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शाहपुर पुलिस ने 48 घंटे के अंदर किया अंधे कत्ल का खुलासा

   डिंडोरी 48 घंटे में हुआ खुलासा दिनांक 05/04/2025 को थाना शाहपुर क्षेत्रांन्तर्गत ग्राम गनवाही निवासी रूपालाल यादव ने थाना में सूचना दर्ज कराया था कि उसके लड़के भूपेन्द्र कुमार यादव उम्र 34 वर्ष निवासी गनवाही की लाश ग्राम गनवाही एवं मुड़की के बीच मुड़की डेम में बने पुल के नीचे पानी में पड़ी हुई है तथा पुल के ऊपर खून फैला हुआ है सूचना पर थाना शाहपुर पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई जांच पर मृतक भूपेन्द्र यादव की मृत्यु किसी धारदार हथियार से सिर में गर्दन में गंभीर चोट पहुंचाकर हत्या कर अज्ञात व्यक्ति द्वारा लाश का पानी में फेंका जाना पाया गया जिस पर अपराध क्र0 125/2025 धारा 103(1), 238 BNS का अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध पंजीबद्ध किया गया पुलिस अधीक्षक डिण्डौरी श्रीमति वाहिनी सिंह, अति० पुलिस अधीक्षक डिण्डौरी डॉ.  अमित वर्मा के निर्देश में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस शहपुरा  मुकेश अभिद्रा के मार्गदर्शन में टीम गठित कर विवेचना प्रारंभ की गई अंधेकत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए विवेचना के दौरान पाया गया कि प्रकरण का आरोपी चन्द्रभान उर्फ चंदू मसराम पिता लम्मू सिंह मसराम उम्र 29 वर्ष निवासी गनवाही थाना शाहपुर का राजस्थान मजदूरी करने गया था, होली के समय वापस आने पर पत्नि के द्वारा लगातार मोबाईल में बात करने से वह मृतक भूपेन्द्र के ऊपर पत्नि के साथ संबंध होने का शक करने लगा था इस बात को लेकर पत्नि तथा मृतक एवं मृतक के परिवार वालों से भी कहा सुनी हुई थी इसी बाद बिवाद के कारण आरोपी की पत्नि घर छोड़कर चली गई है इसी वजह से आरोपी द्वारा दिनांक 04/04/2025 को रात्रि में अपने एक नाबालिक साथी के साथ मिलकर जब मृतक भूपेन्द्र यादव ग्राम मुड़की तरफ गया हुआ था जिसकी जानकारी लेने अपने एक नाबालिक साथी को भेजा था जो नाबालिक साथी द्वारा मृतक की ग्राम मुडकी में होने की सूचना आरोपी को देने पर घटना स्थल मुडकी डेम की बड़ी पुल के पास घात लगाकर छिपकर मृतक के आने का इंतजार किया जब मृतक रात्रि 12 बजे वापस अपने गांव गनवाही की ओर लौट रहा था तब बड़ी पुल में ही मृतक को अपने नाबालिक साथी के साथ मिलकर धारदार हथियार कुल्हाड़ी से मृतक के सिर में गर्दन में कई वार कर गंभीर चोट पहुंचाकर उसकी हत्या कर दिया और अपने नाबालिक साथी अपचारी बालक के साथ मिलकर बोरे में पत्थर भरकर बोरे को मृतक के पहने हुए लोवर से बांधकर पुल से नीचे बांध के पानी में फेंक दिया और मृतक की मोटरसायकल क्र. MP52ZB 1518 को भी आरोपी द्वारा अपने नाबालिक साथी के साथ मिलकर बांध में पानी में पुल के दूसरे तरफ से नीचे पानी में फेंक दिया गया था। घटना स्थल निरीक्षण एवं घटना स्थल से एकत्र किए गये खून के साथ पड़े हुए मृतक के बाल एवं अन्य भौतिक साक्ष्य के आधार पर अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में निरीक्षक थाना प्रभारी हरिशंकर तिवारी के द्वारा SDRF रेस्क्यू टीम के द्वारा पानी से मृतक के शव का निकलाने एवं पानी में फेंकी गई मृतक की मोटरसायकल को बरामद करते हुए आरोपी चन्द्रभान सिंह उर्फ चन्दू मसराम एवं अन्य एक अपचारी बालक को गिरफ्तार घटना में प्रयुक्त आलाजरर कुल्हाड़ी एवं घटना वक्त पहने हुए आरोपियों कपडे, आरोपी की मोटरसायकल जप्ती की गई है प्रकरण का आरोपी चन्द्रभान मशराम एवं उसके नाबालिक साथी को हिरासत में लेकर न्यायालय पेश किया गया है। प्रकरण के आरोपियों तक पहुंचने एवं उन्हे गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय पेश करने में निरीक्षक थाना प्रभारी हरिशंकर तिवारी सहा. उपनिरीक्षक संतोष उईके, रामप्रसाद यादव, प्रआर 283 राजकुमार जायसवाल, प्रआर 309 छोटेलाल देशिया, आरक्षक कमलेश भवेदी, उज्जवल यादव, बृजेश मरावी एवं  प्रधान आरक्षक मुकेश प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मास्टर हेमन्त का हुआ निःशुल्क आपरेशन

बड़वानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ग्राम मोयदा की आंगनवाड़ी क्रमांक 2 में आरबीएसके टीम ए पानसेमल के डॉ सादिक तिगाले एवं डाँ वंदना चौहान के द्वारा बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान पता चला कि हेमंत के दिल की धड़कन असामान्य है। हेमंत के माता-पिता से पूछताछ में मालूम हुआ कि वह बार-बार बीमार पड़ता है और हमेशा कमजोरी महसूस करता है । आरबीएस के दल द्वारा हेमंत के पिता को समझाया गया कि हेंमत को दिल की बीमारी की आशंका है । जिसकी पुष्टि के लिए बच्चे की जांच करवानी होगी ।     जिला स्तरीय मेगा हेल्थ कैंप में आरबीएसके टीम द्वारा बच्चे को लाया गया। जहां विशेष जूपिटर हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवि रंजन त्रिपाठी के द्वारा इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से हेमंत के दिल की बीमारी की पुष्टि की गई। पिता की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने से इलाज के खर्चे को लेकर चिंतित थे। आरबीएसके टीम द्वारा बच्चे के पिता को बताया गया कि आरबीएसके प्रोग्राम के अंतर्गत बच्चे का इलाज पूरी तरह निःशुल्क हो जाएगा। बच्चे को जिला अस्पताल स्थित डीईआईसी केंद्र भेजा गया, जहां वे केंद्र के अधिकारी श्री राधेश्याम जमरेल एवं लखन गांगले द्वारा आरबीएसके प्रोग्राम के तहत हेमंत के इलाज के लिए एस्टीमेट बना। 3 फरवरी 2025 को विशेष जुपिटर हास्पिटल इंदौर में बच्चे का निःशुल्क ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।     आरबीएसके टीम पानसेमल एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती संगीता वर्मा की मेहनत, डीइआईसी टीम के सहयोग तथा सीएमएचओ डॉ. सुरेखा जमरे व बीएमओ डॉ अमृत बमनका के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि हासिल हुई।

नाबालिग आदिवासी बालिका से बलात्‍संग के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

डिण्‍डौरी  मीडिया सेल प्रभारी  मनोज कुमार वर्मा, अभियोजन अधिकारी द्वारा बताया गया कि, थाना गाड़ासरई के अप0क्र0 332/2023 विशेष प्रकरण क्रमांक 36/2023 के आरोपी मोहम्‍मद रहमान कुरैशी(खुर्शीद) उर्फ चांद पिता मो. जा‍किर हुसैन उम्र 28 वर्ष निवासी गोरखपुर थाना गाड़ासरई जिला डिण्‍डौरी को नाबालिग बालिका को बहला-फसलाकर अपने घर में ले जाकर बंद कमरे में बालिका के साथ बलात्‍संग करने के मामले में न्‍यायालय  कमलेश कुमार सोनी, विशेष न्‍यायाधीश पॉक्‍सो एक्‍ट डिण्‍डौरी द्वारा आरोपी को धारा 363 भादवि के अपराध के लिए 03 वर्ष कठोर कारावास एवं 1000/- का अर्थदण्‍ड, धारा 366 भादवि के अपराध के लिए 05 वर्ष कठोर कारावास एवं 1000/- का अर्थदण्‍ड, धारा 342 भादवि के अपराध के लिए 01 वर्ष कठोर कारावास एवं 1000/- का अर्थदण्‍ड, धारा 376AB भादवि के अपराध के लिए 20 वर्ष कठोर कारावास एवं 10000/- का अर्थदण्‍ड, धारा 5(m)/6 पॉक्‍सो एक्‍ट के अपराध के लिए 20 वर्ष कठोर कारावास एवं 10000/- का अर्थदण्‍ड एवं धारा 3(2)(V) एससी/एसटी एक्‍ट के अपराध के लिए आजीवन कारावास एवं 10000 रूपये का अर्थदण्‍ड तथा धारा 3(1)(W)(i) एससी/एसटी एक्‍ट के अपराध के लिए 03 वर्ष कठोर कारावास एवं 1000 रूपये का अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया । अर्थदण्‍ड की राशि अदा न करने पर क्रमश: धाराओं में 01 माह, 01 माह, 01 माह, 02 माह, 02 माह, 02 माह, 01 माह अतिरिक्‍त कठोर कारावास भुगताये जाने के आदेश पारित किये गये ।    घटना का संक्षिप्‍त विवरण –  घटना का संक्षिप्‍त विवरण इस प्रकार है, दिनांक 11.11.2023 को अभियोक्‍त्री की मां अपने घर में अंदर चाय बना रही थी, उसका पति घर में सो रहा था तथा उसकी पुत्री घर में बाहर खेल रही थी । जब पुत्री घर में नहीं दिखी तब पूंछने पर सास ने बताया कि चांद अभियोक्‍त्री को लेकर गया है । अभियोक्‍त्री को बहुत ढूंढा पर नहीं मिली । बाद में गांव के निवासी पुत्री को लेकर आये और बताये कि आरोपी चांद खरगोश दिखाउंगा करते हुये अभियोक्‍त्री को अपने घर ले गया था और दरवाजा बंद करके जबरदस्‍ती उसके कपडे उतार दिया था एवं अभियोक्‍त्री के गुप्‍तांग को मुंह लगाकर चाट रहा था । उक्‍त घटना के रिपोर्ट करने उपरांत पुलिस द्वारा विवेचना में संकलित साक्ष्‍य के आधार पर अभियोग पत्र माननीय न्‍यायालय के समक्ष प्रस्‍तुत किया गया । तदुपरांत अभियोजन के साक्ष्‍य एवं तर्कों से सहमत होते हुए माननीय न्‍यायालय  कमलेश कुमार सोनी,  विशेष न्‍यायाधीश पॉक्‍सो एक्‍ट डिण्‍डौरी द्वारा उपरोक्‍तानुसार दण्‍ड से दण्डित किया गया ।

बंधा कोल माइंस का एवार्ड पारित, कलेक्टर ने मुआवजा जीवियों के मंसूबों पर फेरा पानी

बंधा कोल माइंस का एवार्ड पारित, कलेक्टर ने मुआवजा जीवियों के मंसूबों पर फेरा पानी 3362 मकान एवार्ड से बाहर, मुआवजा जीविओ को लगा तगड़ा झटका, 355 करोड़ रूपयें का तैयार हुआ मुआवजा ,कई घरो के दरवाजे गायब किसी का अता पता नही सूने मिले मकान  सिंगरौली  बंधा कोल माइंस अवार्ड को कलेक्टर ने पारित कर दिया है बंधा गांव के करीब 1362 मकान अवार्ड से बाहर हो गए हैं ।एवार्ड पारित होने के बाद मुआवजा जीवियों को कलेक्टर ने करारा झटका दिया है। वही मुआवजा जीवियों के मंशा पर कलेक्टर ने पानी फेर दिया है। कलेक्टर के इस कदम से मुआवजा जीवियों में हड़कम्प मच गया हैं। गौरतलब है कि जब हम या और किसी व्यक्ति के द्वारा लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर कहीं पर मकान का निर्माण करते हैं तो इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही अपनी जमा पूंजी लगते हैं। उसमें मुख्य रूप से शहर या नगर तथा कस्बा हो आवागमन के साधन हो ,स्वास्थ्य, आसपास शिक्षा की सुविधा हो, बिजली, सड़क, पानी भी उपलब्ध हो ,इन्ही  बातों का ख्याल रखते हुए मकान का निर्माण करने का उद्देश्य रहता है। किंतु जिले में इन दोनों एक प्रचलन आ गया है कि आलम यह है कि जिस क्षेत्र में औद्योगिक कंपनिया , नेशनल हाईवे सड़क के प्रस्तावित होने की सुगबुगाहट लगते ही मुआवजा जीवी सक्रिय हो जाते हैं। ताजा  उदाहरण तौर पर प्रयागराज से बाया चितरंगी- सिंगरौली नेशनल हाईवे 135 सी का है। मुआवजा जीवियों को इसकी सुगबुगाहट लगते ही रात दिन बराबर लगकर बनारस, लखनऊ, फैजाबाद, चंदौली, मिर्जापुर यहां तक की भोपाल तक के लोग सिंगरौली पहुंच प्रस्तावित नेशनल हाईवे में पक्के मकान का निर्माण कार्य कर दिया। बाद में जब इसकी शिकायत हुई तो भारत सरकार परिवहन मंत्रालय ने आखिरकार सड़क का एलाइमेंट ही निरस्त कर दिया। इसमें करीब 3000 से अधिक नवीन मकानो का निर्माण पाया गया था। भारत सरकार परिवहन राजमार्ग  मंत्रालय  की कार्रवाई के बाद मुआवजा जीवियों को बड़ा झटका लगा था। नेशनल हाईवे 135 सी  का मामला अभी तक ठंडा नहीं पड़ा था कि कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने मुआवजा जीविओ को एक और बड़ा झटका दे दिया है। इस बार ईआईएमएल माईंस एण्ड मिनिरल्स रिसोर्स प्राईवेट लिमिटेड बंधा कोल ब्लाक औद्योगिक कंपनी के लिए कोयला खदान आवंटित है जहां बंधा कोल माइंस परियोजना के अवार्ड को कलेक्टर ने पारित कर दिया है ।सूत्र बताते हैं कि बंधा  ब्लाक के कुल 4174 मकान बने थे, जिसमें 812 पुराने मकान थे। शेष 3362 मकान का निर्माण बाद में कराया गया । वही कुल मुआवजा 355 करोड़ तैयार हुआ है। इस संबंध में बताया जाता है कि बंधा कोल माइंस परियोजना क्षेत्र में अवैध मकानों के निर्माण होने की जानकारी कलेक्टर तक पहुंची जहां कलेक्टर ने भवनो के सत्यापन के लिए जांच टीम गठित किया। जांच टीम के प्रतिवेदन एवं भौतिक सत्यापन के बाद कलेक्टर ने मुआवजा जीवियो के मंशा पर पानी फिरते हुए उनके हर कोशिश को नाकाम करते हुयें 3362 मकानो को एवार्ड से बाहर किया हैं। कलेक्टर के इस कदम से दूर दराज वा अन्य प्रांतो तथा जिलो से अनाधिकृत रूप से मुआवजा लेने के नियत से बनायें गयें मकानो को एवार्ड से बाहर किए जाने के बाद क्षेत्र के मुआवजा जीवियो में हड़कम्प मचा हैं। घर क्यो बनाए जबाव पर चुप्पी आलम यह है कि इन दिनों बंधा कोल ब्लॉक के बंधा गांव में लोग बिल्कुल शांत हैं। कोई भी व्यक्ति मुआवजे के संबंध में कोई बात करने को तैयार नहीं हालांकि उनकी शिकायत यह जरूर है कि हमारे साथ गलत हुआ, पर जब उनसे यह सवाल होता है कि यह घर क्यों बनाए गए हैं तो वह चुप हो जाते हैं अपने खुद के बनाए गए घर को भी मानने से इनकार कर रहे हैं बहरहाल बंधा गांव में जो कोई व्यक्ति पहली बार जाएगा उसे यह समझ कतई नहीं आएगा कि वह किसी गांव में आया है बल्कि उसे शहरो जैसा एहसास होगा। क्योंकि जहां नजर जाती है वहां चारों तरफ पक्के मकान ऐसे बने नजर आते हैं जैसे कोई रिहायशी कॉलोनी हो कुछ घरों में दरवाजे हैं। लेकिन उसमें ताला बंद है और कुछ घर ऐसे हैं, जिनमें दरवाजे भी नहीं है घरों के अंदर मवेशी लौट रहे हैं। साफ जाहिर होता है कि यह मकान रहने के लिए नहीं बल्कि मुआवजा पाने के लिए बनाए गए हैं। कहीं खेत में तो कहीं मैदान में चारों तरफ सिर्फ घर ही घर नजर आते हैं। दो दर्जन आदिवासियों के भूमि पर बने थे मकान कलेक्टर द्वारा गठित टीम के द्वारा वैध एवं अवैध, नवीन तथा पुराने मकानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा था। इस दौरान बंधा कोल ब्लाक में 25 ऐसे मकानो का निर्माण पाया गया जहा आदिवासियों के पट्टे की भूमि पर मकान होना पाया गया। कलेक्टर ने उक्त मकानो को भी एवार्ड से बाहर कर दिया हैं। अब आदिवासियों के मकानो का मुआवजा लेने के नियत से बनाए जाने वाले मुआवजा जीवियो की चिंताये बड़ गई हैं। कलेक्टर ने उक्त कदम उठाते हुयें यह संदेश देने का प्रयास किया है कि गैर तरीके से मुआवजा हासिल करने की कोशिश बंद करे वरना उनकी जमापूंजी भी नष्ट हो जायेगी। इनका कहना है। बंधा कोल ब्लाक का एवार्ड पारित हो गया है 812 मकान पुराने पायें गयें है। 3362 मकान एवार्ड से बाहर कर दिए गए हैं। 355 करोड़ रूपये मुआवजा बना है। चन्द्र शेखर शुक्ला कलेक्टर सिंगरौली।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति शीघ्र होगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति शीघ्र होगी। इस बारे में राज्य शासन द्वारा शीघ्र ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के लगभग 4 लाख अधिकारी-कर्मचारी इस निर्णय से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपने सेवा काल में कई वर्ष से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अनेक अधिकारी-कर्मचारी सेवा निवृत भी हो गए। गत 8 वर्ष से पदोन्नति की रुकावट चली आ रही थी, जो अब समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से संबंध में मुख्यमंत्री स्तर से 12 से अधिक बैठकों में विचार-विमर्श किया गया। मंत्रीगण से भी चर्चा की गई और पदोन्नति का रास्ता राज्य शासन द्वारा तलाशा गया है। राज्य शासन ने अनुभव किया की पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शीघ्र ही मंत्रि-परिषद की बैठक में इस संबंध में निर्णय होगा। सुखद समाचार सभी अधिकारी-कर्मचारियों को शीघ्र प्राप्त होगा। मध्यप्रदेश शासन द्वारा अधिकारी- कर्मचारियों के हित में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समस्त शासकीय सेवकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति तथा प्रसन्नता से ही संभव

भोपाल नागरिकों की खुशहाली एवं बेहतर जीवन के लिए आंतरिक तथा बाह्य सकुशलता आवश्यक है। राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति तथा प्रसन्नता से ही संभव है। नागरिकों के लिये इस प्रकार वातावरण तैयार करना होगा जो उनके लिए आनंद का कारक बनें। विकास का मापदण्ड भौतिक सुविधाओं पर आधारित होने के साथ-साथ नागरिकों के आनंद के आधार पर भी होना चाहिए। इस उदद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा आनंद संस्थान का गठन अगस्त 2016 में किया गया था। यह संस्थान, मध्यप्रदेश शासन के आनंद विभाग अन्तर्गत संचालित है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान आशीष कुमार ने बताया कि अपनी स्थापना के समय से ही राज्य आनंद संस्थान, प्रदेश के नागरिकों की खुशहाली और मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने के लिए सतत कार्यरत है। संस्थान का यह दृढ़ विश्वास है कि सुख बाहरी प्रभाव नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुभूति और एक स्वाभाविक अवस्था है, जिसे सही दृष्टिकोण, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इसी दिशा में कार्य करते हुए, संस्थान अपने विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और आनंदम गतिविधियों से नागरिकों में सकारात्मकता और आत्मिक आनंद की भावना विकसित करने का प्रयास कर रहा है। राज्य आनंद संस्थान द्वारा विगत माह भोपाल में एक नेशनल सेमिनार ऑन हैप्पीनेस का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन चर्चा करना था। इस सेमिनार में देश के प्रमुख मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को आमंत्रित किया गया, ताकि वे अपने अनुभवों और शोध निष्कर्षों को साझा कर सकें। आयोजन ने आनंद के विविध आयामों एवं तत्वों पर केंद्रित विभिन्न विषयों पर चर्चा करने और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक मंच प्रदान किया। सेमिनार में आतंरिक आनंद की अनुभूति, आनंद और स्वास्थ्य के बीच संबंध, खुशहाल परिवार एवं कार्य स्थल, विद्यार्थियों और युवाओं में मानवीय मूल्य को बढ़ावा देने की रणनीतियों और भारतीय परंपरा में आनंद के स्त्रोतों पर चर्चा की गई।  

नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार वर्ष 2027 तक तैयार किया गया है कार्यक्रम

भोपाल प्रदेश में नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप साक्षरता कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। साक्षरता कार्यक्रम वर्ष 2022 से 2027 तक की अवधि के लिये तैयार किया गया है। प्रदेश में निरक्षरता उन्मूलन के लिये उल्लास-नव साक्षरता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 5 व्यापक उद्देश्य को लेकर संचालित किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता प्रदान करना महत्वपूर्ण जीवन कौशल बुनियादी शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा और सतत् शिक्षा प्रदान करना है। यह कार्यक्रम 15 वर्ष से अधिक आयु समूह के व्यक्तियों के लिये है। पठन-पाठन प्रदेश के परिदृश्य को ध्यान में रखकर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा अक्षर पोथी नाम से प्रवेशिका बनाई गई है। यह प्रवेशिका सीखने की परिष्कृत गति एवं विषय वस्तु पर आधारित है। इस प्रवेशिका में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता के साथ महत्वपूर्ण जीवन कौशल जैसे वित्तीय, कानूनी, डिजिटल साक्षरता और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न मुद्दों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन प्रदेश में असाक्षरों के पठन-पाठन के लिये छात्र-छात्राओं, सरकारी-गैर सरकारी संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। सहयोग देने वाले व्यक्ति को अक्षर साथी का नाम दिया गया है। बुनियादी साक्षरता परीक्षा राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष में 2 बार नवसाक्षरों के लिये बुनियादी साक्षरता परीक्षा लिये जाने का प्रावधान है। सितम्बर 2024 में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में आयोजित परीक्षा में 16 लाख 49 हजार से अधिक नवसाक्षर शामिल हुए थे। शामिल नवसाक्षरों में से 90 प्रतिशत नवसाक्षरों ने परीक्षा में उत्तीर्ण होकर प्रमाण-पत्र हासिल किये हैं।  

मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिली, नेशनल हाईवे होगा अपग्रेड

भोपाल मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिल गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश से गुजर रहे नेशनल हाईवे-34 के हिस्से को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद एक्स पर साझा की है। 531.84 करोड़ रुपए की स्वीकृति केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी साझा करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के शाहगढ़-बक्सवाहा-नरसिंहगढ़-दमोह से 63.50 किमी लंबाई के खंड को पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन में अपग्रेड करने के लिए 531.84 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। बनाए जाएंगे 4 बाईपास आगे जानकारी देते हुए लिखा है कि नेशनल हाईवे-34 उत्तराखंड के गंगोत्री धाम को मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर) पर लखनादौन से जोड़ता है। शाहगढ़-दमोह खंड के उन्नयन में 5 प्रमुख पुल, बक्सवाहा, भटेरा, नरसिंहगढ़ और पिपरिया चंपत में 4 बाईपास और दमोह के निर्मित क्षेत्रों में सर्विस/स्लिप रोड (दोनों तरफ 1.3 किलोमीटर) शामिल हैं। इस राजमार्ग के जुड़ने से कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी और आर्थिक विकास को भी तेजी से बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से चल रही थी मांग नेशनल हाईवे 34 प्रदेश के नरसिंहपुर, सागर, दमोह और राजगढ़ से निकलता है। इस मार्ग को लंबे समय से अपग्रेड करने की मांग की जा रही थी। बता दें कि, 63.50 किलोमीटर का हिस्सा एमपी से गुजरता है। इस मार्ग के अपग्रेड होने से कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला, 71 करोड़ होंगे खर्च !

रीवा  मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला है. गौधाम का क्षेत्रफल तकरीबन 1303 एकड़ का होगा. जिसकी लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से भी अधिक है. वर्तमान में इस गौधाम में 30 हजार गौवंशो की देखरेख और भरण पोषण की व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा गौधाम के विस्तार होने के बाद यहां 50 हजार से भी ज्यादा गौवंशों को आश्रय मिल जाएगा. गौधाम में 100 से अधिक गौ सेवकों को रोजगार तो मिलेगा ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. बेसहारा गौवंशों को मिलेगा सहारा मध्य प्रदेश में बेसहारा गौवंश आम आदमी के साथ ही सड़क में चलने वाले बड़े और छोटे वाहनों के आलावा किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है. सड़कों में घूम रहे गौवंश अक्सर सड़क हादसे का शिकार होकर घायल हो जाते हैं और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है. इसके अलावा सड़क पर घूम रहे बेसहारा गौवंशो से टकराकर अक्सर वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. जिसमें सवार यात्रियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ जाती है. प्रदेश की सड़कों पर हैं 10 लाख से अधिक गौवंश गौवंश की सड़क पर होने की समस्या से निजात पाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में गौशाला खोलने की योजना तैयार की है. कई गौशाला भी बनाई गई हैं. जहां पर लाखों गौवंशो को रखा भी जा रहा है. यहांं पर उनके भरण पोषण की व्यवस्था भी बनाई गई. लेकिन प्रदेश मे बेसहारा गौवंशो की संख्या 10 लाख से भी अधिक है. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने गौशालाओं के बाद गौधाम बनाने का निर्णय लिया गया. ये गौधाम गौशालाओं से काफी विशाल होंगे. जिसमें अधिक संख्या में बेसहारा गौवंशो को रखकर उनकी देखभाल की जाएगी. रीवा में होगा प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा गौधाम ग्वालियर लाल टिपारा गौधाम है लेकिन अब रीवा के मनगवां विधानसभा में स्थित हिनौती ग्राम पंचायत में जिस गौधाम का निर्माण हो रहा है वह प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम होगा. इस गौधाम की लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से अधिक होगी. जबकी इसका क्षेत्रफल 1303 एकड़ का होगा. वर्तमान में यहां पर 30 हजार से ज्यादा गौवंशो को रखा गया है. जिनके भरण पोषण के साथ ही देखरेख की जा रही है. जल्द ही यहां पर गौवंशो की संख्या बढ़ाकर 50 हजार से अधिक कर दी जाएगी. वर्तमान में हैं 30 हजार गौवंश प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों से मनगवां विधानसभा के हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम बनाए जाने की सौगात मिली. जिसके बाद बीते कुछ माह पूर्व ही उप मुख्यमंत्री के द्वारा हिंनौती मे भूमि पूजन किया गया था. वर्तमान में इस गौशाला का निर्माण कार्य चल रहा है. अभी इस गौधाम में 30 हजार से अधिक गौवंशो को रखा गया गया है, जिनकी देख रेख की जा रही है. जल्द ही गौधाम विस्तार करते हुए अधिक क्षमता वाला गौधाम बनाया जाएगा, जहां पर 50 हजार से भी अधिक गौवंशो को रखा जाएगा. ‘एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बनाने का होगा प्रयास’ मनगवां विधायक नरेन्द्र प्रजापति ने बताया कि “हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम का निर्माण कार्य चल रहा है. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के दिशा निर्देशन मे गौधाम बनाया जा रहा है. वर्तमान में 30 हजार गौवंश वहां पर रखे गए हैं. गौधाम में जल्द ही एक रेस्ट हाउस का भी निर्माण होगा. यहां से एक प्रतिनिधि मंडल राजस्थान के पथमेड़ा गया था और वहां के गौधाम को देखकर उसी के आधार पर मनगवां में गौधाम का निर्माण कार्य किया जा रहा है. प्रयास किया जाएगा की यह गौधाम एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बने.”

वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी, कब्रिस्तानों पर बने सरकारी दफ्तरों पर चलेंगे बुलडोजर

भोपाल नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें। वक्फ रेकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कब्जे कब्रिस्तानों पर हैं। करीब 100 कब्रिस्तान खत्म हो चुके हैं। इनमें कहीं बस्तियां हैं तो कहीं काम्पलेक्स तो सरकारी दफ्तर भी काबिज हैं।  बोर्ड के रेकॉर्ड में राजधानी में 7700 वक्फ सम्पत्तियां हैं इसमें 135 कब्रिस्तान हैं। लेकिन इनमें से 30 ही बचे हैं। कब्रिस्तानों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जमीयत के सचिव इमरान हारून के मुताबिक वर्तमान में भोपाल टॉकीज चौराहा, पुराना आरटीओ ऑफिस, नरेला संकरी, कोलार, जहांगीराबाद सहित कई इलाकों में कब्रिस्तानों के नामोनिशान भी नहीं बचा। पीएचक्यू के पास सरकारी दफ्तर के पीछे कब्रों के निशान अब भी हैं। वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी है। राजस्व रेकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। इसके आधार पर बोर्ड का रिकॉर्ड भी अपडेट होगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के मुताबिक प्रशासन को सभी की जानकारी दी चुकी है। इमरान हारून ने बताया कि शहर में करीब 70 प्रतिशत कब्रिस्तान खत्म हो गए हैं। कब्रिस्तान पर बस्तियां बस गई हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। नए बिल से निजी कब्जों पर तो कार्रवाई संभव है सरकारी के लिए क्या होगा कुछ पता नहीं। उसके बदले बोर्ड क्या सरकार से जमीन लेेगी। मुस्लिम महासभा के मुन्नवर अली ने बताया कि ये भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। बीते साल ही शहर के कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी की बात सामने आई। निजी कब्जेधारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जिन जमीनों पर सरकार का कब्जा है उनके बदले क्या होगा। कब्रिस्तान के बदले जमीन मिलनी चाहिए। जानें वक्फ के नए कानून में क्या है वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर… सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी? सच्चाई : वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं। सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा? सच्चाई : एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।   सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी? सच्चाई : कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं। सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे? सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है। सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी? सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है। क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है? सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा। धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी? सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो। सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी? सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है।

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए 120 बीघा जमीन की सहमति मिल चुकी

इंदौर  एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के किसान जमीन देने पर सहमत होते जा रहे हैं। बीते दिन दो विधायकों और जमीन मालिकों के साथ एमपीआइडीसी की बैठक हुई। मौके पर ही कुछ जमीन मालिकों ने करीब 40 बीघा जमीन देने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। अब तक 120 बीघा जमीन देने पर सहमति बन गई है।  एमपीआइडीसी के ऑफिस में हुई बैठक में विधायक उषा ठाकुर, मधु वर्मा और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 50 से अधिक जमीन मालिक व किसान मौजूद थे। प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देकर कई लोगों की शंका का समाधान किया गया। सवाल किया गया कि यह कब पूरा होगा तो एमपीआइडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बताया कि जमीन मिलने के बाद दो साल में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। पहली बार सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड किसी योजना में दे रही है। कॉरिडोर के तैयार होने से क्षेत्र और इंदौर के विकास को नई उड़ान मिलेगी। बच्चों को रोजगार मिलेगा। समय पर पूरी होने की उम्मीद एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों के हर सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, उन्हें मिलने वाले विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत शुरू कर सकेंगे। जमीन मालिकों ने भी इस बात पर संतोष जताया कि परियोजना समय पर पूरी होने की उम्मीद है। मिलेंगे रोजगार के अवसर उनका कहना था कि इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों का कहना है पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है, और अब जब हमें 60त्न विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दी जा रही है, तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। समय पर दर्ज कराएं सहमति राजेश राठौड़ ने कहा हमारा लक्ष्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप देना है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें किसान न केवल अपनी जमीन का उचित प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास के साझेदार भी बनेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सहमति दर्ज कराएं और इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।  जिला प्रशासन द्वारा भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। ग्राम रिजलाय में एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने एक अलग बैठक ली, जिसमें कई जमीन मालिक शामिल हुए। इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और किसानों ने परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया। प्रशासन का यह प्रयास है कि हर किसान की सहमति बिना किसी दबाव के, उनकी मर्जी से ली जाए। सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन बैठक में महू विधायक उषा ठाकुर ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की हर मांग को पूरा किया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जमीन देने वाले किसानों को 60 फीसदी विकसित प्लॉट मिलेगा। यह योजना स्वर्णिम भारत के निर्माण का एक कदम है। उद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की छोटी-छोटी शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रशासन और एमपीआईडीसी के अधिकारी हर कदम पर उनके साथ हैं। राऊ विधायक मधु वर्मा भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने परियोजना को क्षेत्र के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि किसानों के लिए भी आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। जिस गांव में जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सडक़ के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी। इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे विकास कार्य में कोई बाधा न आए। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि उन्हें अपनी जमीन के बदले 60त्न विकसित भूखंड मिलेंगे। ये भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानी किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। इससे किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका मिलेगा और वे इन भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे। सहमति देने की प्रक्रिया जमीन मालिक अपनी सहमति एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर में जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसकी पावती उन्हें दी जाएगी। सहमति मिलने के बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और इसके आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी। रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋ ण नहीं है। यदि जमीन पर ऋण है, तो संबंधित बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देना होगा। रजिस्ट्री के बाद किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार भूखंड आरक्षित कर सूचित किया जाएगा और परियोजना पूरी होने पर इनका कब्जा और रजिस्ट्री उनके नाम होगी। समस्या आई तो हम रहेंगे साथ विधायक ठाकुर ने किसानों से कहा कि औद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा। किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा खड़ी हूं। वर्मा ने योजना को क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी। दावे-आपत्तियों का अंतिम निराकरण कॉरिडोर को लेकर एमपीआइडीसी ने दावे-आपत्ति बुलाए थे, जिसमें 700 लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। पहले चरण में सभी दावे-आपत्तियों को सुना गया था। अब सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड देकर जमीन ले रही है तो बड़ी संख्या में किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं। मंगलवार को आपत्तिकर्ताओं की आखिरी सुनवाई होगी। बताया गया है कि कुछ कॉलोनाइजरों की भी जमीन है और वे अड़े हुए हैं।

नैचुरल गैस कनेक्शन देने की प्लानिंग कर रोडमेप प्रस्तुत करें, आयुक्त खाद्य श्री शर्मा ने की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन की समीक्षा

भोपाल हितग्राहियों को पाइप्ड नैचुरल गैस कनेक्शन देने की प्लानिंग कर इसका रोडमेप विभाग को शीघ्र प्रस्तुत करें। आयुक्त खाद्य श्री कर्मवीर शर्मा ने यह निर्देश सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की समीक्षा के दौरान दिये। प्रदेश में शहरी गैस वितरण नेटवर्क विकास एवं विस्तार नीति 2025 जारी की गई है। इन नीति के माध्यम से प्रदेश में जहां घर-घर गैस की पहुंच आसान होगी, वहीं वाहनों में स्वच्छ ईंधन भरने के लिये सीएनजी गैस स्टेशन का विस्तार होगा। नीति लागू होने से स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार होने के साथ ही पर्यावरण की रक्षा भी हो सकेगी। इस नीति से प्रदेश में बड़े पैमाने पर अधोसंरचना का निर्माण होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। शहरी गैस वितरण संस्थाओं के लिये सिंगल विंडो सिस्टम से अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। अभी तक 3.17 लाख घरों में पीएनजी कनेक्शन समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक 3 लाख 17 हजार घरों में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराये गये हैं। इसी तरह 368 सीएनजी स्टेशन स्थापित किये गये हैं। आयुक्त खाद्य श्री शर्मा ने इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये।  

म.प्र. पॉवर जनरेशन कंपनी की ताप विद्युत इकाइयों का 14 बार 100 दिनों से अधिक निरंतर संचालन का नया रिकार्ड

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक और उपलब्धि अपने नाम की है। पॉवर कंपनी की ताप विद्युत इकाइयों ने सतत् व निर्बाध संचालन में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए कुल 14 बार 100 दिनों से अधिक तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड कायम किया। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इन इकाइयों ने 13 बार 100 से अधिक दिनों तक निरंतर संचालन में रहने का रिकार्ड बनाया था। यह उपलब्ध‍ि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत इकाइयों की क्षमता व संचालन की विश्वसनीयता का प्रतीक है। ताप विद्युत इकाइयों की इस ऐतिहासिक सफलता पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सभी ताप विद्युत गृह के इंजीनियरों, तकनीशियनों व संचालन टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सफलता कंपनी की तकनीकी दक्षता और ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गर्व की बात है, अपितु यह ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम भी है। चचाई की यूनिट ने 300 दिनों का आंकड़ा किया पार मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर, श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगलिया व सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की इकाइयों ने निरंतर चलने की इस शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 250 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने लगातार 300 दिनों का आंकड़ा पार कर शानदार प्रदर्शन किया। तीन यूनिट ने बनाया 200 दिनों से अधिक उत्पादन करने का रिकार्ड पॉवर जनरेटिंग कंपनी की तीन इकाइयों ने लगातार 200 से अधिक दिनों तक संचालन का आंकड़ा पार किया। इनमें संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 5, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 10 व श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया की 660 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 3 ने 200 दिनों से लगातार विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान बनाया। 100 से 200 दिन तक निरंतर संचालन मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 ने 181 दिन, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 210 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 2 ने 121 व 115 दिन, इसी विद्युत गृह की 210 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 4 ने 162 दिन और यूनिट नंबर 5 ने 109 दिनों तक सतत् व निर्बाध विद्युत उत्पादन किया। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की 660 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 3 ने 141 व 660 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 4 ने 176 व 100 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन किया। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावॉट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने 170 व यूनिट नंबर 11 ने 138 दिनों तक सतत् रूप से विद्युत उत्पादन किया। इनमें से संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 4 व 5, अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 और श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की यूनिट नंबर 3 वर्तमान में भी सतत् विद्युत उत्पादन कर रही हैं।  

प्रदेश में ट्रांसमिशन लाइनों एवं एक्स्‍ट्रा हाईटेंशन सब स्टेशनों की हो रही है असेट मेपिंग

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी(एम.पी. ट्रांसको) प्रदेश की अपनी ट्रांसमिशन लाइनों एवं एक्स्ट्रा हाईटेंशन सब स्टेशनों की असेट मेपिंग करवा रहा है। इससे जहां ट्रांसमिशन एलीमेंटस का डिजीटल डाटा एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगा ,वहीं किसी भी इमरजेंसी के समय मटेरियल मैनेजमेंट टाइम और व्यवधान को न्यूनतम करने में सहायता मिलेगी। एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री आर.के. मिश्रा ने बताया प्रदेश की 27900 कि.मी. लाइनों एवं 416 सब स्टेशनों में यह असेट मेपिंग का कार्य चल रहा है। इसके लिये सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डेशबोर्ड के निर्माण का कार्य भी करना है। अलग-अलग मॉडयूल में जानकारी संरक्षित की जा रही है। ट्रांसमिशन कंपनी के लाइन मेंटनेन्स कार्मिकों के साथ सबस्टेशन प्रभारी के मोबाईल पर ऐप से यह पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। सर्वे ऑफ इंडिया के मैप पर की जा रही है मेपिंग ट्रांसमिशन एलीमेंट्स की मैपिंग सर्वे ऑफ इंडिया के मैप को आधार बनाकर की जा रही है जिससे डेटा की सटीक प्रमाणिकता रहेगी। जीपीएस प्रणाली के उन्नत संस्करण डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम(डीजीपीएस) के उपयोग से 1 सेंटीमीटर से 1 मीटर तक के स्थान में सटीकता से मैपिंग हो रही है। यह हैं फायदे असेट मैपिंग से ट्रांसमिशन टॉवरों में कोई समस्या आने पर टॉवर की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी त्वरित मिल जायेगी। ट्रांसमिशन कंपनी के सभी एलीमेंटस का डिजीटाइजेशन होने से व्यवस्थित रिकार्ड रखने में आसानी रहेगी, साथ ही मोबाईल ऐप पर भी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इस मैपिंग में ट्रांसमिशन कंपनी की भूमि का भी रिकार्ड उपलब्ध रहेगा।डेशबोर्ड पर विस्तृत जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध रहेगी।जरूरत के पार्टस, उपकरण आदि के बारे में पूरी जानकारी मिलने से सुधार कार्य और मटेरियल के इंतजामों में लगने वाले समय में कमी आयेगी। सर्वे ऑफ इंडिया के मेप पर की जा रही मैपिंग के अलावा कंपनी सर्वे एवं सॉफ्टवेयर डेवलप करने का कार्य भी कर रही है।  

पश्चिमी रिंग रोड में नई गाइडलाइन के दोगुना मुआवजा दिए जाने पर किसानों और प्रशासन के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी

इंदौर बहुप्रतीक्षित पश्चिमी आउटर रिंगरोड परियोजना को लेकर एक बड़ी बाधा अब दूर हो गई है। जमीन अधिग्रहण को लेकर असहमति जता रहे किसान अब सर्वे के लिए तैयार हो गए हैं। नई गाइडलाइन के दोगुना मुआवजा दिए जाने पर किसानों और प्रशासन के बीच सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसके साथ ही परियोजना को लेकर लंबे समय से रुकी प्रक्रिया अब फिर से गति पकड़ने जा रही है। सहमति बनने के बाद मंगलवार से दो टीमें सर्वे का काम शुरू करेगी। पश्चिम रिंग रोड को लेकर रेसीडेंसी कोठी में जिला प्रशासन, एनएचआई और किसान नेताओं के बीच बैठक हुई। बैठक में नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा देने पर सहमति बन गई। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि किसानों को पुरानी गाइडलाइन पर अवार्ड पारित होगा, लेकिन आर्बिटेशन के माध्यम से नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। 15 दिन में किसानों को अवार्ड पारित होगा। वहीं आरबीडेशन की प्रक्रिया डेढ माह में पूरी करेंगे। इस पर किसानों के साथ सहमति बन गई है। मंगलवार से टीमें सर्वे का काम शुरू करेगी। वर्षाकाल से पहले निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा, ताकि वर्षाकाल से पहले काफी काम पूरे किए जा सके।   विरोध के कारण अटका था काम करीब आठ माह पूर्व इस परियोजना का टेंडर किया गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण में किसानों की असहमति के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। किसानों की मांग थी कि उन्हें उचित दर पर मुआवजा दिया जाए। किसान बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा मांग रहे थे। किसानों के विरोध के कारण प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया रोक दी थी। अब ग्रामीण क्षेत्रो में कृषि भूमि की गाइडलाइन सर्वाधिक बड़ी है। ऐसे में किसान बड़ी गाइडलाइन के दो गुना मुआवजे पर सहमत हो गए।

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