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थिएटर बंद, लेकिन घर में छाई धुरंधर: पाकिस्तान में 16 रुपए में मिल रही पायरेटेड CD

इस्लामाबाद   रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर फिल्म धुरंधर पाकिस्तान में थिएट्रिकल रिलीज के दौरान बैन कर दी गई. हालांकि, लोगों ने फिल्म के ओटीटी पर आते ही बता दिया कि इस फिल्म का वो कितना इंतजार कर रहे थे. फिल्म नेटफ्लिक्स रिलीज हुई और पाकिस्टान में टॉप ट्रेंड करने लगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज के 12 दिनों के अंदर ही पाकिस्तान में इस फिल्म को 20 लाख से ज्यादा बार अवैध रूप से डाउनलोड किया गया. अब फिल्म को लेकर एक और खबर आ रही है. कराची की गलियों में आदित्य धर की इस फिल्म की पायरेटेड सीडी धड़ल्ले से बिक रही है. धुरंधर को भले ही पाकिस्तान और कुछ गल्फ देशों में सिनेमाघरों में रिलीज की इजाजत नहीं मिली, लेकिन फिल्म का क्रेज सीमाओं में बंधा नहीं. ओटीटी पर रिलीज के बाद यह स्पाई थ्रिलर अब पाकिस्तान के पायरेटेड बाजारों तक पहुंच चुकी है, जहां इसकी कॉपियां खुलेआम बेची जा रही हैं. न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक ने कराची के रेनबो सेंटर का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें दुकानदार खुलेआम इस फिल्म की पायरेटेड डीवीडी बेचते नजर आ रहे हैं. कराची के बाजार में ‘धुरंधर’ का जलवा यूट्यूबर कार्ल रॉक ने जो वीडियो शेयर किया है उस वीडियो में वह एक दुकानदार से बात करते नजर आ रहे हैं. वह कहते हैं- ‘पाकिस्तान में इंडियन फिल्म्स बैन हैं, लेकिन देखिए क्या मिला, ये नई फिल्म है हिंदुस्तान से.’ दुकानदार से उन्होंने बात की और उसने कहा कि ये सबसे नई फिल्म है. 16 रुपए में बिक रही पायरेटेड CD कार्ल ने रणवीर सिंह का जिक्र करते हुए बताया कि वे सिंधी हैं और उनके दादा-परदादा विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे. फिर उन्होंने दुकानदार से पूछा, ‘ये फिल्म कितने की है?’ दुकानदार ने जवाब दिया, ‘सिर्फ 50 पाकिस्तानी रुपये’, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 16 रुपये.’ कार्ल ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘बहुत सस्ता है!’ वायरल हो रहा ये वीडियो, लोग कर रहे ऐसी बात अब यह वीडियो वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर टिप्पणियां की हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘दोनों देशों के बीच इतनी नफरत क्यों?’, जबकि दूसरे ने कहा, ‘पाकिस्तान में ये फिल्म भारत से ज्यादा हिट रही लगती है’. कुछ ने लिखा कि सियासी तनाव के बावजूद आम लोगों के बीच फिल्मों का प्यार खत्म नहीं हुआ है. बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर का रिकॉर्ड आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने दुनियाभर में 1340 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया. महज 250-300 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का तमगा हासिल किया. रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने ‘पुष्पा 2’ को भी पीछे छोड़ दिया है. अब ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की तैयारी फिल्म के सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की रिलीज डेट 19 मार्च 2026 तय की गई है. यह फिल्म यश की पैन-इंडिया फिल्म ‘टॉक्सिक’ से सीधी टक्कर लेगी. ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों फिल्मों के बीच जबरदस्त क्लैश होने वाला है. बुक माय शो के आंकड़ों के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ में 1.02 लाख से ज्यादा लोग इंट्रेस्टेड हैं, जबकि ‘टॉक्सिक’ में यह आंकड़ा 3.61 लाख है . पाकिस्तान और गल्फ देशों में क्यों नहीं हुई रिलीज बता दें कि ‘धुरंधर’ को पाकिस्तान और गल्फ देशों में थिएट्रिकल रिलीज के वक्त बैन कर दिया गया था. वजह थी फिल्म में पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की सियासत, कंधार हाईजैक, 2001 संसद हमले और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों जैसी संवेदनशील घटनाओं को दिखाया गया है.

CJI सूर्यकांत ने RERA पर सुनाया फैसला, कहा—दागी बिल्डरों को फायदा देने वाला कानून खत्म होना चाहिए

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि सभी राज्यों के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के गठन पर पुनर्विचार करने का यह सही समय है क्योंकि यह संस्था दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों के लिए RERA बनाया गया था, वे ‘पूरी तरह से निराश और हताश’ हैं। पीठ ने जोर देकर कहा कि अगर इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को RERA के कार्यालय को अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए ये टिप्पणियां कीं। हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य द्वारा दायर याचिका पर पीठ ने नोटिस जारी किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जो राज्य के RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से संबंधित था। उच्च न्यायालय ने इससे पहले RERA कार्यालय के स्थानांतरण से संबंधित जून 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया। उच्चतम न्यायालय ने 30 दिसंबर के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी है। CJI भड़के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘दागी बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा यह संस्था (RERA) कुछ नहीं कर रही है। बेहतर होगा कि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है …अब समय आ गया है कि सभी राज्य इस प्राधिकरण के गठन पर ही पुनर्विचार करें।’ राज्य सरकार ने अधिवक्ता सुगंधा आनंद के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि हिमाचल प्रदेश RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय शिमला शहर में भीड़भाड़ कम करने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों पर आधारित था। प्रतिवादी की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि प्राधिकरण जिन परियोजनाओं से संबंधित मामलों को देखता है, उनमें से 90 प्रतिशत शिमला, सोलन, परवानू और सिरमौर में हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि RERA के समक्ष लंबित शिकायतों में से लगभग 92 प्रतिशत इन्हीं जिलों से हैं, और धर्मशाला में केवल 20 परियोजनाएं हैं।

US का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात, ईरान पर बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का फैसला चर्चा में

न्यूयॉर्क ईरान से वार्ता के बीच अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य कार्रवाई की धमकी देने से भी नहीं चूक रहे हैं। दोनों देशों में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर शिप कैरिबिनय शिप में तैनात करने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मध्य एशिया भेजने का आदेश दे दिया है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका का यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ट शिप मध्य एशिया की तरफ रवाना हो चुका है। यह मई तक कैरीबियन शी में ही रुक सकता है। अमेरिका के इस शिप के साथ यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी होंगे। इस शिप को भूमध्य सागर से कैरीबियन सागर में अक्टूबर में ही भेज दिया गया था। माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला में अभियान चलाने से पहले तैयारी पूरी कर रहे थे। इसके बाद पिछले महीने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया और अमेरिका ले आया गया। ईरान को हमले की धमकी इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को हमले की धमकी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान उसकी बातों पर सहमत नहीं होता है तो जून की तरह के हमले एक बार फिर किए जाएंगे। नेतन्याहू के साथ इस मुलाकात में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है। ट्रंप और नेतन्याहू के बीच यह मुलाकात ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ”यह मुलाकात बहुत अच्छी रही और दोनों देशों के बीच शानदार रिश्ते जारी रहेंगे।” उन्होंने कहा, ”कुछ भी निश्चित नहीं हुआ है, सिवाय इसके कि मैंने ईरान के साथ बातचीत पर यह देखने के लिए जोर दिया कि यह समझौता हो सकता है या नहीं।’ बीते दिनों ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि वह इस बा की गारंटी दे सकते हैं कि ईरान कोई परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि अमेरिका को भी आश्वासन देना चाहिए परमाणु शक्ति के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का हक उससे नहीं छीना जाएगा। ईरान ने नौ फरवरी को कहा था कि अगर उस पर लगे प्रतिबंध हटा दिये जाते हैं तो वह अपने 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को डायल्यूट (गुणवत्ता कम) करने को तैयार है। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी (एमएनए) के मुताबिक, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने कहा कि अगर बदले में सभी प्रतिबंध हटा दिए जाते हैं तो ईरान यूरेनियम की गुणवत्ता कम करने पर विचार कर सकता है।

देश को मिला नया PMO ‘सेवा तीर्थ’, आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा प्रधानमंत्री का दफ्तर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है।   प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है। केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नई इमारतें भारत की प्रशासनिक शासन संरचना को दर्शाती हैं। बता दें कि इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति सचिवालय, और कैबिनेट सचिवालय अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। सेवा तीर्थ का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को किया। असल में इस तारीख का ऐतिहासिक महत्व है। 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली औपचारिक रूप से भारत की आधुनिक राजधानी बनी थी। यह तारीख उद्घाटन के 95 वर्षों को दर्शाती है। सेवा तीर्थ के साथ, पीएम मोदी कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन करेंगे। इसमें कई प्रमुख मंत्रालयों के विभाग होंगे, जिनमें वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय शामिल हैं।  

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद की शपथ के करीब तारिक रहमान, 4 साल की उम्र की जेल से पहुंचे राष्ट्रीय नेता तक

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है. मतगणना के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जीत का दावा किया है और कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 सदस्यीय संसद में पार्टी 151 से ज्यादा सीट हासिल कर चुकी है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और कुछ सीटों के नतीजे आने बाकी हैं. बीएनपी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार है. 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त की भी खबर है. चुनाव जीतने वाली पार्टी उस अंतरिम प्रशासन की जगह लेगी, जिसने अगस्त 2024 में आवामी लीग सरकार के हटने के बाद सत्ता संभाली थी. इसी बीच यह भी खबर है कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. बांग्लादेश चुनाव BNP के जीतने के साथ ही विदेशों से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाता है और भारत साझा विकास लक्ष्यों पर साथ काम करने को तैयार है. अमेरिका ने भी चुनाव को सफल बताते हुए शुभकामनाएं दी हैं. वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर से भी बधाई संदेश भेजे गए हैं. बांग्लादेश चुनाव को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर माना गया, क्योंकि आवामी लीग मैदान में नहीं थी. जमात ने मतगणना में देरी और हेरफेर के आरोप लगाए हैं और चेतावनी दी है कि जनादेश छीना गया तो बड़ा आंदोलन होगा. नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी कुछ सीटों पर धांधली के आरोप लगाए. दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नतीजों में उतार-चढ़ाव सामान्य है. गुरुवार को देशभर में 299 सीटों पर मतदान गुरुवार सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चला, जिसके बाद तुरंत मतगणना शुरू कर दी गई. चुनाव के दौरान व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए और करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी चुनावी तैनाती माना जा रहा है. आयोग के अनुसार हजारों केंद्रों से अलग-अलग समय पर नतीजे आने के कारण अंतिम तस्वीर बनने में वक्त लग रहा है. बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी. पार्टी ने पहले ही साफ किया था कि जीत मिलने पर तारीक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे. करीब 17 साल विदेश में रहने के बाद पिछले साल देश लौटे रहमान ने समर्थकों से जश्न के बजाय संयम रखने और दुआ करने की अपील की है. फिलहाल आधिकारिक नतीजों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने की तैयारी है. 4 साल की उम्र में जेल से PM की कुर्सी तक बांग्लादेश के 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत में तारिक रहमान की रणनीतिक और करिश्माई भूमिका ने केंद्रबिंदु की तरह काम किया। लंबे निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पार्टी को एकजुट किया, युवा मतदाताओं को आकर्षित किया और जनसमर्थन की नई लहर खड़ी की। यह जीत सिर्फ बीएनपी की नहीं, बल्कि तारिक रहमान की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरी है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक धारणाओं के बीच घूमती रही है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। ऐसे में 2026 के चुनावों में बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की उभरती भूमिका यह संकेत देती है कि अब देश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर सकता है।  पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए 20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के चेयरमैन हैं। वह पार्टी की सर्वोच्च राजनीतिक इकाई का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया। वे बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिनकी 1981 में हत्या हो गई थी। उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और बीएनपी की प्रमुख चेयरपर्सन थीं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है।  जब चार साल की उम्र में जेल गए थे तारिक तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में अक्सर तारिक जिया कहा जाता है, अपने परिवार के नाम से ही पहचान रखते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे केवल चार साल के थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी रहे। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। उनकी राजनीतिक पहचान भी इसी पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। छोटे उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया।  अब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के बारे में जानिए तारिक रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 3 जनवरी 1982 को पहली बार बीएनपी के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे बीएनसपी की अध्यक्ष बनीं और अपनी मौत तक वह इस पद पर रहीं। बांग्लादेश में सैन्य शासन के खिलाफ खालिदा जिया एक प्रमुख आवाज बनकर उभरीं। लोगों को सैन्य शासन के खिलाफ एकजुट करने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई।  जिया 1991 में पहली बार बनीं पीएम खालिदा जिया साल 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके बाद साल 2001 से 2006 तक दूसरी बार भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। बताते चले कि खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1946 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले … Read more

टोल टैक्स और आबकारी नीति 2026-27 को हरी झंडी, हिमाचल कैबिनेट ने स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में लिए बड़े निर्णय

शिमला  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में टोल टैक्स बैरियर नीति 2026-27 और आबकारी नीति 2026-27 को स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रिमंडल ने महिला होम गार्ड स्वयंसेवकों को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने का भी निर्णय लिया। बैठक में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान दिए जाने वाले राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दी गई।  इसके साथ ही ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके तहत विधवाओं की बेटियों को राज्य के भीतर और बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। छात्रावास सुविधा उपलब्ध न होने पर उन्हें 3,000 रुपये प्रतिमाह किराया सहायता भी दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ को लागू करने की मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। इसके तहत उन्नत पूरक पोषण उपलब्ध करवाया जाएगा। दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह अनुदान में भी बढ़ोतरी की गई है। 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए अनुदान राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि 40 से 70 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। शिक्षा क्षेत्र में, प्रस्तावित सीबीएसई स्कूलों के लिए कुल 600 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है, जिनमें संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत और ड्राइंग शिक्षक के 150-150 पद शामिल हैं। ये पद राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे। साथ ही, राज्य के 31 बालक एवं बालिका विद्यालयों को सह-शिक्षा विद्यालयों में विलय करने का निर्णय लिया गया। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण हेतु 1,617.40 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त, शिमला, सुंदरनगर, नूरपुर, ऊना, भोरंज और बिलासपुर के अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की खरीद को स्वीकृति दी गई। नाहन स्थित डॉ. वाई.एस. परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में इम्यूनोहेमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की स्थापना का भी निर्णय लिया गया। राज्य के सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल उपकरण प्रबंधन एवं अनुरक्षण कार्यक्रम लागू करने, स्वास्थ्य विभाग में नर्स, फार्मेसी अधिकारी, रेडियोग्राफर और फूड सेफ्टी ऑफिसर सहित कई पदों को भरने की भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा, 777 अतिरिक्त विद्यालयों में डिजिटल क्लासरूम परियोजना लागू करने, लोक निर्माण विभाग के लिए रोड ड्रेनेज नीति और सड़कों की मरम्मत के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को स्वीकृति दी गई। चंबा जिले में डिस्टिल ग्लोबल स्किल्स एवं डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना, विभिन्न जिलों में खेल छात्रावास खोलने और सिरमौर जिले में लोक निर्माण विभाग मंडलों के पुनर्गठन जैसे कई महत्वपूर्ण फैसले भी कैबिनेट बैठक में लिए गए।

आर्मी जनरल के साथ मारपीट की खबरें, पाकिस्तान सरकार का अजीबो-गरीब बयान आया सामने

इस्लामाबाद   पाकिस्तान में एक बार फिर से सेना की थू-थू हो रही है. पूरे देश में पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की गंभीर चोटों को लेकर चर्चाएं हैं. वो अस्पताल में भर्ती हैं और उनका स्कल फ्रैक्चर बताया जा रहा है. जब पाकिस्तान भर में खुसुर-फुसुर शुरू हुई तो सेना और परिवार ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करके कहा है कि ‘बाथरूम में फिसल जाने’ से उनका ये हाल हुआ है. हालांकि, भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्र को अंदर की बात पता चली है. CNN न्यूज18 को खुफिया सूत्रों ने बताया है कि बाजवा पर ये अटैक असल में फौजियों ने ही किया है. ‘बाथरूम में फिसले बाजवा’ दावा किया जा रहा है बाजवा के साथ ये घटना 10 फरवरी 2026 की सुबह तड़के 4:30 बजे हुई, ISPR और परिवार ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा है कि जनरल बाथरूम में फिसल गए और उनके सिर पर गंभीर चोटें आ गई. रावपिंडी के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के आईसीयू में भर्ती बाजवा की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है और उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. इस घटना ने पाकिस्तान सेना के भीतर पनप रहे आंतरिक असंतोष और बदले की आग को एक बार फिर सतह पर ला दिया है. जनरल बाजवा के साले नईम घुम्मन ने बताया कि जनरल नंगे पैर थे और बाथरूम में फिसल गए, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट आई. इसके बाद ISPR ने भी तुरंत पुष्टि की कि यह एक घरेलू दुर्घटना है और उनका सफल ऑपरेशन हो चुका है. Military Attack या कुछ और? हालांकि, खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह कोई साधारण बाथरूम में फिसल जाने वाली घटना नहीं है. असल में जनरल बाजवा को तीन सैन्य कर्मियों ने घेर कर पीटा है. उन पर तब तक अटैक किया गया जब तक स्कल फ्रैक्चर नहीं हो गया. सूत्रों का दावा है कि 2022 में इमरान खान की सरकार गिराने के दौरान जनरल बाजवा ने ISI को कुछ ऐसे अधिकारियों के परिवारों को निशाना बनाने का आदेश दिया था जो इस तख्तापलट का विरोध कर रहे थे. माना जा रहा है कि यह हमला उन्हीं पीड़ित अधिकारियों के परिजनों या जूनियर कर्मियों ने किया है.

बांग्लादेश में सत्ता पर BNP का कब्जा, जमात हाशिये पर; प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान की जीत को बताया ऐतिहासिक

ढाका  सत्ता के लिए 20 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 13वें आम चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. यह एक अहम जनादेश है, जो उथल-पुथल से जूझ रहे देश की सियासी दिशा में एक बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है.  तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने आखिरी बार 2001 में चुनाव जीता था. आज पार्टी ने जीत का ऐलान कर दिया है क्योंकि गिनती के ट्रेंड्स में भारी जीत का इशारा मिल रहा था, जिससे दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी पक्की हो गई. इस बीच, जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका लगा है, जो नतीजों के धीरे-धीरे आने के बावजूद डबल-डिजिट सीटों तक ही सीमित रही. स्थानीय मीडिया ने बताया कि सुबह-सुबह हुई वोटिंग में BNP गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं. कैसा रहा जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन? BNP के प्रदर्शन ने उसे सिंपल मेजॉरिटी के लिए ज़रूरी 151 सीटों की लिमिट से आगे पहुंचा दिया, जिससे पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में आ गई. कई चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती जारी रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड्स से पता चला कि फ़ाइनल टैली में बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है. सुबह करीब 4 बजे तक, जमात-ए-इस्लामी ने 56 सीटें जीत ली थीं. बांग्लादेश के रेफरेंडम के अनऑफिशियल नतीजों से जुलाई चार्टर के लिए लोगों के मज़बूत सपोर्ट का भी पता चलता है, जो 2024 के विद्रोह से बना एक सुधार डॉक्यूमेंट है जिसमें बड़े संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव है. The Daily Star के मुताबिक, गिने गए वोटों में से करीब 72.9 फीसदी चार्टर को अपनाने के पक्ष में थे, जबकि 27.1 परसेंट इसके खिलाफ थे.  जगह-जगह से हिंसा की खबरें लोकल मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश के कई हिस्सों में चुनाव के दौरान हिंसा की भी घटनाएं सामने आईं. वोटिंग से जुड़ी झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए हैं. बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने कहा कि 14 अलग-अलग घटनाओं में करीब 72 लोग घायल हुए, जिनमें से कई पोलिंग स्टेशन के पास या अंदर हुए. पुलिस ने इस हंगामे के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को हिरासत में लिया. सबसे बुरी हिंसा नोआखली जिले के हटिया में हुई, जहां BNP और नेशनल सिटीजन पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प में 31 लोग घायल हो गए. वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और नौ घंटे तक बिना रुके चलती रही. वोटरों ने दो अलग-अलग बैलेट पेपर इस्तेमाल किए- एक पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए, जिन्हें देश भर के 42,659 पोलिंग स्टेशनों पर ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में रखा गया था. देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में चुनाव हुए. शेरपुर-3 में एक पार्लियामेंट्री उम्मीदवार की मौत के बाद वोटिंग टाल दी गई. बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन (EC) के मुताबिक, देश भर में 60.69 फीसदी वोटिंग हुई, जिसमें पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल 80.11 परसेंट और कुल वैलिड वोट रेट 70.25 परसेंट रहा. कई वोटरों ने कहा कि 2008 के पार्लियामेंट्री चुनावों के बाद यह पहला शांतिपूर्ण और खुशी वाला चुनाव था जो उन्होंने देखा. वोटों की गिनती के बीच, जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के चीफ, शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी अपने फायदे के लिए ‘विपक्ष की राजनीति’ नहीं करेगी, जिससे गिनती जारी रहने पर चुनाव के नतीजों को मानने का संकेत मिला. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, “हम पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेंगे.” PM मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनावों में उनकी पार्टी की बड़ी जीत के बाद बधाई देते हुए PM मोदी का बयान दोबारा पोस्ट किया. PM मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं.” बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को गर्मजोशी से बधाई दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया (X) पर साझा किए अपने संदेश में इस जीत को बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेशी लोगों के भरोसे को दर्शाती है.” उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक है. शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह बांग्लादेश में पहला बड़ा चुनाव था. 17 साल के वनवास के बाद तारिक रहमान की पार्टी की सत्ता में वापसी दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है. भारत ने इस बधाई संदेश के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नई सरकार के साथ भी मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देगा. आपको बता दें कि बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव के लिए वोट डाले गए थे और शाम को ही मतगणना शुरू हो गई है. अभी तक जो नतीजे सामने आए हैं उसमें रहमान की पार्टी वाले गठबंधन ने 209 सीटें जीतकर 300 सदस्यों वाले जातीय संसद या देश के सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है.  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए देशवासियों को बधाई दी है लेकिन समर्थकों से जश्न न मनाने की अपील की है.पार्टी ने कहा कि विजय उत्सव के बजाय कार्यकर्ता और समर्थक पूरे देश में शुक्रवार की नमाज़ अदा करें और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें.  तारिक रहमान को ऐतिहासिक जीत पर US ने दी बधाई बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए तारिक रहमान और BNP को बधाई देने वाला यूनाइटेड स्टेट्स पहला देश बन गया. बांग्लादेश में US के राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बांग्लादेश के लोगों को सफल चुनाव के लिए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और तारिक रहमान … Read more

बैंकिंग ग्राहकों के लिए राहत की खबर, PAN से जुड़े नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू

नई दिल्ली भारत सरकार ने 7 फरवरी को नए आयकर नियम 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है. नए आयकर नियम, 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. अब कई कामों के लिए PAN कार्ड बताने की जरूरत की सीमा बढ़ाई जा रही है. जैसे मोटर व्हीकल खरीदना, बैंक से बड़ी रकम निकालना या जमा करना, प्रॉपर्टी खरीदना और होटल में बड़ा बिल चुकाना आदि के लिए पैन कार्ड की जरूरत नहीं होगी. नए नियमों में यह भी प्रस्ताव है कि कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्य बढ़ा दिया जाए. साथ ही, क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपनी जानकारी आयकर विभाग के साथ साझा करें. इसके अलावा डिजिटल रुपया (CBDC) को भी अब आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के एक मान्य तरीके के रूप में शामिल किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 की घोषणा के कुछ दिनों बाद, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए आयकर कानून 2025 से जुड़े ड्राफ्ट नियम और फॉर्म जारी किए हैं. इन पर आम लोग अपनी राय दे सकते हैं. नए ड्राफ्ट Income Tax Rules 2026 के मुताबिक, कई जगहों पर PAN नंबर बताना अनिवार्य कर दिया गया है. भारत सरकार ने 7 फरवरी को नए आयकर नियम 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है. नए आयकर नियम, 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. अब कई कामों के लिए PAN कार्ड बताने की जरूरत की सीमा बढ़ाई जा रही है. जैसे मोटर व्हीकल खरीदना, बैंक से बड़ी रकम निकालना या जमा करना, प्रॉपर्टी खरीदना और होटल में बड़ा बिल चुकाना आदि के लिए पैन कार्ड की जरूरत नहीं होगी. नए नियमों में यह भी प्रस्ताव है कि कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्य बढ़ा दिया जाए. साथ ही, क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपनी जानकारी आयकर विभाग के साथ साझा करें. इसके अलावा डिजिटल रुपया (CBDC) को भी अब आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के एक मान्य तरीके के रूप में शामिल किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 की घोषणा के कुछ दिनों बाद, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए आयकर कानून 2025 से जुड़े ड्राफ्ट नियम और फॉर्म जारी किए हैं. इन पर आम लोग अपनी राय दे सकते हैं. नए ड्राफ्ट Income Tax Rules 2026 के मुताबिक, कई जगहों पर PAN नंबर बताना अनिवार्य कर दिया गया है. बैंक में कैश जमा या निकासी अब प्रस्ताव है कि अगर कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में कुल 10 लाख या उससे अधिक की कैश जमा या निकासी करता है. चाहे एक खाते में या कई खातों में तो PAN बताना जरूरी होगा. वर्तमान नियमों के अनुसार, एक ही दिन में बैंक या कोऑपरेटिव बैंक में 50,000 से अधिक का कैश जमा करने पर PAN देना अनिवार्य है. मोटर वाहन खरीदने पर PAN मौजूदा नियमों में अगर खरीदी जाने वाली गाड़ी (कार या बाइक) की कीमत 5 लाख से ज्यादा होती थी, तो PAN बताना जरूरी था. दोपहिया वाहनों के लिए PAN बताने का कोई नियम नहीं था. नए ड्राफ्ट नियम में किसी भी मोटर वाहन की खरीद पर, कीमत चाहे जो भी हो, PAN बताना अनिवार्य होगा यानी दोपहिया वाहन भी अब इस दायरे में आ जाएंगे. बैंक में कैश जमा या निकासी अब प्रस्ताव है कि अगर कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में कुल 10 लाख या उससे अधिक की कैश जमा या निकासी करता है. चाहे एक खाते में या कई खातों में तो PAN बताना जरूरी होगा. वर्तमान नियमों के अनुसार, एक ही दिन में बैंक या कोऑपरेटिव बैंक में 50,000 से अधिक का कैश जमा करने पर PAN देना अनिवार्य है. मोटर वाहन खरीदने पर PAN मौजूदा नियमों में अगर खरीदी जाने वाली गाड़ी (कार या बाइक) की कीमत 5 लाख से ज्यादा होती थी, तो PAN बताना जरूरी था. दोपहिया वाहनों के लिए PAN बताने का कोई नियम नहीं था. नए ड्राफ्ट नियम में किसी भी मोटर वाहन की खरीद पर, कीमत चाहे जो भी हो, PAN बताना अनिवार्य होगा यानी दोपहिया वाहन भी अब इस दायरे में आ जाएंगे.

ऑनलाइन लेन-देन में धोखाधड़ी पर अब मुआवजा, RBI ने तय की 25,000 रुपये की सीमा

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए बड़ी योजना बनाई है। अब ऐसे ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामले में 25,000 रुपये तक का हर्जाना मिल सकेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम मूल्य के धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामलों में 25,000 रुपये तक का हर्जाना देने के लिए एक फ्रेमवर्क लाने का प्रस्ताव है। 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड मामले शामिल इसमें 50 हजार रुपये या उससे कम की धोखाधड़ी के मामलों को शामिल किया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि “बिना कोई सवाल पूछे” ग्राहकों को 85 प्रतिशत राशि (अधिकतम 25 हजार रुपये) वापस की जायेगी। धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि आरबीआई देगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। एक बार ही ले सकेंगे लाभ आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि ग्राहक इस सुविधा का लाभ अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार उठा सकेंगे। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ग्राहक एक बार की गलती से सीख लें।” एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने साफ किया कि भले ही ग्राहक ने खुद ही ठगों को ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बताया हो, तब भी वे हर्जाना राशि पाने के हकदार होंगे। मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी में 50 हजार रुपये तक की राशि वाले मामले 65 प्रतिशत हैं, हालांकि मूल्य के हिसाब से उनका अनुपात काफी कम है। यह पहली बार है जब आरबीआई ने साइबर फ्रॉड मामले में पीड़ित को हर्जाने देने की पहल की है। RBI के डेटा के मुताबिक भारतीय बैंकों ने वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट-आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़े धोखाधड़ी के 13,469 मामले दर्ज किए, जिससे 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, 2023-24 में 29,080 धोखाधड़ी और 1,457 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। साइबर फ्रॉड की शिकायत सबसे पहले बैंक/पेमेंट ऐप को सूचित करें। इसके बाद 1930 पर कॉल करें। यह नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन का ऑफिशियल नंबर है। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। इसके लिए वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर विजिट करें। यहां सभी डिटेल भरने के बाद Acknowledgement नंबर मिलेगा। इसे सेव करके रखना जरूरी है। इस नंबर को लेकर नजदीकी साइबर सेल/पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। आप शिकायत का स्टेटस cybercrime.gov.in पर ट्रैक कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर AI कंटेंट का सफाया? सरकार ने जारी किया नया कड़ा नियम

 नई दिल्ली सरकार ने AI से बने कंटेंट को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं. अब सोशल मीडिया पर जो भी फोटो, वीडियो या ऑडियो AI टूल्स से बनेगा, उस पर साफ लेबल दिखाना जरूरी होगा. इसके लिए कंपनियों को 20 फरवरी तक का डेडलाइन मिला है.  प्लेटफॉर्म्स को यह भी पक्का करना होगा कि यूज़र सच बता रहा है या नहीं कि कंटेंट AI से बना है. भ्रामक या गैरकानूनी AI कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाने का नियम भी लाया गया है. मतलब डीपफेक और फेक वीडियो पर अब ढील नहीं चलेगी. ये बदलाव 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे. सोशल मीडिया कंपनियों के लिए असली चुनौती इन नियमों के बाद इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का काम करने का तरीका बदलेगा. अभी तक AI कंटेंट अक्सर बिना पहचान के घूमता रहा है. कई बार यूज़र को पता भी नहीं चलता कि वीडियो या फोटो असली है या मशीन से बना है. अब अपलोड के वक्त ही यह जानकारी लेनी होगी कि उस वीडियो में कितना AI यूज हुआ है. यहां अब सिर्फ यूज़र की बात पर भरोसा नहीं चलेगा. प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके से भी चेक करना होगा. दिक्कत यह है कि हाई क्वालिटी डीपफेक आज इतने रियल लगते हैं कि सिस्टम भी कन्फ्यूज हो जाता है. ऊपर से तीन घंटे में कंटेंट हटाने की डेडलाइन बहुत टाइट है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर हर केस में इतनी तेजी से एक्शन लेना आसान नहीं होगा. AI कंटेंट क्रिएटर्स के लिए क्या मुश्किलें बढ़ेंगी इन नियमों का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो AI से रील्स, फेसस्वैप वीडियो, फेक वॉइस या जनरेटेड क्लिप्स बनाकर ग्रो कर रहे थे. अब कंटेंट पर AI का लेबल दिखेगा. मतलब जो लोग जानबूझकर रियल जैसा दिखाकर वीडियो वायरल करते थे, उनकी ट्रिक पकड़ी जाएगी. इससे क्लिकबेट और शॉक वैल्यू कम होगी. अगर नोटिस के बावजूद कोई कंटेंट क्रिएटर इसे इग्नोर करेगा तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उन्हें हमेशा के लिए बैन कर सकती हैं. क्योंकि सरकार की तरफ से सख्त हिदायत मिल चुकी है.  AI क्रिएटर्स को अब यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी असली इंसान का चेहरा या आवाज बिना परमिशन यूज न करें. आज जो मजाक या ट्रेंड लग रहा है, वही कल कानूनी परेशानी बन सकता है. अगर प्लेटफॉर्म ने पकड़ लिया कि आपने जानबूझकर AI कंटेंट को छुपाया है, तो अकाउंट पर स्ट्राइक या बैन का रिस्क भी रहेगा. यानी अब AI से कंटेंट बनाना सिर्फ क्रिएटिव काम नहीं रहेगा. उसमें जिम्मेदारी भी जुड़ जाएगी. यूज़र का एक्सपीरियंस कैसे बदलेगा नए नियम यूज़र की आदतें भी बदलेंगे. अब फीड में दिखने वाले वीडियो या फोटो पर लेबल देखना पड़ेगा. अगर AI लिखा है, तो समझना होगा कि यह असली घटना या असली व्यक्ति का वीडियो नहीं है. इससे लोग थोड़ा रुककर सोचेंगे. अभी तक बहुत से लोग डीपफेक को सच मानकर शेयर कर देते थे. अब शायद वह आदत बदले. हालांकि एक खतरा यह भी है कि अगर हर दूसरी पोस्ट पर AI टैग दिखने लगे, तो लोग उसे इग्नोर करना शुरू कर दें. तब लेबल का असर धीरे धीरे कम हो सकता है. प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस पर असर यह बदलाव सिर्फ टेक्निकल नहीं है. यह बिजनेस का भी सवाल है. AI कंटेंट आज सोशल मीडिया की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बन चुका है. रील्स और शॉर्ट्स में AI ट्रेंड्स खूब चलते हैं. अब अगर हर AI कंटेंट पर सख्त लेबल और चेकिंग होगी, तो एंगेजमेंट पैटर्न बदल सकता है. कुछ यूज़र AI कंटेंट से दूरी बना सकते हैं. वहीं ब्रांड्स और एडवर्टाइज़र ज्यादा सेफ फील करेंगे क्योंकि फेक और भ्रामक कंटेंट पर कंट्रोल बढ़ेगा. प्लेटफॉर्म्स को अब ग्रोथ और रेगुलेशन के बीच बैलेंस बनाना होगा. आगे क्या बदलेगा आने वाले वक्त में सोशल मीडिया पर कुछ भी चलेगा वाला माहौल खत्म होगा. डीपफेक, फेक डॉक्यूमेंट और बिना सहमति वाली तस्वीरों पर पहले जैसी ढील नहीं मिलेगी. सरकार साफ कह चुकी है कि प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदारी लेनी होगी. इसका मतलब ज्यादा मॉडरेशन टीम, बेहतर टेक और भारत के हिसाब से अलग सिस्टम बनाना पड़ेगा. कुल मिलाकर, नए AI कंटेंट नियम सोशल मीडिया को ज्यादा जिम्मेदार बनाने की कोशिश हैं. यह बदलाव एकदम परफेक्ट नहीं होगा. शुरुआत में टेक्निकल दिक्कतें आएंगी. गलतियां भी होंगी. लेकिन लंबे वक्त में सोशल मीडिया का माहौल बदलेगा. कंटेंट बनाना अब सिर्फ क्रिएटिविटी का खेल नहीं रहेगा. उसमें जवाबदेही भी जुड़ जाएगी. यही इस पूरे बदलाव की असली दिशा है. रास्ता आसान नहीं है भले ही सरकार ने डेडलाइन दे दी है, लेकिन टेक्निकल तौर पर बात करें तो ये तुरंत इंप्लिमेंट करना आसान नहीं है. क्योंकि लेबल लगाए हुए वीडियो को डाउनलोड करके फिर से अपलोड किया जा सकता है. AI डिटेक्शन सिस्टम भी पूरी तरह ठीक से काम नहीं करते हैं. कई बार वो असली को नकली और नकली को असली समझने की भी गलती कर रहे हैं.  

रूस ने ठहराया BRICS को ताकतवर विकल्प, अमेरिका पर कटाक्ष: ‘यहां कोई हुक्म नहीं चलता’

मास्को  रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में अमेरिका और पश्चिमी देशों के समूह नाटो के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा है। लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, “ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं। ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस जैसे समूहों में आम सहमति ज़्यादातर बनी रहती है।” उन्होंने कहा, “ यहां आप नाटो की तरह आसानी से फैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं ‘चुप रहो’ और सबको पता है कि यह सब कैसे काम करता है।” लावरोव ने आगे कहा कि यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।” बता दें कि हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूराेपीय संघ में कानून का राज “ब्रसेल्स की तानाशाही” से बदल गया है। इससे पहले ने लावरोव ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए अमेरिका पर ‘अनुचित तरीकों’ का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। लावरोव ने एक इंटरव्यू में कहा, ”अमेरिका भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्यों जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ हमारे व्यापार, निवेश सहयोग और सैन्य-तकनीकी संबंधों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।”

इमरान खान की बिगड़ती सेहत से सियासी तूफान, 85% नजर कमजोर होने की खबर पर CJP एक्टिव

इस्लामाबाद पाक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान खान के दाहिनी आंख में ‘सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (CRVO) नामक गंभीर बीमारी का पता चला है, जो समय पर इलाज न मिलने पर स्थाई अंधापन पैदा कर सकती है। इसी वजह से उनकी 85 फीसदी रोशनी चली गई। लंबे समय से जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के हेल्थ अपडेट से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। पाक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खान की दाहिनी आंख की रोशनी 85 फीसदी खत्म हो चुकी है। उसमें अब सिर्फ 15 फीसदी को रोशनी बची है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इमरान खान की आंख की जांच के लिए एक स्पेशल मेडिकल टीम बनाने का आदेश दिया है। यह आदेश कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें PTI फाउंडर ने दावा किया था कि उनकी दाहिनी आंख में “सिर्फ़ 15 फीसदी” रोशनी बची है। SC ने यह भी निर्देश दिया कि इमरान को उनके बच्चों से बात करने की इजाज़त दी जाए। यह आदेश दिया गया कि आंखों की जांच और फोन कॉल दोनों 16 फरवरी (सोमवार) से पहले किए जाएं। SC का यह निर्देश तब आया जब पाकिस्तान के चीफ जस्टिस (CJP) याह्या अफरीदी की अगुवाई वाली और जस्टिस शाहिद बिलाल हसन सहित दो अन्य जजों की बेंच ने PTI संस्थापक के अदियाला जेल में रहने की स्थिति से जुड़े मामले की सुनवाई फिर से शुरू की। खून का थक्का जमने से गई रोशनी कोर्ट में पेश रिपोर्ट में बताया गया कि इमरान खान ने कहा है कि उनकी दाईं आंख की केवल लगभग 15% दृष्टि बची है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक उनकी दोनों आंखों की दृष्टि सामान्य थी, लेकिन बाद में धुंधलापन शुरू हुआ और इलाज में देरी के कारण स्थिति बिगड़ गई। बताया गया कि बाद में डॉक्टरों ने जांच में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) जैसी समस्या की पहचान की और इंजेक्शन सहित इलाज किया गया, लेकिन दृष्टि पूरी तरह वापस नहीं आ सकी। कैदी की सेहत राज्य की जिम्मेदारी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कैदी की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य का दायित्व है कि उसे उचित इलाज मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत सभी कैदियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। कोर्ट ने माना कि परिवार से संपर्क भी महत्वपूर्ण मानवीय पहलू है। इसलिए बच्चों से टेलीफोन पर बातचीत की अनुमति देने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के दौरान टॉप जज ने कहा, “हम उनकी (इमरान की) हेल्थ के मामले पर सरकार का स्टैंड जानना चाहते हैं।” इस पर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (AGP) मंसूर उस्मान अवान ने कन्फर्म किया कि मेडिकल फैसिलिटी देना सरकार की ज़िम्मेदारी है। AGP अवान ने कहा, “अगर कैदी सैटिस्फाइड नहीं है, तो सरकार कदम उठाएगी।” इस पर CJP अफरीदी ने फिर कहा कि इमरान के “अपने बच्चों के साथ टेलीफोन कॉल का मामला भी जरूरी है”। जेल में इलाज पर उठे सवाल रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इमरान खान ने पहले जेल प्रशासन को आंख की समस्या की शिकायत की थी, लेकिन समय पर विशेष इलाज नहीं मिला। बाद में विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए गए। यह मामला सिर्फ एक कैदी के स्वास्थ्य का नहीं बल्कि जेलों में मेडिकल सुविधाओं, मानवाधिकार और राजनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा माना जा रहा है। इस बीच, इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार ने कहा कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार द्वारा फैलाई जा रही कहानी रिपोर्ट के सामने “पूरी तरह से गलत साबित हुई है।”

‘सस्ता कर्ज़, महंगी कीमत’—पेरू में चीन की पैठ पर अमेरिका ने जताई गहरी चिंता

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चिंता जताई है कि चीन लातिन अमेरिकी देश पेरू के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर अपना नियंत्रण मजबूत करके उसकी संप्रभुता को नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिकी की यह चेतावनी पेरू की एक अदालत के उस फैसले के बाद आई है जिसमें एक स्थानीय नियामक ने चीन द्वारा बनाए गए विशाल बंदरगाह की निगरानी को सीमित कर दिया है। पेरू की राजधानी लीमा के उत्तर में चांकाय में स्थित 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से स्थापित गहरे पानी का बंदरगाह लातिन अमेरिका में चीन की पकड़ का प्रतीक बन गया है। यह बंदरगाह अमेरिका के साथ तनाव का केंद्र बिंदु भी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के पश्चिमी गोलार्ध मामलों के ब्यूरो ने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि वह ”उन नवीनतम खबरों से चिंतित है कि पेरू अपने सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक, चांकाय पर नजर रखने में असहाय हो सकता है, जो लालची चीनी मालिकों के अधिकार क्षेत्र में है।” अमेरिका ने कहा, ”हम पेरू के उसके क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की देखरेख करने के संप्रभु अधिकार का समर्थन करते हैं। इसे इस क्षेत्र और दुनिया के लिए एक सबक के रूप में लें, सस्ते चीनी ऋण की कीमत संप्रभुता से चुकानी पड़ती है।” यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब ट्रंप प्रशासन पश्चिमी गोलार्ध पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, चीन लंबे समय से बड़े पैमाने पर ऋण और व्यापार के माध्यम से अपना प्रभाव स्थापित कर रहा है। चीन की सरकार ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बृहस्पतिवार को अपनी दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, ”चीन चांकाय बंदरगाह के बारे में अमेरिका द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों और दुष्प्रचार का कड़ा विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है।”  

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में नया मोड़: साझा समझ के बावजूद बदलीं शर्तें, विदेश मंत्रालय की सफाई

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील की चर्चा इन दिनों सभी जगह है। इस डील की फैक्टशीट पर हाल ही में वाइट हाउस द्वारा कुछ बदलाव किए गए थे। अब इन बदलावों पर जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन दोनों देशों की आपसी सहमति के बाद हुए हैं। यह दोनों देशों की साझा समझ को भी प्रदर्शित करते हैं। मीडिया से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर सरकार का मत सामने रखा। उन्होंने कहा, “दोनों देशों के बीच में पारस्परिक लाभ और व्यापारिक लाभ को ध्यान में रखकर एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी थी। इसे एक संयुक्त बयान के रूप में पेश किया गया था। यही बयान (फैक्टशीट) इस मामले में हमारी समझ का आधार बना हुआ है। अमेरिका की तरफ से इसमें जो भी संशोधन किए गए हैं, वह पूरी तरह से आपसी समझ को प्रदर्शित करते हैं। क्या है पूरा मामला? लंबी बातचीत और कई दौर की मीटिंग के बाद आखिरकार भारत और अमेरिका के बीच एक समझौते पर मुहर लगी थी। हालांकि, अभी भी इस पर बातचीत जारी है, लेकिन एक संयुक्त बयान जारी कर दिया गया था। यह एक बार 10 फरवरी को फिर चर्चा में आया, जब वाइट हाउस ने इस बयान की फैक्टशीट में बदलाव कर दिया। इस बदलाव के मुताबिक भारत द्वारा जिन अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने या समाप्त करने की बात पहले कही गई थी, उनमें से कुछ दालों को हटा दिया गया। इस संशोधन के पहले वाइट हाउस की आधिकारिक बेवसाइट पर उपलब्ध बयान के मुताबिक कहा गया था कि भारत सभी प्रकार की औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर से टैरिफ हटाने या कम करने के लिए सहमत हुआ है। इसके अलावा अमेरिका की तरफ से पहले 500 बिलियन डॉलर की खरीद को लेकर भारत के प्रतिबद्ध होने की बात कही गई थी, इसे बाद में संशोधित करके ‘इरादा रखता है’ वाली बात जोड़ी गई। यानी यह बात भारत के लिए बाध्यकारी न होकर एक आपसी सहमति पर आधारित होगी। भारत और अमेरिका व्यापारिक समझौता ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से लगातार भारत और अमेरिका के बीच में तनाव बना हुआ था। यह तनाव इतना बढ़ गया कि ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को भी खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दी। अमेरिकी ट्रंप, प्रशासन द्वारा लगातार बनाए गए दबाव के बाद भी सरकार ने किसानों के हितों को ताक पर नहीं रखा। महीनों की वार्ता के बाद आखिरकार दोनों देश एक समझौते पर पहुंचे। इस समझौते की तरफ सबसे पहले अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर ने इशारा किया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद भारत सरकार की तरफ से भी इस पर जानकारी साझा की गई।

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