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मधुमेह के मरीजों को पंचकर्म बाद औषधियां देने से शुगर लेवल 200 तक आ गया : शोध

 भोपाल  डायबिटीज (मधुमेह) पर आयुर्वेदिक औषधियों और पंचकर्म का प्रभाव जानने के लिए एक बड़ा शोध भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में चल रहा है। यहां 1050 रोगियों पर किए जा रहे शोध के प्रारंभिक परिणाम उत्साहित करने वाले हैं। डॉक्टरों ने बताया कि जिन रोगियों का एचबीए1सी स्तर (वैल्यू) 13 यानी तीन महीने का औसत शुगर लेवल 350 के करीब था उन्हें पंचकर्म की वस्ति क्रिया (दस्त करवाने) के बाद औषधियां देने से कुछ मरीजों का एक सप्ताह तो कुछ का 15 दिन में ही शुगर लेवल 200 तक आ गया। 1050 रोगियों को तीन समूहों में बांटा गया शोध टीम में शामिल काय चिकित्सा के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक शर्मा बताते हैं कि 1050 रोगियों को औचक (रैंडम) आधार पर बराबर संख्या वाले तीन समूहों में बांटा गया है। एक समूह को पंचकर्म के साथ औषधियां, दूसरे को मात्र औषधियां और तीसरे को सिर्फ खान-पान व जीवन शैली में परिवर्तन करवाया गया है। तीन महीने तक उन पर प्रयोग किया जाना है, हालांकि प्रारंभिक परिणामों में अधिकतर रोगियों की शुगर नियंत्रित मिल रही है। इनमें किसी को एलोपैथी दवाएं नहीं दी जा रही हैं। इस तरह के दिखे परिणाम पंचकर्म विभाग की सह प्राध्यापक डॉ. कामिनी सोनी ने बताया कि आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देश के अनुसार जिन रोगियों का एचबीए1सी 10 से कम है उन्हें ही शोध में शामिल किया है, जिससे स्वास्थ्य को लेकर कोई जोखिम न हो। अभी एक माह में अलग-अलग समय में अस्पताल में भर्ती हुए 10 रोगियों को पंचकर्म और दवा देने के बाद देखने में आया है कि आठ का एचबीए1सी स्तर काफी सुधरा हुआ मिला। औसत रूप से मानें तो इसका स्तर 10 से घटकर छह के आसपास आ गया। इसके पहले भर्ती हुए रोगियों में परिणाम भी लगभग ऐसे ही थे। अपवादस्वरूप कुछ रोगी तो ऐसे भी थे जिनका एचबीए1सी 13 था। पंचकर्म के बाद औषधियां देने से यह छह से सात के बीच आ गया है। बता दें, एचबीए1सी जांच रक्त में शुगर का तीन महीने का औसत स्तर बताती है। यह होता है पंचकर्म     वमन – उल्टी कराना। इसके कई तरीके हैं। कई लाभ हैं पर ज्यादा उपयोग कफज रोग में होता है।     विरेचन – दस्त कराना। इसका अधिक उपयोग पित्त संबंधी बीमारियों में किया जाता है।     अनुवासन वस्ति – इसमें एनिमा की तरह काम होता है। इसके लिए अलग-अलग तरह के तेल का उपयोग किया जाता है।     निरूह वस्ति – इसमें काढ़े का उपयोग कर दस्त कराया जाता हैं। पेट और हार्मोन संबंधी बीमारी में अधिक उपयोगी है।     नस्य कर्म – इसमें नाक से औषधियां दी जाती हैं। 70 प्रतिशत काम हो गया है     कॉलेज की रिसर्च एथिक्स कमेटी की स्वीकृति के बाद 1050 रोगियों पर यह शोध किया जा रहा है। इतनी संख्या में मरीजों पर देश में पहली बार शोध हो रहा है। इसमें रोगियों से बाकायदा सहमति पत्र लिया गया है। लगभग 70 प्रतिशत काम हो गया है। शोध के शुरुआती परिणाम बहुत उत्साहजनक रहे हैं। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज औषधि पैंक्रियाज को ठीक करने का काम करेगी     हर पैथी का अपना सिद्धांत है, इसलिए उस पर संदेह नहीं करना चाहिए। डायबिटीज के उपचार में एलोपैथी व अन्य पैथी के सिद्धांत कुछ हद तक समान हो सकते हैं। जैसे जीवन शैली में बदलाव। पंचकर्म भी लगभग उसी तरह की प्रक्रिया है। जहां तक दवा की बात है जो आयुर्वेदिक औषधि पैंक्रियाज को ठीक करने या मोटापा कम करने पर काम करेगी वह डायबिटीज में भी लाभकारी होगी। अभी सामान्य जनसंख्या में शहरी क्षेत्र में लगभग 10 से 12 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में छह से आठ प्रतिशत लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। – डॉ. मनुज शर्मा, हार्मोन रोग विशेषज्ञ, गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल  

भारत में 2014 से लेकर 2024 तक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी, कॉलेजों की संख्या में 102% और MBBS सीटों में 130% का इजाफा हुआ

नई दिल्ली  भारत में 2014 से लेकर 2024 तक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 102% और MBBS सीटों में 130% का इजाफा हुआ है। 2014 में जहां देश में केवल 387 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब 2024 में यह संख्या बढ़कर 780 हो गई है। इसी तरह, 2014 में जहां MBBS सीटों की संख्या 51,348 थी, अब यह बढ़कर 1,18,137 हो गई है। इन राज्यों में खुले नए मेडिकल कॉलेज कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले कोई मेडिकल कॉलेज नहीं थे, जैसे अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, दादरा और नगर हवेली, मिजोरम, नागालैंड और तेलंगाना। इन राज्यों में अब मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और तेलंगाना में तो 65 कॉलेज तक स्थापित हो चुके हैं। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बढ़ी मेडिकल सीटें कर्नाटक में 2014 में 46 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 73 हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 30 से बढ़कर 86 हो गई है। महाराष्ट्र में भी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जहां 5,590 सीटों से बढ़कर 11,845 सीटें हो गईं। तेलंगाना और राजस्थान में हुआ बदलाव तेलंगाना, जो पहले मेडिकल कॉलेजों से पूरी तरह से वंचित था, अब वहां 9,040 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। राजस्थान में भी 2013-14 में 10 कॉलेजों और 1,750 सीटों से संख्या बढ़कर 43 कॉलेजों और 6,475 सीटों तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बढ़ोतरी मध्य प्रदेश ने अपने कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़ाकर 31 और सीटों की संख्या 1,700 से बढ़ाकर 5,200 कर दी है। छत्तीसगढ़ में कॉलेजों की संख्या पांच से बढ़कर 16 हो गई, और सीटों की संख्या 600 से बढ़कर 2,455 हो गई है। दिल्ली में भी कॉलेजों की संख्या 7 से बढ़कर 10 हो गई और सीटों की संख्या 900 से बढ़कर 1,497 हो गई है। गोवा और चंडीगढ़ में कॉलेजों की संख्या पहले जैसी रही, लेकिन इन दोनों राज्यों में सीटों की संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर हुई है। इस बढ़ोतरी से यह साफ होता है कि सरकार देशभर में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है, जिससे अब अधिक छात्र मेडिकल क्षेत्र में अपना करियर बना सकेंगे।  

महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कालिदास कोलंबकर बने प्रोटेम स्पीकर

मुंबई महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुक्रवार को कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई गई। महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कोलंबकर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें मुंबई स्थित राजभवन में शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम ग्रोहे और मुख्य सचिव सुजाता सौनिक मौजूद थे। बता दें कि कोलंबकर प्रोटेम स्पीकर के रूप में 288 नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा में शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही शनिवार, 7 दिसंबर से शुरू होने वाले 15वीं विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी कराया जाएगा। विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 16 से 21 दिसंबर तक नागपुर में आयोजित होगा। विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 9 दिसंबर को होगा, इसके बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति सरकार विश्वास मत हासिल करेगी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री पद की शपथ फडणवीस ने गुरुवार शाम को ली, जबकि महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित हुआ। आजाद मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में मौजूद थे। शपथ ग्रहण समारोह में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, सलमान खान, संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और माधुरी दीक्षित भी पहुंचे थे। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी समारोह में शामिल हुए थे।

गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके

भोपाल भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। गैस पीड़ितों और उनके बच्चों के लिए भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के तहत 6 अस्पताल और 9 औषधालय भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां सभी प्रकार की जांच, उपचार और आवश्यक सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही आयुष्मान योजना के अंतर्गत भोपाल गैस राहत विभाग से अनुबंधित सभी अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं। गंभीर बीमारियों के विशेष इलाज किडनी, लीवर ट्रांसप्लांट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित के इलाज के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। कैंसर उपचार के लिए विभाग ने एम्स भोपाल और 3 निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया है। इसके अतिरिक्त कमला नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई है, जहां 13 डायलिसिस मशीनों के जरिये पीड़ित मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। अत्याधुनिक आपातकालीन सेवाएं भी जारी भोपाल गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी यूनिट संचालित की जा रही है। इन यूनिट्स में गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को तुरंत और उन्नत चिकित्सा सेवाएं, सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गैस प्रभावित विधवाओं (कल्याणियों) को राज्य सरकार द्वारा विशेष राहत दी जा रही है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अतिरिक्त 1,000 रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है। वर्तमान में 4 हजार 406 विधवाओं को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। राज्य सरकार भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रमुख लक्ष्य कल्याण योजनाओं के तेज क्रियान्वयन और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गैस पीड़ितों के जीवन स्तर में त्वरित सुधार लाना है।  

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डॉक्टर्स की हड़ताल अब नहीं होगी गैरकानूनी, लंबित मांगों का समाधान करेगी हाई लेवल कमेटी प्रदर्शन

इंदौर  अब डॉक्टर्स की हड़ताल गैरकानूनी नहीं मानी जाएगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है, यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए लिया गया। क्योंकि डॉक्टर्स की हड़ताल से मरीजों की देखभाल पर खतरा आ सकता है, इसलिए हड़ताल पर जाने की छूट नहीं दी जाती थी। आमतौर पर, यदि डॉक्टर्स किसी आदेश या घटना से आहत होकर हड़ताल पर जाते थे, तो यह हड़ताल गैरकानूनी मानी जाती थी। कई मामलों में सरकार और विभाग ने हड़ताल पर गए डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। एक मामले की सुनवाई के दौरान, एमपी हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को राहत दी है। डॉक्टर्स को हड़ताल से रोकने के कारण डॉक्टर्स को हड़ताल पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे मरीजों के इलाज में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के तहत भी डॉक्टरों को हड़ताल से मना किया गया है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि न्यायाधीश और डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते, क्योंकि उनका काम जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों से संबंधित होता है। हड़ताल पर जाने से पहले अनुमति की जरूरत हाई कोर्ट ने डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने की छूट दी है, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों के हड़ताल से संबंधित मामले में स्पष्ट किया कि अगर डॉक्टर सरकार के किसी निर्णय से आहत होते हैं, तो वे हड़ताल कर सकते हैं, बशर्ते कोर्ट को पहले सूचित किया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को डॉक्टरों की लंबित मांगों को हल करने के लिए 2 सप्ताह में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का आदेश दिया है। पूरा मामला यह मामला 2023 में प्रदेशभर के डॉक्टरों की हड़ताल से जुड़ा था। 3 मई को चिकित्सक महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएससी और पीएचसी के डॉक्टर हड़ताल पर गए थे। उन्होंने अपनी कार्यकाल, वेतन और सुविधाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें राज्य सरकार के सामने रखी थीं, जिनका समाधान न होने पर डॉक्टरों ने हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रखा। हाई कोर्ट ने चिकित्सक महासंघ को एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे अपनी सभी लंबित मांगों और सुझावों को राज्य सरकार तक पहुंचा सकें। पहले कोर्ट ने इस हड़ताल को गैरकानूनी करार दिया था और भविष्य में किसी भी हड़ताल के लिए कोर्ट से अनुमति अनिवार्य कर दी थी। 1 हफ्ते में मांग-सुझाव सरकार तक प​हुंचाएं     हाई कोर्ट ने चिकित्सक महासंघ को एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे अपनी सभी लंबित मांगों और सुझावों को राज्य सरकार तक पहुंचा सकें।     यह मामला 2023 में प्रदेशभर के चिकित्सकों की हड़ताल से जुड़ा था। तब 3 मई को चिकित्सक महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएससी और पीएचसी के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे।     चिकित्सक महासंघ ने राज्य सरकार से डॉक्टरों के कार्यकाल, वेतन और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इन मांगों का समाधान न होने पर डॉक्टर लगातार हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।     शासकीय-स्वशासी चिकित्सा महासंघ मप्र के मुख्य संयोजन डॉक्टर राकेश मालवीय के मुताबिक पहले हाई कोर्ट ने प्रदेश के डॉक्टरों की हड़ताल को गैरकानूनी करार दिया था। साथ ही भविष्य में किसी भी टोकन स्ट्राइक के लिए कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने अपनी आवाज उठाने के लिए अन्य विकल्प तलाशे।  

जन्म के समय लिंगानुपात में हुआ सुधार, 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया: केन्द्र सरकार

नई दिल्ली स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार देश में लिंगानुपात (एसआरबी)  2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया है। साथ ही, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई +) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल में लड़कियों का राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 79.4 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी। आपको बता दें, देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना 22 जनवरी, 2015 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर शुरू की गई थी। यह लिंग-पक्षपाती लिंग-चयनात्मक प्रथाओं को रोकने, बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करने और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। वहीं, योजना के प्रभाव का आकलन करने और प्रगति का मूल्यांकन करने के प्रमुख मानदंड जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार एसआरबी 2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया है। साथ ही, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई +) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल में लड़कियों का राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 79.4 प्रतिशत हो गया है। इस तथ्य की पहचान करते हुए कि बीबीबीपी के तहत बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस सहित गतिविधियों में कम भागीदारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए, मंत्रालय ने बीबीबीपी के लिए एक संचालन नियमावली जारी किया है। इसमें बालिकाओं, उनके परिवारों और समुदायों की साल भर की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकसित जिलों के लिए एक विस्तृत और अच्छी तरह से सुझाया गया गतिविधि कैलेंडर शामिल है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के आधार पर धनराशि जारी की जा रही है, जिसने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की एकल नोडल एजेंसी (एसएनए) के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। इसके अलावा, वर्ष 2020-21 के लिए एचएमआईएस डेटा के अनुसार जिलों की अलग-अलग एसआरबी स्थिति के आधार पर, बीबीबीपी के तहत धनराशि जारी करने के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं – जिन जिलों का एसआरबी 918 या उससे कम है, उन्हें प्रति वर्ष 40 लाख रुपये आवंटित किए जाते हैं। एसआरबी 919 से 952 वाले जिलों को 30 लाख रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। 952 से अधिक एसआरबी वाले जिलों को 20 लाख रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। गौरतलब हो, बीबीबीपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका मिशन शक्ति के संबल वर्टिकल के तहत देश के सभी जिलों में केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषण किया जाता है। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल सरकार बीबीबीपी को लागू नहीं कर रही है।  

नि-क्षय शिविर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्चुअली करेंगे अभियान का शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक “100 दिवसीय निक्षय शिविर” आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके। शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में “नि-क्षय सप्ताह” के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।  

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली, 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में योजना की अगली किस्त की राशि जल्द आने वाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली है. प्रदेश की 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त की राशि आने वाली है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि साल के आखिरी किस्त तय तारीख से पहले भी आ सकती है. माना जा रहा है कि इस बार तय तारीख 10 दिसम्बर के पहले लाड़ली बहनों को इस योजना की 19वी किस्त के रुप में 1250 रुपए की धनराशि भेजी जा सकती हैं. वहीं संभावना ऐसी भी है कि जनवरी 2025 से मोहन सरकार लाड़ली बहनों की किस्त में इजाफा भी कर सकती है. तारीख से पहले आ सकती है लाड़ली बहना की किस्त ! लाड़ली बहना योजना की दिसंबर महीने की किस्त क्या 10 दिसम्बर से पहले भी आ सकती है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. 1250 की ये किस्त समय से पहले भी लाड़ली बहनों के खाते में डाली जा सकती है. ये लाड़ली बहना योजना की 19वी किस्त होगी. त्योहार के समय में जिस तरह से नियत समय से पहले ये राशि लाड़ली बहनों के खाते में डाली गई, क्या इस बार भी ऐसा होगा. हालांकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है. क्या अगले महीने से बढ़ जाएगी लाड़ली बहना की राशि चर्चा ये भी है कि जनवरी 2025 से लाड़ली बहना योजना की राशि में इजाफा हो सकता है. असल में बुधनी और विजयपुर विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे लाड़ली बहना योजना की राशि में वादे के मुताबिक किस्त की राशि बढ़ाई भी जा सकती है. सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा था कि जो वादा किया गया है. लाड़ली बहनों से पूरा किया जाएगा. उसी के बाद से ये अटकलें तेज हो गई कि क्या नए वर्ष की शुरुआत से सरकार लाड़ली बहनों की राशि बढ़ा सकती है. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल कहते हैं, “इसमें दो राय नहीं कि लाड़ली बहन-बेटियों के लिए समर्पित है. हमारी सरकार और उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर उन्हें हर तरह का संबल देने के प्रयास सरकार की ओर से किए जा रहे हैं. सरकार ने लाड़ली बहनों से जो वादा किया है. वो भी पूरे होंगे. बीजेपी की सरकार ने पूर्व में भी अपने वचन पूरे किए हैं और इस बार भी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.” कब शुरु हुई थी योजना, लाड़ली बहनों का कितना बजट एमपी में लाड़ली बहना अकेली ऐसी योजना है. जिसके लिए सरकार ने बजट में हमेशा विशेष प्रावधान किए हैं. 2023 में शुरु की गई योजना में पहले साल 12 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया था. 23 से साठ वर्ष की महिलाओं के लिए हर महीने हजार रुपए की धनराशि का प्रावधान शुरुआत में किया गया, जो बढ़कर 1250 रुपए का प्रावधान कर दिया गया. पांच वर्षों लक्ष्य में इसे 60 हजार करोड़ इसका बजट माना गया था. जब किस्त की धनराशि 1250 कर दी गई, तो बजट में भी प्रावधान किया गया. अब तैयारी ये है कि 2025 के बजट में महिला बाल विकास विभाग के साथ महिलाओं पर केन्द्रित योजनाओं के लिए धनराशि बढ़ाई जाए.  

मुख्यमंत्री यादव राज्य को औद्योगिक विकास के केंद्र में परिवर्तित करने 7 दिसंबर को नर्मदापुरम में 6वीं आरआईसी का शुभारंभ करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य को औद्योगिक विकास और रोजगार के केंद्र में परिवर्तित करने के लिए अपने अभिनव प्रयासों को जारी रखते हुए, 7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम में 6वीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) का शुभारंभ करेंगे। कॉन्क्लेव में शामिल होने के लिए 4 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जिनमें 3 हजार एमएसएमई प्रतिनिधि, 75 प्रमुख निवेशक, और कनाडा, वियतनाम, नीदरलैंड, मेक्सिको और मलेशिया जैसे 5 देशों के अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। विभिन्न सेक्टोरल सत्रों में राज्य की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और एमएसएमई के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं का वर्चुअल भूमिपूजन और उद्घाटन करेंगे। इस आरआईसी में निवेशकों को भूमि आवंटन-पत्र भी वितरित किये जायेंगे। निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग होगी, जिसमें 10 से अधिक प्रमुख निवेशक अपनी योजनाएँ प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा, राउंड टेबल सत्र नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित होगा। ‘निर्यात कैसे शुरू करें’ और ‘पर्यटन में निवेश संभावनाएँ’ जैसे विषयों पर सेक्टोरल-सत्र भी होंगे। कार्यक्रम की थीम: ‘नए क्षितिज, नई संभावनाएँ’ नर्मदापुरम, जो अपनी धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है, अब एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। ‘नए क्षितिज, नई संभावनाएँ’ थीम के अंतर्गत इस कार्यक्रम में कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, नवकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और वस्त्र जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदर्शनी कॉन्क्लेव में स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन के लिए प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है जिसमें 75 से अधिक स्टॉल लग रहे हैं जिनमें एमएसएमई, पर्यटन, हस्तशिल्प विकास निगम, और बैंकिंग संस्थानों के साथ-साथ ओडीओपी उत्पादों के प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उक्त स्टॉल न केवल जानकारी प्रदान करेंगे बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्पूर्ण भूमिका निभाएंगे। उद्योग और रोजगार के लिए नई राह ‘उद्योग वर्ष 2025’ अंतर्गत आयोजित इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हर क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में आयोजित सफल कार्यक्रमों की श्रृंखला में नर्मदापुरम का यह आयोजन क्षेत्रीय संभावनाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक और महत्वपूर्ण कदम है। इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम क्षेत्र को औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करने के साथ-साथ निवेशकों और सरकार के बीच आपसी सहयोग को और सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।  

CM यादव ने नर्मदापुरम RIC से पहले नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल के उद्योगपतियों से उज्जैन से वर्चुअल संवाद किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 दिसंबर को नर्मदापुरम में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (RIC) से पहले नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल के उद्योगपतियों से उज्जैन से वर्चुअल संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश में उद्योगपतियों का स्वागत है। हमारी मंशा है कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में सबसे पहले स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिले और वर्तमान में संचालित उद्योगों का विस्तार करने में सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं।” मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि उद्योगपतियों को किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा, “उद्योगपतियों की सहायता से ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है और रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। आप सभी आगे आएं, नए उद्योग स्थापित करें और युवाओं को रोजगार देकर प्रदेश के विकास में सहभागी बनें।” स्थानीय उद्योगों को मिलेगी प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा प्राथमिक उद्देश्य है कि सबसे पहले स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिले। इसके बाद राज्य, राष्ट्रीय और अंततः अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उद्योगपतियों को अवसर दिया जाएगा। आरआईसी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, और इसे हमने बहुत बेहतर तरीके से क्रियान्वित किया है।” उद्योगों के विस्तार और निवेश की नई संभावनाएं मुख्यमंत्री ने वीसी से नर्मदापुरम के कई उद्योगपतियों से चर्चा की। उन्होंने हरदा के राइस मिल मालिकों से अपने उद्योगों का विस्तार करने का आग्रह किया और मूंग दाल मिल के मालिक जसप्रीत सिंह से कहा कि उनके पास अतिरिक्त मूंग हो तो उसे उज्जैन के व्यापारियों को भी उपलब्ध कराएं। उन्होंने एमएसएमई के माध्यम से उद्योग शुरू करने वाली ज्योति अग्रवाल और कैटल फीड इंडस्ट्री के मालिक नरेंद्र सिंह तोमर की सफलता की सराहना की। निर्मल मसाला इंडस्ट्री के राजपूत ने बताया कि उनकी मसाला मिल 42 प्रकार के मसालों का उत्पादन करती है, जो 12 जिलों में वितरित किए जाते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, “आपके मसाले एमडीएच मसालों की तरह प्रसिद्ध हों, ऐसी मेरी शुभकामनाएं हैं।” निवेश और विकास के लिए व्यापक दृष्टिकोण मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदापुरम क्षेत्र में कृषि उत्पादन और खाद्य प्र-संस्करण के साथ अन्य सेक्टर में भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने उद्योगपतियों से अपील की कि वे अपने मौजूदा व्यवसायों के साथ नए उद्योग क्षेत्रों में भी निवेश करें। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार उद्योगपतियों को सभी सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। आपके सहयोग से ही क्षेत्रीय विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।” ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की ओर समग्र प्रयास मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि नर्मदापुरम के बाद जनवरी में शहडोल में भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की जायेगी। इन सम्मेलनों की कड़ी 2025 में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने यूके और जर्मनी दौरे का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से प्रदेश को 78,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है। प्रदेश के विकास में उद्योगपतियों की अहम भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा, “उद्योगपति प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं। उनके प्रयासों से ही रोजगार के अवसर सृजित होते हैं और क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से हम प्रदेश के सभी उद्योगपतियों को स्थानीय स्तर पर सशक्त करने का प्रयास कर रहे हैं।” आरआईसी नर्मदापुरम में संभावित क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास के नए रास्ते खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी उद्योगपतियों को कॉन्क्लेव में भाग लेने का निमंत्रण देते हुए कहा कि यह आयोजन निवेश और विकास के अवसरों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मंच प्रदान करेगा। “लोकतंत्र में सब सेवक मैं भी प्रदेश का सेवक” मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैतूल के उद्योगपति ने चर्चा में वर्षों से चले आ रहे बाबा महाकालेश्वर की नगरी अवंतिका उज्जैन में मुख्यमंत्री के रात्रि विश्राम न करने के मिथक को तोड़ने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र में सब सेवक होते है, कोई राजा महाराजा नहीं होता, मैं भी प्रदेश का सेवक हूँ”। सेवक तो भगवान की नगरी में ही रुकते है। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने 7 दिसंबर को होने वाली रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के बारे में पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी। उज्जैन जिले के प्रभारी एवं कौशल विकास एवं रोजगार राज्य (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए।  

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, डबल डेकर बस और ट्रक की भिड़ंत, 8 की मौत, दर्जनों यात्री घायल

कन्नौज यूपी के कन्नौज में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा हो गया. इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जन भर से अधिक लोग घायल हो गए. दरअसल, एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस एक ट्रक में जा घुसी, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हो गया. बस में कुल 40 यात्री सवार बताए गए. मौके पर डीएम-एसपी पहुंचे और हालात का जायजा लिया. फिलहाल, राहत-बचाव कार्य पूरा किया जा चुका है. सड़क को क्लियर करा लिया गया है. ये हादसा आज दोपहर कन्नौज जिले के सकरावा थानाक्षेत्र के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस 141 पर औरैया बॉर्डर के पास हुआ. इस बीच रास्ते से गुजर रहे यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी घायलों की मदद के लिए रुक गए. उन्होंने फौरन घायलों को अस्पताल पहुंचाने का निर्देश दिया. फिलहाल, हादसे में घायल यात्रियों को सैफई मेडिकल कॉलेज व तिर्वा के लिए भेजा गया है. जिसमें अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, चलती बस अनियंत्रित होकर ट्रक से जा टकराई और पलट गई. हादसे के बाद बस यात्रियों में चीख पुकार मच गई. आसपास मौजूद लोगों ने बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला. सूचना पाकर मौके पर यूपीडा की टीम और पुलिस भी पहुंच गई. एक्सीडेंट इतना भीषण था कि रेस्क्यू में कई घंटे लग गए. इस पूरे मामले में कन्नौज के एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस हादसे में मरने वालों की संख्या 6 से बढ़कर 8 हो गई है और घायलों की संख्या 19 है. फिलहाल, रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया है. घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है. मृतकों के परिजनों को भी खबर दी जा रही है. आपको बता दें कि इससे पहले पीलीभीत में भी दर्दनाक सड़क हादसा हुआ था. इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी. जबकि, चित्रकूट सड़क हादसे में छह लोगों को जान गवांनी पड़ी थी. सीएम योगी ने सड़क हादसे पर दुख जताया है.

पश्चिमी विक्षोभ के कारण न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा, दिसंबर के तीसरे सप्ताह से सर्दी बढ़ने की उम्मीद

इंदौर दिसंबर और जनवरी के महीने ठंड के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार दिसंबर की शुरुआत में ठंड गायब नजर आ रही है। रात का तापमान सामान्य से ज्यादा बना हुआ है और घटने के बजाय बढ़ रहा है। जिस ठंड का अहसास आमतौर पर अक्टूबर में होता है, वह इस बार दिसंबर में हो रहा है। बुधवार को अधिकतम तापमान 2.4 डिग्री बढ़कर 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1 डिग्री कम था। लेकिन रात का न्यूनतम तापमान पिछले पांच दिनों में करीब 6 डिग्री उछलकर 18.4 डिग्री पर पहुंच गया, जो सामान्य से 6 डिग्री ज्यादा था। गुरुवार को अधिकतम तापमान 29.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री दर्ज किया गया। फेंगल तूफान की वजह से आसमान में बादल छाए हुए हैं। सुबह के समय बादल और ठंडी हवाओं के कारण हल्की ठंड का एहसास होता है, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ता है, गर्मी महसूस होने लगती है। तापमान के आंकड़े इस बदलाव की गवाही देते हैं। गुरुवार को दिन का अधिकतम तापमान 29.9 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान 17.1 डिग्री रहा, जो सामान्य से 4 डिग्री अधिक था। मंगलवार को यह औसत से 4 डिग्री ज्यादा होकर 18.4 डिग्री तक पहुंच गया था। 2014, 2021 और 2022 में भी दिसंबर की शुरुआत गर्म रही थी। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ठंडी हवाएं बीच-बीच में ठंड का एहसास कराएंगी, लेकिन न्यूनतम तापमान में गिरावट दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में ही संभव होगी। उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इस कारण हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है। वहां से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण दिसंबर के तीसरे सप्ताह से ठंड में इजाफा हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार अक्टूबर और नवंबर भी सामान्य से ज्यादा गर्म रहे, और अब दिसंबर की शुरुआत भी गर्म बनी हुई है। यह पिछले 10 वर्षों में चौथी बार हुआ है कि दिसंबर की शुरुआत इतने ज्यादा न्यूनतम तापमान के साथ हुई हो। पिछले साल का दिसंबर भी लगभग ऐसा ही रहा था, जब पूरे महीने न्यूनतम तापमान का सबसे निचला स्तर 11.4 डिग्री था। इस बार भी रात के तापमान की शुरुआत औसत से 8 डिग्री ज्यादा रही है। गुरुवार को दोपहर के समय धूप इतनी तेज महसूस हुई कि घरों, दफ्तरों और दुकानों में पंखे तक चलाने पड़े। बादलों के कारण हल्की उमस का भी एहसास हो रहा था। फेंगल तूफान के प्रभाव और पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में यह असामान्यता देखी जा रही है। बादलों के चलते रात का तापमान बढ़ा हुआ है, क्योंकि गर्मी वातावरण में ऊपर नहीं जा पा रही है। दिन में तेज धूप और उमस से गर्मी का एहसास हो रहा है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले तीन दिन तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा। दिसंबर के तीसरे सप्ताह में हिमालय से आने वाली सर्द हवाओं के चलते ठंड बढ़ने की संभावना है। पिछले कुछ वर्षों से ठंड के मौसम में इस प्रकार के बदलाव जलवायु परिवर्तन की ओर भी इशारा करते हैं। इसका असर न केवल मौसम के पैटर्न पर पड़ रहा है, बल्कि यह मानव जीवन और पर्यावरण के अन्य पहलुओं को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बदलते मौसम के अनुसार तैयार रहना जरूरी है।  

GDP growth को लगा बड़ा झटका! RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने GDP अनुमान को घटाकर किया 6.6 प्रतिशत

मुंबई  चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के 5.4 प्रतिशत कर दर से बढ़ने के मद्देनजर आर्थिक विकास में आयी सुस्ती को ध्यान में रखकर भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से 0.6 प्रतिशत कम कर 6.6 प्रतिशत कर दिया और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से नकद आरक्षित अनुपात(सीआरआर) में 0.5 प्रतिशत की कटौती कर दी जिससे बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये आ गये। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय पांचवी द्विमासिक बैठक के समापन पर शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा “ एमपीसी ने नोट किया कि अक्टूबर नीति के बाद से भारत में निकट अवधि की मुद्रास्फीति और विकास परिणाम कुछ हद तक प्रतिकूल हो गए हैं। हालांकि, आगे चलकर, रिजर्व बैंक के सर्वेक्षणों में परिलक्षित व्यापार और उपभोक्ता भावनाओं में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि में सुधार होने की संभावना है। मुद्रास्फीति में हाल ही में हुई वृद्धि मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और अपेक्षाओं पर कई और अतिव्यापी झटकों के निरंतर जोखिमों को उजागर करती है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजार में अस्थिरता ने मुद्रास्फीति के लिए और अधिक जोखिम बढ़ा दिया है। उच्च मुद्रास्फीति ग्रामीण और शहरी दोनों उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को कम करती है और निजी खपत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। एमपीसी ने जोर दिया कि उच्च विकास के लिए मजबूत नींव केवल टिकाऊ मूल्य स्थिरता के साथ ही सुरक्षित की जा सकती है। एमपीसी अर्थव्यवस्था के समग्र हित में मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, एमपीसी ने इस बैठक में नीति रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। एमपीसी ने मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख को जारी रखने का भी निर्णय लिया क्योंकि यह अवस्फीति और विकास पर प्रगति और दृष्टिकोण की निगरानी करने और उचित रूप से कार्य करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है। एमपीसी स्पष्ट रूप से लक्ष्य के साथ मुद्रास्फीति के टिकाऊ संरेखण पर केंद्रित है, जबकि विकास का समर्थन करता है।” उन्होंने कहा कि सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए 2024-25 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से कम कर 6.6 प्रतिशत किया गया है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही 6.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है।। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सीआरआर में आधी फीसदी की कटौती गयी है और अब यह 4 प्रतिशत पर आ गया है जिससे बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये आ गये हैं। दास ने कहा “ जैसा कि हम 2025 की दहलीज पर खड़े हैं, मुझे 2024 की घटनापूर्ण यात्रा पर विचार करने दें। पिछले कुछ वर्षों में चलन के अनुरूप, केंद्रीय बैंकों को एक बार फिर निरंतर, विशाल और जटिल झटकों के खिलाफ अपनी अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करने के लिए अंतिम परीक्षण के दौर से गुजरना पड़ा। केंद्रीय बैंक लगातार भू-राजनीतिक संघर्षों, भू-आर्थिक विखंडन, वित्तीय बाजार में अस्थिरता और निरंतर अनिश्चितताओं द्वारा निर्मित नए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य के अनुकूल हो रहे हैं, जो सभी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लचीलेपन का परीक्षण कर रहे हैं। उन्नत और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) दोनों के लिए मुद्रास्फीति की अंतिम मील लंबी और कठिन होती जा रही है। व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और बफर बनाना ईएमई के लिए दिशा-निर्देश बने हुए हैं। भारत में, विकास और मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र में हाल के विचलन के बावजूद, अर्थव्यवस्था प्रगति की ओर एक निरंतर और संतुलित पथ पर अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए स्वरूप के बीच, भारत उभरते रुझानों से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है क्योंकि यह एक परिवर्तनकारी यात्रा पर आगे बढ़ रहा है।” रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने विकास की गति में हाल की मंदी पर ध्यान दिया, जो चालू वर्ष के लिए विकास पूर्वानुमान में कमी के रूप में सामने आती है। इस वर्ष की दूसरी छमाही और अगले वर्ष की ओर बढ़ते हुए, एमपीसी ने विकास के दृष्टिकोण को लचीला माना, लेकिन इस पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। दूसरी ओर, मुद्रास्फीति अक्टूबर में 6.0 प्रतिशत के ऊपरी सहनीय बैंड से ऊपर बढ़ गई, जो खाद्य मुद्रास्फीति में तेज उछाल से प्रेरित थी। खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में बना रहने की संभावना है और केवल 2024-25 की चौथी तिमाही से कम होना शुरू होगा, जिसे सब्जियों की कीमतों में मौसमी सुधार, खरीफ की फसल की आवक, संभावित रूप से अच्छे रबी उत्पादन और पर्याप्त अनाज बफर स्टॉक का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उच्च मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं के हाथों में उपलब्ध व्यय योग्य आय को कम करती है और निजी खपत को प्रभावित करती है, जो वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं की बढ़ती घटनाएं, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और वित्तीय बाजार में अस्थिरता मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा करती हैं। एमपीसी का मानना ​​है कि केवल टिकाऊ मूल्य स्थिरता के साथ ही उच्च विकास के लिए मजबूत नींव सुरक्षित की जा सकती है। एमपीसी अर्थव्यवस्था के समग्र हित में मुद्रास्फीति वृद्धि संतुलन को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, एमपीसी ने इस बैठक में नीति रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख को जारी रखने का फैसला किया क्योंकि यह मुद्रास्फीति और विकास पर दृष्टिकोण की निगरानी और आकलन करने और उचित रूप से कार्य करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद 2024 में असामान्य लचीलापन दिखाया है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे अपने बहु-दशकीय उच्च स्तर से लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, जिससे कई केंद्रीय बैंक नीतिगत बदलाव करने लगे हैं। वैश्विक व्यापार लचीला बना हुआ है और इसकी मात्रा भू-राजनीतिक ब्लॉकों तक सीमित है। पिछली एमपीसी बैठक के बाद से, बढ़ते अमेरिकी डॉलर और सख्त बॉन्ड यील्ड के बीच वित्तीय बाजार अस्थिर बने हुए … Read more

प्रिंसिपल के सिर में गोली मारकर छात्र स्कूटी लेकर हो गया फरार,जाने क्या है पूरा मामला

छतरपुर  छतरपुर जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल की स्कूल में ही पढ़ने वाले छात्र ने गोली मारकर हत्या कर दी। मर्डर करने के बाद आरोपी छात्र मृतक प्रिंसिपल की स्कूटी लेकर मौके से फरार हो गया। घटनाओं की जानकारी लगने के बाद भारी संख्या में पुलिस बल एवं आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एफएसएल की टीम घटना की बारीकी से जांच कर रही है। घटना शुक्रवार के दोपहर 1:00 बजे की है। छतरपुर जिले के धमोरा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले प्रिंसिपल पुष्पेंद्र सक्सेना के सिर उस वक्त गोली मार दी जब वह स्कूल में बनी बाथरूम में गए हुए थे। इसी बीच स्कूल में ही पढ़ने वाला छात्र पीछे से पहुंचा और उनके सिर में गोली मार दी। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 12वीं क्लास के छात्र ने घटना को दिया अंजाम आरोपी छात्र कक्षा 12वीं का है। वह गणित विषय से पढ़ाई कर रहा था। घटना को अंजाम देने के पीछे क्या वजह क्या है फिलहाल इस का पता नही लग सका है। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गई है कि आरोपी छात्र के पास अवैध हथियार कहां से आया और उसने इस वारदात को अंजाम क्यों दिया। फिलहाल आरोपी छात्र फरार है और मौके पर एडिशनल एसपी विक्रम सिंह एसएसपी अमन मिश्रा मौके पर मौजूद है| गोली की आवाज से दहला स्कूल स्कूल में पढ़ाने वाले अन्य शिक्षकों ने बताया की अचानक से गोली चलने की आवाज आई किसी को कुछ समझ में नहीं आया। इस पहले हम सब कुछ समझ पाते छात्र दौड़ते हुए बाथरूम से बाहर निकला। हमने अंदर जाकर देखा तो प्रिंसिपल सर की लाश जमीन पर खून से लथपथ पड़ी हुई थी। घटना के तुरंत के स्कूल में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को घर भेज दिया है वहीं पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है।

राज्यसभा में जोरदार हंगामा, कांग्रेस सांसद की सीट से मिलीं नोटों की गड्डियां, अभिषेक मनु सिंघवी की सफाई

नई दिल्ली  राज्यसभा (Rajya Sabha) में कांग्रेस (Congress) के बेंच (bench) पर नोटों की गड्डी ( bundle of notes) मिलने पर सदन में जबरदस्त हंगामा हो रहा है. सभापति (Chairman) ने खुद ये बात सदन में कही है. उन्होंने कहा है कि ये गंभीर मामला (serious matter) है और इसकी जांच हो रही है. दरअसल, शुक्रवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी,’कल (गुरुवार) सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने हमें जानकारी दी कि सीट नंबर 222 से कैश मिला है. यह सीट तेलंगाना से सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है. इस मामले में नियमों के मुताबिक जांच होनी चाहिए और यह हो भी रही है.’ सभापति ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,’जब तक मामले की जांच चल रही है और सब कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक आपको (सभापति) उनका (अभिषेक मनु सिंघवी) नाम नहीं बोलना था.’ खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा किया. इस पर खड़गे ने कहा कि ऐसा चिल्लर काम करके ही देश को बदनाम किया जा रहा है. आप (सभापति) किसी खास का नाम और सीट के बारे में कैसे कह सकते हैं?’ खड़गे के आरोपों पर सभापति ने कहा कि उन्होंने यह बताया है कि किस सीट पर मिला है और यह किसे अलॉट की गई है. आज (6 दिसंबर) सभापति जगदीप धनखड़ ने संसद की कार्यवाही के दौरान कहा कि एक दिन पहले संसद से 500 रुपए के 100 नोटों की गड्डी मिली. जिस सीट (222) पर नोटों का बंडल मिला, वह कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के नाम पर अलॉट है. अब इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सफाई आ गई है. सिंघवी ने कहा,’पहली बार ऐसा सुनने में आया! मैं जब भी राज्यसभा जाता हूं तो एक 500 रुपये का नोट साथ लेकर जाता हूं. मैं कल दोपहर 12.57 बजे घर के अंदर पहुंचा और 1 बजे सदन चालू हुआ. फिर मैं 1.30 बजे तक कैंटीन में सांसद अयोध्या रामी रेड्डी के साथ बैठा और फिर संसद से चला गया!’ दरअसल, शुक्रवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी,’कल (गुरुवार) सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने हमें जानकारी दी कि सीट नंबर 222 से कैश मिला है. यह सीट तेलंगाना से सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है. इस मामले में नियमों के मुताबिक जांच होनी चाहिए और यह हो भी रही है.’ खड़गे ने नाम लेने पर जताई आपत्ति राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,’जब तक मामले की जांच चल रही है और सब कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक आपको (सभापति) उनका (अभिषेक मनु सिंघवी) नाम नहीं बोलना था.’ खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा किया. इस पर खड़गे ने कहा कि ऐसा चिल्लर काम करके ही देश को बदनाम किया जा रहा है. आप (सभापति) किसी खास का नाम और सीट के बारे में कैसे कह सकते हैं?’ खड़गे के आरोपों पर सभापति ने कहा कि उन्होंने यह बताया है कि किस सीट पर मिला है और यह किसे अलॉट की गई है. दोनों पक्षों को करनी चाहिए निंदा: नड्डा बीजेपी चीफ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा,’यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मुद्दा है. यह सदन की गरिमा पर कुठाराघात है. मुझे विश्वास है कि सही जांच होगी. मुझे उम्मीद थी कि हमारे विपक्ष के नेता भी विस्तृत जांच की मांग करेंगे. विपक्ष को हमेशा सद्बुद्धि रखनी चाहिए. स्वस्थ मन और स्वस्थ भावना के साथ विवरण सामने आना चाहिए. दोनों पक्षों को इसकी निंदा करनी चाहिए.’

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