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टीकमगढ़ प्रशासन ने ग्रामीणों की पीड़ा जानने ‘प्रशासन गांव की ओर’ नवाचार आरंभ किया

टीकमगढ़   ग्रामीण जिला मुख्यालय तक आकर परेशान न हों, इसलिए टीकमगढ़ प्रशासन ने उनकी पीड़ा जानने के लिए जनसुनवाई जैसे मंच को उनके द्वार तक पहुंचाने का नवाचार आरंभ किया। इसे नाम दिया ‘प्रशासन गांव की ओर’। नतीजा यह हुआ कि जिला मुख्यालय पर प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में शिकायती आवेदन 90 प्रतिशत तक कम हो गए। दिसंबर 2023 में शुरू किए इस नवाचार में कलेक्टर अवधेश शर्मा ने इसके लिए मातहत 324 अधिकारियों को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया है। कलेक्टर करते हैं औचक निरीक्षण यह प्रतिनिधि जनसुनवाई करते हैं और शिकायतों को गूगल फॉर्म पर भरकर कलेक्टर के समक्ष पेश करते हैं। इतना ही नहीं इनकी समीक्षा साप्ताहिक टीएल बैठक में सबसे पहले की जाती है। मंगलवार को कभी भी कलेक्टर बिना बताए किन्हीं पांच गांव पहुंच जाते हैं। औचक निरीक्षण के भय से सभी अफसर हर जनसुनवाई में मौजूद रहते हैं। दरअसल कलेक्टर ने देखा कि गांव स्तर से लोग जिला मुख्यालय आते हैं और फिर आवदेन टाइप कराना सहित उनके कई खर्चे होते थे। इसके पूर्व भी ग्राम पंचायत स्तर पर कर्मचारियों से अपेक्षा थी कि निचले स्तर पर ही समस्याओं का निराकरण हो जाए, लेकिन मॉनीटरिंग की बेहतर व्यवस्था न होने से समस्याओं का निराकरण तेजी व गारंटी के साथ नहीं हो पाता था और लोगों को एक ही प्रकार की शिकायत के लिए ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक कई आवेदन देने पड़ जाते थे। जब तक ग्रामीण स्वयं कलेक्टर के हाथ में आवेदन नहीं थमा देते थे, तब तक उन्हें निराकरण होने का भरोसा नहीं रहता था। ऐसे में कलेक्टर ने इस नवाचार को शुरू किया। अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि बने सहभागी अभियान में पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत सरपंच भी सक्रिय भूमिका में है। सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य आदि को भी इस प्रक्रिया के बारे में अवगत कराते हुए इसमें सहभागी बनाया है, जो अधिकारी ग्राम पंचायत स्तर पर अपनी ड्यूटी के लिए जाते हैं। शासन की उनसे स्वयं क्षेत्र भ्रमण की अपेक्षा रहती है, जिसे मंगलवार की जनसुनवाई से जोड़कर इसका भी समाधान किया गया। साथ ही कार्यालय का संचालन विधिवत होता है, जिसमें कोई व्यवधान नहीं आता। पेपरलैस है पूरा सिस्टम सुनवाई का यह पूरा सिस्टम पेपरलैस है। इसमें क्विक रिस्पॉन्स मैकेनिज्म भी तैयार किया गया है, जिसमें एक सरल गूगल फॉर्म विकसित किया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण मु्द्दे जैसे पीडीएस, पेयजल की समस्या, मध्याह्न भोजन, राजस्व, आवास, स्वच्छता की शिकायतों का फीडबैक लिया जाता है, जिसमें स्वयं कलेक्टर लाइव देखते हैं और संबंधित जिला अधिकारी के माध्यम से शिकायत का निराकरण कराते हैं। इसमें कलेक्टर समस्याओं की रिपोर्ट लेकर मौके पर निराकरण कराते हैं। क्विक रिस्पांस मैकेनिज्म के तहत खाद्य विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट मोड पर रहती है, जिससे जनहित से जुड़ी मुख्य समस्याओं जैसे खाद्यान वितरण न होना, पेयजल की गंभीर समस्या होना या किसी संक्रामक बीमारी का उजागर होने पर उनका तत्काल निराकरण संभव हो पाता है। मंगलवार की शाम को किसी एक ब्लाक की सभी ग्राम पंचायतों के नोडल अधिकारियों और जिला अधिकारियों की बैठक लेकर प्रत्येक ग्राम पंचायत की समस्याओं का निराकरण और फालोअप कराते हैं। बिना मजदूरी छोड़े समस्या का हल, अब भरोसा भी मिला टीकमगढ़ जिले के सबसे दूरस्थ गांव जिला मुख्यालय से 90 से 100 किलोमीटर तक स्थित हैं। कलेक्टर की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए कारगर सिद्ध हुई है, क्योंकि वाहनों की उपयोग घटा है। लेकिन इससे भी बढ़कर यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी सुविधा लेकर आई है, जो स्वयं के वाहन न होने के कारण अपना पैसा और समय खर्च कर जिला मुख्यालय तक जाते थे। इससे उनका दिनभर की मजदूरी का भी नुकसान होता था। जिसकी अब बचत हुई। इन समस्याओं का हुआ निराकरण     जर्जर भवनों का चिन्हांकन करते हुए लोगों की सुरक्षा निर्धारित की। नदनवारा, गनेशगंज, पनियाराखेरा, चंद्रपुरा जैसे गांवों में भवनों में सुधार हुआ।     पलेरा के टपरियन चौहान में मध्यान्ह भोजन वितरण न होने की शिकायत पर तत्काल ही एक्शन लिया और फिर शाम को विशेष भोज कराया गया।     बनगाय, अहार, डूडाखेरा, बरमे, खरीला गांव में खाद्यान वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर यहां अन्न उत्सव मनाते हुए खाद्यान वितरण कराया और फिर दुकान खुलने की मुनादी हुई।     वीरुऊ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के नहीं पहुंचने की शिकायत मिली, तो कार्रवाई हुई और फिर तैनाती की गई।     जल स्त्रोत से गंदा पानी आने की शिकायत के बाद एक साथ 261 गांवों से पानी की जांच के लिए नमूने लिए गए।     जनसुनवाई खानापूर्ति न रह जाए और कलेक्टर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए लोगों को टीकमगढ़ जिला मुख्यालय तक न आना पड़े। इसलिए कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में नोडल अधिकारियों को नियुक्त कर दिया, जो प्रतिनिधि मुझे रिपोर्ट करते हैं और उन आवेदनों को देखने के बाद उन पर कार्रवाई होती है। इसकी समीक्षा भी हर दिन एक घंटे की जाती है। इसके बेहतर परिणाम भी आ रहे हैं।     – अवधेश शर्मा, कलेक्टर टीकमगढ़  

वृहद, मध्यम एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार है, जो सबसे ज्यादा फिक्र अपने अन्नदाता की करती है। सरकार निरंतर हर खेत तक पानी पहुंचाने के कार्य कर रही है। जल संसाधन विभाग की विभिन्न वृहद, मध्यम एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो जाने से अब किसान 2 फसलों के स्थान पर 3 फसल लेने लगे है। इससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है और किसान समृद्ध भी हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सिंचाई के रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में जहां प्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 3 लाख हेक्टेयर था, आज बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश की निर्मित और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं से प्रदेश में वर्ष 2025-26 तक सिंचाई का रकबा लगभग 65 लाख हेक्टेयर होने की संभावना है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक प्रदेश की सिंचाई क्षमता 1 करोड़ हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदेश में तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। सरकार ने विभाग के लिए बजट में भी पर्याप्त राशि का प्रावधान किया है। वर्ष 2024-25 के बजट में सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण एवं संधारण के लिए 13 हजार 596 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं में केन-बेतवा लिंक परियोजना एक महत्वाकांक्षी नदी जोड़ों राष्ट्रीय परियोजना है। इसमें केन नदी पर दौधन बांध, आनुषंगिक कार्य एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के अंतर्गत बेतवा कछार में बीना काम्पलेक्स, कोटा बैराज तथा लोअरओर परियोजनाओं का निर्माण किया जाना सम्मिलित है। परियोजना से मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी एवं दमोह जिलों में माइक्रो इरिगेशन से केन कछार में 4.5 लाख हेक्टेयर, बेतवा कछार के विदिशा, रायसेन, सागर, शिवपुरी एवं दतिया जिलों में 2.06 लाख हेक्टेयर तथा उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा, महोबा और झांसी जिलों में 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना से उत्पन्न होने वाली 103 मेगावाट जल विद्युत तथा 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पर पूरा अधिकार मध्यप्रदेश का होगा। परियोजना के द्वितीय चरण की डीपीआर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण द्वारा वर्ष 2014 में तैयार की गई। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा बेतवा कछार में अंतिम रूप से प्रस्तावित 3 परियोजनाएं: बीना परिसर से 96 हजार हेक्टेयर, कोटा बैराज से 20 हजार हेक्टेयर तथा लोअर ओर परियोजना से 90 हजार हैक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित है। साथ ही परियोजनाओं से 66.7 मिलियन घन मीटर पेयजल एवं मांग आधार पर उद्योगों हेतु जल का प्रावधान रखा गया है। परियोजना की सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश में द्वितीय चरण की परियोजना का कार्य प्रगति पर है। परियोजना के कार्यान्वयन के लिए मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच एक त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय मंत्रि-परिषद द्वारा 44 करोड़ 605 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना को 8 वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पार्वती-काली-सिंध-चंबल लिंक परियोजना एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इस परियोजना से प्रदेश के 10 जिलों को लाभ मिलेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना, संशोधित पार्वती-कालीसिंध परियोजना और नर्मदा घाटी की अन्य प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं से प्रदेश में 19 लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। प्रदेश में “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” के उद्देश्य की पूर्ति के लिए 133 वृहद् एवं मध्यम प्रेशराइज्ड सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आधारित परियोजना निर्माणाधीन है। प्रदेश में 1320 करोड़ रुपए की लागत वाली चितरंगी दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना स्वीकृत हुई है। इस परियोजना से सिंगरौली जिले में 32 हजार 125 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा। इसी प्रकार 4197 करोड़ 58 लाख रुपए की लागत से जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को भी स्वीकृत किया गया है। नीमच जिले में इस परियोजना से 18 हजार 600 हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा।  

उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश की धरती उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है। महाभारत जैसे भीषण युद्ध के बीच शास्त्र सम्मत मार्ग दिखाते हुए कर्मवाद की शिक्षा देने का उनका प्रयास और विश्व को श्रीमद् भगवद गीता की देन अद्वितीय है। शास्त्र के रूप में स्थापित भगवद गीता विद्वतजन, ऋषि मुनि से लेकर जन-सामान्य तक के मन में जिज्ञासा भी उत्पन्न करती है और समाधान भी प्रदान करती है। गीता को आचरण और व्यवहार में धारण कर मानव, अपने जीवन को कर्मवाद से जोड़कर सद्मार्ग का अनुसरण करते हुए सफलताएं प्राप्त कर सकता है। इस वर्ष गीता जयंती पर इस्कॉन के साथ मिलकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भगवद गीता पर केंद्रित प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया गया है। गीता के श्लोकों का वाचन, अध्ययन-मनन और भगवद गीता में लोगों की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से यह अकादमिक अभियान चलाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की। स्कूल शिक्षा विभाग और विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से होगी प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि भगवद गीता आधारित मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता, स्कूल शिक्षा विभाग और संस्कृति विभाग के विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों में स्थायी नैतिक मूल्यों का संचार करना, चरित्र निर्माण को प्रेरित करना और आज के युवाओं में व्याप्त विभिन्न व्यसनों के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना है। जिला स्तर पर 26 से 29 नवंबर तक होंगी प्रतियोगिताएं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के अंतर्गत कक्षा-9 से 12 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्विज-प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रत्येक कक्षा की प्रतियोगिता के लिये पृथक-पृथक दिवस निर्धारित किये गये हैं, जिसमें 26 नवंबर को कक्षा -9वीं, 27 नवंबर को कक्षा-10वीं, 28 नवंबर को कक्षा-11वीं और 29 नवंबर को कक्षा-12वीं के छात्रों के लिये क्विज प्रतियोगिता होगी। सभी परीक्षाएं स्कूल में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित की जाएंगी। भागीदारी के लिये लिंक 19 नवंबर तक उपलब्ध करवाई जायेगी। प्रत्येक जिले में कक्षा के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्र राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 10 दिसंबर 2024 को उज्जैन में गीता महोत्सव के दौरान शामिल होंगे। राज्य स्तरीय विजेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। यह मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता छात्रों के शैक्षिक पाठ्यक्रम को आवश्यक नैतिक मूल्यों जैसे सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, सम्मान और उत्तरदायित्व से समृद्ध बनाने के लिए डिजाइन की गई है। साथ ही उन्हें व्यसनों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना और जिम्मेदार एवं नैतिक रूप से जागरूक भविष्य के नागरिकों के रूप में उनके व्यक्तित्व के विकास का प्रयास भी इस पहल का लक्ष्य है।  

सीएम योगी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में प्रयागराज महाकुंभ के लिए खोला खजाना, 23 प्रस्तावों पर लगी मुहर

लखनऊ यूपी की योगी कैबिनेट ने महाकुंभ के प्रचार-प्रसार के लिए खजाना खोल दिया है। शुक्रवार को सीएम योगी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में 24 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 23 को मंजूरी मिल गई है। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री एके सिंह और सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी मीडिया से साझा की। बताया कि महाकुंभ के लिए देश के बड़े शहरों जैसे नई दिल्ली, गोवा, देहरादून, भोपाल, इंदौर, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ और पटना जैसे शहरों में रोड शो होगा। में रोडशो किया जाएगा। इसके अलावा विदेशों में नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मॉरिशस में रोड शो को भी मंजूरी दी गई है। रोडशो में महाकुंभ की विरासत से लोगों को परिचित कराया जाएगा। गृह विभाग का भी महाकुंभ से जुड़ा एक प्रस्ताव था। इसमें नए वाहन खरीदने के लिए प्रस्ताव रखा गया था। इसे भी मंत्री परिषद ने मंजूरी दे दी है। कुल 220 वाहन खरीदे जाएंगे। इनमें 200 बोलोरो, 20 बसें 27.48 करोड़ से खरीदी जाएंगी। बैठक में एक्सट्रा न्यूट्रल अल्कोहल को लेकर भी फैसला हुआ है। इसे जीएसटी से बाहर कर वैट के दायरे में लाया गया है। इससे शराब बनाने की लागत कम होगी और सस्ती शराब मिल सकेगी। इसके साथ ही अभी तक जीएसटी की वजह से 50 फीसदी मिलने वाला फायदा 100 फीसदी हो जाएगा। इसके अलावा ग्रीन एनर्जी और कॉरिडोर के तहत चित्रकूट में 620 करोड़ की लागत से सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन बनेगी। इसमें 33 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार देगी। मंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड में 4000 मेगावाट की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। चित्रकूट में 800 मेगावाट का सोलर प्लांट लगेगा। प्लांट के लिए 620 करोड़ की लागत से ट्रांसमिशन लाइन बनेगी। नजूल भूमि का संशोधित प्रस्ताव भी कैबिनट में रखा गया था लेकिन इसे फिलहाल रोक लिया गया है। इससे पहले भी नजूल भूमि का प्रस्ताव योगी कैबिनेट एक बार पास करके विधानमंडल में भेज चुकी है। विधानसभा में तो प्रस्ताव पास हो गया था लेकिन विधानपरिषद से इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया था। कुछ संशोधनों के बाद दोबारा इसे कैबिनेट में लाया गया लेकिन पास नहीं हो सका है। विधानपरिषद में प्रस्ताव का विरोध खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कर दिया था। इसके अलावा 9 विकास प्राधिकरणों को 20 साल के लिए 4064 करोड़ रुपए देने को भी मंजूरी मिली है। इन विकास प्राधिकरणों में सहारनपुर, मथुरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, लखनऊ, मुरादाबाद, बांदा, मेरठ और खुर्जा शामिल हैं। हर जिले में एक विश्वविद्यालय यूपी में अब हर मंडल में विश्वविद्यालय हो गया है। फिलहाल 171 महाविद्यालय हैं। 71 महाविद्यालय नवनिर्मित या निर्माणाधीन हैं। इसमें से 17 संगठक महाविद्यालय के रूप में संचालित थे, जो विश्वविद्यालय से एफिलेटेड थे। अब इन 71 महाविद्यालयों को राजकीय विद्यालय के रूप में संचालित करने का प्रस्ताव पास किया गया है। अगले 5 साल में हर जिले में एक विश्वविद्यालय होगा। इसके अलावा 71 प्राचार्य के पद, 1136 सहायक आचार्य, 639 क्लास-3 और 710 क्लास-4 के पद भी सृजित होंगे। बिजनौर में विवेक महाविद्यालय को प्राइवेट विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी गई है। यानी एक और विश्वविद्यालय प्रदेश को मिल गया है। टॉप-100 में यूपी के 3 विश्वविद्यालय आ चुके हैं। नोएडा में एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार होगा नोएडा में 17.435 किलोमीटर की एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार होगा। 394 करोड़ केंद्र सरकार और इतना ही राज्य सरकार देगी। यह परियोजना 2,960 करोड़ रुपए की है।

23 नवम्बर को बिलासपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 143 करोड़ की लागत के विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण

रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 23 नवंबर को बिलासपुर को 143 करोड़ 68 लाख रूपये की लागत के अनेक विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान सकरी रोड, मिनोचा रोड, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, मिनी स्टेडियम, सिटी कोतवाली के पास निर्मित मल्टीलेवल पार्किंग और अरपा नदी तट पर निर्मित राम सेतु मार्ग का लोकार्पण करेंगे। श्री साय इस मौके पर लाल बहादुर शास्त्री स्कूल में राउत नाचा महोत्सव में शामिल होंगे। रामसेतु मार्ग अरपा उत्थान और तट संवर्धन प्रोजेक्ट अंतर्गत अरपा नदी के दांयी तरफ की सड़क का नाम रामसेतु मार्ग रखा गया है। रामसेतु मार्ग की लागत 49 करोड़ 98 लाख रूपये है, जिसमें फूटपाथ, डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट, रिटेनिंग वॉल, पीचिंग और सौंदर्यीकरण कार्य शामिल है। मिनी स्टेडियम शहर के पुराने और प्रतिष्ठित शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक शाला मल्टीपरपज़ स्कूल के मैदान को संवार कर बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा 21 करोड़ 79 लाख रूपये की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण किया गया है, जिसमें 14115 वर्ग मीटर का सर्व सुविधायुक्त क्रिकेट मैदान है जिसकी दर्शक क्षमता 850 है। यहां डे-नाईट मैच खेलने की सुविधा है। यहां इनडोर गेम्स जैसे स्नूकर, बिलियर्ड्स, टेबल टेनिस, स्क्वैश खेलने की सुविधा के साथ-साथ आधुनिक जिम बनाया गया है। इसके अलावा ट्रेनिंग हॉल का निर्माण किया गया है। इसी भवन में अलग से वीआईपी गैलरी,एनाउंसमेंट बॉक्स और पेंट्री रूम के साथ ही यहां बाहर से आने वाले खिलाड़ियों के लिए एक हॉस्टल बनाया गया है। यहां दो लॉन टेनिस कोर्ट बनाया गया है।  स्पोर्ट्स कांप्लेक्स 14 करोड़ 60 लाख रूपये की लागत से संजय तरण पुष्कर परिसर में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण किया गया है, इस तीन मंजिला इस स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के बेसमेंट में पार्किंग, ग्राउंड फ्लोर में रिसेप्शन और रेस्टोरेंट संचालित होगा। प्रथम तल में बैडमिंटन, स्क्वैश कोर्ट, टेबल टेनिस, स्नूकर, बिलियर्ड्स, द्वितीय तल में मल्टीपरपज हॉल, योगा, मैट गेम की सुविधा है। तीसरे तल में मनोरंजन की अनेक सुविधाएं है। उल्लेखनीय है कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा शहर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने तीन बड़े प्रोजेक्ट पर काम किया गया है, जिनमें पिंक प्ले ग्राउंड का लोकार्पण पहले ही किया जा चुका है। कोतवाली मल्टीलेवल पार्किंग 29 करोड़ 76 लाख  की लागत से साढ़े तीन एकड़ में कोतवाली थाना परिसर में तीन मंजिला मल्टीलेवल कार पार्किंग बनाया गया है। ग्राउंड फ्लोर के अलावा सभी फ्लोर में पार्किंग की सुविधा दी गई है जिसमें 192 कार और 325 बाइक एक साथ पार्क की जा सकेगी। ग्राउंड फ्लोर को कमर्शियल कांप्लेक्स के तौर पर विकसित किया गया है जिसमें 46 दुकानों का निर्माण किया गया है।  उस्लापुर-सकरी सड़क उस्लापुर रेल्वे ओव्हरब्रिज से लेकर सकरी बाईपास चौक तक 15 करोड़ 87 लाख की लागत से नगर निगम द्वारा सवा चार किमी सड़क का उन्नयन और चौड़ीकरण किया गया है। सड़क चौड़ीकरण और उन्नयन होने से राहगीरों को काफी राहत मिली है और ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिली है। उन्नयन और चौड़ीकरण के तहत मार्ग की चौड़ाई बढ़ाई गई है, डिवाइडर बनाया गया है, स्ट्रीट लाइट और दोनों तरफ नाली निर्माण भी किया गया है। मिनोचा कॉलोनी सहित अन्य रोड 11 करोड़ 68 लाख की लागत से शहर के विभिन्न सड़कों का डामरीकरण, उन्नयन, साइनेज, मिनोचा कॉलोनी रोड और रोटरी शामिल है,  जिसमें प्रमुख रूप से महावीर नगर चौक से उस्लापुर ओव्हर ब्रिज तक 800 मीटर सड़क, डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट और रोटरी शामिल है। शहर के विभिन्न सड़कों का डामरीकरण, साइनेज, रोड मार्किंग के कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि आधारित उद्योगों को घर-घर पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर काम करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि आधारित उद्योगों को घर-घर पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर काम करेंगे। एक और एक दो नहीं, एक और एक ग्यारह बनकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नागपुर में आयोजित एग्रोविजन राष्ट्रीय कृषि मेले के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह मात्र मेला नहीं बल्कि यह भविष्य के सुशासन की समृद्धशाली भारत और प्रदेश के बनने की इसने नींव डाली है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गड़करी सामाजिक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने वाले सिद्धहस्त डॉक्टर हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण कृषि आधारित कामों के आधार पर प्रदेश की पहचान होती है। मैं तारीफ करता हूँ कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सरकार घर-घर में कृषि आधारित मत्स्य पालन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन जैसे घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन, उत्पादकता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादों के लिए पर्याप्त बाजार उपलब्ध कराने पर भी फोकस किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के मंत्री एवं अधिकारियों का एक दल मेले के अवलोकन एवं अध्ययन के लिए भेजा जाएगा। गौ-पालन से बढ़ेगी आमदनी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने गौ-पालकों की आय बढ़ाने अनेक योजनाएं क्रियान्वित की हैं। उन्होंने कहा कि हम श्रीकृष्ण को मानने वाले हैं, जिनके घर गायें है वे गोपाल हैं और जिनके घर में गाय का कुल है वह घर गोकुल है। मराठी में बछड़े-बछिया को गौरा और गौरी कहते हैं। हमने गौ-पालकों को गाय के स्थान पर गौरी देने की योजना बनाई है। गौ-पालक 5 गौरी ले जाएं और अपने घर पर उनको बड़ा करें, गौ-पालक 2 गाय अपने घर में ही रख लें और 3 गायें हम खरीदेंगे। गौ-पालक दूध का विक्रय करेंगे उससे उनकी आय में वृद्धि होगी। कांजी हाउस की कैद से मिलेगी मुक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम निराश्रित और ऐसी गायों को जिनकी दूध देने की क्षमता न्यून या शून्य हो गई है और गौ-पालकों ने उन्हें निराश्रित छोड़ दिया है, को आश्रय देने की दृष्टि से नगरीय क्षेत्रों में गौ-शालाओं का निर्माण करने जा रहे हैं। इस अनुक्रम में भोपाल में 10 हजार गायों की क्षमता वाली गौ-शाला का भूमि-पूजन होने जा रहा है। इससे सड़कों पर निराश्रित गौ-वंशों से होने वाली दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने मध्यप्रदेश में कांजी हाउस, खेड़ा जैसे कैद खानों को भी बंद करने का निर्णय लिया है। मूक पशुओं को जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। महाराष्ट्र मेरा पुश्तैनी घर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराष्ट्र मे आकर ऐसा लगा जैसे मैं अपने घर आ गया हूँ। माता अहिल्या और महादजी सिंधियां की पृष्ठ भूमि महाराष्ट्र राज्य से जुड़ी हुई है। माता अहिल्या को मैं प्रणाम करता हूँ, जिन्होंने उस समय खेती के लिए सिंचाई व्यवस्था के रूप में कुओं का निर्माण करवाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित कुलगुरू श्री शरद घटक, कुलगुरू श्री नितिन पाटिल, श्री अब्दुल्ला एवं पेसा एक्ट के प्रेसिडेंट श्री टी.आर. केशव, श्री दीपक शाह, विक्रम भाग एवं श्री जी. पाटिल का अभिवादन भी किया।  

कल महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे, इससे पहले कांग्रेस हाई अलर्ट, पर्यवेक्षक किए नियुक्त

नई दिल्ली 23 नवंबर यानी शनिवार को महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। दोपहर तक तस्वीर साफ हो जाएगी कि दोनों राज्यों में किसकी सरकार बनने जा रही है। चुनाव नतीजों से पहले ही कांग्रेस अलर्ट हो गई है। पार्टी ने दोनों ही राज्यों में पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। अशोक गहलोत, भूपेश बघेल और डॉ. जी. परमेश्वर को महाराष्ट्र का पर्यवेक्षक बनाया गया है। तारिक अनवर, मल्लू भट्टी विक्रमार्क और कृष्णा अल्लावुरु को झारखंड के पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी मिली है। महाराष्ट्र में ‘खेला’ से सतर्क विपक्षी गठबंधन एक्जिट पोल ने विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (मविआ) की चिंता बढ़ा दी है। आज आघाड़ी के तीनों दलों के नेताओं ने अपने-अपने उम्मीदवारों से बातकर उन्हें एकजुट रहने की सलाह दी है। शनिवार को परिणाम आने के बाद आघाड़ी के सभी विधायकों को एक ही स्थान पर रखने की तैयारी भी की जा रही है। ताकि कोई ‘खेला’ होने से बचा जा सके। एक साथ रहेंगे मविआ के विधायक मतदान के बाद आए ज्यादातर एक्जिट पोल्स में महायुति को बढ़त मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि ऐसे संभावना वाले एक्जिट पोल्स पर मविआ नेताओं ने अविश्वास जताते हुए अपनी ही सरकार बनने का दावा किया है। मगर उनकी चिंता भी बढ़ी दिख रही है। शिवसेना नेता संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि महाविकास अघाड़ी के घटक दलों ने महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों के बाद अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को मुंबई में एक साथ रखने का फैसला किया है। राउत ने किया बड़ा दावा राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मविआ नेताओं ने बृहस्पतिवार को बैठक की और हर सीट का आकलन किया। इनमें वह स्वयं, उनकी पार्टी के सहयोगी अनिल देसाई, राकांपा (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल और कांग्रेस नेता सतेज पाटिल और बालासाहेब थोराट शामिल थे। राउत ने विश्वास जताया कि एमवीए चुनाव में 160 सीटें जीतेगी। कांग्रेस नेताओं को मुंबई आना पड़ेगा राउत ने यह भी कहा कि कोई भी ताकत मविआ को महाराष्ट्र में अगली सरकार बनाने से नहीं रोक सकती और शीर्ष पद पर निर्णय केवल महाराष्ट्र में ही लिया जाएगा। राउत ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को मुख्यमंत्री पद पर सहमति के लिए मुंबई आना है, क्योंकि राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार और शिवसेना (युनाइटेड) प्रमुख उद्धव ठाकरे मुंबई में ही हैं। राष्ट्रपति शासन लगने का डर राउत ने आशंका जताई कि विपक्ष के पास बहुमत होने के बावजूद भाजपा राज्यपाल कार्यालय के माध्यम से मविआ को सरकार बनाने में बाधा डालने की कोशिश करेगी। मगर हम बिना किसी देरी के निर्णय लेंगे। विपक्ष को डर है कि अगर 25 नवंबर तक नई सरकार नहीं बनी तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। विधायक मिलकर तय करेंगे सीएम राउत के अनुसार हमने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को मुंबई लाने का फैसला किया है। नए विधायकों के पास मुंबई में रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए हमने उनके लिए एक साथ आवासीय व्यवस्था करने का फैसला किया है। राउत ने कहा कि जीत की प्रबल संभावना वाले कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी मविआ को ही समर्थन देने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई फॉर्मूला नहीं है। सब विधायक मिलकर सरकार का नेता चुनेंगे ।

मध्य प्रदेश के अगले डीजीपी के लिए कैलाश मकवाना का नाम आगे, आखिरी फैसला मुख्यमंत्री ही करेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चयन को लेकर आज, गुरुवार को दिल्ली में बैठक हुई। शाम 4:30 बजे DGP के लिए तीन नामों के पैनल पर पीएससी ने मोहर लगा दी है। इस तीन आईपीएस अफसरों में अरविंद कुमार (DG होमगार्ड), कैलाश मकवाना (पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन) और 1999 बैच के अजय शर्मा (DG EOW)  हैं। 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं सुधीर कुमार   यूपीएससी के चेयरमैन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दो जॉइंट सेक्रेटरी के अलावा एमपी के मुख्य सचिव अनुराग जैन और मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में भेजे गए 9 आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों के पैनल पर मोहर लगी। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव इनमें से एक नाम पर मोहर लगाएंगे। आपको बता दें कि सुधीर कुमार सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। ये तीन नाम तय किए नए DGP के पद के लिए यूपीएससी ने तीन नामों के पैनल पर मोहर लगाई है। ये तीन नाम 1988 बैच के आईपीएस अफसर अरविंद कुमार (DG होमगार्ड), कैलाश मकवाना (पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन) और 1999 बैच के अजय शर्मा (DG EOW)  हैं। डीजी-आईजी कांफ्रेंस और महत्वपूर्ण निर्णय बता दें कि 28 से 30 नवंबर तक ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में डीजी-आईजी कान्फ्रेंस भी आयोजित होगी। इस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उपस्थित रहेंगे। इस दौरान मौजूदा DGP सुधीर कुमार सक्सेना सेवानिवृत्त होंगे। माना जा रहा है कि OSD के रूप में कार्यरत अधिकारी इस कांफ्रेंस में प्रदेश पुलिस का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश जाएंगे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा पर जा रहे हैं। 24 से 30 नवंबर तक उनका ब्रिटेन और जर्मनी का दौरा प्रस्तावित है। 23 नवंबर को पुलिस मुख्यालय (PHQ) में OSD (Officer on Special Duty) कौन होगा, इसकी घोषणा करके ही मुख्यमंत्री जाएंगे, ताकि 30 नवंबर को वर्तमान DGP सुधीर कुमार सक्सेना की विदाई और नए DGP की कुर्सी संभालने की रस्म पूरी हो सके। अब MP DGP की रेस में सबसे आगे हैं IPS कैलाश मकवाना मध्य प्रदेश के ईमानदार पुलिस अफसरों में शुमार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी कैलाश मकवाना मध्य प्रदेश पुलिस के नए मुखिया यानि डीजीपी बनने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मध्य प्रदेश के नए डीजीपी पद के लिए तीन आईपीएस अफसरों के पैनल पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसमें कैलाश मकवाना का नाम शामिल है। अन्य दो नामों में डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार, ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा का नाम है। सीएम पर टिकी है निगाहें पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन कैलाश मकवाना और ईओडब्ल्यू के अजय शर्मा के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा दिख रही है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर टिक गई हैं, नए डीजीपी के नाम का ऐलान वे ही करेंगे। तीन नाम हुए हैं फाइनल मध्य प्रदेश सरकार ने नए डीजीपी के लिए 9 वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का पैनल यूपीएससी को भेजा था। 21 नवंबर को देर शाम यूपीएससी दिल्ली में बैठक हुई, जिसमें 9 में से 3 नाम फाइनल किए गए। मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद 1 दिसंबर को नए डीजीपी कार्य करना शुरू कर देंगे। रेस में कैलाश मकवाना सबसे आगे कैलाश मकवाना का नाम सबसे उपर इसलिए दिख रहा है क्योंकि फरवरी 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनकी बिगड़ी सीआर को सुधारा था। बताया जाता है कि उन्हें तब 10 में 10 अंक दिए गए। इससे पहले सीआर खराब होने की स्थिति में वह डीजीपी की दावेदारी से बाहर हो रहे थे। साढ़े तीन साल में हुआ था सात बार तबादला मकवाना ने अपनी एसीआर( गोपनीय चरित्रावली) सुधरवाने के लिए मप्र शासन से 9 महीने पहले अपील की थी। उन्होंने रिप्रेजेंटेशन भेजते हुए सरकार से कहा था कि लोकायुक्त संगठन में डीजी रहने के 6 महीने के दौरान उनकी एसीआर खराब कर दी गई। कमल नाथ सरकार में महज एक साल में उनका तीन बार तबादला किया गया था। साढ़े 3 साल में उनका 7 बार तबादला किया गया था। लोकायुक्त का बनाया गया था महानिदेशक मकवाना को वर्ष 2022 में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त में महानिदेशक बनाया गया था। वे यहां इमानदारी से काम कर रहे थे, भी उन्होंने महाकाल लोक की एक फाइल खोल ली। इसके बाद तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें हटाकर मप्र पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में चेयरमैन बना दिया था। तब शिवराज के ओएसडी योगेश चौधरी को एडीजी विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त पदस्थ किया गया था। तब उनकी सीआर कम कर दी गई थी। क्या है महाकाल कॉरिडोर ‘घोटाला’ उज्जैन के महाकाल लोक कॉरिडोर के प्रथम चरण के कामों में भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंची थी। लोकायुक्त संगठन में कांग्रेस विधायक महेश परमार ने शिकायत की है कि तीन आईएएस अफसरों के अलावा 15 अफसरों को नोटिस देकर जवाब मांगा था। लोकायुक्त के नोटिस में तीन आईएएस उज्जैन कलेक्टर और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष आशीष सिंह, स्मार्ट सिटी उज्जैन के तत्कालीन कार्यपालक निदेशक क्षितिज सिंघल और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता शामिल थे। शिकायर्ताओं ने आरोप लगाया था कि ठेकेदार को करोड़ों का लाभ पहुंचाने के लिए एसओआर की दरें और आइटम को बदला गया है।

भोपाल में मंत्रालय के पास 39 हेक्टेयर भूमि से हटाई जाएंगी झुग्गी बस्तियां, रहते हैं 28 हजार से ज्यादा लोग, बनेंगी 116 इमारतें

भोपाल  शहर के सबसे पॉश और हाई सिक्युरिटी जोन वल्लभ भवन (मंत्रालय) के पास बनी छह झुग्गी बस्तियों को विस्थापित करने के लिए नगर निगम ने पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत मंत्रालय के पास स्थित करीब 40 एकड़ जमीन पर 1100 करोड़ से 116 इमारतें बनाई जाएंगी। इनमें यहां 28 हेक्टेयर भूमि पर बनी आठ हजार 214 झुग्गियों के वासियों को आवास आवंटित किए जाएंगे। इन झुग्गियों में लगभग 28 हजार 334 लोग निवास करते हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों संग की बैठक इस प्रोजेक्ट को लेकर कलेक्ट्रेट में गुरुवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बैठक ली और नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायन सहित अन्य अधिकारियों से चर्चा कर आगामी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि पिछले गुरुवार वल्लभ भवन के पास बनी झुग्गी बस्तियों को हटाए जाने को लेकर प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश कलेक्टर ने निगमायुक्त को दिए थे। वहीं शहर में कुल 388 झुग्गी बस्तियां चिह्नित की गई हैं, जिनमें लगभग एक लाख 56 हजार 560 झुग्गियां बनी हुई हैं। सुराज योजना के तहत बनाए जाएंगे आवास मंत्रालय के पास बनी झुग्गियों के लिए यहां स्थित शासकीय भूमि पर सुराज योजना के तहत ईडब्ल्यूएस आवास बनवाए जाएंगे। यह मकान निजी डेवलपर से बनवाए जाएंगे, जिसके बदले में उसे यहां पर प्रतिपूरक भूमि पार्सल (सीएलपी) के तहत भूमि आवंटित की जाएगी। डेवलपर द्वारा इस भूमि पर रिडेंसीफिकेशन के तहत आवासीय परियोजनाओं में मॉल, व्यवसायिक कांप्लेक्स, प्राइम डेवलपमेंट के कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही पार्किंग क्षेत्र, कम्युनिटी हॉल, दुकानें आदि भी बनाई जाएंगी। जिससे आसपास के लोगों को यहां रोजगार भी मिल सकेंगे। नौमंजिला इमारत में होंगे 72 आवास झुग्गियों को विस्थापित करने के लिए बनाई जाने वाली 116 इमारतें नौ मंजिला होंगी। हर इमारत में 72 आवास बनाए जाएंगे, इस तरह एक फ्लोर पर आठ आवास रहेंगे। मंत्रालय के पास ही बनाने से यहां रहने वाले झुग्गिवासियों को अन्य दूसरी जगह जाना नहीं होगा। पहले क्लस्टर के लिए मंत्रालय के आसपास बसी वल्लभ नगर एक, दो, ओमनगर, एक, दो, भीमनगर, मालवीय नगर को चिह्नित किया गया है। ये बस्तियां करीब सवा सौ एकड़ क्षेत्र में बनी हुई हैं। जनवरी से काम शुरू करने का लक्ष्य नगर निगम द्वारा तैयार किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिसंबर तक सभी तरह की कागजी प्रक्रिया पूरी की जानी है। मंत्रालय के आसपास बनी आठ हजार 214 झुग्गियों को हटाने के लिए तैयार इस डीपीआर को जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। जहां से अनुमति मिलने के बाद इसके तहत जनवरी 2025 से काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। नई झुग्गी रोकने बनेगी निगरानी समिति मंत्रालय सहित अन्य क्षेत्र में नई झुग्गियों के बनने से रोकने के लिए निगरानी समिति बनाई जाएगी। इस समिति में तहसीलदार, जोनल अधिकारी और एएचओ शामिल रहेंगे। यह अब तक चिह्नित की गईं झुग्गियों के अलावा जहां भी नई झुग्गी बनती है तो उसे चिह्नित कर तोड़ने की कार्रवाई करेंगे। इनका कहना है मंत्रालय के आसपास बनी झुग्गी बस्तियों को हटाने के लिए नगर निगम ने प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। इसके तहत पहले यहां खाली पड़ी शासकीय भूमि में ईडब्ल्यूएस आवास बनाए जाएंगे। इसके बाद परिवारों को दिए जाएंगे। दिसंबर तक सभी तरह की कागजी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी और सरकार से अनुमति मिलते ही जनवरी से काम शुरू कर दिया जाएगा। -कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल

लोकतंत्र प्रथम-मानवता प्रथम का मंत्र, मोदी गुयाना की संसद के एक विशेष अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह मंत्र दिया

जॉर्जटाउन/नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुयाना को मौजूदा विश्व में आगे बढ़ने के लिये “लोकतंत्र प्रथम-मानवता प्रथम” का मंत्र देते हुए कहा कि इससे सबको साथ लेकर सबका विकास करते हुए मानवता का हित करना संभव होता है। श्री मोदी गुयाना की संसद के एक विशेष अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह मंत्र दिया। इस मौके पर संसद के अध्यक्ष मंजूर नादिर, उप राष्ट्रपति भरत जगदेव, प्रधानमंत्री मार्क एंथनी फिलिप्स, नेता प्रतिपक्ष, चांसलर ऑफ द ज्यूडिशियरी भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों के बीच, हमें आज वैश्विक परिस्थितियों पर भी लगातार नजर ऱखनी है। जब भारत और गयाना आजाद हुए थे, तो दुनिया के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं। आज 21वीं सदी की दुनिया के सामने, अलग तरह की चुनौतियां हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्थाएं और संस्थाएं,ध्वस्त हो रही हैं, कोरोना के बाद जहां एक नई वैश्विक व्यवस्था की तरफ बढ़ना था, दुनिया दूसरी ही चीजों में उलझ गई, इन परिस्थितियों में,आज विश्व के सामने, आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मंत्र है-“लोकतंत्र प्रथम—मानवता प्रथम”। “लोकतंत्र प्रथम” की भावना हमें सिखाती है कि सबको साथ लेकर चलो,सबको साथ लेकर सबके विकास में सहभागी बनो। “मानवता प्रथम” की भावना हमारे निर्णयों की दिशा तय करती है, जब हम मानवता प्रथम को अपने निर्णयों का आधार बनाते हैं, तो नतीजे भी मानवता का हित करने वाले होते हैं। श्री मोदी ने कहा कि हमारी लोकतांत्रिक मूल्य इतने मजबूत हैं कि विकास के रास्ते पर चलते हुए हर उतार-चढ़ाव में हमारा संबल बनती हैं। एक समावेशी समाज के निर्माण में लोकतंत्र से बड़ा कोई माध्यम नहीं। नागरिकों का कोई भी मत-पंथ हो, उसका कोई भी बैकग्राउंड हो, लोकतंत्र हर नागरिक को उसके अधिकारों की रक्षा की,उसके उज्जवल भविष्य की गारंटी देती है। और हम दोनों देशों ने मिलकर दिखाया है कि लोकतंत्र सिर्फ एक कानून नहीं है,सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है, हमने दिखाया है कि लोकतंत्र हमारे डीएनए में है, हमारे विजन में है, हमारे आचार-व्यवहार में है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी मानव केन्द्रित कार्यशैली,हमें सिखाती है कि हर देश के नागरिक उतने ही अहम हैं, इसलिए, जब विश्व को एकजुट करने की बात आई, तब भारत ने अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का मंत्र दिया। जब कोरोना का संकट आया, पूरी मानवता के सामने चुनौती आई, तब भारत ने ‘एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य’ का संदेश दिया। जब जलवायु से जुड़ी चुनौतियों में हर देश के प्रयासों को जोड़ना था, तब भारत ने वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड का विजन रखा, जब दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हुए, तब भारत ने सीडीआरआई यानि कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेज़ीलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर की पहल शुरू की। जब दुनिया में पृथ्वी प्रेमी लोगों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करना था, तब भारत ने मिशन लाइफ जैसा एक वैश्विक आंदोलन शुरु किया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र प्रथम—मानवता प्रथम” की इसी भावना पर चलते हुए, आज भारत विश्वबंधु के रूप में विश्व के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा है। दुनिया के किसी भी देश में कोई भी संकट हो, हमारा ईमानदार प्रयास होता है कि हम फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनकर वहां पहुंचे। आपने कोरोना का वो दौर देखा है, जब हर देश अपने-अपने बचाव में ही जुटा था। तब भारत ने दुनिया के डेढ़ सौ से अधिक देशों के साथ दवाएं और वैक्सीन्स शेयर कीं। मुझे संतोष है कि भारत, उस मुश्किल दौर में गयाना की जनता को भी मदद पहुंचा सका।” श्री मोदी ने कहा कि दुनिया में जहां-जहां युद्ध की स्थिति आई,भारत राहत और बचाव के लिए आगे आया। श्रीलंका हो, मालदीव हो, जिन भी देशों में संकट आया, भारत ने आगे बढ़कर बिना स्वार्थ के मदद की, नेपाल से लेकर तुर्की और सीरिया तक, जहां-जहां भूकंप आए, भारत सबसे पहले पहुंचा है। यही तो हमारे संस्कार हैं, हम कभी भी स्वार्थ के साथ आगे नहीं बढ़े, हम कभी भी विस्तारवाद की भावना से आगे नहीं बढ़े। हम संसाधनों पर कब्जे की, संसाधनों को हड़पने की भावना से हमेशा दूर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं, अंतरिक्ष हो, समुद्र हो, ये सार्वभौमिक टकराव के नहीं बल्कि सार्वभौमिक सहयोग के विषय होने चाहिए। दुनिया के लिए भी ये समय, टकराव का नहीं है, ये समय, टकराव पैदा करने वाले कारणों को पहचानने और उनको दूर करने का है। आज आतंकवाद, ड्रग्स, साइबर अपराध, ऐसी कितनी ही चुनौतियां हैं, जिनसे मुकाबला करके ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार पाएंगे। और ये तभी संभव है, जब हम लोकतंत्र प्रथम मानवता प्रथम को केन्द्रीय स्थान देंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा सिद्धांतों के आधार पर, भरोसे और पारदर्शिता के आधार पर ही अपनी बात की है। एक भी देश, एक भी क्षेत्र पीछे रह गया, तो हमारे वैश्विक लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। तभी भारत कहता है – हर देश महत्वपूर्ण है! इसलिए भारत, द्वीपीय देशों को छोटे द्वीपीय देश नहीं बल्कि बड़े महासागरीय देश मानता है। इसी भाव के तहत हमने हिन्द महासागर से जुड़े द्वीपीय देशों के लिए सागर प्लेटफॉर्म बनाया। हमने प्रशांत महासागर के देशों को जोड़ने के लिए भी विशेष फोरम बनाया है। इसी नेक नीयत से भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल कराकर अपना कर्तव्य निभाया।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया, नवविवाहिता के खाते में 35000 रुपये डीबीटी के जरिए भेजेगी.

रायपुर मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में  भ्रष्टाचार को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है.छतीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि व्यय राशि 50000 रुपये को लेकर व्यय मापदंड में एक बड़ा फेरबदल किया है. सरकार से मिलने वाली इस राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे नवविवाहिता के खाते में 35000 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर)के जरिए भेजेगी.   शादियों का सीजन शुरू हो चुका है. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सरकार गरीब परिवार की बेटियों की शादी करवाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के पास आवेदन भी आने शुरू हो गए हैं. इस योजना का लाभ लेने वाली बेटियों के लिए एक अच्छी खबर है कि उनके खातों में 35000 रुपये भेजे जाएंगे. सीधा लाभ कन्या को ही मिलेगा दरअसल मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में आर्थिक अनियमितता का आरोप अधिकारियों पर लगता था. इन आरोपों को दूर करने के लिए सरकार ने पूरे मापदंडों को ही बदल दिया है. हालांकि अधिकारी यह भी कह रहे हैं, सरकार ने इसका प्रारूप बदला है इससे सीधा लाभ कन्या को ही मिलेगा. अब खरीद फरोख्त में न तो कोई आरोप लगेगा और न ही घटिया सामग्री की खरीदी की कोई जगह बची है. इस तरह से खर्च होगी राशि विवाह आयोजन व्यवस्था और परिवहन पर कुल व्यय 8 हजार रुपए होगा. इसमें पंडाल और भवन किराया और प्रति जोड़ा के 20 अतिथि के भोजन और नाश्ता पर खर्च किया जाए. साथ ही बैठक व्यवस्था और विवाह का फोटो और प्रमाण पत्र आकस्मिक व्यय और परिवहन पर खर्च होगा. शेष 7000 रुपए को वर-वधु के कपड़े, श्रृंगार सामग्री, जूते-चप्पल,चुनरी,साफा मंगलसूत्र और इन सामानों के अलावा क्रय समिति जो उचित समझे उसे खरीद सकती है. इस प्रारूप से बाहर जाकर अधिकारी अपनी मनमानी नहीं कर सकते हैं. योजना में व्यय राशि का एक बड़ा हिस्सा विवाहित जोड़े के खाते में डीबीटी किया जाएगा. इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन आ रहे हैं. मार्च के पहले सामूहिक विवाह सम्पन्न कराया जाएगा. 2024-25 से मिलेगा लाभ महिला एवं बाल विकास विभाग छग शासन ने यह आदेश 15 मार्च 2024 को सभी जिलों के लिए जारी कर दिया था.  इस आदेश को 2024-25 से प्रभावी रूप सभी जिलों के  जिला कार्यक्रम अधिकारियों को लागू करना होगा. इस तरह व्यय मापदंड में संशोधन करने से बीपीएल परिवार से जुडे नव विवाहित जोड़े को बड़ा लाभ मिलेगा. दंतेवाड़ा जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में रह रही युवतियां जो इस योजना से जुड़ेंगी उन्हें विवाह के बाद ये आर्थिक मदद गृहस्थ जीवन को और बेहतर करेगी.

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर ज्वार, बाजरा की खरीदी आज से, 15 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन, आधार नंबर से लिंक बैंक खाते में आएगा पैसा

भोपाल मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के किसानों के लिए अच्छी और बड़ी खुशखबरी सामने आई है. पूरे प्रदेश में ज्वार और बाजरा की समर्थन मूल्य (Jwar and Bajra MSP) पर खरीदी शुरू हो गई है. 22 नवंबर से शुरू हुई खरीदी 20 दिसंबर तक की जाएगी. इसके लिए प्रदेश सरकार ने खास तैयारियां की हैं. तय रेट के अनुसार, ज्वार मालदण्डी को 3421 रुपये, ज्वार हाईब्रिड को 3371 रुपये और बाजरा को 2625 रुपये समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा. बता दें कि पूरे प्रदेश से  बाजरा के लिये 9 हजार 854 और ज्वार के लिये 5 हजार 933 किसानों ने पंजीयन कराया है. ज्वार और बाजरा के MSP पर खरीदी के लिए राज्य स्तर पर एक कंट्रोल-रूम भी स्थापित किया गया है. इसका टेलीफोन नंबर 0755-2551471 है. किसान अपनी किसी भी तरह की परेशानी के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं. भुगतान व्यवस्था समर्थन मूल्य पर ज्वार और बाजरा की खरीदी के बाद भुगतान, कृषक पंजीयन के दौरान आधार नंबर से लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। ज्वार और बाजरा उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केंद्र पर लाई जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिए पूरी कार्रवाई के निर्देश कलेक्टरों को दिये गए हैं। इस दाम पर होगा ज्वार-बाजरा की खरीदी मध्य प्रदेश में ज्वार और बाजरा की एमएसपी पर खरीदी शुरू हो गई है. सरकार की तय रेट के अनुसार, प्रदेश के किसानों से ज्वार मालदण्डी को 3421 रुपये, ज्वार हाईब्रिड को 3371 रुपये और बाजरा को 2625 रुपये पर खरीदा जाएगा. इसके अलावा, किसानों से एफएक्यू गुणवत्ता की उपज भी इन्हीं दरों पर खरीदी जायेगी. खरीदी हर हफ्ते सोमवार से शुक्रवार तक चलेगी. इस दौरान किसान अपना फसल बेंच सकेंगे. बता दें कि पूरे प्रदेश से ज्वार और बाजरा के लिए कुल 15 हजार से ज्यादा किसानों ने रजिस्ट्री कराई है. ऐसे किया जाएगा खरीदी का भुगतान   समर्थन मूल्य पर ज्वार एवं बाजरा की खरीदी के बाद इसके लिए भुगतान ऑनलाइन किया जाएगा. किसानों के कृषक पंजीयन के दौरान आधार नम्बर से लिंक बैंक खाते में ये पैसे भेजे जाएंगे. ज्वार एवं बाजरा उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केन्द्र पर लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिये समुचित कार्रवाई के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं. जिला स्तरीय समिति उपार्जन संबंधी सभी विवादों का अंतिम निराकरण और उपार्जित खाद्यान्न की गुणवत्ता की निगरानी करेगी.  

भोपाल में अब पराली जलाने वालों की खैर नहीं, प्रशासन ने उठाया ये बड़ा कदम; तुरंत होगी कार्रवाई

 भोपाल मध्य प्रदेश में पराली जलाने के की घटनाएं पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा देखने को मिल रही है. राजधानी भोपाल के आस-पास के इलाकों लगातार जलाए जा रहे पराली से हवा प्रदुषित हो गई है. राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह सख्त हो गए हैं. उन्होंने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है. जिसके तहत पराली जलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी. यह आदेश कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निदेश पर अपर कलेक्टर भूपेंद्र गोयल ने गुरुवार को जारी किए हैं। इस आदेश के मुताबिक पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कानून का शिकंजा प्रशासन द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का पालन करते हुए जिले की सभी राजस्व सीमा में फसल की कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यदि अब किसी किसान द्वारा पराली में आग लगाई जाती है, तो उसके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी। उसके खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यह आदेश 21 नवंबर से प्रभावी हो गया है, जो आगामी दो महीने के लिए लागू रहेगा। सभी एसडीएम, तहसीलदार और थानों के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर इसे लगाएंगे। संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस थाना प्रभारी अपने -अपने क्षेत्रों का भ्रमण कर उक्त व्यवस्था सुनिश्चित करवाएंगे। आदेश में यह     खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जनसंपत्ति एवं प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जन्तु नष्ट हो जाते हैं। जिससे नुकसान होता है।     खेत की मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।     खेत में पड़ा कचरा, भूसा, डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। इन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है। आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।     जिले में कई किसान रोटावेटर एवं अन्य साधनों से डंठल खेत से हटा रहे हैं। यह सुविधा जिले में उपलब्ध हो गई है। पराली जलाने के नुकसान     खेत में पड़ा कचरा, भूसा, डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं, इन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करता है। आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।     खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जनसंपत्ति व प्राकृतिक वनस्पति, जीवजंतु आदि नष्ट हो जाते है। जिससे व्यापक नुकसान होता है।     खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु इससे नष्ट होते है।जिससे खेत की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

सुकमा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में10 नक्सली को किया ढेर, मुख्यमंत्री ने की सराहना

सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई की है। कोन्टा थाना क्षेत्र के भेज्जी इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ। साथ ही, कई हथियार भी बरामद किए गए हैं। फिलहाल, सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षाबलों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार नक्सलवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम बस्तर क्षेत्र में विकास, शांति और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।” खबरों के अनुसार, मुठभेड़ में 10नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने तीन ऑटोमैटिक राइफल्स समेत कई अन्य हथियार बरामद किए। मुठभेड़ सुबह के समय शुरू हुई, जब सुरक्षाबल ने नक्सलियों की घेराबंदी की। दोनों ओर से सैकड़ों राउंड गोलीबारी की गई। नक्सलियों के पास से अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। डीआरजी की टीम के साथ मुठभेड़ खबर के मुताबिक डीआरजी की टीम नक्सलियों की घेराबंदी के लिए निकली थी। सूचना मिली थी कि ओडिशा के रास्ते नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगल में प्रवेश किए हैं। इसके बाद ही टीम घेराबंदी के लिए गई थी। डीआरजी जवानों के साथ सीआरपीएफ के जवान भी मुठभेड़ में शामिल। वहीं, बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने की मुठभेड़ की पुष्टि की है। मारे गए नक्सलियों की संख्या और हथियारों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है। सुकमा एसपी ने नक्सलियों के शव मिलने की पुष्टि कर दी है। कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम, भंडारपदर के जंगल-पहाड़ी में यह मुठभेड़ हुई है। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब जवान इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से काफी देर तक गोलीबारी हुई। DRGऔर CRPFकी टीम की संयुक्त कार्रवाई DRG(डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और CRPF(केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की टीम ने नक्सलियों की घेराबंदी के लिए संयुक्त कार्रवाई की। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि ओडिशा से नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगलों में घुस आए हैं। इसके बाद, सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन और घेराबंदी की योजना बनाई थी। IGऔर SPने मुठभेड़ की पुष्टि की बस्तर के IGपी सुंदरराज ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि मारे गए नक्सलियों की संख्या और बरामद हथियारों की आधिकारिक जानकारी जल्द जारी की जाएगी। सुकमा के SPने भी नक्सलियों के शव मिलने की पुष्टि की है। मुठभेड़ कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम और भंडारपदर के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में हुई। सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने किया हमला यह मुठभेड़ उस समय हुई जब सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों ओर से लंबी गोलीबारी हुई। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। सुकमा के SP किरण चव्हाण ने कहा है कि यह बड़ी सफलता है. जवान मौके पर ही हैं. लौटेंगे तो ज्यादा जानकारी मिलेगी. सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि भेज्जी के जंगल में नक्सलियों का जमावड़ा है. जवानों ने इस इलाके को घेर लिया और ऑपरेशन चलाया. सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में नक्सली ओडिशा के रास्ते छत्तीसगढ़ में घुसे हैं.   पांच दिन पहले छत्तीसगढ़ के कांकेर में जवानों और नक्सलियों के बीच रविवार को मुठभेड़ हुई थी. इस दौरान पुलिस ने पांच नक्सलियों को ढेर कर दिया था. इनमें 2 महिलाएं शामिल थीं. इस साल 1 जनवरी से 22 नवंबर तक 207 नक्सली मारे गए हैं. इससे पूर्व 16 नवंबर को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर और कांकेर जिले की सीमा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में पांच नक्सलियों को मार गिराया था.

शहीद के परिवार को एक करोड़ की सम्मान राशि, CM डॉ मोहन ने सौंपा चेक, जवान की बहादुरी और बलिदान को सराहा

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से आज यहां मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सीआरपीएफ के शहीद जवान स्व. पवन भदौरिया के परिजन ने भेंट की। मुख्यमंत्री ने जवान शहीद स्व. पवन कुमार भदौरिया के परिजन को एक करोड़ रूपये की सहायता राशि का चेक भेंट किया। राष्ट्रपति द्वारा वीरतापूर्ण कार्य के लिए जवान स्व. भदौरिया को मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया है। डॉ यादव ने मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी शहीद स्व. पवन भदौरिया के परिजन को प्रावधान के अनुसार एक करोड़ रुपए की राशि का चेक आज भेंट किया। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी जान की परवाह न करते हुए साहस के साथ नक्सलियों से मुकाबला करते हुए शहादत को प्राप्त स्व. पवन भदौरिया पर प्रदेशवासियों को गर्व है। शहीद परिवार के साथ शासन साथ खड़ा है। राज्य शासन शहीद परिवार की सहायता के लिए सदैव तत्पर है। 2018 में हुई थी शादी बता दें छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले के बॉर्डर इलाके टेकलगुड़ेक में इसी साल 30 जनवरी को सीआरपीएफ कोबरा और DRG की संयुक्त जवानों की टीम पर हुए नक्सली हमले में तीन जवान शहीद हो गए थे. इसमें एमपी के भिंड निवासी पवन कुमार भदौरिया भी शामिल थे. शहीद जवान पवन कुमार अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. पवन कुमार की शादी 2018 में ही हुई थी. दरअसल, टेकलगुड़ेम में पुलिस ने नया कैंप स्थापित किया था. इस कैम्प की सुरक्षा में लगे कोबरा एसटीएफ-डीआरजी के जवान कैंप की स्थापना के बाद जूनागुड़ा-अलीगुड़ा इलाके में गश्त पर निकले हुए थे. इसी बीच घात लगाए नक्सलियों ने टीम पर फायरिंग कर दी. इस दौरान सुरक्षाबलों ने भी नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. इस दौरान फोर्स को भारी पड़ता देख माओवादी जंगल में भाग गए थे. नक्सली मुठभेड़ में वीरता का परिचय कुपावली निवासी पवन कुमार भदौरिया सीआरपीएफ की 201 कोबरा बटालियन में तैनात थे। नक्सल विरोधी अभियान के तहत 30 जनवरी 2024 को सुकमा के कैंप टेकल गडेम में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अगले दिन इलाज के दौरान शहीद हो गए। शहीद के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख राशि से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया है।

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