Message given for preservation of Sanatan culture, spirituality and Indian knowledge tradition

विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के याशील होटल में रविवार को ‘आचार्य देवो भवः अवॉर्ड्स फंक्शन-2026’ का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। सनातन संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय ज्ञान-विज्ञान की गौरवशाली विरासत को समर्पित इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों, विद्वानों, आचार्यों, शिक्षाविदों एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों ने सहभागिता की।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मुकेश खन्ना रहे। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक तथा राज्य मंत्री एवं आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मदन कौशिक वर्तमान में उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और पंचायती राज, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास तथा जनगणना जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों से जुड़े हैं।
कार्यक्रम का आयोजन ‘सनातन पथ’ के संस्थापक गौरव शर्मा द्वारा किया गया। समारोह का उद्देश्य भारत की प्राचीन सनातन परंपरा, संस्कृति, अध्यात्म, गुरु-शिष्य परंपरा तथा भारतीय ज्ञान-विरासत के प्रति समाज में जागरूकता और सम्मान की भावना को मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संत-महात्माओं, आचार्यों एवं विद्वानों का सम्मान किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वतजनों को विशेष सम्मान प्रदान किए गए तथा चयनित विद्वानों को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान संतों एवं विद्वानों ने भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध तथा भारतीय जीवन दर्शन पर सारगर्भित एवं प्रेरणादायी व्याख्यान दिए।
वक्ताओं ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, संस्कार, कर्तव्य, करुणा, अनुशासन और लोककल्याण से जोड़ने वाली व्यापक जीवन-दृष्टि है। आधुनिकता और तकनीकी विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
‘आचार्य देवो भवः’ की भावना को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को केवल ज्ञान देने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और जीवन-दृष्टि का निर्माता माना गया है। इसलिए आचार्य एवं विद्वानों का सम्मान वास्तव में भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान है।
मंदिर वास्तुकला के क्षेत्र में डॉ. आशीष श्रीवास्तव सम्मानित
समारोह में डॉ. आशीष श्रीवास्तव, प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, को मंदिर वास्तुकला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘Award for Excellence in Temple Architecture’ से सम्मानित किया गया।
डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने सम्मान प्राप्त करते हुए कहा कि भारतीय मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय वास्तुकला, शिल्प, कला, आध्यात्म, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना के अद्भुत संगम हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में मंदिर वास्तुकला की प्राचीन परंपराओं, स्थापत्य सिद्धांतों और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि भारत की सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत विश्व के लिए ज्ञान एवं मानव कल्याण का महत्वपूर्ण स्रोत रही है। संतों और विद्वानों ने युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का आह्वान किया।
समारोह का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सनातन भावनाओं से ओत-प्रोत रहा। देशभर से आए संतों, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों के सम्मान के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन भारतीय संस्कृति एवं सनातन ज्ञान परंपरा के प्रति समर्पण का प्रभावशाली उदाहरण बना। इस अवसर में ख्यातिलब्ध इंफ्लूएंसर डॉ माधवी बोरसे सिंह को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
आयोजक गौरव शर्मा ने सभी संतों, विद्वानों, अतिथियों एवं सम्मानित व्यक्तित्वों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सनातन पथ’ का उद्देश्य भारत की गौरवशाली संस्कृति, अध्यात्म और ज्ञान परंपरा को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना तथा उसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करना है।







