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37 करोड़ रुपए का इनामी अफगानिस्तान का गृहमंत्री; 13 साल पहले भारत को जख्म दिया था

काबुल. 20 साल बाद अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा। 20 साल बाद ही एक बार फिर तालिबान ने हुकूमत का औपचारिक ऐलान कर दिया। तालिबान घोषित आतंकी संगठन है और जाहिर सी बात है कि उसकी सरकार में दहशतर्दों को ही जगह मिलनी थी, और मिली भी। एक नाम और उसका ओहदा या कहें पोर्टफोलियो, अमेरिका और दुनिया को चौंका रहा है। ये नाम है सिराजुद्दीन हक्कानी। वो कितना खूंखार आतंकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने उस पर 50 लाख डॉलर (इंडियन करेंसी के मुताबिक करीब 37 करोड़ रुपए) का इनाम घोषित कर रखा है। सिराजुद्दीन और उसके पिता ने 2008 में काबुल के भारतीय दूतावास पर भी हमला कराया था। इसमें 58 लोग मारे गए थे। 2011 में अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ रहे जनरल माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का दायां हाथ और एजेंट बताया था। फिदायीन हमले इसके दिमाग की उपज फिदायीन हमलों का इतिहास कई दशक पुराना है। माना जाता है कि श्रीलंका में सिविल वॉर के वक्त इनकी शुरुआत हुई थी, लेकिन अफगानिस्तान में फिदायीन या आत्मघाती हमले शुरू करने वाला हक्कानी नेटवर्क और खास तौर पर यही सिराजुद्दीन हक्कानी माना जाता है। अफगानिस्तान में इन हमलों में अब तक हजारों बेकसूर मारे जा चुके हैं। सिराजुद्दीन ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की साजिश भी इन्हीं हमलों के तहत रची थी। ये नाकाम रही। कहा जाता है कि सिराजुद्दीन का बाप और हक्कानी नेटवर्क की स्थापना करने वाला जलालुद्दीन हक्कानी 2013 या 2015 के बीच मारा गया, लेकिन सिराजुद्दीन 2001 के बाद से ही हक्कानी नेटवर्क का सरगना बना हुआ है। सिराजुद्दीन पाकिस्तान के वजीरिस्तान में ही रहता है। हक्कानी नेटवर्क को जानना जरूरी इसको संक्षिप्त में समझ लेते हैं। 1980 के आसपास सोवियत सेना ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। अमेरिका ने इसे अपनी तौहीन समझा। पाकिस्तान के साथ मिलकर स्थानीय कबीलों को हथियार और पैसा दिया। इनमें हक्कानी नेटवर्क भी शामिल था। इसके बाद तालिबान बना और अमेरिका ने इन गुटों से दूरी बनानी शुरू कर दी, लेकिन पाकिस्तान इन्हें पालता-पोसता रहा। ISI ने हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल अफगानिस्तान और अमेरिका दोनों के खिलाफ किया। ये एजेंसी पैसे भी लेती और हमले भी कराती। अमेरिका की ये नाकामी ही कही जाएगी कि वो पाकिस्तान पर दबाव डालकर हक्कानी नेटवर्क को खत्म नहीं करा सका। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क: कितने पास, कितने दूर शायद कम लोगों को पता होगा कि तालिबान किसी एक संगठन का नाम नहीं है। इसमें कई गुट, कई कबीले और कई धड़े हैं। हक्कानी नेटवर्क को आप इनमें से एक मान सकते हैं। अफगान तालिबान अलग है और पाकिस्तान तालिबान अलग। बस एक चीज कॉमन है। ये सभी कट्टरपंथी और आतंकी संगठन हैं जो शरीयत के हिसाब से हुकूमत चलाना चाहते हैं। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क अपनी सुविधा के हिसाब से एक-दूसरे का इस्तेमाल करते हैं। अफगान तालिबान को सत्ता में आने के लिए हक्कानी नेटवर्क ने दिल-ओ-जान से मदद की। नतीजा सामने है। उसका सरगना अब अफगानिस्तान का होम मिनिस्टर होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो तालिबान और हक्कानी नेटवर्क एक होकर भी अलग हैं, और अलग होकर भी एक हैं। हक्कानी नेटवर्क का खूनी खेल 2001: सिराजुद्दीन हक्कानी नेटवर्क का चीफ बना 2008 : में भारतीय दूतावास पर हमला, 58 की मौत 2012 : में अमेरिका ने हक्कानी नेटवर्क को बैन किया 2014 : में पेशावर स्कूल पर हमला, 200 बच्चे मारे गए 2017 : काबुल में हमला, 150 से ज्यादा लोगों की मौत

शरिया क़ानून क्या है और ‘तालिबान के शासन’ में अफ़ग़ान महिलाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?

नईदिल्ली। तालिबान ने कहा है कि वे इस्लाम की शरिया क़ानूनी प्रणाली की सख़्त व्याख्या के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान पर शासन करेंगे। इस समूह ने राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा करने के बाद अपनी जीत का दावा किया है। इसके साथ ही देश में अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना की उपस्थिति को क़रीब दो दशक बाद ख़त्म कर दिया है। अफ़ग़ानिस्तान में क्या हो रहा है? देश पर अपना नियंत्रण क़ायम कर लेने के बाद बुलाई गई पहली प्रेस वार्ता में, तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि मीडिया और महिलाओं के अधिकारों जैसे मसलों से “इस्लामी क़ानून के ढांचे के तहत” निपटा जाएगा। हालांकि तालिबान ने अभी तक यह नहीं बताया कि व्यवहार में इसके क्या मायने होंगे। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई जिन्हें पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की वक़ालत करने के चलते तालिबान ने 15 साल की उम्र में गोली मार दी थी, उन्होंने चेतावनी दी है कि शरिया क़ानून की तालिबान की व्याख्या अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए घातक हो सकती है। मलाला ने बीबीसी को बताया, “मुझे अफ़ग़ानिस्तान में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं सहित कुछ कार्यकर्ताओं से बात करने का अवसर मिला। उन्हें अपने आगे के जीवन को लेकर भरोसा नहीं हो रहा है।” उन्होंने कहा, “उनमें से कई लोग 1996-2001 के बीच देश में में जो हुआ था, उसे याद कर रहे हैं और वे अपनी सुरक्षा, अपने अधिकारों और स्कूल जाने के अधिकार को लेकर बहुत चिंतित हैं।” असल में, पहले जब तालिबान सत्ता में थे, तब महिलाओं को काम करने या शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी। आठ साल की उम्र से लड़कियों को बुर्क़ा पहनना पड़ता था। यही नहीं, महिलाओं को बाहर जाने की अनुमति तभी थी, जब उनके साथ कोई पुरुष संबंधी होते थे। इन नियमों की अवहेलना करने पर महिलाओं को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे जाते थे। शरिया क्या है? शरिया क़ानून इस्लाम की क़ानूनी व्यवस्था है। इसे इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक क़ुरआन और इस्लामी विद्वानों के फ़ैसलों यानी फ़तवों, इन दोनों को मिलाकर तैयार किया गया है। शरिया का शाब्दिक अर्थ- “पानी का एक स्पष्ट और व्यवस्थित रास्ता” होता है। शरिया क़ानून जीवन जीने का रास्ता बताता है। सभी मुसलमानों से इसका पालन करने की उम्मीद की जाती है। इसमें प्रार्थना, उपवास और ग़रीबों को दान करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य मुसलमानों को यह समझने में मदद करना है कि उन्हें अपने जीवन के हर पहलू को ख़ुदा की इच्छा के अनुसार कैसे जीना है। व्यवहार में इसका क्या मतलब है? शरिया किसी मुसलमान के दैनिक जीवन के हर पहलू के बारे में व्यवस्था देता है। उदाहरण के लिए, काम के बाद अपने सहयोगियों द्वारा पब में बुलाए जाने पर सोच में डूबा कोई मुसलमान सलाह के लिए शरिया विद्वान के पास जा सकता है ताकि यह तय हो सके कि वह अपने धर्म के क़ानूनी ढांचे के भीतर व्यवहार करे। दैनिक जीवन के अन्य क्षेत्रों, मसलन पारिवारिक क़ानून, वित्त और व्यवसाय के लिए मार्गदर्शन के लिए भी कोई मुसलमान शरिया क़ानून का रुख़ कर सकता है। शरिया के कुछ कठोर दंड क्या हैं? शरिया क़ानून अपराधों को दो सामान्य श्रेणियों में विभाजित करता है। पहला, ‘हद’, जो गंभीर अपराध हैं और इसके लिए अपराध तय किए गए हैं और दूसरा, ‘तज़ीर’ अपराध होता है। इसकी सज़ा न्याय करने वाले के विवेक पर छोड़ दी गई है। हद वाले अपराधों में चोरी शामिल है। इसके लिए अपराधी के हाथ काटकर दंड दिया जा सकता है। वहीं व्यभिचार करने पर पत्थर मारकर मौत की सज़ा दी जा सकती है। कुछ इस्लामी संगठनों का तर्क है कि ‘हद’ अपराधों के लिए दंड मांगने पर इसके नियमों में सुरक्षा के कई उपाय तय हैं। इसके लिए दंड तय करने से पहले काफ़ी ठोस सबूत की ज़रूरत होती है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने पत्थर मारकर मौत की सज़ा देने का विरोध किया है। उसका कहना है: “यह दंड यातना या अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक सज़ा तय करता है। इसलिए यह साफ़ तौर पर प्रतिबंधित है।” हालांकि सभी मुस्लिम देश हद अपराधों के लिए ऐसे दंड नहीं देते। सर्वेक्षणों की मानें तो ऐसे अपराधों के लिए कठोर दंड देने को लेकर मुसलमानों की राय बहुत बंटी हुई है। क्या धर्मांतरण के लिए फांसी दी जा सकती है? धर्म को छोड़ना, मुसलमानों के बीच एक बहुत ही विवाद का मसला है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश इस्लामी विद्वानों की राय है कि इसके लिए सज़ा मौत है। हालांकि मुस्लिम विचारकों का एक अल्पसंख्यक तबका (ख़ासकर पश्चिमी देशों से जुड़े लोगों का) मानता है कि आधुनिक दुनिया की वास्तविकता का अर्थ यह है कि इसके लिए दंड अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। ऐसे लोगों की यह भी राय है कि धर्मत्याग से इस्लाम को कोई ख़तरा नहीं है।क़ुरआन स्वयं घोषणा करता है कि धर्म में “कोई बाध्यता नहीं” होती। फ़ैसले कैसे होते हैं? किसी भी क़ानूनी प्रणाली की तरह शरिया भी काफ़ी जटिल है। इसका लागू होना पूरी तरह से जानकारों के गुण और उनकी शिक्षा पर निर्भर करता है। इस्लामी क़ानूनों के जज मार्गदर्शन और निर्णय जारी करते हैं। मार्गदर्शन को फ़तवा कहा जाता है। इसे औपचारिक क़ानूनी निर्णय माना जाता है। शरिया क़ानून के पांच अलग-अलग स्कूल हैं। चार सुन्नी सिद्धांत हैं- हनबली, मलिकी, शफ़ी और हनफ़ी और एक शिया सिद्धांत है जिसे शिया जाफ़री कहा जाता है। पांचों सिद्धांत, इस बात में एक-दूसरे से अलग हैं कि वे उन ग्रंथों की व्याख्या कैसे करते हैं जिनसे शरिया क़ानून निकला है।

कोरोना काल में शूटिंग बंद और सेक्स रैकेट शुरू, टॉप की मॉडल ने बताया सब कुछ

Mumbai: मुंबई में एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ है. इस सेक्स रैकेट के मामले में टॉप की मॉडल और एक्ट्रेस को पकड़ा गया है. इनमें से एक टॉप की मॉडल है और कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में काम कर चुकी हैं और दूसरी एक्ट्रेस है जिसने टीवी सीरियलों में काम किया है. ये मॉडल और अभिनेत्री दो घंटे के दो लाख रुपए चार्ज किया करती थीं. मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने इन्हें जुहू के एक फाइव स्टार होटल से पकड़ा है. इन मॉडल और अभिनेत्री को मुंबई पुलिस ने अरेस्ट नहीं किया है बल्कि इन्हें सेक्स रैकेट के चंगुल से रेस्क्यू करने की बात कही है. अभिनेत्री और मॉडल की बजाए रैकेट चलाने वाली महिला दलाल को अरेस्ट किया गया है. गिरफ्तार होने के बाद पूछताछ में ईशा खान ने बताया कि वे इस सेक्स रैकेट को पिछले कई सालों से चला रही है. वह दो घंटे का दो लाख रुपए चार्ज किया करती थी. इसमें 50 हजार रुपए वह अपना कमीशन रखा करती थी और बाकी के डेढ़ लाख रुपए संबंधित मॉडल और ऐक्ट्रेस को दे दिया करती थी. पूछताछ में मॉडल व एक्ट्रेस ने बताई सेक्स रैकेट से जुड़ने की वजह पूछताछ में मॉ़डल और अभिनेत्री ने बताया कि कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन की वजह से शूटिंग बंद दी, काम नहीं मिल रहा था. इसलिए वे सेक्स रैकेट से जुड़ गईं. यह रैकेट कुछ इस तरह से चला करता था जिसमें ईशा खान ग्राहकों से संपर्क किया करती थी. वह ग्राहकों से मॉडल,अभिनेत्रियों और कॉल गर्ल्स के प्रोफाइल और फोटोग्राफ्स शेयर करती थी. ग्राहक जिसे पसंद कर लेते थे उनके साथ रेट, डेट और टाइम फिक्स कर लिया जाता था. फिर जुहू जैसे पॉश इलाकों में स्थित होटलों में कमरे बुक करवा दिए जाते थे. मॉडल को उस कमरे में भेज दिया जाता था. दो घंटे के लिए दो लाख रुपए वसूल किए जाते थे. दो घंटे के दो लाख रुपए में सौदा फिक्स मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने फर्जी ग्राहक बन कर ईशा खान से संपर्क किया. ईशा खान से कहा कि उन्हें और उनके एक दोस्त को टॉप मॉडल्स चाहिए. इसके बाद ईशा खान ने कई फोटो वाट्सअप पर भेजे. क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने दो लड़कियों के फोटो सेलेक्ट किए. इनमें से एक ने कई विज्ञापनों में काम किया है और दूसरी ने कई टीवी सीरियलों में काम किया है. क्राइम ब्रांच ने ऐसे जाल बिछाया, सेक्स रैकेट का खेल सामने आया ईशा खान ने प्रति लड़की का दो घंटे का दो लाख रुपए में सौदा फिक्स किया. क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने सौदे के लिए हां कर दी. जुहू का होटल भी बुक करा दिया गया. गुरुवार रात जैसे ही महिला दलाल और मॉडल व अभिनेत्री होटल के बाहर पहुंचे. क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया.

चयनित शिक्षकों का आंदोलन, भोपाल में BJP दफ्तर का घेराव, पुलिस ने धमकाया, रोने लगी महिलाएं

भोपाल. भोपाल में 10 घंटे से चल रहा चयनित शिक्षकों का आंदोलन शाम को खत्म हो गया। वे सुबह 9 बजे से BJP दफ्तर का घेराव कर धरने पर डटे थे। शाम को कलेक्टर अविनाश लवानिया और डीआईजी इरशाद वली पहुंचे और चयनित शिक्षकों से हटने को कहा, लेकिन जब वे नहीं माने तो कुछ समय की मोहलत दी और फिर एफआईआर दर्ज करने के लिए नाम-पते लिखे जाने लगे। साथ ही मोबाइल पर वीडियो भी बनाए गए। एफआईजार की चेतावनी के बाद अधिकांश महिला-पुरुष हट गए। कुछ तो पुलिस ने जबरदस्ती हटा दिया। कार्रवाई से चलते कई महिलाएं रोने लगी तो एफआईआर की बात सुनकर कई पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़ने लगी। इस दौरान बारिश भी होने लगी। कई महिलाएं छाता लेकर डटी रहीं, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ कम हुई तो उनके हौंसले भी पस्त हो गए। इन्हें चेतावनी दी गई कि यदि नहीं हटे तो एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी और फिर कहीं भी नौकरी नहीं मिलेगी। यह सुनकर महिलाएं डर गईं और आखिरकर वे हट गईं। हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाई महिलाएं पुलिस कार्रवाई के डर से कई महिलाएं पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगी। वे रोने भी लगी। दूसरी ओर कई महिलाएं कार्रवाई का विरोध कर रही थी। उनका कहना था कि नियुक्ति के लिए धरना देने पर ही कोरोना का खतरा है, लेकिन राजनीतिक कार्यक्रमों से कोरोना नहीं फैलेगा? हालांकि, पुलिस की सख्ती से उनकी एक न चली। कई महिलाओं ने जब वीडयो-फोटो से इनकार किया तो जबरदस्ती की गई। हालांकि, डीआईजी ने जवानों को साफ तौर पर कहा कि मारपीट या अन्य तरीके से न हटाया जाए। बरसते पानी में कार्रवाई पुलिस बरसते पानी में कार्रवाई करती रही। शाम 7.30 बजे से सभी को मौके से हटा दिया गया था। वहीं धरनास्थल पर बेरिकेडिंग की गई। कार्रवाई के दौरान सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया। इस कारण हबीबगंज रेलवे स्टेशन से एमपी नगर तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। इससे पहले सुबह 9 बजे प्रदेशभर से आए सैकड़ों चयनित शिक्षकों ने BJP ऑफिस का घेराव कर दिया। CM शिवराज सिंह चौहान से उनकी मांग थी कि उन्हें जल्द नियुक्ति दी जाए, ताकि वे परिवार का भरण-पोषण कर सकें। नारेबाजी के दौरान कई महिलाएं रो पड़ीं और कुछ बेहोश भी हो गईं। चयनित महिला शिक्षक ‘हम होंगे कामयाब’ का नारा लगाती रही। महिलाओं ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति की मांग को लेकर उठक-बैठक की तो कई महिलाएं सड़क पर नतमस्तक भी हो गईं। इस दौरान कुछ महिलाएं हाथों में राखी की थालियां सजाकर पहुंची। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को राखी बांधकर नियुक्ति पत्र तोहफे में लेकर जाऊंगी। हालांकि, उन्हें शाम को हटा दिया गया। 3 साल पहले चयन, अब तक नियुक्ति नहीं सुबह नारेबाजी के दौरान इंदौर की विनीता शर्मा की तबीयत बिगड़ गई। अन्य महिला साथियों ने विनीता को संभाला। विनीता का कहना है कि 3 साल पहले उसका संविदा शाला शिक्षक वर्ग-1 के पद पर चयन हो गया था, लेकिन स्कूल में अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। इंदौर से आई एक अन्य चयनित शिक्षिका का कहना है कि नियुक्ति का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार सोई हुई है, हमारी मांग पूरी नहीं हो रही है। प्रदेशभर से आए चयनित शिक्षक सुबह 9 बजे से ही प्रदेशभर से चयनित शिक्षकों ने BJP दफ्तर के बाहर डेरा डाल दिया। कुल 3 हजार चयनित शिक्षकों में करीब एक हजार महिलाएं हैं। कई महिलाएं ऐसी थीं, जो अपने दुधमुंहे बच्चों को साथ लाई थी। किसी की गोद में बच्चा बैठा था तो किसी को उसके पिता संभाल रहे थे।

MP में नौकरी मांगने पर बरसाए लट्‌ठ, बेरोजगारों पर टूट पड़ी पुलिस, कई युवक घायल

भोपाल। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर लंबे समय से भर्तियां नहीं होने से बुधवार को भोपाल में प्रदर्शन करने आए बेरोजगारों को रोजगार के बदले लाठी मिली। प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने कई युवाओं को खदेड़ दिया। युवाओं का दावा है कि इसमें 24 से ज्यादा युवक घायल हो गए। आरोप है कि पुलिस ने जबर्दस्ती एक वैन में बैठाया और भोपाल से करीब 25 किमी दूर छोड़ आई। MP के बेरोजगार युवाओं के साझा मंच मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट ने 18 अगस्त को प्रदेशभर के युवाओं को भोपाल में एकजुट होने का आह्वान किया था। इसके चलते बुधवार सुबह से ही कई युवा रोशनपुरा चौराहे पर जुटने लगे, लेकिन पुलिस ने यहां पर चारों ओर से बैरिकेडिंग कर रखी थी, इसलिए संगठन ने लोकेशन बदली। इसके बाद वे नीलम पार्क में पहुंचने लगे, लेकिन आगे जाने से रोक दिया और लाठी भी बरसाई। जंगल में छोड़ा, कई साथियों को इलाज की जरूरत संगठन के मनोज रजक ने बताया कि नीलम पार्क पर पुलिस ने पकड़ लिया। संगठन के पदाधिकारी प्रमोद नामदेव, सुमेरसिंह बड़ोले, दिनेश ठाकुर, गोपाल प्रजापति समेत करीब 25 लोगों को पुलिस अपने वाहन में बैठाकर भोपाल से काफी दूर एक जंगल में लाई है। हमें गाड़ी में ही बंद कर रखा है। लाठी लगने से कई साथियों को चोट आई हैं, जिन्हें इलाज की जरूरत है। एक महिला साथी भी साथ है। रोजगार के लिए प्रदर्शन संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि मध्यप्रदेश में पिछले कई सालों से कोई भी सरकारी भर्तियां नहीं निकाली गई हैं, जिसके कारण योग्य उम्मीदवार ओवरएज होकर परीक्षा से बाहर हो रहे हैं। यहां तक कि विभागों में तमाम पद खाली पड़े हुए हैं और लगातार सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने से निरंतर पद खाली होते जा रहे हैं। इसकी वजह से जो कार्यरत सरकारी कर्मचारी हैं उन पर काम का दबाव बहुत ज्यादा है। साथ ही सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली पर भी गलत प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को सभी विभागों में खाली पड़े पदों पर तुरंत स्थाई भर्ती करनी चाहिए। प्रदेश में पिछले 11 साल से शिक्षक भर्ती नहीं हुई है, जो अभ्यर्थी शिक्षक पात्रता परीक्षा में पास हो चुके हैं, अपने डॉक्युमेंट सत्यापित करवा चुके हैं उन्हें भी पिछले 3 साल से अपनी नियुक्ति का इंतजार है। चाहे पुलिस, नर्सिंग या पैरामेडिकल स्टाफ की समस्याएं हो, किसी भी विभाग में भर्ती प्रक्रिया सुचारु रूप से नहीं चल रही है। इसे ध्यान में रखते हुए मांग उठा रहे हैं, पर कोई हल नहीं निकल रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से लूट, उतना पैसा दिया नहीं जितना ले लिया

नई दिल्ली . कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट कहती है कि निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, अगर इसकी तुलना की जाए तो बीमा कंपनियों ने 30 फीसदी से अधिक की बचत की है। भारत को किसानों का देश कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में 13 जनवरी 2016 से एक नई योजना ”प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)” के नाम पर शुरू की थी. इसे उन्होंने सभी किसानों के लिए बाध्यकारी भी बनाया। अगर इस योजना की पृष्ठभूमि पर गौर करें, तो साफ समझ में आता है, कि निजी बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य था। प्रधानमंत्री ने इस योजना से कृषि पर आश्रित गरीब किसानों को फायदा तो नहीं पहुंचाया, बल्कि अपनी आंखों के सामने उन्हें खूब लूटवाया। गरज यह कि पांच साल पहले शुरू की गई इस योजना से किसानों को तो फायदा नहीं हुआ। किंतु निजी बीमा कंपनियों ने जमकर इससे मुनाफा कमाया। कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट भी यही कहती है, कि इन वर्षों में निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, इसकी तुलना की जाए, तो कंपनियों ने 30 फीसदी से अधिक की बचत की है। कृषि एवं कल्याण मंत्रालय की ओर से समिति को उपलब्ध कराये गये आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2016 से लेकर 14 दिसम्बर 2020 के दौरान, निजी बीमा कंपनियों ने किसानों से प्रीमियम के तौर पर 1,26, 521 करोड़ रुपए जमा कराए, जबकि बीमा कंपनियों ने नुकसान के एवज में किसानों को 87,320 करोड़ रुपए का भुगतान किया। यानी कंपनियों ने 69 फीसदी मुआवजे का भुगतान किया है। रिपोर्ट के अनुसार फसल का नुकसान होने पर किसानों ने 92,954 करोड़ रुपए का क्लेम किया था, लेकिन उन्हें 87,320 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया। आंकड़ों के मुताबिक इन सालों में सवा 9 करोड़ किसानों को ही मुआवजा दिया गया है। दिसम्बर 2020 तक किसानों को क्लेम का 5924 करोड़ रुपए नहीं दिया गया। रिपोर्ट पर गौर करें, तो साफ समझ में आता है, कि इस योजना का लाभ किसानों को कम और निजी बीमा कंपनियों को ज्यादा हुआ है। निजी बीमा कंपनियों ने कमाया 60 फीसदी से अधिक मुनाफा स्थायी समिति की रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक निजी बीमा कंपनियों ने वर्ष 2016 से 2020 के दौरान करीब 31फीसदी मुनाफा कमाया है। कई कंपनियों ने 50 से 60 फीसदी तक मुनाफा कमाया है। भारती एक्स 2017-18 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल हुई और तीन साल के दौरान कंपनी ने करीब 1576 करोड़ रुपए का प्रीमियम वसूला और क्लेम का करीब 439 करोड़ रुपए भुगतान किया’। इसी तरह रिलायंस जीआईसी लिमिटेड ने प्रीमियम के तौर पर 6150 करोड़ रुपए वसूला और किसानों को 2580 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया। जनरल इंडिया इंश्योरेंस को करीब 62 फीसदी, इफको को ने 52 और एचडीएफसी एग्रो ने करीब 32 फीसदी मुनाफा कमाया है। जबकि इस योजना की आत्मा में यह बताया गया था बीमा दावे के निपटान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसानों को फसल बीमा योजना के संबंध में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े । मध्यप्रदेश में ऐसे लाखों किसान हैं, जिन्हें तीन साल से प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ नहीं मिला है। जिसकी वजह से उनके खेत सूने पड़े हैं और कृषि विभाग के अधिकारी इसे बकवास बताते हैं और बैंक जवाब देने को तैयार नहीं है। दरअसल प्रदेश के किसान बैंक और बीमा कंपनियों के बीच फुटबॉल बनकर रह गये हैं। मध्यप्रदेश में ऐसे दो लाख से अधिक किसान हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ पिछले तीन साल से नहीं मिला है। न ही कहीं उनकी सुनवाई हो रही है। बीमा न मिलने के कारण सिवनी- मालवा के किसानों ने खरीफ की बुवाई बंद कर दी सिवनी-मालवा जिले के हिरण खेड़ा गांव के किसान ओमप्रकाश बताते हैं कि उनकी पुश्तैनी 52 एकड़ कृषि भूमि खरीफ सीजन में खाली पड़ी रहती है। ओमप्रकाश ने बताया, वर्ष 2013 में सोयाबीन की फसल खराब होने पर पहली बार फसल बीमा का लाभ मिला था। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। उसके बाद फसल बर्बाद होने पर कभी भी बीमा का लाभ नहीं मिला। लिहाजा परिवार ने निर्णय लिया कि खरीफ की बुवाई ही नहीं करनी क्योंकि इस मौसम में धान नहीं बो सकते, उसके लिए बहुत पानी की जरूरत है, जो सरकार से हमें नहीं मिलती। सरकार हमें तवा बांध से अक्टूबर से फरवरी तक ही पानी देती है। इसलिए इस दौरान हम लोग रबी के लिए पूरी तैयारी करते हैं। ताकि उसका पूरा लाभ लिया जा सके। रबी में हम लोग गेहूं बोते हैं। ओमप्रकाश का कहना है कि अगर खरीफ में सोयाबीन बोते हैं तो बारिश से पूरा सड़ जाती है। बहुत नुकसान होता है। फिर रबी की फसल के लिए पैसे ही नहीं बचते। इसी तरह होशंगाबाद के भी लाखों किसानों ने खरीफ के सीजन में खेतों को खाली छोड़ देते हैं। सीहोर जिले के लाखों हेक्टेअर में सोयाबीन फसल की बर्बादी इसी बरसात में हुई है, सीहोर जिले के करीब सवा तीन लाख हेक्टेअर में सोयाबीन की फसल बर्बाद हो चुकी है। अतिवृष्टि, इल्ली और अफलन के कारण दर्जनों गांव में फसल खराब हो चुकी है। अब इन किसानों को कर्ज चुकाने के साथ ही पूरा साल बिताने की चिंता भी सताने लगी है। इस जिले के सेवनिया गांव की महिला किसानों ने खेत की खड़ी फसल को काटकर बाहर फेंक दिया। कुछ गांवों के किसानों ने तो अपनी खड़ी फसल को काटकर गाय-भैंस मवेशी को खिला दिया, तो कहीं -कहीं किसान ट्रैक्टर से बखर चलाकर फसल को हांक रहे हैं। सीहोर किसानों का कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किसान एमएस मेवाड़ा ने बताया कि पिछले तीन सालों से सीहोर जिले के किसानों की फसलें खराब होती चली आ रही हैं, जिससे किसान कर्ज के बोझ में डूब गये हैं। उन्होंने कहा कि इस बार 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल से सोयाबीन का … Read more

PM मोदी की लोकप्रियता तेजी से घटी,अब सिर्फ 24% की पसंद,योगी टॉप-5 में नहीं-सर्वे

Mood of the Nation survey : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कोई बीजेपी सीएम टॉप 5 में नहीं नई दिल्ली। इंडिया टुडे के हालिया सर्वे देश का मूड (MOOD OF THE NATION) जारी किया गया है. सर्वे में कई सवालों के जवाब देशवासियों ने दिए हैं. इस सर्वे में मोदी की लोकप्रियता, एनडीए की विकफला, गांधी परिवार के बिना कांग्रेस, देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री समेत कई सवाल पूछे गए थे जिनके जवाब आ चुके हैं. आइए जानते हैं क्या कहता है सर्वे…. योगी टॉप-5 में नहीं-सर्वे देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पीएम मोदी की लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है. पिछले साल 2020 में 66 फीसदी लोग नरेन्द्र मोदी को देश के अगले पीएम के तौर पर देख रहे थे. लेकिन इस बार 24 फीसदी लोगों ने ही मोदी के नाम पर मुहर लगाई है. वहीं योगी आदित्यनाथ पिछले साल 3 फीसदी से इस बार 11 फीसदी पर आ गए उन्हें जनता पीएम के दूसरे विकल्प के तौर पर देखती है. जबकि राहुल गांधी 10 फीसदी लोगों की पसंद के साथ तीसरे स्थान पर हैं. पिछले साल राहुल को 8 फीसदी लोगों ने पीएम के तौर पर पसंद किया था. इस लिस्ट में अरविंद केजरीवाल ,ममता बनर्जी, अमित शाह, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का नाम भी है.

पीएम मोदी के टोक्यो यानी बनारस शहर की सड़कों पर चल रही हैं नावें

वाराणसी। “बनारस में बाढ़ नहीं आई, बल्कि ये उस कराहती गंगा के आंसू हैं, जिसके प्रवाह, गहराई और दिशा के साथ भाजपा सरकार लगातार मनमानी कर रही है। इसी सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी ने बनारसियों को भरमाने के लिए कहा था, ‘मैं आया नहीं, मां गंगा ने मुझे बुलाया है।’ सच यह है कि गंगा को लेकर पीएम मोदी के पास कोई नजरिया नहीं है। अगर कुछ है तो सिर्फ स्लोगन और जुमले। इनकी नीति और नीयत दोनों गलत है। बनारस की गंगा के साथ मनमाने ढंग से जो छेड़छाड़ किया जा रहा है, उसी का नतीजा है जलप्लावन।” यह बेबाक राय है चंचल की, जो बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे और जन-सरोकारों के प्रति स्पष्ट नजरिया रखने वाले मुखर समाजवादी चिंतक हैं। चंचल बेबाकी के साथ कहते हैं, ” नमामि गंगे” बेवकूफ बनाने वाली योजना है। हर नदी का अपना एक अलग स्वभाव होता है। सभी नदियों को बचाने का कोई एक तय तरीका नहीं होता। बारिश के दिनों में गंगा समेत दुनिया भर की नदियां बाढ़ लाकर खुद को साफ करती हैं। इनसे छेड़छाड़ करोगे तो डिजास्टर होगा ही। बनारस में इन दिनों बिना बारिश के बाढ़ इसलिए विकराल है कि सरकार ने गंगा का रुख बदलने और वाहवाही लूटने के लिए रेत पर “मोदी नहर” बनवा दी। विश्वनाथ कारिडोर का सारा मलबा गंगा में डालवा दिया। मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा में प्लेटफार्म बनाकर उसके वेग को रोकने की गंदली कोशिश की गई। ऐसे में बनारस के लोगों को खतरनाक नतीजे तो भुगतने ही पड़ेंगे।” ‘स्मार्ट सिटी’ में चल रहीं नौकाएं बनारस में गंगा ने सचमुच खतरे का अलार्म बजा दिया है। नदी का जल लाल निशान पार कर चुका है। इसका असर वरुणा और गोमती पर भी है। ‘स्मार्ट सिटी’ की गलियों में नावें चलाई जा रही हैं। सामने घाट इलाके के लोग योगी सरकार का मुंह देख रहे हैं, लेकिन इनके पास जो कुछ पहुंच रहा है वह सरकार नहीं, सामाजिक संस्थाएं दे रही हैं। बनारस में गंगा के साथ वरुणा ने इस कदर तबाही मचाई है कि बनारसी साड़ियों का ताना-बाना डूब गया है। करघों की खटर-पटर बंद है। हजारों बुनकरों के सामने रोजी-रोटी की भीषण समस्या है। बाढ़ से घिरे लोगों की नजरें प्रशासन से मिलने वाली मदद की ओर गड़ी हुई हैं। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जो अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। गंगा में उफान के कारण इसके तटवर्ती इलाकों के साथ-साथ वरुणा के मुहाने पर बसे रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। शहर के दर्जनों इलाकों में जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। वाराणसी शहर के दशाश्वमेध घाट पर स्थित जल पुलिस थाना भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल डूब गया है। हरिश्चंद्र घाट की सबसे ऊपरी सीढ़ी पर शवदाह किया जा रहा है। यही स्थिति सामने घाट, रमना, डोमरी, रामनगर आदि शवदाह स्थलों की है। बनारस का सीन यह है कि गंगा घाटों का आपसी संपर्क भी पूरी तरह टूट गया है। बलिया-गाजीपुर मार्ग पर आवागमन ठप है। चंदौली जिले में बलुआ घाट पार कर गंगा का पानी बाजार में पहुंच गया है। कोनिया, सामने घाट, सरैया, डोमरी, नगवा, रमना, बनपुरवा, शूलटंकेश्वर के कुछ गांव, फुलवरिया, सुअरबड़वा, नक्खीघाट, सरैया समेत कई इलाकों में बाढ़ ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सभी इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। आवागमन पूरी तरह से ठप है। बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। पिछले दो-तीन दिनों से पलायन का सिलसिला तेज हो गया है। कुछ लोग अपने घरों का सामान लेकर रिश्तेदारों और परिचितों के यहां जा रहे हैं। बुनकरों के हिस्से में आई बाढ़ की तबाही गंगा और वरुणा नदी में आई बाढ़ की वजह से शहर के दर्जन भर मोहल्लों में लूम और करघों की धड़कन बंद हो गई हैं। हालत यह है कि बुनकरों को अब दो वक्त की रोटी जुटा पाना मुहाल हो गया है। घरों में पानी घुसने से बिजली की सप्लाई के साथ-साथ करघे और लूम खामोश हो गए हैं। नक्खीघाट की शकीला के घर में करीब एक फीट तक पानी भर गया है। शकीला के घर में जाने के लिए कोई भी रास्ता नहीं बचा है। करीब पांच फीट पानी भर जाने की वजह से आसपास के कुछ लोग यहां से पलायन कर चुके हैं। शकीला बताती हैं, “घर में पानी भर जाने की वजह से रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। पेट के लिए उधार लेकर काम चला रहे हैं।” वरुणा नदी के किनारे किराये के मकान में रहने वाली सबीना अपने चार बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे रहने पर विवश है। सबीना का पति बुनकर है। आश्रय की तलाश में भटक रही इस महिला की मदद के लिए न प्रशासन आगे आ रहा है, न सियासी दल। दरअसल वह वोट बैंक नहीं है। वह कहती है, “हम बिहारी हैं। बनारस की वोटरलिस्ट में हमारा नाम नहीं है, इसलिए हमारी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है।” नक्खीघाट पुल पर कई दिनों से मेला लग रहा है। सैकड़ों लोगों का हुजूम बाढ़ से होने वाली तबाही का मंजर देखने के लिए जुट रहा है। एनडीआरएफ की टीम वरुणा नदी में लगातार गश्त कर लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दे रही है। हिदायतनगर के जावेद अख्तर बताते हैं, “हर तीन साल में ऐसी भीषण बाढ़ आती है। इससे पहले साल 2013, 2016 और 2019 में ऐसी ही भयानक बाढ़ आई थी। पिछली मर्तबा बाढ़ की वजह से करीब एक महीने तक कारख़ाना बंद रहा, जिसकी वजह से हमारी बरसों की बनाई गृहस्थी उजड़ गई थी।” सिधवा इलाके के नवाब अंसारी बताते हैं, “गंगा ने रौद्र रूप धारण किया तो अचानक वरुणा भी फुंफकार मारने लगी। कुछ ही घंटों में हमारे साथ-साथ पड़ोसियों की सारी गृहस्थी डूब गई। लूम और करघों पर चढ़ीं साड़ियां काली पड़ गई हैं। यह बात हमारी समझ में नहीं आ रही है कि नुकसान की भरपाई कैसे हो पाएगी?” नक्खीघाट पर प्रशासन ने तीन नावों की व्यवस्था की है। लोग इन्हीं नावों से अपने घर आ-जा रहे हैं, लेकिन … Read more

क्रिमिनल केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :MP-MLA के क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकेंगी राज्य सरकारें

नई दिल्ली. अब राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों पर चल रहे क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकेंगी। इसके लिए संबंधित राज्य के हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। आपराधिक मामलों में सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों को हमेशा के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। कोर्ट ने सितंबर 2020 के बाद सांसदों-विधायकों के वापस लिए गए केस दोबारा खोलने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह पिटीशन दाखिल की थी। इसमें सांसदों-विधायकों के केस के जल्दी निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने की भी मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में 3 जजों की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। इसमें चीफ जस्टिस एवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनीत सरन शामिल थे। MP-MLA के बंद मामले फिर खोलने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने के अजीत बनाम केरल सरकार केस में आए फैसले का हवाला देते हुए सभी स्टेट हाईकोर्ट से अपील की है कि वे सितंबर 2020 और उसके बाद सांसदों-विधायकों के खिलाफ वापस लिए गए सभी मामलों की फिर से जांच करें। CJI ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पेंडिंग केस और निपटाए गए केस का चार्ट पेश करने का आदेश भी दिया। चीफ जस्टिस ने CBI को फटकार लगाई मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सहयोगी वकील विजय हंसरिया ने कोर्ट को बताया कि उन्हें इस तरह के केसों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से स्टेटस रिपोर्ट मिल चुकी है, लेकिन CBI ने अभी तक स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट नहीं की है। इस पर चीफ जस्टिस ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा, ‘हम आश्वस्त हैं कि सरकार इस मुद्दे पर बहुत गंभीर है और कुछ करना चाहती है, लेकिन अब तक कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है। जब आप (CBI) स्टेटस रिपोर्ट भी फाइल नहीं करना चाहते, तो हमसे क्या उम्मीद कर सकते हैं?’ सरकार की तरफ से मौका देने की अपील इसके जवाब में CBI का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट करने के लिए और समय की मांग की। मेहता ने कहा, ‘हमने कल ED की ओर से एक रिपोर्ट दायर की थी। CBI के डायरेक्टर को भी जल्द से जल्द स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट करने को कहा है।’ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से इस केस में एक आखिरी मौका देने की अपील की। कर्नाटक ने 61 MP-MLA के केस वापस लिए इससे पहले, कोर्ट के सहयोगी वकील हंसरिया ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने 61 सांसदों-विधायकों के खिलाफ केस वापस ले लिए हैं। इस पर भी कोर्ट को विचार करना चाहिए। UP-उत्तराखंड में भी क्रिमिनल केस वापस हुए हंसरिया ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड समेत कई राज्य सरकारों ने अपने आदेश के जरिए दोषी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ क्रिमिनल केस वापस ले लिए हैं। कोर्ट मित्र ने सुप्रीम कोर्ट से दखल की अपील की हंसरिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में ऑर्डर पास करना चाहिए कि संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के आदेश के बिना राज्य सरकारें दोषी सांसदों-विधायकों के क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकें। CBI और स्पेशल कोर्ट सुनवाई जारी रखेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI कोर्ट और स्पेशल कोर्ट में MP-MLA के खिलाफ ऐसे केस की सुनवाई करने वाले जज अगले आदेश तक सुनवाई जारी रखेंगे। केस की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के निवेदन पर मामले की सुनवाई 2 हफ्ते के लिए टाल दी। अब कोर्ट 25 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगा।

500 रुपए में हो गई सिटी मजिस्ट्रेट और आर्मी के मेजर की शादी

धार. सरकारी अफसरों की शादी में अक्सर चमक-धमक और खर्चीले इंतजाम के लिए जाने जाते हैं, लेकिन धार में साेमवार काे सिटी मजिस्ट्रेट और सेना के मेजर ने बेहद सादगी से काेर्ट में शादी की। बिना बैंड-बाजा और बारात के हुई इस शादी में फूल-माला व मिठाई के नाम पर मात्र 500 रु. खर्च हुए। शादी के बाद सब रजिस्ट्रार कार्यालय में शादी का रजिस्ट्रेशन भी कराया। इस शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन के परिजन और स्टाफकर्मी शामिल हुए। मूलरूप से भाेपाल की रहने वाली सिटी मजिस्ट्रेट शिवांगी जाेशी का रिश्ता दो साल पहले घर वालों ने भाेपाल में ही रहने वाले मेजर अनिकेत चतुर्वेदी के साथ तय किया था। अनिकेत सेना में मेजर हैं और वर्तमान में लद्दाख में तैनात हैं। काेराेना के चलते शादी दाे साल से टल रही थी। दोनों (शिवांगी और अनिकेत) ने घरवालों की सहमति से समाज में एक संदेश देने का भी निर्णय लिया। परिजनों की सहमति के बाद धार काेर्ट परिसर में सोमवार को बिना शोर शराबे और महंगे इंतजाम से दूर रहकर सादगी से कोर्ट मैरिज कर शादी का रजिस्ट्रेशन कराया। धार में तैनात शिवांगी जाेशी ने बताया कि पिछले दो साल से कोरोना काल चल रहा है। ऐसे समय में काेराेना याेद्धा के रूप में सेवा देना जरूरी समझा। इस काल में हमने कई लाेगाें काे खाेया है। इस समय संक्रमण कम जरूर हुआ, लेकिन काेराेना अभी गया नहीं है। लाेग भी नियमाें का पालन करें। उन्होंने बताया कि सादगी से शादी करने का मकसद ये संदेश देना था कि लोग शादियाें में फिजूलखर्च न करें। मैं शुरुआत से फिजूलखर्च के खिलाफ हूं। शादी में फिजूलखर्च से न केवल लड़की के परिवार पर बोझ पड़ता है बल्कि पैसों का दुरुपयोग भी होता है। शादी के बाद नवदंपती ने धारेश्वर मंदिर पहुंच कर भगवान धारनाथ से आशीर्वाद लिया। इस शादी में परिवार वालों के साथ कलेक्टर आलाेक कुमार सिंह, एडीएम सलाेनी सिड़ाना सहित स्टाफ के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। पहले भी दो अफसरों ने सादगी से की थी शादी IAS अफसर और जिपं सीईओ आशीष वशिष्ठ और एडीएम सलाेनी सिड़ाना ने भी ऐसे ही शादी की थी। वशिष्ठ और सिड़ाना वर्तमान में धार में ही तैनात हैं। दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2014 बैच के अफसर हैं। सारा काम सादगी के साथ किया गया था।

द्वारकाधीश मंदिर की 52 गज ध्वजा पर बिजली गिरी, मंदिर को नुकसान नहीं

द्वारका। गुजरात के द्वारका ( Dwarka) में मंगलवार को प्रसिद्ध द्वारकाधीश (dwarkadheesh) मंदिर के ध्वज दंड पर बिजली गिर गई। बिजली गिरने से मंदिर की 52 गज ध्वजा को नुकसान पहुंचा। हालांकि, इस हादसे में द्वारकाधीश मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और केवल मंदिर की दीवारें काली पड़ गईं। घटना मंगलवार दोपहर 2:30 बजे के लगभग हुई। झंडे पर बिजली गिरने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। मंदिर के आस-पास घनी बस्ती है। ऐसे में अगर रिहायशी इलाके में बिजली गिरती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। द्वारकाधीश मंदिर के ऊपर लगे झंडे का भी खास महत्व है। इसे 52 गज ध्वजा कहा जाता है। यह भारत का अकेला ऐसा मंदिर है, जहां दिन में 3 बार 52 गज की ध्वजा चढ़ाई जाती है। भक्तों के बीच इस ध्वजा को लेकर इतनी श्रद्धा है कि ध्वजा चढ़ाने के लिए कई बार उन्हें दो साल तक का इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब मंदिर के किसी हिस्से पर बिजली गिरी है। द्वारकाधीश ने शहर के लोगों को बड़े हादसे से बचा लिया। बिजली गिरने से मंदिर को नुकसान नहीं द्वारका के SDM निहार भेटारिया ने बताया कि मंगलवार दोपहर को बिजली गिरने की घटना के बाद प्रशासन ने मंदिर परिसर की जांच की है। बिजली से मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। केवल झंडे को ही नुकसान हुआ है। जांच के बाद मंदिर की गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं। द्वारका का जगत मंदिर द्वारकाधीश मंदिर गुजरात राज्य के द्वारका में गोमती नदी के तट पर स्थित है। इसे जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान कृष्ण को समर्पित द्वारकाधीश मंदिर भारत के सबसे प्रमुख और भव्य मंदिर में से एक है। इसे रामेश्वरम, बद्रीनाथ और पुरी के बाद हिंदुओं के चार पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करने आते हैं। करीब 2200 साल पुराना तीर्थस्थल द्वारकाधीश मंदिर लगभग 2200 साल पुराना है, जिसका निर्माण वज्रनाभ ने किया था। इसके परिसर में भगवान कृष्ण के साथ-साथ सुभद्रा, बलराम, रेवती, वासुदेव, रुक्मिणी समेत कई देवी-देवताओं को समर्पित मंदिर भी हैं। जन्माष्टमी पर मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव को देखने लाखों लोग पहुंचते हैं। रविवार को जयपुर में बिजली गिरने से 11 की मौत हुई थी जयपुर में तेज बारिश के बीच रविवार को आमेर महल में बने वॉच टावर पर बिजली गिर गई। यहां घूम रहे 35 से ज्यादा टूरिस्ट इसकी चपेट में आ गए। दरअसल, मौसम में आए बदलाव के बाद बड़ी संख्या में लोग आमेर की पहाड़ियों पर घूमने पहुंचे थे। यहां फोटोग्राफी और सेल्फी का सिलसिला चल रहा था कि अचानक बिजली गिर गई।

नवजोत सिद्धू का AAP में जाने के संकेत

जालंधर। पंजाब के सीएम पर हमलावर कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ( Navjyot sidhu) ने आम आदमी पार्टी (AAP) की तारीफ करके नए सियासी समीकरणों की ओर इशारा किया है। तीन दिन पहले AAP पर हमलावर सिद्धू ने अब उसकी तारीफ की सियासी गुगली फेंककर सबको चौंका दिया है। सिद्धू ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि पंजाब में विपक्षी पार्टी AAP ने हमेशा उनके विजन और काम को पहचाना है। 2017 में बेअदबी, ड्रग्स, किसान और करप्शन के मुद्दे हों या अब राज्य का मौजूदा बिजली संकट हो या फिर अब मैं पंजाब मॉडल पेश कर रहा हूं। वो जानते हैं कि वास्तव में पंजाब के लिए कौन लड़ रहा है। बता दें कि तीन दिन पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के पंजाब में थर्मल प्लांट बंद करने की याचिका को लेकर सिद्धू ने हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि AAP चाहती है कि पंजाब में थर्मल प्लांट बंद हो जाएं। पंजाब में बिजली संकट से पंजाबियों को परेशानी हो और किसानों की फसल बर्बाद हो जाए। ट्वीट किए वीडियो में संजय सिंह व भगवंत मान कर रहे सिद्धू की तारीफ सिद्धू ने ट्वीट के साथ एक पुराना न्यूज वीडियो भी लगाया है। जिसमें उनके राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद पंजाब में AAP की ओर से उनके लिए माहौल बनाने की बात कही गई है। वीडियो में AAP नेता संजय सिंह उनकी तारीफ कर रहे हैं। संजय सिंह कहते हैं कि वो सिद्धू के इस साहसिक कदम और बहादुरी भरे फैसले का स्वागत करते हैं। सिद्धू और उनकी पत्नी अकाली दल के भ्रष्टाचार, ड्रग माफिया, किसानों की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। इसी वीडियो में AAP के पंजाब अध्यक्ष भगवंत मान सिद्धू की तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं। वे कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने रोल मॉडल से बड़ा नहीं हो सकता। अगर सिद्धू पार्टी में आते हैं तो मैं सबसे पहला व्यक्ति होऊंगा, जो उनका स्वागत करूंगा। पंजाब कांग्रेस में अभी भी अंदरूनी कलह चल रही है। हाईकमान की कमेटी के बाद CM कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर आए। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। सिद्धू के बारे में लगातार यह बात कही जा रही है कि वे मौजूदा कैप्टन सरकार में कोई भी पद लेने को तैयार नहीं हैं। पंजाब में राजनीतिक गणित को देखते हुए कांग्रेस किसी सिख चेहरे को पंजाब प्रधान का पद नहीं देना चाहती। ऐसे में सिद्धू को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाने की चर्चा चल रही थी। इसके बावजूद पूरे संकट का अभी तक कोई समाधान होता नजर नहीं आ रहा। इस वजह से यह माना जा रहा है कि कहीं सिद्धू इसके जरिए कोई सियासी संकेत तो नहीं दे रहे। पिछले महीने दिल्ली के CM और AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल पंजाब के दौरे पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऐलान किया था कि पंजाब में अगर AAP जीती तो सिख ही मुख्यमंत्री होगा। इस दौरान उन्होंने सिद्धू की तारीफ भी की थी। उन्होंने कहा- वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, हम उनका सम्मान करते हैं।

वाजपेयी जिंदा थे तब तक भाजपा थी, अब तो गुजरातियों का कब्जा : राजभर

मुरादाबाद। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने मुरादाबाद में BJP पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने कहा कि भाजपा तब तक थी, जब तक अटल बिहारी वाजपेयी जिंदा थे। अब तो भाजपा पर गुजरातियों का कब्जा है। उन्होंने कहा कि यूपी के गर्वनर से लेकर गृह मंत्री, प्रधानमंत्री, CBI चीफ, ED चीफ, वित्त मंत्री, RBI गर्वनर तक गुजराती हैं। तंज कसा कि देश का पैसा लेकर भागने वाले और देश बेचने वाले गुजराती ही हैं। देश को खरीदने वाले भी गुजराती हैं। राजभर ने कहा, पीएम मोदी और भाजपा कहते थे कि काला धन वापस लाएंगे। लेकिन इनके समय में स्विस बैंक में काला धन और भी बढ़ गया है। भाजपा के शासनकाल में महज पिछले 3 साल में स्विस बैंक में 20,000 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। भाजपा बताए कि यह धन किसका है। देश को लूटकर किसने स्विस बैंकों में रकम भरी है। राजभर ने कहा कि पीएम मोदी कहते थे कि देश नहीं बिकने दूंगा। लेकिन उन्होंने रेलवे, बैंक, LIC, एयरपोर्ट सब कुछ बेच डाला। बड़े कमाल की बात है कि देश बेचने वाला भी गुजराती है और उसे खरीदने वाला भी गुजराती है। बड़े-बड़े कार्पोरेट घराने गुजरात के हैं। देश की रकम लेकर विदेशों में भागने वाले भी गुजरात के ही हैं। जनता दवा को छटपटा रही थी, मोदी-योगी वोट को छटपटा रहे थे राजभर ने कहा कि जब कोरोना चरम पर था। तब जनता दवा, ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड के लिए छटपटा रही थी। लेकिन जनता को ये सब मुहैया कराने के बजाए मोदी और योगी उस समय बंगाल में वोट के लिए छटपटा रहे थे। जनता इसे भूलेगी नहीं, हिसाब पूरा करेगी। गुंडे छोड़कर चले गए थे तो ये कहां से आए यूपी में पंचायत चुनाव में हुई हिंसा पर राजभर ने कहा, योगी कहते थे गुंडे प्रदेश छोड़कर चले गए हैं। अब गोली-बम चलाने वाले ये गुंडे फिर कहां से उतर आए। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के जाने के साथ ही भाजपा में गुंडे, माफिया, भ्रष्टाचारियों का कब्जा हो गया है। भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है।–

पीएम मोदी पर बोले कमलनाथ- दाढ़ी बढ़ा ली तो अच्छे लगते हैं

भोपाल। कैबिनेट मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को सिविल एविएशन मिनिस्ट्री (नागर विमानन मंत्रालय) का पदभार संभाल लिया है। इस पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें बधाई दी। साथ में तंज भी कसा। कमलनाथ ने मोदी कैबिनेट में जगह मिलने पर कहा- यह बीजेपी और सिंधिया के बीच का मामला है। देखते हैं, अब ये गाड़ी आगे कैसे चलती है? कमलनाथ ने देश में महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों में वृद्धि के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा- महंगाई की कोई सीमा नहीं है। मोदीजी लंबे-लंबे भाषण देते थे। 2013-2014 के भाषण घोषणाएं, स्लोगन दिए थे स्टैंडअप इंडिया, डिजिटल इंडिया यह कहां है? उन्होंने दाढ़ी बढ़ा ली है, तो अच्छे लग रहे हैं। कमलनाथ ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के नए राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात कर सरकार की शिकायत की। राजभवन से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, राज्यपाल से मुलाकात के दौरान SC-ST वर्ग के साथ हो रही घटनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, SC-ST वर्ग के लोग मध्य प्रदेश में सुरक्षित नहीं हैं। इतनी घटनाएं हुई हैं, जितनी देश के इतिहास में नहीं हुईं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे आदिवासी इलाकों में काम करने का अनुभव है। मैंने राज्यपाल को अवगत कराया है कि प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लोग हैं, जितने देश में कहीं नहीं हैं। यहां वे सुरक्षित नहीं हैं। मैंने राज्यपाल को अवगत कराया कि प्रदेश का हर वर्ग परेशान है। किसान, छोटा व्यापारी परेशान है, नौजवान बेरोजगार है, बेरोजगारी घट नहीं बल्कि बढ़ रही है, हमारी अर्थव्यवस्था चौपट है। कमलनाथ ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस सरकार ने नीति बनाई थी, उसे सरकार लागू करे। नेमवार सहित अन्य बड़ी घटनाओं से राज्यपाल को अवगत कराया है। उप चुनाव की तैयारी को लेकर उन्होंने कहा कि मैं 11 दिन अस्पताल में था। मुझे निमोनिया हो गया था। अब पूरी तरह से स्वस्थ हूं। अब मैं पूरे स्टेट का दौरा करूंगा। उप चुनाव में उम्मीदवारों का चयन करने के लिए कार्यकर्ताओं से बात की जा रही है।

जमीन घोटाले को लेकर चंपत राय और अनिल मिश्रा तलब

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर के लिए कथित जमीन घोटाले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक्शन के मूड में नजर आ रहा है। RSS के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ट्रस्ट को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। वे जल्द अयोध्या भी पहुंच सकते हैं। बताया जा रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को चित्रकूट में चल रही संघ की बैठक में भी तलब किया गया है। उन्हें ट्रस्ट के काम से दूर भी किया जा सकता है। चंपत राय के पास विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष का भी दायित्व है। इसलिए वे ट्रस्ट को सहयोग देते रहेंगे। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा को संघ विचार प्रवाह के किसी संगठन में जिम्मेदारी देकर उनको भी ट्रस्ट के काम से दूर किया जा सकता है। फिलहाल ट्रस्ट ने नई जमीन की खरीद पर रोक लगा दी है। बिजैसी क्षेत्र में जमीन खरीद के दौरान दो करोड़ की जिस भूमि का 18 करोड़ में हुए सौदे को लेकर घोटाले के आरोप लगे थे, उसी के पास कोल डिपो क्षेत्र में कई हेक्टेयर जमीन का सौदा तय था, उसकी रजिस्ट्री होनी थी, उसे रोक दिया गया है। जमीन घोटाले के आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच भले ही संघ ट्रस्ट के पदाधिकारियों का बचाव करता दिखाई दे रहा हो, लेकिन अंदर ही अंदर छटपटाहट साफ नजर आने लगी है। यह मामला सामने आने के साथ ही RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी सरकार्यवाह भैयाजी जोशी मामले पर निगाह बनाए हुए हैं। वे जल्द अयोध्या भी आ सकते हैं। ट्रस्ट के जिन पदाधिकारियों का नाम इस प्रकरण में सामने आया है, वे कानूनी तौर पर ट्रस्ट में बने रहेंगे, लेकिन ट्रस्ट में उनका प्रभाव खत्म कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया जाना तय है। सूत्र बताते हैं कि भैयाजी जोशी की एंट्री यह बता रही है कि विपक्ष को कुछ कहने-सुनने का मौका न देते हुए ट्रस्ट के कई लोगों को उनके पद पर बनाए रखना है, लेकिन अब वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएंगे। ट्रस्ट पर RSS सीधे निगाह रखेगा।

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