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शाइना एनसी पर अपने बयान के लिए शिवसेना (यूबीटी) के नेता अरविंद सावंत ने मांगी माफी

मुंबई उद्धव ठाकरे की पार्टी यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने पूर्व बीजेपी नेता और शिवसेना उम्मीदवार शाइना एनसी को लेकर दिए गए ‘इम्पोर्टेड माल’ वाले बयान पर माफी मांगी है। अरविंद सावंत ने कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। उनका इरादा किसी महिला को अपमान करने का नहीं था। अगर किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची है तो वह माफी मांगते हैं। यूबीटी सांसद ने कहा कि अपने 55 साल की राजनीति में उन्होंने कभी किसी महिला का अपमान नहीं किया है। माफी के साथ बीजेपी पर सवाल भी उठाए शिवसेना(यूबीटी) सांसद ने कहा कि उन्होंने अपने बयान में किसी नेता का नाम नहीं लिया था। केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए बयान को तोड़ मरोड़कर बताया गया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से ही महिलाओं का सम्मान करते रहे हैं। उन्होंने अन्य दलों के नेताओं के बयान पर भी सवाल उठाए। अरविंद सावंत ने कहा कि बीजेपी नेता आशीष शेलार ने किशोरी पेडनेकर के बारे में क्या कहा? अब्दुल सत्तार ने सुप्रिया सुले के बारे में क्या कहा? क्या सभी घटनाओं में एफआईआर दर्ज की गई? उन्होंने इन नेताओं के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। इस बीच यूबीटी नेता संजय राउत ने भी अरविंद सावंत का बचाव किया। संजय राउत ने कहा कि शाइना बीजेपी से इम्पोर्ट होकर शिवसेना में आई हैं, इसलिए उन्होंने गलत नहीं कहा। कल बोला था यहां इम्पोर्टेड नहीं चलेगा… बता दें कि उद्धव सेना के सांसद अरविंद सांसद ने शुक्रवार को मुंबा देवी सीट से शाइना एन सी की उम्मीदवार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यहां इम्पोर्टेड नहीं चलेगा। अमीन पटेल को ओरिजिनल माल है। हमारे यहां ऑरिजनल माल चलता है। इसके बाद मुंबई की सियासत गरमा गई। शाइना एन सी ने इस मामले में नागपाड़ा पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराया। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब दिया कि , महिला हूं, माल नहीं हूं। शाइना एन सी बीजेपी की प्रवक्ता रही हैं। एकनाथ शिंदे ने जब शाइना को उम्मीदवार बनाया तब वह बीजेपी छोड़कर शिवसेना में शामिल हो गईं। 29 अक्टूबर को उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया। मुंबादेवी में उनका मुकाबला कांग्रेस के अमीन पटेल से है।

प्रशांत किशोर चुनावी रणनीति बनाने के लिए कितनी फीस लेते थे ? किया चौंकाने वाला खुलासा

पटना  बिहार की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इस उपचुनाव में इंडिया गठबंधन और एनडीए के प्रत्याशियों के बीच टक्कर है। हालांकि, जन सुराज भी चुनावी मैदान में है। ऐसे में इस बात की चर्चा खूब हो रही है कि प्रशांत किशोर चुनाव में इतना खर्च कैसे कर रहे हैं? अब खुद उन्होंने इसका खुलासा किया है। पूर्व में चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह किसी पार्टी को एक चुनाव में सलाह देने के 100 करोड़ या इससे ज्यादा फीस लेते थे। प्रशांत किशोर ने कहा, दस राज्यों में उनकी बनाई सरकार चल रही है, तो क्या हमको अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाने का पैसा नहीं मिलेगा? इतना कमजोर समझ रहे हो आप? उन्होंने आगे कहा, हम दो साल तक अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाते रहेंगे, उसके बदले केवल एक चुनाव में जाकर किसी को सलाह देंगे तो एक दिन में सारा पैसा आ जाएगा। बता दें, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बेलागंज, इमामगंज, रामगढ और तरारी में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। अगले 8 साल सिर्फ बिहार पर फोकस जन सुराज चीफ प्रशांत किशोर ने उनका फोकस सिर्फ बिहार है और अगले 8 साल तक वह सिर्फ बिहार की बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने के काम करेंगे। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार आज कल यह कहते हैं कि लालू प्रसाद के राज में गया शाम छह बजे बंद हो जाता था, हमारी सरकार आने के बाद व्यवस्था में बदलाव आया है। हम नीतीश कुमार से पूछना चाहते हैं कि गया, हैदराबाद, बैंगलोर जैसा कब बनेगा। लालू यादव को दिया बड़ा ऑफर बिहार में जाति की राजनीति पर प्रशांत किशोर ने कहा, जाति की राजनीति नहीं हो रही है। सिर्फ परिवारवाद की राजनीति होती है। उन्होंने कहा कि लालू यादव की इच्छा है कि उनका बेटा बिहार का राजा बन जाए। भाजपा नीतीश के सहारे में बिहार में अपनी नैया पार लगाने में लगी है। कुछ ऐसा ही हाल नीतीश का भी है। वहीं, जीतन राम मांझी चाहते हैं कि उनके परिवार के लोग मंत्री, सांसद और विधायक बने रहें। अगर लालू यादव अपने समाज के किसी काबिल व्यक्ति को सीएम का चेहरा बनाने की बात करते हैं, तो हम कैमरे के सामने कह रहे हैं कि जन सुराज लालू यादव और उनकी पार्टी को समर्थन देगी।

प्रदेश की 288 विधानसभा सीटों पर मतदान 20 नवंबर को होगा, CM योगी तक जाने कितनी चुनावी जनसभाएं करेंगे

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार प्रदेश की 288 विधानसभा सीटों पर मतदान 20 नवंबर को होगा। इसके बाद चुनाव परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।इन चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियाँ बना रहे हैं। मतदाता जागरूकता बढ़ाने और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। चुनावों की तैयारी के इस दौर में सभी पार्टियाँ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। 20 नवंबर का दिन महाराष्ट्र के राजनीतिक भविष्य का निर्धारण करेगा। पिछले चुनावों का नज़रिया 2019 के विधानसभा चुनाव में, भाजपा को 105, शिवसेना को 56, NCP को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। चुनाव के बाद, शिवसेना और NCP में बंटवारा हो गया। NCP ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, जबकि उद्धव ठाकरे शिवसेना UBT के नेता बने। राजनीतिक बदलाव जून 2022 में, एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना ने उद्धव गुट के 40 विधायकों को तोड़कर अपने साथ मिला लिया। इसके परिणामस्वरूप, शिंदे गुट के पास बहुमत आ गया और महायुति की सरकार का गठन हुआ, जिसमें एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने।   चुनावी मुकाबला 2024 के चुनाव में, शिवसेना शिंदे गुट और शिवसेना उद्धव गुट अपने सहयोगी दलों के साथ आमने-सामने हैं। शिंदे गुट का सहयोगी दल भाजपा है, जबकि उद्धव गुट का सहयोगी दल कांग्रेस है। दोनों गुट अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरेंगे। भाजपा की चुनावी तैयारियां भाजपा महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के लिए बड़े नेताओं की 50 से ज्यादा सभाएं आयोजित करने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य बड़े नेता महाराष्ट्र में जनसभाएं करेंगे।   प्रमुख नेताओं की जनसभाएं     प्रधानमंत्री मोदी: 8 सभाएं     देवेंद्र फड़णवीस: 50 सभाएं     अमित शाह: 20 सभाएं     नितिन गडकरी: 40 सभाएं     योगी आदित्यनाथ: 15 सभाएं     चन्द्रशेखर बावनकुले: 40 सभाएं   महायुति में सीट शेयरिंग महायुति में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो गया है:     भाजपा: 148 सीटें     शिवसेना (शिंदे): 85 सीटें     NCP (अजित पवार): 52 सीटें भाजपा ने अपने हिस्से की 4 सीटें सहयोगी दलों को दी हैं। शिवड़ी विधानसभा सीट पर शिंदे गुट ने MNS को समर्थन दिया है।   महाविकास अघाड़ी का फॉर्मूला महाविकास अघाड़ी (MVA) में:     कांग्रेस: 102 सीटें     उद्धव ठाकरे गुट: 89 सीटें     शरद पवार गुट: 87 सीटें 13 सीटें महाविकास अघाड़ी के सहयोगी दलों को दी गई हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में राजनीतिक पटल पर बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सभी पार्टियाँ अपने-अपने तरीके से चुनावी रणनीतियों पर काम कर रही हैं।

प्रमोद कृष्णम ने कहा- कांग्रेस को अपना ‘दफ्तर’ और ‘झंडा’ भी ‘सपा’ को सौंप देना चाहिए

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सभी नौ सीटों पर होने वाले उपचुनाव में इंडिया गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों को उतारने की घोषणा की है। कांग्रेस ने यूपी में एक भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा है, इसको लेकर यूपी सियासत गरमा गई है। सपा के इस फैसले पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस पर तंज कसा है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उत्तर प्रदेश उपचुनाव में सभी नौ सीटों पर विपक्षी गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को उतारने के ऐलान के बाद कांग्रेस पर बड़ा तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को अपना दफ्तर और झंडा भी सपा को दे देना चाहिए। प्रमोद कृष्णम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस को अपना ‘दफ्तर’ और ‘झंडा’ भी ‘सपा’ को सौंप देना चाहिए।” बता दें कि यूपी नौ सीटों विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग का मुद्दा काफी चर्चा में रहा। कांग्रेस जहां प्रदेश में चार से पांच सीटें मांग रही थी, जबकि सपा, कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें देने को तैयार थी। वहीं सपा ने अब सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “बात सीट की नहीं जीत की है’ इस रणनीति के तहत ‘इंडिया गठबंधन’ के संयुक्त प्रत्याशी सभी 9 सीटों पर समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ के निशान पर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एक बड़ी जीत के लिए एकजुट होकर, कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी है। इंडिया गठबंधन इस उपचुनाव में, जीत का एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।” उन्होंने कहा था, कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ आने से समाजवादी पार्टी की शक्ति कई गुना बढ़ गई है। इस अभूतपूर्व सहयोग और समर्थन से सभी 9 विधानसभा सीटों पर ‘इंडिया गठबंधन’ का एक-एक कार्यकर्ता जीत का संकल्प लेकर नई ऊर्जा से भर गया है। ये देश का संविधान, सौहार्द और पीडीए का मान-सम्मान बचाने का चुनाव है। इसलिए हमारी सबसे अपील है; एक भी वोट न घटने पाए, एक भी वोट न बंटने पाए। देशहित में ‘इंडिया गठबंधन’ की सद्भाव भरी ये एकता और एकजुटता आज भी नया इतिहास लिखेगी और कल भी।” बता दें कि यूपी की सभी नौ सीटों पर उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान होंगे, वहीं इसके नतीजे 23 नवंबर को सामने आएंगे। नामांकन की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर है।  

Maharashtra Elections: मैदान में 8,000 उम्मीदवार, किस पार्टी के हिस्से कितनी सीटें?

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में सीट बंटवारे की तस्वीर अब साफ हो गई है, क्योंकि मंगलवार को नामांकन समाप्त हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 148 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है – जो आधा दर्जन प्रमुख राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण चुनाव में 103 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। शिंदे की शिवसेना ने 80 उम्मीदवार उतारे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 80 कैंडिडेट उतारे हैं। दूसरे उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की NCP ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 53 सीटों पर अपने कैंडिडेटों को उतारा है। पांच सीटें अन्य महायुति सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि दो खंडों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। MVA में सीट बंटवारे की व्यवस्था विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में कांग्रेस ने 103 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 89 और NCP (SP) ने 87 उम्मीदवार नामित किए। 6 सीटें अन्य एमवीए सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि तीन विधानसभा क्षेत्रों पर कोई स्पष्टता नहीं थी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस 8,000 उम्मीदवार मैदान में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे के प्रमुख राजनीतिक दलों सहित लगभग 8,000 उम्मीदवारों ने 288 विधानसभा सीटों के लिए अपने नामांकन दाखिल किए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 7,995 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग (EC) के पास 10,905 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। कब होगी नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी की लास्ट डेट? उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 22 अक्टूबर को शुरू हुई और 29 अक्टूबर को समाप्त हो गई। नामांकन पत्रों का सत्यापन और जांच 30 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर (अपराह्न 3 बजे तक) है।

बृजभूषण का पप्पू यादव पर तंज- बाहुबली बनते हैं और अब सुरक्षा मांग रहे, लॉरेंस पर क्यों बोले

कैसरगंज. यूपी में कैसरगंज के पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद पप्पू यादव पर तंज किया है। बृजभूषण ने कहा कि बिहार के अंदर एक नेता बड़े बाहुबली बनते हैं और अब सुरक्षा मांग रहे हैं। ऐसा बयान क्यों देते है जो सुरक्षा मांगनी पड़े। दरअसल, संसाद पप्‍पू यादव ने कुछ दिनों पहले कहा था कि वह 24 घंटे में लॉरेंस बिश्‍नोई का नेटवर्क खत्‍म कर सकते हैं। इसके बाद उन्‍हें जान से मारने की धमकी मिलने लगी जिस पर पप्‍पू यादव ने सुरक्षा की मांग की है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पैतृक आवास पर समर्थकों से मुलाकात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोई हैं बिहार के बड़े बह़ुबली नेता हैं जो हर विषय पर बोलते हैं। अब सुरक्षा मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा बयान ही क्यों दिया था कि सुरक्षा मांगनी पड़े। आजकल जिसको देखो वही टिप्पणी करने लगता है। इनाम घोषित कर दे रहा है। उसके बाद सुरक्षा मांगने लगता है। बृजभूषण ने कहा कि मेरी सरकार से अपील है कि इन सब पर रोक लगना चाहिए। ऐसा करने वालों को सरकार कोई सुरक्षा ना दे। उन्होंने कहा कि देश, धर्म, समाज और व्यक्ति पर बोलने वालों पर रोक लगनी चाहिए। समाज में नफरत फैलाने वालों पर नकेल लगाना जरूरी है। पप्पू यादव के लिए जेड प्लस सुरक्षा की मांग आपको बता दें कि विश्नोई गैंग द्वारा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को जान से मारने की धमकी की मिली है। सांसद कार्यालय के सचिव देवाशीष पासवान ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की जाय। उन्होंने कहा कि सांसद को बार-बार माफियाओं द्वारा पहले भी कई बार धमकी मिल चुका है। गृह मंत्री से आग्रह किया कि सांसद पप्पू यादव को अविलंब जेड प्लस सुरक्षा मुहैया कराएं। पप्पू ने लॉरेंस बिश्नोई को दो टके का क्रिमिनल कहा था सांसद पप्पू यादव ने बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद लॉरेंस बिश्नोई को दो टके का क्रिमिनल कहा था और दावा कर दिया कि कानून इजाजत दे तो वो 24 घंटे में लॉरेंस का नेटवर्क खत्म कर देंगे। जेल में सुरक्षित बैठा लॉरेंस बिश्नोई कई चर्चित लोगों की हत्या सुपारी किलरों से करवा चुका है। लॉरेंस के घोषित टारगेट में सलमान खान सबसे ऊपर हैं।

BJP का राज ठाकरे के बेटे को समर्थन, असमंजस में शिंदे की शिवसेना

मुंबई. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में अब केवल 20 दिन बचे हैं। माहिम विधानसभा सीट पर उम्मीदवारों को लेकर महायुति गठबंधन में असमंजस की स्थिति बन गई है। इस सीट पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे, शिवसेना के मौजूदा विधायक सदा सर्वणकर और शिवसेना (यूबीटी) के महेश सावंत के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है। यहां लड़ाई दिलचस्प तब हो गई जब भाजपा ने अमित ठाकरे को अपना समर्थन देने का वादा कर दिया। वहीं, सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने अपने मौजूदा विधायक को मैदान में उतारने का फैसला किया है और दोनों ही दल अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। भाजपा को इस बात उम्मीद थी कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना विधायक सर्वणकर को सीट से हटाकर अमित ठाकरे का समर्थन करेगी। हालांकि भाजपा नेताओं का दावा है कि इस मामले पर शिंदे के साथ समझौता हो गया है। वहीं, शिवसेना नेताओं का तर्क है कि अगर वे उम्मीदवार नहीं उतारते हैं तो उनके वोट उद्धव गुट को जा सकते हैं। सर्वणकर ने बुधवार को राज ठाकरे से अनुरोध किया कि वे अपने बेटे की माहिम सीट से उम्मीदवारी वापस लें और शिवसेना का समर्थन करें। विधायक ने ट्वीट कर शिवसेना के वफादार के रूप में अपने 40 साल के कार्यकाल और कड़ी मेहनत के दम पर तीन बार विधायक चुने जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे जीवित होते तो वे उनसे अपने रिश्तेदारों के लिए सीट छोड़ने के लिए नहीं कहते। शिवसेना एमएलए ने कहा, “दादर-माहिम में बाल ठाकरे के 50 रिश्तेदार रहते हैं, लेकिन उन्होंने मुझ जैसे आम कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया। वे कार्यकर्ता की भावना को संजोने वाले नेता थे। एकनाथ शिंदे साहब को देखिए। भले ही उनका बेटा तीन बार सांसद रहा हो, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को केंद्र में मंत्री नहीं बनाया, बल्कि एक वफादार शिवसैनिक को यह मौका दिया।” उन्होंने आगे कहा, “मैं राज साहब से अनुरोध करता हूं कि वे मेरे जैसे कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय न करें। मुझे अपना समर्थन दें।” वहीं, इस पूरे मामले पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम अमित ठाकरे का समर्थन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का भी यही विचार है। अगर शिवसेना का उम्मीदवार नहीं होता है, तो उनके वोट शिवसेना (यूबीटी) को जाएंगे, इसलिए उम्मीदवार दिया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति का समाधान खोजने के प्रयास किए जाएंगे। फडणवीस ने कहा कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेताओं ने तर्क दिया कि अगर पार्टी चुनाव नहीं लड़ती है तो उसके समर्पित मतदाता उद्धव सेना में चले जाएंगे। उन्होंने कहा, “भाजपा अमित का समर्थन करने के लिए तैयार थी और अभी भी अपने रुख पर कायम है।” इस बीच सरवणकर ने एकनाथ शिंदे से मुलाकात की और दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे माहिम से चुनाव लड़ेंगे। इस बीच, राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र में अगली सरकार महायुति गठबंधन के नेतृत्व में होगी, जिसमें मुख्यमंत्री का पद भाजपा को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार मनसे के समर्थन से बनेगी।

जीतू पटवारी की जेम्बो कार्यकारिणी आई, नाथ-दिग्गी समर्थक ज्यादा, उठने लगे विरोध के स्वर

Jeetu Patwari’s Jambo executive came, Nath-Diggy supporters were more, voices of protest started rising भोपाल। दस महीने बाद आई बहुप्रतीक्षित जीतू पटवारी की जेम्बो कार्यकारिणी में एकबार फिर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह वजनदार दिखाई दिए हैं, क्योंकि 88 उपाध्यक्ष-महामंत्री में करीब 50 फीसदी इन नेताओं के समर्थकों को पद मिले हैं। वहीं विंध्य के कद्दावर नेता एवं पूर्व नेता-प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वय एवं डॉ गोविन्द सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की न केवल उपेक्षा की गई बल्कि उनके विरोधियों को तरजीह दी गई। भोपाल से लेकर दिल्ली तक पूर्व मुख्य्मंत्री कमलनाथ के खिलाफ विषवमन करने वाले निलंबित नेता राजा बघेल को भी जगह मिल गई। कार्यकारिणी बनते ही विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं इंदौर के कांग्रेस नेता प्रमोद टंडन कांग्रेस के इस्तीफा दे दिया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी की शनिवार को घोषणा हो गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की इस कार्यकारिणी में 17 उपाध्यक्ष, 71, महामंत्री, 33 स्थायी आमंत्रित, 40 विशेष आमंत्रित और 16 एक्जीक्यूटिव कमेटी के मेम्बर हैं। पूरी कार्यकारिणी में देखा जाए तो कांग्रेस छोड़कर गए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के समर्थक रहे राजीव सिंह, आरिफ मसूद, महेंद्र जोशी, अवनीश भार्गव, अमित शर्मा जैसे नाम उपाध्यक्ष-महामंत्री में शामिल हैं। आम कांग्रेस कार्यकर्त्ताओं में चर्चा थी कि दिल्ली हाईकमान के सामने कद घट गया है पर जीतू पटवारी ने अपनी कार्यकारिणी में जिन उपाध्यक्षों को शामिल किया है उनमें हिना कांवरे, लखन घनघोरिया, सिद्धार्थ कुशवाह व सुखदेव पांसे कमलनाथ समर्थक हैं तो जयवर्धन सिंह, महेश परमार, प्रियव्रत सिंह और सुरेंद्र सिंह हनी बघेल दिग्विजय समर्थक हैं। इसी तरह महामंत्री में अनुभा मुंजारे, दिनेश गुर्जर, मंगू, हर्षविजय गहलोत, हर्ष यादव, हीरालाल अलावा, सुरेंद्र सिंह शेरा, जतिन उइके, सुनील उइके, माया त्रिवेदी, निधि चतुर्वेदी, निलय डागा, फूंदेलाल मार्को, प्रवीण पाठक, रोशनी यादव, रामू टेकाम जैसे नेता कमलनाथ समर्थक माने जाते हैं तो आतिफ अकील, घनश्याम सिंह, जयश्री हरिकरण, किरण अहिरवार, नारायण पट्टा, प्रभू सिंह ठाकुर, प्रताप ग्रेवाल, संजीव सक्सेना, विक्रांत भूरिया जैसे नेता दिग्विजय समर्थक हैं। पटवारी की टीम में जनाधार विहीन नेता भी जीतू पटवारी की अपनी कार्यकारिणी में उनके अपने नाम कुछ ही हैं। पटवारी ने अपने समर्थक जिन नेताओं को जगह दी है, वे जनाधार विहीन है पर कंप्यूटर मास्टर जरूर है, जो कागजों पर संगठन संचालित करने में माहिर है। गौरव रघुवंशी- मृणाल पंथ ने पूरे प्रदेश में कागजों पर मंडलम-सेक्टर बना दिए थे। जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को हकीकत लगी तब उन्होंने गोरकी को कांग्रेस कार्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसी प्रकार गोर्की बैरागी को कंप्यूटर एक्सपर्ट के रूप में शामिल किया है। इनके अलावा जीतू के समर्थकों में राजा बघेल, वीरेंद्र द्विवेदी, शैलेंद्र पटेल, संजय कामले, अनीस मामू भी जन आधार भी नेताओं में शुमार हैं। पूर्व नेता-प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के समर्थकों में सुखेंद्र सिंह बना को महामंत्री तो महेंद्र सिंह चौहान को ही स्थायी आमंत्रित में शामिल किया गया है। कांतिलाल भूरिया के पुत्र विधायक विक्रांत भूरिया ही इस नई कार्यकारिणी में जगह पा सके हैं। पटवारी की कार्यकारिणी में एक समय पीसीसी में पॉवर सेंटर रहने वाले मानक अग्रवाल की फिर वापसी हुई पर वे स्थायी आमंत्रित में शामिल किए गए हैं। लेकिन मीडिया प्रभारी मुकेश नायक को स्थायी आमंत्रित में शामिल किए जाने से उनकी जिम्मेदारी किसी और को दिए जाने वहीं, उनके विरोधी पूर्व मंत्री राजा पटैरिया को स्थायी आमंत्रित में शामिल कर लिया गया है। पचौरी समर्थकों को विशेष तरजीह कहा जा रहा है कि जीतू पटवारी का कांग्रेस की सरकारों में केंद्रीय मंत्री रहने के बाद भाजपा का दामन थामने वाले नेता सुरेश पचौरी समर्थकों पर जीतू पटवारी ने ज्यादा भरोसा जताया है। राजीव सिंह, आरिफ मसूद, महेंद्र जोशी, अमित शर्मा, अवनीश भार्गव, संजय शर्मा के नाम जीतू पटवारी की नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष व महामंत्री के रूप में शामिल किए गए हैं। ये सभी नाम पचौरी के निकटतम साथियों में रहे हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 48 उम्मीदवार किए घोषित

नई दिल्ली कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए 48 उम्मीदवारों की आज पहली सूची जारी की जिसमें नाना पटोले, पृथ्वीराज चव्हाण, बालासाहब थोराट, विजय वडेट्टीवार, विश्वजीत कदम सहित कई प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन उम्मीदवारों के नाम का चयन किया है। पार्टी ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले को फिर साकोली से टिकट दिया है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को कराड़ दक्षिण से उम्मीदवार बनाया गया है। प्रफुल्ल विनोदराव गुडाधे नागपुर दक्षिण पश्चिम, असलम आर. शेख मलाड पश्चिम, विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ब्रह्मपुरी उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे धीरज देशमुख को लातूर ग्रामीण से और अमित देशमुख को लातूर शहर से उम्मीदवार बनाया है। बाला साहेब थोराट के बेटे विजय थोराट को संगमनेर से तथा पूर्व मंत्री असलम शेख मलाड वेस्ट से उम्मीदवार बनाया है।  

NCP अजित गुट की दूसरी लिस्ट, नवाब मलिक की बेटी सना और बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान को टिकट

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के शंखनाद के बीच मुंबई से बड़ी खबर सामने आई है। दिवंगत एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी के बेटे और मुंबई युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जीशान सिद्दीकी एनसीपी में शामिल हो गए हैं। जीशान सिद्दीकी का अजित पवार ने पार्टी में स्वागत किया। इसके अलावा एनसीपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बांद्रा पूर्व सीट से जीशान सिद्दीकी को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया। एनसीपी में शामिल होकर क्या बोले जीशान? एनसीपी में शामिल होने के बाद जीशान सिद्दीकी ने कहा कि यह मेरे और मेरे परिवार के लिए एक भावनात्मक दिन है। इस कठिन समय में मुझ पर विश्वास करने के लिए मैं अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे का आभारी हूं। मुझे बांद्रा ईस्टसे टिकट मिला है। मुझे यकीन है कि सभी लोगों के प्यार और समर्थन से मैं बांद्रा ईस्ट को फिर से जरूर जीतूंगा। जीशान ने पिता की हत्या पर क्या कहा? अपने पिता की हत्या के बाद ज़ीशान ने कहा कि हत्यारों की नजर अब उन पर है, लेकिन वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने X पर लिखा कि उन्होंने मेरे पिता को चुप करा दिया। लेकिन वे भूल जाते हैं- वह एक शेर थे और मैं उनकी दहाड़ अपने अंदर, उनकी लड़ाई अपनी रगों में लिए हुए हूं। वह न्याय के लिए खड़े हुए, बदलाव के लिए लड़े और अडिग साहस के साथ तूफानों का सामना किया। बांद्रा पूर्व की जनता से अपील? ज़ीशान ने आगे कहा कि अब जो लोग उन्हें नीचे लाए, वे मुझ पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। यह मानते हुए कि वे जीत गए हैं, उनसे मैं कहता हूं। एक शेर का खून मेरी रगों में दौड़ता है। मैं अभी भी यहां हूं, निडर और अटूट। उन्होंने एक को ले लिया, लेकिन मैं उनकी जगह पर उठ खड़ा हुआ हूं। यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आज मैं वहीं खड़ा हूं जहां वह खड़े थे। जीवित, अथक और तैयार। बांद्रा पूर्व के मेरे लोगों, मैं हमेशा आपके साथ हूं। कब हुई थी बाबा सिद्दीकी की हत्या दरअसल 12 अक्टूबर की रात को मुंबई के बांद्रा इलाके में ज़ीशान सिद्दीकी के दफ्तर के पास पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है और मुख्य शूटर समेत दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे के मकसद का अभी तक पता नहीं चल पाया है और विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। इसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंध भी शामिल है। शिवसेना (यूबीटी) ने जारी की उम्मीदवारों की सूची महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में शामिल उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को उम्मीदवारों की एक सूची जारी कर दी. उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 65 उम्मीदवारों की अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में उद्धव की पार्टी ने ठाकरे परिवार की एक रवायत तोड़ दी है. उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे के खिलाफ भी उम्मीदवार उतार दिया है. महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होगा चुनाव महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. पिछले चुनाव में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं. हालांकि, चुनाव के बाद शिवसेना एनडीए से अलग हो गई और उसने एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली. शिवसेना के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने. जून 2022 में शिवसेना में आंतरिक कलह हो गई. इसके बाद एकनाथ शिंदे ने पार्टी के 40 विधायकों को तोड़ दिया. एकनाथ शिंदे बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए. अब शिवसेना दो गुटों में बंट चुकी है. शरद पवार की एनसीपी भी दो गुट- शरद पवार और अजित पवार में बंट गई है.

महाराष्ट्र विस चुनाव के लिए राकांपा ने आज सात उम्मीदवारों की सूची जारी की

मुंबई महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)-अजित पवार गुट ने 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को सात उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की राकांपा ने गुरुवार को पहली सूची में 38 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी और आज सात उम्मीदवारों की सूची जारी की। सूची में बांद्रा पूर्व से मारे गए राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी के पुत्र ज़िशान सिद्दीकी, इस्लामपुर से निशिकांत पाटिल, तासगांव से संजयकाका पाटिल, लोहा खंडार से प्रताप चिक्लिकर, वडगांव शेरी से सुनील यिंगरे, शिरूर हवेली से दिनेश्वर कटके और अनुशक्तिनगर निर्वाचन क्षेत्र से श्री नवाब मलिक की पुत्री सना मलिक शामिल हैं।  

कांग्रेस ने बुधनी विजयपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट की जारी, 40 नेता करेंगे प्रचार

भोपाल  मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा और श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की गई है।प्रदेश कांग्रेस चुनाव आयोग कार्य प्रभारी जेपी धनोपिया ने उक्त सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि बुधनी और विजयपुर विधानसभा में उपचुनाव हो रहे हैं, आगामी 13 नवम्बर को मतदान होना नियत है। दोंनो विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस नेतागणों को प्रचार-प्रसार हेतु स्टार प्रचारक बनाया गया है। राजस्थान के विधायक सचिन पायलट और कांग्रेस के सचिवगण संजय दत्त, चंदन यादव, आनंद चौधरी, रनविजयसिंह लोचन भी दोनो सीटों पर प्रचार करते नजर आएंगे। कांग्रेस के यह दिग्गज नेता करेंगे दोनों सीटों पर प्रचार कांग्रेस पार्टी ने दोनों विधानसभा सीटों के लिए जो लिस्ट जारी की है उसमें से कांग्रेस के सचिव मप्र प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं दिग्विजय सिंह और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत, राजस्थान के विधायक सचिन पायलट, अभा कांग्रेस के सचिवगण संजय दत्त, चंदन यादव, आनंद चौधरी, रनविजयसिंह लोचन, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया और अरूण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, अशोक सिंह, राजस्थान की सांसद संजना जाटव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, सीडब्लूसी मेंबर कमलेश्वर पटेल, विधायक ओमकार मरकाम, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, विधायक फूलसिंह बरैया, पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव, विधायकगण आरिफ मसूद, दिनेश गुर्जर, नीटू सिकरवार, बाबू जंडेल, पंकज उपाध्याय, प्रवीण पाठक, सिद्धार्थ कुशवाह, हिना कांवरे, सतीश सिकरवार, विक्रांत भूरिया, सत्य नारायण पटेल, हीरालाल अलावा, रोशनी यादव, रिचा गोस्वामी और मितेन्द्र  दर्शन सिंह यादव को बुधनी एवं विजयपुर उपचुनाव में प्रचार हेतु स्टार प्रचारक बनाया गया है।

आदित्य ठाकरे के खिलाफ मिलिंद देवड़ा लड़ सकते हैं चुनाव, शिंदे सेना दे सकती है वर्ली से टिकट

मुंबई  शिवसेना के एक पैंतरे से मुंबई की वर्ली सीट पर अब मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। महायुति ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे आदित्य ठाकरे को वर्ली विधानसभा में घेरने की रणनीति बनाई है। शिंदे की शिवसेना वर्ली से राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा को मैदान में उतार सकती है। मिलिंद दो बार साउथ मुंबई से सांसद रहे हैं और फिलहाल शिवसेना के राज्यसभा सांसद हैं। उनके पिता मुरली देवड़ा मुंबई के मेयर और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। आदित्य ठाकरे ने बुधवार को वर्ली सीट से नामांकन दाखिल किया था। लोकसभा चुनाव में यूबीटी को वर्ली में मिली थी बढ़त आदित्य ठाकरे पहली बार 2019 में वर्ली विधानसभा से चुनाव लड़े और 67,427 वोटों से जीते। तब महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी के बीच गठबंधन था। उन्होंने एनसीपी उम्मीदवार सुरेश माणे को हराया था। पिछले चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी आदित्य के खिलाफ कैंडिडेट नहीं उतारा था। जीत के बाद आदित्य अपने पिता उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में शामिल हुए। लोकसभा चुनाव के दौरान वर्ली से शिवसेना यूबीटी को सिर्फ 6700 वोटों से लीड मिली थी, इसलिए मिलिंद देवड़ा के मैदान में उतरने से मुकाबला टक्कर का होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। जनवरी में कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए थे देवड़ा मिलिंद देवड़ा को भी राजनीति विरासत में मिली है। दो बार लोकसभा सांसद रह चुके मिलिंग अभी राज्यसभा सदस्य हैं। उन्होंने करीब 10 महीने पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से पहले कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। वह एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए। जून में उन्होंने शिवसेना सांसद के तौर पर संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर पहला भाषण दिया। उन्होंने राज्यसभा में कहा था कि मुझे पिता ने पार्टी के प्रति वफादारी से पहले देश के प्रति वफादारी सिखाया है।

दिग्विजय की कार्तिक चौहान को समझाइश, कहा – बेटाअभी से ऐसा न करो

बुदनी मध्यप्रदेश की दो विधानसभा सीटों बुदनी और विजयपुर में उपचुनाव होने जा रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान बुदनी सीट पर जोरदार प्रचार कर रहे हैं ताकि इस सीट पर जीत हासिल की जा सके। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान कार्तिकेय के दिए एक बयान से सियासत तेज हो गई है। कार्तिकेय के बयान पर अब कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने उन्हें नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे भाषण मत दो। आप मेरे बेटे नहीं पोते जैसे हैं। अपने पिता शिवराज सिंह चौहान से सीखो। कार्तिकेय सिंह चौहान ने क्या कहा था? दरअसल कार्तिकेय सिंह चौहान ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि अगर गलती से भी यहां कांग्रेस का विधायक आ गया तो गांव में एक ईंट भी नहीं लगने वाली। उन्नीस बीस होता है तो समझिए किसका नुकसान होगा? अपने पैरों पर हम क्यों कुल्हाड़ी मारें भाई। अपनी पोलिंग में गड़बड़ी कर हम क्यों अपनी इज्जत खराब करें। उन्होंने आगे कहा था कि, हमको नहीं जाना क्या मुख्यमंत्री जी के पास काम कराने के लिए? क्या हमको नहीं जाना केंद्रीय कृषि मंत्री के पास काम करवाने? अगर उन्नीस बीस हुआ तो कैसे जाएंगे काम करवाने? इसी बयान को लेकर दिग्विजय सिंह ने अपने अधिकारिक एक्स हैंडल से एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कार्तिकेय चौहान को नसीहत देते हुए लिखा है कि कार्तिकेय अभी से इस प्रकार का भाषण ना दो। अपने पिता शिवराज सिंह से सीखो। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों मिल कर भारत निर्माण में सहयोग करते हैं। 10 साल तक मैं मुख्यमंत्री रहा लेकिन मैंने इस प्रकार की भाषा का कभी उपयोग नहीं किया। आपके पिता गवाह हैं। पंचायत राज कानून में निर्माण काम करने के जिम्मेदारी सरपंच की होती है ना की विधायक की। और आप तो अभी ना सरपंच हैं ना विधायक। आप मेरे पुत्र नहीं पौत्र समान हैं। यह मेरी राय है आप मानें ना मानें आप जानें।

पांच दशक तक मुंबई पर राज करने वाली ठाकरे फैमिली चुनाव नहीं लड़ी, अब तीन उम्मीदवार मैदान में

मुंबई  आदित्य ठाकरे के बाद ठाकरे फैमिली की तीसरी पीढ़ी का एक और सदस्य ने चुनावी राजनीति में डेब्यू किया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने बेटे अमित ठाकरे को शिवसेना के गढ़ माने जाने वाले माहिम सीट से टिकट दिया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि चुनावी इम्तिहान में अमित ठाकरे को उतारकर राज ठाकरे अपनी ताकत की आजमाइश करेंगे। शिवसेना के यूथ विंग के प्रमुख के तौर पर राज ठाकरे ने मुंबई को शिवसेना का किला बनाया था। उद्धव ठाकरे के सक्रिय होने से पहले राज ही मुंबई में पार्टी को डील करते थे। आज भी मनसे का जनाधार मुंबई में है। यह भी तय है कि अगर अमित जीत जाते हैं तो वह न सिर्फ मनसे पार्टी और राज के उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित हो जाएंगे। आदित्य को मनसे ने दिया था वॉकओवर, मगर … अमित ठाकरे के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा, क्योंकि इस सीट पर शिंदे सेना और उद्धव सेना के उम्मीदवारों से उनका मुकाबला होगा। बीजेपी के करीबी होने के बाद भी शिवसेना (शिंदे) ने मौजूदा विधायक सदा सरवणकर को टिकट दिया है। शिवसेना (यूबीटी) ने भी महेश सावंत को अमित ठाकरे के खिलाफ मैदान में उतार दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में आदित्य ठाकरे ने मुंबई की वर्ली सीट से चुनाव में पदार्पण किया था, तब राज ठाकरे ने उनके खिलाफ मनसे उम्मीदवार नहीं उतारे थे। यूबीटी नेता संजय राउत ने कहा कि दादर-माहिम सीट शिवसेना का गढ़ रही है। इस सीट पर यूबीटी के चुनाव नहीं लड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। हालांकि अमित ठाकरे इससे चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुझे चुनाव लड़ने का मौका मेरे पिता ने दिया है और लोग मेरे भाग्य का फैसला करेंगे। उम्मीदवारों का ऐलान भी होने लगा है. सत्ताधारी महायुति में शामिल भारतीय जनता पार्टी ने 99, शिवसेना (शिंदे) ने 45 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) ने 38 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. उम्मीदवारों की एक लिस्ट महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में शामिल उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) ने भी जारी कर दी है. उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 65 उम्मीदवारों की अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में उद्धव की पार्टी ने ठाकरे परिवार की एक रवायत तोड़ दी है. उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे के खिलाफ भी उम्मीदवार उतार दिया है. ऐसा तब है जब पिछले चुनाव में आदित्य ठाकरे की उम्मीदवारी के ऐलान के बाद राज ठाकरे ने बड़ा दिल् दिखाते हुए वर्ली सीट से उम्मीदवार नहीं उतारा था. राज ठाकरे ने तमाम विरोधाभास के बावजूद आदित्य ठाकरे को बिना किसी शर्त के समर्थन दिया था. ठाकरे परिवार की एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने की जो रवायत पिछले चुनाव में राज ठाकरे ने शुरू की थी, उद्धव ने इस बार उसे तोड़ दिया है. गौरतलब है कि अमित ठाकरे मध्य मुंबई की माहिम सीट से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट से शिवसेना (शिंदे) ने मौजूदा विधायक सदा सरवणकर को उम्मीदवार बनाया है. ऐसे कयास थे कि उद्धव ठाकरे की पार्टी अमित के खिलाफ उम्मीदवार उतारने से परहेज कर सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं. उद्धव की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) ने महेश सावंत को टिकट दे दिया है. गौरतलब है कि अमित ठाकरे के चचेरे भाई आदित्य ठाकरे साल 2019 के चुनाव में माहिम से सटी वर्ली सीट से चुनाव मैदान में उतरे और जीते थे. आदित्य ठाकरे, ठाकरे परिवार से चुनावी रणभूमि में उतरने वाले पहले सदस्य थे. आदित्य ठाकरे के बाद उद्धव ठाकरे भी बतौर विधान परिषद सदस्य एक्टिव पॉलिटिक्स में आए. हालांकि, उद्धव ठाकरे ने चुनाव मैदान से दूरी बनाए रखी है. राज ठाकरे ने भी कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है. राज ठाकरे कभी नहीं लड़े चुनाव, अब बेटे को उतारा मुंबई में ठाकरे परिवार 58 साल से सक्रिय राजनीति एक्टिव है। 1966 में बाल ठाकरे ने अपने पिता केशव सीताराम ठाकरे के सुझाव पर शिवसेना बनाई। पांच दशक तक ठाकरे परिवार मातोश्री से मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में हस्तक्षेप करता रहा, मगर चुनाव मैदान से दूर ही रहे। बाल ठाकरे कभी चुनाव नहीं लड़े। शिवसेना से निकलकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाने वाले राज ठाकरे भी चुनावी राजनीति करते रहे, मगर कभी खुद किस्मत नहीं आजमाया। वह चुनाव नहीं लड़ने की ठाकरे परंपरा पर कायम रहे। 2019 में आदित्य ठाकरे अपने परिवार के पहले शख्स थे, जो सीधे मैदान में उतरे और विधायक बन गए। उद्धव ठाकरे ने सीएम बनने के बाद विधान परिषद में एंट्री ली। वह लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं लड़े। अब राज ठाकरे ने अपने बेटे अमित ठाकरे को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मध्य मुंबई की माहिम सीट से उतारा है। जीत गए तो विधानसभा में दिखेगा ठाकरे वर्सेज ठाकरे पिछले विधानसभा चुनाव में हाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी। 2006 में गठन के बाद से मनसे को चुनावों में कोई खास सफलता नहीं मिली। राज ठाकरे शिवसेना से अलग हुए तो उद्धव ठाकरे का पार्टी पर वर्चस्व हो गया। 2019 में वह खुद मुख्यमंत्री बने और बेटे आदित्य को कैबिनेट मंत्री बनाकर महाराष्ट्र की राजनीति में स्थापित कर दिया। राज ठाकरे चुनाव न लड़कर राजनीति में पीछे खिसकते चले गए। अब बेटे अमित ठाकरे को मुंबई से चुनाव लड़ाकर अपना पुराना बकाया वसूलने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव में जीत के बाद अगर महायुति की सरकार बनती है तो अमित ठाकरे भी कैबिनेट मंत्री के दावेदार होंगे। विधानसभा के सदन में ठाकरे के मुकाबले में एक और ठाकरे होगा। मनसे खुले तौर पर नरेंद्र मोदी और बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा करती रही है।

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