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राहुल को नाना, दादा-दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए:सीएम मोहन यादव

CM Mohan Yadav’s strange statement: Rahul should go to his maternal grandfather, grandparents, father मुरैना। मुरैना जिले में 101 हेक्टेयर का एक नया औद्योगिक पार्क बनाया जा रहा है, जो विकास का प्रतीक है। दूसरी ओर, नादान विपक्ष और राहुल गांधी तरह-तरह के प्रपंच रच रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी पार्टी लगातार चुनाव हार रही है, और वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ के लिए गलत बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी को अगर इतनी ही परेशानी है, तो उन्हें अपने नाना, दादा, दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए, क्योंकि इस जगत में रहने का उन्हें कोई हक नहीं है।यह बात मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मुरैना में हाइड्रोजन इकाई का भूमि पूजन करने के बाद आमसभा में कही। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी से सीखना चाहिए, जिन्होंने कई मंत्रियों और नेता विपक्ष के साथ काम किया था कि विपक्ष में कैसे रहा जाता है। कांग्रेस को माफी मांगनी होगी। राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाए। अगर कोई शंका थी, तो उन्हें वहां चले जाना चाहिए था। बम के नीचे, तो सब पता चल जाता। अब वे चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा- पिपरसेवा में 157.5 करोड़ की लागत से 500 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाला सोलर प्लांट वर्ष 2030 तक तैयार होगा। इसका भूमिपूजन सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कभी मुरैना-चंबल में उद्योगपति आते ही नहीं थे, क्योंकि कांग्रेसियों ने यहां डाकुओं को जमीन दे रखी थी। लेकिन अब मुरैना में बहुत संभावना है। यहां चंबल मैया और गजक अद्भुत हैं। अब अनुराग जैन जैसे उद्योगपति यहां इन्वेस्ट कर रहे हैं। शनि देव की कृपा से शनि लोक भी बनेगा। यहां सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा और 300 करोड़ के इन्वेस्ट हो रहे हैं। मुरैना की अब काया बदल रही है। आमसभा में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना एवं सांसद शिवमंगल सिंह तोमर भी मौजूद थे।

प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्रियों ने जो किया वही करने जा रहे हैं, सीएम मोहन

CM Mohan is going to do what the two former Chief Ministers of the state did. भोपाल ! मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव नए साल में नया प्रयोग करने जा रहे हैं। सीएम मोहन यादव, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और उमा भारती की तरह सीएम आवास पर जनता दरबार लगाएंगे। सीएम मोहन यादव लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उसका समाधान करेंगे। सीएम आवास पर पहले जनता दरबार का आयोजन 6 जनवरी को होगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मोहन यादव से पहले राज्य के दो पूर्व सीएम उमा भारती और दिग्विजय सिंह जनता दरबार लगा चुके हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में कभी पहल नहीं की। सूत्रों के अनुसार, पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सुबह 10 से 12 बजे तक होगा। सीएम हाउस पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। लोगों की समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग विभाग के अधिकारी भी मौजूद करेंगे जो लोगों की समस्या का तुरंत समाधान करेंगे। बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी। यहां केवल केवल बीमारी और जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी। ग्रामीण इलाके के लोगों को प्राथमिकता बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ग्रामीण इलाके से आए लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। सीएम खुद उन लोगों की समस्या को सुनेंगे। पहले जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभाग स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ये सीएम भी लगा चुके हैं जनता दरबार मोहन यादव से पहले पूर्व सीएम उमा भारती भी जनता दरबार लगा चुकी हैं। पूर्व सीएम उमा भारती 2003 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं थी। वह लोगों की समस्या सुनकर उसका समाधान करती थीं। कहा जाता है कि जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचते थे जिस कारण से इसे बंद करना पड़ा था। मध्य प्रदेश में सबसे पहले दिग्विजय सिंह ने जनता दरबार लगाने की शुरुआत की थी। दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक लोगों की समस्या सीएम आवास पर खुद सुनते थे।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन पर कसा तंज: ‘कर्ज़ में डूबा प्रदेश, बढ़ रही मुख्यमंत्री की संपत्ति

Leader of Opposition Umang Singhar took a dig at CM Mohan: ‘State is in debt, Chief Minister’s wealth is increasing’ मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश कर्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री की संपत्ति दिन-ब-दिन बढ़ रही है। प्रदेश पर भारी कर्ज़ का बोझ नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मध्यप्रदेश पर प्रति व्यक्ति क़र्ज़ ₹52,000 है, और कुल मिलाकर प्रदेश पर लगभग ₹4 लाख करोड़ का कर्ज़ है। उन्होंने इसे प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति का परिचायक बताया। ADR रिपोर्ट का खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देश के पांचवें सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान, उनकी कुल चल संपत्ति ₹5.66 करोड़ थी, जबकि उनकी पत्नी सीमा यादव के पास ₹3.23 करोड़ की संपत्ति थी। इसके अतिरिक्त, उनकी अचल संपत्ति का मूल्य ₹13.36 करोड़ और उनकी पत्नी की ₹18.75 करोड़ था। देश के अन्य मुख्यमंत्रियों की तुलना रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ₹931 करोड़ की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सबसे कम ₹15 लाख की संपत्ति है। देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति ₹1630 करोड़ है। नेता प्रतिपक्ष के तंज उमंग सिंघार ने कहा, “प्रदेश गर्त में जा रहा है और विकास हो रहा है तो केवल मुख्यमंत्री की तिजोरी का।” उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के साथ अन्याय और आर्थिक प्रबंधन में विफलता बताया। क्या कहते हैं आंकड़े? भारत की 2023-24 की प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय ₹85,854 थी, जबकि मुख्यमंत्रियों की औसत आय ₹13,64,310 है, जो औसत आय का लगभग 7.3 गुना है। सवालों के घेरे में सरकार विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में कर्ज़ बढ़ाने की नीतियां जनता के हित में नहीं हैं और इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों को मिल रहा है। उमंग सिंगार ने मुख्यमंत्री से उनकी संपत्ति में हुई वृद्धि का स्पष्टीकरण मांगा है। नेता प्रतिपक्ष के इन आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री या सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या जनता इन मुद्दों को आगामी चुनावों में गंभीरता से लेगी।

आज से जर्मनी यात्रा पर CM मोहन यादव, मध्य प्रदेश में निवेश पर उद्योगपतियों से करेंगे बातचीत

CM Mohan Yadav on Germany trip from today, will talk to industrialists on investment in Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूके यात्रा समाप्त हो गई. अब मुख्यमंत्री जर्मनी के उद्योगपतियों के साथ राज्य में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 नवंबर तक जर्मनी में रहेंगे और म्यूनिख के साथ-साथ स्टटगार्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यूके यात्रा के बाद अब जर्मनी जा रहे हैं. मुख्यमंत्री यादव 28 से 30 नवंबर को जर्मनी यात्रा पर रहेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव म्यूनिख और स्टटगार्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे और प्रदेश में निवेश और उद्योगों की संभावनाओं को लेकर यहां के उद्योगपतियों से विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 नवंबर को म्यूनिख में भारत के कौंसुलेट जर्नल की ओर से होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में ब्रीफिंग दी जाएगी. इसके बाद मुख्यमंत्री बवेरिया राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. आर्थिक विकास-संभावित सहयोग पर चर्चामुख्यमंत्री डॉ. यादव जर्मन के बवेरिया राज्य के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास और संभावित सहयोग पर चर्चा करेंगे. एसएफसी एनर्जी के प्रमुख संस्थान का दौरा करेंगे. साथ ही बैरलोचर ग्रुप के डॉ. टोबियास रोसेंथल द्वारा अर्बन टर्बन रेस्टोरेंट में आयोजित लंच में जर्मनी के उद्योग प्रतिनिधियों से अनौपचारिक संवाद करेंगे. उद्योगपतियों के साथ इंटरैक्टिव सेशनलंच ब्रेक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में म्यूनिख सीआईआई, इन्वेस्ट इंडिया और भारत के कौंसुलेट जनरल, इंडो-जर्मन चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में उद्योग प्रतिनिधियों के साथ निवेश पर वन-ऑन-वन मीटिंग करेंगे. इसमें प्रमुख जर्मन कंपनियों के साथ निवेश और उद्योग संबंधों को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा. वहीं शाम को मुख्यमंत्री डॉ. यादव होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में प्रवासी भारतीय प्रतिनिधियों और फ्रेंडस ऑफ एमपी के साथ संवाद करेंगे. इसमें करीब 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में भारत के कौंसुलेट जनरल की ओर से आयोजित डिनर में शामिल होंगे.

उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करें’, सीएम का विभागों का निर्देश

‘Resolve problems of entrepreneurs immediately’, CM’s instructions to departments भोपाल ! वीरांगना रानी दुर्गावती के 500वें जन्म शताब्दी के मौके पर सीएम मोहन यादव कैबिनेट की बैठक सिंग्रामपुर में हो रही है. इस बैठक के साथ मध्य प्रदेश सरकार कई सौगातें भी दे रही है. इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उद्योग विभाग और सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करें. औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों के लिए औद्योगिक संस्थानों में भूमि विकास के साथ ही सीवरेज व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दिलवाना सुनिश्चित किया जाए. उद्यमियों को आवश्यक अनुमतियों के लिए भी विभाग द्वारा निरंतर समीक्षा की जाए. छोटे उद्योगों और छोटे उद्यमियों के प्रोत्साहन के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारी साप्ताहिक रूप से समीक्षा बैठक करें. मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि जिन जिलों में पावरलूम सेक्टर में विकास की संभावना है वहां आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवायें. 700 से अधिक महिला उद्यमियों ने हिस्सा लियाबैठक में सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग की ओर से प्रेजेंटेशन में बताया गया कि इस वर्ष ग्वालियर व्यापार मेले में 1800 करोड़ से अधिक का व्यापार हुआ. उज्जैयिनी विक्रम व्यापार मेले में 2765.25 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ. महिला उद्यमी सम्मेलन भोपाल में 700 से अधिक महिला उद्यमियों ने हिस्सा लिया. लघु उद्योग भारती देवास इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव में भी एमएसएमई विभाग ने भूमिका निभाई. पावरलूम के साथ ही गारमेंट्स, टैक्सटाइल, फार्मा फर्नीचर और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में विशेष कार्य प्रारंभ किया गया है. एमएसएमई सेक्टर में कुल 850 इकाइयों को 275 करोड़ रुपये की राशि गत अगस्त माह में प्रदान की गई है. स्टार्टअप की संख्या में 150% की वृद्धि है हुईप्रदेश में स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है.कुल 2168 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं. प्रदेश में कुल साढ़े चार हजार स्टार्टअप और 70 इनक्यूबेटर स्थापित किए गए हैं. भोपाल में स्टार्टअप केंद्र की स्थापना की गई है. गत दो वर्ष में अधिमान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या में 150% की वृद्धि हुई है. भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में प्रदेश को लीडर श्रेणी में स्थान मिला है. अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स से अनुबंध किया गया है जिससे राज्य शासन ने 2.25 करोड़ निवेश किया है. इससे प्रदेश के तीन स्टार्टअप के लिए 11 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है.

गजब मध्य प्रदेश : आपस में भिड़े अध्यापक, महिला शिक्षक और मास्साब में चली चप्पलें ?

Amazing Madhya Pradesh: Teachers, female teachers clashed with

Amazing Madhya Pradesh: Teachers, female teachers clashed with each other and the mass of the students used slippers and licked them. ग्वालियर ! जिले में सरकारी स्कूल में टीचर और लेडी टीचर के बीच जमकर चप्पलें चलीं। एक-दूसरे को चांटे मारे। टीचर ने लेडी टीचर को धक्का मारा। वह सीढ़ियों से गिरने से बच गईं। लेडी टीचर का आरोप है कि वॉशरूम जाते समय उनका वीडियो बनाते हैं। लेडी टीचर ने शिकायत की है जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार का कहना है कि वीडियो के आधार पर दोनों टीचर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामला अडूपुरा स्थित मिडिल स्कूल का है। यहां एक ही परिसर में प्राइमरी और मिडिल स्कूल संचालित है। इसमें विद्या रतूड़ी प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं, जबकि शिशुपाल सिंह जादौन मिडिल स्कूल में पढ़ाते हैं। दोनों के बीच किसी बात को लेकर पिछले कई दिन से विवाद चल रहा है। दरअसल पेरेंट्स को पता चला था कि स्कूल में टीचर्स लेट आते हैं। इसी सिलसिले में एक बच्चे के पेरेंट्स स्कूल आए थे। आते ही स्कूल में टीचर्स की मौजूदगी देखने के लिए उन्होंने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इसी दौरान प्राइमरी स्कूल की टीचर विद्या रतूड़ी क्लास के अंदर गईं। वहां मौजूद शाला प्रभारी राजीव गौतम को लगा कि विद्या रतूड़ी ने पेरेंट्स को बुलाया है। इसी बात को लेकर अन्य शिक्षक शिशुपाल जादौन भी नाराज हो गए। उन्होंने गैलरी से लेडी टीचर को धक्का दे दिया। वे गिरते-गिरते बचीं। विरोध करने पर चप्पल से पीटने लगे और चांटे भी मारे…मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव भी किया। इसके बाद विद्या रतूड़ी ने भी सैंडल उतार कर शिशुपाल को मारना शुरू कर दिया। गिरेबां पकड़कर चांटे भी मारे। वहां मौजूद अभिभावक ने इसका वीडियो बनाते हुए सोशल मीडिया पर लाइव चला दिया। लेडी टीचर विद्या रतूड़ी का कहना है मुझे स्कूल में परेशान किया जा रहा है। हमें कुछ छात्रों ने बताया है कि जब हम वॉशरूम में जाते हैं, तो बाहर से पुरुष टीचर वीडियो बनाते हैं। स्कूल आने में देर हो जाए, तो नाराजगी जताते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के सामने अपमान करते हैं। लगातार कुछ मैडम को टारगेट किया जा रहा है। वहीं सिरोल थाना प्रभारी आलोक सिंह भदौरिया का कहना है कि दोनों पक्षों ने शिकायत की है। पुरुष टीचर ने आरोप लगाया है कि महिला टीचर लेट आती हैं। मामला शिक्षा विभाग का था। दोनों पक्ष पहले संकुल केन्द्र पर भी शिकायत कर चुके हैं। आगे की जांच के लिए शिक्षा विभाग को सौंप दिया है।

मध्य प्रदेश सरकार बच्चों के भविष्य से कर रही खिलवाड़ ? महज एक-एक शिक्षक से चलाए जा रहे 22 हजार विद्यालय

Is Madhya Pradesh government playing with the future of children?

Is Madhya Pradesh government playing with the future of children? 22 thousand schools are being run with just one teacher each. कमलेश ( विशेष संवादाता )भोपाल ! मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह दावे केवल कागजों ही शोभा बढ़ा रहे हैं. मध्य प्रदेश में 1275 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 22 हजार स्कूलों में महज एक-एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है. मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सीएम राईज स्कूल की शुरुआत की है. यह स्कूल सुविधाओं से युक्त है. इन स्कूलों में बच्चों को आने-जाने के लिए नि:शुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध की है, लेकिन दूसरी ओर स्थिति यह है कि 46 जिलों के 1275 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि करीब 22 हजार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं और साढ़े तीन हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी बच्चा नहीं है. 79 हजार शिक्षक पद खाली प्रदेश में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के करीब 79 हजार पद खाली हैं. हालांकि इस साल 9 हजार पदों पर भर्ती होने के बाद भी करीब 70 हजार पद खाली रह जाएंगे. जिसका सीध असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर देखें तो शहरों में स्थित स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है तो गांवों में टोटा पड़ा हुआ है. जिसकी वजह से गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. शहरों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हर शिक्षक अपने आपको शहर में पदस्थ करने की जुगाड़ में लगा रहता है. यही कारण है कि शहरों के स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं. इंदौर में 1,337, ग्वालियर में 1,153, भोपाल में 1,115 और जबलपुर में 887 शिक्षक पदस्थ हैं, वहीं सतना, बालाघाट, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, उज्जैन, राजगढ़, भिंड, मुरैना और देवास जिलों में भी शिक्षकों की संख्या अत्याधिक है. शौचालय विहिन 20 प्रतिशत स्कूल केन्द्र सरकार के आह्वान व प्रयासों के बाद हर घर शौचालय की जरूरत तो पूरी हो गई है, लेकिन स्कूलों में इस सुविधा का अभाव है. प्रदेश में 20 प्रतिशत स्कूल शौचालयविहिन है. जहां शौचालय है वहां पानी की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में 35.9 प्रतिशत शौचालयों का इस्तेमाल ही नहीं हो पाता. 28.4 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है. इसी राज्य प्रदेश के 5176 स्कूलों में पेयजल के इंतजाम नहीं है. 44 हजार 754 स्कूलों में खेल मैदान का अभाव है.

प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में मंगलवार को जनसुनवाई करने के आदेश जारी किया

The state government issued orders to hold public hearing in all the districts on Tuesday. उपरोक्त विषयांतर्गत संदर्भित परिपत्र का अवलोकन करें, जिसके ‌द्वारा मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव वर्ष 2023 की “आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण, आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान “जनसुनवाई कार्यक्रम स्थगित करने के निर्देश दिए गए थे। आदर्श आचार संहिता दिनांक 04.12.2023 से समाप्त हो चुकी है। अत “जन सुनवाई कार्यक्रम पूर्व की भांति पुनः प्रारम्भ किया जावे।

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