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मंत्री परमार ने कहा महाविद्यालय का अभिनव प्रयास, भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करेगा

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय में “विवाह एवं परिवार परामर्श केन्द्र” की स्थापना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। परमार ने कहा कि महाविद्यालय का यह अभिनव प्रयास, भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करेगा और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का आदर्श केंद्र बनेगा। मंत्री परमार ने कहा कि परिवार, राष्ट्र की प्रथम इकाई है, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र का मौलिक सृजन होता है। राष्ट्र के सांस्कृतिक सृजन में, पारिवारिक मूल्यों एवं मौलिक संस्कारों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। विवाह संस्कार, सनातन के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। विवाह संस्कार के पालन एवं कुटुम्ब में सौहार्दपूर्ण समन्वय, वर्तमान परिदृश्य की आवश्यकता भी है। मंत्री परमार ने कहा कि यह केंद्र, पारिवारिक मूल्यों के सांस्कृतिक संवर्धन एवं संरक्षण में अपनी महती उपयोगिता सिद्ध करेगा। भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय में, सोमवार को जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष डॉ. भारती कुंभारे सातनकर एवं प्राचार्य डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव ने “विवाह एवं परिवार परामर्श केन्द्र” का शुभांरभ किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्राएं उपस्थित थीं। प्रकोष्ठ के माध्यम से अनुभवी मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों एवं मध्यस्थता करने वाले व्यवसायिक परामर्शदाताओं की परामर्श एवं काउन्सलिंग छात्राओं को उपलब्ध करायी जाएगी। प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. आलोक कुमार निगम एवं सह संयोजक डॉ. संजना शर्मा हैं। “विवाह एवं परिवार” के संदर्भ में छात्राओं के मध्य परामर्श सुविधा उपलब्ध कराने के लिए, केन्द्र की स्थापना करने वाला यह महाविद्यालय, प्रदेश का प्रथम शासकीय महाविद्यालय है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान परिदृश्य में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण विवाह एवं परिवार संस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जहाँ एक ओर नारी सशक्तिकरण की ओर बढ़ रही है, वहीं उसे पारिवारिक समायोजन में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में विवाह और परिवार जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और ये बिखरती जा रही है। विवाह और परिवार जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं के विषय में महाविद्यालय की छात्राओं में जागरूकता लाने एवं नकारात्मक विचारों को हटाने के उद्देश्य से महाविद्यालय के समाजशास्त्र, समाजकार्य विभाग तथा मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में “विवाह एवं परिवार परामर्श केन्द्र” की स्थापना का अभिनव प्रयास किया गया है। परिवार में सौहार्द्रता वृद्धि और मूल्यों के संवर्धन के उद्देश्य से, छात्राओं को बौद्धिक एवं मानसिक रूप से प्रबल करना इस प्रकल्प का ध्येय है। पारिवारिक सम्बन्धों को मजबूत करना, विवाह संबंधों को सुधारना, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विकास, सामाजिक एवं भावनात्मक समर्थन जैसे विविध मूल्य आधारित लक्ष्यों के साथ; यह केंद्र छात्राओं को जीवन में आने वाली चुनौतियों से सामना करने में सक्षम बनाने में सहयोगी बनेगा।  

AIआधारित रियल-टाइम वन अलर्ट प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला राज्य मध्यप्रदेश बन गया

मध्यप्रदेश पहला राज्य जहाँ रियल-टाइम फॉरेस्ट अलर्ट सिस्टम लागू वन मण्डलाधिकारी गुना द्वारा तैयार किया गया एआई आधारित सिस्टम, रियल-टाइम फॉरेस्ट अलर्ट सिस्टम लागू AIआधारित रियल-टाइम वन अलर्ट प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला राज्य मध्यप्रदेश बन गया  गुना एआई आधारित रियल-टाइम वन अलर्ट प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला राज्य मध्यप्रदेश बन गया है। प्रदेश में सक्रिय वन प्रबंधन की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह प्रणाली उपग्रह चित्रों, मोबाइल फीडबैक और मशीन लर्निंग की मदद से कार्य करती है, जो भूमि अतिक्रमण, भूमि उपयोग परिवर्तन और वन ह्रास का पता लगाकर वन विभाग को समय पर कार्रवाई के लिये सक्षम बनाती है। इस नवाचार की परिकल्पना वन मण्डलाधिकारी गुना अक्षय राठौर द्वारा की गयी और इसे मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक आईटी बी.एस. अणिगेरी के नेतृत्व और संस्थागत समर्थन से क्रियान्वित किया गया। गूगल अर्थ इंजन पर आधारित यह प्रणाली बहु-कालिक उपग्रह आंकड़ों का विश्लेषण करती है और कस्टम एआई मॉडल की मदद से भूमि उपयोग परिवर्तन की पहचान करती है। हर संभावित बदलाव को मोबाइल ऐप के माध्यम से फील्ड स्टॉफ को भेजा जाता है, जिससे वे स्थल पर जाकर पुष्टि कर सके। गुना डीएफओ ने बताया कि यह पहली बार है जब हमने सेटेलाइट, एआई और फील्ड फीडबैक को एक निरंतर चक्र में जोड़ा है, जो खुद को समय के साथ सुधारता है। यह प्रणाली फॉरेस्ट स्टॉफ को केवल निगरानी नहीं, बल्कि तत्काल कार्यवाही के लिये सशक्त बनाती है। अलर्ट जनरेशन और फीडबैक प्रक्रिया में प्रारंभिक अलर्ट जनरेशन में गूगल अर्थ इंजन द्वारा 3 तारीखों के उपग्रह चित्रों की तुलना, फसल, बंजर भूमि, निर्माण इत्यादि में बदलाव की पहचान करता है। साथ ही महत्वपूर्ण पिक्सल परिवर्तन के आधार पर पॉलीगन अलर्ट, फील्ड सत्यापन के अंतर्गत मोबाइल ऐप पर अलर्ट भेजना, फील्ड स्टॉफ जीपीएस टैग की गई फोटो, वाइस नोट और टिप्पणियाँ अपलोड करना एवं डेटा समृद्धि में एनडीवीआई, एसएवीआई, ईवीआई जैसे इंडेक्स और एसएआर विशेषताओं को जोड़ने से एक अलर्ट में लगभग 20+ इंडिपेंडेंट फीचर्स तैयार होते हैं। मशीन लर्निंग मॉडल सुधार के अंतर्गत फील्ड से मिले फील्ड बैक के आधार पर एआई मॉडल का पुन: प्रशिक्षण और गलत अलर्ट की संख्या में कमी के साथ सटीकता में वृद्धि होगी। वन मण्डलाधिकारी के डैशबोर्ड के लिये लाइव निगरानी के अंतर्गत नई प्रक्रिया में और पूर्ण अलर्ट की लाइव स्थिति, बीट और फील्ड पोस्ट अनुसार विभाजन और डेट, डेंसिटी, एरिया आदि के आधार पर फिल्टर एवं फील्ड स्टॉफ की ऑन-साइट कार्रवाई के लिये मोबाइल ऐप पर अलर्ट प्राप्त होगा, छवि, जीपीएस, वॉइस सहित सर्वे डाटा सबमिट और जियो फेंसिंग और दूरी मापन के फीचर अंतर्निहित होंगे। वन विभाग द्वारा पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में इस प्रणाली को 5 संवेदनशील वन मण्डलों में लागू किया गया है, जिनमें शिवपुरी, गुना, विदिशा, बुरहानपुर और खण्डवा शामिल हैं। इन वन मण्डलों में अतिक्रमण और वृक्ष कटाई की घटनाएँ अधिक होती हैं। इस प्रणाली को राज्य स्तर पर भी लागू किया जायेगा।  

स्वास्थ्य संघ के पदाधिकारियों ने हड़ताल की समाप्ति के संबंध में उप मुख्यमंत्री को पत्र भी सौंपा

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के साथ हुई चर्चा के बाद उप मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त कर दी गयी है। स्वास्थ्य संघ के पदाधिकारियों ने हड़ताल की समाप्ति के संबंध में उप मुख्यमंत्री को पत्र भी सौंपा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 22 अप्रैल 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अप्रेजल, स्वास्थ्य बीमा, ईपीएफ, समकक्षता निर्धारण, ग्रेज्युटी, अर्जित एवं मेडिकल अवकाश तथा अन्य मांगों पर यथोचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश द्वारा उप मुख्यमंत्री शुक्ल के आश्वासन पर सहर्ष हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना, प्रदेश महामंत्री भारतीय मजदूर संघ कुलदीप सिंह गुर्जर सहित संघ के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में सुगम यातायात व्यवस्था के लिये विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होगी

भोपाल, इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया से जुड़ी सभी आवश्यक कार्यवाही समय-सीमा में हो पूरी: मुख्यमंत्री डॉ.यादव  सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के लिए प्रस्तावित भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के विकास से संबंधित प्रक्रिया को पूर्ण किया जाए: मुख्यमंत्री डॉ.यादव मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में सुगम यातायात व्यवस्था के लिये विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होगी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के लिए प्रस्तावित भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के विकास से संबंधित प्रक्रिया को पूर्ण किया जाए औैर इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास की संभावनाओं के मद्देनजर कार्य योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि दोनों मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में सुगम यातायात व्यवस्था के लिये विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होगी। इसके लिए योजना से जुड़ी समस्त एजेंसियां समन्वित रूप से कार्य योजना तैयार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में प्रदेश में प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन एरिया गठन के संबंध में बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में राजस्व मंत्री करणसिंह वर्मा, राज्य मंत्री नगरीय विकास श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में भूमि का नियोजित रूप से विकास सुनिश्चित किया जाए। क्षेत्र में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए निवेशकों को अभी से प्रोत्साहित करें। इन क्षेत्रों में भविष्य को देखते हुए इकॉनामिक कॉरिडोर, सड़क परिवहन के साथ रेल परिवहन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इससे जुड़ी सभी कार्यवाही निश्चित समय- सीमा में पूरी की जाएं। दो मेट्रोपॉलिटन एरिया देवास-सीहोर जिलों में परस्पर भी जुड़ेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में एक साथ दो महानगरीय क्षेत्रों के गठन की पहल से इन्दौर और भोपाल के मध्य स्थित इलाकों के समग्र विकास में सहयोग मिलेगा। दोनों मेट्रोपॉलिटन एरिया परस्पर जुड़ने से प्रदेश का एक विशाल क्षेत्र समन्वित और एकीकृत विकास का उदाहरण बनेगा। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों को भी क्रियान्वयन में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी दोनों महानगरीय क्षेत्रों के लिए जनप्रतिनिधियों से चर्चा के सत्र सम्पन्न हुए हैं। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इन क्षेत्रों के विकास में अपनी विरासत को संरक्षित रखने और पर्यावरण की दृष्टि से ग्रीन बेल्ट पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इंदौर -भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनने से इकॉनामिक कारिडोर के विजन को पूरा किया जा सकेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में हमें सेमी-अर्बन क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं पर प्रारंभिक रूप से प्लानिंग करनी होगी। अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ल ने प्रजेंटेशन द्वारा बताया कि पहला मेट्रोपॉलिटन एरिया इंदौर, उज्जैन, देवास, धार को मिलाकर बनाया जा रहा है। दूसरा मेट्रोपॉलिटन एरिया भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इससे संबंधित आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए आगामी विधान सभा सत्र से पूर्व तैयारी पूरी की जाएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कल करेंगे श्रमिक परिवारों को राशि वितरित

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 अप्रैल को धार जिले के उमरबन में संबल योजना में अनुग्रह सहायता के 27 हजार 523 प्रकरणों में राशि रूपये 600 करोड़ सिंगल क्लिक से वितरित करेंगे। कार्यक्रम में श्रम व पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि, हितग्राही उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना, प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें अनुग्रह सहायता योजना के अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। इसी प्रकार स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 01 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा में शिक्षा हेतु सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबंल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है एवं इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती हैं। इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, अब वे भी 5 लाख रूपये वार्षिक निः शुल्क चिकित्सा प्राप्त कर रहे है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना प्रारंभ से अब तक 01 करोड 75 लाख श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया गया है, पंजीयन प्रक्रिया जारी है। संबल योजना के अंतर्गत वर्ष 2018 से वर्तमान तक कुल 6 लाख 81 हजार से अधिक प्रकरणों में राशि रूपये 6 हजार 432 करोड से अधिक के हितलाभ का वितरण किया जा चुका है।

सरकारी जॉब के नियम होंगे चेंज, पीएससी की तर्ज पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल परीक्षा लेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में नौकरियों के लिए भर्ती का पैटर्न बदलेगा। पीएससी की तर्ज पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल परीक्षा लेंगे। श्रेणी के हिसाब से समूह बनाए जाएंगे। एक प्रतीक्षा सूची भी बनाई जाएगी। सितंबर में परीक्षा का कैलेंडर तय होगा। यह व्यवस्था नई साल यानी जनवरी 2026 से लागू होगी। मध्य प्रदेश सरकार भर्ती नियमों में बदलाव करने जा रही है। एमपी में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली भर्ती परीक्षाएं अब बार-बार नहीं होंगी। संघ लोक सेवा आयोग की तरह अब मध्य प्रदेश में भी वर्ष में एक ही परीक्षा होगी। प्रदेश सरकार जनवरी 2026 से भर्ती-चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी में है। सभी श्रेणी के पदों के लिए प्रावीण्य सूची बनाई जाएगी और प्रतीक्षा सूची भी एक ही रहेगी। एक ही मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सभी श्रेणियों के परीक्षार्थी शामिल होंगे। चयन लिस्ट के साथ प्रतीक्षा सूची भी एक बार बनेगी, जिससे खाली पदों पर तेजी से नियुक्ति संभव हो पाएगी।   CM डॉ मोहन बोले- साल में एक बार होंगे एग्जाम सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि एक और निर्णय हम कर रहे हैं। सभी प्रकार की परीक्षाएं समय पर भर्ती हो जाए, सभी पदों के लिए कहीं कोई स्थान खाली न रहे। इस तरह से हम अपनी एमपीपीएससी परीक्षा कराने की दिशा में काफी अच्छे से आगे बढ़े हैं। बहुत जल्द ही इसके रिजल्ट आएंगे, ताकि साल में एक बार परीक्षा होगी, जैसे यूपीएससी की होती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की “पद्मसम्मान” से सम्मानित विभूतियों को दीं बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में हुए गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर कमलों से मध्यप्रदेश की दो विभूतियों को पद्मसम्मान से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी है। मध्यप्रदेश के लोक गायक भेरूसिंह चौहान को कला क्षेत्र और श्रीमती शालिनी देवी होलकर को व्यापार एवं उद्योग क्षेत्र में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने और कारीगरों के सशक्तिकरण के लिए किए गए उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मसे सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश की इन दोनों विभूतियां की उपलब्धि से संपूर्ण मध्यप्रदेश गौरवान्वित है। आप दोनों ने सतत परिश्रम, त्याग और साधना से ऐसे प्रतिमान स्थापित किए , जो अन्य सभी को रचनात्मकता, राष्ट्र भक्ति और जनसेवा की प्रेरणा देंगे।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग का विकसित भारत @ 2047 तक इसे 16 गुना किए जाने का लक्ष्य: राज्यमंत्री जायसवाल

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि विभाग का प्रत्येक 5 वर्ष में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही विकसित भारत @ 2047 तक इसे 16 गुना किए जाने का लक्ष्य है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लोगों को प्रशिक्षण, नवीन उपकरणों का प्रदाय, नवीन इकाइयों एवं स्टार्ट-अप्स का संरक्षण एवं साधन उपलब्ध कराने का कार्य कर रहा है। राज्य के सकल घरेलू उत्पादन में विभाग का 135.37 करोड़ रुपए का योगदान है, जिसे वर्ष-2047 तक 2165.92 करोड़ किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि वर्ष 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्पादन में वृद्धि के लिए नवीन इकाइयों का पंजीयन, नवीन विधाओं में प्रशिक्षण, निर्यात, नवीन डिजाइनों एवं रंगों का समावेश, उन्नत उपकरणों का प्रदाय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विक्रय प्रदर्शनियों का आयोजन एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नवीन विक्रय केंदो की स्थापना का सुझाव रखा गया है। विभाग प्रदेश के सेमी अर्बन एवं ग्रामीण क्षेत्र के आधिकाधिक युवाओं की नवीन इकाइयों का पंजीयन, नवीन स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन, हाथकरघा एवं औद्योगिक क्षेत्र की विभिन्न विधाओं में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण, सम्मानजनक रोजगार के लिए मूलभूत आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध करा रहा है।  

CM बोले ‘हमें सम्मेलन में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले,क्रियान्वयन से 75,000 नौकरियां पैदा होंगी

इंदौर  मध्य प्रदेश सरकार को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे राज्य में 75,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है. मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव  इंदौर में “मध्य प्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025” में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि ”हमें इस सम्मेलन में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से लगभग 75,000 नौकरियां पैदा होंगी.” 500 से अधिक कंपनियों ने लिया कार्यक्रम में भाग मोह यादव ने कहा कि, ”प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में 500 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया. इस सम्मेलन के दौरान निवेशकों को एकीकृत सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक प्रोत्साहन पोर्टल पेश किया गया. इसके अलावा, राज्य की वैश्विक क्षमता केंद्र नीति, सेमीकंडक्टर नीति, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स, विस्तारित वास्तविकता नीति और ड्रोन नीति के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए.” 6 शहरों में बन रहा आईटी पार्क मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने घोषणा की कि, ”राज्य सरकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उपक्रमों को बढ़ावा देने के लिए अपनी स्वयं की अंतरिक्ष-तकनीक नीति तैयार करेगी. विभिन्न कंपनियों से राज्य को मिले निवेश प्रस्तावों के आधार पर 6 प्रमुख शहरों में आईटी पार्क विकसित करने का काम शुरू हो चुका है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि, ”आईटी पार्क इंदौर के परदेशीपुरा क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर लगभग 250 करोड़ रुपये के निवेश से 3 एकड़ के भूखंड पर विकसित किया जाएगा.” Tech एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के नये केंद्र खुलेंगे CM ने कहा, ”लोकमाता देवी अहिल्या बाई की पावन नगरी में आयोजित IT सेक्टर का यह महाकुम्भ रोजगार के नये अवसरों के सृजन का माध्यम बनेगा. साथ ही स्टार्टअप एवं नवाचारों को प्रोत्साहन देगा. डिजिटल इंफास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाएगा, ग्लोबल इंवेस्टमेंट को आकर्षित करेगा और मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश के गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करेगा.” सीएम ने कहा, ”IT सेक्टर की ग्रोथ से प्रदेश में Tech एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के नये केंद्र खुलेंगे. हम प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय आईटी एजुकेशन एवं डिजिटल स्किल देकर उन्हें रोजगारोन्मुखी बनाने हेतु संकल्पित हैं.” इससे पहले, सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं, जिससे देश आगे बढ़ रहा है. अब भारत के पारंपरिक दुश्मन पाकिस्तान के लोग भी कह रहे हैं कि अगर मोदी उनके पीएम होते, तो वे इतनी मुश्किलों में नहीं पड़ते.” पिछली कांग्रेस सरकारों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “1947 में भारत की आजादी के बाद, प्रशासन चलाने के लिए जिम्मेदार लोगों ने देश की क्षमता, योग्यता और उद्यमशीलता का सही इस्तेमाल नहीं किया. इससे देश को नुकसान हुआ है.” उद्योगों की स्थापना मंदिर निर्माण के समान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, ”उद्योगों की स्थापना मंदिर निर्माण के समान है. उद्योग ऐसे मंदिर हैं जो ईश्वरीय आशीर्वाद की तरह श्रम की शक्ति से लाखों लोगों को आजीविका और समृद्धि प्रदान करते हैं. आज के तकनीकी युग में छोटे-छोटे देश भी उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं और युद्धों के कारण पीछे छूट गए देश उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं.” डॉ. यादव ने कहा कि, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम एक बदलते भारत को देख रहे हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से विकास कर रहा है. इंदौर ने औद्योगिक विकास में एक मील का पत्थर स्थापित किया है और आईटी क्षेत्र की राजधानी बन गया है. अतुल पंचशील जैसे उद्यमी इंदौर में असाधारण कार्य कर रहे हैं.” मुख्यमंत्री ने बताया कि, ”मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं. कोरिया जैसे देश, जिनके साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं, भी राज्य में निवेश करने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं.” आज के सम्मेलन में कोरिया और जापान के प्रतिनिधि मौजूद थे. डॉ. यादव ने घोषणा की कि इस सम्मेलन के माध्यम से लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 75,000 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने रक्षा मंत्री को सलाह दी कि हम तो रक्षा मंत्री से भी कहेंगे कि हमारी शक्ति का सदुपयोग करें

छतरपुर  जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों को मार दिया गया. जबकि कई टूरिस्ट घायल हुए थे. इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश है. आम जनता से लेकर तमाम पॉलिटिकल पार्टी, सेलिब्रिटी आतंकी घटना का विरोध जता रहे हैं और मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं. वहीं इस घटना पर छतरपुर के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री भी अपनी प्रतिक्रिया पहले दे चुके हैं. अब उन्होंने देश के रक्षा मंत्री को अपनी शक्तियों की मदद लेने की बात कही है. देश के हित में अपनी शक्तियां लगाएंगे धीरेंद्र शास्त्री नरसिंहपुर जिले में भक्तों को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बयान दिया. जहां उन्होंने कहा कि “हम तो देश के रक्षा मंत्री को भी कहेंगे, आप हमारी शक्ति की मदद ले सकते हैं. इस बीच उन्होंने कहा देखो मैं ऑफिशियल अफसर तो नहीं बन सकते, क्योंकि पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन हमारे पास जो चेतना है और हनुमानजी की कृपा है, आप उसका सदुपयोग करिए. आने वाले समय में कहां कौन सी संभावित घटना हो सकती है, उस पर आप हमारी शक्ति का सदुपयोग करिए. इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा लेकिन मैं अपनी शक्तियों को गोपनीय तरीकों से बताऊंगा, क्योंकि खुलकर बताएंगे, तो कई मुझे ही उड़ा देगा. उन्होंने कहा कि गोपनीय तरीके से वह राष्ट्रहित में काम शुरू कर रहे हैं, जिससे देश का भला हो. उन्होंने कहा कि सिर्फ मन की बता बता देने भर से राष्ट्र का भला होने वाला नहीं है. पहलगाम आतंकी हमले पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान बता दें पहलगाम आतंकी घटना पर धीरेंद्र शास्त्री पहले भी विरोध जता चुके हैं. उन्होंने कहा था कि ” पहलगाम में जो घटना घटी, वो इस सदी की सबसे निंदनीय घटना है. आंतकियों ने ये नहीं पूछा कि तुम ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या सेवक हो. उन्होंने ये नहीं पूछा कि तुम एससी, एसटी, ओबीसी या सवर्ण हो, बल्कि उन्होंने पूछा कि तुम हिंदू हो और गोली मार दी. उन्होंने कहा इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा. हिंदूओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये हो गई है कि हिंदुस्तान में हिंदू होना खतरा है. प्रदीप बोले-शस्त्र जरूरी धीरेंद्र शास्त्री के अलावा पंडित प्रदीप मिश्रा ने भी “हिंदुओं की सजग रहने रहने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि हिंदुओं के घर में शास्त्र न हो, लेकिन शस्त्र जरूर होना चाहिए. हमारे सनातन धर्म के किसी भी देवता के हाथ खाली नहीं होते, फिर हमारा घर क्यों खाली हो?”

rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता

कक्षा 5 और 8 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना के संबंध में निर्देश प्रदेश में 5 और 8  परीक्षा सत्र 2024-25 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना प्रक्रिया के संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने दिशा-निर्देश जारी  rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता राज्य शिक्षा केन्द्र ने जारी किये निर्देश भोपाल प्रदेश में कक्षा 5 और 8 वार्षिक मुख्य परीक्षा सत्र 2024-25 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना प्रक्रिया के संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। निर्देशों में बताया गया है कि कक्षा 5 और 8 के परीक्षा परिणाम की घोषणा के 5 दिन बाद 3 अप्रैल 2025 से परीक्षा पोर्टल पर पुनर्गणना की सुविधा लाइव की जा चुकी है। पुनर्गणना के लिये विद्यालय के माध्यम से छात्रों के पुनर्गणना के आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत किये जा रहे हैं। विद्यालयों से कहा गया है कि rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता है। जिन छात्रों द्वारा विद्यालय के समक्ष उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना के लिये ऑफ लाइन आवेदन प्रस्तुत किये गये हैं, उनके संबंध में पोर्टल में पंजीकरण करते हुए पुनर्गणना के चयनित विषयों को सबमिट किया जाये। छात्रवार एक से अधिक विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना करायी जा सकती है। निर्धारित समयावधि के बाद किसी भी परिस्थिति में पुनर्गणना के लिये आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे। प्रक्रिया में 21 अप्रैल 2025 तक विद्यालय के माध्यम से छात्रों के पुनर्गणना के आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत किये जायेंगे। 21 अप्रैल 2025 रात्रि 12 बजे के बाद यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। मूल्यांकन केन्द्र अधिकारी पुनर्गणना के लिये समस्त आवेदनों की पुनर्गणना के बाद संशोधित प्राप्तांकों की एंट्री पोर्टल पर 28 अप्रैल तक करने के लिये कहा गया है। इस तिथि का पालन न करने पर मूल्यांकन अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी। उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना की प्रक्रिया में 21 अप्रैल तक आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत करने के लिये समस्त शालाओं को सूचित करने का उत्तरदायित्व डीपीसी, बीआरसीसी और जनशिक्षकों का संयुक्त रूप से निर्धारित किया गया है।  

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” 13 हजार 500 कृषकों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में 30 मार्च से प्रारंभ किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में उद्यानिकी विभाग द्वारा गाँव-गाँव में आयोजित की जा रही “पानी चौपाल” आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गई है। “पानी चौपाल” में मैदानी अमले द्वारा गाँव के किसानों को जल संरक्षण के साथ, कम पानी से होनी वाली फसलों, कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों को जोड़कर अधिक लाभ कमाने और नवीन उद्यानिकी तकनीकियों की समझाइश दी जा रही है। इसके साथ ही अभियान के दौरान ही फलोद्यान,‍ड्रिप लाइन, प्लास्टिक मलचिंग, सब्जी क्षेत्र, मसाला क्षेत्र, पुष्प क्षेत्र विस्तार योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये उद्यानिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से पंजीयन भी कराया जा रहा है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” अंतर्गत 13 हजार 500 कृषकों को 76.68 करोड़ रूपये की लागत स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 5 हजार हैक्टेयर में फलदार पौधों का रोपण, सभी विकासखंड में उपलब्ध जल से सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उचित प्रबंधन पर कार्यशालाओं का आयोजन करने तथा अभियान के लिये 25 लाख से अधिक फलदार पौधे उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिये “पानी चौपाल” में ही किसानों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की जा रही है। “पानी-चौपाल” गुना जिले के गुना विकासखंड ग्राम अकावदा में, विकासखंड चाचौड़ा की ग्राम पंचायत उकविदा, शिवपुर, टीकमगढ़ जिले के विकासखंड जतारा के नतोवली ग्राम पंचायत सेवार, रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड के ग्राम सलवानिया और ग्राम सोहौला, छतरपुर जिले के लवकुश नगर विकासखंड के ग्राम में, अशोक नगर जिले के विकासखंड मुगांवली की शासकीय संजय निकुंज गोपालिया में, नर्मदापुरम के विकासखंड माखननगर, मैहर जिले के विकासखंड मुख्यालय के ग्रामों में, सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम खैराजी सहित प्रदेश के सेकड़ों ग्रामों में पानी चौपालों का आयोजन लगातार जारी है। पानी चौपाल में किसानों के आये सुझाव और समास्याओं पर अमल व निराकरण एक साथ किया जाएगा।  

नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी

भोपाल नई शिक्षा नीति के तहत अब निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। आगामी 16 जून से नए शिक्षा सत्र में जिले के 226 स्कूलों में नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों को नर्सरी से शिक्षा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए तीन वर्ष की उम्र वाले विद्यार्थियों को संस्था में प्रवेश दिया जायेगा। यह सभी स्कूल सांदिपनी विद्यालय से अलग होंगे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में यह सभी व्यवस्था लागू होंगी। जिला परियोजना समन्वयक रमेश राम उईके ने बताया कि जिले के 226 सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र 16 जून से नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी। इन कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 अन्य कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 और केजी-2 के समकक्ष हैं। नर्सरी के विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए डाइट के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे कि शिक्षक विद्यार्थियों को शुरुआती दौर में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ज्ञान दे सकें। इसके अतिरिक्त शिक्षक बच्चों को नाच-गाकर भी पढ़ाएंगे, जिससे कि विद्यार्थियों को आसानी से अक्षर का ज्ञान हो सकेगा। नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित नई शिक्षा नीति के अनुसार पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 से साढ़े 7 वर्ष व नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित की गई हैं। निजी स्कूलों में पहले से ही नर्सरी की कक्षाएं संचालित हैं। इन स्कूलों को टक्कर देने के लिए ही सरकारी स्कूलों में यह पहल शुरु की जा रही है। 226 स्कूलों के बाद आगामी समय में जिले के अन्य सभी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा। डीपीसी के मुताबिक प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर अब शिक्षक नर्सरी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाएंगे। पिछले वर्ष के आगे की कक्षा में भेजे जाएंगे और अभिभावकों को शिक्षक घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेंगे। नए प्रयोग से मजबूत होगी बच्चों की नींव डीपीसी आरआर उइके के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग का यह तर्क है कि सरकारी स्कूलों से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ा जाए। यदि प्रारंभिक दौर में नर्सरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाएगा तो वह आगे की कक्षा में भी सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करेंगे। शिक्षक नाच-गाकर नर्सरी के बच्चों को अक्षर का ज्ञान सिखाएंगे ऐसे में विद्यार्थी कक्षा पहली तक आते-आते अक्षर व शब्द लिखना पूरी तरह सीख जाएंगेे। ऐसे में बच्चों की शिक्षा की राह आसान होगी ओर उनकी नींव भी पूरी तरह मजबूत होगी। विभाग ने इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं। शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश भी जारी किये गए हैं। बच्चों के लिए करें व्यवस्था राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला कलेक्टरों को जारी दिशा-निर्देश में कहा है कि प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल में टाट पट्टी, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए. जिस विद्यालय में प्रवेश दिया जाना है, वहां कम से कम दो कक्षाओं में प्रवेश पाने वाले बच्चों की कक्षा संचालन की सुविधा हो और बाहर खेलने के लिए मैदान पर्याप्त जगह वाला हो.  

MP में सरकारी नौकरी पर भर्ती के लिए परीक्षा का तरीका बदलेगा, पीएससी और चयन मंडल की परीक्षाएं अब एक बार, बढ़ेगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती और चयन परीक्षा में बड़ा परिवर्तन करने जा रही है। राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली भर्ती परीक्षाएं अब बार-बार नहीं होंगी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर वर्ष में केवल एक बार परीक्षा होगी और सभी श्रेणी के पदों के लिए प्रावीण्य सूची बना ली जाएगी। प्रतीक्षा सूची भी एक ही रहेगी। इसके लिए पदों की संख्या सभी विभागों से वर्ष में एक बार पूछ ली जाएगी और उसके आधार पर सितंबर में आगामी वर्ष के लिए कैलेंडर निर्धारित हो जाएगा। जनवरी, 2026 से भर्ती-चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी सामान्य प्रशासन विभाग कर रहा है। कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं होती है आयोजित प्रदेश में द्वितीय और कार्यपालिक तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती पीएससी के माध्यम से होती है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए कर्मचारी चयन मंडल परीक्षाएं कराता है। अभी जैसे-जैसे विभागों की ओर से पद उपलब्ध होते हैं, वैसे-वैसे दोनों एजेंसियां अपने कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं आयोजित करती हैं। बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है इसमें न केवल अधिक समय लगता है बल्कि अभ्यर्थियों को बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है। एजेंसियों को भी हर परीक्षा के लिए मानव संसाधन से लेकर अन्य व्यवस्थाएं करनी होती हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के साथ विभागीय भर्ती नियम सहित अन्य प्रक्रियाओं में परिवर्तन का खाका तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा ही तरह की परीक्षा से विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन किया जाएगा। एक बार बनाई जाएगी प्रतीक्षा सूची विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों से आवेदन के समय विकल्प मांगे जाते हैं। मेरिट के हिसाब से यदि उसका चयन दो पदों के लिए हो जाता है और ऐसे में वह जिस पद का चयन करता है तो दूसरा पद प्रतीक्षा सूची वाले को मिल जाएगा। प्रतीक्षा सूची एक बार बनाई जाएगी। पद उपलब्ध होते ही इस सूची के अभ्यर्थी को मौका मिलता रहेगा। दरअसल, अभ्यर्थी एक साथ कई परीक्षाएं देते हैं और अलग-अलग पद पर चयन होने पर वे किसी एक सेवा का चयन करते हैं। ऐसे में अन्य पद रिक्त रह जाते हैं। नियम से लेकर परीक्षा का ब्योरा रहेगा ऑनलाइन सूत्रों का कहना है कि पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा। अभी पीएससी के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई बातें सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं। परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है। पूरी प्रक्रिया रुक जाती है। आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई संदेह न रहे। एक जैसे होंगे विभागों के भर्ती नियम विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि एकरूपता रहे। इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे। साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे। दो-ढाई लाख पदों पर होंगी भर्तियां प्रदेश में आगामी दो-तीन साल में दो से ढाई लाख सरकारी पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसमें रिक्त पदों के साथ पदोन्नति होने पर खाली होने वाले पद भी शामिल हैं। ये सभी पद समयसीमा में भर जाएं, इसके लिए चयन प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किया जा रहा है। बार-बार नहीं देनी होगी परीक्षा     मुख्यमंत्री की मंशा है कि परीक्षाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। विवाद की स्थिति नहीं बननी चाहिए और अभ्यर्थी को बार-बार परीक्षा भी न देनी पड़े। इसके लिए नियमों में संशोधन करके पूरी व्यवस्था में ही परिवर्तन किया जा रहा है। प्रयास यह है कि सितंबर तक यह प्रक्रिया पूरी करके जनवरी, 2026 से लागू कर दिया जाए।- संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग  

9 किलोमीटर के वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के कारण फंसा 495 करोड़ का हाईवे प्रोजेक्ट! 8 महीने से अटका काम

 श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में बन रहे 155 किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग 52 (NH 52) में भले ही पहले दो भाग (पाली-गोरस और गोरस-श्यामपुर) काम चल रहा है, लेकिन तीसरे भाग श्यामपुर-सबलगढ़ का काम टेंडर होने के 8 महीने बाद भी अटका हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस भाग में 9 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का क्षेत्र आ रहा है, लिहाजा अभी काम की अनुमति नहीं मिली है। हालांकि एनएच के अफसर आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अभी एनओसी का इंतजार है।  यही वजह है कि पिछले दिनों श्योपुर आए प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला भी समीक्षा बैठक में वन विभाग के अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया गंभीरता से पूरी कराने के निर्देश दे गए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में नेशनल हाइवे के 155 किमी में पाली श्योपुर-गोरस के भाग में 60 फीसदी काम हो गया है, जबकि गोरस-श्यामपुर के भाग में प्रारंभिक काम शुरु हो गया है। बीच में नौ किमी का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर यूं तो श्यामपुर से सबलगढ़ तक फुल 55 किलोमीटर के हाइवे निर्माण होना है, लेकिन इसमें किलोमीटर का हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का आ रहा है। जिसमें श्योपुर कूनो नेशनल पार्क और राजस्थान के कैलादेवी अभयायरण्य के बीच का ये हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के रूप में संरक्षित है, यही वजह है कि हाइवे निर्माण के लिए एनओसी की जरुरत है। बताया गया है कि श्यामपुर-सबलगढ़ हाइवे में नए एलाइनमेंट के अनुसार वीरपुर कस्बे के बाहर से हाइवे निर्माण होगा। वहीं वीरपुर के आगे जाकर ब्रॉडगेज रेल लाइन के ऊपर से ओवरब्रिज भी बनाया जाएगा। 495 करोड़ में बनना है ये 55 किमी का मार्ग नेशनल हाइवे 552 (एक्सटेंशन) पाली-श्योपुर-गोरस-श्यामपुर-सबलगढ़ का 3 भाग में काम हो रहा है। इसी के तहत ये तीसरा भाग श्यामपुर से सबलगढ़ का है। 55 किलोमीटर के इस भाग के लिए गत वर्ष सितंबर माह में ही टेंडर हो चुके हैं, जिसमें इसके निर्माण की लागत 495 करोड़ रुपए है। लेकिन टेंडर होने के 8 महीने बाद भी काम शुरु होना तो दूर अभी तक संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ एग्रीमेंट भी नहीं हुआ है। यही वजह है कि फिलहाल सड़क निर्माण अधर में लटका है। इस मामले में एनएच-पीडब्ल्यूडी श्योपुर के सब इंजीनियर विजय अवस्थी ने बताया कि ‘एनएच के तहत श्यामपुर-सबलगढ़ के निर्माण के लिए टेंडर तो पिछले साल हो गए थे, लेकिन इसके बीच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का हिस्सा आ रहा है, जिसकी एनओसी के लिए हमने आवेदन किया हुआ है। एनओसी मिलते ही इसका काम शुरू हो जाएगा।’

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