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जो प्रवासी भारत के विकास के लिए आ रहे हैं, हम उनका स्वागत करते हैं: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। इसी बीच आज  लोकसभा में इमीग्रेशन बिल को लेकर चल रही चर्चा में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हिस्सा लिया।  घुसपैठ और अवैध अप्रवास रोकने के मकसद से लाए गए इस बिल का नाम इमिग्रेशन एंड फॉरेन बिल 2025 (अप्रवासन और विदेशी विधेयक) है।   देश के विकास करने वालों का भारत में स्वागत: अमित शाह इस विधेयक के महत्व का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जो प्रवासी भारत के विकास के लिए आ रहे हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। जो लोग देश में शिक्षा के लिए, व्यापार के लिए, रिसर्च के लिए आते हैं हम उनका स्वागत करते हैं। पीएम मोदी का लक्ष्य है कि साल 2047 तक हमारा देश एक विकसित राष्ट्र बने। इसी वजह से हम कई पुराने कानूनों को खत्म किया। सीमा में कौन दाखिल हो रहा, जानना जरूरी: अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है। देश के कई मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बहुत जरूरी है कि देश की सीमा में कौन घुसता है। हम उन लोगों पर भी कड़ी नजर रखेंगे जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालेंगे।” अमित शाह ने आगे कहा,”10 साल में हमारा अर्थतंत्र 11वें नंबर से 5वें नंबर पर पहुंच गया है। पूरी दुनिया के अर्थतंत्र की सूची में भारत एक चमकदार जगह बनकर उभरा है। भारत मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने जा रहा है। ऐसे में हमारे यहां विश्वभर से लोगों का आना बड़ा स्वभाव है।” हमारा इमीग्रेशन का स्कैन और साइज दोनों बहुत बड़ा है। इसके साथ-साथ शरण लेने की जगह पर उनके निहित निवास और देश को असुरक्षित करने वालों की संख्या भी बढ़ती है। ऐसे में जो लोग भारत की व्यवस्था में योगदान देने के लिए आते हैं, व्यापार और शिक्षा के लिए आते हैं, ऐसे सभी लोगों का स्वागत है, लेकिन लकड़ी रोहिंग्या हो या बांग्लादेशी हो। अगर यहां गंदगी फैलाने के लिए आते हैं तो इन लोगों के साथ बड़ी दोस्ती के साथ उनका व्यवहार होगा।

झाबुआ में एक साथ लगभग दो हजार जोड़ों के सामूहिक विवाह में शामिल होने का आनंद अदभुत और अविस्मरणीय: मुख्यमंत्री

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि झाबुआ में एक साथ लगभग दो हजार जोड़ों के सामूहिक विवाह में शामिल होने का आनंद अदभुत और अविस्मरणीय है। उन्होंने नव-विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए सभी के मंगलमय और सुखद दांपत्य जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य जीवन के 16 संस्कारों में से पाणिग्रहण संस्कार गृहस्थ जीवन में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें 7 फेरों से 7 वचनों को पूरा कर सात जन्मों तक बंधन में बंधते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलन में शामिल जोड़ों को विवाह और निकाह की बधाई देते हुए सभी के जीवन में खुशियों की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव झाबुआ में सामुहिक विवाह समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में 11 जोड़ों को प्रतीकात्मक रूप से 49-49 हजार की राशि के चेक भी प्रदान किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ जिले के निवासियों को सौगात देते हुए कहा कि राणापुर क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या के निराकरण के लिए भांडाखेड़ा बैराज, नागन खेड़ी, गलती, छायण, झालरवा, बुदाशाला और कल्लीपुरा में बैराज बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से संबद्ध झाबुआ में मेडिकल कॉलेज भी बनाया जायेगा। झाबुआ के विकास के लिये सभी कार्य किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में सभी वर्गों का विकास समाहित है। किसी भी वर्ग को विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहने दिया जायेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप सबका साथ लेकर सबका विकास किया जायेगा, जिसमें सबके प्रयास और सबका विश्वास शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के सशक्तिकरण के लिये राशि प्रदान की जा रही है। किसानों का गेहूँ 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से उपार्जित किया जा रहा है। धान उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिये जा रहे हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्कूटी और लेपटॉप प्रदाय किये जा रहे हैं। लाड़ली बहनों को प्रतिमाह मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की राशि प्रदान की जा रही है। प्रदेश में बेटियों को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। प्रभारी मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग डॉ. कुँवर विजय शाह ने कहा कि झाबुआ में आयोजित लगभग 2000 जोड़ों के सामूहिक विवाह में सम्मिलित होकर मन आनंदित हो गया हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि जिले के लिए सौभाग्य है कि इतना विशाल विवाह समारोह आयोजित हुआ और जिसमें स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकर बहनों को आशीर्वाद प्रदान किया। पारंपरिक रूप से स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्री सुश्री भूरिया ने जनजातीय परम्परा के अनुरूप जनजातीय जैकेट “झूलड़ी” पहनाकर, साफा बांधकर एवं तीर कमान भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन किया। प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग कुपोषण मुक्त झाबुआ के तहत मोटी आई कैम्पैन, मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन गलसन माला, गुड्डा गुड्डी, तीर कमान, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग के अंतर्गत जिले में उत्पादित टमाटर एवं टमाटर से बने उत्पाद जैसे टमाटर पाउडर, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग श्री अन्न फसल एवं जैविक उत्पाद, नगर पालिका परिषद झाबुआ द्वारा वेस्ट टु वेल्थ प्रोजेक्ट अंतर्गत तैयार किये गये डस्टबिन एवं गमले प्रदर्शित किये गये। सम्मेलन में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, सांसद श्रीमती अनिता चौहान, संभागायुक्त इंदौर श्री दीपक सिंह, आईजी श्री अनुराग, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, पुलिस अधीक्षक श्री पद्म विलोचन शुक्ल एवं अन्य जनप्रतिनिधियों उपस्थित रहे।

70 साल पुराना सपना साकार, जम्मू-कश्मीर की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द दौड़ेगी पटरी पर

 जम्मू  70 साल पुराना सपना साकार होने जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी  19 अप्रैल को कटरा से घाटी तक चलने वाली पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी कटरा से कश्मीर तक चलने वाली जम्मू-कश्मीर की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। ये ट्रेन रियासी जिले के कटरा कस्बे से शुरू होकर पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला को पार करते हुए श्रीनगर पहुंचेगी और फिर उत्तरी कश्मीर के बारामूला तक जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी 19 अप्रैल की सुबह नई दिल्ली से उधमपुर आर्मी एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे चेनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का दौरा करेंगे। इस दौरान उन्हें पुल के निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद पीएम मोदी कटरा स्थित माता वैष्णो देवी आधार शिविर से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल ये ट्रेन संगलदान से बारामूला तक चल रही है। इस इतिहास बनाने वाले कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल होंगे। दिल्ली लौटने से पहले प्रधानमंत्री मोदी कटरा में एक सार्वजनिक रैली को भी संबोधित करेंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार जम्मू रेलवे स्टेशन पर विस्तार कार्य पूरा होने के बाद इस वर्ष जुलाई-अगस्त तक जम्मू से घाटी के लिए ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। हालांकि फिलहाल दिल्ली या अन्य हिस्सों से कश्मीर के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं होगी। यात्रियों को कटरा में उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़नी होगी जिसे बाद में जम्मू में भी लागू किया जाएगा। बता दें कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के तहत कुल 272 किलोमीटर में से 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-बारामूला खंड को अक्टूबर 2009 में शुरू किया गया था। इसके बाद जून 2013 में 18 किलोमीटर लंबे बनिहाल-काजीगुंड लिंक और जुलाई 2014 में 25 किलोमीटर लंबे उधमपुर-कटरा खंड का कार्य पूरा किया गया है। पिछले साल फरवरी में 48.1 किमी बनिहाल-संगलदान खंड को भी जोड़ा गया था। 46 किलोमीटर लंबे संगलदान-रियासी खंड का काम भी पिछले साल जून में पूरा हुआ जबकि रियासी और कटरा के बीच 17 किलोमीटर का निर्माण हाल ही में पूरा किया गया है।

संबल योजना: 28 मार्च को सीएम मोहन यादव जारी करेंगे श्रमिक परिवारों के खातों में 505 करोड़ रूपये, मिलेगा लाभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 28 मार्च को मंत्रालय में संबल योजना में अनुग्रह सहायता के 23 हजार 162 प्रकरणों में 505 करोड़ रुपये सिंगल क्लिक से हितग्राहियों के खातों में अंतरित करेंगे। कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मंत्री एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। योजना में अनुग्रह सहायता योजना अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। संबल योजना में महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रुपये दिए जाते हैं, साथ ही श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालयीन शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिए संपूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। गिग वर्कर्स भी योजना में शामिल नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारंभ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है। इससे वे केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। जन्म से मृत्यु तक आर्थिक सहायता संबल योजना में श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है। प्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, अब उन्हें भी 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार ने योजना प्रारंभ होने के बाद 1 अप्रैल 2018 से अब तक 1 करोड़ 74 लाख श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया है। श्रमिकों के पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। श्रम विभाग योजनांतर्गत वर्तमान तक 06 लाख 58 हजार से अधिक प्रकरणों में 5 हजार 927 करोड़ रुपये से अधिक के हितलाभ दिए जा चुके हैं। जानिए क्या है संबल योजना     मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। योजना में अनुग्रह सहायता योजना अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं।     स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं।     संबल योजना में महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं, साथ ही श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।     नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं।     संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है। इससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं।संबल योजना में श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है।     प्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, अब उन्हें भी 5 लाख रूपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण स्कीम अंतर्गत 2.16 करोड़ अंतरित सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण स्कीम के तहत राज्य अधिवक्ता परिषद् जबलपुर के बैंक खाते में 2 करोड़ 16 लाख रूपये अंतरित कर दिये गये है। राशि वित्त वर्ष 2024-25 के लिये अंतरित की गई है। इस स्कीम के तहत 12 हजार रूपये के मान से प्रत्येक नवीन अधिवक्ता को सहायता राशि प्रदान की जाती है।  

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री साय ने 780 बुजुर्ग श्रद्धालुओं से भरे ट्रैन को दिखाई हरी झंडी

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने तीर्थ दर्शन योजना को फिर शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में तीर्थयात्रा ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। इस योजना के तहत राज्य के वरिष्ठ नागरिकों और कम आय वाले परिवारों को प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा करने का अवसर मिलेगा। इस दौरान सीएम साय ने कहा कि, बुजुर्ग श्रद्धालुओं को तीर्थ करने का फल मिल सके इसलिए संवेदनशील सरकार ने यह पहल की है। मोदी की गारंटी को पूरा कर रही छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, यह योजना हमारी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का हिस्सा है। हम चाहते हैं कि राज्य के हर नागरिक को देश के पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन का मौका मिले, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। हम एक और मोदी की गारंटी पूरी कर रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के वक्‍त जनता से वादा किया था, उस दौरान मोदी की गारंटी में इसे भी शामिल किया गया था, जिसे छत्‍तीसगढ़ सरकार पूरा कर रही है। इस दौरान सीएम साय ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में यात्रियों से बातचीत की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। तीर्थ दर्शन योजना का उद्देश्य मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उद्देश्य गरीब और वरिष्ठ नागरिकों को देश के प्रमुख और प्रसिद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा कराना है। सभी वर्गों के लोगों को धार्मिक यात्राओं का लाभ मिल सके, इसके लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। छत्तीसगढ़ से बाहर के तीर्थ स्थलों पर जाने से राज्य के लोगों को नए स्थानों के दर्शन का अवसर मिलेगा। बता दें कि, ट्रेन में यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को खाने-पीने की व्यवस्था, यात्रा बीमा और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएगी। योजना के तहत यात्रा का अधिकांश खर्च सरकार वहन करेगी, जिससे गरीब परिवारों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। कैसे मिलेगा योजना का लाभ? इच्छुक लाभार्थियों को ऑनलाइन या जिला प्रशासन के माध्यम से आवेदन करना होगा। आयु सीमा वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) को प्राथमिकता। आर्थिक पृष्ठभूमि में कम आय वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया में लाभार्थियों का चयन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। गौरतलब है कि, यह योजना पहले भाजपा सरकार के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसे बंद कर दिया गया था। अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दी जानकारी, भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन, स्वीकार किया निमंत्रण

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत दौरे के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार यह जानकारी दी और कहा कि इस दौरे के लिए तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि अब हमारी बारी है। रूसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी) द्वारा आयोजित “रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर” शीर्षक वाले सम्मेलन को संबोधित करते हुए लावरोव ने कहा, “पुतिन के भारत दौरे के लिए वर्तमान में व्यवस्था की जा रही है।” रूसी विदेश मंत्री के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने कहा, “राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार के प्रमुख के भारत दौरे के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। रूसी राष्ट्र प्रमुख की भारत गणराज्य की यात्रा की वर्तमान में तैयारी की जा रही है।” लावरोव ने कहा कि पिछले साल फिर से चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहली विदेश यात्रा रूस की थी। उन्होंने कहा, “अब हमारी बारी है।” हालांकि, यात्रा की तारीखों का अभी खुलासा नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2024 में रूस का दौरा किया था, जो लगभग पांच वर्षों में देश की उनकी पहली यात्रा थी। इससे पहले, उन्होंने 2019 में एक आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक का दौरा किया था। पिछली यात्रा के दौरान, मोदी ने पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया था। 24 मार्च को, लावरोव ने कहा कि रूस भारत के साथ विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहा है। लावरोव ने एक कार्यक्रम में कहा कि रूस चीन, भारत, ईरान, उत्तर कोरिया और स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) देशों जैसे देशों के साथ सक्रिय रूप से संबंधों का विस्तार कर रहा है। शीर्ष रूसी राजनयिक ने कहा, “पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग के संबंध अभूतपूर्व स्तर के आपसी विश्वास का दावा करते हैं। भारत के साथ विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित हो रही है।”

ग्वालियर मेले में किताबें उपलब्ध न कराने पर 8 स्कूल व 6 वेंडर्स को नोटिस, दो स्कूलों के प्रिंसिपलों पर एफआईआर दर्ज

ग्वालियर  ग्वालियर जिला प्रशासन की ओर से आयोजित किए गए पुस्तक मेला में दो स्कूल प्रबंधनों को मनमानी भारी पड़ी है। निजी प्रकाशकों की किताबें जानबूझकर उपलब्ध न कराकर मनमानी करने के मामले में एमिटी इंटरनेशनल स्कूल महाराजपुरा (महाराजपुरा थाना) और अमर पब्लिक स्कूल थाटीपुर (थाटीपुर थाना) के प्राचार्यों पर एफआईआर दर्ज की गई है। शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिसमें बताया कि स्कूलों द्वारा उनके यहां चलने वाली निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। न ही पुस्तकें उपलब्ध कराई गई। इस पर जब नोटिस जारी किया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। जबलपुर की तर्ज पर लगाया गया पुस्तक मेला दो दिन पहले ही कलेक्टर ने स्कूल संचालकों को फटकार लगाई थी व स्कूलों को नोटिस भी जारी किए गए। ग्वालियर में पुस्तक मेला जबलपुर की तर्ज पर लगाया गया है। जबलपुर में पिछले साल से पुस्तक मेले का आयोजन हो रहा है, इस बार यह 25 मार्च से लगाया गया है। इस बार जबलपुर पुस्तक मेले में अभिभावकों को किताबें व स्टेशनरी आदि पिछले साल की तुलना में आधे में मिल रही हैं। यदि जबलपुर के पैटर्न को ग्वालियर में भी अपनाया जाए तो अगले साल के पुस्तक मेले में अभिभावकों को जबलपुर की तरह ही लाभ मिल सकता है। वहीं बुधवार को कलेक्टर रुचिका चौहान ने पुस्तक मेले का निरीक्षण किया और वेंडरों से कहा कि वे समय पर दुकान खोलें, यदि वे समय पर दुकानें नहीं खोलते हैं तो माना जाएगा कि वे अधिक कीमत में देना चाहते हैं। ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई होगी। क्या है जबलपुर का पैटर्न जबलपुर के शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने नईदुनिया को बताया कि पिछले साल पुस्तक मेला लगाया था, तब अभिभावकों को लाभ मिला था। मेले के दौरान समझ में आया था कि स्कूल संचालक निजी पब्लिशर की किताबें चलाते थे जो महंगी पड़ती थीं। मेले के बाद ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके बाद सभी स्कूलों ने कक्षा एक से 12वीं तक एनसीईआरटी की किताबें ही चलाते हैं। चूंकि एनसीईआरटी की किताबें पहले से ही सस्ती होती हैं। इनके साथ एक दो किताबें ही निजी पब्लिशर की चलाते हैं। इसलिए किताबों का बजट कम हो गया। ग्वालियर में भी अगले मेले से मिल सकती है राहत जिला प्रशासन ने जिस तरह से आठ बड़े स्कूलों को नोटिस दिए हैं और जवाब मंगाए हैं। उन जवाबों में स्कूल संचालकों ने कहा कि वे कक्षा एक से 12वीं तक एनसीआरटीई की किताबें ही चलाते हैं और आगे से यही किताबें चलाएंगे। हालांकि स्कूल संचालकों के जवाब का शिक्षा विभाग अभी परीक्षण कर रहा है। शिक्षा अधिकारी के मुताबिक परीक्षण के बाद जिनके जवाब संतोषजनक नहीं होंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। एक बार कार्रवाई होगी तो आगे से सभी स्कूल नियमों का पालन करेंगे। कलेक्टर रुचिका चौहान ने किया निरीक्षण, दी चेतावनी कलेक्टर ने कुछ दुकानदारों द्वारा देरी से दुकानें खोले जाने की शिकायत मिलने पर पुस्तक मेले का निरीक्षण किया। देरी से खुली दुकानों पर पहुंचकर दुकान संचालकों को चेतावनी दी कि आगे से ऐसी स्थिति न बने, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शहर में जहां पर भी दुकान संचालित हैं, वहां पर छापामार कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही दुकान पर डिस्काउंट की सूची लगाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा कलेक्टर ने बुक बैंक का भी निरीक्षण किया। किताबें उपलब्ध न कराने पर 8 स्कूल व 6 वेंडर्स को नोटिस जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए पुस्तक मेले में किताबें उपलब्ध न कराना स्कूलों को भारी पड़ सकता है। सोमवार को ऐसे 8 स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिन्होंने मेले में अब तक किताबें ही उपलब्ध नहीं कराईं। वहीं, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक कुमार ने सोमवार को पुस्तक मेले का निरीक्षण किया। उन्होंने कंट्रोल रूम, पूछताछ केंद्र, बुक बैंक, फीडबैक स्टॉल, बुक स्टॉल व फूड स्टॉल देखे एवं दुकानदारों से चर्चा की। तीसरे दिन भी पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के साथ पहुंचे। परीक्षण के बाद कार्रवाई होगी     जिन स्कूलों को किताबें उपलब्ध कराने पर नोटिस दिए थे उनके जवाब आ गए हैं। हालांकि सभी ने कक्षा एक से 12वीं तक एनसीईआरटी की किताबें चलाने की बात कही है। परीक्षण के बाद कार्रवाई होगी। उम्मीद है कि इस बार डिस्काउंट मिल रहा है, अगली बार अभिभावकों को अधिक फायदा होगा। – अजय कटियार, जिला शिक्षा अधिकारी, ग्वालियर  

जल गंगा संवर्धन अभियान :पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता

प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश में बनेगा जन आंदोलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च से होगा प्रारंभ होकर 30 जून तक चलेगा “जल गंगा संवर्धन अभियान” पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता पानीदार प्रदेश बनने की ओर बढ़ता देश का हृदय प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के क्षिप्रा तट से करेंगे प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत अभियान में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत मुख्यमंत्री हर दिन एक जल संरचना का लोकार्पण करेंगे तीन माह लगातार चलेगा अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का “जल गंगा संवर्धन” महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन 30 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित क्षिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ “जल गंगा संवर्धन अभियान” का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। उन्होंने कहा है कि जल संरक्षण के इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार आएगा। पानी की बूंद-बूंद बचाएं, तभी हमारी सांसें बचेंगी। मध्यप्रदेश सरकार जन, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बना है। राज्य सरकार भी ‘खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। पानी दे, गुरुबाणी दे। जल बिन सब सूना है। जो सबको जीवन दे, वो है जल। जल ही जीवन है। इससे हम आज सुरक्षित है, इसी से हमारा कल भी सुरक्षित है। जल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, समाज को भी आगे आना होगा। इसी मंशा से मध्यप्रदेश सरकार जल गंगा जल संवर्धन महा अभियान प्रारंभ करने जा रही है। हमारी धरा के कुल जल का केवल एक छोटा हिस्सा ही पीने योग्य स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है। पृथ्वी के कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत महासागरों में खारा जल है, जो पीने योग्य नहीं है। शेष 3 प्रतिशत मीठा जल है, लेकिन इसमें से भी अधिकांश हिमखंडों और बर्फ की चोटियों में जमा है। सिर्फ 0.5 प्रतिशत से भी कम पानी झीलों, नदियों और भूजल के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम उपयोग कर सकते हैं। पृथ्वी पर स्वच्छ और पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही सीमित है और इसे संरक्षित करना बेहद ज़रूरी है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने जल बचाने के लिए कदम बढ़ाये हैं। जल बचाने लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान”, प्रदेश में जल संकट को खत्म करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेशव्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के कार्य करेंगे। अभियान की थीम ‘जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण’ रखी गई है। नागरिकों के सहयोग से जल संरक्षण अभियान बनेगा जन-आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संचय की विभिन्न गतिविधियां संचालित करने जैसे – पौध-रोपण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम चलाने, स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने, ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनाएं। “जल गंगा संवर्धन अभियान” में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्य     पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किये जायेंगे।     अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।     नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।     लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।     ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।     प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।     नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।     नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।     ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।     प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।     सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।     नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।     नहरों को मार्क … Read more

सिंगरौली में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई

 सिंगरौली  मध्य प्रदेश में गुरुवार को सिंगरौली जिले में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। झटके इतने हल्के थे कि कई लोगों को यह महसूस नहीं हुए, हालांकि कुछ लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर था।हालांकि कई स्थानों पर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। सिंगरौली और आसपास के जिलों में काफी लोगों ने भूकंप के झटके को महसूस किया तो कुछ को धरती की कंपन का अहसास नहीं हुआ। जिन लोगों को भूकंप महसूस हुआ वे तुरंत घरों से बाहर निकल आए। लोग एक दूसरे से भूकंप की चर्चा करने लगे। प्रशासन को कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता वाले भूकंपों को हल्के दर्जे में गिना जाता है। इतनी तीव्रता के भूकंप में नुकसान की आशंका ना के बराबर होती है। हालांकि, हल्के से हल्का भूकंप भी लोगों को डरा जरूर देता है। क्यों आता है भूकंप? दरअसल, पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं, जिसे इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट कहते हैं। जानकारी के अनुसार, पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेट्स घूमती रहती हैं, जिसके आपस में टकराने पर पृथ्वी की सतह के नीचे कंपन शुरू होता है। जब ये प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती हैं तो भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। इस जगह पर सबसे ज्यादा भूकंप का असर रहता है। हालांकि, भूकंप की तीव्रता अगर ज्यादा होती है तो इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं। भूकंप के दौरान क्या करें?     भूकंप के दौरान जितना संभव हो उतना सुरक्षित रहें। इस बात को लेकर सावधान रहे कि भूकंप कितनी तीव्रता के साथ आ सकता है। इसकी पूर्व-चेतावनी देने वाले भूकंप के झटके होते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है।     धीरे-धीरे कुछ कदमों तक की हलचल करें, जिससे पास में किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें और भूकंप के झटकों के रुकने पर घर में तब तक रहें जब तक कि आपको यह सुनिश्चित हो जाएं कि बाहर निकलना सुरक्षित है।  

साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया

नई दिल्ली बीते कुछ साल में मकानों की कीमत (House Price) आसमान को छूने को बेताब है। इधर, जियो-पोलिटिकल टेंशन और शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया है। तभी तो इस साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया है। तभी तो इस दौरान मकानों की बिक्री में 28 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट से हुआ है खुलासा रियल एस्टेट कंसल्टेंट एनारॉक (Anarock) का कहना है कि आवासीय संपत्तियों की आसमान छूती कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण Q1, 2025 में भारतीय आवास बाजार की तेजी धीमी हो गई है। उसकी वजह से घरों की बिक्री में कमी आ रही है। इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से मार्च के दौरान करीब 93,280 यूनिट्स की बिक्री हुई है। पिछले साल इसी समय में 1,30,170 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस हिसाब से इस साल 28% की गिरावट दिख रही है। दिल्ली एनसीआर में बिक्री 20 फीसदी घटी दिल्ली-NCR में बिक्री 20% तक घटी है। यहां इस साल पहली तिमाही के दौरान करीब 12,520 यूनिट्स की बिक्री हुई है। जबकि पिछले साल इसी दौरान 15,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 26% तक गिरी है। वहां इस साल करीब 31,610 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जबकि पिछले साल 42,920 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मकानों (इकाइयों में) की बिक्री में साल-दर-साल % परिवर्तन   शहरों के नाम Q1-2025 Q1-2024 % परिवर्तन (Q1-2024 बनाम Q1-2025) एनसीआर 12,520 15,650 -20% एमएमआर 31,610 42,920 -26% बैंगलोर 15,000 17,790 -16% पुणे 16,100 22,990 -30% हैदराबाद 10,100 19,660 -49% चेन्नई 4,050 5,510 -26% कोलकाता 3,900 5,650 -31% कुल 93,280 1,30,170 -28% स्रोत: एनारॉक रिसर्च   बेंगलुरु-हैदराबाद में भी घटी बिक्री इस अविध के दौरान बेंगलुरु में मकानों की बिक्री 16% तक गिरी है। वहां इस साल की करीब 15,000 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 17,790 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। पुणे में बिक्री 30% तक गिर सकती है। यहां 16,100 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 22,990 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हैदराबाद में घरों की बिक्री 49% तक गिर सकती है। यहां 10,100 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 19,660 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। चेन्नई में बिक्री 26% तक गिर सकती है। यहां 4,050 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 5,510 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। कोलकाता में आवासीय संपत्तियों की बिक्री इस साल जनवरी-मार्च में 31% तक कम हो सकती है। यहां 3,900 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी समय में 5,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। अर्थव्यवस्था ठीक तब भी गिरावट एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि भारत का समग्र आर्थिक परिदृश्य इस समय सकारात्मक बना हुआ है। GDP विकास दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहने और मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में रहने का अनुमान है। लेकिन, तब भी मकानों की बिक्री में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा “हालांकि, मकानों की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनावों जैसे चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और एक कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था ने भारत के आवासीय बाजार की गतिविधि पर असर डाला है। इन कारकों का असर Q1 2025 में आवास बाजार पर पड़ा है।”

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा फिर हुई शुरू रामेश्वरम रवाना हुए 800 यात्री, सीएम ने दिखाई हरी झंडी

रायपुर छत्तीसगढ़ में छह साल बाद आज फिर से मुख्यमंत्री तीर्थ योजना की शुरुआत हुई. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत गौरव ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रायपुर रेलवे स्टेशन से रवाना किया. इस ट्रेन में छत्तीसगढ़ से 800 यात्री तीर्थ यात्रा के लिए रवाना रवाना हुए हैं. इस योजना के तहत दर्शनार्थियों को मदुरई, तिरुपति और रामेश्वरम के दर्शन कराए जाएंगे. ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों के लिए खाने-पीने के साथ ही चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध है. इस दौरान सीएम साय ने कार्यक्रम को संबोधितक करते हुए उनके सुखद याात्रा की कामना की है. सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए आज बड़ा ही ऐतिहासिक और गौरव का दिन है. मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा का आज पुनः शुभारंभ कर रहे हैं. आज हम लोग फिर से मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की शुरुआत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार में इस योजना की शुरुआत डॉ. रमन सिंह ने की थी. बीच में यह योजना बंद हो गई थी, लेकिन इसे फिर शुरुकर दिया है. उन्होंने कहा कि हमारा जो वादा था, उसे पूरा करने का काम कर रहे हैं. इनकी यात्रा सुखमय हो. हम एक और मोदी की गारंटी का काम पूरा कर रहे हैं. सर्वसुविधा युक्त ट्रेन में यात्रियों के साथ 20 अधिकारी भी मौजूद सीएम साय ने आगे कहा कि रामलला दर्शन योजना की भी हमने शुरुआत की है. इसमें 22 हजार से ज्यादा लोग दर्शन कर आ चुके हैं. बुजुर्गों को तीर्थयात्रा की इच्छा होती है, लेकिन वे आर्थिक समस्या की वजह से जा नहीं पाते. सरकार ऐसे लोगों का पूरा ध्यान रख रही है. तीर्थयात्रियों को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी. तीर्थयात्रियों की देख रेख के लिए 20 अधिकारी भी साथ जा रहे हैं. वहीं तीर्थ यात्रा के लिए रवाना हुए यात्रियों में भारी उत्साह भी देखने को मिला. यात्रियों ने इस योजना को फिर से शुरू करने के लिए साय सरकार का धन्यवाद भी किया है.

मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी

स्पेस पॉलिसी के निर्माण और प्रदेश में इसरो के केंद्र के लिए होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कर रहा नेतृत्व मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के अनेक रहस्य सुलझाने की क्षमता विज्ञान में हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से अनेक क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक और एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक प्रत्येक क्षेत्र का स्वरूप परिवर्तित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत एक दशक में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र प्रगति की है। राष्ट्र में एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार हुआ है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की विजनरी नीति का ही परिणाम है कि भारत डिफेंस और अन्तरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत इस क्षेत्र में गलोबल लीडर बन रहा है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही स्पेस पॉलिसी बनाई जाएगी। प्रदेश में इसरो के केंद्र की शुरूआत के लिए भी मंथन प्रारंभ किया गया है। हाल ही में जीआईएस के दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित 4 नीतियों को लागू करने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को उज्जैन में हो रहे राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन/ विज्ञान उत्सव और चालीसवें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअल रूप से शुभारंभ करते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन कालिदास अकादमी परिसर उज्जैन में हो रहा है। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम टेटवाल भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मध्यप्रदेश को बनाएंगे टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग बढ़ाया जाएगा। प्रदेश को टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब बनाया जाएगा। हाल ही में इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट अर्थात स्पैडेक्स सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग करते हुए इतिहास रच दिया है। इसके लिए इसरो की टीम बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैज्ञानिक समाज और विज्ञान प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों के सहयोग से मध्यप्रदेश में इसरो की तरह एक केंद्र के विकास पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में दक्षिण भारत ही ऐसी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उत्तर और मध्य भारत में इस तरह के केंद्र का अभाव है। प्रदेश में चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में भी विज्ञान का प्रयोग बढ़ रहा है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग हो रहा है। मध्यप्रदेश में ड्रोन के माध्यम से राजस्व के क्षेत्र में भी नक्शे बनाने की शुरूआत की गई है। रायसेन से राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बस्तियों के भूमि सर्वेक्षण का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। प्रदेश के अन्य शहरों में भी जमीन,भूखण्ड और बस्तियों का डिजिटल नक्शा बनाने की पहल हुई है। इससे संपत्ति के स्वामित्व के रिकार्ड्स रखना आसान होगा। अनेक क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग कार्यों को आसान बना रहा है। उज्जैन है काल गणना का केंद्र, चार नई नीतियों के माध्यम से विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति भी विज्ञान आधारित है। हम अनेक शुभ कार्य नवग्रह पूजन से प्रारंभ करते हैं। विक्रम संवत 2082 आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के काल से लेकर अब तक उज्जैन के इतिहास,कला, संस्कृति और अध्यात्म के साथ ही विज्ञान के केंद्र होने का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सभी उज्जैन को काल गणना के केंद्र के रूप में जानते हैं। इस संबंध में भी निरंतर अनुसंधान हो रहा है। हम नूतन का स्वागत करते हुए पुरातन परम्पराओं को भी साथ रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा वैज्ञानिक सम्मेलन और राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की थीम “विकास की बात विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार एक साथ”प्रासंगिक है। प्राचीन भारतीय विज्ञान परम्परा पर आधारित विभिन्न सत्रों का आयोजन सराहनीय है, जिसमें लगभग 300 शोधार्थी और युवा वैज्ञानिक 17 विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी और नवाचार आज की आवश्यकता है। हाल ही में सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आईटी विभाग के माध्यम से 4 महत्वपूर्ण नीतियां मध्यप्रदेश ड्रोन सवंर्धन और उद्योग नीति-2025, मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल एफैक्टस, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटी (एवीजीसी- एक्सआर) नीति-2025, मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर नीति-2025 और मध्यप्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी)नीति-2025 घोषित की गई हैं। वैज्ञानिक सम्मेलन में स्पेस पॉलिसी बनाने का सुझाव आया है। इस नाते मध्यप्रदेश की स्पेस पॉलिसी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के लिए बधाई दी। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिस तरह देश डिफेंस प्रोडक्शन, स्पेस और बॉयो टेक्नालॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, मध्यप्रदेश भी इन क्षेत्रों में प्रयासरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस पॉलिसी-2023 लाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऐसे चंद मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं जो इस क्षेत्र में नवाचार के लिए उत्साहित हैं। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए शीघ्र ही मेपकास्ट के सहयोग से अनुबंध किया जाएगा। कृषि बीमा योजना जैसे कार्य स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि प्रदेश में इस तरह के वैज्ञानिक सम्मेलन अन्य स्थानों पर भी किए जाएंगे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु राकेश सिंघई, विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक और मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पई,भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के एमेरिट्स वैज्ञानिक सुधीर मिश्रा और महानिदेशक, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल प्रो. गोवर्धन दास, निदेशक नेशनल इनोवेशन फाउन्डेशन डॉ. अरविन्द रानाडे, प्रमुख सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग, प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर प्रो. मनीष जैन भी सम्मेलन में शामिल हुए। समत्म भवन से मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल और अपर मुख्य सचिव सूचना प्रौद्योगिकी संजय दुबे भी सम्मेलन के इस सत्र में उपस्थित हुए।  

एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: सीएम यादव

भोपाल  एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने यह बात एक निजी कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, सरकार अपने संसाधनों का हर संभव अधिक से अधिक उपयोग करेगी और जनता को सरकारी योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा, ताकि वे सरकार के जरिए स्वयं की आय बढ़ा सके। सरकार इस काम में जो मदद कर सकती है, वे सभी मदद पहुंचाई जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि जीआइएस की सफलता को लेकर सीएम का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि भोपाल की प्राकृतिक संपदा और इसके पुरा-इतिहास के संवर्धन में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। भोपाल को एक सुंदर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाएंगे। भोजपुर मंदिर रोड पर ‘भोज द्वार’ और इंदौर-उज्जैन मार्ग पर विक्रमादित्य के सुशासन के प्रतीक स्वरूप ‘विक्रम द्वार’ बनाए जाएंगे। भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हम विरासत से विकास की ओर बढ़ रहे हैं। अगले 5 साल में हम प्रदेश का सालाना बजट दोगुना कर देंगे। कोई नया टैक्स नहीं लगाएंगे बल्कि नागरिकों की आय बढ़ाकर अपने बजट को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में विश्व से उद्योगपति भोपाल आए। भोपाल आकर उन सभी को आनंद आ गया, क्योंकि यहां की झीलें, तालाब और यहां की संस्कृति जीवंत हैं, यही हमारी पूंजी है। उन्होंने कहा कि भोपाल देश का एकमात्र राजधानी क्षेत्र है जहाँ मानव और बाघों के सह-अस्तित्व का अनोखा और अद्वितीय उदाहरण विद्यमान है।

हॉक फोर्स और एसएसयू में कई पदों पर भर्ती की तैयारी, 300 पद व विशेष सहयोगी दस्ते में 800 पदों पर होगी भर्ती

बालाघाट नक्सलियों के सफाए के लिए पुलिस अपनी रणनीति और संख्या बल को मजबूत करने में जुटी है। नक्सल प्रभावित लांजी और बैहर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की कमान भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संभालेंगे। अभी यहां युवा अधिकारियों की तैनाती की गई है। पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह का कहना है कि युवा आईपीएस को नक्सल आपरेशन की कमान देकर उनके कौशल, सूझबूझ और ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। बल संख्या को मजबूत करते हुए जल्द ही हॉक फोर्स के 300 पद और विशेष सहयोगी दस्ता(एसएसयू) के करीब 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ के बाद गश्त तेज ये बड़े और अहम फैसले ‘मिशन 2026’ को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। 20 मार्च को छत्तीसगढ़ में हुईं दो अलग-अलग मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार गिराने के बाद यहां पुलिस ने अपनी गश्त और तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से लगे करीब 12 कैंप के 700 से अधिक जवान दिन-रात गश्त कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को नक्सलियों की गतिविधि से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिससे पुलिस पहले से ज्यादा सतर्क है। मिशन 2026 के लिए बढ़ा रहे पद दिसंबर 2022 में नक्सल उन्मूल अभियान के तहत पुलिस ने तीन जिलों के क्षेत्रीय युवक-युवतियों का विशेष सहयोगी दस्ता बनाया था। तब बालाघाट में विशेष सहयोगी दस्ता के 80, मंडला में 30 और डिंडौरी में 40 पदों पर युवाओं की अस्थाई भर्ती की गई थी। मिशन 2026 को देखते हुए बालाघाट पुलिस इन पदों को बढ़ाने जा रही है। युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका     मिशन 2026 को देखते हुए मुख्यालय स्तर से हॉक फोर्स और पुलिस के कई पदों पर युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका दिया गया है। हॉक फोर्स के 300 और एसएसयू के 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। हमारी कोशिश है कि युवा पुलिस अधिकारियों के कौशल, उनकी सूझबूझ और ऊर्जा का सही उपयोग हो। – नगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट   वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर हुई ’38 वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खतरे से समग्र रूप से निपटने के लिए, भारत सरकार (जीओआई) ने 2015 में ‘एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ को मंजूरी दी थी। इस नीति में सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकों को सुनिश्चित करने आदि से जुड़ी एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है। नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा और भौगोलिक विस्तार में लगातार कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल 2018 तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है, जुलाई 2021 तक यह संख्या 70 और फिर अप्रैल 2024 तक 38 रह गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही है। उन्होंने बताया, वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2010 में अपने उच्चतम स्तर 1936 पर पहुंच गई थीं, 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। यानी 81 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 85 प्रतिशत घटकर 2010 में 1005 से 2024 में 150 हो गई है। पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी उग्रवादियों द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2019 में 501 थीं, 2024 में घटकर 374 हो गई हैं, यानी 25 प्रतिशत की कमी। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 26 प्रतिशत घटकर 2019 में 202 से 2024 में 150 हो गई है। वर्ष 2022 और 2023 में हिंसा में वृद्धि वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ बढ़े हुए अभियानों के कारण है, क्योंकि सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के मुख्य क्षेत्रों में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार (जीओआई) वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बटालियन, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रशिक्षण और धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करना, किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि प्रदान करके क्षमता निर्माण के लिए सहायता करती है। सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत सुरक्षा बलों की परिचालन और प्रशिक्षण आवश्यकताओं से संबंधित आवर्ती व्यय, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए राज्यों द्वारा किए गए व्यय, सामुदायिक पुलिसिंग, ग्राम रक्षा समितियों और प्रचार सामग्री आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 2014-15 से 2024-25 के दौरान 3260.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विशेष अवसंरचना योजना के तहत विशेष खुफिया शाखाओं, विशेष बलों, जिला पुलिस को मजबूत करने और फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशनों (एफपीएस) के निर्माण के लिए धनराशि प्रदान की जाती है। एसआईएस के तहत 1741 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना के तहत पहले से निर्मित 400 एफपीएस के अलावा 226 एफपीएस का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा शिविरों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों को 1120.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं। विकास के मोर्चे पर, प्रमुख योजनाओं के अलावा, भारत सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कई विशिष्ट पहल की हैं, जिसमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, कौशल और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क संपर्क के विस्तार के लिए 14,618 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 7,768 टावर लगाए गए हैं। कौशल विकास के संबंध में 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) चालू किए गए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 178 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) चालू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं के साथ 5731 … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद गौतम के पात्र उत्तराधिकारी को शासकीय सेवा में लेने के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए

मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर मऊगंज जिले के गौतम परिवार को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के अंतर्गत एक करोड़ रूपये की राशि का चेक प्रदान किया। भारतीय स्टेट बैंक की पुलिस सेलरी पैकेज योजना में पुलिसकर्मियों को दी जाने वाली पूरक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुविधा के अनुसार परिवार को यह राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद गौतम के पात्र उत्तराधिकारी को शासकीय सेवा में लेने के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि कर्तव्य निवर्हन के दौरान अपने प्राणों को उत्सर्ग करने वाले पुलिस उपनिरीक्षक रामचरण गौतम की पत्नी श्रीमती पुष्पा को चेक प्रदान करते हुए कहा कि राज्य शासन ने स्व. गौतम को शहीद का दर्जा देते हुए उनके आश्रितों को एक करोड़ रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है। ग्राम गडरा जिला मऊगंज में कर्तव्य निर्वहन करते हुए इस माह पुलिस उप निरीक्षक रामचरण गौतम शहीद हुए। स्व. गौतम के परिवार को बीमा की अनुदान राशि का चेक सौंपे जाने के अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सीजीएम एसबीआई म.प्र./छ.ग चंद्रशेखर शर्मा, महाप्रबंधक अजिताभ पाराशर, महाप्रबंधक कुन्दन ज्योति, महाप्रबंधक मनोज कुमार सहित भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. गौतम की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा और इस अवसर पर उपस्थित स्व. गौतम के पुत्र धीरेन्द्र और भतीजे सतीश से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधि का जो विधान था वह हुआ लेकिन राज्य शासन द्वारा स्व. रामचरण गौतम के परिवार को पूरा सहयोग दिया जाएगा।  

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