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कब्रिस्तान बताई गई जीवाजी यूनिवर्सिटी की जमीन, प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मचा हंगामा

Jiwaji University land declared a graveyard, sparking commotion during administrative action ग्वालियर। सिटी सेंटर स्थित अल्कापुरी के सामने जीवाजी यूनिवर्सिटी को आवंटित 15 बिस्वा जमीन का कब्जा दिलाने पहुंची प्रशासन की टीम के साथ विवाद हो गया। यहां जेयू के अधिकारी व प्रशासन की टीम जब पहुंची तो कुछ युवक आ गए। इसमें शामिल मुस्लिम युवक ने कहा कि यह कब्रिस्तान की जमीन है, जिसके बाद प्रशासन ने दस्तावेज दिखाने को कहा तो नहीं दिखा पाए। मौके पर और युवकों को बुलवा लिया गया और विवाद बढ़ने लगा। यह देख प्रशासनिक अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी थाना पुलिस का फोर्स बुलवा लिया जिसके बाद उत्पात मचाने वालो के तेवर ढ़ीले पड़ गए। विवाद करने वालों पर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज कराने की तैयारी की गई लेकिन विरोध करने वाले फिर पीछे हट गए। इसके बाद कब्जा दिलाने की कार्रवाई पूरी की गई। सिटी सेंटर वृत्त के नायब तहसीलदार शिवदत्त कटारे ने बताया कि जीवाजी यूनिवर्सिटी की ओर से प्रबंधन को आवंटित जमीन का कब्जा दिलाने के लिए आवेदन आया था। यह जमीन पूर्व में आवंटित की गई और सीमांकन भी हो चुका है। यह जीवाजी यूनिवर्सिटी का विवेकानंद परिसर कहा जाता है। जेयू के कुल सचिव डॉ राजीव मिश्रा सहित अधिकारी कब्जा लेने के लिए मौके पर आए। इसी दौरान शाहरूख खान नाम का युवक कुछ साथियों के साथ आ गया जो जमीन को कब्रिस्तान की बताने लगा। मौके पर पुराने रिकॉर्ड भी दिखाए गए और बताया कि यह जमीन जीवाजी यूनिवर्सिटी को आवंटित है। उल्लेखनीय है कि जीवाजी विश्वविद्यालय को पीएम-उषा योजना के अंतर्गत दो शैक्षणिक विभागों और एक छात्रावास के विस्तार के लिए अनुदान प्राप्त हुआ है। इसी के तहत इंजीनियरिंग अध्ययनशाला के विस्तार का कार्य प्रस्तावित है। बीते कुछ दिनों से अतिक्रमण की आशंका के चलते निर्माण कार्य में लगातार व्यवधान उत्पन्न हो रहा था। मौके पर विवाद खत्म होने के बाद निर्माण शुरू कराया गया। मुआवजा भी मांग रहे थे युवक मौके पर आए युवक कुछ कागजात दिखाते हुए यह भी कह रहे थे कि इस जमीन का हमें मुआवजा नहीं मिला है। जब अधिकारियों ने कहा कि जमीन आपकी है इसके दस्तावेज दिखाएं फिर मुआवजा की बात होगी। इस दौरान प्रशासन ने वीडियो रिकार्डिंग भी की। जेयू को आवंटित जमीन का कब्जा दिलाने के दौरान कुछ लोग इसे कब्रिस्तान की जगह बता रहे थे लेकिन उनके पास कोई दस्तावेज नहीं थे। पुलिस के सहयोग से कार्रवाई पूरी कर कब्जा दिलाया गया। शिवदत्त कटारे, नायब तहसीलदार

‘200 लोग लाओ, दो करोड़ के प्रस्ताव पास कराओ’, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने पार्षदों को सीएम से मिलाने का भी दिया ऑफर

“Bring 200 people, get a proposal worth two crore rupees passed,” Minister in charge Tulsiram Silawat also offered to introduce the councillors to the Chief Minister. ग्वालियर। जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने आगामी 25 दिसंबर को ग्वालियर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर भाजपा पार्षद दल की बैठक ली। बाल भवन के नवीन टीएलसी कक्ष में आयोजित बैठक में प्रभारी मंत्री ने सभी पार्षदों को लक्ष्य दिया कि कार्यक्रम में 200-200 लोगों को लेकर पहुंचना है। वाहनों की चिंता नहीं करें। वो सारी व्यवस्था हम कराएंगे। पार्षदों के दो-दो करोड़ रुपये के काम कराए जाएंगेप्रभारी मंत्री तुलसीराम ने कहा कि इसके अलावा पार्षदों के दो-दो करोड़ रुपये के काम कराए जाएंगे, जिसके प्रस्ताव तैयार कराए जाएं। क्योंकि अब आप लोगों का कार्यकाल खत्म होने में डेढ़ साल ही रह गया है। इस पर पार्षदों ने पूछा कि ये कार्य किस वित्तीय वर्ष में कराए जाएंगे, तो प्रभारी मंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि आप लोगों का कार्यकाल खत्म होने से पहले काम हो जाएंगे। सीएम मोहन यादव से मिलवाने का किया वादाप्रभारी मंत्री ने पार्षदों से यह भी कहा कि कार्यक्रम का सफल आयोजन होने के बाद आप सभी को मैं इंदौर लेकर चलूंगा। आपको इंदौर घुमाया जाएगा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समय लेकर उनसे मुलाकात भी कराई जाएगी। बैठक की शुरुआत में प्रभारी मंत्री ने कहा कि अटलजी राष्ट्र के गौरव होने के साथ ही ग्वालियर के लाडले सपूत थे। उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को भव्य व ऐतिहासिक बनाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। परिषद की बैठक भी हुई स्थगितवहीं सोमवार को नगर निगम परिषद की बैठक को सभापति मनोज सिंह तोमर ने कोरम के अभाव में स्थगित कर दिया। दरअसल, 25 दिसंबर को वीआइपी आगमन के चलते नगर निगम के अधिकतर अधिकारी व्यस्त थे। इसके अलावा जिले में प्रभारी मंत्री द्वारा बैठकें आयोजित की जा रही थीं। ऐसे में परिषद में पार्षद पूरी संख्या में नहीं पहुंचे थे। हालांकि पिछली बैठक में जिन 15 प्रश्नों के उत्तर न आने के कारण हंगामा हुआ था, वो सारी जानकारी सदन में आ गई थी, लेकिन कोरम के अभाव के चलते बैठक को स्थगित कर दिया गया। वार्ड स्तर पर भी लीं बैठकेंमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार के सफल दो वर्ष पूर्ण होने एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर सोमवार को शहर के सभी वार्डों में भाजपा की बैठकें आयोजित हुईं। वार्ड 19 में आयोजित बैठक में प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट व भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया मुख्य अतिथि के रूप शामिल हुए। वहीं वार्डों की बैठकों में भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वार्ड 19 की श्रीकृष्ण वाटिका में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि अटल स्मृति वर्ष की स्मृति को बनाए रखने के लिए 25 दिसंबर को स्मृति के रूप में आप सबके अमूल्य योगदान के कारण जाना जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 25 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में हर बूथ से कार्यकर्ता की भागीदारी सुनिश्चित हो।

25 करोड़ के दावों पर सवाल: सरकार की नाक के नीचे सबसे बड़ी गौशाला में गोवंशों की दुर्दशा

ग्वालियर। Madhya Pradesh Largest Gaushala: मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला का तमगा पाने वाली लाल टिपारा स्थित आदर्श गौशाला आज खुद सवालों के घेरे में है। जिस गौशाला को सरकार और नगर निगम अपनी उपलब्धि बताकर पेश करते रहे, वहीं अब गोवंश की बदहाल तस्वीर ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। गौशाला परिसर में करीब 15 गोवंशों के शवों का ढेर मिलना न केवल संवेदनहीनता को उजागर करता है, बल्कि करोड़ों रुपए के खर्च पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हैरानी की बात यह है कि इस गौशाला के संचालन पर हर साल करीब 25 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में 10 हजार से अधिक गोवंश रखे गए हैं। इसके बावजूद गोवंशों की मौत और शवों की ऐसी दुर्दशा साफ इशारा करती है कि जमीनी हकीकत कागजी दावों से बिल्कुल अलग है। मामला उजागर होने के बाद नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने जांच के आदेश तो दे दिए, लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर लापरवाही आखिर कब से चल रही थी और जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे? क्या 25 करोड़ का बजट सिर्फ फाइलों और आंकड़ों में ही खर्च हो रहा है? निरीक्षण के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने इसे बीमारी और दुर्घटना से हुई मौत बताकर स्थिति को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन स्वस्थ गोवंश की मौत न होने का दावा आमजन को रास नहीं आ रहा। अगर इंतजाम इतने ही “मजबूत” थे, तो गौशाला में शवों का ढेर आखिर कैसे लगा? यह घटना सरकार और नगर निगम के गौ-कल्याण के दावों पर सीधा तमाचा है। सवाल उठता है कि जब प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला का यह हाल है, तो बाकी गौशालाओं की स्थिति क्या होगी? अब जनता यह जानना चाहती है कि क्या सिर्फ जांच के आदेश देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा, या फिर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी और गोवंश के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपयों का हिसाब भी तय किया जाएगा।

कांग्रेस का बड़ा सियासी धमाका, बीजेपी-बीएसपी के नेताओं ने जीतू पटवारी कि मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम

Big political by Congress, BJP-BSP leaders joined Congress in the presence of Jeetu Patwari ग्वालियर। Big political by Congress ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। रविवार को ग्वालियर ग्रामीण से बीजेपी और बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। इस कदम ने कांग्रेस के संगठन को नई ताकत और सियासी परिदृश्य को नया मोड़ दिया है। ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा की राजनीति ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस मौके पर पटवारी ने कहा – कांग्रेस परिवार में सभी का स्वागत और हृदय से अभिनंदन करता हूं। लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई, हम सब मिलकर लड़ेंगे। ग्वालियर-चंबल: सत्ता की कुंजी वाला क्षेत्र Big political by Congress मध्यप्रदेश की राजनीति में ग्वालियर-चंबल अंचल हमेशा निर्णायक रहा है। यहाँ की दिशा ही कई बार सत्ता की दशा तय करती आई है। बीजेपी और बीएसपी से कांग्रेस में हुआ यह जुड़ाव स्थानीय और राज्य स्तरीय समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगा। लोकतंत्र बनाम सत्ता की राजनीति Big political by Congress पटवारी का वक्तव्य यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस केवल सत्ता की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए संघर्षरत है। मौजूदा हालात में जब विपक्ष पर दबाव और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, कांग्रेस ने खुद को लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक बताने की कोशिश की है। नए कार्यकर्ता, नई ऊर्जा Big political by Congress किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। बीजेपी और बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में आए इन कार्यकर्ताओं से न केवल संगठन को मजबूती मिलेगी बल्कि गांव-गांव में कांग्रेस का जनाधार भी और गहराएगा। यह बदलाव कार्यकर्ताओं की नाराजगी और जनता की नई उम्मीदों दोनों को दर्शाता है। बीजेपी और बीएसपी को झटका Big political by Congress ग्वालियर ग्रामीण में यह घटना बीजेपी और बीएसपी के लिए बड़ा झटका है। यहाँ के जातीय और सामाजिक समीकरण अक्सर चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। कांग्रेस में हुए इस जुड़ाव से विपक्षी दलों का परंपरागत वोट बैंक प्रभावित होना तय माना जा रहा है। जनता की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं Big political by Congress महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों से जूझती जनता अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में है, जो सच्चे अर्थों में उनकी आवाज बने। कांग्रेस में शामिल हुए नए नेता और कार्यकर्ता इस उम्मीद को मजबूत कर सकते हैं। राजनीतिक संदेश स्पष्ट Big political by Congress यह सदस्यता अभियान केवल दल-बदल की औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है जनता बदलाव चाहती है। ग्वालियर ग्रामीण की यह तस्वीर प्रदेश में नई राजनीति की पृष्ठभूमि तैयार करती दिख रही है। ग्वालियर ग्रामीण का यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। वहीं बीजेपी और बीएसपी के लिए यह चेतावनी है कि जनता अब उनके पारंपरिक वादों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक मूल्यों और वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।कांग्रेस का बढ़ता परिवार प्रदेश की राजनीति में नई करवट का संकेत है—बदलाव अब सिर्फ शुरुआत है, असली लड़ाई आगे है। ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में हलचल, जब बीजेपी और बीएसपी के कई नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। जीतू पटवारी ने कहा – लोकतंत्र और संविधान की रक्षा ही अब असली राजनीति है।

पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस

Notice to vacate government residence to former minister Arvind Bhadoria ग्वालियर। शिवराज सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद भदौरिया को अब रेसकोर्स रोड स्थित शासकीय बंगला नंबर 35 खाली करना होगा. यह बंगला मंत्री के रूप में उन्हें मिला था, लेकिन चुनाव हारने और मंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनके द्वारा बंगला खाली नहीं किया गया है. कुछ दिनों पहले उनके बंगले में चोरी हो गई थी, जिससे मामला हाईलाइट हो गया. तब प्रशासन की नींद टूटी. अब पूर्व मंत्री को बंगला खाली करने को लेकर एसडीएम झांसी रोड ने नोटिस जारी किया है. इसमें उन्हें आज यानी 28 अगस्त तक का अल्टीमेटम है. अगर इस पर पूर्व मंत्री ने बंगला नहीं छोड़ा तो बेदखल करने की कार्रवाई की जाएगी.

पूर्व मंत्री अरविंद भदोरिया के बंगले में बड़ी चोरी, अगल बगल रहते हैं अन्य मंत्रीगण

Big theft in former minister Arvind Bhadoria’s bungalow, other ministers live nearby ग्वालियर। ग्वालियर में चोरों ने पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया के बंगले को निशाना बनाया. बंगले में घुसे अज्ञात चोरों ने यहां रखी चांदी की 2 मूर्तियां कुर्सियां और हलवाई का सारा सामान चुरा लिया. बंगले के चौकीदार हंसराज भदोरिया ने पड़ाव थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इसमें बताया कि कुछ समय पहले पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया के बंगले पर भंडारे का आयोजन हुआ था जहां हलवाई का सामान रखा हुआ था. बंगले से चोर 2 चांदी की मूर्ति, कुर्सियां, 15 बड़े भगोंने, दो बड़ी कढ़ाई, दो गैस सिलेंडर 50 थाली ले गए. घटना का पता तब लगा जब चौकीदार ताला खोलकर अंदर पहुंचा. देखा कि सारा सामान गायब था. चौकीदार की शिकायत पर पड़ाव पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और अब उसकी तलाश शुरू कर दी है. खास बात यह है कि पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया का बंगला रेस कोर्स रोड पर है. ऊर्जा मंत्री प्रदुम सिंह तोमर और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले भी इसी रोड पर है. इन्हीं बंगलों के बीच पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया का बंगला स्थित है

मप्र विधानसभा अध्यक्ष का सरकारी बंगला बना तालाब, बारिश के कारण बंगले में भर पानी

The official bungalow of the Speaker of Madhya Pradesh Legislative Assembly became a pond, the bungalow was filled with water due to rain ऊपर दिए वीडियो में स्विमिंग पूल जैसा जो दृश्य नजर आ रहा है, वह प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के शासकीय बंगले का है। जहां बारिश का पानी भरा हुआ है, यह न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को भी उजागर कर रहा है। इसे देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जब ‘माननीय’ के बंगले की यह स्थिति है, तो आम लोगों के घरों और शहर की हालत आप समझ ही सकते हैं। दरअसल, ग्वालियर शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और घरों में पानी भरने की कई शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के ग्वालियर स्थित सरकारी आवास में भी बारिश का पानी घुस गया। स्थिति बिगड़ते ही नगर निगम की टीम अपनी विफलता छिपाने के लिए मौके पर पहुंची, जबकि उस समय तोमर बंगले में मौजूद नहीं थे। नगर निगम ने पंपिंग सेट की मदद से पानी निकालने की कोशिश की, लेकिन लगातार बारिश के कारण जल निकासी में काफी परेशानी आई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसी स्थिति बनी ही क्यों? इसका कारण साफ है कि वर्षा से पहले नगर निगम द्वारा नालों और जल निकासी व्यवस्था की सफाई और तैयारी समय पर नहीं की गई, जिससे यह संकट खड़ा हुआ। बारिश के चलते ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने एहतियातन 26 जुलाई को जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। आदेश में कहा गया है कि भारी वर्षा के कारण विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, यह निर्देश भी दिए गए हैं कि यदि किसी विद्यालय में मासिक परीक्षा या टेस्ट चल रहे हों, तो उन्हें आगामी दिनों में दोबारा आयोजित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक हानि न हो।

कूनो में बारिश से बढ़ी चीतों की मुश्किलें, पानी भरे गड्ढों-दलदली जमीन में फंसने का मंडरा रहा खतरा

Rain in Kuno has increased the difficulties of cheetahs, there is a danger of them getting trapped in water filled pits and marshy land ग्वालियर। कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही भारी वर्षा ने एक बार फिर चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मादा चीता ‘आशा’ और उसके तीन शावक रविवार को पार्क की सीमा पार कर बागचा क्षेत्र की ओर निकल गए। इस समय जंगल में चारों ओर जलभराव और दलदल जैसी स्थिति है, जिससे ट्रैकिंग में भारी बाधा आ रही है। जंगल के बाहर पहुंचना जोखिम भरापार्क की सीमा पार कर चुके चीतों के सामने नहर में डूबने और गड्ढों में फंसने का खतरा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल चीता ‘पवन’ की मौत पानी से भरे एक गड्ढे में गिरने से हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग की टीम विशेष सतर्कता बरत रही है, लेकिन वर्षा और रास्तों के बाधित होने के कारण ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो गई है। गार्ड्स और ट्रैकर्स की सीमाएंहालांकि सभी चीतों के गले में कालर आइडी लगे हुए हैं, फिर भी ट्रैकिंग टीमें बारिश के चलते मौके पर जल्दी नहीं पहुंच पा रहीं। पानी से भरे रास्तों और कीचड़ के कारण न तो गाड़ियों से पहुँचना संभव है और न ही पैदल ट्रैकिंग आसान रह गई है। इसी कारण, ट्रैकर्स और वनरक्षकों ने एक प्रस्ताव प्रबंधन के सामने रखा है कि मानसून खत्म होने तक चीतों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाए। संक्रमण से बचाव के उपायकूनो डीएफओ थिरूकुरल आर ने बताया कि सभी चीतों को संक्रमण से बचाने के लिए एंटी एक्टो परजीवी दवा दी जा चुकी है। साथ ही लगातार निगरानी जारी है। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 26 चीते हैं, जिनमें 9 वयस्क (6 मादा, 3 नर) और 17 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें से 16 चीते अब खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। शावकों के लिए स्थिति ज्यादा संवेदनशीलमादा चीतों के साथ मौजूद शावकों के लिए बारिश के मौसम में खुले जंगल में रहना और भी खतरनाक है। पानी भरे गड्ढों और दलदली जमीन में उनके फिसलने या फंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। ट्रैकिंग रूट्स में पानी भरने से निगरानी टीमों की गतिविधि सीमित हो गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता में बाधा बन सकती है।

बिजली कटौती से नाराज बराती बस लेकर देर रात पहुंचे ऊर्जा मंत्री के बंगले, जानें फिर क्या हुआ

Angry with the power cut, the baraatis reached the energy minister’s bungalow late at night by bus, know what happened next ग्वालियर में बिजली कटौती की समस्या से आमजन बुरी तरह परेशान है। स्थिति यह हो गई है कि लोग राहत के लिए अब सीधे जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाने लगे हैं। ताजा मामला शहर के सिंधिया नगर क्षेत्र का है, जहां लगातार बिजली कटौती से परेशान लोगों का सब्र जवाब दे गया। बीती रात जब इलाके में कई घंटों से बिजली नहीं थी और गर्मी से हाल बेहाल हो गया, तो लोग बस में भरकर सीधे ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सरकारी आवास जा पहुंचे। यह घटना गुरुवार रात की है। सिंधिया नगर स्थित विवेकानंद नीडम के पास की बस्ती में शाम से ही बिजली गुल थी। लोगों ने कई बार बिजली विभाग में शिकायतें कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब रात एक बजे तक भी बिजली नहीं आई तो लोग बेहद नाराज़ हो गए। स्थानीय निवासियों ने सामूहिक रूप से एक बस की व्यवस्था की और लगभग पूरी बस्ती के लोग उसमें बैठकर ऊर्जा मंत्री के बंगले की ओर रवाना हो गए। मंत्री निवास पर पहुंचते ही लोगों ने जमकर हंगामा किया और बिजली समस्या को लेकर नाराजगी जताई। शोर-शराबा सुनकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न तोमर खुद बाहर आए और लोगों की बात सुनी। उन्होंने मौके पर ही बिजली विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और तत्काल प्रभाव से सिंधिया नगर की बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। थोड़ी ही देर में बिजली बहाल हुई और लोग वापस अपने घर लौटे।

Ladli Laxmi Yojana: मध्य प्रदेश के कई जिलों में लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए बजट ही नहीं

Ladli Laxmi Yojana

Ladli Laxmi Yojana: There is no budget for Ladli Laxmi Yojana in many districts of Madhya Pradesh ग्वालियर। मध्य प्रदेश सरकार ने कई जिलों की पात्र बालिकाओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना की पिछली वित्तीय वर्ष की राशि अभी तक आवंटित नहीं की है। इसके पीछे सरकार के पास बजट की कमी बताई जा रही है। असल में, लाड़ली लक्ष्मी योजना के बजट का मद अलग है, शासन स्तर पर इसका एक पूल बना हुआ है, जिसमें जिलों को राशि का आवंटन हर वर्ष शासन से किया जाता है। आमतौर पर प्रत्येक वर्ष 20 से 31 मार्च के बीच इसका बजट शासन से पूल में जारी कर दिया जाता रहा है लेकिन अप्रैल माह का प्रथम सप्ताह आ जाने के बावजूद ग्वालियर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, झाबुआ सहित कई जिले बजट आवंटित होने से वंचित रह गए हैं। 36 हजार से ज्यादा बालिकाओं को नहीं मिली किश्तग्वालियर में 36 हजार से ज्यादा पात्र बालिकाओं को बीते वित्तीय वर्ष की किश्त नहीं मिल पाई है। यहां योजना के मद में 22 करोड़ से ज्यादा का भुगतान होना है। ग्वालियर के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीएस जादौन का कहना है कि शासन स्तर से बताया गया है कि जल्द ही धनराशि जारी कर दी जाएगी। बता दें कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत की थी। बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार, बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर व स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार तथा उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले अभिभावक को बच्ची के जन्म के समय पंजीकरण कराना होता है। पात्र बच्चियों के खाते में प्रतिवर्ष छह हजार रुपये लगातार पांच वर्ष तक जमा किए जाते हैं। 21 वर्ष की आयु होने पर ब्याज की राशि मिलाकर प्रत्येक बालिका को कुल एक लाख 43 हजार रुपए मिलते हैं। संबल में भी ली गई थी लाड़ली योजना की राशिपूर्व में जब प्रदेश में संबल योजना शुरू की गई थी तो इसके लिए लाडली लक्ष्मी योजना के मद से राशि ली गई थी, यह राशि इसके बाद वापस नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि लाडली लक्ष्मी योजना के मद से इसलिए भी राशि लिया जाना संभव हो जाता है, क्योंकि इसमें बड़ी राशि पूल में होती है।

अनिल शुक्ला होंगे ग्वालियर सर्किल के सीएफ

Anil Shukla will be CF of Gwalior Circle भोपाल। वन विभाग ने सर्किल में रिक्त पद के नई पदस्थापना करने के प्रस्ताव मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि रंग पंचमी के बाद पदस्थापना के आदेश जारी हो जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ग्वालियर सागर और सिवनी सर्किल में अपने पसंदीदा अफसरों को पदस्थ कराना चाह रहें हैं। बताया जाता है कि होशंगाबाद सर्किल से 6 महीने पहले हटाए गए एसीएस वन वर्णवाल ने अनिल शुक्ला को पहले वन विकास निगम में पदस्थ किया अब उन्हें ग्वालियर सर्किल में पदस्थ करने का प्रस्ताव भेजा है। इसी प्रकार क्षेत्रीय महाप्रबंधक जबलपुर पदस्थ बृजेंद्र झा को सिवनी और मुख्यालय में पदस्थ रिपुदमन सिंह को सागर सर्किल में वन संरक्षक के पद पर पदस्थ करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सचिवालय में अनुमोदन के लिए लंबित है। सवाल यह उठता है कि 6 महीने पहले जिन अधिकारियों को फील्ड से हटाकर मुख्यालय अटैच किया गया उन्हें एसीएस पुनः फील्ड में पोस्टिंग करने जा रहे हैं।

ग्वालियर किला निजी हाथों में सौंपने शहरवासियों ने किया विरोध, बोले- दिल्ली तक जाएंगे

gwalior city residents protested against handing over gwalior fort to private hands Gwalior Fort Update: ग्वालियर के ऐतिहासिक किले को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी से शहरवासी आक्रोश में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि ग्वालियर किला (Gwalior Fort) हमारी विरासत है, इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। शहरवासियों का कहना है कि ग्वालियर किले पर बने ऐतिहासिक स्मारक हमारी पहचान हैं और किले के निजीकरण के बाद यहां मनमाने ढंग से वसूली प्रारंभ हो जाएगी। इसके विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा शुक्रवार को कलेक्टर और राज्य पुरातत्व विभाग को ज्ञापन देकर चेताएगी। बता दें, भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ ग्वालियर किले के लिए एमओयू किया है। वहीं इंडिगो ग्रुप के 100 लोगों की टीम शुक्रवार 7 मार्च की शाम 4 बजे ग्वालियर फोर्ट पहुंच रही है। टिकट काफी महंगे हो जाएंगेग्वालियर किले पर जो स्मारक पूर्ण रूप से संरक्षित हैं और उनसे आमदनी भी हो रही है, ऐसे स्मारकों को निजी हाथ में देना ठीक नहीं रहेगा। क्योंकि उनके टिकट काफी बढ़ जाएंगे। ऐसे में आम आदमी स्मारकों को देखने से वंचित रह जाएगा और पुरातत्व महत्व भी समाप्त हो जाएगा।–लाल बहादुर सिंह, पूर्व क्यूरेटर (संग्रहाध्यक्ष) गूजरी महल संग्रहालयराष्ट्रपति भवन तक जाएंगे हम इस मुद्दे पर पूरी लड़ाई लड़ेंगे, किसी भी हालत में किले का निजीकरण नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए दिल्ली में राष्ट्रपति भवन तक क्यों ना जाना पड़े। हम हर स्तर पर इसका पुरजोर विरोध करेंगे। साथ ही दूसरे समाजों को भी इससे जोड़ेंगे। इससे पूर्व भी हमने यहां निजी होटल के निर्माण को नहीं होने दिया था।–पूरन सिंह राणा, एडवोकेट, सचिव, जाट समाज कल्याण परिषद ग्वालियरनिजीकरण बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ग्वालियर का किला न सिर्फ शहर बल्कि प्रदेश-देश के लिए भी पुरातत्व धरोहर है। इसका निजीकरण किया जाना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। पता नहीं इस ऐतिहासिक विरासत को पूंजीपतियों के हवाले क्यों किया जा रहा है। जो लोग इस काम को करवा रहे हैं, उन्हें गरिमा का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है। हम शुक्रवार को इसके लिए ज्ञापन भी देंगे।–सुनील शर्मा, कांग्रेस प्रदेश महासचिवकम हो जाएगी पर्यटकों की संख्या ग्वालियर किला हमारे ग्वालियर नहीं अपितु पूरे देश में प्रसिद्ध है, यहां हर कोई आना पसंद करता है। निजी हाथों में जाने के बाद यहां जाने के लिए अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग और केंद्रीय पुरातत्व विभाग इस किले का संरक्षण और देखभाल कर तो रहे हैं। निजीकरण से निश्चित तौर पर पर्यटकों की संख्या कम ही होगी।–ज्योति अग्रवाल, संस्थापक अध्यक्ष, अग्रकुल महिला समितिनिजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए ग्वालियर किला हमारी ऐतिहासिक धरोहर है, इसका निजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। इसे संरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि निजी कंपनियों को सौंपना। इससे आम जनता की पहुंच और सांस्कृतिक महत्व प्रभावित हो सकता है। किले का संरक्षण सरकार खुद करे, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।–श्वेता बिंदल, चेयरपर्सन, जेसीआई ग्वालियरनिर्णय वापस लिया जाए ग्वालियर किला हमारे शहर की शान है। जो भी ऐतिहासिक धरोहर होती हैं उनकी देखभाल व संरक्षण करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। निजीकरण करना कोई विकल्प नहीं है, इसलिए अनुरोध है कि निजी कंपनी को किले को देने का निर्णय वापस लिया जाए। किले का जो पुराना इतिहास है उसको यथावत रखा जाए, क्योंकि यही हमारी पहचान भी है।-जुबैर रहमान, संस्थापक अध्यक्ष, लॉयंस क्लब दिशा

ग्वालियर किला अब निजी हाथों में, इंडिगो एयरलाइंस से 5 साल का करार

Gwalior Fort is now in private hands, 5 year agreement with Indigo Airlines Gwalior Fort: नरेंद्र कुइया. लियर के किले को अब निजी हाथों में देने की तैयारी है। इसके लिए भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ एमओयू किया है। इसमें आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। अभी 5 साल के करार में किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण होगा। बाद में पांच साल और बढ़ेगा। इसकी फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी, एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। इनके संरक्षण का कार्य भी वे ही करते हैं। ग्वालियर दुर्ग पर एमओयू (MOU) के बाद की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मप्र टूरिज्म(MP Tourism), इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) और एकेसीएसएफ की 100 लोगों की टीम 7 मार्च को शाम 4 बजे किले पर पहुंचेगी। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के वि₹म महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। एमओयू में ऐसे तथ्य● ग्वालियर किला कंजर्वेशन और इल्यूमिनेशन परियोजना बहुआयामी प्रयास।● पर्यटकों के लिए सुविधाजनक पहुंच मार्ग, सुविधाओं का विस्तार।● मौजूदा स्थानों का उपयोग कर कैफे व प्रदर्शनी स्थलों का विकास। तब विरोध पर रुका था होटल निर्माणग्वालियर किले पर बनी भीमसिंह राणा की छत्री पर शासन ने 2022-23 में होटल की योजना बनाई थी। जाट समाज के विरोध के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। श्योपुर का किला, बलदेवगढ़ का किला, दतिया का राजगढ़ पैलेस राज्य पुरातत्व विभाग से असंरक्षित कर पर्यटन निगम को दिए थे। 50 लाख रुपए मासिक आयग्वालियर किले पर 50 लाख रु. मासिक आय ग्वालियर दुर्ग पर बने केंद्र-राज्य पुरातत्व विभाग के स्मारकों को देखने विदेशों से सैलानी आते हैं। मासिक आय 50 लाख तक है। विशेष दिनों में यह बढ़ जाती है। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के विक्रम महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैंनिजी कंपनियों को पुरातत्व संरक्षित स्मारकों की जानकारी नहीं होती। वे धरोहरों का संरक्षण कार्य कैसे कर सकती हैं। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैं। ये सब मिलीभगत से होते हैं।

ग्वालियर के रोहित सिंह ने पैरा आर्म  रेसलिंग में जीता स्वर्ण पदक

Gwalior’s Rohit Singh won gold medal in para arm wrestling ग्वालियर। 30 जनवरी से 3 फरवरी के बीच 40  देशों के बीच संपन्न हुई, वर्ल्ड आर्म रैसलिंग कप 2025 उज़्बेकिस्तान में आयोजित हुई। पैरा (सीपीयू) 60+केजी में रोहित सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर देश एवं ग्वालियर शहर का नाम रोशन किया | ग्वालियर आर्म रैसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर केशव पांडे ने बताया की ग्वालियर ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता मे अभी तक 27 पदक अर्जित किए गए हैं | ग्वालियर आर्म रैसलिंग का हब है तथा देश के उच्चतम स्थान में अव्वल है | रोहित सिंह के कोच वर्ल्ड चैंपियन मनीष कुमार ने बताया कि रोहित आर्म रेसलिंग एकेडमी बिरला नगर मैं 2 वर्ष की ट्रेनिंग ली है और सहायक कोच दीपक जामौर ने उनकी अभ्यास में सहायता की है | रोहित के पिता अरविंद सिंह 14 बटालियन में आरक्षक के पद पर  पदस्थ है उन्होंने बताया कि रोहित का भी यह एक नया जन्म है तथा पैदा होने से ही वह सेरेबल पालिसी से ग्रसित है मध्य प्रदेश आर्म रैसलिंग के सचिव तारीख मोहम्मद ने और देश के आर्म रेसलिंग की अध्यक्ष  प्रीति झांगयानी ने रोहित की इस उपलब्धि पर बधाई दी

सामाजिक परिवर्तन और विकास के लिए शक्तिशाली प्रेरक है जनसंवाद : कुमार

Public dialogue is a powerful catalyst for social change and development: Kumar ग्वालियर। इंटरनेशनल सेंटर ऑफ मीडिया एक्सीलेंस (आईकॉम) पर प्रशासनिक सेवा में प्रशंसनीय कार्य करने के लिए जिला पंचायत के सीईओ विवेक कुमार का नागरिक अभिंनदन किया गया। इस दौरान शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ उन्होंने संवाद किया और प्रबुद्धजनों ने उन्हें सम्मानित किया।सेंटर डायरेक्टर एवं प्रमुख समाज सेवी डॉ. केशव पाण्डेय ने स्वागत भाषण में उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए विवेक कुमार के द्वारा किए जा रहे कार्यां का उल्लेख किया। साथ ही बताया कि कैसे उनके द्वारा पात्रता एप्प के रूप में किया गया नवाचार पूरे प्रदेश के लिए वरदान साबित हो रहा है।मुख्य अतिथि विवेक कुमार ने कहा कि आईएएस की नौकरी में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि हम जितने ज्यादा लोगों से मिलते हैं उतने ही ज्यादा भिन्न-भिन्न प्रकार के आईडिया हम लोगों के पास आते हैं। निःसंदेह जो आईडिया होते हैं वह सकारात्मक भी होते हैं और कई बार प्रेरणात्मक भी होते हैं जो हमें प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता के लिए उपयोगी साबित होते हैं।मेरा मानना है कि जितने भी अधिकारी होते हैं उन्हें लोगों से सरलता से मिलना चाहिए और सहजता से उनके साथ संवाद करना चाहिए। क्योंकि सामाजिक परिवर्तन और विकास के लिए शक्तिशाली प्रेरक होता है जनसंवाद।उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि अधिकारी बनने से वह सबकुछ जानता है समय के साथ अनुभव होते हैं और आपस में मिलकर भी सीखते हैं। यदि आपके पास ग्रामीण से संबंधित कोई भी पॉइंट आता है तो आप मुझे अपना फीडबैक दे सकते हैं। गवर्नमेंट का पूरा सेटअप होता है वह पूर्णरूप से सोसायटी को आगे लेकर नहीं जाता है उसके लिए नागरिकों का भी सहयोग जरूरी होता है। प्रबुद्ध नागरिकों की भागीदारी का अपना ही महत्व है। मीडिया का समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। हम सभी का यही प्रयास होना चाहिए कि हम अपने ग्वालियर को आगे कैसे ले जा सकते हैं?इससे पूर्व डॉ. पाण्डेय ने विवेक कुमार का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और फिर शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिंह भेंट कर सम्मानित किया। इनके अलावा रामबाबू कटारे, विजय पाण्डेय, दीपक तोमर, मंजू सोनी, सचिन पाण्डेय, पीडी पाण्डेय, गणेश चतुर्वेदी, चाको सर, डॉ. आदित्य भदौरिया, संतोष वशिष्ठ, डॉ.सारिका शर्मा, प्रमोद पचौरी, सौरभ मिश्रा एवं राजेश अवस्थी लावा ने उनका सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन महेश मुदगल ने तथा आभार व्यक्त राजेंद्र मुदगल ने किया।

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