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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में 18 यात्रियों की मौत के एक पखवाड़े बाद रेल प्रबंधक सुखविंदर सिंह का किया तबादला

नई दिल्ली नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में 18 यात्रियों की मौत के एक पखवाड़े बाद जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, दिल्ली मंडल रेल प्रबंधक सुखविंदर सिंह का मंगलवार को तबादला कर दिया गया। 2023 में नियुक्त हुए थे सुखविंदर सिंह सुखविंदर सिंह को जुलाई 2023 में दिल्ली मंडल डीआरएम नियुक्त किया गया था और उनका दो साल का कार्यकाल इस साल के अंत में समाप्त हो रहा था। रेल मंत्रालय द्वारा जारी तबादला आदेश में कहा गया है कि उत्तर मध्य रेलवे जोन से पुष्पेश आर त्रिपाठी सिंह की जगह लेंगे। हालांकि, आदेश में सिंह की नई पोस्टिंग के बारे में कुछ नहीं कहा गया। राष्ट्रपति की मंजूरी से निर्णय लिया आदेश में कहा गया है, “रेल मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मंजूरी से निर्णय लिया है कि पुष्पेश आर त्रिपाठी, एनएफएचएजी (गैर-कार्यात्मक उच्च प्रशासनिक ग्रेड)/आईआरएसईई (भारतीय रेलवे विद्युत इंजीनियर्स सेवा)/उत्तर मध्य रेलवे को सुखविंदर सिंह, आईआरएसईई के स्थान पर डीआरएम/दिल्ली/उत्तर रेलवे के पद पर स्थानांतरित और तैनात किया जाना चाहिए, जिनके लिए आदेश बाद में जारी किए जाएंगे।” रेलवे अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि सिंह का तबादला 15 फरवरी की भगदड़ से जुड़ा है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली स्टेशन पर हुई त्रासदी के कारण उनकी नई तैनाती आगे बढ़ा दी गई है, जिसमें 18 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हो गए थे।

2050 तक भारत में 25 साल से ज्यादा उम्र के करीब 45 करोड़ लोग मोटापे या अधिक वजन के शिकार होंगे: रिपोर्ट

नई दिल्ली बदलती जीवनशैली और फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता के चलते मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अनियमित खान-पान, कम शारीरिक सक्रियता और अस्वस्थ आदतों के कारण दुनियाभर में मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो 2050 तक भारत में 25 साल से ज्यादा उम्र के करीब 45 करोड़ लोग मोटापे या अधिक वजन के शिकार होंगे। चीन, भारत और अमेरिका सबसे ज्यादा प्रभावित रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक मोटापे की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित देश चीन, भारत और अमेरिका होंगे।     चीन में 627 मिलियन (62.7 करोड़)     भारत में 450 मिलियन (45 करोड़)     अमेरिका में 214 मिलियन (21.4 करोड़) दुनियाभर में मोटापे का खतरा बढ़ा वैश्विक स्तर पर अनुमान लगाया गया है कि 2050 तक 3.8 बिलियन (380 करोड़) लोग अधिक वजन या मोटापे के शिकार हो सकते हैं। इनमें से 1.95 बिलियन (195 करोड़) लोग गंभीर मोटापे की श्रेणी में आ सकते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा प्रभावित 2021 के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में 2.11 बिलियन (211 करोड़) युवा अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, जिनमें:     1 बिलियन पुरुष (100 करोड़)     1.11 बिलियन महिलाएं (111 करोड़) भारत में मोटापे की तेजी से बढ़ती समस्या 2021 में भारत में 180 मिलियन (18 करोड़) लोग मोटापे से प्रभावित थे। इस संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फास्ट फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत भारत में मोटापे के बढ़ते मामलों का एक प्रमुख कारण है। फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड बड़ा कारण अध्ययन में बताया गया है कि भारत, कैमरून और वियतनाम ऐसे देश हैं जहां 2009 से 2019 के बीच प्रति व्यक्ति अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स की बिक्री में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। समय रहते कदम उठाने की जरूरत अगर स्वस्थ खान-पान और नियमित व्यायाम को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लाइफस्टाइल में बदलाव और संतुलित आहार अपनाकर इस गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।  

सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके

बेलग्रेड यूरोपीय देश सर्बिया की संसद में विपक्षी सांसदों ने भारी बवाल मचाया है. विपक्षी सांसदों ने संसद में एक के बाद एक कई स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके जिससे संसदीय सत्र में भारी अव्यवस्था फैल गई. संसद में हाथापाई भी देखने को मिली. संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और गुलाबी धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे. किस बात पर नाराज विपक्ष ने संसद में मचाया उत्पात चार महीने पहले सर्बिया में रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए जो अब सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. विधान सभा सत्र में, सर्बियाई प्रगतिशील पार्टी (एसएनएस) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे को मंजूरी दी जिसके बाद कुछ विपक्षी नेता अपनी सीट से उठकर संसद के अध्यक्ष की तरफ दौड़े. इस दौरान सुरक्षा गार्ड्स से उनकी हाथापाई देखने को मिली. वहीं, कुछ विपक्षी सांसदों ने स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. लाइव प्रसारण में संसद की इमारत के अंदर काला और गुलाबी धुआं उठता दिखाई दिया. स्पीकर एना ब्रनाबिक ने कहा कि इस दौरान दो सांसद घायल हुए हैं, जिनमें से एक, एसएनएस पार्टी की जैस्मिना ओब्राडोविक को स्ट्रोक हुआ है और उसकी हालत गंभीर है. उन्होंने सत्र में कहा, ‘संसद काम करना और सर्बिया की रक्षा करना जारी रखेगी.’ मंगलवार को सर्बियाई संसद को देश की यूनिवर्सिटीज के लिए धनराशि बढ़ाने वाला कानून पारित करना था. इस कानून की मांग को लेकर दिसंबर से ही सर्बिया के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. संसद में देश के प्रधानमंत्री मिलोस वुसेविक के इस्तीफे पर भी चर्चा होनी थी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे में कई ऐसे मुद्दों को रखा जिससे विपक्ष बुरी तरह भड़क गया.   संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और लाल धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे.

ट्रंप ने यूक्रेन की आर्मी मदद पर लगाई रोक, अब पुतिन से कैसे लोहा लेंगे जेलेंस्की

न्यूयॉर्क रूस और यूक्रेन के बीच लगभग तीन साल से युद्ध चल रहा है। इस दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को हर तरह से मदद दी है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका का दौरा किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की थी। लेकिन इस दौरान दोनों के बीच जमकर बहस हुई, जिसके बाद जेलेंस्की व्हाइट हाउस से बिना प्रेस वार्ता के निकल गए। अब राष्ट्रपति ट्रम्प ने जेलेंस्की को झटका देते हुए यूक्रेन को मिलने वाली मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व्हाइट हाउस ने इस संबंध में जानकारी दी है। व्हाइट हाउस का कहना है कि पिछले सप्ताह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की केसाथ तीखी बहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली सभी तरह की मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अमेरिका अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनका ध्यान शांति पर है। हमें चाहिए कि हमारे साझेदार भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समाधान में योगदान दे रही है। ट्रंप का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसके मुताबिक ऐसी मदद से जो अमेरिका से अभी तक यूक्रेन नहीं पहुंची है, उसे भी रोक दिया गया है। इसमें पोलैंड तक पहुंच चुका सामान भी शामिल है। यूक्रेन और अमेरिका ने नहीं दिया जवाब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, यूक्रेन को रोकी गई मदद तब तक बहाल नहीं की जाएगी। जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह यकीन नहीं हो जाता कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वास्तव में शांति चाहते हैं। यूक्रेन को सैन्य मदद रोके जाने को लेकर फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग और न ही राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई टिप्पणी आई है। वहीं अमेरिकी सहायता रोके जाने पर यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि इस सहायता पर रोक लगाना पूरी तरह से स्थाई नहीं है। यह एक विराम है। एक अरब डॉलर की मदद रुकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे एक अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद संबंधी मदद पर असर पड़ सकता है। इन्हें जल्द ही यूक्रेन को डिलीवर किया जाना था। इधर यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि उसके पास सिर्फ गर्मियों तक रूस से लड़ने के लिए आपूर्ति है। ऐसे में रूस से लडाई के लिए यूक्रेन संसाधनों की कमी से जूझ सकता है। यूरोपीय देशों पर बढ़ेगा यूक्रेन की मदद का दबाव रूस के खिलाफ युद्ध में अब अमेरिका के यूक्रेन की मदद नहीं करने से यूरोपीय देशों पर यूक्रेन की मदद का दबाव बनेगा। अब तक कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में यूक्रेन की मदद की है, लेकिन उतनी नहीं जितनी अमेरिका ने की है। अमेरिका ने इस युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन को वित्तीय सहायता के साथ ही सैन्य सहायता भी मुहैया कराई है। लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। जिससे यूरोपीय देशों पर इस युद्ध में यूक्रेन को कमजोर न पड़ने देने का दबाव बनेगा। रूस को मिलेगा अमेरिका का सीधा समर्थन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद अमेरिका और यूक्रेन में तकरार आ गई है। इस बहस का सीधा फायदा रूस को मिलेगा। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अच्छे दोस्त हैं। ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उनका झुकाव रूस की ओर रहा है। अब इस युद्ध में अमेरिका की तरफ से रूस को सीधा समर्थन मिल सकता है। हालांकि अमेरिका, रूस की इस युद्ध में कोई मदद नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका की तरफ से रूस को समर्थन जरूर मिलेगा। व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मकसद शांति स्थापित करना है। हम चाहते हैं कि हमारा सहयोगी भी शांति के लिए प्रतिबद्ध हो। आज हम अपनी सहायता को रोक रहे हैं और उसकी समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह समाधान में सहयोग दे रही है। इधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की मदद करने पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन की भी जमकर आलोचना की है। अमेरिका और यूक्रेन के बीच खनिज सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘…यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि बाइडेन ने बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से एक देश को युद्ध लड़ने के लिए 350 बिलियन डॉलर दे दिए… हमें कुछ नहीं मिला… हम 350 बिलियन डॉलर से अपनी पूरी अमेरिकी नौसेना का पुनर्निर्माण कर सकते थे…’

सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला- ‘मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहना अपराध नहीं, भावनाएं आहत करने का केस गलत

नई दिल्ली किसी को ‘मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहना गलत और आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं माना जा सकता। ऐसा कहे जाने पर धार्मिक भावनाएं आहत किए जाने के मामले में भी केस दर्ज नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला दिया है। अदालत ने यह बात 80 साल के एक शख्स के खिलाफ दर्ज केस को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। बुजुर्ग पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यक्ति को मियां-तियां और पाकिस्तानी कहा था। इससे उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। लेकिन उस केस को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने खारिज कर दिया। बेंच ने कहा, ‘बुजुर्ग पर आरोप है कि उन्होंने मियां-तियां और पाकिस्तानी कहकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। निसंदेह उनकी टिप्पणी खराब है और गलत तरीके से की गई। लेकिन इससे उस व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं, जिससे यह बात कही गई।’ यह मामला झारखंड के बोकारो का है, जहां के एक उर्दू अनुवादक मोहम्मद शमीमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि बुजुर्ग ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्हें मियां-तियां और पाकिस्तानी कहा। शमीमुद्दीन ने 80 साल के हरि नारायण सिंह पर यह आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी बातों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस शिकायत के आधार पर बुजुर्ग के खिलाफ सेक्शन 298 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), सेक्शन 504 (जानबूझकर किसी को अपमानित करना और शांति भंग), 506 (आपराधिक साजिश), 353 (सरकारी कर्मचारी से बदसलूकी) जैसी धाराओं में केस दर्ज हो गया। बुजुर्ग के खिलाफ जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। जुलाई 2021 में मजिस्ट्रेट ने इस मामले का संज्ञान लिया और बुजुर्ग को समन जारी किया। इसके बाद बुजुर्ग ने अडिशनल सेशन जज का रुख किया, लेकिन राहत नहीं मिली। फिर उन्होंने हाई कोर्ट में अपील दायर की। वहां से भी राहत न मिलने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद बुजुर्ग को राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि उनकी टिप्पणी गलत तो है, लेकिन आपराधिक केस नहीं बना सकते। यह मामला अब ऐसे अन्य केसों के लिए भी नजीर बन सकता है।

‘किसी को मियां-टियां या पाकिस्तानी कहना गलत, पर अपराध नहीं’, आरोपी को दोषमुक्त करते हुए कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टिप्पणी को लेकर अहम बात कही। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहना गलत होगा, लेकिन इससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं माना जाएगा। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना) के तहत आरोप से एक व्यक्ति को मुक्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पर उसे ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि निस्संदेह, दिए गए कथन गलत है। हालाँकि, इससे याचिकाकर्ता की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुचती है। झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच झारखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामला उप-विभागीय कार्यालय, चास में एक उर्दू अनुवादक और कार्यवाहक क्लर्क (सूचना का अधिकार) की तरफ से दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वह आरटीआई आवेदन के संबंध में जानकारी देने के लिए अपीलकर्ता से मिलने गया, तो आरोपी ने उसके धर्म का हवाला देकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन को रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल किया। अदालत ने 11 फरवरी को दिए अपने फैसले में कहा, “निस्संदेह, दिए गए बयान सुनने में ठीक नहीं लगते हैं। लेकिन, इससे सूचना देने वाले की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती। इसलिए, हमारा मानना है कि अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 298 के तहत आरोपमुक्त किया जाना चाहिए।” शिकायतकर्ता, जो एक उर्दू अनुवादक और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कार्यवाहक क्लर्क है, ने अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के बाद आरोपी सिंह को व्यक्तिगत रूप से कुछ जानकारी दी थी। सिंह ने शुरू में दस्तावेज स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई, लेकिन अंततः उन्होंने दस्तावेज स्वीकार कर लिए, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता के धर्म का हवाला देते हुए उसे अपशब्द कहे। यह भी आरोप लगाया गया कि सिंह ने शिकायतकर्ता को डराने और लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप सिंह के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना), 506 (आपराधिक धमकी), 353 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) शामिल हैं। मजिस्ट्रेट ने मामले की समीक्षा करते हुए धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए, जबकि साक्ष्य के अभाव में धारा 323 और 506 के तहत आरोपों को खारिज कर दिया। सिंह की आरोपमुक्ति की याचिका को पहले सत्र न्यायालय और बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के तहत आरोप को कायम रखने के लिए हमले या बल प्रयोग का कोई सबूत नहीं है। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस प्रावधान के तहत आरोपी को आरोपमुक्त न करके गलती की है। शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 504 भी लागू नहीं होती, क्योंकि सिंह की ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया, जिससे शांति भंग हो सकती हो। धारा 298 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सिंह की टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन आईपीसी के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए कानूनी तौर पर पर्याप्त नहीं थी। नतीजतन, सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। आईपीसी 504 के तहत आरोप नहीं लगा सकते आखिरकार, अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शिकायत में अपराध के तत्व नहीं बताए गए थे। कोर्ट ने कहा कि जाहिर है, अपीलकर्ता ने धारा 353 आईपीसी को आकर्षित करने के लिए कोई हमला या बल का प्रयोग नहीं किया था। कोर्ट ने आगे कहा कि अपीलकर्ता पर धारा 504 आईपीसी के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उसकी ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया जिससे शांति भंग हो सकती हो।

टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में: ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से सेमीफाइनल हराया

Team India in the final of Champions Trophy: Defeated Australia by 4 wickets in the semi-final विराट कोहली ने करियर की 74वीं फिफ्टी पूरी की है। टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराकर चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है। सेमीफाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच बने चेज मास्टर विराट कोहली, जिन्होंने 84 रन की बेहद अहम पारी खेली। दुबई के इंटरनेशनल स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए सेमीफाइनल में कोहली ने रन चेज में 3 बड़ी साझेदारियां भी कीं। उन्होंने श्रेयस अय्यर के साथ 91, अक्षर पटेल के साथ 44 और केएल राहुल के साथ 47 रन जोड़े। इन्हीं पार्टनरशिप ने रन चेज को आसान बनाया। आखिर में हार्दिक पंड्या ने तेजी से 28 रन बनाए और केएल राहुल ने छक्का मारकर जीत दिलाई। वे 42 रन बनाकर नाबाद लौटे। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी की और 265 रन का टारगेट दिया। ऑस्ट्रेलिया से कप्तान स्टीव स्मिथ ने 73 और एलेक्स कैरी ने 61 रन बनाए। इंडियन बॉलर्स ने ऑस्ट्रेलिया को ऑलआउट कर दिया। मोहम्मद शमी ने 3, रवींद्र जडेजा और वरुण चक्रवर्ती ने 2-2 विकेट लिए।

औरंगजेब की तारीफ मामले में सपा के विधायक अबू आसिम आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा से निलंबित करने की मांग की

मुंबई सपा विधायक अबू आजमी की ओर से मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ करने पर महाराष्ट्र विधानसभा में मंगलवार को हंगामा मच गया। उन्होंने कहा था कि औरंगजेब का शासन इतना अच्छा था कि उसके दौर में भारत सोने की चिड़िया था। मुंबई के मानखुर्द शिवाजी नगर से विधायक ने दावा किया था, ‘हमारा जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दुनिया का 24 प्रतिशत था और भारत को (औरंगजेब के शासनकाल के दौरान) सोने की चिड़िया कहा जाता था।’ महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ के सदस्यों ने मुगल बादशाह औरंगजेब की प्रशंसा करने के लिए मंगलवार को सपा के विधायक अबू आसिम आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा से निलंबित करने की मांग की। इस मुद्दे पर हंगामा इतना बरपा कि कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्यों ने दावा किया कि आजमी औरंगजेब के वंशज हैं, जिसने मराठा राजा छत्रपति संभाजी महाराज को प्रताड़ित किया था और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। भाजपा के अतुल भटकलकर ने मांग की कि आजमी पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाए और बजट सत्र के लिए उन्हें विधानसभा से निलंबित किया जाए। शिवसेना के मंत्री गुलाबराव पाटिल ने भी आजमी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। भाजपा लीडर सुधीर मुनगंटीवार ने मांग की कि औरंगजेब की कब्र को ध्वस्त किया जाए। सदस्यों को उग्र होता देख विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद में जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो उद्योग मंत्री उदय सामंत ने मांग दोहराई कि आजमी को सदन से निलंबित किया जाए और उन पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा बर्दाश्त नहीं कर सकते जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज का उत्पीड़न किया और उनके बेटे छत्रपति संभाजी महाराज को प्रताड़ित किया।’ हंगामे के बीच शिवसेना उद्धव गुट के सदस्य भास्कर जाधव ने सदन की कार्यवाही के दौरान जारी हंगामे को ‘नाटक’ बताया। शोरगुल के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही फिर से 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सोमवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मांग की थी कि छत्रपति संभाजी महाराज को क्रूरतापूर्वक प्रताड़ित करने वाले औरंगजेब की प्रशंसा करने के लिए आजमी पर राजद्रोह का केस लगाया जाना चाहिए। लोकसभा सदस्य नरेश म्हास्के की शिकायत पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के प्रयास के आरोप में सोमवार को उपमुख्यमंत्री के राजनीतिक क्षेत्र ठाणे में आजमी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। सपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष आजमी ने कहा था कि औरंगजेब के शासनकाल में भारत की सीमा अफगानिस्तान और बर्मा (म्यांमार) तक पहुंच गई थी। विधायक ने दावा किया, ‘हमारा जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) (विश्व जीडीपी) 24 प्रतिशत था और भारत को (औरंगजेब के शासनकाल के दौरान) सोने की चिड़िया कहा जाता था।’ हाल में आई हिंदी फिल्म ‘छावा’ में संभाजी महाराज की बहादुरी और बलिदान को दर्शाया गया है।

सैन्य गतिविधियों पर भड़कीं किम यो जोंग ने अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की दी धमकी

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन ने अमेरिका को धमकी देनी शुरू कर दी है। दक्षिण कोरिया में अमेरिकी विमान वाहक पोत और अन्य सैन्य गतिविधियों पर भड़कीं किम यो जोंग ने अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की धमकी दे डाली है। किम यो जोंग ने इसे अमेरिका और उसके साथियों का टकरावपूर्ण और उन्मादी कदम करार दिया। किम यो जोंग की चेतावनी का मतलब यह है कि उत्तर कोरिया हथियार परीक्षण गतिविधियों में तेजी लाएगा और अमेरिका के खिलाफ टकराव का रुख बरकरार रखेगा। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह कूटनीति को पुनर्जीवित करने के लिए किम जोंग उन से संपर्क करेंगे। बता दें कि पहले कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से मुलाकात भी की थी। मीडिया की खबर के मुताबिक, एक बयान में किम यो जोंग ने अमेरिका पर उत्तर कोरिया के प्रति अपनी सबसे शत्रुतापूर्ण और टकराव वाली इच्छा को स्पष्ट रूप से दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोरिया प्रायद्वीप में अमेरिकी रणनीतिक संसाधनों की तैनाती उत्तर कोरिया की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। रविवार को अमेरिका का विमान वाहक पोत यूएसएस कार्ल विन्सन और उसका ‘स्ट्राइक’ समूह दक्षिण कोरिया पहुंचा। माना जा रहा है कि कुछ दिन पहले उत्तर कोरिया ने हथियारों का परीक्षण किया था। इसी के जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में जंगी जहाजों का बेड़ा भेज दिया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन को स्मार्ट गाय भी कहा था। हालांकि अब उनकी सरकार उत्तर कोरिया के खिलाफ कड़ा कमद उठा रही है। इससे पहले अक्टूबर में कहा था कि दक्षिण कोरिया के मनी मशीन है और अब उन्हें हर साल 10 बिलियन डॉलर देने होंगे। अमेरिका के 28 हजार से ज्यादा जवान दक्षिण कोरिया में तैनात हैं।

जल्द बीजेपी को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, बैठक की तारीख तय, दो बड़े नाम रेस में

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। जेपी नड्डा के कार्यकाल के बाद अगला अध्यक्ष कौन होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 से 20 अप्रैल के बीच बेंगलुरु में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नए अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। सूत्रों के अनुसार, इस बार दक्षिण भारत से किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना प्रबल है। इस दौड़ में आंध्र प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दग्गुबाती पुरंदेश्वरी और बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कोयंबटूर विधायक वनती श्रीनिवास के नाम सबसे आगे हैं। महिला नेताओं के नाम सबसे आगे दग्गुबाती पुरंदेश्वरी 2014 में बीजेपी में शामिल हुई थीं और संगठनात्मक अनुभव के साथ दक्षिण भारत में उनकी मजबूत पकड़ है। उन्हें ‘दक्षिण की सुषमा’ भी कहा जाता है। वहीं, वनती श्रीनिवास भी एक मजबूत उम्मीदवार मानी जा रही हैं, जिनका तमिलनाडु में बड़ा प्रभाव है। अन्य संभावित दावेदार इन दो महिला नेताओं के अलावा शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर और धर्मेंद्र प्रधान के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान और धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बीजेपी और आरएसएस सहमत हैं, लेकिन मनोहर लाल खट्टर के नाम पर अमित शाह को ऐतराज है। दक्षिण भारत से अध्यक्ष बनने की संभावना क्यों? बीजेपी की रणनीति के तहत, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार के लिए दक्षिण भारत से अध्यक्ष बनाए जाने के संकेत दिए जा रहे हैं। अगले कुछ महीनों में केरल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने के लिए दक्षिण भारत से नेतृत्व दे सकती है। अब सभी की नजरें 18-20 अप्रैल की बैठक पर टिकी हैं, जहां बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।

परमाणु ऊर्जा का बहिष्कार: सतत और जनकेंद्रित ऊर्जा नीतियों की मांग

 हैदराबाद जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) का हैदराबाद में राष्ट्रीय अधिवेशन था, जो 1 से 4 मार्च तक चला।इस राष्ट्रीय अधिवेशन में नेशनल अलायंस फॉर क्लाइमेट एंड इकोलॉजिकल जस्टिस, नेशनल अलायंस ऑफ एंटी-न्यूक्लियर मूवमेंट्स और चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे एवं बरगी बांध विस्थापित मत्स्य संघ के अध्यक्ष मुन्ना बर्मन ने संयुक्त रूप से परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विरोध में प्रस्ताव रखा। बताया गया कि परमाणु ऊर्जा के विस्तार की हालिया नीतियों का कड़ा विरोध करता है, जिसमें मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में परमाणु संयंत्रों की स्थापना शामिल है। परमाणु ऊर्जा न तो सुरक्षित है, न सतत, और न ही आर्थिक रूप से व्यावहारिक। इसके पर्यावरणीय, सामाजिक और मानवीय नुकसान इसके कथित लाभों से कहीं अधिक हैं। एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) और एनपीसीआईएल (न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के बीच ₹80,000 करोड़ के निवेश का समझौता, परमाणु ऊर्जा को आगे बढ़ाने की एक खतरनाक नीति है, जो जनसुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता की पूरी तरह अनदेखी करती है। चुटका परमाणु संयंत्र और नीमच, देवास, सिवनी और शिवपुरी जिलों में प्रस्तावित संयंत्र स्थानीय समुदायों के विस्थापन, विकिरण (रेडिएशन) के खतरे और दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय विनाश का कारण बनेंगे। चुटका क्षेत्र में 2009 से आदिवासी समुदाय इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं, जहां भूमि का जबरन अधिग्रहण किया गया और उचित मुआवजा भी नहीं दिया गया। इस परियोजना से मछुआरे, किसान और स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके बावजूद चुटका परमाणु परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो सरकार की जनविरोधी और कॉरपोरेट-हितैषी नीतियों को उजागर करता है। परमाणु संयंत्रों के लिए आदिवासी, किसान और मछुआरों को उनकी भूमि से बेदखल किया जाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है और इससे उनकी आजीविका छिन रही है। इसके अलावा, सरकार द्वारा फ्रांस की ईडीएफ, रूस की रोसटाॅम और अमेरिका की वैस्टींगहाउस इलेक्ट्रिक कार्पोरेशन  जैसी विदेशी परमाणु कंपनियों पर निर्भरता देश की संप्रभुता और सार्वजनिक जवाबदेही को भी संकट में डालती है। परमाणु ऊर्जा को “स्वच्छ ऊर्जा” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यह विकिरणीय कचरा, उच्च लागत और विनाशकारी दुर्घटनाओं के खतरे के साथ आती है। वैश्विक अनुभव से यह स्पष्ट हुआ है कि सौर, पवन  और छोटे विकेन्द्रित जलविद्युत ऊर्जा अधिक सुरक्षित और सतत समाधान हैं। एनएपीएम परमाणु ऊर्जा को एक ऊर्जा समाधान के रूप में अस्वीकार करता है और नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर तत्काल रोक लगाने की मांग करता है। इसके बजाय, सरकार को विकेन्द्रित, नवीकरणीय (रिन्यूएबल) ऊर्जा स्रोतों में निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि ऊर्जा नीति पर्यावरणीय न्याय और समुदायों की संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप हो। एनएपीएम परमाणु ऊर्जा के आर्थिक, पर्यावरणीय और मानवीय लागतों को उजागर करने और सतत और लोकतांत्रिक ऊर्जा प्रणालियों की ओर न्यायसंगत परिवर्तन की वकालत करने के लिए प्रतिबद्ध है। परमाणु ऊर्जा विस्तार को तुरंत रोका जाना चाहिए, इससे पहले कि यह अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय और मानवीय तबाही को जन्म दे। इस 30वें राष्ट्रीय सम्मेलन की सभा मांग करती है कि: 1.    खतरनाक और विषैली परमाणु विखंडन तकनीक को पूरी तरह से त्यागा जाए। 2.    परमाणु ऊर्जा पर भारी बजट को विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा विकास की ओर किया जाए। 3.    स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर परियोजना को बंद किया जाए और बजट को स्वच्छ, सुरक्षित और किफायती ऊर्जा विकल्पों की ओर खर्च किया जाए, विशेष रूप से वंचित समुदायों की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए। 4.    सभी यूरेनियम खदानों को बंद करने के लिए एक समयबद्ध योजना बनाई जाए और उसे लागू किया जाए। 5.    बंद और छोड़ी गई यूरेनियम खदानों की पारिस्थितिकी बहाली के लिए एक व्यापक योजना बनाई जाए और उसे लागू किया जाए। 6.    सभी प्रभावित समुदायों का व्यापक अध्ययन किया जाए, और प्रभावित लोगों को पूर्ण पुनर्वास तथा निःशुल्क चिकित्सा सहायता दी जाए। 7.    सभी 24-25 परमाणु विखंडन रिएक्टरों के लिए एक समयबद्ध निष्कासन योजना बनाई जाए और सावधानीपूर्वक उसे लागू किया जाए। 8.    उच्च-रेडियोधर्मी कचरे के स्थायी और सुरक्षित भंडारण की गारंटी हो। 9.    न्यूक्लियर डैमेज सिविल लायबिलिटी एक्ट को कमजोर करने के सभी प्रयास बंद किए जाएं और इसे और मजबूत किया जाए। 10.    भारत को वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण योजनाओं को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहिए, जैसा कि राजीव गांधी सरकार के दौरान प्रस्तावित किया गया था।                        प्रस्ताव को  23 राज्य के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने सर्वसहमति से पारित किया।

PM ने महिलाओं को अपनी प्रेरणादायक जीवन यात्रा साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया, सौंपेंगे अपने सोशल मीडिया अकाउंट

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कुछ चुनिंदा महिलाओं को एक दिन के लिए उनके डिजिटल सोशल मीडिया अकाउंट्स को संभालने का अवसर मिलेगा। कल सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं नमो ऐप ओपन फोरम पर बहुत ही प्रेरणादायक जीवन यात्राएं साझा होते देख रहा हूं, जिसमें से कुछ महिलाओं को 8 मार्च को महिला दिवस पर मेरे डिजिटल सोशल मीडिया अकाउंट्स को संभालने के लिए चुना जाएगा। मैं ऐसी और भी जीवन यात्राएं साझा करने का अनुरोध करता हूं।” इससे पहले 23 फरवरी को ‘मन की बात’ की 119वीं कड़ी में पीएम मोदी ने अपने सम्बोधन में कहा, “अगले महीने 8 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ है। यह हमारी नारी-शक्ति को नमन करने का एक विशेष अवसर होता है। देवी माहात्म्य में कहा गया है – विद्या: समस्ता: तव देवि भेदा: स्त्रीय: समस्ता: सकला जगत्सु। अर्थात सभी विद्याएं, देवी के ही विभिन्न स्वरूपों की अभिव्यक्ति हैं और जगत की समस्त नारी-शक्ति में भी उनका ही प्रतिरूप है। हमारी संस्कृति में बेटियों का सम्मान सर्वोपरि रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “आप किसी भी क्षेत्र पर नजर डालें तो पाएंगे कि महिलाओं का योगदान कितना व्यापक है। साथियो, इस बार महिला दिवस पर मैं एक ऐसी पहल करने जा रहा हूँ, जो हमारी नारी-शक्ति को समर्पित होगी। इस विशेष अवसर पर मैं अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसे एक्स, इंस्टाग्राम के एकाउंट्स को देश की कुछ प्रेरणादायी महिलाओं को, एक दिन के लिए सौंपने जा रहा हूँ। ऐसी महिलाएं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल की हैं, नवाचार किया है, अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। 8 मार्च को, वो, अपने कार्य और अनुभवों को देशवासियों के साथ साझा करेंगी।” उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म भले ही मेरा होगा, लेकिन वहां उनके अनुभव, उनकी चुनौतियाँ और उनकी उपलब्धियों की बात होगी। यदि आप चाहती हैं कि ये अवसर आपको मिले, तो, नमो ऐप पर बनाए गए विशेष फोरम के माध्यम से, इस प्रयोग का हिस्सा बनें और मेरे एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट से, पूरी दुनिया तक, अपनी बात पहुंचाएँ, तो आइए, इस बार महिला दिवस पर हम सब मिलकर अदम्य नारी-शक्ति का जश्न मनाएं, सम्मान करें, नमन करें।  

औरंगजेब की तारीफ पड़ी भारी, अबू आजमी के खिलाफ इन धाराओं में केस दर्ज

मुंबई महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आजमी को औरंगजेब की तारीफ करना महंगा पड़ गया है। शिवसेना ने अबू आजमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। बता दें कि इससे पहले शिवसेना के प्रमुख और राज्य के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी अबू आजमी पर देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की मांग की थी। आइए जानते हैं कि अबू आजमी ने कहा क्या था और पुलिस ने उनपर किन धाराओं में केस दर्ज किया है। शिवसेना ने दर्ज कराई शिकायत औरंगजेब की तारीफ करने को लेकर महाराष्ट्र सपा अध्यक्ष अबू आजमी की मुसीबत बढ़ गई है। अबू आजमी के खिलाफ शिवसेना (शिंदे) ने मुम्बई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिवसेना प्रवक्ता और पूर्व विधायक किरण पावसकर ने कार्यकर्ताओं के साथ  पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। अबू आजमी पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की गई है। इन धाराओं में केस दर्ज इसके अलावा शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के की शिकायत के आधार पर ठाणे के वागले एस्टेट पुलिस स्टेशन में अबू आजमी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। माना जा रहा है कि सपा विधायक अबू आजमी की मुसीबत बढ़ने वाली है। पुलिस ने आजमी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299, 302 और 356 के तहत मामला दर्ज किया है। क्या बोले थे अबु आजमी? बता दें कि अबू आजमी महाराष्‍ट्र में समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष हैं। सोमवार को उन्‍होंने कहा- “गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए। औरंगज़ेब कोई क्रूर शासक नहीं थे। उन्‍होंने यहां तक दावा क‍िया क‍ि बनारस में जब एक पंडित की बच्‍ची के साथ उसके सिपहसालार ने बदतमीजी की करने की कोश‍िश की तो औरंगजेब ने उस सिपहसालार को दो हाथ‍ियों के बीच बंधवाकर मरवा डाला। बाद में उन पंड‍ितों ने औरगंजेब के ल‍िए मस्‍ज‍िद बनाकर भेंट क‍िया। वो अच्छे प्रशासक थे, जो उन्होंने किया वो सही किया। अगर कोई और राजा होता वो वो भी वही करता।” अबू आजमी ने ये भी कहा था- “औरंगजेब के शासन के दौरान भारत की जीडीपी 24% थी और देश “सोने की चिड़िया” था। औरंगजेब उनके लिए गलत नहीं था। उसने कई मंदिर भी बनवाये थे। इतिहास में कई गलत चीज़े बताई गई हैं।” उदित राज ने किया आजमी का समर्थन कांग्रेस नेता उदित राज ने अबू आजमी के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा,’मैं अबू आजमी के बयान का समर्थन करता हूं. उन्होंने कुछ गलत नहीं बोला है. औरंगजेब ने मस्जिद भी तोड़ी थी. राजा लोग एक-दूसरे को प्रताड़ित करते ही थे. बड़े राजा छोटे को प्रताड़ित करते थे. सिर्फ एक राजा को टारगेट करना गलत है. हिन्दुओं में भी क्रूर राजा हुए. सिर्फ औरंगजैब को ही टारगेट क्यों किया जा रहा है?’ अबू आजमी ने बयान में कही थी ये बात बता दें कि सपा नेता अबू आजमी ने औरंगजेब का बचाव करते हुए बयान दिया था. उन्होंने कहा था,’मैं 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानता. इन दिनों फिल्मों के माध्यम से मुगल बादशाह की विकृत छवि बनाई जा रही है.’ एकनाथ शिंदे ने व्यक्त की थी प्रतिक्रिया अबू आजमी की टिप्पणी पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. शिंदे ने कहा था कि सपा नेता को उनकी टिप्पणी के लिए माफी मांगना चाहिए. इतना ही नहीं शिंदे ने अबू आजमी के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी की थी. पुलिस स्टेशन के बाहर जमकर हुआ प्रदर्शन अबू आजमी के बयान के विरोध में शिवसेना शिंदे गुट से ठाणे से सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेश म्हस्के के साथ शिवसेना शिंदे गुट के मुस्लिम समुदाय के कार्यकर्ता वागले पुलिस स्टेशन पहुंचे और जमकर विरोध-प्रदर्शन किया. इसके बाद म्हस्के ने अबू आजमी के खिलाफ केस दर्ज कराया.

IRCTC, IRFC को मिला नवरत्न दर्जा; रेल मंत्री ने दी बधाई

IRCTC, IRFC को मिला नवरत्न दर्जा; रेल मंत्री ने दी बधाई सभी सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू को 2014 के बाद नवरत्न का दर्जा प्राप्त हुआ। नईदिल्ली सरकार ने भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) और भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) को नवरत्न कंपनियों के रूप में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा सार्वजनिक उद्यम विभाग (Department of Public Enterprises) ने अपने X पोस्ट के माध्यम से की। पोस्ट में कहा गया कि IRCTC 25वीं और IRFC 26वीं नवरत्न कंपनी बनी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने IRCTC और IRFC की टीम को नवरत्न दर्जा प्राप्त करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी 7 सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू अब नवरत्न का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं, और यह उपलब्धि 2014 के बाद संभव हुई है। सभी 7 सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू जो नवरत्न बने: CONCOR: जुलाई 2014 RVNL: मई 2023 IRCON और RITES: अक्टूबर 2023 RailTel: अगस्त 2024 अब IRCTC और IRFC रेल मंत्री ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रेलवे के संपूर्ण परिवर्तन और विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री का भी आभार व्यक्त किया।   IRCTC: रेलवे की नवरत्न कंपनी IRCTC, जो रेल मंत्रालय का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (CPSE) है, ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में ₹4,270.18 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर, ₹1,111.26 करोड़ का शुद्ध लाभ (PAT), और ₹3,229.97 करोड़ की शुद्ध संपत्ति हासिल की। IRCTC को नवरत्न का दर्जा तब मिला है जब कंपनी 2025 में अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रही है। यह कंपनी की कैटरिंग, पर्यटन और ऑनलाइन टिकटिंग सेवाओं में उत्कृष्टता को दर्शाता है। नवरत्न दर्जा मिलने से अब IRCTC अपने यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विस्तार कर सकेगी और अपनी सेवाओं को और बेहतर बना सकेगी।   IRFC: रेलवे वित्त का मजबूत आधार भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC), जो रेल मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख वित्तीय संस्थान है, को भारत सरकार द्वारा नवरत्न का दर्जा प्रदान किया गया है। यह दर्जा IRFC की मजबूत वित्तीय स्थिति और रेलवे अवसंरचना के वित्तपोषण में इसके योगदान को मान्यता देता है। IRFC की स्थापना 12 दिसंबर 1986 को 100% सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में हुई थी। यह भारतीय रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में IRFC का राजस्व ₹26,644 करोड़ और शुद्ध लाभ (PAT) ₹6,412 करोड़ रहा, जबकि इसकी शुद्ध संपत्ति ₹49,178 करोड़ तक पहुंच गई। आज, IRFC भारत की तीसरी सबसे बड़ी सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) बन चुकी है। नवरत्न दर्जे के लाभ नवरत्न पीएसयू (PSU) को कई विशेष अधिकार और स्वायत्तता मिलती है, जिनमें शामिल हैं: 1. वित्तीय स्वायत्तता सरकार की अनुमति के बिना संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures), सहायक कंपनियां (Subsidiaries) बनाने और विलय या अधिग्रहण करने की शक्ति। 2. परिचालन स्वतंत्रता स्वतंत्र व्यावसायिक और निवेश निर्णय लेने की क्षमता, जिससे निजी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होती है। एचआर प्रबंधन में लचीलापन, जिससे कंपनी बाजार दर पर पेशेवरों की भर्ती कर सकती है। 3. वैश्विक विस्तार की संभावना अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश कर सकती हैं, रणनीतिक गठबंधन कर सकती हैं और ग्लोबल स्तर पर विस्तार कर सकती हैं। 4. बेहतर बाजार स्थिति वित्तीय रूप से स्थिर कंपनियों के रूप में निवेशकों का अधिक विश्वास प्राप्त होता है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण शेयरधारकों को अधिक लाभ प्रदान कर सकती हैं। IRCTC और IRFC को नवरत्न दर्जा मिलने से रेलवे क्षेत्र में बड़े वित्तीय और परिचालन सुधारों की संभावनाएं बढ़ेंगी। यह भारतीय रेलवे के आर्थिक और व्यावसायिक विकास में एक बड़ा कदम है और इससे रेलवे को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थान मिलेगा।

इन आसान तरीकों से आसानी से करें लॉक आधार कार्ड

नई दिल्ली आधार कार्ड आज के वक्त का सबसे जरूरी दस्तावेज है। आधार कार्ड में बॉयोमेट्रिक डिटेल मौजूद होती है, जिसकी मदद से फ्रॉड को अंजाम दिया जा सकता है। ऐसे में आधार कार्ड को लॉक करना जरूरी हो जाता है। अगर आप आधार की बायोमेट्रिक डिटेल को लॉक कर देते हैं, तो आपको एक एक्स्ट्रा लेयर सिक्योरिटी मिल जाती है। आधार कार्ड लॉक करने पर आपकी परमिशन के बिना आपके प्रिंट और आईरिस स्कैन का वेरिफिकेशन किया जा सकेगा। यह आपके आधार से जुड़ी एक्टिविटी पर कंट्रोल रखने में मदद करता है। आधार लॉक के प्रॉसेस को आसानी से ऑनलाइन किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर इस फीचर को कैसे एक्टिवेट किया जाए? आधार बायोमेट्रिक लॉक आधार बायोमेट्रिक लॉक आपके फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और फेस डेटा के दुरुपयोग से बचाने के लिए शुरू किया गया है। यह एक सिक्योरिटी फीचर है। इस लॉक को एक्टिवेट करने से कोई भी आपकी परमिशन के बिना आईडी वेरिफिकेशन, वित्तीय लेनदेन या सिम कार्ड जारी नहीं कर पाएगा। यूजर UIDAI पोर्टल या mAadhaar एप्लीकेशन के जरिए किसी भी समय बायोमेट्रिक्स को लॉक या अनलॉक कर सकते हैं। आधार बायोमेट्रिक्स को ऑनलाइन कैसे लॉक करें अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने के लिए आपको सबसे पहले एक आधार वर्चुअल ID (VID) जेनरेट करना होगा। ऐसा करने के लिए आप UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं और ‘VID जेनरेटर’ ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं।   सबसे पहले UIDAI myAadhaar पोर्टल पर जाएं।     इसके बाद नीचे स्क्रॉल करें और ‘लॉक/अनलॉक आधार’ ऑप्शन पर क्लिक करें।     फिर आपको ‘Next’ ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     आधार वर्चुअल ID (VID)     पूरा नाम     पिन कोड     कैप्चा कोड     फिर OTP वेरिफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद आपका आधार बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाएगा।     यह सिक्योरिटी फंक्शन आपके आधार डिटेल को सुरक्षित रखता है। साथ ही प्रोटेक्शन की एक एडिशनल लेयर देता है। mAadhaar ऐप से आधार बायोमेट्रिक्स कैसे करें लॉक     सबसे पहले Google Play Store या Apple ऐप स्टोर से mAadhaar ऐप डाउनलोड करें।     इसके बाद ऐप पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।     फिर ‘my aadhaar’ आइकन पर क्लिक करें।     अपना आधार नंबर, कैप्चा कोड दर्ज करें और OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।     अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने के लिए ‘बायोमेट्रिक लॉक’ ऑप्शन चुनें।     एक बार चालू होने पर, यह फीचर आपके फिंगरप्रिंट, आईरिस और फेस डेटा को गैरजरूरी एक्सेस से बचाता है। SMS से बायोमेट्रिक्सकैसे करें लॉक अगर आप अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करना चाहते हैं, लेकिन आपके पास इंटरनेट एक्सेस नहीं है, तो आप SMS की मदद से आसानी से बायोमेट्रिक लॉक कर सकते हैं।     अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर से 1947 पर एक [GETOTP (space) aadhaar Last 4 digits] मैसेज भेजें।     फिर SMS से ओटीपी वेरिफाई करें।     अगर आपका फोन नंबर कई आधार नंबर से लिंक है, तो लास्ट 4 की जगह आखिरी 8 अंकों का यूज करें।     इस तरह आपका बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाएगा।

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