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बच्ची की खांसी के कारण एक यात्री का गुस्सा बढ़ गया कि उसने विमान में हंगामा करना शुरू कर दिया, करनी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

नई दिल्ली हाल ही में एक विमान में हुई इमरजेंसी लैंडिंग ने सभी को चौंका दिया। दरअसल, उड़ान के दौरान एक दस साल की बच्ची की खांसी के कारण एक यात्री का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उसने विमान में हंगामा करना शुरू कर दिया। बताया गया है कि यह महिला इतनी नाराज हो गई कि उसने क्रू मेंबर्स को चाकू मारने की धमकी दी और फिर फ्लाइट को उतारने का फैसला करना पड़ा। घटना में महिला ने बच्ची को धमकी दी और उसके पीछे-पीछे शौचालय तक गई, फिर बच्ची की मां को गालियाँ देने लगी। स्थिति तब और बिगड़ गई जब महिला ने विमान के दरवाजे का हैंडल तोड़ दिया और यात्रियों पर जूते फेंके। इससे कई यात्री तनाव में आ गए, जिनमें से कुछ बीमार पड़ गए। पायलट ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी लैंडिंग का निर्णय लिया। एयरपोर्ट पर पहले से पुलिस, अग्निशमन दल और मेंटेनेंस टीम तैयार थी। घटना के बाद महिला को गिरफ्तार कर लिया गया और यात्रियों से बयान लिए गए। विमान कंपनी इजीजेट ने माफी मांगी और इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया।

नए साल में मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने विभिन्न योजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली 1 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में किसानों के लिए कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं और पैकेजों को मंजूरी दी। इन फैसलों से किसानों को राहत मिल सकती है, खासकर उर्वरकों और फसल बीमा से जुड़े मामलों में। डीएपी उर्वरक कंपनियों के लिए स्पेशल पैकेज केंद्र सरकार ने डीएपी (डायअमोनियम फास्फेट) उर्वरक बनाने वाली कंपनियों के लिए एक स्पेशल पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के तहत कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी के अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। डीएपी उर्वरक की मांग भारत में बहुत अधिक है, लेकिन इसके अधिकतर कच्चे माल का आयात किया जाता है, खासकर चीन, सऊदी अरब और मोरक्को जैसे देशों से। वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण डीएपी की लागत बढ़ी है, जिससे किसानों के लिए उर्वरक की कीमतें भी बढ़ी हैं। सरकार ने इन कंपनियों को वित्तीय सहायता देने का फैसला लिया है ताकि उर्वरक की कीमतों को स्थिर रखा जा सके और किसानों को राहत मिले। यह पैकेज 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा, जिससे अगले कुछ वर्षों तक किसानों को महंगे उर्वरकों से राहत मिलेगी और उनकी उत्पादन लागत में कमी आएगी। फसल बीमा योजना में किए सुधार केंद्र सरकार ने किसानों के लिए फसल बीमा योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, बीमारी या अन्य कारणों से फसल को हुए नुकसान के लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। अब, सरकार ने इस योजना के नियमों को संशोधित करने का निर्णय लिया है, ताकि यह किसानों के लिए और अधिक सुलभ हो। सरकार के मुताबिक, फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम की दर को कम किया जाएगा और बीमा प्राप्त करना किसानों के लिए आसान बनाया जाएगा। पहले जहां किसानों को बीमा लेने के लिए जटिल प्रक्रिया का सामना करना पड़ता था, वहीं अब इसे सरल बनाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार इस योजना में कवरेज की सीमा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, ताकि किसानों को और अधिक सहायता मिल सके। इस कदम से छोटे और मझले किसानों को फायदा होने की संभावना है, क्योंकि उन्हें कम खर्च में अधिक बीमा कवर मिलेगा और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्राप्त होगी। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) का सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से किया मना इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के साथ बातचीत करने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने एसकेएम को 3 जनवरी 2025 को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था, लेकिन एसकेएम ने इसे ठुकरा दिया। एसकेएम का कहना है कि वे किसी भी न्यायालयिक हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करते क्योंकि उनकी लड़ाई केंद्र सरकार के साथ नीतिगत मुद्दों पर है, और इसमें न्यायालय की कोई भूमिका नहीं हो सकती। एसकेएम ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने संघर्ष को न्यायालय से बाहर, सीधे तौर पर सरकार से करेंगे। एसकेएम के नेताओं का कहना है कि वे सरकार से किसानों के लिए ज्यादा राहत देने और उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत करेंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के साथ कोई भी बैठक नहीं करेंगे। खनौरी बॉर्डर पर महापंचायत की घोषणा संयुक्त किसान मोर्चा ने 4 जनवरी 2025 को खनौरी बॉर्डर पर एक महापंचायत बुलाने की घोषणा की है। इस महापंचायत में पंजाब और आसपास के राज्यों के किसानों को आमंत्रित किया गया है। किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने इस महापंचायत का आयोजन किया है, और उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में किसानों को महत्वपूर्ण संदेश दिए जाएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि इस महापंचायत में आगामी आंदोलन की रणनीतियों और किसानों की समस्याओं को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, किसान नेताओं का कहना है कि महापंचायत के माध्यम से वे सरकार को यह संदेश देंगे कि किसानों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उनके हितों के खिलाफ किसी भी नीतिगत फैसले को मंजूरी नहीं दी जाएगी। किसानों के संघर्ष की निरंतरता किसान आंदोलन ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण मोड़ लिए हैं, और अब यह आंदोलन कृषि नीतियों के विरोध में केंद्र सरकार से सीधे संवाद की ओर बढ़ रहा है। जबकि सरकार ने अब तक कई फैसले किसानों के पक्ष में लिए हैं, एसकेएम और अन्य किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार उनके द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर पूरी तरह से ध्यान दे और ठोस कदम उठाए। इस महापंचायत में किसानों को आगामी फैसलों और रणनीतियों पर बातचीत करने का अवसर मिलेगा। एसकेएम के नेता इसे किसानों की आवाज को और अधिक मजबूत करने के एक मौके के रूप में देख रहे हैं। सरकार के फैसलों का असर सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों का असर किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि ये न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि उन्हें कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए आवश्यक संसाधन और सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। विशेषकर डीएपी की सब्सिडी और फसल बीमा में सुधार से किसानों को सीधी राहत मिल सकती है, जो उनकी आय को स्थिर रखने में मदद करेगा। सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र के सुधारों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है, जो किसानों की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

नए साल में भीषण एक्सीडेंट: दर्शन के लिए निकला था परिवार, हुआ भीषण सड़क दुर्घटना, चार लोगों की मौत

नई दिल्ली नए साल की खुशियां महाराष्ट्र में एक दुखद हादसे से फीकी पड़ गईं। 1 जनवरी को अक्कलकोट के मिंदारगी के पास हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि सात से आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा इतना भयावह था कि सड़क पर बिखरे मंजर ने मौके पर मौजूद हर शख्स को हिला कर रख दिया। श्रद्धालुओं की यात्रा में आया मातम घटना उस समय हुई जब नांदेड़ जिले का एक परिवार स्कॉर्पियो गाड़ी से अक्कलकोट के श्री स्वामी समर्थ मंदिर में दर्शन के लिए गंगापुर जा रहा था। मिंदारगी के पास सामने से आ रहे वाहन ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में चार श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें दो पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। घायलों का इलाज और राहत कार्य हादसे की सूचना मिलते ही अक्कलकोट पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। घायलों को तत्काल अक्कलकोट के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। दुर्घटना के कारण सड़क पर यातायात ठप हो गया था। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात को बहाल किया।   दुर्घटना की वजह का पता लगाने की कोशिश पुलिस ने बताया कि दुर्घटना की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा ड्राइवर की लापरवाही का नतीजा था या फिर खराब मौसम, धुंध, या सड़क की स्थिति इसके पीछे कारण थी। सड़क सुरक्षा की अहमियत यह हादसा सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर एक बड़ा संदेश देता है। नए साल की शुरुआत में हुई इस घटना ने सभी को गहरा झटका दिया है और परिवारों के लिए यह खुशी का दिन मातम में बदल गया।

भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024′ आज से लागू हो गया, 90 साल पुराना कानून होगा खत्म

नई दिल्ली भारत सरकार द्वारा विमान निर्माण और डिजाइन को प्रोत्साहन देने और विमानन क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाने के लिए बनाए गए ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ आज से लागू हो गया है। यह अधिनियम 90 वर्ष पुराने ‘विमान अधिनियम, 1934’ का स्थान लेगा। सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर 1 जनवरी, 2025 से इस अधिनियम को प्रभावी करने की घोषणा की। संसद ने इसे पिछले साल दिसंबर महीने की शुरुआत में मंजूरी दी थी। इस कानून का उद्देश्य विमान डिजाइन, निर्माण, रखरखाव, स्वामित्व, उपयोग, संचालन, बिक्री, निर्यात और आयात के नियमन और नियंत्रण को सुनिश्चित करना है। साथ ही यह विमानन क्षेत्र में सुधार और पारदर्शिता लाने का प्रयास करता है। नए कानून की प्रमुख विशेषताएं: अधिनियम विमान निर्माण और डिजाइन में भारतीय कंपनियों को सशक्त बनाएगा। यह पुराने कानून में मौजूद 21 बार संशोधन की गई जटिलताओं को दूर करेगा। भारत के तेजी से बढ़ते नागरिक विमानन बाजार को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने में सहायक होगा। यह अधिनियम केंद्र सरकार को वायुयान निर्माण, डिजाइन, मेंटेनेंस, स्वामित्व, इस्तेमाल, परिचालन, बिक्री, निर्यात और आयात पर पूरा नियंत्रण प्रदान करता है। वायुयान से जुड़े अन्य मामलों में भी नियमन और नियंत्रण का अधिकार केंद्र सरकार का होगा। अधिनियम में विमान को खतरनाक तरीके से उड़ाने, विमान में हथियार या विस्फोटक ले जाने, हवाई अड्डों के पास कूड़ा-कचरा फैलाने या जानवरों का वध करने को अपराध माना गया है। इन अपराधों के लिए तीन साल तक की कैद, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून न केवल भारत को विमानन उद्योग में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी एक मजबूत स्थिति प्रदान करेगा। ‘भारतीय वायुवान अधिनियम, 2024’ का लागू होना भारतीय विमानन क्षेत्र में सुधार और इनोवेशन का संकेत है। इससे देश में न केवल विमान निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि रोजगार और तकनीकी उन्नति के लिए भी नए द्वार खुलेंगे।

भारत में हेरोइन तस्करी के मामले में पकड़े गए आठ पाकिस्तानी नागरिकों को दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा मिली

मुंबई विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने 2015 में अरब सागर के रास्ते भारत में हेरोइन तस्करी के मामले में पकड़े गए आठ पाकिस्तानी नागरिकों को दोषी ठहराते हुए 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 600 समुद्री मील की दूरी तय कर पाकिस्तान के कराची से भारत की समुद्री सीमा में प्रवेश करने वाले जहाज “अल यासिर” से जुड़ा हुआ है। इस जहाज को भारतीय तटरक्षक बल ने 232 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। इस हेरोइन की कीमत 6.93 करोड़ रुपये आंकी गई थी। पकड़े गए आरोपी आरोपियों में अलीबख्शा सिंधी, मक्सूद मासिम, मोहम्मद नाथो, मोहम्मद अहमद इनायत, मोहम्मद यूसुफ गगवानी, मोहम्मद यूनुस सिंधी, मोहम्मद गुलहसन सिंधी और गुलहसन सिद्दीक सिंधी शामिल हैं। ये सभी आरोपी 2015 से मुंबई के जेल में बंद हैं। घटना का विवरण 18 अगस्त 2022 को इस मामले से जुड़े 11 बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम येलो गेट पुलिस स्टेशन से मुंबई सिविल कोर्ट, काला घोड़ा ले जाए गए। 2015 में इन्हीं ड्रमों में 232 किलोग्राम हेरोइन भरकर “अल यासिर” जहाज के जरिए पाकिस्तान से भारतीय सीमा में लाया गया था। तटरक्षक बल की कार्रवाई भारतीय तटरक्षक बल के जहाज “संग्राम” के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर ने विशेष एनडीपीएस कोर्ट में पेश होकर घटना का पूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह “अल यासिर” को पकड़ा गया और उसमें मौजूद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा, “कोर्ट में मौजूद आरोपी वही हैं, जिन्हें हमने पाकिस्तानी जहाज ‘अल यासिर’ पर पाया था।” सजा का ऐलान विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने सभी आरोपियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) के तहत दोषी करार देते हुए 20 साल की कठोर सजा सुनाई। इस फैसले से भारत में ड्रग तस्करी पर कड़ा संदेश गया है। यह मामला भारतीय तटरक्षक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का प्रमाण है, जिसने नशीले पदार्थों की इस बड़ी खेप को भारतीय बाजार में पहुंचने से पहले ही रोक लिया।

गाजा में बीते 14 महीने से जारी जंग, साल के पहले दिन इजरायली हमलों में 9 लोगों की मौत

देइर अल-बलाह इजरायल और गाजा में बीते 14 महीने से जारी जंग का फिलहाल कोई अंत होता नजर नहीं आ रहा है। नया साल शुरू होने की खुशी में एक तरफ जहां पूरी दुनिया जश्न मना रही है, वहीं दूसरी तरफ गाजा के लोगों के लिए नया साल कोई राहत लेकर नहीं आया है। गाजा के अधिकारियों ने बुधवार को बताया है कि ताजा इजरायली हमलों में कम से कम नौ फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है। इनमें से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। बुधवार को इजरायल ने उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके पर एक घर पर हमला किया। जंग के बीच गाजा का यह इलाका सबसे अलग-थलग पद चुका है और बुरी तरह से नष्ट हो चुका है। जबालिया इलाके में इजरायल बीते अक्टूबर की शुरुआत से ही एक बड़ा अभियान चला रहा है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस हमले में एक महिला और चार बच्चों सहित सात लोग मारे गए और कम से कम एक दर्जन से ज्यादा लोग लोग घायल हुए हैं। वहीं गाजा के अल-अक्सा शहीद अस्पताल ने बताया कि बुधवार को मध्य गाजा में बुरेज शरणार्थी शिविर में एक और हमले में एक महिला और एक बच्चे की मौत हो गई है। 45 हजार फिलिस्तीनियों की हो चुकी है मौत गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था जिसमें 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए थे। हमास ने लगभग 250 लोगों को बंदी भी बना लिया था। उसके बाद से इजरायल ने गाजा में हमास के लड़ाकों को निशाना बनाकर हमले किए हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जंग की शुरुआत से इजराइल के हमलों में 45,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है। हैं। मंत्रालय का कहना है कि मरने वालों में आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं। हमास को दोषी ठहराता है इजरायल वहीं इजराइली सेना का कहना है कि वह सिर्फ हमास के आतंकियों को निशाना बनाती है। इजरायल नागरिकों की मौतों के लिए हमास को दोषी ठहराती है। इजरायल ने कहा है कि हमास घनी आबादी वाले क्षेत्रों से हमले करता है जिसकी वजह से लोगों की मौत हो रही है। इजरायली सेना ने कहा है कि उसने अब तक हमास के 17,000 आतंकियों को मार गिराया है।

26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को जल्द लाया जायेगा भारत, प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका तैयार

मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26/11 आतंकी हमले में शआमिल रहा पाकिस्तान मूल का कनाडाई बिजनेसमैन तहव्वुर राणा को जल्द ही भारत को सौंपा जा सकता है। इसके लिए डिप्लोमैटिक चैनल्स पर काम शुरू हो गया है। अमेरिका की एक कोर्ट तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को जायज बता चुकी है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण को लेकर बातचीत चल रही है।  रिपोर्ट के अनुसार, तहव्वुर राणा को राजनयिक माध्यमों से भारत लाने की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त 2024 में, नौवें सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय ने फैसला सुनाया कि तहव्वुर राणा दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। अमेरिकी पैनल ने दी प्रत्यर्पण को लेकर जानकारी पैनल ने जिला न्यायालय द्वारा तहव्वुर हुसैन राणा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करने के निर्णय की पुष्टि की, जिसमें मुम्बई में आतंकवादी हमलों में कथित भागीदारी के लिए राणा को भारत को प्रत्यर्पित करने योग्य घोषित करने के मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के निर्णय को चुनौती दी गई थी। पैनल ने यह भी माना कि भारत ने मजिस्ट्रेट जज के इस निष्कर्ष के समर्थन में पर्याप्त सक्षम साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं कि राणा ने आरोपित अपराध किए हैं। मुंबई पुलिस ने 26/11 हमलों के सिलसिले में 405 पन्नों की चार्जशीट में राणा का नाम शामिल किया है। राणा पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेटिव होने का आरोप है। प्रत्यर्पण को लेकर क्या हैं पेच? अदालत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि में Non Bis is Idem एक अपवाद है, जो कि तब लगा होता है, जब आरोपी को उसी अपराध के लिए पहले दोषी ठहराया जा चुका हो, या बरी किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि राणा के खिलाफ भारत में लगाए गए आरोप अमेरिकी अदालतों में उनके खिलाफ चलाए गए मामलों से अलग हैं, इसीलिए नॉन बिस, इन आइडम अपवाद लागू नहीं होता है। बता दें कि 26 नवंबर 2011 को मुंबई में हुई हमलों के लगभग एक साल बाद FBI ने शिकागो में राणा को गिरफ्तार किया था। राणा और उसके साथी कोलमैन हेडली ने मिलकर मुंबई हमलों के लिए जगहों की रेकी की थी, और पाकिस्तान के आतंकवादियों को अंजाम देने के लिए एक खाका तैयार किया गया है। तहव्वुर राणा के खिलाफ सबूत अमेरिकी अदालत ने राणा के प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज कर दी, जिसमें भारत द्वारा उसके खिलाफ पर्याप्त सबूतों का हवाला दिया गया। उसका नाम 26/11 हमलों के लिए मुंबई पुलिस की चार्जशीट में शामिल है। उस पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है। राणा ने कथित तौर पर मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली की मुंबई में संभावित ठिकानों की टोह लेने में मदद की थी। आरोपपत्र में हेडली के साथ मिलकर इन हमलों की योजना बनाने में उसकी संलिप्तता का विवरण दिया गया है। गैर-बिस इन आइडेम क्लॉज नहीं होंगे लागू अदालत ने कहा कि भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि में गैर-बिस इन आइडेम क्लॉज यहां लागू नहीं होता है। यह क्लॉज उस स्थिति में प्रत्यर्पण को रोकता है जब किसी व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए कहीं और मुकदमा चलाया गया हो। हालांकि, राणा के खिलाफ भारत और अमेरिका में आरोप अलग-अलग हैं, इसलिए यह अपवाद अप्रासंगिक है। मुंबई हमलों के एक साल बाद शिकागो से गिरफ्तार हुआ राणा मुंबई आतंकी हमलों के करीब एक साल बाद FBI ने राणा को शिकागो में गिरफ्तार किया था। अमेरिका में आरोपों से बरी होने के बावजूद, भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के कारण वह हिरासत में है। 26/11 की पूरी प्लानिंग तहव्वुर राणा और डेविड कोलमैन हेडली ने मिलकर मुंबई को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी आतंकवादियों के लिए एक योजना बनाई। उनके ब्लूप्रिंट में हमलों के लिए प्रमुख स्थानों की पहचान की गई थी। वर्तमान में, राणा लॉस एंजिल्स की जेल में बंद है और भारत में उसके प्रत्यर्पण के संबंध में आगे की कार्यवाही का इंतजार कर रहा है।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के सम्मान और स्मारक का बनाए जाने का चर्चित वकील अश्विनी उपाध्याय ने विरोध किया

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार और स्मारक को लेकर राजनीति तेज है। इस बीच दिल्ली के एक वरिष्ठ वकील ने मनमोहन सिंह के प्रस्तावित स्मारक का विरोध किया है। कई चर्चित केसों की पैरवी करने वाले अश्विनी उपाध्याय ने मनमोहन सिंह की सरकार में हुए घोटालों और कुछ अन्य फैसलों का जिक्र करते हुए स्मारक बनाए जाने का विरोध किया है। केंद्र सरकार ऐलान कर चुकी है कि उचित स्थान का चुनाव करके मनमोहन सिंह का स्मारक बनाया जाएगा। समान शिक्षा, समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण नियंत्रण, जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर अक्सर हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले अश्विनी उपाध्याय ने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह कई दलीलों के साथ मनमोहन सिंह के सम्मान और स्मारक पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘सम्मान किसका होना चाहिए और समाधि स्थल किसका बनना चाहिए, क्या उस व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए जिसके 10 साल के शासन में 10 लाख लाख करोड़ का घोटाला हो गया। 70 हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला, एक लाख 76 हजार करोड़ का टूजी घोटाला, अगर आप पूरा देखें 2004 से लगभग 10 लाख करोड़ का घोटाला होगा। और भी बहुत सारे घोटाले।’ उपाध्याय ने नेशनल माइनॉरिटी एजुकेशन ऐक्ट का जिक्र करते हुए भी मनमोहन सिंह के सम्मान और स्मारक का विरोध किया है। उन्होंने कहा, ‘क्या उस व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए और समाधि स्थल बनना चाहिए, जिसने संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए 2004 में एक नेशनल माइनॉरिटी एजुकेशन ऐक्ट बनाया और भारत में समुदाय विशेष को फायदा देने के लिए स्कूल-कॉलेजों को उनको माइनॉरिटी स्टेटस देना शुरू कर दिया।’ वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि पहली बार भारत में माइनॉरिटी अफेयर मिनिस्ट्री 2006 में बनी है उसके पहले तक केवल सोशल जस्टिस मिनिस्ट्री हुआ करती थी जिसको कहते थे सामाजिक न्याय मंत्रालय। सभी गरीबों का कल्याण उसी के जरिए होता था। लेकिन 2006 में पहली बार रहमान खान साहब को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाया गया और ये काम किया गया था केवल तुष्टिकरण के लिए। क्या वो व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है जिसने 2010 में विदेशी फंडिंग कराने के लिए एफसीआरए कानून बनाया जो, ये जो एफसीआरए कानून 2010 में बनाया गया था केवल और केवल भारत विरोधी माओवादियों, नक्सलियों, जिहादी मिशनरियों को फंडिंग कराने के लिए बनाया गया था। उसके बाद यहां एनजीओस की भरमार हो गई। उपाध्याय ने आगे कहा, ‘क्या उस व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए जिसने 2012 में राइट टू एजुकेशन ऐक्ट को बदल के मदरसों को इसके दायरे से बाहर कर दिया। जब राइट टु एजुकेशन ऐक्ट बना था तो मदरसे भी इसके दायरे में थे। लेकिन 2012 में इस कानून में संशोधन किया गया। नतीजा ये है कि मदरसे में कौन पढ़ा रहा है, मदरसे में क्या पढ़ाया जा रहा है, ये सरकारी अधिकारी जा के ऑडिट नहीं कर सकते और यह किसके कहने पर किया गया था, जमीयत उलेमा हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कहने पर, प्रधानमंत्री कौन मनमोहन सिंह, क्या उनका सम्मान होना चाहिए।’

बेंगलुरु के बाद दिल्ली में वीडियो बना पुनीत खुराना का सुसाइड, पत्नी से था परेशान, चल रहा था तलाक का केस

नई दिल्ली बेंगलुरु के बाद दिल्ली में भी अतुल सुभाष जैसा मामले सामने आया है। राजधानी के मॉडल टाउन के कल्याण विहार में स्थित घर में एक युवक ने 54 मिनट का वीडियो बनाकर अपनी जीवन लीला खत्म कर ली है। मृतक का नाम पुनीत खुराना है। जिसने फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी। परिवार का कहना है कि वह अपनी पत्नी मनिका पाहवा से परेशान था। दोनों के बीच तलाक का केस चल रहा था। बताया जा रहा है कि मृतक रेस्टोरेंट कारोबारी था। रेस्टोरेंट कारोबारी था पुनीत पुलिस ने युवक का फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हालांकि पुलिस को मौके पर से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। आजतक के अनुसार, 39 साल के पुनीत खुराना ने अपने घर में आत्महत्या कर ली। वह रेस्टोरेंट कारोबारी था। मृतक का पत्नी से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच तलाक का केस चल रहा था। परिवार का कहना है पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर उनके बेटे ने यह कदम उठाया है। आठ साल पहले हुई थी शादी दोनों की आठ साल पहले शादी हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगा था। दो साल पहले पुनीत को छोड़कर पत्नी मायके चली गई थी। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से तलाक का केस दाखिल किया। दोनों के बीच हुई बातचीत का भी एक ऑडियो वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि पत्नी से चल रहे विवाद को लेकर मृतक तनाव में था। इसी बीच उसने मंगलवार दोपहर में फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने जब्त किया फोन परिवार वाले उसे अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि मौत से पहले उसने वीडियो बनाया है। परिजनों के आरोप को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच आरंभ कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित करते हुए खुदकुशी करने वाले युवक के फोन को जब्त कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है। 2016 में युवक की डेरावाला नगर में रहने वाली मनिका से शादी हुई थी।

रील के नाम पर फिर तमाशा, एक शख्स को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है, फाड़ दी ट्रेन की सीट

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर फेम कमाने और वायरल होने के चक्कर में कई यूजर किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। ताजा मामला भारतीय रेल से जुड़ा है, जहां एक शख्स को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि शख्स कौन है। साथ ही रेलवे की तरफ से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट एक वीडियो में नजर आ रहा है कि एक युवक खुले आम ट्रेन की सीटों को फाड़ रहा। मामला ट्रेन के सामान्य कोच का लग रहा है। यह साफ नहीं है कि घटना किस ट्रेन की है और न ही स्थान को लेकर जानकारी स्पष्ट हो सकी है। सोशल मीडिया यूजर इस युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही यूजर्स युवक को ‘गद्दार’ करार दे रहे हैं। पहले भी हुई ट्रेन में तोड़फोड़ रेलवे यात्री का ट्रेन को नुकसान पहुंचाने का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में एक और वीडियो सामने आया था, जहां गेट नहीं खोले जाने से भड़के एक युवक ने अंत्योदय एक्सप्रेस के दरवाजे का पत्थर मार कांच तोड़ दिया था। घटना उत्तर प्रदेश के बस्ती रेलवे स्टेशन की बताई जा रही थी। साथ ही कुछ लोग खिड़की की ग्रिल तोड़कर बोगी में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे। क्या वजह जानकार भीड़ को बड़ी वजह मान रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे अधिकारियों का कहना है, ‘ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हैं, तो अंदर मौजूद यात्री और लोगों को चढ़ने से रोकने के लिए कोच को बंद कर लेते हैं। इसके चलते बस्ती रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को नाराज कर दिया था।’

अमेरिकी न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 26/11 मुंबई हमले में शामिल तहव्वुर राणा को जल्द जाएगा भारत को सौपा जायेगा

नई दिल्ली 26/11 मुम्बई आतंकी हमलों में शामिल पाकिस्तान मूल के कनाडाई व्यापारी तहव्वुर राणा को जल्द ही भारत सैंपा जा सकता है। राणा को भारत लाने की प्रक्रिया राजनयिक चैनलों के माध्यम से चल रही है। आपको बता दें कि अगस्त 2024 में अमेरिकी न्यायालय ने फैसला सुनाया कि राणा को दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बैक चैनल बातचीत जारी है। अदालत ने तब राणा की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने मुम्बई आतंकी हमलों में अपनी संलिप्तता के लिए भारत को प्रत्यर्पित करने का विरोध किया था। अदालत ने यह माना कि भारत ने राणा के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए थे, जिससे यह साबित होता है कि प्रत्यर्पण आदेश सही था। राणा का नाम मुम्बई पुलिस ने 26/11 हमलों के संबंध में अपनी चार्जशीट में शामिल किया था। उस पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक सक्रिय सदस्य के रूप में काम करने के आरोप हैं। चार्जशीट में यह भी कहा गया कि राणा ने मुम्बई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली की मदद की थी, जिसने हमलों के लिए मुम्बई में जगहों की रेकी की थी। अदालत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि में Non-Bis in Idem अपवाद है। यह तब लागू होता है जब आरोपी को उसी अपराध के लिए पहले ही दोषी ठहराया या बरी किया जा चुका हो। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि राणा के खिलाफ भारत में लगाए गए आरोप अमेरिकी अदालतों में उनके खिलाफ चलाए गए मामलों से अलग हैं, इसीलिए नॉन-बिस इन आइडम अपवाद लागू नहीं होता। 26/11 मुम्बई आतंकी हमलों के लगभग एक साल बाद एफबीआई ने शिकागो में राणा को गिरफ्तार किया था। राणा और उसके साथी डेविड कोलमैन हेडली ने मिलकर मुम्बई हमलों के लिए जगहों की रेकी की थी और पाकिस्तान के आतंकवादियों को हमले को अंजाम देने के लिए एक खाका तैयार किया था।

घुसपैठ कर भारत आई प्रधान बनी बांग्लादेशी महिला? TMC नेता पर लगे फर्जी दस्तावेजों से नागरिकता हासिल करने के आरोप

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के रशीदाबाद की ग्राम पंचायत की मुखिया लवली खातून की नागिरकता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. मालदा जिले में टीएमसी के नेतृत्व वाली रशीदाबाद ग्राम पंचायत की मुखिया लवली खातून को लेकर कहा जा रहा है कि वो बांग्लादेशी अप्रवासी हैं. इतना ही नहीं उनपर आरोप है कि वो बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से भारत में घुसी थीं. मीडिया रिपोर्ट्स में लवली खातून का असली नाम नासिया शेख बताया जा रहा है. ऐसे में स्थानीय चुनाव में हिस्सेदारी और पंचायत प्रमुख बनने के बारे में सवाल उठना लाजमी हो गए हैं. इस संबंध में कलकत्ता हाई कोर्ट ने SDO से रिपोर्ट भी तलब कर ली है. चुनाव जीतने के बाद TMC में हुई शामिल चंचल की रहने वाली रेहाना सुल्ताना ने 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी. रेहाना ने 2022 में ग्राम पंचायत चुनाव लड़ा था लेकिन वो लवली खातून से चुनाव हार गईं थीं. सुल्ताना के वकील अमलान भादुड़ी ने कहा,’याचिका दाखिल करने वाली रेहाना सुल्ताना ने टीएमसी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था लेकिन लवली खातून से हार गईं, जिन्होंने कांग्रेस और वाम गठबंधन की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. खातून के चुनाव जीतने के बाद एक या दो महीने के भीतर वह टीएमसी में शामिल हो गईं.’ भारत में रहकर बनवाए फर्जी दस्तावेज मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लवली खातून का असली नाम नासिया शेख है और वह कथित तौर पर बांग्लादेशी अप्रवासी है, जो बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से भारत में घुसी थी. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 2015 में खातून के नाम पर आधार कार्ड जारी किया गया था और 2018 में जन्म प्रमाण पत्र, लेकिन सभी फर्जी दस्तावेजों की बुनियाद पर ये डॉक्यूमेंट्स बने हैं. याचिकाकर्ता का दावा है कि यह साबित करने के लिए सबूत हैं कि खातून ने अपना नाम और आधिकारिक रिकॉर्ड बदलने सहित अपनी पहचान बदल दी है. लवली खातून से हारी थीं रेहाना सुल्ताना के वकील अमलान भादुड़ी ने कहा कि याचिका दायर करने वाली रेहाना सुल्ताना ने टीएमसी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह लवली खातून से हार गई थीं, जिन्होंने कांग्रेस और वाम गठबंधन की उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। खातून के चुनाव जीतने के एक या दो महीने के भीतर ही वह टीएमसी में शामिल हो गई थीं। लवली खातून पर क्या हैं आरोप? इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में वकी भादुड़ी ने कहा कि लवली खातून का असली नाम नासिया शेख है और वह कथित तौर पर एक बांग्लादेशी अप्रवासी है, जो बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से भारत में घुसी थी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 2015 में खातून के नाम पर आधार कार्ड जारी किया था, और 2018 में जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया। बांग्लादेश से आया चालाक घुसपैठिया भादुड़ी ने कहा है कि लवली खातून ने चुनाव के लिए अपनी पात्रता साबित करने के लिए अपने आधार कार्ड, वोटर कार्ड और यहां तक ​​कि ओबीसी स्टेटस जैसे फर्जी दस्तावेज भी बनवाए हैं। हमें स्थानीय लोगों से यह भी पता चला कि खातून एक पड़ोसी गांव में गई थी। एक व्यक्ति से अपने पिता का नाम बताने के लिए कहा था। हर कोई जानता है कि उसके पिता का नाम शेख मुस्तफा नहीं बल्कि जमील बिस्वास है, यहां तक ​​कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में भी शेख मुस्तफा के परिवार में लवली का कोई जिक्र नहीं है। वकील ने आगे सवाल उठाया कि खातून कैसे चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि वह भारतीय नागरिक नहीं हैं। इस बीच लवली खातून ने द एक्सप्रेस द्वारा किए गए कॉल का जवाब नहीं दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के लिए जाली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ‘पड़ोसी गांव में किसी को बनाया पिता’ रेहाना के वकील भादुड़ी ने कहा,’हम स्थानीय पुलिस स्टेशन और स्थानीय प्रशासन के पास गए थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए हम 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय चले गए.’ उन्होंने कहा कि लवली खातून ने चुनाव के लिए अपनी पात्रता साबित करने के लिए अपने आधार कार्ड, वोटर कार्ड और यहां तक ​​कि ओबीसी स्थिति जैसे दस्तावेजों में भी हेराफेरी की है. हमें स्थानीय लोगों से यह भी पता चला कि खातून एक पड़ोसी गांव में गई थी और एक व्यक्ति से अपने पिता का नाम बताने के लिए कहा था. सभी जानते हैं कि उनके पिता का नाम शेख मुस्तफा नहीं बल्कि जमील बिस्वास है, यहां तक कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NRC) में भी शेख मुस्तफा के परिवार में लवली का कोई जिक्र नहीं है.’ यह ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश के नागरिकों के लिए जाली दस्तावेजों के साथ पासपोर्ट बनाने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो अवैध रूप से देश में घुस आए थे.

पांचजन्य ने लिखा मस्जिद-मंदिर विवाद के फिर से उठने पर मोहन भागवत की टिप्पणी समाज से इस मामले में एक ‘समझदारी भरा रुख’

नई दिल्ली आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने पिछले दिनों एक भाषण में कहा था कि हमें हर मस्जिद में मंदिर खोजने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग हर राम मंदिर जैसा विषय खड़ा करके हिंदू नेता बनना चाहते हैं। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान का एक वर्ग ने समर्थन किया तो वहीं हिंदूवादी संगठनों और कुछ संतों ने राय को खारिज कर दिया। यही नहीं पिछले सप्ताह आरएसएस से जुड़ी पत्रिका ऑर्गनाइजर ने सोमनाथ से संभल तक की एक कवर स्टोरी लगाई थी और इसे सभ्यतागत न्याय का सवाल बताया था। लेकिन अब आरएसएस से ही जुड़ी मैगजीन पांचजन्य में मोहन भागवत की राय को सही बताया गया है। पांचजन्य के संपादकीय में कहा है कि मस्जिद-मंदिर विवाद के फिर से उठने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी समाज से इस मामले में एक ‘समझदारी भरा रुख’ अपनाने का स्पष्ट आह्वान है। इसने इस मुद्दे पर ‘अनावश्यक बहस और भ्रामक प्रचार’ के प्रति भी आगाह किया। आरएसएस प्रमुख ने हाल में देश भर में मंदिर-मस्जिद विवादों के फिर से उठने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ व्यक्तियों को ऐसा लगने लगा है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर ‘हिंदुओं के नेता’ बन सकते हैं। 19 दिसंबर को पुणे में सहजीवन व्याख्यानमाला में ‘भारत: विश्वगुरु’ विषय पर व्याख्यान देते हुए भागवत ने समावेशी समाज की वकालत की और कहा कि दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि भारत सद्भाव के साथ रह सकता है। आरएसएस के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ के संपादक हितेश शंकर के 28 दिसंबर के संपादकीय में कहा गया है, ‘आरएसएस प्रमुख मोहनराव भागवत के मंदिरों पर दिए गए हालिया बयान के बाद मीडिया जगत में घमासान (वाकयुद्ध) छिड़ गया है। या यूं कहें कि यह जानबूझकर किया जा रहा है। एक स्पष्ट बयान के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। हर दिन नई प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।’ उन्होंने कहा कि इन प्रतिक्रियाओं में स्वतःस्फूर्त सामाजिक राय के बजाय “सोशल मीडिया विशेषज्ञों द्वारा उत्पन्न किया गया कोहराम और उन्माद” अधिक दिखाई देता है। संपादकीय में कहा गया कि भागवत का बयान समाज से इस मुद्दे के प्रति समझदारी भरा रुख अपनाने का स्पष्ट आह्वान है। ‘मंदिरों का राजनीतिक लाभ लेने का चलत गलत है’ इसमें कहा गया है, ‘यह सही भी है। मंदिर हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल कतई स्वीकार्य नहीं है। आज के दौर में मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर अनावश्यक बहस और भ्रामक दुष्प्रचार को बढ़ावा देना चिंताजनक प्रवृत्ति है। सोशल मीडिया ने इस प्रवृत्ति को और तेज कर दिया है।’ संपादकीय के अनुसार, ‘खुद को सामाजिक कहने वाले कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया मंचों पर स्वयंभू रक्षक और विचारक बन बैठे हैं। ऐसे अविवेकी विचारकों से दूर रहने की जरूरत है जो समाज के भावनात्मक मुद्दों पर जनभावनाओं का इस्तेमाल करते हैं।’ संपादकीय में कहा गया है कि भारत एक ऐसी सभ्यता और संस्कृति का नाम है, जिसने हजारों वर्षों से न केवल अनेकता में एकता के दर्शन का प्रचार किया, बल्कि उसे जीया और आत्मसात भी किया। संपादकीय में मीडिया पर लगाया सनसनी फैलाने का आरोप इसमें कहा गया है, ‘यह भूमि केवल भौगोलिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत स्पंदन है। ऐसे में मंदिरों का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक भी है।’ संपादकीय में कहा गया है कि ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मूल्यों से रहित, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ से भरे ‘कुछ तत्वों’ ने अपनी राजनीति को बढ़ावा देना, समुदायों को भड़काना और हर गली और इलाके में ‘हिंदू मंदिरों’ को बचाने की आड़ में खुद को सर्वश्रेष्ठ हिंदू विचारक के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। इसमें कहा गया है, ‘मंदिरों की खोज को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करना शायद मीडिया के लिए भी एक चलन बन गया है और यह एक प्रकार का मसाला है, जो 24 घंटे चलने वाले (समाचार) चैनलों और समाचार बाजार की भूख को पूरा रखता है।’

सांसद निधि योजना की राशि मौजूदा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने के अनुरोध पर चर्चा करेगी संसदीय समिति

नई दिल्ली सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) पर नवगठित संसदीय समिति की पहली बैठक सात जनवरी 2025 को होगी जिसमें इस मद की निधि को मौजूदा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने के अनुरोध पर चर्चा की जाएगी। राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश इस समिति के अध्यक्ष हैं। एमपीएलएडीएस पर समिति के निर्धारित एजेंडे के अनुसार, ‘संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) पर नवगठित समिति की पहली बैठक 7 जनवरी 2025 को संसद भवन एनेक्सी में आयोजित की जाएगी जिसमें विभिन्न मुद्दों पर विचार किया जाएगा और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के प्रतिनिधियों के विचार सुने जायेंगे।’ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजीव अरोड़ा ने 29 अक्टूबर 2023 को इस मद की राशि को मौजूदा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित गरीब मरीजों के लिए एमपीएलएडी फंड के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। उनके इस सुझाव पर भी समिति द्वारा विचार विमर्श किया जाएगा। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास प्रभाग को संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये तक के कार्यों के लिए जिला कलेक्टर को सुझाव देने का प्रावधान है। योजना के तहत राज्य सभा सदस्य उस राज्य के एक या एक से अधिक जिलों में कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं जहां से वे निर्वाचित हुए हैं। कोविड महामारी के मद्देनजर एमपीलैड्स को 6 अप्रैल, 2020 से 9 नवंबर, 2021 तक निलंबित कर दिया गया था और वित्त वर्ष 2020-21 के लिए इस योजना के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई थी। वित्त वर्ष 2021-22 की शेष अवधि, यानी 10 नवंबर, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक, प्रत्येक संसद सदस्य के लिए योजना के तहत 2 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। 1993-94 में जब यह योजना शुरू की गई थी, तब प्रत्येक संसद सदस्य को 5 लाख रुपए की राशि आवंटित की गई थी जिसे 1994-95 में बढ़ाकर एक करोड़ रुपए प्रति वर्ष कर दिया गया। इसके बाद, इसे 1998-99 में बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2011-12 से 5 करोड़ रुपए किया गया।  

1 जनवरी से बदल जाएंगे ये 10 नियम, जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली आज एक जनवरी है। आज से साल 2025 शुरू हो गया । इसी के साथ कई नियम भी बदले । इसमें एलपीजी से लेकर जीएसटी और यूपीआई तक शामिल हैं। इन नियमों के बारे में आपको पता होना चाहिए। क्योंकि इन नियमों में बदलाव सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे। हालांकि कई नियम हर महीने की पहली तारीख को बदलते हैं। लेकिन इस बार पहली तारीख से कुछ और नियमों में बदलाव हो रहा है। जानें एक जनवरी से हो रहे 10 प्रमुख बदलावों के बारे में: 1. LPG सिलेंडर की कीमत हर महीने की पहली तारीख को ऑयल कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को रिवाइज्ड करती हैं। इसमें घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर शामिल होते हैं। इस दौरान कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ा भी सकती हैं और कम भी कर सकती हैं। कई बार कंपनियों कीमत में कोई बदलाव भी नहीं करतीं। 2. GST नियम में बदलाव एक जनवरी से जीएसटी से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इसमें मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) भी शामिल है। यह प्रक्रिया उन सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होगी जो जीएसटी फाइल करते हैं। इसका उद्देश्य जीएसटी फाइलिंग प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाना है। 3. किसी भी बैंक से पेंशन ईपीएफओ ने एक जनवरी से पेंशन का नियम आसान बना दिया है। एक जनवरी से कर्मचारी अपनी पेंशन की रकम किसी भी बैंक से निकाल सकेंगे। इसके लिए उन्हें किसी भी अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत नहीं होगी। इस नए नियम से पेंशन की रकम निकालना काफी आसान होगा। 4. यूपीआई 123Pay पर बढ़ी लिमिट वे यूजर्स जो स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं करते, वे अपने बेसिक या फीचर फोन से भी बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं। इसकी लिमिट पहले 5 हजार रुपये थी। एक जनवरी से इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है। अब लोग ज्यादा रकम का ट्रांजेक्शन कर सकेंगे। 5. किसानों को मिलेगा ज्यादा लोन एक जनवरी से किसानों को अब बिना गारंटी के दो लाख रुपये तक का लोन मिल सकेगा। रिजर्व बैंक ने हाल ही में इसके बारे में घोषणा की थी। रिजर्व बैंक ने कहा था कि किसानों दिए जाने वाले लोन की सीमा को 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाता है। 6. बढ़ेंगी कार की कीमतें एक जनवरी से कार खरीदना महंगा हो सकता है। कार कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, हुंडई, महिंद्रा, होंडा, बीएमडब्ल्यू आदि कीमत बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। माना जा रहा है कि एक जनवरी से कार की कीमत 3 फीसदी तक ज्यादा हो सकती है। 7. FD के नियम भी बदलेंगे अगर आप निवेश के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को तवज्जो देते हैं तो एक जनवरी से इसमें भी कुछ बदलाव होने जा रहे हैं। रिजर्व बैंक ने NBFCs और HFCs के लिए FD से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। ये बदलाव एफडी में जमा रकम को मैच्योरिटी से पहले निकालने से जुड़े हैं। 8. अमेजन प्राइम मेंबरशिप में लिमिट तय अमेजन प्राइम की मेंबरशिप में भी एक जनवरी से बदलाव हो रहे हैं। अब एक प्राइम अकाउंट से से केवल दो टीवी पर ही प्राइम वीडियो देख सकेंगे। अगर उस अकाउंट से तीसरे टीवी पर प्राइम वीडियो देखना चाहेंगे तो इसके लिए अलग से सब्सक्रिप्शन लेना होगा। पहले एक प्राइम अकाउंट से पांच डिवाइस (टीवी या स्मार्टफोन) तक पर वीडियो देखे जा सकते थे। 9. रुपे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल एक जनवरी से रुपये क्रेडिट कार्ड से जुड़े कुछ नियम भी बदल रहे हैं। NPCI ने इसके लिए गाइडलाइन जारी कर दी हैं। नए नियमों के तहत प्रत्येक रुपे क्रेडिट कार्ड यूजर एयरपोर्ट पर लाउंज एक्सेस नहीं कर पाएगा। यह सुविधा क्रेडिट कार्ड से खर्च होने वाली रकम के आधार पर मिलेगी। 10. बदल जाएगा ट्रेनों का समय एक जनवरी से कई ट्रेनों के समय में भी बदलाव हो रहा है। नई समय सारिणी में उत्तर मध्य रेलवे की कई ट्रेन शामिल हैं। इनमें आगरा-वाराणसी के बीच चलने वाली वंदे भारत समेत कुल 15 ट्रेनों को शामिल किया है। वहीं दूसरी ओर इसमें अन्य रूट की और भी ट्रेन शामिल हैं। इसके अलावा कोरोना के समय जो ट्रेन स्पेशल नंबर से चलाई गई थीं, उनका भी नंबर बदल जाएगा। गाड़ियों की कीमतें बढ़ेंगी 1 जनवरी से मारुति, टाटा, हुंडई और अन्य कंपनियां अपनी गाड़ियों के दाम 2-3% तक बढ़ाने वाली हैं।  क्रिकेट में बदलाव 2025 में रोहित शर्मा टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हो सकते हैं। वहीं, IPL में RCB की कप्तानी फिर से विराट कोहली को मिल सकती है।  शिक्षा के नियम बदलेंगे 2025 से 5वीं और 8वीं में फेल होने वाले छात्रों को प्रमोट नहीं किया जाएगा। उन्हें दो महीने के भीतर फिर से परीक्षा देकर पास होना होगा। साथ ही, कोचिंग सेंटरों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों का ही एडमिशन होगा।  पुराने फोन में वॉट्सएप बंद 1 जनवरी से पुराने फोन, जिनका वर्जन एंड्रॉयड 4.4 या उससे पहले का है, उनमें वॉट्सएप काम नहीं करेगा। भारत में विदेशी डिग्री अब भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालय मिलकर साझा कोर्स शुरू करेंगे। इससे लोग भारत में रहकर ही विदेशी डिग्री हासिल कर सकेंगे।

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