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यूक्रेन भी इजरायल की तरह चुन-चुनकर बदले ले रहा, पुतिन के करीबी अफसर लेफ्टिनेंट जनरल को मार गिराया

मॉस्को बीते करीब तीन सालों से रूस के हमले झेल रहे यूक्रेन ने मॉस्को के भीतर घुसकर व्लादिमीर पुतिन के करीबी अफसर लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव को मार गिराया है। वह रूसी सेना के परमाणु, जैविक और केमिकल हथियारों के बेड़े की कमान संभाल रहे थे। उन्हें व्लादिमीर पुतिन का भरोसेमंद माना जाता रहा है। वह उस वक्त मारे गए, जब अपने अपार्टमेंट से निकलकर स्कूटर से ऑफिस जा रहे थे। इसी दौरान उनके स्कूटर में रखे बम में धमाका हुआ और वह मौके पर ही मारे गए। किरिलोव के एक सहायक की भी मौत हो गई है। रूसी रिपोर्ट्स के अनुसार यह बम धमाका रिमोट के जरिए किया गया था। यूक्रेन ने इस हमले की खुलकर जिम्मेदारी ली है। इससे पहले 9 दिसंबर को रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी शहर डोनेत्स्क में एक कार बम धमाके में सेरगेई येवसुकोव की मौत हो गई थी। वह उस कुख्यात जेल ओलेनिवका के हेड रहे थे, जहां बड़ी संख्या में यूक्रेन के युद्ध बंदियों को रखा गया है। इस जेल में मिसाइल अटैक करके बड़ी संख्या में लोगों को मार दिया गया था। रूसी अथॉरिटीज का कहना था कि इस कार ब्लास्ट में एक संदिग्ध को अरेस्ट किया गया है, लेकिन अब तक कुछ ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। इस बीच यूक्रेन की ओर से रूस के एक अन्य टॉप सैन्य अधिकारी को मार गिराने से हलचल मच गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या यूक्रेन की एजेंसियां भी इजरायल की तरह पावरफुल हो गई हैं और वे चुन-चुनकर बदला ले रही हैं। अब उसने किरिलोव को मारा है। किरिलोव पर ब्रिटेन, कनाडा समेत कई देशों ने प्रतिबंध लगा रखे थे। उन्हें यूक्रेन पर हमले के लिए जिम्मेदार प्रमुख अफसरों में से एक माना जाता था। यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस एसबीयू ने उनके खिलाफ आरोप लगाया था कि वह ही केमिकल हथियारों से अटैक की योजना बना रहे हैं। अब यूक्रेनी एजेंसी का कहना है कि हमने रूसी अधिकारी का कत्ल किया है। यूक्रेन का कहना है कि किरिलोव एक युद्ध अपराधी थे और उन्हें मारा जाना पूरी तरह से वाजिब कदम है। यही नहीं यूक्रेन की एजेंसी ने कहा कि कुल 4800 बार केमिकल हथियारों का इस्तेमाल जंग में रूस की ओर से बीते ढाई सालों में किया जा चुका है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था। तब से दोनों देशों के बीच रुक-रुककर जंग जारी है। इसी जंग के बीच मई में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि उसने पता लगा लिया है कि रूस ने क्लोरोपिकरिन गैस का इस्तेमाल यूक्रेन के सैनिकों के खिलाफ किया है। इस गैस का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भी किया गया था। हालांकि रूस ऐसे किसी भी हथियार के इस्तेमाल से इनकार करता रहा है। बता दें कि किरिलोव को व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हथियारों की जिम्मेदारी 2017 में सौंपी थी। वह पुतिन सरकार के हाई-प्रोफाइल सैन्य अधिकारियों में से एक रहे हैं।

मॉस्को बम धमाके में परमाणु सुरक्षा बल प्रमुख की गई जान, रूस के राष्ट्रपति पुतिन को बड़ा झटका

मॉस्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक बड़ा झटका लगा है। यहां की राजधानी मॉस्को में मंगलवार को एक बड़ा धमाका हुआ, जिसमें रूस के परमाणु, जैविक और रासायनिक सुरक्षा बलों के प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव की मौत हो गई। किरिलोव की क्रेमलिन के पास रियाजांस्की प्रॉस्पेक्ट पर स्थित एक अपार्टमेंट के बाहर हत्या कर दी गई। स्कूटर में छिपाया गया था बम रूसी जांच एजेंसियों के अनुसार, धमाका एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में छिपाए गए बम के कारण हुआ। बम फटने से किरिलोव और उनके एक सहायक की जान चली गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह एक हत्या थी। तस्वीरें सामने आईं जमीन से ली गई तस्वीरों में मलबे से अटी एक इमारत का टूटा हुआ प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा। वहीं, घटनास्थल पर खून से सनी बर्फ में दो शव पड़े हुए थे और पुलिस ने इलाके को घेर लिया था। इसके बाद इस मामले में आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।

देश के सबसे बड़े घोटाले में लिप्त अधिकारी को फांसी पर चढ़ाया, चीन में भ्रष्टाचार की कोई माफी नहीं

बीजिंग. चीन की सरकार में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति है और इसी नीति के तहत चीन की सरकार ने अपने एक और शीर्ष अधिकारी को मौत की सजा दे दी है। चीन की सरकार ने मंगलवार को उत्तरी इनर मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के पूर्व अधिकारी ली जियानपिंग को फांसी दे दी। ली जियानपिंग को देश के अब तक के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया गया था। यह भ्रष्टाचार 42 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का बताया जा रहा है। ली जियानपिंग चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यसमिति के सदस्य थे। ली को पूर्व में सितंबर 2022 में ही मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन उन्होंने सजा के खिलाफ अपील की थी। अपील के बाद भी चीन के सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद अब ली को फांसी की सजा दी गई। चीन के मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, ली जियानपिंग को अदालत द्वारा 42 करोड़ डॉलर की अवैध कमाई का दोषी पाया गया था। यह चीन के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही सख्त रुख साल 2012 में चीन की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार के खिलाफ रुख सख्त रहा है। अब तक शी जिनपिंग के कार्यकाल के दौरान दो पूर्व रक्षा मंत्रियों और दर्जनों सैन्य अधिकारियों समेत दस लाख से अधिक पार्टी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। इस साल जनवरी में केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग (सीसीडीआई) के पूर्ण सत्र में दिए गए अपने भाषण में भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भ्रष्टाचार का डटकर सामना करने का आह्वान किया था। गौरतलब है कि चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के बावजूद घोटालों में लिप्त अधिकारियों के सजा पाने के मामले बढ़े हैं। सेना में शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने वैश्विक ध्यान खींचा है, जिसके बारे में उनके आलोचकों का कहना है कि इसने उन्हें सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने में सक्षम बनाया है।

तख्तापलट की साजिश रचने वालों को मिलेगी कड़ी सजा, ब्राजील के राष्ट्रपति ने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद किया ऐलान

साओ पाउलो। ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डा सिल्वा ब्रेन सर्जरी के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और 2022 में तख्तापलट की कोशिश में शामिल लोगों को ‘कड़ी सजा’ देने का ऐलान किया है। लूला के डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद सिरियो लिबनेस अस्पताल में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई जो पिछले सप्ताह हुई सर्जरी के बाद से उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। उनकी मेडिकल टीम और प्रथम महिला रोसांगेला डा. सिल्वा उनके साथ मौजूद थीं। लूला ने हिरासत में लिए गए रिटायर जनरल वाल्टर ब्रागा नेट्टो का जिक्र करते हुए कहा, “मेरा मानना ​​है कि जनरल ब्रागा को निर्दोष होने का पूरा अधिकार है।” ब्रागा ने पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के अधीन रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था। जांच में हस्तक्षेप करने के प्रयास के आरोपी ब्रागा नेट्टो को सुप्रीम फेडरल कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को गिरफ्तार कर किया गया। फेडकरल पुलिस के अनुसार, बोल्सोनारो कथित तौर पर 2022 में लूला को राष्ट्रपति पद संभालने से रोकने के लिए तख्तापलट की योजना बना रहे थे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार लूला ने कहा कि राष्ट्रपति की हत्या की साजिश में उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों का शामिल होना अस्वीकार्य है। छुट्टी मिलने के बाद लूला गुरुवार तक साओ पाओलो स्थित अपने आवास पर काम करेंगे। उसके बाद उन्हें राजधानी ब्रासीलिया की यात्रा के लिए परमिट प्राप्त करने के लिए सीएटी स्कैन कराना होगा, ताकि वे प्लानाल्टो पैलेस में अपना काम फिर से शुरू कर सकें। 79 वर्षीय लूला ने गंभीर सिरदर्द की शिकायत की थी, जब उनके मस्तिष्क और मेनिन्जियल झिल्ली के बीच हेमेटोमा पाया गया तो उन्हें इमरजेसी सर्जरी के लिए भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि हेमेटोमा से कोई चोट या अन्य बीमारियां नहीं हुई हैं। यह मामला अक्टूबर महीने के अंत में राष्ट्रपति निवास, पैलेसियो डा अलवोराडा में लूला के गिरने से जुड़ा था, जब उनके सिर के पिछले हिस्से में चोट लगी थी और पांच टांके लगे थे, जिसके कारण उन्हें रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने की अपनी यात्रा को ऐन मौके पर कैंसिल करना पड़ा था। ब्राजील के सामाजिक संचार सचिव पाउलो पिमेंटा ने पुष्टि की है कि डा सिल्वा 2026 में फिर से चुनाव लड़ेंगे। सीएनएन ब्राज़ील के साथ एक इंटरव्यू में, पिमेंटा ने आश्वासन दिया कि दिमाग में हुए रक्तस्राव के उपचार के बाद राष्ट्रपति का स्वास्थ्य अच्छा है। उन्होंने कहा कि वह देश का नेतृत्व जारी रखने के लिए “सबसे योग्य और तैयार व्यक्ति” हैं।

केन्द्र सरकार के 2014 के बाद से किसानों की आय में वर्ष 2018-19 तक करीब पांच गुना वृद्धि हो चुकी थी: शिवराज

नई दिल्ली कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज संसद में कहा कि केन्द्र सरकार के 2014 के बाद से किसानों की आय में वर्ष 2018-19 तक करीब पांच गुना वृद्धि हो चुकी थी और नये आंकड़े आने पर यह उससे भी दोगुना होने की संभावना है। श्री चौहान ने लोकसभा में आज प्रश्नकाल में किसानों की आय से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के आने के पहले वर्ष 2013-14 में किसानों की औसत आय 2115 रुपए हुआ करती थी जो वर्ष 2018-19 में बढ़ कर 10218 रुपए हो गयी थी। उसके बाद अब तक कोई गणना नहीं हुई है। अगले साल किसानों की आय की गणना की जानी है। उन्हें विश्वास है कि किसानों की आय इस आंकड़े की दोगुनी से अधिक दर्ज की जाएगी। श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने 2014 से ही किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया था। इसके लिए छह सूत्रीय योजना पर काम किया गया है जिसमें कृषि उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन की लागत कम करना, कृषि पर लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देना, किफायती वित्तीय सहायता देना, कृषि विविधीकरण और जैविक खेती को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया गया है। किसान सम्मान निधि के अंतर्गत बहुत से राज्यों में किसानों के नाम नहीं जोड़े जाने के बारे में पूछे जाने पर कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि चूंकि राज्यों का भी विषय रहता है तो इससे संबंधित सभी निर्णयों में क्रियान्वयन की शक्ति राज्य सरकारों के पास होती है। बहुत से राज्यों में कुछ नाम छूट भी गये थे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान लगभग एक करोड़ किसानों के नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि याेजना के अंतर्गत जोड़े गये हैं। उन्होंने कहा, “मैं वचन देता हूं कि प्रत्येक पात्र किसान का नाम जोड़ा जाएगा और योजना का लाभ दिया जाएगा।”  

अमृतसर के पुलिस आयुक्त ने बताया कि स्थानीय लोगों ने थाने में विस्फोट की आवाज सुनी, दहशत व्याप्त

अमृतसर पंजाब में अमृतसर के इस्लामाबाद थाना में मंगलवार तड़के लगभग तीन बजे हुए जोरदार धमाके से इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त है। घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि स्थानीय लोगों ने थाने में विस्फोट की आवाज सुनी, लेकिन वहां कोई नुकसान नहीं हुआ। इस बीच, जर्मनी स्थित गैंगस्टर जीवन फौजी ने विस्फोट की जिम्मेदारी ली। अधिकारियों ने बताया कि मामले में आगे की जांच चल रही है। इससे पहले चार दिसंबर को रात करीब 10 बजे अमृतसर के मजीठा थाने में ‘धमाका’ हुआ था। हाल ही में अजनाला थाने के बाहर भी एक शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बरामद हुआ था और अमृतसर पुलिस आयुक्तालय के गुरबक्श नगर पुलिस चौकी के अंदर भी धमाका हुआ था। श्री भुल्लर भी घटनास्थल पर पहुंच गये हैं। उन्होंने बताया कि हम लोग थाने के अंदर हैं। थाने के अंदर कोई विस्फोट नहीं हुआ, लेकिन हम जांच कर रहे हैं। आज सुबह एक धमाका ज़रूर सुना गया। वहीं, अब इस विस्फोट को लेकर एक गैंगस्टर जीवन फौजी की पोस्ट भी सामने आई है, जिसमें उसने थाने में ग्रेनेड फेंकने की बात कही है और विस्फोट की जिम्मेदारी ली है। उसने पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर पंजाब पुलिस को भी धमकी दी है और कहा है कि अगर किसी पुलिसकर्मी ने किसी सिख की पगड़ी को छुआ, तो यह उसके परिवार के लिए अच्छा नहीं होगा। गैंगस्टर द्वारा जिम्मेदारी लेने को लेकर श्री भुल्लर ने कहा, ‘हमने हाल ही में यूएपीए के तहत 10 लोगों को गिरफ्तार करके एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जो ऐसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। ऐसा लगता है कि हताशा में ये लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। हम बाकी लोगों को भी जल्द गिरफ्तार कर लेंगे।’ सेना की एक टीम भी सुबह जांच के लिए थाने पहुंची थी, लेकिन सेना के अधिकारी पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत कर वापस चले गये।  

भारतीय सेना की एक पहल के तहत दक्षिण भारत के शैक्षणिक दौरे पर ले जाया गया, प्रमुख संस्थानों के बारे में ली जानकारी

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले कुपवाड़ा के 15 छात्रों को भारतीय सेना की एक पहल के तहत दक्षिण भारत के शैक्षणिक दौरे पर ले जाया गया, जहां उन्हंक देश के शीर्ष शैक्षणिक, तकनीकी और सांस्कृतिक स्थलों से परिचित कराया गया। सेना ने बताया कि नौ से 15 दिसंबर तक चलने वाले दौरे का उद्देश्य इन युवा मस्तिष्कों के क्षितिज को व्यापक बनाना, अत्याधुनिक अनुसंधान में अंतर्दृष्टि प्रदान करना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है। इस दौरे का आयोजन ऑपरेशन सद्भावना के हिस्से के रूप में 68 माउंटेन ब्रिगेड के तत्वावधान में सेना की 41 आरआर (मराठा ली) ‘हमदर्द-ए-कुपवाड़ा’ द्वारा किया गया। बेंगलुरु की अपनी यात्रा के दौरान, छात्रों ने भारत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक और कॉर्पोरेट संस्थानों के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (एनआईएएस) में विद्वानों के साथ सार्थक बातचीत की और मूल्यवान शैक्षणिक अंतर्दृष्टि प्राप्त की। करीब 115 साल पुराने प्रमुख संस्थान भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) में उन्हें पारिस्थितिक विज्ञान, सामग्री अनुसंधान और सुपरकंप्यूटिंग में प्रगति से परिचित कराया गया। इस दौरान सुपरकंप्यूटर इंजीनियरिंग एंड रिसर्च सेंटर (एसईआरसी) में अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग सुविधा परम प्रवेगा पर ब्रीफिंग एक मुख्य आकर्षण रही।  

जीवनयापन की लागत कम करना है प्राथमिकता, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने डोमिनिक को बनाया नया वित्त मंत्री

ओटावा। कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री डोमिनिक रहे लेब्लांक ने सोमवार को ओटावा के रिड्यू हॉल में वित्त मंत्री पद की शपथ ली। नए वित्त मंत्री ने समारोह के बाद कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता कनाडाई लोगों के लिए जीवनयापन की लागत कम करना और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करना होगा। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खास सहयोगी लेब्लांक हाल ही में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ट्रूडो संग रात्रिभोज में शामिल हुए थे। 57 वर्षीय न्यू ब्रंसविक पहली बार 2000 में चुने सांसद गए, वह पूर्व गवर्नर-जनरल रोमियो लेब्लांक के बेटे हैं। लेब्लांक ने कहा कि वह अंतर-सरकारी मामलों के मंत्री का पद अपने पास रखेंगे। इससे पहले क्रिस्टिया फ़्रीलैंड ने ट्रूडो को लिखे एक पत्र में सोमवार सुबह अचानक वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि वे देश के लिए सर्वोत्तम रास्ते को लेकर असमंजस में हैं। लिबरल सरकार का आर्थिक अपडेट सोमवार दोपहर जारी किया गया, जिससे पता चला कि घाटा 31 मार्च को समाप्त वित्तीय वर्ष के लक्ष्य से बहुत बड़ा था। अपने त्याग पत्र में फ्रीलैंड ने खुलासा किया कि ट्रूडो ने उन्हें पिछले सप्ताह सूचित किया था कि वह अब उन्हें इस भूमिका में नहीं देखना चाहते हैं और इसके बजाय उन्हें एक और कैबिनेट पद की पेशकश की थी। ट्रूडो ने इस्तीफे पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ट्रूडो सरकार कथित तौर पर प्रतिक्रिया में बढ़ी हुई सीमा सुरक्षा और निगरानी में निवेश करने की योजना विकसित कर रही है, लेकिन ट्रंप के सख्त रुख का दबाव भी महसूस कर रही है। फ्रीलैंड द्वारा दिए जाने वाले आर्थिक अपडेट में सरकार सोमवार को कनाडा की संसद में सीमा योजना का विवरण पेश करने वाली थी। फ्रीलैंड का भी सरकारी खर्च को लेकर ट्रूडो के साथ मतभेद था और उनके इस्तीफा देने के बाद अपडेट का विवरण सामने आया। ये अपडेट तब आए हैं, जब ट्रूडो की लिबरल पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही है जो अगले साल अक्टूबर के अंत से पहले होना चाहिए। ट्रूडो ने कहा है कि उनकी योजना पार्टी के शीर्ष पर बने रहने की है। उदारवादियों के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, यदि सहयोगी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी अपना समर्थन खींच लेती है तो इससे किसी भी समय एक नया चुनाव हो सकता है। इस बीच ट्रंप की जीत ने घरेलू चिंताओं को जन्म दिया है कि कनाडा वैश्विक सत्ता-विरोधी रुझानों के अधीन हो सकता है, जो लोकलुभावन पियरे पोइलिव्रे के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी को 2015 के बाद पहली बार सत्ता में देख सकता है। लगभग एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद सितंबर में ट्रूडो की अनुमोदन रेटिंग घटकर केवल 33 प्रतिशत रह गई।

छह छात्र अभी भी घायल, अमेरिका के स्कॉन्सिन स्कूल में गोलीबारी से मरने वालों की संख्या दो हुई

न्यूयॉर्क। विस्कॉन्सिन के मैडिसन स्थित एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में सोमवार को हुई गोलीबारी में एक शिक्षक और एक किशोर छात्र की मौत हो गई, जबकि छह छात्र घायल हो गए। पुलिस ने पहले मृतकों की संख्या अधिक बताई थी, लेकिन बाद में इसे सही करार दिया। पुलिस ने बताया कि स्कूल का संदिग्ध किशोर छात्र अब मर चुका है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, संदिग्ध ने हैंडगन का इस्तेमाल किया था। मैडिसन के पुलिस प्रमुख शॉन बार्न्स ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमले का मकसद अभी तक साफ नहीं है। उन्होंने बताया कि छह घायल छात्रों में से दो की हालत गंभीर है और उन्हें गंभीर चोट आई है, जबकि बाकी चार छात्रों को हल्की चोट आई हैं। अधिकारी छात्रों को उनके माता-पिता से मिलाने की कोशिश कर रहे हैं। एबीसी न्यूज के अनुसार, इस स्कूल में किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक लगभग 390 छात्र पढ़ाई करते हैं। विस्कॉन्सिन के सार्वजनिक निर्देश अधीक्षक जिल अंडरली ने एक बयान में कहा, “यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें अपने बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए और मेहनत करनी चाहिए, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं फिर से न हों। हम तब तक आराम नहीं करेंगे जब तक हम ऐसे उपाय नहीं ढूंढ लेते, जो हमारे स्कूलों को सुरक्षित बना सकें।” विस्कॉन्सिन के गवर्नर टोनी एवर्स ने लिखा, “मैं मैडिसन के एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में हुई घटना पर नजर बनाए हुए हूं। हम बच्चों, शिक्षकों और पूरे स्कूल के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम और जानकारी का इंतजार कर रहे हैं और पहले उत्तरदाताओं के लिए आभारी हैं, जिन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया दी।” मैडिसन पुलिस विभाग ने कहा कि वे पीड़ितों के परिवारों से संपर्क करने के बाद ही जानकारी देंगे, इसलिये सोमवार सुबह एक ईसाई स्कूल में गोलीबारी में मारे गए दो लोगों के बारे में जानकारी नहीं दी। संघीय जांच ब्यूरो और शराब, तंबाकू, फायर आर्म्स और विस्फोटक ब्यूरो के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और स्थिति की जांच कर रहे हैं। सीनेटर रॉन जॉनसन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में हुई इस दुखद घटना के सभी पीड़ितों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं। मैं स्थिति पर नजर रखे हुए हूं।” विस्कॉन्सिन के गवर्नर टोनी एवर्स ने लिखा, “मैं मैडिसन के एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में हुई घटना पर नजर बनाए हुए हूं। हम बच्चों, शिक्षकों और पूरे स्कूल के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम और जानकारी का इंतजार कर रहे हैं और पहले उत्तरदाताओं के लिए आभारी हैं, जिन्होंने जल्दी से प्रतिक्रिया दी।” अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को मैडिसन के स्कूल में हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी दी गई है। वरिष्ठ उप प्रेस सचिव एमिली सिमंस ने कहा, “राष्ट्रपति को विस्कॉन्सिन के मैडिसन स्कूल में हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी दी गई है। व्हाइट हाउस के अधिकारी जरूरत के अनुसार मदद करने के लिए मैडिसन में स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।” के-12 स्कूल शूटिंग डेटाबेस के अनुसार, इस साल अमेरिका में 322 स्कूलों में गोलीबारी हुई हैं, जो 1966 के बाद से किसी भी साल में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। यह संख्या पिछले साल की 349 गोलीबारी से कम है।

एनटीए अगले साल से भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं कराएगा, अगले साल एनटीए का पुनर्गठन होगा: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली नीट, जेईई मेन, सीयूईटी और यूजीसी नेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कामकाज के तौर तरीके में सुधार को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को ऐलान किया कि वर्ष 2025 से उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एनटीए सिर्फ प्रवेश परीक्षाएं कराएगा। एनटीए अगले साल से भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं कराएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले साल एनटीए का पुनर्गठन होगा। परीक्षा एजेंसी में 10 नए पद सृजित किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सरकार निकट भविष्य में कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा और टेक्नोलॉजी बेस्ड प्रवेश परीक्षा की ओर कदम बढ़ाना चाहती है।’ मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ इस संबंध में बातचीत जारी है कि नीट यूजी परीक्षा पेन पेपर मोड से आयोजित की जाए या ऑनलाइन। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) यूजी का आयोजन साल में एक बार ही किया जाएगा। आपको बता दें की सीयूईटी यूजी से ही डीयू, बीएचयू, जामिया, इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश के 260 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के स्नातक कोर्सेज में दाखिला मिलता है। उन्होंने कहा, ‘एजेंसी का 2025 में पुनर्गठन किया जाएगा, कम से कम दस नए पद सृजित किए जा रहे हैं । काम में कोई गलती न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एनटीए के कामकाज में कई बदलाव किए जाएंगे।’ उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में कंप्यूटर अडैप्टिव टेस्ट, तकनीक आधारित प्रवेश परीक्षाओं की ओर बढ़ने पर विचार कर रही है। ये बड़े एंट्रेंस एग्जाम कराता है एनटीए नीट: गौरतलब है कि नीट यूजी 2024 और यूजीसी नेट में अनियमितताएं उजागर होने के बाद केंद्र सरकार ने एनटीए की कार्यशैली में सुधार और इसके द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया था। इस समिति ने कई सुधारों की सिफारिश की थी। कमिटी की ओर से दिए गए थे ये सुझाव 1- जेईई मेन की तरह नीट भी एक से अधिक चरणों में कराया जाए। 2- ऑफलाइन परीक्षाओं को कम किया जाए, जहां ऑनलाइन मोड पर संभव नहीं, वहां हाइब्रिड (ऑनलाइन व ऑफलाइन पेन पेपर मोड दोनों) परीक्षाओं का विकल्प हो। जहां ऑनलाइन एग्जाम संभव न हो वहां प्रश्न पत्रों को डिजिटल मोड में भेजा जाए और आंसर ओएमआर शीट पर लिखे जाएं। 3- मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट सहित प्रमुख परीक्षाओं में प्रयासों की संख्या सीमित की जाए। 4- सीयूईटी की परीक्षा में विषयों की संख्या कम की जाए। 5- आउटसोर्सिंग कर्मियों की भूमिका को कम किया जाए। आउटसोर्सिंग कर लिए जाने वाले प्राइवेट सेंटरों की संख्या कम की जाए। 6- एनटीए में परमानेंट कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। जेईई और नीट आयोजन प्रक्रिया में बदलाव के संकेत इससे पहले दिसंबर के दूसरे सप्ताह में एक्सएलआरआई, जमशेदपुर में उन्होंने कहा था कि जेईई और नीट समेत अन्य केंद्रीय प्रतियोगिता परीक्षाओं में अगले साल से कई बदलाव किए जाएंगे। इसके आयोजन के लिए राज्य सरकारों की भी मदद ली जाएगी। चूंकि ये परीक्षाएं अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जाती हैं, इसलिए अब इनका आयोजन राज्य सरकारों के साथ किया जाएगा। इसके लिए एनटीए और राज्य सरकारों में समन्वय स्थापित किया जाएगा। अब तक यह परीक्षाएं केंद्रीय एजेंसी की ओर से ही आयोजित की जाती थी, लेकिन पिछले दिनों पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने इन परीक्षाओं के आयोजन को लेकर यह बदलाव किए हैं। प्रधान ने कहा कि पिछले दिनों हुई पेपर लीक की घटना के बाद इसकी जांच कमेटी गठित कर कराई गई थी। पारदर्शिता लाने को लेकर इसकी जांच रिपोर्ट के मिल जाने के बाद अब पेपर लीक की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो, इसके लिए रोड मैप तैयार किया गया है।

शवों को लाने की तैयारी कर रहा भारतीय दूतावास, जॉर्जिया के रेस्त्रां में काम करने वाले 11 भारतीयों की मौत

त्बिलिसी (जॉर्जिया)। यूरोपीय देश जॉर्जिया में एक भारतीय रेस्त्रां में काम करने वाले 11 भारतीय लोगों की मौत पर जॉर्जिया स्थित भारतीय दूतावास ने दुख जताया है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी एक प्रेस वक्तव्य में जॉर्जिया स्थित भारतीय दूतावास ने लिखा, “त्बिलिसी स्थित भारतीय दूतावास जॉर्जिया के शहर गुडौरी में 11 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के बारे में जानकर दुखी है। हम उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।” प्रेस वक्तव्य में कहा गया, “दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि शवों को शीघ्र भारत भेजा जा सके। हम शोक में डूबे परिवारों के संपर्क में हैं और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” गुडौरी स्थित एक भारतीय रेस्त्रां में भारतीय नागरिकों की मौत हुई। इस घटना की जांच जॉर्जिया के आंतरिक मामलों के मंत्रालय द्वारा की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया है कि यह मौत संभवतः कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण हुईं हैं। ज्ञात हो कि 14 दिसंबर को जॉर्जिया के गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “गुडौरी में हुई दुर्घटना के संबंध में आंतरिक मामलों के मंत्रालय के मत्सखेता मटियानेटी पुलिस विभाग के कर्मचारियों ने जॉर्जिया के आपराधिक संहिता के अनुच्छेद 116 के तहत जांच शुरू की है। इसमें लापरवाही के कारण हत्या का आरोप लगाया गया है।” बयान में कहा गया है कि रेस्ट एरिया में उसी रेस्त्रां में काम करने वाले 12 लोगों के शव मिले। प्रारंभिक जांच में शरीर पर किसी तरह की चोट या किसी अन्य प्रकार के निशान नहीं पाए गए। प्रारंभिक जांच के अनुसार, बेडरूम के पास बंद जगह में एक बिजली जनरेटर रखा हुआ था, जिसे कल शायद बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद चालू किया गया था।” बयान में आगे कहा गया कि 12 मृतकों में से 11 व्यक्ति भारतीय हैं और 1 व्यक्ति जॉर्जिया का रहने वाला था। जॉर्जिया के गृह मंत्रालय ने कहा, “इस तथ्य के संबंध में, जांच कार्रवाई सक्रिय रूप से की जा रही है, फोरेंसिक एक्सपर्ट और पुलिस अधिकारी मौके पर जांच कर रहे हैं। मामले से संबंधित व्यक्तियों के पूछताछ की जा रही है। मौत का सही कारण जानने के लिए स्थानीय पुलिस बल सक्रियता के साथ काम कर रही है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके का वादा, ‘भारत के खिलाफ अपनी जमीन का नहीं होने देंगे इस्तेमाल’

कोलंबो। भारत दौरे पर आए श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने आश्वासन दिया है कि वह अपनी जमीन का किसी भी तरह से भारत की सुरक्षा के खिलाफ उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे। नई दिल्ली में रक्षा सहयोग पर चर्चा के दौरान संयुक्त बयान में श्रीलंका के राष्ट्रपति ने यह बात कही। उनका यह बयान उस वक्त आया है जब चीन भारत के खिलाफ अपने मिशन हिंद महासागर को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है। दरअसल श्रीलंका में चीन के बढ़ते दखल से भारत की चिंता बढ़ी हुई है। दो साल पहले जब श्रीलंका कर्ज चुकाने में विफल रहा था तो चीन ने उसके हंबनटोटा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया था। चीन ने यहां पर अपने नौसैनिक निगरानी और जासूसी जहाज को खड़ा किया। अगस्त 2022 में चीनी नौसेना के जहाज युआन वांग 5 ने दक्षिणी श्रीलंका के हंबनटोटा में डॉक किया। इसके बाद दो चीनी जासूसी जहाजों को नवंबर 2023 तक 14 महीने के भीतर श्रीलंका के बंदरगाहों में डॉक करने की अनुमति दी गई थी। चीनी शोध जहाज 6 अक्टूबर 2023 में श्रीलंका पहुंचा और उसने कोलंबो बंदरगाह पर डॉक किया। इस जहाज के डॉक करने का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण पर रिसर्च थी। मगर भारत और अमेरिका ने इसे लेकर चिंता जताई थी। नई दिल्ली ने आशंका जताई थी कि चीनी जहाज जासूसी जहाज हो सकते हैं और कोलंबो से ऐसे जहाजों को अपने बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति न देने का आग्रह किया था। भारत द्वारा चिंता जताए जाने के बाद श्रीलंका ने जनवरी में अपने बंदरगाह पर विदेशी शोध जहाजों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब श्रीलंका और भारत के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद श्रीलंका ने अपना रुख साफ किया है। श्रीलंका की ओर से कहा गया कि वह अपने जल क्षेत्र का किसी भी तरह से भारत की सुरक्षा के लिए हानिकारक तरीके से उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। न ही किसी ऐसे अभियान की मंजूरी देगा जिसका क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। सोमवार को दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने कहा कि हमने करीब दो साल पहले एक अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना किया था। उस समय भारत ने हमारा भरपूर समर्थन किया। श्रीलंका भारत की विदेश नीति में बहुत अहम स्थान रखता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह हमेशा श्रीलंका की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मैंने भारत के प्रधानमंत्री को यह भी आश्वासन दिया है कि हम अपनी जमीन का किसी भी तरह से भारत के हितों के लिए हानिकारक उपयोग नहीं होने देंगे। भारत के साथ सहयोग निश्चित रूप से बढ़ेगा और मैं भारत के प्रति अपने निरंतर समर्थन का आश्वासन देना चाहता हूं।

एक देश- एक चुनाव विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद क्या बदलेगा? बिल के पक्ष में 269, विरोध में पड़े 198 वोट

नई दिल्ली ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। इसके मद्देनजर सरकार ने बिल को जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी यानी संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर को इस बिल को मंजूरी थी। घमासान की वजह से वक्फ संशोधन बिल की तरह ‘एक देश एक चुनाव’ बिल भी जेपीसी के पास जा रहा है। आइए एक नजर डालते हैं कि संसद में किन पार्टियों ने इस बिल के समर्थन और किन्होंने विरोध का ऐलान किया। भाजपा और उसके सहयोगी दल इस विधेयक के समर्थन में हैं। बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस जैसे कुछ गैर-एनडीए दलों का भी इस बिल को समर्थन है। दूसरी तरफ कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे कई विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। कुल 32 राजनीतिक दल इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि 15 दल इसका विरोध कर रहे हैं। बिल पेश करने को लेकर लोकसभा में हुआ मत विभाजन बिल को पेश करने को लेकर विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की, जिसके बाद वोटिंग हुई। बिल को सदन पटल पर रखे जाने के पक्ष में 269 वोट पड़े जबकि विरोध में 198 वोट पड़े। अब सदन में बिल को जेपीसी में भेजने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। कोविंद कमिटी ने दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की है पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर में इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। समिति ने दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की गई थी। स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) आम चुनाव के 100 दिनों के भीतर कराने की बात कही गई थी। समिति ने सभी चुनावों के लिए एक समान मतदाता सूची बनाने की भी सिफारिश की थी।

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा ने भगवान बुद्ध की पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान लगाया

गया श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा ने भगवान बुद्ध की पावन ज्ञान भूमि बोधगया के महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा अर्चना की, साथ ही पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान लगाया। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार गया अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पहुंचे, जहां बिहार सके मंत्री डॉ. प्रेम कुमार एवं संतोष कुमार सुमन ने पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सड़क मार्ग से बोधगया पहुंचे। जहां बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों ने खादा वस्त्र देकर उनका भव्य स्वागत किया। उनके साथ आए श्रीलंकाई शिष्टमंडल का भी पारंपरिक अंदाज में अभिनंदन किया गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति की इस यात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस बल की तैनाती रही। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम और वरीय पुलिस अधीक्षक आशीष भारती खुद मौके पर मौजूद थे। महाबोधि मंदिर में पूजा एवं ध्यान साधना के बाद अनुरा कुमारा ने बोधगया के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की सराहना की। उन्होंने पवित्र बोधिवृक्ष के छांव में भी भगवान बुद्ध को नमन किया। इस दौरान श्रीलंका के शिष्टमंडल ने भी मंदिर की परंपराओं और शांति के संदेश को लेकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।इसके बाद राष्ट्रपति बोधगया स्थित श्रीलंकाई महाविहार पहुंचे, जहां उन्होंने जयश्री महाबोधि महाविहार मंदिर में भगवान बुद्ध के दर्शन किए, साथ ही उन्होंने भगवान बुद्ध के दो परम शिष्य महामोगलान और सारीपुत के अस्थि कलश को भी नमन किया। राष्ट्रपति की इस यात्रा से भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। बोधगया, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, श्रीलंका के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए हमेशा से आस्था का केंद्र रहा है।  

एजेंट ने दुबई में नौकरी का वादा करके भारतीय महिला को पाक में बेचा, वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत पहुंचीं महिला ने किया खुलासा

नई दिल्ली पिछले 22 वर्षों से पाकिस्तान में रह रही एक भारतीय महिला लाहौर में वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन लौट आई। महिला को एक ट्रैवेल एजेंट धोखे से पाकिस्तान ले गया था। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मूल रूप से मुंबई की हमीदा बानो  2002 में पाकिस्तान के हैदराबाद पहुंची थीं। बानो के अनुसार, एक एजेंट ने उन्हें दुबई में नौकरी दिलाने का वादा करके धोखा दिया। बानो ने बताया कि एजेंट उन्हें दुबई ले जाने के बजाय पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद जिले में ले आया। एक सरकारी अधिकारी ने  बताया,  वह कराची से विमान से यहां पहुंचीं और इसके बाद वह वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत पहुंचीं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें विदा किया।” बानो ने अपने परिवार से मिलने की बात पर बहुत खुशी जाहिर की। बानो ने कहा कि उन्होंने भारत लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें यह दिन देखने को मिला। वर्ष 2022 में स्थानीय यूट्यूबर वलीउल्लाह मारूफ ने अपने ‘व्लॉग’ में साझा किया था कि हमीदा बानो ने 2002 में भारत छोड़ दिया था, जब एक भर्ती एजेंट ने उन्हें दुबई में रसोइया की नौकरी दिलाने का वादा किया था। हालांकि दुबई ले जाने के बजाय उन्हें धोखे से तस्करी कर पाकिस्तान ले आया गया। मारूफ के ‘व्लॉग’ ने उन्हें भारत में अपने परिवार से जुड़ने में मदद की। उनकी बेटी यास्मीन ने भी उनसे फोन पर बात की। मारूफ से बातचीत में हामिदा बानो ने बताया कि पाकिस्तान आने से पहले वह अपने पति की मौत के बाद भारत में अपने चार बच्चों की आर्थिक मदद कर रही थीं। उसने पहले दोहा, कतर, दुबई और सऊदी अरब में बिना किसी परेशानी के रसोइया के तौर पर काम किया था। पाकिस्तान में 22 साल रहने के दौरान बानो ने कराची के एक पाकिस्तानी व्यक्ति से शादी की, जिसकी कोविड-19 से मौत हो गई। तब से वह अपने सौतेले बेटे के साथ रह रही थी।

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