पहली ही बारिश में हमीदिया की नई बिल्डिंग की खुल गई पोल! भरभराकर गिरी फॉल सिलिंग
The first rain exposed the reality of Hamidia’s new building! False ceiling collapsed
The first rain exposed the reality of Hamidia’s new building! False ceiling collapsed
People of Amla are impressed by the nature of Doctor Saheb हरिप्रसाद गोहे आमला । आमतौर पर विधानसभा चुनाव के बाद वहां के रहवासियों को केवल विधायक और मंत्री मिल पाते है। लेकिन ये इत्तेफाक है कि आमला विधानसभा को आम लोगो की नब्ज भापनें वाला विधायक के साथ डॉक्टर भी मिला। सजह सरल स्वभाव के विधायक डॉ0 योगेश पंडागरे की फितरत जब लोगो के सामनें आती है तो लोग इस फितरत पर फिदा हो जाते। ऐसे कई वाक्ये आएदिन सामनें आते। जब विधायक डॉ0 पंडागरे क्षेत्र का दौरा या जनसंपंर्क करते हुए लोगो के बीच चहुचते तो लोग अपनी समस्याएं तो बताते जरूरत पड़नें पर अपना ईलाज और चिकित्सकीय परामर्श करानें से भी नही चूंकते। बड़ी बात ये है कि डॉक्टर भी ऐसे समय अपनी विधायकी को भूला कर मरीजो की सेवा मे तल्लीन नजर आते। केस 1– अप्रैल माह मे 14 अप्रेल को आमला मे अंबेडकर अनुयायियों ने निशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किया। जहां डॉ0 पंडागरे बतौर अतिथि उपस्थित थे। लेकिन एक गंभीर बीमार की हृदय रोग संबंधी सूचना मिली तो बिना किसी से कुछ कहे अतिथि की कुर्सी छोड़ मरीज संतोष पारधे के की मोटरसाईकिल पर सवार होकर उसका ईलाज करनें एक स्थानीय नीजि क्लीनिक पहुचें और ईलाज शुरू कर दिया। गंभीर बीमार इलाज के पश्चात् अब स्वस्थ है। केस 2- 27 अप्रैल को विवाह समारोह मे शामिल होनें जा रहे डॉ0 पंडागरे को जब सरकारी अस्पताल मे एक महिला मरीज की गंभीर हालत की सूचना मिली तो वे पहले कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल पहुचे। मरीज की नब्ज भांपी। परिजनों और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को और बेहतर ईलाज का परामर्श दिया। इसके पश्चात् ही वे समारोह मे शामिल होनें पहुचे।
Bottle gourd raita will benefit the body in the scorching heat, know how to make it अप्रैल का महीना चल रहा है और भीषण गर्मी से अभी से लोगों की हालत खराब होने लगी है। कई शहरों में तो तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से पार चला गया है, जिस वजह से लोगों ने बाहर निकलना तक बंद कर दिया है। इस मौसम में लोगों को अपने खाने का खासा ध्यान रखना पड़ता है। अगर आप भी ऐसी डिश की तलाश कर रहे हैं, जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद हो तो लौकी का रायता एक बेहतर विकल्प है। लौकी गर्मी के मौसम में शरीर को काफी लाभ पहुंचाती है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। इसके साथ ही लौकी मे पाए जाने वाले विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम और अन्य तत्व शरीर के लिए लाभदायक हैं। वहीं दही शरीर को ठंडक प्रदान करता है। ऐसे में अगर आप लौकी का रायता बनाकर खाएंगे, तो आपको इसका लाभ देखने को जरूर मिलेगा। लौकी का रायता बनाने का सामान विधि लौकी का रायता बनाना काफी आसान है। इसके लिए सबसे पहले लौकी का छिलका उतारकर उसे चार टुकड़ों में काटकर कद्दूकस कर लें। कद्दूकस करने के बाद लौकी को एक पैन में पानी डालकर उबाल लें। इसे आपको 5-8 मिनट तक उबालना है। जब लौकी गल जाए तो इसे छलनी से छानकर एक थाली में फैला दें।जब तक ये ठंडी हो रही है, तब तक एक भगोने में दही लेकर उसे सही से फेंट लें। अब आपको रायते के तड़के की तैयारी करनी है। तड़का लगाने के लिए सबसे पहले एक पैन में तेल डालकर इसे गर्म करें। तेल गर्म हो जाने के बाद इसमें हींग-जीरे का तड़का लगाएं। तड़का बन जाने के बाद इसे फेंटी हुई दही में डालें। तड़का लगाने के बाद दही को सही से मिक्स करें। आखिर में इसमें उबली हुई लौकी, बारीक कटी धनिया पत्ती, हरी मिर्च स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा काला नमक डालें। रायता तैयार होने के बाद इसे फ्रिज में रख दें। अब ठंडे रायते को खाने के साथ परोसें।
Hamidia Hospital: OPD will be shifted to the new building, all facilities will be within 100 meters radius सोमवार से ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी एच 1 बिल्डिंग में होगी संचालित भोपाल। हमीदिया अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब जांच, इलाज के साथ भर्ती जैसी सुविधाओं के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी। अब मरीजों को अस्पताल की सारी सुविधाएं 100 मीटर के दायरे में ही मिल जाएगी। इसके लिए अस्पताल के पुराने भवन और ट्रॉमा इमरजेंसी बिल्डिंग में संचालित ओपीडी को नई बिल्डिंग यानि एच 1 और एच 2 ब्लॉक में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी शुरूआत सोमवार से की जाएगी। सोमवार को ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी एच 1 बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित होगी। इसके बाद अन्य विभागों की ओपीडी को चरणबद्ध तरीके से शिफ्ट कर दिया जाएगा। मालूम हो कि हमीदिया अस्पताल में करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से 11 मंजिला नए ओपीडी ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। यह ब्लॉक अस्पताल के पुराने भवनो की जगह तैयार किया जाना है। ऐसे में पुराने अस्पताल के भवन के एक हिस्से को पूरी तरह से तोड़ा जा चुका है, अब दूसरे हिस्से को तोड़ा जाएगा। इसी हिस्से में ओपीडी संचालित होती है, यही कारण है कि ओपीडी को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है। मरीजों को यह होगी सुविधा अस्पताल प्रबंधन के इस कदम से मरीजों को खासा फायदा होगा। दरअसल अभी अस्पताल में ओपीडी, रजिस्ट्रेशन, ब्लड बैंक, दवा लेने और वार्ड तक जाले में मरीजों को करीब एक किलोमीटर का फासला तय करना होता है। यही नहीं 11 मंजिल पर स्थित वार्ड में भर्ती मरीजों को बिलिंग के लिए गेट के पास बने रजिस्ट्रेशन सेंटर आना पड़ता है। अब यह सारी व्यवस्थाएं मरीजों को एक ही जगह पर ही मिल जाएंगी। एमआरआई और कैथलैब का प्लान नहीं ओपीडी शिफ्टिंग का प्लान को तैयार कर लिया गया है, लेकिन पुराने भवन में स्थित एमआरआई, सीटी स्कैन के सथ कैथ लैब की शिफ्टिंग का कोई प्लान नहीं है। इन सभी सुविधाओं की शिफ्टिंग में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही नहीं इसमें भारी भरकम खर्च भी होता है। ऐसे में अगर बिल्डिंग टूटती है तो इन सुविधाओं को बंद करना पड़ेगा, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना होगा। गिरी फॉलसीलिंग हमीदिया अस्पताल के एच1 ब्लॉक के सेकेंड फ्लोर पर ओटी कॉम्प्लेक्स कॉरीडोर की फाल्स सीलिंग गिर गई। घटना गुरुवार को चली तेज हवाओं और आंधी के चलते हुई है। इन घटनाओं से 750 करोड़ रुपए में बने नए भवनों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे है। हमीदिया अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए ओपीडी शिफ्ट की जा रही है। मरीजों को सभी सुविधाएं आस पास ही मिले ऐसी व्यवस्थाएं की जा रही है।
152 blood donors presented a great example of charity by donating blood in the blood donation camp हरिप्रसाद गोहे आमला । मानव जन्म दुर्लभ है,इसकी सार्थकता साबित करना आसान नहीं पर इतना भी मुश्किल नहीं, जरूरी नहीं कि मानव जीवन की सार्थकता सिद्ध करने के लिए आप कलेक्टर, डॉक्टर ही बनें,बंगलो के मालिक हो या बहुत बड़े बिजनेस टायकून बने या रसूखदार बने, अगर आप अपना थोड़ा सा समय देकर भी किसी के जीवन को बचाने के प्रयास में भागीदार बनते हैं तो आपकी मनुष्यता सिद्ध होती है, ऐसा ही एक श्रेष्ठ उदाहरण बचपन प्ले स्कूल आमला में देखने को मिला, जहां जनसेवा कल्याण समिति एवं बचपन प्ले स्कूल ,ए एच पी एस के सयुक्त तत्वाधान में आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं द्वारा जबरदस्त जज्बा दिखाते हुए आयोजन को सफल बनाया और मानव जीवन की सार्थकता साबित की ।स्वर्गीय पंकज उसरेठे एवं स्वर्गीय शशि टिकारे जी की स्मृति में रविवार बचपन ए प्ले स्कूल में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया । आयोजन समिति के नीरज बारस्कर ,राहुल धेण्डे ,हर्षित ठाकरे ने बताया कि स्वर्गीय पंकज उसरेठे एवं स्वर्गीय शशि टिकारे की स्मृति में आयोजित होने वाला ये रक्तदान शिविर विगत सात वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है, तीव्र गर्मी के बावजूद इस आयोजन का सफल होना रक्तदाताओं की जिंदादिली का द्योतक है । कुल 152 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर इस शिविर को सफल बनाया। शिविर में आधे से ज्यादा नए रक्तदाताओं ने एवं महिला शक्ति ने भी आगे आकर पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया ।बैतूल से आए शैलेंद्र बिहारिया , दीप मालवीय एवं सागर सिंह चौहान द्वारा रक्तदान का महत्व बताया गया , अमित यादव ,कैलाश ठाकरे ,चंद्रकिशोर टिकारे बताते है कि रक्तदान शिविर का जनसेवा कल्याण समिति एवं बचपन ए प्ले स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन किया गया, जिसे सफल बनाने में शहर की सभी रक्तदान समितियों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले रक्तदान के मामले में आमला थोड़ा उदासीन सा था,परन्तु रक्तदाता समितियों के प्रयासों एवं जागरूकता के चलते आज आमला को रक्त राजधानी का तमगा प्राप्त हो चुका है। आयोजन समिति द्वारा रक्तदान करने आये बड़े दिल वाले दानदाताओं को प्रमाणपत्र के साथ सम्मानस्वरूप शील्ड प्रदान की गई ।
Hamidia Hospital: Lifts are closed, heart patients climbing 200 stairs to reach 11th floor अस्पताल के एच 1 ब्लॉक में 11 वी मंजिल पर है कार्डियोलॉजी ब्लॉक, हड्डी रोग, सर्जरी के साथ ओटी कॉम्प्लेक्स भी यही भोपाल। हमीदिया अस्पताल में दिल के ऑपरेशन हो या हड्डी का, डॉक्टर इन्हें कम से कम शारीरिक श्रम की सलाह देता है। लेकिन इन मरीजों को ऑपरेशन के बाद वार्ड तक पहुंचने के लिए 150 से 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही है। हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक वन में कुल 13 लिफ्ट बंद पड़ी हैं। ऐसे में मरीजों को वार्ड या आईसीयू तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां या लिफ्ट कर सहारा लेना पड़ रहा है। हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक वन में कुल 13 लिफ्ट हैंं, इसमें से चार मरीजों के लिए हैं। इमरजेंसी, डॉक्टर्स, लॉजिस्टिक के लिए भी अलग लिफ्ट आरक्षित हैं। इनमें से सिर्फ एक ही लिफ्ट काम कर रही है, यही वजह है कि कई मरीज सीढ़यों व रैंप के जरिए आना जाना करने को मजबूर हैं। नए बने ब्लॉक वन में चरमरा रहीं व्यवस्थाएं नए बने ब्लॉक वन में कार्डियोलॉजी, इमरजेंसी मेडिसिन, आॅथोर्पेडिक, एनेस्थीसिया, ओटी कॉमप्लेक्स, सर्जरी, मेडिसिन, साइकाइट्री, ईएनटी, रेडियो डायग्नोसिस समेत अन्य अहम विभाग हैं। इसी ब्लॉक से कुछ समय पहले रात में बत्ती गुल होने का मामला सामने आया था। जिसके बाद अब लिफ्ट खराब होने की बात सामने आई है। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग मरीजों को हो रही है।मरीज को व्हील चेयर ले गए 11 वी मंजिलजहांगीराबाद निवासी मोहन यादव ने बताया कि उनके चाचा कार्डियोलॉजी विभाग में एडमिट थे। कुछ जांचे कराने के लिए उन्हें पुरानी बिल्डिंग में ले जाना पड़ा। लिफ्ट खराब थी तो रैम्प से ही नीचे आए लेकिन मरीज को वापस रैम्प से 11 वी मंजिल ले जाने में हद से ज्यादा परेशानी हुई। हम चार लोग व्हील चेयर खींच रहे थे, इसके बावजूद हम सभी की सांसे फूलने लगी। ऐसे में अगर हाथ छूट जाता तो मरीज के साथ हादसा हो सकता था। कर्मचारी को हो गई परेशानी सिर्फ मरीज ही नहीं लिफ्ट बंद होने से अस्पताल के कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है। कार्डियोलॉजी विभाग के एक कर्मचारी का कुछ दिन पहले ही हार्ट का ऑपरेशन हुआ है। डॉक्टर ने उन्हें ज्यादा चलने से मना किया है। गुरुवार को जब वह वार्ड से रैम्प से नीचे उतरे तो 11 मंजिल पैदल चलने से हार्ट बीट बढ़ गई। नीचे उतरने के के बाद वे करीब 15 मिनट मे वेटिंग ऐरिया में आराम करते रहे, इसके बाद ही सामान्य हो सके। इस संबंध में हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन का कहना है कि लिफ्ट खराब थी, पीडब्ल्यूडी की टीम लगातार काम कर रही है। अब 4 लिफ्ट ठीक हो गई हैं, सात लिफ्ट जल्द चालू हो जाएंगी।
Complete medicines are not available in the district hospital, citizens are forced to take medicines from outside. कटनी । शासन के द्वारा नागरिकों को मुहैया कराने के लिए जिला चिकित्सालय में दवाइयां उपयोग कराई जाती हैं एवं अच्छे स्वास्थ्य की अपेक्षा की जाती है लेकिन जिला चिकित्सालय में आए हुए मरीजों को पूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं डॉक्टर जो दवा लिखते हैं इसमें कई दवाइयां नागरिक बाहर से खरीदने को मजबूर होते हैं यह कोई नई बात नहीं है यह सिलसिला हमेशा चलता रहता है मिली जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय में लगभग 80 परसेंट दवाइयां उपलब्ध रहती हैं एवं कई प्रकार की दवाइयां जिला चिकित्सालय में आती हैं फिर भी डॉक्टर के द्वारा लिखी दवाइयां कुछ मरीजों को प्राप्त नहीं हो पाती हैं नागरिकों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि बाहर से दवाई लेने को मजबूर होते हैं जिला चिकित्सालय में हर रोज कई मरीज आते हैं और बाहर से भी जिसको दवाइयां नहीं मिलती है वह परेशान होते हैं मरीज ने बताया कि पूर्ण रूप से दवाइयां नहीं मिल पाती हैं जिससे बाहर महंगे दामों में खरीदना पड़ता है इस विषय पर सिविल सर्जन डॉक्टर यशवंत वर्मा का कहना है कि हमारी कोशिश रहती है कि मरीज को दवाइयां उपलब्ध कराना कभी स्टॉक में कमी हो जाती है और लेट दवाइयां मिलने के कारण मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाती हैं
Patients are facing a lot of problems in Ambah Sibil Hospital. मलखान सिंह परमार मुरैना ! अंबाह सिबिल अस्पताल मे देखने को मिला मरीजो को बेड पर बिछाने के लिए चादर नहीं मिल रही है। सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों को तमाम सुविधाएं देने की बात कहती हो। लेकिन अंबाह के सरकारी अस्पताल में भर्ती होने आए मरीजों को बेड पर चादर तक नहीं है ऐसे में मरीजों को या तो घर से चादर लानी पड़ रही है या फिर बिना चादर के ही लेटना पड़ रहा है। अंबाह अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार लगातार पहल कर रही है। कि मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो। अस्पतालों में अब स्टॉफ की कमी नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। सिबिल अस्पताल प्रभारी नहीं मिले मौके पर जानकारी ली तो लोगों ने बताया कि अपने क्लीनिक पर होंगे अस्पताल में वह नहीं थे शुक्रवार को अस्पताल के पड़ताल में व्यवस्था भी कुछ इसी तरह दिखी। किसी भी बेड चादर बिछी नहीं दिखी सिबिल अस्पताल मरीजों के बेड पर चादर नहीं थी वार्ड में एक भी बेड पर चादर नहीं थी तथा जो भी नए मरीज आए, उसे बिना चादर के ही बेड पर भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया।
Hamidia Superintendent’s instructions: Now cursive writing will not work, doctors will write names of medicines in capital letters. भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों को ओपीडी पर्चे पर दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं जिन पर जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुमित टंडन ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। बतादें कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। ओपीडी पर्ची की होगी मॉनिटरिंग डॉक्टरों की राइटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। डॉक्टरों को लिखनी होगी जेनेरिक दवाएंचिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानिटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है। अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं। पहले भी जारी हो चुके ऐसे आदेश9 दिसंबर 2014 को चिकित्सकों को घसीटामार लिखावट नहीं करने के लिए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने निर्देश जारी किए थे। इसमें भी डाक्टरों से कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा गया था। इसके बाद अप्रैल 2015 में एक बार फिर यही आदेश जारी किए गए। – 2 जनवरी 2021 – हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों के पर्चे पर चिकित्सकों का नाम, मोबाइल नंबर और उनकी मुहर भी लगाने के आदेश जारी हुए थे। इनका कहनाहमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मॉनिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था।डॉ सुमित टंडन, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल
Health department failed to curb quack doctors, both district health and Ambah area are silent after the death of many people. मलखान सिंह परमारमुरैना ! अंबाह झोलाछाप डॉक्टर पर अंकुश लगाने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है जिला स्वास्थ्य अधिकारी को कई साल से जानकारी होने के बावजूद भी एक भी कार्रवाई नहीं करते यहां तक की देखा गया है कि कई जिला स्वास्थ्य अधिकारी और बीएमओ को अवगत अवगत कराया गया और लिखित में भी कार्रवाई की मांग की गई पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई ऐसा लगता है कहीं ना कहीं स्वास्थ्य अधिकारी को इन झोलाछाप डॉक्टरों से मोटी रकम मिल रही है इसलिए कार्यवाही करने के नाम से पीछे हट जाते हैं जब भी इसे कोई जानकारी मांगी जाए तो उनका कहना होता है कि हमारी टीम कार्रवाई करेगी पर आज तक किसी भी झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं की गई और तो और सिविल अस्पताल के बगल से ही कई झोलाछाप डॉक्टर बैठती है कई मरीजों की जान भी गई है पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्रवाई के नाम से मुंह ऐसे मोड़ लेते हैं जैसे की मारता है तो मरने दो हमारा थोड़ी मरता है अस्पताल सिविल अस्पताल प्रभारी प्रमोद शर्मा को भी बताया गया तो उनका कहना है हमारी टीम कार्रवाई करेगी पर ऐसा कभी नहीं होता है कार्रवाई के नाम से स्वास्थ्य अधिकारी अपना मुंह मोड़ लेते हैं इनका कहना हैप्रमोद शर्मा जी डॉक्टर कार्रवाई करेंगे
Misled in getting government job in health department by giving fake certificate कटनी। सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े के किस्से अक्सर सामने आते रहते है जिनमे न्यायालय के आदेश पर कार्यवाही भी होती है। इसके बावजूद भी फर्जीवाड़ा कम होने का नाम नही ले रहा। ताजा मामला बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा हुआ है जहा एक आरटीआई कार्यकर्ता ने स्वास्थ्य विभाग को हायर सेकंडरी के फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले शख्स को उजागर किया है। आरटीआई कार्यकर्ता कमल शर्मा ने बताया की एसपी पाटकर नामक व्यक्ति ने बोर्ड मार्कशीट लगाकर एमपीडब्लू की पोस्ट हासिल की थी। आरटीआई के जरिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी से बात उजागर हुई है की एस पी पाटकर ने जो मार्कशीट लगाई थी उसमे किसी भी तरह की सील मुहर, या प्राचार्य के साइन नहीं है।वही फर्जी दस्तावेज से नौकरी करने वाला सुदर्शन प्रसाद पाटकर बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुपरवाइजर के पद पर आसीन है। यह मामला अपने आप में बेहद संगीत है। आरटीआई एक्टिव विस्ट द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों को अगर सही माने तो कई वर्षों से बड़वारा में सदस्य सुपरवाइजर शासन की आंखों में धूल झोंक रहा है। इस मामले की सूक्ष्म जांच कराए जाने से सारी सच्चाई सामने आ सकती है।इनका कहना हैइस पूरे मामले को लेकर बातचीत करते हुए खुद सुदर्शन पाठ करने कहा कि आगजनी की एक घटना में मेरे सभी दस्तावेज जलकर खाक हो गए हैं। मेरे द्वारा किसी तरह का कोई फर्जी बाड़ा नहीं किया गया है। जांच कराई जानी चाहिए जिससे मामला स्पष्ट हो सके।
Hamidia Hospital is being prepared for robotic surgery भोपाल ! इस साल के अंत तक हमीदिया अस्पताल में रोबोटिक्स तकनीक से घुटने और कूल्हे के आपरेशन शुरू करने की तैयारी। राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में जल्द ही घुटने और कूल्हे (नी एंड हिप रिप्लेसमेंट) की रोबोटिक सर्जरी को शुरु करने की तैयारियों में जुट गया है। अब तक सिर्फ प्रदेश के निजी अस्पतालों में नी और हिप की सर्जरी होती है। प्रदेश के एम्स को छोड़ किसी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा पहली बार शुरू होने जा रही है। रिप्लेसमेंट के लिए इसकी शुरुआत दिसंबर 2024 तक की जाएगी, जिसकी कार्ययोजना काम किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो साल के अंत तक इसकी सुविधा सर्जरी वाले मरीजों को मिलना भी शुरू हो जाएगी। गांधी मेडिकल कालेज से मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए बेंगलुरु की एक निजी कंपनी से अस्पताल के विशेषज्ञ संपर्क में भी हैं। क्या है रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट रोबोटिक सर्जरी कंप्यूटराइज्ड डिवाइस से की जाएगी, जो चिकित्सक के सहयोगी के रूप में काम करेगी। इसमें सर्जरी के दौरान चिकित्सक रोबोटिक सेटअप का रिमोट हाथ में पहनते हैं। इसमें लगे कैमरे और सेंसर रोबोट घुटने के सारे मूवमेंट और स्थिति को नोट कर उसकी थ्रीडी इमेज तैयार करते हैं। थ्रीडी इमेज के हिसाब से रोबोट सर्जरी का सटीक प्लान तैयार करता है। वह चिकित्सक को बताता है कि हड्डी कितनी खराब है, कितनी और किस जगह से काटने पर क्या परिणाम आ सकते हैं। आपरेशन एक विशेष कंसोल में बैठा सर्जन आपरेशन का काम संभालता है। सर्जन को आपरेशन करने वाली जगह का एक बड़ा 360 डिग्री दृश्य दिखता है। इसके अलावा साथ खड़ा चिकित्सक इस बात की जानकारी देता है कि उपकरण सही जगह पर जाकर अपना काम कर रहा है। रिप्लेसमेंट के तीन दिन बाद अस्पताल से मिलेगी छुट्टी अब तक यह सारे आकलन चिकित्सक अपने विवेक और अनुभव के आधार पर करते थे। अब चिकित्सक के पास सटीक आकलन और प्लान होगा। इससे सर्जरी काफी आसान हो जाएगी। यही नहीं, रोबोटिक सर्जरी में इंप्लांट की उम्र 10 साल तक बढ़ जाती है और सर्जरी फेल होने का खतरा न के बराबर होता है। यह सर्जरी इतनी सटीक होती है कि रिप्लेसमेंट के तीन दिन बाद ही मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इनका कहना हैरोबोटिक सर्जरी को लेकर काम काफी समय से चल रहा है। इसके पूर्व में भी इस सर्जरी के लिए डेमों विशेषज्ञों के सामने हो चुका है। वर्ष 2024 के अंत तक में इसकी शुरुआत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। इतना ही नहीं तकनीकी को बढ़ाने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं, बाहर के विशेषज्ञों से इसे लेकर लगातार संपर्क में हैं, जिससे इसकी सफलता की जानकारी दी जा सके।
Do not take headache lightly, it can lead to serious diseases. जानें राहत पाने के उपाय सिरदर्द होने पर आमतौर पर दर्द की दवा खाकर ठीक हो जाते हैं लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है तो कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है. ऐसी कंडीशन में इसे सामान्य दर्द समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. Headache Remedies: सिरदर्द एक आम समस्या मानी जाती है लेकिन अगर इससे ज्यादा दिन से परेशान हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि जब कई दिनों तक सिरदर्द (Headache) ठीक न हो तो वह गंभीर रूप भी ले सकती है. इसका कारण कई खतरनाक बीमारी भी हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर के पास जाने की नौबत आ सकती है. इसलिए सिरदर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं सिरदर्द के क्या कारण हो सकते हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए… सिरदर्द का गंभीर कारण बुखार के साथ सिरदर्दकई बार बुखार के साथ सिरदर्द या गर्दन में अकड़न की वजह से भी होती है. यह इंसेफेलाइटिस या मेनिन्जाइटिस के संकेत भी हो सकते हैं. जिसे दिमागी बुखार या मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है.यह एक संक्रामक बीमारी है, जिसमें मेनिन्जेस में सूजन आ जाती है. इस तरह का सिरदर्द खतरनाक भी हो सकता है. ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या उनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उनके लिए यह जानलेवा भी हो सकती है. इसलिए समय रहते इसका इलाज करवाना चाहिए. माइग्रेन या क्लस्टर हेडेकक्लस्टर हेडेक या माइग्रेन से होने वाला सिरदर्द अलग होता है. माइग्रेन की वजह से सिर के किसी एक हिस्से में काफी तेज दर्द होता है. इसमें उल्टी या मिचली भी आती है. कई बार यह दर्द इतना ज्यादा होता है कि नींद खुल जाती है. यह समस्या 20 से 50 साल की उम्र वालों में ज्यादा देखने को मिलता है. कई बार ब्रेन ट्यूमर, स्लीप एपनिया और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की वजह से भी सिरदर्द होता है. स्ट्रेस की वजह से सिरदर्दस्ट्रेस यानी तनाव की वजह से भी सिरदर्द की समस्या होती है. इसमें सिरदर्द अचानक से होता है और फिर खुद से ही ठीक हो जाता है. हालांकि, तनाव से होने वाले दर्द में कोई दूसरा लक्षण नहीं दिखाई देता लेकिन इसे भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. थंडर क्लैप सिरदर्दथंडरक्लैप सिरदर्द काफी गंभीर बीमारी है. इसमें कुछ ही सेकेंडस में ही तेज दर्द होने लगता है. कई बार स्ट्रोक, आर्टरीज के डैमेज होने या सिर में चोट की वजह से भी दर्द हो सकता है. कई बार ये दर्द सिर से पीठ की तरफ बढ़ जाता है और कई-कई घंटों तक बना रहता है. थंडर क्लैप सिरदर्द की वजह से मिचली, बेहोशी और चक्कर आने की समस्याएं हो सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर वालों को यह दर्द ज्यादा परेशान कर सकता है. साइनस सिरदर्दसिर में साइनस या कैविटी में सूजन आने के कारण भी कई बार सिर में तेज दर्द होता है. यह दर्द लगातार होता रहता है. इसमें सिरदर्द के अलावा नाक के ऊपरी हिस्से या गाल की हड्डी पर भी दर्द हो सकता ह. इसकी वजह से चेहरे पर सूजन, कान बंद होना, बुखार और नाक बहने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. आंखों की बीमारी से सिरदर्दआंखों का धुंधलापन, रेटिना की प्रॉब्लम्स या आंखों की दूसरी समस्याओं की वजह से भी सिर दर्द बहुत तेज होता है. अगर आंखों की रोशनी कम है तो भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर को दिखाना चाहिए. सिरदर्द के ये कारण भी50 साल या उससे ज्यादा उम्र वालों में शारीरिक बदलाव की वजह से कमजोरी होती है और इससे भी सिरदर्द हो सकता है.कुछ महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान सिरदर्द होता है.चाय-कॉफी पीने की आदत है तो कैफीन की लत पड़ जाती है, जब ये न मिले तो सिरदर्द होने लगता है.ज्यादा शराब पीने या डिहाइड्रेशन से भी सिरदर्द हो सकता है.नींद पूरी न होने से से भी सिर दर्द करता रहता है. सिरदर्द से राहत पाने के उपाय Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.
OME can take away the ability to hear, know everything about this problem from experts कान हमारे शरीर का सबसे जरूरी अंग है जिसके बिना जीवन की कल्पना करता मुश्किल हो जाता है। हालांकि बावजूद इसके लोग अपने कानों का ख्याल नहीं रखते हैं। ऐसे में इसे लेकर जागरूकता फैलाने के मकसद से हर साल World Hearing Day मनाया जाता है। इस मौके पर आज एक्सपर्ट से जानेंगे कानों में होने वाले ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन के बारे में कान हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है, जो हमें सुनने में मदद करता है।ऐसे में इसकी देखभाल के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है।ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन कान में होने वाली एक समस्या है, जिसकी अनदेखी हानिकारक हो सकती है। हमारे शरीर में मौजूद सभी अंग हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यह सभी अंग हमें सेहतमंद रहने में मदद करते हैं। हमारे सेंस ऑर्गन इन्हीं में से एक है, जो हमें आसानी से जीवन जीने में मदद करते हैं। कान इन्हीं जरूरी अंगों में से एक है, जो हमें सुनने में मदद करते हैं। यह हमारे लिए काफी जरूरी होते हैं, जिसके बिना अपना जीवन तक सोच पाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि अपने कान का भी ख्याल रखना बेहद जरूरी है। अपनी बिजी लाइफ में लोग अक्सर अपने कानों की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में कानों की सेहत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मकसद से हर साल 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है। यह दिन हियरिंग लॉस और बहरेपन को रोकने के बारे में जागरूकता बढ़ाना और विश्व स्तर पर कान और उनकी देखभाल को बढ़ावा देना है। इस मौके पर आज हम जानेंगे कानों में होने वाले संक्रमण ओटिटिस मीडिया (ओएमई) के बारे में, जिसकी अनदेखी आपके लिए हानिकारक हो सकती है। इस बारे में हमने सीके बिरला हॉस्पिटल गुरुग्राम में लीड ईएनटी कंसल्टेंट डॉक्टर अनिष गुप्ता से विस्तार में जानने की कोशिश की क्या है ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन?डॉक्टर बताते हैं कि पिछले कुछ समय में मिडल ईयर में ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन (Otitis Media with Effusion) या ओएमई (OME) के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। इस परेशानी को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन अगर इसका इलाज न कराया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे मिडल ईयर का इन्फेक्शन हो सकता है या मिडिल ईयर में धीरे-धीरे वेंटिलेशन की समस्या हो सकती है। ओएमई के कारणओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन (ओएमई) होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें लगातार कोल्ड होना, एलर्जी, वायरल इंफेक्शन, एडेनोओडाइटिस और एडेनोइड हाइपरट्रॉफी शामिल हैं। क्यों बढ़ रहे ओएमई के मामलेओएमई के बढ़ते मामलों पर डॉक्टर कहते हैं कि ओएमई के मामले खासकर कोरोनाकाल के बाद ज्यादा बढ़ी हैं। इसकी वजह एडेनोइड संक्रमण और हाइपरट्रॉफी को माना जाता है। हालांकि, कोरोना वायरस से इसका सीधा संबंध अभी स्थापित होना बाकी है, लेकिन हाल के वक्त में ओएमई के मामलों में 25 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। खासकर 3 से 6 साल के बच्चों को इसका खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में जिन बच्चों को एडोनोइड हाइपरट्रॉफी, बार-बार सर्दी, खांसी और एलर्जी होती है, उन्हें लगातार स्क्रीनिंग और चेकअप की जरूरत है। ओएमईम के जोखिम कारकओएमई की समस्या गंभीर रूप ले सकती है, अगर समय रहते इसकी पहचान न की जाए और इसके इलाज में देर हो जाए। इसकी वजह से ईयरड्रम को डैमेज हो सकता है, और फिर कान की बीमारी हो सकती है। इस सबके कारण सुनने की क्षमता कम हो सकती है, कान तरल पदार्थ बहने लगता है और दूसरी अन्य समस्याएं भी हो जाती हैं। ऐसे में ओएमई के नकारात्मक प्रभाव से बचाव के लिए सही समय पर इसकी पहचान और फिर सही इलाज बहुत जरूरी है।
Private hospitals will not be able to hold dead bodies hostage if bills are not paid. भोपाल। निजी अस्पतालों में किसी मरीज की मौत होती है तो अस्पताल बिल भुगतान के नाम पर मरीज के शव को बंधक नहीं बना सकता। यही नहीं परिजनों द्वारा शव को प्राप्त न करने तक या लावारिस होने पर शव को गरिमा के साथ रखना होगा। इस दौरान शव के लिए फ्रीजर या कोल्ड स्टोरेज जैसी व्यवस्था भी करनी होगी। ऐसा करने पर अस्पताल पर कठोर अनुशासात्मक कार्रवाई की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को निजी अस्पतालों में शवों के रखरखाव को लेकर दिशा निर्देश जारी किए। कोविड काल में शवों के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर यह नियम जारी किए। आयोग द्वारा नियम जारी करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी सभी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम्स को इस संबंध में पत्र जारी किया। मालूम हो कि कई बार निजी अस्पतालों में बिल भगुतान ना होने के बाद शव को परिजनों को न सौंपने और विवाद के मामले सामने आते हैं। कई बार परिजन इसके विरोध में अस्पताल में तोड़फोड़ तक कर देते हैं। इन सब विवादों को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियम जारी किए गए। निजी अस्पतालों में नहीं होते फ्रीजरजारी नियमों में परिजनों को शव प्राप्त न होने तक शव को उचित तरीके से फ्रीजर में रखना होगा। हालांकि निजी अस्पतालों में कोल्ड स्टोरेज और फ्रीजर की व्यवस्था नहीं होती। यही नहीं नर्सिंग होम एक्ट में भी छोटे निजी अस्पतालों में कोल्ड स्टोरेज बनाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में निजी अस्पतालों को शव को कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी। शीतगृहों तक परिवहन की नि: शुल्क व्यवस्था भी निजी अस्पतालों को ही करना होगी। भोपाल नर्सिग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने कहा कि निजी अस्पतालों में फ्रीजर नहीं होते लेकिन अस्पताल इसकी व्यवस्था कर देते हैं। कोई अस्पताल पैसों के लिए शवों को बंधक नहीं बनाता। शवों को परिजनों को सौंपे जाने तक अस्पताल में पूरी गरिमा से रखा जाता है।