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गुड गर्ल कंपनी, दुबई, लास वेगास और कोलंबिया में ‘सेक्स आइलैंड’ की मेजबानी करने वाला

वॉशिंगटन  दुनिया में अय्याशी के कई अड्डे हैं। उनमें से एक ‘सेक्स आइलैंड’ है। यह जगह बेहद सीक्रेट होती है, जहां क्या होता है, इसके बारे में ज्यादा खबर नहीं। लेकिन रिपोर्ट्स का कहना है कि यहां हर तरह की सेक्सुअल फैंटेसी सच होती है। सेक्स आइलैंड साल में कुछ दिनों के लिए खुलता है। एक बार फिर यह शुरू हो गया है। इसकी आयोजक गुड गर्ल कंपनी, जून में दुबई, लास वेगास और कोलंबिया के कार्टाजेना के तट पर ‘सेक्स आइलैंड’ की मेजबानी करने वाला है। एक हफ्ते की इस ट्रिप पर 50 लोग जा सकते हैं, जिन्हें लाखों खर्च करने पड़ते हैं। सेक्स आइलैंड ड्रग्स पार्टियों के लिए मशहूर है। दुनिया के कई मशहूर लोगों का नाम इससे जोड़ा जाता रहा है, जो यहां जाते थे। हालांकि हर किसी की दिलचस्पी इसमें नहीं है। सेक्स आइलैंड के आलोचकों का कहना है कि यह डरावना और बेहद घृणित है। वहीं इसके आयोजकों का दावा है कि यह पूरी तरह से कानूनी है। वेबसाइट पर कहा गया है कि इसमें होलोग्राफिक संगीत कार्यक्रम, सुंदर महिलाएं, अनलिमिटेड सेक्स और नशा और ड्रग्स के लिए अनुकूल वातावरण, मुफ्त शराब रिसॉर्ट में उपलब्ध है। क्या-क्या होता है यहां? सेक्स आइलैंड के आयोजक इसे नशे के लिए ‘धरती पर स्वर्ग’ कहते हैं। वेबसाइट के मुताबिक कंपनी महिलाओं की अदला बदली की इजाजत देता है। पूरे बीच पर नग्न घूमा जा सकता है। वहीं एचआईवी और एसटीडी का टेस्ट भी किया जा सकता है। अपनी इस पार्टियों को लेकर कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर वीडियो शेयर किया है। गुड गर्ल कंपनी का दावा है कि यह कपल फ्रेंडली है, जहां आप प्रेमिका के साथ जा सकते हैं। हालांकि अपनी इन्हीं फैसिलिटीज के कारण इसे अय्याशी के अड्डे के रूप में देखा जाता है। कितना लगता है खर्च द सन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां जाने वाले एक शख्स ने बताया कि वह अपने घर बिजनेस ट्रिप का बताकर आया था। उसने कहा, ‘नाव सुंदर महिलाओं से भरी थी। वह डांस कर रही थीं और शराब पी रही थीं। जैसे ही हम आगे बढ़े हमें ड्रिंक्स दिए गए और हम पार्टी एंजॉय करने लगे। उसने कहा कि हर व्यक्ति दो लड़कियां चुन सकता था जो पूरी यात्रा के दौरान उनके साथ रहतीं।’ हालांकि यह ट्रिप बेहद महंगी होगी। लास वेगास में सेक्स आइलैंड पर जाने वालों को तीन दिनों के लिए 4,500 डॉलर (3.75 लाख) देने होंगे। इस ट्रिप पर सिर्फ 50 लोग ही जा सकते हैं।

उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के पहले स्पिरिचुअल सिटी बनाई जाएगी

उज्जैन  सिंहस्थ महापर्व 2028 से पहले धर्मधानी उज्जैन में स्थित चौरासी महादेव मंदिरों का जीर्णोंद्धार होगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इसके लिए 30 करोड़ रुपये से योजना तैयार की है। स्वीकृति के बाद काम शुरू हो जाएगा। पुराणों में महाकाल वन में चौरासी महादेव का उल्लेख है। भक्त प्रतिवर्ष श्रावण मास तथा प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाले अधिकमास के दौरान चौरासी महादेव मंदिरों की यात्रा करते हैं। इस बार भी श्रावण मास में 22 जुलाई से चौरासी महादेव यात्रा शुरू होगी, जो 19 अगस्त तक चलेगी। पुराने शहर की सघन बस्ती तथा शिप्रा किराने चौरासी महादेव के मंदिर हैं। कुछ मंदिरों की जमीन पर अतिक्रमण पसरा है। कुछ जमीनों पर अवैध निर्माण भी हो गए हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम नहीं है। ऐसे में उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा मंदिरों के उन्नयन तथा विकास की योजना बनाई गई है। सिंहस्थ से पहले इनका कायाकल्प हो जाएगा। यहां आने वाले दर्शनार्थियों को सुविधा के साथ बेहतर आध्यात्मिक वातावरण मिलेगा। अध्ययन के बाद तैयार कराई डिजाइन उविप्रा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी ने बताया कंसलटेंट से मंदिरों का अध्ययन कराकर डिजाइन तैयार कराई गई है। विचार विमर्श के बाद, जो योजना तैयार हुई है इसमें मंदिरों का विकास, आसपास की खाली जमीन का विकास, बाउंड्रीवाल, अप्रोच, फसाड, रंगरोगन, लाइटिंग, हरियाली तथा नाली आदि का निर्माण शामिल है। जिन मंदिरों में जिस प्रकार के काम की आवश्यकता होगी वह कराया जाएगा। कुल मिलकर मंदिरों के संपूर्ण विकास की योजना बनाई गई है। पिछले सिंहस्थ में भी हुआ था काम चौरासी महादेव मंदिरों को लेकर सिंहस्थ 2016 में भी योजना बनाई गई थी। इसके तहत कई मंदिरों में परिसर आदि का निर्माण भी कराया गया था। प्राचीन मंदिर काले पत्थरों से निर्मित है, लेकिन शिखर पर रंगरोगन तथा मरम्मत आदि के काम किए गए थे। इस बार महापर्व के पहले से संधारण शुरू होगा, इससे काम में गुणवत्ता भी बनी रहेगी।   भगवान शिव की विशाल मूर्ति के साथ होंगे 12 ज्योतिर्लिंग जानकारी के मुताबिक यह सिटी उज्जैन से 15 किमी दूर बनाई जाएगी, जिसके लिए 150 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। यहां भगवान भोलेनाथ की मूर्ति के चारों ओर देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप स्थापित किए जाएंगे। यहां ज्योतिर्लिंग के साथ अपनाई जाने वाली पूजा पद्धति की जानकारी भी रहेगी, ताकि आने वाले श्रद्धालु 12 अलग-अलग ज्योतिर्लिंग में की जाने वाली पूजा के आधार पर पूजन कर सकें। उज्जैन में बनेगा म्यूजियम सिंहस्थ के पहले उज्जैन में बड़ा म्यूजियम बनाने की तैयारी भी की जा रही है। यह म्यूजियम कोठी एरिया में बनाया जाएगा। इसमें विक्रमादित्य के शासन काल के साथ भगवान कृष्ण, महाकाल बाबा और अन्य धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों और अन्य ऐतिहासिक, पुरातात्विक वस्तुओं को रखा जाएगा, ताकि श्रद्धालु म्यूजियम में जाकर उज्जैन के गौरवशाली इतिहास और धार्मिक महत्व से परिचित हो सकें।

प्रदेश के अधिकांश प्राइवेट स्कूलों ने सरकारी पोर्टल पर नहीं चढाई फीस की जानकारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार जहां प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने की कोशिश कर रही है, वहीं स्कूल संचालक भी अपनी ‘अकड़’ दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला स्कूलों की फीस से जुड़ा हुआ है। सरकार ने स्कूलों को निर्देश दिये थे कि वे 8 जून के पहले फीस सहित अन्य जानकारी सरकारी पोर्टल पर चढ़ा दें, लेकिन अब तक अधिकांश स्कूलों ने यह काम नहीं किया है। बता दें, कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा काफी समय से विशेष अभियान चलाकर निजी स्कूलों में अनियमितताओं की जांच की जा रही है। कुछ स्कूलों द्वारा फर्जी व डुप्लीकेट पाठ्य-पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात सामने आई थी। जिसके बाद इस बड़े फर्जीवाड़े का उजागर हुआ। इसके बाद सरकार के द्वारा यह सख्त कार्रवाई की गई हैं। एमपी के स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसा रवैया देखने के बाद भी इन स्कूलों को 15 दिन का और अतिरिक्त समय दिया है। पहले के मुकाबले अब इन्हें 24 जून तक पोर्टल पर फीस स्ट्रक्चर और अन्य जानकारी अपलोड करने के लिए कहा है। कलेक्टर भी नहीं दे रहे ध्यान यह बात भी सामने आई है कि सरकार के आदेश के बाद भी अधिकांश जिला कलेक्टर ने शिक्षा माफिया के खिलाफ को ठोस कार्रवाई नहीं की है। इसे देखते हुए विभाग ने कलेक्टर, संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि अपने जिले और संभाग के प्राइवेट स्कूलों से यह जानकारी जल्दी से जल्दी भरवाएं। क्या कहते हैं नियम गौरतलब है कि प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा फीस में वृद्धि एवं इससे जुड़े अन्य विषयों को नियमन करने के लिए मध्य प्रदेश निजी विद्यालय फीस और संबंधित विषयों का विनियमन अधिनियम-2017 बनाया गया है। इस अधिनियम को 2018 में लागू किया गया था। इसके बाद इस अधिनियम के अधीन एमपी के निजी स्कूल फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन 2020 में प्रावधान किया गया है। इस नियम के हिसाब से राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। डुप्लीकेट किताब चलाने का खुलासा गौरतलब है कि जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने 11 निजी स्कूलों की जांच कराकर वहां फर्जी और डुप्लीकेट पुस्तकें चलाने का खुलासा किया था। उन्होंने यह भी पकड़ा कि इन स्कूलों ने 81.30 करोड़ रुपए की फीस ज्यादा वसूल ली और 240 करोड़ की नियम विरुद्ध आय अर्जित की थी। इन स्कूलों पर 22 लाख की पेनाल्टी लगाकर स्कूलों के 20 प्राचार्यों, चेयरमैन, सीईओ, सचिव और अन्य पदाधिकारियों की गिरफ्तार किया गया था। इसे बड़ी कार्रवाई के बाद एक बार फिर सरकार एक्शन मोड़ में नजर आ रही है।

अर्जेंटीना सरकार पर भारी कर्ज, 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहने को मजबूर

ब्यूनस आयर्स अर्जेंटीना क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का आठवां बड़ा देश है। प्रथम विश्व युद्ध से पहले इस दक्षिण अमेरिकी देश की गिनती दुनिया के टॉप 10 अमीर देशों में होती थी। लेकिन आज इस देश में महंगाई चरम पर है। दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई इसी देश में है। अप्रैल में अर्जेंटीना में महंगाई की सालाना दर 289 फीसदी पहुंच गई। दुनिया में कोई दूसरा देश महंगाई इस मामले में उसके आसपास भी नहीं है। तुर्की 75.45 फीसदी के साथ दूसरे और वेनेजुएला 64.9 फीसदी से साथ तीसरे नंबर पर है। अर्जेंटीना में महंगाई का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि यह भारत के मुकाबले करीब 60 गुना है। भारत में अप्रैल में खुदरा महंगाई की दर 4.83 फीसदी रही थी। सवाल यह है कि कभी दुनिया के अमीर देशों में शुमार अर्जेंटीना की यह दुर्गति कैसे हुई? प्रथम विश्व युद्ध से पहले अर्जेंटीना की गिनती दुनिया के टॉप अमीर देशों में होती थी। इस देश की अमीरी का अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि As rich as an Argentine जैसे मुहावरे चलन में थे। 19वीं शताब्दी के अंत में और 20वीं सदी की शुरुआत में पूरे यूरोप से लोग अर्जेंटीना आए। यह देश धनधान्य से भरपूर था। लेकिन 1946 से देश में लोकलुभावन नीतियों और खर्च का ऐसा दौर शुरू हुआ कि उसकी इकॉनमी गर्त में चली गई। इसकी शुरुआत राष्ट्रपति जुआन पेरोन ने की जो 1946 से 1955 तक सत्ता में रहे। 1990 के दशक में राष्ट्रपति कार्लोस मेनम ने फ्री-मार्केट रिफॉर्म्स की कुछ कोशिशें की लेकिन वह नाकाम रहे। साल 2001 के अंत में चीजें हाथ से निकल गई जब देश को भयंकर आर्थिक संकट से गुजरना पड़ा और उसने 102 अरब डॉलर के कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट किया। 40 फीसदी आबादी गरीब अर्जेंटीना की सरकार ने अपनी करेंसी पीसो की कीमत डॉलर के बराबर रखने के लिए सख्त नीतियां बनाई। पिछले दो दशक से भी अधिक समय से देश में वामपंथी सरकारें रही जिन्होंने देश की आर्थिक समस्याओं को सुलझाने के बजाय लोकलुभावन नीतियों को आगे बढ़ाया और सरकारी खर्च पर लगाम लगाने में नाकाम रहीं। छह महीने पहले जेवियर मिलेई बड़े-बड़े वादों के साथ सत्ता में आए लेकिन जनता की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। पीसो की कीमत सालभर में चार गुना से ज्यादा गिर चुकी है। जानकारों का कहना है कि अगर इसे सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए तो यह अब भी काफी नीचे जा सकती है। हालत यह है कि देश के अमीरों को भी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। देश के पास कैश रिजर्व नहीं है, सरकार पर भारी कर्ज है जबकि 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रह रही है।

प्रदेश में 2025-26 में 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी, फैकल्टी की भर्ती शुरू

भोपाल प्रदेश में अगले वर्ष (2025-26) में 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रारंभ कर दी है। इनमें शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र बुधनी, राजगढ़, श्योपुर, सिंगरौली और मंडला का मेडिकल कालेज शामिल है। सभी जगह 150-150 सीटें होंगी। बुधनी में नर्सिंग कॉलेज भी शुरू किया जाएगा। मापदंड पूरा करने में कोई कमी नहीं रह जाए, इसलिए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने लगभग एक वर्ष पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। श्योपुर और सिंगरौली में फैकल्टी की पदस्थापना भी शुरू हो गई है, क्योंकि मान्यता मिलने में सबसे बड़ी अड़चन फैकल्टी को लेकर ही आती है। कॉलेज भवन का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। 60 फीसदी राशि केंद्र से मिली बता दें कि बुधनी छोड़ बाकी 4 कालेज केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे हैं। 60 प्रतिशत राशि केंद्र से मिली है, 40 प्रतशित राज्य सरकार लगा रही है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में घोषणा की थी कि प्रदेश के सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में अगले पांच वर्ष के भीतर सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। सरकार बनने के अब इस संकल्प को पूरा करने में सबसे अधिक जोर है। इसी कड़ी में अगले वर्ष 5 कॉलेज शुरू होना लगभग तय माना जा रहा है। इनमें सबसे तेज काम बुधनी मेडिकल कॉलेज का चल रहा है। राजगढ़ कॉलेज भवन बनाने का काम पिछड़ा है। अब अपर मुख्य सचिव मो. सुलेमान ने निर्माणाधीन कालेजों की समीक्षा कर कहा है कि इस वर्ष अंत तक सभी कऑलेजों का भवन तैयार हो जाना चाहिए। बता दें कि इनमें सिंगरौली और श्योपुर का कॉलेज इसी वर्ष से शुरू करने की तैयारी पहले थी, पर भवन नहीं बन पाने के कारण अगले वर्ष से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस वर्ष यानी 2024-25 में सिवनी, नीमच और मंदसौर में सरकारी और एक निजी मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिल सकती है। इसके साथ प्रदेश में 17 सरकारी और 13 निजी मिलाकर कुल 30 मेडिकल कालेज हो जाएंगे।

मणिपुर एक साल से देख रहा शांति की राह, प्राथमिकता से हल करना होगा विवाद: मोहन भागवत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर की हिंसा और चुनाव को लेकर बड़ी बातें कही हैं। मणिपुर को लेकर भागवत ने कहा देश में शांति  चाहिए। जगह-जगह और समाज में कलह नहीं चलता। एक साल से मणिपुर शांति की राह देख रहा है। उससे पहले 10 साल शांत रहा। पुराना जन कल्चर समाप्त हो गया, ऐसा लगा। अचानक जो कलह वहां उपजी या उपजाई गई उसकी आग में अभी तक चल रहा है। त्राहि त्राहि कर रहा है। उसका ध्यान कौन देगा। प्राथमिकता देकर उसपर विचार करना कर्तव्य है। उन्होंने कहा, भले घर की महिला शराब पीकर कार चलाती है और लोगों को रौंद देती है। तो हमारी संस्कृति कहां है। संस्कृति के वाहक हम लोग उसकी परवार करेंगे तभी सामंजस्य बना रहेगा। इसलिए जो संस्कृति हमें सिखाती है उसे आगे की पीढ़ी तक पहुंचने का प्रश्न खड़ा हो गया है। जिन्होंने उसको त्याग दिया वे खुश नहीं हैं। चुनाव को लेकर क्या बोले भागवत मोहन भागवत ने चुनाव को लेकर कहा कि यह एक सहमित बनाने की प्रक्रिया है। संसद में किसी भी प्रश्न के दोनों पहलू सामने आए इसलिए ऐसी व्यवस्था की गई है। चुनाव प्रचार में जिस प्रकार एक दूसरे को लताड़ना, तकनीक का दुरुपयोग, असत्य का प्रसारित किया जाता है, वह ठीक नहीं है। विरोधी की जगह प्रतिपक्षा कहना उचित होगा। चुनाव के आवेश से मुक्त होकर देश के सामने उपस्थित समस्याओं पर विचार करना होगा। प्रचार में इस बात का भी ध्यान नहीं रखा गया कि ऐसा करने पर समाज में मनमुटाव बढ़ सकता है। संघ को भी उसमें घसीटा गया। तकनीक का भी दुरुपयोग किया गया। आधुनिक तकनीक का उपयोग असत्य परोसने के लिए किया गया। ऐसे देश कैसे चलेगा। आखिरकार सबको देश ही चलाना है। लोग विरोधी पक्ष कहते हैं, मैं प्रतिपक्ष कहता हूं। उसका भी विचार होना चाहिए। चुनाव लड़ने में मर्यादा होती है जिसका पालन नहीं हुआ। देश के सामने चुनौतियां समाप्त नहीं हुई। वही सरकार फिर से आई। पिछले 10 सालों में बहुत कुछ अच्छा हुआ। दुनिया जिस आधार पर आर्थिक स्थिति का मापन करती है. उसके हिसाब से आर्थिक स्थिति सुधरी है। दुनियाभर में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। कला और संस्कृति के क्षेत्र में हम आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम चुनौतियों से मुक्त हो गए हैं। अभी चुनाव के आवेश से मुक्त होकर आने वाली बातों का विचार करना है।

कूलर निर्माता कंपनी भुर्जी सुपरटेक इंडस्ट्रीज में लगी आग, मुश्किल में काम कर रहे लोगों और दमकल कर्मी

भिवाड़ी भिवाड़ी के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित भुर्जी सुपरटेक इंडस्ट्रीज में दिन में भयंकर गर्मी के बीच आग लग गई। यह कंपनी कूलर बनाने का काम करती है और आग की लपटों ने वहां काम कर रहे लोगों और दमकल कर्मियों को मुश्किल में डाल दिया है। कंपनी के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आग सबसे पहले जनरेटर में लगी, जो देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर गई। आग तेजी से कंपनी के अन्य हिस्सों में फैल गई और कंपनी के कर्मचारी तुरंत बाहर निकलने लगे। आग की भयंकरता को देखते हुए आसपास के क्षेत्रों से भी दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। आसपास के क्षेत्र और भिवाड़ी की तमाम दमकल गाड़ियाँ आग बुझाने में लगी हुई हैं। दमकल कर्मियों को आग बुझाने में काफी परेशानी हो रही है क्योंकि आग की लपटें बहुत तेज हैं और गर्मी की वजह से आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। दमकल कर्मी पूरी तत्परता से आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आग की विकरालता को देखते हुए यह कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस आगजनी की घटना से भुर्जी सुपरटेक इंडस्ट्रीज को भारी नुकसान होने की संभावना है। आग के कारण इंडस्ट्रियल एरिया में हड़कंप मच गया है और वहां काम कर रहे कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। इस आगजनी की घटना से उद्योग क्षेत्र में सुरक्षा के प्रबंधों पर सवाल उठने लगे हैं।

सीएम विष्णुदेव साय ने मुख्य सचिव और डीजीपी को तलब कर घटना की प्रारंभिक जानकारी ली

रायपुर बलौदाबाजार जिले में उत्पन्न हुई अप्रिय स्थिति पर सीएम विष्णुदेव साय ने सीएम हाउस में आपात बैठक की. उन्होंने मुख्य सचिव और डीजीपी को तलब कर घटना की प्रारंभिक जानकारी ली एवं घटना की रिपोर्ट भी मंगाई है. सीएम ने आईजी और कमिश्नर को तत्काल घटना स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं. सीएम साय ने कहा, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने सभी से शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील की है. बलौदा बाजार जिले में उत्पन्न हुई अप्रिय स्थिति पर आईजी व कमिश्नर को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव और डीजीपी को तलब कर घटना की प्रारंभिक जानकारी ली एवं घटना की रिपोर्ट भी मंगाई है। कलेक्टर-एसपी दफ्तर को लगाई आग, 200 से अधिक दोपहिया, 50 चारपहिया छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में उग्र प्रदर्शनकारियों ने सोमवार शाम को कलेक्टर और एसपी दफ्तर में आग लगा दी। भीड़ ने पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़ की। साथ ही 200 दोपहिया, 50 चारपहिया वाहनों को भी जला दिया। भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज भी किया गया। रायपुर आइजी अमरेश मिश्रा, बिलासपुर आइजी संजीव शुक्ला समेत अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया है। खबर लिखे जाने तक एक पुलिसकर्मी के घायल होने की सूचना है।

जम्मू में आतंकी हमला है इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य : राजस्थान-अजमेर दरगाह प्रमुख

अजमेर. अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख हजरत दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने जम्मू में रियासी जिले के शिवखोड़ी से दर्शन करके लौट रहे यात्रियों की बस पर घात लगाकर हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों मे निंदा करते हुए कहा कि यह घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। हादसे का शिकार हुए लोगों में औरतें, बच्चे और बुजुर्ग भी थे, जिनका कोई कसूर नहीं था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति पिछले 10 सालो में मोदी सरकार की नीति ही बहुत कारगर रही है, इसलिये प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में कश्मीर से आतंकवादियों को जड़ से खत्म कर कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त करवाएं। अजमेर दरगाह प्रमुख ने कहा कि भारत के हर नागरिक को प्रधानमंत्री से बहुत अपेक्षाएं हैं और देश के हर नागरिक को पूरा विश्वास है कि मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ-साथ देश को दस दशक पुराने आतंकवाद और अतिवाद से भी मुक्त करवाएंगे।

Modi 3.0: मोदी सरकार 3.0 का गठन हो चुका, कुछ हारे हुए नेताओं को भी दिया गया मंत्री पद

नई दिल्ली नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बन गए हैं। रविवार को उन्होंने राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मोदी के साथ ही 71 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें 30 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री हैं। ज्यादातर पुराने चेहरों को ही नई सरकार में जगह मिली। लेकिन मोदी सरकार 3.0 में एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिला है। वहीं नए मंत्रिमंडल में लगभग हर राज्य का प्रतिनिधित्व है। केरल से दो मंत्रियों को बनाया गया है, पंजाब से भी मंत्री बनाए गए हैं। ये बताता है कि सरकार का केरल और पंजाब पर फोकस है, और हो भी क्यों न पहली बार केरल में कमल खिला है। वहीं पंजाब में बीजेपी का वोट शेयर 9 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया। सबका साथ: मोदी मंत्रिमंडल में सामाजिक समीकरणों का पूरा ख्याल मोदी सरकार 3.0 में सामाजिक समीकरणों का पूरा ख्याल रखा गया। प्रधानमंत्री के बाद सबसे पहले राजनाथ सिंह ने फिर अमित शाह, फिर नितिन गडकरी और फिर जेपी नड्डा ने शपथ ली। नड्डा के बाद शिवराज सिंह चौहान, फिर निर्मला सीतारमण, फिर एस जयशंकर और उनके बाद मनोहर लाल खट्टर ने शपथ ली। सहयोगी दलों में से सबसे पहले जेडीएस के एचडी कुमार स्वामी ने शपथ ली। एनडीए सरकार में जिन 71 मंत्रियों ने शपथ ली उनमें 27 ओबीसी, 10 एससी, 5 एसटी और 5 माइनॉरिटी से हैं। हालांकि कोई भी मुस्लिम मंत्री नहीं बना है। मोदी सरकार 3.0 में महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहेगा। कैबिनेट मंत्री के तौर पर 2 महिलाओं को शामिल किया गया है। इसमें झारखंड से सांसद अन्नपूर्णा देवी और राज्यसभा सांसद निर्मला सीतारण शामिल हैं। वहीं राज्य मंत्री में 4 महिलाएं हैं। इसमें अपना दल की अनुप्रिया पटेल, बीजेपी की शोभा करंदलाजे, रक्षा खडसे और सावित्री ठाकुर, नीमूबेन बंभानिया शामिल हैं। गठबंधन के बोझ तले नहीं है मोदी 3.0 मोदी सरकार 3.0 के मंत्रिमंडल ने ये संदेश दिया है कि सरकार पर गठबंधन की कोई राजनीतिक मजबूरी नहीं है। मोदी के 71 मंत्रियों में से 60 से ज्यादा बीजेपी के ही हैं। इसके अलावा सरकार के टॉप-4 मंत्रिमंडल भी बीजेपी को ही मिलने के आसार हैं। एनसीपी को सरकार की ओर से एक मंत्री पद की पेशकश की गई, लेकिन एनसीपी के भीतर भी खींचतान के चलते इसका फैसला नहीं हो पाया। बीजेपी ने भी इस पर बहुत फोकस नहीं किया। यही हाल जेडीयू और टीडीपी का दिखा। भले ही खबरों में आया कि गठबंधन को बड़े मंत्री पद देने होंगे, लेकिन ऐसा नहीं दिखा।   इधर कांग्रेस ने भी तंज कसते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट शेयर करते हुए कहा था कि ‘अबकी बार बैसाखी सरकार’। लेकिन मोदी 3.0 ने साफ कर दिया कि नई सरकार में उनका पुराना अंदाज कायम रहेगा।   तीसरे टर्म में आजमाए नामों पर भरोसा मोदी सरकार 3.0 में कई आजमाए नामों पर ही भरोसा रखा गया है। पहले ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि अपने तीसरे टर्म में नरेंद्र मोदी पूरी तरह नई टीम बना सकते हैं। सरकार के स्तर पर नई टीम दे सकते हैं। मगर, 71 मंत्रियों के शपथ में राजनीतिक मजबूरी दिखी। 10 वर्षों के शासन में मात्र 14 ऐसे मंत्री रहे जो पीएम मोदी के तीनों कार्यकाल में मंत्री बने रहे। जो नाम तीनों टर्म में कॉमन रहे वे हैं- राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, जितेंद्र सिंह, राव इंद्रजीत सिंह, मनसुख मांडविया, किरेन रिजिजू, सर्वानंद सोनेवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, अनुप्रिया पटेल, हरदीप पुरी और धर्मेंद्र प्रधान। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि BJP के अंदर क्या मंत्रियों को उनके पुराने मंत्रालय ही रिपीट होंगे।   चुनाव में हार के बाद भी बनाया मंत्री नई सरकार में पीएम मोदी ने कुछ ऐसे मंत्रियों को भी शामिल किया है, जो लोकसभा चुनाव हार गए थे। सबसे हैरतअंगेज रहे नामों में पंजाब के लुधियाना से ‌BJP उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू और तमिलनाडु के नीलगिरी के उम्मीदवार एल. मुरुगन माने जा रहे हैं। पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू ने चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थामा था। वहीं मोदी सरकार में राज्यमंत्री रहे एल. मुरुगन DMK के ए. राजा से हारे थे। मोदी ने इन दोनों को मंत्रिमंडल में जगह देकर पंजाब और साउथ के राज्यों को संदेश दिया है। माना जा रहा है कि BJP ने भावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए हारने के बावजूद पंजाब में एक जट सिख चेहरे पर दांव लगाया है, ये कदम बीजेपी को पंजाब में फायदा दिला सकता है।   कौन-कौन ड्रॉप हुए? अब तक केंद्रीय मंत्री रहे अनुराग ठाकुर, स्मृति इरानी, अर्जुन मुंडा, महेंद्र नाथ पांडे, नारायण राणे, पुरुषोत्तम रूपाला, आरके सिंह को इस बार जगह नहीं मिला। अनुराग ठाकुर हिमाचल से, नारायण राणे महाराष्ट्र से और पुरुषोत्तम रूपाला गुजरात से चुनाव जीते हैं। चुनाव के दौरान रुपाला के एक बयान को लेकर खासा विवाद हुआ था और राजपूत संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। स्मृति इरानी ने जहां 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को अमेठी से हराया था, वहीं इस बार वह अमेठी से चुनाव हार गई हैं। अर्जुन मुंडा, महेंद्र नाथ पांडे और आरके सिंह भी चुनाव नहीं जीत पाए। पिछली सरकार में राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भी सरकार में जगह नहीं मिली। उन्होंने केरल से कांग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन करीबी मुकाबले में हार गए। मंत्रिमंडल की औसत उम्र 59 साल मोदी सरकार 3.0 की औसत उम्र 59 साल है। पिछली बार यह औसत उम्र 61 साल थी, हालांकि 2021 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में यह घटकर 58 साल रह गई थी। इस बार सबसे उम्रदराज मंत्रियों में 79 साल के जीतनराम मांझी हैं तो वहीं सबसे कमउम्र के टीडीपी के 36 वर्षीय के राममोहन नायडू और बीजेपी की 37 वर्षीया रक्षा खड़से हैं। पीएम नरेंद्र मोदी को मिलाकर उनकी सरकार में लगभग एक दर्जन चेहरे 70 साल या उससे ज्यादा के हैं। सरकार में महिला और युवा चेहरे मोदी सरकार में इस बार युवा और महिलाओं का एक संतुलन दिखा। हालांकि महिलाओं को … Read more

कर्नाटक, महाराष्ट्र, अरुणाचल, असम और मेघालय में मॉनसून की एंट्री कई स्थानों पर अति भारी बारिश का अलर्ट जारी

नई दिल्ली देश के उत्तरी राज्यों में प्रचंड गर्मी का कहर जारी है. मौसम विभाग की मानें तो आज यानी 10 जून से 13 जून तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, बिहार और झारखंड के अलग-अलग स्थानों पर लू का दौर जारी रहने की आशंका है. वहीं कर्नाटक, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मॉनसून की एंट्री हो चुकी है और इन स्थानों पर अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. दिल्ली का मौसम दिल्ली में मौसम विभाग ने 10 से 13 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है. इस दौरान तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा. इस हफ्ते दिल्लीवासियों को चिलचिलाती गर्मी और लू का सामना करना पड़ सकता है. IMD के मुताबिक, इस पूरे हफ्ते दिल्ली का अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है और न्यूनतम तापमान 28 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. IMD का अनुमान देश के मौसम का हाल मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान, दक्षिण कोंकण गोवा, दक्षिण मध्य महाराष्ट्र और तटीय कर्नाटक में मध्यम से भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं तेलंगाना, मराठवाड़ा, उत्तरी कोंकण और गोवा, उत्तरी मध्य महाराष्ट्र, केरल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत, लक्षद्वीप, दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश संभव है. ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, दक्षिण गुजरात, मध्य प्रदेश और पश्चिमी हिमालय में हल्की बारिश हो सकती है. वहीं मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में लू की स्थिति संभव है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति संभव है. देश की मौसमी गतिविधियां मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, मध्य क्षोभमंडलीय पश्चिमी हवाओं में एक गर्त के रूप में पश्चिमी विक्षोभ, जिसकी पहुँच औसत समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर ऊपर है, अब लगभग 70 डिग्री पूर्व देशांतर के साथ अक्षांश 28 डिग्री उत्तर के उत्तर में चल रहा है. वहीं उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औसत समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. इसके अलावा उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश में एक और चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. असम के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. पूर्वी बिहार के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. सौराष्ट्र और उससे जुड़े क्षेत्रों पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. महाराष्ट्र से उत्तरी केरल तक एक अपतटीय गर्त बना हुआ है. कतरनी क्षेत्र औसत समुद्र तल से 3.1 और 7.6 किलोमीटर ऊपर लगभग 16 डिग्री उत्तर अक्षांश के साथ चल रहा है.  

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