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ग्वालियर में नवनिर्मित विवेकानंद नीडम आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) जल्द ही जनता को समर्पित किया जाएगा

भोपाल ग्वालियर में नवनिर्मित विवेकानंद नीडम आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) जल्द ही जनता को समर्पित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विगत दिवस ग्वालियर ट्रांजिट विजिट में विमानतल पर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान को नीडम आरओबी का निरीक्षण कर शेष कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि शेष कार्य पूर्ण होते ही आरओबी का लोकार्पण किया जायेगा। ग्वालियर जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने भी नीडम आरओबी के शेष कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण कराने को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान व नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय सहित अन्य संबंधित अधिकारियों से चर्चा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उन्होंने कहा कि नव निर्मित आरओबी की कमियों को तत्परता से पूर्ण कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में कलेक्टर श्रीमती चौहान ने शनिवार को नीडम आरओबी का निरीक्षण किया। उन्होंने सेतु निगम के कार्यपालन यंत्री को आरओबी पर किए जा रहे विद्युतीकरण, रोड फिनिशिंग, आरओबी के दोनों ओर की कॉलोनियों को सड़क सुरक्षा मानकों के अनुसार जोड़ने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा कि आरओबी पर समुचित ढंग से रेडियम लगाने और डिवाइडर सहित जरूरत के मुताबिक स्पीड ब्रेकर बनाने की हिदायत भी उन्होंने निरीक्षण के दौरान दी।  

मुख्यमंत्री यादव ने दिल्ली में ‘विक्रमादित्य महानाट्य’ के संबंध में पत्रकारों को संबोधित किया, 12 से 14 अप्रैल को होगा मंचन

नई दिल्ली/ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सुशासन को ध्यान में रखते हुए विभागवार अपने कार्यों को जारी रखे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्येय वाक्य ‘विरासत से विकास की ओर’ हमारे लिए एक पाथेय की तरह सिद्ध हो रहा है। हम विकास कार्यों में विरासत को महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। मध्यप्रदेश में विरासत की बात करें तो 2000 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का शासन काल सुशासन व्यवस्था के एक आदर्श उदाहरण के रूप में परिलक्षित होता है। विक्रमादित्य की जीवन के विविध पक्षों को देखें तो उनकी एक अलग प्रतिमा बनती है। वे एकमात्र ऐसे शासक थे, जिनके जीवन के विविध प्रसंगों से आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। विक्रमादित्य के शासन काल की तुलना सुशासन से करना सर्वश्रेष्ठ तुलना है। उनके द्वारा किए गए कार्य और प्रयोग आज भी प्रासंगिक हैं।     आज हमारे पास हिजरी और विक्रम संवत हैं। इसमें विक्रम संवत उदार परंपरा को लेकर चलने वाला संवत है, अर्थात संवत चलाने वाले के लिए शर्त है कि जिसके पास पूरी प्रजा का कर्ज चुकाने का सामर्थ्य है, वो संवत प्रारंभ कर सकता है। यानी कि शासक के पास इतना धन हो कि वह प्रजा को कर्ज मुक्त कर दे और उद्योग-व्यापार के लिए भी इतना धन उपलब्ध कराए कि उद्योगपति इसे चलाने के लिए भविष्य में कर्ज न लें। यह बात दुनिया के लिए अविश्वसनीय हो सकती है। लेकिन सम्राट विक्रमादित्य के कार्यकाल में यह हुआ।     1 अप्रैल से विक्रम संवत 2082 का शुभारंभ हुआ है। हमारे यहां संवत के भी 60 अलग-अलग प्रकार के नाम हैं। इस तरह से 2082 को धार्मिक अनुष्ठानों के संकल्प में सिद्धार्थ नाम दिया गया है। अगर अंग्रेजी के 2025 को कुछ और बोला जाए तो यह संभव नहीं है, लेकिन विक्रम संवत में वर्ष के नाम के भाव अलग-अलग होते हैं। इन 60 नामों का चक्रीकरण बदलता रहता है।     पहली बार सम्राट विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था में ही नवरत्नों का समूह देखने को मिलता है। उन्होंने नवरत्नों के समूह में प्रत्येक को 5 से 7 मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी थी। विक्रमादित्य ने अपने देश को गुलामी की दास्तां से मुक्त कराया। जब उन्होंने अपने पिता के बाद शासन संभाला तो उनके नवरत्नों में सभी अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ थे।     उन्होंने सुशासन की व्यवस्था स्थापित की। उनके मंत्रि-परिषद में शामिल नवरत्न इनते सक्षम थे कि किसी कारण से विक्रमादित्य उपस्थित न हो तब भी शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती थी। 300 साल पहले शिवाजी महाराज के अष्ट प्रधान की पद्धति में यही व्यवस्था नजर आती है। उनके राज्य में नहीं होने पर भी शासन व्यवस्था चलती रही।     सम्राट विक्रमादित्य दानशीलता, वीरता, प्रजा का ध्यान रखने में अग्रणी थे। विक्रम-बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां हम सभी ने सुनी हैं। विक्रमादित्य ने शासन की इनती अच्छी व्यवस्था स्थापित कर ली थी कि हर राजा उनके जैसा शासन करना चाहता था।     विक्रमादित्य का मूल नाम सहशांक था, लेकिन जो उल्टे क्रम को सूत्र में बदल दे, वो विक्रम और जो सूर्य के समान प्रकाशमान रहे वो आदित्य। विक्रमादित्य एक उपाधि है, जो उन्हें मिली थी। कई राजाओं ने स्वयं को विक्रमादित्य से जोड़ा है, लेकिन आदि विक्रमादित्य एक ही हैं और उनकी राजधानी उज्जैन थी।     विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था सुशासन का आधार है। वे एक आदर्श, वीर, जनकल्याणकारी, जनहितैषी सम्राट थे। जिन्होंने कभी खुद को राजा कहलाना पसंद नहीं किया। उन्होंने अपने राज्य में 2000 साल पहले गणतंत्र की स्थापना की थी।     विक्रमादित्य के विराट व्यक्तित्व को सबके सामने लाने के लिए महानाट्य की कल्पना की गई है। जब इसका मंचन दिल्ली में 12, 13 और 14 अप्रैल को लालकिले पर होगा तो इसमें हाथी, घोड़ा, पालकी के साथ 250 से ज्यादा कलाकार अभिनय करते नजर आएंगे।     महानाट्य में शामिल कलाकार निजी जीवन में अलग-अलग क्षेत्र के प्रोफेशनल्स हैं। महानाट्य में वीर सर समेत सभी रस देखने को मिलेंगे। यह गौरवशाली इतिहास को विश्व के सामने लाने का मध्यप्रदेश सरकार का एक प्रयास है। इस कालजयी रचना को सबसे सामने रखने में दिल्ली सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। इससे पूर्व हैदराबाद में विक्रमादित्य महानाट्य का आयोजन हो चुका है।     विक्रमादित्य ने अपने जीवनकाल में मथुरा और अयोध्या जैसे 300 से अधिक स्थानों पर मंदिरों का निर्माण उन्होंने कराया था। विक्रमादित्य काल के जैसे प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में गरीबों को मकान बनाने में मदद की जा रही है। देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सक्षम और सशक्त बन रहा है। यही तो रामराज्य है, जो विक्रमादित्य काल में था।

वैशाली नदी के जीर्णोद्धार को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिया नोटिस

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने वैशाली नदी मुरार को लेकर दायर जनहित याचिका में सुनवाई की है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर निगम को नोटिस जारी कर नदी जीर्णोद्धार से जुड़ी जानकारी मांगी है. याचिकाकर्ता ने इस जनहित याचिका के जरिए मांग की है कि नदी के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है जिसके लिए अब नगर निगम की सहायता की आवश्यकता है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से भी कहा है कि नगर निगम इस मामले में सहयोग करेगी. जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं. वहीं इस काम को याचिकाकर्ता भी गंभीरता से करते रहे, जैसे अभी कर रहे हैं. अब इस मामले की सुनवाई 5 मई को होगी.

जल गंगा संवर्धन अभियान : कुओं, बावड़ियों और तालों के पुनर्जीवित होने से बढ़ने के साथ सुरक्षित रहेगा भूजल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में जन सहयोग उमड़ रहा है। इसमें निरंतर जन सहभागिता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के माँ क्षिप्रा के तट रामघाट से 30 मार्च को प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी जुटने से स्पष्ट है कि प्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के ‘जन सहयोग से जल संरक्षण’ की मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर अग्रिम पंक्ति में आ गया है। राज्य सरकार ‘खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। इसे सफल बनाने के लिए “जल गंगा संवर्धन अभियान” में वर्षा जल संचयन, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उज्जैन में जन सहभागिता से आगे बढ़ रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उज्जैन से प्रारंभ किये गये अभियान में जल संरक्षण, जल स्त्रोंतो के पुनरूद्धार, भू-जल स्तर सुधार, पुराने कुओं-बावड़ियों के जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों की साफ-सफाई, पौध-रोपण, छोटी नदियों, तालाब जैसी जल संरचनाओं के संरक्षण करने के लिए चल रहे इस अभियान में अब जन सहयोग भी उमड़ने लगा है। उज्जैन जिला पंचायत सीईओ श्रीमति जयति सिंह के साथ जनपद पंचायत उज्जैन की टीम ने भी जन सहयोग से चिंतामण बावड़ी, गोठड़ा बावड़ी, राणावड़ बावड़ी और बामोरा बावड़ी की साफ-सफाई की। इंदौर में धर्मगुरु बता रहे हैं जल की महत्ता इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरक्षण की महत्ता जन-जन तक पहुँचाने के लिए धर्मगुरु भी जुड़ रहे हैं। धर्मगुरु अपने उपदेशों से जल की महत्ता जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इनकी प्रेरणा से नागरिक श्रमदान कर बावड़ी, कुँओं और तालाबों को संवार रहे हैं। इन्दौर जिले के बरलाई जागीर गांव में चारभुजा नाथ मंदिर सांवेर के गुरु आनंदाचार्य ने आश्रम के बटुकों के साथ पूजन-अर्चन किया। मंत्रोच्चार के साथ जल का पूजन भी किया गया। उन्होंने उपस्थित जनों को जल की महत्ता समझाते हुए कहा कि जल की एक-एक बूँद जीवनदायी होती है। हमारी धार्मिक मान्यताओं में भी जल का विशेष स्थान है। इसलिए सभी को मिलकर जल को सहेजने चाहिये। आनंदाचार्य के आह्वान पर श्रद्धालुओं ने बरलाई जागीर की बावड़ी के लिये श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान”, प्रदेश में जल की प्रचुर उपलब्धता और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। सीधी में जन श्रमदान से जल संरचनाओं की सफाई, चौपाल संगोष्ठियों से जन जागरण मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद ने महाविद्यालयों के विद्यार्थियौं के सहयोग से सीधी की सबसे महत्वपूर्ण जल संरचना गोपालदास तालाब में से गाद निकाल कर उसकी साफ-सफाई के लिए श्रमदान का क्रम प्रारंभ किया है, जो अलग-अलग जल संरचनाओं की सफाई के रूप में निरंतर जारी है। इसके साथ ही जल संरक्षण के प्रति जन सामान्य को जागरुक बनाने के लिए चौपाल संगोष्ठी, दीवार लेखन और निबंध-कविता आदि साहित्यिक प्रतियोगिताओं के आयोजन भी कराए जा रहे हैं। नवांकुर संस्था जन-चेतना ग्राम विकास समिति ने सीधी जिले के आदर्श ग्राम नदहा की तिरचुली नदी में श्रमदान से स्वच्छता अभियान चलाया। जनता ने श्रमदान कर गांव के हैंडपम्पों के आसपास और जलाशय की सफाई एवं गहरीकरण किया। श्योपुर में सीप नदी के गिर्राज घाट पर श्रमदान से शुरू हुआ नदी सफाई का क्रम श्योपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान में जन-अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ने समाजसेवियों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से सीप नदी के गिर्राज घाट पर साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। सिवनी में जन-सहयोग के लिए जागरुकता रैली औऱ श्रमदान सिवनी जिले में जल गंगा संवर्धन-अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में नदी, कुंओं, तालाबों, बावड़ियों सहित अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही इस अभियान में जनसमुदाय को जोडने के लिए जागरूकता रैली और दीवार लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।  

मध्य प्रदेश में कर्मचारियों की लगी लॉटरी, वेतन-भत्ते में 10% तक का इजाफा, जानिए कितना होगा फायदा?

भोपाल   मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को डॉ. मोहन यादव की सरकार ने चैत्र नवरात्रि त्योहार के दौरान खुशियों की एक सौगात दी है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों ने के वेतन में 5 से 10 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। कर्मचारियों को  मासिक वाहन भत्ता, दैनिक भत्ता, हाउस रेंट भत्ता के साथ ही अनुग्रह राशि का भी लाभ मिलेगा। मासिक वाहन भत्ता     इसके तहत 201 से 300 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हे  1350 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 550 रुपये मिलेंगे।     301 से 405 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हे  2050 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 750 रुपये मिलेंगे।     451 से 600 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हें  2500 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 950  रुपये मिलेंगे।     601 से 800 किमी की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हें  3000 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 1100 रुपये मिलेंगे।     800 किमी से ज्यादा की यात्रा अगर कर्मचारी अपने वाहन से करेंगे तो उन्हें  3700 रुपये का भत्ता मिलेगा जबकि दूसरे साधन से इतनी यात्रा करने पर 1250 रुपये मिलेंगे। दैनिक भत्ता     A श्रेणी- 375 रुपये (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए550 रुपये)     B श्रेणी- 300, रुपये (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 440 रुपये)     C श्रेणीः 225 रुपये(भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 330 रुपये)      D श्रेणी: 185 रुपये (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 280 रुपये)     E श्रेणी: 125, (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के लिए 190 रुपये) हाउस रेंट भत्ता     7 लाख या इससे अधिक जनसंख्या वाले शहरों में मूल वेतन का 10%     3 लाख से अधिक पर 7  लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में  मूल वेतन का 7%     3 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में मूल वेतन का 5% इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने अधिकारी-कर्मचारियों की श्रेणियों के हिसाब से हवाई, रेल और बस यात्रा पर भत्ता, भोजन भत्ता, यात्रा के दौरान ठहरने की पात्रता, ट्रांसफर होने पर सामान परिवहन और शासकीय सेवकों को स्थाई यात्रा भत्ते में भी वृद्धि की है। यह उन्हें वेतन व श्रेणी के हिसाब से मिलेंगे। अनुग्रह राशि भी बढ़ी वहीं राज्य सरकार ने नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को वेतनमान में बैंड वेतन के योग के छह माह के बराबर अधिकतम 50 हजार रुपए तक अनुग्रह राशि दी जाती है। अब इसे बढ़ाकर 125000 रुपए स्वीकृत की गई है। वहीं सरकार डॉक्टरों को वेतन बैंड में समान वेतन तथा ग्रेड वेतन में नॉन प्रक्टिस एलांउस 25 प्रतिशत था, अब यह 20 प्रतिशत मिलेगा।

MPIDC के इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर को लेकर सरकार ने 60% विकसित भूखंड देने का फैसला किया

इंदौर  इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर(Indore-Pithampur Economic Corridor) के लिए सरकार ने अपनी लैंड पुलिंग पॉलिसी बदल दी। किसानों को जमीन के बदले 60 फीसदी विकसित भूखंड मिलेंगे। अब एमपीआइडीसी भी बदलाव करने जा रहा है। विभाग किसानों तक पहुंचने जा रहा है। गांव-गांव में शिविर लगाकर सहमति पत्र लिया जाएगा।  एमपीआइडीसी के इस कॉरिडोर को लेकर सरकार ने 60% विकसित भूखंड देने का फैसला किया है। 20.24 किमी लंबे कॉरिडोर में 1291 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। अब तक सवा सौ बीघा जमीन के पत्र आए असर यह हुआ कि नियमित एमपीआइडीसी के दफ्तर में किसान सहमति पत्र लेकर पहुंच रहे हैं। अब तक सवा सौ बीघा जमीन के पत्र आ गए हैं तो रोज बड़ी संख्या में किसानों के मिलने का सिलसिला जारी है। मालूम हो, 1291 हेक्टेयर जमीन के करीब 3500 से अधिक मालिक हैं। कई लोगों के पास जमीन के अलग-अलग हिस्से भी हैं। कार्यालय आना आसान भी नहीं होता, जिसको देखते हुए गांवों में शिविर लगाए जाएंगे। कलेक्टर ने ली बैठक  एमपीआइडीसी कार्यालय पर कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने और जमीन मालिकों से बात कर सहमति लेने के निर्देश दिए। भूमि अधिग्रहण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में एमपीआइडीसी के राजेश राठौड़, जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन, एडीएम ज्योति शर्मा, एसडीएम गोपाल वर्मा, राकेश मोहन त्रिपाठी, राकेश परमार आदि मौजूद है।

EV दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से होने वाली दुर्घटनाओं में 2024 में 89 लोगों की जान चली गई। 868 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा राज्यसभा में पेश किया गया। इसके अनुसार ईवी दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर है। हालांकि, 2022 से मौतों की संख्या में कमी आई है, लेकिन दुर्घटनाएं 2023 से स्थिर हैं। सरकार ईवी बैटरी की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है और उसने सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए हैं। कुल 663 EV दुर्घटनाएं हुईं। उत्तराखंड 369 मौतों के साथ पहले स्थान पर है। मध्य प्रदेश से ऊपर अन्य राज्य बिहार (230 मौतें), महाराष्ट्र (154 मौतें), राजस्थान (144 मौतें), पश्चिम बंगाल (133 मौतें), असम (117 मौतें) और कर्नाटक (99 मौतें) हैं। भारत में सड़क दुर्घटनाएं रिपोर्ट में खुलासा अच्छी बात यह है कि मध्य प्रदेश में EV दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या में पिछले तीन सालों में कमी आई है। यह जानकारी राज्यसभा में दी गई। पूरे देश में 2024 में EV से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 7,575 थी। इनमें 1,947 लोगों की जान गई और 9,318 लोग घायल हुए। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ‘भारत में सड़क दुर्घटनाएं’ नाम से एक वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करती है। यह रिपोर्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले आंकड़ों पर आधारित होती है। राज्य सरकारें डालती हैं डाटा मंत्रालय ने बताया है कि एमओआरटीएच द्वारा ईवी से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं के बारे में अलग से कोई जानकारी नहीं जुटाई जा रही है। हालांकि, MoRTH के पास एक इलेक्ट्रॉनिक वेब पोर्टल है – eDAR। यह सड़क दुर्घटना के आंकड़ों की रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए एक केंद्रीय जगह है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू कर दिया गया है। पोर्टल पर डेटा राज्य सरकारें डालती हैं। मध्य प्रदेश में EV से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी आई है। 2022 में, EV दुर्घटनाओं की कुल संख्या 1067 थी, जिसमें 250 लोगों की जान चली गई। 2023 में यह संख्या घटकर 670 हो गई, जिसमें 140 लोगों की जान गई। 2024 में दुर्घटनाओं की संख्या 663 रही और 89 लोगों की जान गई। सुझाव से संशोधन सरकार ने राज्यसभा में यह भी बताया कि EV बैटरी में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। MoRTH ने बैटरी और उसके घटकों, BMS (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) और संबंधित प्रणालियों के लिए सुरक्षा मानकों का सुझाव देने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई थी। समिति के सुझावों के आधार पर MoRTH ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (AIS) में संशोधन किया है। ये संशोधन 1 दिसंबर, 2022 से लागू हैं। AIS के कुछ नियम 31 मार्च, 2023 से प्रभावी हैं। इन संशोधनों से EV बैटरी और उसके घटकों के लिए मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं को बढ़ाया गया है। इसके अलावा, MoRTH ने 19 दिसंबर, 2022 को एक नोटिफिकेशन जारी किया है। यह नोटिफिकेशन सभी प्रकार के EV, जिनमें क्वाड्रिसाइकिल, ई-रिक्शा, दोपहिया और चार पहिया वाहन शामिल हैं, के लिए उत्पादन की अनुरूपता (COP) की आवश्यकताओं से संबंधित है। सरकार ने यह जवाब दिया।

अपने राजा के जन्मोत्सव के लिए पूरा शहर सजकर तैयार हो गया

 ओरछा बेतवा नदी पर बसा ऐतिहासिक शहर ओरछा रामनवमी के लिए सजकर तैयार हो गया है। इसे छोटी अयोध्या भी कहा जाता है क्योंकि यहां राजा राम का भव्य व विश्वभर में मशहूर मंदिर(Ram Raja Sarkar Mandir) है। हर साल रामराजा सरकार के दर्शन के लिए 7-8 लाख श्रद्धालु आते हैं। रामनवमी पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। राम नवमी को लेकर शहर में अब उत्साह चरम पर है। पूरा शहर सजकर तैयार अपने राजा के जन्मोत्सव(Ram Navami 2025) के लिए पूरा शहर सजकर तैयार हो गया है। राम जन्मोत्सव परिवार द्वारा सुबह से प्रभातफेरी निकाल कर हर घर में आमंत्रण दिए जा रहे है तो शाम को भगवान राम की जगह-जगह महाआरती की जा रही है। शुक्रवार की शाम 8.30 बजे संगम गार्डन में राम जन्मोत्सव परिवार ने महाआरती का आयोजन किया। वहीं अयोध्या में विराजमान रामलला की 5 फीट की सुंदर प्रतिमा की आरती की गई। ये प्रतिमा इस बार 6 अप्रैल को शोभायात्रा में मुंबई की ढोल पार्टी के साथ निकाली जाएगी। ऐसी हैं तैयारियां रामराजा सरकार के मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। इसकी सजावट के लिए देश की राजधानी दिल्ली से दो ट्रक भरकर फूल मंगवाए गए। रामनवमी पर रामराजा सरकार पालने में विराजमान होंगे, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा।

पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के छह शहरों में 582 ई-बसों(E-Bus) का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इन बसों का संचालन नगरीय निकायों को महंगा पड़ सकता है क्योंकि इनके संचालन के लिए जीसीसी यानी ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रेक्ट मॉडल अपनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बस, ड्राइवर, कंडक्टर और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही रहेगी। सरकार केवल प्रति किलोमीटर के हिसाब से उसे भुगतान करेगी। प्रतिदिन न्यूनतम 180 किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा। इंदौर में अभी एक एजेंसी 65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से ई-बसें संचालित कर रही है।  भोपाल की सड़कों पर अगले छह महीनों में दो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। पहला बदलाव जुलाई तक भोपाल मेट्रो की शुरुआत है। दूसरा बदलाव शहर की बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का जुड़ना है। पीएम ई-बस योजना के तहत राज्य के 6 शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर) में पीपीपी मॉडल पर 552 शहरी ई-बसें चलाई जाएंगी। इसे पिछले फरवरी में मंजूरी मिली थी। शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. परीक्षित जाडे ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि हम उम्मीद करते हैं कि पीएम ई-बस योजना के तहत ये इंट्रासिटी बसें 2025 के मध्य या अंत तक शुरू हो जाएंगी। इस बदलाव का उद्देश्य हजारों छात्रों और अन्य सार्वजनिक परिवहन उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन के वित्तीय बोझ को कम करना है। महामारी की समाप्ति के बाद से ये लोग सब्सिडी वाले बस पास का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।  यदि नई ई-बसों का कॉन्ट्रेक्ट 60 रुपए प्रति किलोमीटर में होता है तो एक बस को 180 किमी का प्रतिदिन 10800 रुपए का भुगतान होगा, चाहे उसमें सवारियां बैठे या नहीं। इस प्रकार बसों का संचालन करने वाली एजेंसी को 582 बसों का प्रतिदिन 62 लाख 85 हजार 600 रुपए मिलेगा। एक महीने में यह राशि 18 करोड़ 85 लाख 68 हजार रुपए होगी। टेंडर जारी पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी। इसके लिए कंपनी की तलाश शुरू हो गई है। रेट तय करने के लिए सरकार ने टेंडर जारी किया है। जो कंपनी सबसे कम रेट देगी उसे संचालन का काम मिलेगा। यह सुविधा तीन माह के अंदर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कुल 582 ई-बसें चलेंगी। इनमें से 472 बसें नौ मीटर वाली होंगी जिनमें लगभग 32 सीट होंगी। जबकि 110 बसें सात मीटर वाली होंगी जो 21 सीटर होंगी। कहां कितनी ई-बसें चलेंगी     भोपाल – 100     इंदौर – 150     जबलपुर – 100     उज्जैन – 100     ग्वालियर – 100     सागर – 32 टिकट एजेंसी का जिम्मा निकाय का इन बसों के चार्जिंग की व्यवस्था भी मिलजुलकर की जा रही है। चार्जिंग स्टेशन और डिपो राज्य सरकार बनवाएगी। इसकी 60 फीसदी राशि केन्द्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य को देना होगी। सरकार सिर्फ जमीन और इंफ्रा विकसित करेगी। चार्जिंग गन बसों का संचालन करने वाली कंपनी ही लगाएगी और बिजली का बिल भी कंपनी ही चुकाएगी। ऐसे 11 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जबकि टिकटिंग एजेंसी संबंधित निकाय द्वारा तय की जाएगी। टिकट का पैसा निकाय के पास जाएगा, इसी से बसों का भुगतान होगा। केंद्र 12 साल तक राशि देगी बसों के संचालन के लिए प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान होगा। इसके लिए केंद्र सरकार प्रति किलोमीटर के अनुसार 22 रुपए देगी। केंद्र यह राशि 2037 तक यानी 12 साल तक देगी। जो राशि बचेगी वह किराए से कवर होगी। जहां किराए से कवर नहीं हो पाएगी उसका भुगतान संबंधित नगरीय निकाय को करना होगा। तीन महीने का अग्रिम भुगतान केंद्र ने इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की है कि ई-बसों को नियमित भुगतान होता रहे। इसके लिए बैंक में एक एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा। इसमें राज्य सरकार को कम से कम तीन माह का एडवांस पेमेंट जमा कराना होगा। यदि निकाय भुगतान करने में विफल रहते हैं तो इस अकाउंट में से संचालनकर्ता कंपनी को भुगतान हो जाएगा। बीसीएलएल को मिलेंगी 100 ई-बसें सूत्रों के अनुसार एमपी यूएडीडी यात्रियों की यात्रा लागत को सब्सिडी देने के लिए एक स्थिरता मॉडल पर काम कर रहा है। इसके साथ ही बेड़े की व्यवहार्यता को भी बनाए रखा जाएगा। भोपाल नगर निगम की सहायक कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही है। यह राज्य सरकार के समर्थन और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर निर्भर है। बीसीएलएल को इस योजना के तहत 100 ई-बसें मिलेंगी। एमपी नगर में 5000 से ज्यादा छात्रों का आना जाना महामारी से पहले भोपाल में 35,000 से अधिक बस यात्री मेयर के बस पास से असीमित यात्रा का लाभ उठाते थे। मिसरोद से एमपी नगर आने-जाने वाले जेईई कोचिंग के छात्र सार्थक और हर्षित ने इस लाभ का अनुभव कभी नहीं किया। एमपी नगर में लगभग 5,000 छात्र 5 किमी के दायरे में कोचिंग क्लासेस आते-जाते हैं। ये छात्र प्रति माह यात्रा पर अनुमानित 35 लाख रुपए खर्च करते हैं। प्रति छात्र औसतन 25 रुपये प्रतिदिन खर्च होता है। महामारी से पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मेयर पास के समान एक स्टूडेंट बस पास इन यात्रा लागतों को आधे से भी कम कर सकता है। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी सौगात हर्षित ने कहा कि अगर स्टूडेंट पास लागू होता है, तो केवल कोचिंग क्लासेस के लिए छात्रों की बचत 50% से अधिक हो जाएगी। जिन छात्राओं की कोचिंग क्लासेस देर शाम को खत्म होती हैं, उन्हें परिवहन पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जल्दी आने-जाने के लिए ई-रिक्शा लेने से खर्च तीन गुना बढ़ जाता है। इससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है। भोपाल की मेयर मालती राय से संपर्क करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर IMR तैयार किया जा रहा, पर्यावरण और कनेक्टिवटी पर रहेगा जोर

इंदौर  इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) तैयार किया जा रहा है। कंसल्टेंट कंपनी ने प्राथमिक रिपोर्ट पेश कर दी है, जिसमें क्षेत्र के इकट्ठा हुए डाटा के आधार पर खाका खींचा गया है। अब उसमें मंत्री व कलेक्टर के सुझाव को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद कंपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करेगी। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुस के हजारों गांव जुड़ेंगे इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर की 29 तहसीलों के 1756 गांवों को मिलाकर 2051 के हिसाब से इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्लान तैयार किया जा रहा है। 9336 वर्ग किमी एरिया में कनेक्टिविटी, उद्योग और पर्यावरण का संतुलन बनाया जाएगा ताकि बेतरतीब विकास पर नियंत्रण किया जा सके। इसको तैयार करने का काम इंदौर की मेहता एंड एसोसिएट कंपनी को दिया गया है, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर दी है। दूसरी रिपोर्ट के लिए तैयारी शुरू प्लान तैयार करने के काम में कंपनी के डेढ़ दर्जन से अधिक विशेषज्ञ पिछले दो माह से जुटे हुए हैं जिन्होंने सभी जिलों से 26 बिंदुओं पर डाटा इकट्ठा किया। बिखरी हुई जानकारी होने की वजह से टीम को पसीने छूट गए। फिर भी बाद में शामिल हुए शाजापुर की जानकारी पूरी नहीं आई है। हालांकि मोटी मोटी जानकारी के आधार पर पूरे क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है जिसे कलेक्टर आशीष सिंह को सौंप दी गई। अब कम्पनी ने दूसरे चरण का काम शुरू कर दिया है जिसमें भौगोलिक स्थिति के साथ क्षेत्र की विशेषता और सामने आए डाटा के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है तो साथ में मैपिंग भी हो रही है। दूसरी रिपोर्ट में रीजन की पिक्चर सामने आ जाएगी। 1. इंदौर जिला क्षेत्रफल – 3901.6 वर्ग किमी प्रतिशत – 100 तहसील – बिचौली हप्सी, देपालपुर, महू, हातोद, इंदौर, कनाड़िया, खुड़ैल, मल्हारगंज, राऊ और सांवेर गांव – 690 2. उज्जैन जिला क्षेत्रफल – 2740.5 वर्ग किमी प्रतिशत – 44.99 तहसील – बड़नगर, घटिया, खाचरौद, कोठीमहल, नागदा, तराना, उज्जैन, उज्जैन नगर और उन्हेल गांव – 512 3. देवास जिला क्षेत्रफल – 2086.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 29.72 तहसील – बागली, देवास, देवास नगर, हाटपिपल्या, सोनकच्छ और टोक खुर्द, गांव – 444 4. धार जिला क्षेत्रफल – 574.4 वर्ग किमी प्रतिशत – 7.04 तहसील – बदनावर, धार और पीथमपुर, गांव – 107 5. शाजापुर जिला क्षेत्रफल – 33.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 0.54 तहसील – शाजापुर, गांव – 03 मंत्री और कलेक्टर ने दिए सुझाव पिछले माह इंदौर कलेक्टोरेट में आइएमआर में शामिल जिलों के संभागायुक्त, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। प्रेजेंटेशन देकर उन्हें जानकारी दी गई तो उस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों ने मौके पर ही सुझाव दिए थे तो बाकी से लिखित में सुझाव अपेक्षित किए गए थे। उसमें मंत्री तुलसीराम सिलावट व देवास कलेक्टर ने सुझाव दिए हैं। अब उन पर विचार किया जाएगा।    

उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा, सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली

उज्जैन  मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा। वैसे इसके लिए अभी तीन वर्ष का समय है, लेकिन सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली है। इसी के चलते उज्जैन के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव जैसे बड़े अधिकारियों ने समीक्षा बैठक की है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा।

गोवा घूमने जानें वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर से दूसरी सीधी फ्लाइट,15 अप्रैल से होगी शुरू, 4 हजार 376 रुपए है बेसिक किराया

इंदौर 15 अप्रैल से इंदौर और गोवा के बीच नई फ्लाइट चलाई जाएगी। फ्लाइट का संचालन एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा किया जाएगा। फ्लाइट के शुरू हो जाने से इंदौर से गोवा जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा हो जाएगी। न सिर्फ गोवा, बल्कि गोवा के आसपास पहुंचने के लिए यात्रियों को इंदौर से अब ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, इंडिगो एयरलाइंस द्वारा पहले ही गोवा के लिए फ्लाइट संचालित की जा रही है। मौजूदा फ्लाइट का समय इंदौर से प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे है, जबकि नई फ्लाइट का समय गोवा से इंदौर आकर दोपहर 12:20 से इंदौर से गोवा के लिए रवाना रखा गया है। हालांकि, गोवा जाने वाली फ्लाइट में सिर्फ 10 मिनट का अंतराल ही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई फ्लाइट सुबह गोवा से इंदौर आकर दोपहर 12:20 इंदौर से गोवा के लिए रवाना होगी। ऐसे में 10 मिनट के अंतराल में इंदौर एयरपोर्ट से दो फ्लाइट गोवा के लिए उड़ान भरेंगी। वहीं, इंदौर से अब हर दिन आने-जाने में 90 से ज्यादा फ्लाइट हो गई हैं। ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश (टाफी) अध्यक्ष टीके जोस ने बताया कि इंदौर से गोवा के लिए 12 महीने यात्री जाते हैं। पहले मानसून सीजन में लोग गोवा जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। सीजन के समय तो कई बार एक ओर का किराया 20 हजार तक पहुंच जाता है। कोविड के पहले एयर एशिया भी इंदौर से गोवा के लिए फ्लाइट का संचालन करती थी, लेकिन बाद में यह उड़ान बंद हो गई और एयर एशिया ने इंदौर से संचालन ही बंद कर दिया। बता दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस गोवा के लिए जो उड़ान शुरू करेगी, उसका संचालन नार्थ गोवा के मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होगा। अभी इंडिगो इंदौर से गोवा के बीच में एक डेली उड़ान का संचालन करती है। यह उड़ान साउथ गोवा के डेंबोलिंब एयरपोर्ट के लिए संचालित होती है। कंपनी ने तीन कैटेगरी में बुकिंग शुरू की इंदौर-गोवा फ्लाइट की बुकिंग कंपनी ने तीन कैटेगरी में शुरू की है। पहली कैटेगरी एक्सप्रेस लाइट है, जिसका किराया 4 हजार 376 रुपए है। वहीं दूसरी कैटेगरी एक्सप्रेस वैल्यू है जिसका किराया 4 हजार 902 रुपए है। वहीं तीसरी कैटेगरी एक्सप्रेस फ्लेक्स है जिसका किराया 5 हजार 636 रुपए है। यह रहेगा शेड्यूल – गोवा-इंदौर : सुबह 10:05 बजे गोवा से रवाना होगी। फ्लाइट 11:40 बजे इंदौर पहुंचेगी। – इंदौर-गोवा : दोपहर 12:20 बजे रवाना होगी। दोपहर 3:45 बजे गोवा पहुंचेगी। इंदौर एयरपोर्ट पर चलने वाली फ्लाइट्स की संख्या 90 से ज्यादा इंदौर एयरपोर्ट से अब गोवा के लिए दो फ्लाइट्स उड़ान भरेंगी। वहीं, अब इस नई फ्लाइट के चलने से इंदौर एयरपोर्ट पर चलने वाली फ्लाइट्स की संख्या 90 से ज्यादा हो गई है। इसे लेकर ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष टीके जोशी ने जानकारी दी कि इंदौर से गोवा जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है, और 12 महीने यात्री आते-जाते रहते हैं। हालांकि पहले मानसून सीजन में लोग गोवा जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब लोग मानसून सीजन में भी गोवा के लिए जाते हैं। सीजन के समय तो कई बार एक ओर का किराया ही बढ़कर ₹20,000 तक पहुंच जाता है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट दरअसल, कोविड से पहले एयर एशिया की भी एक फ्लाइट इंदौर से गोवा के लिए चलाई जाती थी, लेकिन इस फ्लाइट को बाद में बंद कर दिया गया और एयर एशिया की कोई भी फ्लाइट इंदौर से नहीं चलाने का निर्णय लिया गया। जानकारी दे दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस गोवा के लिए जो उड़ान शुरू करने जा रही है, इस फ्लाइट का संचालन नॉर्थ गोवा के मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से किया जाएगा। हालांकि, अभी इंडिगो की एक फ्लाइट इंदौर से गोवा के बीच उड़ान भरती है, जो कि साउथ गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट के लिए संचालित की जाती है।

एनडीए और सीडीएस की परीक्षा के लिये सहायक कोआर्डिनेटिंग सुपरवाइजर नियुक्त. जबलपुर में 11 केंद्रों पर होगी परीक्षा.

जबलपुर  लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली की आने वाले 13 अप्रैल को आयोजित की जा रही एनडीए/एनए और सीडीएस-1 की परीक्षा के सुचारू संचालन के लिये सहायक कोआर्डिनेटिंग सुपरवाइजर के तौर पर रिजर्व सहित 16 प्रशासनिक अधिकारियों को नियुक्त किया है। एनडीए/एनए और सीडीएस-1 की परीक्षा शहर में 11 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जायेगी। इनमें एनडीए/एनए की परीक्षा दो पालियों में सुबह 10 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक एवं दोपहर 2 बजे से शाम 4.30 बजे तक होगी तथा सीडीएस-1 की परीक्षा तीन पालियों में सुबह 9 बजे से 11 बजे तक, दोपहर 12.30 बजे से दोपहर 2.30 बजे तक एवं तथा दोपहर 4 बजे से शाम 6 बजे आयोजित की जायेंगी। परीक्षाओं में 3 हजार 943 परीक्षार्थी शामिल होंगे। एनडीए/एनए और सीडीएस-1परीक्षा के लिये सहायक कोआर्डिनेटिंग सुपरवाइजर के तौर पर कलेक्टर द्वारा तैनात किये गये प्रशासनिक अधिकारियों पर तय टाइम टेबल के अनुसार जिला कोषालय से परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्रों के पैकेट्स प्राप्त कर परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुँचाने का दायित्व होगा।

कृषि विभाग ने नरवाई का उचित प्रबंधन के लिए जारी किये निर्देश

जबलपुर जायद सीजन में उड़द एवं मूंग का बोनी कार्य तेजी से चल रहा है। किसानों द्वारा गेहूं फसल की कटाई के बाद उड़द एवं मूंग फसलों की बोनी की जा रही है। प्रायः हार्वेस्टर से गेहूं फसल की कटाई उपरांत जो फसल अवशेष बचता है, उसको आग लगाकर नष्ट कर दिया जाता है, इस प्रक्रिया को नरवाई जलाना कहते हैं। नरवाई जलाने से मृदा की गुणवत्ता का हास होता है। इससे भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त होती है, उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण रूक जाता है। लगातार नरवाई जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह जलकर कठोर हो जाती है, खेत की जल धारण क्षमता कम होने लगती है एवं फसलें जल्दी सूखती हैं। नरवाई जलाने से मेढ़ों पर लगे पेड-पौधे नष्ट होने से उन पर पल रहे मित्र कीटों को भी नुकसान होता है। नरवाई के धुंए से पर्यावरण प्रदूषित होता है, तापमान में वृद्धि होने से वातावरण और अधिक गर्म होता जा रहा है। उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास के निर्देशन में जिले में लगभग 1500 एकड़ में नरवाई प्रबंधन से संबंधित फसल प्रदर्शन किये जा रहे हैं। जिसमें गेहूं की फसल की कटाई के तुरंत बाद नरवाई को जलाए बिना हैप्पी सीडर, सुपर सौडर एवं स्मार्ट सीडर के माध्यम से उड़द एवं मूंग की बोनी की जा रही है। आज 4 अप्रैल को विकासखंड पनागर के ग्राम पिपरिया बनियाखेड़ा में सुश्री पूनम चक्रवर्ती, कृषि विस्तार अधिकारी की उपस्थिति में कृषक श्री भागीरथ पटेल एवं विनय पटेल के खेत पर 01-01 एकड़ में, ग्राम नुनियाकला में श्रीमति मोनिका झा, कृषि विस्तार अधिकारी की उपस्थिति में कृषक तीरथ पटेल एवं प्रहलाद पटेल के खेत पर 01-01 एकड़ में एवं सिहोरा विकासखंड के ग्राम घोरा कोनी में सुश्री अदिति राजपूत, कृषि विस्तार अधिकारी की उपस्थिति में कृषक श्री पुरुषोत्तम असाटी एवं कमल पालीवाल के खेत पर हैप्पी सीडर द्वारा नरवाई प्रबंधन प्रदर्शन आयोजित किये गये। नरवाई प्रबंधन प्रदर्शन आयोजन के दौरान उपस्थित कृषि विस्तार अधिकारियों ने बताया कि, यदि किसान नरवाई जलाने के बजाए नरवाई का उचित प्रबंधन करे तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। हार्वेस्टर से कटाई उपरांत खेत में 8-12 इंच के डंठल शेष रहते हैं, उन्हें स्ट्रा रीपर का उपयोग कर भूसा बनाया जा सकता है। जिसका उपयोग पशुओं को चारे तथा अतिरिक्त आय के साधन के रूप में किया जा सकता है। नरवाई को नष्ट करने के लिए रोटावेटर का उपयोग किया जा जाए, जो नरवाई को बारीक कर मिट्टी में मिला देता है। इससे जैविक खाद तैयार होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ती है तथा उपज में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त किसान भाई हैप्पी सीडर, सुपर सीड एवं स्मार्ट सीडर की सहायता से खेत तैयार किये बिना सीधे बोनी कर सकते हैं। इससे नरवाई खेत में मल्य का कार्य करती है एवं वर्तमान फसल की सिंचाई के पानी से धीरे-धीरे सड़कर खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे खेत तैयार करने में लगने वाली लागत एवं एक सिंचाई के साथ-साथ समय की भी बचत होती है। साथ ही फसल 08-10 दिन पूर्व पक कर तैयार हो जाती है, जिससे फसल पकने की अवस्था में वर्षा आने पर खरपतवारनाशक दवा का उपयोग कर फसल सुखाने की आवश्यकता नहीं होती।

चना, मसूर एवं सरसों के उपार्जन एवं तुअर के पंजीयन

जबलपुर मध्‍यप्रदेश शासन, किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास विभाग, मंत्रालय भोपाल द्वारा जारी उपार्जन नीति अनुसार जिले में चना, मसूर एवं सरसों का उपार्जन कार्य जिले के 03 उपार्जन केन्‍द्रों सहकारी विपणन संस्‍था जबलपुर, मझौली एवं सेवा सहकारी समिति शहपुरा के माध्‍यम से किया जा रहा है। चना, मसूर एवं सरसों के लिए उपार्जन की अंतिम तिथि 31 मई 2025 निर्धारित है। किसान भाई अपनी सुविधानुसार स्‍लॉट बुकिंग करने के उपरांत निर्धारित तिथि में उपार्जन केन्‍द्रों पर एफएक्‍यू अच्‍छी गुणवत्‍ता की उपज लेकर अधिक से अधिक संख्‍या में पहुंचे। साथ ही तुअर (अरहर) उपार्जन के लिए जिले में स्‍थापित 05 पंजीयन केन्‍द्रों सहकारी विपणन संस्‍था मर्या. जबलपुर, मझौली, शहपुरा, सिहोरा एवं वृहताकार सेवा सहकारी संस्‍था बघराजी के माध्‍यम से 20 अप्रैल तक किसानों के पंजीयन किये जावेंगे। किसान भाई एमपी ऑनलाइन के माध्‍यम से अथवा स्‍वयं के मोबाइल से भी पंजीयन करा सकते हैं। सभी किसान भाइयों से अपील है कि, अधिक से अधिक संख्‍या में पंजीयन करावें।

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