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हरियाणा के मंत्री अनिल विज का बड़ा आरोप, ‘प्रशासन ने मेरी जान लेने की कोशिश की…

अंबाला  हरियाणा के चर्चित बीजेपी नेता अनिल विज का एक और सनसनीखेज बयान सामने आया है। बिजली, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर आरोप लगाया कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में प्रशासन ने उन्हें हराने की पूरी कोशिश की। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें मरवाने की कोशिशें की गईं। मंत्री ने मामले में जांच की मांग की है। वह अंबाला छावनी विधानसभा सीट पर जीत के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। अनिल विज ने कहा कि चुनाव के दौरान उनके खिलाफ खूब खेल खेले गए। ‘प्रशासन ने उन्हें हराने की पूरी कोशिश की, जो जांच का विषय है। नगर परिषद ने हमारी स्वीकृत सड़कों का निर्माण रोक दिया। इसके अलावा अन्य काम भी रोक दिए।’ शाहपुर गांव की घटना का जिक्र मंत्री ने दावा किया कि प्रशासन ने इस चुनाव में खून-खराबा कराने की भी कोशिश की ताकि अनिल विज या उनका कार्यकर्ता मर जाए, ताकि चुनाव प्रभावित हो सके।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे शाहपुर गांव की धर्मशाला में एक कार्यक्रम में जाना था और इसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति ली थी। जब चुनाव आयोग अनुमति देता है तो पुलिस से एनओसी भी लेता है। जब मैं उस कार्यक्रम में गया तो वहां काफी लोग मौजूद थे, इसी बीच कई लोग लाठी-डंडे लेकर हॉल के अंदर आ गए और मारपीट शुरू हो गई। अगर इस झड़प में कुछ होता तो गलत होता। मैंने अपना धैर्य बनाए रखा, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पुलिस कहां थी?’ एक दिन पहले सुरक्षा क्यों वापस? अनिल विज ने कहा कि उन्होंने कहा कि उन्हें जेड सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन इस घटना से एक दिन पहले उनकी आधी सुरक्षा वापस ले ली गई। उस दिन सीआईडी कहां थी, उन्हें इस प्रदर्शन के बारे में क्यों नहीं पता चला? इसी तरह गांव गरनाला में भी एक घटना हुई और कार्यक्रम में जाने से पहले मैंने डीजीपी, डीसी, एसपी, चुनाव आयोग और आरओ को सूचित कर दिया था कि मेरा वहां कार्यक्रम है। लेकिन वहां भी झड़प हुई और अगर इस कार्यक्रम में किसी को कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता। अनिल विज ने कसा तंज कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पुलिस प्रशासन अनिल विज को हराने की कोशिश कर रहा था और उनके इशारे पर कुछ कार्यकर्ताओं ने बगावत कर दी। चुनाव नतीजों के दिन सभी एग्जिट पोल एजेंसियों के दावे गलत साबित हुए। मुझे पूरा भरोसा था कि मैं चुनाव जीतूंगा, पार्टी जीतेगी और वह मंत्री भी बनेंगे। कई लोगों ने यह भ्रांति फैलाई कि अनिल विज को टिकट नहीं मिलेगा, फिर कहा कि वे जीतेंगे नहीं, फिर कहने लगे कि सरकार नहीं आएगी, ये सब झूठ साबित हुआ और ये लोग विपक्ष की गोद में जाकर बैठ गए। विज ने चुटकी लेते हुए कहा कि कसाई के कहने से भैंस नहीं मरती। आशीष तायल पर अनिल विज का निशाना विज ने कार्यकर्ताओं से अंबाला सदर नगर परिषद चुनाव के लिए तैयार रहने को भी कहा। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ कई ताकतें लड़ीं। आशीष तायल नामक सज्जन ने गली-गली जाकर लोगों को चित्रा सरवारा के खेमे में शामिल करवाया और उनके पास इसके सारे सबूत हैं। उन्होंने फेसबुक पर नायब सैनी के साथ फोटो डाली ताकि वे अधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रभावित कर सकें। मैं जानता हूं कि उनके मुख्यमंत्री के साथ क्या संबंध हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि उन्होंने भाजपा के खिलाफ जो भी काम किया है, उन्हें हमारे मुख्यमंत्री के साथ फोटो डालने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें तुरंत फेसबुक से यह फोटो हटा देनी चाहिए और हम अपने मुख्यमंत्री का नाम बदनाम नहीं होने देंगे।

कर्नाटक उपचुनाव में कांग्रेस का सफाया हो जाएगा: बसवराज बोम्मई

हुबली कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सोमवार को कहा कि राज्य में आगामी उपचुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका देंगे। कांग्रेस किसानों के मुद्दों पर अपने दोहरे मानदंडों के कारण तीनों विधानसभा सीटों पर हार जाएगी। हुबली में मीडिया से बात करते हुए पूर्व सीएम और भाजपा सांसद ने कहा कि लोग वक्फ संपत्ति के नाम पर किसानों को नोटिस जारी करने के राज्य सरकार के कदम से नाराज हैं। उन्होंने सवाल किया, “मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपनी गलतियों का एहसास होने के बाद इन नोटिसों को वापस ले लिया है। यदि सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है, तो वे किसानों को दिए गए नोटिस क्यों वापस लेंगे?” कर्नाटक के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमीर अहमद खान के बयान की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि नोटिस सीएम के आदेश पर जारी किए गए थे।उपायुक्तों ने भी पुष्टि की है कि नोटिस मंत्री जमीर के निर्देश पर जारी किए गए थे। पूर्व सीएम बोम्मई ने कर्नाटक सरकार को यू-टर्न लेने वाली सरकार बताया और कहा, “वे जमीन का अधिग्रहण करते हैं और फिर उसे वापस कर देते हैं, वे वाल्मीकि आदिवासी कल्याण निगम के धन को लूटते हैं और बाद में उसे वापस करने का दावा करते हैं।” उन्होंने कहा, “वक्फ के मामले में उन्होंने किसानों को नोटिस जारी किए और जब कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा तो उन्होंने आदेश वापस ले लिया। राज्य सरकार लगातार इसी तरह से काम कर रही है।” इस बीच, भाजपा आज वक्फ बोर्ड विवाद के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन कर रही है। चन्नापटना, संदुर और शिगगांव विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं। बोम्मई के बेटे भरत बोम्मई शिगगांव विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।    

प्रधानमंत्री मोदी आज झारखंड में भरेंगे हुंकार, गढ़वा और चाईबासा में करेंगे चुनावी रैली

रांची  झारखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 4 नवंबर को गढ़वा और चाईबासा में चुनावी सभाओं को संबोधित करने जा रहे हैं. नई दिल्ली से प्रधानमंत्री गया एयरपोर्ट होते हुए गढ़वा जाएंगे और गढ़वा में चुनावी सभा को संबोधित करने के बाद करीब 12:30 बजे रांची एयरपोर्ट पहुंचेंगे. रांची एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, असम के मुख्यमंत्री और विधानसभा चुनाव सह प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा, सांसद दीपक प्रकाश, संगठन मंत्री करमवीर सिंह समेत कई अन्य भाजपा नेता मौजूद रहेंगे. रांची एयरपोर्ट पर करीब आधे घंटे तक भाजपा नेताओं से बातचीत करने के बाद प्रधानमंत्री चाईबासा के लिए रवाना हो जाएंगे. चाईबासा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा होगी, जिसके बाद रोड शो भी होने की उम्मीद है. चाईबासा कार्यक्रम स्थल पर सांसद आदित्य साहू मौजूद रहेंगे. 10 नवंबर को भी होगी पीएम मोदी की रैली झारखंड विधानसभा चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार कार्यक्रम होने वाला है. पार्टी की ओर से अब तक तय कार्यक्रम के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6 चुनावी सभाएं होंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 नवंबर को दूसरी बार झारखंड आने वाले हैं. वे उस दिन रांची और चंदनक्यारी में चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं. पीएम मोदी के अलावा बीजेपी के शीर्ष नेताओं में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं. जानकारी के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 नवंबर को रातू में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे, जिसके बाद उनका कार्यक्रम लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र में होगा. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 नवंबर को जमशेदपुर, कोडरमा और बड़कागांव में चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं.  

नगर निगम चुनावों को देखते हुए पार्टी ने नए अध्यक्ष के चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के पंजाब अध्यक्ष के पद को छोड़ने की इच्छा जताई थी। इसके साथ ही नगर निगम चुनावों को देखते हुए पार्टी ने नए अध्यक्ष के चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बताने योग्य है कि मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पार्टी को फुल टाइम के लिए अध्यक्ष चाहिए। अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए, जो पार्टी के प्रति समर्पित हो, पार्टी की मजबूती के लिए काम करे और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ सहमति रखता हो। सूत्रों के अनुसार, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा को पंजाब के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि अमन अरोड़ा हिंदू चेहरा हैं और लोगों में उनकी पहुंच है। इसके अलावा, पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी उन्हें भरपूर समर्थन प्राप्त है और पार्टी के किसी भी नेता या कार्यकर्ता के साथ उनका कोई विवाद नहीं है। अमन अरोड़ा विरोधी पक्ष के सवालों का भी मजबूती से जवाब देते हैं, जिस कारण पार्टी द्वारा उन्हें पंजाब अध्यक्ष के पद के लिए चुना जा सकता है।

नवाब जान उर्फ अमीर बाबू ने वक्फ संशोधन बिल को लेकर चिंता जताई, दर्द पैदा कर रहा वक्फ संशोधन बिल

नई दिल्ली वक्फ संशोधन बिल को लेकर देश भर में सियासी घमासान जारी है। कुछ राजनीतिक दल इसे मुसलमानों के लिए बेहतर बता रहे हैं, तो कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। इन सब के बीच एनडीए के घटक दल तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने भाजपा की टेंशन बढ़ा दी है। तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के उपाध्यक्ष नवाब जान उर्फ अमीर बाबू ने रविवार को वक्फ संशोधन बिल को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने खास बातचीत में कहा कि यह बिल मुसलमानों के दिलों में दर्द पैदा कर रहा है। उनका कहना है कि चंद्रबाबू नायडू के कहने पर ही वक्फ संशोधन बिल को लेकर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) का गठन किया गया है। नवाब जान ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू के अनुसार इस बिल को लेकर सभी का राय मशवि‍रा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस मुद्दे पर राय मशविरा चल रहा है और चंद्रबाबू नायडू ने सभी से सर्वे करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यह आवश्यक है कि इस विषय पर सभी पक्षों की बात सुनी जाए। इससे पहले नवाब जान उर्फ अमीर बाबू ने कहा था कि वक्फ संशोधन बिल को नाकाम करने के लिए हमें आगे बढ़ना है। भारत की बदकिस्मती है कि पिछले 10-12 वर्षों में यहां ऐसी घटनाएं हुईं, जो नहीं होनी चाहिए थीं। हमारे चंद्रबाबू नायडू एक सेकुलर सोच वाले इंसान हैं। वे हिंदू और मुसलमान को एक ही नजर से देखते हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि जिस धर्म का जो भी बोर्ड है, उसमें उसी धर्म के लोग होने चाहिए। हम इस वक्फ संशोधन बिल को लागू नहीं होने देंगे। बता दें कि वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा में संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया था। इस बिल के पेश होने पर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने विरोध किया था। बिल में संशोधन विधेयक के लिए भाजपा सांसद जगदंबिका पाल के नेतृत्व में जेपीसी का गठन किया गया है।

प्रियंका गांधी ने कहा- सरकार आम आदमी की अनदेखी करती है और केवल अमीर व्यापारियों के कर्ज माफ कर उन्हें बढ़ावा देती है

वायनाड प्रियंका गांधी ने रविवार को अपने भाई राहुल गांधी के साथ चुनावी मंच से महंगाई और बेरोजगारी को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार आम आदमी की अनदेखी करती है और केवल अमीर व्यापारियों के कर्ज माफ कर उन्हें बढ़ावा देती है। केरल के वायनाड लोकसभा उपचुनाव के लिए अपने प्रचार के दूसरे चरण की शुरुआत करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने निर्वाचन क्षेत्र में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल, आवास और शिक्षा में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। ग्रामीण रोजगार योजना के लिए अध‍िक न‍िवेश को संसद में सरकार पर दबाव बनाने का वादा करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अमीर व्यापारियों के 16 लाख करोड़ रुपये के ऋण माफ कर दिए, लेकिन किसानों को फसल नुकसान के लिए मुआवजा देने या बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और नौकरियों पर खर्च करने में अनिच्छुक है। बड़े व्यापारियों का फेवर लेने के लिए पीएम मोदी पर हमला करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य क्रोध और नफरत फैलाकर, आपको विभाजित करके सत्ता में बने रहना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अत्याचार कर रहे हैं और लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं। वायनाड के मतदाताओं की ओर से राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई लड़ाई को जारी रखने का वादा करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने संसद में आपकी समस्याओं को उठाकर उन्हें हल करने का बहुत प्रयास किया है। महंगाई और बेरोजगारी को मूलभूत समस्याओं के रूप में रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार लोगों के लिए काम नहीं कर रही हैं। उन्होंने वायनाड के मतदाताओं को उनके भाई राहुल गांधी के साथ खड़े होने के लिए धन्यवाद दिया, जबकि उन पर भाजपा द्वारा हर दिन हमला किया जा रहा था और उनकी छवि को खराब करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा था। वायनाड में विकास के लिए अपना खाका साझा करते हुए कांग्रेस महासचिव ने लोगों की आय बढ़ाने के लिए पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की क्षमता पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में राजनीतिक मुद्दे उठाने से परहेज करने वाले राहुल गांधी ने कहा कि देश में लड़ाई नफरत से नहीं, बल्कि विनम्रता और प्यार से बनाए गए संविधान की रक्षा और उसे कायम रखने तक सीमित है। इस दौरान उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कभी-कभी मैं अधिक तार्किक होता हूं, लेकिन वह मुझसे अधिक भावुक होती हैं। इसलिए मुझे विश्वास है कि आपको सबसे अच्छा सांसद मिलने वाला है। मैं यह दृढ़ता से कह रहा हूं कि उनसे बेहतर कोई भी आपका सांसद बनने के लिए उपयुक्त नहीं है। प्रियंका गांधी की प्रतिबद्धता का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज सुबह जब वह यहां आ रही थीं, तो उनके पास एक सूची थी कि हम भविष्य में कहां ध्यान केंद्रित करेंगे, हम वायनाड के लिए कहां लड़ेंगे और हम वायनाड की क्षमताओं को कहां मजबूत करेंगे।

जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने सत शर्मा बने नए अध्यक्ष, रविंदर रैना को नई जिम्मेदारी, बड़ा फेरबदल हुआ

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने संगठन में बड़ा बदलावकिया है। बीजेपी ने सत शर्मा का केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी की कमान दे दी है। बीजेपी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सत शर्मा को जम्मू-कश्मीर का बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं रविंदर रैना को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव से पहले सत शर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया था। भाजपा महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में यह घोषणा की गई। जम्मू-कश्मीर में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सत शर्मा को टिकट नहीं दिया था। इसके बाद उन्हें प्रदेश इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। रैना को इस बार विधानसभा चुनाव में नौशेरा से हार का सामना करना पड़ा था। लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे रैना को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल कर लिया गया। बीजेपी की जम्मू-कश्मीर इकाई अब विधानसभा सत्र से पहले अपने विधायक दल का नेता भी चुनेगी। जानकारी के मुताबिक रविवार को ही श्रीनगर में बैठक होने वाली है। इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 90 में से 29 सीटों पर सफलता मिली है। अब तक का बीजेपी का जम्मू-कश्मीर विधानसभा में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन है। नगरोटा सीट पर बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह राणआ ने 30 हजार से ज्यादा सीटों से जीत हासिल की थी। राणा का शुक्रवार को निधन हो गया है। उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की रेस में सबसे आगे माना जा रहा था। सूत्रों का कहना है कि पांच नामों पर बीजेपी में विचार किया जा रहा है। वहीं जम्मू-कश्मीर में चार नवंबर से ही विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है। मुबारक गुल को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। छह नवंबर को उपराज्यपाल का अभिभाषण होगा।

अगर भाजपा झारखंड में सत्ता में आई तो राज्य में लागू होगा UCC: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

रांची केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को झारखंड में बड़ी घोषणा कर दी। शाह ने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (BJP) झारखंड में सत्ता में आई तो राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी, लेकिन जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा। शाह ने झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा का घोषणापत्र- ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए घोषणा की कि राज्य में उद्योगों और खदानों के कारण विस्थापित हुए लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए विस्थापन आयोग का गठन किया जाएगा। शाह ने रांची में कहा कि हमारी सरकार झारखंड में समान नागरिक संहिता लागू करेगी, लेकिन जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा। (राज्य में) झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) सरकार इस झूठ का प्रचार कर रही है कि समान नागरिक संहिता से आदिवासियों के अधिकार और संस्कृति प्रभावित होगी। यह पूरी तरह निराधार है, क्योंकि उन्हें इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा। शाह ने कहा कि यदि भाजपा झारखंड में सत्ता में आती है तो वह ‘सरना धर्म कोड’ के मुद्दे पर विचार-विमर्श करेगी और उचित निर्णय लेगी। झारखंड में उद्योगों और खदानों के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए विस्थापन आयोग का गठन किया जाएगा। पेपर लीक की जांच करेंगी CBI और SIT यूसीसी को लेकर बड़ी घोषणा करते हुए शाह ने कहा कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो झारखंड में 2.87 लाख सरकारी नौकरियों सहित रोजगार के पांच लाख अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड में पेपर की सीबीआई और एसआईटी से जांच कराई जाएगी और दोषियों को दंडित किया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा झारखंड में घुसपैठियों से जमीन वापस लेने और अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करने के लिए कानून लाएगी। उन्होंने दावा किया कि अवैध प्रवासियों से ‘माटी, बेटी, रोटी’ को खतरा है और भाजपा स्थानीय लोगों को सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने झामुमो नीत सरकार पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और दावा किया कि राज्य में जनजातीय आबादी घट रही है और जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं और तुष्टीकरण अपने चरम पर है। झारखंड देश का सबसे भ्रष्ट राज्य है। शाह शनिवार रात राज्य की राजधानी रांची पहुंचे। राज्य में 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 13 और 20 नवंबर को दो चरणो में होंगे और मतों की गिनती 23 नवंबर को होगी।

महाराष्ट्र चुनाव में कैसे चल रहा ‘नेम गेम’, भाजपा के लिए अजित पवार ने चला दांव?

मुंबई चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दल सभी दांव-पेच आजमाते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। यहां पर एनसीपी मुखिया अजित पवार ने ‘नेम गेम’ शुरू किया है। असल में अजित पवार ने कटोल विधानसभा क्षेत्र से अनिल देशमुख नाम का प्रत्याशी उतार दिया है। वहीं, उनके सामने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के बेटे सलिल देशमुख हैं। बताया जा रहा है कि उनका यह दांव वोटरों को कंफ्यूज करने और भाजपा की मदद के लिए है। असल में इस सीट पर सलिल का मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार चरणसिंह ठाकुर से है। महायुति के साथी की राह आसान बनाने के लिए अजित पवार ने अनिल को मैदान में उतारा है। माना जा रहा है अनिल देशमुख, सलिल देशमुख का कुछ वोट काटने में कामयाब रहेंगे, जिससे भाजपा उम्मीदवार के जीत का रास्ता खुल सकता है। पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख इस विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं। अनिल देशमुख भी घड़ी चुनाव चिह्न पर ही चुने गए थे। ऐसे में अजित को उम्मीद है कि अनिल देशमुख के नाम पर कुछ वोट बंट सकते हैं। इस बार एनसीपी के उम्मीदवार अनिल देशमुख का पूरा नाम अनिल शंकरराव देशमुख है। उनके सामने एनसीपी-शरद पवार के सलिल देशमुख हैं, जो अपने पिता अनिल देशमुख के नाम पर वोट जुटाना चाहेंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऐसे में वोटरों के बीच काफी कंफ्यूजन होगा और सलिल चौधरी के लिए चुनौतियां भी बढ़े सकती हैं। एनसीपी उम्मीदवार अनिल देशमुख द्वारा पेश चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक उनके पास सिर्फ 6.6 लाख रुपए की कुल संपत्ति है। गौरतलब है महाराष्ट्र में सियासी लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है। एनसीपी ने नवाब मलिक को उम्मीदवार बनाया है। इसको लेकर भी महायुति में दरार की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि ऐसा करने से राज्य में अन्य जगहों पर ‘महायुति’ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मलिक को धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन पर गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के करीबी लोगों से संबंध रखने का भी आरोप है। वह राज्य में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुंबई की मानखुर्द-शिवाजीनगर सीट से राकांपा के आधिकारिक उम्मीदवार हैं।

सांसद कुमारी सैलजा को पार्टी हाईकमान द्वारा एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की उम्मीद

चंडीगढ़ विधानसभा चुनाव के बाद से हरियाणा कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। विधायक दल के नेता के लिए लॉबिंग चल रही है तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी नई नियुक्ति की संभावना जोर पकड़ रही है। कांग्रेस महासचिव एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा को पार्टी हाईकमान द्वारा एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की उम्मीद है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर सैलजा की नियुक्ति को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। हरियाणा विधानसभा में इस बार कांग्रेस के 37 विधायक चुनकर आए हैं, जिनमें से 33 विधायक हुड्डा समर्थक हैं। चार विधायकों को कुमारी सैलजा समर्थक माना जाता है। इन चार विधायकों के बूते पर हालांकि सैलजा गुट को ना तो विधायक दल के नेता का पद मिल सकता है और ना ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर उनकी दावेदारी बनती है, लेकिन विधानसभा चुनाव में जिस तरह से सैलजा ने नाराज होकर बड़ा खेल किया, उससे कांग्रेस हाईकमान सकते में हैं। खींचतान से पार्टी के हाथ से छूट गई सत्ता विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के चाहे कितने भी कारण रहे हों, लेकिन हुड्डा व सैलजा की खींचतान की वजह से पार्टी के हाथ से सत्ता छूट गई है। रणनीतिकारों को पूरी उम्मीद थी कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी, लेकिन पार्टी के राज्य स्तरीय नेताओं की आपसी खींचतान ने कांग्रेस को पांच साल पीछे धकेल दिया है। थिंक टैंक का मानना है कि यदि हुड्डा और सैलजा मिलकर चुनाव लड़ते तो राज्य में कांग्रेस की सरकार बनना तय था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हुड्डा खेमा अपने स्वयं के बूते पर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी हुई मानकर चल रहा था, जबकि सैलजा गुट को अपनी नाराजगी के माध्यम से ताकत दिखाने का मौका मिल गया, जिसका पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। दोबारा जिम्मेदारी दे सकती है पार्टी कांग्रेस के इन नेताओं में अब भविष्य में तालमेल बना रहे और पार्टी में सिर्फ हुड्डा का एकाधिकार ना रहे, इसके लिए हुड्डा के स्थान पर किसी दूसरे को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाने की चर्चा चल रही है। दूसरा पहलू यह भी है कि हुड्डा के बिना कांग्रेस की राजनीतिक प्रगति संभव नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हाईकमान किसी दूसरे को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है। कुमारी सैलजा चूंकि पहले भी हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं तो ऐसे में उन्हें पार्टी दोबारा जिम्मेदारी दे सकती है, जिसका अंदर ही अंदर हुड्डा खेमा विरोध कर रहा है।

जीतन राम मांझी को ‘पलटू’ बताते हुए कहा कि यह उन्हें भी नहीं पता होगा कि कब पलटकर वह राजद के साथ आ जाएंगे: प्रशांत किशोर

गया बिहार में चार विधानसभा क्षेत्रों में हो रहे उप चुनाव के प्रचार में जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच, जन सुराज पार्टी के संस्थापक और पार्टी के स्टार प्रचारक प्रशांत किशोर ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी को ‘पलटू’ बताते हुए कहा कि यह उन्हें भी नहीं पता होगा कि कब पलटकर वह राजद के साथ आ जाएंगे। प्रशांत किशोर ने इमामगंज विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज प्रत्याशी जितेंद्र पासवान के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में दो ही पार्टियां हैं- एक लालू यादव की राजद और दूसरी नरेंद्र मोदी की भाजपा। उन्होंने कहा कि जदयू के नीतीश कुमार और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी भी नहीं जानते कि वे कब पलटकर लालटेन थाम लेंगे और कब कूदकर कमल पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले जनता कहती थी कि हमारे पास विकल्प की कमी है। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। अब जनता के पास जन सुराज का विकल्प है, जिसकी सोच समाज के अच्छे लोगों को राजनीति से जोड़ना और जनता का राज स्थापित करना है। उन्होंने आगे कहा कि उपचुनाव में जनता को संकल्प लेना होगा कि वह अपने बच्चों के भविष्य, उनकी शिक्षा और रोजगार के लिए वोट करेंगे, ना कि मांझी या किसी अन्य नेता के बच्चों को राजा बनाने के लिए। प्रशांत किशोर ने लोगों को भरोसा देते हुए कहा कि अगले वर्ष 2025 के छठ के बाद आपके बच्चों, पति और आपके भाई को अपना घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्य में मजदूरी करने नहीं जाना पड़ेगा। जन सुराज यह सुनिश्चित करेगा कि बिहार के युवाओं को बिहार में ही 10-12 हजार रुपये का रोजगार मिले।

लाइट विवाद मामले में नितेश राणे ने चेतावनी देते हुए कहा – इस तरह के लोगों को 90 प्रतिशत हिंदुओं का ध्यान रखना होगा जो यहां रहते

नवी मुंबई महाराष्ट्र के नवी मुंबई के एक सोसायटी में चेयरमैन द्वारा दीपावली पर लाइट लगाने से रोकने वाले विवाद के बाद भाजपा नेता नितेश राणे ने पीड़ित पक्ष से मुलाकात की। साथ ही लाइट लगाने से रोकने वाले आरोपियों को कड़ी चेतावनी भी दी। दरअसल, नवी मुंबई के एक सोसायटी में चेयरमैन ने लोगों को दीपावली के अवसर पर अपने-अपने घरों पर लाइट लगाने पर रोका था, वहीं महिलाओं के साथ अभद्रता भी की थी। लोगों को लाइट लगाने से रोकने वाला चेयरमैन मुस्लिम समुदाय का था। मामला बढ़ने के बाद मौके पर दोनों पक्षों के लोग इकट्ठे हो गए थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने एक पक्ष के खिलाफ लोगों को गाली-गलौज और धमकी देने का मामला दर्ज किया था। मामला प्रकाश में आने के बाद भाजपा नेता नितेश राणे ने पीड़ित पक्ष से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने इस पूरे मामले में अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिहादी मानसिकता के लोगों द्वारा प्रताड़ित करने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। नितेश राणे ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के लोगों को 90 प्रतिशत हिंदुओं का ध्यान रखना होगा जो यहां रहते हैं। वर्ना यह टकराव घातक साबित होगा और मुस्लिम पक्ष भी अपने त्योहार को शांति से नहीं मना पाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर कहीं पर कानून कम पड़ेगा, तो आगे की शिक्षा हम देंगे। हाई कोर्ट का जजमेंट है कि सोसायटी में बकरा नहीं काटा जा सकता, इसलिए ईद के समय पर एक महिला ने बकरा काटने पर सवाल उठाया था और जिसका बदला लिया जा रहा था। लेकिन, ये तो कानून है कि सार्वजनिक जगहों पर बकरा नहीं काटा जा सकता। बता दें कि पूरा मामला महाराष्ट्र के नवी मुंबई के तलोजा स्थित पंचानंद सोसायटी का है। जब सोसायटी के लोग 28 अक्टूबर को अपने घरों के बाहर और इमारत पर लाइट लगा रहे थे, उस समय सोसायटी के मुस्लिम चेयरमैन ने लाइट लगाने को लेकर अपनी आपत्ति जताई और लाइटिंग निकालकर फेंकने की धमकी दी साथ ही साथ महिलाओं के साथ गाली-गलौज भी की।  

टीटीडी हिंदू धर्म का बोर्ड है और वक्फ मुसलमान धर्म का बोर्ड है: असदुद्दीन ओवैसी

हैदराबाद एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ बोर्ड और तिरुमाला बोर्ड को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहाकि एक तरफ तो टीटीडी बोर्ड में एक भी गैर हिंदू नहीं रखने की बात चल रही है। दूसरी तरफ मोदी सरकार बिल में वक्फ बोर्ड परिषद में दो गैर हिंदुओं को रखने का प्रावधान ला रही है। ओवैसी ने आगे कहाकि टीटीडी हिंदू धर्म का बोर्ड है और वक्फ मुसलमान धर्म का बोर्ड है। दोनों के नियमों में समानता क्यों नहीं हो सकती है। एआईएमआईएम सांसद ने आगे कहाकि अगर टीटीडी के ट्रस्टीज मुसलमान नहीं हो सकते हैं तो फिर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम क्यों होने चाहिए? ओवैसी ने मीडीया से बात करते हुए तिरुमाला बोर्ड से जुड़े विभिन्न नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहाकि इस ट्रस्ट के सदस्यों में कोई भी गैर हिंदू नहीं है। उन्होंने आगे कहाकि यह तो बात सिर्फ ट्रस्ट के सदस्यों की है। अब बोर्ड के अध्यक्ष कह रहे हैं कि वहां जो कोई भी काम करेगा वह हिंदू होना चाहिए। चेयरमैन हिंदू धर्म के लिहाज से यह बात कर रहे हैं। हमें इस बात पर कोई ऐतराज भी नहीं है। एआईएमआईएम सांसद ने आगे कहाकि हमें ऐतराज वक्फ बोर्ड को लेकर प्रस्तावित बिल पर है। उन्होंने कहाकि मोदी सरकार कह रही है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल में दो गैर मुस्लिम होने चाहिए। आखिर वक्फ बिल में इस तरह के प्रावधान क्यों ला रहे हैं? औवैसी ने आगे कहाकि इसी तरह स्टेट वक्फ बोर्ड में सभी मुस्लिम सदस्य रखने की मांग है। लेकिन प्रस्तावित बिल में उसे भी कम कर दिया जा रहा है। उन्होंने कहाकि वक्फ बोर्ड में नान मुस्लिमों को क्यों रखा जा रहा है।

‘कांग्रेस से दूर रहो कहते थे बाला साहेब , लेकिन उद्धव ने…’, शिंदे ने बताया क्यों किया था ‘तख्तापलट’

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा चुनाव के बीच में उद्धव ठाकरे पर शिवसेना में फूट डालने का आरोप लगाया है। एएनआई को दिए एक खास इंटरव्यू में शिवसेना में हुए विभाजन पर बोलते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि मैं महाविकास अघाड़ी सरकार का हिस्सा था, लेकिन जो सरकार बनी। वह बाला साहेब ठाकरे के आदर्शों के खिलाफ थी। शिवसेना और बीजपी का गठबंधन ही आगे का सही रास्ता था। हालांकि उद्धव ठाकरे के निजी स्वार्थों के कारण कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ, जो बाला साहेब कभी नहीं चाहते थे। इसके चलते पार्टी अनुशासन का पालन करते हुए और बदलाव लाने के लिए उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया। शिंदे ने क्याें उठाया कदम? शिंदे ने आगे कहा कि शिवसेना कार्यकर्ता होने के नाते हमने पार्टी अनुशासन का पालन किया और बदलाव की जरूरत को महसूस किया। हमने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास किया लेकिन हम असफल रहे और दुर्भाग्य से हमारी पार्टी और कार्यकर्ताओं को जो नुकसान हो रहा था, हमने महाराष्ट्र के लोगों की सुनने का फैसला किया, जो शिवसेना-बीजेपी गठबंधन चाहते थे। हमारे विधायक भी थके हुए थे क्योंकि उनके क्षेत्रों में कोई काम नहीं हो रहा था। इसलिए हमने सरकार बदली और बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के साथ एक नई सरकार बनाई। महायुति सरकार की तारीफ महायुति सरकार की सराहना करते हुए सीएम शिंदे ने गर्व किया कि इस सरकार ने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने उन परियोजनाओं को फिर से शुरू किया जिन्हें MVA सरकार ने रोक दिया था। महायुति की उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि उनके शासन के दौरान महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी या स्वच्छता, हर क्षेत्र में शीर्ष पर रहा। उन्होंने कहा कि राज्य ने उनके शासनकाल में ही 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया। दो साल के काम का बखान सीएम शिंदे ने कहा कि मुझे गर्व और खुशी है कि हमने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। पिछले दो सालों में हमारी सरकार को उसके काम के लिए सराहना मिली है। पहले दिन से ही हमने किसानों, श्रमिकों, युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया, और विकास परियोजनाएं। हमने मेट्रो, बुलेट ट्रेन और राजमार्गों जैसी रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू किया। इससे महाराष्ट्र निवेश के अनुकूल बना। आज मैं गर्व से कहता हूं कि हमने 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। MVA शासन के दौरान महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर था, लेकिन जब हम आए, तो महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी और स्वच्छता में शीर्ष पर रहा। हमारी कल्याणकारी योजनाएं, जैसे लाडली बहना योजना आदि लड़कियों को वजीफा और मुफ्त उच्च शिक्षा प्रदान करती हैं। हमने दो सालों में बहुत कुछ हासिल किया है और मैं आभारी हूं। केंद्र की कठपुतली वाले आरोप पर क्या बोले? यह पूछे जाने पर कि विपक्ष उनकी सरकार को केंद्र सरकार की कठपुतली बता रहा है। इस पर सीएम शिंदे ने कहा कि जब से महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार आई है, राज्य को केंद्र से कई लाभ मिले हैं। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार की ‘कड़ी मेहनत’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सराहा है। शिंदे ने कहा, मुझे खुशी है कि पिछले दो सालों में हमारी सरकार की कड़ी मेहनत को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सराहा है। एमवीए सरकार पर हमला पिछली MVA सरकार पर परोक्ष हमला करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि सीएम होने का मतलब लोगों की सेवा करना है, न कि केवल फेसबुक लाइव के जरिए सरकार चलाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सुनती है और काम करती है, बहरी या गूंगी नहीं है। हमारी सरकार किसानों को प्राथमिकता देती है, सहायता और समर्थन प्रदान करती है। हमने किसानों के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। यह किसानों की सरकार है।

किस पार्टी की सदस्य है निर्मला सप्रे? सस्पेंस ख़त्म करने कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष से बात करेगी

भोपाल सागर जिले के बीना विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर निर्णय करने के लिए कांग्रेस विधायक दल विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से बात करेगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए प्रमाण सहित आवेदन दिया है लेकिन उस पर अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है। उधर, सप्रे लगातार भाजपा की बैठकों में भाग ने रही हैं। वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर निर्मला सप्रे बीना विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं। लोकसभा चुनाव के समय वे भाजपा के संपर्क में आईं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंच भी साझा किया। उन्होंने क्षेत्र के विकास का हवाला देते हुए पार्टी प्रत्याशी के स्थान पर भाजपा के लिए काम किया। भाजपा में शामिल होने की बात भी कही। इसे लेकर कांग्रेस ने उनसे दूरी बना ली। उमंग सिंघार ने किया था आवेदन विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया और सदन में अपने साथ नहीं बैठाने का निर्णय लेकर विधानसभा सचिवालय को सूचित भी कर दिया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी और रामनिवास रावत के विरुद्ध दलबदल कानून के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया। दलबदल नहीं किया है इस पर कार्रवाई से पूर्व रावत ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया, परंतु सप्रे ने ऐसा नहीं किया। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें नोटिस जारी कर दलीय स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। इस पर पहले तो उन्होंने जवाब देने का समय मांग लिया और फिर दूसरे नोटिस के जवाब में आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने दलबदल नहीं किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेना है, जो अभी तक नहीं हुआ है। भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में नजर आईं थी सप्रे उधर, सप्रे पिछले सप्ताह प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में भाग लेने पहुंचीं। मीडिया ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा, पर वे टाल गईं। अब कांग्रेस विधायक दल सप्रे की पार्टी विरोधी गतिविधियों के प्रमाण सबके सामने होने को आधार बनाकर दलबदल संबंधी आवेदन पर शीघ्र निर्णय करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से मिलेगा। अब कोई संशय की स्थिति नहीं है विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि अब कहीं कोई संशय की स्थिति नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा की देशभर में प्रतिष्ठा है, पर ऐसे प्रकरणों से साख प्रभावित होती है। इसलिए अध्यक्ष को शीघ्र निर्णय लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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