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देश में एक्टिव हुए कोरोना के दो वैरिएंट NB.1.8.1 and LF.7, जानें ये कितने खतरनाक?

नई दिल्ली देश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है। मई 2025 के अंत तक भारत में कोविड-19 के एक्टिव केस 1000 का आंकड़ा पार कर चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और बिहार समेत कई राज्यों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों ने सतर्कता बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा केस कहां? कोविड की इस नई लहर में केरल सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बनकर सामने आया है, जहां अब तक 430 से अधिक एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। वहीं, दिल्ली में 100 से ज्यादा मरीज, महाराष्ट्र में 43 नए केस, और नोएडा में 8 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। पटना में भी संक्रमण ने दस्तक दे दी है, जहां एक मरीज पटना एम्स का डॉक्टर है। नोएडा और पटना में नए केस नोएडा में सामने आए मामलों में से एक व्यक्ति की हाल की यात्रा चेन्नई से रही है, जो नए संक्रमण के प्रसार की आशंका को और गहरा करता है। वहीं बिहार की राजधानी पटना में दो नए केस दर्ज किए गए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है। कोरोना के नए वेरिएंट भारत में इस समय 4 वेरिएंट्स की पुष्टि हो चुकी है:     XFG सीरीज     LF.7 सीरीज     JN.1 सीरीज     NB.1.8.1 सीरीज इन वेरिएंट्स में से JN.1 तेजी से फैलने वाला बताया जा रहा है, जिसके लक्षणों में नाक बहना, गले में खराश, बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। एशिया में भी बढ़ता खतरा भारत के साथ-साथ एशिया के कई देशों में कोरोना मामलों में तेजी देखी जा रही है। हांगकांग, सिंगापुर, थाईलैंड और चीन में रोज़ नए संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। सिंगापुर और हांगकांग में मौतों की संख्या में भी इजाफा दर्ज हुआ है। कोरोना के दो वैरिएंट NB.1.8.1 and LF.7, जानें ये कितने खतरनाक? पिछले सप्ताह में वायरस के कारण कम से कम सात मौतें हुई हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्थापित भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के डेटा के अनुसार इस समय देश में कोरोना वायरस के दो वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 भी पाए गए हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में ख्याल आ सकता है कि यह दोनों वैरिएंट कितने खतरनाक हैं. चलिए हम आपको इस सवाल का जवाब देते हैं. सबसे पहले आपको संक्षेप में इन मामलों के अपडेट बताते हैं.     INSACOG के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में तमिलनाडु में NB.1.8.1 का एक मामला पाया गया था, जबकि मई में गुजरात में LF.7 के चार मामले सामने आए थे.     अब तक, 22 अलग-अलग देशों के ग्लोबल जीनोम डेटाबेस में NB.1.8.1 वैरिएंट के 58 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और सिंगापुर शामिल हैं. अमेरिका में, कैलिफ़ोर्निया, वाशिंगटन, वर्जीनिया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान इस वैरिएंट की पहचान की गई थी. कोरोना वायरस के NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 वैरिएंट क्या हैं? इसे जानने के लिए आपको पहले वैरिएंट का मतलब समझना होगा. दरअसल फैलने के लिए एक वायरस किसी होस्ट (इंसान या जानवर) को संक्रमित करता है, वह अपनी बहुत साली कॉपी बनाता है. जब कोई वायरस अपनी कॉपी बनाता है, तो वह हमेशा अपनी एक सटीक कॉपी तैयार करने में सक्षम नहीं होता है. इसका मतलब यह है कि, समय के साथ, वायरस अपने जीन सीक्वेंस (जिन कैसे लाइन में लगे हैं) में थोड़ा अलग होना शुरू कर सकता है. इस प्रक्रिया के दौरान उस वायरस के जीन सीक्वेंस में किसी भी परिवर्तन को म्यूटेशन के रूप में जाना जाता है, और इन नए म्यूटेशन (नए या अलग जीन सीक्वेंस वाले वायरस) वाले वायरस को ही वेरिएंट कहा जाता है. वेरिएंट एक या एक से अधिक म्यूटेशन से भिन्न हो सकते हैं. अब वापस आते हैं कोरोना वायरस के दो वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 पर. NB.1.8.1 और LF.7 दोनों कोरोना के JN.1 वैरिएंट में बदलाव होने से बने हैं आनी वे उप-वंशावली हैं. अभी भारत में सबसे अधिक फैलने वाला वैरिएंट JN.1 ही है. सभी मालूम चले कोरोना मामलों के सैंपल में 53% JN.1 वैरिएंट के ही हैं. इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और अन्य ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20 प्रतिशत) का स्थान है. भारत सरकार की तैयारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं। टेस्टिंग, ट्रैकिंग और आइसोलेशन पर ज़ोर देने की सिफारिश की गई है, ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। क्या कहती हैं ताज़ा रिपोर्ट्स?     दिल्ली में बीते एक हफ्ते में 100+ नए केस सामने आए हैं।     महाराष्ट्र में अब तक कोविड से 5 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।     केरल, कर्नाटक और मुंबई जैसे शहरों में रेड अलर्ट लागू कर दिया गया है। कोरोना वायरस के NB.1.8.1 और LF.7 – JN.1 वैरिएंट कितने खतरनाक? WHO के इन वैरिएंट को लेकर उनके जोखिम का जो शुरुआती मूल्यांकन किया है, उसके अनुसार, NB.1.8.1 वैरिएंट दुनिया भर में कम सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है. फिर भी इसमें A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन है. यह दिखाता है कि यह अन्य वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैल सकता है और शरीर के इम्यून सिस्टम (रोगों से लड़ने की क्षमता) को मात दे सकता है. शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि NB.1.8.1 और LF.7 के संक्रमण से सामान्य फ्लू या हल्के COVID-19 के समान लक्षण होते हैं. अधिकांश रोगी अस्पताल में एडमिट हुए बिना घर पर ही जल्दी ठीक हो जाते हैं. यह डेल्टा जैसे पहले के वेरिएंट के उल्टा है, जो अधिक गंभीर बीमारी और उच्च मृत्यु दर का कारण बनता है, खासकर बिना टीकाकरण वाले लोगों में या उनमें जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है . हांगकांग-ताइवान में मरीजों की भीड़…. कोरोना कहां-कहां बरपा रहा कहर? भारत में पिछले एक हफ्ते में कोविड-19 के 752 नए केस रिपोर्ट किए गए हैं. देश में कुल पॉजिटिव मामलों की तादाद 1,000 से ज्यादा हो गई है. केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली ऐसे राज्य हैं, जहां पिछले एक हफ्ते में सबसे ज्यादा नए मामले रिपोर्ट किए गए हैं. इसके साथ ही विदेश में भी कोरोना के … Read more

महीनों की शांति के बाद, कोरोना वायरस भारत के शहरों में धीरे-धीरे वापसी कर रहा, 20 राज्यों में आये मामले

नई दिल्ली महीनों की शांति के बाद, कोरोना वायरस भारत के शहरों में धीरे-धीरे वापसी कर रहा है. दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कोविड-19 के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है. इन सभी राज्यों में अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है. भारत में दो नए कोविड-19 वेरिएंट- NB.1.8.1 और LF.7 का पता चला है. देश के कम से कम 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के नए मरीज सामने आए हैं. आईसीयू बेड, ऑक्सीजन सप्लाई और अन्य जरूरी उपकरणों के साथ अस्पतालों को अपनी ओर से पूरी तैयारी रखने का निर्देश है. महाराष्ट्र में कोरोना के ज्यादातर नए केस मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरों में रिपोर्ट हो रहे हैं. केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस महीने कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. कर्नाटक में भी बेंगलुरु नए कोविड मामलों का सेंटर बनकर उभरा है. राष्ट्रीय राजधानी में तीन साल में पहली बार कोरोना वायरस के 23 मामले दर्ज किए गए हैं. ज्यादातर मामले हल्के हैं और मरीजों को कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है. हालांकि, ठाणे और बेंगलुरु में कोरोना संक्रमित दो मरीजों की मौत भी हुई है. कर्नाटक के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जिस कोरोना संक्रमित 84 वर्षीय व्यक्ति की बेंगलुरु में मौत हुई, उसे पहले से कई गंभीर बीमारियां थीं. वहीं, ठाणे नगर निगम ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज कालवा अस्पताल में इलाज करा रहे 21 वर्षीय कोविड-19 मरीज की मौत हो गई. केरल में कोविड संक्रमण के सर्वाधिक मामले मई में कोविड संक्रमण के सर्वाधिक 273 मामले केरल में सामने आए हैं. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है. केरल के अस्पतालों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और खांसी के लक्षण वाले लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी गई है. पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी कोविड के मामलों में मामूली वृद्धि देखी गई है, जहां 35 संक्रमण दर्ज किए गए हैं. इनमें होसकोटे का नौ महीने का बच्चा भी शामिल है. सांस की गंभीर बीमारी या सांस लेने में दिक्कत का सामना करने वाले लोगों को तत्काल अपना कोविड टेस्ट करवाने की सलाह दी गई है. मुंबई में मई में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 95 मामले सामने आए हैं, जो महाराष्ट्र में कोविड संक्रमण के कुल मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा है. हालांकि, शहर में अस्पताल में भर्ती होने की दर कम रही है, केवल 16 मरीज भर्ती हुए हैं. बीएमसी ने सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) जैसे लक्षण वाले सभी मरीजों को अपना कोविड जांच कराने की सलाह दी है. महाराष्ट्र के ठाणे में पिछले तीन दिनों में कोविड के 10 मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है. आंध्र प्रदेश में कोरोना के मामलों में बहुत ज्यादा उछाल नहीं आया है, लेकिन राज्य ने अस्पतालों को वैक्सीन, पीपीई किट और ट्रिपल-लेयर मास्क की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने का निर्देश दिया है. कोविड प्रभावित देशों, खासकर एशियाई देशों से लौटने वालों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी गई है. तमिलनाडु में भी मई महीने में अब तक कोरोना संक्रमण के 66 नए मामले दर्ज किए गए हैं. अचानक क्यों बढ़ने लगे कोरोना के मामले? दक्षिण एशिया में कोविड मामलों में उछाल संभवतः JN.1 वैरिएंट (ओमिक्रॉन का एक सब-वैरिएंट) के प्रसार के कारण हो रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैरिएंट काफी एक्टिव है, लेकिन इसे अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा चिंताजनक वैरिएंट के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है. कोरोना के इस वैरिएंट से संक्रमित होने वाले मरीजों में लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं और वह चार दिनों के भीतर ठीक हो जाता है. कुछ सामान्य लक्षणों में बुखार, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द, थकान, थकावट इत्यादि शामिल हैं. तमिलनाडु में अप्रैल 2025 में NB.1.8.1 की पहचान की गई, जबकि गुजरात में मई में LF.7 के चार मामलों की पुष्टि हुई. इन दोनों को WHO द्वारा ‘निगरानी में रखे गए वैरिएंट’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रमुख स्ट्रेन JN.1 बना हुआ है, जो सभी जांच किए गए सैंपल्स के 53% में पाया गया है. इसके बाद BA.2 (26%) और अन्य ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20%) आते हैं. NB.1.8.1 और LF.7 जैसे वैरिएंट के सामने आने के बावजूद, कोई सबूत नहीं है कि ये ज्यादा गंभीर बीमारी का कारण बन रहे हैं. इनसे संक्रमित होने वाले मरीजों में लक्षण सामान्य सर्दी या हल्के फ्लू जैसे ही रहते हैं. बढ़ते कोविड मामले कितनी परेशानी की बात? कोरोना संक्रमण में अचानक बढ़ोतरी को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं, घबराने की नहीं. उनका कहना है कि पिछले संक्रमणों और टीकाकरण से मिली मजबूत हाइब्रिड इम्युनिटी के साथ, भारत स्थिर स्थिति में है. साथ ही उन्होंने सरकार को नए कोविड वैरिएंट पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत में मामूली वृद्धि कोविड-19 संक्रमण की सही संख्या को सही ढंग से नहीं दर्शा सकती है, क्योंकि श्वसन संबंधी लक्षणों वाले कई व्यक्ति कोविड-19 परीक्षण नहीं करवाते हैं. फिर भी, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि वायरस ने अधिक गंभीर बीमारी पैदा करने के लिए म्यूटेशन किया है. वायरस के विकास पर नजर रखने वाले माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स का कहना है कि जब तक वायरस में महत्वपूर्ण विकासात्मक बदलाव नहीं आता, तब तक संक्रमण के पैटर्न या गंभीरता में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. लोगों में बन गई है सेल्फ इम्युनिटी: डॉ. गुलेरिया दिल्ली एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने आज तक से बातचीत में कहा कि जो नया वैरिएंट JN.1 सामने आया है, यह 2023 में ही रिपोर्ट हुआ था. कोरोना का यह वैरिएंट पूरी दुनिया में अब सबसे डॉमिनेंट वैरिएंट हो गया है. इस वैरिएंट में कुछ म्यूटेशन हुए हैं, जिसके कारण यह ज्यादा संक्रमणकारी हो गया है. यह लोगों की बॉडी की इम्युनिटी को बायपास करके उनको संक्रमित कर रहा है. लेकिन इससे संक्रमित लोगों में देखा गया है कि लक्षण हल्के होते हैं. अधिकतर लोगों में खांसी, नजला, बुखार, गले में खरास जैसे सामान्य लक्षण ही … Read more

इंदौर में मिले 2 पॉजीटिव मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, मरीजों को घरों में ही किया आइसोलेट. जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर.

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है. यहां जनवरी से अब तक कुल 5 मरीज मिले. फिलहाल दो लोग कॉविड पॉजिटिव पाए गए हैं, जिन्हें उनके घर पर ही आइसोलेट किया गया है. जिन दो लोगों को कोविड पॉजिटिव पाया गया है, उनकी केरल की ट्रैवल हिस्ट्री मिली है. इंदौर के सीएएचओ भूरे सिंह सैत्या के मुताबिक “फिलहाल दोनों मरीजों की स्थिति सामान्य है, इनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं है. दोनों को बुखार, सर्दी, खांसी थी.” दोनों मरीजों की मॉनीटरिंग कर रहा स्वास्थ्य विभाग इसके बाद जांच करने पर दोनों पॉजिटिव निकले. स्वास्थ्य विभाग की टीम इन मरीजों की मॉनिटरिंग कर रही है. अच्छी बात यह है जनवरी से लेकर अभी तक सिर्फ 5 मरीज ही इंदौर में मिले हैं, जिसमें से सिर्फ एक की मृत्यु हुई है और यह मृत्यु भी अन्य बीमारियों के चलते भी हुई है. बाकी 4 मरीजों की स्थिति सामान्य है. दो मरीज जो हाल ही में मिले हैं, उनकी पुनः जांच कराई जा रही है. किसी भी प्रकार की कोई ऐसी स्थिति वर्तमान में निर्मित नहीं है कि इंदौर में पॉजिटिव कैसे बढ़ रहे हैं. यह जो कैसे आए हैं यह भी इंदौर के जरूर है लेकिन इनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी है. देश में कुल 300 मरीजों का आंकड़ा बता दें कि देश में 300 के करीब संक्रमित मरीजों का आंकड़ा हो गया है. फिलहाल मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडु, गुजरात और केरल में करीब 259 मामले दर्ज किया जा चुके हैं. हालांकि इन मरीजों की स्थिति सामान्य है. हाल ही में हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद में 3 नए मामले सामने आए हैं, जबकि गुजरात में 15 और महाराष्ट्र में 26 मामले दर्ज किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि वर्तमान में जे एन 1वेरिएंट पाया जा रहा है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है.

देश के कई हिस्सों में कोविड-19 के मामलों में एक बार फिर तेज़ी देखी जा रही, अब तक 312 मामले

नई दिल्ली देश के कई इलाकों में कोविड-19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसको लेकर सरकारों ने चिंता जताई है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. इसी बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकार ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी अस्पतालों को सतर्क रहने और कोविड से निपटने की पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं. ये पहली बार है जब दिल्ली में लगभग तीन वर्षों के बाद COVID-19 मामले सामने आए हैं. वहीं,  गुजरात, हरियाणा, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों में कोविड-19 के नए मामले सामने आए हैं. दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में सभी अस्पतालों को बेड, ऑक्सीजन, दवाओं और वैक्सीन की उपलब्धता के लिए तैयार रहने को कहा गया है. शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि गुरुवार तक कोविड-19 के 23 मामले सामने आए हैं और सरकार इस बात की पुष्टि कर रही है कि मरीज दिल्ली के निवासी हैं या उन्होंने शहर से बाहर की यात्रा की है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये पॉजिटिव मामले निजी लैब द्वारा रिपोर्ट किए गए हैं और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि इस वेरिएंट में सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण हैं. क्या बोले दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने आजतक से बातचीत में कहा कि आज दिल्ली के तमाम अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के साथ हमने बैठक की है, जिसमें अस्पतालों को निर्देश दिया गया है की कोविड से लड़ने के लिए तमाम तैयारियां की जाए चाहे वह ऑक्सीजन बेड की हो ऑक्सीजन कंसंट्रेट की हो. उन्होंने बातचीत में ये भी बताया की पैनिक होने की जरूरत नहीं है, अभी दिल्ली में कोरोना के जो केस आए हैं. उनकी संख्या में 23 है, सरकार मॉनिटरिंग कर रही है कि यह जो केस दिल्ली में दर्ज किए गए हैं. वह बेशक प्राइवेट लैब के जरिए आए हो, लेकिन क्या वह दिल्ली के हैं या फिर वह बाहर से आए हैं. इन सब की मॉनिटरिंग सरकार कर रही है और जनता को वक्त-वक्त पर अपडेट दिया जाता रहेगा. दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों से कोविड-19 के सभी पॉजिटिव सैंपल्स को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए लोक नायक अस्पताल भेजने का निर्देश दिया है. साथ ही दिल्ली स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल पर सभी मापदंडों की दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है. सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है, ‘अस्पतालों को बेड, ऑक्सीजन, एंटीबायोटिक्स, अन्य दवाओं और वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी. सभी उपकरण जैसे वेंटिलेटर, बीआई-पीएपी, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और पीएसए (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) चालू स्थिति में होने चाहिए.’ एडवाइजरी के अनुसार, समर्पित कर्मचारियों को रिफ्रेशर प्रशिक्षण दिया जा सकता है और सभी स्वास्थ्य सुविधाओं (ओपीडी/आईपीडी) में इन्फ्लूएंजा जैसी रोग (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (एसएआरआई) के मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (आईएचआईपी) पोर्टल पर सुनिश्चित की जानी चाहिए. पुष्टि किए गए इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 मामलों को भी आईएचआईपी पर एल फॉर्म के तहत दर्ज किया जाना चाहिए. एडवाइजरी में ये भी कहा गया है कि अस्पताल कैंपस और स्वास्थ्य सुविधाओं पर मास्क पहनने समेत श्वसन संबंधी शिष्टाचार का पालन किया जाना चाहिए. सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अविरल माथुर ने कहा, “जेएन.1 वेरिएंट और इसके सब-वेरिएंट से जुड़े कोविड-19 मामलों में हालिया उछाल के साथ, हमें सावधानी के साथ काम करना चाहिए. यह स्ट्रेन अत्यधिक संक्रामक है. हालांकि, लक्षण ज्यादातर हल्के ही रहते हैं. फिर भी,रोकथाम जरूरी है. दिल्ली में 23 नए केस, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइज़री में सभी अस्पतालों को बेड, ऑक्सीजन, दवाओं और वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है . स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने शुक्रवार को बताया कि गुरुवार तक कोविड-19 के 23 मामले सामने आए हैं . सरकार यह पुष्टि कर रही है कि मरीज दिल्ली के निवासी हैं या उन्होंने शहर से बाहर की यात्रा की है . स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ये पॉजिटिव मामले निजी लैब द्वारा रिपोर्ट किए गए हैं और घबराने की कोई जरूरत नहीं है . उन्होंने कहा कि इस वेरिएंट में सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण हैं . दिल्ली सरकार ने सभी अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के साथ बैठक की है, जिसमें अस्पतालों को ऑक्सीजन बेड और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसी सभी तैयारियां करने का निर्देश दिया गया है . सरकार निगरानी कर रही है और जनता को समय-समय पर अपडेट दिया जाएगा . सभी कोविड-19 पॉजिटिव सैंपल्स को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए लोक नायक अस्पताल भेजने और सभी स्वास्थ्य डेटा की दैनिक रिपोर्टिंग ‘दिल्ली स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल’ पर अनिवार्य कर दी गई है . एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अस्पताल परिसर और स्वास्थ्य सुविधाओं पर मास्क पहनने सहित श्वसन संबंधी शिष्टाचार का पालन किया जाना चाहिए . गुरुग्राम और अन्य राज्यों में भी दस्तक दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुरुग्राम में भी कोरोना की दस्तक हुई है, जहां दो मरीज मिले हैं . दोनों को फिलहाल आइसोलेशन में रखा गया है, जिनमें से एक मुंबई से गुरुग्राम आई थी . गुरुग्राम के सीएमओ ने बताया कि लक्षण हल्के हैं और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है . गुरुवार को गुजरात में कोरोना वायरस के 15 नए मामले सामने आए . अहमदाबाद में 4 नए केस दर्ज हुए, जिनमें 84 साल के एक मरीज प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं, बाकी होम आइसोलेशन में हैं . पूरे मई महीने में अहमदाबाद में 38 कोरोना केस दर्ज हुए हैं, जिनमें 31 एक्टिव केस हैं . बुधवार को केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि राज्य में मई में कोविड-19 के 182 मामले सामने आए . कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने 21 मई को पुष्टि की कि राज्य में कोविड-19 के 16 सक्रिय मामले हैं . बेंगलुरु में नौ महीने के एक बच्चे में भी कोविड-19 की पुष्टि हुई है . JN.1 वेरिएंट: तेजी से फैलने वाला, पर कम खतरनाक इस नई लहर के लिए ओमिक्रॉन का JN.1 वेरिएंट और इसके सब-वैरिएंट्स .F.7 और NB.1.8 जिम्मेदार हैं . विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने JN.1 को दिसंबर 2023 में ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था . विशेषज्ञ बताते … Read more

एशिया में कोविड का नया वेरिएंट JN.1 से खतरे की घंटी? पिछले 1 साल में सबसे ज्यादा एक्टिव केस, डॉक्टर ने कही ये बात

नई दिल्ली कोरोना वायरस कहें या कोविड-19 साल 2020 के बाद से इसका खौफ लोगों के बीच खूब देखने को मिला. इस महामारी से दुनियाभर में सैंकड़ों लोगों ने जान गवाईं. अभी लोग ढंग से कोविड-19 द्वारा मचाई गई तबाही को भूले भी नहीं थे के इस बीच एशिया के कुछ देशों में कोरोना के केस फिर से बढ़ने लगे हैं. सिंगापुर, हांगकांग और थाईलैंड में संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसकी वजह है ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट है जो बहुत जल्दी फैलता है और अब इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा रहा है. सिंगापुर में 3 मई तक के हफ्ते में 14,200 नए कोरोना केस मिले, जबकि पिछले हफ्ते यह संख्या 11,100 थी. वहां अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी 30% बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से वहां के हेल्थ ऑफिसर ज्यादा सतर्क हो गए हैं. हांगकांग में भी हालात अच्छे नहीं हैं. वहां कोरोना का फैलाव काफी ज्यादा बताया जा रहा है. हेल्थ ऑफिसर अल्बर्ट औ के मुताबिक, इस साल अब तक सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं. एक ही हफ्ते में 31 लोगों की मौत भी हुई है, जो एक साल में सबसे ज्यादा है. कई लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं. भारत में अभी कोरोना के मामले कम हैं, लेकिन थोड़ी बढ़त जरूर हुई है. 19 मई तक 257 एक्टिव केस सामने आए हैं. आसपास के देशों में मामले बढ़ने की वजह से भारत के डॉक्टर और हेल्थ ऑफिर्स अलर्ट पर हैं और हालात पर नजर रख रहे हैं ताकि समय रहते कोई जरूरी कदम उठाया जा सके. लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर ओमिक्रॉन का ये नया वेरिएंट JN.1 क्या है? इसके लक्षण क्या हैं और ये कैसे फैलता है? चलिए जानते हैं. JN.1 वैरिएंट क्या है? JN.1 कोरोना वायरस का एक नया रूप है, जो ओमिक्रॉन से जुड़ा है. यह BA.2.86 नाम के पुराने वेरिएंट से निकला है, जिसे पिरोला भी कहा जाता है. इस वेरिएंट की पहचान सबसे पहले 2023 के आखिरी में हुई थी. इसके बाद यह अमेरिका, यूके, भारत, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों में तेजी से फैल गया. इस वेरिएंट में स्पाइक प्रोटीन (वायरस का वो हिस्सा जिससे वह शरीर की सेल्स से चिपकता है) में एक खास बदलाव (म्यूटेशन) हुआ है. इस बदलाव की वजह से यह वायरस ज्यादा तेजी से फैल सकता है. यह शरीर की उस इम्युनिटी को भी बेद सकता है, जो वैक्सीन लगवाने या पहले कोविड होने के बाद बनी थी. कितना खतरनाक है JN.1? फिलहाल के आंकड़ों के मुताबिक, JN.1 वेरिएंट ओमिक्रॉन के पुराने वेरिएंट्स की तरह ही है और इससे गंभीर बीमारी होने का खतरा बहुत कम है. अधिकतर लोगों में इसके लक्षण हल्के से मध्यम लेवल के ही देखे गए हैं. इनमें गले में खराश, बहती नाक, हल्का बुखार, थकान और खांसी जैसे लक्षण शामिल हैं. ये लक्षण पहले वाले ओमिक्रॉन वायरस से बहुत मिलते-जुलते हैं. हालांकि, JN.1 की सबसे बड़ी चिंता इसकी तेजी से फैलने की क्षमता है. यह वेरिएंट बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, इसलिए इसके केस तेजी से बढ़ सकते हैं. अभी तक डॉस्पिटल में एडमिट होने वालों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं देखी गई है, लेकिन फिर भी बुज़ुर्ग लोगों, पहले से बीमार लोगों और जिनकी इम्युनिटी कमजोर है उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है. इस वेरिएंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और सतर्कता बहुत जरूरी है, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके. कोविड का नया वेरिएंट JN.1 क्या खतरे की घंटी कोरोना एक बार फिर एशिया के कुछ हिस्सों में दस्तक दे रहा है। भारत में पिछले एक साल में सबसे अधिक 257 सक्रिय केस दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, AIIMS के एक्सपर्ट डॉ संजय रॉय का कहना है कि JN-1 एक साल पुराना वेरिएंट है, कोई नया वायरस नहीं है। न ही यह कोई नया स्ट्रेन है। पॉजिटिव केस इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि टेस्ट किए जा रहे हैं। मौजूदा हालात में JN.1 को लेकर घबराने वाली बात नहीं है। अभी तक इसको लेकर साइंस यही कहता है कि यह कॉमन कोल्ड है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय का भी कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के एक्सपर्ट और कोरोना वैक्सीन ट्रायल के प्रमुख रहे डॉक्टर संजय रॉय ने बताया कि कोरोना फैमिली के हजार से भी ज्यादा वेरिएंट हैं। लेकिन, मुख्य रूप से सात ऐसे वायरस हैं जो इंसानों को प्रभावित करते हैं। 2002 तक कोरोना वायरस (CoV) इंसानों के लिए मामूली वायरस माना जाता था। लेकिन पिछले 20 से 25 सालों में इसके इफेक्ट को देखें तो कोरोना परिवार का 5वां वायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) आया। इसके बाद इस परिवार का छठा वायरस मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS-CoV) आया। अब इसका 7वां वायरस कोविड-19 है। जहां तक वर्तमान हालात की बात है तो अब यह कॉमन कोल्ड है। इसके ज्यादा खतरनाक होने का कोई एविडेंस अभी नहीं है। वैज्ञानिक समझ के आधार पर करनी होगी बात डॉक्टर संजय ने कहा कि साइंस की बातें तो साइंस के आधार पर ही होनी चाहिए। वट्सऐप से जानकारी लेकर बातें नहीं करनी चाहिए। JN.1 वेरिएंट में नया कुछ नहीं है। एक साल पुराना है। इसको लेकर इतनी बातें करने के पीछे कोई साइंस तो नहीं दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी का कमर्शियल इंट्रेस्ट हो तो यह अलग बात है, लेकिन यह भी बहुत दिनों तक नहीं चलता है। अमेरिका जैसे देश ने अपने यहां छह महीने तक के बच्चों का भी कोविड वैक्सीनेशन करा दिया, जबकि हमने साइंस की बात की। हमारी सरकार ने भी इसे तवज्जो दिया और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को एक भी वैक्सीन नहीं लगी और वायरस का उनपर असर भी कुछ नहीं हुआ। हमें समझना होगा और वैज्ञानिक समझ के आधार पर ही बात करनी होगी। सिक्वेंसिंग में पहले भी मिला था वेरिएंट JN.1 दिल्ली में कोरोना वायरस पर नजर रखने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की जाती थी, लेकिन सूत्रों का कहना है … Read more

कोविड-19 एक बार फिर फैल रहा, देश में फिलहाल 257 एक्टिव मामले

नई दिल्ली  कोविड-19 एक बार फिर फैल रहा है। भारत में फिलहाल कोविड के मामले उतनी चिंता में डालने वाले नहीं हैं, लेकिन फिर भी कुछ राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। देश में फिलहाल 257 एक्टिव मामले हैं। कुछ राज्यों में मामूली केस हैं तो कुछ में आंकड़ा अच्छा खासा है। जैसे हरियाणा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कोविड के 1-1 केस ही हैं तो वहीं केरल में इस समय 95 एक्टिव केस हैं। देश की राजधानी दिल्ली में भी इस समय कोविड के 5 एक्टिव केस हैं। हालांकि, कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां एक भी कोरोना का मामला सामने नहीं आया है। तमिलनाडु में भी कोरोना के 55 एक्टिव मामले हैं। महाराष्ट्र में केस इससे 10 कम यानी 56 हैं। आइए आपको बताते हैं कि किस राज्य में कितने एक्टिव केस इस समय हैं। किस राज्य में कितने एक्टिव केस राज्य    एक्टिव केस केरल    95 तमिलनाडु    66 महाराष्ट्र    56 कर्नाटक    13 पुडुचेरी    10 गुजरात    7 दिल्ली    5 राजस्थान    2 हरियाणा    1 पश्चिम बंगाल    1 सिक्किम    1 कुल मामले    257 सिंगापुर-चीन में भी फैल रहा कोरोना एशिया के कुछ देशों में कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हांगकांग, सिंगापुर, थाईलैंड के अलावा चीन में भी कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 27 अप्रैल से 3 मई 2025 के सप्ताह में कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़कर 14,200 हो गई, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 11,100 थी। थाइलैंड में 33 हजार मामले इस अवधि में सिंगापुर के अंदर कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की औसत संख्या 102 से बढ़कर 133 हो गई। थाईलैंड में 11 मई से 17 मई के बीच मामले बढ़कर 33,030 हो गए, जबकि बैंकॉक में 6,000 मामले सामने आए। इसी तरह हांगकांग में भी कोविड-19 के मामलों में सिर्फ 4 हफ्तों (6 से 12 अप्रैल) के अंदर 6.21% से 13.66% की वृद्धि हुई।

कोरोना जैसी ब्रोंकाइटिस के मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ी

भोपाल कोरोना वायरस खत्म होने के बाद लोगों ने इसे भूलना शुरु ही किया था कि फिर से एक बार खबरें आने लगी हैं। एमपी में भोपाल शहर के अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, उल्टी-पेट दर्द और फेफड़े में संक्रमण के मरीजों संख्या बढ़ती जा रही है। कोरोना जैसी ब्रोंकाइटिस के मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है। इनके लक्षण कोरोना जैसे ही बताए जा रहे हैं।  हालांकि श्वास रोग चिकित्सा संस्थानों ने कोरोना के लक्षण होने से इनकार किया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह की बीमारी ज्यादातर उन लोगों को हो रही है, जिन्हें एलर्जी की बीमारी है या वे नियमित दवा खाते हैं। अगर आपको भी ऐसे कोई लक्षण शरीर में दिखते हैं तो तुरंत एहतियात बरतना शुरु कर दीजिए। ये एहतियात बरतें ● बाहर जाते समय एन 95 मास्क पहने ● एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें ● नियमित अस्थमा और सीओपीडी की दवाएं ● लक्षण में बदलाव होने पर शीघ्र ही डॉक्टर से संपर्क करें 10 बिस्तरों का डेंगू वार्ड तैयार डेंगू को लेकर जिला चिकित्सालय अलर्ट मोड पर आ गया है। जेपी हॉस्पिटल में डेंगू के लिए 10 बिस्तर का वार्ड तैयार कर लिया गया है। इस दौरान डॉक्टरों की टीम ने वार्ड का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण में निर्णय लिया कि यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है, तो उसके अनुसार बेड भी बढ़ाया जाएगा। 15 जून से बढ़ने लगेंगे डेंगू के मरीज डाक्टरों का कहना है कि 15 जून के बाद मानसून शुरू होते ही डेंगू के मरीज बढ़ने लगेंगे। बताया कि बारिश होते ही एडिस मच्छरों का प्रजनन काल शुरू हो जाता है। जेपी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि डेंगू वार्ड में मरीज के लिए बेड तैयार किया गया है।

मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना का एक नया मामला सामने आया, इलाज के दौरान महिला की मौत, डॉक्टर्स पॉजिटिव युवक का इलाज कर

इंदौर  मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी. इंदौर के एक प्राइवेट अस्पताल में एक महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थी, उसका किडनी से संबंधित बीमारी का इलाज किया जा रहा था, लेकिन जांच में वह कोरोना पॉजिटिव मिली. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना से स्वास्थ्य महकमें में हड़कंप मच गया. अन्य दो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. डॉक्टर्स कोरोना वायरस के लौटने से हैरान हैं. मध्य प्रदेश के इंदौर में लंबे समय बाद कोविड के दो मरीज मिले हैं. इनमें एक युवक है जबकि, दूसरी बुजुर्ग महिला है. दोनों को एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था. दोनों को अलग-अलग बीमारियां हैं. इनमें से महिला की अन्य बीमारियों के चलते सोमवार को मौत हो गई जबकि युवक का इलाज चल रहा है. बताया जा है कि दोनों मरीज इंदौर के हैं. इनमें से युवक को दो-तीन दिनों से सर्दी खांसी थी. उसने पहले दूसरे अस्पताल में दिखाया, लेकिन फर्क नहीं पड़ने पर अरबिंदो अस्पताल में दिखाया. यहां उसकी कई प्रकार की जांचें हुईं, जिनमें कोविड की पुष्टि हुई. ऐसे भर्ती हुई महिला प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महिला इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र की रहने वाली थी. 74 वर्षीय महिला को किडनी की बीमारी के कारण एडमिट किया गया था, उसे सीवियर सेप्टिक था. वह कोमार्बिट पैसेंट थी. उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसकी भी फ्लू पैनल जांच की गई. जिसमें वह भी कोविड पॉजिटिव पाई गई. सोमवार को उसकी मौत हो गई. डॉक्टर्स का कहना है कि महिला को किडनी में समस्या के साथ अन्य बीमारियां थीं साथ ही वह कोरोना पॉजिटिव भी पाई गई थी, जिसकी से उसकी मौत हुई. युवक का इलाज जारी डॉक्टर्स ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला के बाद एक युवक भी काफी दिनों से सर्दी खांसी की समस्या से परेशान था. उसके इलाज के लिए उसकी कई प्रकार की जांच की गई. जिसमें कोरोना का जांच भी शामिल थी. उसे कोरोना की जांच में पॉजिटिव मिलने पर सावधानियां बरती गईं. फिलहाल युवक ठीक है. उसका इलाज जारी है.

मध्य प्रदेश में फिर डराने लगा कोरोना, इंदौर में मरीज मिलने के बाद मचा हड़कंप

COVID in Madhya Pradesh, as a patient in Indore tests positive. Doctors advise people to stay vigilant. इंदौर। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। इंदौर में एक मरीज मिलने के बाद डॉक्टरों ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एक बुजुर्ग की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह सर्दी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज को होम आईसोलेशन में रखा गया है। दो साल बाद भी कोविड का भय खत्म नहीं हुआ है। 70 वर्षीय बुजुर्ग की सर्दी खांसी के जांच के बाद कोविड पॉजिविट मिला है। इसके बाद मरीज का होम आईसोलेशन कर उपचार किया गया। मरीज की हालत ठीक है।कोविड नोडल अधिकारी डॉ अमित मालाकार ने बताया कि हरदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मरीज को आईसोलेशन में रखकर उसका उपचार किया गया। फिलहाल मरीज की हालत ठीक है। मामला 24 नवंबर का है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव है। बता दे कि मामले के 16 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मरीज की सांझा नहीं की है।

कोविड और हार्ट अटैक पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का चौकाने वाला बड़ा बयान.!

Corona; Covid; Hearth Attack; Sahara Samachaar; Mansukh Mandaviya

Shocking statement by the Central Health Minister on COVID and heart attacks Manish Trivediनई दिल्ली : लगातार देश में आ रही हार्ट अटैक की खबरों से लोगों की नींद हराम हो गईं हैं,अगर देखा जाये तो सबसे अधिक युवा वर्ग प्रभावित हो रहे हैं. लोगों के दिमाग में ये भी सवाल उठना शुरू हो गया है कि कहीं हार्ट अटैक बढ़ने की खबरों का कोविड से तो कोई संबंध नहीं है. जानिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का चौकाने वाला बड़ा बयान जरूर पढ़ें. स्वास्थ्य मंत्री ने साफ तौर पर इसका जवाब हां में दिया है. उन्होंने कहा कि जिस किसी व्यक्ति को कोविड की बीमारी हुई थी, उसे आने वाले दो-तीन सालों तक कोई भी कठिन और तनावपूर्ण कार्य से बचना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को दो से तीन सालों तक कठिन एक्सरसाइज भी नहीं करना चाहिए. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस संबंध में इंडियन काउंसल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडी का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने इस संबंध में एक स्टडी की है. इसके अनुसार जिन्हें भी कोविड का इन्फेक्शन हुआ था, उन्हें आने वाले कम से कम दो सालों तक कठिन कार्य से बचना चाहिए. मंडाविया ने कहा कि हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिसके बाद इस पर स्टडी किया गया. मंत्री ने कहा कि 22 अक्टूबर को गुजरात के खेडा में गर्बा खेलते-खेलते 17 साल का एक लड़का हार्ट अटैक का शिकार हो गया. इस तरह की कई घटनाएं हुईं हैं,

चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं की सभा में नहीं जुट पा रही भीड़,

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Assembly Elections)में प्रचार के दौरान प्रत्याशियों (candidates)को खासी मुसीबत (Trouble)का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों (localities)में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों (candidates)को सुनने के लिए लोग इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं. सभाओं में खाली कुर्सियां नेताओं के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं. राघोगढ़ के भाजपा प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में ग्रामीण इकट्ठा नहीं हो पाए. नतीजतन कुर्सियां खाली पड़ी रहीं. धरनावदा में आयोजित अपनी सभा में खाली कुर्सियों को देखकर बीजेपी प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह ने मंच से कहा, मैं 100 टंच किसान हूं. पार्टी ने मुझे टिकट दिया इसलिए कुर्ता पजामा पहनकर घूम रहा हूं. फसल कटाई चल रही है, इसलिए लोग खेतीबाड़ी में व्यस्त हैं. युवा वर्ग भी काम पर निकल जाता है इसलिए लोग नहीं आ पाए. मैं किसानों की परेशानी समझता हूं. कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा प्रत्याशी ने खुद को कट्टर सनातनी बताते हुए कहा कि चुनाव तो हम जीत चुके हैं. विपक्षियों की बौखलाहट दिखाई दे रही है. कांग्रेस के ठेकेदार डराने धमकाने का काम कर रहे हैं. भाजपा में कोई ठेकेदार नहीं है बल्कि संगठन सर्वोपरी है. हीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेसी नेता वीरेंद्र रघुवंशी का भी जिक्र किया. कहा कि वीरेंद्र भैया के साथ बहुत बुरा हुआ. पार्टी में वापस लौटेंगे तो मान सम्मान के साथ उनका स्वागत किया जाएगा. हीरेन्द्र सिंह ने दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कमलनाथ उनके कपड़े फाड़ने की बात कर रहे हैं. बड़े लोगों की बड़ी बातें होती हैं. बीजेपी प्रत्याशी ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अब बैठकों का दौर खत्म हो चुका है. समय कम है. चुनाव में जुट जाएं. चुनाव बेटी की शादी की तरह होता है. डेढ़ महीने पहले से जुटना पड़ता है . वहीं, राघोगढ़ से कांग्रेस के प्रत्याशी विधायक जयवर्धन सिंह भी विधानसभा क्षेत्र में प्रचार प्रसार करने में जुटे हैं. जयवर्धन ने मंच से बयान देते हुए कहा बीजेपी के राज में किसान बदहाल है. सहकारी बैंकों में करोड़ों के घोटाले हो रहे हैं. 2003 से पहले जब कांग्रेस सरकार थी तो हर पांच साल में कृषि मंडी, सहकारी बैंक और सोसाइटी में चुनाव होते थे. लेकिन अब भाजपा के दलाल इन संस्थाओं में बैठ गए हैं. हाल ही में दिग्विजय सिंह के विधायक पुत्र का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मासूम बच्चे को गोद में लेकर भाषण देते दिखाई दिए थे. बता दें कि मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा के आगामी चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होगा और मतों की गिनती 3 दिसंबर को होगी.

पूर्व मंत्री इमरती देवी की सिंधिया से मांग, बोलीं-डबरा को जिला बनवा दें, मैं राजनीति छोड़ दूंगी

संतोष सिंह तोमर,ग्‍वालियर । डबरा विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने डबरा (Dabra) को जिला बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के सामने ऐलान कर दिया कि इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए। भले ही आगे मुझे टिकट मत देना, लेकिन डबरा को जिला बनवा दें। मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। पूर्व मंत्री इमरती देवी भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए। मध्य प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों में हमेशा में हमेशा चर्चा में रहने वाली पूर्व मंत्री और भाजपा नेता इमरती देवी में आज डबरा तहसील को जिला बनाने की मांग की। बीजेपी के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उन्होंने मंच से मांग उठाई कि महाराज डबरा को जिला बनवा दीजिए मुझे अब कोई और काम नहीं चाहिए। यदि मैं मर गई तो डबरा के लोग कहेंगे कि डबरा को जिला ज्योतिरादित्य सिंधिया और इमरती देवी ने बनवाया था। इमरती देवी ने कहा- महाराज इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए भले ही आगे मुझे टिकट देना या ना देना, जिला बनते ही मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। भाजपा ने डबरा विधानसभा से पूर्व मंत्री इमरती देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मौजूदा विधायक सुरेश राजे को फिर से मैदान में उतारा है। डबरा विधानसभा में समधि और समधन के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। पिछले 2020 के उपचुनाव में उनके समधी सुरेश राजे ने इमरती देवी को शिकस्त दी थी।

कोरोना : नए साल पर मिलेगा वैक्सीन का तोहफा, देशभर में डिस्ट्रीब्यूशन की प्लानिंग पर काम शुरू

नई दिल्ली.. देश के लिए अच्छी खबर है। कोरोना वैक्सीन पर तेजी से काम हो रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मंगलवार को कहा कि उम्मीद है कि जैसे ही नया साल शुरू होगा, देश में कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी, वह भी एक से ज्यादा सोर्स के जरिए। देशभर में इसके डिस्ट्रीब्यूशन की प्लानिंग पर काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि जुलाई 2021 तक हम देश में वैक्सीन के 40-50 करोड़ डोज मुहैया कराकर देश के 20-25 करोड़ लोगों को वैक्सीन दे सकेंगे। इस बीच, देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 71 लाख 73 हजार 565 हो गया है। 710 लोगों ने दम तोड़ा। देश में एक्टिव केस में 21 दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई है। 24 घंटे में 25 हजार केस कम हुए हैं। इससे पहले 21 सितंबर को 28 हजार 653 केस कम हुए थे। मोदी बोले- जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा- ‘जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में लापरवाही न बरती जाए।’ मोदी ने डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल की बायोग्राफी रिलीज होने के मौके पर यह बात कही। देश में पिछले दो हफ्तों में 10 लाख मामले बढ़े हैं। हालांकि, 24 घंटे में सामने आने वाले संक्रमितों की औसत संख्या अब 72 से 74 हजार के बीच हो गई है। दो हफ्ते पहले हर दिन 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आते थे। अब तक 62.24 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 1 लाख 9 हजार 894 मरीजों की मौत हो चुकी है। रिकवरी का आंकड़ा बढ़ने से एक्टिव केस भी कम हो रहे हैं। बीते 24 घंटे में 71 हजार 559 लोग ठीक होने के साथ एक्टिव केस की संख्या घटकर 8.61 लाख हो गई। लगातार चार दिनों से देश में एक्टिव केस की संख्या 9 लाख से नीचे रही। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

उत्तराखंड के दौरे पर गयीं उमा भारती को कोरोना, हरिद्वार के पास क्वारंटीन

भोपाल। एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव हैं। वह अभी उत्तराखंड के दौरे पर हैं। उमा बीते दिनों पहाड़ की यात्रा पर गई थीं। उन्होंने केदारनाथ में दर्शन करते हुए वीडियो भी डाला था। कोरोना पॉजिटिव होने के जानकारी उन्होंने खुद ही ट्वीट कर दी है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उमा भारती ने ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच स्थित वंदे मातरम कुंज में खुद को क्वारंटीन किया है। उमा भारती ने देर रात ट्वीट कर लिखा है कि मैं आपकी जानकारी के लिए यह डाल रही हूं कि मैंने अपनी पहाड़ यात्रा की समाप्ति के अंतिम दिन प्रशासन को आग्रह करके कोरोना टेस्ट की टीम को बुलवाया, क्योंकि मुझे 3 दिन से हल्का बुखार था। मैंने हिमालय में कोविड के सभी विधिनिषेध एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। फिर भी मैं कोरोना पॉजिटिव निकली हूं। पूर्व सीएम ने बताया कि मैं अभी हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच वंदे मांतर कुंज में क्वारंटीन हूं, जो कि मेरे परिवार के जैसा है। 4 दिन बाद फिर से टेस्ट कराऊंगी और स्थिति ऐसी ही रही, तो डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार निर्णय लूंगी। मेरे संपर्क में आए लोगों से अपील है कि वो अपनी कोरोना टेस्ट करवाए एवं सावधानी बरते। गौरतलब है एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती एमपी उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार के बाद हिमालय की यात्रा पर निकल गई थीं। यात्रा खत्म कर वह फिर से एमपी की राजनीति में सक्रिय होतीं। लेकिन उससे पहले ही वह कोरोना की चपेट में आ गई हैं। एमपी बीजेपी के नेताओं ने उन्हें जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

MP : न डॉक्टर देखते हैं, न दवा देते हैं, मरीज की पत्नी ने मंत्री को गिनाईं खामियां

भोपाल। पति को कोरोना होने पर 5 दिन पहले ही जेपी अस्पताल में भर्ती किया है, ना डॉक्टर देखने आते हैं और ना वार्ड ब्वॉय दवाई खिलाते हैं। नर्सों को कुछ बोलो तो वो दुत्कार देती हैं। मरीज को खाना खिलाने और बाथरूम कराने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में मजबूरन मैं कोरोना के आईसीयू में जाकर पति को दवा और खाना खिलाती हूं। मैं जानती हूं कि मुझे संक्रमण का खतरा है, इसलिए 5 दिन से अस्पताल में ही पड़ी हूं। घर में छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं। अपनी मजबूरी और अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही 12 नंबर स्टॉप पर रहने वाली आशा शर्मा ने शनिवार दोपहर 2 बजे जेपी अस्पताल पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को सुनाई। इस पर मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई और स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा। साथ ही आशा को भरोसा दिलाया कि उनके पति का बेहतर इलाज किया जाएगा। मंत्री सारंग जेपी अस्पताल में कोरोना मरीज संतोष रजक की मौत और रजक की बेटी की ओर से लगाए गए आरोपों की हकीकत देखने अस्पताल पहुंचे थे। मंत्री ने जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी और डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव को फटकार लगाई। मंत्री सारंग ने बताया कि मृतक संतोष रजक के मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य आयुक्त को बोला है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद देर शाम जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी को हटा दिया गया। इनके स्थान पर डॉ. राकेश श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी सौंपी। मंत्री की फटकार के बाद चिरायु भेजा- मंत्री सारंग ने आशा से पूछा कि आप क्या चाहती हैं। इस पर आशा ने साफ कहा कि यहां इलाज ही नहीं हो रहा है, आप मेरे पति को चिरायु अस्पताल में शिफ्ट करा दो। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्रिय हुआ और एक घंटे में एंबुलेंस से सुरेश को चिरायु अस्पताल भेज दिया गया। इससे पहले मंत्री सारंग ने कोरोना पॉजिटिव मृतका संतोष की बेटी प्रियंका की ओर से लगाए गए आरोपों का वीडियो जेपी के सिविल सर्जन डॉ. तिवारी समेत अन्य जिम्मेदारों को दिखाया। उनसे हकीकत पूछी। इस पर उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा था कि परिजन तो झूठे आरोप लगा रहे हैं।

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