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नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल: विवादों में घिरे एसडीएम सर्वेश यादव, मिलिंद ढोके का कार्यकाल बना मिसाल

Questions on administrative working style in Nalkheda: SDM Sarvesh Yadav surrounded by controversies, tenure of Milind Dhoke became an example संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद एसडीएम सर्वेश यादव की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी सामने आ रही है। मंदिर के पंडितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान एसडीएम ने धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल दिया, बिना संवाद के फैसले थोपे और मर्यादित भाषा व व्यवहार का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसे रवैये के कारण ही मंदिर में हवन-अनुष्ठान तक रोकने जैसी स्थिति बनी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पंडितों की चेतावनी और बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः एसडीएम को मंदिर कार्यों से हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे कई लोग देर से लिया गया कदम बता रहे हैं। इसी बीच नलखेड़ा में पूर्व एसडीएम मिलिंद ढोके के कार्यकाल की खुलकर सराहना होने लगी है। स्थानीय नागरिकों और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि ढोके के समय प्रशासनिक कामकाज संतुलित, संवेदनशील और संवाद आधारित रहा। उनके कार्यकाल में मंदिर में चांदी से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कराए गए, व्यवस्थाएं बेहतर हुईं और किसी भी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। पंडित समाज और श्रद्धालु उस दौर को शांति और सहयोग का उदाहरण बताते हैं। लोगों का मानना है कि मिलिंद ढोके की कार्यप्रणाली अलग थी, जहां आदेश से पहले संवाद और शक्ति से पहले समझदारी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी तुलना के बीच अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि नलखेड़ा जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए विवाद पैदा करने वाली नहीं, बल्कि भरोसा बनाने वाली प्रशासनिक शैली की जरूरत है, जैसी पूर्व में देखने को मिली थी।

घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस का जागरूकता अभियान, नागरिकों ने हेलमेट पहनने का लिया संकल्प।

Awareness campaign of Nalkheda Police on Gharaula Road, citizens took a pledge to wear helmets. चंदा कुशवाह (सहारा समाचार) नलखेड़ा। आज घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस द्वारा यातायात सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पुलिस टीम ने लोगों को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी देते हुए हेलमेट पहनने की आवश्यकता और महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा हादसों से संबंधित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए, जिनमें यह दिखाया गया कि हेलमेट न पहनने की छोटी सी गलती किस तरह बड़े हादसे और नुकसान का कारण बन सकती है। वीडियो देखने के बाद उपस्थित नागरिकों ने विषय को गंभीरता से समझा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि हेलमेट केवल कानूनी नियम नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण कवच है। अभियान के अंत में सभी नागरिकों ने नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लिया और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने का भरोसा भी दिलाया।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत

Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।

नलखेड़ा: हाईकोर्ट के आदेश पर राम मंदिर की भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

Nalkheda: Encroachment removed from Ram Temple land on High Court orders नलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि पर वर्षों पुराने विवाद का अध्याय आखिरकार शनिवार को बंद हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस अमले की भारी संख्या में मौजूदगी रही। मौके पर पहुंचे अधिकारी, विरोध के बीच शुरू हुई कार्रवाई सुबह होते ही SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव मौके पर पहुँचे। उनके साथ पटवारी पंकज वर्मा,पटवारी चिराग शर्मा,पटवारी राजेश घावरी, पटवारी रामपाल सिंह तोमर, अन्य पटवारी, राजस्व अमला तथा पुलिस टीम तैनात की गई। कार्रवाई शुरू होते ही कुछ लोगों ने विरोध जताया, जिस कारण थोड़ी देर के लिए विवाद की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद माहौल नियंत्रित किया गया। कई लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही हटाया अतिक्रमण हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देने पर कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें, शेड और सामान हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन ने इसे सकारात्मक माना और कहा कि स्वेच्छा से हटाया गया अतिक्रमण प्रक्रिया को काफी आसान बना देता है। कुछ जगह नहीं माने लोग, SDM के निर्देश पर चलाई गई JCB जहाँ लोगों ने अतिक्रमण हटाने में सहयोग नहीं किया, वहाँ SDM सर्वेश यादव के निर्देश पर JCB लगाई गई। सीमांकन के आधार पर अतिक्रमण हटवाया गया और विवादित भूमि को पूरी तरह साफ करवाया गया। पुलिस बल पूरे समय मौजूद रहा जिससे किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। भूस्वामी क्षेत्र को किया गया अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन की सख्त चेतावनी कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा गया कि धार्मिक एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन सर्वोपरि है और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

नलखेड़ा – निजी स्कूल बस संचालकों की मनमानी से बढ़ रहा है खतरा, प्रशासन मौन!

Nalkheda – The danger is increasing due to the arbitrariness of private school bus operators, the administration is silent! चंदा कुशवाह  नलखेड़ा। नगर में निजी स्कूल बस संचालकों द्वारा परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जा रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इन बस संचालकों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से बसें चलाना आम बात बना ली है। हर सुबह और दोपहर के समय इन बसों के कारण नगर की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बसें अब गलियों और मोहल्लों तक ले जाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस, परमिट और बीमा तक संदिग्ध है, पर फिर भी वे रोजाना बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। फिर सवाल उठता है — आखिर प्रशासन कहाँ है? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में हैं? जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होगी, क्या तब तक यह अनदेखी जारी रहेगी? जनता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस पर सख्त कार्रवाई करे, बसों का फिटनेस व परमिट जांच अभियान चलाए, और नलखेड़ा में नियम विरुद्ध बस संचालन पर रोक लगाए — ताकि बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

नशे की गिरफ्त में नलखेड़ा नगर, बढ़ रहा बच्चों में लत का खतरा

Nalkheda town in the grip of drug addiction, increasing risk of addiction among children चंदा कुशवाहनलखेड़ा । जिले में हाल ही में 253 किलो गांजे की बड़ी खेप जब्त करने के दावे के बावजूद नलखेड़ा क्षेत्र में खुलेआम गांजा विक्रय जारी है। इसके पीछे पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही और संभवतः मिलीभगत की कड़ियों से इंकार करना मुश्किल है। क्या नलखेड़ा की पुलिस इस गंभीर अपराध से बेदखल हो गई है या जान-बूझकर आंखें बंद किए बैठी है? स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पुलिस सिर्फ दिखावे की पकड़ में लगी है, जबकि असल गिरोह खुली हवा में कारोबार कर रहा है। यह स्थिति पुलिस की जिम्मेदारी और ईमानदारी पर सवाल खड़े करती है। जहां जिले के बड़े स्तर पर नशा तस्करों को दबोचने की खबरें आ रही हैं, वहीं नलखेड़ा में पुलिस की सक्रियता नाममात्र की प्रतीत होती है।पुलिस को चाहिए कि इस गंभीर स्थिति से आंखें न मूंदे और अपने दायित्वों का निर्वहन करे। सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम मादक पदार्थ बिक रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, इससे समाज और खासकर युवाओं का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ता है। गांजा जैसे नशे की लत मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाती है, खासकर किशोरों और बच्चों के लिए इसका प्रभाव विनाशकारी होता है। सवाल उठता है कि जब इतने बड़े नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर खुलेआम नशा बिकने से अवगत होकर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?यह स्थिति सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि गांजा तस्करों को संरक्षण देने वाली सांठगांठ की भी ओर इशारा करती है। यह दीगर है कि कई बार बड़े नशा सिंडिकेट में परस्पर जुड़े रसूखदारों और पुलिस अधिकारियों का नेटवर्क भी सामने आता रहा है। ऐसे में नलखेड़ा में भी पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की अटकलें लगना स्वाभाविक है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा यह पूरी व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास घटना शुरू हो जाएगा। एक तरफ तस्करों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट आयें, तो दूसरी ओर खुले बाजार में नशा बिके—यह विपत्ति की घड़ी है।समाज और प्रशासन के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि अब और कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। नलखेड़ा की पुलिस को चाहिए कि वह जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाए, तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यह लड़ाई सिर्फ कानून का अभाव नहीं, ईमानदारी और तत्परता की लड़ाई भी है, जिसमें पुलिस को अब कमजोरी दिखाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसा न होने पर नशे के व्यापार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी खुद सवालों के घेरे में आ सकते हैं, और समाज का आक्रोश गहराता जाएगा।

मां बगलामुखी मंदिर में गैर पंडा-पुजारियों का बढ़ता अवैध दखल — प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल, SDM की भूमिका पर चर्चा तेज

The growing illegal interference of non-priests at the Maa Baglamukhi Temple—questions raised about administrative negligence, and the SDM’s role is being debated. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में शासन द्वारा नियुक्त पंडा-पुजारियों के बावजूद गैर अधिकृत व्यक्तियों का मंदिर परिसर और गर्भगृह में लगातार दखल बढ़ता जा रहा है।श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ लोग बिना किसी अधिकार के गर्भगृह व पांडाल में रुककर पूजा-पाठ की परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे मंदिर की मर्यादा और अनुशासन पर असर पड़ रहा है। मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मां बगलामुखी मंदिर प्रबंधन समिति की है, जिसके पदेन अध्यक्ष SDM नलखेड़ा हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब मंदिर का संचालन सीधे SDM के अधीन है, तो इस प्रकार की अव्यवस्था पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “SDM मंदिर के अध्यक्ष हैं, सभी गतिविधियाँ उनके संज्ञान में रहती हैं” मंदिर से जुड़े एक प्रमुख पुजारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि — “मां बगलामुखी मंदिर का संचालन मंदिर प्रबंधन समिति के माध्यम से होता है, जिसके अध्यक्ष SDM हैं। मंदिर में जो भी गतिविधियाँ होती हैं, वे सामान्यतः प्रशासन के ज्ञान में रहती हैं। हम सिर्फ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते हैं, बाकी प्रशासनिक व्यवस्था उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आती है।” इस बयान से यह साफ झलकता है कि मंदिर परिसर की प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी तरह SDM और प्रबंधन समिति पर है। जनचर्चा में प्रशासन की निष्क्रियता स्थानीय श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि गैर पंडा-पुजारियों का प्रवेश और गतिविधियाँ प्रशासन की अनदेखी का परिणाम हैं।नवरात्रि से पूर्व हुई मंदिर समिति की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर, जो नलखेड़ा की पहचान और श्रद्धा का प्रतीक है, उसकी मर्यादा की रक्षा के लिए प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। श्रद्धालुओं की मांग श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से यह प्रमुख मांगें रखी हैं —

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