान बड़ी संख्या में एकत्र हुए और रैली के रूप में तहसील कार्यालय तक पहुंचे. उन्होंने नारेबाजी करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा. किसानों का कहना है कि उनके 11 गांवों को नर्मदा लिंक परियोजना में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण वे इस महत्वपूर्ण परियोजना के लाभ से वंचित हैं. उन्होंने सभी छूटे हुए गांवों को परियोजना से जोड़ने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मौजूदगी ने किसानों के आंदोलन की ताकत को दर्शाया. किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी नहीं होने तक वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे.  

जबलपुर के एक निजी रेस कोर्स में हैदराबाद से आए 57 घोड़ों में से 8 घोड़ों की मौत

जबलपुर  एक निजी रेस कोर्स में हैदराबाद से आए 57 घोड़ों में से 8 घोड़ों की मौत हो गई है. इन घोड़ों की मौत के बाद एक अनजान बीमारी का डर फैल गया है. घोड़े को ग्लैंडर्स (एक संक्रामक रोग है जो बर्कहोल्डरिया मैलेई नामक बैक्टीरिया के कारण होता है) नाम की एक बीमारी होती है. दुनिया में कई जगह घोड़े से यह बीमारी आदमियों तक भी पहुंचती है. इस बीमारी में बैक्टीरिया घोड़े के शरीर में जन्म लेता है उसके शरीर में गांठे बनती हैं और इन्हीं की वजह से उसकी मौत हो जाती है. हैदराबाद से आए थे 57 घोड़े यह मामला पनागर के पास रैपुरा गांव है. यहीं के निवासी सचिन तिवारी जबलपुर में एक रेस कोर्स खोलने की तैयारी कर रहे थे. इसके लिए इन्होंने हैदराबाद से 57 घोड़े बुलवाए थे. सचिन की तैयारी थी कि कुछ ही दिनों में रेस कोर्स शुरू हो जाएगा. यह प्रदेश का पहला रेस कोर्स बनने वाला था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और अचानक तबीयत बिगड़ने से 8 घोड़ों की मौत हो गई. अनजान बीमारी से हुई 8 की मौत शुरुआत में सचिन तिवारी को लगा कि हैदराबाद से जबलपुर आने की वजह से घोड़ों को यहां का मौसम अभी सूट नहीं हो रहा है. जिसकी वजह से उनकी थोड़ी बहुत तबीयत खराब हो रही हो. जब तक घोड़े सिर्फ बीमार थे तब तक सचिन तिवारी चिंता में नहीं थे, लेकिन जैसे ही घोड़ों की मौत शुरू हुई उनकी चिंता बढ़ने लगी. धीरे-धीरे करके 8 घोड़ों की मौत हो गई और अभी भी कई घोड़े बीमार हैं. सचिन तिवारी ने तुरंत इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी. रेस कोर्स में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम कलेक्टर जबलपुर दीपक सक्सेना ने इस मामले में तुरंत 4 रैपिड एक्शन टीम बनाई. क्योंकि घोड़ों की मौत की एक बड़ी वजह ग्लैंडर्स नाम की बीमारी होती है. वेटरनरी डॉक्टर की टीम तुरंत रेस कोर्स में पहुंची और बीमारी की जांच शुरू की. वेटरनरी डॉक्टर देवेंद्र गुप्ता ने बताया, “घोड़ों को जो बीमारी हुई है उसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्लैंडर्स होने की आशंका है. इसलिए घोड़ों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं, यदि उन्हें ग्लैंडर्स बीमारी होती है तो घोड़ो को क्वॉरेंटाइन किया जाएगा. ताकि यह बैक्टीरिया एक जानवर से दूसरे जानवर में न फैल सके.” ग्लैंडर बीमारी होने की जताई जा रही आशंका जबलपुर के वेटरनरी कॉलेज के डॉक्टर आदित्य मिश्रा ने बताया, “ग्लैंडर्स के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह बैक्टीरिया घोड़े से आदमियों तक फैल सकता है, हालांकि, ऐसे कम ही मामले सामने आए हैं.” ग्लैंडर्स बीमारी में जब बैक्टीरिया घोड़े में बनते हैं तो उसके शरीर में गांठे बन जाती हैं और यह गांठें इतनी खतरनाक होती हैं कि इससे घोड़े की मौत हो जाती है. यह बैक्टीरिया हवा में फैल सकते हैं. इनके संपर्क में आने से घोड़े और आदमी बीमार पड़ जाते हैं. इसलिए देश भर में जब भी ऐसी कोई संभावना नजर आती है, तो तुरंत प्रशासन सतर्क होकर उसे रोकने की कार्रवाई शुरू कर देता है.” जानलेवा है ग्लैंडर्स बैक्टीरिया संक्रमण हालांकि, वेटरनरी डॉक्टर ने जो सैंपल भेजे थे उनमें अभी तक ग्लैंडर्स की पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि चिंता की बात नहीं है. लेकिन एक सवाल है कि आखिर एक साथ इतने सारे घोड़े कैसे मर गए. वेटरिनरी विभाग इसकी जांच कर रहा है कि आखिर इन घोड़ों को हुआ क्या है?. फिलहाल, जबलपुर वेटरनरी डिपार्टमेंट की टीम इसकी जांच में लगी हुई है. साथ ही बीमार घोड़ों के संपर्क में आने वालों को चिन्हित किया जा रहा है, जिससे की उन्हें दूसरे लोगों से मिलने से रोका जा सके. यदि कोई अनजान बैक्टीरिया या वायरस घोड़े की वजह से किसी तक पहुंचा हो तो वह आगे ना बढ़ सके.

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