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सेना और जनता के बीच हालिया वर्षों में भरोसा कम हो रहा है, जो बड़ा खतरा बन सकता है, दी बड़ी चेतावनी: इमरान खान

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने जेल से देश के सेना प्रमुख असीम मुनीर को चिट्ठी लिखी है। लंबे समय से जेल में बंद इमरान ने अपने इस खुले खत में अपने साथ दुर्व्यवहार होने की बात कही है। साथ ही उन्होंने सेना की राजनीति में दखल को गलत बताते हुए इसे रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सेना और जनता के बीच हालिया वर्षों में भरोसा कम हो रहा है, जो बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सेना अपनी संवैधानिक सीमाओं में काम करे। इमरान खान एक हफ्ते में दो चिट्ठी लिख चुके हैं। खान ने 9 फरवरी से पहले 3 फरवरी को भी खुला खत लिखा था।   इमरान खान ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि उनकी चिंता सशस्त्र बलों की प्रतिष्ठा, सेना और जनता के बीच बढ़ती खाई के खतरनाक नतीजों के लिए है। इमरान का कहना है कि उनकी ओर से उठाए छह बिंदुओं पर जनमत संग्रह कराया जाए तो 90 प्रतिशत पाकिस्तानी उनका समर्थन करेंगे। ये बिंदु चुनाव धांधली, 26वें संवैधानिक संशोधन के जरिए न्यायपालिका पर कब्जा, PECA जैसे कठोर कानून बनाकर जनता का उत्पीड़न, राजनीतिक अस्थिरता और पाकिस्तान की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पर कार्रवाई शामिल है। इससे सिर्फ सियासी लोगों को ही परेशानी नही हो रही है बल्कि अवाम और सेना के बीच की खाई भी बढ़ रही है। मेरे साथ जेल में खराब बर्ताव: इमरान इमरान खान ने अडियाला जेल में तैनात एक सैन्य अधिकारी पर उत्पीड़न और उनके अधिकारों के हनन का आरोप भी लगाया है। खान का कहना है कि यह अफसर अदालत के आदेशों की अनदेखी करते हुए खराब बर्ताव करता है। इमरान का कहना है कि उन्हें 20 दिनों तक जेल की ऐसी बैरक में रखा गया, जहां सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंचती थी। इतना ही नहीं उनके सेल की बिजली भी पांच दिनों तक काट दी गई। अदालत के आदेश के बावजूद उनको छह महीने में केवल तीन फोन कॉल करने की अनुमति दी गई। इमरान ने आगे आरोप लगाया कि बंदूक की नोक पर पारित 26वें संशोधन का उपयोग करके ‘पॉकेट जज’ नियुक्त किए जा रहे हैं। खान ने कहा कि एक न्यायाधीश को उनके खिलाफ फैसला सुनाने के दबाव के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। खान ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट को प्रतिबंधित करने के लिए PECA जैसे कठोर कानूनों का इस्तेमाल किया गया है। इंटरनेट में व्यवधान ने देश के आईटी उद्योग को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचा है। लोग सेना से खुश नहीं: खान इमरान खान ने कहा कि पीटीआई के खिलाफ जारी कार्रवाइयों से सेना के प्रति जनता की नाराजगी बढ़ रही है। यह चिंताजनक है कि प्रतिष्ठान की नीतियों और गैरकानूनी कार्रवाइयों के कारण सेना के प्रति जनता की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। यह सेना की शपथ का उल्लंघन है। कोई भी राष्ट्रीय सेना अपने नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करती है। खान ने कहा कि पाकिस्तान की स्थिरता और सुरक्षा के लिए सेना और जनता के बीच बढ़ती खाई को पाटना अनिवार्य है। इसे हासिल करने का एकमात्र तरीका यह है कि सेना अपनी संवैधानिक सीमाओं पर लौट आए। सेना राजनीति से अलग हो जाए और अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों को पूरा करे। यह एक ऐसा कदम है, जो सेना को खुद उठाना चाहिए, वरना यह बढ़ती खाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक खतरनाक फॉल्ट लाइन बन जाएगी।

पुतिन से फोन पर रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की बात

अमेरिका अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की वकालत करते रहे हैं। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर इस युद्ध को खत्म करने के बारे में बात की है। ट्रंप ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति भी यही चाहते हैं कि लोगों का मरना बंद हो जाए। साल 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति के बीच यह पहली ज्ञात बातचीत है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमारे साथ-साथ पुतिन भी युद्ध में मर रहे लोगों को लेकर चिंतित हैं। वहां जो लोग मर रहे हैं, वह हमारे और आपके बच्चों की तरह हैं। मैं चाहता हू्ं कि लोगों का यह मरना जल्दी से जल्दी बंद हो जाए। ट्रंप ने कहा कि पिछले लगभग तीन सालों से यह युद्ध चल रहा है, अगर मैं राष्ट्रपति होता तो यह युद्ध कभी भी शुरू नहीं होता। पुतिन के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं। बाइडन पर हमला बोलते हुए कहा कि बाइडेन ने हमारे देश के लिए शर्मिंदगी वाली स्थिति को पैदा कर दिया है। हमें फिलहाल इसे समेटने में थोड़ा समय लगेगा। हम वही कर रहे हैं। रूस शांति चाहता है क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव से जब ट्रंप के इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच में संचार के अलग-अलग माध्यम काम करते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से इसके बारे में नहीं जानता। न तो मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूं न ही इससे इंकार कर सकता हूं। इससे पहले क्रेमलिन की तरफ से कहा गया था कि रूस शांति चाहता है और वह शांति के लिए अमेरिका से बातचीत करने के लिए तैयार है। जल्द ही होगी ट्रंप-पुतिन समिट? अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वह इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म कराना चाहते हैं। इस मामले में वह जल्द ही पुतिन से मिलेंगे। हालांकि इन दोनों वैश्विक नेताओं की मुलाकात कब होगी इसको लेकर अभी कोई तारीख सार्वजनिक नहीं है। रॉयटर्स ने इस महीने की शुरुआत में रिपोर्ट दी थी कि रूस सऊदी अरब या संयुक्त अरब अमीरात में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात करवाना चाहता है।

माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए जरूरी खबर, 2 महीने तक शराब और मांसाहार पर पाबंदी

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए जरूरी खबर है। आधार शिविर कटरा में शराब और मांसाहार की बिक्री और इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को 2 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कटरा से त्रिकुटा पर्वत स्थित मंदिर तक जाने वाले 12 किलोमीटर लंबे मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में यह प्रतिबंध लागू रहेगा। आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने तक यह पाबंदी प्रभावी रहेगी। कटरा के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट पियूष धोतरा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंध लागू किया है। अधिकारियों ने बताया कि कटरा से मंदिर मार्ग तक के अलावा मार्ग के दोनों ओर 2 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों जैसे अरली, हंसाली और मटयाल में शराब और मांसाहार पर रोक रहेगी। इसी तरह, कटरा-टिकरी रोड के दोनों ओर 200 मीटर के दायरे में स्थित चंबा, सेरली और भगता गांवों में पाबंदी लागू रहेगी। कटरा-जम्मू रोड के दोनों ओर 200 मीटर तक के क्षेत्र में स्थित कुंद्रोरियन, कोटली बजालियान, नोमाइन और मघाल गांवों में भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा। तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर कोटा की सुविधा गौरतलब है कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने वैष्णो देवी मंदिर में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर कोटा सुविधा की घोषणा की है। एसएमवीडीएसबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशुल गर्ग ने बताया कि तीर्थयात्री सेवाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया। उन्होंने बताया कि बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर कोटा उपलब्ध होगा। गर्ग ने कहा कि बोर्ड समय-समय पर नई सुविधाएं शुरू करके और मौजूदा बुनियादी ढांचे को उन्नत करके तीर्थयात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा, ‘वरिष्ठ नागरिक मंच की ओर से लंबे समय से की जा रही मांग के जवाब में यह सुविधा शुरू की गई है। मंच ने हाल ही में उच्च स्तरीय समिति के साथ बैठक करके अलग हेलीकॉप्टर बुकिंग कोटा की मांग की थी।’

किम जोंग उन ने ऐसा क्यो कहा- दक्षिण कोरिया और जापान से अमेरिका की दोस्ती हमारे सामने गंभीर खतरा

सियोल उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कहा कि दक्षिण कोरिया और जापान से अमेरिका की सुरक्षा साझेदारी बढ़ने से उत्तर कोरिया के सामने गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। किम ने साथ ही अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया है। सरकारी मीडिया में रविवार को आईं खबरों में यह जानकारी दी गई। किम पहले भी ऐसी चेतावानियां दे चुके हैं। उनके ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उनसे मुलाकात करने और कूटनीति को पुनर्जीवित करने की पेशकश को निकट भविष्य में स्वीकार नहीं करेंगे। सरकारी ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ (केसीएनए) के अनुसार शनिवार को कोरियाई पीपुल्स आर्मी की 77वीं स्थापना दिवस के अवसर पर दिए गए भाषण में किम ने कहा कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की तरह क्षेत्रीय सैन्य संगठन बनाने की अमेरिकी साजिश के तहत स्थापित अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य असंतुलन पैदा कर रही है। उन्होंने कहाकि यह साझेदारी हमारे देश के सुरक्षा हालात के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर रही है। केसीएनए के मुताबिक, उन्होंने परमाणु शक्तियों समेत सभी प्रतिरोध प्रणालियों को तेजी से मजबूत बनाने के लिए नयी योजनाओं उल्लेख करते हुए, एक बार फिर परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ने की नीति स्पष्ट की। शुक्रवार को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा था कि हम उत्तर कोरिया और किम जोंग उन के साथ संबंध बनाए रखेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, मेरा उनसे बहुत अच्छा रिश्ता रहा। मुझे लगता है कि मैंने युद्ध रोक दिया है। गौरतलब है कि 23 जनवरी को ‘फॉक्स न्यूज’ पर प्रसारित एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने किम को एक बुद्धिमान व्यक्ति बताते हुए कहा था कि वह धार्मिक कट्टरपंथी नहीं हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह किम से फिर से संपर्क करेंगे, तो ट्रंप ने जवाब दिया था कि हां, मैं करूंगा। ट्रंप ने 2018-19 में तीन बार किम से मुलाकात कर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने पर चर्चा की थी।

कभी ठंड का प्रकोप बढ़ जाता है तो कभी तापमान में कुछ बढ़ोतरी हो जाती है, बारिश और बर्फबारी भी हो सकती है: मौसम विभाग

नई दिल्ली फरवरी में आए दिन मौसम का मिजाज बदल रहा है। कभी ठंड का प्रकोप बढ़ जाता है तो कभी तापमान में कुछ बढ़ोतरी हो जाती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, ताजा पश्चिमी विक्षोभ एक बार से अपना असर दिखाने वाला है। इससे उत्तर-पश्चिम भारत के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। हवाओं की रफ्तार बढ़ जाएगी, जिससे सर्दी आपकी कंपकंपी भी छुड़ा सकती है। साथ ही, 9 फरवरी से लेकर 12 तारीख तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर बर्फबारी के भी आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम में बदरा बरसने वाले हैं। आईएमडी की ओर से इसे लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया है। राजस्थान में शुष्क बना हुआ है मौसम राजस्थान में मौसम शुष्क बना हुआ है। सीकर जिले का फतेहपुर 3.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा स्थान रहा। मौसम विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, शनिवार को करौली में न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री, दौसा में 4.6 डिग्री, माउंट आबू में 5.2 डिग्री, चूरू में 5.6 डिग्री और लूणकरणसर में 5.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि सीकर में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री, डबोक में 6.6 डिग्री, चित्तौड़गढ़ में 6.7 डिग्री, अंता में 6.9 डिग्री, नागौर में 7.1 डिग्री, वनस्थली में 7.3 डिग्री और राजधानी जयपुर में 10.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि आगामी 48 घंटों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। जम्मू-कश्मीर में अगले तीन दिनों तक बारिश जम्मू-कश्मीर में अगले तीन दिनों तक छिटपुट बारिश और हिमपात का अनुमान है। मौसम विभाग ने रविवार को यह जानकारी दी। इस वर्ष सर्दी काफी असामान्य रही है। रातें सामान्य से अधिक ठंडी और दिन गर्म हैं। सर्दियों में वर्षा की कमी भी देखी गई है। अधिकारियों ने कहा कि जम्मू -कश्मीर में जनवरी में बारिश की भारी कमी देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 29 जनवरी तक 87 प्रतिशत से कम बारिश हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, रविवार को अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश और हिमपात के आसार हैं। 10-11 फरवरी को मौसम थोड़ा सक्रिय हो सकता है, जिससे कश्मीर में छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश और हिमपात का अनुमान जताया गया है।

केंद्र सरकार ने बताया- अमेरिकी अधिकारियों ने 487 संभावित भारतीय नागरिकों के खिलाफ अंतिम निर्वासन आदेश जारी किए गए

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने आज घोषणा की कि अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया है कि 487 संभावित भारतीय नागरिकों के खिलाफ “फाइनल रिमूवल ऑर्डर” (अंतिम निर्वासन आदेश) जारी किए गए हैं। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब 104 भारतीय प्रवासियों को अमेरिका से निर्वासित कर एक C-17 अमेरिकी सैन्य विमान के जरिए भारत भेजा गया, जहां उनके हाथ-पैर जंजीरों में जकड़े हुए थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “हमें सूचित किया गया है कि 487 संभावित भारतीय नागरिकों के खिलाफ अंतिम निर्वासन आदेश जारी किए गए हैं। उनके कानूनी दर्जे और स्थिति के बारे में हमें कुछ जानकारी मिली है, और हम इन उपलब्ध आंकड़ों पर काम कर रहे हैं।” अमेरिकी सैन्य विमान से भारत भेजे गए प्रवासी 104 भारतीय प्रवासियों को लेकर अमेरिकी सैन्य विमान जब अमृतसर पहुंचा, तो यह डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत पहली सामूहिक निर्वासन प्रक्रिया बन गई। ये प्रवासी अवैध तरीके से अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर निर्वासित किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पूरी उड़ान के दौरान उन्हें हथकड़ियों और बेड़ियों से जकड़कर रखा गया था, और भारत पहुंचने के बाद ही उन्हें मुक्त किया गया। अमेरिका द्वारा सैन्य विमान के इस्तेमाल पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “यह निर्वासन प्रक्रिया पहले की उड़ानों की तुलना में थोड़ी अलग थी। अमेरिकी प्रणाली में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान के रूप में वर्णित किया गया है।” निर्वासन पर केंद्र बनाम विपक्ष निर्वासन और उसे लागू करने के तरीके को लेकर भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि सरकार ने अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए अपनी शर्तों पर कोई प्रयास क्यों नहीं किया। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए अपने रुख का बचाव किया, लेकिन विपक्ष ने तर्क दिया कि सरकार ने पहले संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए विशेष उड़ानों की व्यवस्था की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा, “हर देश को अवैध रूप से रहने वाले अपने नागरिकों को वापस लेने की जिम्मेदारी निभानी होती है। अमेरिका में यह निर्वासन प्रक्रिया 2012 से लागू मानकों के तहत की गई है। ICE (यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट) के नियमों के अनुसार, निर्वासन के दौरान हथकड़ी लगाने का प्रावधान है, लेकिन हमें सूचित किया गया है कि महिलाओं और बच्चों को नहीं बांधा गया।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार अमेरिकी अधिकारियों से लगातार संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्वासित भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार न हो। उन्होंने कहा,”हम सभी के हित में वैध प्रवास को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास को हतोत्साहित करना जरूरी है।” प्रवासी भारतीयों के लिए नया कानून लाने की तैयारी भारत सरकार नए प्रवास कानून पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे वैध, सुव्यवस्थित और सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा दिया जा सके। लोकसभा में सोमवार को विदेश मामलों पर संसदीय स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद शशि थरूर कर रहे हैं, ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में ‘ओवरसीज मोबिलिटी (सुविधा और कल्याण) विधेयक, 2024’ लाने की सिफारिश की गई है। अमेरिका का पक्ष अमेरिका ने भारतीय प्रवासियों को सैन्य विमान से निर्वासित करने के अपने फैसले का बचाव किया है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा, “हमारे देश के आप्रवासन कानूनों को लागू करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।” अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, “मैं उड़ान के विवरण में नहीं जा सकता, लेकिन मैं यह साझा कर सकता हूं कि अमेरिका के आप्रवासन कानूनों को निष्पक्ष रूप से लागू करना हमारी नीति है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी अवैध प्रवासियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।”

मंत्री मार्को रुबियो ने पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति एकदम स्पष्ट थे, हमास को अब सभी बंधकों को रिहा करना होगा!’

वाशिंगटन अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हमास की ओर से बनाए गए बंधकों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को दोहराते कहा कि हमास सभी बंधकों को तुरंत रिहा कर दे। रुबियो ने एक्स पर व्हाइट हाउस की पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति एकदम स्पष्ट थे। हमास को अब सभी बंधकों को रिहा करना होगा!’ अमेरिकी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी बंधकों की रिहाई को लेकर काफी अहम मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि यूएस अब इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। इससे पहले, इजरायल ने पुष्टि कर दी कि गाजा पट्टी में संघर्षविराम के तहत हमास की ओर से रिहा किए गए 3 इजरायली बंधक उनकी सेना को मिल गए हैं। अब इजरायल को भी दर्जनों फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करना है। हमास ने तीनों बंधकों को शनिवार को गाजा में रेड क्रॉस को सौंप दिया। रिहा हुए बंधकों को मेडिकल के लिए ले जाया जाएगा और 16 महीने की कैद के बाद उनके परिवार से मिलाया जाएगा। जिन बंधकों को हमास की ओर से रिहा किया गया उनके नाम एली शरबी, ओहद बेन अमी और ओर लेवी हैं। इन सभी को 7 अक्टूबर 2023 को हमास की ओर से किए गए हमले में बंधक बना लिया गया था। 183 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा इजरायल इजरायल रिहा किए गए बंधकों के बदले में 183 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। रेड क्रॉस को सौंपने से पहले हमास के लड़ाके तीनों बंधकों को सैकड़ों लोगों की भीड़ के सामने ले गए और एक-एक करके तीनों को बोलने के लिए माइक दिया गया। तीनों ने सार्वजनिक रूप से अपना बयान दिया। बंधकों को सार्वजनिक रूप से बयान दिलवाने के संबंध में इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘हम शनिवार को हुए चौंकाने वाले दृश्यों को स्वीकार नहीं करेंगे।’ हालांकि, बयान में किसी दंडात्मक उपाय की बात नहीं की गई है। यह पहली बार है, जब युद्ध विराम के इस चरण के दौरान मुक्त किये गए बंधकों को उनकी रिहाई के दौरान सार्वजनिक रूप से बयान देने के लिए कहा गया। इजरायल और हमास के बीच 19 जनवरी को संघर्षविराम शुरू होने के बाद से यह बंधकों के बदले कैदियों की 5वीं अदला-बदली है।

बेटी के अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे श्रद्धा वाकर के पिता विकास वाकर का निधन

नई दिल्ली श्रद्धा वाकर के पिता विकास वाकर का मुंबई में निधन को गया है। जानकारी के मुताबिक उन्हें दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद मुंबई के वसई में उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि विकास वाकर बेटी की मौत के बाद काफी उदास रहते थे और उसका अंतिम संस्कार करने के लिए शव के नाम पर बचे टुकड़े पाने का इंतजार कर रहे थे। उनकी बेटी श्रद्धा वाकर की उसी के लिव इन पार्टनर आफताब पूनावाला से बेहरमी से हत्या कर दी थी। इसके बाद उसके शव के कई टुकड़े कर कई दिनों फ्रिंज में बंद रखा था। बाद में उन टुकड़ों को महरौली में किस्तों में ठिकाने लगाने लगा। आफताब फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है लेकिन श्रद्धा के शव के टुकड़े अब भी पुलिस के कब्जे में हैं। उसके पिता को बेटी का अंतिम संस्कार करने के लिए शव के नाम पर बचे कुछ टुकड़े भी नसीब नहीं हुए। श्रद्धा वाकर मर्डर केस का खुलासा 12 नवंबर 2022 को उस वक्त हुआ था जब आफताब महरौली में लाश के टुकड़े ठिकाने लगाते हुए पकड़ा गया था। बाद में पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने तो श्रद्धा को 18 मई को मार डाला था। इसके बाद शव को कई टुकड़ों में काट धीरे-धीरे उन्हें महरौली के जंगल में फेंकता रहा। वक्त बहुत ज्यादा बीत चुका था, ऐसे में पुलिस को भी श्रद्दा के शव के नाम पर कुछ टुकड़े ही मिले जिनका डीएनए टेस्ट करने पर साबित हुआ कि यह श्रद्धा के हैं। श्रद्धा के पिता को ही सबसे पहले नवंबर में पता चला था कि उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं रही।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ऊपर हमला करने वालों की मांगी जानकारी, सीक्रेट सर्विस से मांगा जवाब, कोई बहाना नहीं

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीक्रेट सर्विस को एक खास आदेश जारी किया है। इस आदेश में उन्होंने अपने ऊपर हमला करने वालों की जानकारी मांगी है। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उन दो लोगों के बारे में पूरी जानकारी चाहिए, जिन्होंने पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें मारने का प्रयास किया था। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक ट्रंप ने बताया कि मैं दोनों हत्यारों के बारे में पता लगाना चाहता हूं। एक आदमी के पास छह सेलफोन क्यों थे और दूसरे आदमी के पास विदेशी ऐप्स क्यों थे? ट्रंप का कहना है कि वह जानने के हकदार हैं। बाइडेन पर यह बोले डोनाल्ड ट्रंप ने कहाकि जो बाइडेन के चलते मैं अब और पीछे नहीं हटूंगा। मैं जानने का हकदार हूं। और उन्होंने इसे काफी समय तक छुपाए रखा। बता दें कि ट्रंप पर पहली हत्या का प्रयास 13 जुलाई, 2024 को पेंसिल्वेनिया में उनके अभियान भाषण के दौरान हुआ। ट्रंप को कान में गोली मारी गई थी। इस हमले में एक दर्शक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने बताया था कि उन्होंने एक संदिग्ध 20 वर्षीय थॉमस मैथ्यू क्रुक्स को मार डाला है, जिसने मंच की ओर कई गोलियां चलाई थीं। वह उस मंच से लगभग 100 मीटर दूर एक औद्योगिक भवन की छत पर छुपा हुआ था। दो बार हुआ था हमला ट्रंप की हत्या का दूसरा प्रयास 15 सितंबर, 2024 को फ्लोरिडा में उनके गोल्फ क्लब के पास हुआ। कानूनी एजेंसियों के मुताबिक, सीक्रेट सर्विस अधिकारियों ने हमलावर पर गोलियां चलाईं, जो झाड़ियों में छिपा हुआ था। उस व्यक्ति ने कार में बैठकर भागने की कोशिश की, लेकिन उसे हिरासत में ले लिया गया। जिस स्थान पर उसे देखा गया था, वहां दूरबीन लगी एक एके-47 असॉल्ट राइफल, दो बैकपैक और एक गोप्रो एक्शन कैमरा मिला था। अक्टूबर 2024 में, ट्रंप पर जुलाई में हत्या के प्रयास की जांच करने वाले एक स्वतंत्र आयोग ने यूएस सीक्रेट सर्विस के काम में कई विफलताएं पाईं। इसके चलते हमलों को रोका नहीं जा सका।

अमेरिका के अलास्का में विमान दुर्घटना में मारे गए सभी 10 लोगों के शव बरामद कर लिए गए, अधिकारियों ने दी जानकारी

वाशिंगटन अमेरिका के अलास्का में विमान दुर्घटना में मारे गए सभी 10 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो कर बेरिंग सागर में गिर गया था। नोम वालंटियर दमकल विभाग ने शनिवार दोपहर अपने फेसबुक पेज पर यह जानकारी दी। क्षेत्र में बर्फीली आंधी आने से पहले ही बचाव दलों ने शवों को निकालने के प्रयास शुरू कर दिए थे। दमकल विभाग ने दोपहर करीब तीन बजे सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “बेरिंग विमान हादसे में मारे गए सभी 10 लोगों के शव निकाल लिए गए हैं।” विभाग ने कहा कि विमान को निकालने के प्रयास जारी हैं। अलास्का के नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार ‘बेरिंग एयर’ के विमान ने गुरुवार दोपहर को उनालाक्लीट से उड़ान भरी थी और यह नोम जा रहा था। विमान का मलबा शुक्रवार को बर्फ से ढके समुद्र में मिला था। ‘बेरिंग एयर’ के संचालन निदेशक डेविड ओल्सन ने बताया था कि ‘सेसना कारवां’ ने अपराह्न दो बजकर 37 मिनट पर उनालाक्लीट से उड़ान भरी थी और एक घंटे से भी कम समय बाद उसका संपर्क टूट गया था। ‘नेशनल वेदर सर्विस’ के अनुसार उस समय हल्का हिमपात हो रहा था और कोहरा छाया हुआ था, साथ ही तापमान शून्य से नीचे 8.3 डिग्री सेल्सियस था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के मुताबिक इस विमान में कुल 10 लोग ही सवार हो सकते थे। रडार के फरेंसिक डेटा से पता चला कि विमान की रफ्तार अचानक बढ़ गई थी और यह ऊपर की ओर जाने लगा था। विमान दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया। विमान का मलबा आखिरी लोकेशन के जरिए खोजा गया। इसके बाद समुद्री बर्फ में शवों को तलाशने का अभियान चलाया गया। विमान में एक इमर्जेंसी ट्रांसमीटर भी था। किसी भी गड़बड़ी के दौरान यह ट्रांसमीटर सैटलाइट को सिग्नल भेज सकता था। हालांकि ट्रांसमीटर से किसी तरह का सिग्नल भी नहीं भेजा गया था।

विधानसभा चुनाव 2025: आतिशी ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, दिल्ली विधानसभा भंग, अधिसूचना जारी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। राजधानी में 27 साल बाद बीजेपी ने वापसी की है। पार्टी की हार के बाद आप नेता आतिशी ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उप राज्यपाल वीके सक्सेना का अपना रिजाइन सौंपा है। वहीं LG ने दिल्ली विधानसभा को भंग कर दिया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। अब दिल्ली के नए सदन का गठन किया जाएगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वहीं आम आदमी पार्टी को करारी हार मिली है। जिसके बाद आज रविवार को सीएम आतिशी मार्लेना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सुबह 11 बजे राजभवन पहुंचकर उपराज्यपाल से मुलाकात की और अपना त्यागपत्र सौंपा। दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी 70 सीटों में से 22 सीट ही जीत सकी। वहीं 27 साल के बाद भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली की सत्ता में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की। बीजेपी ने दो तिहाई बहुमत हासिल किया है। इस चुनाव में BJP ने 70 में से 48 सीटों पर अपना परचम लहराया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज समेत कई बड़े चेहरों को हार का मुंह देखना पड़ा। केजरीवाल को भाजपा के प्रवेश वर्मा से नई दिल्ली विधानसभा सीट पर 4000 से ज्यादा वोटों के अंतर से मात दी है। हालांकि आतिशी मार्लेना अपनी सीट बचाने में कामयाब रहीं।

द‍िल्‍ली व‍िधानसभा :16 सीटों पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को ‘हरा’ दिया, जी हां! यकीन न हो तो आंकड़े देख लीजिए

नई द‍िल्‍ली  दिल्ली की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। पिछले 3 विधानसभा चुनावों (Delhi Assembly Election Result 2025 ) से दिल्लीवालों ने जिस पार्टी को अपने दिल में जगह दी थी, उसे आज सत्ता से बाहर कर दिया है। दिल्ली में आखिरकार ‘मोदी मैजिक’ चल ही गया। लेकिन ‘असली खेल’ किया फिर से 0 पर आउट होने वाली कांग्रेस ने। चुनाव आयोग के मुताबिक दिल्ली की 70 सीटों में से 48 पर बीजेपी आगे है या जीत चुकी है। जबकि आम आदमी पार्टी के खाते में महज 22 सीट ही रही। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। मगर कम से कम 16 सीटें ऐसी रहीं, जिस पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) को ‘हरा’ दिया। जी हां! यकीन न हो तो आंकड़े देख लीजिए। सबसे पहले बात वोट शेयर की साल 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 53 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। जबकि बीजेपी का वोट प्रतिशत 38.51% रहा। इस बार की बात करें तो ‘आप’ को 43.61% वोट मिले हैं जबकि बीजेपी 45.88% वोट शेयर पहले नंबर पर काबिज हो गई। कहने को यह अंतर महज 2.27 फीसदी का ही है, लेकिन दिल्ली के सिंहासन पर काबिज होने के लिए यह अंतर काफी बड़ा रहा। आखिर कैसे कांग्रेस ने पलटा गेम आखिर यह ढाई फीसदी वोट फिर कहां गए? जवाब साफ है-कांग्रेस। यूं तो इस बार भी कांग्रेस का वोट प्रतिशत 10 फीसदी से कम ही रहा, लेकिन खुद को ‘वोट कटवा’ पार्टी साबित करने में इस बार वह कामयाब रही। पिछली बार पहले और दूसरे नंबर की पार्टी के बीच अंतर बड़ा था। इसलिए कांग्रेस को कितने वोट मिले, इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। मगर इस बार अलग थी। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस को 6.39% वोट मिले और जीत-हार का अंतर 2.27%। इन सीटों पर भारी पड़ी कांग्रेस से ‘हाथ’ छुड़ाना   क्रम सीट बीजेपी को वोट म‍िले AAP को वोट म‍िले कांग्रेस को वोट जीत का अंतर 1 नई द‍िल्‍ली 30,028 25,999 4,568 4,089 2 जंगपुरा 38,859 38,184 7,350 675 3 त्र‍िलोकपुरी 58,217 57,824 6,147 392 4 ग्रेटर कैलाश 49,594 46,406 6,711 3,188 5 छतरपुर 80,469 74,230 6601 6239 6 मादीपुर 52,019 41,120 17,958 10,899 7 मालवीय नगर 39,564 37,433 6,770 2,131 8 नांगलोई जाट 75,272 49,021 32,028 26,251 9 राजेंद्र नगर 46,671 45,440 4,015 1,231 10 संगम विहार 54,049 53,705 15,863 344 11 तिमारपुर 53,551 52,290 8,101 1,261 12 बिजवासन 64,951 53,675 9,409 11,276 13 महरौली 48,349 46,567 9,338 1,782 केजरीवाल-सिसोदिया समेत बड़े नेताओं पर भारी पड़ी कांग्रेस अरविंद केजरीवाल 3 बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। लगातार तीन बार नई दिल्ली सीट से जीते। मगर इस बार बीजेपी के प्रवेश साहिब सिंह ने 4000 वोटों से हरा दिया। रोचक बात है कि तीसरे नंबर पर रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे व पूर्व कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित 4500 से ज्यादा वोट मिले। इसी तरह ‘आप’ में नंबर-2 मनीष सिसोदिया जंगपुरा से 675 वोटों से हारे। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के फरहाद सूरी को 7000 से ज्यादा वोट मिले। सोमनाथ भारती की हार में भी कांग्रेस का ही हाथ रहा। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और EVM पर सवाल उठाने वाले सौरभ भारद्वाज 3100 वोटों से सीट गंवा बैठे। इनकी हार में भी एक चीज कॉमन रही-कांग्रेस। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के गर्वित सांघवी ने 6700 से ज्यादा वोट हासिल किए। ऐसी करीब 17 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने फर्क पैदा कर दिया। मतलब अगर दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन होता तो शायद तस्वीर कुछ और हो सकती थी।   तो मिल जाता ‘आप’ को बहुमत! इसी तरह द्वारका सीट पर बीजेपी को 8671 वोट मिले जबकि कांग्रेस ने यहां 6630 वोट काटे। हरी नगर सीट पर बीजेपी को 6632 वोटों से जीत मिली जबकि कांग्रेस यहां 4252 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रही। रोचक बात यह रही कि निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमारी ढिल्लों ने 3398 वोट हासिल किए। मुंडका सीट पर भी कांग्रेस ने जमकर वोट काटे।

आम आदमी पार्टी के ‘अजेय’ होने का दंभ बना हार का कारण, फ्रीबीज पॉलिटिक्स में बीजेपी ने केजरीवाल को दे दी पटखनी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की आंधी में आम आदमी पार्टी हवा हो गई। वो आम आदमी पार्टी जो लगातार दो चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन इस बार बीजेपी की कुछ ऐसी हवा चली कि AAP के बड़े-बड़े शूरमा उखड़ गए। खुद अरविंद केजरीवाल चुनाव हार गए। मनीष सिसोदिया चुनाव हार गए। AAP के तमाम दिग्गज चुनाव हार गए। न फ्री का वादा काम आया, न मुफ्त की रेवड़ियां काम आईं और न ही ‘कट्टर ईमानदार’ अरविंद केजरीवाल का चेहरा काम आया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कभी 70 में से 67 और 62 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी को इस बार बुरी शिकस्त का सामना करना पड़ा? आइए देखते हैं AAP की हार के 7 बड़े कारण क्या रहे। 1- एंटी-इन्कंबेंसी आम आदमी पार्टी ने अपने जन्म के साथ ही दिल्ली के लोगों के दिल पर राज किया। 2013 के अपने पहले चुनाव में वह बीजेपी के बाद दूसरे नंबर पर रही थी लेकिन त्रिशंकु विधानसभा में वह उस कांग्रेस से हाथ मिला ली, जिसके कथित भ्रष्टाचार के विरोध से राजनीति शुरू की थी। खैर, कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली आम आदमी पार्टी की वो सरकार 2 महीने भी नहीं टिकी। उसके बाद 2015 में 70 में से 67 और 2020 में 70 में से 62 सीटों पर जीत के साथ इतिहास रचा। पार्टी लगातार 10 सालों तक दिल्ली की सत्ता में रही। लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करना वैसे भी बहुत आसान नहीं होता क्योंकि सत्ताविरोधी रुझान यानी एंटी-इन्कंबेंसी का खतरा बना रहता है। आम आदमी पार्टी को भी इस फैक्टर का नुकसान उठाना पड़ा। 2- करप्शन का दाग अब इसे विडंबना ही कहेंगे कि जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से जन्म लिया, सत्ता में आने पर वह भी अपने दामन को करप्शन की कालिख से नहीं बचा पाई। खुद को कट्टर ईमानदार कहने वाले अरविंद केजरीवाल को करप्शन का दाग भारी पड़ा। भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें खुद जेल जाना पड़ा। मनीष सिसोदिया को जेल जाना पड़ा। सत्येंद्र जैन को जेल जाना पड़ा। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी लगातार खुद के कट्टर ईमानदार होने की दुहाई देते रहे लेकिन दिल्ली की जनता ने उनको नकार दिया। अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के शिल्पी अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली की सत्ता में आए तो एक नई तरह की साफ-सुथरी, ईमानदार और वैकल्पिक राजनीति का वादा किया था। लेकिन किया क्या? सीएजी की रिपोर्ट को विधानसभा की पटल तक पर नहीं रखा। कभी जिस दिल्ली के एक मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना जैन हवाला कांड में अपना नाम लिए जाने पर ही पद से इस्तीफा दे दिया था, उसी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल आरोप तो छोड़िए, जेल में जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं दिया। लालू प्रसाद यादव से लेकर हेमंत सोरेन तक तमाम मुख्यमंत्रियों ने जेल जाने की नौबत आने पर नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन ईमानदारी की राजनीति के कथित चैंपियन केजरीवाल ने तो जेल से सरकार चलाने की ऐसी जिद दिखाई जो भारत की राजनीति में कभी नहीं हुआ। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इस्तीफा जरूर दिया लेकिन शायद तबतक बहुत देर हो चुकी थी। अगर जेल जाते ही इस्तीफा दिए होते तो 3- मुफ्त बिजली-पानी मॉडल से आगे नहीं बढ़ पाना अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने पहली बार सत्ता में आने के बाद मुफ्त-बिजली पानी वाला मॉडल पेश किया। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की दशा में भी सुधार का दावा किया। सुधार हुए भी, लेकिन उतने भी नहीं जितना आम आदमी पार्टी ढिंढोरा पीटती है। इस मॉडल की बदौलत दो बार सरकार भी बनाई लेकिन पार्टी इससे आगे नहीं बढ़ पाई। हर नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का चलन चलाया। सड़कें बदहाल रहीं। जगह-जगह गंदगी का अंबार रहा। निगम चुनाव में जीत के बाद साफ-सफाई की जिम्मेदारी से भाग भी नहीं सकते थे। यमुना को साफ करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन पानी आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं रहा। ये सब चीजें आम आदमी पार्टी के खिलाफ गईं। 4- फ्रीबीज पॉलिटिक्स में केजरीवाल को मिला तगड़ा कंपटिशन दूसरी तरफ, विरोधियों ने भी केजरीवाल के खिलाफ उसी हथियार का इस्तेमाल किया जो उनकी ताकत थी। ये हथियार था मुफ्त वाली योजनाओं का जिन्हें राजनीति में फ्रीबीज या मुफ्त की रेवड़ियां भी कहा जाता है। केजरीवाल की फ्रीबीज पॉलिटिक्स को मुफ्त की रेवड़ियां बताकर और देश के लिए घातक बताकर खारिज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी भी इसी होड़ में कूद गए। बीजेपी ने भी महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये, त्योहारों पर मुफ्त सिलिंडर, बुजुर्गों के लिए बढ़ी हुई पेंशन, मुफ्त इलाज जैसे लोकलुभावन वादे किए। साथ में ये भी कि आम आदमी पार्टी की सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं मुफ्त वाली योजनाओं को भी जारी रखेंगे। इस चुनाव से पहले तक बीजेपी दिल्ली में मुफ्त की रेवड़ियों का विरोध किया था लेकिन इस बार उसने केजरीवाल के ही हथियार से केजरीवाल को मात दे दी। ये बात दीगर है कि फ्रीबीज पॉलिटिक्स से दिल्ली की इकॉनमी का कचूमर निकलता है, सत्ता तो आ ही गई। 5- केंद्रीय बजट दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के कारणों में केंद्रीय बजट को भी गिना ही जाएगा। चुनाव से ठीक पहले जिस तरह बजट में मध्यम वर्ग को बड़ी सौगात दी गई, 12 लाख रुपये तक की आमदनी और वेतनभोगियों के मामले में तो 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को इनकम टैक्स से मुक्त करने का जो ऐलान हुआ, उसका सीधा लाभ बीजेपी को दिल्ली चुनाव में मिला है। 6-अरविंद केजरीवाल की गैर-जिम्मेदार राजनीति अरविंद केजरीवाल ने सियासत में कदम रखते ही अलग तरह की राजनीति के नाम पर बिना किसी सबूत या आधार के बाकी सभी पार्टियों और उनके नेताओं को थोक के भाव में चोर-बेईमान का सर्टिफिकेट बांटना शुरू किया था। ये सिलसिला तब खत्म हुआ जब उन्हें नितिन गडकरी, कपिल सिब्बल, अवतार सिंह भड़ाना जैसे तमाम नेताओं से अदालतों में माफी मांगनी पड़ी। खैर इन सबका उन्हें राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा, बस ये फर्क पड़ा कि हर विरोधी नेता को चोर बताने की उनकी आदत छूट गई। लेकिन इस बार के दिल्ली … Read more

बजट में मोदी सरकार का टैक्स छूट वाला दांव दिल्ली चुनाव में मास्टरस्ट्रोक हुआ साबित

नई दिल्ली  दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का रिजल्ट लगभग आ चुका है। बीजेपी दिल्ली में सरकार बनाती हुई साफ दिखाई दे रही है। इसकी सिर्फ औपचारिकता ही बाकी है। आम आदमी पार्टी की करारी हार हो चुकी है। बीजेपी राष्ट्रीय राजधानी में 27 साल बाद सरकार बनाएगी। 8वें वेतन आयोग और 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री करने की घोषणा, ये दो ऐसे कारण रहे जिनसे बीजेपी को फायदा हुआ। दिल्ली में ऐसे काफी लोग हैं जिनकी सैलरी 12 लाख रुपये सालाना है। इतनी सैलरी इनकम टैक्स फ्री करने से ऐसे लोगों को फायदा होगा। वहीं दिल्ली में रहने वाले केंद्र सरकार के रिटायर कर्मचारियों की संख्या भी काफी है। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इन दो कारणों से भी दिल्ली का मिडिल क्लास वोटर बीजेपी के पक्ष में जाता नजर आया है। 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की है। इससे करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलेगी। 8वां वेतन आयोग लागू होने से न केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि महंगाई भत्ता (डीए) भी बढ़ेगा। इसके अलावा 8वें वेतन आयोग से करीब 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में भी बढ़ोतरी होगी। केंद्रीय कर्मचारियों की दिल्ली में अच्छी खासी संख्या है। वहीं यहां काफी रिटायर्ड कर्मचारी भी रहते हैं। ऐसे में उन्हें बीजेपी में एक उम्मीद दिखाई दी और इनका अधिकतर वोट बीजेपी के पक्ष में जाता दिखाई दिया। इनकम टैक्स में कटौती इस महीने एक फरवरी को केंद्रीय बजट आया था। इसमें सरकार ने सालाना 12 लाख रुपये तक की सैलरी वालों का इनकम टैक्स जीरो कर दिया है। दिल्ली में ऐसे लोगों की संख्या काफी है जिनकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपये तक है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने इनकम टैक्स की नई व्यवस्था को भी संशोधित किया है। इसके स्लैब में बदलाव होने से लोगों को अब कम इनकम टैक्स चुकाना होगा। इनकम टैक्स में हुए इन बदलावों को देखते हुए हाई सैलरीड क्लास वर्ग भी बीजेपी के पक्ष में नजर आया। इसके अलावा इनकम टैक्स में राहत से मिडिल क्लास भी काफी खुश नजर आया और उनसे भी बीजेपी की जीत में अपना योगदान दिया।

बेंगलुरु में पब और नाइटलाइफ क्षेत्र में अभूतपूर्व संकट, पिछले एक साल में 40 से अधिक पब बंद हो गए

बेंगलुरु  कर्नाटक का आईटी हब बेंगलुरु, जहां देशभर से आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स रहते हैं। यह वह शहर है जहां पांच दिन दफ्तरों पर भीड़ रहती है और वीकेंड्स पर बार और पब फुल रहते हैं। सुबह तक इतनी शराब पी जाती है कि बार-पब्स का पूरे हफ्ते की आमदनी दो दिनों में होती है। लेकिन अब यहां लग रहा है कि इंजीनियर्स में पार्टी का बुखार खत्म हो गया है। शहर का पब और नाइटलाइफ क्षेत्र एक अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है, क्योंकि पिछले एक साल में 40 से अधिक पब बंद हो गए हैं। उद्योग जगत के लिकर लीडर्स में अब टेंशन बढ़ गई है। उनका मानना है कि पब्स के बंद होने के पीछे बढ़ती संचालन लागत, फुट-फॉल में 0.20-25 प्रतिशत की गिरावट और सरकार के लगाए गए मूल्य वृद्धि है। बेंगलुरु में 2000 से ज्यादा पब पब मालिक तत्काल कर्नाटक राज्य सरकार से नीतिगत सुधारों, वित्तीय सहायता और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के लिए आह्वान कर रहे हैं ताकि उनके व्यवसाय को बनाए रखने में मदद मिल सके। बेंगलुरु में 2000 से ज्यादा पब और शराब बनाने के कारखाने हैं। पिछले दिनों से कोरमंगला जैसे क्षेत्रों में कुछ सबसे गंभीर प्रभाव दिख रहे हैं। जहां पिछले साल कई पब बंद हो गए।  रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) बेंगलुरु चैप्टर के सचिव अनंत नारायण ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार बहुत जरूरी राहत नहीं देती, तब तक बंद होने की दर बढ़ सकती है। पब के बजाय हो रहीं हाउस पार्टियां? पब्स में घटती भीड़ के पीछे कुछ लोग अन्य कारण भी बताते हैं। लोगों में सोशल बिहेवियर चेंज देखने को मिल रहा है। अब वे बाहर जाकर पार्टी करने की बजाए घर पर पार्टीज करना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि पबों में कम ग्राहक आए हैं। इसके अतिरिक्त, कॉर्पोरेट खर्च में कमी और नौकरी की असुरक्षा ने रात्रि जीवन की घटती मांग में योगदान दिया है। यह क्षेत्र, जिसका मूल्य 600 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये के बीच है, भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है, जिसमें अचल संपत्ति और वेतन सहित परिचालन लागत सालाना लगभग 10 प्रतिशत बढ़ रही है, जबकि मुनाफे में गिरावट जारी है। बढ़ीं चुनौतियां चिन लंग रेस्टो बार चेन के मालिक प्रज्वल लोकेश ने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों की चुनौतियों और भयंकर प्रतिस्पर्धा ने स्थिति को और बढ़ा दिया है। जबकि कर्मचारियों को कुशल बनाना और रुझानों के साथ बने रहना महत्वपूर्ण है। इस मार्केट में कभी छोटे प्रतिष्ठानों का वर्चस्व था, अब मुख्य रूप से छूट-उन्मुख मानसिकता से संचालित है, जिससे नए उद्यमों की सफलता की संभावना कम हो जाती है। जटिल है लाइसेंस की प्रक्रिया जटिल और बोझिल लाइसेंस प्रक्रिया एक और महत्वपूर्ण बाधा है। पब मालिकों को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए कम से कम नौ अलग-अलग लाइसेंस प्राप्त करने होते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हाल ही में मूल्य वृद्धि की गई है। बीयर की कीमतों में वृद्धि ने, विशेष रूप से, अतिरिक्त तनाव पैदा कर दिया है, कुछ प्रतिष्ठान अतिरिक्त लागतों का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्नाटक आबकारी आयुक्त आर. वेंकटेश कुमार ने बीयर और भारतीय निर्मित शराब (आईएमएल) पर हाल ही में शुल्क वृद्धि का बचाव किया। उन्होंने कहा, कि वृद्धि मामूली थी और मुख्य रूप से उच्च-स्तरीय उत्पादों को टारगेट किया गया था। उन्होंने कहा कि निचले स्तर के उत्पाद, जो उद्योग के लिए अधिकांश राजस्व उत्पन्न करते हैं, अप्रभावित रहे। यह स्वीकार करते हुए कि मुद्रास्फीति ने कुछ लागतों को बढ़ाया है, उन्होंने समग्र क्षेत्र पर शुल्क वृद्धि के प्रभाव को कम किया।

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