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एमपी में क्यूआर कोड से ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से बचाव, जानें इसकी कार्यप्रणाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश पुलिस एक नई और प्रभावी पहल करने जा रही है। ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से क्यूआर कोड आधारित जागरूकता व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही साइबर अपराध से बचाव से जुड़ी आवश्यक और प्रमाणिक जानकारी सीधे मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो जाएगी। मध्य प्रदेश पुलिस साइबर विशेषज्ञों के सहयोग से इस नवाचार को अंतिम रूप दे रही है। योजना के तहत भोपाल सहित पूरे प्रदेश के भीड़भाड़ वाले स्थानों, प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी एवं निजी कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर ये क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मार्च 2026 से प्रदेशवासियों को यह सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी।  इस परियोजना पर साइबर पुलिस के नेतृत्व में तेजी से काम चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में अपराधी नये-नये हथकंडे अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे में तकनीक के जरिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। यह क्यूआर कोड न सिर्फ जानकारी देगा, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने में भी मदद करेगा। सभी प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे क्यूआर कोड सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी संस्थानों में भी प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाने की तैयारी है। इसके साथ-साथ इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग कर सकें। पुलिस अधीक्षक (साइबर) प्रणय नागवंशी ने बताया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। साइबर मुख्यालय समय-समय पर एडवाइजरी जारी करता है और अब क्यूआर कोड के माध्यम से यह जानकारी और अधिक सुलभ हो जाएगी। क्यूआर कोड से मिलने वाले प्रमुख लाभ क्यूआर कोड स्कैन करने पर यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि साइबर अपराध से बचने के लिए क्या करें और किन बातों से बचें। आमतौर पर पूछे जाने वाले सवालों के सरल उत्तर भी उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime-gov-in) का सीधा लिंक दिया जाएगा, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे। ठगी के अलावा फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग से जुड़ी सावधानियों की जानकारी भी मिलेगी। साथ ही, फर्जी कॉल, नकली नोटिस और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धोखाधड़ी से बचने के जरूरी उपाय भी बताए जाएंगे। 

एमपी में 15 जिलों को 1500 करोड़ की छूट, बिजली कंपनी घर-घर पहुंचाएगी स्मार्ट मीटर के फायदे

भोपाल   राज्य शासन के निर्देश पर पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी इंदौर सहित सभी 15 जिलों में 9 से 23 फरवरी तक स्मार्ट मीटर पखवाड़ा मनाएगी। इस दौरान उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे, त्रुटिरहित व त्वरित बिजली बिल सेवा, ऊर्जस ऐप पर स्मार्ट मीटर की लाइव जानकारी, गैर घरेलू उपभोक्ताओं को पॉवर फैक्टर की छूट, सौर ऊर्जा गणना के लिए स्मार्ट मीटर से मीटर राशि की बचत और दिन में बिजली खपत के लिए टीओडी गणना इत्यादि लाभों को बताया जाएगा। स्मार्ट मीटर के फायदे बताए जाएंगे उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के साथ ही लगाए गए चेक मीटर संबंधित रिपोर्ट की जानकारी दी जाएगी, जिसमें दोनों ही मीटरों में खपत का स्तर समान दर्ज हुआ है। पखवाड़े के दौरान पश्चिम क्षेत्र कंपनी की ओर से शिविर, कार्यशालाएं, शिकायत निवारण, तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष सत्र, प्रदर्शनी इत्यादि के आयोजन होंगे। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य आम लोगों को स्मार्ट मीटर के फायदे बताने, भ्रम दूर करने एवं उपभोक्ताओं बिजली की संतुष्टि को लेकर रचनात्मक प्रयास है। 1500 करोड़ की छूट मिलेगी बिजली वितरण कंपनी औद्योगिक, उच्चदाब उपभोक्ताओं को नियमानुसार प्रति माह, प्रति बिल निर्धारित छूट (रिबेट) प्रदान कर रही है। पिछले बारह माह के दौरान नए कनेक्शनों पर छूट, कैप्टिव छूट, इंक्रीमेंटल छूट, टीओडी छूट, पॉवर फैक्टर छूट, सब्सिडी, प्रॉम्प्ट पैमेंट, ग्रीन फील्ड छूट मिलाकर कुल 1500 करोड़ रुपए की छूट प्रदान की गई है ताकि उद्योगों को गति मिले, रोजगार, विकास के अवसर में पर्याप्त वृद्धि हो।

पीएमएफएमई योजना के तहत प्रदेश के युवा बना रहे हैं उद्योग और स्थापित कर रहे हैं अपनी पहचान

पीएमएफएमई योजना प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक भोपाल  केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी  अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें। यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पीएमएफएमई योजना से मिला संबल अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं। क्या है डिहाइड्रेट यूनिट डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है। डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं। प्रक्रिया अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है। पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है। रोजगार के अवसर भी हुए सृजित यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। मांग और बिक्री से बढ़ रही आय अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं। योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।  

एमपी ट्रांसको में कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित

एमपी ट्रांसको में स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भोपाल मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के आष्टा 132 केवी सबस्टेशन, सतवास में क्लस्टर (कन्नौद, खातेगांव एवं सतवास उपकेंद्र) के अंतर्गत कार्यरत सभी नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर कार्यपालन अभियंता  योगेन्द्र चहार के विशेष प्रयासों से आयोजित किया गया। शिविर में सतवास के मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल ने कर्मचारियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) सहित प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने सीपीआर देने की परिस्थितियों, उसकी सही विधि एवं इसके व्यावहारिक महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़ी इस उपयोगी जानकारी से सभी उपस्थित कर्मचारी लाभान्वित हुए। एमपी ट्रांसको की सतत मुहिम के अंतर्गत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना।  

बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का ब्याह, कन्या विवाह महोत्सव में नेपाल की युवती भी बनेगी दुल्हन

खजुराहो  छतरपुर के बागेश्वर धाम में हर वर्ष की तरह इस साल भी बहुत ही शानदार कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है. इस बार का महोत्सव काफी खास होने वाला है, क्योंकि यह महोत्सव सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है. नेपाल की भी एक बेटी की शादी धाम में होगी.  इस मौके पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री दी. खजुराहो के बागेश्वर धाम में 300 जोड़ों की शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। समारोह 12 से 15 फरवरी तक तीन दिनों तक चलेगा। हर दिन अलग-अलग रस्में होंगी। आने वाले मेहमानों की खातिरदारी भी की जाएगी। दहेज में सभी जोड़ों को 90 लाख की FD, सोने-चांदी समेत गृहस्थी का सामान दी जयेगा।  बागेश्वर धाम में सातवीं बार आयोजन हो रहा है। इस बार 13 राज्यों से 1500 से अधिक आवेदन मिले। 60 जिलों की 600 सदस्यीय टीम ने एक महीने तक सर्वे किया। 300 जोड़ों को शादी के लिए बुलाया गया। इसमें एक जोड़ा नेपाल का भी है। 30,000 रुपये की जॉइंट एफडी बाबा बागेश्वर ने सभी ससुराल वालों को सलाह दी कि वे अपनी बहुओं को अपनी बेटियों जैसा मानें और यह पक्का करें कि किसी भी तरह की कोई शिकायत न हो. उन्होंने कुछ समधियों को बुलाया, उनके साथ मज़ाक किया और उनके चेहरों पर गुलाल लगाया. उन्होंने ऐलान किया कि इस बार दूल्हा और दुल्हन के नाम पर 30,000 रुपये की जॉइंट फिक्स्ड डिपॉज़िट खोली जाएगी. यह फिक्स्ड डिपॉज़िट पांच साल से पहले नहीं तोड़ी जा सकती. उन्होंने बताया कि शादियों के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी रही. सर्वे टीम ने 500 से ज़्यादा लड़कियों में से 300  लड़कियों को चुना, जिसमें उन लड़कियों को प्राथमिकता दी गई जो बहुत गरीब, अनाथ या बेसहारा थीं. धीरेंद्र शास्त्री बोले– ये अब बालाजी की बेटियां आयोजन को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि “ये अब बालाजी की बेटियां हो गई हैं। इनका विवाह धूमधाम से किया जाएगा। देशभर के संत, महात्मा, राजपीठ, व्यास पीठ के लोगों के सानिध्य में बेटियां विवाह बंधन में बंधेंगी। उन्होंने बताया कि सर्वे टीम ने 600 से अधिक अति निर्धन, अनाथ, मातृहीन और पितृहीन बेटियों का चयन किया था। इनमें से वर्तमान संसाधनों को देखते हुए 300 बेटियों को विवाह के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि पात्र बेटियों की संख्या अधिक थी, लेकिन बागेश्वर धाम की वर्तमान सामर्थ्य के अनुसार ही चयन किया गया है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के ऑफिस में इन दिनों खासी हलचल है। कर्मचारी देर रात तक काम में व्यस्त हैं। सभी की टेबल पर शादी के निमंत्रण कार्ड का ढेर है। ये निमंत्रण पत्र VVIP मेहमानों को भेजे जाने हैं। बीच-बीच में इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे कमल अवस्थी कार्ड उठाकर चेक कर ले रहे हैं। वो इसलिए कि नाम और पता सही है या नहीं। उसे वे अपने आईपैड में दर्ज लिस्ट से भी मिलान कर रहे हैं। कोशिश है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। दूसरी तरफ भंडार में दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने वाले उपहार के ढेर लगे हैं। सेवादार सावधानी से पैकेट बना रहे हैं। कमल अवस्थी कहते हैं कि सभी अरेंजमेंट पूरे हो गए हैं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ दिन पहले ही हर जोड़े को बुलाकर उन्हें कपड़े और बाकी सामान दे दिया है। सभी को 13 फरवरी की सुबह 8 बजे बुलाया है। लगन मंडप तैयार किए जा रहे हैं। भोजन पंडाल अलग-अलग होंगे। तैयारियां तो पूरी हैं, फिर भी बहुत काम बाकी है। उस दिन पूरे बागेश्वर धाम को सजाया जाएगा। कमल अवस्थी ने नेपाल की रहने वाली अस्मिता सुनार से फोन पर हमारी बात कराई। अस्मिता भी नेपाल के युवक ये यहां सात फेरे लेने वाली हैं। इसके अलावा, मध्यप्रदेश की दो लड़कियाें से भी बात की। नेपाल की अस्मिता बोली- चार साल में आया नंबर अस्मिता ने फोन पर बताया कि परिवार की माली हालत कभी ठीक नहीं रही। मां दिल्ली में घर-घर जाकर बर्तन साफ करती हैं। पिता यहीं मजदूरी करते हैं। भाई केरल में मजदूरी करता है। एक बार मेरी तबीयत खराब हुई। पहले यहां फिर दिल्ली में डॉक्टर्स को दिखाया। फायदा नहीं हो रहा था। डॉक्टर बोलते थे कि दिमाग खराब है, पागल हो गई हूं। लोगों से सुना, तो बागेश्वरधाम पहुंचे। अब मैं एकदम ठीक हूं। बालाजी भगवान ने मुझे ठीक कर दिया। हमने यूट्यूब पर बागेश्वर धाम में हो रही शादियों के बारे में देखा था। मां पिछले चार साल से यहां मेरी शादी के लिए आवेदन कर रही थी, लेकिन इस बार नंबर लगा है। खुशी है कि मुझे गुरुजी से मिलने का मौका मिलेगा। अब मेरी शादी मेज बहादुर से हो रही है, वो मेरे ही देश के कंचनपुर के रहने वाले हैं। उनके परिवार की हालत भी हमारे जैसे ही हैं। पढ़ाई के दौरान हमारी मुलाकात हुई थी। मैं और उनकी बहन साथ पढ़ते थे। एक बार हम माउंटेन घूमने गए। वहां बात हुई। धीरे-धीरे प्यार हो गया। फिर हम लोगों ने अपने-अपने घर बताया, तो घरवाले बोले- इतना पैसा नहीं है कि अभी शादी कर दें। इसके बाद मां चार साल तक लगातार आवेदन करती रहीं। इस बार नंबर आ गया। फोन पर मिली सूचना, शादी के लिए चुना गया विदिशा जिले की गंजबासौदा के लाल पठार इलाके में रहने वाली सपना अहिरवार के पिता नहीं हैं। मां बीमार रहती हैं और भाई छोटा है। घर में दो वक्त खाने के लिए भी जद्दोजहद करनी होती है। सपना कहती हैं- बीमार मां को हमेशा मेरी शादी की चिंता रहती थी। जब बागेश्वर धाम में होने वाली सामूहिक विवाह समारोह के बारे में पता चला, तो मन में आस सी जागी। पहले भी यहां आ चुकी हूं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने परिवार की मदद की। उन्हें अपने पिता जैसा मानती हूं। आवेदन के बाद यहां से घर पहुंचे थे। कुछ दिन बाद फोन पर सूचना मिली कि मुझे यहां शादी के लिए चुना गया है। उन्होंने शादी का लहंगा, सैंडल और होने वाले पति को शेरवानी, पगड़ी, जूते और माला दी है। उस दिन कपड़े पहनकर यहां आना है। गरीब हूं, पर आज इसका अहसास नहीं हो रहा है। बागेश्वरधाम से शादी होना सपने की तरह बागेश्वरधाम … Read more

संदीपनी विद्यालय घुघरी का मामला अतिथि शिक्षक की ‘अमर्यादित’ टिप्पणी पर हंगामा

मंडला.  जिले के शासकीय सांदीपनी विद्यालय घुघरी में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पदस्थ एक अतिथि शिक्षक पर कक्षा 10वीं की छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार और अपमानजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना से आक्रोशित छात्राओं ने विद्यालय के प्राचार्य को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।  *क्या है पूरा मामला   प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय में पदस्त अतिथि शिक्षक बिजेंद्र झारिया पर आरोप है कि उन्होंने कक्षा 10वीं की छात्राओं के प्रति अत्यंत अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। शिकायत पत्र में छात्रा ने उल्लेख किया है कि शिक्षक ने पूरी कक्षा के सामने उसे जलील किया, जिससे उसकी गरिमा को गहरी ठेस पहुँची है। इस शिकायत का समर्थन कक्षा की अन्य छात्राओं ने भी अपने हस्ताक्षर करके किया है।  अधिकारियों का रुख: “हटाया जाएगा आरोपी शिक्षक”  इस संवेदनशील मामले पर सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए कहा कि, “मुझे इस संबंध में पहले जानकारी नहीं थी, लेकिन अब प्राचार्य के माध्यम से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। ऐसे आरोपी अतिथि शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और उन्हें तत्काल प्रभाव से विद्यालय से हटाया जाएगा।”  राजनीतिक आक्रोश: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी”  मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति अध्यक्ष श्री कमलेश तेकाम ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा मैंने पूर्व में ही अधिकारियों को ऐसे शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन क्षेत्रीय संयोजक मंडला विष्णु सिंगोर जैसे लोगों की लापरवाही के कारण इन्हें संरक्षण मिल रहा है। बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार करने वालों को शह देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि इस शिक्षक को तुरंत नहीं हटाया गया, तो हम स्वयं आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।” छात्राओं में डर और आक्रोश छात्राओं का कहना है कि स्कूल में सुरक्षित महसूस करना उनका अधिकार है, लेकिन शिक्षक के इस प्रकार के व्यवहार से वे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी और कितनी ठोस कार्रवाई करता है एवं आरोपी अतिथि शिक्षक को कब तक हटाएगी  इनका कहना है कि मैने ऐसी मैडम बात की है कि ऐसे आरोपी शिक्षक को जल्द से जल्द हटाया जावे जो शिक्षा को शर्मसार कर रहे हैं

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिले स्विस संसद सदस्य

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में स्विट्जरलैंड की संसद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य  निक्लाउस सैमुअल गुगर ने सौजन्य भेंट की।  गुगर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से औद्योगिक विकास, ऊर्जा संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला सहित औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्विस संसद के सदस्य  गुगर ने स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा दक्षता के लिए डिजिटल समाधान के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक ऑटोमेशन और सतत् प्रौद्योगिकी में स्विस विशेषज्ञता का विशेष लाभ उठा सकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु शासन, औद्योगिक संक्रमण पर नीति आदान-प्रदान के लिए स्विस संसदीय प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश आमंत्रित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर स्विस संसद सदस्य  गुगर ने मध्यप्रदेश के जलवायु और स्थिरता पहलों में स्विस निजी क्षेत्र की संभावित भागीदारी और यहां के युवाओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा एवं उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) में तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग/समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी पर शोध के लिए स्विस विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त पहल की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।  गुगर ने कहा कि स्विस नागरिकों के लिए मध्यप्रदेश को एक विरासत एवं इको टूरिज्म गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जाए, इससे लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों की योजना बनाई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने  गुगर के सुझावों की सराहना कर हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस में हुई थी भेंट उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से गत माह दावोस में हुए वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम में स्विस संसद सदस्य  गुगर ने सौजन्य भेंट की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से भारत से अपने संबंधों, नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग, पर्यावरण-संरक्षण और जनजातीय कल्याण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की थी। चर्चा के दौरान ग्रामीण ईको पर्यटन, मिलेट्स के प्रमोशन और मध्यप्रदेश-स्विट्जरलैंड के बीच भावी सहयोग की सभी संभावनाओं और अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया था।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गणतंत्र दिवस शिविर एवं परेड में भाग लेने वाले एनसीसी कैडेट्स और कैम्प में

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एनसीसी युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व और देशभक्ति के संस्कार प्रदान करने वाला एक सशक्त माध्यम है। ‘मुख्यमंत्री बैनर’ जैसे कार्यक्रम युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास में एनसीसी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ ‘मुख्यमंत्री बैनर’ कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, संगठनात्मक दक्षता तथा राष्ट्र सेवा की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास के लिए हम सबको सक्रिय भागीदारी करनी होगी। इस दिशा में युवाओं को विशेष रूप से आगे आना चाहिये। युवा साथी अपनी असीम ऊर्जा का पूरी जिम्मेदारी और समर्पण भाव से सदुपयोग कर प्रदेश के विकास में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृ्त्व में भारतीय सेना पूरी शक्ति के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम हैं। भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया। देश में वैश्विक स्तर पर शांति के लिए दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। जब-जब आतंकियों ने दुस्साहस किया, हमारे सैनिकों ने अद्भुत पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए पड़ौसी देश में छिपे आतंकवादियों को तीन-तीन बार घर में घुसकर सबक सिखाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेनाओं में भी नारी सशक्तिकरण पर बल दिया जा रहा है। वर्ष 2026 का गणतंत्र दिवस समारोह नारी सशक्तिकरण को समर्पित रहा। देश में पहली बार परेड समारोह में अर्ध सैनिक बल की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व महिला ऑफिसर कर रही थीं। प्रदेश की 23 बेटियों (एनसीसी कैडेट्स) को गणतंत्र दिवस परेड में मार्च करते हुए देखा तो सीना गर्व से फूल गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने सेनाओं और सशस्त्र बलों में महिलाओं को समान अवसर देने के लिए स्थाई कमीशन देने सहित अनेक कदम उठाए हैं। नौसेना की अग्निपथ योजना में बेटियों को आरक्षण मिल रहा है। सैनिक स्कूलों में भी बेटियों को दाखिला मिलने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में हुए गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) की बेस्ट एनसीसी कैडेट्स प्रतियोगिता में एक स्वर्ण एवं 2 रजत पदक जीतने पर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय को बधाई दी। इस वर्ष के गणतंत्र दिवस शिविर में देशभर के 17 निदेशालयों के कैडेट्स शामिल हुए और मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए इसमें तीसरा स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने एनसीसी गणतंत्र दिवस टुकड़ी को सम्मानित किया एवं इस उपलब्धि के लिए कैडेट्स, प्रशिक्षक एवं अधिकारियों की निष्ठा, दृढ़ता और सतत प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, जबलपुर को प्रशिक्षण वर्ष 2025-26 के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का बेस्ट इंटर ग्रुप मुख्यमंत्री बैनर प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित नेशनल कैडेट कोर के कैंप में मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले कैडेट्स को मैडल पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) में प्रतिभागी कैडेट्स को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमश: 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रूपए के चेक भी सौंपे। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स ने नारी शक्ति समूह गीत एवं एनएसएस की कैड्टेस ने एनएसएस गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पीएम मेडल विजेता सीनियर अंडर ऑफिसर श्री विशाल सिंह ने आरडीसी के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विजिटर बुक में स्वयं एनसीसी के लिए शुभकामना संदेश लिखा और सभी पदक विजेताओं को बधाई देकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की तरह वे भी अपने स्कूल-कॉलेज के समय एनसीसी और एनएसएस के वर्दीधारी रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी एनसीसी के दौर में सीखे अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा पर गर्व करते हैं। एनसीसी के कैडेट्स जब जैसी आवश्यकता हो, भारतीय लोकतंत्र की भावना और विरासत को हर कालखंड में सशक्त करने से कभी पीछे नहीं हटते हैं। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में मध्यप्रदेश से राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के 8 कैड्टेस शामिल हुए। प्रदेश में अभी 1 लाख 56 हजार एनएसएस कैडेट हैं, जिन्होंने 1200 से अधिक गांवों को गोद लिया है। राज्य सरकार ने एनएसएस कैडेट्स की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, जिससे प्रदेश के युवाओं में समानता, समाजसेवा और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भाव विकसित हो। अपर महानिदेशक एनसीसी, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय मेजर जनरल श्री जे.पी. सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में हमें एनसीसी की गतिविधियों एवं विस्तार को सुदृढ़ करने में राज्य सरकार के समस्त विभागों, विशेष रूप से उच्च शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग एवं राज्य वित्त विभाग से पूर्ण सहयोग मिल रहा है। मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर और सागर में एनससी के नए कैंप स्थापित करने के लिए भूमि का आवंटन हो चुका है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कभी कुल 77 हजार कैडेट्स हैं, आगामी वर्षों में इनकी संख्या 1 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मेजर जनरल श्री सिंह ने बताया कि 17 लाख कैडेट्स के साथ एनसीसी दुनिया में अपना अलग स्थान रखती है। गणतंत्र दिवस परेड-2026 के समारोह में एनसीसी के कुल 2200 कैडेट्स शामिल हुए। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय में कुल 1 लाख 5 हजार कैडेट्स हैं, इनमें से 136 कैडेट ने गणतंत्र दिवस शिविर में सहभागिता की। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय ने 2024 में छठा, 2025 में चौथा और इस वर्ष 2026 में तीसरा स्थान हासिल किया है। निदेशालय के 23 कैडेट्स ने कर्तव्य पथ पर परेड में मार्च पास्ट किया। एनसीसी निदेशालय, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में भोपाल, जबलपुर, सागर, इंदौर, ग्वालियर तथा रायपुर में स्थित कुल छह एनसीसी ग्रुप कार्यरत हैं। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 15 बटालियन हैं। सभी बटालियन अपने-अपने ग्रुप का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे प्रशिक्षण वर्ष के दौरान विभिन्न गतिविधियों में प्रतिस्पर्धा करती हैं, जिनमें सेवा विषय, फायरिंग, वार्षिक प्रशिक्षण शिविर, सामाजिक सेवा गतिविधियाँ, साहसिक गतिविधियाँ तथा ग्रुप गीत प्रतियोगिताएँ शामिल हैं। उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन के आधार पर एनसीसी ग्रुप मुख्यालय जबलपुर ने प्रशिक्षण वर्ष 2025-26 के लिए चैंपियन ग्रुप के रूप में उभरकर सफलता प्राप्त की। कार्यक्रम के … Read more

उज्जैन का ईको टूरिज्म पार्क वन्य जीव केन्द्र का ही होगा हिस्सा

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है‍ कि मध्यप्रदेश में पर्यटन विशेषकर वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर निर्मित किए जा रहे हैं। दोनों ही शहरों में इन सेंटर्स के निर्माण के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिए गए हैं। बहुत जल्द प्रदेश में 2 नए वन्य जीव केन्द्र बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उज्जैन में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के संबंध में नियुक्त कन्सल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों के साथ बैठक को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वन्य जीव केन्द्र के लिए निुयक्त कंसल्टेंट फर्म से कहा कि वे उज्जैन में वनतारा की तर्ज पर इस तरह का जंगल चिड़ियाघर सफारी (वाईल्ड लाईफ सेंटर कम इंडियन जू कम रेस्क्यू सेंटर) तैयार करें, जो यहां आने वाले विजिटर्स को पूरी दुनिया के अलग-अलग जंगलों का एक ही जगह पर फुल एक्सपीरियंस दे। उन्होंने कहा कि इस वाईल्ड लाईफ सेंटर को करीब 500 हैक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया जाए। उज्जैन में 50 हैक्टेयर रकबे में पहले से तैयार ईको टूरिज्म पार्क भी इसी वन्य जीव केन्द्र में शामिल कर लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंसल्टेंट से कहा कि यह एक अनोखा वन्य जीव केन्द्र होना चाहिए, जिसमें वन और वन्य प्राणियों की विविधता दूसरे वन्य जीव केन्द्रों से भिन्न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 में इस वन्य जीव केन्द्र के फेज-1 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाए और जितनी जल्दी हो सके, वन्य जीव केन्द्र तैयार हो जाए, जिससे उज्जैन को एक बेहतरीन फॉरेस्ट टूरिज्म स्पॉट (सफारी एक्सपीरियंस के साथ) के रूप में ख्याति मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के वन्य जीव केन्द्र में देशी और विदेशी सभी प्रजाति के वन्य प्राणी हों। यह केन्द्र इस तरह तैयार किया जाए कि इसमें दिन और रात दोनों वक्त विजिटर्स इसका आनंद ले सकें। बैठक में उज्जैन में इस केन्द्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं और सेंटर के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्य जीव केन्द्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर एक भव्य केन्द्र के रूप में तैयार किया जाए। बैठक में वन्य जीव केन्द्र निर्माण के लिए नियुक्त की गई कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों ने पॉवर पाईंट प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि करीब 500 हैक्टेयर रकबे में विजिटर्स को देश-दुनिया के 11 जंगलों का अनुभव कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में सेंटर फॉरमेशन का पहला चरण प्रारंभ करेंगे। वर्ष 2027 के अंत तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वन्य जीव केन्द्र का निर्माण कुल 6 चरणों में किया जाएगा। वन्य जीव केन्द्र में दिखाई नहीं देने वाली बाड़ का खुला जंगल होगा, जिसमें विजिटर्स पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहन का उपयोग कर सेंटर का विजिट कर सकेंगे। उन्होंने बताया‍ कि इस केन्द्र में 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजाति के जंगली जानवर होंगे। देशी और विदेशी जानवरों का अनुपात क्रमश: 75 एवं 25 प्रतिशत होगा। केन्द्र में एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया‍ कि विश्व में पहली बार विजिटर्स को असली जंगल चिड़ियाघर सफारी का अनुभव उज्जैन के वन्य जीव केन्द्र में कराया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन  अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, पीसीसीएफ वाईल्ड लाईफ  शुभरंजन सेन, सीसीएफ  कृष्णमूर्ति सहित गुजरात के वनतारा जू से आए अधिकारी और कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। 

बिजली कंपनी के वॉट्सएप चैटबॉट से बिल डाउनलोड और बिल भुगतान की सुविधा

भोपाल.  उपभोक्ता सुविधा का लाभ उठाएं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि वॉट्सएप चैटबॉट से बिल डाउनलोड एवं बिल भुगतान सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके लिए उपभोक्ता को कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वे अपने मोबाइल के माध्यम से बिजली बिल डाउनलोड एवं भुगतान सहित अन्य 10 सेवाओं का फायदा उठा सकते हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि चैटबॉट नंबर 0755 2551222 पर ‘Hi‘ (हाय) लिखते हैं तो तुरंत आपके सामने क्रमशः 10 अलग-अलग सुविधाओं की सूची आ जाएगी। यदि आपको अपने घर का बिजली बिल भरना है तो इसमें 2 नंबर पर ‘फॉर बिल’ का ऑप्शन दिखता है। मैसेज बॉक्स में जैसे ही आप 2 लिखते ही आपको 1 नंबर ‘फॉर व्यू एंड पे एलटी बिल’ का ऑप्शन सहित तीन अन्य ऑप्शन भी दिखेंगें। जब आप अपने बिल के लिए 1 नंबर लिखेंगे तो दो ऑप्शन आएंगे। इसमें 1 नंबर पर ‘टू यूज मोबाइल नंबर’ और 2 नंबर पर ‘फॉर इंटर कस्टूमर आईडी। इसमें आप अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के लिए जैसे ही ‘टू यूज मोबाइल नंबर’ के लिए 1 नंबर लिखेंगे तो आपके कनेक्शन नंबर दिखेंगे। इसमें जिस नंबर का बिल आपको चाहिए वह नंबर जैसे ही लिखेंगे तो तुरंत आपके मोबाइल पर बिल की राशि सहित पीडीएफ आ जाएगी। इसी में ‘व्यू एंड पे’ तथा ‘पे नाऊ’ का ऑप्शन दिखेगा। यदि आप पहले बिल देखना चाहते हैं तो ‘व्यू एंड पे’ को टच करेंगे। यदि आपको राशि देखकर उसे जमा करना है तो ‘पे नाऊ’ को टच करना होगा। जैसे ही आप ‘पे नाऊ’ को टच करेंगे तो आपसे भुगतान के विकल्प पूछे जाएंगे। इसमें आपको पे ऑन वाट्सएप, गूगल पे, फोन पे, पेटीएम सहित अन्य यूपीआई एप्स के ऑप्शन दिखेंगे। यहां पर जिस विकल्प से आपको पेमेंट करना है, उसे चयन कर ‘कांटीन्यू’ कर देंगे तो आपके वैलेट से पैमेंट की प्रक्रिया पूरी होगी और तत्पश्चात मोबाइल पर ही रसीद प्राप्त हो जाएगी। इस रसीद को आपके मोबाइल में सेव करने का ऑप्शन भी रहेगा। इसके अलावा आप चाहें तो उसका स्क्रीनशॉट भी ले सकते हैं। इस तरह से उपभोक्ता घर बैठे अपने मोबाइल से बिजली कंपनी की सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। वॉट्सएप व चैटबॉट पर जिन 10 सुविधाओं का ऑप्शन उपलब्ध है उसमें फॉर कंप्लेंट, फॉर बिल (एलटी/एचटी), फॉर व्यू अदर एप्लीकेशंस, फॉर लिंक युअर मोबाइल टू कनेक्शन नंबर, फॉर सैल्फ रीडिंग, टू एप्लाई फॉर न्यू सर्विस कनेक्शन/नेट मीटरिंग, टू एप्लाई फॉर चैंज इन एक्जिस्टिंग कनेक्शन, टू एप्लाई फॉर फिजिकल बिल, फॉर सोलर रूफटॉप (नेट मीटरिंग) और एड ऑर रिमूव मोबाइल नंबर शामिल हैं। 

नीमच की ‘बहादुर मां’ कंचन बाई ने 20 बच्चों को बचाने के लिए झेले मधुमक्खियों के डंक, सरकार उठाएगी बच्चों की पढ़ाई का खर्च

 नीमच मध्य प्रदेश सरकार ने  नीमच जिले में मधुमक्खियों के हमले में 20 बच्चों को बचाते हुए जान गंवाने वाली 45 साल की महिला के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है.  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “नीमच जिले के रानपुर गांव में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल की असमय मौत बहुत दुखद और दिल दहला देने वाली है. राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ है. मानवीय आधार पर, मैंने उनके परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएगी.” महिला के बेटे रवि मेघवाल ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि कंचन बाई एक सेल्फ-हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष थीं, जो जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रानपुर गांव में एक ही बिल्डिंग में स्थित आंगनवाड़ी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों को खाना खिलाती थीं. घटना की जानकारी देते हुए मेघवाल ने कहा, “2 फरवरी को मधुमक्खियों के झुंड ने कुछ बच्चों पर हमला कर दिया, जब वे बिल्डिंग के बाहर हैंडपंप पर पानी पी रहे थे. बच्चे बिल्डिंग के अंदर भाग गए, लेकिन मधुमक्खियों का हमला जारी रहा. मेरी मां अंदर भागीं और एक टीचर की मदद से बच्चों को बचाया.” मेघवाल ने आगे बताया कि हमले के समय बिल्डिंग के अंदर करीब 20 बच्चे थे. उन्होंने कहा, “उन्हें बचाते समय मेरी मां को कई मधुमक्खियों ने काट लिया, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं और उनके मुंह से झाग निकलने लगा. उन्हें पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.” मुख्यमंत्री की ओर से दिए जा रहे 4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा के बारे में बात करते हुए मेघवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी मां को उनकी बहादुरी के लिए पूरा सम्मान और श्रेय मिले. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मधुमक्खियों के हमले से जुड़े हालात की जांच की जा रही है और जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे.

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

भोपाल।  नवाचार, अनुसंधान और समाजोन्मुख विकास पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संवाद रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “शोध शिखर 2026” का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। यह सम्मेलन नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और समाजोन्मुख अनुसंधान की दिशा में वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अपर्णा एन., ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी, इसरो, हैदराबाद ने रिमोट सेंसिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शोध में भू-स्थानिक तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग का योगदान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों और पेपर प्रेजेंटर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  संतोष चौबे, कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संस्था की शुरुआत एक पुस्तक “कंप्यूटर एक परिचय” से हुई थी, जिसकी अब तक लगभग दो मिलियन प्रतियां प्रकाशित और वितरित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक आंदोलन था। हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर प्रकाशित पुस्तक भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आज जिन पहलों—डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया—को आगे बढ़ा रही है, उन दिशाओं में आईसेक्ट समूह लंबे समय से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताते हुए शोध को व्यवहारिक और समाजोपयोगी बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट वक्ताओं में  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से भारत में रह रहे हैं और यहां की संस्कृति, अनुशासन और कार्यशैली से अत्यंत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वे किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसानों के बीच तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक शोध और तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें व्यवहारिक और प्रैक्टिकल सोच विकसित करनी होगी, तभी हम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकेंगे। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ‘विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर नवाचारों को अपनाना होगा। केवल कृषि ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में विश्व की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना होगा। विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, ने अपने संबोधन में कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय किसानों, सरकार और उद्योग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जो अनुसंधान को जमीन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और लाखों युवाओं ने नवाचार के माध्यम से नए आयाम स्थापित किए हैं। विचारों को वास्तविकता में बदलने की क्षमता ही आज के भारत की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम के प्रारंभ में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो रवि प्रकाश दुबे ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “शोध शिखर” जैसे कार्यक्रमों से ऐसे विचार सामने आते हैं जो समाज और राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां 10 संकायों में विविध पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तथा 18 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध और नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। डॉ अरुण जोशी, कुलगुरु, डॉ सी वी रामन यूनिवर्सिटी खण्डवा ने कहा कि यदि कोई अच्छा और नवाचारी शोधकर्ता बनना चाहता है, तो उसे ‘रिफ्लेक्शन’ शब्द को समझना और अपनाना होगा। जब तक आत्म-मंथन और चिंतन नहीं होगा, तब तक सच्चा शोध संभव नहीं है। उन्होंने शोध आधारित प्रशिक्षण और इनसाइटफुल एनालिसिस पर बल देते हुए कहा कि यही प्रक्रिया हमें क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाती है। डॉ. विजय सिंह, कुलगुरु, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी ने कहा कि आज कौशल आधारित शिक्षा और शोध की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उद्योगों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय स्किल और रिसर्च दोनों क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। रक्षा, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष कार्य हो रहा है, जो भविष्य की शिक्षा और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। कार्यक्रम की प्रस्तावना और भूमिका रखते हुए सम्मेलन की संयोजक डॉ. रचना चतुर्वेदी ने “शोध शिखर” की अवधारणा, उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल शोध प्रस्तुत करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नवाचारों को समाज के वास्तविक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास है, जिससे अकादमिक ज्ञान और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच सेतु स्थापित किया जा सके। उद्घाटन समारोह के पश्चात पैनल डिस्कशन में डॉ. अपर्णा एन. ने सेटेलाइटों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसरो 32 मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है, उन्होंने आगे कहा कि एनआरएससी और आरएनटीयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ रिमोट सेंसिंग, डाटा एनालिसिस, जियो स्पेशियल जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दे सकता है। वहीं डॉ मनीष मोहन गोरे, सीनियर साइंटिस्ट एंड एडिटर विज्ञान प्रगति एनआईएसपीआर नई दिल्ली ने एनआईएसपीआर की यात्रा को बताते हुए कहा कि एनआईएसपीआर और आरएनटीयू साथ मिलकर विज्ञान संचार के लिए काम कर सकते हैं जिसमें संयुक्त पब्लिकेशन और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने विद्यार्थियों को माइंडसेट चेंज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि आरएनटीयू कृषि में एआई के उपयोग पर साथ में कार्य कर सकता है। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया और  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर … Read more

पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में कार्मिकों के लिए हुई पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस कार्यशाला

भोपाल . मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) द्वारा अपने अभियंताओं और कार्मिकों के लिए पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन नयागांव स्थित कंपनी के प्रशिक्षण संस्थान में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कार्मिकों की व्यवहारिक दक्षताओं, नेतृत्व क्षमता व टीमवर्क कौशल को सुदृढ़ करना था, जिससे कम्पनी कार्यक्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में कंपनी के विभिन्न विभागों से कुल 67 अभियंताओं व कार्मिकों ने सक्रिय सहभागिता की। करियर काउंसलर एवं कॉर्पोरेट ट्रेनर मनीषा आनंद ने कार्मिकों को विविध टीम बिल्डिंग गतिविधियों, संवादात्मक अभ्यासों व व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से व्यावहारिक एवं नेतृत्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मॉडल एवं सिद्धांतों से परिचित कराया। सत्र के दौरान आत्म-विकास, प्रभावी संचार, सहयोगात्मक कार्यशैली एवं पेशेवर उत्कृष्टता जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया। मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री दीपक कश्यप ने कहा कि कंपनी का दृष्टिकोण केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी अपने मानव संसाधन को निरंतर सीखने एवं कौशल उन्नयन की दिशा में प्रेरित करती है। उन्होंने बताया कि कंपनी के कार्मिक न केवल अपने-अपने तकनीकी क्षेत्रों में दक्ष हैं, बल्कि व्यक्तिगत एवं पेशेवर विकास के पथ पर भी निरंतर अग्रसर हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कंपनी के कार्मिकों में सकारात्मक कार्य संस्कृति के निर्माण एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरन्तरता पर बल देते हुए कहा कि व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं।  

अस्पताल में घूसखोरी का आरोप: नवजात देने के बदले ₹4 हजार की मांग, ₹1500 लेकर बच्चा सौंपा

बुधनी. शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद जहां आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, वहीं अब यहां से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसूता के परिजनों से 4 हजार की मांग आरोप है कि सिविल अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूति दाइयों द्वारा प्रसूता के परिजनों से खुलेआम पैसों की मांग की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात दाई ने नवजात शिशु को देने से पहले 4 हजार रुपये की मांग की। जब परिवार ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई और पूरी राशि देने में असमर्थता जताई, तो दाई ने कथित तौर पर बच्चा देने से इनकार कर दिया। 1500 रुपये की ‘वसूली’ के बाद मिला बच्चा बताया जा रहा है कि मजबूर गरीब परिवार ने जैसे-तैसे 1500 रुपये की व्यवस्था की, तब जाकर उन्हें उनका नवजात शिशु मिला। इस घटना से आक्रोशित परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। जब इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. बड़ोदिया से बात की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सरकारी योजनाओं की साख पर बट्टा यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह निम्न श्रेणी के कुछ कर्मचारी अपनी मनमानी से सरकारी योजनाओं की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। सरकार जहां जननी सुरक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को निःशुल्क प्रसव सुविधा देने का दावा करती है, वहीं इस तरह की वसूली गरीबों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है।

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा में विद्यार्थियों के साथ सुने प्रधानमंत्री मोदी के परीक्षा मंत्र

लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें प्रधानमंत्री  मोदी ने जबलपुर के छात्र आयुष के प्रश्न पर दिया जवाब स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा में विद्यार्थियों के साथ सुने प्रधानमंत्री  मोदी के परीक्षा मंत्र प्रदेश के विद्यालयों में हुआ परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण, शासकीय सुभाष स्कूल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में विद्याथिर्यों से संवाद कर परीक्षा से जुड़े तनाव और शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालय, जबलपुर के छात्र  आयुष तिवारी ने प्रधानमंत्री  मोदी से प्रश्न किया कि कई बार वे शिक्षकों की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बिठा पाते हैं, उसे कैसे मैच करें? इस पर प्रधानमंत्री  मोदी ने विद्यार्थियों को समझाते हुए शिक्षकों से भी आग्रह किया कि अपने अध्‍यापन की स्‍पीड विद्यार्थियों के सीखने की गति के अनुरूप रखें। लेसन प्‍लान विद्याथिर्यों के साथ पूर्व से ही साझा करें। विद्यार्थी वह चेप्‍टर पहले से पढें, अध्‍ययन करें जो शिक्षक भविष्‍य में कक्षा में पढाने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षकों की गति से सामंजस्‍य बैठाने का सबसे अच्‍छा तरीका यह है कि पहले अपने को जोड़ो, फिर मन को जोड़ो। उसके बाद पढाई के विषय शुरू करो। प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि मन को जोड़ने का अर्थ है, विषय की तमाम जानकारियां जुटाना और जोड़ने का अर्थ है, एकाग्रता बनाए रखना। इससे आपकी समझ मजबूत होगी और आप एक कदम आगे चलेंगे। प्रधानमंत्री  मोदी ने विद्यार्थियों के साथ आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में तनावमुक्त जीवन, समय प्रबंधन, अनुशासन, जीवन कौशल एवं व्यवसायिक विकास के महत्वपूर्ण मंत्र दिए। इसके साथ ही उन्‍होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। 2018 से लगातार हो रहा आयोजन प्रधानमंत्री  मोदी वर्ष 2018 से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम का 9 वां संस्करण था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री  मोदी ने देश भर से आये विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया गया। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता- शिक्षा मंत्री  सिंह परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में स्‍कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा कन्या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी के परीक्षा मंत्र सुने। मंत्री  सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रधानमंत्री के द्वारा दिए गए सूत्रों और विचारों को आत्‍मसात कर परीक्षाओं की तैयारी करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुशासन को मजबूत करने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। समय अनुशासन सिखाता है और अनुशासन के साथ जिया गया जीवन ही सफलता की सच्ची पहचान है। जब तक असंभव को करने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक असाधारण उपलब्धियां संभव नहीं हैं। शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का भोपाल के शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम हुआ। यहां पर स्‍कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने विशिष्‍ट जनों, वरिष्‍ठ अधिकारी, अभिभावक और विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता की। संचालक लोक शिक्षण  केके द्व‍िवेदी सहि‍त कार्यक्रम के नोडल अधिकारी संयुक्‍त संचालक  एच.एन. नेमा भी उपस्थित रहे। प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान, प्रशिक्षण परिषद (SCERTS), सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों (DIETS) और प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को समारोह पर्वूक आयोजित किया गया। उक्‍त कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में विद्यार्थियों ने उत्‍साहपूर्वक सहभागिता की। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की गई थी। 9 फरवरी को होगा अगला प्रसारण परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का अगला प्रसारण 9 फरवरी 2026 को होगा। जिसमें प्रधानमंत्री  मोदी देश के विभिन्‍न अंचलों के विद्यार्थियों के साथ चर्चा करेंगे। यह कार्यक्रम विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर सुबह 10 बजे से प्रसारित किया जायेगा। प्रदेश के विद्यालयों में उक्‍त कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्‍यवस्‍थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।  

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