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राज्य सरकार का 01 वर्ष – “जनकल्याण पर्व” के रूप में मनाया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार का 01 वर्ष – “जनकल्याण पर्व” के रूप में मनाया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 से 26 दिसंबर तक चलेगा विशेष अभियान महिला, किसान, युवाओं और गरीब कल्याण से जुड़े होंगे कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि राज्य शासन के 1 वर्ष पूर्ण होने पर पूरे प्रदेश में 11 से 26 दिसंबर तक “जन कल्याण पर्व” मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत सभी जिलों में महिला, किसान, युवा और गरीब कल्याण सहित विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कार्यक्रमों के आयोजन के लिए मंत्रियों की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समितियां बनाई गई हैं। किसानों के लिए गठित समिति का अध्यक्ष किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना को, युवाओं से जुड़ी समिति का अध्यक्ष नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को, गरीब कल्याण से जुड़ी समिति का अध्यक्ष पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल को और महिलाओं से जुड़ी समिति का अध्यक्ष महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया को बनाया गया है। संबंधित मंत्रीगण पूरे प्रदेश में कार्यक्रम के आयोजित के संबंध में विस्तृत रूपरेखा तैयार कर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 11 दिसंबर को भोपाल एवं सभी जिलों में गीता जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार ग्वालियर में 15 से 19 दिसंबर तक तानसेन समारोह आयोजित होगा।  

संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में चार नए पाठ्यक्रम होंगे प्रारंभ

भोपाल भोपाल में स्थित संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (GSP) में चार नए अत्याधुनिक पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया है। कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में इस परियोजना को नई दिशा दी जा रही है। इन पाठ्यक्रमों में साइबर एंड नेटवर्क सिक्युरिटी एनीमेशन – मोशन ग्राफिक, गेमिग टेक्नोलॉजी और एआर एंड वीआर शामिल हैं। इन सभी पाठ्यक्रमों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों से लिया जाएगा। उपरोक्त कोर्सेज के संचालन के लिए कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं एमएसएमई मंत्री चेतन काश्यप की उपस्थिति में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। तकनीकी साझेदारी के लिए आईआईटी दिल्ली और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर को नॉलेज पार्टनर के रूप में चुना गया है। आईआईटी दिल्ली तीन पाठ्यक्रमों (एनीमेशन – मोशन ग्राफिक, टेक्नोलॉजी और एआर एंड वीआर) के लिए मार्गदर्शन देगा, जबकि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, साइबर और नेटवर्क सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि भारत का आईटी क्षेत्र सिंगापुर की तुलना में अधिक उन्नत और विशेषज्ञता से समृद्ध है। इसके अलावा, आईआईटी रोपड़ के साथ एक समझौता किया गया है, जिसके अंतर्गत ड्रोन टेक्नोलॉजी से संबंधित अल्पकालिक पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे। इनमें डीजीसीए सर्टिफाइड ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, ड्रोन डाटा प्रोसेसिंग के लिए जीआईएस, ड्रोन एग्रीकल्चर, और ड्रोन निर्माण जैसे कोर्स शामिल होंगे। ये पाठ्यक्रम ग्लोबल स्किल्स पार्क के छात्रों के साथ-साथ बाहरी प्रतिभागियों के लिए भी उपलब्ध होंगे। मंत्री टेटवाल ने कहा कि यह पहल न केवल ग्लोबल स्किल्स पार्क को नई ऊंचाई पर ले जाएगी, बल्कि छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी। भारत के आईटी क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।  

दिव्यांग खिलाड़ी अपनी शारीरिक चुनौतियों के साथ कैसे बैटिंग, बॉलिंग, फील्डिंग करते देखना दिव्यता का साक्षात्कार करना -राज्यपाल

व्हील चेयर क्रिकेट टूर्नामेंट दिव्य शक्तियों का प्रदर्शन- राज्यपाल पटेल  खेल के दौरान दिव्यांग जन की दिव्य शक्तियों को प्रदर्शन का अवसर देना सराहनीय पहल – राज्यपाल पटेल  दिव्यांग खिलाड़ी अपनी शारीरिक चुनौतियों के साथ कैसे बैटिंग, बॉलिंग, फील्डिंग करते देखना दिव्यता का साक्षात्कार करना -राज्यपाल राज्यपाल ने टूर्नामेंट का किया शुभारंभ भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि दिव्य शक्तियों के दर्शन और प्रदर्शन का अवसर व्हील चेयर क्रिकेट टूर्नामेंट हैं। खेल के दौरान दिव्यांग जन की दिव्य शक्तियों को प्रदर्शन का अवसर देना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी अपनी शारीरिक चुनौतियों के साथ कैसे बैटिंग करते है। बॉलिंग करते है। फील्डिंग करते देखना दिव्यता का साक्षात्कार करना है।उन लोगों को जो मामूली शारीरिक मानसिक चुनौतियों से निराश हो जाते है। उन्हें नई प्रेरणा और उत्साह मिलेगा। राज्यपाल पटेल उमंग गौरवदीप वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित अस्थिबाधित महिला एवं पुरुष व्हील चेयर डे एण्ड नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग,सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय श्रीमती सोनाली वायंगणकर पोक्षे, आयुक्त रामाराव भोसले एवं खेल प्रेमी उपस्थित थे। प्रतियोगिता का आयोजन ओल्ड कैंपियन ग्राउंड मे किया गया था। खेलते रहने वाला ही होता है विजेता राज्यपाल पटेल ने कहा कि जीवन की सच्चाई है कि निरंतर प्रयास से ही परिणाम मिलते है। हारना-जीतना उतना मायने नहीं रखता है जितना निरंतर खेलते रहना। निरंतर खेलते रहने वाले ही विजेता होते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को उनके उत्साह और जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि खेल भावना से खेलते रहना ही विजेता बनने का तरीका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब वर्ष 2000 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। तभी से वे खेल और खिलाड़ियों के उन्नयन के लिए कार्य कर रहें है। देश में खेलों और खिलाड़ियों के प्रति नया वातावरण निर्मित हुआ है। इसी तरह मोदी ने दिव्यांगजन की शक्तियों को उन्नति और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए है। इसी क्रम में जनवरी माह में युवाओं का सम्मेलन हो रहा है, जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से चयनित युवा शामिल होंगे। उन्होंने प्रतियोगिताओं के खिलाड़ियों और उपस्थित युवाओं आह्वान किया कि वह इन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर सम्मेलन में शामिल होने का प्रयास करें। राज्यपाल नियत अवधि से कार्यक्रम में आधे घन्टे अधिक रहे राज्यपाल पटेल अस्थिबाधित महिला एवं पुरुष व्हील चेयर क्रिकेट टूर्नामेंट में नियत अवधि से आधे घन्टे अधिक समय तक उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच खेले जा रहे क्रिकेट मैच में छत्तीसगढ़ की पुरूष टीम की बैटिंग के नियत 10 ओवरों में से छह ओवर तक के खेल का अवलोकन किया। खिलाड़ियों के मनोबल का उत्साह वर्धन किया। इससे पूर्व राज्यपाल पटेल ने क्रिकेट खेलकर खिलाड़ियों में जोश का संचार किया। प्रत्येक टीम के खिलाड़ियो के पास पहुंचकर उनका परिचय प्राप्त कर उन्हें उत्साहित किया। खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने दिखाया है कि जीतता वही है, जिसमें ज़िद और जज्बा होता। उन्होंने प्रतियोगिता आयोजकों को प्रतिवर्ष प्रतियोगिता में कुछ नया करने के प्रयासों की सराहना की। कहा कि सुखद है कि हर वर्ष जो नया किया जाता है वह भी किसी से कम नहीं होता है। यह बड़ी बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार ज्ञापित किया, जिन्होंने दिव्यांग-जनों के लिए संवेदनशीलता के साथ विकास और उन्नयन के कार्य किए है। साथ ही उनकी मानसिक और शारीरिक दिव्यता को उजागर किया है। उन्होंने प्रदेश के राज्यपाल पटेल के पालक भाव से अभिभूत होने की बात कही। राज्यपाल का सामाजिक सरोकारों में आगे रहने को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि सिकल सेल रोग उन्‍मूलन प्रयासों को आंदोलन का रूप राज्यपाल के प्रयासों से ही मिला है। सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा कि प्रदेश सरकार दिव्यांगजन कल्याण प्रयासों को व्यापक स्तर पर संचालित कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर दिव्यांग जन के लिए विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताएं ग्वालियर में आयोजित की गई। इससे पूर्व ग्वालियर में ही दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि पैरा ओलम्पिक में मेडल विजेता दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है। उमंग गौरवदीप वेलफेयर सोसायटी की संस्थापक श्रीमती दीप्ती पटवा ने प्रतियोगिता के संबंध में जानकारी दी। बताया कि प्रतियोगिता में आठ राज्यों की दस टीमें शामिल हुई है। प्रतियोगिता में 180 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ी भाग ले रहे है। कार्यक्रम में निर्मला उपाध्याय के संयोजन में दिव्यांग बच्चों ने गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन और मैच की कॉमेन्ट्री विकास ने की।  

प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य के अनुरूप 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति नवकरणीय संसाधनों से होगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेशवासियों को सस्ती व प्रदूषण मुक्त बिजली उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सौर तथा पवन ऊर्जा को प्रदेश में हर संभवन प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य के अनुरूप 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति नवकरणीय संसाधनों से होगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप प्राथमिकता से लगाए जाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेशवासियों को सस्ती और प्रदूषण मुक्त बिजली उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सौर तथा पवन ऊर्जा सहित नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के सभी स्रोतों को प्रदेश में हर संभव प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत की आपूर्ति नवकरणीय ऊर्जा संसाधनों से करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में राज्य सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस क्षेत्र में निजी निवेशकों को भी हर संभव सहयोग दिया जाए। प्रधानमंत्री सूर्य घर तथा प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना से अधिक-से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए नगरीय निकायों, रहवासी संघों तथा कृषकों के साथ मिलकर अभियान चलाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में नवीन एवं नवीनकरणीय मंत्री राकेश शुक्ला, सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप , मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, मनु श्रीवास्तव तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की ऊर्जा का 41 प्रतिशत उपभोग किसानों द्वारा किया जाता है। किसान दिन के समय बिजली का उपभोग कर सकें, इस उद्देश्य से सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करना जरूरी है। उन्होंने सभी शासकीय भवनों पर मिशन मोड में सोलर रूफटॉप स्थापित करने के लिए समय- सीमा निर्धानित करते हुए समन्वित रूप से कार्य योजना लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय,स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग भवनों पर भी सोलर रूफटॉप प्राथमिकता से लगाए जाएं। इससे इन विभागों की इकाइयों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में 14 गुना वृद्धि हुई बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में पिछले बारह वर्षों में 14 गुना वृद्धि हुई है। वर्तमान में सौर ऊर्जा की प्रति उत्पादन दर प्रति यूनिट दो रुपए 50 पैसे लगभग आ रही है, जो कोयला आधारित ऊर्जा से तुलनात्मक रूप से किफायती है। सौर ऊर्जा के संबंध में प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मुरैना, आगर, धार, अशोकनगर, शिवपुरी, सागर इत्यादि में सौर पार्क स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगर, शाजापुर और नीमच की नवकरणीय सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा ओंकारेश्वर स्थित विश्व की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना तैयार हो चुकी हैं। मुरैना में हाई ब्रिड वृहद नवकरणीय ऊर्जा परियोजना भी निर्माणाधीन है। इसके प्रथम चरण में सुबह और शाम के पीक समय के दौरान प्रदेश को सुनिश्चित आपूर्ति के लिए 600 मेगावाट सोलर के साथ ही स्टोरेज की सुविधा भी उपलब्ध होगी। यह परियोजना 2027 तक पूर्ण होगी। ऊर्जा भण्डारण के लिए भी जारी है पहल बैठक में कुसुम योजना की प्रगति के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि परियोजना के वित्त पोषण के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है। साथ ही इंडो-जर्मन सोलर एनर्जी पार्टनरशीप-एनोवेटिव सोलर भी निष्पादित किया गया। प्रदेश में उज्जैन, आगर, धार, रतलाम और मंदसौर में पवन ऊर्जा पार्क विकसित करने के लिए भूमि चिन्हित की गई है। नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में नगरीय विकास एवं आवास, जल संसाधन और मध्यप्रदेश जनरेशन कम्पनी का सहायोग लिया जा रहा है। ऊर्जा भण्डारण परियोजनाओं के लिए भी राज्य सरकार पहल कर रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से परमवीर चक्र विजेता योगेन्द्र सिंह यादव ने भेंट की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज मंत्रालय में परमवीर चक्र विजेता, कारगिल युद्ध में टाइगर हिल के हीरो योगेन्द्र सिंह यादव ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगेन्द्र सिंह यादव को अंगवस्त्रम और सांची की प्रतिमा भेंट कर अभिनंदन किया।  

कूनो नेशनल पार्क में अब पर्यटकों को हो सकेंगे दीदार, बाड़े से आजाद हुए चीते, अग्नि और वायु को जंगल में छोड़ा

श्योपुर लंबे इंतजार के बाद कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में रखे गए चीतों में से दो चीते अग्नि और वायु को बुधवार को जंगल में छोड़ दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर विशेषज्ञों ने जंगल में उनेक विचरण, सुरक्षा, भोजन आदि को लेकर अंतिम चर्चा के बाद यह निर्णय लिया। बाड़े में कुल 12 चीते और 12 शावक हैं, जिसमें से एक मादा शावक मुखी पौने दो साल का होने के साथ पूर्ण वयस्क हो चुकी है। इसके साथ ही जल्दी ही जंगल में और चीते छोड़े जाने की संभावना बढ़ गई है। अगले दो-तीन दिन में दो और चीते छोड़े जा सकते हैं। सिंह परियोजना के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारोंद वन क्षेत्र में चीते छोड़े गए हैं। यह क्षेत्र अहेरा पर्यटन क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में पर्यटकों को सफारी के दौरान चीतों को देखने का अवसर मिल सकता है। पवन ने बार-बार लांघी कूनो की सीमाएं कूनो नेशनल पार्क में 17 सिंतबर 2022 को नामीबिया से लाए जाने के बाद पवन चीता को सबसे पहले 21 मार्च 2023 को जंगल में छोड़ा था। बार-बार कूनो की सीमा लांघकर कभी शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क तो कभी यूपी की सीमा तक जाने के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर वापस लाकर बाड़े में बंद करने पड़ा था। पिछले साल नौ चीतों को जंगल में छोड़ा अग्नि-वायु, गौरव-शौर्य, आशा, वीरा सहित कुल नौ चीतों को जंगल में छोड़ा जा चुका है। पिछले साल जुलाई और अगस्त में कुछ चीतों की मौत व संक्रमण के मामले सामने आने के बाद सभी चीतों को वापस बाड़े में बंद कर दिया था। बरसाती नाले में एक की डूबने से हुई थी मौत छह माह पहले पवन व वीरा चीता का जोड़ा जंगल में छोड़ा था। वीरा के मुरैना व ग्वालियर क्षेत्र तक आकर ग्रामीणों के पशुओं के शिकार करने के बाद वापस बाड़े में ले जाना पड़ा था। पवन की बरसाती नाले में डूबकर मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही सभी चीतों बाड़े में ही बंद थे। अग्नि और वायु उम्र में अधिक बड़े और मजबूत चीतों में से हैं, इसलिए पहले इन्हे छोड़ा है।

महाकाल मंदिर के पुजारी को देवेंद्र फड़नवीस ने खुद भेजा महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण

उज्जैन महाराष्ट्र में कल शाम को 5 बजे नए मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा आज हो सकती है। इन सबके बीच भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस का नाम मुख्यमंत्री के लिए तय माना जा रहा है। देवेंद्र फड़नवीस ने महाकाल मंदिर के पुजारी को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा ने बताया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने खुद उन्हें महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा है। मुंबई आने-जाने और ठहरने का प्रबंध भी किया है। आशीष पुजारी ने बताया कि वे शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आज शाम को मुंबई के लिए रवाना होंगे। वे अपने साथ महाकाल का प्रसाद, दुपट्टा और रुद्राक्ष की माला ले जाएंगे और भावी मुख्यमंत्री को भेंट करेंगे। महाकाल के परम भक्त हैं फडणवीस आशीष पुजारी ने बताया कि देवेंद्र फडणवीस महाकाल के परम भक्त हैं। पिछली बार जब वे मुख्यमंत्री बने थे, तब महाकाल मंदिर के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने आए थे। उसके बाद में भी वे लगातार भगवान महाकाल के दर्शन करने आते रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर को शाम 5 बजे मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित किया जाएगा। मंत्रिमंडल का गठन बाद में होगा महाराष्ट्र में गुरुवार शाम को 5 बजे नए मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। अभी देवेंद्र फडणीस के साथ ही एकनाथ शिंदे और अजित पवार ही शपथ लेंगे। मंत्रिमंडल का गठन बाद में दिया जाएगा। पहले कहा गया था कि कुछ विधायक भी शपथ ले सके हैं।

IIT Indore की तकनीक फसलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने के लिए गेमचेंजर साबित होगी

 इंदौर आईआईटी इंदौर ने छोटे और मध्यम किसानों की फसल सुरक्षा के लिए एक अनूठी और सस्ती स्मार्ट स्टोरेज तकनीक विकसित की है, जो किसानों को महंगे कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता से मुक्त कर सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए बड़े और महंगे कोल्ड स्टोरेज का खर्च नहीं उठा सकते। “चलो गांव की ओर” अभियान के अंतर्गत विकसित यह स्मार्ट स्टोरेज तकनीक किसानों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकती है। आईआईटी इंदौर ने दावा किया है कि यह तकनीक फसलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने के लिए गेमचेंजर साबित होगी। इसका उपयोग छोटे किसानों द्वारा घर के एक कमरे में आसानी से किया जा सकता है। इस स्मार्ट स्टोरेज सिस्टम को 10 बाय 10 फीट के छोटे से कमरे में फिट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यह तकनीक कम जगह में भी प्रभावी रूप से काम कर सके। यह न केवल फसल और सब्जियों को संरक्षित रखने में मदद करेगा, बल्कि इनकी गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखेगा। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह फोटोडायनामिक इनेक्टिवेशन (PDI) तकनीक पर आधारित है। इसमें 455 और 476 एनएम के प्रभावी वेवलेंथ पर फोटोसेंसिटाइजर और फ्लैश लाइट के साथ विटामिन बी-2 स्प्रे का उपयोग किया गया है। यह संयोजन खाद्य पदार्थों पर मौजूद कीटाणु और रोगाणुओं को पूरी तरह से नष्ट कर देता है, जिससे फसल और सब्जियों को किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाया जा सकता है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने इस तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि यह कोल्ड स्टोरेज का एक उत्कृष्ट और किफायती विकल्प है। इस तकनीक का आविष्कार प्रोफेसर देबायन सरकार के नेतृत्व में किया गया है, जिसमें छात्र नीलाद्रि शेखर रॉय ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसान अपने घर के किसी एक कमरे में ही इसे स्थापित कर सकते हैं। यह स्मार्ट स्टोरेज सिस्टम बड़ी मात्रा में सब्जियों और फलों को संरक्षित रखने में सक्षम है। यह न केवल फसलों को लंबे समय तक ताजा बनाए रखता है, बल्कि साग-सब्जियों की गुणवत्ता को भी बनाए रखने में मदद करता है। इस सिस्टम में लगाए गए कैमरे की मदद से किसान स्टोरेज में रखे उत्पादों पर नजर रख सकते हैं। आईआईटी इंदौर की यह पहल विशेष रूप से देश के छोटे और गरीब किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। अक्सर किसान अपनी फसल को महंगे कोल्ड स्टोरेज में रखने में असमर्थ होते हैं, जिसके कारण उनकी फसल खराब हो जाती है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यह नई तकनीक ऐसे किसानों को एक किफायती और प्रभावी समाधान प्रदान करती है। इसके उपयोग से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखकर बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे। इस तकनीक की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसे ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह न केवल छोटे और मध्यम किसानों के लिए मददगार है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन को भी बेहतर बनाएगी। आईआईटी इंदौर के इस नवाचार से न केवल किसानों का खर्च कम होगा, बल्कि उनकी आय भी बढ़ेगी।    

सतना जिले में जिले में सिंचाई की पानी की आपूर्ति के लिए चार नए बांध बनाने के लिए सर्वे प्रक्रिया का काम जल्द शुरू

सतना सतना जिले में जिले में सिंचाई की पानी की आपूर्ति के लिए चार नए बांध बनाने के लिए सर्वे प्रक्रिया का काम जल्द शुरू होने जा रहा है. नए बांध के जरिए जिले के 3 हजार हेक्टेर कृषि भूमि को सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिले में चार नए बांधों के निर्माण की रुपरेखा तैयार की जा रही है. जल संसाधन विभाग अवर सचिव के निर्देश पर जिले में चार नए बांध के निर्माण के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है. प्राथमिक तौर पर रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बालकुंड़ चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के कंदर, नरदहा और गहबर इलाके में बांध निर्माण करने का सर्वे किया जाएगा. चार महीने के अंदर सर्वे पूरा करके पेश करना होगा रिपोर्ट जिले चार नए बांध निर्माण के लिए चार महीने के अंदर सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है. इसके बाद बांधों का डीपीआर तैयार किया जाएगा. वहीं, जल संसाधन संभाग सतना को संबंधित योजनाओं का सर्वे करवाए जाने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शिका जारी की गई है.  रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बालकुंड में होगा बांधों का निर्माण जानकारी के मुताबिक शासन के स्वीकृत के अनुसार विधानसभा क्षेत्र चित्रकूट के अंतर्गत कंदर, नरदहा और गहबर में जबकि रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बालकुंड में बांधों का निर्माण किया जाएगा. इन चारों योजनाओं के निर्माण पर करीब 102 करोड़ रुपए खर्च होने और लगभग 3 हजार हेक्टेयर की सिंचाई होने का लक्ष्य प्रस्तावित है. बालकुंड से लगभग 355 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का खर्च 12.39 करोड़ रुपए होगा.कंदर बांध से 888 हेक्टेयर रकबे के लिए 27.95 करोड़, नरदहा के 1120 हेक्टेयर सिंचाई के लिए 37.10 करोड़ और गहबर से लगभग 724 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए 24.85 करोड़ खर्च आएगा. सतना में चार नए बांध निर्माण के लिए विधायकों ने की थी पहल बताया जा रहा है कि योजनाओं के प्रस्ताव शासन स्तर पर काफी समय से लंबित हैं, जिसके लिए आवश्यक मंजूरी के लिए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी और चित्रकूट क्षेत्र के लिए विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र की 3 सिंचाई योजनाओं को शासन से मंजूरी दिलाए जाने की मांग रखी थी. चारों बांध के निर्माण पर आएगा करीब 102 करोड़ रुपए खर्च बालकुंड से लगभग 355 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य है, जिसकाखर्च 1 2.39 करोड़ रुपए होगा. वहीं, कंदर बांध से 888 हेक्टेयर रकबे के लिए निर्माण खर्च 27.95 करोड़, नरदहा के 1120 हेक्टेयर सिंचाई के लिए 37.10 करोड़ और गहबर से लगभग 724 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए बांध निर्माण पर  24.85 करोड़ आएगा.

जैविक खेती के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नायक राहुल कुमार वसूले, आज एक प्रगतिशील कृषक हैं

भोपाल छिंदवाड़ा जिले के खजरी गांव के राहुल कुमार वसूले आज एक प्रगतिशील कृषक हैं। इसके साथ-साथ वे जैविक खेती के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नायक भी हैं। कभी 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी करने वाले राहुल ने इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद पावर प्लांट में कार्य किया। लेकिन परिवार के स्वास्थ्य पर रसायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जैविक व प्राकृतिक खेती की राह चुनी। बी.टेक और एम.बी.ए. की शिक्षा लेने के बाद राहुल ने लगभग 15 वर्षों तक पॉवर प्लांट में कार्य किया, लेकिन अपने पिता और पुत्र को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में खोने के बाद उन्होंने महसूस किया कि इन समस्याओं की मूल जड़ रासायनिक खेती से पैदा हुआ अनाज और सब्जियां हैं। इस गहरी सोच के बाद उन्होंने वर्ष 2018 में अपनी नौकरी छोड़कर जैविक खेती करने का फैसला किया। जैविक खेती को समझने और इसे प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए राहुल ने राज्य सरकार की मदद से देश के विभिन्न संस्थानों और वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, केंचुआ खाद और नीमास्त्र जैसे जैविक उत्पाद तैयार करना सीखा। साथ ही इज़राइल की तकनीक से संरक्षित खेती और मशरूम उत्पादन जैसे आधुनिक तरीके भी अपनाये। राहुल की प्रगतिशीलता से उन्हें 1 से 3 दिसंबर 2024 तक पूसा, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें ‘मिलेनियर फॉर्मर ऑफ इंडिया 2024’ जैसे प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 2022 में आगरा में उन्हें जैविक इंडिया अवार्ड मिला। वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गौ आधारित जैविक कृषि अवार्ड में भी राहुल को सम्मानित किया गया। जैविक खेती का मॉडल राहुल के पास 10 एकड़ भूमि है, जहां वे गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, चना, मूंग, और सब्जियों की खेती करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खाद और जैविक तरीकों का उपयोग कर अपनी उपज की गुणवत्ता को बेहतर बनाया। इसके अलावा वे दुग्ध और मशरूम उत्पादन भी कर रहे हैं। राहुल की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है “रसायनमुक्त नवरत्न आटा,” जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, काला गेहूं और अन्य अनाज भी शामिल हैं। यह आटा उनके जैविक प्र-संस्करण यूनिट में तैयार होता है, जो ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस यूनिट से क्षेत्र के 50 से अधिक जरूरतमंद लोगों को रोजगार भी मिला है। राहुल पहले 15 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी कर रहे थे, अब खेती करने के बाद उनका का वार्षिक टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। उनके उत्पाद गुरुग्राम, नोएडा, पुणे, मुंबई जैसे शहरों तक भेजे जा रहे हैं। राहुल ने “श्रीराम जैविक कृषक समूह” की स्थापना की, जिससे 600 से अधिक किसान जुड़े हैं। वे सभी किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हैं और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाते हैं। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी रसायनमुक्त खेती की ओर मोड़ दिया है। अपनी सफलता से प्रफुल्लित होकर राहुल कहते हैं कि सही सोच और मेहनत से हम न केवल अपनी, बल्कि समाज की दिशा भी बदल सकते हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहते हैं कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की वजह से ही वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।  

इंदौर में मरीजों को कम रेट पर मिलेगी चेकअप की सुविधा, मरीजों की रिपोर्ट आने के बाद वह इन डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे

 इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और नवाचार करने जा रहा है। चार लाख लोगों का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप करने के बाद अब हेल्थ ऑफ इंदौर अभियान के तहत प्रिवेंटिव हेल्थ केयर सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए एक संस्था ने साउथ तुकोगंज क्षेत्र में करोड़ों रुपये की 30 हजार वर्ग फीट जमीन दान की है। इस केंद्र की विशेषता यह है कि यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से मरीजों की जांच हो सकेगी, वहीं जांच के बाद ही रियल टाइम रिपोर्ट भी मिल सकेगी। आईआईटी सहायता लेंगे आधुनिक मशीनों से सिर्फ दो घंटे में ही मरीज का बॉडी चेकअप हो सकेगा और उसे रिपोर्ट भी मिल जाएगी। इसके लिए आईआईटी की सहायता ली जाएगी। दावा किया जा रहा है कि यह देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जो संस्था के माध्यम से संचालित होगा। न्यूनतम दर पर मिल सकेगी सुविधा यहां जांच की सुविधा लोगों को न्यूनतम दर में मिल सकेगी। इसके लिए हस्तीमल सुंदरबाई पारमार्थिक ट्रस्ट के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी के माध्यम से पिछले दिनों शहर आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उनसे भूमिपूजन में शामिल होने का आग्रह भी किया। चार लाख लोगों की जांच में आए चौंकाने वाले आंकड़े बता दें, हेल्थ ऑफ इंदौर के तहत शहर में सांसद सेवा संकल्प, रेड क्रास सोसायटी और सेंट्रल लैब द्वारा की गई चार लाख लोगों की जांच में चौंकाने वाले आकड़े सामने आए थे, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में कई तरह की बीमारियां पाई गई थीं। इस अत्याधुनिक सेंटर में खून की सामान्य जांच से लेकर इको कार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, कैंसर स्क्रीनिंग और जीनोमिक टेस्टिंग तक हो सकेगी। जांच के साथ फालोअप पर भी देंगे ध्यान निजी लैब की संचालक डॉ. विनीता कोठारी ने बताया कि इस सेंटर में जांच में किसी भी व्यक्ति में कोई बीमारी सामने आती है तो उसके फालोअप का भी ध्यान रखा जाएगा। हर माह मरीजों से संपर्क कर यह देखा जाएगा कि बीमारी में कितना सुधार हुआ है, क्योंकि बोहरा समाज ने पिछले 10 वर्षो में अपने स्वास्थ्य में काफी सुधार किया है।

साल 2024 में अबतक मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे

उज्जैन मप्र के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक और पौराणिक महत्व की दुनियाभर में पहचान है। इसीलिए पर्यटक बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश पहुंच रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक रिकॉर्ड 6.57 करोड़ पर्यटक उज्जैन आए। मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे। सबसे खास बात यह है कि देसी पर्यटकों के टॉप-5 डेस्टिनेशन में उज्जैन, ओंकारेश्वर, इंदौर, भोपाल और मैहर शामिल हैं। इस वर्ष 10 लाख 85 हजार विदेशी पर्यटक भी मप्र पहुंचे। विदेशियों सैलानियों में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल खास आकर्षण का केंद्र रहे। टॉप-5 डेस्टिनेशन में खजुराहो, बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और ओरछा हैं। ​देसी पर्यटकों की रुचि धार्मिक क्षेत्रों में अधिक है। ओंकारेश्वर में 21 लाख 29 हजार लोगों ने दर्शन किए। इसी तरह 97 लाख लोग मैहर पहुंचे। हालांकि, इस साल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले घटी है। साल 2023 में प्रदेश में 11.21 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। वहीं, साल 2022 में यह आंकड़ा 3.41 करोड़ का था। पिछले दो साल की ही बात करें तो प्रदेश में 21.87 करोड़ पर्यटक पहुंचे। यह दो साल में पर्यटकों की संख्या का रिकॉर्ड है। धार्मिक स्थलों की ओर रुझान ज्यादा, महाकाल लोक बनने के बाद बदली तस्वीर महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। अभी फेज-2 के काम चल रहे हैं। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ ने बताया कि मंदिर में कम समय में दर्शन होते। भस्मआरती में आरएफ बैंड सिस्टम शुरू किया है। ​इससे अवैध रूप से भस्मआरती में शामिल होने वालों पर अंकुश लगा है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दो भक्त निवास बन चुके हैं। तीसरा अभी बन रहा है। महाकाल लोक बनने के बाद सेलीब्रिटी भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले पाँच सालों में दोगुनी हो गई है। कोरोना काल में पर्यटन में तेजी से गिरावट हुई थी, लेकिन वर्ष 2023 में एक बार फिर जबर्दस्त तेजी आई है और 5 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटकों के पहुँचने का रिकार्ड उज्जैन ने बनाया है। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक उज्जैन में 5 करोड़ 28 लाख 41 हजार 802 पर्यटक पहुँचे। इसी के साथ मध्य प्रदेश के टॉप-10 पर्यटन केंद्रों में उज्जैन सबसे आगे रहा हैं। प्रदेश के टॉप 10 शहरों की सूची में पहले नंबर पर उज्जैन और दूसरे नंबर पर मैहर रहा, जबकि भोपाल सबसे आखिरी पायदान पर है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में बाबा महाकाल के दर्शन और महाकाल लोक के वैभव को देखने पहुँच रहे हैं। यहाँ महाराष्ट्र के शिरडी से तीन गुना, राजस्थान के खाटू श्याम से चार गुना ज्यादा श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। मंदिर समिति के मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है कि गर्मी की शुरुआत के एक माह में 22 अप्रैल से 22 मई में अभी तक करीब 45 लाख से अधिक लोग उज्जैन पहुँच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा श्रद्धालु दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए हैं।

5 बार ट्रैफिक रूल तोड़ने पर जुर्माना न भरने वाले वाहन चालकों की मोटर साइकिलें भी जब्त की जा रही, पुलिस ने भेजे समन

सागर अगर आप ने शहर में यातायात नियम तोड़ा है और उसका जुर्माना नहीं भरा तो आप की गाड़ी को पुलिस जब्त करेगी, क्योंकि पांच से अधिक बार यातायात नियम को तोड़ने वाले वाहनों चालकों की कुंडली बनकर तैयार हो गई है। पुलिस इनके पते में समन भिजवा रही है। जुर्माना न भरने वाले वाहन चालकों की मोटर साइकिलें भी जब्त की जा रही हैं। सागर में ऐसे 1 हजार से अधिक वाहन चालक ऐसे हैं जिन्होंने पांच से अधिक बार ट्रैफिक नियम को तोड़ा है और बगैर जुर्माना भरे घूम रहे हैं। एक बाइक चालक महाशय के तो 23 चालान तक बन चुके हैं।   नियम तोड़ने वालों के ई-चालान दरअसल शहर के जगह-जगह लगे स्मार्ट सिटी के कैमरों में यातयात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के ई-चालान बनाए जाते हैं। शहर के कुल डेढ़ दर्जन स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से रेड लाइट जंप, तीन सवारी और हेलमेट न पहलकर वाहन चलाने वालों के चालान काटे जाते हैं। हर साल कैमरों की मदद से बनने वाले ई-चालान की बात करें तो इनकी संख्या करीब 50 हजार है, यानी हर साल सागर शहर में 50 हजार से अधिक लोग यातायात नियम तोड़ते हैं। पिछले साल से सागर में लागू हुए एनआईसी के ई-चालान सिस्टम के माध्यम से न केवल कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों का चालान बनाया जाता है, कई विभागों से भी जुड़ा ऑनलाइन सिस्टम आल इंडिया स्तर पर बनाए गए नए साफ्टवेयर पर उक्त वाहन चालक का चालान अपलोड भी हो जाता है। इस साफ्टवेयर में आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस ही बल्कि न्यायालय तक जुड़ा हुआ है। हालांकि चालान बनने की सूचना चालक के वाहन रजिस्ट्रेशन पर दर्ज उसके मोबाइल नंबर पर भी भेजी जाती है। लेकिन वाहन चालक चालान नहीं भरते।   शहर में करीब 50 हजार चालान लंबित यही करते करते शहर में करीब 50 हजार ई-चालान की राशि वाहन चालकों ने जमा नहीं की है। इसी को देखते हुए पिछले दिनों न्यायालय और जिला दंडाधिकारी द्वारा यातायात पुलिस को ई-चालान की जुर्माना राशि वसूली और न भरने वाले चालकों के वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए गए। लंबित चालान पर कार्रवाई यातायात पुलिस द्वारा सबसे पहले पांच या उससे अधिक लंबित चालान वाले वाहन चालकों पर शिकंजा कसाने की योजना बनाई है। करीब एक हजार ऐसे वाहन चालक हैं, जिन्होंने पांच या उससे अधिक बार यातायात नियमों को तोड़ा और जुर्माना नहीं भरा। इसके लिए यातायात पुलिस द्वारा समस्त पुलिस कर्मियों को उनके बीट के अनुसार ऐसे वाहन चालकों के नाम समन जारी करवाकर उसे हाथों-हाथ तामील कराया जा रहा है। साथ ही उनके वाहनों की जब्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है। साफ्टवेयर में सारी जानकारी अपलोड एनआईसी के नए साफ्टवेयर में चालानी कार्रवाई के दौरान जैसे ही यातायात पुलिस वाहन को पकड़कर उसका आनलाइन चालान करती है, वैसै ही मशीन में गाड़ी नंबर डालते ही इसके पहले हुए उसके सारे चालान और जुर्माना की जानकारी सामने आ जाएगी। रेड लाइन जंप के लिए 500 रुपये, तीन सवारी बैठाकर मोटर साइकिल चलाने वाले पर 500 रुपये और हेलमेट न पहन कर वाहन चलाने वाले चालकों पर 300 रुपये जुर्माना की कार्रवाई की जाती है। वाहन जब्त होंगे पांच से अधिक बार यातायात नियमों को तोड़कर उसका जुर्माना न भरने वाले वाहन चालकों के वाहन जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे वाहन चालकों के घर पर भी जाकर पुलिस उन्हें समन तामील करवा रही है।मयंक चौहान, डीएसपी, ट्रैफिक फोटो कैप्शन: सिविल लाइन चौराहे पर रेड सिग्नल के बाद खड़े वाहन।

क्रांतिसूर्य टंट्या मामा भारत के जनजातीय गौरव पुरूष थे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्रांतिसूर्य टंट्या मामा भील समाज के ही नहीं, भारत के जनजातीय गौरव पुरूष थे। टंट्या मामा को मैं शत-शत प्रणाम करता हूँ, जिन्होंने जीवन भर अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर शोषितों की आवाज बनकर स्वतंत्रता की अलख जगाई। उनकी पुण्य-तिथि के अवसर पर टंट्या भील विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बलिदान दिवस पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। आजादी के बाद कई दशकों तक देश के तत्कालीन सत्ताधीशों ने जनजातीय जननायकों को यथोचित मान-सम्मान नहीं दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बुधवार को मंत्रालय से टंट्या मामा की पुण्यतिथि के अवसर पर क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन में आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देता हूं, जिनके आने के बाद स्थिति बदली है और उनके नेतृत्व में हमने फिर चाहे टंट्या मामा हो या भगवान बिरसा मुंडा जैसे जननायकों के कामों को आज के युवा के मानस पटल पर पुनर्जीवित किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवम्बर को पूरे देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि खरगोन में भील विश्वविद्यालय का नाम टंट्या मामा के नाम पर रखना भी उनके प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तांतिया भील का टंट्या नाम अंग्रेजों द्वारा दिया गया था। जिसे बाद में लोगों द्वारा प्यार से टंट्या मामा कहकर पुकारने लगे। टंट्या गुरिल्ला युद्ध कौशल में माहिर थे कि सशक्त शक्तिशाली, सब प्रकार से सम्पन्न अंग्रेजी हुकुमत की नाक में उन्होंने दम किया हुआ था। वे अपने समाज में रॉबिन हुड के नाम से जाने जाते थे। वे अंग्रेजों से धन लूटकर गरीबों में बांटा करते थे। उनकी सोच थी कि हिन्दुस्तान का पैसा हिन्दुस्तान के लोगों के काम आए, न कि उसे अंग्रेज लूट कर ले जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने जनजातीय समाज के जननायकों की गौरव गाथा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य टंट्या मामा के जन्म स्थल क्षेत्र के युवाओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों में उच्चतम शिक्षा प्रदान करना था। इस विश्वविद्यालय से 5 जिले खरगौन, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी और अलीराजपुर के 80 महाविद्यालय संबद्ध हैं। विश्वविद्यालय में बीए, बीकॉम, बीएससी, बीबीए, बीएससी, एमएससी, एमए, एमकॉम, विधि आदि महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम संचालित हैं। साथ ही बीएससी कृषि जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम भी संचालित हो रहे हैं, इनमें लगभग 350 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रम भी किए जाएं शुरू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां पैरामेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रमों को भी प्रारंभ किया जाएगा। विश्वविद्यालय को प्रारंभ हुए एक वर्ष भी पूर्ण नहीं हुआ है। दिनांक 9 फरवरी 2024 को स्वीकृति के बाद सिर्फ शिक्षा ही नहीं रोजगार के अवसर भी इस विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ सामने आए। इसमें 140 शैक्षणिक, 14 प्रशासकीय और 81 गैर शैक्षकीय इस प्रकार कुल 235 पद स्वीकृत किए गए हैं।

टेक्नोलॉजी ग्रामीण विकास में सहायक होगी : मंत्री श्री पटेल

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा विकसित “युक्तधारा” पोर्टल ग्रामीण विकास के कार्यों को पूरा करने में मदद करेगा और कृषि विकास में बड़ी भूमिका निभाएगा। मंत्री श्री पटेल ने बुधवार को मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) में मनरेगा अन्तर्गत “युक्तधारा पोर्टल” के दो दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण का शुभारंभ कर संबोधित किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, आयुक्त मनरेगा श्री अवि प्रसाद, संचालक वाल्मी श्रीमती सरिता बाला सहित विभागीय अधिकारी और आठ राज्यों से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि युक्तधारा सेटेलाइट इमेजिंग तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक का व्यापक उपयोग है। य‍‍ह तकनीक सरकारी भूमियों की उपलब्धता का आंकलन करने, कार्यों की जमीनी स्तर पर समीक्षा करने, कार्यों की पुनरावृत्ति का पता करने और शोध संबंधी गतिविधियों के लिए उपयोग में लाई जा सकती है। तकनीक की मदद से हम शासकीय भूमियों को चिह्नांकित कर उनके बेहतर उपयोग के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। इस तकनीक की मदद से हम बंजर भूमियों का भी चिन्हांकन कर सकते है और पर्यावरण-संरक्षण के लिये बंजर भूमि को पुनः कृषि योग्य बनाने, सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने सहित अन्य कोई बेहतर उपयोग भी कर सकते हैं। नीति निर्धारण में हमें इस टेक्नोलॉजी से बहुत मदद मिलेगी। इस पोर्टल के माध्यम से हम समस्याओं का निराकरण बेहतर तरीके से कर सकते हैं। सभी प्रतिभागी पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करें और शंका समाधान के लिए एक्सपर्ट्स से अधिक से अधिक प्रश्न पूछें। युक्तधारा एक भू-स्थानिक नियोजन पोर्टल है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में मनरेगा गतिविधियों की ग्राम पंचायत स्तर की योजना बनाना है। यह पोर्टल अलग-अलग प्रकार की थीमेटिक परतों, मल्टी-टेम्पोरल हाई रेजोल्यशन अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा को एनालिटिकल उपकरणों के साथ एकत्रित करता है। इसके माध्यम से योजना बनाने वाले लोगों के द्वारा अलग-अलग योजनाओं के अंतर्गत पिछली संपत्तियों का विश्लेषण किया जाएगा और वे ऑनलाइन उपकरणों के माध्यम से नए कार्यों की पहचान करने में सक्षम होंगे। राज्य के विभागों के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों द्वारा तैयार की गई योजनाओं का सही मूल्यांकन भी किया जाएगा। युक्तधारा आधारित योजनाएं निचले स्तर के पदाधिकारी द्वारा तैयार की जाएंगी और इससे जुड़े संसाधन आवंटन के लिए इसे उपयुक्त अधिकारियों और कार्यालयों की ओर से सत्यापित किया जाएगा। इसके माध्यम से योजना की क्वालिटी तय की जा सकेगी और पहले से तैयार संपत्तियों की निगरानी संभव हो सकेगी। पोर्टल जीआईएस उपकरणों का उपयोग करके नियोजन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को सक्षम करने के लिए विभिन्न प्रकार की स्थानिक सूचना सामग्री को एकीकृत करता है।  

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