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गठबंधन के लिए कांग्रेस पर साधा निशाना, स्थानीय निकायों में शिवसेना (यूबीटी) अकेले लड़ेगी चुनाव

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बताया कि उनकी पार्टी विभिन्न स्थानीय निकायों के चुनाव अकेले लड़ेगी। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन और महाविकास अघाड़ी गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए था। उन्होंने आगे बताया कि गठबंधन में अलग-अलग पार्टियों के कई कार्यकर्ताओं को मौका नहीं मिलता है। यह संगठनात्मक विकास में बाधा डालता है। पत्रकारों से बात करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा, “गठबंधन में अलग-अलग पार्टियों के कार्यकर्ताओं को मौका नहीं मिलता और इससे संगठनात्मक विकास बाधित होता है। हम अपनी ताकत के दम पर मुंबई, ठाणे, नागपुर और अन्य नगर निगमों, जिला परिषदों और पंचायतों में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी को संकेत दिए कि उन्हें अकेले चुनाव लड़ना चाहिए।” कांग्रेस पर साधा निशाना कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने कहा कि जो लोग आम सहमति और समझौते पर भरोसा नहीं करते उन्हें गठबंधन में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव के बाद इंडी गठबंधन ने एक भी बैठक नहीं की। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा, इंडी गठबंधन के लिए हम एक संयोजक तक नियुक्त नहीं कर पाए। यह अच्छा नहीं है। गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बैठक बुलाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की थी। उन्होंने आगे कहा, यह कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वे इंडी गठबंधन को बचाए। कांग्रेस एक महान पार्टी है। यह सच है कि इंडी गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए बना था। लोकसभा चुनाव के बाद एक बैठक नहीं हुई। पीएम मोदी के पॉडकास्ट पर दी प्रतिक्रिया पीएम मोदी के पहले पॉडकास्ट पर भी संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी। अपने पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने कहा था कि वे एक इंसान हैं और गलतियां कर सकते हैं। इस पर शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा, “वे (पीएम मोदी) भगवान हैं। मैं उन्हें इंसान नहीं मानता। भगवान तो भगवान हैं। अगर कोई उन्हें भगवान का अवतार मानता है तो वे इंसान कैसे हो सकते हैं। वह विष्णु का 13वां अवतार है। अगर किसी इंसान को भगवान माना जाता है, लेकिन वह कहता है कि वह इंसान है तो इसमें कुछ गलत है।”

संक्रमण काल से गुज़रते राजनीतिक माहौल में अहम होंगे नतीजे

विशेष लेख : महाराष्ट्र एवं झारखंड में चुनाव   हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में एक आदर्श वाक्य (नारा) बार-बार कहा था–”अगर हम बंटेंगे, तो बाँटने वाले महफ़िलें सजाएँगे।” इसी भाव को आदित्य नाथ योगी इस तरह व्यक्त कर रहे थे कि–”बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे।” इत्तफ़ाक़ से इन्हीं दिनों बांग्लादेश में तख़्तापलट हुआ था और शेख हसीना की उदारवादी सरकार की जगह सत्ता पर जेहादियों और कट्टरपंथियों का कब्ज़ा हो गया था। उसके बाद से कोई ऐसा दिन नहीं हुआ है, जब बांग्लादेश के शांतिप्रिय हिन्दू समुदाय पर हमले, धमकाने, डराने की ख़बर न आती हो। आए दिन मंदिरों में तोड़फोड़ हो रही है, मजलूम औरतों से दुर्व्यवहार हो रहा है। तुष्टीकरण की भयावह नीति पर चलते हमारे विपक्ष के किसी नेता के पास पड़ोस में हो रहे इस अत्याचार और अन्याय के लिए सहानुभूति का एक शब्द भी नहीं है। इस परिप्रेक्ष्य में हरियाणा की बहुसंख्य जनता ने मोदी और योगी के नारों का मर्म समझा और भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिला दी। यहाँ तक कि जाट पट्टी में भी भाजपा को कई सीटों पर जीत मिली है, जिस पर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा अपना अधिकार मानते थे। सच कहा जाए तो हरियाणा में षड़यंत्रकारी ताकतों, वोट बैंक की राजनीति करके देश को पीछे धकेलने वाले विचारों, जाति के नाम पर बहुसंख्यक समुदाय को विभाजित कर सत्ता हासिल करने की ख्वाहिशों, नकारात्मक चुनाव प्रचार और अनहद अहंकार की पराजय हुई थी। उस नैरेटिव की पराजय हुई थी, जो राहुल गांधी और कांग्रेस बड़े ही अहंकार भाव से देश की जनता के बीच ले जा रहे थे। राहुल गांधी अनवरत यह नैरेटिव खड़ा कर रहे थे कि भाजपा संविधान को ख़त्म करना चाहती है, दलितों पिछड़ों का आरक्षण समाप्त करना चाहती है। पिछले कई वर्षों से यह देखा जा रहा है कि सकारात्मक राजनीति पर राहुल गांधी और कांग्रेस का भरोसा कम होता जा रहा है। वे लगातार असत्य नैरेटिव लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। संविधान बदलने और आरक्षण समाप्त करने का नैरेटिव राहुल गांधी के असत्य भाष्य का सबसे बड़ा उदाहरण है। आम चुनाव में कुछ प्रांतों में दलित और पिछड़ों का एक छोटा सा तबका इस असत्य नैरेटिव में फंस गया था। खासकर उत्तर प्रदेश में इसका ज़्यादा असर हुआ था और भाजपा को अपेक्षाकृत कम सीटें मिलीं। निश्चय ही आम चुनाव के नतीजे अपेक्षा के अनुकूल नहीं थे और एक बड़े बहुमत की आशा करती भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा था। राहुल गांधी और कांग्रेस के रणनीतिकारों ने यह समझा कि भारतीय जनता पार्टी को रोकने का फार्मूला उनके हाथ लग गया है, मगर हरियाणा के प्रबुद्ध मतदाताओं ने बहुत ही संयम का परिचय देते हुए सही समय पर कांग्रेस के इस भ्रम को तोड़ दिया। हरियाणा की जनता ने सरकार विरोधी भावनाओं (एंटी इनकम्बेंसी) के स्थापित मिथ को भी तोड़ा है। हरियाणा के नतीजे हालिया राजनीति का अहम पड़ाव साबित हुए हैं। इसी संदर्भ में महाराष्ट्र, झारखंड और कई प्रदेशों में हो रहे उपचुनावों के नतीजे भी सदी के तीसरे दशक की राजनीति का बहुत बड़ा पड़ाव साबित होने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर मतदाताओं को भावी ख़तरों से आगाह कर रही है। पीएम मोदी ने अपने नारे में थोड़ी सी तब्दीली करते हुए कहा है कि–”एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे।” इधर योगी आदित्यनाथ अपने उसी नारे “बंटेंगे तो कटेंगे” पर डटे हुए हैं। राजनीति में अक़्सर इशारों में संवाद होता है। चुनावी मंचों पर भी बहुत सी सच्चाइयों को और बहुत से तथ्यों को संकेतों में कहा जाता है। तब आख़िर एक प्रधानमंत्री और एक बड़े मुख्यमंत्री को साफ-साफ और सीधे चोट करते शब्दों में ऐसा क्यों कहना पड़ रहा है? दरअसल मोदी और योगी सीधे और स्पष्ट शब्दों में देशवासियों के सामने एक बहुत बड़ी सच्चाई बयां कर रहे हैं। अभी तक हर नेता इस सच्चाई से कतराकर निकल जाता था। इतिहास गवाह है कि जातियों में बंटे देश के बहुसंख्यक समुदाय ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। आज़ादी के बाद उम्मीद थी कि परिस्थितियां बदलेंगी, मगर ऐसा हुआ नहीं। बहुसंख्यक समुदाय की आस्थाओं और भावनाओं की घोर उपेक्षा करके अल्पसंख्यकों के वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने की कोशिशों ने देश का भला कतई नहीं किया है। फ़िलहाल देश और देश का बहुसंख्यक समुदाय बड़े ही नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है। सच कहा जाए तो देश का राजनीतिक माहौल ही संक्रमण काल से गुज़र रहा है। बहुसंख्यक समुदाय अपने भावी अस्त्तित्व और अपनी धार्मिक आस्थाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित है, तो विपक्षी पार्टियों ने अपने राजनीतिक फ़ायदों के लिए देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय को असुरक्षा में डाल रखा है। विपक्षी पार्टियां यही चाहती हैं कि–बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक–दोनों समुदायों के बीच खाई चौड़ी होती रहे और वे वोटों की फसल काटते रहें। जब बहुसंख्यक समुदाय ने एकत्र होकर राजनीतिक तौर पर इसका प्रतिकार किया, तो बहुसंख्यकों को एक बार फिर जातियों में बांट देने के षड़यंत्र रचे जाने लगे। इस बार के आम चुनाव के प्रचार में और अब प्रदेशों के चुनाव प्रचारों में निरंतर बढ़ती तल्ख़ी साफ़ देखी जा सकती है। यह तल्ख़ी दोनों समुदायों, ख़ासकर बहुसंख्यक समुदाय, के बीच पैदा हुई असुरक्षा की अभिव्यक्ति ही है। मोदी और योगी के नारे इसी असुरक्षा भाव को ही प्रतिबिंबित करते हैं। साफ़ नहीं है महाराष्ट्र की चुनावी तस्वीर वैसे तो महाराष्ट्र की 288 सीटों में सीधा मुकाबला महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच लग रहा है, मगर बहुत सी अन्य पार्टियां भी मैदान में उतरी हुई हैं, तो चुनाव परिणाम का अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल हो गया है। आम चुनाव में महा विकास अघाड़ी को 48 में से 30 सीटों पर विजय मिली थी, जबकि महायुति को 17 सीटें ही हासिल हुई थीं। इस परिणाम के परिप्रेक्ष्य में आंकलन किया जाए तो महा विकास अघाड़ी का पलड़ा भारी दिखता है। मगर भाजपा के हालिया प्रदर्शनों पर गौर करें तो साफ दिखता है कि भाजपा के अंदर अपनी चुनावी कमजोरियों को समय रहते पहचानने और उसे दूर करने की अद्भुत क्षमता है। इस संदर्भ में कोई आश्चर्य नहीं होगा कि महायुति गठबंधन विधानसभा चुनाव में इन नतीजों को पलट … Read more

केरल, पंजाब और यूपी में 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव अब 20 नवंबर को होंगे

 नई दिल्ली केरल, पंजाब और यूपी में 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव अब 20 नवंबर को होंगे. विभिन्न उत्सवों के कारण चुनाव आयोग ने वोटिंग को एक हफ्ते तक टालने का फैसला किया है. बता दें कि 13 नवंबर को होने वाली वोटिंग को टालने के लिए कांग्रेस, भाजपा समेत कई दलों ने चुनाव आयोग से अपील की थी. पार्टियों का कहना था कि कई त्योहारों के चलते 13 नवंबर को वोटिंग कम हो सकती है. हालांकि, चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को ही आएंगे. इसी दिन महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावी नतीजे भी आएंगे. कार्तिक पुर्णिमा के चलते बीजेपी ने की थी ये मांग भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यूपी में होने वाले विधानसभा उप-चुनाव की तारीखों में बदलाव की मांग को लेकर चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया था. बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में कहा था कि 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा होने की वजह से कुंदरकी, मीरापुर, गाजियाबाद और प्रयागराज में लोग तीन चार दिन पहले इकट्ठे जो जाते हैं. ऐसे में चुनाव आयोग को कार्तिक पूर्णिमा को ध्यान में रखते हुए तारीखों में बदलाव करना चाहिए. बीजेपी की मांग थी कि 13 नवंबर की जगह 20 नवंबर को चुनाव कराए जाएं. बता दें कि अब 20 नवंबर को उत्तर प्रदेश में 9 सीटों पर उपचुनाव होने हैं जिनमें- कानपुर की सीसामऊ, प्रयागराज की फूलपुर, मैनपुरी की करहल, मिर्जापुर की मझवां, अंबेडकरनगर की कटेहरी, गाजियाबाद सदर, अलीगढ़ की खैर, मुरादाबाद की कुंदरकी और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट शामिल है. जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट में मुकदमा लंबित होने के चलते चुनाव आयोग ने मिल्कीपुर में चुनाव की तारीख का एलान नहीं किया है. चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को आएंगे. इसी दिन महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे भी सामने आएंगे. यूपी की इन 9 सीटों पर होना है विधानसभा उपचुनाव     करहल     सीसामऊ     कुंदरकी     गाजियाबाद     फूलपुरट     मझवां     कटेहरी     खैर     मीरापुर  

कश्मीर चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर डाला वोट, कश्मीर अब पाक से बहुत दूर हो गया – शब्बर जैदी

इस्लामाबाद पाकिस्तान के शीर्ष अर्थशास्त्री और संघीय राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके सैयद शब्बर जैदी का कहना है कि कश्मीर अब उनके देश से बहुत दूर हो गया है। शब्बर जैदी ने कश्मीर में हुए विधानसभा के चुनाव और इसके नतीजों पर ये टिप्पणी की है। जैदी का मानना है कि भले ही कश्मीर के लोगों ने नरेंद्र मोदी की पार्टी भाजपा को वोट नहीं दिया है लेकिन पाकिस्तान के लिहाज से भी कोई अच्छी खबर नहीं है क्योंकि कश्मीरियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को चुना है, जिसे शेख अब्दुल्ला ने बनाया था। शब्बर जैदी ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, ‘पाकिस्तान ने कश्मीर हमेशा के लिए खो दिया है। कश्मीर चुनाव नतीजे दिखाते हैं कि कश्मीरियों ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया लेकिन ये भी देखिए कि उन्होंने शेख अब्दुल्ला की बनाई पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को जमकर समर्थन दिया है। मेरे विचार से उन्होंने हिंदुत्व और पाकिस्तान के साथ विलय दोनों को अस्वीकार कर दिया। हमने पाकिस्तान में अपने प्रदर्शन से कश्मीरियों को निराश कर दिया।’ कश्मीर में चुनाव ने किया पाकिस्तान को निराश! जम्मू कश्मीर की 90 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित किए गए हैं। चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 90 में से 42 पर जीत दर्ज की है। वहीं उसकी सहयोगी कांग्रेस के खाते में छह सीटें गई हैं। बीजेपी ने जम्मू रीजन की 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। पीडीपी और दूसरी पार्टियां कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। कश्मीर में चुनाव पर ना सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान और दुनियाभर की निगाह थीं। इसकी वजह ये थी कि जम्मू कश्मीर में यह चुनाव 10 साल के बाद हुआ है कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म किए जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव था। एक्सपर्ट का मानना है कि कश्मीर के लोगों ने जिस तरह चुनाव जोश के साथ हिस्सा लिया, उसने कहीं ना कहीं पाकिस्तान की मीडिया और सरकार को परेशान किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों में वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में कश्मीर में 63.45 प्रतिशत मतदान हुआ। कश्मीर में लंबे समय बाद इस तरह का उत्साह चुनाव के लिए देखा गया। इस चुनाव में लोगों ने कहीं भी वोटिंग का बायकॉट नहीं किया, जैसा पहले कुछ इलाकों में देखा जाता रहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तानियों को परेशान कर रखा है। उनको लगता है कि अब पाकिस्तान के लिए कश्मीर में समर्थन ढूंढ़ना मुश्किल होगा।

हरियाणा चुनाव के नतीजे बदलते ही कैसे कांग्रेस के दफ्तर के बाहर छा गई मायूसी

नई दिल्ली  5 अक्टूबर, 2024। वक्त शाम के 6 बजे। हरियाणा विधानसभा की सभी 90 सीटों पर मतदान का औपचारिक समापन। टीवी चैनलों के रिपोर्ट्स बताने लगे कि मतदान केंद्रों पर अभी भी कुछ मतदाता पंक्तियों में खड़े हैं तो कुछ देर मतदान चलेंगे। इधर, टीवी चैनलों के स्टूडियोज में वरिष्ठ पत्रकारों और चुनावी विशेषज्ञों की पैनल सजी है। एंकर बता रहे हैं कि 6.30 बजे से हम एग्जिट पोल के नतीजे बताना शुरू करेंगे। और वह वक्त आ गया। एंकर घोषणा करने लगे कि अब हरियाणा और जम्मू-कश्मीर, दोनों प्रदेशों के एग्जिट पोल्स बारी-बारी से दिखाए जाएंगे। टीवी चैनलों पर पट्टियां आने लगीं। हरियाणा चुनाव का फाइनल रिजल्ट आने से पहले ही रुझानों को लेकर विवाद उठ गया है। दरअसल, शुरुआती रुझानों में सुबह लगभग 9 बजे तक कांग्रेस को बढ़त हासिल थी। माना जा रहा था कि हरियाणा में इस बार कांग्रेस सरकार बनाएगी। लेकिन, अगले एक घंटे के भीतर ही आंकड़े बदल गए और बीजेपी ने जबरदस्त बढ़त बना ली। बीजेपी इस समय रुझानों में कांग्रेस को पछाड़कर बहुमत के नजदीक पहुंच गई है। ऐसे में कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय चुनाव आयोग को टैग करते हुए पूछा है, ‘लोकसभा नतीजों की तरह हरियाणा में भी चुनावी रुझानों को जानबूझकर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर धीमे-धीमे शेयर किया जा रहा है। क्या भाजपा पुराने और भ्रामक रुझानों को साझा करके प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है?’ एक तरफ हरियाणा, एक तरफ जम्मू-कश्मीर। दोनों के सामने सीटों की संख्या 90-90 दिखने लगे। उनके आगे प्रमुख पार्टियों के नाम और उनके आगे 0-0। चर्चा चल रही है। वक्त के साथ-साथ आंकड़े आने लगे और पता चला कि बीजेपी को दोनों ही प्रदेशों में झटका लग रहा है। लगभग सभी एग्जिट पोल्स में ऐलान कर दिया गया कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और नैशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) की करीब-करीब बराबर सीटें आएंगी, लेकिन हरियाणा में कांग्रेस की प्रचंड जीत होने वाली है। तारीख बदलती है। 8 अक्टूबर, 2024। फिर से टीवी चैनलों पर उसी तरह का माहौल, वही विश्लेषण। इंतजार है सुबह के 8 बजने का जब वोटों की गिनती शुरू होगी। रिपोर्ट्स फिर से मैदान में हैं। वो अलग-अलग दलों के नेताओं से बात कर रहे हैं। सभी अपनी-अपनी पार्टियों की जीत के दावे कर रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने मीडिया का माइक पहुंचता है। वो कहते हैं- हमारी सरकार की वापसी हो रही है। रिपोर्ट उन्हें एग्जिट पोल्स के नतीजों की याद दिलाते हैं। तब सैनी मुस्कुराते हैं और कहते हैं कि बस इंतजार कीजिए, एग्जेक्ट पोल (असली नतीजे) उलट होंगे, बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलेगा। और वो वक्त आ गया। 8 बजे और दोनों ही प्रदेशों में नियम के मुताबिक पहले पोस्टल बैलेट्स की गिनती शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में रुझान भी आने लगे। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर, दोनों ही जगहों पर बीजेपी के प्रत्याशियों को ज्यादातर सीटों पर पीछे दिखाया जा रहा है। एग्जिट पोल्स के नतीजे सही जान पड़ रहे हैं। हरियाणा में बीजेपी के चार उम्मीदवार अपने प्रतिस्पर्धियों से आगे हैं तो कांग्रेस को 30 सीटों पर बढ़त मिल चुकी है। धीरे-धीरे यह अंतर घटता जाता है। लेकिन लंबे वक्त तक कांग्रेस आगे रहती है। फिर टीवी चैनलों से घोषणा होने लगती है कि हरियाणा में कांग्रेस को रुझानों में पूर्ण बहुमत मिल गया है। बीजेपी तब तक 25 सीटों के आसपास सिमटती दिख रही है। यही ट्रेंड टिका रहता है। तब तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी रुझान आने लगते हैं। वहां अलग ही कहानी है। हरियाणा में कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी आगे! देखते ही देखते टीवी चैनलों पर भी माजरा बदलने लगता है। लगभग सभी चैनलों पर पासा पलटने लगा है- बीजेपी आगे और कांग्रेस पीछे। धीरे-धीरे बीजेपी और कांग्रेस के बीच रुझानों में सीटों का अंतर बढ़ता जा रहा है। फिर वक्त आता है जब बीजेपी को रुझानों में पूर्ण बहुमत मिल जाता है। सिर्फ आधे घंटे का फासला और कांग्रेस आगे से पीछे जबकि बीजेपी पीछे से आगे! यह ट्रेंड भी टिक जाता है। टीवी चैनलों पर एंकर पोलस्टरों से पूछने लगते हैं- ये क्या हो रहा है, कैसे हो रहा है? जवाब आता है, अभी तो शुरुआती रुझान हैं। फिर वो वोट प्रतिशत पर ध्यान दिलाते हैं। हरियाणा में कांग्रेस सीटों के मामले में बीजेपी से पिछड़ने के बावजूद वोट प्रतिशत में आगे है। कांग्रेस को करीब 43% वोट मिलते दिख रहे हैं जबकि बीजेपी को करीब 40% वोट मिल रहे हैं। फिर यह गैप भी भरने लगा। करीब तीन प्रतिशत का अंतर घटकर एक प्रतिशत पर आ चुका है।

ब्रिटेन में मतदान आज, 50 सीटों पर भारतीय निर्णायक भूमिका में

लंदन  ब्रिटेन में गुरुवार को होने वाले आम चुनाव में 650 सांसदों को चुनने के लिए वोटिंग होगी। एक विश्लेषण के अनुसार, अगर लेबर पार्टी बहुमत हासिल करती है तो उसमें जातीय अल्पसंख्यक सांसदों की अभी तक की सबसे अधिक संख्या हो सकती है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के उत्तरी इंग्लैंड में रिचमंड और नॉर्थअलर्टन की अपनी सीट बरकरार रखने की उम्मीद है। उनके मंत्रिमंडल की पूर्व सहयोगी प्रीति पटेल के एसेक्स में विथम में जीतने की उम्मीद है। आइए समझें इस चुनाव से जुड़े सवालों को। कब होगी वोटिंग और रिजल्ट कब? ब्रिटेन में 4 जुलाई को वहां के समय के अनुसार सुबह 7 बजे वोटिंग शुरू होगी, जो रात 10 बजे तक चलेगी। वोटिंग खत्‍म होते ही मतगणना शुरू हो जाएगी और 5 जुलाई को सुबह 5 बजे तक नतीजे आ जाएंगे। चुनाव में कोई भी व्‍यक्ति जो 4 जुलाई के दिन 18 साल या उससे अधिक का है और ब्रिटिश नागरिक है या यूके पते के साथ आयरलैंड नागरिक है, तो वह मतदान कर सकता है। चुनाव में क्‍या हैं मुद्दे? इस बार चुनाव में बढ़ती अप्रवासियों की संख्‍या पर लगाम कसना, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे काफी हावी हैं। भारत से कितना अलग है ब्रिटेन का चुनाव? ब्रिटेन में वोट बैलेट बॉक्स में डाले जाते हैं, जबकि भारत में EVM के जरिए मतदान होता है। इसके अलावा, ब्रिटेन में भारत की तरह सड़कों-दीवारों पर पोस्टर, बैनर और होर्डिंग नजर नहीं आते हैं। वहां सप्ताह भर धीमी गति से प्रचार होता रहता है। वीकेंड यानी शनिवार-रविवार को प्रत्याशी डोर-टु-डोर जाकर वोट मांगते हैं। क्या होगी भारतीयों की भूमिका? ब्रिटेन में 650 में से करीब 50 सीटों पर भारतीय वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन 50 सीटों में से 15 सीटें जैसे लेस्टर, बर्मिंघम, कॉन्वेंट्री, साउथ हॉल और हैरॉस में तो भारतीय मूल के उम्मीदवार ही पिछले दो चुनाव से जीत रहे हैं। इन सीटों पर इस बार सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को लेकर भारतीय वोटरों में गुस्सा है, तो वहीं विपक्षी लेबर पार्टी के उम्मीदवारों को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। 2019 में हुए पिछले आम चुनाव में भारतीय मूल के 15 सांसद चुने गए थे, जिनमें से कई दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके अलावा भारतीय मूल के कई लोग पहली बार आम चुनाव लड़ रहे हैं। भारतीय मूल के वोटर वाले इलाके में दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद आलोक शर्मा और लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र शर्मा इस बार रीडिंग वेस्ट और इलींग साउथल से फिर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इलींग साउथल में बड़ी संख्या में पंजाबी मतदाता हैं। वहां से इस बार दो ब्रिटिश सिख उम्मीदवार संगीत कौर भैल और जगिंदर सिंह निर्दलीयों के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। ब्रिटिश भारतीय उम्मीदवारों में प्रफुल नार्गुंड लेबर पार्टी की टिकट पर इस्लिंगटन नॉर्थ से चुनाव लड़ रहे हैं। जस अथवाल लेबर पार्टी के गढ़ इफोर्ड साउथ से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बैगी शंकर डर्बी साउथ, सतवीर कौर साउथम्पटन टेस्ट और हरप्रीत उप्पल हडर्सफील्ड से चुनाव लड़ रहे हैं। इंदौर में जन्मे राजेश अग्रवाल पहली बार लीसेस्टर ईस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला एक अन्य ब्रिटिश भारतीय एवं कंजर्वेटिव पार्टी की उम्मीदवार शिवानी राजा से है। भारतीय मूल के मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद वाले इस क्षेत्र में मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि गोवा मूल की पूर्व सांसद कीथ वाज भी यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।

3 बजे तक 49.20% मतदान, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक हुई वोटिंग

49.20% polling till 3 pm, highest voting in West Bengal लोकसभा चुनाव 2024 के छठे चरण में 8 राज्यों की 58 सीटों पर शुक्रवार को मतदान हो रहा है। इसके बाद 1 जून को आखिरी चरण के साथ ही वोटिंग का क्रम सम्पन्न हो जाएगा। इसके बाद देश को 4 जून को इंतजार रहेगा, जब मतगणना होगी।लोकसभा चुनाव का यह छठा चरण भाजपा के लिए अहम है। 2019 में इस 58 सीटों में से कांग्रेस एक पर भी जीत दर्ज नहीं कर पाई थी, जबकि भाजपा ने 40 सीट जीती थी। इस रिकॉर्ड को बनाए रखना भाजपा के लिए चुनौती होगी। इस चरण में दिल्ली और हरियाणा की सभी सीटों पर मतदान सम्पन्न हो जाएगा। छठे चरण में 3 बजे तक पश्चिम बंगाल में 70.19% हुआ मतदान, यूपी में कम हो रही वोटिंग यूपी: 43.95% ओडिशा: 48.44% जम्मू कश्मीर: 44.41% झारखंड: 54.34% पश्चिम बंगाल: 70.19% बिहार: 45.21% दिल्ली एनसीआर: 44.58% हरियाणा: 46.26%

बाराबंकी में सबसे अधिक, लखनऊ में सबसे कम ,यूपी में एक बजे तक 39.55% मतदान

Highest in Barabanki, lowest in Lucknow, 39.55% voting till 1 pm in UP पांचवें चरण में यूपी की 14 लोकसभा सीटों पर मतदान जारी है। इस चरण में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री स्मृति जूबिन इरानी, कौशल किशोर, निरंजन ज्योति व यूपी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह सहित 144 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। जालौन सीट पर 39.50 फीसदी मतदानजालौन निर्वाचन क्षेत्र में कुल 39.50 प्रतिशत मतदान हुआविधानसभा भोगनीपुर- 41.68 प्रतिशतविधानसभा माधौगढ़- 37.93 प्रतिशतविधानसभा कालपी- 39.5 प्रतिशतविधानसभा उरई- 39.9 प्रतिशतविधानसभा गरौठा- 38.91 प्रतिशत झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर 43.61 प्रतिशत मतदान222 बबीना विधान सभा – 41.77223 झांसी नगर विधान सभा – 37.9224 मऊरानीपुर विधान सभा – 40.65226 ललितपुर विधान सभा – 46.96227 महरौनी विधान सभा – 49.2 यूपी में एक बजे तक 39.55 फीसदी मतदान अमेठी सीट पर 38.21 फीसदी मतदानकैसरगंज सीट पर 38.50 प्रतिशत वोटिंगकौशांबी सीट पर 36.25 फीसदी मतदानगोंडा सीट पर 36.67 प्रतिशत वोटिंगजालौन सीट पर 39.50 फीसदी मतदानझांसी सीट पर 43.61 प्रतिशत मतदानफतेहपुर सीट पर 39.85 फीसदी मतदानफैजाबाद लोकसभा सीट पर 40.77 प्रतिशत वोटिंगबांदा लोकसभा सीट पर 40.20 फीसदी मतदानबाराबंकी लोकसभा सीट पर 44.77 प्रतिशत वोटिंगमोहनलालगंज लोकसभा सीट पर 41.43 फीसदी मतदानरायबरेली लोकसभा सीट पर 39.69 प्रतिशत मतदानलखनऊ सीट पर 33.50 प्रतिशत वोटिंगहमीरपुर सीट पर 40.71 फीसदी मतदान

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कलः चुनाव आयोग दोपहर 3 बजे शेड्यूल जारी करेगा, आचार संहिता भी लागू हो जाएगी

Lok Sabha election dates announced tomorrow: Election Commission will release the schedule at 3 pm, code of conduct will also come into force. चुनाव आयोग CEC राजीव कुमार, EC सुखबीर संधू और ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को ही लोकसभा चुनावों को लेकर मीटिंग की है। आम चुनाव 2024 और राज्य विधानसभाओं के कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए चुनाव आयोग शनिवार 16 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। यह दोपहर 3 बजे आयोजित की जाएगी। इसे ईसीआई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइवस्ट्रीम किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे देश में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। एक दिन पहले ही दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति गई है। ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू नए चुनाव आयुक्तों ने शुक्रवार 15 मार्च को पदभार संभाला है। आयोग के तीनों अधिकारियों ने शुक्रवार को ही चुनाव कार्यक्रम को लेकर बैठक का आयोजन किया था। 2024 लोकसभा चुनाव में 97 करोड़ वोटर्स, 2 करोड़ नए मतदाता जुड़े 2024 लोकसभा चुनाव में 97 करोड़ लोग वोटिंग कर सकेंगे। चुनाव आयोग ने 8 फरवरी को सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के वोटर्स से जुड़ी स्पेशल समरी रिवीजन 2024 रिपोर्ट जारी की थी। आयोग ने बताया कि वोटिंग लिस्ट में 18 से 29 साल की उम्र वाले 2 करोड़ नए वोटर्स को जोड़ा गया है। 2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या में 6% की बढ़ोतरी हुई है। चुनाव आयोग ने कहा- दुनिया में सबसे ज्यादा 96.88 करोड़ वोटर्स लोकसभा चुनावों में वोटिंग के लिए रजिस्टर्ड हैं। साथ ही जेंडर रेशो भी 2023 में 940 से बढ़कर 2024 में 948 हो गया है।

मध्य प्रदेश के 10 जिलों में बनाए गए 103 सहायक मतदान केन्द्र।

103 auxiliary polling stations created in 10 districts of Madhya Pradesh. 1550 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों पर भारत निर्वाचन आयोग के अनुमोदन पर बने सहायक मतदान केंद्र। संतोष सिंह तोमर भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए 10 जिलों के 1550 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों पर 103 सहायक मतदान केन्द्र बनाने के अनुमोदन प्रदान करने के बाद मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग ने इसे अमली जामा पहना दिया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 1550 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों पर 103 सहायक मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इसमें भोपाल, छतरपुर, देवास, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, कटनी, मुरैना, नरसिंहपुर और उज्जैन जिला शामिल है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन 2023 के लिये 1550 से अधिक मतदाताओं वाले 103 मतदान केन्द्रों के लिए सहायक मतदान केन्द्र बनाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है। इन विधानसभा क्षेत्रों में बनाए गए हैं सहायक मतदान केंद्र। भोपाल जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 151-नरेला के 2, 152-भोपाल दक्षिण-पश्चिम के 2, 153-भोपाल मध्य के 2, 154-गोविंदपुरा के 4, 155-हुजूर के 5 मतदान केंद्र। छतरपुर जिले के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 51-छतरपुर के 1 सहायक मतदान केंद्र। देवास जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 171-देवास के 1 सहायक मतदान केंद्र। ग्वालियर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-14-ग्वालियर ग्रामीण के 1, 15-ग्वालियर के 1, 19- डबरा (अ.जा.) के 1। इंदौर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 203-देपालपुर के 1, 204-इंदौर-1 के 2, 205-इंदौर-2 के 5, 207-इंदौर-4 के 1, 208-इंदौर-5 के 23, 209-डॉ. अम्बेडकर नगर – महू के 9, 210 राऊ के 27 और 211-सांवेर (अ.जा.) के 7 मतदान केद्र। जबलपुर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 97-जबलपुर पूर्व के 1, 99-जबलपुर केन्ट के 1 मतदान केंद्र। कटनी जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 93-मुड़वारा के 1 मतदान केंद्र। मुरैना जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 04-जौरा के 1 मतदान केंद्र। नरसिंहपुर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 121-गाडरवारा के 1 के मतदान केंद्र। उज्जैन जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-212-नागदा खाचरौद के 1, 216-उज्जैन उत्तर एवं 217- उज्जैन दक्षिण के 1-1 मतदान केन्द्र को सहायक मतदान केन्द्र बनाया गया है

पुलिस की वाहन चेकिंग बनी जनता के लिए परेशानी।

MP Police; Bhopal; Sahara Samachaar;

Vehicle checking by police has become a problem for the public. चुनावी माहौल में पुलिस की कड़ी वाहन चेकिंग,इसमें पिस रहे आम आदमी। चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों को 15 से 30 मिनट तक रोका जा रहा है। उदित नारायणभोपाल। चुनाव आचार संहिता लागू होने के साथ ही ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर कहीं भी खड़े होकर वाहन चेकिंग के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस मामले को लेकर यातायात पुलिस के अला-अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग की गाइड लाइन पर चेकिंग की जा रही है। जिससे कोई भी असामाजिक तत्व विधानसभा चुनाव को प्रभावित न कर सके। दरअसल कई बार ऐसा देखने को मिला है कि कई उम्मीदवार चुनाव में मतदाताओं को पैसे व शराब का प्रोलभन देकर अपने पक्ष में वोटिंग कराने के लिए करते है। इन सबको रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा सड़कों पर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। पुलिस को कई बार वाहनों से पैसे व शराब लेते जाते हुए। लोग पकड़ में भी आ चुके है। अब ऐसे लोगों पर नजर उनकी धरपकड़ के नाम पर सड़कों पर चेकिंग की जा रही है। लेकिन इसमें आम आदमी पिस रहे है। उन्हें चेकिंग के नाम पर 15 से 30 मिनट तक रोका जा रहा है। इससे वह अपने आफिस,ट्रेन पकड़ने व अन्य कामों में लेट हो रहे है। ट्रैफिक व्यवस्था चेकिंग में लगे अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा वाहनों को रोककर उनके पेपर देखे जाते हैं। गाड़ी में रखे सामान की बारीकी से चेकिंग इसके लिए चार पहिया वाहनों चालकों को पीछे डिग्गी भी खोलकर दिखानी पड़ रही है। जिसके चलते कई बार लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। तो वहीं इस सबके चलते कई बार जाम की स्थिति भी बन रही है। जिससे आमजन को परेशान हो रहे है। तो वहीं दुर्घटनाओं की आशंका बनी रही है। पुलिस दे रही केस बनाने की धमकी चेकिंग के दौरान वाहन चालकों व पुलिस अधिकारियों के बीच कई बार तीखी बहस बाजी भी हो रही है। इस दौरान कई बार पुलिस द्वारा चुनाव आचार संहिता लागू होने पर सहयोग नहीं करने पर केस बनाने की धमकी तक दे रहे है। पुलिस की वाहन चेकिंग में फंसे वाहन चालक मुबीन खान ने बताया कि मैं दोपहर करीब 12:30 बजे रानीकमलापति स्टेशन के सामने वाली सड़क से निकल रहा था। यहां पर यातायात पुलिस चेकिंग कर रही थी। जिन्होंने जांच के लिए रोक लिया। गाड़ी के कागज आदि दिखाने के बाद भी करीब 20 मिनट तक रोककर रखा गया। इसके चलते मैं आफिस के लिए लेट हो गया। जिससे खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक एडिशनल डीसीपी विक्रम रघुवंशी ने कहा कि निश्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की गाइड लाइन पर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। जिसमें गाड़ियों में कोई पैसे, शराब आदि तो नहीं ले जा रही है। इस सबको को चेक किया जा रहा है। इसके लिए वाहनों की डिग्गी खोलकर चेक करना पड़ता है। जिससे कई बार थोड़ा टाइम तो लगता है। इसकी डेली रिपोर्ट चुनाव आयोग को जाती है। जिसमें कितने वाहनों की चेकिंग की गई और क्या कार्रवाई की गई।

विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को जारी हुआ चुनाव चिन्ह – अब मतदाताओं के पास जूते, चप्पल, मोजे, बिस्किट, फूलगोभी लेकर जाएंगे उम्मीदवार.

MP Elections; Candidates; Sahara Samachaar;

In the assembly elections, election symbol for independent candidates has been issued – now candidates will go to voters with symbols like shoes, slippers, shoes, biscuits, and cauliflower. किसी चिंह्न पर एक से ज्यादा दावे की स्थिति में अंतिम फैसला लेंगे रिटर्निंग आॅफिसर Udit Narayanभोपाल – विधानसभा चुनाव के लिए निर्दलीय प्रत्याशी भी आज नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद घर-घर जाएंगे और जूते, चप्पल, मोजे, बिस्किट, फूलगोभी जैसे चुनाव चिन्ह्न से मतदाताओं को रिझाएंगे। निर्वाचन आयोग ने निर्दलियों के लिए 204 चुनाव चिंह्न तय किए हैं। बता दें, देश के सात राजनीतिक और 24 राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टियों को 59 चुनाव चिंह्न आरक्षित किए हैं, लेकिन गैर मान्यता प्राप्त 2044 दलों और निर्दलीयों के लिए चुनाव आयोग मुक्त चुनाव चिंह्न जारी करेगा।जूते, चप्पल, जुराबे, मोजे, बिस्कुट, फूलगोभी, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, पेट्रोल पंप, गले की टाई समेत कुल 204 चिंह्न चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों को बांटने के लिए छांट लिए हैं। आयोग की ओर से जारी 198 प्रतीक गैर मान्यता प्राप्त छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिंह्न के तौर पर बांटे जाएंगे। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होना है। ऐसे में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और पंजीकृत पार्टियों के प्रत्याशी अपने दल के चिंह्न पर चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिंह्न आवंटित करेगा। प्रत्याशी भी चुनाव चिंह्न को लेकर बेहद संजीदा नजर आ रहे हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग का स्पष्ट नियम है कि प्रत्याशी चुनाव चिंह्न के लिए कोई तीन विकल्प दे सकेगा, लेकिन किसी चिंह्न पर एक से ज्यादा दावे की स्थिति में अंतिम फैसला रिटर्निंग आॅफिसर का होगा। अब तक 42 पार्टियों को मिले चुनाव चिह्न- निर्वाचन आयोग ने अब तक 42 पार्टियों को सभी 230 विधानसभा में एक जैसे चुनाव चिंह्न आवंटित कर दिए हैं। राष्ट्रीय सर्वजन विकास पार्टी को पेट्रोल पंप, जन कल्याण पार्टी को अंगूर, राष्ट्रीय जन क्रांति पार्टी को लिफाफा, भारतीय बहुजन क्रांति दल को टेलीविजन, जन अधिकार पार्टी को डोली, भारतीय अवाम ताकत को ब्रश, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को आरी, भारत रक्षक पार्टी को बल्लेबाज, नागरिक अधिकार शक्ति सेवा पार्टी को मेज, भारतीय जनसंपर्क पार्टी को फूलगोभी, जनतावादी कांग्रेस पार्टी को फोन चार्जर, अखिल भारतीय हिंद क्रांति पार्टी को बोतल और संपूर्ण समाज पार्टी को अंगूठा चुनाव चिन्ह्न आवंटित किए गए हैं।

कलेक्टर, एसपी के निरीक्षण के बाद टीम हुई सक्रिय अंर्तराज्यीय चेक पोस्ट से 04 लाख से अधिक नगद राशि जब्त।

MP Police; Routine;

Collector and the Superintendent of Police’s inspection, a team became active, seizing more than 4 lakhs in cash from an interstate check post Manish Trivediबालाघाट। विधानसभा आम निर्वाचन की आचार संहिता लागु हो जाने के बाद बालाघाट जिले में पहली बार इतनी बड़ी राशि जब्त की गई है। बुधवार करीब 2 बजे कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा व एसपी श्री समीर सौरभ ने संयुक्तक रूप से अंर्तराज्यीद्य चेक पोस्ट मोवाड़ी का निरीक्षण किया था। इस दौरान दोनो ही अधिकारी ने चुस्ती के साथ वाहन चेकिंग के टिप्स सुझाये थे। इसके बाद करीब साढ़े तीन बजे टीएसआई पंकज जैन, पीसीओ भरतलाल नारनोटे ने मोवाड़ नाके पर वाहन क्रमांक सीजी-04-एनजी-9507 की जांच करते हुये 4 लाख 18 हजार रुपये की नगद राशि बैग से बरामद की। आरटीओ श्री अनिमेश गढ़पाले ने जानकारी देते हुये बताया कि महाराष्ट्र के तुमसर की ओर से मोवाड़ी स्थित चौकी से गोविंद राव कोपरानी के बैग से 500-500 के 771 नोट , 200-200 व 100-100 के 103-103 नोट और 50-50 के 32 नोट बरामद किये गये। जब्त राशि का पंचनामा बनाया गया।

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