LATEST NEWS

वानुअतु के तटीय क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, पांच लाख डॉलर की सहायता देगा भारत

नई दिल्ली भारत ने वानुअतु में 17 दिसंबर 2024 को आए भयंकर भूकंप के बाद प्रभावित लोगों की मदद के लिए तत्काल 5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 4 करोड़ रुपये) की राहत सहायता की घोषणा की है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह सहायता वानुअतु की सरकार और जनता के साथ भारत की एकजुटता और सहानुभूति का प्रतीक है. वानुअतु के तटीय क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने देश में भारी तबाही मचाई. इस भूकंप के कारण दर्जनों लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए, और हजारों लोग बेघर हो गए. कई इमारतें पूरी तरह से ध्वस्त हो गईं, और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा. भारत सरकार ने इस संकट की घड़ी में वानुअतु के लोगों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत वानुअतु के लोगों के साथ खड़ा है. हम 5 लाख अमेरिकी डॉलर की राहत सहायता प्रदान कर रहे हैं, जो मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन के प्रयासों में उपयोग की जाएगी.” वानुअतु में भारत का योगदान भारत का यह कदम “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत पर आधारित है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है. पिछले वर्षों में भारत ने विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित देशों को तेजी से सहायता प्रदान की है, जिससे उसकी मानवीय भूमिका को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है. भविष्य के प्रयास भारत ने वानुअतु की सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय करते हुए दीर्घकालिक पुनर्निर्माण और राहत कार्यों में भी सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की है. इस सहायता में आपातकालीन राहत सामग्री, चिकित्सा सेवाएं, और बुनियादी ढांचे की बहाली शामिल हो सकती है. वानुअतु के प्रधानमंत्री ने भारत की इस उदार सहायता के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उनके देश के पुनर्निर्माण प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.  

‘गढ़चिरौली जल्द होगा नक्सली प्रभाव से मुक्त’, 11 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सीएम देवेंद्र फडणवीस के सामने डाले हथियार

गढ़चिरौली  महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष सीनियर कैडर विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का समेत कुल 11 नक्सलियों ने  सरेंडर कर दिया. इन सभी नक्सलियों के सिर पर 1.03 करोड़ रुपये का सामूहिक इनाम रखा गया था. ये सभी सुरक्षा कर्मियों पर हमले करने में शामिल थे. सीएम के सामने सरेंडर करने वाले माओवादियों में सबसे प्रमुख दंडकारण्य जोनल कमेटी का सदस्य विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का है. विमला पिछले 38 सालों से नक्सलवादी आंदोलन में शामिल था. सीएम फडणवीस ने नक्सल विरोधी अभियानों में बहादुरी के लिए C-60 कमांडो और अधिकारियों को सम्मानित भी किया. उन्होंने कहा कि हथियार डालने वाले माओवादियों की संख्या में वृद्धि और भर्ती करने में आंदोलन में विफलता को देखते हुए महाराष्ट्र जल्द ही नक्सल खतरे से मुक्त हो जाएगा. उन्होंने कहा, “गढ़चिरौली पुलिस ने जिले में नक्सली गतिविधियों को लगभग खत्म कर दिया है. उत्तरी गढ़चिरौली अब माओवादी गतिविधियों से मुक्त है और दक्षिणी गढ़चिरौली जल्द ही नक्सलियों से मुक्त हो जाएगा.” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में कई खूंखार नक्सलियों को या तो मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया. उन्होंने कहा कि, माओवादी कैडर आंदोलन से खुद को अलग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इसकी खोखली विचारधारा का एहसास हो गया है. मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्हें यकीन है कि, उन्हें संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से ही न्याय मिलेगा.” उन्होंने कहा कि, भारत विकास में बड़ी छलांग लगा रहा है और माओवाद खत्म हो रहा है. इससे एक दिन पहले फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा कि, गढ़चिरौली जिले के दूरदराज के इलाकों में नक्सलियों का प्रभुत्व कम हो रहा है और नक्सलवाद अपने अंत के करीब है. उन्होंने कहा कि सरकार ने माओवादियों के प्रभुत्व को खत्म करके गढ़चिरौली को “पहला जिला” बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि, गढ़चिरौली को अक्सर महाराष्ट्र का आखिरी जिला कहा जाता है क्योंकि यह राज्य की पूर्वी सीमा पर है. फडणवीस ने अपने दौरे के दौरान जिले में 32 किलोमीटर लंबी गट्टा-गरदेवाड़ा-वांगेतुरी सड़क और वांगेतुरी-गरदेवाड़ा-गट्टा-अहेरी मार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस सेवा का उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़चिरौली सरकार के लिए अंतिम नहीं, बल्कि ‘पहला जिला’ है. उन्होंने कहा कि, आज उद्घाटन किया गया सड़क संपर्क महाराष्ट्र को सीधे छत्तीसगढ़ से जोड़ेगा. फडणवीस ने नक्सलवाद के खिलाफ उनके काम के लिए गढ़चिरौली पुलिस की सराहना की. उन्होंने कहा कि, लोग अब नक्सलियों का समर्थन नहीं करते हैं. अब कोई भी व्यक्ति गैरकानूनी आंदोलन में शामिल होने को तैयार नहीं है जो “बहुत महत्वपूर्ण” है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने गट्टा-गरदेवाड़ा-तोड़गट्टा-वांगेतुरी सड़क और ताड़गुडा पुल का हवाई निरीक्षण किया. फडणवीस ने कोंसारी में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के विभिन्न विभागों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य सरकार पिछले दस सालों से गढ़चिरौली को बदलने की कोशिश कर रही है ताकि आम आदमी को मुख्यधारा में लाया जा सके और इस जिले से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके.” उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और गढ़चिरौली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की बदौलत पिछले चार सालों में माओवादी गढ़चिरौली में एक भी कैडर की भर्ती करने में विफल रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि, खनन से जुड़े उपक्रमों में गढ़चिरौली जिले में 20 हजार रोजगार के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि, निकट भविष्य में गढ़चिरौली में एक हवाई अड्डा बनेगा और गढ़चिरौली बंदरगाहों को जोड़ने वाले जलमार्गों का भी सर्वेक्षण किया जाएगा.

न्यूयॉर्क में फिर ताबड़तोड़ गोलीबारी! क्वींस में 11 लोगों को मारी गोली, वीडियो आया सामने

 न्यूयॉर्क अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक नाइट क्लब में हुई गोलीबारी में कम से कम 11 लोग घायल हो गए हैं। न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में अमेजुरा नाइटक्लब में बुधवार देर रात गोलीबारी की ये वारदात हुई। पुलिस ने बताया है कि जमैका में अमेजुरा इवेंट हॉल के पास बड़ा नाइटक्लब है, जिसमें 4,000 लोगों की क्षमता है। यहां अक्सर डीजे और लाइव परफॉर्मेंस होते रहते हैं। यहां पर नए साल के मौके पर लोग जमा थे, इसी दौरान गोलीबारी होने की सूचना मिली। पुलिस और राहतकर्मियों ने सभी 11 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। गोलीबारी की घटना के बाद न्यू यॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और इलाके को घेर लिया गया। पुलिस को 91 एवेन्यू और 144 प्लेस पर कई खाली कारतूस मिले हैं, जिससे एक और क्राइम सीन बनाया गया है। पुलिस ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया गया। पुलिस ने अमेजुरा और सटफिन ब्लाव्ड पर स्पेशल यूनिट को तैनायत किया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी सिटिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक सफेद कार की पहचान की है, जिसके गोलीबारी की घटना में शामिल थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।अभी पुलिस को कोई पुख्ता सुराग इस मामले में नहीं मिल सका है। क्वींस नाइट क्लब में गोलीबारी के शिकार लोगों को लॉन्ग आइलैंड ज्यूइश हॉस्पिटल और कोहेन्स चिल्ड्रन मेडिकल सेंटर समेत कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। NYPD ने पुष्टि की है कि किसी भी पीड़ित की हालत गंभीर नहीं है और सभी के बचने की उम्मीद है। पुलिस ने अब तक किसी संदिग्ध को गिरफ्तार नहीं किया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है की क्या यह घटना किसी गैंगवार से जुडी है या इसके पीछे कोई और वजह है। घटनास्थल से मिले सबूतों को इकट्ठा किया जा रहा है और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है की अगर उनके पास इस घटना से जुडी कोई भी जानकारी है तो वे आगे आकर पुलिस की मदद करें। अमेरिका से नए साल पर कई शहरों से हिंसा, गोलीबारी और हमलों की खबरें सामने आई हैं। सबसे बड़ी घटना न्यू ओर्लियन्स में हुई है। यहां एक एक शख्स ने नए साल का जश्न मना रहे लोगों की भीड़ पर एक कार चढ़ा दी। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई और करीब 30 लोग घायल हो गए। अमेरिका ने इसे आतंकी हमला कहा है। इस घटना में हमलावर को पुलिस ने मौके पर ही मार दिया है। मोंटनेग्रो में 2022 में भी हुई थी 12 लोगों की मौत मोंटनेग्रो में 2022 में भी गोलीबारी में 12 लोगों की मौत हो गई थी। सेटिनजे के एक व्यक्ति ने पारिवारिक विवाद के बाद बच्चों सहित सड़क पर चलने वाले लोगों पर बेतरतीब ढंग से गोलियां चला दीं थीं। इससे 12 लोगों की मौत हो गई थी और छह अन्य घायल हो गए थी । हालांकि वह हमलावर शख्स बाद में पुलिस की गोली लगने से मारा गया था।

आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

ढाका बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की जमानत अर्जी खारिज हो गई है। दास की जमानत याचिता पर गुरुवार को चटगांव कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के 11 वकीलों ने चिन्मय का पक्ष चटगांव की अदालत में रखा लेकिन उनको जमानत नहीं मिल सकी। बांग्लादेश के द डेली स्टार ने बताया है कि चटगांव की अदालत ने कड़ी सुरक्षा के बीच हुई सुनवाई के दौरान चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को जमानत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले 3 दिसंबर 2024 को दास के केस की तारीख थी। उस समय अभियोजन पक्ष के समय मांगने और चिन्मय की ओर से कोई वकील ना होने के चलते अदालत ने 2 जनवरी की तारीख जमानत पर सुनवाई के लिए दी थी। पूर्व में इस्कॉन से जुड़े रहे दास के खिलाफ बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा ध्वज फहराने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद उनको ढाका के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया और कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद जेल भेज दिया गया। दास की गिरफ्तारी के बाद चटगांव में उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान हिंसा में चटगांव में एक वकील की मौत भी हो गई थी। ये मामला काफी ज्यादा चर्चा में रहा था। सुप्रीम कोर्ट के वकील करेंगे पैरवी चिन्मय कृष्ण दास की पैरवी के लिए उनके वकील अपूर्ब कुमार भट्टाचार्य के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के 11 वकीलों की टीम चटगांव पहुंची थी। वकील अपूर्ब कुमार भट्टाचार्य ने द डेली स्टार को बताया, ‘हम एंजीबी ओकया परिषद के बैनर तले चटगांव आए हैं और अदालत में चिन्मय की जमानत के लिए पक्ष रख रहे हैं। हालांकि उनको दास की जमानत की उम्मीद थी, जो नहीं हो सका। यह पूरा मामला 25 अक्टूबर को चटगांव में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा ध्वज फहराने के आरोप से शुरू हुआ। मामला दर्ज होने के बाद चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद स्थिति तब बिगड़ी, जब 27 नवंबर को चटगांव कोर्ट से दास की जमानत खारिज होने के बाद उनके समर्थकों का प्रदर्शन हिंसक हो गया और इसमें एक वकील की मौत हो गई। चटगांव कोर्ट में हिंसा के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में अल्पसंख्यकों और इस्कॉन के साधुओं के खिलाफ भी हिंसा देखने को मिली। हालांकि इस्कॉन की ओर से साफ कर दिया गया कि यौन शोषण के आरोपों के चलते दास को पहले ही निकाला जा चुका है। भारत ने भी बयान जारी करते हुए हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी।

एयर मार्शल मिश्रा ने भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान संभाली

मुंबई एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा नेभारतीय वायुसेना (IAF) की वेस्टर्न एयर कमांड के कमांडर का पदभार संभाला. यह एक महत्वपूर्ण पद है, जो भारत की पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. बेंगलुरु, अमेरिका और यूके से ली एडवांस्ड ट्रेनिंग एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन किया गया था. उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव प्राप्त किया है. पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी के ग्रेजुएट एयर मार्शल मिश्रा ने बेंगलुरु के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, और यूनाइटेड किंगडम के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से एडवांस्ड ट्रेनिंग प्राप्त की है. एयर मार्शल मिश्रा ने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा का स्थान लिया है, जो 31 दिसंबर 2024 को रिटायर हो गए. भारतीय वायुसेना में निभाई कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं एयर मार्शल मिश्रा एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं. उन्होंने भारतीय वायुसेना में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. इनमें एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर से लेकर एयरक्राफ्ट और सिस्टम टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) के चीफ टेस्ट पायलट तक की जिम्मेदारियां शामिल हैं. उन्होंने दो अग्रिम वायुसेना ठिकानों की कमान संभाली और संचालन योजना और मूल्यांकन निदेशक, प्रिंसिपल डायरेक्टर (ASR), और एयर मुख्यालय में सहायक वायु स्टाफ प्रमुख (प्रोजेक्ट्स) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है. इसके अलावा, वे ASTE के कमांडेंट और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, संगठन, और प्रशिक्षण) के डिप्टी चीफ भी रह चुके हैं. इस पदभार से पहले, एयर मार्शल मिश्रा इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) के डिप्टी चीफ के रूप में कार्यरत थे.   क्या है वेस्टर्न एयर कमांड की भूमिका? वेस्टर्न एयर कमांड भारतीय वायुसेना का सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गठन है, जिसे राष्ट्र की पश्चिमी सीमाओं की रक्षा और संघर्ष के दौरान संचालन सहायता प्रदान करने का दायित्व सौंपा गया है.

मंदिर-मस्जिद विवाद पर ओवैसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा, शीर्ष अदालत से की बड़ी मांग

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में ओवैसी ने देश में पूजा स्थल कानून लागू करने की मांग की है। ओवैसी ने अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से 17 दिसंबर को याचिका दाखिल की। कानून को सख्ती से लागू करने की मांग ओवैसी ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार को कानून को प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है। ओवैसी के वकील ने हवाला दिया कि कई अदालतों ने हिंदू वादियों की याचिकाओं पर मस्जिदों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। उधर, मुस्लिम पक्ष की दलीलों में सांप्रदायिक सौहार्द और मस्जिदों की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के लिए 1991 के पूजा स्थल कानून को लागू करने की मांग की गई है। हिंदू पक्ष ने कानून की संवैधानिक वैधता को दी चुनौती हिंदू पक्ष का दावा है कि आक्रमणकारियों के हमले से पहले इन स्थानों पर मंदिर थे। कई याचिकाओं में पूजा स्थल कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। इसके खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। समिति ने मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद, दिल्ली के कुतुब मीनार के पास कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, मध्य प्रदेश में कमाल मौला मस्जिद समेत अन्य दरगाहों से जुड़े दावों को सूचीबद्ध किया है। समिति का कहना है कि कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं इन धार्मिक स्थलों के खिलाफ मुकदमों को सुविधाजनक बनाने के शरारती इरादे से दाखिल की गई। नए मुकदमे पर शीर्ष अदालत की रोक 12 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई याचिकाओं पर सुनवाई की और सभी अदालतों को नए मुकदमों पर विचार करने और धार्मिक स्थलों विशेषकर मस्जिदों और दरगाहों पर पुनः अधिकार के लिए लंबित मामलों में अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि चूंकि मामला इस अदालत में विचाराधीन है। इसलिए हम यह समझते हैं कि कोई नया मुकदमा दर्ज न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्षों द्वारा दायर लगभग 18 मुकदमों की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इनमें वाराणसी में ज्ञानवापी, मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और संभल में शाही जामा मस्जिद समेत 10 मस्जिदों के सर्वेक्षण की मांग की गई थी। अश्विनी उपाध्याय ने भी दाखिल की याचिका विशेष पीठ में न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन भी शामिल थे। पीठ ने छह याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें एक याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय की है। उन्होंने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि कानून के प्रावधान किसी व्यक्ति या धार्मिक समूह के पूजा स्थल को पुनः प्राप्त करने के लिए न्यायिक उपचार के अधिकार को छीन लेते हैं। क्या है पूजा स्थल अधिनियम? पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप में बदलाव से रोकता है। कानून के तहत कोई भी पूजा स्थल ठीक वैसा ही रहेगा जैसा जैसा वह 15 अगस्त 1947 को था। भाजपा सरकार पर साधा निशाना असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुवैत के नेताओं को संभल में मस्जिद के पास वक्फ की जमीन पर बनाई जा रही पुलिस चौकी दिखा सकते हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि संभल में जामा मस्जिद के पास पुलिस चौकी का निर्माण वक्फ की जमीन पर किया जा रहा है। हालांकि जिला मजिस्ट्रेट ने इस आरोप को खारिज कर दिया।

अगर पैसे नहीं भी हैं तो नहीं रुकेगा ट्रीटमेंट, राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं का ‘उपचार’ शुरू कर दिया

देहरादून राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं का ‘उपचार’ शुरू कर दिया है। जिसकी शुरुआत मेडिकल कालेजों से की गई है। स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार ने निर्देश दिए हैं कि राजकीय मेडिकल कालेजों में आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन को और अधिक दुरस्त किया जाए। जिसके लिए नई गाइड लाइन (एसओपी) उन्होंने जारी की है। गाइड लाइन के अनुसार किसी भी अस्पताल का यह दायित्व है कि इमरजेंसी में आने वाले हरेक मरीज को इमरजेंसी मेडिकल केयर उपलब्ध कराए। अगर मरीज के पास पैसे भी नहीं हैं तब भी चिकित्सक या अस्पताल उसके इलाज में न तो किसी तरह की देरी करेंगे और न ही इलाज से इन्कार करेंगे। पहली प्राथमिकता मरीज को तुरंत उपचार स्वास्थ्य सचिव ने सख्त हिदायत दी है कि डाक्टर की पहली प्राथमिकता मरीज को तुरंत उपचार उपलब्ध कराने की होनी चाहिए, ताकि उसे बचाया जा सके। स्वास्थ्य सचिव की आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन को लेकर राजकीय मेडिकल कालेजों के प्राचार्यों के साथ बैठक में इस विषय पर गहन मंथन किया गया। आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन पर लंबे विचार-विमर्श के बाद अस्पतालों के लिए एसओपी जारी की गई है। जिसके तहत ट्राइएज एरिया में मरीजों की त्वरित जांच, क्लीनिक प्रोटोकाल, डाक्युमेंटेशन और क्वालिटी एश्योरेंस आदि को लेकर एक विस्तृत गाइड लाइन बनाई गई है। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को 10 मिनट के भीतर इलाज मिलना सुनिश्चित किया जाएगा। इस संबध में लापरवाही होने पर संबंधित मेडिकल कालेज के एमएस या प्राचार्य की जवाबदेही होगी। यह दिए निर्देश आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता वाले किसी मरीज को बेड या विशेषज्ञ सेवा के अभाव में भी समुचित उपचार दिया जाएगा। आपातकालीन विभाग तत्काल उचित जीवन रक्षक देखभाल प्रदान करेगा। जिसमें भावनात्मक सुरक्षा और व्यक्ति-केंद्रित देखभाल शामिल होगी। आपातकालीन विभाग विशेषीकृत इकाई के रूप में कार्य करेगा। जहां जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली सभी स्थितियों में त्वरित और विविध आपातकालीन देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की व्यवस्था रहेगी। आनकाल फैकल्टी का यह दायित्व है कि वह ईएमओ को अपनी उपलब्धता और संपर्क विवरण के बारे में सूचित करे। उन्हें अपनी आनकाल ड्यूटी के तहत रोस्टर रजिस्टर में हस्ताक्षर करना होगा। रात के समय ड्यूटी रूम में अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहना होगा। किसी मरीज को देखने में हुई अनावश्यक देरी की स्थिति में इमरजेंसी प्रभारी/एमएस स्थिति की समीक्षा करेंगे। यदि कोई चूक सामने आती है तो दोषी ईएमओ, एसआर या संकाय सदस्य के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि आपातकालीन विभाग में तैनात कोई कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी निजी प्रतिष्ठान से न जुड़ा हो। तैनाती से पहले इस आशय का शपथ पत्र लिया जाए। अगर कोई कर्मचारी मरीजों को निजी नर्सिंग होम या डायग्नोस्टिक सेंटर भेजने में संलिप्त पाया जाता है तो उसे विभाग से हटा उचित कार्रवाई की जाएगी। इमरजेंसी विभाग किसी भी अस्पताल का चेहरा है। जहां मिलने वाली त्वरित, उचित और समन्वित देखभाल स्वास्थ्य प्रणाली में आम जनता का विश्वास बढ़ाती है। ऐसे में अपने दायित्व का सही ढंग से निर्वहन न कर रहे कर्मचारियों के प्रशिक्षण या उन्हें हटाने की आवश्यकता है। बिना किसी वाजिब कारण एक से दूसरे विभाग में भेजने पर मरीज को परेशानी होती है। इसे चिकित्सकीय लापरवाही के बराबर माना जाना चाहिए। मरीज के प्रारंभिक उपचार में वित्तीय बाधा नहीं आनी चाहिए। इस ओर दें ध्यान ट्राइएज प्रक्रिया : मरीज की स्थिति की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता देने के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण विकसित करें। शीघ्र उपचार को सुनिश्चित करें। क्लिनिकल प्रोटोकाल : आम आपात स्थितियों के उपचार के लिए दिशा-निर्देश स्थापित करें। प्रभावी परिणाम के लिए स्टाफ का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें। दस्तावेजीकरण : निरंतर देखभाल के लिए सटीक रिकार्ड की प्रक्रिया लागू करें। मरीज की शिकायतों का भी व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण करें। गुणवत्ता आश्वासन : नियमित आडिट और फीडबैक प्रणाली शामिल करें। एसओपी की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें। आपातकालीन देखभाल का नैतिक पक्ष त्वरित प्रतिक्रिया : निष्पक्षता के साथ शीघ्र प्रतिक्रिया दें और विशेषज्ञ देखभाल प्रदान करें। रोगी अधिकार व संचार : रोगियों के हितों और अधिकारों को प्राथमिकता दें। उनके या उनके परिवार के साथ ईमानदारी से संवाद करें। रोगी की स्थिति : रोग प्रबंधन के दौरान मरीज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखें। रोगी की गोपनीयता : रोगी की गोपनीयता का सम्मान करें और सुरक्षा करें।  

अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर रहे हैं, वे मुस्लिम बहुल बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के श्रमिक हैं: असम सीएम

गुवाहाटी बांग्लादेश में फैली अशांति के बीच वहां से कई लोग पलायन कर भारत आ रहे हैं। इस बीच असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि हाल के महीनों में बांग्लादेश से राज्य में आने वाले लोगों में से अधिकांश पड़ोसी देश के बहुसंख्यक समुदाय के हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि जो लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर रहे हैं, वे मुस्लिम बहुल बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के श्रमिक हैं, जो वहां संकट के बाद खराब स्थिति में हैं और वे उसी क्षेत्र में शामिल होने के लिए तमिलनाडु जाना चाहते हैं। बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग ध्वस्त हो गया असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बांग्लादेश में जो स्थिति है, उसके कारण वहां कपड़ा उद्योग ध्वस्त हो गया है। वहां बहुसंख्यक लेकिन हमारे देश में अल्पसंख्यक श्रमिक सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे तमिलनाडु में कपड़ा उद्योगों में जाने के लिए देश में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं और इन उद्योगों के मालिक उन्हें सस्ते श्रम के लिए आने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उस देश में हिंदू अल्पसंख्यक अब वहां अत्याचारों का सामना करने के बावजूद आने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, संभवतः इसलिए क्योंकि वे बहुत देशभक्त हैं। बांग्लादेशी हिंदू नहीं आया भारत: सरमा असम के सीएम ने कहा कि उन्होंने बहुत ही परिपक्व तरीके से व्यवहार किया है और पिछले पांच महीनों में कोई भी बांग्लादेशी हिंदू असम नहीं आया है। हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस देश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने में मदद करने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं। सीएम ने दावा किया कि स्थिति बहुत ही चिंताजनक है और केंद्र इसे लेकर बहुत चिंतित है। बांग्लादेश में अशांति के बाद से घुसपैठ में भारी वृद्धि हुई है और पिछले पांच महीनों में रोजाना 20 से 30 लोग अवैध रूप से असम और त्रिपुरा में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि असम सरकार इन घुसपैठियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है बल्कि उन्हें उनके अपने देश वापस भेज रही है। अवैध घुसपैठियों की गिरफ्तारी हो रही उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में फैली अशांति के बाद आतंकी नेटवर्क के सदस्यों पर कार्रवाई के बारे में सरमा ने कहा, “हम एनआईए और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में लगातार काम कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप असम और अन्य राज्यों में 23 लोगों की गिरफ्तारी और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया है।” उन्होंने कहा, “हमें आतंकी संगठन की जड़ों पर प्रहार करना है। अन्य एजेंसियों के साथ मजबूत समन्वय के साथ, हमारी पुलिस ने सफलता हासिल की है।”

नए साल पर US के न्यू ऑरलियन्स में बड़ा हमला, ट्रक के भीड़ में घुसने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल

न्यू ऑरलियन्स नए साल के पहले दिन ही अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स में बड़ा हादसा हुआ है। जानकारी के अनुसार न्यू ऑरलियन्स में भीड़ में एक ट्रक घुस गया, जिसमें कम से कम 10 लोगों के मौत की खबर है। अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है। ट्रक ने भीड़ को मारी टक्कर समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने शहर की एक सरकारी एजेंसी के हवाले से बताया कि न्यू ऑरलियन्स के फ्रेंच क्वार्टर में बुधवार की सुबह बोरबन स्ट्रीट पर एक ट्रक के भीड़ में घुसने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। चालक ने लोगों पर की फायरिंग प्रारंभिक तौर पर इस हादसे को लेकर तत्काल कोई अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इससे पहले सीबीएस न्यूज ने गवाहों का हवाला देते हुए बताया कि एक ट्रक तेज गति से भीड़ में घुस गया था, जिसके बाद चालक ने बाहर निकलकर बंदूक से फायरिंग शुरू कर दी। बताया जाता है कि चालक की फायरिंग के बाद पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। घटना को लेकर पुलिस ने कही ये बात इस घटना को लेकर न्यू ऑरलियन्स पुलिस विभाग के प्रवक्ता ने सीबीएस न्यूज को बताया कि शुरुआती रिपोर्ट से पता चलता है कि एक कार ने लोगों के एक समूह को टक्कर मारी होगी। चोटों के बारे में पता नहीं है, लेकिन कुछ लोगों के मारे जाने की खबर है।” पुलिस विभाग ने टिप्पणी के लिए रॉयटर्स के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।

नए साल में मोदी सरकार ने किसानों को तोहफा, खाद पर सब्सिडी बढ़ी

नई दिल्ली नए साल में मोदी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक किसानों के नाम रही है। साल के पहले दिन बुधावार को हुई बैठक में डीएपी फर्टिलाइजर के लिए स्पेशल पैकेज को मंजूरी दी गई। इसके तहत फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों को सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा यह सब्सिडी (स्पेशल पैकेज) 31 दिसंबर 2025 तक दी गई है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि किसानों को डीएपी का 50 किलो का बैग 1,350 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। यह ‘वन टाइम पैकेज’ काफी महत्वपूर्ण है। पड़ोस के देशों में डीएपी का 50 किलो का बैग तीन हजार रुपये से ज्यादा में मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में भले ही कैसे भी स्थिति आ जाए हमें अपने किसानों को सुरक्षित करना है। उनके ऊपर बोझ नहीं डालना है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की है कि डीएपी के नाम पर कुछ लोग किसानों को ठगने का प्रयास करेंगे। मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि अगर कोई ऐसा करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस पैकेज पर लगभग 3,850 करोड़ रुपये की लागत होगी। साल 2014 से लेकर अब तक कोविड-19 का वह दौर भी आया जब स्थिति काफी खराब थी। लेकिन, हमारी सरकार और पीएम मोदी ने सुनिश्चित किया है कि किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव का खामियाजा न उठाना पड़े। 2014-24 तक उर्वरक सब्सिडी 11.9 लाख करोड़ रुपये थी जो 2004-14 के दौरान दी गई सब्सिडी से दोगुनी से भी अधिक है। कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक जारी रखने को मंजूरी दी। इस निर्णय से 2025-26 तक देश भर के किसानों के लिए न रोकी जा सकने वाली प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के जोखिम कवरेज में मदद मिलेगी। इसके अलावा, योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी के उपयोग से पारदर्शिता और दावा गणना और निपटान में वृद्धि होगी। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 824.77 करोड़ रुपये की राशि के साथ नवाचार और प्रौद्योगिकी कोष (एफआईएटी) के निर्माण को भी मंजूरी दी है।

सरकार ने आज से “वन नेशन, वन सब्‍सक्रिप्‍शन” योजना शुरू की, डिजिटल ज्ञान संसाधनों तक निर्बाध पहुंच

नईदिल्ली सरकार ने आज से वन नेशन वन ससब्‍सक्रिप्‍शन-ओएनओएस योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्‍य विद्यार्थियों को सिंगल सब्‍सक्रिप्‍शन प्‍लेटफार्म के तहत शोधपत्रों, जरनलों और शैक्षिक सामग्री सहित व्‍यापक डिजिटल ज्ञान संसाधनों तक निर्बाध पहुंच उपलब्‍ध कराना है। इस योजना से अलग-अलग जगह सब्‍सक्रिप्‍शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ज्ञान सबको सुलभ होगा। विश्‍वविद्यालयों और आईआईटी सहित सरकारी सहायता प्राप्‍त उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के एक करोड 80 लाख विद्यार्थियों को इस पहल के अंग के रूप में दुनिया भर के शीर्ष जरनल में प्रकाशित शोध पत्रों को देखने की सुविधा मिलेगी। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने बताया कि योजना तीन चरणों में लागू होगी। फेज-वन में हमने सारी रिसर्च सैंट्रल और स्‍टेट गवर्मेंट की जितनी रिसर्च इन्‍स्‍टीट्यूट, यूनिवर्सिटीज़, कॉलेजिस सबको मिलाया। उसको एक्‍सपीरियंस करके हम फेज-टू में हमारी जो प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजिस हैं उनको हम देखेंगे कि कैसे मिलाया जाए फेज टू में और फेज-थ्री जब होगा कि जब आपके कोई भी नागरिक देश का अगर वो नॉलेज को एक्सिस करना चाहता है कर पाए तो वो फेज-थ्री होगा। तो पहले तीन साल हमने फेज-वन किया है उसके बाद फेज-टू और उसके बाद फेज-थ्री। केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने पिछले वर्ष 25 नवम्‍बर को वन नेशन, वन सब्‍सक्रिप्‍शन योजना को स्‍वीकृति दी थी। मंत्रिमंडल के फैसले के दौरान केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने योजना के बारे में विस्‍तार से बताया था। उन्‍होंने बताया कि ओएनओएस योजना के तहत तीन वर्ष की अवधि के लिए छह हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। यह चुनिंदा उत्‍कृष्‍ट ओपन एक्‍सेस जर्नलों में प्रकाशन के वास्‍ते लाभार्थी लेखकों के लिए सालाना एक सौ पचास करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता भी उपलब्‍ध कराएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर 2024 को इस दृष्टिकोण के अनुरूप वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य देश के सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) और केंद्र सरकार के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के सभी छात्रों,  शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की पत्रिकाओं और लेखों तक पहुंच प्रदान करके ज्ञान की बाधाओं को तोड़ना है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के शैक्षणिक और अनुसंधान समुदाय सर्वोत्तम वैश्विक संसाधनों से लैस हों, नवाचार को बढ़ावा दें और विभिन्न विषयों में अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ाएं। वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा की आधारशिला है। यह पहल विकासशील भारत@2047 विजन का एक प्रमुख घटक है। यह रोडमैप अत्याधुनिक अनुसंधान, तकनीकी उन्नति और आत्मनिर्भर प्रगति द्वारा संचालित एक अग्रणी वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उभरने की कल्पना करता है। ऐसी पहलों के माध्यम से, भारत ज्ञान की अपनी समृद्ध विरासत का निर्माण करने की तैयारी कर रहा है, जिससे वह वैश्विक नवाचार और खोज में सबसे आगे खड़ा हो सके। एक अच्‍छा जनरल की एक्सेस कितनी कम रहती इसलिए प्रधानमंत्री जी ने इसको एक नए स्‍वरूप में डाला है कि क्‍यों ना हम सभी यूनिवर्सिटी अपने रिसोर्सिस को पूल कर लें, कॉमन कर लें। कॉमन करके जितने विश्‍व प्रसिद्ध जनरल हैं उन सबको खरीदें उनका सब्सक्रिप्‍शन करें और उसके बाद में देशभर में जितने भी हमारे एजुकेशनल इन्‍स्‍टीट्यूशंस हैं उन सब में वो उपलब्‍ध हो जाएं। इट्स ए वेरी इंट्रेस्टिंग थॉट एंड दिस इज़ लेट टू द सिक्‍स थाउजेंड करोड़, प्रोग्राम फॉर वन नेशन, वन सब्‍सक्रिप्‍शन।

मंदिर-मस्जिद की गई टिप्पणी सुर्खियों में, संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने अपनी संपादकीए में बयान का समर्थन किया

नई दिल्ली देश में इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के मंदिर-मस्जिद की गई टिप्पणी सुर्खियों में है। इसी बीच संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने अपनी संपादकीए में मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया है। पांचजन्य के संपादकीय में कहा गया है कि मोहन भागवत का हालिया बयान समाज को इस मुद्दे पर समझदारी भरा रुख अपनाने का स्पष्ट संदेश देता है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि भागवत के बयान ने देश में चल रही अनावश्यक बहस और भ्रामक प्रचार से आगाह किया है। संपादकीय में सोशल मीडिया के लिए चिंता पांचजन्य में प्रकाशित संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि मंदिर हिंदुओं के विश्वास का केंद्र होते हैं, लेकिन राजनीति के लाभ के लिए इनका इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। साथ ही संपादकीय में इस बात पर चिंता जताई गई कि आजकल मंदिर और मस्जिद के मुद्दे पर अनावश्यक बहस और भ्रामक प्रचार एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है, जिसे सोशल मीडिया ने और बढ़ा दिया है। क्यों चर्चा में है मोहन भागवत, एक नजर.. गौरतलब है कि हाल ही में देश में मस्जिदों को लेकर बढ़ते विवाद और मस्जिदों के सर्वे की मांग के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बीते दिनों पुणे में एक कार्यक्रम में कहा था कि राजनीतिक फायदे के लिए मंदिर-मस्जिद के मुद्दों को उठाना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर हिंदुओं के आस्था का मामला था लेकिन इसके बाद रोज नए मुद्दे उठाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने तेज आवाज में ऐसो लोगों को आगाह किया था कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर हिंदू समाज के नेता बन सकते हैं लेकिन यह गलत है। अंग्रेजी मुखपत्र ऑर्गनाइजर में संभल विवाद की बातें बता दें कि इससे पहले आरएसएस के अंग्रेजी मुखपत्र ऑर्गनाइजर ने संभल मस्जिद विवाद पर अपनी कवर स्टोरी की थी। इसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि विवादित धार्मिक स्थलों और संरचनाओं का वास्तविक इतिहास जानना आवश्यक है। साथ ही पत्रिका में यह भी कहा गया था कि जिन धार्मिक स्थलों पर आक्रमण हुआ या उन्हें ध्वस्त किया गया, उनकी सच्चाई जानना सभ्यतागत न्याय के लिए और सभी समुदायों के बीच शांति और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है।  

2025 में रक्षा मंत्रालय साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करेगा

नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय ने 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किया है। मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि 2025 में रक्षा मंत्रालय साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। मंत्रालय सैन्य क्षमता के तीव्र विकास के लिए अधिग्रहण प्रक्रियाओं को भी सरल और समयबद्ध बनाएगा। उन्होंने बताया कि रक्षा सुधार से एकीकृत सैन्य कमान की स्थापना में सुविधा होगी। उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सुधारात्मक उपायों को सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार ऐसे बल में बदलने के लिए लागू किया जाएगा, जो बहु-क्षेत्रीय एकीकृत संचालन में सक्षम होगा। मंत्रालय ने कहा कि 2025 में साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, हाइपरसोनिक और रोबोटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। आधुनिकीकरण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुधार का वर्ष सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यह देश की रक्षा तैयारियों में अभूतपूर्व प्रगति की नींव रखेगा और इस प्रकार 21वीं सदी की चुनौतियों के बीच राष्ट्र की सुरक्षा एवं संप्रभुता सुनिश्चित करने की तैयारी करेगा। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में 2025 को सुधार वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। भारत खुद की रक्षा करने से कहीं अधिक करने की स्थिति में:आनंद महिंद्रा इस बीच महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा कि भारत वैश्विक गठबंधनों में बदलाव के अवसर का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक क्षमता को बढ़ा सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत सिर्फ अपनी रक्षा करने के अलावा और भी बहुत कुछ करने की स्थिति में है। समूह के कर्मचारियों को नववर्ष के अपने संदेश में महिंद्रा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध अधिकाधिक लेन-देन वाले बन सकते हैं, जो राष्ट्रीय हित तथा राष्ट्रीय ताकत के दम पर संचालित होंगे।  

कॉलेजियम के हाईकोर्ट में जजों के करीबी रिश्तेदारों की नियुक्ति के खिलाफ तैयार किए जा रहे प्रस्ताव की सराहना की

नई दिल्ली कांग्रेस नेता और प्रसिद्ध वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के हाईकोर्ट में जजों के करीबी रिश्तेदारों की नियुक्ति के खिलाफ तैयार किए जा रहे प्रस्ताव की सराहना की है। उन्होंने कहा इस प्रस्ताव को जल्द लागू किया जाए। क्योंकि अब न्यायिक नियुक्तियों का कोई उद्देश्य नहीं रह गया है। एक्स पर पोस्ट में कांग्रेस नेता ने लिखा कि यदि सच है, तो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के विचाराधीन दोनों प्रस्ताव क्रांतिकारी और अच्छे हैं। इन्हें जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक नियुक्तियों की वास्तविकता मूल रूप से कल्पना की तुलना में बहुत अधिक अस्पष्ट और बहुत अधिक गैर-उद्देश्यपूर्ण है। आपसी पीठ खुजाना, चाचा जज, पारिवारिक वंश आदि दूसरों का मनोबल गिराते हैं और कोर्ट की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि कहना आसान है, करना मुश्किल। अभी तक हम हाईकोर्ट में जज के रिश्तेदारों के रूप में वकील रिश्तेदारों के अभ्यास पर प्रतिबंध लगाने में असमर्थ हैं। यह व्यवस्था सुधार के लिए वांछनीय आवेगों से अधिक मजबूत साबित हुई है। उन्होंने कहा कि मैंने दशकों पहले लिखा था कि कॉलेजियम के न्यायाधीशों को खुद को छिपाना चाहिए और उन न्यायाधीशों की अदालतों में बैठना चाहिए जिन्हें पदोन्नति के लिए चुना गया है या पदोन्नति से पहले कार्रवाई कर रहे वकीलों को यह मौका दिया जाए। जैसे पुराने समय के कुछ सुल्तानों ने अपने जागीर की वास्तविक समस्याओं को जानने के लिए किया था। हम सभी सीवी और वास्तविकता के बीच कागजी मूल्यांकन बनाम अदालत के प्रदर्शन के बीच के अंतराल पर चकित होंगे। अब प्रस्तावित साक्षात्कार मेरे सुझाव के अनुसार अच्छे नहीं है, लेकिन कम से कम दूसरा सबसे अच्छा है। हालांकि छिपे हुए आश्चर्य की जांच पूरी तरह से अवास्तविक नहीं है। यह है कॉलेजियम का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव के तहत मौजूदा या पूर्व संवैधानिक न्यायालय के जजों के परिवार के सदस्यों को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश फिलहाल रोकी जा सकती है। सूत्रों की माने तो ऐसा इसलिए किया जा रहा क्योंकि एक आम धारणा है कि इन वकीलों को पहली पीढ़ी के वकीलों की तुलना में जज बनने की प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलती है। सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के करीबी रिश्तेदारों की नियुक्ति के खिलाफ विचार कर सकता है। कॉलेजियम हाईकोर्ट के कॉलेजियम को ऐसे उम्मीदवारों की सिफारिश न करने का निर्देश देने पर विचार कर सकता है, जिनके माता-पिता या करीबी रिश्तेदार सर्वोच्च न्यायालय या हाईकोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश रहे हों। कॉलेजियम में सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस बी आर गवई, सूर्यकांत, हृषिकेश रॉय और ए एस ओका शामिल हैं। वे जानते हैं कि कुछ योग्य उम्मीदवार, जो वर्तमान या पूर्व सुप्रीम कोर्ट या हाकोर्ट जजों के करीबी रिश्तेदार हैं, इस प्रस्ताव से वंचित हो सकते हैं।  

नए साल के मौके पर मणिपुर सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया, अब मिलेगा 39% महंगाई भत्ता

मणिपुर नए साल के मौके पर मणिपुर सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 7% की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद अब कर्मचारियों को 39% महंगाई भत्ता मिलेगा, जो पहले 32% था। सरकार के इस कदम से राज्य के 1 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा होगा। केंद्र से अब भी कम DA हालांकि, यह महंगाई भत्ता अभी भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मुकाबले 14% कम है। केंद्र के कर्मचारी वर्तमान में 53% DA प्राप्त कर रहे हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता हर छह महीने में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत बढ़ाया जाता है। माना जा रहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी जल्द ही बढ़ सकता है। विस्थापितों के लिए बिना गारंटी लोन मणिपुर के मुख्यमंत्री ने राज्य में विस्थापित लोगों की सहायता के लिए भी अहम पहल की है। मुख्यमंत्री उद्यमिता सहायता योजना के तहत जातीय हिंसा के कारण विस्थापित 426 लोगों को 50,000 रुपये तक का कर्ज बिना किसी गारंटी के दिया जा रहा है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने सात स्टार्टअप्स की पहचान की है जो 432 विस्थापित लोगों को रोजगार देंगे। इसके अलावा, करीब 500 युवाओं को एयर इंडिया और इंडिगो में केबिन क्रू के रूप में शामिल होने के लिए दिल्ली में आवासीय कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मणिपुर सरकार का विकास पर जोर सीएम एन बीरेन सिंह ने बताया कि राज्य सरकार लगातार नई पहल कर रही है ताकि कर्मचारियों, उद्यमियों और युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। इस तरह की योजनाएं न केवल आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet