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डल्लेवाल के डॉ. अवतार सिंह ने बताया कि उनकी हालत बेहद ख़राब, नहीं दे रहे कोई जवाब!

संगरूर/चंडीगढ़ खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का मरण व्रत लगातार जारी है। उनकी हालत बेहद नाजुक है। देर रात भी उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और ब्लड प्रेशर 88/52 पर पहुंच गया था। इस बारे में बात करते हुए डल्लेवाल के डॉ. अवतार सिंह ने बताया कि उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि मॉनिटर में भी उनका बी. पी. नोट नहीं हो रहा था, इतना ज्यादा बी.पी. डाऊन हो गया था। उसका शरीर बर्फ की तरह ठंडा हो गया था और उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। डल्लेवाल ने 30-40 मिनट तक कोई जवाब नहीं दिया। डॉक्टर ने बताया कि उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया है। इस समय डल्लेवाल की जो हालत है, उन्हें इस समय ICU में होना चाहिए और उनका पूरा इलाज होना चाहिए लेकिन   डल्लेवाल ने इलाज कराने से इनकार कर दिया है। डॉक्टर ने कहा कि डल्लेवाल बेहद खतरे में है और कभी भी कुछ भी हो सकता है। बता दें कि गत दिवस सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवामुक्त जज नायब सिंह के नेतृत्व में गठित हाई पावर कमेटी ने किसान नेता डल्लेवाल से मुलाकात की थी। कमेटी ने डल्लेवाल से मेडिकल कराने की अपील की थी।

बाढ़ग्रस्त कोयला खदान में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए बचाव अभियान में लगी सेना और नौसेना

असम असम के दीमा हसाओ जिले में बाढ़ग्रस्त कोयला खदान में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए राहत और बचाव अभियान जोरों पर है। जानकारी के अनुसार, इस हादसे में तीन लोगों के मारे जाने की आशंका है। जिला प्रशासन ने बताया कि उनके शव खदान के अंदर देखे जा सकते हैं, लेकिन अभी तक उन्हें निकाला नहीं गया है। फंसे मजदूरों की स्थिति गंभीर 6 जनवरी से फंसे हुए नौ मजदूरों में से सात असम से हैं, जबकि एक-एक मजदूर नेपाल और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। हादसे के बाद से मजदूरों के परिवारों में चिंता का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खदान में अचानक आई बाढ़ की वजह से मजदूर बाहर नहीं निकल सके। पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण उनकी जान पर खतरा मंडराने लगा। इस आपात स्थिति में जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। बचाव कार्य में सेना और नौसेना तैनात मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि मजदूरों को बचाने के लिए नौसेना के गोताखोरों को बुलाया गया है। विशाखापत्तनम से आ रहे ये गोताखोर जल्द ही मौके पर पहुंचेंगे। खदान के अंदर पानी का स्तर लगभग 100 फीट तक बढ़ गया है, जिससे राहत कार्य में कठिनाइयां आ रही हैं। सरमा ने ट्वीट कर कहा, “उमरंगशू में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। हम सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।” विशेषज्ञों और उपकरणों के साथ राहत कार्य जारी भारतीय सेना और असम राइफल्स ने राहत और बचाव कार्य के लिए विशेष उपकरण, इंजीनियर्स टास्क फोर्स, गोताखोर और चिकित्सा दल तैनात किए हैं। रक्षा प्रवक्ता ने कहा, “हमारी टीम पूरी तैयारी के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई है और फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।” स्थानीय प्रशासन और बचाव दल लगातार घटनास्थल पर मौजूद हैं। प्रशासन का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा- ईवीएम को किसी भी तरह से हैक नहीं किया जा सकता है, इस दौरान एलन मस्क पर भी निशाना साधा

नई दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर उठाए जा रहे तमाम सवालों का विस्तार से जवाब दिया है। मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा करने से पहले चुनाव आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि ईवीएम को किसी भी तरह से हैक नहीं किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिकी अरबपति एलन मस्क पर भी निशाना साधा। दरअसल दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भारत में चुनाव के दौरान कहा था कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और उन्हें इस पर भरोसा नहीं है। इस पर राजीव कुमार ने कहा है कि जो शख्स ऐसा कह रहा है उसके खुद के देश में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता है। राजीव कुमार ने कहा कि लोग उसी नैरेटिव को फॉलो करने लगते हैं जो उन्हें सूट करता है। बता दें कि अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले कहा था कि वोटिंग मशीनों से चुनाव में धांधली होती है। उन्होंने मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा था, “मैं खुद तकनीक से जुड़ा हूं। यही वजह है कि कंप्यूटर प्रोग्राम पर अधिक भरोसा नहीं कर सकता। इसे हैक करना आसान है।” हालांकि इन्हीं एलन मस्क ने भारत में मतगणना की भी तारीफ की थी। मस्क ने अमेरिकी चुनाव में हो रही गणना की काउंटिंग पर सवाल उठाते हुए भारत का उदाहण दिया था कि कैसे वहां एक ही दिन में मतगणना हो जाती है जबकि अमेरिका में एक से डेढ़ महीना लग जाता है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक को किया तलब, नागपुर में बाघिन और उसके बच्चों का रास्ता रोकने पर HC सख्त

नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में उमरेड-पावनी-करहंडला अभयारण्य में पर्यटकों द्वारा एक बाघिन और उसके पांच शावकों का रास्ता रोकने के मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत की नागपुर बेंच ने राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति नितिन सांबरे और न्यायमूर्ति वृषाली जोशी ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर करने का आदेश दिया। साथ ही राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को दो दिन के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताया जाए कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। 31 दिसंबर की घटना अदालत अब इस मामले में बुधवार को सुनवाई करेगी। यह घटना 31 दिसंबर 2024 की है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक पर्यटक वाहनों ने 31 दिसंबर को ‘F2’ नाम की बाघिन और उसके पांच शावकों को काफी देर तक घेरे रखा और उसकी फोटो ले रहे थे। वन विभाग भी जांच में जुटा घटना उमरेड-पवानी-करहंडला अभयारण्य के कुछ वन क्षेत्र में गोथनगांव सफारी रूट पर हुई। अखबारों में छपी खबर के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के प्रशासनिक जज नितिन सांबरे ने खुद जनहित याचिका दायर करने का आदेश दिय। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इस संबंध में बुधवार तक अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। मामले में नागपुर वन विभाग भी एक आंतरिक जांच करने में जुटा है। इन लोगों को किया निलंबित महाराष्ट्र वन विभाग ने सोमवार को इस घटना में शामिल चार जिप्सी चालकों और गाइड्स को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है और उनकी गाड़ियों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, प्रकृति गाइड्स पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, इन पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत मामला भी दर्ज किया गया है। घटनाओं को रोकने के लिए बनाई गई समिति पेंच टाइगर रिजर्व (नागपुर) के उप निदेशक प्रभु नाथ शुक्ला ने बताया कि पर्यटकों ने अभयारण्य के नियमों का उल्लंघन किया, जब उन्होंने बाघिन F-2 और उसके शावकों के रास्ते में कई सफारी वाहनों को घेर लिया। इस घटना में शामिल पर्यटकों को भविष्य में अभयारण्य में आने से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा, एक समिति भी बनाई गई है, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय सुझाएगी। उन्होंने कहा कि फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों को सफारी मार्गों पर नियमित गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं और प्रकृति गाइड्स और ड्राइवरों के लिए विशेष बैठकें और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि इकोटूरिज्म के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाई जा सके।

राजद नेता याचिका पर सुनवाई में की टिप्पणी, सुप्रीम कोर्ट ने माननीयों को सिखाया विरोधियों से बात करने का तरीका

नई दिल्ली। विधानसभाओं और संसद में लगातार हो रही कटुतापूर्ण कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि ऐसा लगता है कि विधायक यह भूल गए हैं कि कड़ा विरोध जताते समय या विरोधियों की आलोचना करते समय कैसे सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। यह टिप्पणी जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन के सिंह की पीठ ने राजद नेता सुनील कुमार सिंह की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में बिहार विधान परिषद के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें बजट सत्र के दौरान कथित कदाचार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नकल करने के कारण उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया गया था। सम्मान के साथ हो कटु आलोचना सुप्रीम कोर्ट ने सिंह की टिप्पणियों को प्रथम दृष्टया अस्वीकार करते हुए कहा कि सम्मानित सदनों के सदस्यों को दूसरों के कटु आलोचक होते हुए भी उनका सम्मान करना चाहिए। सुनील कुमार सिंह के वकील ए एम सिंघवी ने कहा कि भले ही मामला कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन चुनाव आयोग ने सिंह की खाली हुई सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा की है और आशंका जताई है कि इससे भ्रम की स्थिति पैदा होगी। चुनाव पर रोक लगाने की मांग सिंघवी ने कहा कि अगर चुनाव होते हैं और कोई और निर्वाचित होता है और उसी समय सुप्रीम कोर्ट सिंह के निष्कासन को रद्द कर देता है, तो इससे एक ही सीट के लिए दो निर्वाचित उम्मीदवारों के होने की असंगत स्थिति पैदा होगी। उन्होंने अनुरोध किया कि सुप्रीम कोर्ट को इस महीने के अंत में होने वाले चुनावों पर रोक लगा देनी चाहिए। ‘क्या आप ऐसी भाषा का समर्थन करते हैं?’ सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव स्थगित करने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि वह सिंह की रिट याचिका पर अंतिम सुनवाई 9 जनवरी को करेगा। सिंघवी ने कहा कि सदन के अंदर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यापक छूट दी गई है। पीठ ने कहा कि इस तरह से सदन के अंदर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल किया जाता है? आप (सिंघवी) भी संसद सदस्य हैं। क्या आप सदन के अंदर विरोधियों के खिलाफ ऐसी भाषा के इस्तेमाल का समर्थन करते हैं? सिंघवी ने कहा कि वह ऐसी भाषा का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन ऐसी भाषा के इस्तेमाल के लिए निष्कासन से विपक्ष की बेंच खाली हो जाएगी। एक अन्य एमएलसी की तरफ से भी इसी तरह की भाषा के इस्तेमाल के लिए, उन्हें केवल निलंबित किया गया था। लेकिन सिंह के मामले में, यह निष्कासन था। 26 जुलाई को किया गया था निष्कासित विधान परिषद की आचार समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिंह को हटाने की संस्तुति करते हुए कहा था कि “विपक्ष के मुख्य सचेतक होने के नाते उनकी विधायी जिम्मेदारी और नियमों और विनियमों का पालन दूसरों से अधिक होना चाहिए। लेकिन उनका व्यवहार इसके विपरीत था। वेल में आकर उन्होंने अनर्गल नारे लगाए, सदन की कार्यवाही में बाधा डाली। अध्यक्ष के निर्देश का अनादर किया। सदन के नेता के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्हें अपमानित करने की कोशिश की और एक तरह से विधान परिषद की गरिमा को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्ट के आधार पर सिंह को 26 जुलाई को निष्कासित कर दिया गया।

पूर्वोत्तर में विदेशियों का आना होगा आसान!, नगालैंड करेगा संरक्षित क्षेत्र परमिट हटाने की केंद्र से मांग

कोहिमा। नगालैंड सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य को संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) के दायरे से बाहर करने के लिए केंद्र से अपील करने का फैसला किया है। राज्य के पर्यावरण मंत्री सीएल जॉन ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री के आवासीय परिसर में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से नगालैंड में पीएपी व्यवस्था को समाप्त करने का अनुरोध किया जाएगा। संरक्षित क्षेत्र परमिट के तहत विदेशी नागरिकों को भारत के कुछ विशेष क्षेत्रों में यात्रा करने के लिए पीएपी हासिल करना होता है, जिसमें उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कुछ इलाके भी शामिल हैं। ‘गहन चर्चा के बाद लिया गया फैसला’ मंत्री जॉन ने कहा, ‘कैबिनेट बैठक में पीएपी व्यवस्था पर गहन चर्चा की गई है। मंत्रिमंडल के सदस्यों ने देखा कि राज्य ने पिछले साल एक से 10 दिसंबर तक शांति से हॉर्नबिल महोत्सव मनाया था, जिसमें 2,000 से अधिक विदेशी मेहमानों ने भाग लिया। कैबिनेट ने फैसला लिया कि केंद्र से अपील की जाएगी कि नगालैंड से पीएपी व्यवस्था को हटाया जाए।’ ढाई हजार विदेशी आए थे पिछली साल पिछले साल दिसंबर में आयोजित हॉर्नबिल महोत्सव के दौरान नगा धरोहर गांव किसामा में कुल 2,05,968 पर्यटक आए थे। इनमें 2,527 विदेशी शामिल थे, जो राज्य की राजधानी से लगभग 12 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। 2021 में की थी व्यवस्था समाप्त, फिर कर दी गई लागू पीएपी व्यवस्था, जो 1960 के दशक से सुरक्षा कारणों और क्षेत्रीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लागू की गई थी, दिसंबर 2021 में समाप्त कर दी गई थी। इससे विदेशी नागरिकों को नगालैंड और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में बिना परमिट के प्रवेश की अनुमति मिल गई थी। हालांकि, तीन साल बाद गृह मंत्रालय ने दिसंबर में नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में फिर से पीएपी की व्यवस्था लागू कर दी।

मक्का-मदीना में आई बाढ़, सऊदी अरब में ओले-तूफान और भारी बारिश

रियाद। सऊदी अरब का जब जिक्र होता है तो हमारे दिमाग में मक्का, मदीना और रेगिस्तान की तस्वीर बनती है। लेकिन अब यहां के हालात बदल गए हैं। भारी बारिश के बाद भीषण बाढ़ आ गई है। मक्का और मदीना के ज्यादातर हिस्सों में खास तौर से जेद्दा शहर और गवर्नरेट के अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि और तूफान के साथ भारी बारिश हुई। बारिश के बाद आई बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो बारिश बुधवार को भी जारी रह सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में शहर आंशिक रूप से जलमग्न दिखाई दे रहे हैं। लाखों मुस्लिम आते हैं हज और उमरा करने सऊदी अरब में मक्का मदीना बेहद पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां दुनियाभर से हर वर्ष लाखों मुसलमान हज और उमरा करने के इन शहरों में आते हैं। मगर इन दिनों भयंकर बारिश ने पूरे सऊदी का माहौल बदल दिया है। भारी बारिश के कारण सऊदी के कई शहर डूब गए हैं। आगे भी ऐसी स्थिति बने रहने की चेतावनी जारी की गई है। नेशनल मीटियोलॉजिकल सेंटर (NMC) ने इस सप्ताह के लिए मध्यम से भारी बारिश, गरज और धूल भरी आंधी का अनुमान व्यक्त किया है। पिछले एक घंटे में बारिश के लिए कई येलो वेदर वॉर्निंग जारी की गई हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल इस बारिश में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका अल-उला और अल-मदीना है। अल-मदीना में मुस्लिमों का सबसे पवित्र स्थल मस्जिद-ए-नबवी है, जहां की वीडियो काफी वायरल हो रही है। वीडियो में मस्जिद के अंदर तेज बारिश के साथ पानी भरा हुआ दिख रहा है। राज्यों में कई जगहों पर आने-जाने की मनाही है और इसके साथ ही स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने चेतावनी जारी की प्रशासन ने चेतावनी जारी कर लोगों को घरों के अंदर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। आपातकालीन सेवाएं किसी भी घटना के जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार स्थिति को नियंत्रित करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। वहीं, मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह स्थिति कुछ और दिनों तक बनी रहेगी। वे लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील कर रहे हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने और मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

न मानने पर बेल्ट से पीटकर आरोपी पति फरार, उत्तर प्रदेश-बरेली में पत्नी को जबरन देह व्यापार के लिए किया मजबूर

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में पत्नी को जबरन देह व्यापार कराने का मामला सामने आया है। पत्नी ने आरोप लगाया है कि पति अपने दोस्तों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूत करता है। मेरे मना करने पर बेल्ट से बुरी तरह पीटता है। पीड़िता की शिकायत पर इज्जतनगर पुलिस ने आरोपी पति व उसके दोस्तों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इज्जतनगर क्षेत्र निवासी महिला ने पुलिस को अपनी आपबीती बताई। उसने कहा कि इज्जतनगर क्षेत्र के एक युवक से मेरा निकाल हुआ था। शुरुआत में सबकुछ ठीक से चलता रहा, लेकिन फिर अचानक से सब बदल गया। पति के व्यवहार में बदलाव से मैं परेशान रहने लगी। उसने मुझे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। वह चाहता था कि मैं देह व्यापार करूं। मैंने इस तरह की गंदी हरकतों के लिए पति से साफ मना कर दिया, तो उसने मुझे बुरी तरह पीटा। इतना मारा कि बेल्ट के निशान मेरे शरीर पड़ गए। मुझे मजबूरी में उसकी बात माननी पड़ी। उसकी हरकतें खराब होती गईं। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ और मुझसे जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। दोस्तों के साथ संबंध बनाने पर दिया जोर 27 दिसंबर की रात की बात है। पीड़िता का आरोपी पति अपने तीन दोस्तों के घर पर आया। इस दौरान वह घर पर काम कर रही थी। आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलने के बुलाया और कसकर हाथ पकड़ लिया। पीड़ित को ठीक नहीं लगा, तो उसने विरोध किया। उसके बाद आरोपी पति के तीन दोस्तों ने भी पीड़िता के साथ गलत हरकतें करना शुरू कर दिया। उसने सभी का विरोध किया, तो आरोपियों ने पकड़कर महिला को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। उसके बाद गालियां देकर पीड़िता को घर से बाहर निकाल दिया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्जकर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

मुस्लिम देश ईरान ने बचाने में हर संभव मदद का दिया भरोसा, हूतियों के कब्जे में है भारतीय नर्स निमिषा प्रिया

सना/नई दिल्ली. केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा सुनाई गई गई है। हाल ही में ये खबर आई थी कि यमनी नागरिक की हत्या के मामले में निमिषा की फांसी को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी है। इस पर यमन दूतावास ने सफाई देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति रशद मोहम्मद अल-अलीमी ने सजा की पुष्टि नहीं की है। इसकी वजह ये है कि निमिषा राजधानी सना की जेल में बंद है, यह हूती विद्रोहियों के कब्जे वाला इलाका है। ऐसे में यह यमनी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। निमिषा की सजा पर फैसला हूतियों का प्रशासन ही लेगा। यमन के दूतावास ने सोमवार को भारत में जारी बयान बयान में कहा कि निमिषा का पूरा केस मामला हूती विद्रोहियों की कोर्ट में ही चला है। प्रिया की मौत की सजा को मंजूरी हूती सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के नेता मेहदी अलमशात ने की है। इसमें यमनी राष्ट्रपति का कोई हस्तक्षेप नहीं है। भारतीय नर्स निमिषा की सजा पर आगे का फैसला हूतियों की सरकार को लेना है। ईरान से आखिरी उम्मीद! हूतियों से निमिषा को फांसी से माफी दिलाने में ईरान से भारत को मदद की आखिरी उम्मीद की तरह है। इजरायल और अमेरिका से लाल सागर में लड़ रहे हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में ईरान का दखल इस मामले में अहम हो सकता है। ईरान की ओर से निमिषा की मदद की बात कही गई है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि निमिषा के लिए हम जो भी अच्छा से अच्छा कर सकते हैं, वो करेंगे। निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं। वह एक दशक से ज्यादा समय से यमन में हैं। प्रिया पर 2017 में तलाल महदी नाम के यमनी नागरिक की हत्या का आरोप लगा और 2018 में उन्हें दोषी पाया गया और मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद से निमिषा को बचाने की कोशिश हो रही है। सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल की ओर से भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई गई है। निमिषा के वकील और परिवार ने ब्लड मनी देने की भी पेशकश की है। निमिषा के वकील सुभाष चंद्रन ने कहा कि हम ब्लड मनी के तौर पर कोई भी रकम पीड़ित देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह मामला काफी पेचीदा है क्योंकि यमन में हूती विद्रोहियों का कब्जा है और वहां की स्थिति अस्थिर है। इसलिए निमिषा को रिहा करवाने के लिए भारत सरकार को काफी कूटनीतिक प्रयास करने होंगे।

हाथ पैर और मुंह बांधकर कई कुत्तों को 40 फीट ऊंचे पुल से फेंका, 21 बेजुबानों की मौत, हैवानियत की हदें पार

हैदराबाद हैदराबाद के गांव से कुत्तों के साथ हैवानियत का एक खौफनाक मामला सामने आया है। यहां के संगारेड्डी के एड्डुमाइलरम नाम के गांव में अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर 20 से ज्यादा कुत्तों की जान ले ली है। पुलिस के मुताबिक इन कुत्तों को 40 फीट ऊंचे पुल से नीचे फेंका गया जिसके बाद 21 कुत्तों की मौत हो गई। वहीं 11 अन्य कुत्तों की हालत गंभीर है। आरोपियों ने इन कुत्तों के हाथ-पैर और मुंह तक बांध दिए थे। यह घटना बीते 4 जनवरी को सामने आई जब कथित तौर पर जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था सिटीजन फॉर एनिमल्स के कुछ वॉलेंटियर्स को घटनास्थल के पास से आ रही चीखों के बारे में सूचना मिली। सिटीजन फॉर एनिमल्स संस्था ने बताया, “शिकायत के बाद जब वह वहां पहुंचे तो उन्हें खौफनाक मंजर दिखा। यहां कुछ घायल कुत्ते थे जो मृत साथियों के सड़ते हुए शवों के बीच कराह रहे थे। कुछ लाशों में कीड़े भर गए थे। कुछ शव पानी में तैर रहे थे। इससे यह पता चलता है कि घटना को कई दिन बीत चुके थे।” संस्था ने बताया कि उन्होंने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी। संस्था एक वॉलेंटियर पृथ्वी पनेरू ने बताया, “हमने एनिमल वॉरियर्स कंजर्वेशन सोसाइटी (AWCS) और पीपुल फॉर एनिमल्स (PFA) हैदराबाद से सहायता मांगी। कई घंटों की मशक्कत के बाद 11 घायल कुत्तों को बचाया गया है और नागोले में PFA आश्रय में ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।” संस्था के वॉलेंटियर्स ने इंद्रकरण पुलिस के पास अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस आगे की छानबीन में जुटी हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इंद्रकरण पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया, “शुरुआती जांच से पता चलता है कि पुल के नीचे गंभीर रूप से घायल पाए गए कुत्तों को पुल से फेंका गया है। हालांकि अभी उसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। स्थानीय लोगों से घटना के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश चल रही है। वहीं कुत्तों के अवशेषों को और सबूत जुटाने के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।”

वोटर लिस्ट से नाम काटने के आरोपों पर इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने दिया जवाब, एक-एक चीज गिना दी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग ही निशाने पर लिया था। उनका कहना था कि नई दिल्ली विधानसभा सीट समेत कई स्थानों पर वोटर लिस्ट से नाम काटे गए हैं। खासतौर पर उन लोगों और इलाकों से वोट काटे गए हैं, जिनके बारे में माना जा रहा है कि वे आम आदमी पार्टी के समर्थक हो सकते हैं। इसकी शिकायत भी उन्होंने आयोग से की थी, जिसका आज इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने जवाब दिया। दिल्ली के चुनाव का शेड्यूल जारी करने के दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी के आरोप का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भ्रम पैदा किया जा रहा है, जबकि वोटर लिस्ट से किसी का नाम मनमाने ढंग से हटाया ही नहीं जा सकता। राजीव कुमार ने कहा कि 2020 से 30 राज्यों में चुनाव हुए हैं और 15 राज्यों में अलग-अलग दल बहुमत पाकर सत्ता में आए हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। राजीव कुमार ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। यहां तक कि हम सभी राजनीतिक दलों को अधिकार देते हैं कि वह अपने स्तर पर बीएलओ की नियुक्ति करें। हर साल अक्टूबर में ड्राफ्ट रोल तैयार किया जाता है और नए लोगों को जोड़ा जाता है। उन लोगों को हटाया जाता है, जो शिफ्ट हो गए हैं या मृत्यु हो गई हो। बिना डेथ सर्टिफिकेट के नहीं कटता मृतक का नाम सभी राजनीतिक दलों को लिस्ट की दो कॉपी दी जाती हैं। इसके अलावा हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई की जाती है। जिस वोटर का नाम डिलीट करने का आवेदन आता है, उसके परिजन से या उससे संपर्क किया जाता है। मृत्यु की दशा में डेथ सर्टिफिकेट लगने पर ही लिस्ट से नाम हटता है। ईवीएम को लेकर भी राजीव कुमार ने दूर किए भ्रम यही नहीं उन्होंने ईवीएम को लेकर भी एक बार फिर भ्रम दूर किए। उन्होंने कहा कि ईवीएम पोलिंग बूथ पर आने से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम में जाने तक राजनीतिक दलों के एजेंट को प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। उन्हें मतों तक की जानकारी दी जाती है कि किस मशीन में कितने वोट पड़े हैं।

विधानसभा चुनाव में झोंकेंगे ताकत, नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल का दो पूर्व CM के बेटों से मुकाबला

नई दिल्ली। दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग आज तारीखों का एलान कर सकता है। सत्तासीन आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा तीनों ने ही अपने कुछ उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है। इनमें जिस सीट की आज हम बात करने जा रहे हैं, वह इस साल का सबसे बड़ा और रोचक मुकाबला हो सकता है। दरअसल, यह सीट है नई दिल्ली की, जहां से कभी शीला दीक्षित जीतकर मुख्यमंत्री बनी थीं। बाद में इसी नई दिल्ली सीट पर शीला दीक्षित को हराकर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जीत दर्ज की और वे अब तक इसी सीट से दिल्ली के विधायक बने हुए हैं। इस बार भी आम आदमी पार्टी की तरफ से इस सीट पर अरविंद केजरीवाल ही उम्मीदवार हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस सीट पर संदीप दीक्षित को उतारा है। संदीप दीक्षित दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे हैं और केजरीवाल से 11 साल पहले अपनी मां की हार का बदला लेने के लिए मैदान में हैं। इसके अलावा तीसरा नाम भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा का है। वे खुद भी दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। इन तीन नेताओं के मुकाबले ने नई दिल्ली सीट पर विधानसभा चुनावों को सबसे दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नई दिल्ली विधानसभा सीट का इतिहास क्या है? इस बार इस सीट से खड़े हो रहे उम्मीदवारों का सियासी इतिहास क्या है? उनकी ताकत कितनी है? इसके अलावा उनकी संपत्ति कितनी है? आइये जानते हैं… नई दिल्ली विधानसभा सीट का क्या इतिहास? दिल्ली विधानसभा की 70 सीट में से सबसे अहम सीटों में से एक है नई दिल्ली की विधानसभा सीट। दरअसल, इसका इतिहास और यहां से खड़े होने वाले चेहरे इस सीट को हमेशा से खास बनाते रहे हैं। 1993 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने से पहले इसे गोले बाजार विधानसभा सीट कहा जाता था। हालांकि, नई दिल्ली की अलग सीट बनने के बाद से ही यहां बड़े-बड़े नेता लगातार अपनी किस्मत आजमाते रहे हैं। 1. पहली बार में ही आई भाजपा के हाथ 1993 से लेकर अब तक नई दिल्ली विधानसभा सीट पर सात बार चुनाव हो चुके हैं। सबसे पहली बार जब इस सीट पर चुनाव हुए थे, तब भारतीय जनता पार्टी के कीर्ति आजाद ने यहीं से कांग्रेस के प्रत्याशी बृज मोहन भामा को शिकस्त दी थी। हालांकि, यह मुकाबला काफी करीबी रहा था और हार-जीत का अंतर 3500 वोटों का था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस चुनाव के बाद से भाजपा अब तक नई दिल्ली की सीट को दोबारा नहीं जीत पाई। अगले छह चुनाव में तीन बार कांग्रेस तो तीन बार आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया। 2. फिर कांग्रेस ने मजबूत रखा अपना दावा इस सीट पर 1998 में हुए दूसरे चुनाव में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को जीत मिली थी। शीला दीक्षित तब कांग्रेस में एक कद्दावर नेता की पहचान बना रही थीं। इस जीत ने दिल्ली में उनके दावे को मजबूत किया और पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। शीला दीक्षित ने इसके बाद यहां से दो और बार- 2003 और 2008 में जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहीं। 3. अरविंद केजरीवाल को नहीं हरा पा रहे कांग्रेस-भाजपा 2013 में दिल्ली विधानसभा के लिए फिर चुनाव कराए गए। इस बार यहां एक नए दल आम आदमी पार्टी ने किस्मत आजमाई और इस सीट से पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित को चुनौती देने की ठानी। वे इस चुनौती में सफल भी रहे और उन्होंने शीला दीक्षित और कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर सरकार बनाने में सफलता हासिल की। केजरीवाल की जीत कितनी बड़ी थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें एक मुख्यमंत्री के खिलाफ 26 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल हुई थी। केजरीवाल को इस सीट पर 44,269 वोट मिले थे, जबकि शीला दीक्षित को 18,405 वोट हासिल हुए थे। भाजपा के विजेंद्र गुप्ता इस सीट पर 17,952 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे। 2013 में त्रिशंकु विधानसभा बनने के बाद कांग्रेस ने आप को बाहर से समर्थन देकर सरकार बनाई। तब नई दिल्ली विधानसभा सीट से जीतने वाले अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम बने। हालांकि, 2015 में ही कांग्रेस ने यह समर्थन वापस ले लिया और दिल्ली में फिर चुनाव हुए। इस बार फिर केजरीवाल इसी सीट से चुनाव लड़े और 64 फीसदी वोट हासिल कर बंपर जीत हासिल करने में सफल रहे। केजरीवाल को 57 हजार से ज्यादा वोट मिले और उन्होंने भाजपा की नूपुर शर्मा (25,630) वोट और कांग्रेस की किरण वालिया (4,781 वोट) को आसानी से हरा दिया। इस तरह केजरीवाल लगातार दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल फिर नई दिल्ली सीट से ही उतरे। सात साल की एंटी-इन्कंबेंसी के कारण केजरीवाल (46,758 वोट) के वोटों की संख्या में गिरावट जरूर आई। लेकिन उनकी जीत का मार्जिन 20 हजार वोटों से ऊपर ही रहा। उन्हें इस चुनाव में 61 फीसदी वोट मिले। वहीं भाजपा के सुनील कुमार यादव (25,061) और कांग्रेस के रोमेश सभरवाल (3,220 वोट) यहां से चुनाव हार गए। इस बार मैदान में उतरे लोगों की सियासी ताकत कितनी? 1. अरविंद केजरीवाल इस बार नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल फिर मैदान में हैं। बीती तीन जीत ने उनकी सियासी ताकत को लेकर काफी खुलासे पहले ही कर दिए हैं। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी और संपत्ति के बारे में भी बात करना जरूरी है। 2020 में चुनाव से पहले दिए गए उनके हलफनामें उनकी (अरविंद और उनकी पत्नी की) कुल संपत्ति 3 करोड़ 44 लाख 42 हजार 870 रुपये बताई गई थी। उनके पास कुल कैश 22,000 रुपये, बैंक में जमा 33 लाख 29 हजार रुपये, बॉन्ड-स्टॉक्स के तौर पर 15 लाख 31 हजार रुपये, 6 लाख 20 हजार के करीब मोटर वाहनों में और 12 लाख 40 हजार रुपये की ज्वैलरी शामिल थी। यानी केजरीवाल और उनकी पत्नी के पास 2020 के चुनाव से पहले 67 लाख रुपये की संपत्ति चल संपत्ति थी। इतना ही नहीं केजरीवाल के पास 1 … Read more

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, एक ही चरण में होगा मतदान, 5 फरवरी को वोटिंग, 8 को आएंगे परिणाम

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आज चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि एक ही चरण में 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव 5 फरवरी को होंगे, जबकि नतीजे 8 फरवरी को आएंगे।  दिल्ली में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ाने की रखी बात राजीव कुमार ने जनता से लोकतंत्र में अपनी भागीदारी बढाते रहने की गुजारिश की। उन्होंने कहा, ”सभी लोग लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ाते रहें। लोकसभा चुनाव में नया रिकॉर्ड बना है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में भी लोकतंत्र मजबूत होता रहेगा। साल 2024 चुनाव से भरा साल रहा। इस बार दिल्ली में भी बड़े पैमाने पर वोट होने की उम्मीद है।” उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए गए, लेकिन सभी शंकाएं दूर की गईं। देश में 99 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं।  कहा गया कि वोटर लिस्ट में गलत एंट्री हुई। धीमी मतगणना के आरोप लगाए गए। कहा गया कि ये ईवीएम इलेक्शन है।” इन्हें मिलेगी घर से मतदान करने की सुविधा इसके अलावा चुनाव में 85 वर्ष से अधिक आयु के तथा दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा रहेगी। मतदान में आसानी के लिए मतदान केंद्रों पर स्वयंसेवक, व्हीलचेयर तथा रैंप बनाए जाएंगे।साथ ही चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को नसीहत भी दी। राजीव कुमार ने कहा, ”चुनाव प्रचार में भाषा का ख्याल रखें। महिलाओं के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल न करें।” अंतिम मतदाता सूची भी हुई जारी इससे पहले चुनाव आयोग ने बीते सोमवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इस सूची में कुल 1,55,24,858 मतदाता हैं। इनमें 85,49,645 पुरुष, 71,73,952 महिलाएं और 1,261 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। खास बात यह है कि इस बार 18 से 19 वर्ष के करीब 2 लाख युवा पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के तहत आवेदन लिए जाते हैं। इसके लिए फॉर्म 6 (नाम जोड़ने) और फॉर्म 7 (नाम हटाने) का इस्तेमाल होता है। राजनीति दलों को समय-समय पर इन बदलावों की जानकारी दी जाती है। नए मतदाता और हटाए गए नाम आयोग के मुताबिक 29 अक्टूबर से 28 नवंबर के बीच 3,08,942 नए नाम जोड़े गए जबकि 1,41,613 नाम सूची से हटाए गए। इस तरह 1,67,329 नए मतदाता जुड़े हैं सभी आवेदनों की जांच हुई चुनाव आयोग ने बताया कि 16 दिसंबर से एक महीने में 5.10 लाख से अधिक नए आवेदन आए। इनमें से 3 लाख से ज्यादा नाम अंतिम सूची में जोड़े गए। सभी आवेदनों की जांच पूरी गंभीरता से की गई और अधिकारियों को हर आवेदन का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया। दिल्ली में वोटर्स का गणित मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि दिल्ली में अब कुल एक करोड़ 55 लाख 24 हजार 858 मतदाता है। इनमें कुल 83 लाख 49 हजार 645 पुरुष और 71 लाख 73 हजार 952 महिला मतदाता हैं। थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 1261 है।

आंध्र प्रदेश में पटरी से उतरी मालगाड़ी, हैदराबाद में कार में आग लगने से दो जिंदा जले

हैदराबाद। हैदराबाद के घाटकेसर से बच्चाराम की ओर जा रही कार में आग लगने से कार में सवार दो लोग जिंदा जल गए। पुलिस ने कहा कि घटना सोमवार शाम 5:30 बजे की है। यात्रा के दौरान अचानक कार में आग की लपटें उठने लगीं और अंदर मौजूद दो व्यक्ति आग की चपेट में आ गए। अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने आग बुझाई। मरने वालों में से एक पुरुष था, जबकि दूसरे की पहचान नहीं हो सकी। उसका शरीर पूरी तरह से जल गया। आग लगने के कारण की जांच की जा रही है। आंध्र प्रदेश में पटरी से उतरी मालगाड़ी आंध्र प्रदेश के पलानाडु जिले के दचपेल्ली मंडल में मंगलवार सुबह श्रीनवासपुरम के पास एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। मालगाड़ी सीमेंट लोड करने के लिए विष्णुपुरम राशि सीमेंट फैक्टरी जा रही थी। इसके चलते यातायात ठप हो गया। इसके बाद गुंटूर और हैदराबाद के बीच चलने वाली ट्रेनों को विजयवाड़ा के रास्ते से चलाया जा रहा है। घटना की सूचना पर रेलवे पुलिस और अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।

‘मुझे गर्व है कि मैं पहला हूं, लेकिन आखिरी नहीं हूं’, अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यन ने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली

वाशिंगटन। भारतीय अमेरिकियों के लिए दिन काफी ऐतिहासिक रहा था। दरअसल, छह भारतवंशी नेताओं ने अमेरिकी संसद के सदस्य के रूप में शपथ ली था। यह पहला मौका है, जब अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव यानी निचली सदन में एक साथ छह भारतीय-अमेरिकियों ने शपथ ग्रहण की। इस दौरान सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने भगवद् गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। जबकि सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने एक कार्यक्रम के दौरान भगवद् गीता का एक अंश पढ़ा। सुहास सुब्रमण्यम, अमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार अमेरिकी सदन में पहुंचे हैं। डॉ. अमी बेरा 2013 से कैलिफोर्निया के सातवें संसदीय जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे सीनियर भारतीय अमेरिकी सांसद हैं। भगवद् गीता पर शपथ ली अमेरिका के पूर्वी तट पर बसे राज्यों से अमेरिकी संसद में पहुंचने वाले पहले भारतवंशी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने भगवद गीता की शपथ ली। इसी के साथ वह हिंदू ग्रंथ पर ऐसा करने वाले संभवतः एकमात्र सांसद बन गए। उनकी मां, जो डलास हवाईअड्डे के माध्यम से अमेरिका आई थीं, ने उन्हें गीता की शपथ लेते हुए देखा। गौरतलब है, 43 साल की तुलसी गब्बार्ड अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की पहली हिंदू अमेरिकी सदस्य थीं। उन्होंने पहली बार तीन जनवरी, 2013 में गीता पर शपथ ली थी। वह हवाई के दूसरे संसदीय जिले का प्रतिनिधित्व करती थीं। गब्बार्ड, जो किशोरावस्था में हिंदू धर्म अपनाने वाली पहली व्यक्ति थीं, अब राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के पद के लिए नामांकित हैं। शपथ लेने के बाद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा, ‘मेरे माता-पिता ने मुझे वर्जीनिया से पहले भारतीय अमेरिकी और दक्षिण एशियाई सांसद के रूप में शपथ लेते हुए देखा। अगर आप मेरी मां से भारत से डलास एयरपोर्ट पर उतरते समय कहते कि उनका बेटा भविष्य में वर्जीनिया का प्रतिनिधित्व करेगा, तो वह शायद विश्वास नहीं करतीं, लेकिन मेरी कहानी वही आशा है जो अमेरिका रखता है। मुझे गर्व है कि मैं पहला हूं, लेकिन आखिरी नहीं हूं, क्योंकि मैं वर्जीनिया के 10वें जिले का प्रतिनिधित्व करता हूं।’ कृष्णमूर्ति ने पढ़ा गीता का अंश सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने द्धिदलीय अंतरधार्मिक प्रार्थना सभा के दौरान भगवद् गीता का एक अंश पढ़ा। यह सेवा 119वीं सदन के पहले दिन की शुरुआत में आयोजित की गई थी। राजा कृष्णमूर्ती के कार्यालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, वह इस सेवा में बोलने वाले अकेले हिंदू प्रतिनिधि थे। उन्होंने कहा, ‘कुछ साल पहले, हिंदू अमेरिकियों को हमारे देश की राजधानी में प्रार्थना सेवाओं में शामिल नहीं किया जाता था। मैं आभारी हूं कि अब हमारे पास भी एक जगह है और मैं हिंदू धर्म के सुंदर आशीर्वादों को अपने सहयोगियों के साथ बांटने में भूमिका निभा सकता हूं, चाहे वे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट। हम सबने मिलकर शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की, जिससे हम अपने देश की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं।’ सांसद कृष्णमूर्ति 2017 से इलिनॉयस के 8वें जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को 119वीं सदन का हिस्सा बनने के लिए शपथ ली। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, ‘हमारी समुदायों की सेवा करना एक जीवनभर का सम्मान है। पिछले सप्ताह, जब मैंने एक और कार्यकाल के लिए वाशिंगटन में अपने प्रतिनिधि के रूप में शपथ ली, तो मैं आगे के अवसरों के लिए बेहद आभारी और उत्साहित हूं।’

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