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कृष्णागिरी में 13 साल की छात्रा के साथ रेप, एक महीने बाद हुआ खुलासा, सरकारी स्कूल के तीन शिक्षक गिरफ्तार

कृष्णागिरी तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में 13 साल की स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। स्कूल के ही शिक्षकों ने छात्रा के साथ रेप किया। एक महीने के बाद इस वारदात का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपी शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों शिक्षकों को बुधवार को  POCSO कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों आरोपियों को 15 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एक सरकारी स्कूल में तीन शिक्षकों ने 13 साल की छात्रा का यौन उत्पीड़न किया है। तीनों आरोपियों को बुधवार को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार करने के बाद 15 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार यह अपराध 2 जनवरी को स्कूल के शौचालय के अंदर हुआ। न्यूज एजेंसी एएनआई ने कृष्णागिरी कलेक्टर सी दिनेश कुमार के हवाले से बताया, “कृष्णागिरी जिले के एक सरकारी मिडिल स्कूल में तीन शिक्षकों ने 13 वर्षीय छात्रा का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया। तीनों शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने निलंबित कर दिया है और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपी शिक्षकों को 15 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।” मामले से अवगत एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना कथित अपराध के एक महीने बाद 2 फरवरी को सामने आई, जब छात्रा के माता-पिता ने प्रधानाध्यापक के इस अपराध के बारे में सूचित किया। सूचना मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और चाइल्ड हेल्पलाइन ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। उन्होंने कहा, “पीड़िता के माता-पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर तीनों आरोपी शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और उन्हें पोक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।” आपको बता दें कि पिछले साल के अंत में तमिलनाडु में कोट्टूरपुरम पुलिस ने अन्ना विश्वविद्यालय मामले में एकमात्र आरोपी बिरयानी विक्रेता 37 वर्षीय ज्ञानसेकरन को गिरफ्तार किया था। उसने विश्वविद्यालय में जबरन घुसकर कथित तौर पर दूसरे वर्ष की छात्रा के साथ मारपीट की थी। पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में महिला ने कहा कि वह 23 दिसंबर को एक इमारत के पीछे अपने पुरुष मित्र के साथ घूम रही थी, तभी आरोपी ने उन्हें धमकाया। उसने पहले उसके पुरुष मित्र, तीसरे वर्ष के छात्र के साथ मारपीट की और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया। उसने अगले दिन कोट्टूरपुरम के महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इस अपराध ने राज्य में बड़े पैमाने पर राजनीतिक हंगामा मचा दिया। कृष्णागिरी के कलेक्टर ने क्या कहा? कृष्णागिरी के कलेक्टर सी दिनेश कुमार ने कहा, “कृष्णागिरी जिले के एक सरकारी मिडिल स्कूल में तीन शिक्षकों ने 13 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तीनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी शिक्षकों को 15 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एक महीने बाद वारदात का हुआ खुलासा पुलिस के मुताबिक, 2 जनवरी को स्कूल के शौचालय में छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सीनियर पुलिस अफसर ने बताया कि यह घटना 2 फरवरी को प्रकाश में आई। जब छात्रा के माता-पिता ने स्कूल के प्रिंसिपल को इस घटना की जानकारी दी, तब जाकर एक महीने बाद वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस ने जानकारी मिलने ही एक्शन लेना शुरू कर दिया। डीईओ ने मामले में लिया एक्शन सूचना मिलने के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और चाइल्ड हेल्पलाइन ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। चाइल्ड हेल्पलाइन के अफसरों के मुताबिक, पीड़ित के माता-पिता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, तीन आरोपी शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है। इन तीनों शिक्षकों को पोक्सो अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।  

12 फरवरी को मथुरा में अलंकरण समारोह आयोजित, जिसमे वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा

जम्मू भारतीय सेना की उत्तरी कमान 12 फरवरी को उत्तर प्रदेश के मथुरा सैन्य स्टेशन में एक प्रतिष्ठित अलंकरण समारोह आयोजित करेगी, जिसमें कमान के अधिकारियों और सैनिकों को उनके कर्तव्य से परे बहादुरी के कार्यों और राष्ट्र के लिए विशिष्ट सेवा के लिए वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि उत्तरी कमान इस समारोह में अपने बहादुर और असाधारण सैनिकों और इकाइयों को श्रद्धांजलि देगी। उन्होंने कहा कि उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल एम वी सुचींद्र कुमार उत्तरी कमान के अधिकारियों और सैनिकों को उनके कर्तव्य से परे बहादुरी के कार्यों और राष्ट्र के लिए विशिष्ट सेवा के लिए वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित करेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि विभिन्न इकाइयों को उनके असाधारण पेशेवर कार्यों और अद्वितीय उपलब्धियों के सम्मान में जीओसी-इन-सी यूनिट प्रशस्ति से भी सम्मानित किया जाएगा। उत्तरी कमान और इकाइयों के सैनिकों ने असाधारण साहस का परिचय दिया है और उन्होंने अक्सर अपनी मातृभूमि की संप्रभुता और रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगायी है। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘उनके उल्लेखनीय कार्य और बलिदान जुझारूपन, समर्पण और प्रतिबद्धता के उच्चतम मानकों का उदाहरण हैं, जो भारतीय सेना के चरित्र को परिभाषित करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस समारोह के माध्यम से सेना न केवल अपने कर्मियों की व्यक्तिगत और सामूहिक उपलब्धियों का जश्न मनाती है, बल्कि वफादारी, निस्वार्थ सेवा और देशभक्ति के मूल्यों को भी रेखांकित करती है, जो इसके मिशन का अभिन्न अंग हैं। प्रवक्ता के अनुसार, ‘‘यह अलंकरण समारोह राष्ट्र की सुरक्षा और स्वतंत्रता को बनाए रखने में इन नायकों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाएगा, जो भविष्य की पीढ़ियों को उत्कृष्टता और सेवा की विरासत को जारी रखने के लिए प्रेरित करेगा।’’ देश की सबसे पुरानी सैन्य छावनियों में से एक मथुरा सैन्य छावनी को इसकी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के कारण इस समारोह के लिए चुना गया है। समारोह में बड़ी संख्या में सैन्यकर्मी, गणमान्य नागरिक और पुरस्कार विजेताओं के गौरवशाली परिजन शामिल होंगे।  

श्रद्धा वालकर मर्डर केस के दो साल… पिता को अंतिम संस्कार का है इंतजार

नई दिल्ली आपको श्रद्धा बाल्कर हत्याकांड तो याद होगा। किस तरह से एक लड़की को प्यार के जाल में फंसाया गया और फिर कर दी गई निर्मम हत्या। इस हत्याकांड के बाद दिल्ली में मानों हड़कंप सा मच गया। लेकिन श्रद्धा के पिता को आज भी बेटी के अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। उनका आज भा यही सवाल है कि आखिर कब मिलेगा मेरी बेटी को इंसाफ…. इसी पूरे मामले में आज हम आपको इस खबर का पूरा विशलेषण करने जा रहे हैं। छोटे से बाक्स में बंद है श्रद्धा का शव दिल्ली में एक पुलिस थाने के मालखाने में एक छोटा सा बक्सा रखा है, जिसमें बंद है श्रद्धा वॉल्कर। जिसे आज भी अपने अंतिम संस्कार का इंतजार है। ये वही श्रद्धा वॉल्कर है, जिसे उसके प्रेमी ने मौत की नींद सुला दिया था और लाश के टुकड़ों को कई दिनों तक फ्रीज में बंद रखा था। दो साल पूरे होने को हैं इस मुकदमें को शुरू हुए करीब दो साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन अब भी इस केस हर दिन सुनवाई का इंतजार था। अब जाकर अदालत ने फैसला किया है कि मार्च के महीने से अब हर दिन इस केस की सुनवाई होगी। हालांकि इस केस में अभी तक बहुत सी कार्रवाई अधूरी है। महरौली थाने का है पूरा मामला महरौली थाने से लगभग 4 किलोमीटर दूरी पर मौजूद है साकेत कोर्ट। 1 जून 2023 यानी लगभग पिछले पौने दो साल से इसी कोर्ट में श्रद्धा केस की सुनवाई लंबित है। इस सुनवाई के दौरान ऐसा कई बार हुआ जब एक छोटे से बक्से में बंद श्रद्धा को महरौली थाने के मालखाने से निकाल कर कोर्ट में पेश किया गया। यह कहना है पिता का श्रद्धा के पिता विकास वॉल्कर को नवंबर 2022 में पहली बार पता चला था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। उनकी बेटी श्रद्धा के इसी दोस्त यानी आफताब पूनावाला ने श्रद्धा का कत्ल करने के बाद लाश के टुकड़ों को महरौली के जंगलों में किस्तों में ठिकाने लगा दिया था। लगभग सवा दो साल से विकास वॉल्कर को पता है कि उनकी बेटी श्रद्धा अब इस दुनिया में नहीं है। श्रद्धा के नाम पर कुछ है तो छोटे से बक्से में बंद उसकी चंद हड्डियां। मगर इस बदकिस्मत बाप की बदनसीबी देखिए कि श्रद्धा तो छोड़िए उसकी लाश के बचे खुचे टुकड़े तक उन्हें अंतिम संस्कार के लिए नहीं सौंपे गए। दो साल काट रहे हैं कोर्ट के चक्कर बीते पौने दो साल से जब जब विकास वॉल्कर साकेत कोर्ट में हाजिर होते हैं, तो बस कभी कभार कोर्ट रूम के अंदर ही उन्हें बक्से में बंद श्रद्धा नजर आ जाती है। न जाने ये कैसा मजाक है जो कानून के नाम पर एक बेबस बाप के साथ किया जा रहा है। जिस बाप की जवान बेटी को पहले ही उससे छीन लिया गया हो, जिसके कत्ल और कत्ल के तरीके की कहानी को सुन कर श्रद्धा को न जानने वाले भी गमजदा हो जाते हों, उसी श्रद्धा के अंतिम संस्कार के लिए पिछले सवा दो साल से उसके बाप को इंतजार कराया जा रहा है।

2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 38 करोड़ से अधिक हो जाएगी, प्रजनन दर 2.5 तक

इस्लामाबाद  कंगाली में डूबा पाकिस्तान तमाम सूचकांकों में पीछे है, लेकिन बच्चा पैदा करने के मामले में यह काफी आगे है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक पाकिस्तान जनसंख्या के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा और दुनिया की तीसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा। ऐसा तब हुआ है जब पिछले तीन दशक के दौरान पाकिस्तान में जन्म दर में बड़ी गिरावट देखी गई है। 3.6 है पाकिस्तान की प्रजनन दर संयुक्त राष्ट्र विश्व प्रजनन रिपोर्ट 2024 के अनुसार, पाकिस्तान की प्रजनन दर साल 2024 में 3.6 पर है, जो एशिया के तमाम देशों से बहुत ज्यादा है। हालांकि, 1994 में पाकिस्तान की अपनी ही प्रजनन दर की तुलना में यह काफी कम हुई है। साल 1994 में पाकिस्तान में प्रति महिला जीवित प्रजनन दर 6 थी। इसका मतलब है कि हर महिला औसतन छह बच्चों को जन्म देती थी। तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनेगा इस गिरावट के बावजूद, अनुमान है कि साल 2050 तक पाकिस्तान अमेरिका, इंडोनेशिया,ब्राजील और रूस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। साल 1947 में पाकिस्तान बनने के समय देश की जनसंख्या 3.1 करोड़ थी, जो 2023 की जनगणना के अनुसार 24.1 करोड़ हो गई है। कितनी हो जाएगी पाकिस्तान की जनसंख्या? संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 38 करोड़ से अधिक हो जाएगी। वहीं, 2054 तक प्रजनन दर में और गिरावट आने की उम्मीद है, जो घटकर 2.5 तक हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान के साथ-साथ इथियोपिया, नाइजीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे मुस्लिम देशों में 2024 में वैश्विक जन्म का 43 प्रतिशत हिस्सा रहा। देश की बढ़ती आबादी ने पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा दिया है। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए देश परिवार नियोजन कार्यक्रमों,गर्भनिरोधक वितरण और ग्रामीण शिक्षा अभियानों समेत विभिन्न उपायों का सहारा ले रहा है। हालांकि, धार्मिक कट्टरता, सांस्कृतिक बाधाएं और शिक्षा तक सीमित पहुंच इसमें बाधा डाल रही है। धार्मिक कट्टरता के चलते परिवार नियोजन उपायों को देश में बुरी नजर से देखा जाता है।

कोल्हापुर में एक मेले का आयोजन हुआ, मेले में दूध से बनी मिठाई ‘खीर’ को ‘प्रसाद’ के रूप में बांटा गया, 250 लाेग पड़े बीमार

मुंबई महाराष्ट्र के कोल्हापुर में प्रसाद खाने से 250 लाेग बीमार पड़ गए. मेले में बंटी खीर खाने के बाद सभी फूड पॉइजनिंग के शिकार हो गए. करीब 50 लाेगों को सुबह से हो रही दस्त, मतली और बुखार की शिकायत होने लगी. अब तक 255 लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है. वहीं 50 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और सभी की हालत सामान्य बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में शिवनकवाड़ी गांव में एक मेले का आयोजन किया गया था. मेले में दूध से बनी मिठाई ‘खीर’ को ‘प्रसाद’ के रूप में बांटा गया था. प्रसाद खाने के बाद सभी लोगों को बुधवार सुबह से ही दस्त, मतली और बुखार की शिकायत होने लगी. मामले को लेकर कुरुंदवाड़ पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में शिरोल के अस्पताल में लगभग 50 लोगों का इलाज चल रहा है और सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है. एक अधिकारी ने दावा करते हुए बताया कि, अधिकांश बीमार लोगों ने मेले में ‘खीर’ खाई थी. हालांकि वहां खाने-पीने के स्टॉल भी थे. फिलहाल अस्पताल में 50 से अधिक लोगों का इलाज चल रहा है. जबकि अन्य को छुट्टी दे दी गई है. अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की स्थिति सामान्य है. जांच के लिए मेले से खाद्य पदार्थों के नमूने फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजे गए हैं. प्रसाद में विषाक्तता थी या नहीं, इसका पता रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. वहीं, इस धटना से आसपास के लोग दहशत में आ गए हैं.

भारत को साल के अंत तक रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली के चौथे स्क्वॉड्रन को प्राप्त होगा

नई दिल्ली भारत इस साल के अंत तक रूसी निर्मित एस-400 वायु रक्षा प्रणाली के चौथे स्क्वॉड्रन को प्राप्त करने वाला है. सूत्रों ने पुष्टि की है कि पांचवां स्क्वॉड्रन 2026 में आने की उम्मीद है. भारत ने पहले ही एस-400 प्रणाली के तीन स्क्वॉड्रन प्राप्त कर लिए हैं. उन्हें विभिन्न स्थानों पर तैनात किया है. भारत ने 2018 में रूस के साथ एस-400 प्रणाली के पांच स्क्वॉड्रन के लिए लगभग ₹35,000 करोड़ के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. यह उन्नत वायु रक्षा प्रणाली भारत के रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. एस-400 की तैनाती के प्रमुख क्षेत्रों में होगी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए एक स्क्वॉड्रन को तैनात किया गया है. पठानकोट क्षेत्र में एक अन्य स्क्वॉड्रन को तैनात किया गया है ताकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब की रक्षा को मजबूत किया जा सके. भारत की पश्चिमी सीमा पर एक स्क्वॉड्रन को तैनात किया गया है ताकि राजस्थान और गुजरात में महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. भारत के पास S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मौजूद होने की वजह से चीन या पाकिस्तान सीमा पार से नापाक हरकत नहीं कर पाएंगे. इस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के बचे हुए यूनिट्स आने के बाद देश की सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी. एस-400 मिसाइल सिस्टम के ऑपरेटर्स की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है. हथियार नहीं महाबली है यह अभेद्य रक्षा कवच एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम हथियार नहीं महाबली है. इसके सामने किसी की भी साजिश नहीं चलती. यह आसमान से घात लगाकर आते हमलावर को पलभर में राख में बदल देता है. एस-400 मिसाइल सिस्टम को दुनिया की सबसे सक्षम मिसाइल प्रणाली माना जाता है. पाकिस्तान और चीन भारत के लिए हमेशा से चुनौती रहे हैं. भारत का इन देशों से युद्ध भी हो चुका है. शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी मिसाइल प्रणाली की देश को जरूरत थी. भारत को एस-400 सिस्टम मिलने से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा. 35 हजार करोड़ रुपए में हुई थी पांच यूनिट की डील भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ ऐसे पांच सिस्टम खरीदने का करार  किया था जिसकी लागत 5 अरब डॉलर यानी 35,000 करोड़ रुपये है. चीन हो या पाकिस्तान S-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम के बल पर भारत न्यूक्लियर मिसाइलों को अपनी जमीन तक पहुंचने से पहले ही हवा में ही ध्वस्त कर देगा. S-400 से भारत चीन-पाकिस्तान की सीमा के अंदर भी नजर रख सकेगा. जंग में भारत S-400 सिस्टम से दुश्मन के लड़ाकू विमानों को उड़ने से पहले निशाना बना लेगा. चाहे चीन के जे-20 फाइटर प्लेन हो या फिर पाकिस्तान के अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान. यह मिसाइल सिस्टम इन सभी विमानों को नष्ट करने की ताकत रखता है.  रूस ने साल 2020-2024 तक भारत को एक-एक कर ये मिसाइल सिस्टम देने की बात कही थी.   एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है ये सिस्टम S-400 एक बार में एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकती है. इसके सबसे खास बात ये है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम को कहीं मूव करना बहुत आसान है क्योंकि इसे 8X8 के ट्रक पर माउंट किया जा सकता है. S-400 को नाटो द्वारा SA-21 Growler लॉन्ग रेंज डिफेंस मिसाइल सिस्टम भी कहा जाता है. माइनस 50 डिग्री से लेकर माइनस 70 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम इस मिसाइल को नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल है. क्योंकि इसकी कोई फिक्स पोजिशन नहीं होती. इसलिए इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर सकते.   S-400 मिसाइल सिस्टम में चार तरह की मिसाइलें होती हैं जिनकी रेंज 40, 100, 200, और 400 किलोमीटर तक होती है.  यह सिस्टम 100 से लेकर 40 हजार फीट तक उड़ने वाले हर टारगेट को पहचान कर नष्ट कर सकता है.  एस-400 मिसाइल सिस्टम (S-400 Air Defence Missile System) का रडार बहुत अत्याधुनिक और ताकतवर है. 600 km की रेंज में 300 टारगेट ट्रैक करने की ताकत इसका रडार 600 किलोमीटर तक की रेंज में करीब 300 टारगेट ट्रैक कर सकता है. यह सिस्टम मिसाइल, एयरक्राफ्ट या फिर ड्रोन से हुए किसी भी तरह के हवाई हमले से निपटने में सक्षम है. शीतयुद्ध के दौरान रूस और अमेरिका में हथियार बनाने की होड़ मची हुई थी. जब रूस अमेरिका जैसी मिसाइल नहीं बना सका तो उसने ऐसे सिस्टम पर काम करना शुरू किया जो इन मिसाइलों को टारगेट पर पहुंचने पर पहले ही खत्म कर दे.  

प्रतिबंधित संगठनों के साथ समझौतों से त्रिपुरा में शांति और समृद्धि आई: शाह

अगरतला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि त्रिपुरा अब देश के अन्य हिस्सों से पूरी तरह से जुड़ गया है, और प्रतिबंधित संगठनों के साथ समझौतों से इस पूर्वोत्तर राज्य में शांति एवं समृद्धि आई है। अगरतला में त्रिपुरा सरकार के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने पिछले सात वर्षों में कांग्रेस एवं वाममोर्चा के कई दशकों के शासन की तुलना में अधिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में प्रतिबंधित संगठनों के साथ हुए तीन समझौतों से त्रिपुरा में शांति और समृद्धि आई है।’’ भाजपा नेता इस बात पर जोर देते रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में त्रिपुरा और देश के बाकी हिस्सों के बीच भूमि, हवाई और रेल संपर्क में बेहतर सुधार हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन 2018 से राज्य में शासन कर रहा है। नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर शाह ने कहा कि त्रिपुरा में माणिक साहा के नेतृत्व वाली सरकार ने बिना किसी भेदभाव के ‘मल्टी-टास्किंग स्टाफ’ (ग्रुप-डी) के 2,806 पदों के लिए भर्ती अभियान पूरा कर लिया है।  

अजमेर को राष्ट्रीय जैन तीर्थ स्थल घोषित करने की दरगाह दीवान की प्रधानमंत्री से अपील

अजमेर दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अजमेर को राष्ट्रीय जैन तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में एक पत्र भी प्रधानमंत्री को भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा कि अजमेर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है, जो न केवल ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह बल्कि जैन धर्म से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों से भी जुड़ा हुआ है। दरगाह दीवान ने यह भी बताया कि अजमेर में आचार्य 108 विद्यासागर महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में जैन समाज इसे विशेष रूप से मनाएगा। उन्होंने इस मांग को जैन धर्म के प्रति सच्चा सम्मान और भारत की समृद्ध धार्मिक धरोहर को और भी प्रतिष्ठित करने वाला कदम बताया। इस बयान के बाद, विष्णु गुप्ता, जिन्होंने दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे की याचिका डाली थी, ने दीवान का समर्थन करते हुए कहा कि कम से कम अब यह माना गया है कि अजमेर जैनियों का तीर्थ स्थल है। यह मामला अब एक नई बहस का कारण बन गया है, जिसमें विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक पहचान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ब्राजील में लगे पशुओं के मेले में भारतीय नस्ल की गाय 40 करोड़ में बिकी, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में बनाई जगह

नई दिल्ली ब्राजील में लगे पशुओं के मेले में भारतीय नस्ल की एक गाय 40 करोड़ रुपये में बिकी है। यह किसी भी गाय के लिए लगी अब तक की सबसे महंगी बोली है, जिसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बना ली है। यह बोली ब्राजील के मिनास गेरैस में लगी, जहां एक ग्राहक ने वियाटिना-19 नाम की गाय के लिए इतनी ऊंची बोली लगा दी। गाय का वजन 1101 किलो पाया गया है, जो इस नस्ल की अन्य गायों की तुलना में लगभग दोगुना है। नेल्लोर नस्ल की यह गाय चर्चा में आ गई है। यह नस्ल भारत के आंध प्रदेश, तेलंगाना में पाई जाती है। वियाटिना-19 नाम की गाय ने पूरी दुनिया में पहचान हासिल की है। इसकी पहचान असाधारण जीन और शारीरिक सुंदर के लिए है। इस गाय ने मिस साउथ अमेरिका का टाइटल भी जीता था। इसके बाद से ही यह गया चर्चा में है। दुनिया के कई देशों में इस गाय की संतानों को लोग लेकर गए हैं ताकि अच्छी नस्ल गायें तैयार की जा सकें। यही वजह है कि जब इस गाय के लिए बोली लगाई गई तो एक ग्राहक ने 40 करोड़ रुपये तक का ऊंचा मूल्य चुकाने का फैसला लिया। नेल्लोर नस्ल की गायों को ऑन्गोल ब्रीड के तौर पर भी जाना जाता है। इन गायों की विशेषता यह है कि ये बेहद कठिन और गर्म परिस्थितियों में भी रह सकती हैं। इनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित नहीं होती। आमतौर पर अत्यधिक गर्म मौमस में गायों का दूध कम हो जाता है। इसके अलावा नेल्लोर नस्ल की गायों की इम्युनिटी भी शानदार होती है और वे बीमारियों से लड़ पाती हैं। यही कारण है कि इनकी दुनिया भर में लोकप्रियता काफी अधिक है। यह गाय बेहद कम देखभाल के साथ भी कठिन परिस्थिति वाले इलाकों में रह लेती हैं। सफेद फर और कंधे पर ऊंचे हंप वाली इन गायों की यह विशेषता है कि ये ऊंटों की तरह लंबे समय तक के लिए खाने और पीने की सामग्री को स्टोर कर लेती हैं। इसके चलते इनका रेगिस्तान, गर्म वाले इलाकों में रहना आसान होता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया में नेल्लोर नस्ल की गायों की मांग बढ़ गई है। कई बार चारे आदि की कमी पर पशुओं के लिए सर्वाइव करना मुश्किल होता है। ऐसे में ये गायें एक अच्छा विकल्प हैं। ये गायें फैट की स्टोरेज कर लेती हैं। इसे कठिन परिस्थितियों में भी उनके स्वास्थ्य पर ज्यादा असर नहीं दिखता। नेल्लोर नस्ल की गाय की इतनी ऊंची बोली लगने से साफ है कि इनकी डिमांड काफी तेज है। इन गायों का बीमारियों से बचाव का प्रतिरोधी तंत्र काफी मजबूत होता है। इसके अलावा उनका गर्म मौसम में रहना बहुत कठिन नहीं है। इन गायों की रोग प्रतिरोधक क्षमता ऐसी होती है कि उन्हें कम से कम मेडिकल केयर की जरूरत रहती है। बता दें कि साहीवाल, नेल्लोर, पेंगनूर और बदरी गाय समेत देश में ऐसी कई नस्लें हैं, जिनकी भारत समेत दुनिया भर के देशों में काफी ज्यादा डिमांड है। नेल्लोर नस्ल की गायों को ब्राजील में भी बड़े पैमाने पर पाला जाता है। वर्ष 1800 से ही ब्राजील में इनका पालन हो रहा है।

भारत यात्रा में देरी पर मस्क ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा था कि टेस्ला के दायित्वों के कारण भारत यात्रा में देरी हुई

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात करने के लिए अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं, साथ ही इस दौरान वे टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क से भी मिल सकते हैं। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति मस्क उन चुनिंदा सीईओ के साथ होने वाली पीएम मोदी की उस मीटिंग का हिस्सा होंगे, जो 13 फरवरी को प्रस्तावित है। अमेरिकी सरकार द्वारा खर्चों में कटौती के लिए बनाए गए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) के चीफ मस्क अपनी इलेक्ट्रिक कारों के लिए समान अवसरों की वकालत कर सकते हैं। वह देश में किफायती सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक का परिचालन शुरू करने के लिए जल्द रेगुलेटरी एप्रूवल की भी मांग कर सकते हैं, साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ सहयोग बढ़ा सकते हैं। हालांकि, अभी पीएम मोदी और मस्क के बीच मुलाकात की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पिछले साल मस्क ने अपनी नियोजित भारत यात्रा को टाल दिया था। इसकी वजह टेस्ला के खराब नतीजे थे। भारत यात्रा में देरी पर मस्क ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा था कि टेस्ला के दायित्वों के कारण भारत यात्रा में देरी हुई है। मैं इस साल के अंत में भारत आऊंगा। इलेक्ट्रिक कार निर्माता ने हाल ही में हुई बैठकों के दौरान अपने “पावरवॉल” के साथ देश की बैटरी स्टोरेज क्षमताओं का समर्थन करने का प्रस्ताव रखा है। मस्क भारत में टेस्ला सप्लाई सिस्टम बनाना चाहते हैं। पिछले साल जून में पीएम मोदी के रिकॉर्ड तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुने जाने के बाद, टेस्ला के सीईओ ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह अपनी कंपनियों का भारत में विस्तार करना चाहते हैं। पीएम मोदी 11-12 फरवरी को पेरिस में एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद द्विपक्षीय यात्रा के लिए अमेरिका जाएंगे।

तिरुपति मंदिर में ड्यूटी के दौरान दूसरे धर्म में झुकाव रखने वाले 18 कर्मचारियों को हटाने का दिया फरमान

अमरावती आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर विश्व विख्यात मंदिर से 18 कर्मचारियों को हटा दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि ये 18 कर्मचारी मंदिर में ड्यूटी के दौरान गैर हिंदू गतिविधियों में भाग लेते थे। ये कर्मचाररी तिरुमाला तिरुपति देवास्थानम (TTD) के उत्सवों में भी भाग लेते थे। टीटीडी के चेयरमैन बी आर नायडू के आदेश के अनुसार इन सभी कर्मचारियों को दो विकल्प दिए गए हैं। यह वे सेवानिवृत्ति ले लें या फिर वे राज्य सरकार के किसी दूसरे विभाग में तबादला ले सकते हैं। अगर ये कर्मचारी ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पिछले साल तिरुपति मंदिर के प्रसाद यानी लड्डू में चर्बी विवाद काफी छाया रहा था। मंदिर की पवित्रता के लिए जरूरी टीटीडी प्रबंधन का कहना है कि यह फैसला मंदिरों और धार्मिक स्थलों की आध्यात्मिक पवित्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। टीटीडी एक स्वतंत्र सरकारी ट्रस्ट है। यह तिरुपति में स्थित तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर का प्रबंधन करता है। यह दुनिया का सबसे अमीर हिंदू मंदिर है। टीटीडी अधिनियम में अब तक तीन बार संशोधन किया जा चुका है। इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि मंदिर बोर्ड और उससे जुड़े संस्थानों में केवल हिंदुओं को ही नौकरी मिलनी चाहिए। 1989 में जारी एक सरकारी आदेश में भी यह अनिवार्य किया गया था कि टीटीडी द्वारा प्रशासित पदों पर नियुक्तियां केवल हिंदुओं तक ही सीमित रहेंगी। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 16 (5) द्वारा समर्थित है। इस अनुच्छेद के अनुसार, धार्मिक या सांप्रदायिक संस्थानों को अपने ही धर्म के सदस्यों को नियुक्त करने की अनुमति है। टीटीडी के फैसले पर खड़े हुए सवाल इसी तरह आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ धार्मिक स्थलों के लिए बनाए गए नियमों में कहा गया है कि धार्मिक संस्थानों के कर्मचारियों को हिंदू धर्म का पालन करना चाहिए। इस कानूनी समर्थन को नवंबर 2023 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मजबूत किया था। हाईकोर्ट ने नियम 3 को बरकरार रखते हुए पुष्टि की थी कि ट्रस्ट बोर्डों को सेवा शर्तों को अनिवार्य करने का अधिकार है, जिसमें यह आवश्यकता भी शामिल है कि कर्मचारी हिंदू धर्म का पालन करें। यह मामला हिंदू धार्मिक प्रथाओं के पालन और धार्मिक संस्थानों में रोजगार की शर्तों से जुड़ा है। टीटीडी के अनुसार इन कर्मचारियों का अन्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल होना मंदिर की आध्यात्मिकता को प्रभावित कर सकता है। सीएम के बयान के बाद हुआ एक्शन इस घटना ने टीटीडी के कामकाज और नीतियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या टीटीडी को कर्मचारियों के निजी धार्मिक विश्वासों में हस्तक्षेप करना चाहिए? क्या यह धार्मिक भेदभाव का एक रूप है? इन सवालों पर बहस जारी है। टीटीडी अपने रुख पर कायम है। उसका कहना है कि वह केवल मंदिर की पवित्रता की रक्षा कर रहा है। यह पूरा मामला ऐसे वक्त पर हुआ है जब पिछले महीने ही आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि तिरुपति बालाजी हिन्दुओं का मंदिर है और इसपर केवल हिन्दुओं का अधिकार है। यहां “ॐ नमो वेंकटेश्वरा” के अलावा कोई मंत्र नहीं चलेगा। कुछ लोगों को मैं चेतावनी देकर कहना चाहता हूं, अभी समझ जाओ वरना अच्छे से समझा दिया जाएगा। चंद्रबाबू नायडू यह बयान तब दिया था जब मंदिर में कन्वर्जन की गतिविधि चलने की बात आई थी। मंदिर के मैनेजमेंट में गैर हिन्दुओं को भी शामिल किया गया था।

दो नाबालिग लड़कियां ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर’ के दौरान बने एक दोस्त से मिलने के लिए घर छोड़कर भागी

नई दिल्ली आजकल ऑनलाइन गेमिंग का चलन बढ़ता जा रहा है और इसके दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के विकासनगर में सामने आया जहां दो नाबालिग लड़कियां ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर’ के दौरान बने एक दोस्त से मिलने के लिए घर छोड़कर भाग गईं। पुलिस की तत्परता और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के सहारे उन्हें पंजाब के राजपुरा में एक बस स्टैंड से सकुशल बरामद किया गया। विकासनगर के एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि उसकी 13 वर्षीय भतीजी और पड़ोस में रहने वाली 17 वर्षीय सहेली अचानक बिना बताए घर से गायब हो गई हैं। परिजनों ने काफी खोजबीन की लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जब इसका खुलासा हुआ तो पता चला कि सारा कांड ऑनलाइन खेल से शुरु हुआ था। जांच में ऐसे हुआ खुलासा गुमशुदा लड़कियों की तलाश में पुलिस ने परिजनों और दोस्तों से पूछताछ की। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी उनकी जानकारी साझा की गई। इसी बीच, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से पता चला कि दोनों लड़कियां हरियाणा के अंबाला में हैं। जब तक पुलिस वहां पहुंचती, तब तक वे वहां से निकल चुकी थीं। राजपुरा के बस स्टैंड पर मिलीं लड़कियां पुलिस लगातार लड़कियों की लोकेशन ट्रैक कर रही थी। कुछ देर बाद पता चला कि वे पंजाब के राजपुरा में बस स्टैंड पर हैं। तुरंत ही पुलिस टीम वहां पहुंची और दोनों लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि वे ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर’ के दौरान बने एक मित्र से मिलने घर से निकली थीं। परिजनों को सौंपा गया पुलिस द्वारा पूछताछ में लड़कियों ने स्पष्ट किया कि उनके साथ किसी भी प्रकार का आपराधिक कृत्य नहीं हुआ है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में बच्चों और माता-पिता को सतर्क रहने की सलाह दी है। ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत बन रही खतरा यह मामला दर्शाता है कि ऑनलाइन गेमिंग सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों के लिए खतरा भी बनता जा रहा है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें। जरूरी सावधानियां बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अजनबियों से बातचीत को नियंत्रित करें। बच्चों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। ऑनलाइन दोस्ती के संभावित खतरों को समझाएं।  

आर्थिक तंगी के चलते जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के वंशज शिरिश महाराज मोर ने आत्महत्या कर ली

 पुणे जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के ग्यारहवें वंशज शिरिश महाराज मोर ने आत्महत्या कर ली है. उन्होंने ऐसा कदम वित्तीय बाधाओं के चलते उठाया है. इस बात का जिक्र उन्होंने सुसाइड नोट में किया था, जिसे पुलिस ने उनके आवास से बरामद किया है. सुसाइड नोट में उन्होंने उल्लेख किया है कि वह वित्तीय बाधाओं से आत्महत्या कर रहे हैं. शिरिश महाराज संत तुकारम महाराज के ग्यारह वंशज थे. उनके पास निगडी में इडली रेस्त्रां भी था. परिवार में उनके अलावा मां और पिता हैं. उनकी पिछले महीने शादी तय हुई थी. शादी अप्रैल या मई में आयोजित की जानी थी. लेकिन शादी से पहले ही उन्होंने आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या की घटना से देहुगांव में शोक की लहर दौड़ गई है. फिलहाल देहरोड पुलिस घटना की आगे जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि शिरिश महाराज अपने रूम में सोए थे. सुबह जब उनको उठाने के लोए परिवार के लोग गए तो उन्होंने अंदर जवाब नहीं दिया. जिसके बाद परिवार के लोगों ने कुछ देर बाद दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा तोड़ने के बाद परिजनों ने जब सामने की ओर देखा तो शिरिश महाराज पड़े थे. हालांकि, इसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

भाजपा और आरएसएस संविधान के खिलाफ हैं क्योंकि संविधान दलितों और वंचितों को अधिकारों की गारंटी देता है: राहुल गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देशव्यापी जाति आधारित जनगणना की अपनी मांग को दोहराते हुए बुधवार को कहा कि वह उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब दलित और कमजोर वर्ग के लोग भारत के हर संस्था में शीर्ष पद संभालेंगे। गांधी ने यहां स्वतंत्रता सेनानी एवं दलित नेता जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) संविधान के खिलाफ हैं क्योंकि संविधान दलितों और वंचितों को अधिकारों की गारंटी देता है। ‘मैं दलितों के हितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा’ उन्होंने कहा, ‘‘देश के मौजूदा सत्ता तंत्र और संस्थाओं में दलितों और वंचितों की कोई भागीदारी नहीं है… दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के कमजोर वर्गों की सटीक संख्या का पता करने के लिए पूरे भारत में जाति जनगणना की आवश्यकता है।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डालने के बाद बुधवार सुबह पटना पहुंचे। गांधी ने कहा, ‘‘मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं जब दलित और कमजोर वर्ग देश की हर संस्था में नेतृत्व की स्थिति में होंगे… और मैं दलितों के हितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा।” ‘यह दलितों-पिछड़ों और आदिवासियों का धन’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आप (दलितों) लोगों के इतिहास का कोई उल्लेख नहीं है। क्या देश में दलित प्रोफेसर परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार कर रहे हैं? उद्योग जगत की बात करें तो नरेन्द्र मोदी जी ने देश के 25 सबसे अमीर लोगों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया …यह दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों का धन है।” गांधी ने कहा, ‘‘देश में 100 रुपये में दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग सभी को मिलाकर हिस्सेदरी 6.10 रुपये है और इसे भी वो छीनने की कोशिश कर रहे हैं ।”  

अमेरिका गाजा पट्टी में आर्थिक विकास करेगा जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आवास उपलब्ध हो सकेगा: डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रत्याशित ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका गाजा पट्टी पर अपना स्वामित्व कायम करेगा और उसे अपने अधीन करेगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका गाजा पट्टी में आर्थिक विकास करेगा जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आवास उपलब्ध हो सकेगा। ‘व्हाइट हाउस’ में ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ये बातें कहीं। हालांकि, ट्रंप ने कहा कि वहां मौजूद सभी खतरनाक बमों और अन्य हथियारों को निष्क्रिय करने, जगह को समतल करने और तबाह हो चुकी इमारत को हटाने की जिम्मेदारी हमारी होगी। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी कि वहां किसे रहने की अनुमति दी जाएगी। इस बीच अमेरिकी सांसद और ट्रंप की पार्टी की सदस्य नैन्सी मेस ने आह्वान किया, “आइए, गाजा को मार-ए-लागो में तब्दील करें।” रिपब्लिकन सांसद मेस ने यह टिप्पणी और आह्वान तब किया, जब सोशल मीडिया पर ट्रंप के बयान की तीखी आलोचना हो रही है। हालांकि, कई लोग गाजा को अमेरिका के अधीन करने के ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन भी कर रहे हैं। मेस अकेली नहीं हैं, जो ट्रंप के इस अभियान की समर्थक बनकर उभरी हैं। क्या है मार-ए-लागो मार-ए-लागो, संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में पाम बीच के बैरियर द्वीप पर 17 एकड़ में बना एक रिसॉर्ट है। यह एक राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्थल भी है, जिसमें 126 कमरे हैं। यह 62,500 वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है। 1985 से डोनाल्ड ट्रम्प के स्वामित्व में है। 2019 से यह संपत्ति उनका प्राथमिक निवास स्थान है। 1924 और 1927 के बीच फ्लोरिडा भूमि बूम के दौरान मार-ए-लागो का निर्माण व्यवसायी और सोशलाइट मार्जोरी मेरिवेदर पोस्ट के लिए किया गया था। 1973 में अपनी मौत से पहले पोस्ट ने राष्ट्रीय उद्यान सेवा को ये रिसॉर्ट दे दिया था। बाद में 23 दिसंबर 1980 को अमेरिकी संसद के अधिनियम 96-586 द्वारा पोस्ट फाउंडेशन को इसे वापस कर दिया गया था। 1985 में रियल इस्टेट कारोबारी डोनाल्ड ट्रंप ने इसका अधिग्रहण कर लिया था। इसे विंटर व्‍हाइट हाउस भी कहा जाता है। ट्रंप ने मार-ए-लागो को 10 मिलियन डॉलर में खरीदा था और अब इसकी कीमत 342 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 3 हजार करोड़ रुपए है। इसमें 128 कमरे, 58 बेडरूम और 33 बाथरूम हैं। बाथरूम तक में सोने की परत चढ़ी है। साथ ही यहां थिएटर, प्राइवेट क्लब और स्पा भी हैं। इसे ब्रह्मांड का केंद्र भी कहा जाता है। गाजा पट्टी का भूगोल कैसा है मेसी की तरह अन्य कई रिपब्लिकन चाहते हैं कि भूमध्यसागर के पूर्वी किनारे पर 41 किलोमीटर लंबे और 6 से 12 किलोमीटर चौड़ी गाजा पट्टी, जिसका कुल क्षेत्रफल 360 वर्ग किलोमीटर है, का अमेरिकी सरकार मार-ए-लागो की तर्ज पर विकास और पुनर्निर्माण करे। फिलहाल इजरायली हमले में गाजा पट्टी तबाह हो चुकी है और वहां की इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। इजरायल और हमास के बीच 15 महीने से चल रहे संघर्ष में गाजा को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें 47,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। दूसरी तरफ, सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र जैसे अन्य इस्लामिक देशों ने पहले ही ट्रम्प के गाजा पर कब्जा करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भी फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा कि यह हमारी मातृभूमि है और किसी को नहीं दे सकते। इस बीच, इजरायल सरकार और हमास के बीच युद्ध विराम समझौते के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।  

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