Nalkheda: Administration adopts a double standard in the Maa Baglamukhi Temple area—cracking down on the poor while showing leniency toward major encroachers.
संवाददाता: चंदा कुशवाहा
नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) ! विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर की पावन नगरी नलखेड़ा में इन दिनों आस्था के केंद्र के आसपास प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। देश-दुनिया से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने में नाकाम रहा स्थानीय प्रशासन अब अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गरीबों और छोटे दुकानदारों को निशाना बना रहा है। हाल ही में तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव के निर्देशन में हुई कार्रवाई ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गरीबों के निवाले पर जुर्माना, चालानी कार्रवाई से हड़कंप
मंदिर परिसर और उसके आसपास ठेला लगाकर, फूल-माला बेचकर अपना व अपने परिवार का जीवन-यापन करने वाले गरीब मजदूरों पर प्रशासन की गाज गिरी है। दिनभर में बमुश्किल 200 से 250 रुपये कमाने वाले इन छोटे व्यवसायियों पर तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव के आदेश पर 400-400 रुपये की भारी-भरकम चालानी रसीदें काट दी गईं।
अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई इस कार्रवाई से पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रोजगार कर अपने बच्चों का भरण-पोषण कर रहे हैं। इतने कम मुनाफे में 400 रुपये का दंड भुगतना उनके लिए भुखमरी जैसी स्थिति पैदा कर देता है। अधिकारियों की नजरों में अपनी सक्रियता साबित करने के लिए छोटे-मोटे असहाय दुकानदारों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
मुख्य मार्ग पर रसूखदारों का कब्जा, प्रशासन मौन
एक तरफ जहां गरीब फूल-माला वालों को हटाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नलखेड़ा के मुख्य मार्ग पर बड़े व्यापारियों द्वारा किया गया पक्का और अवैध अतिक्रमण प्रशासन को नजर नहीं आता। मुख्य मार्ग पर स्थित कई बड़े होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग की कोई व्यवस्था तक नहीं है। होटल मालिक अपनी गाड़ियों और ग्राहकों के वाहनों को सरेराह सड़क पर खड़ा करवाते हैं, जिससे आए दिन यातायात बाधित होता है और लंबा जाम लगता है।
नियमानुसार इन व्यापारिक प्रतिष्ठानों के नक्शे और पार्किंग व्यवस्था की नियमित जांच करना और उल्लंघन पर कार्रवाई करना तहसीलदार व स्थानीय निकाय का दायित्व है। लेकिन विडंबना देखिए कि रसूखदार होटल व्यवसायियों और बड़े व्यापारियों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।









