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अध्ययन में पाया गया कि पैरासिटामोल के कारण वृद्ध लोगों में पाचन तंत्र, हृदय और गुर्दे पर पड़ता दुष्प्रभाव

नई दिल्ली चिकित्सक की पर्ची के बिना मिलने वाली दवाओं में शामिल पैरासिटामोल 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में आंत, हृदय और गुर्दे से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है। हल्के से मध्यम बुखार के दौरान आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासिटामोल, अस्थियों से जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए भी चिकित्सक द्वारा परामर्श दी जाने वाली पहली दवा है क्योंकि इसे प्रभावी, अपेक्षाकृत सुरक्षित और सुलभ माना जाता है। हालांकि, दर्द निवारण में पैरासिटामोल की प्रभावशीलता पर कुछ अध्ययनों में सवाल उठाये गए हैं, जबकि अन्य अध्ययनों ने लंबे समय तक इसके उपयोग से पाचन तंत्र संबंधी दुष्प्रभावों, जैसे अल्सर और रक्तस्राव, के बढ़ते जोखिम को रेखांकित किया है। ब्रिटेन के नॉटिंघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए नवीनतम अध्ययन में पाया गया कि पैरासिटामोल के उपयोग से पेप्टिक अल्सर रक्तस्राव (पाचन तंत्र में अल्सर के कारण रक्तस्राव) के जोखिम में क्रमशः 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की वृद्धि होती है और आंत संबंधी रक्तस्राव में कमी आती है। अध्ययन के मुताबिक, पैरासिटामोल के सेवन से गुर्दे के गंभीर रोग का खतरा 19 प्रतिशत, दिल का दौरा पड़ने का खतरा नौ प्रतिशत तथा उच्च रक्तचाप का खतरा सात प्रतिशत बढ़ सकता है। आर्थराइटिस केयर एंड रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ‘‘यह अध्ययन वृद्ध लोगों में गुर्दा, हृदय और आंत संबंधी दुष्प्रभावों को दर्शाता है।’’ नॉटिंघम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रमुख अनुसंधानकर्ता वेया झांग ने कहा, ‘‘कथित तौर पर सुरक्षित होने की वजह से पैरासिटामोल को अस्थियों से जुड़े रोगों के लिए कई उपचार दिशानिर्देशों में प्राथमिक दवा के रूप में अनुशंसित किया गया है, विशेष रूप से वृद्ध लोगों में, जिनमें दवा से उत्पन्न जटिलताओं का उच्च जोखिम होता है।’’ शोधकर्ताओं ने इन नतीजों पर पहुंचने के लिए 1,80,483 लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिन्हें बार-बार पैरासिटामोल दी गई थी।शोधकर्ताओं ने इसके बाद इन स्वास्थ्य रिपोर्ट की तुलना उसी आयु के 4,02,478 (4.02 लाख) लोगों से की, जिन्हें कभी भी बार-बार पैरासिटामोल नहीं दी गई थी।  

आधार कार्ड अपडेशन के लिए मुफ्त ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने की सुविधा 14 जून 2025 तक बढ़ी

नई दिल्ली आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने लाखों आधार धारकों को राहत दी है। अपडेशन के लिए मुफ्त ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने की सुविधा 14 जून 2025 तक बढ़ा दी है। मुफ्त अपडेट की समय सीमा शुरू में 14 जून, 2024 के लिए निर्धारित की गई थी, फिर 14 दिसंबर, 2024 तक बढ़ाने से पहले इसे बढ़ाकर 14 सितंबर, 2024 कर दिया गया था। एक्स पर प्राधिकरण ने पोस्ट किया है कि UIDAl लाखों आधार संख्या धारकों को लाभान्वित करने के लिए 14 जून 2025 तक मुफ्त ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा का विस्तार करता है। यह मुफ्त सेवा केवल myAadhaar पोर्टल पर उपलब्ध है। यूआईडीएआई लोगों को अपने Aadhaar में दस्तावेजों को अपडेट रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। जो लोग अपने आधार कार्ड की जानकारी बदलने की योजना बना रहे हैं, उनके पास ऐसा करने के लिए 14 जून 2025 तक का समय है। इससे पहले, मुफ्त अपडेट के लिए विंडो 14 दिसंबर को बंद हो गई थी। ऑनलाइन आधार डिटेल्स अपडेट करने के स्टेप्स 1. यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर आधार सेल्फ सर्विसपोर्टल पर जाएं अपने मोबाइल पर भेजे गए अपने आधार नंबर, कैप्चा और ओटीपी का उपयोग करके लॉग इन करें। अब दस्तावेज़ अपडेट वाले मेन्यू पर जाएं और मौजूदा डिटेल्स की समीक्षा करें। 4. ड्रॉप-डाउन सूची से उपयुक्त दस्तावेज के प्रकार का चयन करें और सत्यापन के लिए मूल दस्तावेजो की स्कैन की गई प्रतियां अपलोड करें। 5. सेवा अनुरोध संख्या को नोट करना याद रखें। यह आपके आधार अपडेट अनुरोध की प्रक्रिया के चरण को ट्रैक करने में आपकी सहायता करेगा। क्यों जरूरी है आधार अपडेट करना यदि आपके आधार डेटाबेस में कोई बदलाव शामिल करने की आवश्यकता है, तो आपको बाद में किसी भी परेशानी से बचने के लिए इसे अपडेट करना चाहिए। बच्चों के लिए, आपको यह ध्यान रखना होगा कि यदि आपने अपने बच्चे को आधार के लिए नामांकित किया है , जब वह पांच वर्ष से कम आयु का था, तो आपको कम से कम दो बार बायोमेट्रिक रिकॉर्ड अपडेट करवाना होगा- एक बार 5 वर्ष की आयु पार करने के बाद और दूसरा 15 वर्ष पूरा करने के बाद। बॉयोमीट्रिक जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन या फोटो से जुड़े अपडेट के लिए, व्यक्तियों को आधार नामांकन केंद्र या आधार सेवा केंद्र पर जाना होगा। ऑफ़लाइन अपडेट के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें… फॉर्म डाउनलोड करें: यूआईडीएआई की वेबसाइट से नामांकन/अपडेट फॉर्म डाउनलोड करें। केंद्र पर जमा करें: फॉर्म भरें, आवश्यक दस्तावेज लगाएं और जमा करें। बायोमेट्रिक डेटा प्रदान करें: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रॉसेस को पूरा करें। रसीद प्राप्त करें: ट्रैकिंग प्रगति को ट्रैक करने के लिए अपने यूआरएन के साथ एक पर्ची प्राप्त करें।

एस जयशंकर से मिली कांग्रेस सांसद सुधा, श्रीलंकाई सरकार से बात कर भारतीय मछुआरों को रिहा कराने की मांग उठाई

नई दिल्ली तमिलनाडु के मयिलादुथुराई से कांग्रेस सांसद आर सुधा ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने श्रीलंकाई सरकार से बात कर भारतीय मछुआरों को रिहा कराने की मांग उठाई। कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि, वो श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका पर दबाव बनाए कि वे 15-17 दिसंबर को तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान भारतीय मछुआरों को रिहा करें। उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से अनुरोध किया, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा कैद किए गए 141 भारतीय मछुआरों और भारतीय मछुआरों के स्वामित्व वाली 198 मछली पकड़ने वाली नौकाओं को तत्काल छोड़ दिया जाए। कांग्रेस सांसद ने राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों के मुद्दे के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से कच्चाथिवु समझौते पर ध्यान देने और तमिलनाडु के 14 तटीय जिलों में रहने वाले 2.1 करोड़ लोगों के जीवन में शांति लाने के लिए कार्रवाई करने की भी अपील की। जयशंकर को दिए ज्ञापन में इस बात का जिक्र है। इसमें लिखा गया है, “श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायको की 17 दिसंबर, 2024 को प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा, भारत और श्रीलंका से संबंधित कुछ गंभीर सामाजिक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को सामने लाने का एक और अवसर है। इस दौरान श्रीलंकाई जेलों में बंद अवैध रूप से गिरफ्तार भारतीय मछुआरों और श्रीलंका द्वारा अवैध रूप से जब्त की गई मछली पकड़ने वाली नौकाओं और ट्रॉलरों की रिहाई सुनिश्चित करने का भी अवसर है।” बता दें कि तमिलनाडु का तट 1,076 किलोमीटर तक लंबा है, जो भारत की कुल तटीय लंबाई का लगभग 15 प्रतिशत है। प्रदेश के कुल 38 जिलों में से 14 तटीय हैं। इसमें मयिलादुथुराई भी शामिल है। वहीं, अन्य तटीय जिले तिरुवल्लूर, चेन्नई, चैंगलपट्टू, विल्लुपुरम, कुड्डालोर, नागपट्टिनम, तिरुवरुर, तंजावुर, पुदुकोट्टई, रामनाथपुरम, थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी हैं।  

आज वर्तमान पर बात होनी चाहिए, आज संविधान अगर धोखे में है तो इसे महाराष्ट्र में देखा गया: आदित्य ठाकरे

मुंबई कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को लोकसभा में संविधान और मनुस्मृति की प्रतियां दिखाते हुए सरकार पर हमला बोला जिसको लेकर बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज संविधान और हमारे भविष्य पर बात होनी चाहिए। आज वर्तमान पर बात होनी चाहिए। आज संविधान अगर धोखे में है तो इसे महाराष्ट्र में देखा गया। संविधान का अपमान महाराष्ट्र में हुआ था। 50 साल या हजार साल पहले क्या हुआ, इस विषय में भाजपा या कांग्रेस को जाने की जरूरत नहीं है। मुझे लगता है कि हमें आज के मुद्दे पर बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल चुनावों के लिए हिंदुओं का उपयोग करती है और फिर फर्जी समाचार प्रचारित करना शुरू कर देती है। कुछ सिद्धिविनायक मंदिर के स्वामित्व का दावा करते हैं। सच्चाई यह है कि अगर आप देश भर में देखें तो सबसे अधिक हिंदू और हिंदू मंदिर भाजपा शासित राज्यों में खतरे में हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा कि दादर इलाके में 80 साल पुराने हनुमान मंदिर को नोटिस भेजा गया था। हमारे विरोध के बाद बीजेपी के कई नेता हनुमान मंदिर पर नाटक करने पहुंचे थे। अगर इतनी ही हिम्मत है तो बांग्लादेश में हिन्दुओं को बचाओ। हमारी मांग यही है कि जो हनुमान मंदिर को नोटिस भेजा गया था, उस नोटिस पर स्टे लगना चाहिए। कल उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के नकली हिंदुत्व, बीजेपी के चुनावी हिंदुत्व को उजागर किया। रेलवे ने दादर मंदिर को दिए गए नोटिस को खारिज कर दिया। आज हम दादर मंदिर जा रहे हैं। महाराष्ट्र के दादर रेलवे स्टेशन के बाहर बने हनुमान मंदिर को अब नहीं हटाया जाएगा। रेलवे ने मंदिर को दिए गए नोटिस पर रोक लगा दी है। मध्य रेलवे की ओर से कहा गया कि भाजपा नेता आशीष शेलार और मंगल प्रभात लोढ़ा के अनुरोध पर हनुमान मंदिर के खिलाफ रेलवे के नोटिस पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। रेलवे ने चार दिसंबर को दादर रेलवे स्टेशन के बाहर बने हनुमान मंदिर के ट्रस्टी और पुजारी को भेजे नोटिस में कहा था कि यह अतिक्रमण है। इससे यात्रियों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। रेलवे प्रशासन ने मंदिर को सात दिन में हटाने के लिए कहा था।

शीनबाम ने कहा, नागरिकों को मेक्सिको वापस भेजने के नियम हैं, ऐसा नहीं है कि पुलिस उन्हें रोकती है और फिर भेज देती है

मेक्सिको सिटी राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि अमेरिका में स्थित मेक्सिको के वाणिज्य दूतावास अपने नागरिकों के लिए कानूनी सहायता को और बेहतर करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें उनके अधिकारों और निर्वासन प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि हम मेक्सिको में मेक्सिकन लोगों के स्वाग्त के लिए तैयार हैं। प्रेसिडेंट शीनबाम का यह बयान, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार दी जा रही सामूहिक निर्वासन की धमकियों के जवाब में आया। ट्रंप ने अवैध इमीग्रेशन को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के लिए मेक्सिको की आलोचना की है। शीनबाम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “(नागरिकों) को मेक्सिको वापस भेजने के नियम हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस उन्हें रोकती है और फिर उसी दिन उन्हें बॉर्डर पर भेज देती है। ऐसे मानक और नियम हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए, और उन्हें बिना किसी कारण के निर्वासित नहीं किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने वाणिज्य दूतावासों की क्षमता को मजबूत कर रहे हैं और कानूनी सहायता के स्तर में सुधार कर रहे हैं। सरकार वाणिज्य दूतावासों के लिए संपर्क जानकारी प्रदान करेगी, ताकि मैक्सिकन नागरिक निर्वासन के मामले में सहायता प्राप्त कर सकें।” शीनबाम ने कहा, “हम मेक्सिको में मेक्सिकन लोगों का स्वागत करने के लिए हैं और उन्हें निर्वासित किए जाने की स्थिति में उनकी जरुरत की हर चीज तैयार कर रहे हैं।” इससे पहले नवंबर में, राष्ट्रपति शिनबाम ने प्रवासियों के संभावित बड़े पैमाने पर निर्वासन के लिए चिंता व्यक्त की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनके पदभार संभालने के बाद ऐसा हो सकता है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक शीनबाम ने कहा, “यदि निर्वासन होता है, तो हम मैक्सिकन लोगों को स्वीकार करेंगे, और हमारे पास इसके लिए एक योजना है।” प्रवासियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किए जाने पर अपनी असहमति व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा, “इसलिए दुनिया भर में न्याय की संस्थाएं मौजूद हैं ताकि बुनियादी अधिकारों की रक्षा की जा सके। सरकार निर्वासन के जोखिम में फंसे प्रवासियों की बेहतर सुरक्षा के लिए अमेरिका में मैक्सिकन वाणिज्य दूतावासों के नेटवर्क को मजबूत कर रही है। ट्रंप, जो 20 जनवरी, 2025 को शपथ लेंगे, ने अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर अवैध प्रवासियों के प्रवाह को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की धमकी दी है।

पुलिस से परेशान होकर शंभू किसानी मोर्चे में शामिल एक किसान ने मानसिक तनाव के कारण पिया ज़हर, हालत बिगड़ी

पटियाला शंभू किसानी मोर्चे में शामिल एक किसान ने हरियाणा पुलिस द्वारा सख्ती किए जाने के बाद मानसिक तनाव के कारण सल्फास (ज़हर) पी लिया। इस घटना के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई और उसे तत्काल पटियाला के सरकारी राजेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स के अनुसार, किसान की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है। शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों पर हरियाणा पुलिस द्वारा अचानक सख्ती की गई। पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई से वहां मौजूद किसान खासे तनाव में थे। इस दौरान जोरा सिंह, जो लुधियाना जिले के खन्ना स्थित गांव रतन खेड़ी का निवासी है और उम्र 50 साल है, पुलिस की इस बर्बरता को देख पाता है कि उसके आत्मविश्वास को गहरा धक्का लगा। मानसिक अवसाद के चलते जोरा सिंह ने एक हताशा की स्थिति में सल्फास पी लिया। किसान नेता सुरजीत सिंह फुल ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि यह घटना बहुत ही दुखद है। उन्होंने कहा कि “किसान शांतिपूर्वक अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। इस घटना को देखकर जोरा सिंह, जो अपनी भूमि के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा था, मानसिक रूप से टूट गया और उसने सल्फास पी लिया।” फुल ने आगे कहा कि “हमारे किसान भाइयों पर इस तरह की हिंसा दुखद है। हम इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं और सरकार से अपील करते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।” जोरा सिंह की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उसकी हालत स्थिर नहीं हुई है। उसे तुरंत इलाज के लिए भर्ती किया गया और चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।

स्कूल में गिरा ओवरहेड वॉटर टैंक गिरने से हुआ हादसा, तीन छात्रों की मौत, 2 घायल

ईटानगर अरुणाचल प्रदेश में एक दुखद हादसे में निजी स्कूल का ओवरहेड वाटर टैंक गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीन छात्रों की मौत हो गई। समाचार एजेंसी एएनआई ने घटना की जानकारी देते हुए पुलिस के हवाले से बताया कि नाहरलागुन इलाके में शनिवार को एक निजी स्कूल के तीन छात्रों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 9 बजे मॉडल विलेज के सेंट अल्फोंसा स्कूल में हुई। नाहरलागुन के पुलिस अधीक्षक मिहिन गाम्बो ने एजेंसी से कहा, ‘पांच में से तीन की मौत हो गई और दो अन्य का इलाज चल रहा है।’ प्रिंसिपल और मालिक पुलिस हिरासत में एसपी ने कहा, ‘मॉडल विलेज, नाहरलागुन में सेंट अल्फोंसा स्कूल की ओवरहेड वॉटर टैंक की दीवार गिर गई और स्कूल के कुछ छात्रों पर गिर गई। घायल छात्रों को टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (TRIHMS) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया।’ पुलिस ने कहा कि मृतक कक्षा 9 के छात्र हैं, जबकि घायल कक्षा 6 और 8 के छात्र हैं। पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल, मालिक और चार अन्य कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। जांच में जुटी पुलिस मिहिन गाम्बो ने कहा, ‘शुरुआत में हमने इमारत के मालिक और स्कूल के प्रिंसिपल सहित छह लोगों को हिरासत में लिया है और हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। तीनों मृतक छात्र कक्षा 9 के छात्र हैं। घायल हुए दो छात्रों में से एक कक्षा 6 का छात्र है और दूसरा कक्षा 8 का छात्र है।’ पुलिस मामले की जांच कर रही है।

श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमले के आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर, 9 की हुई थी मौत

जम्मू राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को शिवखोड़ी में श्री माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं की बस पर हुए आतंकी हमले में लिप्त एक आरोपित के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। यह आरोपपत्र जम्मू स्थित विशेष अदालत में दायर किया गया है। एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि आज दायर किए गए आरोपपत्र में हाकम खान उर्फ हाकिम दीन को आरोपित बनाया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि श्री माता वैष्णो देवी की तीर्थयात्रा पर आए श्रद्धालुओं का एक दल नौ जून 2024 को कटड़ा से आगे शिवखोड़ी स्थित भगवान शिव की पवित्र गुफा में विराजमान पवित्र शिवलिंग के दर्शन करने के बाद जब वापस लौट रहे थे तो रास्ते में कंडा, झंडी मोढ़ के पास आतंकियों ने उनकी बस पर हमला किया। इस हमले में आठ श्रद्धालु और बस चालक बलिदानी हो गए। हमले में 41 श्रद्धालु जख्मी हो गए थे। हाकम खान के खिलाफ सबूत जुटाकर किया गिरफ्तार आतंकियां ने यह हमला जम्मू प्रांत में लोगों में भय की भावना पैदा करने और जम्मू-कश्मीर में आने वाले श्रद्धालुओं को रोकने के षडयंत्र के तहत किया था। आतंकियों द्वारा दागी गई एक गोली बस चालक के सिर में लगी थी और इसके साथ ही बस बेकाबू हो सड़क के साथ सटी खाई में जा गिरी थी। केंद्रीय गृहमंत्रालय के निर्देशानुसार, एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। एनआईए जांच के दौरान हाकम खान उर्फ हाकिमदीन के खिलाफ आवश्यक सुबूत जुटाए और उसे गिरफ्तार कर लिया। हाकम दीन ने हमले में लिप्त आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के अलावा अन्य साजो सामान का भी बंदोबस्त किया था। उसने आतंकियों के लिए उस जगह का चुनाव किया था, जहां हमला किया गया। इसके अलावा उसने ही आतंकियों को वहां तक पहुंचाया था। एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि अभी इस मामले की जांच जारी है।

पाकिस्तान के सरेंडर वाली तस्वीर को भारतीय सेना ने हटाई, उस तस्वीर की जगह एक नई पेंटिंग ने ली

नई दिल्ली 53 साल पहले जब पाकिस्तानी जनरल नियाजी ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया था, उसकी एक ऐतिहासिक तस्वीर ने भारतीय सेना की शक्ति को दुनिया के सामने रखा था। लेकिन अब, भारतीय थलसेना प्रमुख के ऑफिस में वह तस्वीर हटा दी गई है और उसकी जगह एक नई पेंटिंग लगाई गई है, जो भारतीय सेना के नए सैन्य फोकस को दर्शाती है। यह पेंटिंग न केवल सेना की आधुनिक रणनीति और तकनीकी विकास को दिखाती है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देती है कि अब भारत का ध्यान पाकिस्तान पर नहीं, बल्कि चीन पर केंद्रित है।   क्या है  खास पेंटिंग में? 1971 की प्रसिद्ध तस्वीर में जनरल नियाजी भारतीय सेना के सामने सरेंडर करते हुए नजर आ रहे थे, लेकिन अब थलसेना प्रमुख के लॉन्ज में उस तस्वीर की जगह एक नई पेंटिंग ने ली है। इस पेंटिंग में लद्दाख के पैंगांग लेक का दृश्य दिखाई दे रहा है, जिसमें आधुनिक टैंक, बोट, ऑल-टेरेन व्हीकल्स और अपाचे हेलिकॉप्टर जैसे युद्ध उपकरण हैं। पेंटिंग में महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ को खींचने वाले भगवान कृष्ण, चाणक्य की युद्ध नीति, और भारतीय सेना के तीनों अंगों के समन्वय को दिखाने वाले चित्र भी हैं। यह सब मिलकर एक संदेश देते हैं कि अब भारतीय सेना का मुख्य फोकस पाकिस्तान पर नहीं, बल्कि चीन पर है। भारत का नया सैन्य फोकस चीन पर दुनिया में बदलते समय और रणनीतियों के साथ भारतीय सेना ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पेंटिंग में दिखाए गए आधुनिक सैन्य उपकरण, जैसे टैंक, बोट, हेलिकॉप्टर और ऑल-टेरेन व्हीकल्स, यह दर्शाते हैं कि भारतीय सेना अब समन्वित तरीके से और उच्च तकनीकी स्तर पर युद्ध के लिए तैयार है। रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल अशोक कुमार का कहना है कि यह पेंटिंग भारतीय सेना के तीनों अंगों – थलसेना, वायुसेना और नौसेना – के समन्वय को दिखाती है, जो मिलकर किसी भी संभावित युद्ध में तेज और प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम हैं। इसके अलावा, यह पेंटिंग आत्मनिर्भर भारत की सैन्य रणनीति और सोच को भी प्रदर्शित करती है, जिसमें भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता के आधार पर अपनी ताकत को बढ़ाया है। चीन को स्पष्ट संदेश: चाणक्य और गीता की नीति चीन, जो शुन त्जू की प्रसिद्ध “आर्ट ऑफ वॉर” से प्रेरित होकर युद्ध की रणनीति अपनाता है, भारतीय सेना से 2020 में पूर्वी लद्दाख में हार चुका है। भारतीय सेना ने चाणक्य की नीति और गीता के सिद्धांतों से प्रेरित होकर एक ऐसी रणनीति अपनाई, जिसने न केवल चीन के आक्रमण को नाकाम किया, बल्कि उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर दिया। इस पेंटिंग में भारतीय सेना की ताकत और उसकी आधुनिकता को दिखाने के साथ यह संदेश भी दिया जा रहा है कि भारतीय सेना अपने विरोधियों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सेना के तीनों अंगों का समन्वय, जमीन, हवा और समुद्र में ऑपरेशन की क्षमता, और उच्च तकनीकी प्रणालियों के उपयोग से यह पेंटिंग यह संदेश देती है कि भारत के पास चीन जैसी शक्तियों को हराने के लिए रणनीति और संसाधन दोनों हैं। सैन्य रणनीति का प्रतीक यह पेंटिंग भारतीय सेना के धार्मिक और शाश्वत दृष्टिकोण को भी दर्शाती है, जैसे महाभारत की गीता और चाणक्य की नीति में दिखाया गया है। सेना अब केवल देश की रक्षा नहीं कर रही, बल्कि वह राष्ट्र के मूल्यों, न्याय और धर्म की रक्षा करने के लिए भी संघर्ष कर रही है। यह पेंटिंग भारत की सेना की तैयारी और उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। भारत की तैयारी और चीन के खिलाफ संदेश इस पेंटिंग से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि चीन के पास शुन त्जू की “आर्ट ऑफ वॉर” हो सकती है, लेकिन भारत के पास चाणक्य की नीति और गीता का सार है, जो किसी भी युद्ध में न केवल धार्मिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से प्रभावी साबित होते हैं, बल्कि आधुनिक तकनीकी युद्ध के साथ पूरी तरह से सक्षम हैं। यह पेंटिंग केवल एक सैन्य चित्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना की शक्ति, आधुनिकता, और चाणक्य की नीति के साथ दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई है, जो भविष्य में किसी भी संघर्ष में भारत की सफलता की कुंजी साबित हो सकती है।

पत्नी और ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर बेंगलुरु पुलिस के हेड कांस्टेबल ने वर्दी में की आत्महत्या

बेंगलुरु एक दिल दहला देने वाली घटना में बेंगलुरु पुलिस के हेड कांस्टेबल ने वर्दी में आत्महत्या कर ली। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह कदम उन्होंने पत्नी और ससुराल वालों द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के बाद उठाया। यह घटना बिहार के इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के मामले के बाद सामने आई है, जिन्होंने सोमवार को एक वीडियो और नोट जारी करते हुए अपनी पत्नी पर प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया और आत्महत्या कर ली। हेड कांस्टेबल थिप्पन्ना ने दी जान बेंगलुरु के हुलिमावु ट्रैफिक पुलिस स्टेशन में तैनात 34 वर्षीय हेड कांस्टेबल थिप्पन्ना, विजयपुरा जिले के सिंधगी के पास हैंडिगनुर गांव के निवासी थे। उन्होंने शुक्रवार रात शहर के हीलालिगे रेलवे स्टेशन और कार्मेलाराम हुसागुरु रेलवे गेट के बीच रेल पटरियों पर जान दे दी। घटनास्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें थिप्पन्ना ने अपनी पत्नी और ससुर यमुनप्पा को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। नोट में उन्होंने लिखा, “12 दिसंबर को उन्होंने मुझे रात 7:26 बजे फोन किया और 14 मिनट तक बात की। इस दौरान उन्होंने मुझे धमकी दी। अगले दिन जब मैंने अपने ससुर से बात की, तो उन्होंने मुझे मर जाने को कहा और कहा कि उनकी बेटी मेरे बिना बेहतर रहेगी।” नोट में लिखा है, “उन्होंने मेरे साथ दुर्व्यवहार भी किया।” पुलिस ने दर्ज किया मामला थिप्पन्ना के शव को अस्पताल के मोर्चरी में भेजा गया और बयप्पनाहल्ली रेलवे पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 108, 351(3), और 352 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इंजीनियर अतुल सुभाष का मामला इस घटना से पहले बेंगलुरु में कार्यरत एक इंजीनियर अतुल सुभाष ने आत्महत्या की थी। उन्होंने एक घंटे लंबे वीडियो और 24 पन्नों के सुसाइड नोट में पत्नी और उसके परिवार पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। नोट में अतुल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया ने तलाक के लिए 3 करोड़ रुपये की मांग की थी। उन्होंने लिखा, “अगर अदालत मेरे आरोपों को नकार देती है, तो मेरी अस्थियों को अदालत के बाहर नाले में डाल देना। जब तक मेरे दोषियों को सजा न मिले, मेरी अस्थियों का विसर्जन मत करना।” अतुल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सुप्रीम कोर्ट को ईमेल भेजकर प्रताड़ित पतियों के लिए मदद की गुहार भी लगाई थी। सोशल मीडिया पर उठा #MenToo अभियान अतुल की आत्महत्या के बाद सोशल मीडिया पर #MenToo और #JusticeForAtulSubhash ट्रेंड हुआ। कई पुरुषों ने इस अभियान के जरिए अपनी पीड़ा और अनुभव साझा किए। दोनों घटनाओं ने समाज में पुरुषों के अधिकारों और विवाह संबंधी विवादों में न्याय की मांग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पुलिस दोनों मामलों की गहन जांच कर रही है।

कांग्रेस के नेहरू-गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी: मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में संविधान पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने दो टूक कहा कि हमारा संविधान भारत की एकता का आधार है। इसको बनाने में समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व था। उन्होंने कांग्रेस के नेहरू-गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इस बात का इसलिए जिक्र कर रहा, क्योंकि इस परिवार ने 55 साल तक देश पर राज किया। इसी वजह से जानने का अधिकार है कि क्या-क्या हुआ। पीएम मोदी ने कहा, ‘’इस परिवार के कुविचार, कुनीति आदि की परंपरा लगातार चल रही है। हर स्तर पर इस परिवार ने संविधान को चुनौती दी है। 1947 से 1952 तक देश में चुनी हुई सरकार नहीं थी। अस्थायी व्यवस्था थी और चुनाव नहीं हुए थे। 1952 से पहले राज्यसभा का भी कोई गठन नहीं हुआ था और जनता का भी कोई आदेश नहीं था, लेकिन इसके बाद भी 1951 अध्यादेश लाकर संविधान को बदल दिया और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला कर दिया।” पीएम मोदी ने कहा कि भारत बहुत ही जल्द विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में मजबूत कदम रख रहा है। 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प है कि जब आजादी की शताब्दी मनाएंगे तो देश को विकसित भारत बनाकर रहेंगे। इस संकल्प से सिद्धि के लिए सबसे बड़ी जरूरत है, वह है भारत की एकता। संविधान के निर्माण कार्य में देश के बड़े बड़े दिग्गज, साहित्यकार, स्वंत्रतासेनानी थे। कई फील्ड के प्रोफेशल्स थे। लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”जब हम संविधान लागू होने के 75 वर्ष का उत्सव मना रहे हैं तो अच्छा संयोग है कि राष्ट्रपति पद पर एक महिला आसीन हैं जो संविधान की भावना के अनुरूप भी है। भारत का गणतांत्रिक अतीत विश्व के लिए प्रेरक रहा है और इसलिए देश को लोकतंत्र की जननी के रूप में जाना जाता है। हमारी सरकार के निर्णयों में लगातार भारत की एकता को मजबूती देने का प्रयास किया जाता रहा है, अनुच्छेद 370 एकता में रुकावट बना हुआ था और इसलिए हमने जमीन में गाड़ दिया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि संविधान निर्माताओं के दिमाग में एकता की भावना थी, लेकिन आजादी के बाद देश की एकता के मूल भाव पर प्रहार हुआ और गुलामी की मानसिकता में पले-बढ़े लोग विविधता में एकता की जगह विरोधाभास खोजते रहे। पीएम मोदी ने कहा कि हमने संविधान की एकता की भावना के अनुरूप नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को बहुत बल दिया है और अब गरीब परिवार के बच्चे मातृभाषा में पढ़ाई करके डॉक्टर-इंजीनियर बन सकते हैं।

भारत का संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, यह हमारे देश की आत्मा है: राहुल गांधी

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संविधान और उसमें निहित विचारधारा पर जोर देते हुए कहा कि जब हम संविधान खोलते हैं, तो उसमें हमें डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की आवाजें और उनके विचार सुनाई देते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में हमारी विरासत की झलक है। राहुल गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान संविधान और लोकतंत्र की महत्ता पर अपनी बात रखते हुए कहा, “भारत का संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, यह हमारे देश की आत्मा है। इसमें हर नागरिक के अधिकार, कर्तव्य और देश के प्रति जिम्मेदारी का विवरण दिया गया है। यह हमें समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे की भावना सिखाता है।” राहुल गांधी लोकसभा में मनुस्मृति लेकर पहुंचे थे। उनके एक हाथ में संविधान था तो दूसरे हाथ में मनुस्मृति। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत के संविधान को “भारत माता” का दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा, “संविधान आधुनिक भारत का दस्तावेज है, लेकिन इसे प्राचीन भारत और उसके विचारों के बिना कभी नहीं लिखा जा सकता था।” राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष में संविधान को बचाने की बात करने वाले लोग बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सावरकर ने संविधान के खिलाफ बोला था। राहुल गांधी ने एकलव्य का किस्सा सुनाते हुए कहा कि “आप (भाजपा) गरीबों का, पूरे देश का अंगूठा काट रहे हो।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को लोकसभा में सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि जिस तरह एकलव्य का अंगूठा काटा गया उसी तरह से आज सरकार देश के युवाओं का अंगूठा काट रही है। उन्होंने ‘संविधान की 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आज भारत में एक वैचारिक लड़ाई चल रही है और विपक्ष की तरफ संविधान के विचारों के संरक्षक हैं। राहुल गांधी ने कहा कि द्रोणाचर्य और एकलव्य की गाथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे एकलव्य का अंगूठा काटा गया, उसी तरह सरकार पूरे देश आप पूरे देश का युवाओं का अंगूठा काट रही है। उन्होंने कहा, ‘‘जब आप एक उद्योगपति को धारावी परियोजना देते हो, बंदरगाह और हवाईअड्डे को देते हैं तो आप हिंदुस्तान का अंगूठा काटते हैं।’’ राहुल गांधी ने दावा किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने संविधान के बारे में कहा था कि इसमें कुछ भी भारतीय नहीं है। कांग्रेस नेता ने सत्तापक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जब आप संविधान की रक्षा की बात करते हैं तो आप सावरकर को कमतर और अपमानित करते हैं।’’ राहुल गांधी ने सावरकर का हवाला देते हुए कहा कि “उन्होंने कहा था कि भारत के संविधान की सबसे बुरी बात यह है कि इसमें कुछ भी भारतीय नहीं है। मनुस्मृति वह धर्मग्रंथ है जो हमारे हिंदू राष्ट्र के लिए वेदों के बाद सबसे अधिक पूजनीय है और जिससे हमारा प्राचीन काल हमारी संस्कृति, रीति-रिवाज, विचार और व्यवहार का आधार बना है। इस पुस्तक ने सदियों से हमारे राष्ट्र की आध्यात्मिक और दैवीय यात्रा को संहिताबद्ध किया है। आज मनुस्मृति ही कानून है।” ये सावरकर के शब्द हैं।” राहुल गांधी ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान भाजपा पर हमला करने के लिए एकलव्य की कहानी का हवाला दिया। गांधी ने कहा, “जैसे द्रोणाचार्य ने एकलव्य के अंगूठे काटे थे, वैसे ही भाजपा भारत में युवाओं के अंगूठे काट रही है।” उन्होंने कहा, “जब भाजपा धारावी को अडानी को देती है, तो आप छोटे व्यापारियों के अंगूठे काट रहे हैं।”

मालेगांव वोट जिहाद पैसा घोटाले की जांच शुरू हो गई है और जल्द ही सब साफ हो जाएगा: किरीट सोमैया

मुंबई भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता एवं पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने शनिवार को लोकसभा चुनाव में मालेगांव पर वोटों के लिए हुई फंडिंग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, मालेगांव वोट जिहाद पैसा घोटाले की जांच शुरू हो गई है और जल्द ही सब साफ हो जाएगा। सोमैया ने कहा, “मालेगांव वोट जिहाद का पैसा घोटाले मामले में यह बात सामने आई है कि सिराज मोहम्मद ने नासिक मर्चेंट बैंक में जो 14 बेनामी कंपनियों के अकाउंट खोले थे, उनमें हिंदुस्तान के 21 राज्यों के 255 बोगस कंपनियों के बैंक अकाउंट से 112 करोड़ 71 लाख 97 हजार 780 रुपए जमा हुए।” उन्होंने कहा, “इसी तरह से मालेगांव की बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में 5 बेनामी अकाउंट खोले गए। इनमें 53 करोड़ 75 लाख रुपए के रुपए आए हैं। अब महाराष्ट्र के एटीएस पुलिस ने इसकी जांच अपने हाथ में ली है। जो 250 से बोगस कंपनियों में से पैसे आए हैं, अब उनकी जांच भी शुरू हो चुकी है।” दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को महाराष्ट्र में हार का सामना करना पड़ा, मालेगांव में भी बीजेपी उम्मीदवार की हार हुई थी। 11 नवंबर को भाजपा नेता किरीट सोमैया ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोट जिहाद के लिए करोड़ों की फंडिंग का खुलासा किया था। उससे पहले भी उन्होंने वोट जिहाद के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग की बात कही थी। भाजपा नेता ने कहा था- “मालेगांव में सिराज अहमद और मोईन खान नाम के शख्स ने मिलकर दो दर्जन बेनामी अकाउंट एक कॉपरेटिव बैंक में खोले, जिसमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में मौजूद ब्रांचों से इन बेनामी अकाउंट में पैसे भेजे गए थे। सिर्फ चार दिन में 125 करोड़ रुपये से अधिक रकम इन अकाउंट में जमा की गई। इसके बाद सिराज अहमद और मोईन खान ने अलग-अलग 37 अकाउंट में वापस पैसे ट्रांसफर किए और फिर इसे निकाल भी लिया गया। कुल मिलाकर 2,500 बैंक ट्रांजेक्शन किया गया, जिसमें 125 करोड़ पैसे भेजे गए और इतने ही निकाल भी लिए गए।”  

तिरुमाला ‘लड्डू’ विवाद की जांच कर रही एसआईटी टीम ने मंदिर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया

तिरुपति आंध्र प्रदेश के तिरुपति में भगवान श्री वेंकटेश्वर मंदिर में शनिवार सुबह विशेष जांच दल (एसआईटी) की छह सदस्यीय टीम मंदिर की रसोई का निरीक्षण करने पहुंची। तिरुमाला ‘लड्डू’ विवाद की जांच कर रही एसआईटी टीम ने मंदिर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। जांच दल ने मंदिर की रसोई की भी जांच की, जहां पवित्र तिरुमाला श्रीवारी लड्डू (प्रसादम) बनाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने प्रयोगशाला का निरीक्षण किया, जहां लड्डू की गुणवत्ता जांची जाती है। एसआईटी टीम ने आटा मिल का भी निरीक्षण किया। टीम ने श्रीवारी मंदिर में लड्डू पोटू, मंदिर के बाहर बूंदी पोटू, घी स्टोरेज सेंटर और विपणन (मार्केटिंग) गोदाम से साक्ष्य एकत्र कर रही है। वे मंदिर के अधिकारियों से लड्डू बनाने की विधि, घी की खपत, प्रसाद बनाने, घी की आपूर्ति और अन्य मुद्दों पर विवरण भी एकत्र कर रहे हैं। एसआईटी टीम ने आवश्यक रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। ज्ञात हो कि इससे तीन हफ्ते पहले, एसआईटी की एक टीम पवित्र प्रसादम में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में मिलावट की जांच करने के लिए तिरुपति गई थी। टीम ने विस्तृत जांच की थी, जिसका उद्देश्य मिलावट के मामले के बारे में पूरी जानकारी जुटाना था। बता दें कि सितंबर में आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में जो प्रसाद भक्तों को लड्डू के रूप में दिया जाता है, उसमें जानवरों की चर्बी और मछली तेल से बनाई जाने वाली घी का उपयोग करने की बात सामने आई थी। मिलावटी घी से बने प्रसाद के खुलासे ने पूरे देश के करोड़ों भक्तों की आस्था पर गहरी चोट पहुंचाई थी। इस बात के सामने आने के बाद से देशभर के साधु-संतों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मांग शुरू की थी।  

‘कश्मीर मुद्दे’ के समाधान के लिए सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल करने का संकल्प लिया: पीडीपी

श्रीनगर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने जम्मू-कश्मीर में सम्मान के साथ शांति के लिए अपने संघर्ष को फिर से तेज करने और ‘कश्मीर मुद्दे’ के समाधान के लिए सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल करने का शनिवार को संकल्प लिया। पार्टी ने पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे की बहाली पर भी जोर दिया है। पीडीपी ने पार्टी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में अपनी आम परिषद की बैठक के दौरान इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने अपने मूलभूत सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। पीडीपी ने प्रस्ताव में कहा, ‘‘हम जम्मू-कश्मीर राज्य के वास्ते सम्मान के साथ शांति के लिए अपने संघर्ष को फिर से तेज करने का संकल्प लेते हैं, जिसमें कश्मीर मुद्दे को हल करने को लेकर सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों का उपयोग करना शामिल है। इसमें भारत के संविधान के तहत पांच अगस्त, 2019 तक हमारे लोगों को प्राप्त विशेष दर्जे की बहाली भी शामिल है।’’ पार्टी ने ‘‘भारत में मुसलमानों के खिलाफ नफरत के बढ़ते माहौल पर भी गहरी चिंता व्यक्त की’’ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हिंसा को रोकने, झूठे विमर्शों को दूर करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया। पीडीपी ने प्रस्ताव में कहा, ‘‘हम भारत में अपने विश्वास की पुष्टि करते हैं, क्योंकि यह एक ऐसा राष्ट्र है जो विविधता, आपसी सम्मान और व्यक्तिगत अधिकारों तथा विश्वासों की सुरक्षा का जश्न मनाता है।’’ आम परिषद ने राजनीतिक कैदियों की रिहाई का भी आह्वान किया। पीडीपी ने कहा, ‘‘बैठक में भारत भर की विभिन्न जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की स्थिति की तत्काल समीक्षा की मांग की गई है। हम कमजोर या असंगत आरोपों पर हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों की रिहाई की मांग करते हैं और कैदियों को जम्मू-कश्मीर स्थानांतरित करने की वकालत करते हैं।’’ हाल के विधानसभा चुनाव में पीडीपी के प्रदर्शन पर पार्टी की आम परिषद ने स्वीकार किया कि हालांकि यह उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा ‘‘हमें विश्वास है कि निर्वाचित प्रतिनिधि लोगों की चिंताओं, आकांक्षाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।’’ आम परिषद ने यह भी आशा जताई की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार अपने घोषणापत्र और प्रतिबद्धताओं में दिए गए महत्वपूर्ण जनादेश और विश्वास के अनुरूप कार्य करेगी। पीडीपी ने कहा, ‘‘हालांकि, हम देखते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के शुरुआती कदम इन अपेक्षाओं पर पूर्ण रूप से खरे नहीं उतर पाए हैं। हम जम्मू-कश्मीर सरकार से आग्रह करते हैं कि वह जनादेश के वास्तविक सार को पहचाने और प्रभावी ढंग से नेतृत्व करे।’’  

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