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पांच फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जायेंगे त्रिपुरा, नियुक्ति पत्र करेंगे वितरित

अगरतला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 फरवरी को त्रिपुरा सरकार में मल्टी-टास्किंग स्टाफ (ग्रेड-डी) पदों के लिए चयनित लोगों को नौकरी के प्रमाण पत्र वितरित करेंगे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि 2021 में त्रिपुरा के संयुक्त भर्ती बोर्ड (जेआरबीटी) द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से 2400 से अधिक उम्मीदवारों का चयन किया गया था। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और उनके कैबिनेट सहयोगी भी यहां स्वामी विवेकानंद मैदान में 5 फरवरी को होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सामान्य डिग्री कॉलेजों को मजबूत करने के लिए डिग्री कॉलेजों के लिए प्रिंसिपलों के 13 पदों को अधिसूचित किया गया है। सीएम साहा ने एक अलग पोस्ट में घोषणा की कि राज्य के सरकारी सामान्य डिग्री कॉलेजों के लिए 201 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती की जाएगी और आवश्यक अधिसूचना पहले ही प्रकाशित हो चुकी है। इस बीच, साहा ने केंद्रीय बजट 2025 की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट समावेशी बजट है जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि यह एक अनूठा बजट है और यह युवाओं, महिलाओं, गरीबों और किसानों के लिए है। उन्होंने कहा कि मैंने पहले कभी ऐसा बजट नहीं देखा। इस बजट में कई पहलुओं को शामिल किया गया है। कपास उत्पादन और गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। युवाओं को नवीन विचारों के साथ आगे बढ़ाने के लिए स्टार्टअप एक बेहतरीन पहल है। हम सभी को सरकारी नौकरी नहीं दे सकते, यही वजह है कि यह बजट स्टार्टअप पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, जबकि संशोधित उड़ान योजना की घोषणा की गई, 50 पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रावधान किए गए और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई। साहा ने कहा कि 30 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट दी गई और अब 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा, जिससे मध्यम वर्ग के लोगों को भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक और समावेशी बजट है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद देना चाहता हूं। इससे सबका साथ, सबका विकास की भावना पूरी होगी।  

रेलवे यात्रियों के लिए जरूरी खबर, श्री माता वैष्णो देवी जाने वाली वंदे भारत ट्रेन में मिलेगा केवल शाकाहारी भोजन

नई दिल्ली रेलवे यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। अगर आप शाकाहारी हैं तो अब आपको ट्रेन से यात्रा के दौरान परेशान नहीं होना पड़ेगा। नई दिल्ली से कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी जाने वाली वंदे भारत ट्रेन को लेकर अहम फैसला लिया गया है। इस रेलगाड़ी में आपको केवल शाकाहारी भोजन ही मिलेगा। कई लोगों को इस बात की चिंता रहती थी कि रेलवे कैंटीन में तो वेज और नॉन-वेज दोनों तरह का भोजन बनता है। ऐसे में उन्हें डर सताता था कि शुद्ध शाकाहारी खाना मिलेगा या नहीं। मगर, अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। नई दिल्ली-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस ने शत प्रतिशत शाकाहारी भोजन का बेंचमार्क तैयार किया है। जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा को पवित्र गंतव्य माना जाता है। ऐसे में नई दिल्ली को कटरा से जोड़ने वाली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन में यात्रियों को शाकाहारी भोजन परोसने का फैसला हुआ। रेलवे का प्रयास है कि यात्रा के दौरान पूरी तरह के शाकाहारी वातावरण बनाए रखा जाए। इसके लिए यात्रियों को रेलगाड़ी में मांसाहारी भोजन या नाश्ता ले जाने की इजाजत नहीं है। इसलिए जो लोग मांसाहार खाना पसंद करते हैं, उन्हें पहले से सजग हो जाने की जरूरत है। इसका पालन होने से दूसरे यात्रियों को परेशानी नहीं होगी। शाकाहार के प्रति किया गया जागरूक यह खबर ऐसे समय सामने आई, जब प्रयागराज में महाकुंभ चल रहा है। बाबा जयगुरुदेव के संगत प्रेमियों ने बीते दिनों शाकाहारी फेरी निकली। राज्य सरकार के बयान के मुताबिक, प्रयागराज मेला परिसर सामाजिक संदेशों के प्रचार और प्रसार का भी बड़ा माध्यम साबित हो रहा है। बाबा जयगुरुदेव के संगत प्रेमियों ने महाकुंभ नगर क्षेत्र में शाकाहारी फेरी निकली। इस फेरी में संगत प्रेमियों ने ‘बाबा जी का कहना है, शाकाहारी रहना है’ के नारे लगाए। इस दौरान संगत प्रमियों ने श्रद्धालुओं को शाकाहार के प्रति जागरूक करने के साथ ही उनसे शाकाहारी बनने का समर्थन मांगा। मेले में आए हुए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में हाथ उठाकर शाकाहारी संदेशों का समर्थन किया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक की समीक्षा के लिए JPC की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की जाएगी

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति (JPC) की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की जाएगी। वहीं पैनल में मौजूद कई विपक्षी सांसदों का कहना है कि उनके असहमति नोट को बिना उनकी जानकारी के ही हटा दिया गया। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बुलेटिन में कहा गया है कि समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल और सदस्य संजय जायसवाल सोमवार को लोकसभा में रिपोर्ट पेश करेंगे। समिति ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति ने बुधवार को बहुमत से रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के सदस्यों द्वारा सुझाए गए संशोधन शामिल किए गए थे। जिसके बाद विपक्ष ने इस प्रक्रिया को वक्फ बोर्डों को नष्ट करने का प्रयास करार दिया। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति ने मसौदा कानून पर रिपोर्ट को 15-11 बहुमत से अपनाया। विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट पर असहमति जताई। भाजपा सदस्यों ने जोर देकर कहा कि पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में आधुनिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की व्यवस्था करता है। दूसरी ओर, विपक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों पर हमला और वक्फ बोर्डों के कामकाज में हस्तक्षेप करार दिया। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि उन्होंने असहमति पत्र दिया था जिसे हटा दिया गया। ऐसे में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, बिना मेरी जनकारी के ही डिसेंट नोट को हटा दिया गया। वक्फ विधेयक पर बनी जॉइंट कमेटी का पहले ही तमाशा बना दिया गया। वहीं अब विपक्षी सांसदों को भी दरकिनार कर दिया गया। हमें चुप कराने के लिए यह सब क्यों किया जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि विधेयक पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर उनके विस्तृत असहमति नोट को समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने उनकी जानकारी के बिना हटा दिया। समिति के सदस्य ओवैसी ने इस रिपोर्ट पर 231 पृष्ठों का असहमति नोट दिया था। ओवैसी ने ‘एक्स’ पर लिखा, था‘मैंने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ संयुक्त समिति को एक विस्तृत असहमति नोट सौंपा था। यह चौंकाने वाली बात है कि मेरे नोट के कुछ हिस्सों को मेरी जानकारी के बिना संपादित किया गया। हटाए गये खंड विवादास्पद नहीं थे; उनमें केवल तथ्य बताए गए थे।’ उन्होंने कहा, ‘‘(समिति के) अध्यक्ष जगदंबिका पाल जैसी रिपोर्ट चाहते थे, वैसी रिपोर्ट तैयार करवा ली , लेकिन विपक्ष की आवाज को क्यों दबाया गया? चूंकि उन्होंने मेरी रिपोर्ट को बदलने के लिए एक नियम का दुरुपयोग किया है, इसलिए मैं जल्द ही अपना पूरा असहमति नोट जनता को पढ़ने के लिए जारी करूंगा।’

दक्षिण 24 परगना में लेदर कॉम्प्लेक्स में मैनहोल साफ करने उतरे तीन मजदूरों की मौत, कई घंटों बाद शव बाहर निकाले

कोलकाता दक्षिण 24 परगना जिले के बंटाला इलाके में लेदर कॉम्प्लेक्स में रविवार को मैनहोल साफ करते समय नाले में गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। प्रारंभिक संदेह यह है कि मौत का कारण दम घुटना है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। आपदा प्रबंधन बल और दमकल विभाग के कर्मचारियों की मदद से तीनों मजदूरों के शवों को मैनहोल से बाहर निकाला गया। मृतकों की पहचान फरजान शेख, हसी शेख और सुमन सरदार के रूप में हुई है। मजदूर मूल रूप से मुर्शिदाबाद जिले के निवासी हैं। हादसे के कई घंटों बाद मजदूरों के शव मैनहोल से बाहर निकाले गए। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम का कहना है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाएगी। पुलिस जांच करेगी कि इन लोगों को मैनहोल में क्यों उतारा गया और पंप का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह 9 बजे सफाई का काम शुरू हुआ था। जब पाइप टूटा तो रासायनिक कचरे की सफाई की जा रही थी, जिससे तीनों मजदूर करीब 20 फीट नीचे गिर गए। पुलिस, अग्निशमन सेवा और राज्य आपदा राहत बलों की एक टीम ने दोपहर करीब 1:30 बजे मजदूरों के शव बरामद किए। अभी ये साफ नहीं हुआ है कि मजदूरों की मौत डूबने से या जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से हुई। बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता समेत कई महानगरों में मैनुअल स्कैवेंजिंग और मैनुअल सीवर सफाई पर प्रतिबंध लगाया दिया था, इसके बाद ये घटना हुई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने नए टैरिफ लागू किए जाने पर तीनों देशों ने ट्रंप के आदेश के सामने झुकने से इनकार

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के तीन सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों – चीन, मैक्सिको और कनाडा से आयातित सभी वस्तुओं पर व्यापक नए टैरिफ लागू किए हैं। तीनों देशों ने ट्रंप के आदेश के सामने झुकने से इनकार कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के चलते दुनिया में एक व्यापार युद्ध छिड़ने की आशंका जताई जा रही है। क्या है यह पूरा विवाद : – 1-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (1 फरवरी) को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें मेक्सिको से आने वाले सामानों पर 25% टैरिफ लगाया गया। कनाडा से आने वाले सामानों पर भी 25% टैरिफ लगाया गया है, लेकिन कनाडा के ऊर्जा संसाधनों पर 10% टैरिफ ही लगेगा। इस ऑर्डर में चीन से आयात पर भी 10% टैरिफ लगाया गया। 2-टैरिफ एक घरेलू कर है जो देश में प्रवेश करने वाले सामानों पर लगाया जाता है, जो आयात के मूल्य के अनुपात में होता है। 3-अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह कदम अवैध इमिग्रेशन और ड्रग्स तस्करी के बारे में उनकी चिंताओं को लेकर उठाया गया है। रिपब्लिकन नेता ने इन दो मुख्य मुद्दों को अपने चुनावी अभियान का आधार बनाया था। 4-ट्रंप ने कहा कि तीनों देशों को अवैध आव्रजन और ड्रग्स की तस्करी के मामले में ‘जवाबदेह’ ठहराने के लिए टैरिफ लगाना जरूरी है। 5-जवाब में, कनाडा और मैक्सिको ने कहा कि वे जवाबी कार्रवाई में टैरिफ लगाने जा रहे हैं। वहीं चीन ने विश्व व्यापार संगठन में मुकदमा दायर करने की बात कही। 6-कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शनिवार को कहा कि उनका देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए अनेक अमेरिकी आयातों पर 25% शुल्क लगाएगा। उन्होंने कहा कि वह 155 बिलियन कनाडाई डॉलर (107 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगा रहे हैं। 7-मीडिया रिपोट्स के मुताबिक कनाडाई पीएम ने कहा कि 30 बिलियन कनाडाई डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ मंगलवार से लागू होंगे, [उसी दिन ट्रंप के टैरिफ भी प्रभावी होंगे], और 125 बिलियन कनाडाई डॉलर मूल्य के यूएस प्रॉडक्ट्स पर 21 दिनों में शुल्क लगाया जाएगा। 8-मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने शनिवार को अमेरिकी आयात पर जवाबी टैरिफ लगाने की बात कही। एक्स पर लिखे एक लंबे लेख में शीनबाम ने कहा कि उनकी सरकार अपने शीर्ष व्यापारिक साझेदार के साथ टकराव के बजाय बातचीत चाहती थी, लेकिन मेक्सिको को भी उसी तरह जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 9-शीनबाम ने पोस्ट किया, “मैंने अपने अर्थव्यवस्था मंत्री को प्लान बी को लागू करने का निर्देश दिया है, जिस पर हम काम कर रहे हैं, जिसमें मेक्सिको के हितों की रक्षा के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ उपाय शामिल हैं।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी सरकार किन अमेरिकी वस्तुओं को टारगेट करेगी। 10-ट्रंप के आदेश पर चीन की प्रतिक्रिया भी काफी तीखी रही। रविवार को चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि चीन विश्व व्यापार संगठन में मुकदमा दायर करेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए उचित जवाबी कदम उठाएगा। मंत्रालय ने कहा, “अमेरिका की ओर से एकतरफा टैरिफ वृद्धि विश्व व्यापार संगठन के नियमों का गंभीर उल्लंघन है। यह कदम न केवल अमेरिका के अपने मुद्दों को हल करने में नाकाम है बल्कि चीन-अमेरिका के सामान्य आर्थिक और व्यापार सहयोग को भी बाधित करता है। चीन [अमेरिकी निर्णय] का कड़ा विरोध करता है और इससे बेहद असंतुष्ट है।”

भगवान मुरुगन के मंदिर निर्माण पर मोदी ने खुशी जाहिर की, दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी विरासत का नया स्वर्णिम अध्याय

नई दिल्ली इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भगवान मुरुगन के मंदिर निर्माण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को खुशी जाहिर की है। मंदिर के महा कुंभाभिषेकम के अवसर पर उन्होंने दोनों देशों के संबंध मजबूत होने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की सदियों पुरानी विरासत में आज नया अध्याय जुड़ रहा है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर इंडोनेशिया के लोगों और भगवान मुरुगन को मानने वालों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “मेरा सौभाग्य है कि जकार्ता के मुरुगन मंदिर में महा कुंभाभिषेकम जैसे कार्यक्रम का हिस्सा बन रहा हूं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मौजूदगी ने कार्यक्रम को मेरे लिए और विशेष बना दिया है। भले ही मैं शारीरिक रूप से जकार्ता से सैकड़ों किलोमीटर दूर हूं। लेकिन मेरा मन इस आयोजन के उतने ही करीब है, जितना भारत और इंडोनेशिया के आपसी रिश्ते। अभी कुछ दिन पहले ही इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो 140 करोड़ भारतवासियों का प्यार लेकर लौटे हैं।” पीएम मोदी ने सभी को जकार्ता मंदिर के महा कुंभाभिषेकम की बधाई देते हुए कहा, “भारत और इंडोनेशिया के लोगों के लिए आपसी रिश्ते सिर्फ जियोपॉलीटिकल नहीं हैं। दोनों देश हजारों वर्ष पुराने संस्कृति और इतिहास से जुड़े हैं। हमारा संबंध विरासत, विज्ञान और विश्वास का है। हमारा संबंध साझी आस्था और अध्यात्म का है। हमारा संबंध भगवान मुरुगन और भगवान राम का भी है। भारत से इंडोनेशिया जाने वाला व्यक्ति जब प्रम्बानन मंदिर में हाथ जोड़ता है, तो उसे काशी और केदार जैसी आध्यात्मिक अनुभूति होती है। भारत में इंडोनेशिया के रामलीला का मंचन भी होता रहता है।” उन्होंने कहा, “आज जब भारत के लोग हवाई यात्रा के लिए गरुड़ इंडोनेशिया में बैठते हैं, तो उन्हें उसमें भी हमारी साझी संस्कृति के दर्शन होते हैं। हमारे रिश्ते कई मजबूत तारों से जुड़े हुए हैं। जब राष्ट्रपति प्रबोवो भारत आए थे, तो हमने दोनों देशों के साझी विरासत से जुड़ी कई बातें की थीं। आज जकार्ता में भगवान मुरुगन के इस नए मंदिर के जरिए हमारी सदियों पुरानी विरासत में नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ रहा है। यह मंदिर न सिर्फ आस्था का बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों का भी केंद्र बनेगा।”

81 वर्ष की आयु में जर्मनी के पूर्व राष्ट्रपति होर्स्ट कोहलर का निधन

बर्लिन जर्मनी के पूर्व राष्ट्रपति होर्स्ट कोहलर का 81 वर्ष की आयु में बीमारी के बाद निधन हो गया। यह जानकारी जर्मनी के संघीय राष्ट्रपति कार्यालय ने दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, जुलाई 2004 से मई 2010 तक जर्मनी के राष्ट्रपति रहे कोहलर ने जर्मनी के सशस्त्र बलों के विदेशी अभियानों के संबंध में टिप्पणी की थी। इस पर आलोचना होने के बाद उन्होंने अप्रत्याशित रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर ने शनिवार को ईवा लुईस कोहलर से बात की और उनके पति की मृत्यु पर अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने देश के लिए कोहलर की सेवा और योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति बनने से पहले होर्स्ट कोहलर 2000 से 2004 तक वाशिंगटन में आईएमएफ के प्रमुख थे। उन्होंने सिविल सेवा और बैंकिंग में अन्य भूमिकाएं भी निभाईं। तत्कालीन विपक्षी नेता एंजेला मर्केल द्वारा उन्हें आगे बढ़ाने के बाद वे जर्मनी के राष्ट्राध्यक्ष बने, जो कि एक औपचारिक भूमिका थी। मार्केल बाद में चांसलर बनीं। स्टीनमीयर को 2009 में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया, लेकिन अगले वर्ष मई में उन्होंने अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा देकर देश को चौंका दिया था। उनका यह निर्णय एक इंटरव्यू में विवादास्पद टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान में जर्मनी की सैन्य उपस्थिति को आर्थिक हितों की रक्षा से जोड़ा था। इन टिप्पणियों ने महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया था, क्योंकि जर्मनी में विदेशों में सैन्य अभियानों के बारे में संवेदनशीलता बनी हुई है। ये नाजी युग की दर्दनाक यादों से आकार लेती है। अपने भाषणों के दौरान, कोहलर ने अक्सर जर्मनी की ताकत और उसके लोगों की क्रिएटिविटी और रचनात्मकता में विश्वास रखने के महत्व पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने कहा- अगर आज इंदिरा जी का जमाना होता तो 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 लाख रुपये टैक्स में चले जाते

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट के बाद रविवार को कांग्रेस पर टैक्स को लेकर हमला बोला। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का हवाला देते हुए दावा किया कि उनकी सरकारों ने लोगों की कमाई पर भारी टैक्स लगाया, जबकि मोदी सरकार ने टैक्स का बोझ कम किया और मध्यम वर्ग को अधिक राहत प्रदान की। दिल्ली चुनाव के लिए आरके पुरम में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ”अगर नेहरू जी के जमाने में आप 12 लाख रुपये कमाते तो 12 लाख रुपये की आय पर आपकी एक चौथाई सैलरी सरकार वापस ले लेती। अगर आज इंदिरा जी का जमाना होता तो 12 लाख रुपये तक की आय पर आपके 10 लाख रुपये टैक्स में चले जाते। 10-12 साल पहले तक, कांग्रेस की सरकार में अगर आप 12 लाख रुपये कमाते तो आपको 2 लाख 60 हजार रुपया टैक्स देना होता। भाजपा सरकार के कल के बजट के बाद, साल में 12 लाख कमाने वाले को एक रुपया भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा।” पीएम मोदी ने कहा कि देश के विकास में हमारे मिडिल क्लास का बहुत बड़ा योगदान है। यह बीजेपी ही है, जो मिडिल क्लास को सम्मान देती है, ईमानदार टैक्सपेयर्स को पुरस्कार देती है। बजट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैंने विकसित भारत के निर्माण के लिए चार स्तंभों को मजबूत करने की गारंटी देश को दी थी। ये स्तंभ हैं- गरीब, किसान, नौजवान और नारीशक्ति। कल जो बजट आया है, वो मोदी की ऐसी ही गारंटियों को पूरा करने की गारंटी है। केंद्रीय बजट 2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को घोषणा की कि सालाना 12 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को आयकर नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि यह मध्यम वर्ग की मदद के लिए उठाया गया कदम है। 75,000 रुपये की मानक कटौती के साथ, कर-मुक्त आय सीमा प्रभावी रूप से 12.75 लाख रुपये होगी। उन्होंने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि नई व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर नहीं लगेगा।” वहीं, बजट के बाद पीटीआई को दिए गए एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टैक्स में कटौती के विचार के पूरी तरह से समर्थन में थे, लेकिन नौकरशाहों को समझाने में समय लगा। निर्मला सीतारमण ने कहा, ”…पीएम बहुत स्पष्ट थे कि वह कुछ करना चाहते हैं। मंत्रालय को सहजता से काम करना है और फिर प्रस्ताव पर आगे बढ़ना है। इसलिए, जितना अधिक काम करने की आवश्यकता थी, बोर्ड को यह समझाने की आवश्यकता थी कि संग्रह में दक्षता और ईमानदार करदाताओं की आवाज… यह सब मंत्रालय का काम था, पीएम का नहीं।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह उनकी सरकार ने भी हमेशा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की आवाज सुनी है।

लक्जरी बस गहरी खाई में गिरी, दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत, 17 घायल

डांग (गुजरात) गुजरात के डांग जिले में सापुतारा हिल स्टेशन के निकट रविवार तड़के तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक निजी लक्जरी बस गहरी खाई में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य 17 घायल हो गए। प्रभारी पुलिस अधीक्षक एसजी पाटिल ने बताया कि यह दुर्घटना सुबह करीब 4-4:30 बजे के आसपास सापुतारा हिल स्टेशन के पास हुई। चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और बस गहरी खाई में जा गिरी। उन्होंने बताया कि बस में 40 से अधिक तीर्थयात्री सवार थे। बस क्रैश बैरियर तोड़कर करीब 35 फीट गहरी खाई में जा गिरी। अधिकारी ने बताया कि पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिसमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। अधिकारी ने बताया, “पांच तीर्थयात्रियों की मौत के अलावा 17 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को अहवा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ अन्य को मामूली चोटें आई हैं। बचाव अभियान लगभग पूरा हो चुका है।” उन्होंने बताया कि बस दुर्घटना उस समय हुई, जब ये महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर से 40 तीर्थयात्रियों को लेकर गुजरात के द्वारका जा रही थी। वे 23 दिसंबर से धार्मिक यात्रा पर थे। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में विभिन्न स्थानों का दौरा करने के बाद, पिछली बार कल या परसों वे शिरडी, त्यंरदबकेश्वर, नासिक का दौरा करके आ रहे थे। रविवार सुबह गुजरात के हिल स्टेशन सापुतारा में रुके। उन्होंने चाय पी और फिर 10 मिनट के बाद तीन से चार किलोमीटर के अंदर ही उनकी बस एक गहरी खाई में जा गिरी।” अधिकारी ने बताया कि तीर्थयात्री मध्य प्रदेश के गुना, शिवपुरी और अशोक नगर जिलों के थे।  

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश, और हल्की बर्फबारी

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है जबकि गुलमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों सहित कुछ ऊंचे इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश हुई। जम्मू के कुछ हिस्सों में भी रात भर हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग श्रीनगर ने बताया कि इस दौरान उत्तरी कश्मीर के बारामुल्ला जिले के स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में 5.1 सेमी , पहलगाम में 2.8 सेमी और कुपवाड़ा में 2.5 सेमी बर्फबारी हुई। दक्षिण कश्मीर में पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला सहित कश्मीर घाटी के कुछ ऊंचे इलाकों में भी हल्की बर्फबारी हुई। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि अगले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी, गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना के साथ आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। विभाग ने कहा ‘तीन फरवरी की शाम से अलग-अलग स्थानों पर हल्की बर्फबारी और बारिश की संभावना है जबकि चार फरवरी को आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी हाेने की संभावना है।’ विभाग ने कहा पांच फरवरी को सुबह या दोपहर के समय छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश एवं बर्फबारी का एक और दौर भी होने का अनुमान है। गुलमर्ग को छोड़कर बर्फबारी के बाद अधिकांश मौसम केंद्रों पर रात का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि में श्रीनगर में दर्ज न्यूनतम तापमान में सुधार हुआ और यह पिछली रात के 0.8 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले 2.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया और इस अवधि के दौरान यह औसत से 3.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। उत्तरी कश्मीर के बारामुल्ला जिले में गुलमर्ग के स्की रिसॉर्ट में तापमान में कुछ डिग्री की गिरावट आई और यहां न्यूनतम तापमान माइनस 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि पिछले साल यह माइनस 7.4 डिग्री सेल्सियस था। यह इस समय मैदानी इलाकों की घाटी के औसत तापमान से 0.2 डिग्री सेल्सियस कम था। मौसम विभाग ने कहा कि पहलगाम के पर्यटक रिसॉर्ट में भी बर्फबारी के बाद गिरावट देखी गई और रविवार को यहां तापमान माइनस 2.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि यहां तापमान माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस था जबकि कोकरनाग में तापमान शून्य से नीचे था जबकि पिछली रात यह माइनस 0.8 डिग्री सेल्सियस था।  

मच्छर रोकने जल निकायों में क्यों छोड़ी जा रहीं आक्रामक मछलियां, एनजीटी ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली। मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए जैविक एजेंट के रूप में आक्रामक और विदेशी प्रजाति की मछलियां भारत के तालाबों और नदियों में छोड़ी जा रही हैं। इसके खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की गई है, जिस पर एनजीटी ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। याचिका में कहा गया है कि दो मछली प्रजातियां गंबूसिया एफिनिस (Mosquitofish) और पोसिलिया रेटिकुलाटा (Guppy)को विभिन्न राज्यों के जल निकायों में छोड़ा जा रहा है। जलीय पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक — यह याचिका आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ ग्रुप ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि इन दोनों मछली प्रजातियों को आक्रामक और विदेशी घोषित किया गया है और ये स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर विपरीत असर डालती हैं। इससे स्थानीय मछली प्रजातियों के भोजन की कमी हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड देशों में तो मच्छर मछली पर बाकायदा प्रतिबंध भी है। याचिका के अनुसार, मच्छर मछली दुनिया की 100 सबसे खतरनाक मछली प्रजातियों में शामिल है। याचिका में कहा गया है कि मच्छर मछली को असम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश के जल निकायों में छोड़ा गया है। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा में मछली की गप्पी प्रजाति को छोड़ा गया था। 6 मई को सुनवाई करेगा एनजीटी — याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 24 जनवरी को दिए अपने आदेश में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र जवाब दाखिल करेंगे। एनजीटी इस मामले पर अगली सुनवाई 6 मई को करेगा।

दूल्हे ने अपनी बारात में किया चोली के पीछे गाने पर किया डांस, दामाद के डांस से नाराज ससुर ने तोड़ी शादी

नई दिल्ली भारतीय शादियों में फिल्मी गानों पर दूल्हा-दुल्हन का डांस करना आम बात है। सोशल मीडिया पर इस तरह के अनेक वीडियो देखने को मिल जाते हैं। हम सभी ने ऐसे कई वायरल वीडियो और रील देखे हैं, जिनमें दूल्हे या दुल्हन को अपनी शादी में डांस करते दिखाया जाता है। सोशल मीडिया में वायरल ऐसी ही एक खबर के मुताबिक, दिल्ली में एक दूल्हे को अपनी शादी में डांस करना काफी महंगा पड़ गया। दूल्हे के डांस से भड़के दुल्हन के पिता ने नाराज होकर शादी तोड़ दी। अपने रिश्तेदारों का मनोरंजन करने के लिए दूल्हे ने चोली के पीछे गाने पर डांस किया तो लड़की के पिता ने शादी की कैंसल कर दी। इस खबर के साथ एक विज्ञापन है, जिसमें लिखा है – फ्री मनोरंजन तो सबको अच्छा लगता है। ‘जेवियर अंकल’ नाम के यूजर ने कैप्शन लिखा – यकीनन मैंने आज से पहले विज्ञापन का ऐसा प्लेसमेंट नहीं देखा! रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में 18 जनवरी को एक शादी समारोह में कथित तौर पर दूल्हे द्वारा दोस्तों की फरमाईश पर बॉलीवुड के मशहूर सॉन्ग ‘चोली के पीछे क्या है’ पर डांस करना दोनों पक्षों के परिवारों के लिए महंगा साबित हुआ। ऐसा दावा है कि दूल्हे का डांस देख दुल्हन के पिता ने नाराज होकर शादी तोड़ दी। बैंड की धुनों पर नाचते हुए, दूल्हे के दोस्तों ने जोर देकर कहा कि वह उनके साथ लोकप्रिय गाने ‘चोली के पीछे क्या है’ पर डांस करे। इस दौरान कुछ मेहमानों और परिवार के सदस्यों ने नाचते हुए दूल्हे का उत्साहवर्धन किया, तभी अचानक वहां पहुंचे दुल्हन के पिता को अपने होने वाले दामाद की हरकतें पसंद नहीं आईं। उन्होंने इस पर ऐतराज जताते हुएए जश्न में हस्तक्षेप किया। इतना ही नहीं, दुल्हन के पिता ने दूल्हे के डांस से नाराज होकर शादी समारोह रोक दिया और शादी रद्द कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, दुल्हन के पिता ने यह कहते हुए गुस्से में आकर अपनी बेटी की शादी तोड़ दी कि दूल्हे की हरकतों से उनके परिवार के संस्कार का अपमान हुआ है। बताया जा रहा है कि दुल्हन रो पड़ी, जबकि दूल्हे ने दुल्हन के पिता को सांत्वना देने की कोशिश की। हालांकि, उसकी कोशिशें बेकार गईं और शादी रद्द कर दी गई।

कल लोकसभा में पेश होगी वक्फ विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति (JPC) की रिपोर्ट सोमवार को लोकसभा में पेश की जाएगी। वहीं पैनल में मौजूद कई विपक्षी सांसदों का कहना है कि उनके असहमति नोट को बिना उनकी जानकारी के ही हटा दिया गया। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बुलेटिन में कहा गया है कि समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल और सदस्य संजय जायसवाल सोमवार को लोकसभा में रिपोर्ट पेश करेंगे। समिति ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति ने बुधवार को बहुमत से रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के सदस्यों द्वारा सुझाए गए संशोधन शामिल किए गए थे। जिसके बाद विपक्ष ने इस प्रक्रिया को वक्फ बोर्डों को नष्ट करने का प्रयास करार दिया। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति ने मसौदा कानून पर रिपोर्ट को 15-11 बहुमत से अपनाया। विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट पर असहमति जताई। भाजपा सदस्यों ने जोर देकर कहा कि पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में आधुनिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की व्यवस्था करता है। दूसरी ओर, विपक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों पर हमला और वक्फ बोर्डों के कामकाज में हस्तक्षेप करार दिया। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि उन्होंने असहमति पत्र दिया था जिसे हटा दिया गया। ऐसे में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, बिना मेरी जनकारी के ही डिसेंट नोट को हटा दिया गया। वक्फ विधेयक पर बनी जॉइंट कमेटी का पहले ही तमाशा बना दिया गया। वहीं अब विपक्षी सांसदों को भी दरकिनार कर दिया गया। हमें चुप कराने के लिए यह सब क्यों किया जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि विधेयक पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर उनके विस्तृत असहमति नोट को समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने उनकी जानकारी के बिना हटा दिया। समिति के सदस्य ओवैसी ने इस रिपोर्ट पर 231 पृष्ठों का असहमति नोट दिया था। ओवैसी ने ‘एक्स’ पर लिखा, था‘मैंने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ संयुक्त समिति को एक विस्तृत असहमति नोट सौंपा था। यह चौंकाने वाली बात है कि मेरे नोट के कुछ हिस्सों को मेरी जानकारी के बिना संपादित किया गया। हटाए गये खंड विवादास्पद नहीं थे; उनमें केवल तथ्य बताए गए थे।’ उन्होंने कहा, ‘‘(समिति के) अध्यक्ष जगदंबिका पाल जैसी रिपोर्ट चाहते थे, वैसी रिपोर्ट तैयार करवा ली , लेकिन विपक्ष की आवाज को क्यों दबाया गया? चूंकि उन्होंने मेरी रिपोर्ट को बदलने के लिए एक नियम का दुरुपयोग किया है, इसलिए मैं जल्द ही अपना पूरा असहमति नोट जनता को पढ़ने के लिए जारी करूंगा।’

ट्रूडो ने कहा, यह टैरिफ मुक्त व्यापार समझौते का उल्लंघन कर रहा है, इसके परिणाम अमेरिका के लोगों को भी भुगतने होंगे

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शिवार को कनाडा से आयात की जाने वाली चीजों पर 25 फीसदी का टैरिफ लागू कर दिया है। अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका देने वाले इस फैसले से कनाडा बौखला गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो डोनाल्ड ट्रंप को धमकी देने लगे हैं। उन्होंने कहा, हम यह चाहते तो नहीं थे लेकिन कनाडा इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कनाडा की सरकार भी 155 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लागू कर देगा। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह सीधे अमेरिकियों से बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला सीधे तौर पर अमेरिका के लोगों और अर्थव्यवस्था पर असर डालेगी। ट्रूडो ने कहा कि मंगलवार से ही 30 अरब डॉलर के उत्पादों पर टैरिफ लागू हो जाएगा। इसके अलावा बाकी के 125 अरब डॉलर के उत्पादों पर आने वाले 21 दिनों में नया टैरिफ लगा दिया जाएगा। ट्रूडो ने कहा, यह टैरिफ मुक्त व्यापार समझौते का उल्लंघन कर रहा है। इसके परिणाम अमेरिका के लोगों को भी भुगतने होंगे। जस्टिन ट्रूडो ने पहले भी कहा था कि अगर डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ लागू करते हैं तो तुरंत जवाब दिया जाएगा। बता दें कि चुनाव से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और चीन को सीधे तौर पर धमकी दे दी थी कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह दोनों देशों पर 25 फीसदी टैरिफ थोप देंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने अब कनाडाऔर मेक्सिको पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। वहीं चीन पर10 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है। ट्रंप ने आते ही मेक्सिको की सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल लगा दिया है। अमेरिका कस सकता है और कड़ा शिकंजा अब सवाल यह है कि कहीं यह टैरिफ की जंग विकराल रूप ना ले ले। इन देशों के एक्शन के बाद डोनाल्ड ट्रंप और ज्यादा टैरिफ की दरें बढ़ा सकते हैं। ऐसे में चीन, कनाडा और मेक्सिको के साथ आर्थिक तनाव चरम पर पहुंच सकता है। वहीं अमेरिका की आम जनता के लिए यह फैसला मुश्किल खड़ा कर सकता है क्योंकि इससे महंगाई और ज्यादा बढ़ जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से तेल, बिजली और एनर्जी इंपोर्ट पर 10 फीदी का टैरिफ लगाया है। वह चाहते हैं कि गैसोलीन और घर को गर्म करने वाले तेलों की कीमतों में ज्यादा इजाफा ना हो। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि देश को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम जरूरी है। उन्होंने कहा कि अवैध एलियंस और ड्रग्स को अमेरिकी सीमा में आने से पूरी तरह रोक दिया जाएगा। मैक्सिको का कहना है कि अमेरिका जो भी फैसला लेगा उसके जवाब में प्लान ए. बी और सी तैयार कर लिया गया है।

योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण पर केरल की एक अदालत ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, बढ़ी मुश्किल

नई दिल्ली योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें फिर एक बार बढ़ गई हैं। केरल की एक अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। रामदेव के अलावा पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ भी वारंट जारी किया है। पलक्कड़ जिले की कोर्ट दोनों के ही खिलाफ यह वारंट उनकी गैरहाजिरी के कारण जारी किया है। आपको बता दें कि वे केरल के ड्रग्स इंस्पेक्टर द्वारा दिव्य फार्मेसी के खिलाफ दायर किए गए आपराधिक मामले में पेश नहीं हुए थे। कोर्ट ने इन दोनों के खिलाफ 15 फरवरी को पेश होने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इससे पहले कोर्ट ने 1 फरवरी को इन आरोपियों के खिलाफ जमानत योग्य वारंट जारी किया था, ताकि वे कोर्ट में पेश हो सकें। यह मामला दिव्य फार्मेसी द्वारा कथित रूप से भ्रामक चिकित्सा विज्ञापन प्रसारित करने से जुड़ा है, जिस पर केरल ड्रग्स इंस्पेक्टर ने कार्रवाई की है। आपको बता दें कि योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पर कई मामले रहे हैं। इनमें भ्रामक विज्ञापन, अवमानना और ट्रेडमार्क उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि को राहत दे चुकी है। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर वे फिर से कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें सजा हो सकती है। पतंजलि के खिलाफ अब तक के मामले पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की माफी स्वीकार कर ली थी। इस मामले में मानहानि का केस बंद कर दिया गया था। पतंजलि के कपूर वाले उत्पादों को बेचने पर रोक लगाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने पतंजलि पर चार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कोविड-19 ठीक करने का दावा करने और मॉडर्न मेडिसिन को बेकार कहने के मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने बाबा रामदेव पर आरोप लगाए थे।

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