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500 करोड़ की लागत से भोपाल में बनेगा नया कलेक्ट्रेट भवन, 90 घरों को नोटिस दिए

भोपाल  भोपाल शहर की प्रोफेसर कॉलोनी में नए कलेक्ट्रेट भवन के लिए 90 घरों को नोटिस दिए गए। बीते दिन इस पर कलेक्टर ने पूछताछ की, जिसमें बताया गया कि जिन्हें नोटिस दिए वे खाली है। सरकारी मकान है जो बेहद जर्जर है। यहां कोई नहीं रहता, लेकिन ये आवंटित है। इन पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।  गौरतलब है कि जारी किए नोटिस पर सांसद आलोक शर्मा ने आपत्ति ली थी। टेंडर जारी होने से पहले ही मकान खाली कराने के नोटिस जारी होने पर रहवासियों में तो नाराजगी है ही, सांसद आलोक शर्मा ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से इन मकानों में रहने वालों को नोटिस जारी करने पर तीखी नाराजगी जताई है। मामले में प्रोफेसर कॉलोनी रहवासी संघ भी सक्रिय हुआ। संघ के त्रिभुवन मिश्रा ने बताया वे मामले में मंगलवार को हाउसिंग बोर्ड पहुंचकर उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देंगे। सांसद शर्मा ने मामले में संभवत: बुधवार या गुरुवार को संबंधित प्रशासनिक अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों की बैठक तय करने की बात कही। यहां कुल 149 घर है। इसके अलावा अन्य भवन है। शिफ्ट होने है कई ऑफिस रीडें​सीफिकेशन प्रोजेक्ट लगभग 500 करोड़ रुपए का है। इससे यहां संभागायुक्त, आईजी देहात, कलेक्टर, चार एडीएम कार्यालय, नाजिर शाखा, खनिज शाखा, आबकारी विभाग, खाद्य विभाग, निर्वाचन के लिए अलग से कार्यालय, खाद्य विभाग व इनसे संबंधित कार्यालय, बाबुओं के बैठने की व्यवस्था, कांफ्रेंस हाल, रिकॉर्ड रूम, लोकसेवा गारंटी केंद्र, एसएलआर, अधिवक्ता कक्ष, महिला बाल विकास, आदिम जाति कल्याण विभाग, सामाजिक न्याय विभाग सहित अन्य दफ्तर शिफ्ट होने हैं। इसके साथ ही मौजूदा ओल्ड सेक्रेटरिएट की खाली होने वाली जमीन पर हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट लाने की योजना है। शिफ्टिंग के साथ वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भी आदेश जारी हो गया है। सीबीआई व्यापम स्कैम b1, सीबीआई व्यापम स्कैम b8, 10 समेत साइन मंदिर और गीतांजलि होस्टल भी खाली होगा। सर्किट हाउस समेत क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं मेरेलिया नियंत्रक ऑफिस चंबल बेतवा विषय मुख्य अभियंता कार्यालय भी खाली होगा। 500 करोड़ की लागत से भोपाल का नया कलेक्ट्रेट कार्यालय भवन बनेगा। प्रोजेक्ट भी तालाब से 60 से 150 मीटर दूर बनाय जा रहा है। हाउसिंग बोर्ड के अधिवक्ता शांतनु सक्सेना ने बताया कि एनजीटी के जज एसके सिंह और एक्सपर्ट मैंबर अफरोज अहमद ने हाउसिंग बोर्ड के तर्कों को स्वीकार करते हुए सिटीजंस फोरम की याचिका को निरस्त कर दिया है। एनजीटी ने इसका ऑर्डर अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है। सोलर एनर्जी से लेकर प्राकृतिक प्रकाश की व्यवस्था कलेक्टोरेट की इमारत को पूरी तरह से जनता से जुड़ा हुआ बनाया जाएगा। उनके लिए यहां अलग से कक्ष भी बनाया जाएंगे। जनसुनवाई कक्ष अत्याधुनिक होगा, वहीं अलग-अलग इमारतों में अधिकारियों की बैठक के लिए भव्य कक्ष बनाए जाएंगे। भविष्य को देखकर इस बिल्डिंग में सोलर एनर्जी से लेकर प्राकृतिक प्रकाश तक की व्यवस्था की गई है। प्रोेफेसर कालोनी के साथ सर्किट हाउस व मंत्री बंगलों को तोड़कर नई कलेक्टोरेट व कुछ अन्य दफ्तरों को यहां शिफ्ट किया जाना है। ये काम रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत हो सकेगा। इसको लेकर पीएस रेवेन्यू के यहां तक बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। बदल जाएगी पुराने शहर की तस्वीर चार बंगला ऑफिस और मकान टूटकर कलेक्ट्रेट और अन्य ऑफिस ब्लॉक बनेंगे। पॉलिटेक्निक चौराहा .. .यहां अर्बन फॉरेस्ट और पोडियम पार्किंग बनाई जाएगी। किलोल पार्क मलेरिया ऑफिस को तोड़कर पार्क का विस्तार होगा और नई सड़कें बनेंगी। पुराने शहर में पहला बड़ा प्रोजेक्ट… यह प्रोजेक्ट सिर्फ नए कलेक्ट्रेट के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें प्रोफेसर कॉलोनी, कलेक्ट्रेट, चूना भट्टी और मेन रोड नंबर 2 के 58.94 एकड़ जमीन का रिडेंसिफिकेशन होगा। 42.63 एकड़ में सरकारी दफ्तर और अन्य सुविधाएं बनेंगी, जबकि 16.31 एकड़ पर प्राइवेट रेसीडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट होगा। शहर के बड़े डेवलपमेंट की रूपरेखा ऐसी होगी     बी टाइप अपार्टमेंट : 20 टॉवर (जी+11)     हॉस्टल ब्लॉक : जी+3 और जी+4 के ब्लॉक     रवींद्र भवन के सामने शॉपिंग : 3000 वर्ग मीटर     अरबन फॉरेस्ट : 7.3 एकड़     स्टेट गेस्ट हाउस : 68 कमरे और 5 सुइट्स बनेंगे। चूना भट्‌टी पर जी एफ सरकारी फ्लैट बनेंगे चूना भट्टी : जी+6 के 5 ब्लॉक। इसमें 3 जी टाइप (72 फ्लैट), 2 एफ टाइप (48 फ्लैट) यानी कुल-120 फ्लैट बनेंगे। कुल जमीन 15,000 वर्ग मीटर। ओल्ड सेक्रेटरिएट : यहां 2.24 हेक्टेयर पर ई टाइप जी+6 के 3 ब्लॉक, 72 फ्लैट व एफ। कलेक्ट्रेट के लिए 9 बार तलाशी जगह… 1972 से अब तक कलेक्ट्रेट के लिए 9 बार अलग-अलग जगहों पर विचार हुआ, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन आ गई। अब जाकर 2024 में इस नई साइट को मंजूरी मिली है।

डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश, सहकारिता से सरल हुई सशक्तिकरण की राह

भोपाल विशेष लेख संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है “सहकारिता एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती है”। स्व से सब का भाव हो जाना ही सहकार है। भारतीय संस्कृति स्वयं से ऊपर उठकर हम की भावना रखना सिखाती है और इसी भावना से जन्म हुआ है सहकार का। सनातन संस्कृति में जब हम प्रार्थना करते हैं तो सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करते हैं। सबके सुख और मंगल की यही कामना सहकारिता का मूल भाव हैI हम लाभ से ज्यादा सेवा को महत्त्व देते हैं। एक से ज्यादा समूह को महत्त्व देते हैं। प्रतिस्पर्धा से ज्यादा परस्पर सहयोग को महत्व देते हैं और यही सहकारिता है। भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्य धारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा। सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा, कानूनी सुधार और रणनीतिक पहल शुरू की। सरकार ने सहकारी समितियों के लिए ‘व्यापार करने में आसानी’, डिजिटलीकरण के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वंचित ग्रामीण समुदायों के लिए समावेशिता को बढ़ावा देने की अपनी पहल पर काफी जोर दिया है। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत का सहकारिता आंदोलन एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। अपनी दूरदर्शी सोच को आधार बनाकर उन्होंने सहकारिता के लिए नई विचारधारा को जन्म दिया है। उनके नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय सहकारी आंदोलन में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का विस्तार, पैक्स के लिए बेहतर प्रशासन और व्यापक समावेशिता, पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने एवं पैक्स को नाबार्ड से जोड़ने का काम किया है । नई श्वेत क्रांति की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश प्रदेश में सहकार से समृद्धि की पहल के तहत केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और स्टेट डेयरी को-ऑपरेटिव फेडरेशन तथा फेडरेशन से संबद्ध दुग्ध संघों के बीच कोलेबोरेशन एग्रीमेंट हुआ। इस कोलेबोरेशन एग्रीमेंट के माध्यम से सहकारी डेयरी नेटवर्क को सशक्त बनाने का लक्ष्य है, जिससे दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि हो सके और सांची ब्रांड का उत्थान और विस्तार किया जा सके। यह नई श्वेत क्रांति की ओर प्रदेश का महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इसका लाभ दुग्ध उत्पादकों और दुग्ध उपभोक्ताओं दोनों को मिलेगा। दुग्ध उत्पादक राज्यों में मध्यप्रदेश टॉप-थ्री में है, हमारे यहां देश का करीब 9 प्रतिशत दुग्ध-उत्पादन होता है। प्रदेश में रोजाना करीब 551 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है, जिसमें से मध्यप्रदेश स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन और इससे जुड़े संघ करीब 10 लाख किलोग्राम दूध जमा करते हैं।  डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश देश का फ़ूड बास्केट तो है ही, हममें डेयरी कैपिटल बनने की क्षमता भी है। देश का डेयरी कैपिटल बनने के लिए हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं। प्रदेश में सहकारी डेयरी नेटवर्क को हाइटेक बनाने के लिए एक डेयरी डेवलपमेंट प्लान तैयार करने की योजना है, जिसमें लगभग 1450 करोड़ रुपए का निवेश होगा। प्रदेश में औसत दुग्ध संकलन को दोगुना किया जाएगा, दुग्ध संकलन को 10 लाख किलो से बढ़ाकर 20 लाख किलो प्रतिदिन करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार की जाएगी। प्रदेश भर के 18 हजार गांवों के दुग्ध-उत्पादन से जुड़े किसान भाइयों को सहकारी डेयरी नेटवर्क से जोड़ेंगे। ग्राम स्तर पर दुग्ध शीतलीकरण की क्षमता विकसित करेंगे, औसत पैकेट दुग्ध विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 15 लाख लीटर प्रतिदिन करेंगे। मिल्क प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए नए हाइटेक संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे दुग्ध संकलन और दुग्ध विक्रय में वृद्धि हो सके। सभी दुग्ध संघों का व्यवसाय 1944 करोड़ से बढ़ाकर 3500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जाएगा। एनडीडीबी द्वारा एमपीसीडीएफ एवं दुग्ध‍संघों के प्रबंधन, संचालन, तकनीकी सहयोग, नवीन प्रसंस्कररण एवं अन्य अधोसंरचनाएं विकसित करेंगे। एनडीडीबी द्वारा दुग्ध सहकारी समितियों के सभी सदस्यों, सचिवों, प्रबंधन समिति के सदस्यों और दुग्ध संघों के कर्मचारियों को स्वच्छ और गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहकारिता से सरल हुई सशक्तिकरण की राह प्रदेश में डेयरी गतिविधियों के लिए त्रि-स्तरीय सहकारी संस्थाओं का गठन कर, ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियां, सहकारी दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर एमपीसीडीएफ (मध्यप्रदेश स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड) की स्थापना की गई। ये दुग्ध सहकारी समितियां किसानों से दूध संग्रह, गोवंश के कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, तकनीकी पशु प्रबंधन, उन्नत चारा बीज, पशु उपचार और टीकाकरण जैसी सुविधाएं देने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। दुग्ध उत्पादक किसानों के साथ मध्यप्रदेश सरकार डेयरी क्षेत्र विकसित करने के संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रदेश में श्वेतक्रांति मिशन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य है। प्रदेश में निराश्रित गौवंश की समस्या के निराकरण के लिए स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति : 2025 की स्वीकृति दी है। गौ-शालाओं को पशु चारे और आहार के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को भी 20 रुपये प्रति गौवंश प्रति दिवस से बढ़ाकर 40 रूपये प्रति गौवंश प्रति दिवस करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना अब डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के नाम से जानी जाएगी। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना अंतर्गत 25 दुधारू गाय अथवा भैंस की इकाई स्थापित करने का प्रावधान किया गया। प्रदेश की गौ शालाओं को हाइटेक बनाया जा रहा है। ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना की गई है। भोपाल के बरखेड़ी-डोब में 10 हजार गौ-वंश क्षमता वाली हाइटेक गौ-शाला बनाई जा रही है। प्रदेश के सवा 2 लाख किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों को सहकारिता के माध्यम से जोड़ा गया है। सरकार द्वारा दुग्ध सहकारी … Read more

केबल स्टे ब्रिज के साथ ही भोपाल को विकास की रफ्तार देगा ये नया प्रोजेक्ट, मनीषा मार्केट से चूनाभट्टी चौराहा, इतना आ रहा खर्च

भोपाल भोपाल के मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से काली मंदिर तक एक और केबल स्टेब्रिज बनेगा। 15 मीटर चौड़े इस ब्रिज को बनाने में 60 करोड़ की लागत आएगी। यह ब्रिज मनीषा मार्केट से चूना भट्टी को जोड़ेगा। हालांकि, इसके लिए पीडब्ल्यूडी को केंद्रीय वेटलैंड अथॉरिटी से एनओसी लेनी होगी। मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा। डीपीआर बनकर तैयार है। अभी बड़ा तालाब पर एक ब्रिज शाहपुरा तालाब पर यह शहर का दूसरा केबल स्टेब्रिज होगा। ये मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से चूनाभट्टी में काली मंदिर पर उतरेगा। इसके बनने से मनीषा से सीधे चूनाभट्टी या कोलार की ओर पहुंचा जा सकेगा। यह करीब 1.20 किमी लंबा होगा। यह शाहपुरा से लेकर मनीषा मार्केट, अरेरा हिल्स का क्षेत्र चूनाभट्टी, कोलार, माता मंदिर, पीएंडटी, नेहरू नगर की ओर से सीधा जुड़ेगा। अभी बड़ा तालाब पर केबल स्टेब्रिज है। छोटा तालाब पर भी आर्च ब्रिज है। अब शाहपुरा पर भी ऐसा ही ब्रिज होगा। केबल स्टे ब्रिज का काम जल्द शुरू करेंगे। कुछ जरूरी अनुमतियां व एनओसी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।- संजय मस्के, सीई, पीडब्ल्यूडी 30 करोड़ की सीसी रोड, 5 करोड़ का पैविंग ब्लॉक लोक निर्माण विभाग देवी अहिल्या तिराहा से सीआइ तिराहा तक 30 करोड़ रुपए की लागत से सात किमी लंबी चार लेन सीसी रोड बना रहा है। अब इसके किनारे पैविंग ब्लॉक लगाने के लिए पांच करोड़ का अलग से ठेका दिया है। जबकि सीसी से ही किनारे पर रोड की पैकिंग होती है। मौजूदा ठेकेदार को पूरी चार लेन रोड, डक्ट के साथ ही रोड किनारे पर पैकिंग का काम दिया गया था। शाहपुरा बाबानगर से सीआइ तिराहा कोलार रोड तक काम 90 फीसदी हो चुका है। किनारे पर करीब दो-दो मीटर की पैकिंग की जगह बची, लेकिन इस कार्य को अन्य ठेकेदार को दिया गया है। 1.20 किलोमीटर होगी ब्रिज की लंबाई शाहपुर तालाब पर बनने वाला यह शहर का दूसरा केबल स्टे ब्रिज होगा. ये मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से चूनाभट्टी में काली मंदिर पर उतरेगा. इस ब्रिज का निर्माण होने से मनीषा से सीधे चूनाभट्टी या कोलार की ओर पहुंचा जा सकेगा.  यह करीब 1.20 किमी लंबा होगा. यह शाहपुरा से लेकर मनीषा मार्केट, अरेरा हिल्स का क्षेत्र चूनाभट्टी, कोलार, माता मंदिर, पीएंडटी, नेहरू नगर की ओर से सीधा जुड़ेगा. वर्तमान में बड़े तालाब पर केबल स्टेब्रिज है. छोटा तालाब पर भी आर्च ब्रिज है. अब शाहपुरा पर भी ऐसा ही ब्रिज होगा. 5 करोड़ का पैविंग ब्लॉक लोक निर्माण विभाग देवी अहिल्या तिराहा से सीआइ तिराहा तक 30 करोड़ रुपए की लागत से सात किमी लंबी चार लेन सीसी रोड बनाया जा रहा है. अब इसके किनारे पैविंग ब्लॉक लगाने के लिए पांच करोड़ का अलग से ठेका दिया है. जबकि सीसी से ही किनारे पर रोड की पैकिंग होती है. मौजूदा ठेकेदार को पूरी चार लेन रोड, डक्ट के साथ ही रोड किनारे पर पैकिंग का काम दिया गया था. शाहपुरा बाबानगर से सीआइ तिराहा कोलार रोड तक काम 90 प्रतिशत हो चुका है. किनारे पर करीब दो-दो मीटर की पैकिंग की जगह बची, लेकिन इस कार्य को अन्य ठेकेदार को दिया गया है. 60 करोड़ का आएगा खर्च लोक निर्माण अधिकारियों ने शहर के विकास के लिए इस प्रोजेक्ट के महत्व पर जोर दिया है। कुछ स्थानीय निवासियों को इससे अपने रूटीन पर पॉजीटिव इफेक्ट पड़ने की उम्मीद है। शाहपुरा झील को चूनाभट्टी से जोड़ने वाले पुल पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने कहा, यह मनीषा मार्केट को जोड़ेगा, सिंचाई विभाग की भूमि के किनारे से होकर, एक निजी अस्पताल के पीछे से गुजरेगा और चूनाभट्टी में चौराहे से जुड़ेगा। भोपाल में दो केबल पुल भोपाल में हाल ही में दो केबल वाले पुलों का निर्माण देखा गया है। एक ऊपरी झील तक फैला है, और दूसरा लोअर लेक पर ट्रैफिक को जोड़ता है। चूनाभट्टी को मनीषा मार्केट से जोड़ने वाली सड़क पर अक्सर ट्रैफिक जाम रहता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अधिकांश अव्यवस्था सड़क किनारे पार्किंग के कारण होती है। ट्रैफिक संबंधी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद इसका उद्देश्य ट्रैफिक में सुधार करना और शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को बढ़ाना है। मॉडर्न पुल डिजाइन को लागू करने से, शहरों को ट्रैफिक संबंधी समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। केबल स्टे ब्रिज कॉन्सेप्ट में ब्रिज डेक का सपोर्ट करने के लिए केबलों का उपयोग करना होता है, जिससे इसका ड्यूरेशन बढ़ जाता है। यह डिज़ाइन शहर में विशेष रूप से प्रभावी है जहां स्थान सीमित है और पारंपरिक पुल मॉडल संभव नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा, केबल स्टे ब्रिज से शहर का सौंदर्य भी बढ़ता है। योजनाकार मान रहे ट्रैफिक सुगम होगा शहर के योजनाकारों का मानना है कि केबल स्टे ब्रिज को ट्रैफिक सिस्टम में जोड़ने से आवागमन सुगम हो सकता है और भीड़भाड़ कम हो सकती है। सपोर्ट पियर्स की संख्या में कमी का मतलब है मौजूदा सड़कों पर कम रुकावट और लंबे समय के लिए कम मेंटिनेंस कॉस्ट। अपर लेक केबल स्टे ब्रिज ट्रैफिक को सुगम बनाने में प्रभावी रहा है। पुल के डिज़ाइन और निर्माण ने ट्रैफिक को सुविधाजनक बनाया है। गिन्नोरी ब्रिज पर हो रहीं समस्याएं दूसरी ओर गिन्नोरी केबल स्टे ब्रिज के ट्रैफिक डिजाइन में गलतियां हैं। इससे समस्याएं पैदा हो रही हैं। पॉलिटेक्निक से आने वाले वाहनों को पुल पर लेन बदलने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पुल एक तरफ़ा मार्ग बन गया है, जो अतिक्रमण से घिरा हुआ है।

इंदौर की महिला पुलिसकर्मी अपने गीतों के जरिए लोगों को ट्रैफिक नियमों से अवगत करा रही, VIDEO वायरल

इंदौर मध्य प्रदेश का इंदौर शहर स्वच्छता के साथ अपने अनूठे प्रयोगों के लिए भी जाना जाता है। इंदौर में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी को रोकने के लिए और यातायात नियमों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक महिला ट्रैफिक पुलिसकर्मी का अनोखा अंदाज सामने आया है। यह लोगों को काफी आकर्षित भी कर रहा है। महिला पुलिसकर्मी अपने गीतों के जरिए लोगों को ट्रैफिक नियमों से अवगत करा रही है। चौराहे पर वाहन चालकों से रूबरू इस महिला पुलिसकर्मी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में महिला ट्रैफिक पुलिसकर्मी सोनाली सोनी शहर के गीता भवन चौराहे पर सुपरहिट बॉलीवुड सॉन्ग ‘किसी राह पर.. किसी मोड़ पर..’ का अनोखा वर्जन गाकर लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरुक करती नजर आ रही हैं। सोनाली सोनी ने गाने में जो चेंजेज किए हैं वो हैं- ‘कहीं चल न देना सिग्नल तोड़ कर..’ है। बता दें कि जैसे ही सिग्नल रेड होता है। सोनाली माइक लेकर सड़क पर आती हैं और लोगों को अपने गीजों के जरिए जागरुक करने का प्रयास करती हैं। सोनाली वाहन चालकों के पास जाती हैं और उनको हेलमेट लगा कर वाहन चलाने ट्रैफिक रूल्स को फालो करने की अपील करती हैं। अक्सर आम लोग ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन जिस चौराहे पर सोनाली की ड्यूटी लगती है वहां का नजारा ही कुछ और होता है। लोग बड़े गौर से सोनाली की बातें सुनते हैं। महिला आरक्षक को मधुर आवाज में गाते देखकर वाहन चालक रुक जाते हैं। जितनी देर तक चौराहे पर रेड लाइट रहती है, सोनाली लोगों को ट्रैफिक रूल्स की अहमियत समझाती हैं। सोनाली मंदसौर के नारायणगढ़ की रहने वाली सोनाली एमसीए डिग्री के साथ पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पूर्व में टीचिंग के दौरान भी वह अपने गाने के शौक को लेकर चर्चा में रही हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती बेटी हैं। उनका कहना है कि शुरू से ही वह पुलिस सेवा में जाना चाहती थीं। उनकी ड्यूटी इंदौर के गीता भवन चौराहे के अलावा पलासिया चौराहे पर लगती है। दोनों ही इंदौर शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक चौराहों में गिने जाते हैं। यही वजह है कि ट्रैफिक पुलिस ने शहर के पूर्वी क्षेत्र के सबसे व्यस्ततम चौराहों पर सोनाली की ड्यूटी लगाकर लोगों को जागरूक करने के लिए एक अनूठा प्रयोग किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- बढ़ती गर्मी के मद्देनजर वे प्रदेश के सभी अंचलों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी रखें

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों से कहा है कि बढ़ती गर्मी के मद्देनजर वे प्रदेश के सभी अंचलों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों और अपने गृह जिले में भी पेयजल की आवश्यकतानुसार समुचित आपूर्ति के लिए स्वस्फूर्त प्रयास करें। पीने के पानी की आपूर्ति बाधित न हो। किसी को भी पेयजल के लिए कठिनाई न होने पाए। उन्होंने कहा कि पेजयल व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करें और उन्हें अपना मार्गदर्शन एवं आवश्यक दिशा-निर्देश भी दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रि-परिषद के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, सरकार ने दी सैद्धांतिक सहमति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। निवेशकों द्वारा सहमति देने पर ग्वालियर में जल्द ही टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना की जाएगी। इसके लिए हम केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय को हर जरूरी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि इस टीएमजेड में बड़े निवेशकों द्वारा निवेश करने की रूचि व्यक्त की गई है। इस प्रयोजन के लिए पहले चरण में ग्वालियर आईटी पार्क की 70 एकड़ तथा दूसरे चरण में साडा ग्वालियर की 300 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में लगभग 12 हजार करोड़ रूपए के निवेश की संभावना है। इससे 5 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 50.18 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेंहू उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को अवगत कराया कि प्रदेश में गेंहू उपार्जन कार्य तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि जब से सरकार ने गेहूं की उपार्जन दर 2600 रुपए प्रति क्विंटल (समर्थन मूल्य 2,425 रूपए तथा बोनस राशि 175 रूपए प्रति क्विंटल) घोषित की है, तब से अब तक 50 लाख 18 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन हो चुका है। अब तक करीब 5.50 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों से गेहूं उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य तय किया है। गेहूं उपार्जन की गति को देखते हुए प्रतीत हो रहा है कि हम यह लक्ष्य जल्द ही (उपार्जन की अंतिम तिथि 5 मई से पहले ही) प्राप्त कर लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 10 हजार 562 करोड़ रुपए से अधिक उपार्जन राशि किसानों के खातों में हस्तांतरित कर दी है। उन्होंने कहा कि गेहूं उपार्जन के मामले में हम जल्द ही पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से भी आगे होंगे। गांधी सागर अभयारण्य में दो चीतों के रिलोकेशन पर सरकार को मिल रही वैश्विक सराहना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधी सागर अभयारण्य में दो चीतों के पुनर्वास के विषय में मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में पहली बार चीतों का सफल पुनर्वास किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभाष और पावक दोनों नर चीतों को गांधी सागर अभयारण्य की जलवायु और सहज वातावरण भा गया है। वे दोनों बड़े ही आनंद से अभयारण्य में विचरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर हम मध्यप्रदेश में सभी वन्य प्राणियों के विकास और संवर्धन सहित जरूरी होने पर उनके पुनर्वास के लिए भी हर संभव प्रयास जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि चीतों के पुनर्वास के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं उसके लिए सरकार को राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर से सराहना मिल रही है। मंत्रि-परिषद की अगली बैठक में होगी स्थानांतरण नीति पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि अगली कैबिनेट में प्रदेश की ट्रांसफर पॉलिसी पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से कहा कि स्थानांतरण के लिए नवीन नीति – 2025 पर अगली बैठक में चर्चा एवं स्वीकृति के लिए तैयारी कर लें। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण नीति के अनुरूप 1 से 31 मई तक स्थानांतरण विभाग कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से भी कहा कि वे अपने-अपने विभाग में ट्रांसफर्स के लिए प्रॉपर प्लानिंग कर लें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी जिलों में जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियां भी सतत् रूप से चलती रहे। प्रभारी मंत्री अपने जिलों में इस अभियान की समीक्षा और सहभागिता भी करें। टेक-आईटी कॉन्क्लेव 27 अप्रैल को इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 27 अप्रैल को इंदौर में एमपी टेक कॉन्क्लेव होने जा रही है। इस कॉन्क्लेव के लिए अब तक 500 से अधिक टेक कंपनियों ने इंदौर आने में रुचि दर्शाई है। उन्होंने आशा जताई कि आईटी कॉन्क्लेव में राज्य सरकार को अपेक्षा के अनुरूप निवेश प्रस्ताव प्राप्त होंगे। पोप फ्रांसिस के निधन पर प्रदेश में रहेगा 2 दिन का राजकीय शोक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैथोलिक ईसाई समुदाय के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पोप फ्रांसिस के देहावसान पर प्रदेश में दो दिन (22 एवं 23 अप्रैल) का राजकीय शोक रहेगा।  

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइड लाइन्स के अनुसार एम.पी. ट्रांसको की स्काडा प्रणाली का हुआ उन्नयन: ऊर्जा मंत्री

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के प्रदेश में क्रियाशील एकस्ट्रा हाइटेंशन सबस्टेशनों की निगरानी (मॉनिटरिंग) के साथ अब इनका रिमोट से नियंत्रण (कंट्रोल) और संचालन का ऑपरेशन संभव हो सकेगा। इसके लिये एम.पी. ट्रांसको ने अपनी पुरानी स्काडा प्रणाली का केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइड लाइन्स के अनुसार उन्नयन करते हुये अत्याधुनिक तकनीक से लैस नई स्काडा प्रणाली (स्काडा सिस्टम) स्थापित कर क्रियाशील कर लिया है। विगत दिवस इसका संचालन नयागांव जबलपुर स्थित नये नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) से प्रारंभ हुआ। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने जानकारी दी कि लगभग 51.88 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से निर्मित इस नये स्काडा सिस्टम में पुराने स्काडा सिस्टम के मुकाबले अनेक नये फीचर्स उपलब्ध है। भारत सरकार के केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइड लाइन्स के अनुसार नये स्काडा सिस्टम को नवीनतम तकनीकों और साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत किया गया है। अब प्रदेश के एकस्ट्रा हाइटेंशन सबस्टेशनों के प्रत्येक मिनिट का रियल टाइम डेटा प्राप्त कर सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे आधुनिक स्काडा सिस्टम की दक्षता और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही इससे सुरक्षा और डेटा विश्लेषण क्षमताओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्नयन (अपग्रेडेशन) से यह है फायदा एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री अमरकीर्ति सक्सेना ने बताया कि नए स्काडा सिस्टम में उन्नत फ़ायरवॉल और मल्टी-लेयर सुरक्षा तंत्र शामिल है, जो संभावित साइबर खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके डैशबोर्ड में उन्नत डेटा विश्लेषण की सुविधा हैं, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती हैं। रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स से डेटा की सटीकता और प्रासंगिकता में सुधार होगा, जिससे बेहतर निर्णय लेने और त्वरित प्रतिक्रियाओं में मदद मिलेगी। यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस होने के कारण नया सिस्टम आधुनिक और सहज ग्राफिकल यूजर इंटरफेस से सुसज्जित है, जिससे ऑपरेटरों को अधिक कुशलता और सुविधा मिलती है। स्काडा सिस्टम का यह उन्नयन (अपग्रेडेशन) बदलते अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक मानकों और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सुरक्षित डेटा के लिये उपयोग होगा ट्रांसको का लोकल एरिया नेटवर्क वर्तमान में सायबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये स्काडा सिस्टम के डेटा मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की आप्टिकल फायबर ग्राउंड वायर के माध्यम से लोकल एरिया नेटवर्क से प्राप्त होंगे। स्काडा को अपग्रेड करने में अधीक्षण अभियंता श्री मनीष खरे द्वारा संशोधित ड्राइंग-डिजाईन एवं सटीक टेडरिंग प्रक्रिया के साथ स्काडा के सहायक अभियंता श्री अतुल अग्रवाल के स्किल नॉलेज का योगदान रहा।  

जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में नदी, खेत तालाब, पोखर सहित सभी जल स्रोतों के संरक्षण का कार्य चल रहा : मुख्यमंत्री

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में नदी, खेत तालाब, पोखर सहित सभी जल स्रोतों के संरक्षण का कार्य चल रहा है। सभी जिलों में जनप्रतिनिधि और प्रभारी मंत्री अपने-अपने स्तर पर 90 दिन तक चलने वाले इस अभियान का हिस्सा बने और अपना योगदान दें। आगामी 30 जून तक जारी रहने वाले जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में अमृत सरोवरों का भी निर्माण किया जा रहा है। हमारी सरकार का यह अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण के हो रहे पुनीत कार्यों के लिए प्रदेशवासियों को बधाई दी है। अगली कैबिनेट मीटिंग में लेंगे ट्रांसफर पॉलिसी पर निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार अगली कैबिनेट मीटिंग तक स्थानांतरण नीति (ट्रांसफर पॉलिसी) को लेकर भी नीतिगत निर्णय लेगी। हम प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों के कल्याण के लिए उनके वेतन एवं सभी प्रकार के भत्तों के भुगतान के लिए कार्य कर रही है। लोक सेवकों के हितों के साथ ही राज्य सरकार खाली पदों पर जल्द से जल्द भर्ती की दिशा में आगे बढ़ रही है। भर्ती अभियान में सभी योग्य उम्मीदवारों को मौका मिले, इसके लिए प्रत्येक विभाग की समीक्षा की जा रही है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की लंबित परीक्षाएं भी शीघ्र कराने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना से बढ़ेंगे रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने बीते सोमवार को ही प्रदेश में टेलीकॉम सेक्टर के डेवलपमेंट को गति प्रदान करने के लिए ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापना की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। इससे बड़े पैमाने पर युवाओं को रोजगार उपलब्ध होंगे। इसी के साथ आईटी सेक्टर पर आधारित एक कॉन्क्लेव 27 अप्रैल को इंदौर में आयोजित होगी। इससे जुड़े विभागों के अधिकारी तैयारियों में जुटे हुए हैं। मध्यप्रदेश के ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में आईटी के बड़े केंद्र स्थापित हो, इस प्रयोजन से हर संभव प्रयास हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को देश का नंबर-1 राज्य बनाने का संकल्प दोहराते हुए बदलते दौर में सभी क्षेत्रों में समुचित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मीडिया को जारी संदेश में यह जानकारियां साझा की हैं।  

विनोद मिल उज्जैन से संबंधित ऋण प्रकरण के निराकरण के लिए ओटीएस कमेटी गठित

भोपाल राज्य शासन ने विनोद मिल उज्जैन से संबन्धित ऋण प्रकरण के एकमुश्त निराकरण के लिए प्रमुख सचिव एमएसएमई की अध्यक्षता में ओटीएस कमेटी का गठन किया है। ऋण वसूली अभिकरण जबलपुर द्वारा दिए गए आदेशानुसार सामान्य प्रशासन विभाग ने इस कमेटी का गठन किया है। आदेश अनुसार कमेटी में वित्त, राजस्व, लोक परिसंपत्ति प्रबन्धन और विधि विभाग के प्रतिनिधि के साथ संचालक ग्राम एवं नगर निवेश के प्रतिनिधि, प्रबन्ध संचालक मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। आयुक्त सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। कमेटी में आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञ को शामिल किया जा सकेगा। कमेटी ऋण वसूली अभिकरण जबलपुर द्वारा विनोद मिल उज्जैन से संबन्धित प्रकरण में एकमुश्त निराकरण के निर्देश के क्रम में बैंक द्वारा प्रस्तुत दावों का परीक्षण कर अंतिम निराकरण के लिए अपनी अनुशंसा प्रस्तुत करेगी।  

प्रदेश में 5 नए आयुर्वेद महाविद्यालय तैयार, इनमें जल्द ही शुरू होगी पढ़ाई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मेडिकल टूरिज्म एक उभरता हुआ सेक्टर है। प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आयुष विभाग भी इस क्षेत्र में भागीदारी करें। प्रदेश के हर पर्यटन स्थल, धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थलों के आसपास वैलनेस सेंटर स्थापित किए जाएं, इससे यहां आने वाले पर्यटक आयुष विभाग की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति और पंचकर्म सुविधा का भी लाभ ले सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में आयुष विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव आयुष श्री डी.पी. आहूजा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन में प्रदेश में जहां-जहां नए आयुर्वेद महाविद्यालय स्थापित किए जाने हैं, इन्हें प्रारंभ करने के लिए तेज एवं प्रभावी कार्रवाई की जाएं। स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग आपसी समन्वय और तालमेल से काम करें और अधिक से अधिक मरीजों को अपनी-अपनी चिकित्सा पद्धतियों से उपचार का लाभ दें। उन्होंने कहा कि दोनों ही विभाग रोजगारपरक शिक्षा की ओर बढ़ें, ताकि प्रदेश को अधिकाधिक डॉक्टर्स एवं आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी मिलें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष विभाग द्वारा 543 से अधिक आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, 36 होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारी, 14 यूनानी चिकित्सा अधिकारी, 65 आयुर्वेद व्याख्याता एवं 150 से अधिक पैरामेडिकल स्टॉफ एवं संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर की पोस्टिंग भी कर देने की जानकारी मिलने पर विभागीय अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि अब आयुष के डॉक्टर्स गांव-गांव में उपलब्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिना किसी डिग्री के क्लीनिक चलाकर एवं घर-घर जाकर भोले-भाले ग्रामीण मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप डॉक्टर (क्वेक्स) पर सख्ती से अंकुश लगाने के निर्देश दिए। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुंचे आयुष विभाग की सेवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और पारम्परिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। देश और प्रदेश में आयुर्वेदिक उपचार पद्धति की ओर लोगों का रुझान निरंतर बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए आयुष विभाग की अपनी सभी चिकित्सा प्रणालियों यथा आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विस्तार के लिए जरूरी मानव संसाधन की पूर्ति कर अपनी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनमानस में आयुष पद्धति के प्रति विश्वास और बढ़े, इसके लिए जन जागरूकता अभियानों को तेज किया जाए तथा आयुष सेवाओं की पहुंच दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि जिन आयुर्वेदिक महाविद्यालय को हम निकटतम बड़े विश्वविद्यालय से जोड़ सकते हैं, उन्हें जोड़ने की कार्रवाई केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार करें। क्योंकि क्षेत्रीय बहुउद्देशीय विश्वविद्यालय से शिक्षा एवं उपचार की सभी पद्धतियों के महाविद्यालयों के लिंक होने पर अध्ययन और अध्यापन दोनों में सुविधा होगी। प्रकृति परीक्षण अभियान में मध्यप्रदेश देश में पांचवे स्थान पर आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘देश का प्रकृति परीक्षण’ अभियान लांच किया गया है। इस अभियान में प्रदेश में तेजी से कार्यवाही की गई। उन्होंने बताया कि अब तक 8.50 लाख से अधिक परीक्षण किए जा चुके हैं। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में 5वें स्थान पर रहा है। खजुराहो में योग संस्थान की स्थापना की तैयारी प्रमुख सचिव आयुष ने बताया कि छतरपुर जिले के खजुराहो में योग संस्थान की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का यह प्रस्ताव केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद में विचारार्थ है। कलेक्टर छतरपुर द्वारा योग संस्थान के लिए खजुराहो के समीप ग्राम खर्रोही में 25 एकड़ भूमि आयुष विभाग को आवंटित कर दी गई है। इस भूमि का केन्द्र सरकार के दल द्वारा निरीक्षण भी किया जा चुका है। जल्द ही इस पर अगली कार्यवाही होनी है। इसके साथ ही खजुराहो में ही इंटर यूनिवर्सिटी सेन्टर फॉर योगिक साइंस की स्थापना का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। उज्जैन में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए प्रयास तेज प्रमुख सचिव ने बताया कि उज्जैन जिला मुख्यालय में केन्द्र सरकार के सहयोग से अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए मध्यप्रदेश राज्य के चयन के लिए केन्द्र सरकार में प्रस्ताव विचाराधीन है। केन्द्र सरकार द्वारा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत प्रस्ताव मांगा गया है। राज्य सरकार द्वारा ग्रीनफील्ड प्रस्ताव भेज दिया गया है। प्रदेश में बनेंगे 11 नए आयुर्वेद महाविद्यालय प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रदेश में 11 नए आयुर्वेद महाविद्यालय खोले जाने हैं। इसमें डिण्डोरी जिले में आयुर्वेद महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना के तहत भोपाल में 50 बिस्तरीय और नरसिंहपुर में 30 बिस्तरीय नए आयुर्वेद चिकित्सालय का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है।  

मध्य प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की बैठक पीसीसी में आयोजित की गई, कई नेता रहे नदारत

भोपाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व सीएम कमलनाथ पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह समेत कई दिग्गज नेता नदारद रहे। इस बैठक मेंसंगठन को मजबूत बनाने की रणनीतिक पर चर्चा की गई। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की बैठक मंगलवार को पीसीसी में आयोजित की गई। इस बैठक में  पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, डॉ. गोविंद सिंह समेत कई दिग्गज नेता नदारद रहे। इस बैठक में संगठन को मजबूत बनाने, जनसमस्याओं को प्राथमिकता देने, एवं आगामी आंदोलनों एवं अभियानों को लेकर चर्चा की गई। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूत रहे। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि संविधान पर हो रहे हमलों को रोकने और जनता को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए यह अभियान निर्णायक साबित होगा।  जीतू पटवारी ने कहा किहर कार्यकर्ता इस आंदोलन को अपनी जिम्मेदारी माने और हर गांव, हर वार्ड तक संविधान का संदेश लेकर जाए। कांग्रेस को मजबूत करने सभी को जुटना होगा  हरीश चौधरी ने कहा कि सबको साथ मिलकर कांग्रेस को मजबूत करने में जुटना चाहिए। आज कांग्रेस को अर्जुन सिंह जैसे नेताओं की जरूरत है। जिस तरह अर्जुन सिंह सबको साथ लेकर चलते थे। उस तरह हर स्तर के नेता को काम करना चाहिए। अपने जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की कोशिश सबको करना चाहिए। संविधान बचाओ अभियान पर विशेष चर्चा बैठक का प्रमुख फोकस आगामी संविधान बचाओ अभियान पर रहा। निर्णय लिया गया कि 25 से 30 अप्रैल के बीच पूरे देश में संविधान बचाव रैली आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में इस अभियान को 28 अप्रैल से ग्वालियर में एक भव्य रैली के साथ किया जाएगा। 1- जिला स्तरीय संविधान बचाओ रैलियां 3 मई से 10 मई प्रदेश के प्रत्येक जिले में समस्त DCC द्वारा PCC के समन्वय से रैलियाँ आयोजित की जाएँगी। इन रैलियों में मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियाँ – बढ़ती बेरोजगारी, महँगाई, कृषि संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदहाली आदि मुद्दों को उजागर किया जाएगा। युवाओं, किसानों, मजदूरों और दलित समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। 2- विधानसभा स्तरीय संविधान बचाओ रैलियां-11 मई से 17 मई हर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता जनजागरण करेंगे। ED, CBI, और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना, महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों पर हमलों को उजागर किया जाएगा। 3- घर-घर संपर्क अभियान-20 मई से 30 मई हर घर तक पहुंचने के लिए कार्यकर्ता द्वार-द्वार जाकर संवाद स्थापित करेंगे। विशेष रूप से महंगाई, बेरोजगारी, संविधानिक अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। अभियान साहित्य वितरित कर, सोशल मीडिया के माध्यम से भी संवाद को सशक्त किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले की सड़क दुर्घटना पर किया शोक व्यक्त

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दमोह जिले में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में एक ही परिवार के 8 नागरिकों के असामयिक निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि दुर्घटना दुखदायी है। इस मुश्किल घड़ी में राज्य सरकार शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है। राज्य सरकार की ओर से इस दुर्घटना में मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रूपए एवं घायलों को 50-50 हजार रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। दमोह के बनवार क्षेत्र में महादेव घाट के पास मंगलवार को एक बोलेरो के अनियंत्रित होकर खाई में गिर जाने से यह दर्दनाक हादसा हुआ है। सभी पीड़ित जागेश्वर धाम की धार्मिक यात्रा से जबलपुर लौट रहे थे।  

भविष्य के लिए जल को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है: मंत्री सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ईंटखेड़ी में बाणगंगा नदी के विसर्जन घाट पर सफाई, सौंदर्यीकरण एवं जल संरक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बलिदान स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके त्याग और बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में विधायक श्री विष्णु खत्री,जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मोहन सिंह जाट, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमोद राजपूत,सरपंच श्री हरि सिंह सैनी, श्री तीरथ सिंह मीणा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी एवं अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जल संरक्षण के संकल्प को पूरा करने के लिए अभियान में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 13 मिनट तक जल गंगा संवर्धन और संरक्षण की आवश्यकता बताई थी। भविष्य के लिए जल को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है। मंत्री श्री सिलावट ने जन-आंदोलन के साथ इस कार्य को करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि गांव, जिले, राज्य और देश में श्रमदान को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। बैरसिया विधानसभा में 70 अमृत सरोवर हैं, जिनका संवर्धन करना है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का भी आग्रह किया। श्री सिलावट ने 30 मार्च से 30 जून तक चलने वाले जल गंगा संवर्धन अभियान में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने सभी वर्गों से जल संरक्षण कार्यों में सहभागिता करने को कहा। उन्होंने ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों पर जल स्रोतों के संरक्षण के लिए श्रमदान का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि धरातल पर काम की प्रगति दिखनी चाहिए और काम में कोताही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल स्रोतों में अतिक्रमण को पूरी तरह से हटाने के भी निर्देश दिये।

विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्ध घुमंतु जातियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है सरकार: राज्य मंत्री श्रीमती गौर

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध घुमंतु जातियों के विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। जन अभियान परिषद के माध्यम से इन विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु 51 जातियों के परिवारों के समेकित विकास के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद पहले चरण में 12 जिलों के 71 ब्लॉक में सर्वेक्षण करेगा। जो 30 अप्रैल 2025 से प्रारंभ होकर 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। सर्वेक्षण का उद्देश्य इन समुदाय के लोगों की जीवनशैली, पारंपरिक व्यवसाय और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी का दस्तावेजीकरण करना है। कई बार निरंतर स्थान बदलने के कारण यह किसी भी भौगोलिक सीमा के सर्वेक्षण में नहीं आ पाते हैं। एक स्थान पर निवास ना होने के कारण इन जातियों के लोगों के आधार कार्ड, समग्र कार्ड इत्यादि भी नहीं बन पाते हैं। इस सर्वेक्षण से शासन की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लाभ इन जातियों को मिल सकेगा, रिहाइशों की पहचान हो सकेगी और स्थान परिवर्तन का समय, कारण व अन्य तथ्यों की जानकारी एकत्रित की जा सकेगी। बैठक में जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री मोहन नागर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंखयक कल्याण, विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार, संचालक विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु श्री नीरज वशिष्ठ, जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की धरती पर जन्में चीतों की शिफ्टिंग पर व्यक्त की प्रसन्नता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदसौर स्थित गांधीसागर अभयारण्य में मध्यप्रदेश की धरती पर जन्में चीतों की शिफ्टिंग को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह अभयारण्य प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मध्यप्रदेश में चीतों के आवास एवं विचरण के लिए सर्वाधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। कूनो नेशनल पार्क से राज्य में दूसरे स्थान पर चीतों को ले जाकर पुनर्वास करना वन्य-प्राणी संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े गए चीते पावक और प्रभाष को यहाँ की आबो-हवा और नया परिवेश पसंद आया है और दोनों आनंद के साथ जंगल में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को वन्य जीवों के संरक्षण में अग्रणी बनाने के लिए विशेष ईको सिस्टम विकसित करने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश बाघों की संख्या में शीर्ष पर है और इसे टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है। इसी के साथ राज्य में लेपर्ड (तेंदुए) भी सर्वाधिक हैं। राज्य सरकार सभी विलुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में चीतों के पुनर्वास को एशिया महाद्वीप की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से वन्य-प्राणियों के संरक्षण में साझेदार बनने के साथ ‘जियो और जीने दो’ की भावना से कार्य करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत 20 अप्रैल 2025 को मध्यप्रदेश में कूनो नेशनल पार्क में जन्में दो चीते पावक और प्रभास को उनके नए घर गांधीसागर अभयारण्य में मुक्त विचरण के लिए छोड़ा है। मई महीने में मध्यप्रदेश को बोत्सवाना से चार चीते मिल सकते हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएससी की परीक्षा में चयनित युवाओं को दी बधाई

 भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संघ लोक आयोग के घोषित परिणामों में प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं का चयन गर्व का विषय है। यह परिणाम बताते हैं कि युवाओं ने शासकीय सेवा के माध्यम से राष्ट्र की सेवा करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चयनित युवाओं को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कल सिविल सेवा दिवस मनाया गया। सिविल सेवकों की जन कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान में अधिकारी वर्ग ने श्रेष्ठ सेवाएं प्रदान करते हुए सार्थक भूमिका का निर्वहन किया है, जिसके कारण भारत की एक विशेष पहचान बनी है। प्रदेश के युवाओं ने अच्छा अवसर पाया है। यूपीएससी के रिजल्ट में प्रदेश के युवाओं ने शासकीय सेवा के माध्यम से देश की सेवा करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की है कि सभी चयनित युवा राष्ट्र सेवा के लिए बेहतर से बेहतर कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिविल सेवा परीक्षा:2024 में चयनित होने वाले देशभर के सभी प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को भी बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों के अथक परिश्रम, धैर्य एवं समर्पण का प्रतिफल है।  

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