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रोमांचक मैच में जीती लखनऊ, मुंबई की तीसरी हार, सूर्यकुमार की कोशिश गई बेकार

 लखनऊ  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 के मैच नंबर-16 में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) का सामना मुंबई इंडियंस (MI) से हुआ. 5 अप्रैल (शुक्रवार) को लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स ने 12 रनों से रोमांचक जीत हासिल की. मुकाबले में मुंबई इंडियंस को जीत के लिए 204 रनों का टारगेट मिला था, लेकिन वो 20 ओवर में 5 विकेट पर 191 रन ही बना सकी. आवेश-शार्दुल ने की शानदार गेंदबाजी देखा जाए तो इस मुकाबले के आखिरी ओवर में मुंबई को जीत के लिए 22 रन बनाने थे, लेकिन तेज गेंदबाज आवेश खान ने मुंबई के मंसूबों पर पानी फेर दिया. आवेश ने उस ओवर में सिर्फ 9 रन दिए और हार्दिक पंड्या को परेशान करके रखा. उससे पहले पारी का 19वां ओवर शार्दुल ठाकुर ने डाला था, जिसमें केवल सात रन बने थे. वो ओवर मैच का टर्निंग पॉइंट रहा. मुंबई इंडियंस की मौजूदा सीजन में यह चार मैचों में तीसरी हार रही. वहीं लखनऊ की इतने ही मैचों में ये दूसरी जीत रही. ऐसा रहा मैच का आखिरी ओवर पहली गेंद- 6 रन (हार्दिक पंड्या) दूसरी गेंद- 2 रन (हार्दिक पंड्या) तीसरी गेंद- 0 रन (हार्दिक पंड्या) चौथी गेंद- 0 रन (हार्दिक पंड्या) पांचवीं गेंद- 1 रन (हार्दिक पंड्या) छठी गेंद- 0 रन (मिचेल सेंटनर)  छह गेंद पर चाहिए 22 रन तिलक वर्मा रिटायर होकर पवेलियन लौट गए हैं। तिलक ने 23 गेंदों पर 25 रन बनाए। मुंबई और लखनऊ के बीच मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है और मुंबई को जीत के लिए छह गेंदों पर 22 रनों की जरूरत है। सूर्यकुमार यादव आउट आवेश खान ने सूर्यकुमार यादव को आउट कर मुंबई इंडियंस को चौथा झटका दिया है। सूर्यकुमार अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे और अर्धशतक लगा चुके थे, लेकिन वह 43 गेंदों पर नौ चौकों और एक छक्के की मदद से 67 रन बनाकर आउट हुए।  सूर्यकुमार का पचासा सूर्यकुमार यादव ने लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ 31 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया है। सूर्यकुमार ने नमन धीर के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए अच्छी साझेदारी निभाई और अब अर्धशतक लगाकर टीम की उम्मीदें बनाई रखी है। मुंबई ने 14 ओवर की समाप्ति के बाद तीन विकेट पर 133 रन बना लिए हैं। अब उसे जीत के लिए 36 गेंदों पर 71 रन बनाने हैं।  टारगेट का पीछा करते हुए मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने 17 रनों के स्कोर तक 2 विकेट खो दिए. पहले इंग्लिश खिलाड़ी विल जैक्स (5) को आकाश दीप ने आउट किया. फिर दूसरे ओपनर रियान रिकेल्टन (10) को शार्दुल ठाकुर ने पवेलियन रवाना किया. दो विकेट गिरने के बाद नमन धीर और सूर्यकुमार यादव ने मिलकर पारी को मोमेंटम प्रदान किया. नमन और सूर्यकुमार के बीच तीसरे विकेट के लिए 69 रनों की पार्टनरशिप हुई. नमन धीर 24 बॉल पर 46 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें 4 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. नमन को स्पिनर दिग्वेश सिंह राठी ने बोल्ड किया. नमन धीर के आउट होने के बाद सूर्यकुमार यादव और ‘इम्पैक्ट सब’ तिलक वर्मा के बीच चौथे विकेट के लिए 66 रनों की पार्टनरशिप हुई. सूर्यकुमार यादव ने 43 गेंदों पर 67 रन बनाए, जिसमें 9 चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. आवेश खान ने सूर्यकुमार यादव को आउट करके इस साझेदारी को तोड़ा. सूर्या के आउट होने के बाद तिलक वर्मा और हार्दिक पंड्या से मुंबई को तूफानी बैटिंग की उम्मीद थी. हालांकि तिलक वर्मा बिल्कुल लय में नहीं दिखे, ऐसे में उन्होंने 19वें ओवर में रिटायर्ड आउट होने का फैसला किया. तिलक ने 24 गेंदों पर 25 रन बनाए. इसके बाद आखिरी ओवर में हार्दिक पंड्या ने पूरी कोशिश की, लेकिन वो मैच को मुंबई के कब्जे में नहीं कर पाए. हार्दिक ने 16 बॉल पर नाबाद 28 रन बनाए, जिसमें दो चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है

रायपुर  दाऊ अमृष कुमार लक्ष्मेश्वर दयाल, छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन पुरानी बस्ती के लोकार्पण समारोह, छत्तीसगढ़ में दान की अनोखी परंपरा स्थापित करने वाले दानदाताओं के वंशजों और छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के केंद्रीय पदाधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह मैं पहुंचे प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है। कोरोना काल में जब सब अपने घरों से निकल नहीं पा रहे थे तब छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज ने सबके भोजन की, विश्वास की और मुस्कान की चिंता की इस समाज ने धर्म शिक्षा स्वास्थ्य शुद्ध पेयजल जैसे विभिन्न आयाम में दान किया। यह अनुकरणीय है।  कोई सोच भी नहीं सकता था ऐसा दान दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने किया है। 1728 एकड़ जमीन कृषि विश्वविद्यालय को दान अद्भुत है। अस्पताल का निर्माण आज भी लोगों को लाभ पहुंचा रहा है और एम्स की जमीन दाऊजी की दूर दृष्टि को साबित करती है। ऐसे दाऊजी को नमन है।  लोगों को संबोधित करते हुए रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने कहा कि आज का कार्यक्रम एक समाज के दायरे में बंद कार्यक्रम नहीं है आज के कार्यक्रम में शहर को शिक्षा स्वास्थ्य संस्कृति धर्म शादी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने वाले व दान करने वालों का सम्मान किया जा रहा है कहीं ना कहीं उसकी इस दान के पीछे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जी की प्रेरणा है। और यह परंपरा लगातार आगे बढ़े ऐसा इस आयोजन का उद्देश्य है।   इस पूरे आयोजन में रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा महापौर मीनल चौबे व नान  अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव भाजपा प्रवक्ता नालिनेश ठोकने भी उपस्थित थे। ।  कार्यक्रम के आयोजक छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने बताया कि दानशीलता दिवस का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी जो आभासी दुनिया में जी रही है उन्हें उनके पूर्वजों के योगदान से अवगत कराना है। पूर्वजों ने दान की जो परंपरा रखी थी वर्तमान पीढ़ी उसे बहुत आगे अच्छे से आगे बढ़ा रही है भविष्य की पीढ़ी भी उससे प्रेरणा ले इसलिए ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। अनुराग अग्रवाल ने बताया कि रायपुर अब महानगर हो गया है महानगर के लोगों को यह पता लगे की रायपुर के निर्माण में अग्रवाल समाज, मराठी समाज, ब्राह्मण समाज, बंगाली समाज, सिंधी समाज, सिख समाज सब समाजों ने मिलकर बिना भेदभाव के योगदान दिया है इसलिए यह आयोजन किया गया है।   छत्तीसगढ़ी दाऊ अग्रवाल समाज की तरफ से केंद्रीय अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने मुख्यमंत्री जी से दानवीर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल के नाम से राज्य अलंकरण प्रारंभ करने की मांग रखी है। क्योंकि प्रथम मंत्रालय दो कल्याण सिंह मंत्रालय था अतः नया रायपुर में किसी चौराहे या सड़क का नाम दाऊ कल्याण सिंह के नाम से रखने की मांग भी की गई है।   छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की अध्यक्ष पद पर  दाऊ अनुराग अग्रवाल सचिव पद पर दाऊ  डॉ जेपी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पद पर  दाऊ अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष पद पर दाऊ अजय दानी, उपाध्यक्ष पद पर दाऊ श्याम अग्रवाल, दाऊ गजेंद्र अग्रवाल, दाऊ डॉ राजेश अग्रवाल, श्रीमती सीता अग्रवाल, सह सचिव पद पर दाऊ यशवंत अग्रवाल, दाऊ संतोष अग्रवाल, दाऊ केशव मुरारी अग्रवाल,श्रीमती निहारिका अग्रवाल, महिला प्रतिनिधि के पद पर श्रीमती विंध्य अग्रवाल और युवा प्रतिनिधि के तौर पर दाऊ आशीष अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के द्वारा महाराज अग्रसेन के नाम से शपथ ली।   कार्यक्रम आभार प्रदर्शन केंद्रीय सचिव डॉक्टर दाऊ जेपी अग्रवाल ने किया।

8 साल बाद 50 लाख किसानों से जुड़ी समितियों के होंगे चुनाव, चुनाव 1 मई से 7 सितंबर 2025 तक पांच चरणों में होंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में 50 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पीएसीएस) के चुनाव आठ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद अब होने जा रहे हैं। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इन चुनावों को प्राथमिकता दी है। महाधिवक्ता कार्यालय ने इसे अति आवश्यक बताते हुए पांच चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है, जो एक मई से सात सितंबर 2025 के बीच संपन्न होंगे। यह चुनाव गैर दलीय आधार पर होंगे, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।   हाई कोर्ट के निर्देशों ने बढ़ाया दबाव प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव आखिरी बार 2013 में हुए थे, जिनका कार्यकाल 2018 में समाप्त हुआ। नियमानुसार छह माह पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन विधानसभा चुनाव, किसान कर्ज माफी और अन्य कारणों से यह लगातार टलता रहा। कांग्रेस और शिवराज सरकारों के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इस बीच, वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रशासकों की नियुक्ति की गई, लेकिन सहकारी अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था अधिकतम एक साल तक ही वैध थी। चुनाव न होने से असंतोष बढ़ा और हाई कोर्ट की जबलपुर व ग्वालियर खंडपीठ में कई याचिकाएं दायर हुईं। मार्च में महाधिवक्ता कार्यालय ने सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव और सहकारिता विभाग को सुझाव दिया कि चुनाव जल्द कराना जरूरी है। इसके बाद राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने कार्यक्रम घोषित किया। पुनर्गठन के बाद पहले चरण में चुनाव चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण में उन समितियों को शामिल किया जाएगा, जो पुनर्गठित हो चुकी हैं। भारत सरकार के सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के निर्देशों के कारण पहले पुनर्गठन पर जोर दिया गया, लेकिन अब हाई कोर्ट के दबाव में प्रक्रिया तेज की गई है। निर्वाचन प्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी चरणों में व्यवस्थित ढंग से मतदान होगा। सबसे पहले रजिस्ट्रीकरण व निर्वाचन अधिकारी को सदस्यता सूची सौंपी जाएगी, जिसके बाद दावा-आपत्ति का निराकरण कर अंतिम सूची जारी होगी। महिलाओं के लिए संचालक मंडल में पद आरक्षित होंगे। आमसभा की सूचना के साथ नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कांग्रेस-भाजपा का दखल भले ही सहकारिता चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हों, लेकिन राजनीतिक दलों की इसमें गहरी दिलचस्पी रहती है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्रियों भगवान सिंह यादव और अरुण यादव के नेतृत्व में एक समिति बनाई है, जो चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। वहीं, भाजपा का सहकारिता प्रकोष्ठ भी अपने समर्थकों को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य संस्थाओं में प्रतिनिधि बनाने के लिए सक्रिय है। दोनों दल गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सहकारी संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। चुनाव की प्रक्रिया चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। सदस्यता सूची प्रकाशन के बाद विशेष साधारण सम्मेलन बुलाकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का चयन होगा। पांच चरणों का कार्यक्रम इस प्रकार है: पहला चरण (1 मई-23 जून), दूसरा चरण (13 मई-4 जुलाई), तीसरा चरण (23 जून-22 अगस्त), चौथा चरण (5 जुलाई-31 अगस्त), और पांचवां चरण (14 जुलाई-7 सितंबर)। यह प्रक्रिया समितियों के पुनर्गठन और किसानों की सहभागिता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

UPI के बढ़ते चलन ने घटाई ATM की मांग, ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा असर

मुंबई डिजिटल युग के इस दौर में, एक तरफ जहां कैशलेस ट्रांजेक्शन अपना तेजी से स्थान बना रही है और लोगों की रोमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग अब कैश के साथ ही साथ एटीएम का प्रयोग कम कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे प्रमुख कारण UPI पेमेंट्स का उभार है। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के माध्यम से लेन-देन आसान और तेज हो गया है, जिससे कैश निकासी की आवश्यकता में कमी आई है। देश में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते एटीएम के इस्तेमाल में गिरावट आई है। इससे जुड़ी हुई आरबीआई ने रिपोर्ट भी पब्लिश की है। भारत में ATM की संख्या में लगातार हो रही गिरावट RBI के ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार,देश में एटीएम की संख्या में भारी कमी आई है। भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 219,000 से घटकर सितंबर 2024 में 215,000 हो गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ऑफ-साइट ATM में कमी के कारण हुई है। ये ATM सितंबर 2022 में 97,072 से गिरकर सितंबर 2024 में 87,638 तक पहुंच गए। ATM की संख्या में कमी के कारण वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकारी बैंकों ने एटीएम बंद करने के लिए कई कारण बताए हैं। इनमें बैंकों का एकीकरण, एटीएम का कम इस्तेमाल, व्यावसायिक लाभ की कमी और एटीएम का स्थानांतरण शामिल हैं। बैंकर्स का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और यूपीआई के उभरने से नकदी का उपयोग कम हुआ है, जिससे एटीएम का संचालन अव्यावहारिक हो गया है। UPI का बढ़ता दबदबा पिछले नौ वर्षों में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जन धन योजना, मोबाइल इंटरनेट और यूपीआई के प्रसार ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में जहां 535 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 13,113 करोड़ हो गए। इस वित्त वर्ष (सितंबर तक) यूपीआई के जरिए 122 लाख करोड़ रुपए के 8,566 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं। डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता कदम उपभोक्ता अब सब्जियों से लेकर ऑटो सवारी और महंगी खरीदारी तक के लिए यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने भारत को नकदी से डिजिटल भुगतान की ओर तेजी से बढ़ाया है। क्यों कम हो रहे ATM मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में पिछले काफी समय से डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट करना लोगों को काफी आसान भी लगता है, इसलिए कम समय में ही यह पूरे देश में काफी लोकप्रिय हो गया है। बैंकों के घटती एटीएम की संख्या में काफी बड़ा रोल यूपीआई का भी है। पिछले कुछ समय से एटीएम के पॉपुलैरिटी में काफी कमी आई है। लोगों तक एटीएम की पहुंच अभी भी कम है, रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में प्रति 100,000 लोगों पर केवल 15 एटीएम हैं। RBI के नियमों का असर देश में नकदी अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्त वर्ष 22 में 89% लेन-देन और सकल घरेलू उत्पाद का 12% हिस्सा नगद लेन देन का ही था। लेकिन एटीएम लेन-देन और इंटरचेंज शुल्क पर RBI के नियमों ने ATM पर अपना गहरा असर डाला है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव डिजिटल भुगतान विशेष रूप से यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल परिवर्तन पर रणनीतिक ध्यान केंद्रित करने से प्रेरित है। आइए सबसे पहले (Automated Teller Machine- ATM) के इतिहास पर एक नजर डालते हैं: भारत में पहला एटीएम साल 1987 में HSBC ने मुंबई में लगाया था. उसके अगले 10 वर्षों में यानी 1997 तक देश में करीब 1500 एटीएम खुले. अगर दुनिया में पहला ATM की बात करें तो 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में एक कैश मशीन का उपयोग किया गया था, जिसे दुनिया की पहली एटीएम के रूप में मान्यता प्राप्त है. इस ATM को बार्कलेज बैंक ने शुरू किया था. 80 के दशक के दौरान दुनिया के कई बड़े देशों में ATM मुख्यधारा में शामिल हो गए थे. इसके बाद साल 1997 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने ‘स्वधन’ नामक से पहला ज्वाइंट ATM नेटवर्क शुरू किया, जिसे इंडिया स्विच कंपनी (ISC) ने संचालित किया. हालांकि, यह 2003 में बंद हो गया. उसके बाद 2004 में नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS) की स्थापना हुई, जो आज भारत का सबसे बड़ा ATM नेटवर्क है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है. आज भारत में कुल इतने ATM जनवरी 2022 तक, NFS नेटवर्क के तहत भारत में 2,55,000 से अधिक ATM थे, जिसमें नकदी जमा मशीनें और रिसाइक्लर शामिल थे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और NPCI के आंकड़ों के आधार पर 2023 तक भारत में लगभग 2,60,000 से 2,70,000 ATM होने का अनुमान था. फिलहाल भारत में लगभग 2.8 से 3 लाख ATM होने की संभावना है. फिलहाल देश में एक लाख लोगों पर 15 ATM हैं.  ATM की संख्या और प्रभाव के आधार पर SBI सबसे बड़ा ऑपरेटर है, लेकिन कैश मैनेजमेंट में CMS का दबदबा है. भारत में अब तक कितने ATM बंद हो चुके हैं… RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 2,19,000 थी, जो सितंबर 2024 में घटकर 2,15,000 हो गई.  इसका मतलब ये है कि इस अवधि में करीब 4 हजार ATM बंद हुए. यही नहीं, साल 2017 के बाद से ही ATM की संख्या में बढ़ोतरी धीमी हो गई, और साल-दर-साल इसका दायरा बढ़ता गया है. खासकर 2022 के बाद से ऑफ-साइट ATM (बैंक परिसर से बाहर स्थित) की संख्या में लगातार गिरावट आई है. यह डिजिटल भुगतान (जैसे UPI) के बढ़ते उपयोग, ATM संचालन की उच्च लागत, और बैंक शाखाओं के विलय के कारण हो रहा है. क्यों बंद हो रहे हैं ATM? यानी सबकुछ ग्राहकों पर निर्भर करता है, अगर ATM का खूब उपयोग होगा तो फिर कारोबार घाटे में नहीं चलेगा, वहीं अगर एक ATM महीने में 300-500 लेनदेन करता है, तो यह घाटे में भी जा सकता है. ये कड़वा सच है, देश में ATM का उपयोग तेजी … Read more

बस्तर में सुरक्षाबल के जवानों की लगातार कार्रवाई से नक्सली संगठन खौफ, शाह की रणनीति का दिखा असर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार एक्शन हो रहे हैं। सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ में घुसकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिसके बाद नक्सली खौफ में आ गए हैं। ऐसे में नक्सली संगठन की तरफ से शांति की पहल का एक लेटर जारी किया गया है। शांति की पहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि नक्सली संगठन अब कमजोर हो गए हैं। केंद्र सरकार भी नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगातार सपोर्ट कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं और उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अमित शाह के डेडलाइन क्या है? छत्तीसगढ़ में नक्सवाद के खात्मे की कमान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले रखी है। अमित शाह लगातार नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा कर रहे हैं और रणनीति भी बना रहे हैं। अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक डेडलाइन तक की है। शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने की डेट तय की है। यह डेडलाइन तय होने के बाद सुरक्षाबल के जवान ताबड़तोड़ एक्शन कर रहे हैं। सेना की पहुंच उन इलाकों में हो गई है जहां कभी नक्सलियों की बिना इजाजत के कोई बाहरी व्यक्ति कदम नहीं रख सकता था। गृहमंत्री ने दिया है दो टूक जवाब नक्सली संगठन का एक लेटर सामने आया है। इस लेटर में उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध विराम की घोषणा करनी चाहिए। वह शांति से वार्तालाप करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने उसके लिए शर्त रखी है कि सरकार सेना की कार्रवाई रोके। नए इलाकों में बनाए गए कैंप को हटा दिया जाए। नक्सलियों की शर्त पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा दो दो टूक जवाब दे चुके हैं कि नक्सली संगठन हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें उन्होंने कहा कि किसी भी शर्त पर बातचीत नहीं होगी। क्यों शांति चाहते हैं नक्सली नक्सलियों की शांति पहल को लेकर बस्तर के रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रजीव रंजन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि- ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सली इतने कमजोर हैं। जिस तरह से 2024 में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हुए उसके बाद इस साल की शुरुआत में जवानों ने माओवादियों के बड़े कैडर को मार गिराया हो उससे वह खौफ में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शांति पहल नक्सलियों का एक ट्रैप है। इस ट्रैप का फायदा उठाकर वह अपने लिए समय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह खुद को और अपने संगठन के टॉप लीडरों की बचाने की नक्सलियों की एक साजिश है। इस साजिश के जरिए नक्सली सरकार को शांतिवार्ता में उलझाकर जवानों की कार्रवाई रोकना चाहते हैं। वह जिस युद्ध विराम की बात कर रहे हैं वह खुद उन्हें करना चाहिए। सरेंडर करके सरकार की जो पुनर्वास नीति है उसका लाभ उठाना चाहिए। हथियारों और लीडरों की कमी उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल के जवानों ने अबूझमाड के उन इलाकों में कैंप स्थापित कर लिए हैं जिन्हें नक्सली अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे। नक्सलियों के खिलाफ जवान लगातार कार्रवाई ही नहीं कर रहे हैं उनके हथियार और विस्फोटकों को भी जब्त कर रहे हैं जिससे संगठन के पास आधुनिक हथियारों की भी कमी हो गई है। ऐसे में वह शांति का ट्रैप बिछाने की कोशिश में हैं। वह अपने टॉप लीडरों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाना चाहते हैं। पहली बार ऐसा एक्शन उन्होंने कहा कि इससे पहले हम बस्तर में देखते थे कि सरकार और जवान शांति के लिए पहल करते थे। लेकिन इस बार उल्टा है। जवान और सरकार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं और नक्सली शांति की बात कर रहे हैं। वह भारी दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शांति पहल करनी चाहिए लेकिन बस्तर में जवानों की कार्रवाई तब तक नहीं ठहरनी चहिए जब तक की नक्सलवाद पूरी तरह से घुटने नहीं टेक देता है।

बागेश्वर धाम में भारत का पहला हिन्दूग्राम, हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त, गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा

छतरपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठ के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 अप्रैल को हिंदू गांव की आधारशिला रखी. इसके साथ ही बागेश्वर धाम के निकट देश के पहले हिंदू गांव के निर्माण की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं, जो दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा. इस गांव में रहने वालों की जीवनशैली वैदिक संस्कृति पर आधारित होगी. ​देश के पहले हिंदू गांव के स्थापना समारोह में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की संकल्पना हिंदू घरों, हिंदू गांवों, हिंदू जिलों और हिंदू राज्यों की स्थापना के बाद ही पूरी होगी. योजना के अनुसार इस गांव में 1,000 परिवार रहेंगे और इसे बागेश्वर धाम परिसर में विकसित किया जाएगा. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बागेश्वर धाम जनसेवा समिति हिंदू और सनातन धर्म के अनुयायियों वाले इस गांव के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी और इसे दोबारा बेचा या खरीदा नहीं जा सकेगा. बाबा बागेश्वर ने कहा, ‘इस भूमि पर भवन बनाए जाएंगे तथा वहां रहने वाले लोगों के लिए कुछ बुनियादी शर्तें तय की जाएंगी. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा. हालांकि, सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत है. हिंदू गांव में घर एग्रीमेंट के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे.’ हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त उन्होंने बताया कि हिंदू गांव की आधारशिला रखे जाने के पहले ही दिन दो व्यक्तियों ने अपनी सहमति दे दी है तथा भवन अधिग्रहण के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है. बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू गांव में लोग जिस मकान में रहेंगे उसकी खरीद-फरोख्त का हक उन्हें नहीं मिलेगा. इसके पीछे की वजह यह है कि विधर्मी लोभ-लालच देकर किसी भी स्तर पर जाकर किसी भी कीमत पर मकान खरीदने के प्रयास करते हैं. अक्सर ऐसा देखने में भी आता है कि लालच में आकर लोग धर्मविरोधी ताकतों के सामने खुद को सरेंडर कर देते हैं. इसलिए बागेश्वर धाम का हिंदू ग्राम क्रय-विक्रय से प्रतिबंधित रहेगा. जहां सनातन मूल्य नहीं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदू राष्ट्र बनाने से पहले हर घर और हर गांव में हिंदू धर्मावलंबी बनाने का काम शुरू होगा. यह अभियान इसी महीने शुरू होगा. इस अभियान के लिए बागेश्वर धाम से टीमें रवाना हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, ‘जहां बारिश नहीं होती, वहां फसलें खराब हो जाती हैं. इसी तरह, जहां सनातन मूल्य मौजूद नहीं हैं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं. हम धर्मनिष्ठ हिंदू बनाने के लिए काम करेंगे. प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक प्रधान नियुक्त किया जाएगा.’ धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस वीडियो के माध्यम से देश में नई क्रांति खड़ी होने वाली है. हम उसकी घोषणा सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हम कट्टर हिंदू बनाने का काम करेंगे. सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक प्रभारी होगा, जो एक मंडल प्रभारी से जुड़ा होगा. 10 गांवों का एक मंडल बनाया जाएगा, यह जिला अध्यक्ष से जुड़ा होगा. सभी प्रभारियों को तीन-चार महीने में बागेश्वर धाम आकर बात करनी होगी. मंडल जहां काम कर रहे हैं, वहां कथाएं भी होंगी.’  

खुशखबरी! दिल्लीवालों का इंतजार खत्म होने जा रहा, आज से दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू

नई दिल्ली खुशखबरी! दिल्लीवालों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। आज यानी शनिवार से दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू हो सकती है। दिल्ली सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। जानकारी के मुताबिक पहले चरण में एक लाख लोगों का दिल्ली में आयुष्मान कार्ड बनेगा। इसके बाद तेजी से इस योजना को आगे बढ़ाते हुए सभी पात्र दिल्ली वालों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समझौते पत्र (MOU) साइन होने वाले हैं। इसके बाद 10 अप्रैल तक कम से कम 1 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य है। बीजेपी ने दिल्ली में विधानसभा चुनावों से पहले ही ऐलान किया था कि सत्ता में आने के बाद इस योजना को लागू किया जाएगा। आयुष्मान योजना के तहत दिल्ली में 5 लाख + 5 लाख यानी 10 लाख रुपये का मेडिकल कवर मिलेगा। सबसे पहले किसके बनेंगे आयुष्मान कार्ड केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना गरीब व जरूरतमंद लोगों को बेहतर इलाज देने के लिए है। दिल्ली में भी इस योजना का लाभ इन्हीं लोगों को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक जिन लोगों के पास अंत्योदय अन्न योजना (AAY) कार्ड है, उन्हीं के कार्ड पहले बनाए जाएंगे। इसके बाद बीपीएल कार्डधारकों के नंबर आएंगे। माना जा रहा है कि शुरुआत में एक लाख अंत्योदय कार्डधारकों को इस योजना का लाभ होने वाला है। आयुष्मान योजना के लिए बजट दिल्ली में आयुष्मान योजना लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने 2144 करोड़ रुपये का बजट पास किया हुआ है। आयुष्मान कार्ड बनवाने पर अन्य राज्यों में 5 लाख रुपये तक का मेडिकल कवर मिलता है। दिल्ली में यह मेडिकल कवर 10 लाख रुपये है। इसमें से 7 लाख का खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। दिल्ली में कितनी तरह के राशन कार्ड दिल्ली में वर्तमान में दो तरह के राशन कार्ड बनते हैं। पहला: Priority Category या बीपीएल कार्ड, जो गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के बनते हैं। इन्हें PR कार्ड भी कहा जाता है। दूसरा अंत्योदय अन्न कार्ड यानी AAY कार्ड। ये कैटेगरी गरीबी रेखा के मामले में सबसे निचले पायदान पर मानी जाती है। इन्हें प्रति परिवार 35 किलो राशन हर महीने दिया जाता है। द‍िल्‍ली में क‍ितने AAY राशन कार्ड द‍िल्‍ली में 72,77,995 राशन कार्ड को मंजूरी म‍िली हुई है। केंद्र सरकार द्वारा तय संख्या के अनुसार दिल्ली में 1,56,800 AAY राशन कार्ड को मंजूरी मिली हुई है। ये कार्ड Poorest of Poor वर्ग में आने वाले सबसे गरीब वर्ग का ही बनता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक जनवरी, 2025 में दिल्ली में AAY राशन कार्ड की संख्या महज 66,532 ही थी। अंत्योदय अन्न योजना राशन कार्ड के अंतर्गत प्रति परिवार 2 रुपये किलो के हिसाब से 25 किलो गेहूं और 3 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 10 किलो चावल मिलता है। इसके अलावा 13.50 रुपये किलो के हिसाब से 6 किलो चीनी मिलती है।

अगले कुछ सालों में सोने के दाम 38% तक गिरेंगे, भारत में 55,000 प्रति 10 ग्राम आएंगे भाव

नई दिल्ली  क्या कभी सोने की कीमत 55 हजार हो जाएगी। क्या सोने की कीमतों के लिहाज से वक्त 2 साल पीछे हो जाएगा, जब 2023 में 10 ग्राम सोने की कीमत तकरीबन यही थी…संभव हो ऐसा हो। एक अमेरिकी एनालिटिकल कंपनी ने तो कुछ ऐसा ही अनुमान लगाया है। मगर, ऐसा क्यों होगा, इसके पीछे क्या ईरान-अमेरिका, रूस-यूक्रेन युद्ध, बांग्लादेश में तख्तापलट या इजरायल-हमास जंग है, जिसके खत्म होने के आसार लगाए जा रहे हैं। आइए-समझते हैं। किसने की सोने पर ऐसी खुशी देने वाली भविष्णवाणी अमेरिकी कंपनी मॉर्निंगस्टार के विश्लेषक ने यह भविष्यवाणी की है कि अगले कुछ सालों में सोने के दाम 38% तक गिर सकते हैं। भारत में 24 कैरेट सोने का दाम लगभग 90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह $3,100 से ऊपर है। अगर सोने के दाम 40% गिरते हैं, तो भारत में यह लगभग 55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। सोने के दाम कब बढ़ जाते हैं और क्यों यह सुरक्षित निवेश सोने के दाम लगातार बढ़ ही रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि दुनिया बीते कई सालों से युद्ध, महामारी, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के चलते उतार-चढ़ाव से जूझ रही है। चूंकि, युद्ध या संघर्षों के दौरान सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। चीन के साथ अमेरिका का ट्रेड वॉर भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सोने ने दिखाई अकड़ 2018 में यूक्रेन ने इस क्षेत्र पर रूस के कब्जे की घोषणा की। संघर्ष के इन पहले आठ वर्षों में नौसैनिक घटनाएं और साइबर युद्ध भी शामिल थे। 20 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर आक्रमण किया और कब्जा कर लिया। इस युद्ध की शुरुआत वैसे तो 2014 में तब शुरू हुई थी, जब फरवरी 2014 में यूक्रेन के स्वायत्त गणराज्य क्रीमिया पर रूसी सैनिको ने गुप्त रूप से आक्रमण कर दिया था। इसके बाद से ही छिटपुट युद्ध चलता रहा है। 2022 में इसकी बाकायदा शुरुआत हो गई। तभी से एक और विश्वयुद्ध की आशंका के चलते सोने के भाव बढ़ते चले गए। 2023 में सोना करीब 55 हजार ही था, मगर बीते दो साल में यह दोगुने के करीब पहुंच चुका है। इजरायल-हमास युद्ध ने भी बढ़ाए सोने के भाव बीते कई सालों से इजरायल-हमास के बीच जारी युद्ध के दौरान सोने की चमक लगातार बढ़ती गई। बीते साल अक्टूबर तक सोना 76000 के पार निकल गया था। जो अब 90 हजार के पार पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि अगर यही हाल रहा तो इसकी कीमत इसी साल 1 लाख के पार हो जाएगी। बीते कुछ महीनों से इजरायल और हमास के बीच जंग और गहरी हो गई है। गाजा पट्टी को लेकर संघर्ष भी बढ़ गया है। अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु युद्ध को लेकर टेंशन बीते कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु प्रसार को लेकर भी टेंशन बढ़ रही है। ईरान के गुपचुप तरीके से यूरेनियम संवर्द्धन की खबरें आती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास इतनी परमाणु सामग्री जमा हो चुकी है कि वह मौका पाते ही बेहद कम समय में परमाणु हथियार बना लेगा, जो अमेरिका और उसके समर्थक देशों के लिए तबाही ला सकता है। इस बात को लेकर भी अमेरिकी शेयर बाजार कई बार टूटे हैं। मगर, उस वक्त भी सोने ने अंगद की तरह पांव जमा रखे थे। उसके भाव बढ़ते रहे हैं। इन वजहों से गिर सकते हैं सोने के भाव दरअसल, मॉर्निंगस्टार के एनालिस्ट का कहना है कि सोने का उत्पादन बढ़ गया है। 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की खदानों को एक औंस पर $950 का मुनाफा हुआ। इसका मतलब है कि सोना निकालने वाली कंपनियों को फायदा हो रहा है। दुनिया भर में सोने का भंडार भी 9% बढ़कर 2,16,265 टन हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में सोने का उत्पादन बढ़ गया है। साथ ही, पुराने सोने को पिघलाकर फिर से इस्तेमाल करने का चलन भी बढ़ गया है। क्या सोने की मांग कम होने से दाम गिरना संभव यह भी कहा जा रहा है कि दुनिया में सोने की मांग कम हो सकती है। पिछले साल केंद्रीय बैंकों ने 1,045 टन सोना खरीदा था। लेकिन अब वे शायद उतना सोना न खरीदें। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक सर्वे में पता चला है कि 71% केंद्रीय बैंक या तो अपना सोने का भंडार कम करेंगे या उसे उतना ही रखेंगे। इससे सोने के दाम में संभव है कि उतनी तेजी न आए, जितना आमतौर पर देखने को मिलती है। क्या सोने का बाजार का यह सैचुरेशन पीरियड यह भी कहा जा रहा है कि सोने का बाजार शायद अब चरम पर पहुंच गया है। 2024 में सोने के कारोबार में विलय और अधिग्रहण 32% बढ़ गए हैं। यह इस बात का संकेत है कि बाजार अब ऊपर जाने के बजाय नीचे आ सकता है। कुछ मामलों में लोग सोना खरीदने-बेचने के बजाया सोने में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। क्या रूस-यूक्रेन की जंग होगी खत्म, जिससे घटेगा सोना रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कमर कस ली है। वह दुनिया के दिग्गज राजनेताओं से इस बारे में मुलाकात और बात भी कर चुके हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस युद्ध के खात्मे के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि अगर ये कोशिशें जारी रहती हैं तो वह दिन दूर नहीं जब दोनों देशों के बीच युद्ध थम जाएगा। वैसे भी दोनों देश अब ज्यादा लड़ने के इच्छुक भी नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो बाजार सुधरेगा और दुनिया में सोने की बेतहाशा खरीददारी भी थम सकती है। जब सोने की मांग घटेगी तो जाहिर है सोने की कीमतें भी गिर सकती हैं। क्या इजरायल-हमास जंग के भी खत्म होने के आसार है इजरायल और हमास के बीच वैसे तो जंग पूरी तरह से खत्म होने के आसार नहीं हैं। मगर, ये है कि ये संघर्ष कुछ समय के लिए थम सकता है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे लेकर प्रयास कर रहे … Read more

राजेन्द्र शुक्ल ने कहा- स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना ज़रूरी

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना ज़रूरी है। प्रदेश सरकार के द्वारा निरंतर कोशिश की जा रही है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सर्व सुविधायुक्त बनाया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने उज्जैन ज़िले के घट्टिया जनपद पंचायत में 9 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत के 50 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घट्टिया के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय और पैरामेडिकल की भर्ती की जाएगी। सरकार के द्वारा पूरे प्रदेश में चिकित्सा स्टाफ की 30 हज़ार भर्तियां की जाएंगी। हम स्वास्थ्य और शिक्षा को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए हम सभी प्रयासरत हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों से कहा के भवन का निर्माण गुणवत्ता के साथ किया जाए। साथ ही समय सीमा से पहले ही निर्माण कार्य को पूर्ण करने का प्रयास किया जाए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घट्टिया का निर्माण कार्य आगामी 15 महीने में पूर्ण किया जाना है।उन्होंने घट्टिया में एंबुलेंस की मांग को स्वीकार करते हुए कहा कि यहां पर एंबुलेंस की सेवा शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी। क्षेत्र की अन्य आवश्यकताओं के लिए उन्होंने विस्तृत कार्य योजना बना कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। विधायक श्री सतीश मालवीय ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घट्टिया से आसपास के 100 गांव लाभान्वित होंगे। जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुंवर, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत घट्टिया श्री भगवान सिंह पंवार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल, विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

जयपुर सीरियल ब्लास्ट केस में चारों आरोपी दोषी करार, विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा 8 अप्रैल को होगी सजा

जयपुर राजधानी जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के दौरान चांदपोल में मंदिर के पास मिले जिंदा बम मामले में आज विशेष अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश रमेश कुमार जोशी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 8 अप्रैल को आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी। हालांकि, आरोपियों को 124(A) (राजद्रोह) के आरोपों से बरी कर दिया गया है, लेकिन अन्य धाराओं में दोषी ठहराया गया है। 17 साल बाद आया बड़ा फैसला दरअसल, जयपुर में 17 साल पहले हुए सीरियल बम ब्लास्ट के दौरान 8 बम धमाके हुए थे, लेकिन नौवां बम चांदपोल बाजार के गेस्ट हाउस के पास मिला था। यह बम धमाकों के 15 मिनट पहले ही डिफ्यूज कर दिया गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। अब इस जिंदा बम मामले में चारों आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। इससे पहले जयपुर बम धमाकों से जुड़े 8 मामलों में यही आरोपी फांसी की सजा पा चुके थे, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने मार्च 2023 में सभी को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कई खामियों को उजागर किया था, जिसके बाद सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जो अभी पेंडिंग है। क्या है बम ब्लास्ट का पूरा मामला? गौरतलब है कि 13 मई 2008 को जयपुर के चारदीवारी इलाके में 8 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 72 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में विशेष अदालत ने पहले 20 दिसंबर 2019 को चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने मार्च 2023 में इस फैसले को पलटते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इन चारों को जिंदा बम रखने के मामले में गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ एक नया केस दर्ज किया गया। 4 आरोपी दोषी करार, पहले हो चुके हैं बरी जिंदा बम मामले में दोषी करार दिए गए चारों आरोपी मोहम्मद सैफ, सैफुर्रहमान, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद हैं। मोहम्मद सैफ और सैफुर्रहमान फिलहाल जयपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद जमानत पर बाहर हैं। इससे पहले इन चारों आरोपियों को 2019 में जयपुर बम धमाकों में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी गई थी, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने मार्च 2023 में सभी को बरी कर दिया था। 112 गवाह और 1200 दस्तावेज पेश किए गए इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 112 गवाहों के बयान दर्ज कराए और करीब 1200 दस्तावेज अदालत में पेश किए। साइकिल मैकेनिक दिनेश महावर ने बताया कि किसी ने उसके पास बम वाली साइकिल कसवाई थी। पत्रकार प्रशांत टंडन और पूर्व एडीजी अरविंद कुमार जैन को भी गवाह बनाया गया था। पहले हाईकोर्ट ने क्यों किया था बरी? राजस्थान हाईकोर्ट ने मार्च 2023 में आरोपियों को बरी करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि साइकिल बम किसने रखी थी। अदालत ने जांच एजेंसियों की खामियों पर भी सवाल उठाए थे। वहीं, अब जिंदा बम मामले में चारों आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, जिससे इस केस में नया मोड़ आ गया है।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार वाली भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व को परिवार मानती है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार वाली भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व को परिवार मानती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में इस सिद्धांत पर चल रही राज्य सरकार सभी के हित और कल्याण के लिए समर्पित है। परिवारों का वातावरण खराब न हो, मेहनत से कमाए गए पैसे का उपयोग परिवार के हित में हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ही शराबबंदी लागू की गई है। धार्मिक नगरों में पवित्र भाव की अनुभूति होती है, अत: प्रदेश में विद्यमान 19 देव-स्थानों की गरिमा को बनाए रखने के लिए ही इन स्थानों पर शराबबंदी लागू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माँ पीताम्बरा की नगरी दतिया में शराबबंदी लागू करने के लिए आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दतिया में शराबबंदी के लिये नागरिक अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दतिया सहित प्रदेश में जहां-जहां देवी मां की कृपा है, वहां देवी लोक विकसित किए जाएंगे। चित्रकूट सहित भगवान श्रीराम से जुड़े प्रदेश के सभी स्थानों का श्रीराम वनपथ गमन मार्ग के अंतर्गत उन्नयन किया जा रहा है। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां भी लीलाएं हुईं, उन स्थानों को भी तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति के मूल भाव “सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामय:” के अनुरूप राज्य सरकार सबके कल्याण के लिए ही समर्पित भाव से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। राज्य सरकार के लिए कृषकों का हित सर्वोपरि है, किसानों को उनकी मेहनत और उपज का सही दाम मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए ही 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीदा जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश के लिए ‘केन-बेतवा’ लिंक परियोजना और ‘चंबल-काली सिंध-पार्वती’ नदी जोड़ों परियोजना जैसी सौगात प्रदेश को दी है। साथ ही ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से जमीन नहीं बेचने का आहवान करते हुए कहा कि इन नदी जोड़ो परियोजनाओं से दतिया भी लाभान्वित होगा और किसान परिवारों का खुशहाल जीवन सुनिश्चित है। डबल इंजन की सरकार में जनता का हित सर्वोपरि है, प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने जो कहा वह करके दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनावश्यक खर्चों से परहेज करने के लिए जनसामान्य को प्रेरित करते हुए कहा कि विवाह और मृत्यु भोज जैसे आयोजनों में अनावश्यक खर्च करना व्यर्थ है। अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके भविष्य निर्माण पर ध्यान देना ही परिवारों की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। हर गरीब को रहने के लिए पक्का मकान, हर जरूरतमंद के लिए भोजन की व्यवस्था जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में संचालित सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण की गतिविधियां राम राज्य के आदर्श के समान है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दतिया सहित प्रदेश के अनेक धार्मिक शहरों में शराबबंदी का जो निर्णय लिया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। शराब की लत के कारण अनेक परिवार परेशानी झेलते हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार उपलब्ध हों, इसके लिये मुख्यमंत्री द्वारा न केवल देश में बल्कि विदेशों में जाकर उद्योगपतियों से चर्चा कर प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के सार्थक प्रयास किए हैं। उनके प्रयासों से ही अनेक उद्योगपतियों ने प्रदेश में आकर उद्योग धंधे स्थापित कर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। विधायक सेवढ़ा श्री प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि माँ पीताम्बरा की नगरी दतिया में शराबबंदी का जो ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। इसके लिये दतिया के सभी निवासी मुख्यमंत्री के प्रति आभारी हैं। मुख्यमंत्री ने माँ पीताम्बरा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को दतिया में माँ पीताम्बरा माई के दरबार में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री डॉ. मिश्रा सहित जन-प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

MP में वक्फ प्रॉपर्टी में करोड़ों की गड़बड़ी, 15008 संपत्तियां, नए संशोधन बिल से क्या होगा असर

भोपाल  मध्यप्रदेश में वक्फ बोर्ड के अधीन 15008 संपत्तियां दर्ज हैं। इस हिसाब से इन सभी संपत्तियों से कम से कम 100 करोड़ रुपए सालाना आय होना चाहिए। जबकि सच यह है कि 02 करोड़ रुपया साल भी नहीं आ रहे हैं। कई नेताओं ने वक्फ की आमदनी से अपना पेट भरा है। इस नए बिल से उन्हीं लोगों का विरोध सामने आ रहा है। वास्तव में जरूरतमंद मुसलमान तो इस बिल से खुश है। यह बातें मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर सनवर पटेल ने कही हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि अभी पैसा जन कल्याण के काम में खर्च नहीं हो पाता। अब नए बिल के लागू होने के बाद राशि आएगी तो जनकल्याण के लिए खर्च की जा सकेगी। सनवर ने आरोप लगाए कि वक्फ की संपत्तियों का अवैध उपयोग भी हो रहा है। वक्फ प्रापर्टी का गलत उपयोग भोपाल में नईम खान ने वक्फ की प्रापर्टी का गलत उपयोग किया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। सनवर पटेल ने एक प्रेस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश भर में वक्फ की संपत्तियों को लेकर कई जगहों पर शिकायतें हुईं। जिसमें न्यायालय के साथ सरकार के दफ्तर भी शामिल हैं। वक्फ बिल पेश हुआ तो विपक्ष ने डराने का काम किया। जेपीसी ने देश भर में घूमकर सुझाव मांगे। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुझाव मांगे हैं। 2 करोड़ लोगों ने दिए सुझाव दो करोड़ से अधिक लोगों ने इस पर अपने सुझाव दिए हैं। पटेल ने कहा कि देश के भाईचारे और समाज व देश हित में वक्फ बिल लाया गया है। असल हकदार जरूरतमंद मुसलमानों के लिए यह बिल है। चंद ताकतवर मुसलमान लोग वक्फ की जमीन पर कब्जा करके बैठे थे, वे इसका विरोध कर रहे हैं। अब असली जरूरत मंद मुसलमानों के हित में इन संपत्तियों से होने वाली आय को खर्च किया जा सकेगा। बड़ी गड़बड़ी का हुआ खुलासा वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पटेल ने कहा कि कांग्रेस नेता रियाज खान ने वक्फ में 15 दुकानें बताई थी, इसकी जांच हुई तो 115 दुकानें मिलीं। ऐसे कई मामले हैं। ये वक्फ की आमदनी से अपना पेट भर रहे हैं। इस बिल से उन्हीं लोगों का विरोध सामने आ रहा है। जबकि जरूरतमंद मुसलमान तो इस वक्फ नए बिल से खुश हैं। विपक्ष पांच नाम बताए जिन्हें सीएए के कारण देश से निकाला गया पटेल ने कहा कि विपक्ष के लोग आज भी पांच नाम या एक नाम बता पाने की स्थिति में नहीं हैं कि सीएए के बाद किसी को देश से निकाला गया है। जेपीसी के बाद 15 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई गई थी और कलेक्टरों को फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। एमपी वक्फ बोर्ड ने 15 में से 12 बिंदुओं पर जानकारी भेज दी है। अब एमपी के लिए एक नया पोर्टल वामसी नाम से बनाया जा रहा है। शेष तीन बिन्दु राजस्व विभाग से संबंधित हैं जिसमें राजस्व रिकार्ड में संपत्तियों की क्या स्थिति है? निजी है या सरकारी है। बंदोबस्त के पहले जमीन का खसरा नम्बर क्या था? इसकी जानकारी कलेक्टरों से मांगी गई है। कांग्रेस नेताओं का वक्फ पर कब्जा, इसलिए कर रहे विरोध वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पटेल ने कहा कि कांग्रेस नेता रियाज खान 7.11 करोड़ की आरआरसी जारी हुई है। इन्होंने वक्फ में 15 दुकानें बताई थी, इसकी जांच हुई तो 115 दुकानें मिलीं। ऐसे ही 1.84 करोड़ की रिकवरी सागर जिले के बीना में कांग्रेस नेता इकबाल खान पर निकली है। नईम खान भोपाल के हैं, उनके विरुद्ध भी सवा करोड़ रुपए आरआरसी जारी हुई है। ये वक्फ की आमदनी से अपना पेट भर रहे हैं। इस बिल से उन्हीं लोगों का विरोध सामने आ रहा है। वास्तव में जरूरतमंद मुसलमान तो इस बिल से खुश है।

सरकार द्वारा दी गई जानकारी, भारतीय रेलवे के ट्रैक नेटवर्क के विस्तार के लिए चार परियोजनाओं को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे के ट्रैक नेटवर्क के विस्तार के लिए 18,658 करोड़ रुपये के निवेश से चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शुक्रवार को सरकार द्वारा यह जानकारी दी गई। तीन राज्यों (महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़) के 15 जिलों को कवर करने वाली चार परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 1,247 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं में संबलपुर-जरापड़ा तीसरी और चौथी लाइन, झारसुगुड़ा-सासोन तीसरी और चौथी लाइन, खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा पांचवीं और छठी लाइन और गोंदिया-बल्हारशाह रेलवे लाइन का दोहरीकरण शामिल हैं। आधिकारिक बयान में कहा गया कि बढ़ी हुई लाइन क्षमता से मोबिलिटी में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की दक्षता बढ़ेगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्ततम खंडों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। ये परियोजनाएं पीएम मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाएंगी, जिससे उनके लिए रोजगार/अवसरों में वृद्धि होगी। ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा हैं, जिसमें एकीकृत योजना की आवश्यकता होती है और ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इन परियोजनाओं के साथ, 19 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे दो आकांक्षी जिलों (गढ़चिरौली और राजनांदगांव) की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 3,350 गांवों और लगभग 47.25 लाख आबादी की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा लाइन बलौदा बाजार जैसे नए क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और इससे क्षेत्र में सीमेंट संयंत्रों सहित नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की संभावनाएं पैदा होंगी। सरकार ने बयान में आगे कहा कि ये लाइनें कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। नए ट्रैक बनने से 88.77 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी।

शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि विवाद ने रोचक मोड़ लिया, नहीं मान सकते मस्जिद, मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली मथुरा की शाही ईदगाह को मस्जिद के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसकी वजह है कि यह भारतीय पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित स्थान है। हिंदू पक्ष ने यह दलील दी है, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस तरह मथुरा के शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि विवाद ने रोचक मोड़ ले लिया है। इस पर शीर्ष अदालत का कहना है कि वह इस बात का परीक्षण करेगी कि आखिर इस दावे की क्या वैधता है। दरअसल हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की दलील के बाद इस मामले में ASI को भी पार्टी बनाने को कहा था। मुस्लिम पक्ष की याचिका सुनते हुए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच ने हिंदू पक्ष को नोटिस जारी किया है। मुस्लिम पक्ष की अपील सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जहां तक यह सवाल है कि क्या एएसआई संरक्षित स्थान का इस्तेमाल मस्जिद के तौर पर किया जा सकता है। इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। आपने इस बारे में हाई कोर्ट को भी कुछ नहीं कहा। इस मामले को मेरिट के आधार पर ही सुना जाएगा।’ यही नहीं अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष को अपनी याचिका में संशोधन करने की परमिशन दी है, जो पहली नजर में सही फैसला लगता है। हिंदू पक्ष ने हाई कोर्ट में कहा था कि ASI द्वारा संरक्षित किसी स्मारक को मस्जिद के तौर पर प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसके अलावा हिंदू पक्ष की दलील है कि ASI संरक्षित स्मारक होने के कारण यहां प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट भी लागू नहीं होता। अदालत ने कहा- दूसरी अर्जियों के साथ ही इसकी भी होगी सुनवाई बेंच ने कहा कि आपके पास अधिकार है कि अपनी अर्जी में संशोधन करें। अदालत ने कहा कि हिंदू पक्ष अपनी याचिका में संशोधन कर सकता है और उसमें यह दावा हो सकता है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट लागू नहीं होता। अदालत ने कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। हम नई अर्जी को भी पहले से दायर मामलों के साथ ही सुनेंगे। अब इस मामले में 8 अप्रैल को अदालत में सुनवाई होगी। दरअसल हिंदू पक्ष ने इस मामले में हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि एएसआई को भी इस केस में पार्टी बनाया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि शाही ईदगाह मस्जिद का संरक्षण वही करता है। इसलिए उसे भी पक्षकार बनाने के बाद ही मामले को आगे बढ़ाया जाए।

ड्रैगन-अमेरिका में ट्रेड वार शुरू, ट्रंप के टैरिफ के बाद चिनफिंग ने भी लगाया 34% जवाबी टैक्स

बीजिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2 अप्रैल को दुनिया के देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के साथ ही वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका जताई जाने लगी. अब यह व्यापार युद्ध शुरू होता दिख रहा है क्योंकि चीन भी अमेरिका पर बराबरी का टैरिफ लगाने जा रहा है. चीन के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका से आयातित सभी सामानों पर 10 अप्रैल से 34% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि चीन का यह टैरिफ अमेरिका के हालिया टैरिफ का जवाब है. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘2 अप्रैल 2025 को अमेरिकी सरकार ने देश में आयातित सभी चीनी सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगा दिया. अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ है जो कि चीन के वैध अधिकारों को नुकसान पहुंचाता है. यह दादागिरी है जो न केवल अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास, उत्पादन की स्थिरता और सप्लाई चेन को भी खतरे में डालेगा.’ चीनी मंत्रालय ने अमेरिका से टैरिफ हटाने का आग्रह कहते हुए कहा, ‘चीन अमेरिका से आग्रह कहता है वो बातचीत के जरिए तुरंत अपने एकतरफा टैरिफ उपायों को हटा ले ताकि व्यापार को लेकर जो भी मतभेद हैं उन्हें सुलझाया जा सके.’ अमेरिका को रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात पर भी नियंत्रण लगाएगा चीन अमेरिकी टैरिफ से नाराज चीन न केवल अमेरिका पर बराबरी का टैरिफ लगा रहा है बल्कि उसने यह भी कहा है कि वो अमेरिका को अब रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात पर भी नियंत्रण लगाएगा. चीन ने कहा है कि वो अमेरिका को मध्यम और भारी रेयर अर्थ मेटल्स यानी दुर्लभ-पृथ्वी धातुओं के निर्यात पर नियंत्रण लगा रहा है. इन धातुओं में समारियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम शामिल हैं. यह नियंत्रण 4 अप्रैल से ही लागू भी हो गया है. वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘चीनी सरकार कानून के अनुसार प्रासंगिक वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू कर रही है. इसका मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की बेहतर सुरक्षा करना और परमाणु अप्रसार जैसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करना है.’ चीन ने पहले ही दी थी जवाबी टैरिफ की धमकी ट्रंप ने पहले ही अमेरिका में आयात होने वाले चीनी सामानों पर 20% का टैरिफ लगाया था.  2 अप्रैल को फिर उन्होंने चीन पर 34% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया जिसके बाद चीनी सामानों पर अमेरिका का टैरिफ 54% हो गया. चीन ने गुरुवार को अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ की निंदा करते हुए कहा था कि वो इन तरीकों का ‘दृढ़ता से विरोध करता है और अपने अधिकारों, हितों की रक्षा के लिए जवाबी उपाय’ लागू करेगा. गुरुवार को एक बयान में, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने टैरिफ की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानदंडों का उल्लंघन बताया और तर्क दिया था कि इससे प्रभावित देशों के वैध अधिकारों को काफी नुकसान पहुंचता है. क्या है टैरिफ? टैरिफ एक तरह का टैक्स है, जो वस्तुओं के आयात पर लगाया जाता है। इसे आयात शुल्क भी कहते हैं। वस्तुओं का आयात करने वाले को यह टैक्स सरकार को देना पड़ता है। आम तौर पर कंपनियां टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं। क्या है पारस्परिक टैरिफ? पारस्परिक टैरिफ का मतलब है कि कोई देश दूसरे देश पर उतना ही टैरिफ लगाएगा, जितना टैरिफ दूसरा देश उस पर लगा रहा है। ट्रंप ने भी दूसरे देशों को पारस्परिक टैरिफ की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि हम दूसरे देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे, जितना वे हमारे उत्पादों पर लगाते हैं। अमेरिका भारत पर कितना टैरिफ लगाता है? भारत से अमेरिका निर्यात किए जा रहे उत्पाद जैसे स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पर पहले से ही 25 प्रतिशत टैरिफ लग रहा है। बाकी उत्पादों पर 5-8 अप्रैल के बीच 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। इसके बाद 9 अप्रैल से भारत के उत्पादों पर 27 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। अमेरिका के टैरिफ वार से 60 से अधिक देश प्रभावित होंगे। अमेरिका ने क्यों किया है टैरिफ का एलान? अमेरिका का दावा है कि टैरिफ से अमेरिका में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार घाटा कम होगा। अमेरिका कई देशों के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार असंतुलन का सामना कर रहा है। खा कर चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा काफी अधिक है। वस्तुओं के व्यापार में भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 2023-24 में 35.31 अरब डॉलर रहा था। किन सेक्टर्स को टैरिफ से छूट मिली है? थिंक टैंक जीटीआरआइ के अनुसार, आवश्यक और रणनीतिक वस्तुओं को टैरिफ से छूट मिली है। जैसे फार्मा, सेमीकंडक्टर, तांबा और ऊर्जा उत्पाद जैसे तेल, गैस, कोयला और एलएनजी। टैरिफ का भारत पर क्या होगा असर? भारत सरकार के अधिकारियों के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 27 प्रतिशत टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है। हालांकि, इसका असर मिला-जुला होगा और यह भारत के लिए बड़ा झटका नहीं है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर क्या चल रहा है? फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका गए थे। उस समय दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने के लिए एक व्यापार समझौते की बात कही थी। दोनों देश समझौते के पहले चरण को इस वर्ष सितंबर-अक्टूबर तक अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। क्या है व्यापार समझौता? व्यापार समझौते में दो व्यापारिक साझीदार देश या तो आयात या निर्यात शुल्क बड़े पैमाने पर घटाते हैं या ज्यादातर उत्पादों पर शुल्क खत्म कर देते हैं। इसके अलावा वे सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नियमों को आसान बनाते हैं। क्या अमेरिका के टैरिफ डब्ल्यूटीओ के नियमों के हिसाब से हैं? अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के विशेषज्ञ अभिजीत दास के अनुसार ये टैरिफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ)  के नियमों का उल्लंघन करते हैं। सदस्य देश के पास अधिकार है वह इनके खिलाफ डब्ल्यूटीओ में जाकर अपील करें।  

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