LATEST NEWS

क्या मठ की अथाह संपत्ति बनी महंत नरेंद्र गिरि की मौत की वजह?

महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. उनका शव उनके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला था. उनके कमरे से एक सुसाइड नोट (Suicide Note) भी बरामद हुआ है. वहीं महंत की आत्‍महत्या को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं. महंत नरेंद्र गिरी की मौत को बाघंबरी गद्दी मठ (Baghambari Math) और निरंजनी अखाड़े (Niranjani Akhara) की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर भी जोड़ा जा रहा है. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े से जुड़े लोग हत्‍या की भी आशंका जता रहे हैं. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा (Property Dispute) को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है. मीडिया में आई तमाम रिपोर्ट के मुताबिक, मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीनें बेचने, सेवादारों और उनके परिवारीजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है. मंहत नरेंद्र गिरि के अधीन संपत्तियां: बाघंबरी मठ: प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में बाघंबरी गद्दी और मठ है, जो करीब 5 से 6 बीघे जमीन में है. यहां निरंजनी अखाड़े के नाम एक स्कूल और गौशाला भी है. दारागंज में भी अखाड़े की जमीन है. प्रयागराज में हनुमान मंदिर जिसे संगम तट पर लेटे हुए हनुमान जी के नाम से जाना जाता है, वो भी इसी बाघंबरी मठ का ही मंदिर है. जहां प्रयागराज और संगम आने वाले सभी श्रद्धालु मत्था जरूर टेकते हैं. मांडा (प्रयागराज) में 100 बीघा और मिर्जापुर के महुआरी में भी 400 बीघे से ज्यादा की जमीन बाघंबरी मठ के नाम है. मिर्जापुर के नैडी में 70 और सिगड़ा में 70 बीघा जमीन अखाड़े की है. प्रयागराज और आसपास के इलाकों में निरंजनी अखाड़े के मठ, मंदिर और जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की है, जबकि हरिद्वार और दूसरे राज्यों में संपत्ति की कीमत जोड़े तो वो हजार करोड़ के पार है. निरंजनी अखाड़े की कुंभ नगरी उज्जैन और ओंकारेश्वर में 250 बीघा जमीन, आधा दर्जन मठ और दर्जनभर आश्रम हैं. कुंभ नगरी नासिक में 100 बीघा से अधिक जमीन, दर्जनभर आश्रम और मंदिर हैं. बड़ोदरा, जयपुर, माउंटआबू में भी करीब 125 बीघा जमीन, दर्जन भर मंदिर और आश्रम हैं. हरिद्वार स्थित मुख्यालय के अधीन दर्जनभर मठ-मंदिर हैं. नोएडा में मंदिर और जमीन है तो वहीं वाराणसी में मंदिर और आश्रम के साथ करोड़ों की जमीन है.

पीएम मोदी के बर्थडे पर बना कीर्तिमान, महज 9 घंटे में 2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी

नई दिल्ली। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुक्रवार को महज 9घंटे में ही कोरोना वायरस के खिलाफ 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बनाया है। अभी भी वैक्सीनेशन जारी है। यानी यह आंकड़ा अभी और ऊपर जाएगा। इससे पहले दोपहर डेढ़ बजे तक ही एक करोड़ से ज्‍यादा डोज लगाए जा चुके थे। वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हर सेकेंड 527 से ज्‍यादा डोज लगाए जा रहे हैं। हर घंटे 19 लाख से ज्‍यादा डोज दिए जा रहे हैं। राज्यों को 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज मुहैया कराए गए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन के 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध कराए गए है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी वैक्सीन के 6.17 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध हैं। चौथे दिन एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगे इससे पहले 27 अगस्त, 31 अगस्त और 6 सितंबर को देश में एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को आह्वान किया था कि देश में वैक्सीनेशन ड्राइव को रफ्तार देनी चाहिए। यह प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का सबसे अच्छा तोहफा होगा। भाजपा ने इस मौके पर देशभर में अपनी यूनिट्स को निर्देश दिया था कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन का डोज लगाया जाए। 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने PM मोदी के जन्मदिन पर 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान शुरू किया है, जो 7 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी इस दौरान मोदी के सार्वजनिक जीवन में दो दशक पूरा करने का भी जश्न मनाएगी। इसमें वह वक्‍त भी शामिल है, जिस दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

PM मोदी के जन्मदिन पर टि्वटर पर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ट्रेंड, लोग बोले- दो करोड़ नौकरियां कहां हैं?

नई दिल्ली। पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस नाम का टॉपिक ट्रेंड हो रहा है। जिसमें उनसे ‘दो करोड़ नौकरियां कहां हैं’ पूछा जा रहा है। सवाल पूछने वालों की फेरहिस्त में युवाओं के साथ-साथ कई राजनीतिक दिग्गज और रिटायर्ड IAS अधिकारी भी हैं। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पीएम पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि देश अपने पीएम को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की शुभकामनाएं दे रहा है। राम तीरथ (@IESramteerath) नाम के यूजर ने एक अखबार की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अगस्त महीने में 15 लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां गईं। ग्रेजुएट बड़ी संख्या में बेरोजगार हैं। वहीं गगनदीप कौर (@ikaur_deep) नाम की यूजर लिखती हैं जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं भारत रोजगार मुक्त देश हो गया है। मोदी आपको एक और मास्टर स्ट्रोक के लिए साधुवाद। तो वहीं रिटायर्ड IAS अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए पूछा है कि 2 करोड़ नौकरियां कहां हैं। प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल कर तमाम फनी मीम्स भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता रहे किर्ती आजाद (@KirtiAzaad) ने हैशटैग राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस का इस्तेमाल करते हुए लिखा, नहीं चाहिए अच्छे दिन, बुरे दिन ही लौटा दो प्लीज। वहीं प्रतीक मिश्रा (@Prateek79077318) नाम के यूजर लिखते हैं कि सरकार रोजगार के नाम पर पैसा कमाती है, सबसे पहले वह कम सीटों वाली भर्तियों की जानकारी प्रकाशित करवाती है, इसके बाद आवेदन शुल्क के नाम पर 600 से 2000 रुपये लिए जाते हैं, फिर सेंटर्स के बारे में विकल्प पूछते हैं और आखिर में सेंटर को शहर से बाहर कर देते हैं। ट्विटर पर ट्रेंड के बीच मुकाबला: ट्विटर पर भी ट्रेंड के बीच एक तरह की रेस चल रही है, कभी राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ट्रेंड कर रहा है तो कभी हैप्पी बर्थडे मोदी जी ट्रेंड में आगे निकल जा रहा है। इसके अलावा जुमला दिवस और श्री नरेंद्र मोदी का ट्रेंड भी लगातार रेस में बना हुआ है। यूथ कांग्रेस ने किया था ऐलान: पीएम मोदी के जन्मदिन को यूथ कांग्रेस द्वारा ​’राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ मनाने का ऐलान किया गया था। इसकी तैयारियों में यूथ कांग्रेस पहले से जुटी हुई थी। इसके लिए नुक्कड़ नाटक किए जाएंगे, देश के कई शहरों में पद यात्रा निकालने का भी ऐलान किया गया है। इधर, NDA ने कांग्रेस की इस तैयारी पर कहा है कि वह अपनी बेरोजगारी दूर करने के लिए बेरोजगार दिवस मना रही है।

विश्लेषण : एक झटके में क्यों बदल गई पूरी बीजेपी सरकार? क्या फेल हो गया गुजरात मॉडल ?

अहमदाबाद। गुजरात में बीजेपी सरकार के नए मंत्रिमंडल ने शपथ ले ली है. नई कैबिनेट में पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार वाले एक भी मंत्री को जगह नहीं दी गई है. बीजेपी ने सभी पुराने मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. यानी एक तरह से आगामी विधानसभा चुनावों से क़रीब एक साल पहले बीजेपी ने गुजरात में पूरी सरकार को बदल दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने ये फेरबदल गुजरात में दरकती सियासी ज़मीन को रोकने और देशभर के बेजीपी नेताओं को संदेश देने के लिए किया है. सवाल ये भी उठ रहा है कि जिस गुजरात मॉडल का प्रचार बीजेपी ने देशभर में किया है, क्या अब वो कमज़ोर पड़ गया है? नए मंत्रियों में से चुनिंदा के पास ही सरकार में रहने का अनुभव है. इनमें से राघवजी पटेल 90 के दशक में शंकरसिंह वघेला सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जबकि कृष्णानाथ राणा राज्य की नरेंद्र मोदी सराकर में मंत्री थे. राजेंद्र त्रिवेदी आनंदीबेन पटेल की सरकार में मंत्री थे. क्यों हुआ इतना बड़ा फ़ेरबदल? वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक जतिन देसाई मानते हैं कि बीजेपी को लग रहा था कि गुजरात में उसका मज़बूत किला दरक रहा है और अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो हालात हाथ से बाहर हो जाएँगे. देसाई कहते हैं, “रूपाणी और उनकी टीम का प्रदर्शन बहुत ख़राब था और बीजेपी नेताओं को लगा कि इसके दम पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है. बीजेपी ने सरकार विरोधी लहर को कम करने और लोगों की नाराज़गी से बचने के लिए सरकार को बदला है.” वहीं बीबीसी गुजराती सेवा के संपादक अंकुर जैन कहते हैं, “इसके दो बड़े कारण हैं. पहला तो ये कि बीजेपी जनता को ये संदेश देना चाहती है कि अगर मंत्री भी काम नहीं कर करेंगे तो हम उन्हें भी हटा देंगे. आने वाले दिनों में हो सकता है कि बीजेपी इस बात को ज़ोर-शोर से जनता में उठाए कि पार्टी के लिए जनता पहले है और अपने नेता बाद में.” अंकुर कहते हैं, “भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात मॉडल बेहद अहम है. नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गुजरात में कई प्रयोग कर किए हैं. ऐसे में दूसरा कारण ये हो सकता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह बाक़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को ये संदेश दे रहे हों कि अगर वो भी काम ठीक से नहीं करेंगे, तो उन्हें भी हटाया जा सकता है.” अंकुर जैन के मुताबिक़, “अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने गुजरात में इतना बड़ा फेरबदल करके देशभर के बीजेपी नेताओं और मंत्रियों को ये संदेश दे दिया है कि पूर्ण इम्यूनिटी या सुरक्षा किसी के पास नहीं हैं. पार्टी जब चाहे, जिसे चाहे हटा सकती है. यूपी या दूसरे राज्यों के सीएम को ये संदेश देने की कोशिश की गई होगी कि अगर आप पार्टी की नीति या लाइन के हिसाब से काम नहीं कर रहे हैं तो आपको भी बदला जा सकता है.” ख़तरे को भांप लिया है अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने? गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि अगर गुजरात में सियासी ज़मीन दरकी, तो वह केंद्र में उनकी सत्ता पर भी सवाल उठेंगे. विश्लेषक मानते हैं कि गुजरात में लोगों के असंतोष और नाराज़गी से नेतृत्व वाकिफ़ था और ऐेसे में पार्टी ने बड़ा क़दम उठाते हुए पूरी सरकार को ही बदल दिया है. अंकुर जैन कहते हैं, “कोरोना महामारी के दौरान बीजेपी सरकार ने अपनी रही-सही साख भी गँवा दी थी, ख़ासकर कोविड प्रबंधन को लेकर सरकार को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. बीजेपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इस ख़तरे को भाँप लिया था. उन्हें लगने लगा था कि अगर ऐसे ही सब चलता रहा, तो 2022 के चुनाव में पार्टी को गुजरात में हार का सामना भी करना पड़ सकता है.” वहीं जतिन देसाई कहते हैं, “सरकारी आँकड़ों के मुक़ाबले वास्तविकता में कहीं अधिक लोगों की मौत कोरोना की वजह से हुई है और इसे लेकर गुजरात के लोगों में भारी असंतोष है. बीजेपी पूरी सरकार को हटाकर उस असंतोष को ही ख़त्म करने का प्रयास कर रही है.” “एंटी इन्कम्बेंसी और सरकार के ख़राब प्रदर्शन की वजह से लोगों में बीजेपी के ख़िलाफ़ जो भावना बन रही थी, उसे रोकने के लिए सरकार को बदला गया है. ख़ासकर मोदी और शाह के लिए गुजरात बेहद अहम है, ऐसे में पार्टी यहाँ कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है.” कुछ महीने पहले केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल में फ़ेरबदल हुआ था और अन्य पिछड़ा वर्ग से बड़ी तादाद में मंत्रियों को रखा गया था. प्रधानमंत्री मोदी की नई सरकार में 12 दलित मंत्री हैं और 27 ओबीसी मंत्री हैं. जतिन देसाई कहते हैं, “जिस तरह यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार में ओबीसी मंत्रियों को जगह दी गई है उसी तरह गुजरात की नई सरकार में भी जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है.” गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. पार्टी यहां कोई जोख़िम उठाना नहीं चाहती है गुजरात में सीएम और मंत्रियों को बदले जाने से पहले ही ये चर्चाएँ चलने लगी थीं कि सरकार में फ़ेरबदल हो सकता है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ना सिर्फ़ मुख्यमंत्री को बदला बल्कि पूरी कैबिनेट को ही बदल दिया गया. क्या गुजरात मॉडल नाकाम हो गया है, इस सवाल पर देसाई कहते हैं, “गुजरात के विकास मॉडल की बात होती है, लेकिन अगर आप आँकड़ें देखेंगे तो सामाजिक विकास के सूचकांकों में गुजरात देश के बाक़ी राज्यों के मुक़ाबले काफ़ी पीछे है.” ”बीजेपी हाई कमान को ये लगता रहा था कि गुजरात उनका गढ़ है और वहाँ पार्टी का कुछ नहीं हो सकता. लेकिन अब पार्टी ने गुजरात के गढ़ में अपने सभी कमांडरों को हटा दिया है इससे ये तो बिल्कुल स्पष्ट है कि गुजरात में बीजेपी में और सरकार में सबकुछ ठीक नहीं है. पार्टी ने अपने अंदरूनी आकलन में ये भी स्वीकार किया होगा कि यहाँ क़िला दरक गया है.” समूची सरकार को हटाने के बाद ये सवाल उठा है कि ऐसे करके बीजेपी सरकार … Read more

EXCLUSIVE : टीम इंडिया में कलह, रोहित को उपकप्तानी से हटाना चाहते थे कोहली

नई दिल्ली। विराट कोहली ने गुरुवार को टीम इंडिया के टी-20 फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया। कोहली अक्टूबर में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ देंगे। हालांकि वे टेस्ट और वनडे मैचों के कप्तान बने रहेंगे। कोहली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर कप्तानी छोड़ने के फैसले की जानकारी दी और सभी को हैरानी में डाल दिया। विराट के कप्तानी छोड़ने के ऐलान के बाद एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। न्यूज एजेंसी PTI के सूत्रों के मुताबिक विराट कोहली उपकप्तानी के पद से रोहित शर्मा को हटाना चाहते थे। विराट लिमिटेड ओवर्स में रोहित को उपकप्तानी से हटाने के प्रस्ताव के साथ चयनकर्ताओं के पास गए थे। भारतीय कप्तान का ऐसा कहना था कि रोहित अब 34 साल के हो गए हैं। ऐसे में वनडे में केएल राहुल और टी-20 में ऋषभ पंत को उपकप्तान बनाना चाहिए। हालांकि कोहली का यह प्रस्ताव बोर्ड को पसंद नहीं आया, क्योंकि उनका मानना था कि विराट वास्तव में अपना कोई उत्तराधिकारी नहीं चाहते। पहले भी आई विवादों की बात वैसे से ये कोई पहला मौका नहीं है जब विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच विवादों की खबरें सामने आई हो। 2019 के वनडे वर्ल्ड कप के दौरान ऐसी खबरें आई थी कि विराट और रोहित एक दूसरे से बात तक नहीं करते। हालांकि बाद में हेड कोच रवि शास्त्री ने इन सभी बातों से इनकार किया था। इतना ही नहीं एक खबर तो ये भी सामने आई थी कि रोहित ने विराट को सोशल मीडिया पर अनफॉलो तक कर दिया है। इस बात में कोई सच्चाई नहीं निकली थी। युवा खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं करते कोहली रिपोर्ट में साथ ही ये भी कहा गया है कि भारतीय कप्तान को टीम में सभी खिलाड़ियों को समर्थन हासिल नहीं है। खासतौर पर विराट टीम के जूनियर खिलाड़ियों को बीच मझधार में छोड़ देते हैं। पीटीआई से बात करते हुए एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा- विराट के साथ समस्या संवाद की है। महेंद्र सिंह धोनी का कमरा 24 घंटे खुला रहता था और कोई भी खिलाड़ी अंदर जा सकता था। उनके साथ वीडियो गेम खेल सकता था, खाना खा सकता था और जरूरत पड़ने पर क्रिकेट के बारे में बात भी कर सकता था, लेकिन मैदान के बाहर कोहली से संपर्क कर पाना बेहद मुश्किल काम है। उपकप्तानी के लिए 3 दावेदार विराट कोहली के कप्तानी छोड़ने पर रोहित शर्मा को टी-20 टीम का कप्तान बनाए जाने के पूरे चांस है और उपकप्तानी की जिम्मेदारी ऋषभ पंत और केएल राहुल को मिल सकती है। साथ ही तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी इस पद के रेस में आगे रहेंगे। BCCI के सूत्र ने कहा- पंत का दावा मजबूत है लेकिन लोकेश राहुल को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि वह भी IPL कप्तान है। इतना ही नहीं तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी छुपा रुस्तम साबित हो सकते हैं।

राहुल गांधी ने कहा- भाजपा वाले झूठे हिन्दू हैं, ये धर्म की दलाली करते हैं

नई दिल्ली . कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक बार फिर से BJP पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि भाजपा ने जब GST लागू किया तो दुकानदारों के घर में लक्ष्मी डाली या निकाली? कांग्रेस ने जब मनरेगा लागू किया तब लोगों के घर में लक्ष्मी डाली या निकाली? राहुल ने कहा कि हमने RTI लागू करके करोड़ों लोगों के हाथों में दुर्गा की शक्ति डाली। उन्होंने कहा कि भाजपा वाले अपने आपको हिंदू पार्टी कहते हैं और पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं। ये झूठे हिन्दू हैं। ये हिन्दू धर्म का प्रयोग करते हैं। ये धर्म की दलाली करते हैं। राहुल ने ये बातें महिला कांग्रेस के स्थापना दिवस पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कही। संघ और भाजपा की विचारधारा से कभी समझौता नहीं करूंगा आज देश में RSS वाली बीजेपी की सरकार है। इनकी विचारधारा और हमारी विचारधारा दोनों अलग हैं। या एक विचारधारा देश पर राज करेगी या दूसरी विचारधारा देश पर राज करेगी। कांग्रेस का कार्यकर्ता होने के नाते मैं बाकी दूसरी विचारधाराओं के साथ समझौता कर सकता हूं, लेकिन भाजपा और संघ की विचारधारा से कभी समझौता नहीं कर सकता। गांधीजी, सावरकर और गोडसे की विचारधारा में क्या अंतर है? ये एक बड़ा और गहरा सवाल है। RSS की विचारधारा ने उस हिन्दू की छाती में 3 गोली क्यों मारी? बीजेपी और संघ के लोग कहते हैं कि वो हिन्दू पार्टी हैं। पिछले सौ-दो सौ साल में किसी एक व्यक्ति ने हिन्दू धर्म को समझा हो और उसे अपने प्रैक्टिस बनाई है तो उस व्यक्ति का नाम महात्मा गांधी है। इसे हम भी मानते हैं और भाजपा-RSS के लोग भी मानते हैं। अगर महात्मा गांधी ने हिन्दू धर्म को समझा और उन्होंने पूरी जिंदगी हिन्दू धर्म को समझने में लगा दी तो RSS की विचारधारा ने उस हिन्दू की छाती में तीन गोली क्यों मारीं? जिसको पूरी दुनिया एक उदाहरण मानती है। नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग तक कहते थे कि महात्मा गांधी एक उदाहरण थे और गांधी ने अहिंसा को सबसे अच्छे तरीके से समझा और सिखाया। राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा का मतलब भी बताया राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा का मतलब भी बताया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं से पूछा कि लक्ष्मी का मतलब क्या है? किसी ने नारी शक्ति तो किसी ने धन से जोड़कर जवाब दिया। इस पर राहुल ने बताया कि जम्मू में मैंने किसी से ये सवाल पूछा तो उन्होंने बताया, लक्ष्मी वो शक्ति है जो घर में पैसा लाती है। गलत इंटरप्रिटेशन। लक्ष्मी शब्द लक्ष्य से आता है। लक्ष्य को जो शक्ति पूरा करती है उसे लक्ष्मी कहा जाता है। राहुल ने फिर दुर्गा का मतलब बताया। उन्होंने कहा- देखिए हमारा धर्म जो है बड़ा लॉजिकल है। दुर्गा शब्द आता है दुर्ग से। दुर्ग का मतलब किला। दुर्गा मतलब वो शक्ति जो रक्षा करती है। मतलब साफ है। जो लक्ष्य को पूरा करे वो लक्ष्मी और जो रक्षा करे वो दुर्गा।  लक्ष्मी और दुर्गा को भाजपा और कांग्रेस की योजनाओं से जोड़ा राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा को आज की राजनीति से जोड़ते हुए कहा- राजनेता का काम दुर्गा (रक्षा) और लक्ष्मी (लक्ष्य) की शक्तियों को हर व्यक्ति तक पहुंचाने का होता है। बिना भेदभाव के हर व्यक्ति के घर में दुर्गा मतलब रक्षा, लक्ष्मी मतलब लक्ष्य पूरा करने की शक्ति डालने का काम हर राजनेताओं का होता है। मैंने कुछ गलत बोला? ठीक पटरी पर चल रही है गाड़ी? अब सवाल पूछता हूं… जब मोदी जी ने नोटबंदी की तब उन्होंने हमारी माताओं-बहनों के घर में लक्ष्मी की शक्ति बढ़ाई या कम की? कम की न…। जब नरेंद्र मोदी जी ने किसानों पर तीन कानून लागू किए उनसे लक्ष्य पूरे करने वाली शक्ति उन्होंने छीनी या उनको दी?…छिनी। जब जीएसटी लागू किया। छोटे दुकानदारों के घर में उन्होंने लक्ष्मी और दुर्गा डाली या निकाली? और जब कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा लागू किया तो करोड़ों लोगों के घर में लक्ष्मी की शक्ति डाली या निकाली? जब हमने आरटीआई लागू किया तो करोड़ों लोगों के हाथों में दुर्गा की शक्ति डाली है या नहीं? जब हमने संविधान की लड़ाई लड़ी? वन मैन वन बोर्ड दिया तो हमने दुर्गा की शक्ति बढ़ाई या कम की? लक्ष्मी की शक्ति ज्यादा की या कम की? …तो ये हो क्या रहा है? वो पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं वो अपने आपको हिन्दू पार्टी कहते हैं। और पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं। जहां ये जाते हैं। कहीं ये लक्ष्मी को मारते हैं तो कहीं ये दुर्गा को मारते हैं। और फिर कहते हैं कि हम हिन्दू हैं। ये किस प्रकार के हिन्दू हैं? ये झूठे हिन्दू हैं। ये हिन्दू धर्म का प्रयोग करते हैं। ये हिन्दू धर्म की दलाली करते हैं। मगर ये हिन्दू नहीं हैं। राहुल ने भीड़ से पूछा…बात समझ आई..क्लियर थी? मीडिया को भी घेरा, कहा-टीवी पर ये मेरा भाषण नहीं दिखाएंगे राहुल ने अपने संबोधन में मीडिया को भी घेरा। उन्होंने कहा कि अभी जो मैं भाषण दे रहा हूं। यह टीवी पर चल ही नहीं सकता। यहां मीडिया के कई साथी हैं। उनसे पूछिए क्या ये भाषण उनके चैनल पर चलेगा? मैं बताता हूं, ये चल ही नहीं सकता। इस पर भीड़ में ठहाके गूंजने लगे। महात्मा गांधी के आसपास इसलिए रहती थीं महिलाएं.. राहुल गांधी ने आगे बताया कि महात्मा गांधी की तस्वीरों में आप लोगों ने देखा होगा कि उनके आसपास दो-तीन महिलाएं होती थीं। क्या आपने RSS प्रमुख मोहन भागवत के आसपास किसी महिला को देखा है? ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस महिलाओं का सम्मान करती है और उन्हें मंच देती है। मोदी और RSS देश को महिला प्रधानमंत्री नहीं दे सकते। कांग्रेस ने ऐसा किया है। कांग्रेस के निशान हाथ को हर धर्म से जोड़ा राहुल ने स्थापना दिवस पर महिला कांग्रेस का नया लोगो जारी जारी किया। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से इसका मतलब भी पूछा और आखिरी में खुद इसके बारे में बताया। राहुल ने कहा आपने भगवान शिव, महावीर, बुद्ध, गुरुनानक, जीसस क्राइस्ट, साईं बाबा सबकी तस्वीरों में सामने हाथ होता है। मुस्लिम धर्म में चिह्न … Read more

NCRB की रिपोर्ट … UP रेप के मामले में टॉप पर, बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध MP में

नई दिल्ली। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने बुधवार को 2020 में हुए अपराधों का डेटा जारी किया है। इसके मुताबिक 2020 में हर रोज औसतन 80 मर्डर हुए। सबसे ज्यादा हत्या के मामले उत्तर प्रदेश में आए। कुल अपराधों की बात करें तो 2019 के मुकाबले 2020 में क्राइम रेट में 28% का इजाफा हुआ है। किडनैपिंग, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले कम हुए हैं। 2020 में देश में कुल 66,01,285 मामले दर्ज हुए। जो 2019 के 51,56,158 मुकाबले 14,45,127 ज्यादा हैं। 2019 के मुकाबले 1% बढ़े मर्डर के मामले रिपोर्ट कहती है कि 2020 में देश में कुल 29,193 मर्डर हुए। यानी हर दिन औसतन 80 मर्डर। जो 2019 के 28,915 के मुकाबले 79 ज्यादा हैं। सबसे ज्यादा 10,404 लोगों की हत्याएं आपसी विवाद की वजह से हुईं, वहीं 4,034 हत्याएं पुरानी दुश्मनी की वजह से हुईं। सबसे ज्यादा हत्या के मामले उत्तर प्रदेश में आए। उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा हत्याएं बिहार (3,150), महाराष्ट्र (2,163), मध्य प्रदेश (2,101) और पश्चिम बंगाल (1,948) में हुई हैं। राजधानी दिल्ली में पिछले साल 472 हत्याएं हुईं। जिन लोगों की हत्या हुई उनमें 38.5% की उम्र 30 से 45 साल के बीच थी, वहीं 35.9% की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। 16.4% की उम्र 45 से 60 साल के बीच थी, वहीं 4% ऐसे बुजुर्गों की हत्या हुई जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा थी। देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,71,503 मामले दर्ज हुए। जो 2019 के 4,05,326 मामलों के मुकाबले 8.3% कम थे। इनमें सबसे ज्यादा 30% मामले पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता करने के थे। वहीं 23% मामले शील भंग करने के इरादे से महिलाओं पर हमला करने के थे। 16.8% मामले किडनैपिंग के तो 7.5% मामले रेप के थे। बच्चों के खिलाफ अपराध के 42.6% मामले किडनैपिंग के बच्चों के खिलाफ अपराध के देश में 1,28,531 मामले दर्ज हुए। जो 2019 के मुकाबले 13.2% कम हैं। बच्चों खिलाफ होने वाले अपराधों में सबसे ज्यादा 42.6% मामले किडनैपिंग के हैं। बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा मामले भी 38.8% दर्ज हुए। दलितों के खिलाफ अपराध में 9.4% का इजाफा 2020 में दलितों के खिलाफ अपराध के कुल 50,291 मामले दर्ज हुए, जो 2019 के मुकाबले 9.4% ज्यादा हैं। इनमें 32.9% मामले मारपीट से आई साधारण चोट के थे। 8.5% मामले SC/ST एक्ट के थे। आदिवासियों के खिलाफ अपराध में भी 9.3% का इजाफा 2020 में आदिवासियों के खिलाफ अपराध के कुल 8,272 मामले दर्ज हुए। 2019 के मुकाबले आदिवासियों के खिलाफ अपराध में 9.3% का इजाफा हुआ है।

यूपी में प्रियंका गाँधी के मास्टर स्ट्रोक से अन्य दलों में खलबली

लखनऊ। यूपी चुनाव को लेकर सभी पार्टियां ताल ठोक रही हैं. कांग्रेस कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के मास्टर स्ट्रोक से अन्य दलों में खलबली मच गयी है। अगले साल होने वाले UP विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव और UP प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली या अमेठी की किसी सीट से मैदान में उतर सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रियंका, गांधी परिवार की पहली सदस्य होंगी जो विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। इससे पहले गांधी परिवार के सभी सदस्यों ने सिर्फ लोकसभा चुनाव लड़ा है। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका की पहली पसंद अमेठी है, क्योंकि वहां राहुल गांधी की हार का बदला लेने के लिए अमेठी में लोकसभा चुनावों की जमीन तैयार करेंगी, जिससे स्मृति ईरानी को 2024 के लोकसभा चुनावों में चुनौती दी जा सके। प्रशांत किशोर ने भी प्रियंका को दिया है सुझाव बीते दिनों लखनऊ में हुई मीटिंग में एडवायजरी कमेटी ने भी प्रियंका से कहा था कि उनके चुनाव मैदान में आने से कांग्रेस को UP में नई ताकत मिलेगी। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी प्रियंका को सुझाव दिया था कि उन्हें विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में उतरना चाहिए। प्रियंका के चुनाव के लिए कांग्रेसियों ने कसी कमर प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ने या ना लड़ने को लेकर खुद कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी के ऑफिस की तरफ से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए रायबरेली और अमेठी के डेटा जुटाए जा रहे हैं। रायबरेली या अमेठी ही क्यों? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के चुनाव हार जाने के बाद वहां गांधी परिवार का दबदबा कम हुआ है। वहीं, कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी की सेहत ठीक नहीं होने के चलते रायबरेली में भी गांधी परिवार का जनता से संपर्क कम हुआ है। ऐसे में प्रियंका के चुनाव लड़ने से अमेठी और रायबरेली क्षेत्र की जनता के साथ कांग्रेस के संबंधों को मजबूती मिल सकती है। रायबरेली और अमेठी बरसों से गांधी परिवार का गढ़ रहा है और प्रियंका इस रिश्ते को कमजोर नहीं होने देना चाहती हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद तो औपचारिक रूप से कह चुके हैं कि UP विधानसभा चुनाव में प्रियंका कांग्रेस का चेहरा होंगी। रायबरेली में अब तक सिर्फ 3 बार हारी है कांग्रेस रायबरेली में 1952 से लेकर 2019 तक लोकसभा चुनाव में सिर्फ तीन बार कांग्रेस हारी है। 1977, 1988 और 1996 में इस सीट पर कांग्रेस को हार मिली थी। इस सीट से फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, शीला कौल, अरुण नेहरू और सतीश शर्मा चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। अमेठी में 18 चुनाव में 16 बार कांग्रेस की जीत अमेठी में 17 लोकसभा और 2 उपचुनाव में कांग्रेस ने 16 बार जीत हासिल की है। सिर्फ तीन बार 1977, 1998 और 2019 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में पहली बार कांग्रेस हारी थी। इसके बाद 1980 में संजय गांधी यहां से सांसद बने। संजय की मौत के बाद राजीव गांधी ने अमेठी की बागडोर संभाली। फिर 1999 में सोनिया गांधी ने चुनाव जीता। इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में राहुल गांधी यहां से जीते , लेकिन 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल को हरा दिया था। कांग्रेस ने फंड जुटाने के लिए UP में नया तरीका भी निकाला है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि जिसे भी टिकट चाहिए उसे 25 दिसंबर तक पार्टी फंड में 11 हजार रुपए जमा कराने होंगे। टिकट के लिए पहले आवेदन पत्र जमा करना होगा।

दिल्ली में बारिश से हाहाकार, टूटा 46 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को बताया कि इस साल मानसून के अत्यधिक असामान्य मौसम में दिल्ली (Delhi Weather News) में अभी तक 1100 मिलीमीटर बारिश हुई जो कि 46 वर्षां में सबसे अधिक और पिछले साल दर्ज की गई बारिश से लगभग दोगुनी है. हालांकि ये आंकड़ें बदल सकते हैं, क्योंकि शहर में दिन में और बारिश का अनुमान है. बता दें कि दिल्ली में भारी बारिश की वजह से न सिर्फ इंदिरा गांधी एयरपोर्ट (IGI Airport) के कुछ हिस्सों में पानी भर गया है बल्कि दिल्ली के कई इलाके पानी-पानी हो गए हैं. वहीं, कई जगह जलजमाव की वजह से ट्रैफिक जाम लग गया है. आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा, ‘सफदरजंग वेधशाला ने 1975 के मानसून के मौसम में 1,150 मिलीमीटर बारिश दर्ज की थी. इस साल बारिश पहले ही 1,100 के आंकड़ें को पार कर गयी है और मानसून का मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है.’ आईएमडी के अनुसार, सामान्य तौर पर दिल्ली में मानसून के मौसम के दौरान 648.9 मिमी बारिश दर्ज की जाती है. मानसून का मौसम शुरू होने पर एक जून से 11 सितंबर तक शहर में सामान्य तौर पर 590.2 मिमी बारिश होती है। मानसून 25 सितंबर तक दिल्ली से चला जाता है. इसके अलावा अगले दो दिनों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 17-18 सितंबर के आसपास बारिश आने का अनुमान है. इस बारिश बना रही रिकॉर्ड साल 2003 में राष्ट्रीय राजधानी में 1,050 मिमी बारिश हुई थी. दिल्ली में 2011, 2012, 2013, 2014 और 2015 में मानसून के मौसम के दौरान क्रमश: 636 मिमी, 544 मिमी, 876 मिमी, 370.8 मिमी और 505.5 मिमी बारिश हुई. जबकि आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में 524.7 मिमी, 2017 में 641.3 मिमी, 2018 में 762.6 मिमी, 2019 में 404.3 मिमी और 2020 में 576.5 मिमी बारिश दर्ज की गयी. दिल्ली के लिए सितंबर में प्रचुर मात्रा में बारिश हुई। अभी तक इस महीने में 343.6 मिमी बारिश दर्ज की गयी जो कम से कम 12 वर्षों में सबसे अधिक है. इस साल सितंबर में हुई बारिश पिछले साल की तुलना में सबसे कम रही. पिछले साल सितंबर में शहर में 20.9 मिमी बारिश हुई थी. बहरहाल, दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में लगातार दो दिन 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गयी. एक सितंबर को 112.1 मिमी और दो सितंबर को 117.7 मिमी बारिश दर्ज की गयी. जबकि शनिवार को शहर में 94.7 मिमी बारिश दर्ज की गयी. वहीं, दिल्ली में मानसून के 19 साल में सबसे देर से 13 जुलाई को दस्तक देने के बावजूद राजधानी में उस महीने 16 दिन बारिश दर्ज की गयी थी जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है. दिल्ली में बारिश के दिनों में 507.1 मिमी बारिश हुई जो औसत से तकरीबन 141 प्रतिशत अधिक है. जुलाई 2003 के बाद से यह इस महीने में हुई सबसे अधिक बारिश है. इसके अलावा शहर में अगस्त में महज 10 दिन बारिश हुई थी जो सात वर्षों में सबसे कम है और कुल मिलाकर 214.5 मिमी. बारिश हुई जो 247 मिमी की औसत बारिश से कम है.

UP : प्रबुद्ध सम्मेलन के रास्ते ब्राह्मणों को मनाने में जुटी बीजपी

कानपुर। भाजपा प्रबुद्ध सम्मेलन के बहाने ब्राह्मणों को मनाने का में लगी हुई है। इसी क्रम में कानपुर देहात के रानियां अकबरपुर से विधायक प्रतिभा शुक्ल ने शहर में कार्यक्रम आयोजित कर ब्राह्मणों को एकजुट करने का संदेश देने का कार्य किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थिति गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों के नाम पर प्रमुख मार्गों और शहरों के नाम बदलने का कार्य चलता रहेगा। यह कलंक है, इनको तो मिटना ही होगा। इस दौरान जय श्री राम जय परशुराम के नारे भी लागये गये। हिंदुत्व के बहाने ब्राह्मणों को एक जुट दिखाने की कोशिश भी की गयी। भाजपा राष्ट्रवादी सोच रखती हैं जातिवादी नही मंत्री अजय मिश्र ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति में हमारी सोच कैसी हो इस पर चर्चा करनी होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल ब्राह्मणों का सम्मेलन नहीं है। राष्ट्र के सम्मान को बढ़ाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा। हिंदुस्तान एक आध्यात्मिक देश है। हमारी पहचान धर्म और शिक्षा रही है। आज प्रबुद्ध सम्मेलन के नाम पर जातिगत सम्मेलन हो रहे है। जबकि भाजपा प्रबुद्ध सम्मेलन में यहां देश की चिंता कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के शशक्तिकरण, रोज़गार, सड़क, बिजली, ट्रैन, अच्छी कानून व्यवस्था पर काम करने के लिये भाजपा सरकार चुना गया है। अपमान से जुड़े नाम बदल जाते रहेंगे अजय मिश्र ने कहा कि बाबर, लोधी, गजनी, गोरी जैसे आक्रांताओं ने लूट के साथ, धर्म पर हमला किया। मंदिर मठों को तहस नहस किया गया। हमारी व्यवस्था को नष्ट किया गया। इसके पुनर्निर्माण की ज़रूरत है। देशबके प्रधानमंत्री ने अपने देश की संस्कृति को विश्व पटल पर रखा। शहरों और सड़कों का नाम बदलने का काम भाजपा करती रहेगी। क्योंकि जो चिन्ह देश के अपमान से जुड़े हुए हैं, उन्हें हबदलना होगा। अबकी बार कश्मीर में लोगों ने अपने घरों में तिरंगा फहराया, कृष्ण की झांकी लाल चौक में निकाली गई। भाजपा सत्ता के माध्यम से देशवाशियों को सुविधा संपन्न बनाने का काम कर रही है। ऐसे में राष्ट्र, देश समाज के लिए प्रबुद्ध वर्ग की बडी भूमिका। 25 करोड़ की मूर्ति के बहाने ब्राह्मण नेता बनने की फिराक़ में अनिल शुक्ल विधायक प्रतिभा शुक्ल के पति और पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी ने प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित कर खुद का कद बढ़ाने की कोशिश की। पिछले कुछ समय से कई ब्राह्मण नेताओ के प्रयास है कि वह खुद को ब्राह्मणों का नेता साबित कर सके। आज के प्रबुद्ध सम्मेलन के माध्मय से कुछ ऐसा ही करते नज़र आये अनिल शुक्ल वारसी भी। उनका दावा है कि एक मंदिर बनाया जायेगा जिसमें 25 करोड़ की मूर्ति भगवान परशुराम की लगाई जायेगी। गृहराज्य मंत्री का है कानपुर से गहरा नाता केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र कानपुर के चौबेपुर ब्लॉक के एक गांव के ही रहने वाले हैं। BNSD इंटर कॉलेज से इन्होंने शिक्षा ली है। क्राइस्ट चर्च कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। DAV लॉ से वकालत की पढ़ाई की हुयी है। कानपुर से ही पढ़े अजय मिश्र को मोदी सरकार में गृह मंत्री अमित शाह के साथ काम करने का मौका मिला है।

गुजरात के CM विजय रुपाणी ने चुनाव से एक साल पहले छोड़ा पद

अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने चुनाव से एक साल पहले अचानक इस्तीफा दे दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में समय के साथ दायित्व बदलते रहते हैं। भाजपा में यह स्वभाविक प्रक्रिया है। मुझे 5 साल के लिए मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली, जो मैंने पूरी की है। रुपाणी ने कहा कि जेपी नड्डा जी का भी मार्गदर्शन मेरे लिए अभूतपूर्व रहा है। अब मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी मैं उसका निर्वहन करूंगा। हम पद नहीं जिम्मेदारी कहते हैं। मुझे जो जिम्मेदारी मिली थी वह मैंने पूरी की है। हम प्रदेश के चुनाव नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में लड़ते हैं और 2022 का चुनाव भी उन्हीं की अगुवाई में लड़ा जाएगा। बता दें रुपाणी ने 26 दिसंबर 2017 को दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। भाजपा ने गुजरात में 182 सीटों में से 99 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। विधानमंडल दल की बैठक में रुपाणी को विधायक दल का नेता और नितिन पटेल को उपनेता चुना गया था। नए मुख्यमंत्री की रेस में 4 नाम शामिल रुपाणी के इस्तीफे के बाद ये अटकलें भी शुरू हो गई हैं कि अब अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री पुरषोत्तम रुपाला, गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल के नाम आगे हैं। बीते कुछ दिनों से चल रही थीं नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें बीते कुछ दिनों से गुजरात सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लग रही थीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार रात करीब 8 बजे अचानक अहमदाबाद पहुंचे थे। उनके गुजरात आने का कोई तय शेड्यूल नहीं था। एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत करने राज्य गृहमंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा, मेयर किरीट परमार और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हितेश बारोट पहुंचे थे। हालांकि गुरुवात रात को अमित शाह अपनी बहन के घर पहुंचे थे तो लगा कि पारिवारिक काम से आए होंगे, लेकिन अब लग रहा है कि शायद सत्ता में बदलाव के सिलसिले में ही वे गुजरात पहुंचे होंगे। हार्दिक पटेल बोले- जनता को गुमराह कर रही भाजपा रूपाणी के इस्तीफे पर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि भाजपा जनता को गुमराह कर रही है। कोरोना में अव्यवस्था और नाकामी की वजह से लोगों में नाराजगी थी। ऐसे में भाजपा सीएम बदलकर लोगों को गुमराह कर रही है। उसने उत्तराखंड में भी यही किया है।

BBC खुलासा : मोदी सरकार ने विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए

– BBC की रिपोर्ट – साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से सरकार ने जनवरी 2021 तक विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं  – इससे पहले की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 3,582 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे  नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौर में मोदी सरकार ने महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना (पीएमजेएवाई) के प्रचार पर जितना ख़र्च किया उससे कहीं अधिक ख़र्च नागरिकता संशोधन क़ानून, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और कृषि क़ानूनों जैसे विवादित क़ानूनों से जुड़े विज्ञापनों पर किया। भारत में बेहतर इलाज के लिए ग़रीबों को आर्थिक मदद देने के लिए आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत हुई थी। साल 2020 में कोविड-19 महामारी का असर झेल रहे लोगों के लिए इसके दायरे को बढ़ाया गया था। बीबीसी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) का इस्तेमाल करते हुए कोरोना महामारी के दौर में विज्ञापन के ख़र्च में मोदी सरकार की प्राथमिकताओं को समझने की कोशिश की। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक़ अप्रैल 2020 से लेकर जनवरी 2021 के बीच मोदी सरकार ने विज्ञापनों पर कुल 212 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसमें से केवल 0.01 फ़ीसदी यानी 2 लाख 49 हज़ार रुपए सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना के विज्ञापन पर खर्च किए गए हैं। इस डेटा में आउटडोर मीडिया विज्ञापनों (सड़कों और बाहर लगने वाले पोस्टर वगैरह) पर ख़र्च का हिसाब शामिल नहीं है। भारत सरकार के ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार देश में केवल 3.76 फ़ीसदी लोग की स्वास्थ्य बीमा लेते हैं जबकि वैश्विक स्तर पर क़रीब 7.23 फ़ीसदी लोग स्वास्थ्य बीमा का लाभ उठाते हैं। तो सरकार ने खर्च कहां किया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर अक्सर विज्ञापनों में ज़रूरत से अधिक ख़र्च करने के आरोप लगते रहे हैं। साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से सरकार ने जनवरी 2021 तक विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं। इससे पहले की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 3,582 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे। बीबीसी यह पड़ताल करना चाहती थी कि मौजूदा सरकार किस मद में अधिक ख़र्च कर रही है।  इसके लिए सूचना के अधिकार के तहत भारत सरकार के ‘ब्यूरो ऑफ़ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ को सूचना के अधिकार के तहत अर्ज़ी भेजी गई। यह विभाग सरकार के दिए जाने वाले विज्ञापनों का लेखा-जोखा रखता है। आरटीआई के जवाब में ब्यूरो ने 2,000 पन्नों के दस्तावेज़ भेजे जिनमें मई 2004 से लेकर जनवरी 2021 के बीच प्रिंट मीडिया, टेलीविज़न, डिजिटल और आउटडोर प्लेटफ़ॉर्म पर सरकारी विज्ञापनों पर किए ख़र्च का हिसाब था। इन आंकड़ों को समझने पर सामने आया कि जिस वक्त कोरोना महामारी देश में क़हर बरपा रही थी, उस वक्त सरकार अपने कार्यकाल में लाए कुछ विवादित क़ानूनों के बचाव और उनके बारे में अधिक जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञापन दे रही थी। इन क़ानूनों में नागरिकता संशोधन क़ानून, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और कृषि क़ानूनों जैसे क़ानून शामिल थे जिन्हें लेकर हाल के महीनों में काफ़ी विवाद हुआ है। योजना के फ़ायदे के बारे में किसे कितनी जानकारी? साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 हज़ार रुपए से कम प्रति माह की आय वाले भारतीय परिवारों के लिए ये स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी। मोदी समर्थकों ने इस योजना को ‘मोदीकेयर’ कहा था और दावा किया कि ये योजना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा लांच की गई जानी मानी ‘ओबामाकेयर’ की तर्ज पर है। कोविड महामारी की पहली लहर के दौरान संक्रमण के मामले बढ़े तो इसका दवाब देश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा जो मरीज़ों की बढ़ती संख्या के कारण चरमराने की अवस्था तक पहुंच गई। इस दौरान हज़ारों लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख़ किया और कई परिवारों के लिए ज़रूरी पैसों की व्यवस्था करना बड़ी समस्या बन गया। ऐसे में सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाया और कइयों के लिए ये सरकारी बीमा योजना बेहद अहम साबित हुई। अप्रैल 2020 में सरकार ने कहा कि निजी और सरकार के साथ जुड़े सार्वजनिक अस्पतालों में कोरोना वायरस की टेस्टिंग और कोविड-19 के इलाज का ख़र्च इस बीमा योजना के तहत कवर होगा। इसी साल 18 अगस्त को घोषणा की गई थी कि आयुष्मान योजना के तहत 2 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गई हैं . इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने की सूरत में लाभार्थियों को कैशलेस इलाज मिलता है और साल में एक परिवार के सदस्यों के इलाज पर 5 लाख तक के ख़र्च को कवर किया जाता है। आरटीआई के ज़रिए हमें पता चला कि 2018 के आख़िर से लेकर 2020 की शुरुआत तक सरकार ने आयुष्मान योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 करोड़ रुपयों से अधिक के विज्ञापन दिए हैं। मगर कोरोना महामारी के दौरान ये ख़र्च काफ़ी हद तक कम कर दिया गया और सरकार की सकारात्मक छवि दिखाने वाले अभियानों पर अधिक ख़र्च किया गया। इनमें सरकार का ‘मुमकिन है’ अभियान शामिल है जिसके केंद्र में पीएम मोदी की छवि थी। बीबीसी ने स्वास्थ्य योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाले विज्ञापनों पर ख़र्च बनाम विवादित क़ानूनों के बारे में विज्ञापन के संबंध में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार के आयुष्मान योजना में पंजीकरण कराने के बावजूद राजस्थान के सीकर में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद को अस्पताल का बिल देना पड़ा। राजेंद्र के भाई सुभाष चंद के पास प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड है। इस साल मई में कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। राजेंद्र ने बीबीसी संवाददाता सरोज सिंह को बताया था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इस सरकारी योजना के तहत कौन से अस्पताल सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल के डॉक्टर ने आयुष्मान भारत येजना कार्ड को स्वीकार करने से मना कर दिया और मेरे भाई का इलाज करने से इनकार कर दिया। अब मुझे लगता है कि इस कार्ड के होने का हमारे लिए कोई फ़ायदा नहीं है।’ हालांकि राजस्थान राज्य स्वास्थ्य योजना की कार्यकारी अधिकारी अरुणा राजोरिया का कहना है कि आयुष्मान योजना के सभी लाभार्थियों को एसएमएस के ज़रिए एक … Read more

सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म

महिला ने बताया कि, मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. MP : रुढ़िवादी सोच तोड़ सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म बिना पति के मां बना एक औरत के लिए आज के समय में भी बहुत बड़ा चैलेंज है. समाज ऐसी महिलाओं को स्वीकार नहीं करता है. इन जैसी और भी कई बातों और रुढ़िवादी सोच को तोड़कर भोपाल (Bhopal) की 37 साल की संयुक्ता बनर्जी ने अपने लिए कुछ अलग चुना है. हालांकि ये फैसला लेना इतना आसान नहीं था, लेकिन परिवार और दोस्तों से मिले सपोर्ट के बाद उसके लिए मुश्किले और आसान हो गई. संयुक्ता बनर्जी ने काफी सोचने के बाद बिना पार्टनर के ही मां (single mother) बनने का फैसला लिया और स्पर्म डोनेशन (sperm donation) के जरिए अगस्त में एक बेटे को जन्म दिया है संयुक्ता का आज अपने इस फैसले पर गर्व है. संयुक्ता का कहना है कि उनके परिवार और दोस्तों ने मानसिक और भावनात्मक बहुत सहयोग किया जिसकी वजह से उन्हें ये फैसला लेने में कोई मुश्किल नहीं आई. बच्चा गोद लेने का भी कोशिश की थी लेकिन गोद नहीं मिला उन्होंने बताया कि तीन बार बच्चा गोद लेने की कोशिश की थी, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद एक फैमिली डॉक्टर ने उन्हें आईसीआई तकनीक के बारे में बताया. जिसके बाद उनका मां बनने का सपना पूरा हो गया. सरोगेसी से मां बनना बहुत मंहगा प्रोसेस है संयुक्ता ने बताया कि उनकी शादी 20 अप्रैल 2008 में हुई थी. पति को बच्चा नहीं चाहिए था लेकिन मुझे मातृत्व का सुख लेना था. 2014 में दोनों की राहें अलग हो गईं और 2017 में तलाक हो गया. फिर मैंने नए सिरे से जिंदगी शुरू की. चूंकि मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद मेरे फैमिली डॉक्टर ने सेरोगेसी, आईवीएफ, आईसीआई और आईयूआई जैसी तकनीक के बारे में बताया. इसमें बिना पार्टनर के भी मां बना जा सकता है. 24 अगस्त को दिया बेटे को जन्म उन्होंने कहा कि, मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया. इसमें बिना किसी के संपर्क में आए केवल स्पर्म डोनेशन लेना होता है. इसमें डोनर की पहचान गोपनीय रहती है. फरवरी में मुझे पता चला मैंने कंसीव कर लिया है. डॉक्टर की देखरेख में मैंने 24 अगस्त को बेटे को जन्म दिया. पहले मैंने सरोगेसी से बच्चा पैदा करने के बारे में सोचा था लेकिन यह तकनीक बहुत महंगी है. इसमें काफी रुपया खर्च होने के बाद भी सक्सेस रेट बहुत कम है. इसके बाद टेस्ट ट्यूब बेबी पर भी विचार किया लेकिन उसमें भी बात नहीं बनी. तब मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाया. ‘मैं पापी हो गई हूं. मेरा पाप सामने आ गया’ संयुक्ता कहती हैं, अगर आप शादी के बंधन में हैं तो मां बने बिना एक महिला अस्तित्व ही न पूरा कर पाए. लेकिन अगर शादीनुमा संस्थान से या तो निकल गए हो या शादी ही नहीं की है तो एक महिला का मां बनना पाप माना जाता है. इस तरह से अब इस समाज की नजरों में मेरा एक पाप सामने आ चुका है और मैं पापी हो गई हूं वह कहती हैं कि मेरी मां 70 साल की उम्र में साये की तरह मेरे साथ खड़ी रहीं. कुछ दोस्तों ने भी हर मोड़ पर मेरा साथ दिया जिससे राह आसान हो गई.

MP : बीजेपी प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने बताया नेताओं को नालायक

मंत्री न बनाए जाने से नाराज नेताओं को प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने नसीहत दी भोपाल। मध्य प्रदेश बीजेपी (Madhya Pradesh Bjp) के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव (muralidhar rao) ने गुरुवारो को पार्टी से नाखुश विधायक-सांसदों को सख्त लहजे में नसीहत देते हुए कहा है कि जो लगातार तीन-तीन, चार-चार बार से विधायक-सांसद बन रहे हैं, पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. ऐसे नेताओं के पास कहने को कुछ और नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर ऐसे नेता फिर भी ये कहते हैं कि उन्हें मौका नहीं मिला तो उनसे बड़ा नालायक कोई और नहीं है. उन्हें मौका मिलना भी नहीं चाहिए. दरअसल, बीजेपी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने पार्टी के उन नेताओं पर निशाना साधा, जो लगातार पदों पर बन रहने की मांग करते हैं. मुरलीधर राव ने कहा कि लगातार 4 बार 5 बार से सांसद, विधायक बनना, लगातार प्रतिनिधित्व करना, यह जनता का दिया हुआ वरदाना होता है. ‘सब होने के बाद रोने वालों को नहीं मिलना चाहिए कुछ’ दरअसल मुरलीधर राव गुरूवार को भोपाल स्थित संत रविदास मंदिर में अनुसूचित जाति मोर्चा के संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान राव ने कहा कि लगातार 4 बार 5 बार से सांसद, विधायक बनना, लगातार प्रतिनिधित्व करना, यह जनता का दिया हुआ वरदाना होता है. इसके बाद रोने के लिए कुछ नहीं होना चाहिए, ऐसे नेता अगर कहे कि उन्हें मौका नहीं मिला तो उनसे बड़ा नालायक कोई नहीं, मुरलीधर राव ने कहा कि उन्हें मौका मिलना भी नहीं चाहिए. सीनियर नेताओं को बड़ी नसीहत दी है राव ने मुरलीधर राव की दो टूक लाइन के बाद‌ साफ है कि आने वाले दिनों में कई वरिष्ठ नेताओं का पत्ता कट सकता है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है. दरअसल इस बार मंत्रिमंडल में बीजेपी के कई सीनियर नेताओं को स्थान नहीं मिला था. ऐसे में ये नेता अपने तीखे बयानों के जरिए पद की मांग करते रहते हैं. इन्ही सब बातों को देखते हुए मंत्री न बनाए जाने की नाराजगी को लेकर ही प्रदेश प्रभारी ने सीनियर नेताओं को नसीहत दी है. इन नेताओं के लिए मुरलीधर राव का यह बयान बड़ा संदेश माना जा रहा है. राव अपने बयानों को लेकर मध्य प्रदेश में इन दिनों बहुत चर्चाओं में है. एक दिन पहले ही उन्होंने राजगढ़ में बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि संगठन के नेता दौरे करें. जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद करें वरना उनकी छुट्टी कर दी जाएगी.

भारत बंद की तैयारियां तेज:संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया राज्यवार बैठकों का कार्यक्रम

गाजियाबाद. कृषि कानूनों के खिलाफ 27 सितंबर को प्रस्तावित भारत बंद के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्यवार बैठकों का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य एवं भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता युद्धवीर सिंह के अनुसार, किसान संगठन 11 सितंबर को पटना में एक सम्मेलन करेंगे। मध्यप्रदेश के सभी जिलों में तैयारी बैठकें 10 सितंबर तक पूरी कर ली जाएंगी। उत्तर प्रदेश में एसकेएम के “मिशन यूपी’ की अहम बैठक 9 सितंबर को लखनऊ में होगी। 15 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में किसान संसद होगी। युद्धवीर सिंह ने कहा कि ये सभी बैठकें कहीं न कहीं 27 सितंबर के प्रस्तावित भारत बंद की तैयारियों से जुड़ी हैं। अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार बैठकें-पंचायत करके सभी किसान-मजदूर संगठनों का समर्थन लिया जा रहा है। इन बैठकों के बाद ये संगठन अपने-अपने राज्य में बंदी के लिए जनसंपर्क करके जनसमर्थन हासिल करेंगे। महापंचायत पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार पांच सितंबर को यूपी के मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत पर किसान संगठनों ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनवाई है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ट्वीट करके बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म 17 सितंबर को भारतीय किसान यूनियन के सभी अधिकारिक प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीम की जाएगी। चुनाव नजदीक देख किसान आंदोलन ने पकड़ा जोर जैसे-जैसे यूपी-उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह किसान आंदोलन फिर से जोर पकड़ रहा है। पांच सितंबर की मुजफ्फरनगर महापचंायत और सात सितंबर की करनाल महापंचायत इसी का नतीजा है। करनाल में खुद राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी अपनी टीम को लेकर डटे हुए हैं। इधर, संयुक्त किसान मोर्चा ने कह दिया है कि सभी राज्यों में एसकेएम की समितियां बनाई जाएं। साफ है कि किसान संगठन अब इस आंदोलन को दिल्ली बॉर्डर के साथ-साथ गांव-गांव, जिले-जिले तक ले जाना चाहते हैं।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet