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बांग्लादेश: 77 वर्षीय शेख हसीना के खिलाफ जारी किया दूसरा गिरफ्तारी वारंट

ढाका बांग्लादेश की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ दूसरा गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इस बार वारंट जबरन गायब किए गए लोगों के मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए जारी किया गया। 77 वर्षीय हसीना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोप में एक गिरफ्तारी वारंट पहले ही जारी हो चुका है। हसीना को पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन से उभरे आक्रोश के बाद सत्ता छोड़कर भारत भागना पड़ा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने कहा कि दूसरा वारंट उनके शासन के दौरान जबरन गायब किये गए लोगों से संबंधित है। आरोप है कि बांग्लादेशी सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर 500 से अधिक लोगों का अपहरण किया, जिनमें से कुछ को कई सालों तक गुप्त ठिकानों पर हिरासत में रखा गया। इस्लाम ने कहा, “अदालत ने शेख हसीना और उनके सैन्य सलाहकार, सैन्य कर्मियों और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों सहित 11 अन्य के खिलाफ वारंट जारी किया है।” अंतरिम सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण और मुकदमे को बड़ा मुद्दा बना रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोर देकर कहा कि हसीना को ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के लिए न्याय का सामना करना चाहिए। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हाल ही में भारत सरकार को एक राजनयिक नोट भेजकर, देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने 23 दिसंबर को ढाका में कहा, “हमने भारत को सूचित किया है और न्यायिक उद्देश्यों के लिए शेख हसीना की वापसी का अनुरोध किया है। यह एक नोट वर्बेल (राजनयिक नोट) के माध्यम से संप्रेषित किया गया है।”

अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक को पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक को ठहराया जायज, कहा- जरुरत पढ़ने पर फिर करेंगे ऐसे हमले

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने सोमवार को अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में अपनी हालिया एयर स्ट्राइक को उचित ठहराया। सरकार ने सोमवार को कहा कि यदि जरूरी हुआ तो वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अफगान क्षेत्र के अंदर ऐसे और हमले करेगी। राजनीतिक मामलों पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष सहायक राणा सनाउल्लाह ने सोमवार को स्थानीय मीडिया से कहा, “यदि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान पर हमला करने के लिए किया जाता है तो हमारे पास इन ऑपरेशन को जारी रखने का कानूनी अधिकार है।” 24 दिसंबर को अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक में कई महिलाओं और बच्चों सहित 46 लोगों की मौत हो गई। पाकिस्तान की इस कार्रवाई की दुनिया भर में आलोचना हुई और युद्धग्रस्त देश में तालिबान शासन की ओर से उसे कड़ी चेतावनी दी गई। हमला पक्तिका प्रांत के बरमल जिले के कुछ हिस्सों पर किया गया था। यह 2024 में इस्लामाबाद की तरफ से अफगान नागरिक क्षेत्र पर सीधे हमला करने का दूसरा मामला था। मार्च 2024 में इसी तरह के हमले में तीन बच्चों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी। सनाउल्लाह का बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद ने टीटीपी और अन्य ‘राज्य विरोधी आतंकवादी समूहों’ के खिलाफ अपने ‘आतंकवाद विरोधी अभियान’ तेज कर दिए है। पाकिस्तान का अफगान तालिबान पर आरोप है कि वह टीटीपी विद्रोहियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने और उनकी आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करता है। हालांकि काबुल इन आरोपों का खंडन करता आया है। इस टिप्पणी को हवाई हमलों के बाद से पाकिस्तान के खिलाफ विभिन्न तालिबान नेताओं द्वारा बार-बार दी गई धमकियों के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है। हवाई हमलों के दो दिन बाद कार्यवाहक अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कहा, ‘अफगान अपने क्षेत्र पर हमले को नहीं भूलेंगे।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी शासकों को एक संतुलित नीति अपनानी चाहिए। सोवियत आक्रमण की 45वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान मुत्ताकी ने पाकिस्तान को ‘सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के अंजाम से सीखने’ की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान कभी भी हमले को स्वीकार नहीं करेगा। मुत्ताकी ने पाकिस्तान के लोगों से अपने शासकों की गलत नीतियों को रोकने की अपील भी की। अफगानिस्तान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकजई ने पिछले दिनों चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान में ऐसे लड़ाके हैं जो “परमाणु बम” की तरह काम कर सकते हैं। शनिवार को काबुल में एक स्नातक समारोह को संबोधित करते हुए स्टानिकजई ने कहा, “इस्लामाबाद को अपने पश्चिमी पड़ोसी के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। हमारे पास परमाणु बम के बराबर क्षमता वाले लड़ाके हैं।”

पाक सेना के हमलों पर अफगान सरकार का कड़ा विरोध, भारत ने हमलों की निंदा की, कहा पड़ोसियों को दोषी ठहराना पुरानी आदत

नई दिल्ली 46 निर्दोष नागरिकों की मौत पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 46 निर्दोष लोगों की मौत हुई है। तालिबान सरकार के अनुसार, ये हमले पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में हुए, जहां शरणार्थियों को निशाना बनाया गया। हमलों में छह अन्य लोग घायल हुए। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। भारत ने जताई कड़ी आपत्ति सोमवार को भारत ने इन हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे पाकिस्तान की “अपनी आंतरिक विफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोषी ठहराने की पुरानी प्रथा” बताया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हमने महिलाओं और बच्चों सहित अफगान नागरिकों पर हवाई हमलों की मीडिया रिपोर्टों पर गौर किया है। निर्दोष नागरिकों पर किसी भी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए।” पाकिस्तानी सेना के हमलों पर अफगान सरकार का विरोध अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए काबुल स्थित पाकिस्तानी दूत को तलब किया। अफगान सरकार ने अपने बयान में कहा कि जब पाकिस्तान का नागरिक प्रतिनिधि काबुल में वार्ता कर रहा था, उसी समय पाकिस्तानी सेना ने यह हमला किया। काबुल ने इस हमले को दोनों देशों के बीच विश्वासघात का कारण बताया और कहा कि “ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कार्यों के गंभीर परिणाम होंगे।” टीटीपी ने हमलों को बताया निहत्थे शरणार्थियों पर हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने दावा किया कि हवाई हमलों में 50 लोग मारे गए, जिनमें 27 महिलाएं और बच्चे शामिल थे। टीटीपी ने यह भी कहा कि ये शरणार्थी पाकिस्तान के उत्तरी-पश्चिमी हमलों के कारण अफगानिस्तान भागे थे। उन्होंने हमलों के पीड़ित बच्चों की तस्वीरें भी साझा कीं। पाकिस्तान की रणनीति पर उठे सवाल पाकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि मोहम्मद सादिक काबुल में अफगान अधिकारियों के साथ वार्ता के लिए आए थे। लेकिन वार्ता के कुछ घंटों बाद हुए इन हमलों ने पाकिस्तान की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  इस घटना ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत और अफगानिस्तान ने स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के इन कार्यों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।  

लोकतंत्र हमारे विचारों और कार्यप्रणाली में है, इसीलिए भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है: ओम बिरला

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देश के विकास में महिलाओं ने योगदान को अहम बताते हुए कहा कि लोकतंत्र हमारी विरासत है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों की महिला जनप्रतिनिधियों को सशक्त बनाना है। वे साेमवार काे संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित ‘पंचायत से संसद 2.0’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि आजादी की लड़ाई की पहली शुरुआत 1857 में रानी झांसी ने की थी। इस आजादी के आंदोलन के संघर्ष में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक, राजनीतिक, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सभी क्षेत्रों में महिलाओं की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के लोकतंत्र की सबसे मजबूत संस्था पंचायत है। इसमें महिलाओं के नेतृत्व से जनजातीय क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक विकास, महिलाओं को स्वावलंबी बनाना, कुटीर उद्योग को आगे बढ़ाने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था खास है। दुनिया के अंदर भारत ही एकमात्र देश है जहां पंचायत में भी लोकतंत्र है और देश में सबसे बड़ी संस्था के रूप में संसद में भी लोकतंत्र है। इसलिए हम कहते हैं कि लोकतंत्र हमारी विरासत है। लोकतंत्र हमारी प्राचीन सभ्यता है। लोकतंत्र हमारे विचारों और कार्यप्रणाली में है। इसीलिए भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की विरासत और इतिहास इस बात का प्रमाण है कि इसमें महिलाओं का बड़ा योगदान रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में ओम बिरला ने भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हुए कहा कि 150 वर्ष पूर्व बिरसा मुंडा ने देश की आजादी और जनजाति क्षेत्र के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने जंगल और जमीन, जनजातियों के सम्मान के लिए संघर्ष किया था। बिरसा मुंडा का जीवन हमें प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियों की महिला जनप्रतिनिधियों को सशक्त बनाना हमारा उद्देश्य है। इस मौके पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर, 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की अनुसूचित जनजातियों की पांच सौ से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि उपस्थित रहीं।  

एंबुलेंस ने पैदल तिरुमाला मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं के एक समूह को मरी टक्कर, दो महिलाओं की मौत

तिरुपति तिरुपति जिले में सोमवार को एक 108 एंबुलेंस ने श्रद्धालुओं के समूह को टक्कर मार दी। इस हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एंबुलेंस ने पैदल तिरुमाला मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं के एक समूह को टक्कर मार दी। यह दुर्घटना चंद्रगिरी मंडल के नरसिंहपुरम के पास हुई। हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य श्रद्धालु घायल हो गए। मृतक महिलाओं की पहचान अन्नामय्या जिले के रामसमुद्रम मंडल के चंपलपल्ली निवासी पेड्डा रेड्डम्मा (40) और लक्ष्मम्मा (45) के रूप में हुई है। वहीं, घायलों को तिरुपति के रुइया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। श्रद्धालु पुंगनूर से तिरुमाला स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर जा रहे थे, जबकि एंबुलेंस मदनपल्ली से एक मरीज को लेकर तिरुपति जा रही थी। दुर्घटना का सटीक कारण अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस को संदेह है कि इलाके में घना कोहरा होने के कारण यह दुर्घटना हुई। चंद्रगिरी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि कई भक्त अलग-अलग स्थानों से पैदल चलकर तिरुमाला के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर तक पहुंचते हैं। आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से हजारों भक्त हर दिन मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। इस बीच, रविवार देर रात बापटला जिले में एक घर में आग लगने से दो महिलाओं की मौत हो गई। यह घटना परचूर के तुरपु बाजार में आधी रात के बाद हुई। आग में दो बहनों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गई। मृतकों की पहचान नागमणि (34) और माधवी लता (30) के रूप में हुई है। घायल को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को संदेह है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी।  

चंडीगढ़ में डीसी कार्यालय के पास इमारत गिरी, प्रशासन की सतर्कता के चलते बड़ा हादसा टला, कोई हताहत नहीं

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के पास पांच दशक पुरानी महफिल होटल की इमारत सोमवार सुबह ढह गई। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन की सतर्कता के चलते बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय प्रशासन ने पहले इमारत को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया था। हालांकि, शहर के मध्य में स्थित इस इमारत के ढहने से कोई हताहत नहीं हुआ। चश्मदीदों ने बताया कि इमारत सुबह करीब सात बजे गिर गई। जानकारी के अनुसार, इमारत के पिलरों और दीवारों में दरारों के कारण असुरक्षित घोषित किए जाने से पहले, इमारत में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था। पुलिस ने किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाते हुए इलाके में बैरिकेडिंग कर दी थी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुबह डायल 100 पर एक कॉल आई थी। जिसमें इमारत के गिरने की जानकारी दी गई। इमारत के गिरने के किसी की जान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। मामले में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले होटल में मरम्मत का काम चल रहा था, तभी तीन पिलरों और दीवारों में दरारें आ गई थी, जिससे तो आस-पास की इमारतें भी हिल गई थीं। इमारतों में भूकंप के जैसे झटके महसूस किए गए थे, जिस वजह से लोगों में दहशत फैल गई थी। सूचना मिलने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। सुरक्षा के लिहाज से बिल्डिंग के आसपास बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए गए थे।  

जनता ताज देना जानती है, तो सड़क पर भी लाना जानती है, अजित पवार के बयान पर यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने किया पलटवार

मुंबई महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता आनंद दुबे ने सोमवार को पलटवार किया। उनका कहना है कि जनता ताज देना जानती है, तो सड़क पर भी लाना जानती है। आनंद दुबे ने एक वीडियो बयान में अजित पवार पर तंज करते हुए कहा कि उन पर भाजपा का रंग इतनी जल्दी चढ़ेगा ये कोई नहीं जानता था। अजित पवार बारामती में अपनी ही विधानसभा में अपने ही मतदाताओं के सामने कह रहे हैं कि आपने हमें चुना तो कोई एहसान नहीं किया है। आप हमारे मालिक बनने की कोशिश मत कीजिए। आपने हमें खेतों में कम करने वाला किसान समझ लिया है क्या। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता ने आगे कहा कि खेतों में काम करने वाले किसान अजित पवार को आज अच्छे नहीं लग रहे। उन्हें आज अपने ही मतदाता अच्छे नहीं लग रहे। तभी तो वहां की जनता अब कह रही है कि ‘आप ऐसे जा रहे हैं जैसे हम जानते नहीं, मतलब निकल गया तो अब आप हमें पहचानते नहीं’। उन्होंने कहा कि जनता ताज देना जानती है तो सड़क पर भी लाना जानती है। जनता ने लोकसभा में चुनाव हराया, तब आप गांव-गांव जाकर लोगों से हाथ जोड़कर वोट मांग रहे थे, अपनी गलती मान रहे थे। जब अब आप चुनकर आ गए और सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए तो आपके सुर ही बदल गए। आपने बारामती के लाखों लोगों का अपमान किया है। इसके लिए आपको माफी मांगनी चाहिए। सरकारें आएंगी और जाएंगी, लेकिन मतदाताओं और जनता से बड़ा कोई है। सबसे बड़ी अदालत जनता की अदालत है। आप इतनी बड़ी अदालत का अपमान कर रहे हैं। यह भाजपा की संगत का असर है। बता दें कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार उस वक्त अपना आपा खो बैठे थे, जब एक वोटर ने समस्या से उन्हें अवगत कराया था। दरअसल, अजित पवार रविवार को बारामती में थे। यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम अजित पवार एक वोटर पर भड़क गए थे। उनके कुछ समर्थकों-वोटरों ने उन्हें विभिन्न मुद्दों पर पत्र सौंपे थे। इस पर उन्होंने कहा था कि आपने मुझे वोट दिया है, इसका मतलब ये नहीं कि आप मेरे बॉस (मालिक) बन गए। क्या आपने हमें खेतों में कम करने वाला किसान समझ लिया है।  

तेलंगाना को मिली आधुनिक सुविधाएं, मोदी ने चर्लापल्ली के नए रेलवे टर्मिनल स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी जिले में स्थित चर्लापल्ली के नए रेलवे टर्मिनल स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक टर्मिनल को 413 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह स्टेशन पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन के साथ यात्रियों को उन्नत सुविधाएं प्रदान करेगा। साथ ही, यह सिकंदराबाद, हैदराबाद और काचेगुडा के मौजूदा टर्मिनलों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद करेगा। प्रमुख विशेषताएं और सेवाएं चर्लापल्ली रेलवे टर्मिनल को एक कोचिंग हब के रूप में विकसित किया गया है। यहां प्रतिदिन लगभग 24 ट्रेनें संचालित होंगी। नए टर्मिनल में यात्रियों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसमें एक विशाल परिसंचारी क्षेत्र, दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग और बस परिवहन के लिए समर्पित क्षेत्र शामिल हैं। टर्मिनल औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन में भी अहम भूमिका निभाएगा। यहां से विशेष ट्रेन सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिसमें त्योहारों के दौरान संक्रांति विशेष ट्रेनों का संचालन भी शामिल है। स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा इस अवसर पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी को टर्मिनल के उद्घाटन के लिए धन्यवाद दिया और राज्य में क्षेत्रीय रिंग रेल परियोजना शुरू करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना तेलंगाना के 60% हिस्से को शहरीकृत करने की क्षमता रखती है। समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। समारोह में वर्चुअल माध्यम से कई नेता और अधिकारी जुड़े।

कर्नाटक में दो एचएमपीवी संक्रमित पाए गए हैं. इसके अलावा गुजरात में भी एक मामला सामने आया है, बढ़ा खतरा

नई दिल्ली भारत में चीन में फैल रहे ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) संक्रमण की दस्तक हो गई. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने जानकारी देते हुए बताया है कि कर्नाटक में दो एचएमपीवी संक्रमित पाए गए हैं. इसके अलावा गुजरात में भी एक मामला सामने आया है.गुजरात में 2 साल के बच्चे में ये वायरस पाया गया है. बच्चे को अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कर्नाटक सरकार ने कहा है कि इस वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है. बता दें कि इन दोनों मामलों में इंटरनेशनल ट्रैवल की कोई हिस्ट्री नहीं है. कर्नाटक में सामने आए दो मामले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी. मंत्रालय ने बताया कि तीन महीने की बच्ची को ‘ब्रोंकोन्यूमोनिया’ की शिकायत थी और उसे बेंगलुरु के बैपटिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसके एचएमपीवी से संक्रमित होने का पता चला था. उसे पहले ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. ‘ब्रोन्कोन्यूमोनिया’ से पीड़ित आठ महीने के एक शिशु को तीन जनवरी को बैपटिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद जांच में उसके एचएमपीवी से संक्रमित होने का पता चला. बताया जाता है कि शिशु के स्वास्थ्य में अब सुधार है. मंत्रालय ने रेखांकित किया कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दोनों मरीजों का कोई अंतरराष्ट्रीय यात्रा का इतिहास नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि देश भर में हाल में की गई तैयारियों से पता चलता है कि भारत श्वसन संबंधी बीमारियों में किसी भी संभावित वृद्धि से निपटने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय तुरंत लागू किए जा सकते हैं. नहीं हुआ है असामान्य इजाफा स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बता है कि ILI और SARI मामलों में देश में असामान्य इजाफा नहीं हुआ है. पूरी दुनिया में HMPV पहले से ही फैसला हुआ है. इससे जुड़ी बीमारियों के कई मामले अन्य देशों में भी सामने आए हैं. ICMR और IDSP नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार,  ILI या SARI मामलों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. ILI यानी इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों में बुखार, खांसी, गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं. वहीं, SARI यानी सांस लेने में दिक्कत होती है. HMPV वायरस में भी ऐसे ही लक्षण नजर आते हैं. ऐसे में निगरानी रखना जरूरी हो जाता है.  

FBI की जांच में खुलासा, अमेरिका न्यू ऑर्लियंस में जब्बार ने हमले से पहले दो बार फ्रेंच क्वार्टर का दौरा कर बनाया वीडियो

न्यू ऑर्लियंस। अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में हुए आतंकी हमले में संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने नया खुलासा किया है। एफबीआई ने बताया कि ट्रक हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी शम्सुद्दीन जब्बार ने पहले भी दो बार न्यू ऑर्लियंस का दौरा किया था। उसने हैंड्स-फ्री चश्मे से फ्रेंच क्वार्टर का वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसके अलावा, एफबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि जब्बार ने हमले से पहले मिस्र के काहिरा और कनाडा के ओंटारियो की यात्रा भी की थी। हालांकि, एफबीआई ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि जब्बार की विदेश यात्राएं न्यू ऑर्लियंस में हुए हमले से संबंधित थी या नहीं। बता दें कि जब्बार अमेरिका के ह्यूस्टन शहर का रहने वाला है, उसके पास वहां की नागरिकता भी है। 13 जुलाई 2023 को अमेरिका लौटा था जब्बार न्यू ऑर्लियंस फील्ड ऑफिस के प्रभारी एफबीआई के विशेष एजेंट लियोनेल मायर्थिल ने एक प्रेस ब्रीफिंग की, जिसमें उन्होंने बताया कि हमारी जांच में पता लगा है कि जब्बार ने 22 जून से 3 जुलाई 2023 तक काहिरा, मिस्र की यात्रा की थी। कुछ दिनों बाद, उसने 10 जुलाई को ओंटारियो, कनाडा के लिए उड़ान भरी और 13 जुलाई 2023 को वह अमेरिका लौट आया। जब्बार की गतिविधियों के बारे में पता लगा रहे अधिकारी मायर्थिल ने कहा कि हमारे एजेंट इस बारे में पता लगा रहे हैं कि वह कहां गया था और किन लोगों से मुलाकात की थी। यह भी जानकारी ली जा रही है कि जब्बार की ये यात्राएं न्यू ऑर्लियंस में उसकी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं या नहीं। न्यू ऑर्लियंस में हुए हमले में 15 लोगों की हुई थी मौत एफबीआई के अनुसार, जब्बार ने इस्लामिक स्टेट जिहादी समूह के प्रति अपनी वफादारी का वादा किया था। उसने न्यू ऑर्लियंस के भीड़भाड़ वाले फ्रेंच क्वार्टर में नए साल के दिन लोगों को मारने और घायल करने के लिए पिकअप ट्रक का इस्तेमाल किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे मार गिराया। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 30 अन्य लोग घायल हो गए थे। लास वेगास घटना के कुछ घंटे बाद हुआ न्यू ऑर्लियंस में हमला एफबीआई ने बताया कि न्यू ऑर्लियंस हमला लास वेगास में ट्रंप टावर के बाहर टेस्ला के साइबर ट्रक में हुए विस्फोट के कुछ घंटों बाद हुआ। इस घटना में ड्राइवर की मौत हो गई थी। हमले से पहले जब्बार ने ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किया था जब्बार ने हमले से कुछ घंटे पहले ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करके इस्लामिक स्टेट के प्रति अपने समर्थन की घोषणा की थी। यह अमेरिका में वर्षों में सबसे घातक आईएस-प्रेरित हमला था, जिसने संघीय अधिकारियों द्वारा चेतावनी दिए गए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे को उजागर किया।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया, एचएमपीवी का संक्रमण पहले से ही भारत सहित कई देशों में फैल रहा है, महाराष्ट्र में एडवायजरी जारी

मुंबई भारत में भी ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) ने दस्तक दे दी है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के मुताबिक, कर्नाटक में HMPV के 2 मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, एचएमपीवी का संक्रमण पहले से ही भारत सहित कई देशों में फैल रहा है और विभिन्न देशों में इससे संबंधित श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले सामने आए हैं। इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार भी पूरी तरह से अलर्ट है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एचएमपीवी को लेकर लोगों के लिए सलाह जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि लोगों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। एचएमपीवी से बचने के लिए क्या करें और क्या नहीं… 1. छींकते या खांसते समय रुमाल और कपड़े का इस्तेमाल करें। 2. अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का उपयोग शुरू कर दें। 3. खांसी और सर्दी से प्रभावित लोग सार्वजनिक जगहों से दूर रहें। 4. आपको इन दिनों दूसरों से हाथ मिलाना बंद करना होगा। 5. एक ही टिश्यू पेपर या रुमाल का बार-बार प्रयोग न करें। 6. सार्वजनिक स्थानों पर थूकना बंद करना होगा। 7. किसी तरह का संक्रमण होने पर खुद से दवा शुरू न करें। कर्नाटक वाले मामलों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 3 महीने की बच्ची को ब्रोंकोन्यूमोनिया की शिकायत थी। उसे बेंगलुरु के बैपटिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसके एचएमपीवी से संक्रमित होने का पता चला था। उसे पहले ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। ब्रोन्कोन्यूमोनिया से पीड़ित 8 महीने के एक शिशु को तीन जनवरी को बैपटिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद जांच में उसके एचएमपीवी से संक्रमित होने का पता चला। बताया जाता है कि शिशु के स्वास्थ्य में अब सुधार है। यह ध्यान रखना अहम है कि दोनों मरीजों का कोई अंतरराष्ट्रीय यात्रा का इतिहास नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि वह सभी उपलब्ध निगरानी माध्यमों के जरिए स्थिति की निगरानी कर रहा है और आईसीएमआर पूरे साल एचएमपीवी संक्रमण के रुझानों पर नजर रखेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर उन्हें नमन किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर उन्हें नमन किया है। श्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘मैं श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को उनके प्रकाश उत्सव पर नमन करता हूं। उनके विचार हमें एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं जो प्रगतिशील, समृद्ध और दयालु हो।’ उन्होंने पोस्ट में कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के व्यक्तित्व में अनेक विधाओं का संगम था। वह गुरु तो थे ही , भक्त भी श्रेष्ठ थे। वह जितने अच्छे योद्धा थे उतने ही बेहतरीन कवि और साहित्यकार भी थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद जी के मानवता की रक्षा के लिए , राष्ट्र की रक्षा के लिए ,धर्म की रक्षा के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान से देश दुनिया परिचित है। उन्होंने कहा कि उनमंर वीरता के साथ धीरता थी , उनका धैर्य अद्भुत था , वे संघर्ष करते थे लेकिन त्याग की पराकाष्ठा अभूतपूर्व थी। श्री मोदी ने कहा कि खालसा पंथ के सृजनहार , मानवता के पालनहार एवं भारतीय मूल्यों के प्रति समर्पित श्री गुरु गोबिंद सिंह को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। वाहे गुरु जी का खालसा , वाहे गुरु जी की फतह। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह को प्रकाश पर्व पर नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। श्री खरगे ने कहा “सरबंस दानी, साहिब-ए-कमाल एवं सिख धर्म के दसवें गुरु एवं खालसा पंथ के संस्थापक, धन धन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ। उन्होंने सम्पूर्ण मानवता को शांति, प्रेम, एकता, समानता एवं भाईचारे का संदेश दिया तथा जन-जन के हृदय में मानव सेवा एवं सामाजिक सौहार्द की भावना जागृत की थी जो सदैव प्रेरणादायी रहेगी।” कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक पेज पर गुरु गोविंद सिंह को याद करते हुए कहा “गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती के शुभ अवसर पर हम उनके जीवन और विरासत को नमन करते हैं। आइए हम एकता, साहस और मानवता की उनकी शिक्षाओं को याद करें जो हमारे लिए मार्गदर्शन का एक स्थायी स्रोत हैं। उनके मार्ग पर चलते हुए आईए एक समावेशी समाज का निर्माण करने का हम प्रयास करें।”  

सरकार ने दिया तगड़ा झटका, केंद्रीय कर्मियों की ‘सामान्य भविष्य निधि’ पर नहीं बढ़ी ब्याज दर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘एक जनवरी से 31 मार्च’ 2025 की तिमाही के लिए सामान्य भविष्य निधि ‘जीपीएफ’ पर मिलने वाले ब्याज की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले छह वर्षों से ब्याज दरें एक ही प्वाइंट पर अटकी हैं। इसे केंद्रीय कर्मियों के लिए तगड़ा झटका बताया जा रहा है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने गत सप्ताह जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दरों की घोषणा की है। इसमें कहा गया है कि इस तिमाही के लिए भी ब्याज की दर 7.1 फीसदी ही रहेगी। इससे पहले ‘एक अक्तूबर से 31 दिसम्बर’ 2024 की तिमाही में भी जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी रही थी। सरकार से थी ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने ‘एक अक्तूबर से 31 दिसम्बर’ तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और उससे मिलते जुलते अन्य प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज की दरें घोषित की थीं। उस वक्त ब्याज दर 7.1 प्रतिशत रखी गई। नव वर्ष में सरकारी कर्मियों को एनडीए सरकार से जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय ने ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। कोरोना के दौरान भी नहीं बढ़ाई गई दरें वर्ष 2021-22 के दौरान सामान्य भविष्य निधि तथा उसी प्रकार की अन्य निधियों के अभिदाताओं की कुल जमा रकमों पर दी जाने वाली ब्याज दर एक जुलाई 2021 से लेकर सितंबर 2021 तक 7.1 फीसदी रखी गई थी। आर्थिक कार्य विभाग के 19 अप्रैल 2021 को जारी संकल्प में भी सामान्य भविष्य निधि की राशि पर ब्याज दर 7.1 फीसदी तय की गई थी। उस वक्त देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपना कहर बरपा रखा था। तब केंद्रीय कर्मियों का महंगाई भत्ता भी 18 माह से रोका गया था। इसी वजह से कर्मियों को यह उम्मीद थी कि सरकार ‘जीपीएफ’ की राशि पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। एक जुलाई 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 तक जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दर 7.1 फीसदी रखी गई थी। इन विभागों में लागू होती हैं दरें ये दरें सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि, राज्य रेलवे भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं), भारतीय आयुद्ध विभाग भविष्य निधि, भारतीय आयुद्ध कारखाना कामगार भविष्य निधि, भारतीय नौसेना गोदी कामगार भविष्य निधि, रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि और सशस्त्र सेना कार्मिक भविष्य निधि पर लागू होती हैं। जीपीएफ में जमा कर्मियों की राशि पर बैंकों के मुकाबले ब्याज अधिक मिलता है, इसलिए बहुत से कर्मचारी अपना शेयर बढ़ा देते हैं। जीपीएफ में ज्यादा वेतन इसलिए कटवाया जाता था, ताकि कर्मचारी अपनी बड़ी जरूरत के समय इसका इस्तेमाल कर सकें। अब वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर्मचारी अपने जीपीएफ में से 90 फीसदी राशि निकाल सकते हैं। हालांकि इस लेकर नियम-शर्तें बदलती रहती हैं। बच्चों की शिक्षा, शादी, घर बनाना या उसके लिए प्लाट खरीदना, फ्लैट लेना है, पुश्तैनी मकान की रिपेयर करानी है और घर का लोन चुकाना है, जैसे कामों में जीपीएफ राशि काम आ जाती है। तीन वर्ष पहले केंद्र सरकार ने एक वित्त वर्ष में जनरल प्रोविडेंट फंड में वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर दी थी। नए प्रावधान के अनुसार, एक वित्त वर्ष में जीपीएफ खाते में जमा की गई कुल राशि पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती है।

कृषि मंत्री ने बताया- लड़की बहिन योजना से सालाना 46,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान, भारी पड़ रही योजना

मुंबई महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने कहा कि लड़की बहिन योजना से राज्य के कोष पर भार पड़ रहा है और इसके कारण कृषि ऋण माफी योजना प्रभावित हो रही है। माना जाता है कि नवंबर 2024 में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति की जीत में इस योजना ने अहम भूमिका निभाई। लड़की बहिन योजना से राज्य पर सालाना लगभग 46,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। इस योजना को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने पिछले साल अगस्त में शुरू किया था जिसके तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। रविवार को पुणे में कोकाटे ने संवाददाताओं से कहा कि लड़की बहिन योजना के कारण अतिरिक्त खर्च जुड़ने से राज्य के अधिशेष बनाने की क्षमता प्रभावित हुई। यह अधिशेष किसानों के ऋण माफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता ने कहा, ‘लड़की बहिन योजना के कारण जुड़े अतिरिक्त खर्च ने कृषि ऋण माफी के लिए धन अलग रखने की हमारी क्षमता को प्रभावित किया है। हम वित्तीय स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और एक बार राज्य की आमदनी बढ़ने के बाद, हम अगले चार से छह माह में ऋण माफी योजना पर आगे का कदम उठाएंगे।’ उन्होंने बताया कि ऋण माफी पर निर्णय अंततः मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों द्वारा लिया जाएगा जिसे लागू करना राज्य सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने पिछले सप्ताह कहा था कि राज्य सरकार ने लाडकी बहन योजना के फर्जी लाभार्थियों के बारे में शिकायतों पर कार्रवाई करने का फैसला किया है और उनके सत्यापन के लिए आयकर तथा परिवहन विभागों से जानकारी मांगी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल फर्जी लाभार्थियों से संबंधित शिकायतों पर ही कार्रवाई करेगी।

निष्पक्ष व्यापार नियामक आयोग करेगा जांच, सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन-फ्लिपकार्ट की याचिकाएं कर्नाटक हाईकोर्ट ने कीं ट्रांसफर

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट की सीसीआई (कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया) जांच के खिलाफ दायर याचिकाओं को कर्नाटक उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइंया की पीठ ने कहा कि यदि स्थानांतरित याचिकाओं में से कुछ में दलीलें पूरी नहीं हुई हैं, तो मामले को देखते हुए न्यायाधीश दलीलें पूरी करने के लिए उचित समय दिया जाए। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि निष्पक्ष व्यापार नियामक ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई)’ द्वारा याचिका दायर किए जाने के बाद, विभिन्न उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दायर की गई हैं। जिस पर शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि इन याचिकाओं को कर्नाटक हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाए। पीठ ने कहा, अगर इसके बाद किसी अन्य उच्च न्यायालय में इसी तरह की याचिकाएं दायर की जाती हैं, तो वे भी इस आदेश के अंतर्गत आएंगी।’ पीठ ने माना कि रिट याचिका में जो मामला उठाया गया है, वो ही मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर याचिका में है। ऐसे में पीठ ने सभी याचिकाएं कर्नाटक उच्च न्यायालय को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। क्या है ये पूरा मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने जनवरी 2020 में प्रतिस्पर्धा कानून 2002 के तहत एक जांच शुरू की थी। यह जांच दिल्ली व्यापार महासंघ की शिकायत पर शुरू की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों ने चुनिंदा विक्रेताओं को वरीयता दी, जिससे अन्य विक्रेताओं को नुकसान हुआ। महासंघ ने दावा किया कि जिन विक्रेताओं को फायदा पहुंचाया गया, वो ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़े हुए थे। प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच के खिलाफ अमेजन और फ्लिपकार्ट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हालांकि उच्च न्यायालय ने प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में दखल देने से इनकार कर दिया। अगस्त 2024 में आयोग ने जांच पूरी की और ये पाया कि ई-कॉमर्स कंपनियों  ने प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन किया था। हालांकि इसके बाद अमेजन और फ्लिपकार्ट के विक्रेताओं ने सीसीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दायर कीं। इस पर सीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में 24 याचिकाएं लंबित हैं। ऐसे में सुनवाई में देरी से बचने के लिए सभी याचिकाएं दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दी जाएं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर की सुनवाई में सभी याचिकाओं को दिल्ली उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को कर्नाटक उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

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