LATEST NEWS

कश्मीर में पहली बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों एक पार्टी से, अब हमारे विरोधी क्या कहेंगे : CMअब्दुल्ला

जम्मू जम्मू कश्मीर के नए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस केवल मुस्लिमों की पार्टी नहीं है। यदि ऐसा होता तो किसी भी हिंदू को उपमुख्यमंत्री नहीं बनाते। परिणाम के बाद ही कुछ लोग कहना शुरू हो गए थे कि नेकां मुसलमानों और कश्मीरियों की पार्टी है, जिसमें जम्मू को कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन हमने जम्मू से हिंदू उपमुख्यमंत्री बनाया।कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उमर ने कहा कि हिंदू उपमुख्यमंत्री बनाना उन लोगों को जवाब है, जो नेकां को परिवारवाद वाली पार्टी कहते थे। उपमुख्यमंत्री हिंदू है और जम्मू का है और मेरे परिवार से संबंध नहीं रखता है। पहले उपमुख्यमंत्री गठबंधन की मजबूरी में बनाए जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। बिना किसी मजबूरी या दबाव में हमने उपमुख्यमंत्री बनाया। पहली बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों एक पार्टी से हैं। अब हमारे विरोधी क्या कहेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उमर अब्दुल्ला  पहली बार जम्मू पहुंचे। पार्टी कार्यालय में उनका कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उमर भाजपा पर हमलावर रहे। सीएम ने कहा, कुछ लोगों ने बीते आठ सालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को खत्म करने के लिए हर हथकंडा अपनाया। जिस तरह से परिसीमन करवाया, आरक्षण में बदलाव किया, उसका उद्देश्य सिर्फ एक पार्टी को लाभ पहुंचना था, लेकिन लोगों ने उस सब को एक तरफ रखकर सोच-समझकर वोट दिया। भाजपा पर आरोप लगाते हुए सीएम ने कहा कि बीते आठ सालों में हमारे नेताओं को डराया गया। कुछ लोग पार्टी छोड़ गए तो उन्हें लगा था, उनके जाने से पार्टी खत्म हो जाएगी, लेकिन नेकां कार्यकर्ताओं ने साबित कर दिया कि पार्टी नेताओं की नहीं कार्यकर्ताओं की है। चुनाव में जीते निर्दलीय उम्मीदवारों ने बिना किसी शर्त के पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला लिया। खुद के लिए कुछ नहीं मांगा। अब फैसले कार्यालय या सचिवालय में नहीं लिए जाएंगेसीएम ने कहा, पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार से उम्मीद है। उन्हें भी कई साल हुए हैं सचिवालय गए हुए। अधिकारियों को कुछ समय दो, उन्हें आदत हो जाए कि अब लोगों की सरकार है। अब फैसले बिना लोगों की राय के सचिवालय या अधिकारियों के कार्यालयों में नहीं लिए जाएंगे। अब प्रोजेक्ट और डीपीआर बनेंगे। लोग जो चाहेंगे, वह काम उनके इलाके में होगा।  

भाजपा के साथ नहीं जाएगा उद्धव गुट: संजय राउत

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात की खबरों को सोमवार को पूरी तरह खारिज कर दिया। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के बीच मीडियाकर्मियों से संक्षिप्त बातचीत में राउत ने सत्तारूढ़ शिवसेना नेता की इस भविष्यवाणी को भी खारिज कर दिया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) भाजपा-एनडीए के साथ वापस आ जाएगी। राउत ने कुख्यात इजरायली स्पाइवेयर विवाद का हवाला देते हुए कहा, “यह सिर्फ सत्तारूढ़ पक्ष के मीडिया तंत्र द्वारा फैलाई जा रही अफवाहें हैं। हम जानते हैं कि यह कौन कर रहा है और क्यों… हमारे पास अपना छोटा सा ‘पेगागस’ सेटअप भी है जो हमें सूचित करता रहता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि एसएस-यूबीटी पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र के गौरव की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, “लेकिन भाजपा के साथ जाने के लिए नहीं, जिसने बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित (अविभाजित) शिवसेना को तोड़ दिया, उसका नाम और चुनाव चिन्ह चुरा लिया और जून 2022 में राज्य की बागडोर एक “गद्दार” (सीएम एकनाथ शिंदे) को सौंप दी”। उन्होंने दोहराया कि भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या शाह का समर्थन करने का सवाल “बीजापुर आदिलशाही वंश के जनरल” अफजल खान से हाथ मिलाने के समान होगा। शिवसेना (यूबीटी) नेता की तीखी टिप्पणी कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के मुद्दे पर चल रही तीखी नोकझोंक की पृष्ठभूमि में आई है, जिसने मतदान के दिन से महज तीन सप्ताह पहले एमवीए के भाग्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैप्टन अजय यादव ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे का ऐलान किया था, अब पार्टी में ही बने रहेंगे

हरियाणा हरियाणा में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बुरी तरह अपनी पार्टी को कोस रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों अचानक सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे का ऐलान कर हार की हैट्रिक लगने के बाद सदमे से गुजर रही कांग्रेस को जबरदस्त झटका दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने सीधे हाईकमान को निशाने पर लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी तक को घेर लिया। हालांकि उनकी ये नाराजगी दो दिन से ज्यादा नहीं चली और उन्होंने यू टर्न लेते हुए कहा कि वह जन्मजात कांग्रेसी हैं और जब तक उनकी सांस चलेगी तब तक वो कांग्रेसी ही रहेंगे। बेटे की करारी हार ने सब्र का बांध तोड़ा कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और कांग्रेस छोड़ कर जा चुकीं किरण चौधरी की तरह कैप्टन अजय सिंह यादव को भी हरियाणा कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विरोधी खेमे में गिना जाता है। यादव भी हरियाणा कांग्रेस पर हुड्डा के एक तरफा नियंत्रण की कड़ी मुखालफत करते रहे हैं। 2019 में राव इंद्रजीत सिंह से लोकसभा चुनाव बुरी तरह हारने के बाद कैप्टन इस बार उनसे दो-दो हाथ करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन हुड्डा के कारण टिकट उनके बजाय राज बब्बर को मिल गया, जिसको लेकर वो बेहद नाराज रहे। उनके सब्र का बांध तब टूट गया, जब इस विधानसभा चुनाव में उनके बेटे चिरंजीव राव को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। 2019 में बेहद करीबी अंतर से चुनाव जीतने वाले राव करीब 29 हजार के अंतर से बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मण यादव से चुनाव हार गए। इस सीट से 1991 से लेकर 2014 तक लगातार छह बार कैप्टन अजय यादव चुनाव जीतते आ रहे हैं। लिहाजा गढ़ के हाथ से निकल जाने के बाद कैप्टन का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने आलाकमान से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक को सुना डाला। वहीं अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में हाईकमान को निशाने पर लेते हुए कैप्टन यादव लिखते हैं कि मैं आत्मसम्मान में विश्वास करता हूं क्योंकि किसी पद पर बने रहना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप बिना किसी बाधा के पार्टी के लिए कितना कुछ कर सकते हैं। मैं 1988 में कांग्रेस में शामिल हुआ था, जब पार्टी नेताओं के साथ उचित बातचीत होती थी जो स्वर्गीय राजीव गांधी और यहां तक कि सोनिया गांधी तक चलती रही, लेकिन हाल ही में राहुल गांधी जी के इर्द-गिर्द चापलूसों के एक गुट ने घेरा बना लिया है, जिसके कारण वरिष्ठ नेताओं सहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनसे दूरी बना ली है। कैप्टन अजय यादव ने जहां एक तरफ कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, वहीं दूसरी तरफ उनके बेटे चिरंजीव राव ने पिता के फैसले पर आश्चर्य जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि वो पार्टी से दूर कहीं नहीं जा रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि कैप्टन के यू टर्न के पीछे उनके बेटे राव का भी बड़ा हाथ है, जिसका उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जिक्र भी किया है, कैप्टन यादव लिखते हैं। मैं जन्म से ही कांग्रेसी हूं और अपनी आखिरी सांस तक कांग्रेसी ही रहूंगा। मैं इस बात से दुखी था कि OBC विभाग के लिए की गई मेरी मेहनत को हाईकमान द्वारा सराहा नहीं जा रहा था और कुछ कठोर शब्दों ने मुझे यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया, लेकिन मैंने ठंडे दिमाग से कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने का फैसला किया, खासकर मेरी मार्गदर्शक और नेता सोनिया गांधी जी को। मेरे बेटे चिरंजीव ने मुझे अतीत को भूलने के लिए प्रेरित किया। हालांकि कैप्टन के कांग्रेस से इस्तीफा देते ही सियासी हलकों में उनके बीजेपी में जाने के कयास लगने लगे थे। बताया जाने लगा कि कैबिनेट मंत्री कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की सीट से उन्हें संसद पहुंचाने की डील भी हो गई है। सियासी जानकारों का मानना था कि दरअसल, राव नरबीर सिंह के बाद कैप्टन अजय यादव को अपने साथ लाकर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को नियंत्रित करना चाहती है, ये तीनों परिवार अहीरवाल बेल्ट की राजनीति की धूरी माने जाते हैं। राव नरबीर और कैप्टन को इंद्रजीत सिंह का मुखर विरोधी माना जाता है।

प्रदेश में फिर INDIA गठबंधन में दरार ! बुधनी में सपा ने उतारा प्रत्याशी, कांग्रेस के बागी नेता लड़ेंगे चुनाव

भोपाल मध्य प्रदेश में विजयपुर-बुधनी विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर दोनों ही प्रमुख दलों (बीजेपी और कांग्रेस) की ओर से तस्वीर साफ हो गई है. बुधनी विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जहां पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को प्रत्याशी बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है. कांग्रेस ने बुधनी से राजकुमार पटेल को टिकट दिया है. इधर विजयपुर विधानसभा सीट से बीजेपी ने वन मंत्री रामनिवास रावत को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा को प्रत्याशी बनाया है. इन दोनों ही सीटों पर रोचक मुकाबला होने के आसार हैं. समाजवादी पार्टी ने भी बुधनी से उतारा उम्मीदवार इधर बुधनी से युवा कांग्रेस के अर्जुन आर्य ने भी बगावती तेवर दिखा दिए हैं. अर्जुन आर्य क्षेत्र में कांग्रेस के लिए सक्रिय रहे. हालांकि, टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. अब उन्हें समाजवादी पार्टी ने बुधनी से उम्मीदवार बना दिया है. 13 नवंबर को वोटिंग, 23 को नतीजे मध्य प्रदेश की बुधनी और विजयपुर सीट पर उपचुनाव के लिए प्रक्रिया जारी है. 18 अक्टूबर से नामांकन भराने का सिलसिला जारी है. हालांकि, तीन दिन में दोनों ही सीटों पर एक भी नामांकन फॉर्म जमा नहीं हुआ है जबकि 25 अक्टूबर नामांकन फार्म जमा करने की आखिरी तारीख है. 30 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जाएंगे, तो 13 नवंबर को वोटिंग होगी और 23 नवंबर को परिणाम आ जाएंगे. इधर दोनों ही प्रमुख दल बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं. बुधनी में आसान नहीं दोनों दलों की राह भारत सरकार के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ है. यहां पांच बार से लगातार शिवराज सिंह चौहान विधायक बनते आ रहे थे. यहां बीजेपी मजबूत स्थिति में रही है. क्योंकि अब शिवराज सिंह चौहान प्रत्याशी नहीं हैं. ऐसे में यहां मुकाबला रोचक होने का अनुमान है. बीजेपी ने जहां पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस ने भी पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को प्रत्याशी बना दिया है. बागियों की भी सुगबुगाहट प्रत्याशियों के नाम का ऐलान होने के बाद दोनों ही दलों से बागियों की भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है. बीजेपी के कद्दावर नेता अपने समर्थकों के साथ मीटिंग कर रहे हैं. इस मीटिंग के बाद निर्णय अनुसार यह जनप्रतिनिति आगे की रणनीति बनाएंगे. इधर कांग्रेस से युवा नेता अर्जुन आर्य ने भी बगावत कर दी है. विजयपुर में भी रोचक मुकाबला विजयपुर विधानसभा सीट पर भी दोनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की राह आसान होती नजर आ नहीं आ रही है. विजयपुर विधानसभा सीट पर 67 साल में 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें 9 बार कांग्रेस जीती है, जबकि 6 बार बीजेपी के जनप्रतिनिधि विधायक चुने गए हैं.

हरियाणा में राज्यसभा के लिए BJP के कई दावेदार, कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई एक सीट

चंडीगढ़ हाल ही में हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में इसराना से चुनाव जीतने के बाद कृष्णलाल पंवार ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने पंवार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ऐसे में राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। हालांकि खाली हुई इस एक सीट के लिए चुनाव कब होंगे, इसकी अभी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि हरियाणा में विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद कभी भी राज्यसभा की एक खाली हुई सीट के लिए चुनाव हो सकते हैं। राज्यसभा के सदस्य के रूप में कृष्णलाल पंवार का कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक का था। उन्होंने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी। ऐसे में अब भारतीय जनता पार्टी की ओर से करीब चार साल के लिए अपने प्रत्याशी को राज्यसभा में भेजा जाएगा। इस्तीफा देकर मांगा था आशीर्वाद कृष्ण लाल पंवार ने हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि इसराना के विधायक के रूप में जनसेवा के अपने नए कर्तव्य की ओर कदम बढ़ाए। नई पारी की शुरुआत के लिए सभी अपना आशीर्वाद प्रदान करें। उन्होंने आगे लिखा था कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में इसराना को एक बेहतर और विकसित क्षेत्र बनाने के लिए कृत संकल्पित हूं। बता दें कि पंवार हरियाणा बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। बीजेपी ने सहेजी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत बता दें कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा की ओर से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजा था। किरण चौधरी का राज्यसभा के सदस्य के रूप में 9 अप्रैल 2026 तक का कार्यकाल है। किरण चौधरी ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अपनी बेटी और समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके एवज में भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को सहेजते हुए किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजने का काम किया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तोशाम से किरण चौधरी की बेटी श्रुति को अपना उम्मीदवार बनाया। तोशाम से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने उन्हें प्रदेश की नायब कैबिनेट में भी स्थान दिया। हरियाणा की राज्यसभा सीटों का गणित हरियाणा की अन्य राज्यसभा सीटों की बात करें तो इनमें बीजेपी के रामचंद्र जांगड़ा 10 अप्रैल 2020 को राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसी प्रकार से बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला जो 3 अप्रैल 2024 को राज्यसभा के सदस्य मनोनित हुए थे, का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है। इसी प्रकार से बीजेपी में शामिल होने के बाद राज्यसभा पहुंची किरण चौधरी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव लड़े कार्तिकेय शर्मा ने 2 अगस्त 2022 को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली थी, इनका कार्यकाल 1 अगस्त 2028 तक का है। हालांकि कार्तिकेय को बीजेपी की ओर से समर्थन दिया गया था। इसी प्रकार से बीजेपी की ओर से राज्यसभा में गए कृष्णलाल पंवार ने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी, जिनका कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक था, लेकिन अब उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत हरियाणा विधानसभा के ताजा आंकड़ों को देखे तो इस बार भारतीय जनता पार्टी के पास खुद के 48 विधायक है। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों का भी बीजेपी को समर्थन हैं, जबकि कांग्रेस के 37 और इनेलो के 2 विधायक है। ऐसे में यह साफ है कि कोई भी अन्य दल राज्यसभा के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगा, जिससे बीजेपी उम्मीदवार का निर्विरोध राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। राज्यसभा के लिए बीजेपी के दावेदार मौजूदा राजनीतिक हालात में कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट एक बार फिर से बीजेपी के पास जाती दिखाई दे रही है। ऐसे में इस एक सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी में कई दावेदारों के नामों की चर्चा हो रही है। इनमें भाजपा नेता प्रो. रामबिलास शर्मा, ओमप्रकाश धनखड़, ज्ञानचंद गुप्ता, संजय भाटिया और कुलदीप बिश्नोई के नाम चर्चा में हैं। हो सकता है कि अंदरखाते अन्य नेता भी लॉबिंग में जुटे हों मगर यह सीट किसके पास जाएगी, फिलहाल यह भविष्य के गर्भ में है। बहुमत नहीं होने के कारण विपक्ष की ओर से इस सीट के लिए किसी को प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना बहुत कम है।  

हरविंद्र कल्याण भाजपा की टिकट पर लगातार तीसरी बार विधायक बने, अब बन सकते है प्रोटेम स्पीकर

चंडीगढ़ नायब सिंह सैनी पार्ट-टू में जहां पंजाबी समुदाय से संबंधित एक मात्र अनिल विज को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। वहीं हरियाणा में रोड बिरादरी और कश्यप बिरादरी को मंत्रिमंडल तथा सत्ता पक्ष में अभी तक कोई भागीदारी नहीं मिली है। रोड बिरादरी का प्रभाव हरियाणा के कईं जिलों में काफी ज्यादा है। करनाल, नीलोखेड़ी, असंध, इसराना जैसी विधानसभा सीटों पर रोड बिरादरी का काफी वोट बैंक है। घरोंडा से रोड बिरादरी से संबंधित हरविंद्र कल्याण भाजपा की टिकट पर लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। रोड बिरादरी के नेता अतीत में ज्यादातर सरकारों में विधायक और मंत्री बनते रहे हैं, जिनमें ईश्वर सिंह रोड, चंदा सिंह, सुलतान जड़ोला, श्रीराम, चौधरी मुलतान सिंह जैसे बड़े नाम शामिल है। चौधरी मुलतान सिंह संयुक्त पंजाब में राज्य मंत्री और हरियाणा गठन के बाद डिप्टी स्पीकर भी रहे हैं। ईश्वर सिंह रोड भी हरियाणा विधानसभा में स्पीकर रहे हैं। वर्तमान में हरविंद्र कल्याण जो तीसरी बार विधायक बने हैं, उनकी गिनती केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निकटवर्तियों में होती है। भाजपा पार्ट-2 में भी दो विधायक रोड बिरादरी से जितकर आए थे, जिनमें से एक घरोंडा के हरविंद्र कल्याण और दूसरे निर्दलीय विधायक पुंडरी से रणधीर गोलन, जिन्होंने बीजेपी को समर्थन दे रखा था, उन्हें मंत्रिमंडल में कोई स्थान नहीं मिला था। भले ही हरियाणा में मंत्रिमंडल बनाने के लिए किसी भी सरकार में सीमाएं तय है। संख्या सीमित होने के कारण सबकों इसमें शामिल नहीं किया जा सकता। हरियाणा में स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, चीफ व्हीप यह तीन महत्वपूर्ण पद सत्ता  पक्ष की ओर से भरे जाने हैं। ऐसी चर्चा है कि घरोंडा से तीन बार भाजपा के विधायक बनकर हैट्रिक लगाने वाले हरविंद्र कल्याण को  स्पीकर बनाया जा सकता है। हरविंद्र कल्याण सुशिक्षित, बुद्धिजीवी तथा विधेयक कार्यों में महारत रखते हैं। विधानसभा में वह कईं कमेटियों में सदस्य तथा प्रमुख कमेटी में अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं। विधानसभा में विधेयक कार्यों को करने वाली कमेटियों की कार्यप्रणाली की उन्हें बेहतरीन जानकारी है। मधुरभाषी, सहज व सरल स्वभाव के होने के साथ-साथ वह आरएसएस तथा बीजेपी के आला नेताओं की पसंद भी हैं। डिप्टी स्पीकर का पद पंजाब समुदाय से विधायक बने कृष्ण मिड्ढा या घनश्याम अरोड़ा को दिया जा सकता है और कश्यप बिरादरी से इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप को चीफ व्हीप बनाया जा सकता है। हरविंद्र कल्याण करनाल के लोकसभा चुनाव में जहां से केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने चुनाव लड़ा था, वहां चुनाव के संयोजक थे। उन्हीं दिनों करनाल के उपचुनाव में नायब सिंह सैनी विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपनी संगठनात्मक क्षमता और विरोधियों को भाजपा की ओर लाकर अपनी कार्यप्रणाली कल्याण पहले ही साबित कर चुके हैं।

शिवराज का रुतबा काम ना आया ,कार्तिकेय की लॉन्चिंग पर संगठन ने लगाया ब्रेक

Shivraj’s status did not work, organization put brakes on Karthikeya’s launch बुधनी उपचुनाव में बीजेपी ने रामाकांत भार्गव को टिकट दिया है। यह शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवराज के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। भोपाल: बुधनी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। इस रेस में कई नाम थे। रेस में सबसे आगे शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। इसके बाद विदिशा के पूर्व सांसद रामाकांत भार्गव के नाम की चर्चा थी। दिल्ली ने रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगाई है। ऐसे में चर्चा है कि शिवराज के दबदबे वाली सीट पर रामाकांत भार्गव की लॉटरी कैसे लग गई है। कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम की थी चर्चा दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा सीट से सांसद बनने के बाद बुधनी विधानसभा सीट खाली हुई थी। बुधनी में उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई है। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि शिवराज सिंह चौहान का वारिस कौन होगा। इस रेस में सबसे आगे कार्तिकेय सिंह चौहान ही चल रहे थे। वह पिता की सीट पर लगातार मेहनत भी कर रहे थे। उनके समर्थकों की इच्छा भी थी कि बुधनी से कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम पर ही मुहर लगे। वही प्रदेश चुनाव समिति की तरफ से पैनल में जो नाम भेजा गया था, उसमें कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम था। दिल्ली में नहीं बनी सहमति टिकट की घोषणा से दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान अपने बेटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शादी का न्यौता देने गए थे। इसके बाद एमपी में अटकलें शुरू हो गई थीं कि कार्तिकेय सिंह चौहान को पीएम मोदी का आशीर्वाद मिल सकता है। चुनाव समिति की बैठक के बाद नामों की सूची आई तो रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी है। परिवारवाद से पार्टी ने बनाई दूरी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पार्टी परिवारवाद से दूर है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी नेता पुत्रों को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के पुत्र राजनीति में एंट्री के लिए ललायित हैं लेकिन पार्टी ने सभी की एंट्री पर ब्रेक लगा रखी है। अगर शिवराज सिंह चौहान के बेटे को टिकट देती तो गलत नैरेटिव गढ़ा जाता। शायद इससे बचने के लिए पार्टी ने यह फैसला लिया है। रामाकांत भार्गव हैं शिवराज सिंह चौहान के खास वहीं, रामाकांत भार्गव भी शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान पहले विदिशा सीट से सांसद थे। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जब विदिशा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो शिवराज की पसंद और करीबी रहे रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामाकांत भार्गव ने शिवराज सिंह चौहान के लिए सीट छोड़ दी। शिवराज सिंह चौहान विदिशा से सांसद बन गए हैं। वहीं, बुधनी में शिवराज की विरासत को अब रामाकांत भार्गव संभालेंगे। चुनाव प्रचार में जुट गए कार्तिकेय रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान पहली बार मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे पर शिकन भी देखने को मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रामाकांत भार्गव हमारे पितातुल्य हैं। मैं उनके लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव लड़ने की मंशा से कभी काम नहीं किया। यह मेरा सौभाग्य है कि कार्यकर्ताओं ने मेरा नाम पैनल तक पहुंचाया है। हम रामाकांत भार्गव के लिए दोगुनी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।

उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की 6 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। सभी प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने और प्रचार-प्रसार में जुट गए हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा और मतदाता जुटाने के लिए उनकी रणनीतियों का खुलासा अब आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। TMC ने घोषित किए उम्मीदवार सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। टीएमसी ने निम्नलिखित प्रत्याशियों को टिकट दिया है:     मेदिनीपुर: सुजॉय हाजरा     नैहाटी: सनत देय     सिताई: संगीता रॉय     तालडांगरा: फालगुनी सिंहबाबू     हाड़वा: रबिउल इस्लाम     मदारीहाट: जय प्रकाश टोप्पो उपचुनाव के कारण इन सीटों पर उपचुनाव होने का कारण विभिन्न विधायक चुनावी प्रक्रिया के दौरान सांसद बन गए हैं, जिससे ये सीटें खाली हुई हैं:     मेदिनीपुर: TMC की विधायक जून मालिया 2021 में विधायक बनीं थीं और अब लोकसभा चुनाव 2024 में सांसद बनीं, इसलिए यह सीट खाली हुई है।     मदारीहाट: बीजेपी के मनोज तिग्गा 2021 में विधायक बने थे और लोकसभा चुनाव में अलीपुदुआर से सांसद बने।     हाड़वा: तृणमूल कांग्रेस के हाजी नुरु इस्लाम विधायक थे, जो हाल ही में 2024 लोकसभा चुनाव में बरीशहाट से सांसद बने, लेकिन उनका निधन हो गया।     नैहाटी: तृणमूल कांग्रेस के पार्थ भौमिक ने 2024 में बैरकपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने, जिसके बाद यह सीट खाली हुई।     सिताई: टीएमसी के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया विधायक थे, जो इस बार कूचबिहार से सांसद बने, जिससे यह सीट भी खाली हुई।     तालडांगरा: टीएमसी के अरूप चक्रवर्ती 2021 में विधायक बने थे और 2024 लोकसभा चुनाव में बांकुड़ा से सांसद बने, जिसके कारण यह सीट खाली हुई। इन उपचुनावों में उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ चुनावी रणनीतियों की तैयारी भी जोरों पर है। दोनों प्रमुख पार्टियाँ अपनी-अपनी ताकत को आजमाने के लिए तैयार हैं।  

महाराष्ट्र चुनाव के बीच आंबेडकर के दावे से खलबली, शरद पवार ने दुबई में डॉन दाउद से मुलाकात की पहनाया सोने का हार

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है। महायुति और महाविकास अघाड़ी में अभी तक सीट बंटवारा नहीं हुआ है। इस बीच शरद पवार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं जबकि चुनाव कुछ ही दिन दूर हैं। महाराष्ट्र के एक बड़े नेता ने चौंकाने वाला दावा किया है कि शरद पवार ने दुबई में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं नेता ने यह भी कहा है कि जब पवार उससे मिले थे तो उसको एक सोने का हार भी दिया था। आइए जानते हैं कि वास्तव में यह आरोप किसने लगाया? किसने दिया बयान? वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजित की। इसमें प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि शरद पवार 1988-91 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। उनमें से एक लंदन की यात्रा थी। वहां से वे कैलिफोर्निया चले गये। वे वहां दो दिन रुके, जिनसे उनकी मुलाकात हुई। उन्हें इसका खुलासा करना चाहिए। शरद पवार कैलिफोर्निया से लंदन वापस आए। दो दिन लंदन में रुके। वहां से वह दुबई गए और दुबई में एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात दाउद इब्राहिम से हुई। वंचित बहुजन अघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दावा किया है कि उन्हें वहां सोने का हार दिया गया। प्रकाश आंबेडकर ने पूछे सवाल 1988-91 के दौरान शरद पवार मुख्यमंत्री थे। इसलिए वे केंद्र सरकार की अनुमति के बिना दौरे पर नहीं जा सकते। क्या तब केंद्र सरकार ने उन्हें कैलिफोर्निया बैठक में भाग लेने की अनुमति दी थी? अगर शरद पवार को उस वक्त केंद्र सरकार ने इजाजत दी थी तो क्या उन्हें दुबई जाकर दाउद इब्राहिम से मिलने की इजाजत दी गई थी? और क्या उन बैठकों की सूचना केंद्र सरकार को दी गई? ऐसे सवाल प्रकाश अंबेडकर ने पूछे। चीन को लेकर भी बोले वीबीए प्रमुख वीबीए प्रमुख ने कहा कि डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने 1954 में बताया था कि चीन विस्तारवादी है। अगर हम अपनी सुरक्षा करने की स्थिति में नहीं हैं तो चीन हम पर हमला कर सकता है। केंद्र सरकार ने बाबा साहेब की इस बात को नहीं माना। आंबेडकर ने कहा है कि इसका परिणाम आज हम सब देख रहे हैं। एक तरफ अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच अंदरूनी खींचतान चल रही है। दूसरी ओर आंबेडकर ने यह भी संदेह जताया कि आने वाले समय में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष बढ़ेगा। फिलिस्तीन और इजराइल के बीच संघर्ष जारी है। शरद पवार गुट से कोई प्रतिक्रिया नहीं उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारी केंद्र सरकार अंदर से इजराइल के साथ है और बाहर से फिलिस्तीन के साथ है। आंबेडकर ने कहा कि आज भारत की स्थिति 1990-2000 जैसी दिखती है। उधर, प्रकाश आंबेडकर के दावों पर शरद पवार उनकी पार्टी एनसीपी (एसपी) की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सीट बंटवारा पर देरी को लेकर निराशा, दावा किया कांग्रेस की प्रदेश इकाई के नेता फैसले लेने में सक्षम नहीं हैं: संजय राउत

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया है लेकिन महाविकास अघाड़ी में सीट शेयरिंग को लेकर बात बन ही नहीं रही है। अब गठबंधन के घटक दलों ने एक दूसरे पर आरोप लगाने भी शुरू कर दिए हैं। 20 नवंबर को ही चुनाव होने हैं और ऐसे में सीटों का बंटवारा होने का दबाव सभी पार्टियों पर है। इसी बीच उद्धव ठाकरे के एक बयान ने गठबंधन में सबकुछ ठीक ना होने के कयासों को और बल दे दिया है। उन्होंने कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर गठबंधन टूटना नहीं चाहिए। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस में निर्णय लेने की क्षमता नहीं है। ठाकरे ने यह भी उम्मीद जताई है कि शनिवार तक सीट बंटवारा हो जाएगा। संजय राउत ने महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (MVA) में सीट बंटवारा वार्ता पर देरी को लेकर  निराशा जताई और दावा किया कि कांग्रेस की प्रदेश इकाई के नेता “फैसले लेने में सक्षम नहीं हैं।” मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में राउत ने कहा कि एमवीए के घटक दलों में महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 सीट में से 200 पर आम सहमति कायम हो गई है। एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं। राज्यसभा सांसद राउत ने बताया कि उन्होंने सीट बंटवारे पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और मुकुल वासनिक तथा महाराष्ट्र के लिए पार्टी प्रभारी रमेश चेन्निथला से शुक्रवार सुबह बात की। उन्होंने कहा कि दिन में वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी बात करेंगे। राउत ने कहा, “लंबित फैसला जल्द लिया जाना चाहिए। बहुत कम समय बचा है। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता फैसले लेने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें बार-बार सूची दिल्ली भेजनी पड़ती है और फिर चर्चा होती है। जल्द से जल्द निर्णय लेना होगा।” क्या बोली कांग्रेस कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने शुक्रवार को कहा कि घटकों के बीच 25 से 30 सीट को लेकर गतिरोध है और पार्टी इकाई इस मुद्दे पर आलाकमान के किसी भी फैसले को स्वीकार करेगी। पटोले ने संवाददाताओं से कहा कि एमवीए में सीट बंटवारे को लेकर बातचीत गुरुवार को समाप्त हो गई। ठाकरे ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है और लोगों ने 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्षी एमवीए को सत्ता में लाने का फैसला किया है। र्व मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए एमवीए दलों के बीच बातचीत लंबा खिंचने के मद्देनजर आगाह करते हुए कहा, ‘‘सहयोगियों के बीच सौदेबाजी को बातचीत टूटने के कगार तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’

बुधनी विधानसभा सीट को लेकर सियासत तेज, कार्तिकेय सिंह चौहान की दावेदारी मजबूत

भोपाल  मध्य प्रदेश की बुधनी विधानसभा सीट को लेकर सियासत तेज है। यहां उपचुनाव होने हैं। शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद बुधनी विधानसभा सीट खाली हुई है। इस सीट पर बीजेपी की तरफ से कई दावेदार हैं। दावेदारों में एक नाम शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का भी है। हाल ही में शिवराज सिंह चौहान ने सपरिवार पीएम मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद कई तरह की सियासी अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि शिवराज ने अपने दोनों बेटों की शादी का निमंत्रण देने के लिए पीएम मोदी के पास पहुंचे थे। बुधनी विधानसभा सीट पर बीजेपी हरियाणा वाला फॉर्म्यूला लागू कर सकती है जिससे कार्तिकेय सिंह चौहान की दावेदारी मजबूत हो सकती है। आइए जानते हैं क्या है हरियाणा का फॉर्म्यूला। हाल ही में हरियाणा में विधानसभा के चुनाव हुए। बीजेपी ने यहां लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर सरकार बनाई है। कैबिनेट का गठन भी हो चुका है। हरियाणा चुनाव में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी को टिकट दिया था। राव इंद्रजीत सिंह की बेटी को जीत मिली और उन्हें कैबिनेट में भी शामिल किया गया है। आरती राव को टिकट मिलने और राज्य सरकार में मंत्री बनने के बाद अब नेता पुत्रों के टिकट की दावेदारी बढ़ने की संभावना है। बुधनी में सक्रिय हैं कार्तिकेय सिंह कार्तिकेय सिंह चौहान, शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे हैं। वह बुधनी विधानसभा चुनाव में लंबे समय से सक्रिय हैं। बीते दो विधानसभा चुनावों से वह अपने पिता के विधानसभा क्षेत्र में प्रचार की भी कमान संभाल रहे थे। हाल ही में शिवराज सिंह चौहान को जब विदिशा संसदीय सीट से टिकट दिया गया था तब भी कार्तिकेय सिंह चौहान सक्रिय थे। वह पिता के समर्थन में नुक्कड़ सभाएं और रैलियों को संबोधित कर रहे थे। शिवराज सिंह का गढ़ है बुधनी बुधनी विधानसभा सीट शिवराज सिंह चौहान का गढ़ है। इस सीट पर बीजेपी बीते 21 सालों से चुनाव जीत रही है। कांग्रेस को आखिरी बार 1998 में यहां जीत मिली थी। शिवराज सिंह चौहान इस सीट से पांच बार विधायक रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता को भुनाने के लिए बीजेपी हरियाणा की तरह एमपी में भी केंद्रीय मंत्री के बेटे को चुनाव मैदान में उतार सकती है। पूर्व सांसद भी हैं दावेदार बुधनी विधानसभा सीट पर के दावेदारों में पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव का भी नाम शामिल है। रमाकांत भार्गव 2019 में विदिशा लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे। 2024 में बीजेपी ने उनका टिकट काटकर शिवराज सिंह चौहान को यहां से उम्मीदवार बनाया था। अब माना जा रहा है कि शिवराज के इस्तीफे के बाद खाली हुई बुधनी विधानसभा सीट से रमाकांत भार्गव को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। 13 नंवबर को होनी है वोटिंग बुधनी विधानसभा सीट के साथ विजयपुर में भी उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। नामांकन प्रकिया शुरू हो गई है। वहीं, उपचुनाव का रिजल्ट 23 नवंबर को घोषित किया जाएगा।

बीजेपी बुधनी सीट पर शिवराज सिंह की लोकप्रियता को भुनाने मामा के करीबी पर दांव लगा सकती है

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार शिवराज सिंह चौहान फिर से चर्चा में हैं। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की राजनीति को छोड़कर केंद्र की राजनीति में एक्टिव हैं। मोदी कैबिनेट में वह कृषि और ग्रामीण पंचायत जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हालांकि इन सबसे बीच मध्य प्रदेश में एक बार फिर से उन्हें सियासी चेहरा बनाने की तैयारी चल रही है। दरअसल, बुधनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। उपचुनाव के लिए तारीखों की घोषणा हो चुकी है। बुधनी विधानसभा सीट शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। बुधनी विधानसभा सीट से शिवराज सिंह चौहान लगातार पांच बार विधायक रहे हैं। 2006 के बाद यह पहला मौका है जब बुधनी विधानसभा सीट पर विधानसभा के चुनाव हो रहे हों और शिवराज सिंह चौहान उम्मीदवार नहीं हों। ऐसे में बीजेपी इस सीट पर शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता को भुनाने के लिए किसी ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगा सकती है जो शिवराज का करीबी माना जाता हो। बुधनी में तीसरी बार हो रहे हैं उपचुनाव बुधनी विधानसभा सीट पर तीसरी बार उपचुनाव हो रहे हैं। इससे पहले हुए दो उपचुनावों में बीजेपी की जीत हुई थी। तीनों उपचुनावों में शिवराज सिंह चौहान से कनेक्शन है। बुधनी विधानसभा सीट पर पहली बार 1992 में हुआ था। 1990 में शिवराज सिंह चौहान इस सीट से विधायक बने थे। 1992 में लोकसभा के चुनाव हुए थे। विदिशा सीट से अटल बिहारी वाजपेयी ने चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। अटल बिहारी वाजपेयी दो सीटों से चुनाव जीते थे बाद में उन्होंने विदिशा की सीट से इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को लोकसभा का टिकट दिया था। लोकसभा जीतने के बाद शिवराज ने बुधनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया था। इस चुनाव में बीजेपी के मोहनलाल शिशिर चुनाव जीते थे। इसके बाद बुधनी विधानसभा सीट पर 2006 में उपचुनाव हुए थे। तब बीजेपी विधायक ने शिवराज सिंह चौहान के लिए यह सीट खाली की थी। बीजेपी ने उन्हें राज्य का सीएम बनाया था। सीएम बनने के बाद शिवराज इस उपचुनाव में जीते उसके बाद पांच विधानसभा चुनावों में लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे। अब एक बार फिर इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है क्योंकि शिवराज सिंह चौहान ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया है। क्या बेटे को मिल सकता है टिकट? 2023 के विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी विधानसभा सीट पर 1 लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है। अब बीजेपी के सामने चुनौती है कि बीजेपी इस रेकॉर्ड को बरकरार रखे। ऐसे में उनके बेटे कार्तिकेय के भी चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हैं। इस सीट पर उम्मीदवार कोई भी हो प्रतिष्ठा शिवराज सिंह चौहान की ही दांव पर लगी होगी। ऐसे में बीजेपी शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता को भुनाने के लिए एक नेता को टिकट दे सकती है जिससे जनता के बीच यह मैसेज जाए कि शिवराज सिंह चौहान की टिकट बंटवारे में उपेक्षा नहीं हुई है। शिवराज सिंह चौहान के मैदान में नहीं होने से कांग्रेस भी अपनी सियासी रणनीति को धार देने में जुटी है। बीजेपी का गढ़ है यह सीट शिवराज सिंह चौहान के कारण बुधनी विधानसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर कांग्रेस को आखिरी बार 1998 में जीत मिली थी। तब कांग्रेस के देवेन्द्र पटेल में चुनाव जीता था। उसके बाद से कांग्रेस यहां से चुनाव नहीं जीत पाई है। इस बार कांग्रेस इस सीट को जीतने के लिए विशेष रणनीति बना रही है।  

पुलिस की कार्रवाई को समाज में शांति स्थापित करने और दंगाइयों को कड़ी सजा देने के लिए आवश्यक बताया: नकवी

बहराइच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने बहराइच में हाल ही में हुई हिंसा और एनकाउंटर के संदर्भ में मीडिया से बातचीत की. नकवी ने कहा कि “बलवाइयों की कुटाई और दंगाइयों की ठुकाई समाज की सुरक्षा के लिए जरूरी है.” बहराइच में हालिया हिंसा के दौरान कई लोगों के बीच झड़पें हुईं, जिससे स्थानीय प्रशासन और पुलिस को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इस हिंसा के परिणामस्वरूप कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई, जिसके चलते स्थानीय पुलिस ने नियंत्रण स्थापित करने के लिए कार्रवाई की. इसमें कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और एक एनकाउंटर भी हुआ.  नकवी ने कहा, “अगर समाज को सुरक्षित करना है, तो इस तरह के बलवाई और दंगाईयों की ठुकाई और कुटाई देश के हित में है.” उन्होंने सुरक्षा बलों की कार्रवाई को समाज में शांति स्थापित करने और दंगाइयों को कड़ी सजा देने के लिए आवश्यक बताया. क्या बोले नकवी? भाजपा नेता ने बलवाइयों और दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “हमारा समाज जब तक सुरक्षित नहीं होगा, तब तक विकास और शांति संभव नहीं है.” नकवी ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने से ही समाज में स्थिरता और सुरक्षा स्थापित की जा सकती है. नकवी ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी, जो दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, एक महान राष्ट्रवादी पार्टी भी है. उन्होंने समाज के सभी वर्गों और हिस्सों को साथ लाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि कुछ हिस्से भाजपा से एलर्जी को भाजपा विरोधियों की ऊर्जा बना कर अपने और समाज के लिए नुकसान कर रहे हैं. नकवी ने ऐसे लोगों को भी भाजपा के साथ जोड़ने की अपील की, जो किसी कारणवश राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं. बहराइच हिंसा में शुक्रवार को 26 लोगों को भेजा गया जेल उत्तर प्रदेश के बहराइच में 13-14 अक्टूबर को विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा के बाद शुक्रवार को 26 और लोगों को जेल भेज दिया गया है. वहीं, इससे पहले पुलिस ने पांच आरोपियों अब्दुल हमीद, रिंकू उर्फ सरफराज, फहीम, तालीम और अफजल को सीजेएम प्रतिभा चौधरी के जजेज कालोनी स्थित आवास पर पेश किया. जहां से सीजेएम ने आरोपियों को 14 दिनों की रिमांड पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया. बता दें कि अब तक कुल 31 लोगों को जेल भेजा गया है. इन लोगों पर हुई कार्रवाई हिंसा में जिन 26 लोगों को जेल भेजा गया है उनका नाम इस प्रकार है. 1. असलम का बेटा अलताफ, 2. अंसार अहमद का बेटा अनवर हुसैन 3. जहिद का बेटा तालिब 4. रमजान का बेटा नफीस 5. आमीन का बेटा नौसाद 6. मुनऊ का बेटा सलाम बाबू 7. दानिश का बेटा गुलाम यश 8. मो० तुफैल का बेटा अनवार अशरत 9. मो० अली का बेटा मो० एहशान 10. मो० शफी का बेटा मो0 अली 11. नजीर अहमद का बेटा दोस्त मोहम्मद 12. अब्दुल शाहिद का बेटा मो0 जाहिद और 13. गुलाम सैय्यद का बेटा शुद आलम का नाम शामिल है.  

इंडिया एलायंस का हिस्सा होने के नाते अबू आसिम आजमी ने महाराष्ट्र चुनाव में 12 सीटें चुनाव लड़ने के लिए मांगी

मुंबई  मुंबई के मानखुर्द शिवाजी नगर से सपा विधायक एवं महाराष्ट्र सपा अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने  कहा कि इंडिया एलायंस का हिस्सा होने के नाते मैंने 12 सीटें चुनाव लड़ने के लिए मांगी है। पत्रकारों से बात करते हुए अबू आजमी ने कहा कि अखिलेश यादव इंडिया एलायंस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वो जम्मू-कश्मीर में भी गए थे। अगर हम इंडिया एलायंस का हिस्सा हैं, तो जल्द ही सीटों का बंटवारा हो जाना चाहिए। दरअसल, मैने सुना है क‍ि कांग्रेस पार्टी कुछ सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित करने जा रही है, इसलिए मैने सोचा कि कहीं वही सीटें शामिल हुईं, जिसको हमने मांगा है, तो हमारे कार्यकर्ताओं को लगेगा कि एलायंस टूट गया। इसलिए मैंने कहा कि हमे साथ में लेकर सीटों की घोषणा कीजिए। उन्होंने कहा कि महाविकास अघाड़ी की जो मीटिंग हुई थी, उसमें हमने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए 12 सीटों को मांगी है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि 12 के 12 सीटें मिलना जरूरी है। बता दे कि निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र के लिए चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से प्रदेश में सीटों के बंटवारे की कवायद शुरू हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। प्रदेश में चुनाव एक चरण में संपन्न होगा। 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 23 नवंबर को होगी। महाराष्ट्र में कुल मतदाताओं की संख्या 9.63 करोड़ है, जिनमें से 4.97 करोड़ पुरुष और 4.66 करोड़ महिला मतदाता हैं। पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 20.93 लाख है। इसके अलावा प्रदेश में 1,00,186 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।    

विधायक बाबू सिंह जंडेल ने भगवान शंकर पर टिप्पणी करके पार्टी की मुसीबतें बढ़ा दी !

भोपाल  कांग्रेस के नेता के विवादित बयान का एक मामला मध्य प्रदेश में सामने आया है। जहां उपचुनाव से पहले श्योपुर से विधायक बाबू सिंह जंडेल ने भगवान शंकर पर टिप्पणी करके पार्टी की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। यह बयान पार्टी के लिए ‘सेल्फ गोल’ न बन जाए, नेताओं को यह आशंकाएं सताने लगी है। राज्य की दो विधानसभा सीटों बुधनी और विजयपुर में उपचुनाव होना है। मतदान की तारीख भी तय हो गई है और राजनीतिक दल उम्मीदवार के चयन में जुटे हुए हैं। उप चुनाव की तैयारी जोरों पर है। इसी बीच श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल का भगवान शंकर को लेकर विवादित बयान आया है। इस बयान ने राज्य की सियासत में गर्माहट ला दी है। कांग्रेस विधायक के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज कर लिया गया है। कांग्रेस विधायक का बयान आने के बाद भाजपा हमलावर है। पार्टी की ओर से खुले तौर पर कांग्रेस को एक बार फिर सनातन विरोधी करार दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस बचाव की मुद्रा में है और इस बयान को कई साल पुराना बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजयपुर विधानसभा का उपचुनाव रोचक होने वाला है मगर विधायक के बयान ने बैठे बिठाये कांग्रेस के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। कांग्रेस के नेता हमेशा ही खास कर चुनाव के समय ऐसे बयान दे देते हैं जिससे पार्टी को नुकसान होना तय हो जाता है। अब आशंका इसी बात की बनी हुई है कि कहीं बाबू सिंह जंडेल का यह बयान पार्टी के लिए आत्मघाती गोल साबित न हो जाए। पिछले चुनावों के समय कांग्रेस नेताओं के बयानों ने यही किया है। कांग्रेस विधायक के बयान को पार्टी ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया है और इसका असर मतदाताओं पर पड़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। अगर कांग्रेस बयान सामने आते ही कोई सख्ती दिखाती तो जनता के बीच सकारात्मक संदेश जा सकता था। राज्य में दो विधानसभा क्षेत्र बुधनी और विजयपुर ऐसे हैं जहां के विधायक अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। बुधनी से विधायक रहे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चैहान विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हो चुके हैं वहीं विजयपुर विधानसभा से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने भाजपा का दामन थामा है। रावत वर्तमान में मोहन यादव सरकार में वन मंत्री हैं।    

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet