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पचमढ़ी से भी ठंडा रहा मंडला, पारा 6.8 डिग्री, बर्फीली हवा से शहडोल, मंडला शिमला, माउंट आबू, देहरादून, जम्मू और कटरा से भी ठंडे हैं

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की रात हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ठंडी हो गई है। गुरुवार-शुक्रवार की रात भोपाल में तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पचमढ़ी में पर 9.6 डिग्री रहा। सबसे ठंडा पूर्वी हिस्से का मंडला शहर रहा। बर्फीली हवा की वजह से शहडोल, मंडला जैसे छोटे शहर शिमला, माउंट आबू, देहरादून, जम्मू और कटरा से भी ठंडे हैं। यहां रात का टेम्प्रेचर 7 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। दिन भी सर्द हैं। सर्दी और कोहरे की वजह से ट्रेनों में रेलवे ने फॉग सेफ डिवाइस लगाई हैं। मौसम वैज्ञानिक कुमार ने बताया कि पश्चिम-उत्तर भारत के ऊपर जेट स्ट्रीम 278 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। एक दिन में ही 18 किमी रफ्तार बढ़ी है। इस वजह से प्रदेश में भी सर्द हवाएं आ रही हैं। अभी हवा की ऊंचाई 12.6 किमी है। जब यह नीचे बहेगी, तब ठंड का असर और तेज हो जाएगा। इसके अलावा पूर्वी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम और दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर डीप डिप्रेशन एक्टिव है। इसका असर भी प्रदेश में देखने को मिल रहा है। कल्याणपुर, मंडला ने पचमढ़ी को पीछे किया प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी है। हरियाली से घिरा होने से यहां अब तक दिन और रात का तापमान सबसे कम रहा, लेकिन फिलहाल शहडोल का कल्याणपुर और मंडला की रातें सबसे ठंडी हैं। बुधवार-गुरुवार की रात में कल्याणपुर में टेम्प्रेचर 6.1 डिग्री और मंडला में 6.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। पचमढ़ी में 7.2 डिग्री, उमरिया में 7.5 डिग्री, नौगांव में 8.6 डिग्री, मलाजखंड में 9.3 डिग्री और रीवा में पारा 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। इनमें से कई शहर ऐसे हैं, जो शिमला, माउंट आबू जैसे शहरों से भी ठंडे रहे। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात में शिमला में 7.2 डिग्री, देहरादून में 9.4 डिग्री, मसूरी में 7.1 डिग्री, माउंट आबू में 7 डिग्री, जम्मू शहर में 10.1 डिग्री और कटरा में तापमान 9.2 डिग्री रहा। देश के उत्तरी राज्यों के साथ-साथ अब मध्य भारत के राज्यों में भी ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने 8 राज्यों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। उत्तर भारत के राज्यों में बर्फबारी के कारण हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर फिलहाल सबसे ठंडे राज्य हैं। मौसम विभाग ने बताया हिमाचल के लाहौल स्पीति में रात का तापमान माइनस 11 डिग्री तक पहुंच गया है। यहां आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है। वहीं, मध्य भारत में MP के पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में ज्यादा सर्दी पड़ रही है। शहडोल और मंडला में न्यूनतम तापमान शिमला, देहरादून, जम्मू और कटरा से भी कम है। यहां रात का टेम्परेचर 7 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। उधर, तमिलनाडु में कल यानी 30 नवंबर की सुबह फेंगल तूफान टकरा सकता है। इसके असर के कारण तमिलनाडु के कई जिलों में पिछले 3 दिनों से तेज बारिश का दौर जारी है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी आज बारिश का अनुमान जताया गया है।

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने इस्कॉन मंदिर पर प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लगातार जारी हिंसा के बीच वहां के उच्च न्यायालय ने गुरुवार को इस्कॉन पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है। देशद्रोह के मामले में बांग्लादेश इस्कॉन के प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद से ही हिंदू समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान ही एक वकील की मौत हो गई, जिसके बाद बांग्लादेश में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मांगी थी रिपोर्ट वकीलों ने बुधवार को संगठन से संबंधित कुछ समाचार पत्रों की रिपोर्ट रखने के बाद उच्च न्यायालय से अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना समाज (इस्कॉन) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। द डेली स्टार के अनुसार, उच्च न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल से इस्कॉन की हालिया गतिविधियों के संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा था। क्यों उठा इस्कॉन का मुद्दा? बता दें बांगलादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसी के चलते चिन्मय कृष्ण दास शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को झड़पें हुईं, जिसमें एक असिस्टेंट सरकारी वकील सैफुल इस्लाम की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका ढाका हाईकोर्ट ने बांग्लादेश में इस्कॉन पर बैन लगाने की याचिका को आज खारिज कर दिया है। सरकारी वकील ने इस्कॉन पर बैन लगाने को ज़रूरी बताया, लेकिन हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने सरकार से कही यह बात.. हाईकोर्ट ने न सिर्फ बांग्लादेश में इस्कॉन पर बैन लगाने की याचिका को खारिज किया, बल्कि सरकार से एक बड़ी बात भी कही। हाईकोर्ट ने बांग्लादेश सरकार (अंतरिम) से पूरे देश में रह रहे हिंदुओं के जीवन, संपत्ति की रक्षा के लिए कानून व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। बताया कि गुरुवार को जब उच्च न्यायालय की कार्यवाही शुरू हुई तो अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने न्यायालय द्वारा मांगी गई जानकारी न्यायमूर्ति फराह महबूब और न्यायमूर्ति देबाशीष रॉय चौधरी की पीठ के समक्ष रखी। अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल अनीक आर हक और डिप्टी अटॉर्नी जनरल असद उद्दीन ने उच्च न्यायालय की पीठ को सूचित किया कि वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या और इस्कॉन की गतिविधियों के संबंध में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और इन मामलों में 33 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने लगाई बांगलादेश सरकार को फटकार अटॉर्नी जनरल की रिपोर्ट पढ़ने के बाद पीठ ने बांगलादेश सरकार को चेतावनी दी। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति और बांग्लादेश के लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा के बारे में सतर्क रहेगी। भारत ने जताई चिंता, किया सुरक्षा का आग्रह भारत ने मंगलवार को दास की गिरफ्तारी और जमानत से इनकार करने पर गहरी चिंता व्यक्त की और ढाका से हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारा परिवार हैं, प्रक्रियात्मक कठिनाइयां नहीं आने देंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पुरुषार्थ और परमार्थ का संगम है जर्मनी, इससे जुड़कर उद्योग के नये मार्ग होंगे प्रशस्त : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध करायेंगे हर सुविधा प्रक्रियात्मक कठिनाइयां नहीं आने देंगे निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारा परिवार हैं मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिये उपलब्ध है स्वर्णिम अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस : 2025 के लिए किया जर्मनी के निवेशकों को आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत और जर्मनी के आपसी संबंध हमेशा से बेहतर रहे हैं। पुरुषार्थ और परमार्थ से परिपूर्ण जर्मनी ने भारत के साथ हमेशा उद्योग मैत्री का रवैया रखा है। उन्होंने जर्मनी के निवेशकों को उन्नत तकनीकी के साथ मध्यप्रदेश में आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए आये निवेशकों को हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हमनें निवेशकों के हित में जटिलताओं को समाप्त/सरलीकृत कर प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को दूर करने का काम किया है। निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने पर बिजली और पानी की कमी नहीं आने दी जायेगी। निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारे परिवार का एक अंग हैं। हम उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने देंगे। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के लिये भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को म्यूनिख (जर्मनी) में अपनी 3 दिवसीय यात्रा के प्रथम दिन इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में फरवरी माह में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में आने के लिए जर्मनी के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के अतीतकाल से बहुत गहरे संबंध है। विशेष रूप से उद्योग और व्यवसाय जगत में भी हमारे संबंध बहुत मजबूत हैं। हमने इन संबंधों को निभाया भी है। यूरोप के सभी देशों से तुलना की जाए तो जर्मनी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा निवेश करने वाला देश है। मेरी यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यहां मैं एक स्पष्ट उद्देश्य से आया हूँ। हम जर्मनी के साथ एक नई तरह की साझेदारी चाहते हैं। साझेदारी केवल व्यापार तक ही सीमित न हो। हम चाहते हैं कि जर्मनी की कम्पनियां अपनी उन्नत तकनीक के साथ मध्यप्रदेश में निवेश करें। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो। मध्यप्रदेश एक सम्पूर्ण इन्वेस्टमेंट डेस्टीनेशन है। मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए स्वर्णिम अवसर भी उपल्बध हैं। जब मध्यप्रदेश की क्षमताओं की बात की जाती है, तो आंकड़े स्वयं बोलते हैं। मध्यप्रदेश आज भारत की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हमारी अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़ी है। हमारी विकास दर दोहरे अंक में है। लेकिन यह तो शुरूआत है। हम एक पॉवर सरप्लस स्टेट हैं। सिर्फ यही नहीं, प्रदेश में बिजली देने के लिए वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी की दिशा में मध्यप्रदेश काफी आगे बढ़ा है। इसके साथ ही पर्याप्त जल और भूमि की उपलब्धता भी मध्यप्रदेश की विशेषता है। हमारी यूएसपी है मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि जर्मनी के उद्योगपति जर्मनी ही नहीं, विश्व के कई देशों में ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन विद्वान मैक्स मूलर का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी सहित अन्य भाषाओं में अनुवाद किया। वे संस्कृत के भी विद्वान थे। स्वामी विवेकानंद भी उनकी प्रतिभा की प्रशंसा करते थे। जर्मनी ने विश्व युद्ध सहित अनेक कठिनाईयों का सामना किया है। लेकिन जर्मनी के नागरिकों की जीवटता सराहनीय है। उद्योग स्थापना की महत्वपूर्ण स्वीकृतियाँ 30 दिन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग स्थापना में आने वाली मुश्किलों को दूर करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार ने विशेष प्रयास किये हैं। मध्यप्रदेश को देश का इकलौता प्रदेश कहा जा सकता है, जहाँ उद्योग संबंधी सभी प्रकार की अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ मात्र 30 दिन में दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विभाग की मॉनीटरिंग उत्साही, जिज्ञासु और कर्मठ अधिकारियों के हाथों में है। इसके अतिरिक्त वे स्वयं निरंतर इस विभाग की मॉनीटरिंग करते हैं। मेहमान नहीं, परिवार बनकर आयें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मनी के निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर मेहमान की बजाये परिवार बनकर आये हैं। सभी को सुखद औद्योगिक माहौल मिलेगा। भारत के भावी आर्थिक लक्ष्यों का भी हृदय प्रदेश है मध्यप्रदेश ‘इन्वेस्ट अपोर्चुनिटीज इन एमपी’ के लिए गुरुवार को जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन को जर्मनी में भारत के कौंसुलेट जनरल शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का भौगोलिक हृदय प्रदेश तो है ही, साथ ही यह भारत के आर्थिक विकास का भी प्रमुख गंतव्य बन रहा है। सिन्हा ने जर्मनी के निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश का आव्हान कर उन्हें आश्वस्त करते हुए बताया कि यहां 5 पूर्ण विकसित हवाई अड्डे, 4 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग और विस्तृत रेलवे नेटवर्क है। मध्यप्रदेश के शहरों से देश के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक किसी भी स्थान पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से देश भर के पोर्ट्रस तक सुगम पहुंच इसे देश की सप्लाई चेन के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र बनाती है। सिन्हा ने मध्यप्रदेश में निवेश की अपार संभावनाओं पर जोर देते हुए मध्यप्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फ्रैंडली नीतियों की तारीफ की। उन्होंने जर्मन निवेशकों को बताया कि मध्यप्रदेश में कृषि, नवकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि निवेशकों के लिए भी विकास के नए द्वार खोल सकता है। जर्मन निवेशकों के लिए मध्यप्रदेश आइडियल डेस्टिनेशन डॉ. टोबियास रोसेन्थाल, चेयरमेन, बेयरलोशर ने कहा कि जर्मन निवेशकों के लिये मध्यप्रदेश आइडियल डेस्टिनेशन है। मध्यप्रदेश में एडिटिव प्लास्टिक उत्पादक कंपनी बेयरलोशर के चेयरमेन डॉ. रोसेन्थाल ने मध्यप्रदेश में उद्यमिता के अपने 25 वर्ष के अनुभव साझा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में उनका इतना अच्छा अनुभव रहा कि उनकी कंपनी ने दुनिया भर के 15 प्लांट्स में सबसे बड़ा प्लांट मध्यप्रदेश में स्थापित किया। डॉ. रोसेन्थाल ने जर्मन निवेशकों को बताया मध्यप्रदेश निवेश के लिये आइडियल डेस्टिनेशन है, क्योंकि यहाँ अच्छे व कुशल मानव संसाधन, उपयुक्त इन्फ्रॉस्ट्रक्चर असिस्टेंस और प्रदेश सरकार की ओर … Read more

मध्यप्रदेश में जनवरी 2025 से 3 प्रतिशत बढ़ेगा महंगाई भत्ता, नए साल पर कर्मचारियों को तोहफा!

भोपाल प्रदेश के 7 लाख से अधिक कर्मचारियों का महंगाई भत्ता सरकार नए साल में फिर बढ़ाएगी। यह जनवरी 2024 से 46 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया है। जबकि, केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2024 से 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है।  जनवरी 2025 में केंद्र सरकार महंगाई भत्ता और राहत में फिर वृद्धि करेगी। इसे देखते हुए वित्त विभाग भी 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ाने में की देरी मध्य प्रदेश में 2024 के पहले तक जब-जब केंद्र सरकार महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि करती थी, तब राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता और राहत बढ़ा देती थी। अब इसमें विलंब हो रहा है। अभी भी केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है। राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को नहीं मिला लाभ अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत किया जा चुका है, लेकिन राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि सरकार नए साल में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है, क्योंकि केंद्र सरकार फिर इसमें वृद्धि कर सकती है। उल्लेखनीय है कि बजट में 56 प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ते का प्राविधान है। विभागों का स्थापना व्यय भी इसके अनुसार ही तैयार हुआ है, यानी बजट प्राविधान की कोई समस्या नहीं है। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की है, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया। जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है। पहली किस्त दिसंबर में दी जाएगी। दूसरी जनवरी, तीसरी फरवरी और चौथी किस्त की राशि खातों में मार्च 2025 में आएगी।

मालवा की गंगा शिप्रा में दूषित पानी मिलने से बचाने अब 919 करोड़ रुपये की दूसरी योजना पर काम

उज्जैन  प्रदूषित कान्ह नदी का पानी उज्जैन आकर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में मिल रहा है। फिलहाल ये मिलन रोकने को कोई प्रबंध नहीं है। वर्ष 2016 में 95 करोड़ रुपये खर्च कर एक प्रबंध किया था मगर वो सफल न हो सका। नतीजतन, अब 919 करोड़ रुपये की दूसरी योजना पर काम चल रहा है जो 2027 में पूरी होगी। यानी तब तक शिप्रा में गंदा पानी मिलता रहेगा। मालूम हो कि देश के सबसे स्वच्छ पड़ोसी शहर इंदौर का सीवेज युक्त पानी कान्ह नदी के रूप में उज्जैन आकर शिप्रा नदी में मिलता है। 95 करोड़ रुपये हुए थे खर्च इससे शिप्रा का स्वच्छ जल भी प्रदूषित होता है। ये मिलन रोकने को प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 में 95 करोड़ रुपये खर्च कर कान्ह का रास्ता पाइपलाइन के माध्यम से बदलने का काम किया था। योजना स्वरूप नहान क्षेत्र (त्रिवेणी घाट से कालियादेह महल तक) को स्वच्छ रखने के लिए पिपल्याराघौ से कालियादेह महल के आगे तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाई थी। योजना को बनाते समय दूरदर्शी दृष्टिकोण न अपनाया और नतीजा ये निकला कि परियोजना पूरी होने के बाद भी शिप्रा के नहान क्षेत्र में भी प्रदूषित पानी नहीं मिलता रहा और अब भी मिल रहा है। इधर, उज्जैन शहर में 438 करोड़ रुपये की भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन परियोजना का काम भी समय-सीमा गुजरने के पांच साल बाद भी अधूरा है। जन भावनाओं और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर इन सब स्थितियों का असर जन भावना और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बहरहाल, अब 919 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का काम शुरू कराया है। योजना अंतर्गत त्रिवेणी घाट के समीप जमालपुरा गांव में स्टापडैम बनाकर कान्ह का पानी रोका जाएगा। यहां से कान्ह का पानी 30.15 किलोमीटर दूर गंभीर नदी पर बने बांध के डाउन स्ट्रीम क्षेत्र के सिंगवाड़ा गांव में प्रवाहित गंभीर नदी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए 12 किलोमीटर हिस्से में 5.30 मीटर व्यास की टनल बनाई जाएगी। योजना पूरी होने पर गंभीर में मिलेगा कान्ह का पानी 18.5 मीटर लंबी डी आकर की आरसीसी बाक्सनुमा पाइपलाइन बिछाई जाएगी। प्रारंभिक और अंतिम छोर पर 140-140 मीटर की ओपन चैनल बनाई जाएगी। योजना के पूरा होने पर कान्ह का पानी गंभीर नदी में आकर मिलेगा। यह पानी सिंगवाड़ा से असलोदा, तुम्बावड़ा, सुर्जखेड़ी, गुधा, रूपाखेड़ी, कनार्वद, सर्वाना उन्हेल होकर बरखेड़ा मदन गांव में मेलेश्वर महादेव मंदिर के समीप शिप्रा नदी में जाकर मिलेगा। परियोजना, का निर्माण वर्ष 2052 के समय की इंदौर, सांवेर की आबादी और 40 क्यूमेक जल उद्वदित क्षमता को ध्यान में रखकर किया है। ये महाकुंभ सिंहस्थ 2028 और उसके बाद के सिंहस्थ में बहुत उपयोगी साबित होगी। शिप्रा नदी शुद्ध नहीं हो सकी शिप्रा नदी को स्वच्छ एवं प्रवाहमान बनाने के लिए बीते एक दशक में प्रदेश सरकार एक हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, बावजूद शिप्रा नदी शुद्ध न हो सकी है। अगले तीन वर्ष में दो हजार करोड़ रुपये और खर्च करने की तैयारी है। दावा है कि ये काम होने पर शिप्रा में सीधे नालों का पानी मिलना बंद हो जाएगा और शिप्रा में वर्षभर शिप्रा का ही जल भरा रहा।

अब ट्रेन से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंच सकेंगे श्रद्धालु, स्टेशन पर चल रहा फिनिशिंग का काम

इंदौर  देश दुनिया में प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द ही रेल सेवाएं मिलना शुरू हो जाएगी। मंदिर से करीब 10 किमी पहले मोरघड़ी गांव में ओंकारेश्वर रोड स्टेशन बनाया जा रहा है। जिसका 90 फीसद काम पूरा हो चुका है और फिनिशिंग का काम चल रहा है। रतलाम मंडल ने इस स्टेशन से ट्रेन संचालन के लिए मार्च 2025 तक का लक्ष्य तय कर रखा है। इसी लिहाज से तेजी से काम भी किया जा रहा है। जनवरी-फरवरी तक स्टेशन भवन सहित तमाम यात्री सुविधाएं पूरी कर ली जाएंगी। निरीक्षण कर रिपोर्ट दी गई है उल्लेखनीय है कि सनावद से ओंकारेश्वर रोड स्टेशन से जुलाई में सीआरएस(कमीशन ऑफ रेलवे सेफ्टी) दल द्वारा निरीक्षण कर ओके रिपोर्ट दी जा चुकी है। नए ओंकारेश्वर रोड स्टेशन को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के डिजाइन पर तैयार किया जा रहा है। पुराने स्टेशन से 1.3 किमी दूर बना है नया स्टेशन यह स्टेशन पुराने रेलवे स्टेशन से करीब 1.3 किमी सनावद की ओर मोरघड़ी गांव में बनाया जा रहा है। जमीनी सतह से यह स्टेशन करीब दो मीटर उंचाई पर आकार ले रहा है। स्टेशन के अंदर से गांव में जाने के लिए अंडर पास बनाया गया है। वहीं स्टेशन के प्लेटफार्म पर जाने के लिए सब-वे बनाया गया है। प्लेटफार्म पर रहेगी लिफ्ट और सीढ़‍ियों की सुविधा यहां प्लेटफार्म तक जाने के लिए लिफ्ट और सीढ़िया दोनों की सुविधा रहेगी। यहां पर पार्किंग, ठहरने के लिए रिटायरिंग रूम, तैयार होने के लिए वेटिंग हाल, फूड प्लाजा, स्टाल सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी। पूरे स्टेशन पर ओंकारेश्वर तीर्थ, नर्मदा नदी और आस-पास की धरोहर- पर्यटन स्थल की पेटिंग और जानकारी चस्पा की जाएगी। 560 मीटर लंबे बने रहे स्टेशन पर होंगे दो प्लेटफार्म रतलाम मंडल में यह स्टेशन नई डिजाइन से बनाया जा रहा है। 560 मीटर लंबे स्टेशन पर दो प्लेटफार्म बनाएं गए हैं। तीन रेल लाइन भी बिछाई जा चुकी है। स्टेशन के प्लेटफार्म-1 पर जाने के लिए अंडरपास का उपयोग करना होगा। पार्किंग आदि भी मुख्य सड़क से दूसरी ओर बनाई जा रही है। स्टेशन भवन दो मंजिला बनाया गया है। यहां ग्राउंड फ्लोर पर बुकिंग कार्यालय व यात्री सुविधाएं होंगी। जुलाई में सनावद से ओंकारेश्वर रोड स्टेशन के बीच 5.4 किमी रेल खंड पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाकर स्पीड ट्रायल कर लिया गया है। यानी की मार्च माह तक ट्रेन संचालन शुरू हो जाएगा। अंडर पास से गुजरेगा यातायात मोरटक्का के पास रेलवे फाटक-274 को खत्म कर अंडरपास बनाया गया है, जिसका 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। स्टेशन शुरू होते ही इंदौर-खंडवा फोरलेन का यातायात इसी अंडरपास से होकर गुजरेगा। रेलवे ने इस स्टेशन को पूरा करने के लिए मार्च 2025 तक का लक्ष्य रखा है। लेकिन इससे पहले ही एक लाइन शुरू कर दी जाएगी, ताकि खंडवा की ओर रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालु सीधे यहां तक पहुंच सकें। इस लाइन को शुरू करने के लिए 15 जुलाई को सीआरएस (कमीशन आफ रेलवे सेफ्टी) दल द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। रतलाम मंडल का यह ऐसा पहला रेलवे स्टेशन होगा, जहां प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए सब-वे का उपयोग किया जाएगा। स्टेशन भवन में जहां अत्याधुनिक यात्री सुविधाएं होंगी, वहीं अध्यात्म का परिवेश भी रहेगा। स्टेशन भवन को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। रतलाम मंडल ने 2019 में नए ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन का प्रोजेक्ट तैयार किया था। यह स्टेशन पुराने रेलवे स्टेशन से करीब 1.3 किमी सनावद की ओर मोरघड़ी गांव में बनाया जा रहा है। जमीनी सतह से यह स्टेशन करीब दो मीटर उंचाई पर आकार ले रहा है। ऐसा है ओंकारेश्वर रोड स्टेशन     स्टेशन के अंदर से ही गांव में जाने के लिए अंडरपास बनाया गया है।     स्टेशन के प्लेटफार्म पर जाने के लिए सब-वे बनाया गया है।     यहां प्लेटफार्म तक जाने के लिए लिफ्ट और सीढ़ियां दोनों रहेंगी।     560 मीटर लंबे स्टेशन पर दो प्लेटफार्म होंगे और तीन रेल लाइन डलेंगी।     रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म-दो की ओर पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है। वेटिंग हॉल, फूड प्लाजा सहित कई सुविधाएं रहेंगी नए ओंकारेश्वर रोड स्टेशन को मंदिर की डिजाइन में बनाया जा रहा है। यहां पार्किंग, ठहरने के लिए रिटायरिंग रूम, तैयार होने के लिए वेटिंग हॉल, फूड प्लाजा, स्टाल सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी। पूरे स्टेशन पर ओंकारेश्वर तीर्थ, नर्मदा नदी और आस-पास की धरोहर- पर्यटन स्थल की पेंटिंग और जानकारी चस्पा की जाएगी। मुख्य स्टेशन की इमारत गांव की ओर बन रही रेल अफसरों ने बताया कि स्टेशन दो फ्लोर का बन रहा है। दोनों ओर ग्राउंड फ्लोर पर बुकिंग कार्यालय आदि रहेंगे। मुख्य इमारत प्लेटफार्म-एक यानी गांव की ओर बन रही है। मोरटक्का के पास रेलवे फाटक-274 के पास अंडरपास बनाया जा रहा है। छह-छह मीटर के इन अंडरपास से ही वाहन सीधे प्लेटफार्म-एक की ओर पहुंचेंगे। स्टेशन के दोनों ओर पार्किंग सुविधा भी रहेगी।

फेस्‍ट‍िव सीजन में देश में क्रेडिट कार्ड से खर्च 2 लाख करोड़ रुपये के पार, सितंबर महीने की तुलना में 14.5 प्रतिशत ज्‍यादा

नई दिल्ली फेस्‍ट‍िव सीजन के दौरान देश में क्रेडिट कार्ड से खर्च 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. यह सितंबर महीने की तुलना में 14.5 प्रतिशत ज्‍यादा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में क्रेडिट कार्ड पर खर्च 2.02 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत ज्‍यादा है. केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, सिस्टम में बकाया क्रेडिट कार्ड 12.85 प्रतिशत बढ़कर 106.88 मिलियन हो गए, जो सितंबर से 0.74 प्रतिशत ज्‍यादा है. HDFC बैंक ने सबसे ज्‍यादा क्रेडिट कार्ड जारी क‍िये एचडीएफसी बैंक 241,119 क्रेडिट कार्ड जारी कर चार्ट में सबसे आगे रहा, उसके बाद एसबीआई कार्ड्स ने 220,265 कार्ड और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने 138,541 कार्ड जारी किए. इस बीच, आरबीआई के मासिक आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई बेस्‍ड डिजिटल पेमेंट उछाल के कारण, डेबिट कार्ड बेस्‍ड लेनदेन अगस्त में करीब 43,350 करोड़ रुपये से करीब 8 प्रतिशत घटकर सितंबर में करीब 39,920 करोड़ रुपये रह गया. सितंबर में करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई दूसरी तरफ देश में क्रेडिट कार्ड लेनदेन में वृद्धि हुई, जिसमें सितंबर के महीने में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो अगस्त में 1.68 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये हो गई. बाजार के जानकारों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड खर्च में वृद्धि पिछले साल और फेस्‍ट‍िव सीजन में लोअर बेस के कारण हुई है, क्योंकि फेस्‍ट‍िव सीजन के दौरान समान मासिक किस्तों जैसी प्रमोशनल स्कीम में तेजी आई है. मार्च 2021 में डिजिटल पेमेंट की हिस्सेदारी 14-19 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2024 में 40-48 प्रतिशत हो गई, जिसमें यूपीआई की अहम भूमिका रही. यूपीआई पेमेंट में 75 प्रतिशत सीएजीआर की शानदार गति से वृद्धि हुई है, जबकि अगस्त 2019-अगस्त 2024 की अवधि में यूपीआई खर्च 68 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़ा है, क्योंकि कार्ड इंडस्ट्री की वृद्धि धीमी रही है. एक्सिस सिक्योरिटीज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता लेनदेन मात्रा अनुपात से देखी जा सकती है, जो क्रेडिट कार्ड लेनदेन मात्रा का 38.4 गुना है. हालांकि, यूपीआई लेनदेन के कम (मूल्य के) टिकट साइज को देखते हुए, अगस्त में यूपीआई-टू-क्रेडिट कार्ड खर्च 0.3 गुना रहा, जो वर्तमान स्तरों पर काफी हद तक स्थिर है.

बुधनी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने बीजेपी की चिंता बढ़ाई

सीहोर  बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। 23 नवंबर 2024 को हुए इस चुनाव में भाजपा को मात्र नौ प्रतिशत वोटों से जीत मिली, जबकि कुछ महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को लगभग 70% वोट मिले थे। इस बार भाजपा को 52% और कांग्रेस को 43% वोट मिले। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी और भाजपा के वोट शेयर में गिरावट ने भाजपा के लिए चिंता का विषय पैदा कर दिया है। खासकर 136 पोलिंग बूथ पर मिली हार और 98 बूथ पर बेहद कम अंतर से जीत ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 20 साल बाद ऐसी टक्कर बुधनी विधानसभा में लगभग 20 साल बाद इतना रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन दोनों दलों के लिए यह चुनाव सीख देने वाला रहा। पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो कांग्रेस ने भले ही चुनाव हारा हो, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। बीजेपी का प्रदर्शन गिरा भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट साफ दिखी। 2018 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 43 पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा था। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर 16 रह गई थी। लेकिन हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा को 136 पोलिंग बूथ पर हार मिली। 16 से 136 तक पहुंचने वाली हार के आंकड़ों ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 98 बूथों पर कांटे की टक्कर इस उपचुनाव में 98 पोलिंग बूथ ऐसे रहे, जहां दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर रही। इन बूथों पर जीत और हार का अंतर 50 वोटों से भी कम रहा। भाजपा 50 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। कांग्रेस 48 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। इन बूथों पर जीत-हार का अंतर 2 से लेकर 49 वोटों तक रहा। कई बूथ ऐसे रहे, जहां जीत का अंतर सिर्फ 2, 7, 9 और 10 वोटों का रहा। डोबा और महागांव बूथ पर भाजपा सिर्फ 2 वोटों से जीती। नारायणपुर में 13 वोट, ग्वाडिया में 6 वोट, जोशीपुरा में 10 वोट, बुधनी के पांच बूथों पर 30, 49, 6, 18, 35 वोटों से जीत मिली। किरार समाज पर भारी बारेला वोट इस चुनाव में बारेला समाज के वोट किरार समाज के वोटों पर भारी पड़े। कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल किरार समाज से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र में किरार समाज के लगभग 23,000 वोट हैं। ऐसा माना जा रहा था कि किरार वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। लेकिन राजकुमार पटेल को अपने समाज का पूरा समर्थन नहीं मिला। बारेला समाज के वोट भाजपा की तरफ चले गए। भाजपा प्रत्याशी को 38 पोलिंग बूथ पर बारेला समाज के 12,000 से ज्यादा वोट मिले। 16 अन्य बूथों पर बारेला समाज के 4,000 से ज्यादा वोट भाजपा को मिले। कुल मिलाकर भाजपा को बारेला समाज के 16,000 से ज्यादा वोट मिले, जो उसकी जीत की बड़ी वजह बने। किरार समाज में भी भाजपा ने सेंध लगाई। इस वजह से राजकुमार पटेल अपने गृह क्षेत्र से बड़ी बढ़त नहीं बना पाए। कांग्रेस का भी यही हाल कांग्रेस को 48 पोलिंग बूथ पर 50 से भी कम वोटों से जीत मिली। कई बूथ ऐसे थे जहां जीत का अंतर सिर्फ 1, 2, 5, 7 और 11 वोटों का रहा। तीन बूथों पर 1 वोट और एक बूथ पर 2 वोटों से कांग्रेस जीती। सलकनपुर में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से देवीलोक का निर्माण हो रहा है। लेकिन सलकनपुर पंचायत के मतदाताओं ने भाजपा को 1 वोट से हरा दिया। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है। रमाकांत भार्गव ने जिस गांव को गोद लिया, उसमें जीत बसंतपुर गांव में बारेला, बंजारा, गोंड और अन्य समाज के लोग रहते हैं। रमाकांत भार्गव ने सांसद रहते हुए इस गांव को गोद लिया था, लेकिन अपने कार्यकाल में एक बार भी गांव नहीं गए। पिछले साल ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन फिर भी बसंतपुर के मतदाताओं ने रमाकांत भार्गव को 540 वोट देकर 349 वोटों से जीत दिलाई। राजकुमार पटेल को यहां सिर्फ 191 वोट मिले। गांव में कुल 796 वोट पड़े थे।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की बायसन प्रोजेक्ट 2 की तैयारी पूरी, बायसन जनवरी 2025 के शुरुआत में लाए जा सकते

उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के बाद अब बायसन के लिए भी प्रसिद्ध हो सकता है। यहां देश-विदेश से पर्यटक बाघों का दीदार करने के लिए पहुंचते हैं, क्योंकि यहां बाघों का दिखना आसानी है। लेकिन, अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बायसन की हेल्दी पॉपुलेशन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है, जिसके तहत बायसन प्रोजेक्ट 2 की तैयारी पूरी कर ली गई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि यहां 50 और बायसन लाने की तैयारी की गई है, जो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए जाएंगे। ये बायसन जनवरी 2025 के शुरुआत में लाए जा सकते हैं।   ऐसा नहीं है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अभी बायसन नहीं हैं। डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि 2011-12 में कान्हा से 50 बायसन लाए गए थे, जिनकी संख्या अब 170 हो चुकी है। कुल 120 बायसन यहां बढ़े हैं। बांधवगढ़ के मगधी, कल्लवाह और ताला परिक्षेत्र के जंगलों में बायसन झुंड में देखे जा सकते हैं। बायसन क्यों लाए जा रहे हैं? इस पर डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा बताते हैं कि हाल ही में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून द्वारा किए गए सर्वे में यह पाया गया कि कान्हा के बायसन आपस में इनब्रीड हो रहे हैं। जिससे उनकी जेनेटिक गुणवत्ता पर असर पड़ा है और उनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो रहा है। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट रही है, क्योंकि इनका जीन पूल सीमित है। सतपुड़ा के बायसन का वेरिएंट थोड़ा अलग है, इसलिए 50 बायसन सतपुड़ा से लाए जा रहे हैं ताकि बायसन की विविधता बनी रहे और उनकी पॉपुलेशन हेल्दी बने। 50 बायसन लाने की अनुमति प्राप्त बांधवगढ़ में बायसन के सैंपल पहले लिए गए थे और उन पर अध्ययन किया गया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। रिसर्च पेपर तैयार करने के बाद इसे पीसीसी वाइल्डलाइफ को भेजा गया और फिर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से 50 बायसन लाने की अनुमति मिली है। यह बायसन प्रोजेक्ट 2 के तहत किया जा रहा है, जो 2025 के शुरुआती महीनों में पूरा हो सकता है। बाड़े में रखे जाएंगे बायसन बायसन प्रोजेक्ट 2  के तहत लाए जाने वाले बायसन को पहले 50 हेक्टेयर के बाड़े में रखा जाएगा, जहां उन्हें 30 दिनों तक निगरानी की जाएगी। इसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ने की तैयारी की जाएगी। यह बाड़ा बांधवगढ़ के कल्लवाह परिक्षेत्र में बनाया जाएगा। जंगल में इकोसिस्टम और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बायसन का महत्व है, क्योंकि बायसन मोटी घास खाते हैं, जिसके बाद नई घास उगती है, जिसे अन्य वन्य प्राणी खाते हैं। इसलिए बायसन के रहने से आसपास के अन्य वन्य प्राणियों की संख्या भी बढ़ती है।

अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 750 सीटें बढ़ जाएंगी

भोपाल मध्य प्रदेश में अगले शैक्षणिक सत्र से 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, जो बुदनी, मंडला, श्योपुर, सिंगरौली और राजगढ़ में स्थापित होंगे। इन कॉलेजों में 150-150 सीटों की व्यवस्था होगी, जिससे राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 750 सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा, 12 नए प्राइवेट मेडिकल कॉलेज जिला अस्पतालों से जुड़ने के बाद स्थापित किए जाएंगे, जिससे 1200 सीटों की वृद्धि होगी। इस प्रकार, राज्य में कुल 1950 सीटों की बढ़ोतरी की संभावना है। इन नए कॉलेजों के उद्घाटन के बाद राज्य में सरकारी कॉलेजों की संख्या 21 और निजी कॉलेजों की संख्या 15 हो जाएगी, जिससे कुल 36 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो जाएंगे। इसके अलावा, 12 नए प्राइवेट कॉलेज पीपीपी मोड पर खोले जाने का प्रस्ताव है, जिसके बाद कुल मेडिकल कॉलेजों की संख्या 48 हो जाएगी। 12 जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज टीकमगढ़, बालाघाट, धार, सीधी, खरगोन, पन्ना, बैतूल, भिंड, नर्मदापुरम, देवास, मुरैना और कटनी में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। इन कॉलेजों को पीपीपी मोड पर स्थापित किया जाएगा। 2003 तक राज्य में केवल 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन पिछले 20 वर्षों में 12 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, और अब 12 और मेडिकल कॉलेज पीपीपी मोड पर स्थापित किए जाएंगे। इस प्रकार, राज्य में 50 मेडिकल कॉलेजों का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही 12 नए प्राइवेट कॉलेज भी खुलेंगे। जिला अस्पतालों से संबद्धता के बाद खुलने वाले निजी कॉलेजों में 1200 सीटें रहेंगी। 1950 मेडिकल सीटें बढ़ने से MBBS की पढ़ाई करने वाले छात्रों का भविष्य संवरेगा। MP में डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी। लोगों को बेहतर इलाज भी मिलेगा। 17 नए कॉलेज खुलते ही MP में कुल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 47 हो जाएगी। इन जिलों में खुलेंगे प्राइवेट मेडिकल कॉलेज बता दें कि MP में 2003 तक सिर्फ 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे। 20 साल में 12 नए मेडिकल कॉलेज खुले। अब एक साथ फिर 5 सरकारी और 12 निजी मेडिकल कॉलेज खुलेंगे। निजी कॉलेज पीपीपी मोड पर खोले जाएंगे। कटनी, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, सीधी, खरगोन, पन्ना, बैतूल, भिंड, नर्मदापुरम्, देवास और मुरैना में निजी मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। एमपी के इन जिलों में हैं मेडिकल कॉलेज बता दें कि अभी एमपी के 17 जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल, विदिशा, रतलाम, दतिया, खंडवा, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, सतना, सिवनी, मंदसौर और नीमच को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल चुकी है। सरकारी कॉलेजों में मेडिकल की कुल 2180 सीटें हैं। प्राइवेट की 1950 सीटें मिलाकर कुल सीटों की संख्या 4130 है। नए कॉलेज खुलने पर टॉप-10 में आ जाएगा एमपी देशभर में सबसे ज्यादा 72 मेडिकल कॉलेज तमिलनाडु में हैं। 70 मेडिकल कॉलेज के साथ कर्नाटक दूसरे नंबर पर है। 68 मेडिकल कॉलेजों के साथ उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश फिलहाल 30 मेडिकल कॉलेज हैं। एमपी का नंबर देश में 10वां है। अगले साल 47 मेडिकल कॉलेज होने पर एमपी इस सूची में छठवें स्थान पर पहुंच जाएगा। PPP मोड पर खोले जाएंगे यह कॉलेज कटनी, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, सीधी, खरगोन, पन्ना, बैतूल, भिंड, नर्मदापुरम्, देवास और मुरैना में पीपीपी मोड पर कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। बता दें कि देश में सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज तमिलनाडु (72) में हैं, इसके बाद कर्नाटक (70) और उत्तर प्रदेश (68) का स्थान है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में 36 मेडिकल कॉलेज हैं, जो देश में 10वें स्थान पर है। लेकिन अगले साल 48 कॉलेज हो जाने से प्रदेश 6वें स्थान पर पहुंच जाएगा।

पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में पहली बार दिखी महिला कमांडो, वायरल हो रही SPG कमांडो की ये धाकड़ तस्वीर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कथित तौर पर शामिल एक महिला एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) कमांडो की तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर ने ऑनलाइन बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोगों ने दावा किया कि यह पहली बार है जब किसी महिला कमांडो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में देखा गया है। वहीं, अन्य ने बताया कि यह महिला कमांडो पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा में भी देखी जा चुकी हैं। तस्वीर शेयर कर रहे भाजपा सांसद कई भाजपा सांसद इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं। मंडी से सांसद कंगना रनौत ने भी इसे अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है।केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात महिला SPG कमांडो की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी बहादुरी और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने लिखा, “भारत की शान, नारी शक्ति की पहचान! SPG में ड्यूटी पर तैनात हमारी साहसी महिला सुरक्षा अधिकारी देश की सेवा और सुरक्षा में नया मानदंड स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह नया भारत है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भरता और ताकत की मिसाल बन रही हैं।” चिक्काबल्लापुरा से भाजपा के लोकसभा सांसद डॉक्टर के सुधाकर ने भी यही तस्वीर शेयर की है। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री की एसपीजी में महिला कमांडो! अग्निवीर से लेकर लड़ाकू पायलट तक, लड़ाकू पदों से लेकर प्रधानमंत्री की एसपीजी में कमांडो तक, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। महिलाओं को और अधिक शक्ति मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।” पहले भी देखी जा चुकी हैं महिला SPG कमांडो इसके अलावा, कई अन्य लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया है कि ऐसा पहली बार है जब पीएम की सुरक्षा में कोई महिला SPG कमांडो तैनात है। ऐसा ही दावा सात साल पहले भी किया गया था जब एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में एक महिला कमांडो को देखा गया था। यानी ये साफ है कि महिला SPG कमांडे पहले भी पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में देखी जा चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, एसपीजी ने 2013 से महिला कमांडो को अपने दस्ते में शामिल करना शुरू किया था, जिससे महिलाओं को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भागीदारी का अवसर मिला। कथित तौर पर यह तस्वीर संसद की है, जहां महिला एसपीजी कमांडो तैनात हैं। इन कमांडो को आम तौर पर महिला विजिटर्स की तलाशी लेने के लिए गेट पर तैनात किया जाता है और वे परिसर में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले लोगों की निगरानी करने में भी शामिल होती हैं। इसके अलावा, जब कोई महिला अतिथि प्रधानमंत्री से मिलती है, तो महिला एसपीजी अधिकारी ही सुरक्षा जांच, एस्कॉर्टिंग और प्रधानमंत्री तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। हालांकि जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें दिख रही महिला अधिकारी PM मोदी की सुरक्षा में नहीं राष्ट्रपति मुर्मू की सुरक्षा में तैनता थीं। बताया जा रहा है कि यह फोटो 26 नवंबर को उस वक्त की है जब राष्ट्रपति मुर्मू संसद को संबोधित करने जा रही थीं। 2015 से, महिलाओं को एसपीजी की क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) में भी शामिल किया गया है। यानी अब पीएम के सबसे करीबी सुरक्षा घेरे में भी महिला कमांडो तैनात होती हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान, महिला एसपीजी कमांडो सुरक्षा दल का हिस्सा होती हैं। वर्तमान में, एसपीजी में कथित तौर पर करीब 100 महिला कमांडो हैं। पहली बार 2013 में महिला एसपीजी कमांडो को किसी उच्च-स्तरीय हस्ती की सुरक्षा में तैनात किया गया था। उस समय दो महिला कमांडो को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर की सुरक्षा करते देखा गया था। महिला कमांडो की उपस्थिति प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति एसपीजी की व्यापक सोच और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह कदम न केवल महिलाओं को समान अवसर प्रदान करता है, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता करता है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप क्या है? स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) भारत का एक बेहद खास और एलीट सुरक्षा बल है, जिसे देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री, उनके निकट परिजन, और पूर्व प्रधानमंत्रियों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है। एसपीजी की स्थापना 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी। इसे संसद द्वारा 1988 में पारित एसपीजी अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता दी गई। इस अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को किसी भी आतंकी, विदेशी या अन्य खतरों से अत्यंत सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए।  

मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं, कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं: रिपोर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह जानकारी पुलिस की खुफिया रिपोर्ट में सामने आई है। ये सभी अलग-अलग समूह में पुरुषों के साथ काम कर रही हैं। यह भी पता चला है कि कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं। गांव के लोगों के साथ संवाद करने, उनकी समस्याएं जानने, पर्चा बांटने, लोगों को बरगलाने या किसी तरह की सहायता मांगने के लिए नक्सली महिलाओं को ही आगे करते हैं। महिलाएं गांव के लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाती हैं। इससे उन्हें गांव में प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी भी मिलती रहती है। पुरुषों की तरह महिलाएं भी छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र से ही हैं। अधिकतर महिलाओं की उम्र 25 से 40 वर्ष की है।   इस बार मुठभेड़ में नहीं फेंका पर्चा अभी तक ऐसा होता रहा कि नक्सली मुठभेड़ के दौरान अपने मांगों से जुड़ा पर्चा फेंक कर जाते थे। पिछले दिनों बालाघाट में हुई मुठभेड़ में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। यह जरूर पता चला है कि इसके पहले कुछ गांवों में उन्होंने तेंदूपत्ता की राशि बढ़ाने, बांस कटाई की दर बढ़ाने और मजदूरी बढ़ाने के लिए पर्चे फेंके थे। गांव के लोगों का समर्थन पाने के लिए वह ऐसी मांग रखते हैं। नक्सलियों की मांग के अनुसार नहीं करते काम पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि हम उनकी मांग के हिसाब से नहीं बल्कि अन्य विभाग और एजेंसियों से मिलकर विकास की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधाएं बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर का निर्माण, सड़क निर्माण, सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाने का काम करते हैं। निजी कंपनियों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) से भी काम कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कोल आधारित विद्युत उत्पादन के लिए कोल आवंटन के लिए स्वीकृतिप्रदान की है। इससे 4100 मेगावॉट विद्युत उत्पादन के लिए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने सभी विभागों को प्रगति के अवसर दिये हैं। वे जानते हैं कि बिजली के बिनाविकास की कल्पना संभव नहीं है। यह एक बड़ा अवसर है, जिससे हम प्रदेश में ही स्वयं के पॉवर प्लांट लगा सकते हैं। कोल आवंटन करेगा संजीवनी का काम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में हम आज भी सरप्लस की स्थिति में हैं, परंतु औद्योगिक विकास के लिए नए उद्योगों की स्थापना के परिणामस्वरूप बिजली की खपत में भी निरंतर वृद्धि होती जा रही है। भविष्य की दृष्टि से भी हमें नए थर्मल पॉवर स्टेशन की आवश्यकता होगी। यह कोल आवंटन उसमें संजीवनी की तरह काम करेगा। हम थर्मल पॉवर के नए स्टेशन की स्थापना के लिए उद्यमियों को प्रेरित करेंगे। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि साथ ही राज्य नवकरणीय ऊर्जा की ओर भी समान रूप से आगे बढ़ रहा है। 25 हजार करोड़ रूपये का प्राप्त होगा निवेश उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की आगामी लंबी अवधि की विद्युत मांग के आंकलन के आधार पर 27 नवम्बर को भारत सरकार की उच्च स्तरीय अंतर्विभागीय समिति द्वारा प्रदेश के ऊर्जा विभाग के प्रस्तुतिकरण के आधार पर कुल 4100 मेगावॉट के नए थर्मल पॉवर प्लांट लगाने के लिये कोयला आवंटन स्वीकृत किया गया है। इस संबंध में संयंत्र लगाने के लिये प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा निविदा जारी की जायेगी। इससे लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त होगा। साथ ही हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रदेश उद्योग, घरेलू एवं कृषि सिंचाई के लिये सस्ती और गुणवत्तापूर्ण ऊर्जा प्रदाय करेगा और ऊर्जा उत्पादन में आत्म-निर्भर बना रहेगा।  

किसी भी देश या प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास की गति किसानों के उत्थान से ही संभव हो सकती है : नारायण सिंह कुशवाह

भोपाल नारायण सिंह कुशवाह देश और प्रदेश की उन्नति सर्वोपरि है। इसके लिए किसानों को आर्थिक दृष्टि से सशक्त करना आवश्यक है, जिससे किसान संपन्न हो सकें और देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकें। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी देश या प्रदेश की  आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास की गति किसानों के उत्थान से ही संभव हो सकती है। इसके लिए प्रदेश के विकास में उद्यानिकी भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। इसके लिये नवाचार और तकनीकी सुधार किये जा रहे है। देश के 10% क्षेत्रफल वाले राज्य मध्यप्रदेश में देश की लगभग 7% आबादी निवास करती है। यहां 11 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जाता है। राज्य की कृषि उपज में विविधता मुख्यतः नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में वर्तमान सरकार परिणाम देने वाली नीतियों के माध्यम से उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में नवाचार और प्रगति के नए अध्याय लिख रही है।  मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, उद्यानिकी फसलें किसानों की आय को आसानी से दोगुना करने में सहायक होती हैं। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा खाद्य प्र-संस्करण की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती और खाद्य प्र-संस्करण के नए तरीकों से अवगत कराया जा रहा है। वर्तमान में  मध्यप्रदेश उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। प्रदेश संतरा, धनिया मसाले तथा औषधीय एवं सुगंधीय पौधे  उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। इसके अतिरिक्त प्रदेश टमाटर, लहसुन, हरी मटर, अमरूद ,फूल गोभी, मिर्च एवं  प्याज  उत्पादन में  दूसरे तथा नीबू वर्गीय फल, लाल मिर्च, बंद गोभी एवं फूल उत्पादन में तीसरे स्थान पर है । राज्य में उद्यानिकी का रकबा बढ़कर लगभग 27 लाख हेक्टेयर हो गया है। राज्य सरकार  की नीतियों से प्रदेश में उद्यानिकी के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। इस कारण रकबा 2019-20 में 21.75 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में 26.51 लाख हेक्टेयर हो गया है। लगभग 23.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादन भी लगभग 27 फीसदी बढ़ा है। वर्ष 2019-20 में जो उत्पादन 317.36 लाख मी. टन था, जो बढ़कर अब 404.24 लाख मी. टन हो गया है। किसानों को उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ स्थापित करने के लिए अनुदान दिया जाता है। सरकार से अनुदान लेकर किसान फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ स्थापित कर सकते हैं। साथ ही अनुदान के आधार पर किसान छोटे, मध्यम और बड़े कोल्ड स्टोर भी स्थापित कर सकते हैं। खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अपने समृद्ध कृषि संसाधन और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उपयोग कर, 8.3% की औसत /वार्षिक दर से बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उद्यानिकी उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के लिए 21530.26 लाख रुपए की अनुदान सहायता से 183 कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कर 8.05 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता विकसित की गई है। वहीं प्याज भंडारण के लिए 23667.71 लाख रुपए का अनुदान देकर 66500 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता किसानों के खेतों पर निर्मित की गई है। प्रदेश में बागवानी को शिखर पर ले जाने के प्रयासों में राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.एम.सी.) पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पी.पी.एम.सी), एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एम.आई.डी.एच.) एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आर.के.वी.वाय.) के तहत वर्ष 2024-25 में 528 करोड़ 91 लाख रुपए की कार्ययोजना मंजूर की गई है। राज्य में उद्यानिकी उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए 16 विभिन्न बागवानी उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए पंजीयन कराया गया है। सूक्ष्म सिंचाई द्वारा राज्य में 14 हजार 900 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जिसमें लगभग 12 हजार 790 हितग्राहियों को 114 करोड़ 76 लाख रुपए का अनुदान दिया गया है। इजराइल तकनीक के समन्वय से प्रदेश में मुरैना में उच्च गुणवत्ता वाली सब्जी के लिए, छिंदवाड़ा में नींबूवर्गीय फसलों के लिए तथा हरदा में निर्यात करने लायक आम एवं सब्जी सेन्टर की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए 14 करोड़ 74 लाख की योजना का अनुमोदन किया गया है। प्रदेश सरकार की नई पहल ई-नर्सरी पोर्टल से घर, गार्डन या खेतों में उत्तम गुणवत्ता के पौधे लगाने के लिये, अच्छे और स्वस्थ पौध के लिये अब नर्सरी के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। उद्यानिकी विभाग द्वारा ई-नर्सरी पोर्टल पर 300 से अधिक नर्सरियों की जानकारी ऑनलाईन उपलब्ध करवाई गई है। इससे पौधों का क्रय-विक्रय आसानी से किया जा सकता है। 24 बागवानी उत्पाद जिनकी खेती आमतौर पर राज्य भर में की जाती है, जिनमें कोदो-कुटकी, बाजरा, संतरा/नींबू, सीताफल, आम, टमाटर, अमरूद, केला, पान, आलू, प्याज, हरी मटर, मिर्च, लहसुन अदरक, धनिया, सरसों, गन्ना, आंवला और हल्दी शामिल हैं। छिंदवाड़ा, आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, मंदसौर, बैतूल और सीहोर जैसे जिले संतरे के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं जो संतरे के प्र-संस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए आदर्श हैं। इसी तरह बैतूल, कटनी, अनूपपुर, रीवा, सिंगरौली और रायसेन जिले जो आम की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं, वहां कई आम आधारित खाद्य प्र-संस्करण उद्योग हैं जो स्थापित होने के विभिन्न चरणों में हैं। मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग को उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार एवं प्रशंसा-पत्र भी प्राप्त हुए हैं। जुलाई 2024 को प्रगति मैदान नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय एग्री एवं हार्टी एक्सपो-2024 में उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग मध्यप्रदेश को सर्वोत्तम बागवानी पद्धतियों और सब्जियों एवं ताजे फलों को बढ़ावा देने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। एमपीएफएसटीएस पोर्टल के संचालन के लिए वर्ष 2023-24 में राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर स्कॉच पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय कृषि तथा उद्यानिकी एक्सपो-2023 में ‘एक्सीलेंस अवॉर्ड, नेशनल ओडीओपी अवॉर्ड सेरेमनी-2023 में प्रदेश के बुरहानपुर जिले को केला उत्पादन तथा प्र-संस्करण में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं वर्ष 2022-23 में ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत बेहतर क्रियान्वयन के लिए उद्यानिकी विभाग को स्कॉच अवार्ड प्राप्त हुआ। प्रदेश  में फसल क्षेत्र का विस्तार और उत्पादन में सुधार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पौधों और उन्नत बीजों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। उत्पादन के पहले और बाद में प्रबंधन तकनीकों के जरिए फसल की गुणवत्ता और उत्पादन … Read more

राज्यपाल ने इन्दौर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के साथ ईएजी प्लेनरी देशों की बैठक का किया शुभारम्भ

इन्दौर ईएजी (यूरेशियन ग्रुप) देशों की बैठक मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकवाद की फंडिंग रोकने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। सभी बड़े देशों को एकजुट होकर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए एकजुट होकर बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। विश्व में आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए सभी ईएजी ग्रुप सदस्यों देशों का एकजुट होना बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इन्दौर में गुरूवार को 41वीं ईएजी प्लेनरी देशों की बैठक के उद्घाटन सत्र में माननीय राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कही। राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारत में डिमॉनिटाइजेशन, डिजिटलाइजेशन से पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था के लिए विशेष प्रयास हुए। उन्होंने कहा आधुनिक तकनीक के उपयोग से अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने के लिए और अधिक विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए ईएजी ग्रुप देश को मजबूत कूटनीतिक और सशक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति के लिए ईएजी ग्रुप देशों के प्रयास प्रभावी परिणामकारक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा वित्त शोधन और आतंकवाद को वित्त पोषण की रोकथाम के लिए यूरेशियन देशो का ग्रुप महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा भारत सरकार टेरर फंडिंग के खिलाफ पूरी मजबूती के साथ कार्य कर रही है। भारत में काला धन अधिनियम, आर्थिक अपराध को रोकने के लिए विशेष प्रयास  किए गए है और यह लगातार जारी हैं। भारत में साफ और पारदर्शी वित्तीय प्रणाली के लिए जीएसटी, डिजिटल इंडिया के तहत विशेष प्रयास किए गए हैं। यूपीआई डिजिटल लेनदेन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा हैं। भारत में परिवर्तन निदेशालय लगातार सशक्त हो रहा है। भारत की सभी एजेंसियां द्वारा मिलकर आतंकवाद और उग्रवाद को धन पोषित करने वालों, मनी लांड्रिंग पर प्रभावी और कड़ी कार्रवाई हो रही हैं। भारत के इन प्रयासों को और सशक्त बनने में ईएजी ग्रुप की बैठक महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सम्बोधित करते हुए कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की नगरी में ईएजी ग्रुप की बैठक गर्व का विषय हैं। उन्होंने कहा मनी लॉन्ड्रिंग सीधे तौर पर किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है, लेकिन जब यह आतंकवाद को पोषित करती है, तब विश्व शांति और सद्भाव के समक्ष गंभीर चुनौतियों को जन्म देती है। आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद समस्त विश्व के लिए चिंता का सबब बनी हुई है इससे निपटने के लिए विश्व के बड़े देशों को एकजुट होना होगा। यह आयोजन वैश्विक अखंडता और मानवता के हित की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा नक्सलवाद और ड्रग्स का व्यापार भी मनी लॉन्ड्रिंग से बढ़ रहा हैं। इससे निपटना हमारे लिए बड़ी चुनौती हैं। भारत के प्रयास सार्थक, प्रभावी और प्रशंसनीय ईएजी ग्रुप अध्यक्ष यूरी चिकानचिन ने कहा ईएजी ग्रुपों में भारत के प्रयास सार्थक, प्रभावी और प्रशंसनीय हैं। ग्रुप देशों ने विभिन्न सत्रों में बैठक के दौरान टेरर फंडिंग रोकथाम प्रयासों, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा की गई हैं। उन्होंने कहा भविष्य की चुनौतियों और उनकी रोकथाम के लिए भी बैठक में चर्चा की गई है। यूरेशियन सहित अफ्रीकी देशों सहित विश्व के अन्य क्षेत्रों में आतंकवाद को फंडिंग एक गंभीर चुनौति है। ईएजी ग्रुप की बैठक में तकनीकी और प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग के संबंध में चर्चा हुई हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के प्रयास प्रशंसनीय हैं। भारत को ईएजी ग्रुप देशों की बैठक की मेजबानी मिलना गर्व की बात भारत सरकार के वित्त सचिव संजय मल्होत्रा ने आतंकवाद को वित्त पोषण, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम, पारदर्शी अर्थव्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा यूरेशियन क्षेत्र में टेरर फंडिंग, मनी लांड्रिंग सहित नई चुनौतियों पर नियंत्रण के लिए ईएजी ग्रुप की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। उन्होंने कहा यह हमारे लिए गर्व की बात है कि ईएजी ग्रुप के जो भी देश शामिल है उनमें से कोई भी ग्रे सूची में नहीं है। उन्होंने कहा ग्रुप देशों के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। भारत को ईएजी ग्रुप देश की बैठक की मेजबानी का अवसर मिला। यह भारत के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा आवश्यकता है कि वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी और एआई का उपयोग सुरक्षा के बेहतर उपायों के लिए किया जाए। उन्होंने कहा मनी लांड्रिंग के साथ-साथ फाइनेंशियल फ्रॉड प्रभावित लोगों को असेट्स रिकवरी के लिए भी बेहतर कार्य करने की आवश्यकता है। भारत द्वारा इस क्षेत्र में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में महापौर इन्दौर पुष्यमित्र भार्गव ने ईएजी अध्यक्ष यूरी चिकानचिन को इंदौर में मौजूद यूरेशियन गार्डन का प्रमाण पत्र भेंट किया। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ राज्यपाल पटेल, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। बैठक में केंद्रीय वित्त अतिरिक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में ईएजी प्लेनरी देशों के डेलिगेट्स एवं प्रतिनिधि गण उपस्थित थे।  

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