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मांडू के जहाज महल के लिए हेरिटेज स्ट्रीट का निर्माण लगभग पूर, पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं और सुरक्षा के इंतजाम

मांडू  मांडू आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों के भ्रमण को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए महत्वपूर्ण आकर्षक जुड़ रहा है। मानसून से शुरू होने वाले नवीन पर्यटन सत्र में पर्यटकों को ‘जहाज महल हेरिटेज स्ट्रीट’ (Jahaz Mahal Heritage Street) की सुविधा मिलने जा रही है। इस सड़क का कार्य 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब अपने वाहन एक किलोमीटर दूर खड़े कर पर्यटक इस स्ट्रीट पर चलकर जहाज महल पहुंचेंगे। मांडू विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल(Mandu Tourist Place) है और यहां का जहाज महल देश के आदर्श स्मारकों में शुमार है। आसपास जल संरचनाओं से घिरे दसवीं शताब्दी में निर्मित इस महल की आकृति ऐसी है जैसे समुद्र में कोई जहाज लंगर डाले खड़ा हो, इसलिए इसे शिप पैलेस भी कहा जाता है। इस महल के महत्व को देखते हुए मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा यह हेरिटेज स्ट्रीट तैयार किया गया है। दो साल से चल रहा, हेरिटेज स्ट्रीट का निर्माण दरअसल, दो वर्ष से हेरिटेज स्ट्रीट के निर्माण का कार्य चल रहा है। स्वीकृति के बाद विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और विधायक कालू सिंह ठाकुर इस योजना को लेकर सक्रिय दिखे। इसके चलते यह सुविधा पर्यटन नगरी को मिली है। पूरे क्षेत्र को पर्यटन(Madhya Pradesh Tourism) के दृष्टिकोण से सुविधायुक्त बनाने के प्रयास किए गए हैं। जहाज महल परिसर के बाहर पार्किंग स्थान के साथ चार महत्वपूर्ण स्थान पर हेरिटेज लुक में सर्वसुविधायुक्त सुविधाघर भी बनकर तैयार हो चुके हैं। 700 मीटर पहले होगी वाहन पार्किंग जहाज महल जाने वाले पर्यटकों को अब अपने वाहन लगभग एक किलोमीटर पहले ही पार्क करने होंगे। इसके बाद इस खूबसूरत मार्ग पर पैदल चलकर जाना होगा। पर्यटन को ऐतिहासिक और यादगार अनुभव देने के उद्देश्य से इस मार्ग को आकर्षक रूप दिया गया है। आसपास क्षेत्र में लाल पत्थर से निर्माण कार्य किया गया है, जिससे इसकी सुंदरता और बढ़ गई है। ऐसे पर्यटक जो पैदल चलने में असमर्थ होंगे, उनके लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न सिर्फ पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। आकर्षक रोशनी से सजेगा स्ट्रीट, लाल पत्थर और ग्रेनाइट बनेंगे आकर्षण के केंद्र     स्ट्रीट शुरू होने से पहले 45 हजार स्क्वेयर मीटर में बनकर तैयार हुआ विशाल पार्किंग जोन।     लगभग 700 मीटर लंबा और 7.20 मीटर चौड़ाई वाला होगा जहाज महल हेरिटेज स्ट्रीट।     हेरिटेज लुक देने के लिए लाल पत्थरों और अन्य सामग्री का किया गया सुंदर तरीके से इस्तेमाल।     700 मीटर के दायरे में लगभग 24 ग्रेनाइट के गेट किए गए तैयार।     पूरे मार्ग पर पर्यटकों के बैठने के लिए लगाई जा रही कुर्सियां, रोड किनारे बगीचा तैयार करने की भी योजना।     पूरे क्षेत्र में की जा रही आकर्षक रोशनी, कार्य प्रगति पर।     जहाज महल के बाहर बनाया गया विशाल द्वार, एलईडी लाइट से जा रहा सजाया। 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण     जहाज महल हेरिटेज स्ट्रीट का कार्य मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जा रहा है, जो 95 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। पर्यटकों की सुविधाओं को देखते हुए विशाल पार्किंग क्षेत्र के साथ सर्वसुविधा युक्त सुविधाघर भी बनकर तैयार है। जहाज महल आने वाले लाखों पर्यटकों को एक नया अनुभव मिलने वाला है। – डीके परिहार, ईई, प्रदेश पर्यटन विकास निगम  

उज्जैन के खाचरौद में शीतला माता मंदिर में नमाज अदा करने का वीडियो वायरल होने के बाद माहौल गरमा गया

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा तहसील के खाचरौद कस्बे में एक धार्मिक स्थल पर नमाज़ अदा करने का वीडियो सामने आने के बाद माहौल गरमा गया है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई है और थाने में शिकायत दर्ज कराई है. घटना हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास स्थित शीतला माता मंदिर की बताई जा रही है. वीडियो में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग मंदिर परिसर में बैठकर नमाज अदा करते हुए नजर आ रहे है. यह वीडियो सोमवार शाम करीब 6 बजे का बताया गया है. वहीं एक महिला मंदिर में पूजा के लिए जाती दिखाई दे रही है. वहीं एक व्यक्ति मोटरसाइकिल पर खड़ा हो कर मुस्लिम को देख रहा है. इसके बाद मुस्लिम नवाज अदा करने के बाद मंदिर से जाता दिखाई दिया है. इस घटना का सीसीटीवी सामने आया है. पुलिस कर रही मामले की जांच उज्जैन के खाचरोद का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की. एडिशनल एसपी मयूर खंडेलवाल ने बताया कि धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत मिलने पर 59 साल के यूसुफ नामक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.  

हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन को राजसात करने का अधिकार अब जिले के कलेक्टर को नहीं

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच ने वाहन को राजसात करने के कलेक्टर के अधिकार वाले आदेश को असंवैधानिक (Unconstitutional) घोषित कर दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा हैं कि वाहन को राजसात करने का अधिकार अब जिले के कलेक्टर (Collector) को नहीं बल्कि संबंधित ट्रायल कोर्ट (Trial Court) को होगा। दो याचिकाओं पर दिया फैसला सागर के राजेश विश्वकर्मा और तेंदूखेड़ा के रामलाल झारिया के द्वारा हाईकोर्ट (High Court) में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट की फुल बेंच के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत, जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस विवेक जैन ने सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है। याचिकाकर्ता (Petitioner) की ओर से एडवोकेट विवेक रंजन पांडे, जयंत नीखरा, संजीव नीखरा ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। कलेक्टर को थे वाहन राजसात के अधिकार सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विवेक रंजन पांडे (Advocate Vivek Ranjan Pandey) ने कोर्ट को बताया कि आबकारी (Excise) अधिनियम 1915 की धारा 47(ए) के तहत वाहन को राजसात करने का अधिकार कलेक्टर को है। इसी तरह गोवंश अधिनियम (Cattle Act) 2004 में दिए इस प्रावधान को भी चुनौती दी थी। इसमें भी अपराध में शामिल वाहन को राजसात का अधिकार कलेक्टर (Collector) को था। अलग-अलग बेंच में लगे इन मामलों को कई बार उठाया गया, जिसके बाद फुल बेंच को यह केस रेफर किया गया।

प्रदेश में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से नागरिकों की स्वास्थ्य समस्याओं का निराकरण किया जाए: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

एयर एम्बुलेंस सुविधा का होगा विस्तार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव अस्पताल से घर तक पार्थिव देह ले जाने के लिए जिलों में उपलब्ध होंगे शव वाहन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव  प्रदेश में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से नागरिकों की स्वास्थ्य समस्याओं का निराकरण किया जाए: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से नागरिकों की स्वास्थ्य समस्याओं का निराकरण किया जाए। कैंसर जैसे रोगों से ग्रस्त नागरिकों को आवश्यक उपचार सुविधाएं प्राथमिकता से दिलवाई जाएं। प्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहित किया जाए। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए जा रहे हैं जो प्रदेश के नागरिकों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा अस्पतालों से घर तक पार्थिक देह ले जाने के लिए शव वाहन उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था जिलों से प्रारंभ होगी जिसका बाद में विकास खण्ड और तहसील स्तर तक विस्तार होगा। प्रदेश में एयर एम्बुलेंस सेवा को अधिक प्रभावी बनाते हुए गंभीर रोगियों के साथ ही दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल नागरिकों को भी सेवाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव तथा अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे। जिला स्तर पर उपलब्ध होंगे शव वाहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने अस्पताल से पोस्ट मॉर्टम एवं मत्यु के अन्य मामलों में पार्थिव देह घर तक ले जाने के लिए शव वाहन उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था प्रारंभ में जिला स्तर पर रहेगी। बाद में इस व्यवस्था को विकास खण्ड और तहसील तक विस्तार किया जाएगा। एयर एम्बुलेंस सेवा बनाएंगे प्रभावी मुख्यमत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य है जहां मरीजों के लिए एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा का विस्तार इस तरह किया जाएगा कि किसी भी दुर्घटना स्थल पर भी एयर एम्बुलेंस को पहुंचाया जा सके। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को चिकित्सक और कलेक्टर द्वारा निर्णय लेकर चिकित्सा संस्थानों तक भेजने की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में एयर एम्बुलेंस सेवा में एक हेलीकाप्टर और एक एरोप्लेन उपलब्ध है। गरीब से गरीब नागरिक को इस सुविधा का लाभ देने का प्रयास है। भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत राज्य के विभिन्न जोन निर्धारित कर इस सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। पीपीपी मोड पर नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में पीपीपी मॉडल पर नए मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए जा रहे हैं। गत वर्ष नीमच, मंदसौर और सिवनी में कॉलेज प्रारंभ किए गए। इस तरह के अन्य मेडिकल कॉलेज भी प्रारंभ होंगे। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। गंभीर रोगों की आसानी से जांच और उपचार हो इसके लिए यह व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रदेश में नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। अंगदान और देहदान को प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में अंगदान की घोषणा करने वालों और देहदान का संकल्प लेने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। अंगदान से एक से अधिक रोगियों को लाभ मिलता है। देहदान से चिकित्सा विद्यार्थियों के लिये शल्य क्रिया की दृष्टि से पार्थिव देह की उपलब्धता संभव होती है। अंगदान और देहदान का संकल्प लेने वाले नागरिकों एवं उनके परिजन को महत्वपूर्ण अवसरों पर सम्मानित किया जाए। सेवानिवृत्त चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाएं लेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि विभिन्न सेवानिवृत्त चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाएं विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों में नागरिकों के उपचार में प्राप्त की जाएं। ‍नए मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों के पदों को भरने की प्रक्रिया भी संचालित है। अनेक स्वास्थ्य योजनाओं की हुई समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में स्वास्थ्य संस्थाओं में मानव संसाधन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था, मातृ शिशु संजीवनी कार्यक्रम, अनमोल 2.0 के माध्यम से माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य की शत प्रतिशत ट्रेकिंग और मानीटरिंग और आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन, स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश प्रोत्साहन नीति 2025 के क्रियान्वयन, अस्पतालों के निरीक्षण, स्वास्थ्य संस्थाओं के भवनों के निर्माण, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच, शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने, महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ कुपोषण समाप्ति के लिए संयुक्त प्रयास, स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार और आम जन को बेस्ट प्रैक्टिसेस से अवगत करवाने, टीकाकरण पल्स पोलियो अभियान, डे-केयर सेंटर के संचालन, मोबाइल मेडिकल यूनिट और नर्सिंग महाविद्यालयों के निर्माण से संबंधित चर्चा एवं समीक्षा की।  

विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु 51 जातियों के परिवारों के समेकित विकास के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू किया जाएगा: राज्य मंत्री श्रीमती गौर

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध घुमंतु जातियों के विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। जन अभियान परिषद के माध्यम से इन विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु 51 जातियों के परिवारों के समेकित विकास के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद पहले चरण में 12 जिलों के 71 ब्लॉक में सर्वेक्षण करेगा। जो 30 अप्रैल 2025 से प्रारंभ होकर 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। सर्वेक्षण का उद्देश्य इन समुदाय के लोगों की जीवनशैली, पारंपरिक व्यवसाय और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी का दस्तावेजीकरण करना है। कई बार निरंतर स्थान बदलने के कारण यह किसी भी भौगोलिक सीमा के सर्वेक्षण में नहीं आ पाते हैं। एक स्थान पर निवास ना होने के कारण इन जातियों के लोगों के आधार कार्ड, समग्र कार्ड इत्यादि भी नहीं बन पाते हैं। इस सर्वेक्षण से शासन की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लाभ इन जातियों को मिल सकेगा, रिहाइशों की पहचान हो सकेगी और स्थान परिवर्तन का समय, कारण व अन्य तथ्यों की जानकारी एकत्रित की जा सकेगी। बैठक में जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मोहन नागर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंखयक कल्याण, विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार, संचालक विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु नीरज वशिष्ठ, जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद की कार्यकारिणी समिति की छठवीं बैठक

भोपाल पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद की कार्यकारिणी समिति की छठवीं बैठक अरेरा हिल्स स्थित विकास भवन में हुई। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह भी सम्मिलित हुईं। मंत्री पटेल ने कहा कि मनरेगा में क्वालिटी मॉनिटरिंग के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया का ही पालन किया जाए। विभाग को उन्नत तकनीक की सहायता लेकर जीआईएस लैब स्थापित करने, रिमोट सेंसिंग जीआईएस और एआई पूरे विभाग में लागू करने के प्रस्ताव पर भी बैठक में चर्चा हुई। मंत्री पटेल ने कहा कि एक जिले में एक लैब ही संचालित की जाए। जिन जगहों पर पहले उन्नत लैब हैं, उन्हें अपग्रेड कर संभाग स्तर की लैब बनाएं। इस तरीके से बजट का सदुपयोग होगा और कई अन्य जन-सरोकार से जुड़ी पहल के लिए कार्य किया जा सकेगा। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती सिंह ने विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मनरेगा के तहत हर हाथ को काम देने के संकल्प को मूर्त रूप देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल ने मनरेगा की भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मनरेगा के तहत 15 करोड़ मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य है, इसके लिए अधिकारी कार्य योजना बनाएं। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान 5 करोड़ मानव दिवस सृजित कर जरूरतमंदों को काम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि अब तक करीब 42 लाख रोजगार दिवस सृजित किए जा चुके हैं। मंत्री पटेल ने ग्राम रोजगार सहायक की सेवा शर्तों, कार्यरत अमले को अतिरिक्त प्रभार दिये जाने, संविदा अधिकारी/कर्मचारियों की नवीन सेवा शर्तों, स्टेट क्वालिटी मॉनीटर्स का इमपैनलमेंट और विधि परामर्शदाता की सेवाएं लेने के संबंध में समीक्षा की। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल और राज्यमंत्री श्रीमती सिंह ने “परिवर्तन के पथप्रदर्शक’’ पुस्तक का विमोचन किया। यह वर्ष 2021 से 2024 तक ग्रामीण उत्थान में मनरेगा की सफलताओं पर आधारित है। इस दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल की अध्यक्षता में राज्य आजीविका फोरम सोसायटी की शासी निकाय की बैठक भी हुई।  

पशुपालन राज्य मंत्री पटेल ने कहा जीवन में सफलता के अनेक अवसर मिलेंगे

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा है कि शिक्षा पूर्ण होने और प्लेसमेंट हो जाने के बाद सभी विद्यार्थी एक नए जीवन की ओर आगे बढ़ेंगे। वे अपनी जिम्मेदारी पूर्ण समर्पण के साथ निभाएं और आगे बढ़ें। उन्हें जीवन में सफलता के अनेक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कठिनाई के समय में निराश न हों, बल्कि अपने अंदर की कमी को निखारे और आगे बढ़े। जीवन में कुछ हट के करना होगा, जिससे दुनिया आपको याद रखे। आईईएस यूनिवर्सिटी एवं आईईएस कॉलेज ऑफ टेक्नालजी के वर्ष-2025 बैच के प्लेसमेंट में चयनित इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, मैनेजमेंट, फार्मेसी, बीबीए, बीसीए एवं अन्य कोर्स के छात्रों के लिए प्लेसमेंट-डे का आयोजन आईईएस कैम्पस में मंगलवार को किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य मंत्री लखन पटेल ने किया। उन्होंने सभी चयनित विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। आईईएस यूनिवर्सिटी चान्सलर बी.एस. यादव, प्रो. (डॉ.) सुनीता सिंह उपस्थित थे। विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। यूनिवर्सिटी के सीईओ देवांश सिंह ने आभार व्यक्त किया। हर साल की तरह इस बार भी आईईएस यूनिवर्सिटी के वर्ष-2025 बैच के विद्यार्थियों का अच्छा प्लेसमेंट हुआ। जून 2025 में पास-आउट विद्यार्थियों का चयन देश की टॉप कंपनी जैसे विप्रो, कॉग्निजेंट, डेलोइट, पियाजिओ, जायकी, माइन्ड ट्री जैसी कई कंपनी में हुआ है।  

मध्यप्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों के साथ ही चिकित्सा शिक्षा को भी हिंदी भाषा में सुलभ करने का प्रयास किया

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है कि उच्च शिक्षा भारतीय भाषा में भी प्रदान की जाये, जिससे देश के हर कोने से आने वाले विद्यार्थियों को बराबरी का अवसर मिल सके। इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने अन्य उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों के साथ ही चिकित्सा शिक्षा को भी हिंदी भाषा में सुलभ करने का प्रयास किया है। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने मेडिकल, डेंटल, पैरामेडिकल आदि सभी संकायों की परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में अनुवाद कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इससे विषयवस्तु में निपुण लेकिन अंग्रेजी भाषा में कमजोर विद्यार्थी पिछड़ जाते थे। अब ऐसे विद्यार्थी आत्म-विश्वास के साथ परीक्षा में भाग ले पा रहे हैं। विद्यार्थियों को हिंदी भाषा में उत्तर लिखने के लिये प्रेरित किया जा रहा है। इससे वे अपनी बात सरलता व स्पष्टता से लिख पा रहे हैं। यही नहीं, प्रायोगिक परीक्षाओं में भी छात्रों को हिंदी में उत्तर देने की अनुमति दी गई है। इससे व्यावहारिक ज्ञान का मूल्यांकन भाषाई सुविधा के अनुरूप हो सकेगा। सिर्फ परीक्षा ही नहीं, बल्कि अध्ययन-सामग्री के स्तर पर भी यह परिवर्तन लाया गया है। राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों की लाइब्रेरी में हिंदी भाषा में चिकित्सा की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। इससे हिंदी भाषी विद्यार्थियों को विषय के गहन अध्ययन में कोई बाधा नहीं आएगी। मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है, जिसने चिकित्सा शिक्षा को हिंदी भाषा में प्रदान करने का कार्य किया है। यह निर्णय विशेषकर उन विद्यार्थियों के लिए एक वरदान सिद्ध हो रहा है, जो प्रतिभाशाली होते हुए भी अंग्रेजी में दक्ष न होने के कारण पीछे रह जाते थे। अब उन्हें मातृभाषा में न केवल अध्ययन करने, बल्कि आत्म-विश्वास से परीक्षा में भाग लेने का अवसर मिल रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का आधार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा जल संवर्धन अभियान की सफलता के लिए प्रदेश के नागरिकों से एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि जल ही पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का आधार है। इस की एक-एक बूंद सहेजने की आवश्यकता है। प्रदेश में 30 मार्च से शुरू हुआ जल गंगा जल संवर्धन अभियान का सिलसिला जन-सहभागिता से अब जन अभियान बन चुका है। श्योपुर में कलश यात्रा और भूमि पूजन तालाब के जीर्णोद्धार के लिए श्रमदान जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत श्योपुर की ग्राम पंचायत सोईकलां के ग्राम चिमलका में कलश यात्रा निकाल कर तालाब जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन के साथ श्रमदान किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने बताया कि जिले में जल गंगा3 संवर्धन अभियान के अंतर्गत 124 खेत तालाब तथा 12 अमृत सरोवर बनाए गए हैं। पूर्व से संचालित 1860 कार्यो में से 960 को तीन माह में पूर्ण किया जाएगा। सीईओ जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि श्योपुर विकासखण्ड में अभियान के तहत 46 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, 24 खेत तालाब, 8 परकोलेशन टेंक, 18 तालाब, 3 कुओं का जीर्णोद्धार, 11 रिचार्ज शाफ्ट, 2 लीज पिट, 38 सोकपिट सहित कुल 150 कार्य लिये गये है। राजगढ़ में जल की एक-एक बूंद सहेजने प्रशासन और नागरिक चला रहे श्रमदान महा-अभियान जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राजगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में एक-एक जल संरचना का जीर्णोद्धार कर उनमें बरसात के एवं सतही पानी को सहेजने की मुहिम जारी है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा निर्देश पर जिले के 25 गांवों में स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के लिए श्रमदान अभियान चलाया गया। इस महाअभियान में महराजपुरा, बटेरिया, दोगडा, पडलिया, चिबडकलां, चाठा, रावतपुरा, डोबी, डालूपुरा, धामनिया, नारायण घटा, मंगलपुरा, भीलाखेडी, महुआबे, माधवपुरा, सुवाडेही, सादलपुर,  लक्ष्मणपुरा, काचरी, कडकपुरा, बावडीखेडा, तुमडियाखेडी, सलेपुर, बरखेडा खुर्रम और पिपलिया पाल में स्थित तालाब, परकोलेशन टेंक, कुएं एवं बावडियों की श्रमदान से साफ-सफाई एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया गया। अलीराजपुर में जल गंगा गंगा संवर्धन जन-सहभागिता से जल संरक्षण का अभियान कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह के निर्देशन में जल गंगा संवर्धन के अंतर्गत जोबट तहसील के ग्राम बड़ा गुड़ा स्थित प्राचीन बावड़ी के जीर्णोद्धार का शुभारंभ हुआ। कलेक्टर डॉ. बेडेकर ने जोबट के ग्राम किला जोबट स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की प्राचीन बावड़ी का भी निरीक्षण कर इसके भी जीर्णोद्धार के शुभारंभ का निर्देश दिया। कटनी में सीएमसीएलडीपी विद्यार्थियों ने की सिमरार नदी घाट की सफाई कटनी में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद के सहयोग में जुटे विद्यार्थियों ने छपरवाह स्थित सिमरार नदी के घाट की सफाई कर नदी मे वर्षा जल के अविरल प्रवाह को सुनिश्चित किया। अभियान में जन भागीदारी के साथ प्राकृतिक एवं अन्य जल स्रोतों की सफाई का काम 30 मार्च से निरंतर जारी है। नदी और दूसरे जल स्त्रोतों की सफाई में महेश राजपूत, सत्येंद्र प्यासी, सतीश त्रिपाठी, अनामिका पांडेय, रोशनी कुशवाहा, पूजा सेन, प्रेमलता सोंधिया, द्रोपदी पटेल, अर्चना गड़ारी और छन्नूलाल राय शामिल हुए। जल गंगा संवर्धन अभियान के क्रियान्वयन में सीधी प्रदेश में चौथे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार सीधी जिले में जल गंगा जल संवर्धन अभियान के अंतर्गत चिन्हित कार्यों को पूरा करने, पूर्व से प्रचलित कार्यों को पूर्ण कराने और नागरिकों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिये प्रयास निरंतर जारी हैं। मुख्यमंत्री अभियान की नियमित समीक्षा भी कर रहे हैं। अभियान के क्रियान्वयन में अब तक सीधी राजगढ़, सिवनी तथा निवाड़ी जिलों के बाद सीधा चौथे स्थान पर चल रहा है। है। मऊगंज में तालाबों का जीर्णोद्धार जल गंगा जल संवर्धन अभियान के अंतर्गत मऊगंज की ग्राम पंचायत झलवार के पुटपरिहा तालाब में जीर्णोद्धार का कार्य कराया जा रहा है। ग्राम पंचायत गौरी तथा ग्राम पंचायत रजिगवां में खेत तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। अभियान के तहत सिरमौर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत बमरहा में परकोलेशन टैंक का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम पंचायत तड़ौरा में स्टॉपडैम का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम पंचायत रामनई के महादेव तालाब की साफ-सफाई और गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है।  

जल संवर्धन के लिए पूरे प्रदेश में गत 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है जो कि 30 जून तक चलेगा

भोपाल जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के लिए पूरे प्रदेश में गत 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है जो कि 30 जून तक चलेगा। इसके अंतर्गत प्रमुख रूप से तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो कार्य, पाल (बंड) की मरम्मत, नहरों की सफाई आदि कार्य जनभागीदारी एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से कराए जा रहे हैं। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के 55 जिलों के 10 रिवर बेसिन (कछारों) में जल संवर्धन एवं संरक्षण के 2444 कार्य प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से अब तक 1056 कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 43 प्रतिशत है। शेष कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण कर लिए जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को मंगलवार को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति के संबंध में विभागीय प्रतिवेदन मंत्रालय में सौंपा। मंत्री सिलावट ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में युद्धस्तर पर जल संरक्षण/ संवर्धन के कार्य चलाए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम द्वारा प्रदेश भर में कराए जा रहे कार्यों की निरंतर मॉनीटरिंग कर नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही है। मंत्री सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है कि देश के प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके तथा पर्यावरण का संरक्षण हो। उनके इस संकल्प को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में जल संरक्षण को मूर्त रूप दिया जा रहा है। अभियान में सभी नागरिकों से जल संरक्षण को अपना कर्तव्य समझकर जुड़ने का आहवान किया गया है। मुख्यमंत्री की यह पहल न केवल पर्यावण संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जल संसाधनों को एवं जल संरचनाओं को सुरक्षित एवं संधारित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की घोर निंदा की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की घोर निंदा की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमले में हुए सभी दिवंगत नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस घृणित कृत्य में अपने प्रिय जन खोने वाले शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला कायराना और अमानवीय कृत्य है। इसमें कई निर्दोष लोगों की जान चली गई है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारा देश एकजुट है, आतंकवादियों की जम्मू-कश्मीर को अशांत करने की कोई भी साजिश कभी कामयाब नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से हमले में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।  

प्रदेश के सात जिला सहकारी बैंकों के सुदृढ़ीकरण हेतु समीक्षा बैठक आयोजित

भोपाल   अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने आज प्रदेश के 7 जिला सहकारी बैंकों क्रमश: गुना, सागर, रायसेन,  भिण्ड, मुरैना, सीधी एवं नर्मदापुरम के सुदृढ़ीकरण हेतु आयोजित बैठक में तैयार एक्शन प्लान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि विभिन्न मानदण्डों के अनुरूप निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति हेतु  आवश्यक कार्यवाही निष्पादित करें। बैठक में अपेक्स बैंक की वि.क.अ.श्रीमती कृति सक्सेना, बैंक के चार्टर्ड एकाउंटेंट श्री अमूल्य रांहणेकर,  प्रबंधक श्री करुण यादव,   वि.क.अ. श्री जी.के.अग्रवाल,  संभागीय प्रबंधक श्री ए.के.एस.चंदेल के साथ संबंधित 7 बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उपस्थित हुए।

एम्स भोपाल ने कैंसर की AI आधारित स्क्रीनिंग में दक्षता हासिल की, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगा कैंसर का इलाज

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एम्स और राजस्थान में स्थित जोधपुर एम्स मिलकर कैंसर की पहचान और रोकथाम के लिए काम करने वाले हैं। एम्स भोपाल ने कैंसर की एआई आधारित स्क्रीनिंग में दक्षता हासिल की है। इसका इस्तेमाल जोधपुर एम्स में भी किया जाएगा। इससे कैंसर का निदान और अधिक सटीक और व्यापक रूप से सुलभ हो जाएगा।  यह तकनीक बिना लक्षण वाले मरीजों में भी प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगाने में सक्षम है। एम्स निदेशक प्रो. अजय सिंह का कहना है कि, कैंसर की स्क्रीनिंग को तेज और अधिक सुलभ बनाकर, दूर दराज और पिछड़े क्षेत्रों में कई जानें बचा सकते हैं। विकसित करेंगे शीर्ष केंद्र दोनों एम्स मिलकर कैंसर देखभाल के लिए शीर्ष केंद्र विकसित करना चाहते हैं। यह केंद्र टियर 2 जैसे शहरों में कैंसर के इलाज में मददगार साबित होंगे। स्नोफ्लेक मॉडल दिया है नाम एम्स ने कैंसर के उपचार का जो मॉडल विकसित किया है। उसे स्नोफ्लेक मॉडल नाम दिया है। इसे आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी), राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (एनसीजी) और हब-एंड-स्पोक मॉडल के साथ जोड़ा जाएगा।

सतना से उड़ा गिद्ध, राजस्थान होते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान पहुंचा, अब किर्गिस्तान बता रहा लोकेशन

सतना  मध्य प्रदेश से एक अच्छी खबर आई है। एक घायल गिद्ध को इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया था। अब वह गिद्ध किर्गिस्तान पहुंच गया है। यह गिद्ध पहले सतना में घायल मिला था, जिसके बाद वन विभाग ने उसका इलाज कराया फिर उसे भोपाल के वन विहार में रखा गया। वहां से उसे छोड़ा गया था। छोड़ने से पहले लगाया गया था ट्रैकर गिद्ध के शरीर पर जीपीएस ट्रैकर लगाया गया था। इससे पता चला कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान होते हुए किर्गिस्तान पहुंच गया है। मध्य प्रदेश सरकार गिद्धों को बचाने के लिए कई काम कर रही है, जिससे इनकी संख्या भी बढ़ रही है। जनवरी में मिला था घायल जनवरी महीने में सतना जिले के एक खेत में घायल गिद्ध की सूचना वन विभाग को मिली थी। वन विभाग ने इलाज देने के बाद गिद्ध को बचा लिया। फिर उसे भोपाल के वन विहार के वल्चर कंजर्वेशन सेंटर में भेजा गया। यहां दो महीने तक उसका इलाज और प्रशिक्षण हुआ। 29 मार्च को उसे हलाली डैम क्षेत्र में खुले आकाश में उड़ने के लिए छोड़ दिया गया। गिद्ध ने बना दिया उड़ने का रिकॉर्ड इस गिद्ध ने उड़ते ही एक नया रिकॉर्ड बना दिया। यह विदिशा की पहाड़ियों से राजस्थान होते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ तक पहुंच गया। जीपीएस ट्रैकर से पता चला कि फिलहाल यह गिद्ध किर्गिस्तान में सुरक्षित है। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवण मिश्रा ने बताया कि गिद्ध थोड़ा परेशान था और रास्ता भटक गया था। इलाज के बाद जीपीएस टैगिंग की गई थी। अब उसकी लोकेशन किर्गिस्तान में ट्रैक हो रही है। वल्चर स्टेट बन रहा मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश को अब ‘वल्चर स्टेट’ भी कहा जाने लगा है। यहां पन्ना टाइगर रिजर्व से लेकर गांधी सागर तक गिद्धों के लिए अच्छा वातावरण बनाया गया है। केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र बनाया गया है। यहां से अब तक सैकड़ों गिद्धों को खुले वातावरण में छोड़ा जा चुका है। हाल ही में भोपाल के हलाली जंगल क्षेत्र से छह गिद्धों को छोड़ा गया था। इन पर सौर ऊर्जा से चलने वाले जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं। इन गिद्धों का जन्म केरवा के गिद्ध संवर्धन और प्रजनन केंद्र में हुआ था। एमपी में अब कितने गिद्ध हैं 2019 में राज्य में 8397 गिद्ध थे। 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 10,845 हो गई है। पन्ना क्षेत्र में सबसे ज्यादा गिद्ध हैं। यहां 900 से ज्यादा गिद्ध पाए गए हैं। राज्य में गिद्धों की सात प्रजातियां देखी गई हैं। इनमें चार स्थानीय और तीन प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। 16 सर्कल के 64 डिवीजन में जो गिनती हुई, उसके मुताबिक आज की तारीख में प्रदेश में 12,981 गिद्ध हैं। गिद्ध बचाने के लिए सावधानी जरूरी गिद्धों को बचाने के लिए सावधानी बरतना भी जरूरी है। जानवरों में इस्तेमाल होने वाली ‘डायक्लोफेनाक’ दवा गिद्धों के लिए खतरनाक है। इस दवा पर रोक लगा दी गई है लेकिन जहरीले भोजन का खतरा अभी भी बना हुआ है। पर्यावरणविद रशीद नूर ने चेतावनी दी है कि ‘गौशालाओं और खुले मैदानों में जहरीले इंजेक्शन लगे मृत जानवर अब भी मौजूद हैं। इनके सेवन से गिद्धों की मौत हो सकती है. इसलिए लगातार निगरानी रखना बहुत जरूरी है।’ धरती के सफाई कर्मी कहलाते हैं गिद्ध गिद्धों को धरती का सफाई कर्मी कहा जाता है। इनका संरक्षण करना बहुत जरूरी है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है। जब गिद्ध उड़ते हैं, तो उनके साथ जीवन का चक्र भी चलता रहता है। सतना से उठी एक छोटी सी उम्मीद आज किर्गिस्तान तक पहुंच गई है। पन्ना के जंगलों में, सतना के खेतों में, हलाली के आसमान में, हर जगह गिद्ध दिखाई दे रहे हैं।

सिंहस्थ में रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी, पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे

उज्जैन  एमपी में सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन की तैयारियां चल रही हैं। इंदौर शहर में अलग-अलग जगह होल्डिंग जोन बनाने का प्रस्ताव है, ताकि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर बाहरी लोगों को यहां रोका जाए। जमीन हासिल करने के बाद सभी विभाग यहां हर तरह की सुविधा का इंतजाम करेंगे। पुलिस ने बल व अन्य संसाधनों के साथ हाई-वे चौकियां, सहायता केंद्र व इंट्रीग्रेटेड कमांड सेंटर स्थापित करने की अनुमति मांगी है। एक-दो दिन तक रोकने की रहेगी व्यवस्था होल्डिंग जोन बनाने के लिए कुछ जगह चिन्हित की है। यहां 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोकने के लिए विश्राम स्थल, कुर्सियां, सुविधागृह, पंखे, कूलर, पेयजल आदि की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन में भीड़ अधिक होने पर बाहरी लोगों को यहां ठहराया जाएगा। एक-दो दिन तक रोकने की व्यवस्था रहेगी। एडिशनल कमिश्नर मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, लवकुश चौराहे पर लेफ्ट साइड की खाली जमीन, रिंग रोड पर रोबोट चौराहे के पास आइडीए की जमीन, मांगलिया व तेजाजी नगर में भी होल्डिंग एरिया के लिए जमीन मांगी है। उज्जैन में हुई बैठकों में कई प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं। इतने इंतजाम की दरकार -सुपर कॉरिडोर, लवकुश चौराहे के पास करीब 7 एकड़ जमीन इंट्रीगेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए रहेगी, ताकि वहां से नजर रखी जा सके। पुलिस, प्रशासन व निगम के अफसर यहां से सभी गतिविधियां संचालित करेंगे। -पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे। -महालक्ष्मी नगर, सुपर कॉरिडोर व धार रोड को थाने के रूप में मंजूर करने की मांग है। -7 हाई-वे चौकियां चाहिए। देवगुराड़िया, नेमावर रोड, खंडवा रोड पर तेजाजी नगर, एबी रोड पर राऊ के पास व अन्य जगह लगेगी। -रिंग रोड, बायपास पर ट्रैफिक सहायता केंद्र स्थापना की अनुमति मांगी है। -करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त बल दो महीने पहले चाहिए। साथ ही 20 जीप, 20 बसें व ट्रक फोर्स व सामान के परिवहन के लिए चाहिए। -रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी। शिप्रा के जल से उगाए 50 हजार बांस उज्जैन में सिंहस्थ 2028 में इस बार बहुत कुछ अलग देखने को मिलेगा. इस बार धर्मध्वजाओं को लहराने के लिए पूरे उज्जैन में 50 हजार से ज्यादा बांस उगाए गए हैं, शिप्रा नदी के किनारे 10.72 हेक्टेयर में पूरा जंगल उगाया गया है, यहां शिप्रा नदी के पानी से बांस उगाए हैं, जहां 30 फीट ऊंचे बांस लगाए गए हैं, यह बांस उज्जैन वन मंडल की तरफ से निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन बांसों से सिंहस्थ में आने वाले सभी अखाड़े और साधु संतों को धर्मध्वजा लहराने के लिए दिया जाएगा. इन बांसों की बारीकी से वन विभाग की तरफ से देखरेख भी की जा रही है. उज्जैन में 7 साल पहले लगे थे यह बांस बताया जा रहा है कि उज्जैन में शिप्रा नदीं के किनारे यह बांस 7 साल पहले ही लगा दिए गए थे. जिन्हें 30 फीट की ऊंचाई तक जाने देना है, हालांकि अभी इनकी ऊंचाई 20 से 25 फीट ही हुई है. अभी अगले दो साल और यह बांस लगे रहेंगे, जिससे इनकी लंबाई 30 फीट से ज्यादा हो जाएगी. वन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक सिंहस्थ महाकुंभ शुरू होने से तीन महीने पहले ही इन बांसों की कटाई शुरू हो जाएगी और उन्हें व्यवस्थित कर वन विभाग की देखरेख में रखा जाएगा, जबकि बाद में कलेक्टर और मेला अधिकारी को यह बांस सौंप दिए जाएंगे, जहां सिंहस्थ मेला में 13 अखाड़ों समेत जितने भी साधु-संत आएंगे उन्हें यह बांस धर्म ध्वजा लहराने और अपने-अपने शिविरों में झंडा लगाने के लिए दिए जाएंगे. वन विभाग ने भैरवगढ़ मार्ग पर शिप्रा नदी के पास फिलहाल इन बांसों की पूरी देखरेख की जा रही है. बांस का धार्मिक महत्व बता दें कि बांस का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है, हिंदू धर्म में बांस पर ही ध्वजा लगाई जाती है. ऐसे में सिंहस्थ के दौरान धर्मध्वजाएं इन्हीं बांसों पर लगेगी, क्योंकि यह आस्था का भाव माना जाता है. 10.72 हेक्टेयर में बांस का यह पूरा जंगल फैला है, बताया जा रहा है कि यह बांस बेंबोसा बाल्कोअ प्रजाति, जिसका बीज 2018 में रीवा की फ्लोरीकल्चर लेब से लाया गया था, जहां उज्जैन में कुल 5600 बांस के पौधों का प्लाटेंशन किया गया था, बताया जा रहा है कि यहां वन मंडल की तरफ से धार्मिक महत्व का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है और बांस के सभी झुंडों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. क्योंकि एक बांस के पेड़ से 20 से 25 बांस निकलते हैं, लेकिन यह सब बिना कटे फटे होने चाहिए, इसलिए यहां पूरी देखरेख की जा रही है. क्योंकि 50 हजार से ज्यादा बांसों में केवल शिप्रा नदीं का ही जल सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया गया है. 

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