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विवाद, बहिष्कार और अंत—SDM सर्वेश यादव की विदाई, नए अध्याय की शुरुआत!

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Controversy, boycott and end – SDM Sarvesh Yadav’s farewell, beginning of a new chapter! संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा। प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा का विषय बने सुसनेर के SDM सर्वेश यादव को आखिरकार उनके पद से हटा दिया गया है। शासन ने उनकी जगह किरण बरबड़े को सुसनेर का नया SDM नियुक्त किया है। क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद और विरोध की स्थिति बनी हुई थी, जिसके बाद यह प्रशासनिक बदलाव हुआ है।दरअसल, SDM सर्वेश यादव का कार्यकाल शुरू से ही विवादों से घिरा रहा। सबसे पहले मामला विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा से जुड़ा सामने आया, जहां मंदिर के पुजारियों ने उनके व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताते हुए उनका बहिष्कार कर दिया था। मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन कलेक्टर आगर ने हस्तक्षेप करते हुए सर्वेश यादव को मंदिर से जुड़े सभी दायित्वों से अलग कर दिया और यह जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर कमल मंडलोई को सौंप दी गई।इसके बाद एक और विवाद उस समय सामने आया जब सुसनेर के अधिवक्ताओं ने SDM कोर्ट का बहिष्कार कर दिया। अधिवक्ताओं का आरोप था कि SDM सर्वेश यादव द्वारा उनसे बातचीत के दौरान असभ्य व्यवहार और कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस मुद्दे को लेकर वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह विरोध केवल सुसनेर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नलखेड़ा और सोयत तहसील के अधिवक्ताओं ने भी समर्थन देते हुए उनकी कोर्ट में पेशी देने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक हलकों में यह मामला लगातार चर्चा में बना रहा।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा होती रही कि SDM सर्वेश यादव अक्सर खुद को उच्च राजनीतिक संपर्कों वाला अधिकारी बताते थे। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन प्रशासनिक दफ्तरों और स्थानीय हलकों में यह बातें लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।लगातार बढ़ते विवाद, मंदिर प्रकरण और अधिवक्ताओं के विरोध के बाद आखिरकार शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करते हुए सर्वेश यादव को सुसनेर से हटा दिया और उनकी जगह किरण बरबड़े को नई SDM के रूप में पदस्थ किया है।नई SDM की नियुक्ति के बाद क्षेत्र में यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब प्रशासन और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और लंबे समय से चल रहे विवादों पर विराम लगेगा।

नलखेड़ा में अवैध गांजा खेती पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 227 पौधे जब्त, पिता- पुत्र गिरफ्तार

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Police crack down on illegal cannabis cultivation in Nalkheda, seize 227 plants, arrest father and son संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत नलखेड़ा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गेहूँ की फसल की आड़ में उगाई जा रही गांजे की खेती का भंडाफोड़ करते हुए 227 गांजा पौधे जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में लगभग 10.846 किलोग्राम हरा गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद किया गया है। साथ ही दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह के निर्देशन में जिलेभर में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार बोयट व एसडीओपी सुसनेर देवनारायण यादव के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी नागेश यादव के नेतृत्व में नलखेड़ा पुलिस ने यह कार्रवाई की। मुखबिर सूचना पर हुई कार्रवाई पुलिस को 27 फरवरी 2026 को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम पचलाना निवासी पुरालाल भिलाला और उसका पुत्र लखन भिलाला द्वारा लसुल्ड़िया गोपाल स्थित शासकीय भूमि पर, जो उनके कब्जे में है, गेहूँ की फसल के बीच अवैध रूप से गांजा के पौधे लगाए गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मौके पर दबिश दी। पुलिस को देखते ही दो व्यक्ति भागने का प्रयास करने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। पूछताछ में उन्होंने अपना नाम पुरालाल पिता शंकरलाल भिलाला (60 वर्ष) तथा लखन पिता पुरालाल भिलाला (33 वर्ष) निवासी ग्राम पचलाना बताया। गेहूँ की फसल के बीच उगाए गए थे गांजा पौधे खेत की तलाशी के दौरान गेहूँ की फसल के बीच अवैध रूप से लगाए गए गांजा के पौधे पाए गए। पुलिस ने मौके से 227 छोटे-बड़े हरे पत्तेदार गांजा पौधे उखाड़कर जब्त किए। इलेक्ट्रॉनिक तोलकांटे से तौल करने पर इनका कुल वजन 10.846 किलोग्राम पाया गया। एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ थाना नलखेड़ा में अपराध क्रमांक 73/2026 दर्ज किया है। आरोपियों के विरुद्ध धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस अब आरोपियों से गांजा की बिक्री और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ कर रही है। इन पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका इस कार्रवाई में थाना प्रभारी नागेश यादव, सउनि दरबार सिंह जादोन, सउनि डीसी भिलाला, प्रधान आरक्षक शंभु सिंह जाट, प्रधान आरक्षक ललित सारस्वत, प्रधान आरक्षक नरेन्द्र भाटी, आरक्षक राजेश दांगी, आरक्षक अतेन्द्र, आरक्षक रोड़ीलाल दांगी सहित अन्य पुलिस स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ीं? नीलकंठ महादेव मंदिर की शासकीय भूमि पर दोबारा कब्जे की कोशिश

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Court order flouted? Attempt to reclaim government land belonging to the Neelkanth Mahadev Temple संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर के सर्वे क्रमांक 304 एवं 305 स्थित शासकीय माफी छतरी नीलकंठ महादेव मंदिर की भूमि (रकबा 0.857 हेक्टेयर), जिसका प्रबंधन कलेक्टर महोदय के अधीन है, एक बार फिर अतिक्रमण के कारण चर्चा में है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेवाड़ा विश्वकर्मा सामाजिक विभाग एवं सेवा समिति द्वारा मध्य प्रदेश भूमि राजस्व संहिता की धारा 248 के अंतर्गत तहसील न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई थी। सुनवाई उपरांत तहसील न्यायालय ने नलखेड़ा निवासी पवन विश्वकर्मा सहित अन्य व्यक्तियों को मंदिर की शासकीय भूमि से बेदखल करने का आदेश पारित किया था। न्यायालय ने संबंधित पक्षों पर ₹5000-₹5000 का अर्थदंड भी अधिरोपित किया था तथा पटवारी को अतिक्रमण हटवाकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान में प्रकरण क्रमांक 13/2023 में न्यायालय द्वारा उक्त सर्वे क्रमांक 304 एवं 305 पर स्थगन आदेश प्रभावी है। बताया जाता है कि संबंधित पक्ष द्वारा न्यायालय में अंडरटेकिंग प्रस्तुत की गई थी कि प्रकरण लंबित रहने तक न तो स्वयं निर्माण करेंगे और न ही किसी अन्य से करवाएंगे। इसके बावजूद विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार बीते सोमवार को पवन, जगदीश, कमल एवं घनश्याम आदि द्वारा पुनः निर्माण की तैयारी एवं गतिविधियाँ प्रारंभ कर दी गईं। आरोप है कि अन्य व्यक्तियों के साथ सांठगांठ कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के आदेश एवं स्थगन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा अवमानना की स्थिति में संबंधितों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। अब पूरे प्रकरण में प्रशासनिक कदमों पर नगरवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। न्यायालय के आदेश और ज़मीनी हकीकत के बीच खिंची यह रेखा कब स्पष्ट होगी, यह आने वाले दिनों में तय होगा।

नलखेड़ा में वकीलों का बड़ा ऐलान एसडीएम सर्वेश यादव के कोर्ट का बहिष्कार, सुसनेर में पहले से हड़ताल; दो तहसीलों में थमा न्यायिक काम

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Lawyers in Nalkheda make a major announcement, boycotting SDM Sarvesh Yadav’s court; Susner already on strike; judicial work halted in two tehsils. संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा ! न्यायालयीन माहौल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच नलखेड़ा अधिवक्ता संघ ने बड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार को हुई बैठक में संघ ने सर्वसम्मति से सर्वेश यादव के न्यायालय के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित कर दिया। वकीलों का आरोप है कि एसडीएम का व्यवहार न्यायालय में संतोषजनक नहीं है, जिससे अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों ने कहा कि न्यायालय का वातावरण गरिमामय होना चाहिए। यदि अधिवक्ताओं को सम्मानजनक माहौल नहीं मिलता, तो सामूहिक निर्णय लेना मजबूरी बन जाता है। सुसनेर में 13 फरवरी से हड़तालइसी मुद्दे को लेकर सुसनेर में 13 फरवरी से वकीलों की हड़ताल जारी है। अब नलखेड़ा में भी बहिष्कार का प्रस्ताव पारित होने के बाद आंदोलन दो तहसीलों तक पहुंच गया है। इससे राजस्व और न्यायालयीन कार्य प्रभावित होने लगे हैं।काम करने पर कार्रवाई की चेतावनीअधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि बहिष्कार के दौरान यदि कोई वकील एसडीएम कोर्ट में पेश होता है या कार्य करता है, तो उसके खिलाफ संघ के नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे संगठनात्मक एकता का विषय बताया गया है। प्रशासन से दखल की मांगसंघ ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती, बहिष्कार जारी रहेगा।अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और न्यायालयीन कार्य को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

एसडीएम के कथित व्यवहार के खिलाफ वकीलों का खुला मोर्चा, सुसनेर में बहिष्कार और हड़ताल

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Lawyers open front against alleged behaviour of SDM, boycott and strike in Susner  संवाददाता चंदा कुशवाह सुसनेर। सुसनेर अधिवक्ता संघ ने एसडीएम सर्वेश यादव के खिलाफ सर्वसम्मति से बहिष्कार प्रस्ताव पारित करते हुए उनकी अदालत में लंबित किसी भी प्रकरण में पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अधिवक्ता हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि यह कदम सम्मानजनक कार्य वातावरण और न्यायिक गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एसडीएम का व्यवहार लंबे समय से वकीलों के प्रति अनुचित रहा है तथा कई अवसरों पर विवाद की स्थिति बनी। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया, जिसके चलते सामूहिक बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा एवं  एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताते हैं, जिससे अधिवक्ताओं के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर असंतोष पैदा हुआ। अधिवक्ता संघ के अनुसार, इस निर्णय को नलखेड़ा, सोयत, आगर मालवा और बड़ौद के अधिवक्ता संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। संघ का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर समाज और न्याय व्यवस्था में वकीलों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनका कहना है कि अधिवक्ता केवल मुकदमों की पैरवी करने वाले पेशेवर नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा, विधिक जागरूकता और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। न्यायालय और जनता के बीच सेतु के रूप में अधिवक्ता व्यवस्था की पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण को बनाए रखना पूरे न्याय तंत्र के हित में बताया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीएम या प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल यह मुद्दा स्थानीय न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

देवी लोक की उड़ान, पार्किंग में दलदल का पड़ाव: नलखेड़ा में विकास बनाम कीचड़

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Flight to the Divine, Parking Lot to the Swamp: Development vs. Mud in Nalkheda संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा । इन दिनों “देवी लोक” निर्माण की चर्चाएं आसमान छू रही हैं। योजनाओं की फाइलें इतनी ऊंची उड़ान भर रही हैं कि लगता है जल्द ही शहर अंतरिक्ष पर्यटन की सूची में शामिल हो जाएगा। लेकिन ज़मीन पर उतरते ही हकीकत ऐसी फिसलन भरी है कि हर बारिश के बाद पार्किंग स्थल कुश्ती का अखाड़ा बन जाता है, जहां गाड़ियां नहीं, संतुलन गिरता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही पार्किंग क्षेत्र का रंग “मिट्टी ब्राउन” हो जाता है और जूते-चप्पल “कीचड़ संस्करण 2.0” में अपग्रेड हो जाते हैं। श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों ही मजबूरन इस दलदली रास्ते से गुजरते हैं, मानो देवी लोक से पहले “कीचड़ लोक” की परीक्षा देनी अनिवार्य हो।नगर के एक दुकानदार ने व्यंग्य करते हुए कहा,“देवी लोक बने या न बने, पार्किंग में कीचड़ का स्थायी स्मारक पहले तैयार हो गया है।”वहीं एक राहगीर का कहना है कि विकास की बातें सुनकर उम्मीद जगती है, लेकिन हर बारिश के बाद वही पुराना दृश्य देखकर लगता है कि योजनाएं शायद बादलों के साथ उड़ जाती हैंऔर ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते गल जाती हैं।नगरवासियों की मांग है कि देवी लोक जैसी बड़ी परियोजना से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। कम से कम इतना तो हो कि बारिश में पार्किंग तालाब न बने और शहरवासियों को कीचड़ में “आस्था के साथ स्लिप टेस्ट” न देना पड़े।अब देखना यह है कि प्रशासन पहले देवी लोक की तस्वीर बनाएगा या पार्किंग से कीचड़ की तस्वीर हटाएगा। फिलहाल नलखेड़ा में विकास की चर्चा और कीचड़ की मौजूदगी साथ-साथ चल रही है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पोस्टर में चमक और ज़मीन पर फिसलन।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल: विवादों में घिरे एसडीएम सर्वेश यादव, मिलिंद ढोके का कार्यकाल बना मिसाल

Questions on administrative working style in Nalkheda: SDM Sarvesh Yadav surrounded by controversies, tenure of Milind Dhoke became an example संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद एसडीएम सर्वेश यादव की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी सामने आ रही है। मंदिर के पंडितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान एसडीएम ने धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल दिया, बिना संवाद के फैसले थोपे और मर्यादित भाषा व व्यवहार का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसे रवैये के कारण ही मंदिर में हवन-अनुष्ठान तक रोकने जैसी स्थिति बनी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पंडितों की चेतावनी और बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः एसडीएम को मंदिर कार्यों से हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे कई लोग देर से लिया गया कदम बता रहे हैं। इसी बीच नलखेड़ा में पूर्व एसडीएम मिलिंद ढोके के कार्यकाल की खुलकर सराहना होने लगी है। स्थानीय नागरिकों और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि ढोके के समय प्रशासनिक कामकाज संतुलित, संवेदनशील और संवाद आधारित रहा। उनके कार्यकाल में मंदिर में चांदी से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कराए गए, व्यवस्थाएं बेहतर हुईं और किसी भी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। पंडित समाज और श्रद्धालु उस दौर को शांति और सहयोग का उदाहरण बताते हैं। लोगों का मानना है कि मिलिंद ढोके की कार्यप्रणाली अलग थी, जहां आदेश से पहले संवाद और शक्ति से पहले समझदारी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी तुलना के बीच अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि नलखेड़ा जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए विवाद पैदा करने वाली नहीं, बल्कि भरोसा बनाने वाली प्रशासनिक शैली की जरूरत है, जैसी पूर्व में देखने को मिली थी।

घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस का जागरूकता अभियान, नागरिकों ने हेलमेट पहनने का लिया संकल्प।

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Awareness campaign of Nalkheda Police on Gharaula Road, citizens took a pledge to wear helmets. चंदा कुशवाह (सहारा समाचार) नलखेड़ा। आज घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस द्वारा यातायात सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पुलिस टीम ने लोगों को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी देते हुए हेलमेट पहनने की आवश्यकता और महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा हादसों से संबंधित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए, जिनमें यह दिखाया गया कि हेलमेट न पहनने की छोटी सी गलती किस तरह बड़े हादसे और नुकसान का कारण बन सकती है। वीडियो देखने के बाद उपस्थित नागरिकों ने विषय को गंभीरता से समझा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि हेलमेट केवल कानूनी नियम नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण कवच है। अभियान के अंत में सभी नागरिकों ने नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लिया और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने का भरोसा भी दिलाया।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत

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Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।

नलखेड़ा: हाईकोर्ट के आदेश पर राम मंदिर की भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

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Nalkheda: Encroachment removed from Ram Temple land on High Court orders नलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि पर वर्षों पुराने विवाद का अध्याय आखिरकार शनिवार को बंद हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस अमले की भारी संख्या में मौजूदगी रही। मौके पर पहुंचे अधिकारी, विरोध के बीच शुरू हुई कार्रवाई सुबह होते ही SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव मौके पर पहुँचे। उनके साथ पटवारी पंकज वर्मा,पटवारी चिराग शर्मा,पटवारी राजेश घावरी, पटवारी रामपाल सिंह तोमर, अन्य पटवारी, राजस्व अमला तथा पुलिस टीम तैनात की गई। कार्रवाई शुरू होते ही कुछ लोगों ने विरोध जताया, जिस कारण थोड़ी देर के लिए विवाद की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद माहौल नियंत्रित किया गया। कई लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही हटाया अतिक्रमण हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देने पर कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें, शेड और सामान हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन ने इसे सकारात्मक माना और कहा कि स्वेच्छा से हटाया गया अतिक्रमण प्रक्रिया को काफी आसान बना देता है। कुछ जगह नहीं माने लोग, SDM के निर्देश पर चलाई गई JCB जहाँ लोगों ने अतिक्रमण हटाने में सहयोग नहीं किया, वहाँ SDM सर्वेश यादव के निर्देश पर JCB लगाई गई। सीमांकन के आधार पर अतिक्रमण हटवाया गया और विवादित भूमि को पूरी तरह साफ करवाया गया। पुलिस बल पूरे समय मौजूद रहा जिससे किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। भूस्वामी क्षेत्र को किया गया अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन की सख्त चेतावनी कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा गया कि धार्मिक एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन सर्वोपरि है और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

नलखेड़ा – निजी स्कूल बस संचालकों की मनमानी से बढ़ रहा है खतरा, प्रशासन मौन!

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Nalkheda – The danger is increasing due to the arbitrariness of private school bus operators, the administration is silent! चंदा कुशवाह  नलखेड़ा। नगर में निजी स्कूल बस संचालकों द्वारा परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जा रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इन बस संचालकों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से बसें चलाना आम बात बना ली है। हर सुबह और दोपहर के समय इन बसों के कारण नगर की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बसें अब गलियों और मोहल्लों तक ले जाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस, परमिट और बीमा तक संदिग्ध है, पर फिर भी वे रोजाना बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। फिर सवाल उठता है — आखिर प्रशासन कहाँ है? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में हैं? जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होगी, क्या तब तक यह अनदेखी जारी रहेगी? जनता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस पर सख्त कार्रवाई करे, बसों का फिटनेस व परमिट जांच अभियान चलाए, और नलखेड़ा में नियम विरुद्ध बस संचालन पर रोक लगाए — ताकि बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

नशे की गिरफ्त में नलखेड़ा नगर, बढ़ रहा बच्चों में लत का खतरा

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Nalkheda town in the grip of drug addiction, increasing risk of addiction among children चंदा कुशवाहनलखेड़ा । जिले में हाल ही में 253 किलो गांजे की बड़ी खेप जब्त करने के दावे के बावजूद नलखेड़ा क्षेत्र में खुलेआम गांजा विक्रय जारी है। इसके पीछे पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही और संभवतः मिलीभगत की कड़ियों से इंकार करना मुश्किल है। क्या नलखेड़ा की पुलिस इस गंभीर अपराध से बेदखल हो गई है या जान-बूझकर आंखें बंद किए बैठी है? स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पुलिस सिर्फ दिखावे की पकड़ में लगी है, जबकि असल गिरोह खुली हवा में कारोबार कर रहा है। यह स्थिति पुलिस की जिम्मेदारी और ईमानदारी पर सवाल खड़े करती है। जहां जिले के बड़े स्तर पर नशा तस्करों को दबोचने की खबरें आ रही हैं, वहीं नलखेड़ा में पुलिस की सक्रियता नाममात्र की प्रतीत होती है।पुलिस को चाहिए कि इस गंभीर स्थिति से आंखें न मूंदे और अपने दायित्वों का निर्वहन करे। सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम मादक पदार्थ बिक रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, इससे समाज और खासकर युवाओं का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ता है। गांजा जैसे नशे की लत मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाती है, खासकर किशोरों और बच्चों के लिए इसका प्रभाव विनाशकारी होता है। सवाल उठता है कि जब इतने बड़े नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर खुलेआम नशा बिकने से अवगत होकर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?यह स्थिति सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि गांजा तस्करों को संरक्षण देने वाली सांठगांठ की भी ओर इशारा करती है। यह दीगर है कि कई बार बड़े नशा सिंडिकेट में परस्पर जुड़े रसूखदारों और पुलिस अधिकारियों का नेटवर्क भी सामने आता रहा है। ऐसे में नलखेड़ा में भी पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की अटकलें लगना स्वाभाविक है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा यह पूरी व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास घटना शुरू हो जाएगा। एक तरफ तस्करों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट आयें, तो दूसरी ओर खुले बाजार में नशा बिके—यह विपत्ति की घड़ी है।समाज और प्रशासन के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि अब और कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। नलखेड़ा की पुलिस को चाहिए कि वह जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाए, तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यह लड़ाई सिर्फ कानून का अभाव नहीं, ईमानदारी और तत्परता की लड़ाई भी है, जिसमें पुलिस को अब कमजोरी दिखाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसा न होने पर नशे के व्यापार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी खुद सवालों के घेरे में आ सकते हैं, और समाज का आक्रोश गहराता जाएगा।

मां बगलामुखी मंदिर में गैर पंडा-पुजारियों का बढ़ता अवैध दखल — प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल, SDM की भूमिका पर चर्चा तेज

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The growing illegal interference of non-priests at the Maa Baglamukhi Temple—questions raised about administrative negligence, and the SDM’s role is being debated. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में शासन द्वारा नियुक्त पंडा-पुजारियों के बावजूद गैर अधिकृत व्यक्तियों का मंदिर परिसर और गर्भगृह में लगातार दखल बढ़ता जा रहा है।श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ लोग बिना किसी अधिकार के गर्भगृह व पांडाल में रुककर पूजा-पाठ की परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे मंदिर की मर्यादा और अनुशासन पर असर पड़ रहा है। मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मां बगलामुखी मंदिर प्रबंधन समिति की है, जिसके पदेन अध्यक्ष SDM नलखेड़ा हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब मंदिर का संचालन सीधे SDM के अधीन है, तो इस प्रकार की अव्यवस्था पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “SDM मंदिर के अध्यक्ष हैं, सभी गतिविधियाँ उनके संज्ञान में रहती हैं” मंदिर से जुड़े एक प्रमुख पुजारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि — “मां बगलामुखी मंदिर का संचालन मंदिर प्रबंधन समिति के माध्यम से होता है, जिसके अध्यक्ष SDM हैं। मंदिर में जो भी गतिविधियाँ होती हैं, वे सामान्यतः प्रशासन के ज्ञान में रहती हैं। हम सिर्फ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते हैं, बाकी प्रशासनिक व्यवस्था उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आती है।” इस बयान से यह साफ झलकता है कि मंदिर परिसर की प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी तरह SDM और प्रबंधन समिति पर है। जनचर्चा में प्रशासन की निष्क्रियता स्थानीय श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि गैर पंडा-पुजारियों का प्रवेश और गतिविधियाँ प्रशासन की अनदेखी का परिणाम हैं।नवरात्रि से पूर्व हुई मंदिर समिति की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर, जो नलखेड़ा की पहचान और श्रद्धा का प्रतीक है, उसकी मर्यादा की रक्षा के लिए प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। श्रद्धालुओं की मांग श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से यह प्रमुख मांगें रखी हैं —

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