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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक फॉन्ट अमेरिका में भारत का ‘महत्वपूर्ण मित्र और साझेदार’

नई दिल्ली पीएम मोदी ने मंगलवार को चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक फॉन्ट और उनके उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का भारत में उनके पहले राजकीय दौरे पर स्वागत किया। उन्होंने चिली को लैटिन अमेरिका में भारत का ‘महत्वपूर्ण मित्र और साझेदार’ बताया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों पर प्रकाश डाला और सहयोग को अधिक बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लैटिन अमेरिका में चिली भारत का एक महत्वपूर्ण मित्र और साझेदार देश है। आज की चर्चाओं में हमने आने वाले दशक में सहयोग बढ़ाने के लिए कई नई पहलों की पहचान की। हम आपसी व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी का स्वागत करते हैं। हम इस बात पर सहमत हैं कि इसमें और अधिक सहयोग की क्षमता भी है।” प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों पक्षों ने अपनी टीमों को ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ पर चर्चा शुरू करने का निर्देश दिया, जिससे व्यापार संबंधों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे और अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी में चिली के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा करने का इच्छुक है। उन्होंने अंटार्कटिका के प्रवेश द्वार के रूप में चिली के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित आशय पत्र का स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने चिली की स्वास्थ्य सुरक्षा में भारत के योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। राष्ट्रपति बोरिक ने कहा, “चिली की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत एक विश्वसनीय भागीदार रहा है। हम इस सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हुए।” सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने 4 नवंबर को राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में अपनाने के चिली के फैसले की सराहना की और इसे एक ‘प्रेरक’ संकेत बताया। वैश्विक स्तर पर, दोनों नेताओं ने बातचीत के माध्यम से संघर्षों को हल करने की जरुरत पर सहमति जताई और समकालीन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधारों का समर्थन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और चिली इस बात पर सहमत हैं कि सभी तनावों और विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। हम इस बात पर एक राय रखते हैं कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य संस्थाओं में सुधार जरूरी हैं। हम मिलकर वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान देना जारी रखेंगे।”

मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन की संपत्तियों पर केंद्र सरकार का कब्जा तय, कोर्ट का आदेश

मुंबई मुंबई की एक विशेष टाडा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक टाइगर मेमन और उसके परिवार की 14 संपत्तियों को केंद्र सरकार को सौंपने का आदेश दिया है। इन संपत्तियों में फ्लैट, खाली प्लॉट, ऑफिस और दुकानें शामिल हैं, जो अब सरकार के अधीन आ जाएंगी। बता दें कि 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद, टाडा कोर्ट ने 1994 में टाइगर मेमन और उसके परिवार की संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया था। उस समय से ये संपत्तियां बॉम्बे हाईकोर्ट के ‘कोर्ट रिसीवर’ के अधीन थीं। अब टाडा कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन सभी अचल संपत्तियों को केंद्र सरकार को सौंप दिया जाए। टाइगर मेमन 1993 बम धमाकों का मास्टरमाइंड माना जाता है और वह अभी भी फरार है। धमाकों की साजिश रचने, उन्हें अंजाम तक पहुंचाने और आतंकी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में उसके भाई याकूब मेमन को 2015 में फांसी दी जा चुकी है। टाइगर मेमन के नाम से मशहूर मुश्ताक अब्दुल रज्जाक मेमन एक गैंगस्टर और वांटेड आतंकवादी है। वह इंटरपोल और सीबीआई की वांटेड लिस्ट में शामिल है। वह दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व वाले गिरोह डी-कंपनी का सदस्य रह चुका है। उसे दाऊद का राइट हैंड भी माना जाता है। 1993 में हुए इन बम धमाकों में 250 से अधिक लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। यह हमला देश के सबसे घातक आतंकवादी हमलों में से एक था, जिसमें अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन का नाम सामने आया था। नियमों के अनुसार, टाडा कोर्ट के इस फैसले के बाद, अब केंद्र सरकार इन संपत्तियों का उपयोग कर सकती है। इस आदेश को आतंकवाद से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे फरार अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर सरकार की सीधी कार्रवाई का संदेश जाता है।

भारत के मेट्रो सिस्टम को ‘बहुत अच्छा’ बताते हुए दिल्ली की मेट्रो को एक बेहद अच्छे मेट्रो सिस्टम के रूप में वर्णित किया: जर्मन ट्रैवलर

नई दिल्ली एक जर्मन ट्रैवलर, एलेक्स वेल्डर ने अपनी विदेश यात्रा के दौरान भारत के सार्वजनिक परिवहन, विशेष रूप से दिल्ली और आगरा मेट्रो सिस्टम की जमकर तारीफ की है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में यह भी लिखा कि भारत का मेट्रो सिस्टम पश्चिमी यूरोप से बेहतर है। वेल्डर ने कहा कि वह दिल्ली मेट्रो में यात्रा करते समय 90 प्रतिशत समय में अपनी सीट पाकर बहुत खुश थे। उन्होंने भारत के मेट्रो सिस्टम को ‘बहुत अच्छा’ बताते हुए आगरा और दिल्ली की मेट्रो को एक बेहद अच्छे मेट्रो सिस्टम के रूप में वर्णित किया। वेल्डर ने भारत की मेट्रो सुविधाओं की तुलना जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों से की। उन्होंने प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर, फोन चार्जिंग स्टेशन, महिलाओं और वृद्धों के लिए निर्धारित सीटों का भी जिक्र किया, जो उन्होंने इन देशों में देखी थीं। इसके साथ ही, वह मेट्रो स्टेशनों पर खाने-पीने और शॉपिंग के विकल्पों से भी संतुष्ट दिखे। अपने ब्लॉग में वेल्डर ने कहा कि पहले उन्हें केवल भारत की सड़क यातायात के बारे में ही जानकारी थी, लेकिन मेट्रो के बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। एलेक्स वेल्डर ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा कि “क्या आपने भारत में ऐसे मेट्रो सिस्टम की उम्मीद की थी?” वेल्डर ने लिखा “मुझे नहीं पता था कि भारत के कुछ शहरों जैसे आगरा और दिल्ली में वास्तव में बहुत अच्छा मेट्रो सिस्टम है। दिल्ली में तो कुछ लाइनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर भी हैं, फोन चार्ज करने के लिए प्लग और महिलाओं और वृद्धों के लिए निर्धारित सीटें हैं। ये सभी चीजें मैंने दक्षिण कोरिया, जापान और चीन में देखी हैं, लेकिन सच कहूं तो मुझे भारत में इन्हें देखकर हैरानी हुई”। वेल्डर ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि मैं दक्षिण दिल्ली में रहा और मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि मुझे 80-90 प्रतिशत समय में बैठने की जगह मिल गई, जब तक कि मैं पीक आवर्स में मेट्रो में नहीं चढ़ा और शहर के केंद्र और पर्यटन स्थल से दूर रहा। हर मेट्रो स्टेशन पर खाने-पीने और शॉपिंग के ढेर सारे विकल्प होते हैं । वेल्डर ने अपनी पोस्ट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वह मेट्रो के एक स्पेशियस कोच में आराम से बैठे हुए नजर आए और एक मेट्रो स्टेशन पर खाने-पीने की जगह को भी दिखाया। वेल्डर का वीडियो वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने वीडियो देख कहा “वह इतनी साफ-सुथरी और एसी वाली थी।” दूसरे ने कहा “सच में, जितना मैं यात्रा करता हूं, उतना मुझे लगता है कि पश्चिमी दुनिया खुद को झूठा बता रही है।” तीसरे ने कहा कि “नशेड़ी नहीं, शराबी नहीं, कोई गंदगी नहीं, कोई चूहा नहीं, साफ-सुथरी और थोड़ा भीड़-भाड़, सबसे बेहतरीन कनेक्टिविटी! किसी भी दूसरे सबवे सिस्टम से बेहतर।” एक अन्य ने कहा कि “भारत चुपचाप विकास कर रहा है और विनम्रता से आगे बढ़ रहा है।”

4 अप्रैल तक विभिन्न राज्यों में तेज हवाएं 30-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, गरज-बिजली के साथ भारी बारिश

नई दिल्ली देशभर में मौसम में बड़े बदलाव की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, तेज हवाओं के साथ बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है, जो अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। 1 से 4 अप्रैल के बीच विभिन्न राज्यों में तेज हवाएं 30-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, और कुछ क्षेत्रों में गरज और बिजली के साथ बारिश हो सकती है।  मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है। अप्रैल के पहले सप्ताह में उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान 2-4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बारे में अपना अलर्ट जारी किया है। 1 से 4 अप्रैल तक तेज हवाओं के साथ बारिश महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है, जो उत्तरी तमिलनाडु और कर्नाटक से गुजरते हुए प्रभाव दिखाएगा। इसके कारण 1 से 4 अप्रैल के बीच मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, गोवा, और महाराष्ट्र में तेज बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। इसके साथ ही तेज हवाएं 30-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। गुजरात में 1-2 अप्रैल और ओडिशा, छत्तीसगढ़, मराठवाड़ा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में 1 से 4 अप्रैल तक और पश्चिम बंगाल, झारखंड में 2 से 4 अप्रैल तक तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है और ओले गिरने की भी संभावना है। पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का अलर्ट: आईएमडी ने पूर्वोत्तर राज्यों, विशेष रूप से असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है और गरज-बिजली के साथ बारिश हो सकती है। उत्तर पश्चिम भारत में तापमान में वृद्धि: पूर्वी भारत में 1 से 2 अप्रैल के दौरान तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान 2-4 डिग्री तक बढ़ सकता है। मध्य और दक्षिणी भारत में तापमान में बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन बाद में 2-4 डिग्री की गिरावट हो सकती है। हीट वेव और लू का अलर्ट: मौसम विभाग ने गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ, असम, त्रिपुरा और अन्य क्षेत्रों में लू और हीट वेव की स्थिति के लिए अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 1 से 4 अप्रैल तक गर्म हवाएं चलने की संभावना है और भीषण गर्मी पड़ेगी। देशभर का तापमान: रविवार को महाराष्ट्र के अकोला में सबसे अधिक तापमान 42.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ओडिशा, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 36-37 डिग्री के बीच रहा। दिल्ली एनसीआर का मौसम: दिल्ली एनसीआर में पिछले 24 घंटे में न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री और अधिकतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। दिल्ली का अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री के बीच रहेगा, और न्यूनतम तापमान 13 से 15 डिग्री के बीच रह सकता है। 1-2 अप्रैल को मौसम साफ रहेगा, लेकिन 3 अप्रैल को बादल छा सकते हैं और अधिकतम तापमान 36-38 डिग्री तक पहुंच सकता है।

बांग्लादेश-चीन की बढ़ती नजदीकियां: अंतरिम PM यूनुस ने चीन की यात्रा के दौरान भारत के खिलाफ विवादित दिया बयान

ढाका बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार व अंतरिम प्रधानमंत्री प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने चीन की यात्रा के दौरान भारत के खिलाफ विवादित बयान  दिया, जिससे कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को “लैंडलॉक्ड” (स्थलरुद्ध) बताया और दावा किया कि बांग्लादेश इस क्षेत्र के लिए समुद्र तक पहुंच का एकमात्र संरक्षक है। यूनुस ने अपने भाषण में चीन को  बांग्लादेश में निवेश बढ़ाने  का निमंत्रण देते हुए कहा कि बांग्लादेश  चीनी अर्थव्यवस्था का “विस्तार”  बन सकता है। उन्होंने कहा,  “भारत के सात राज्य, जिन्हें ‘सात बहनें’ कहा जाता है, वे स्थलरुद्ध हैं। उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई तरीका नहीं है। हम इस पूरे क्षेत्र के लिए समुद्र के एकमात्र संरक्षक हैं। इससे नई संभावनाएं खुलती हैं। यह चीनी अर्थव्यवस्था का विस्तार हो सकता है।” बांग्लादेश-चीन की बढ़ती नजदीकियां यूनुस की इस यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और  बांग्लादेश की कमजोर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए अधिक निवेश  की मांग की। उन्होंने कहा,  “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम चीन को अपने अच्छे मित्र के रूप में देखें। हमें आर्थिक स्थिरता और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चीन के सहयोग की आवश्यकता है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब  चीन बांग्लादेश में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है  और भारत-बांग्लादेश के संबंधों में बदलाव देखने को मिल रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि **बांग्लादेश की चीन पर बढ़ती निर्भरता भारत के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर एक नई चुनौती बन सकती है। नेपाल और भूटान का जिक्र भी किया यूनुस ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल और भूटान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “नेपाल और भूटान के पास असीमित जलविद्युत (Hydropower) क्षमता है, जो हमारे लिए एक वरदान है। हम इसका उपयोग कर सकते हैं। बांग्लादेश से आप कहीं भी जा सकते हैं। यह क्षेत्र के लिए समुद्र का एकमात्र प्रवेश द्वार है।” भारत की कड़ी प्रतिक्रियाएं यूनुस के इस बयान पर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।  असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे “अपमानजनक और निंदनीय”  बताया। उन्होंने कहा कि यह बयान  भारत के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की संवेदनशीलता को उजागर करता है। उन्होंने भारत सरकार से  पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए मजबूत रेलवे और सड़क नेटवर्क विकसित करने की अपील की।  भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा,  “अगर चीन बांग्लादेश में निवेश करना चाहता है तो करे, लेकिन भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के स्थलरुद्ध होने का इससे क्या संबंध?”   सुरक्षा विश्लेषक ने भी आपत्ति जताई रक्षा विशेषज्ञ ध्रुव काटोच ने इसे भारत के लिए चेतावनी  करार दिया और कहा कि यूनुस चीन को यह संदेश दे रहे हैं कि बांग्लादेश चीन को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, नेपाल और भूटान तक पहुँचाने का मार्ग दे सकता है।   राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषक क्रिस ब्लैकबर्न ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई और कहा,”यह बहुत ही परेशान करने वाला बयान है। क्या यूनुस खुलेआम चीन को भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों में हस्तक्षेप करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं?” रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस का बयान भारत के लिए एक चेतावनी हो सकता है क्योंकि चीन पहले ही अरुणाचल प्रदेश के पास महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, बांध और गांवों का निर्माण कर चुका है। भारत के लिए बढ़ती चुनौती चीन भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगातार अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर रहा है। उसने पहले ही अरुणाचल प्रदेश के पास कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं और इसे “दक्षिण तिब्बत” का हिस्सा बताता है।भारत भी इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे (NH-913) का निर्माण कर रहा है, जिसे देश की सबसे महत्वपूर्ण सीमा परियोजना माना जा रहा है।  

ट्रंप के फैसलों से दुनिया ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी हलचल है, दो तिहाई बोले हमेशा खबरों पर रखनी पड़ती है नजर

वॉशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही कई बड़े फैसले लिए हैं। अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने का फैसला सख्ती से लागू किया तो अब चीन, कनाडा, मेक्सिको, ब्राजील और भारत समेत तमाम देशों से टैरिफ वॉर छेड़ने की भी ट्रंप ने तैयारी की है। हालात ऐसे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप कब कौन सा फैसला कर लें, इसे लेकर आशंकाओं का दौर जारी रहता है। टैरिफ वाले ऐलान ने तो दुनिया भर के बाजारों में गिरावट का दौर ला दिया है। अकेले भारत में ही शेयर बाजार में मंगलवार को 1352 अंकों की गिरावट आई है। ट्रंप के फैसलों से दुनिया ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी हलचल है। प्यू रिसर्च की ओर से किए गए सर्वे में पता चला है कि 10 में से 7 अमेरिकी यानी दो तिहाई से ज्यादा लोग हमेशा खबरों पर नजर रखते हैं। ऐसा इसलिए ताकि पता चल सके कि डोनाल्ड ट्रंप ने अब कौन सा फैसला ले लिया है। सर्वे के अनुसार 71 फीसदी लोगों का कहना है कि वे हमेशा खबरों पर नजर रखते हैं। इनमें से 31 फीसदी लोग गहनता से खबरें पढ़ते या देखते हैं। वहीं 40 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो सामान्य तौर पर खबरों पर नजर रखते हैं। इस सर्वे में ट्रंप से जुड़ी खबरों पर नजर रखने का कारण भी पूछा गया, जिसमें दिलचस्प जानकारी सामने आई। 66 फीसदी लोगों ने कहा कि हमें इस बात की चिंता रहती है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप ने अब कौन सा फैसला ले लिया है। ऐसे में अकसर खबरों पर नजर बनाए रखते हैं। वहीं 62 फीसदी लोगों ने कहा कि हमें इस बात की चिंता रहती है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का उनकी जिंदगी पर क्या असर होगा। वे यह जानना चाहते हैं और इसीलिए खबरों पर भी नजर रखते हैं। वहीं 43 फीसदी लोगों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए वे खबरों पर नजर रखते हैं। वहीं 36 फीसदी लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों को सही करार दिया और कहा कि वे उन्हें सही मानते हैं। इसलिए खबरें देखते हैं। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 25 फीसदी लोगों ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके फैसले उन्हें मनोरंजन करने वाले दिखते हैं। इसलिए वह खबरों पर नजर रखते हैं। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के फैसलों ने हलचल मचा रखी है। 2 अप्रैल की रात को कयामत की रात तक कहा जा रहा है। चर्चा है कि यदि रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए गए तो दुनिया भर के बाजारों में गिरावट आएगी और मंदी का माहौल भी बन सकता है। यही कारण है कि फिलहाल पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप सबसे चर्चित शख्सियत हैं।

कल 12 बजे संसद में पेश होगा वक्फ संशोधन बिल, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में फैसला

 नई दिल्ली  वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक दोपहर 12 बजे विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधेयक को पेश करने की जानकारी दी गई। विपक्ष ने बिल पर 12 घंटे चर्चा की मांग की। जबकि सरकार ने आठ घंटे का समय दिया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप भी जारी करेगी। पार्टी के सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना होगा। विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट सरकार के रुख से नाराज होकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने उनके किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि हमने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से वॉकआउट किया क्योंकि सरकार अपना अजेंडा थोप रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात नहीं सुन रही है। वक्फ बिल पर 8 घंटे चर्चा होगी। जरूरत के मुताबिक समय बढ़ाया जा सकता है। हर पार्टी को अपनी बात रखने अधिकार है। हम बिल पर चर्चा कराना चाहते हैं। हमने इस मुद्दे पर सभी दलों से व्यापक चर्चा की है। वक्फ बिल पर व्यापक चर्चा की मांग विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि हमने वक्फ पर व्यापक चर्चा की। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा की बात कही। वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने को लेकर मुद्दा रखा। हालांकि, सरकार ने किसी भी मुद्दे पर विपक्ष की बात नहीं मानी। विपक्ष का कहना है कि हाउस सरकार की मनमर्जी से चल रहा है। विपक्ष को कोई जगह नहीं दी जा रही है। यह हाउस सिर्फ रूलिंग पार्टी का नहीं जनता का है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम लागातर वोटर कार्ड की बात कर रहे हैं। हमारी मांग नहीं मानी। उन्होंने कहा कि दूसरे मुद्दे थे। ये किसी पर भी चर्चा नहीं करने दे रहे। अभी तक नहीं मिलीं विधेयक की प्रतियां: बीजद सांसद बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, “जहां तक ​​विधेयक की बारीकियों का सवाल है तो इसकी प्रतियां अभी तक वितरित नहीं की गई हैं। इस विधेयक पर बीजद की गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि चिंता यह नहीं है कि जेपीसी की बैठक हुई, बल्कि यह है कि विपक्ष की आवाज पर विचार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि अब अगर दो दिन लोकसभा में ही चर्चा होगी तो राज्यसभा के लिए समय बचेगा क्या. किरेन रिजिजू ने कहा कि इतना अच्छा बिल हमलोग लेकर आए हैं, रिकॉर्ड में दर्ज होगा कि किसने समर्थन किया और किसने विरोध. उन्होंने ये भी कहा कि कल ही चर्चा होगी, जवाब होगी और लोकसभा से इसे पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि हम हाथ जोड़कर विनती करते हैं, बिल पर बोलने के लिए कुछ नहीं है तो बहाना मत बनाइए. खुलकर बोलिए. उन्होंने ये भी कहा कि चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है लेकिन बिल उसी दिन पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि बहुत से मुस्लिम भी इस बिल के समर्थन में हैं. जेपीसी में इतनी चर्चा हो चुकी है. इस बिल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट विपक्ष ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. सरकार की ओर से पहले चार से छह घंटे चर्चा का प्रस्ताव रखा गया था. विपक्षी दलों के नेता वक्फ बिल पर कम से कम 12 घंटे चर्चा की मांग कर रहे थे. सरकार की ओर से दो ही दिन का समय बचा होने की बात कहते हुए दो दिन तक चर्चा जारी रखने में असमर्थता जता दी. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. बाद में आठ घंटे चर्चा की बात पर सहमति बनी और सरकार की ओर से ये भी कहा गया कि चर्चा का समय और बढ़ाया भी जा सकता है. सांसदों को उत्तेजित न होने के निर्देश वक्फ बिल को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही सरकार नहीं चाहती कि कोई भी सदस्य उत्तेजित होकर ऐसा कुछ बोल जाए जिससे विपक्ष को हंगामा करने का कोई अवसर मिले और सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ जााए. इसलिए सभी सदस्यों से कहा गया है कि जिन्हें भी इस बिल पर चर्चा में शामिल होने का मौका मिले, वे अपनी बात मर्यादित तरीके से प्रमुख बिंदुओं पर फोकस करके रखें. बोलते समय उत्तेजित न हों. बीजेपी ने सहयोगी दलों से भी अपने सभी सदस्यों की मौजूदगी सदन में सुनिश्चित करने के लिए कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट देने से इनकार, कोर्ट ने कहा, इलाहाबादिया को अब दो हफ्ते बाद आना

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया को झटका देते हुए पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इलाहाबादिया को अब दो हफ्ते बाद आने को कहा है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि अगर पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया जाता है तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है। इससे पहले उनके वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने कोर्ट से गुजारिश की कि याचिकाकर्ता की आजीविका मशहूर हस्तियों के साक्षात्कार करने से ही चलती है,और इसके लिए उन्हें लगातार यात्रा करनी पड़ती है। इसलिए जब्त पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया जाय। चंद्रचूड़ ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पिछले आदेश के अनुसार अंडरटेकिंग भी दाखिल की है। दरअसल, चंद्रचूड़ ने रणवीर इलाहाबादिया के आजीविका प्रभावित होने का हवाला देते हुए उच्चतम न्यायालय से पासपोर्ट जमा करने की शर्त में संशोधन करने का अनुरोध किया था। इलाहाबादिया ने दलील दी थी कि पॉडकास्ट उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत है और उनके द्वारा काम पर रखे गए लगभग 280 लोग इस कार्यक्रम पर निर्भर हैं। दो हफ्ते में पूरी होगी जांच इस पर कोर्ट ने कहा कि इसके दो पहलू हैं। अगर हम आपको यात्रा करने की अनुमति देते हैं, तो जांच पर असर पड़ेगा और उसे स्थगित भी किया जा सकता है। मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच पूरी होने में अभी 2 सप्ताह लगेंगे। इसके बाद कोर्ट ने इलाहाबादिया को दो सप्ताह बाद आने को कहा। इलाहाबादिया ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष संकल्प लिया कि वह अपने शो में शालीनता बनाए रखेंगे। कोर्ट ने एक अन्य यूट्यूबर आशीष चंचलानी का पासपोर्ट भी जारी करने से इनकार कर दिया है। ये सभी स्टैंड-अप कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में अश्लील कमेंट करने के आरोपी हैं। शो के दौरान इलनलोगों ने माता-पिता के सेक्स पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसके खिलाफ इन पर कई मुकदमे दायर किएा गए थे।  

मैंने कुछ समय पहले ही सुना था कि भारत अपने टैरिफ में बहुत बड़ी कटौती करने जा रहा है:डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, चीन, मेक्सिको समेत तमाम देशों पर 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप का कहना है कि टैक्स में असमानता खत्म की जाएगी और यदि किसी देश ने अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाया है तो फिर उतना ही टैक्स अमेरिका भी लगाएगा। इस बीच मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि भारत अब अमेरिकी सामानों पर टैक्स कम करने जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैंने कुछ समय पहले ही सुना था कि भारत अपने टैरिफ में बहुत बड़ी कटौती करने जा रहा है और मैंने पूछा था कि ऐसा बहुत पहले क्यों नहीं किया गया?’ उन्होंने कहा कि टैरिफ बढ़ाने के फैसले से कई देशों की नीतियों में सुधार आएगा। ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनकी ओर से किए गए ऐलान के मुताबिक जो टैरिफ बुधवार से लागू होने वाले हैं, उससे क्या दूसरे देश चीन की ओर नहीं जाएंगे। इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ऐसा नहीं होगा। इसकी बजाय सभी देश टैक्स को लेकर अच्छी नीति बना सकेंगे। अभी इस पॉलिसी में गैर-बराबरी है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘मैं इसके बारे में चिंतित नहीं हूं। मुझे लगता है कि टैरिफ के साथ वास्तव में उनके पास बेहतर करने का मौका है। यह फैसला वास्तव में उनकी ही मदद करेगा। मुझे लगता है कि उनमें से बहुत से लोग अपने टैरिफ कम कर देंगे क्योंकि वे वर्षों से अमेरिका पर मनमाना टैरिफ लगा रहे हैं।’ हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ऐसा कैसे होगा। उन्होंने कहा कि यूरोप ने तो अमेरिका में बनी कारों पर टैक्स में 2.5 फीसदी की कटौती कर दी है। ट्रंप ने कहा कि आप देखिए कि यूरोपियन यूनियन ने कारों पर टैरिफ में 2.5 फीसदी तक की कटौती की है। कुछ दिन पहले ही उसने ऐला किया था और अब यह कटौती हुई है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान से पूरी दुनिया में हलचल मची है। उन्होंने 2 अप्रैल को मुक्ति दिवस का ऐलान किया है। उनका कहना है कि यह दिन होगा, जब अमेरिका महंगे टैरिफ का बदला लेगा। उनका कहना है कि चीन, कनाडा, मेक्सिको, यूरोप और भारत जैसे देश ज्यादा टैरिफ लगा रहे हैं, जबकि अमेरिका में वहां के उत्पादों पर कम टैक्स है। इससे गैर-बराबरी है। इसका खामियाजा अमेरिका की अर्थव्यवस्था उठा रही है। यहां के लोग भी इसका नुकसान उठा रहे हैं। बता दें कि ट्रंप के ऐलान के बाद से दुनिया भर के बाजारों में गिरावट का दौर जारी है। भारत के ही बाजार में आज सुबह से बड़ी गिरावट देखी गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज 1352 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। शुरुआत ही 350 अंकों की गिरावट के साथ ही हुई थी। फिलहाल भारतीय उद्योगों ने सरकार से अपील है कि डोनाल्ड ट्रंप से बात की जाए। खासतौर पर फार्मा सेक्टर और आईटी कंपनियों में ज्यादा हलचल देखी जा रही है।

आरएसएस महासचिव ने मंदिर मुद्दों पर स्वयंसेवकों का समर्थन किया, मथुरा और काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद में शामिल हों RSS सदस्य

बेंगलुरु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बड़ा बया सामने आई है। महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि अगर आरएसएस के सदस्य मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद से जुड़े कामों में हिस्सा लेना चाहें, तो संगठन को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सभी मस्जिदों को वापस लेने की बड़ी कोशिशें नहीं होनी चाहिए। इससे समाज में झगड़ा हो सकता है। होसबले ने कन्नड़ में आरएसएस की एक पत्रिका ‘विक्रमा’ से बात करते हुए कहा, ‘उस समय (1984), वी.एच.पी., साधु-संतों ने तीन मंदिरों की बात की थी। अगर हमारे स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों (अयोध्या में राम जन्मभूमि सहित) के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं, तो हम उन्हें नहीं रोकेंगे।’ ‘धर्म परिवर्तन और लव जिहाद चिंता’ होसबले ने माना कि गोहत्या, लव जिहाद और धर्म परिवर्तन जैसी चिंताएं अभी भी हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि अब हमें दूसरी ज़रूरी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि छुआछूत को खत्म करना, युवाओं में अपनी संस्कृति को बचाना और अपनी भाषाओं को सुरक्षित रखना। भाषा विवाद पर क्या बोले होसबले भाषा के बारे में बात करते हुए होसबले ने तीन भाषाओं को सीखने के तरीके को सही बताया। उन्होंने कहा कि इससे भाषा से जुड़े 95% झगड़े खत्म हो सकते हैं। उन्होंने भारतीय भाषाओं को बचाने और इन भाषाओं में पढ़े लोगों को नौकरी के अवसर देने की बात कही। तीन भाषा नीति का समर्थन होसबाले ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण की भी बात कही है। उन्होंने कहा, ‘हमारी सभी भाषाओं में बड़े स्तर पर साहित्यिक काम हुआ है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर भविष्य की पीढ़ियां इन भाषाओं को नहीं पढ़ेंगी और लिखेंगी, तो वे कैसे आगे बढ़ेंगी? अंग्रेजी के प्रति लगाव मुख्य रूप से व्यवहारिक कारणों से है…। एक और अहम पहलू ऐसा आर्थिक मॉडल बनाना है, जहां भारतीय भाषाओं में पढ़े लोगों को रोजगार मिल सके।’ उन्होंने कहा, ‘वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, न्यायाधीशों, शिक्षकों, लेखकों और राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को इस मामले में प्रगतिशील रवैया अपनाना चाहिए।’ हिंदी पर राजनीति पर क्या बोले अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘इतने बड़े देश में अच्छा होगा कि सभी संस्कृत सीख लें। डॉक्टर आंबेडकर ने भी इसकी वकालत की थी। कई लोगों की बोली जाने वाली भाषा सीखने में कोई परेशानी नहीं है। जिन लोगों को रोजगार चाहिए, उन्हें उस राज्य की भाषा सीखनी चाहिए। परेशानी तब होती है, जब राजनीति और विपक्ष के नाम पर इसे थोपे जाने का मुद्दा बना दिया जाता है। क्या भाषा विविधता के बाद भी भारत एकजुट हजारों सालों से एकजुट नहीं है? ऐसा लग रहा है कि हमने भाषा को आज परेशानी बना दिया है।’ ‘अंग्रेजी का क्रेज’ उन्होंने कहा कि हमारी सभी भाषाओं में बहुत अच्छी किताबें लिखी गई हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अगर आने वाली पीढ़ी इन भाषाओं में पढ़ेगी-लिखेगी नहीं, तो ये भाषाएं कैसे बचेंगी? अंग्रेजी का क्रेज इसलिए है क्योंकि इससे काम मिलता है… एक और ज़रूरी बात ये है कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहां भारतीय भाषाओं में पढ़े लोगों को अच्छी नौकरियां मिलें। बड़े-बड़े विद्वानों, जजों, शिक्षाविदों, लेखकों और नेताओं को इस बारे में सोचना होगा। हिंदी पर क्या बोले संघ महासचिव होसबले न ये भी कहा कि हिंदी बहुत लोग बोलते हैं, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये उन पर थोपी जा रही है। इतने बड़े देश में ये बहुत अच्छा होगा अगर सब लोग संस्कृत सीखें। डॉ. आंबेडकर ने भी ऐसा कहा था। अगर कोई ऐसी भाषा सीखता है जो बहुत लोग बोलते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आज हर सैनिक हिंदी सीखता है। जिन्हें नौकरी चाहिए वो उस राज्य की भाषा सीखते हैं। दिक्कत तब हुई जब इसे राजनीति की वजह से थोपने की बात कही गई। क्या भारत हज़ारों सालों से भाषाओं की विविधता के बावजूद एक नहीं रहा? ऐसा लगता है कि हमने भाषा को आज एक समस्या बना दिया है।

आयुष्मान कार्ड से अब इन अस्पतालों में नहीं होगा इलाज, 600 से अधिक प्राइवेट अस्पतालों ने छोड़ दी योजना

 नई दिल्ली साल 2018 में शुरू हुई भारत सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक 600 से अधिक प्राइवेट अस्पतालों ने स्वेच्छा से इससे बाहर होने का फैसला किया है। इन अस्पतालों ने देरी से भुगतान और कम रिम्बर्समेंट रेट जैसे कारणों का हवाला देते हुए योजना से खुद को अलग कर लिया है। सबसे ज्यादा गुजरात के अस्पताल हुए बाहर आयुष्मान भारत योजना से खुद को अलग करने वाले प्राइवेट अस्पतालों में सबसे ज्यादा गुजरात राज्य से हैं। यहां 233 अस्पतालों ने योजना से बाहर होने का फैसला किया। इसके बाद केरल में 146 और महाराष्ट्र में 83 अस्पतालों ने भी इसी तरह का कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा राज्यसभा में शेयर किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 609 प्राइवेट अस्पताल अब तक इस योजना से बाहर हो चुके हैं। यह स्थिति उस योजना के लिए चिंता का विषय बन गई है, जिसका उद्देश्य देश के 10 करोड़ परिवारों या लगभग 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना है। निजी अस्पतालों की शिकायतें निजी अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत निर्धारित कम दरें और भुगतान में होने वाली देरी उनके लिए कामकाज को मुश्किल बना रही हैं। कई अस्पतालों ने दावा किया है कि राज्य सरकारों द्वारा समय पर फंड जारी न करने के कारण उनको समय पर पैसे नहीं मिले, जिससे वे इस योजना में भागीदारी जारी रखने में असमर्थ हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की हरियाणा इकाई के तहत फरवरी में सैकड़ों निजी अस्पतालों ने योजना के तहत सेवाएं बंद करने की घोषणा की थी, क्योंकि वहां 400 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया था। इसके बाद, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम एसोसिएशन ने इसी तरह की निलंबन की मांग की। छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में कुछ ट्रीटमेंट पैकेज केवल सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित होने और सरकारी अस्पतालों से कोई रेफरल न मिलने के कारण भी निजी अस्पताल इससे बाहर निकल रहे हैं। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने अंतर-राज्यीय अस्पतालों के लिए क्लेम दाखिल करने के 15 दिनों के भीतर और पोर्टेबिलिटी अस्पतालों (राज्य के बाहर स्थित) के लिए 30 दिनों के भीतर अस्पतालों को क्लेम का भुगतान करने के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। योजना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति आयुष्मान भारत योजना को 23 सितंबर, 2018 को झारखंड के रांची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। यह योजना गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है। योजना में शुरू में लगभग 10.74 करोड़ गरीब और कमजोर परिवार शामिल थे, जो 2011 की सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के अनुसार भारत की आबादी के निचले 40 प्रतिशत हैं। बाद में जनवरी 2022 में लाभार्थी आधार को संशोधित कर 55.0 करोड़ व्यक्तियों या 12.34 करोड़ परिवारों तक कर दिया गया। अकेले 2024 में, इस योजना का विस्तार करके 37 लाख आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा लाभ के लिए कवर किया गया, और साल के अंत में सरकार ने 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को इसमें शामिल करने की घोषणा की। बाद में, ओडिशा और दिल्ली PMJAY में शामिल होने वाले 34वें और 35वें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश (UT) बन गए, जिससे इस योजना के तहत 70 लाख से अधिक परिवार और जुड़ गए। सरकार का जवाब सरकार का कहना है कि वह इस समस्या को हल करने के लिए कदम उठा रही है। हरियाणा में आयुष्मान भारत की संयुक्त सीईओ अंकिता अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि फंड जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और एक सप्ताह के भीतर स्थिति को संभाल लिया जाएगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने निजी अस्पतालों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पैकेज दरों की समीक्षा और भुगतान प्रक्रिया को तेज करने की बात कही है। आगे की चुनौतियां हालांकि योजना ने अब तक कई करोड़ मरीजों को लाभ पहुंचाया है और करीब 36 करोड़ लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं, लेकिन निजी अस्पतालों का बाहर होना इसके भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भुगतान प्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो और भी अस्पताल इस योजना से बाहर हो सकते हैं, जिसका सबसे अधिक नुकसान गरीब और जरूरतमंद मरीजों को होगा। आयुष्मान भारत योजना को लेकर उठ रहे इन सवालों के बीच सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बनी रहे और गरीबों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्रभावित न हो। इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है, ताकि यह योजना अपने मूल उद्देश्य को पूरा कर सके।

नागपुर की एक महिला ने अपने पति को अरेस्ट करवाया, फोन से मिला ये सब मिला

नागपुर नागपुर की एक 24 साल की महिला ने अपने 32 वर्षीय पति को अरेस्ट करवा दिया. जब उसने उसका व्हाट्सएप हैक कर लिया तो पति की ऐसी सच्चाई पता चली कि पुलिस बुलानी पड़ गई. पता चला कि वह 19 वर्षीय एक युवती सहित कई महिलाओं को ब्लैकमेल कर  उनका यौन शोषण करता था. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति अक्सर अप्राकृतिक तरीके से पेश आने की मांग करता था. वह अजीब-अजीब हरकत करने के लिए भी मजबूर करता था. महिला ने बताया कि उसे पता चला कि उसका पति दूसरी महिलाओं को भी परेशान करता है, जब उसे शक हुआ कि उसके पति के कई अफेयर हैं और उसने उसके फोन की क्लोनिंग कर ली. वह उसके व्हाट्सएप को हैक करने में सफल रही, जहां उसे आरोपी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले. खुद को अविवाहित बताकर करता था महिलाओं को गुमराह पति की चैट देखकर पत्नी को पता चला कि  उसने महिलाओं से कहा था कि वह अविवाहित है और उनमें से कुछ से पैसे की मांग की थी. उसने महिलाओं के साथ रिकॉर्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल करके अपनी मांगें पूरी करने के लिए भी उन्हें मजबूर किया था. महिला ने एक रेप पीड़िता युवती को अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने में भी मदद की. इस वजह से महिला के पति को गिरफ्तार किया गया. 19 साल की पीड़िता को केस दर्ज कराने में महिला ने की मदद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी की पत्नी कुछ महिलाओं से बातचीत करने में कामयाब रही और उन्हें नागपुर में पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने को कहा. आखिरकार, एक 19 वर्षीय महिला, जिसका कथित तौर पर आरोपी ने यौन शोषण किया था, वहां पहुंची और शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार हो गई. पीड़िता से किया था शादी का वादा पीड़िता ने खुलासा किया कि आरोपी ने खुद की पहचान साहिल शर्मा बताई थी. जबकि वह दूसरे धर्म से था. उसने कहा कि आरोपी ने उससे यह बात छिपाई कि वह शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है. उसने उससे शादी करने का वादा किया. उसने यह भी कहा कि वह अपनी पढ़ाई के लिए नागपुर आई थी. एक ही समय में 4-5 महिलाओं को दे रहा था धोखा पचपौली पुलिस थाने के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवती बहुत डरी हुई थी और हमारी टीम ने उसे शिकायत दर्ज कराने और आरोपी को सजा दिलाने के लिए परामर्श दिया. आरोपी ने उसकी अंगूठी भी बेच दी थी और उससे पैसे भी ले लिए थे. उसकी पत्नी ने युवती को पुलिस के सामने पेश किया और बताया कि वह एक ही समय में चार से पांच महिलाओं को धोखा दे रहा था. खुद की बताता था फर्जी पहचान पुलिस ने बताया कि आरोपी फर्जी नाम का इस्तेमाल कर महिलाओं को गुमराह करता था. वह उन्हें आध्यात्मिक समारोहों जैसी जगहों पर ले जाता था.  उसकी पत्नी ने हाल ही में उसके खिलाफ क्रूरता का मामला भी दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वह अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की मांग करता था. पुलिस ने बताया कि नागपुर में पान की दुकान चलाने वाला आरोपी शहर के आस-पास के इलाकों में होटलों में महिलाओं से मिलता था.  

बनासकांठा पटाखा फैक्ट्री में हुआ ब्लास्ट, 11 मजदूरों की मौत, विस्फोट से बिल्डिंग का स्लैव गिर, कई श्रमिकों बुरी तरह घायल

 बनासकांठा गुजरात से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है। गुजरात के बनासकांठा में आज एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हो गया। बताया जा रहा है कि विस्फोट की चपेट में आकर 11 मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि 3 मजदूरों को गंभीर चोटे आई हैं। घायल मजदूरों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि डीसा के धुनवा रोड स्थित जिस फटाका फैक्ट्री में विस्फोट हुआ वह अवैध रूप से संचालित थी। जानकारी के मुताबिक ये हादसा गुजरात के बनासकांठा हुआ है। घटना के बाद मौके पर पहुंची एसडीएम नेहा पांचाल ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री में बॉयलर फटने से ब्लास्ट हुआ है। विस्फोट से बिल्डिंग का स्लैव गिर गया, जिस कारण वहां काम कर रहे मजदूर फैक्ट्री के अंदर फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन कर मजदूरों को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस दौरान 11 मजदूरों की विस्फोट की चपेट में आकर मौत हो गई। वहीं 3 लोगों की हालत गंभीर बतायी जा रही है। अवैध रूप से संचालित थी पटाखा फैक्ट्री डीसा विधायक प्रवीण माली ने बताया, दीपक ट्रेडर्स नाम की यह पटाखा फैक्ट्री खूबचंद सिंधी की है। वह यहां विस्फोटक लाकर पटाखा बनाते थे। उनके पास पटाखा बनाने का लाइसेंस नहीं है। उन्हें सिर्फ पटाखा बेचने का लाइसेंस जारी किया गया है। फिलहाल, स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है। खेतों में बिखरे मिले मानव अंग पटाखा फैक्ट्री में बड़ी संख्या में विस्फोटक मौजूद था। आग लगते ही उसमें ब्लास्ट होने लगा। लिहाजा, फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों को भागने का मौका ही नहीं मिला। विस्फोट इतना भीषण था कि न सिर्फ बिल्डिंग का स्लैब धराशायी हो गया, बल्कि मजदूरों के अंग दूर-दूर तक बिखर गए। कुछ मानव अंग तो फैक्ट्री के पीछे स्थित खेत में पड़े मिले हैं। बताया जा रहा है कि पटाखा फैक्ट्री में बड़ी संख्या में विस्फोटक मौजूद था। आग लगते ही उसमें ब्लास्ट होने लगा। जिससे फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों को भागने का मौका भी नहीं मिल सका। विस्फोट इतना भीषण था कि न सिर्फ बिल्डिंग का स्लैब धराशायी हो गया, बल्कि विस्फोट की चपेट में आकर मजदूरों के अंग दूर-दूर तक बिखर गए। कुछ मानव अंग तो फैक्ट्री के पीछे स्थित खेत में पड़े मिले हैं। इस घटना को लेकर डीसा विधायक प्रवीण माली ने बताया दीपक ट्रेडर्स नाम की यह पटाखा फैक्ट्री खूबचंद सिंधी की है। वह यहां विस्फोटक लाकर पटाखा बनाते थे। उनके पास पटाखा बनाने का लाइसेंस नहीं है। उन्हें सिर्फ पटाखा बेचने का लाइसेंस जारी किया गया है। बावजूद इसके उक्त स्थान पर अवैध तरीके से पटाखा फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। विस्फोट कैसा हुआ इसके अभी तक स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। प्रशासन और पुलिस की टीमें जांच कर रही हैं। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है। 40 प्रतिशत से अधिक झुलसे 3 लोग एसडीएम नेहा पांचाल के मुताबिक, सभी घायलों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, वहां 3 लोगों का इलाज चल रहा है। जो 40 प्रतिशत से अधिक झुलस गए हैं। हादसे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई। प्रशासन और पुलिस की टीमें जांच कर रही हैं। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी फैक्ट्री के अंदर कूलिंग कर रहे हैं।

नवरात्रि के बीच आम जनता को बड़ी राहत… कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता, दिल्ली से मुंबई तक घट गए

नई दिल्ली  तेल कंपनियों ने गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया है। 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 41 रुपये की कटौती की गई है। नई कीमत आज से लागू हो जाएगी। अब दिल्ली में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर 1762 रुपये में मिलेगा। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले एक जनवरी को भी वाणिज्यिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 14.50 रुपये की कटौती की गई थी। व्यापारी वर्ग को मिलेगा लाभ तेल कंपनियां वैश्विक कच्चे तेल की दरों और अन्य कारणों से कीमतों में बदलाव करती हैं। दिसंबर में 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 62 रुपये का इजाफा किया गया था। नई कीमतों का लाभ व्यापारियों वर्ग को मिलेगा। रेस्तरां, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इन सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है। बता दें कि टैक्स और परिवहन लागतों के आधार पर एलपीजी की कीमतें हर राज्य में अलग-अलग हो सकती हैं। मुंबई में सिलेंडर ₹1755.50 से ₹42 घटकर ₹1713.50 रुपए हो गया है। चेन्नई में सिलेंडर ₹1,924.50 का मिल रहा है, जो पहले ₹1,965.50 थी। इससे पहले 1 फरवरी को भी कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹7 घटाई गई थी। हालांकि, 14.2 KG वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में यह ₹803 और मुंबई में ₹802.50 का मिल रहा है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अन्य बाजार कारकों को ध्यान में रखते हुए हर महीने एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। दिसंबर 2023 में 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹62 बढ़ाई गई थी, जिससे रेस्तरां, होटल और छोटे कारोबारी प्रभावित हुए थे। ऐसे उतार-चढ़ाव का सीधा असर उन व्यवसायों पर पड़ता है, जो नियमित रूप से एलपीजी का उपयोग करते हैं। 1 अप्रैल से ATF की कीमतों में बदलाव, जानिए नए रेट देश के चार बड़े महानगरों में एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की नई कीमतें 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गई हैं। घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ के रेट (प्रति किलोलीटर) इस प्रकार हैं:     दिल्ली: ₹89,441.18 (पहले- 95,311.72 रुपए प्रति किलोलीटर)     कोलकाता: ₹91,921.00 (पहले- 97,588.66 रुपए प्रति किलोलीटर)     मुंबई: ₹83,575.42 (पहले- 89,070.03 रुपए प्रति किलोलीटर)     चेन्नई: ₹92,503.80 (पहले- 98,567.90 रुपए प्रति किलोलीटर) वहीं, अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतें डॉलर में इस प्रकार हैं:     दिल्ली: $794.41 (पहले- 848.32 डॉलर प्रति किलोलीटर)     कोलकाता: $832.88 (पहले- 848.32 डॉलर प्रति किलोलीटर)     मुंबई: $794.40 (पहले- 847.10 डॉलर प्रति किलोलीटर)     चेन्नई: $789.76 (पहले- 843.13 डॉलर प्रति किलोलीटर) ₹12 लाख तक इनकम टैक्स फ्री, आज से देश में लागू हो रहे ये 5 बड़े बदलाव   LPG के दाम घटे आज से अप्रैल महीने की शुरुआत हो गई है और पहले ही दिन एलपीजी सिलेंडर पर बड़ी राहत मिली है. 1 अप्रैल 2025 को ऑयल एंड गैस मार्केटिंग कंपनियों ने LPG Cylinder Price में संशोधन करते हुए कटौती की है. इसके बाद दिल्ली से मुंबई तक सिलेंडर के दाम घट गए हैं. IOCL की वेबसाइट के मुताबिक, 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटाए गए हैं और दिल्ली में ये 41 रुपये, जबकि कोलकाला में 44.50 रुपये तक सस्ता हो गया है. हालांकि, इस बार भी 14 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.   12 लाख रुपये तक टैक्स फ्री इनकम नए टैक्स ईयर की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2025 से नए टैक्स स्लैब भी लागू कर दिए गए हैं. बजट 2025 में मिडिल क्‍लास को राहत देते सरकार ने कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिसमें टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव से लेकर टीडीस, टैक्‍स रिबेट और अन्य चीजें शामिल थीं. वहीं पुराने इनकम टैक्‍स एक्‍ट 1961 की जगह पर नए इनकम टैक्‍स बिल का प्रस्‍ताव रखा था. यह सभी बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो गए हैं. नए टैक्‍स स्‍लैब के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यक्तियों को टैक्‍स का भुगतान करने से छूट दी जाएगी. इसके अलावा, वेतनभोगी कर्मचारी 75,000 रुपये की स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन के लिए पात्र होंगे. इसका मतलब है कि 12.75 लाख रुपये तक की वेतन आय अब टैक्‍स से मुक्त होगी. हालांकि, यह छूट केवल उन लोगों पर लागू होती है जो नया टैक्‍स विकल्‍प चुनते हैं. TDS के नियमों में बदलाव New Tax Slab के अलावा TDS विनियमों को भी अपडेट किया गया है, जिसमें अनावश्यक कटौती को कम करने और टैक्‍सपेयर्स के लिए कैश फ्लो में सुधार करने के लिए विभिन्न वर्गों में लिमिट बढ़ाई गई है. उदाहरण के लिए, वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा दोगुनी करके 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे बुजुर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा बढ़ गई है. इसी तरह, किराये की आय पर छूट की सीमा बढ़ाकर 6 लाख रुपये सालाना कर दी गई है, जिससे मकान मालिकों के लिए बोझ कम हो गया है और शहरी क्षेत्रों में किराये के बाजार को बढ़ावा मिल सकता है. UPS की शुरुआत नए टैक्स ईयर की शुरुआत के साथ पहली अप्रैल से केंद्रीय कर्मचारियों को गारंटीकृत पेंशन देने वाली यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS की शुरुआत होने जा रही है. पोर्टल पर आज यानी 1 अप्रैल 2025 से केंद्रीय सरकारी कर्मचारी अप्‍लाई कर सकेंगे. अगर कर्मचारी UPS के तहत पेंशन पाना चाहता है तो उन्‍हें यूपीएस का ऑप्‍शन सेलेक्‍ट करने के लिए क्‍लेम फॉर्म भरना होगा. अगर वे यूपीएस का चयन नहीं करना चाहते हैं तो NPS का विकल्‍प चुन सकते हैं. इसके तहत 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को UPS और NPS में से कोई एक विकल्‍प चुनना होगा. केंद्र सरकार यूपीएस विकल्प चुनने वाले सभी कर्मचारियों के (बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता) का अनुमानित 8.5% अतिरिक्त अंशदान भी प्रदान करेगी. यूपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 10,000 रुपये प्रति माह होगा, जो यूपीएस द्वारा न्यूनतम दस साल की सर्विस को पूरा करने पर दी जाएगी. बैंक अकाउंट से जुड़ा ये बड़ा चेंज अप्रैल महीने की पहली तारीख से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समेत अन्य कई बैंक ग्राहकों के सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियम संशोधित कर दिए हैं. बैंक द्वारा खाताधारक … Read more

IMD अपडेट: अगले तीन महीने कैसे होंगे जानें क्या बोला मौसम विभाग

नई दिल्ली भारत में अप्रैल से जून तक तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है और मध्य एवं पूर्वी भारत के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में अधिक दिन लू चल सकती है. यह बात भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कही. आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि पश्चिमी और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर देश के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा. इन दोनों क्षेत्रों में तापमान के सामान्य रहने की संभावना है. महापात्रा ने कहा, ‘‘अप्रैल से जून तक उत्तर और पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में सामान्य से दो से चार दिन अधिक लू चलने की संभावना है.’’ आमतौर पर भारत में अप्रैल से जून तक चार से सात दिन तक लू चलती है. सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना उन्होंने कहा कि अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. आईएमडी के एक अधिकारी ने पहले कहा था कि उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मियों के दौरान लू के दिनों की संख्या दोगुनी हो सकती है. इस क्षेत्र में गर्मियों के मौसम के दौरान आमतौर पर पांच से छह दिन लू चलती है. इन राज्यों में चलेगी लू जिन राज्यों में सामान्य से अधिक दिन लू चलने की संभावना है उनमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक और तमिलनाडु के उत्तरी हिस्से शामिल हैं. अप्रैल में भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका है. हालांकि, सुदूर दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य रह सकता है. महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, सिवाय उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के कुछ स्थानों के, जहां तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है. बढ़ जाएगी बिजली की खपत विशेषज्ञों ने कहा है भारत को इस साल गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग में 9 से 10 प्रतिशत की वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए. पिछले साल, देशभर में बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 250 गीगावाट को पार कर गई थी, जो पूर्व में किये गए अनुमानों से 6.3 प्रतिशत अधिक थी. जलवायु परिवर्तन, बिजली की मांग में वृद्धि करने वाले प्रमुख कारकों में से एक है.

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